बच्चों को इस तरह से खिलाएं चुकंदर, कभी खून की कमी नहीं होगी !

चुकंदर को शरीर में खून बढ़ाने के लिए काफी अच्छा माना जाता है। ठंड के मौसम में चुकंदर आता है और इस लाल रंग की सब्जी को खाने से हीमोग्लोबिन बनता है।

खासकर यह बच्चों के लिए बहुत अच्छा होता है लेकिन अक्सर छोटे बच्चे स्वाद के कारण चुकंदर खाने से मना कर देते हैं जिसकी वजह से उन्‍हें चुकंदर में मौजूद पोषक तत्‍व नहीं मिल पाते हैं।

आज इस पोस्ट में हम आपको कुछ ऐसे तरीके बताने जा रहे हैं जिससे आप एक बच्चों को इसे आसानी खिला सकते हैं और बच्चे भी इसे को बड़े चाव से खाएंगें।

बच्चों को कब खिलाना है?

जन्म के बाद पहले 6 महीनों तक बच्चा पूरी तरह से अपनी मां के दूध पर निर्भर करता है। इस अवधि के दौरान बच्चे को दूध के अलावा और कुछ नहीं दिया जाना चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि जब बच्चा 8 से 10 महीने का हो जाए, तो आप उसे चुकंदर खिला सकते हैं। बच्चे को इसे खिलाने से पहले एक बार डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

बच्चे को 1 से 2 चम्मच चुकंदर खिलाएं क्योंकि इसमें नाइट्रेट होते हैं  जिससे बच्चे को इसे पचाने में मुश्किल हो सकती है। आप बच्चे को चुकंदर उबाल कर या सब्जियों में डालकर भी खिला सकते हैं।

सूप बनाकर पिलाएं?

आप बड़े बच्चों को सीधे चुकंदर खिला सकते हैं या उनके लिए अलग-अलग रेसिपी बनाकर आहार में शामिल कर सकते हैं लेकिन आप एक छोटे बच्चे को सीधे नहीं खिला सकते हैं।

तो बेहतर होगा आप चुकंदर सूप बनाएं । कई माता-पिता बच्चे को सेब के साथ चुकंदर मिलाकर और उसका दलिया बनाकर खिलाते हैं।

इससे बच्चे को पोषण मिलता है और यह पचाने में भी आसान होता है। आप आहार विशेषज्ञ से सलाह लेकर अपने बच्चे के लिए अधिक पौष्टिक से भरा सूप भी बना सकती हैं।

इसके पोषक तत्व

100 ग्राम चुकंदर में 86.9 ग्राम पानी, 1.95 ग्राम प्रोटीन, 6.18 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 0.76 मिलीग्राम आयरन, 2.8 ग्राम फाइबर, 36.3 मिलीग्राम फाइबर, 69.4 मिलीग्राम सोडियम, 16 मिलीग्राम कैल्शियम, 33.2 मिलीग्राम मैग्नीशियम और 30.5 मिलीग्राम ज़िंक होता है। इसके अलावा, इसमें कई अन्य विटामिन और खनिज होते हैं।

बच्चे को चुकंदर खिलाने के फायदें

छोटे बच्चों के लिए इसका उपयोग करने के कई फायदे हैं। यह विटामिन ए और खनिजों में समृद्ध हैं, जिनमें विटामिन ए, बी, सी और ई शामिल हैं, साथ ही पोटेशियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम और आयरन भी शामिल हैं।

यह बच्चे में अपच और दस्त जैसी बीमारियों को रोकता है। यह आयरन में भी उच्च होता है, जो बच्चों में एनीमिया के खतरे को कम करता है।

आयरन लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को बढ़ाता है, जो शरीर के अंगों को ऑक्सीजन की उचित आपूर्ति में मदद करता है। इसमें फाइबर बच्चे के पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है और अपच को रोकता है।

दुनिया के कुछ ऐसे अजीबो-गरीब रहस्य जो आज तक नहीं सुलझे

यह दुनिया जितनी बड़ी है उतनी ही अजीबो-गरीब रहस्यों से भरी पड़ी है। प्रकृति के कई रहस्य आज भी उलझे हुए हैं, जिन्हें सुलझाने की बहुत कोशिश की गई लेकिन आज तक कोई समाधान नहीं निकल पाया। ऐसे ही कुछ अनसुलझे रहस्यों के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं।

