सफ़ेद और गुलाबी अमरुद में से जानिए कौन है अधिक सेहतमंद

स्वस्थ जीवन जीने के लिए स्वस्थ भोजन करना आवश्यक है और अगर बात स्वस्थ खाने की है तो फलों खाने का जिक्र किए बिना कोई कैसे रह सकता है। फल खाना फिट और स्वस्थ रहने के सर्वोत्तम तरीकों में से एक है। कुछ फलों की अलग-अलग किस्में होती हैं और विभिन्न प्रकार के फलों के अलग-अलग स्वास्थ्य लाभ होते हैं।

ऐसे ही फलों में से एक है अमरूद। अमरूद की दो किस्में होती हैं सफेद और गुलाबी। आज हम अमरूद की इन दो किस्मों और उनसे जुड़े स्वास्थ्य लाभों के बीच अंतर के बारे में बात करने जा रहे हैं तो चलिए जानते हैं:

अमरूद न केवल सस्ता बल्कि बहुत सेहतमंद फल है। यह पेट के लिए बहुत फायदेमंद है। इसमें कुछ ऐसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो आपको कई तरह के रोगों से बचाए रखते हैं।

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अमरूद खाने के स्वास्थ्य लाभ

  • रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करता है। यह “आहार फाइबर का अच्छा स्रोत” है जो मधुमेह के लोगों में रक्त शर्करा के स्तर को बनाए रखने में उपयोगी है।
  • मासिक धर्म के दर्दनाक लक्षणों को दूर करने में मदद कर सकता है।
  • पाचन तंत्र के लिए बेहद अच्छा है।
  • वजन घटाने के लिए अच्छा है।
  • आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है।
  • आपकी त्वचा के लिए अच्छा है।

सफेद और गुलाबी अमरूद में अंतर

जानकारों के अनुसार गुलाबी अमरूद में पानी की मात्रा अधिक तथा चीनी और स्टार्च कम होता है। इसमें विटामिन सी भी कम होता है और बीज भी अधिक नहीं होते हैं या होते ही नहीं हैं। इसे आप ड्रिंक के तौर पर पिएंगे तो अच्छा महसूस होगा।

वहीं सफेद अमरूद में अधिक चीनी, स्टार्च, विटामिन सी और अधिक बीज होते हैं। सफेद गूदे वाले अमरूद में एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा अधिक होती है।

गुलाबी अमरूद में कैरोटीनॉयड नामक ऑर्गेनिक पिगमेंट होता है। यही पिगमेंट गाजर और टमाटर को भी लाल रंग देता है। कैरोटीनॉयड की मात्रा अलग- अलग किस्मों के अमरूदों में भिन्न होती है।

इसी आधार पर ये सफेद, हल्के गुलाबी से लेकर गहरे गुलाबी रंग के होते हैं। वहीं, सफेद अमरूद की कैरोटीनॉयड सामग्री उसके गूदे को रंग देने के लिए अपर्याप्त होती है। साथ ही सफेद और गुलाबी अमरूद के स्वाद में भी थोड़ा अंतर होता है।

अमरूद में मौजूद पोषक तत्व

हालाँकि, अमरूद चाहे गुलाबी हो या सफेद, उसका सेवन सेहत के लिए कई तरह से फायदेमंद है। यह एंटीमाइक्रोबियल, एंटीफंगल, विटामिन सी, के, बी6, फोलेट, नियासिन, एंटीडायबिटिक, एंटी डायरियल, आयरन, फॉस्फोरस, कैल्शियम, पोटैशियम, जिंक, कॉपर, कार्बोहाइड्रेट, डायटरी फाइबर आदि पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसमें एंटी कैंसर तत्व भी होते हैं और यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है।

नमक के ये उपाय आपके जीवन में खुशहाली ला सकते हैं आप भी आजमाएं

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नमक का इस्तेमाल हम खाने पीने की चीजों में करते हैं। अगर खाने में नमक कम या ज्यादा हो जाए तो पूरा खाना खराब हो जाता है। हम कह सकते हैं कि नमक का हमारे खानपान में बहुत महत्व होता है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि खाने के अलावा वास्तु शास्त्र में भी नमक के कई उपाय बताए गए हैं जो आपके भाग्य को चमका सकते हैं। जी हाँ हमारे शास्त्रों में नमक को चंद्र और शुक्र का प्रतिनिधि माना गया है। इसके उपाय से चंद्र और शुक्र के अशुभ प्रभावों से भी बचा जा सकता है।

आज हम इस पोस्ट में नमक के कुछ ऐसे उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनसे जीवन में खुशहाली लाई जा सकती है तो आइए जानते हैं :

  • वास्तु शास्त्र के अनुसार अगर लंबे समय से आपकी नौकरी में तरक्की रुकी हुई है तो घर की सफाई करते समय पानी में थोड़ा नमक मिला लें। आपको इसे हर दिन नहीं करना है। आप इसे हफ्ते में एक या दो बार कर सकते हैं। वास्तु शास्त्र में कहा गया है कि घर में नमक के पानी से सफाई करने से धन की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है।