6 इंच का छोटा नरकंकाल

चिली में घोस्ट टाउन नाम से एक मशहूर जगह है जहाँ एक 6 इंच का नर कंकाल पाया गया था। इस नरकंकाल के दांत पत्थर जैसे मजबूत थे।

बहुत रिसर्च करने के बाद यह मान लिया गया था कि वह कंकाल इंसान का ही था लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि इतने छोटे इंसान के दांत कैसे हो सकते हैं। इसी वजह से आज भी यह रहस्य उलझा हुआ है।

द एस एस ओरंग मेडान

सन 1947 को जून के महीने में “मलक्का की खाड़ी” से व्यापारिक मार्ग से कई जहाज गुजर रहे थे। तभी एक एस ओ एस संदेश पहुंचा, कि “जहाज के सभी क्रू सदस्यों की मौत हो गई है ” जब जहाज़ के सिग्नल का सोर्स पहचानते हुए क्रू जहाज की तरफ मर्चेन्ट शिप ‘द सिल्वल स्टार’ पहुंची तो नज़ारा हैरान करने वाला था ।

क्रू जहाज़ के सभी सदस्यों की मौत हो चुकी थी और सभी के शव जहाज़ पर इधर-उधर बिखरे पड़े थे । वो दृश्य इतना भयानक था, कि समझ नहीं आ रहा था कि हुआ क्या ? इंसानो के साथ-साथ उस जहाज़ पर सफर कर रहें कुत्तों की भी मौत हो गई थी ।

हैरानी वाली बात यह है कि किसी के भी शरीर पर कोई चोट के निशान नहीं मिले। यही कारण है कि उनकी मौत का कारण आज भी एक रहस्य बना है।

मिनेसोटा डेविल्स वॉटरफॉल

“द डेविल्स केटल” नामक इस झरने को रहस्यमयी माना जाता है। इस झरने में दो धाराएं गिरती है। एक धारा तो सामान्य धाराओं की तरह बहती है पर दूसरी धारा एक छेद में गिरकर कहीं गायब हो जाती है।

यह रहस्य आज तक नहीं सुलझ पाया है कि यह पानी जाता कहां है। ‘द डेविल्स कैटल’ नाम के इस छेद में आधी नदी का पानी समा जाता है।

द डांसिंग प्लेग ऑफ 1518

1518 में गर्मियों के दिनों में स्ट्रासबर्ग शहर में एक महिला ने सड़क पर अचानक से नाचना शुरू कर दिया। दिन से रात हो जाती और रात से दिन पर उसका नाचना बंद नहीं होता।

एक सप्ताह के अंदर अंदर 34 अन्य महिलाओं ने भी उनके साथ नाचना शुरू कर दिया। उन्हें देखकर ऐसा लगता था जैसे कि उनके अंदर किसी आत्मा का वास हो गया हो, क्यूंकि नाचने की ना तो कोई वजह थी और ना ही कोई खास मौका।

एक महीने के अंदर नाचने वाली महिलाओं की संख्या 400 पहुंच गई। कई महिलाओं की हालत खराब होने लगी, यहां तक कि कई महिलाओं की नाचते-नाचते मौत हो गईं।

कई धार्मिक पुरोहितों और लोगों को स्थिति पर नियंत्रण लाने के लिए बुलाया गया l डॉक्टरों और वैज्ञानिकों को भी बुलाया गया, परन्तु कोई असर नहीं हुआ।

इस घटना के पीछे कई वजह बताई गई जैसे:- जहर, एपिलेप्सी, सामूहिक मानसिक बीमारी। इस घटना को ठीक करने के लिए कई तरीके भी आजमाए गए लेकिन इस ऐतिहासिक घटना का आज तक संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका है l

खिसकते हुए पत्थर, डेथ वैली, कैलिफोर्निया

डेथ वैली के नाम से जानी जाने वाली इस जगह पर सैकड़ों पत्थर मौजूद हैं। इस सूखे मरुस्थल पर अलग-अलग आकार के पत्थर हैं।

कुछ पत्थर ऐसे लगते हैं जैसे वे अपनी जगह से खिसकते हुए आगे बढ़ रहे हैं, परन्तु वहां पर किसी भी इंसान या जानवर के जरिए इन पत्थरों को घसीटने का कोई निशान नज़र नहीं आता।

जानिए एक ऐसी अनोखी महिला के बारे में जिसकी चार टाँगें थीं

जानिए एक ऐसी अनोखी महिला के बारे में जिसकी चार टाँगें थीं

अकसर लोग जब अपने बारे में किसी को बताते हैं तो वे अपने जीवन से जुड़ी कुछ बातों को सामने रखते हैं, लेकिन क्या आपने कभी ऐसा सुना है कि कोई व्यक्ति अपने परिचय में शरीर के अंगों का भी विवरण दे रहा हो?

जैसे; ‘मेरे दो हाथ, एक आंख और दो कान है’ ये कितना अजीब लगता है, लेकिन कोई है जिसे ऐसा भी कहने की जरूरत पड़ती है और वो है मर्टल कोर्बिन। उसे अपने परिचय में यह कहना पड़ता है कि ‘मेरे दो नहीं बल्कि चार पैर है’ l

आज हम आपको इस पोस्ट में चार टांगो वाली अनोखी महिला मर्टल कोर्बिन के बारे में बताने जा रहे हैं:-

मर्टल कोर्बिन का जन्म 12 मई, 1868 को यूनाइटेड स्टेट के टेनेसी में हुआ। मर्टल कोर्बिन को चार-पैर वाली महिला के रूप में जाना जाता था। उसके जन्म ने हर किसी को हैरान कर दिया था।

बेहद मासूम व प्यारी मर्टल बाकी लोगों की तुलना में केवल एक अंतर लेकर इस दुनिया में आई थी और वो था उसके चार पैर।

जी हां, मर्टल के दो नहीं बल्कि चार पैर थे, दो सामान्य उसी स्थान पर और बाकी दो टांगें उनके ठीक बीचोबीच थे जो मर्टल की कमर के बीच से आते थे।

डॉक्टरों के मुताबिक मर्टल के साथ जुड़ी वो दो अलग टांगें उसकी जुड़वा बहन की थी जो इस दुनिया में आ नहीं पाई।

डॉक्टरों का कहना है कि कई बार जो जुड़े हुए जुड़वा बच्चे होते हैं उनमें से एक के शरीर का तो पूरा आकार बन जाता है लेकिन दूसरे के शरीर के कुछ हिस्से पहले वाले बच्चे के साथ जुड़ जाते हैं।

कितनी अजब-गजब है ये दुनिया

कितनी अजीब और विचित्र बात है न कि आप अपने जन्म के साथ किसी दूसरे के शरीर के अंगों को साथ लेकर आए हो। डॉक्टरों के अनुसार मर्टल अपने अजन्मी बहन के इन्हीं अंगों को साथ लेकर आई थी l

मर्टल अपने अजन्मी बहन के अंगों पर काबू तो पा सकती थी, लेकिन चलते समय उनका उपयोग करना उसके लिए काफी चुनौतीपूर्वक था। यह भी कहा गया कि उन दो टांगों से जुड़े पैरों में केवल 3-3 उंगलियां ही थी।

मर्टल की इस विचित्र बात ने उसे दुनिया भर में मशहूर भी बनाया। जब वो केवल 13 साल की थी तब उसके जीवन पर एक जीवनी लिखी गई, ‘बायोग्राफी ऑफ मर्टल कॉर्बिन’ l

वह अपने अतिरिक्त शरीर को मैचिंग मोज़े और जूतों से सजाती थी, जो उसे एक बहुत ही सुंदर लुक देता था।

मर्टल की शादी

मर्टल की एक बहन और भी थी जिसका नाम विले ऐन था। उसकी शादी साल 1885 में लॉक बिन्नेल नाम के लड़के से हुई थी।

लॉक का एक भाई डॉक्टर जेम्स क्लिंटन बिकनेल था, जिसने अपने भाई की शादी के तुरंत बाद मर्टल से शादी का प्रस्ताव रखा।

19 साल की उम्र में मर्टल ने जेम्स क्लिंटन बिकनेल नाम के एक डॉक्टर से शादी की। मर्टल और जेम्स की शादी एक सच्चे प्यार को बयां करती है।

यहाँ एक और महत्वपूर्ण बिंदु है कि मर्टल के शरीर में एक नहीं बल्कि दो योनियां मौजूद थी। कहा जाता है कि मर्टल ने पांच बच्चों को जन्म दिया था जिनमें से तीन का बचपन में ही निधन हो गया था।