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  • अगर आपको लगता है कि आपके घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ गई है तो आप कांच के कप में नमक भरकर अपने घर के शौचालय-बाथरूम में रख सकते हैं। ऐसा करने से घर में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।
  • यह हमें बुरी नजर से बचाता है। अगर किसी व्यक्ति को बुरी नजर लग गई है तो एक चुटकी नमक लेकर तीन बार उनके ऊपर लेकर घूमा दें फिर उस नमक को बाहर फेंक दें। मान्यता है कि ऐसा करने से सभी दोष दूर हो जाते हैं।
  • अगर आपके घर में कोई पुरानी बीमारी से पीड़ित है तो आप नमक का उपाय कर सकते हैं। इसके लिए कांच के जार में नमक डालकर रोग से पीड़ित व्यक्ति के सिरहाने रख दें। हफ्ते में एक बार उस नमक को बदल लें और फिर से नया नमक डाल दें। ऐसा करने से व्यक्ति के स्वास्थ्य में धीरे-धीरे सुधार होने लगेगा।
  • नमक को कांच की प्याली में भरकर उसके अन्दर चार पांच लौंग डाल दें। ऐसा करने से घर में धन की बरकत बनी रहती है और लक्ष्मी का आगमन होता है। घर में हमेशा सकारात्मक उर्जा रहती है।

पंचमुखी रुद्राक्ष धारण करने से होने वाले चमत्कारी फायदे जानकर हैरान रह जाएंगे आप

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पंचमुखी रुद्राक्ष का विशेष महत्व है। इसके कई प्रकार हैं। पंचमुखी रुद्राक्ष कब धारण करना चाहिए और इससे क्या-क्या लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं, इसके बारे में ज्योतिषशास्त्र में कई महत्वपूर्ण बातें कही गई हैं।

रुद्राक्ष, जो स्वयं रुद्र है, को ज्योतिष में महादेव का एक पहलू और कालाग्नि का एक रूप माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शंकर के आंसुओं से हुई है। इसलिए रुद्राक्ष धारण करना शुभ माना जाता है।

यह माना जाता है कि रुद्राक्ष धारण करने से भगवान गणेश, भगवान शिव, देवी शक्ति, भगवान विष्णु और सूर्य देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

आइए जानते हैं ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पंचमुखी रुद्राक्ष के महत्व है और लाभ:

miraculous benefits of wearing Panchmukhi Rudraksha

इसे धारण करने के लाभ

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस रुद्राक्ष को धारण करने से मन को शांति मिलती है। अनावश्यक बातों से मन विचलित नहीं होता। रुद्राक्ष धारण करने से आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है।

कई ज्योतिषी धन और सुख लाने के लिए रुद्राक्ष धारण करने की सलाह देते हैं। रुद्राक्ष धारण करने वाले व्यक्ति को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है। कई लोगों का यह भी मानना ​​है कि रुद्राक्ष एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बृहस्पति के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए यह रुद्राक्ष धारण करना शुभ होता है। वैवाहिक जीवन में सुख समृद्धि लाने के लिए भी रुद्राक्ष अत्यंत लाभकारी होता है।

कैसे करें धारण

पंचमुखी रुद्राक्ष धारण करने से पहले उस पर गंगाजल छिड़कें। इसके बाद ‘ऊं ह्रीं नम: मंत्र’ मंत्र का 108 बार जाप करें। मान्यता है कि इस तरह पंचमुखी रुद्राक्ष धारण करने से अधिक लाभ मिलता है।

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इसका महत्व

पंचमुखी रुद्राक्ष की सतह पर 5 प्राकृतिक रेखाएं उभरी हुई होती हैं। जिसे रुद्राक्ष का मुख कहा जाता है। इस रुद्राक्ष के देवता भगवान कलाग्नि हैं जो भगवान शिव का ही एक रूप माने जाते हैं।

कहा जाता है कि जो कोई इसे विधि-विधान से पहनता है और इसके नियम का पालन करता है, वह दैवीय शक्ति की वजह से बुरे कर्मों से दूर रहता है।

इसके साथ ही इस रुद्राक्ष को पहनने वाला शुद्ध होता है और उसका मन शांत हो जाता है। कहा जाता है कि पंचमुखी रुद्राक्ष पहनने वाले को यश, प्रसिद्धि और मानसिक शांति मिलती है।

 

करोड़ों में है इस चायपत्ती की कीमत, जानिए क्या है खासियत

हमारे दिन की शुरुआत चाय के साथ होती है। कई लोग तो ऐसे भी हैं जिन्हें अगर सुबह चाय न मिले तो उनका पूरा दिन आलस में जाता है। आपने बाजार में कई तरह की चायपत्ती देखी होगी। जिनमें कुछ महंगी और कुछ सस्ती होगी।

लेकिन क्या आपने ऐसी चायपत्ती के बारे में सुना है, जिसकी एक किलो पैकेट की कीमत करोड़ों में है। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये कौन सी चायपत्ती है जो इतनी महंगी है।