मर्टल के बच्चों के संदर्भ में यह भी कहा गया कि उसके तीन में से दो बच्चे एक योनि से पैदा हुए थे और बाकी दो दूसरी योनि से। अब यह तथ्य सच है या नहीं लेकिन चिकित्सकीय रूप से देखा जाए तो ऐसा होना संभव माना गया है।

जानिए तिल क्या बताते हैं आपके स्वभाव के बारे में

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हर व्यक्ति के शरीर के किसी न किसी अंग पर तिल होता है। तिल हमारे शरीर पर जन्म से ही होते हैं लेकिन क्या आपको पता है कि तिल से भी हमारे स्वभाव के बारे में पता चलता है। इसे हम तिल, मस्सा एवं लाल मस्सा भी कहते हैं। आइए जानते हैं आपके शरीर के किस अंग का तिल, क्या कहता है।

  • आंख की पुतली पर तिल – ऐसा माना जाता है कि दायीं पुतली पर तिल हो तो व्यक्ति के विचार उच्च होते हैं। बायीं पुतली पर तिल वालों के विचार क्रोधित करने वाले होते हैं।
  • पलकों पर तिल – आंख की पलकों पर तिल हो तो व्यक्ति संवेदनशील होता है। दायीं पलक पर तिल वाले बायीं वालों की अपेक्षा अधिक संवेदनशील होते हैं।
  • आंख पर तिल – दायीं आंख पर तिल स्त्री से मेल होने का एवं बायीं आंख पर तिल स्त्री से अनबन होने का आभास देता है।
  • कान पर तिल – कान पर तिल व्यक्ति के अल्पायु होने का संकेत देता है।
  • नाक पर तिल – नाक पर तिल हो तो व्यक्ति प्रतिभासंपन्न और सुखी होता है। महिलाओं की नाक पर तिल उनके सौभाग्यशाली होने का सूचक होता है।
  • होंठ पर तिल – होंठ पर तिल वाले व्यक्ति बहुत प्रेमी हृदय होते हैं। यदि तिल होंठ के नीचे हो तो गरीबी छाई रहती है।
  • मुंह पर तिल – मुखमंडल के आसपास का तिल स्त्री तथा पुरुष दोनों के सुखी संपन्न एवं सज्जन होने के सूचक होते हैं। मुंह पर तिल व्यक्ति को भाग्य का धनी बनाता है। उसका जीवनसाथी सज्जन स्वभाव का होता है।
  • गाल पर तिल – गाल पर लाल तिल शुभ फल देता है। बाएं गाल पर कृष्ण वर्ण तिल व्यक्ति को निर्धन, किंतु दाएं गाल पर धनी बनाता है।
  • जबड़े पर तिल – जबड़े पर तिल हो तो स्वास्थ्य की अनुकूलता और प्रतिकूलता निरंतर बनी रहती है।
  • ठोड़ी पर तिल – जिस स्त्री की ठोड़ी पर तिल होता है, उसमें मिलनसारिता की कमी होती है।
  • कंधों पर तिल – दाएं कंधे पर तिल का होना दृढ़ता तथा बाएं कंधे पर तिल का होना चिड़चिड़े स्वभाव का सूचक होता है।
  • दाहिनी भुजा पर तिल – ऐसे तिल वाला व्यक्ति प्रतिष्ठित व बुद्धिमान होता है। लोग उसका आदर करते हैं।
  • भौंहों पर तिल – यदि दोनों भौहों पर तिल हो तो व्यक्ति अकसर यात्रा करता रहता है। दाहिनी पर तिल सुखमय और बायीं पर तिल दुखमय दांपत्य जीवन का संकेत देता है।
  • बायीं भुजा पर तिल – बायीं भुजा पर तिल वाले व्यक्ति झगड़ालू स्वभाव के होते हैं।
  • कोहनी पर तिल – कोहनी पर तिल का पाया जाना विद्वता का सूचक है।
  • हाथों पर तिल – जिसके हाथों पर तिल होते हैं वह चालाक होते हैं। दायीं हथेली पर तिल हो तो बलवान और दायीं हथेली के पृष्ठ भाग में हो तो धनवान होता है। बायीं हथेली पर तिल हो तो व्यक्ति  खर्चीला तथा दायीं हथेली के पृष्ठ भाग पर तिल हो तो कंजूस होता हैं।
  • अंगूठे पर तिल – अंगूठे पर तिल हो तो व्यक्ति कार्यकुशल, अच्छा व्यवहार तथा न्यायप्रिय होता है।
  • तर्जनी पर तिल – जिसकी तर्जनी पर तिल हो, वह विद्यावान, गुणवान और धनवान किंतु शत्रुओं से पीड़ित होता है।
  • मध्यमा पर तिल – मध्यमा पर तिल उत्तम फलदायी होता है। व्यक्ति सुखी होता है। उसका जीवन शांतिपूर्ण होता है।
  • अनामिका पर तिल – जिसकी अनामिका पर तिल हो वह ज्ञानी, यशस्वी, धनी और पराक्रमी होता है।
  • कनिष्ठा पर तिल – कनिष्ठा पर तिल हो तो वह व्यक्ति संपत्तिवान होता है, किंतु उसका जीवन दुखमय होता है।
  • हथेली पर तिल – जिसकी हथेली में तिल मुठ्ठी में बंद होता है वह बहुत भाग्यशाली होता है ।
  • गले पर तिल – गले पर तिल वाला व्यक्ति आरामतलब होता है। गले पर सामने की ओर तिल हो तो व्यक्ति के घर मित्रों का जमावड़ा लगा रहता है। मित्र सच्चे होते हैं। गले के पृष्ठ भाग पर तिल होने पर जातक कर्मठ होता है।
  • छाती पर तिल – छाती पर दाहिनी ओर तिल का होना स्त्रियों के लिए शुभ होता है। ऐसी स्त्री पूर्ण अनुरागिनी होती है। पुरुष भाग्यशाली होते हैं। छाती पर बायीं ओर तिल रहने से पत्नी की ओर से असहयोग की संभावना बनी रहती है। छाती के मध्य का तिल सुखी जीवन दर्शाता है। यदि किसी स्त्री के हृदय पर तिल हो तो वह सौभाग्यवती होती है।
  • कमर पर तिल – यदि किसी व्यक्ति की कमर पर तिल होता है तो उस व्यक्ति की जिंदगी सदा परेशानियों से घिरी रहती है।
  • पीठ पर तिल – पीठ पर तिल हो तो व्यक्ति भौतिकवादी, महत्वाकांक्षी एवं रोमांटिक होता है। वह भ्रमणशील भी हो सकता है। ऐसे लोग खर्च भी खुलकर करते हैं।
  • पेट पर तिल – पेट पर तिल हो तो व्यक्ति चटोरा होता है। ऐसा व्यक्ति भोजन का शौकीन व मिष्ठान्न प्रेमी होता है। उसे दूसरों को खिलाने की इच्छा कम रहती है।
  • घुटनों पर तिल – दाहिने घुटने पर तिल होने से गृहस्थ जीवन सुखमय और बायें पर होने से दांपत्य जीवन दुखमय होता है।
  • पैरों पर तिल – पैरों पर तिल हो तो जीवन में भटकाव रहता है। ऐसा व्यक्ति यात्राओं का शौकीन होता है।