इस चाय की कीमत में तो आराम से लग्जरी कार, लग्जरी फ्लैट खरीदे जा सकते हैं। लेकिन यह चायपत्ती किसी खास वजह से ही इतनी महंगी है। आईए जानते हैं दुनिया की इस सबसे महंगी चायपत्ती के बारे में।

The price of this tea leaf is in crores, know what is its specialty

कहाँ मिलती है ये चायपत्ती

दुनिया की सबसे महंगी चायपत्ती चीन में मिलती है। इसका नाम डा-होंग पाओ टी (Da-Hong Pao Tea) है। डा होंग पाओ एक वूई रॉक चाय है जो फ़ुज़ियान प्रांत, चीन के वूई पहाड़ों में उगाई जाती है। ये चायपत्ती चीन के फुजियान के वूईसन इलाके में ही मिलती है। इसके अलावा कहीं और ये चायपत्ती नहीं मिलती।

इस वजह से है ये इतनी महंगी

इस चाय पत्ती के कई सारे लाभकारी गुण है। स्वास्थ्य के लिए ये चायपत्ती काफी लाभदायक होती है। यही एक बड़ी वजह है, जिसके चलते इसको जीवनदायिनी भी कहा जाता है।

इसके सेवन से कई प्रकार की गंभीर बीमारियां ठीक होती हैं। इस में कैफीन, थियोफिलाइन, चाय पॉलीफेनोल्स और फ्लेवोनोइड्स होते हैं। इन्हीं सब कारणों से इसके कई स्वास्थ्य लाभों का दावा किया जाता है।

इस चाय को पीने से थकान कम हो सकती है और रक्त परिसंचरण में मदद मिल सकती है। इसके अलावा यह शराब पीने और धूम्रपान के बुरे प्रभावों को कम करने में मदद करता है।

इसको नियमित रूप से पीना त्वचा के लिए बहुत अच्छा होता है और वजन कम करने में मदद करती है। यह खांसी से राहत दिलाने और कफ को कम करने में मदद करती है।

खेती के दौरान डा-होंग पाओ की पत्तियों की पैदावार काफी कम मात्रा में होती है और इसकी पत्तियां भी काफी दुर्लभ होती है। यही एक बड़ा कारण है, जिसके चलते इस चायपत्ती की कीमत 9 करोड़ रुपए प्रति किलोग्राम है।

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डा-होंग पाओ टी का इतिहास

डा-होंग पाओ टी की पत्तियों के इतिहास पर बात करें, तो इसकी खेती की शुरुआत चीन के मींग शासन के समय में शुरू हुई थी। चीनी लोगों का कहना है कि उस दौरान मींग शासन की महारानी अचानक बीमार हो गई थी।

उनकी तबीयत इतनी ज़्यादा बिगड़ गई थी कि बचने की संभावना ही नहीं थी। उन पर किसी भी दवा का असर नहीं हो रहा था।

इसके बाद उन्हें इस चाय को (काढ़े के रूप में) पीने के लिए कहा गया। उन्होंने इसे पीया और पीने के कुछ ही दिनों के बाद वह ठीक हो गईं। महारानी के ठीक होने के बाद राजा काफी खुश हुए और उन्होंने आदेश दिया कि इस खास तरह की चाय की खेती की जाए।

मान्यता है कि मींग शासन से ही इस चाय पत्ती की खेती होती आ रही है। आज कई लोग इस चाय पत्ती के 10 से 15 ग्राम खरीदने के लिए लाखों रुपए चुकाते हैं।

खूबसूरत त्वचा के लिए अपनाएं चंदन से बने फेस पैक, जाने कैसे करें इस्तेमाल

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आजकल की व्यस्त दिनचर्या के कारण हम अपने चेहरे पर ध्यान नहीं दे पाते। जिससे चेहरे की त्वचा अपना रंग खोने लगती है और बेजान, रूखी नज़र आने लगती है। इसके लिए हम कई महंगे प्रोडक्ट्स भी यूज़ करते है जिसका कोई खास असर नहीं दिखता। लेकिन आज हम आपको चंदन से बने फेस पैक के बारे में बताने जा रहे हैं जिससे आप चेहरे की खोई हुई चमक वापस पा सकते हैं। तो चलिए शुरू करते हैं :

चंदन हमारी स्किन के लिए कितना अच्‍छा होता है यह बात तो लगभग सभी महिलाएं जानती हैं और ज्‍यादातर ब्‍यूटी पैक में इसका इस्‍तेमाल भी करती हैं।

एक्ने या पिंपल्स के लिए असरदार

अगर आप पिंपल्स, एक्ने, चेहरे पर छोटे-छोटे दानों से परेशान हैं तो आप चंदन पाउडर को गुलाब जल में मिलाकर पेस्ट बनाएं और अपने चेहरे पर लगाएं। इसके अलावा आपको इस पेस्ट में कुछ भी नहीं मिलाना है।