महेंद्र सिंह धोनी से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

महेंद्र सिंह धोनी से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

  • महेंद्र सिंह धोनी का जन्म 7 जुलाई 1981 में बिहार के रांची शहर में हुआ था। उनके के पिता का नाम पान सिंह वह माता का नाम श्रीमती देवकी हैl
  • बचपन में धोनी का ज़्यादा टाइम क्रिकेट खेलने में ही बीतता था क्योंकि उन्हें क्रिकेट खेलना सबसे अच्छा लगता था l
  • धोनी मिदनापुर में दक्षिण पूर्व रेलवे के तहत 2001 से 2003 तक खड़गपुर रेलवे स्टेशन पर एक यात्रा टिकट परीक्षक (टीटीई) थे। हालांकि, वह ज्यादा देर तक काम नहीं कर सके और कुछ समय के बाद काम छोड़ दिया।
  • उनके पसंदीदा व्यंजन बटर चिकन और चिकन बिरयानी हैं, और उन्हें हॉट चॉकलेट फज भी बहुत पसंद है।
  • धोनी किशोर कुमार के बहुत बड़े फैन हैं और उन्हें पुराने गाने बहुत पसंद है। उनके पसंदीदा गानों में से एक है ” मैं पल दो पल का शायर हूं”।
  • 1998 में धोनी बिहार की अंडर-19 क्रिकेट टीम का हिस्सा थे। उनकी टीम पंजाब के खिलाफ हार गई, लेकिन उनका प्रदर्शन सराहा गया। इसी के आधार पर उन्हें बिहार रणजी टीम में शामिल कर लिया गया।
  • 2012 में फोर्ब्स पत्रिका ने धोनी को सबसे अमीर क्रिकेटर बताया। रईसी के मामले में वे दुनिया के टॉप 100 एथलीट में से 31वें स्थान पर थे। वे इंग्लैंड के फुटबॉलर रूनी, एथलीट उसैन बोल्ट, टेनिस स्टार नोवाक जोकोविच से कहीं आगे थे। 2013 में इसी पत्रिका ने धोनी को इस सूची में 16वां स्थान दिया। उनकी सालाना कमाई 190 करोड़ रुपए बताई गई।
  • तीनों आईसीसी ट्रॉफी (टी 20 विश्व कप 2007, क्रिकेट विश्व कप 2011 और चैंपियंस ट्रॉफी 2013) जीतने वाले विश्व क्रिकेट में धोनी एकमात्र कप्तान हैं।
  • धोनी ने दो साल के अफेयर के बाद जुलाई 2010 में अपनी बचपन की दोस्त साक्षी सिंह के साथ देहरादून में स्थित फार्म हाउस पर सगाई और फिर अगले ही दिन शादी कर ली। दोनों रांची के डीएवी स्कूल में साथ पढ़ा करते थे।
  • धोनी ने 2005 में जयपुर में श्रीलंका के खिलाफ नाबाद 183 रन बनाए, जो एकदिवसीय क्रिकेट में एक विकेटकीपर द्वारा बनाया गया सर्वोच्च स्कोर है। सीएसके के कप्तान ने 299 के सफल पीछा करते हुए 145 गेंदों का सामना करते हुए 15 चौके और 5 छक्के लगाए थे ।
  • धोनी को क्रिकेट में सर्वश्रेष्ठ और सबसे तेज विकेटकीपर के रूप में जाना जाता है। सीएसके (चेन्नई सुपर किंग्स) के कप्तान ने प्रारूप में 538 मैचों में 195 स्टंपिंग की है। उनके बाद कुमार संगकारा (139) दूसरे और रोमेश कालुविथाराना (101) तीसरे स्थान पर हैं।