Use sandalwood face pack for beautiful skin

टैनिंग कम करता है

अत्यधिक टैनिंग न केवल देखने में खराब लगती है, बल्कि यह त्वचा के लिए भी बेहद हानिकारक होती है। चंदन एक एंटी-टैनिंग एजेंट है जो त्वचा को साफ़ करने में मदद करता है।

इसके लिए एक बड़ा चम्मच चंदन पाउडर, संतरे के छिलके का पाउडर और दही लें। सभी सामग्रियों को एक कटोरे में मिलाएं और इस पेस्ट को शरीर के टैन्ड हिस्सों पर लगाएं। सूखने के बाद इसे पानी से धो लें।

मुहांसे के निशान से छुटकारा पाने के लिए

चंदन का उपयोग प्राचीन इतिहास से एक उपचार सामग्री के रूप में किया जाता रहा है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि यह एक चमत्कारिक घटक है जो किसी भी प्रकार के खरोंच और मुहासों के निशान को साफ़ करने में मदद करता है।

इसके लिए चंदन पाउडर और काले चने का पाउडर (काला चना) लें थोड़ा सा गुलाब जल मिलाएं और इस पेस्ट को नियमित रूप से इस्तेमाल करें।

प्राकृतिक रूप से त्वचा की रंगत बढ़ाता है

चंदन में नेचुरल स्किन लाइटनिंग एजेंट होते हैं और इसलिए इसका इस्तेमाल कई फेयरनेस फेस पैक में भी किया जाता है। इसके लिए 1 बड़ा चम्मच चंदन पाउडर और बेसन लें।

थोड़ी सी हल्दी डालें और आवश्यक मात्रा में गुलाब जल मिलाकर एक पतला पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को अपने चेहरे पर 15 मिनट के लिए लगाएं।

झुर्रियों को कम करता है चन्दन

पहले बढ़ती उम्र के साथ झुर्रियों की समस्‍या होती थी लेकिन आजकल कम उम्र की महिलाएं भी इस समस्‍या से परेशान रहती हैं। चेहरे पर आने वाली झुर्रियों से परेशान होकर ज्‍यादातर महिलाएं बाजार में मौजूद महंगे प्रोडक्‍ट्स का इस्‍तेमाल करती है।

लेकिन इन प्रोडक्‍ट से स्किन को कई तरह के साइड इफेक्‍ट भी झेलने पड़ सकते है। लेकिन लाल चंदन में ऐसे तत्व मौजूद होते है जो आसानी से आपकी त्वचा की झुर्रियों को दूर करते है।

इसमें एंटी-एजिंग गुण होते हैं जो त्वचा को जवां बनाए रखने में मदद करते हैं। इसके लिए आप 4 चम्मच लाल चंदन पाउडर के साथ 2 चम्मच कैमोमाइल टी को मिलाकर फेस मास्क बनाकर फेस पर लगा लें।

त्वचा के अनुसार फेस पैक का इस्तेमाल

ड्राई स्किन के लिए

स्किन अगर ड्राई हो रही है तो चंदन और शहद का फेस पैक लगाकर देखें। फेस पैक को बनाने के लिए एक चम्मच चंदन पाउडर को लेकर इसमें थोड़ा सा शहद मिलाकर पेस्ट बना लें।

फिर इस पैक को चेहरे और गर्दन पर लगाकर सूखने के लिए छोड़ दें। 15 से 20 मिनट बाद हल्के हाथों से मसाज कर ठंडे पानी से धो लें। सप्ताह में दो बार इस पैक को लगाने से चेहरा सॉफ्ट होगा और चेहरे पर चमक नजर आने लगेगी।

ऑयली स्किन के लिए

यदि आपकी स्किन बहुत ज़्यादा ऑयली है तो इसके लिए चंदन पाउडर के साथ-साथ मुल्तानी मिट्टी को भी फेस पैक में मिलाना चाहिए। आप 1 चम्मच चंदन पाउडर के साथ 2 चम्मच मुल्तानी मिट्टी लें और इसे गुलाब जल के साथ मिलाकर अपने चेहरे पर लगाएं। इसे सूखने पर धो दें, लेकिन इसके बाद स्किन को अच्छे से मॉइश्चराइज करें।

नॉर्मल स्किन के लिए

अगर आप की स्किन नॉर्मल है तो आप 3 चम्मच आटे का चोकर, 1 चम्मच चंदन पाउडर, 1 चम्मच दही और 1 छोटा चम्मच शहद मिलाकर उसमें गुलाब जल डालें। आपके पेस्ट की कंसिस्टेंसी ना ही बहुत गाढ़ी होने चाहिए और ना ही बहुत पतली।

इसे आधे घंटे के लिए चेहरे पर लगाएं और फिर ठंडे पानी से धो लें। इसके बाद आप अपनी स्किन को मॉइश्चराइज जरूर करें क्योंकि ये बहुत जरूरी है।

Sponsored Ad - Eartho Essentials Haldi Chandan Ubtan Face Pack with Turmeric, Sandalwood & Saffron Extract 50gवैसे तो आप घर पर ही चन्दन से साथ घरेलु चीज़े मिला कर एक प्राकृतिक चन्दन पेस पैक तैयार कर सकते हैं लेकिन अगर आप ऑनलाइन भी मंगवाना चाहें तो अमेज़न से मंगवा सकते हैं।

 

जानिए कुछ रोचक और मजेदार तथ्यों के बारे में….

  • क्या आपको पता है कि ना तो मगरमच्छ अपनी जुबान हिला सकते हैं और न ही कुछ चबा सकते है. मगरमच्छ का पाचक रस इतना ताकतवर होता है कि वह एक लोहे की कील को हजम कर सकता है.
  • समुद्र में पाए जाने वाले केकड़ों का दिल उसके सिर में होता है.
  • दक्षिण अफ्रीका में पाया जाने वाला कोबरा वृक्ष इतना खतरनाक होता है कि अगर कोई व्यक्ति उस पेड़ के पास जाता है तो पेड़ उसे डालियाँ से जकड़ लेता है और तब तक नही छोड़ता जब तक वो व्यक्ति के मृत्यु ना हो जाए.
  • टाइटैनिक जहाज की चिमनिया इतनी बड़ी थी कि इनमें से दो ट्रेने गुजर सकती थी.
  • दुनिया भर में 30 प्रतीशत लोग अभी भी ऐसे हैं जिन्होंने अभी तक मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं किया है.
  • शहद एक मात्र ऐसा खाद्य पदार्थ है जो कि हजारों सालों तक खराब नही होता.
  • ’TYPEWRITER’ सबसे लंम्बा शब्द है जो कि keyboard पर एक ही लाइन पर टाइप होता है. क्या आपको पता था? 🙂
  • यदि हम दोनों हाथों को फैलाए तो हमारे हाथों की लम्बाई हमारे शरीर की लम्बाई के बराबर होगी.
  • पूरी दुनिया में लोग अपने पालतु जानवरों (कुत्ता और बिल्ली) की खुराक पर लगभग हर साल 3 लाख 57 अरब रूपए खर्च करते हैं.
  • 1672 में वान गुएरिके ने बिजली का अविष्कार किया था.
  • रूस विश्व का एकमात्र ऐसा देश है जिसका एक भाग में शाम और एक भाग में दिन होता है.
  • अगर हम एक घंटे से ज्यादा हेडफोन का उपयोग करते हैं तो हमारे कानो में जीवाणुयों की तादाद लगभग 700 गुना बढ़ जाती है.
  • ’Uncopyrightable’ अंग्रेज़ी का 15 अक्षरो वाला एकमात्र शब्द है जिसमे कोई भी अक्षर दुबारा नही आता.
  • अकसर आपने देख होगा कि एक आदमी 7 दिनो के लिए कही घर से बाहर घुमने जाता है तो वह कम से कम 5 सूट ही पैक करता है. लेकिन दूसरी तरफ जब एक महिला 7 दिन के लिए घर से बाहर किसी उत्सव या टूर पर जाती है तो वह अपने साथ कम से कम 21 सूट पैक करती है क्योकि वह यह नही जानती कि हर दिन उसे क्या पहनने को दिल करेगा.
  • दुनिया का सबसे पहला कैमरा 1894 में बना था उस कैमरा में फोटो खीचने के लिए लगभग 8 घंटे इसके सामने बैठना पड़ता था.

जानिए टेलीविजन के आविष्कार और इससे जुड़े कुछ रोचक तथ्य

टेलीविजन को विज्ञान का अद्भुत आविष्कार कहा जाता है। इसे हिंदी में दूरदर्शन और संक्षिप्त में टी.वी. (TV) कहते हैं। ‘टेलीविजन’ लैटिन तथा यूनानी शब्दों से मिलकर बना है जिसका अर्थ होता है “दूर दृष्टि”। ‘टेली’ (Tele) का अर्थ है ‘दूरी पर’ तथा ‘विजन'(vision) का अर्थ है ‘देखना’ अर्थात जो दूर की चीजों का दर्शन कराए, वह है टेलीविजन।

आज दूर घटित घटनाओं को घर बैठे देख पाना टेलीविजन का ही कमाल है। इससे हम घर में बैठ कर दुनिया के किसी भी कोने में घटी घटना के प्रत्यक्षदर्शी बन जाते हैं।

यदि यह कहा जाए कि आधुनिक युग में टेलीविजन लोगों के मनोरंजन का सर्वाधिक लोकप्रिय साधन है तो ग़लत नहीं होगा। इसके द्वारा प्रत्येक वर्ग तथा क्षेत्र के लोगों के लिए अनेक प्रकार के मनोरंजक व शिक्षाप्रद कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं जिनके द्वारा मनोरंजन के अतिरिक्त हमें देश की सामाजिक, राजनीतिक व अन्य समस्याओं का पता चलता है।

आज इस पोस्ट में हम जानेगें टी.वी. के अविष्कार एवं इससे जुड़े कुछ रोचक तथ्यों के बारे में, तो चलिए शुरू करते हैं :