  • उन्होंने अपने क्रिकेट करिअर में कई रिकॉर्ड तोड़े हैं। वे 22 टेस्ट जीतकर सौरव गांगुली से आगे निकलकर भारत के सबसे सफल कप्तान बन गए है।  सौरव ने भी उन्हें भारत का सबसे सफल कप्तान बताया। वे एकदिवसीय मैचों के मामले में भारत के सबसे सफल कप्तान हैं।
  • धोनी जॉन अब्राहम के बहुत बड़े फैन थे और उनके जैसे ही लंबे बाल भी रखे थे। यहां तक कि जब बॉलीवुड अभिनेता जॉन ने अपने बाल कटवाए तो धोनी ने भी अपने बाल भी कटवा लिए थे।
  • धोनी ने कई पुरस्कार भी प्राप्त किए हैं जैसे 2006 में आईसीसी वनडे प्लेयर ऑफ़ द इयर अवार्ड (प्रथम भारतीय खिलाड़ी जिन्हें ये सम्मान मिला) , राजीव गाँधी खेल रत्न पुरस्कार और 2001 में भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान, पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित है l
  • धोनी आईपीएल के आठ फाइनल में जगह बनाने वाले एकमात्र क्रिकेटर हैं। भारत के पूर्व कप्तान ने 2010, 2011 और 2018 में तीन बार सीएसके के साथ टूर्नामेंट जीता है।
  • वे इस समय 20 बड़े ब्रांड का विज्ञापन कर रहे हैं। इसमें रीबॉक, पेप्सी के प्रॉडक्ट शामिल हैं। वे शाहरुख खान के बाद सबसे ज़्यादा विज्ञापन करने वाले सेलिब्रिटी हैं। शाहरुख के पास 21 ब्रांड हैं l
  • धोनी स्कूल टाइम में फुटबॉल भी खेलते थे। वे अपने  स्कूल की ओर से फुटबाल टीम में  गोलकीपर होते थे l
  • शीश महल टूर्नामेंट में सेंट्रल कोल फील्ड्स लिमिटेड के लिए खेलते समय, धोनी अपने कोच “देवल सहाय” से प्रत्येक छक्के के लिए 500 रुपये लेते थे, जो उन्हें मैचों में मिलता था।
  • धोनी को मोटरसाइकिलों के शौक के लिए जाना जाता है। दोपहिया वाहनों के लिए उनका शौक बहुत कम उम्र से शुरू हो गया था। महेंद्र सिंह धोनी के पास (23) लाखों करोड़ों रुपए वाली बाइक्स का कलेक्शंस है क्योंकि उन्हें बाइक्स का बहुत शौक है l
  • धोनी ने कप्तान के रूप में सबसे अधिक अंतर्राष्ट्रीय छक्के मारे हैं वह अब तक 342 छक्के लगा चुके हैं और पाकिस्तान के पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी (476) के नेतृत्व वाली सूची में पांचवें स्थान पर हैं।
  • धोनी ने हमेशा कहा है कि सेना उनका पहला प्यार है और उन्हें 1 नवंबर 2011 को लेफ्टिनेंट कर्नल की मानद रैंक प्रदान की गई।
  • उनकी जीवनी पर आधारित एम.एस.धोनी: “द अनटोल्ड स्टोरी ” फ्लिम भी बनी है। यह एक प्रमुख क्रिकेटर की जीवनी पर बनी पहली फिल्म थी और इसे बहुत पसंद भी किया गया । इस फिल्म में बॉलीवुड के दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने एम.एस.धोनी का किरदार निभाया था।
  • धोनी की भारत और विदेश में फैन फॉलोइंग बहुत बड़ी है। पिछले कई वर्षों में उनसे मिलने वाले कई प्रशंसकों के बीच, रांची की एक लड़की भी थी जिसने अपने स्कूटर से धोनी की हमर का पीछा किया और हवाई अड्डे पर उनके साथ एक सेल्फी क्लिक की।