आविष्कार

यह संचार का सर्वाधिक लोकप्रिय माध्यम है जिसका आविष्कार जॉन लोगी बेयर्ड ने 1925 में लंदन में किया था। जॉन बचपन के दिनों में बीमार रहा करते थे, इसलिए स्कूल नहीं जा पाते थे।

वह सोचा करते थे कि एक दिन ऐसा भी आएगा, जब लोग हवा के माध्यम से तस्वीरें भेज सकेंगे। उन्होंने वर्ष 1924 में बक्से, बिस्कुट के टिन, सिलाई की सूई, कार्ड और पंखे की मोटर का इस्तेमाल कर पहला टेलीविजन बनाया था।

इसके बाद दुनिया के पहले कामकाजी टेलीविजन का निर्माण 1927 में फिलो फार्न्सवर्थ ने किया, जिसे 1 सितम्बर, 1928 को जनता के सामने पेश किया गया। जॉन लोगी बेयर्ड ने कलर टेलीविजन का आविष्कार 1928 में किया।

पब्लिक ब्रॉडकास्टिंग शुरूआती टी.वी. के साथ जॉन लोगी बेयर्ड 1940 में हुई और लोगों ने 1960 के दशक में उसे अपनाना शुरू कर दिया था। टेलीविजन शब्द का सर्वप्रथम उपयोग रूसी साइंटिस्ट कांस्टेंटिन परस्कायल ने किया।

पहला टी.वी.

वैसे तो अमरीका में 1941 से ही टी.वी. लांच हो गया था जो ब्लैक एंड व्हाइट था। इसके एक दशक बाद 1953 में अमरीका में ही सबसे पहले रंगीन टेलीविजन की शुरूआत हुई।

भारत में टी.वी.

वहीं भारत में पहली बार टेलीविजन की शुरूआत 15 सितम्बर, 1959 को हुई। इस ब्लैक एंड व्हाइट स्क्रीन वाले टी.वी. का प्रारंभ में उपयोग शिक्षा एवं ग्रामीण विकास को ध्यान में रखकर किया गया। आरंभ में इसका नाम ‘टेलीविजन इंडिया‘ रखा गया।

1975 में ‘टेलीविजन इंडिया’ का नाम बदलकर ‘दूरदर्शन’ कर दिया गया, जो इतना लोकप्रिय हुआ कि यह नाम टी.वी. का ही पर्याय बन गया।

11 जुलाई, 1962 से सैटेलाइट प्रसारण की शुरूआत हुई, जिससे अमेरिका और यूरोप के बीच लाइव कार्यक्रमों का आदान-प्रदान हुआ।

15 अगस्त, 1965 को दूरदर्शन से सर्वप्रथम समाचार बुलेटिन की शुरूआत हुई। अगस्त 1975 में भारत में सैटेलाइट की सहायता से 2400 गांवों में सेवा आरंभ की गई।

15 अगस्त, 1982 को भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कर कमलों से कलर टेलीविजन की शुरूआत हुई। भारत में दूरदर्शन के विकास के साथ-साथ धारावाहिकों के प्रकाशन, उनके प्रस्तुतीकरण में काफी तेजी आई।

ब्लैक एंड व्हाइट टी.वी. से कलर टी.वी., केबल टी.वी. से सैटेलाइट ब्रॉडकास्टिंग से इस फील्ड में अभूतपूर्व विकास हुआ। शुरूआत में कई प्रोग्राम एक निश्चित दिन, निश्चित समय निश्चित शीर्षक के अंतर्गत प्रसारित होने लगे।

तब दर्शक टी.वी. देखने के लिए अत्यधिक उत्साहित रहते और कार्यक्रम तथा फिल्में देखने के लिए सभी में होड़ रहती। टी.वी. हमेशा से मनोरंजन का सबसे सस्ता साधन रहा है।

हालांकि, तकनीकी परिवर्तन से मोटा भारी-भरकम टी.वी. हल्का तथा पतला होता चला गया और स्क्रीन का आकार बढ़ता चला गया। आज एल.ई.डी. से लेकर प्लाज्मा स्क्रीन तक टी.वी. के ही रूप हैं जो अब इंटरनैट के साथ जुड़ कर स्मार्ट भी बन चुके हैं।

वर्ल्ड टेलीविजन डे की घोषणा

टेलीविजन से विश्व पर पड़ने वाले प्रभाव और उसके बढ़ते योगदान से होने वाले परिवर्तन को ध्यान में रखकर 17 दिसम्बर, 1996 को सयुक्त राष्ट्र सभा ने 21 नवम्बर को वर्ल्ड टेलीविजन डे के रूप मनाने की घोषणा की।

रिमोट कंट्रोल का आविष्कार

टी.वी. के रिमोट कंट्रोल का आविष्कार यूजीन पोली ने किया था। उनका जन्म 1915 में शिकागो में हुआ था। वह जैनिथ इलैक्ट्रॉनिक्स में काम करते थे। वर्ष 1955 में उन्होंने फ्लैश मैटिक का आविष्कार किया था।

पंजाब केसरी से साभार

फर्राटेदार अंग्रेज़ी बोलने में बेहद उपयोगी है ‘छाया-संवाद’ तकनीक!

हिंदी माध्यम से पढ़ें वाले छात्रों और नौकरी तलाशने वाले लोगों के लिए अंग्रेजी किसी काल्पनिक प्रेत-बाधा से काम नहीं है। दरअसल किसी भी बड़ी और साख वाली कम्पनी में नौकरी पाने के लिए अंग्रेजी बोलचाल एक जरूरी मांग होती है। धारा-प्रवाह   अंग्रेजी बोलने में असमर्थता के चलते अन्यथा काबिल युवा भी ऐसे लोग बड़ी IT कम्पनी या किसी बड़ी MNC कम्पनी में नौकरी नहीं पा पाते।

आज इस पोस्ट के माध्यम से हम आपके साथ कुछ बहुत ही उपयोगी और लाभ दायक टिप्स और तकनीक शेयर करने वाले हैं जिनका अभ्यास करके आप न केवल अंग्रेजी अच्छे से समझ पाएंगे बल्कि इंग्लिश बोलने में होने वाली हिचक भी दूर होगी। तो चलिए जानते हैं ये टिप्स और तकनीक।

छाया संवाद तकनीक

छाया संवाद (speech shadowing; स्पीच शैडोइंग) भाषा सीखने की एक उन्नत तकनीक (advanced technique) है। इसका सरल सा मंत्र है : आप किसी व्यक्ति को बोलते हुए सुनते हैं और वह व्यक्ति जो कहता है उसे आप वास्तविक काल (real time) में दोहराते हैं, कम से कम देरी के साथ। यह तकनीक से बहुत काम समय में ही मौखिक प्रवाह ( oral frequency) के सुधार में अंत्यंत उपयोगी है।

कैसे करें स्पीच शैडोइंग तकनीक से अभ्यास

जैसे कि आप जानते होंगे शैडो का मतलब है छाया। छाया संवाद इसका सीधा सा अर्थ जो आप सुनते है उसको उसी समय दोहराना। इसके लिए ऐसा करें।

अपना पसंदीदा अंग्रेजी भाषा का टीवी शो या फिल्म देखें। जैसे ही फिल्म का कोई पात्र बोलता है, और जैसे ही आप उन्हें सुनते हैं उसी क्षण जोर से वही शब्द दोहराएं जो वह कह रहा है। दूसरे शब्दों में, रीयल-टाइम में उनके संवाद को ‘छाया’ दें। हर शब्द या ध्वनि के सही होने की चिंता न करें – ध्यान से सुनने, तेज़ी से बोलने और गति बनाए रखने पर ध्यान दें। फिल्म समाप्त होने के बाद, ठीक उसी फिल्म को दोहराएं और दोबारा करें। और फिर से।

इस तकनीक के माध्यम से, अपने आप को तेज गति से बोलने के लिए मजबूर करने से, आपका मस्तिष्क आप जो सुन रहे हैं, उसके लिए अति-ग्रहणशील(hyper-receptive) हो जाता है, और आप न केवल शब्दों को तेजी से और तेज़ी से समझ पाएंगे, बल्कि अनजाने में उन विभक्तियों और मौखिक बारीकियों की भी नकल कर रहे होंगे जो आमतौर पर एक गैर मातृ भाषायी व्यक्ति के लिए करना मुश्किल होता है।

यह तकनीक अनिश्चितता या आत्मविश्वास की कमी के कारण होने वाली हकलाहट को भी ठीक कर देती है। इस तरह से अभ्यास करने पर अंग्रेजी फिल्म के कलाकार आपके बोलने वाले साथी बन जाते हैं।

इंटरव्यू से पहले करें यह अभ्यास

आपके अगले इंग्लिश-प्रधान इंटरव्यू से ठीक पहले यह सही अभ्यास होगा। YouTube पर कुछ साक्षात्कार (interview) अभ्यास वीडियो देखें और उस पूरे वार्तालाप को छायांकित करें।

एक ही डायलॉग का बार-बार बोलने का अभ्यास करें। आप पाएंगे कि इससे न केवल आपको बेहिचक अंग्रेजी बोलने में मदद मिलेगी बल्कि सक्रिय रूप से सुनने और प्रतिक्रिया करने की आपकी क्षमता में भी उल्लेखनीय सुधार होगा।

हमें आशा है कि यह लेख अंग्रेजी बोलचाल के सुधार में आपकी मदद करेगा। कृपया इस पोस्ट को अपने मित्रों और शुभ चिंतकों के साथ भी शेयर करें।

रात में पेड़ के नीचे क्यों नहीं सोना चाहिए जानिए क्या है कारण?

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हम पेड़-पौधों के बिना धरती पर जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते। पेड़ न सिर्फ हमें सांस लेने के लिए ऑक्सीजन देते हैं, बल्कि प्रदूषण से भी बचाते हैं। गर्मी के मौसम में तेज चिलचिलाती धूप में चलते हुए पेड़ की छांव मिल जाए तो कोई भी एक पल के लिए ठहर जाता है। बहुत से लोग पेड़ के नीचे सो भी जाते हैं।

लेकिन आपने कई बार सुना होगा कि पेड़ के नीचे रात को नहीं सोना चाहिए। इस बात को लेकर कई अंधविश्वास की कहानियां प्रचलित हैं लेकिन इसका असल कारण क्या है ये आज हम आपको इस पोस्ट के माध्यम से बताने जा रहे हैं, तो चलिए शुरू करते हैं :

Why should not sleep under the tree at night

दरअसल पेड़ों द्वारा दिन के समय ऑक्सीजन छोड़ने और कार्बन डाइऑक्साइड लेने की प्रक्रिया चलती रहती है, लेकिन रात के समय अधिकतर पेड़ों द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं।

दिन में जहां पेड़ों से ऑक्सीजन मिलती है वहीं रात के समय पेड़ों से कार्बन डाई ऑक्साइड मिलती है। ऐसी स्थिति में अगर आप रात के समय पेड़ के नीचे सोते है तो कार्बन डाईऑक्साइड की वजह से व्यक्ति का दम घुटने लगता है। कई केस में तो व्यक्ति की मौत भी हो जाती है। यही कारण है कि रात में पेड़ के नीचे नहीं सोना चाहिए।

पेड़ सांस लेने के लिए अपनी पत्तियों में मौजूद बहुत ही छोटे छिद्रों का प्रयोग करते हैं, इन छिद्रों को स्टोमेटा कहते हैं। पेड़-पौधे सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में भोजन तथा ऑक्सीजन बनाते हैं, इसे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया कहते हैं। रात में प्रकाश संश्लेषण नहीं होता है, जिसके कारण रात में ऑक्सीजन का निर्माण नहीं हो पाता है।

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फिटनेस टिप्स : अत्यधिक एक्सरसाइज हो सकती है नुकसानदायक

हम सभी जानते हैं कि एक्सरसाइज (व्यायाम) स्वस्थ जीवन शैली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह न केवल मोटापे को दूर करने में मदद करता है, बल्कि यह आपकी हड्डियों को भी मजबूत करता है और आपके मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज करने की आदत के कई साइड इफेक्ट हो सकते हैं। जी हाँ एक्सपर्ट्स यह सुझाव देते हैं कि बहुत अधिक व्यायाम आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

इस पोस्ट में हम जानेंगे अत्यधिक एक्सरसाइज करने से किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है:

हर वक्त थकान महसूस होना

चाहें आप कितनी भी ज्यादा नींद लें या कितना भी रेस्ट कर लें अत्यधिक एक्सरसाइज बॉडी में थकान पैदा करती है। लगातार व्यायाम शरीर से कैलोरी को बर्न करता है और शरीर अपनी एनर्जी को स्टोर नहीं कर पाता है।

ऐसे में हमेशा ओवर एक्सरसाइजिंग से बचना चाहिए। ज्यादा वर्कआउट करने से सिर में दर्द, चक्कर आने, भूख न लगने जैसी समस्याएं हो जाती हैं।

Fitness Tips: Excessive exercise can be harmful

ज्यादा व्यायाम यानी रोगों को बुलावा

सामान्य से अधिक एक्सरसाइज करने से शरीर के लिए जरूरी प्रोटीन और कैलोरी में कमी आने लगती है जिससे जोड़ों व मांसपेशियों पर दबाव पड़ने से इनकी कोशिकाएं धीरे-धीरे नष्ट होकर कमजोर हो जाती हैं।

इससे बार-बार फ्रेक्चर या चोट लगने का खतरा रहता है। साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। अत्यधिक वर्कआउट से मांसपेशियों की कोशिकाओं में से मायोग्लोबिन (मांसपेशियों में पाया जाने वाला पदार्थ) निकलने लगता है जिससे किडनी फेल हो सकती है।

मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव

व्यायाम को अक्सर रात को अच्छी नींद लेने का एक प्रभावी तरीका माना जाता है। एक स्वस्थ व्यायाम दिनचर्या, शरीर को उचित मात्रा में थका देती है जिससे अच्छी नींद आती है।

हालांकि, अधिक व्यायाम करने से तनाव पैदा करने वाले हार्मोन बढ़ सकते है जिससे नींद की गुणवत्ता प्रभावित हो जाती है। शरीर में उच्च कोर्टिसोल का स्तर नींद की कमी के साथ तनाव, चिंता, मूड विकार जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है।

कितना समय सही रहता है एक्सरसाइज के लिए

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक शरीर को स्वस्थ और फिट बनाए रखने कि लिए हर हफ्ते कम से कम 150 मिनट एक्सरसाइज जरूर करना चाहिए।

यदि आप काफी लंबे समय से व्यायाम करते आ रहे हैं तो इस समय को बढ़ाकर 250 मिनट किया जा सकता है, फिटनेस लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए इतने व्यायाम को ठीक माना जाता है।

हालांकि शरीर के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए व्यायाम की भी एक सीमारेखा होनी आवश्यक है। अत्यधिक एक्सरसाइज करना कई समस्याओं का कारण बन सकता है।