कुछ ऐसे पक्षी जो पृथ्वी से विलुप्त हो चुके हैं

विश्व में करीब 10,000 प्रकार के पक्षी पाए जाते हैं इनमें से 1200 प्रजातियां ऐसी हैं जोकि लुप्त होने की कगार पर हैं, इन पक्षियों की प्रजातियों को संकटग्रस्त घोषित किया गया है।

पृथ्वी पर मानव की गतिविधियों और जंगलों के विनाश की वजह से कई पशु पक्षी विलुप्त हो चुके हैं। सन 1500 से लेकर अब तक पक्षियों की 190 प्रजातियां विलुप्त हो चुकी हैं। विलुप्त होने की यह प्रकिया दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है।

इस लेख में हम जानेंगे विलुप्त हुए कुछ पक्षियों के बारे में :

डोडो पक्षी

विलुप्त पक्षियों में डोडो पक्षी सबसे प्रमुख है। यह पक्षी मॉरीशस का एक स्थानीय पक्षी था। यह पक्षी उड़ नहीं पाते थे और  बहुत बड़े आकार के होते थे। डोडो कबूतर का नज़दीकी रिश्तेदार माना जाता था। इस पक्षी की लम्बाई  3.3 फीट और इसका वजन 20 किलो तक हो सकता था।

Dodo Bird

सन 1598 में डच समुद्री यात्री इस द्वीप पर आए तो उन्होंने डोडो को उसके मांस के लिए शिकार करना शुरू कर दिया। डोडो पक्षी का शिकार करना बहुत आसान था, क्योंकि न तो ये उड़ पाते थे और अधिक वजन होने के कारण न ही भाग पाते थे। समुद्री यात्रियों ने इस द्वीप पर लगभग सभी डोडो पक्षियों को मार कर पूरी प्रजाति को ही नष्ट कर दिया था।

तस्मानियन इमु

तस्मानियन इमु, इमू पक्षी की ही एक प्रजाति थी जो कि तस्मानिया द्वीप में पाई जाती थीl यह पक्षी उड़ नहीं पाता थाl तस्मानिया में यह पक्षी काफी मात्रा में पाए जाते थे, परंतु किसानों ने इसे फसल को नष्ट करने वाला पक्षी मानते हुए इसका शिकार करना शुरू कर दिया और लगभग सारे पक्षियों को मार डाला।

tasmaniyam emu bird

कैरोलिना पैराकीट

कैरोलिना पैराकीट एकमात्र तोते की प्रजाति थी जो कि उत्तरी अमेरिका में पाई जाती थी। यह पक्षी अलाबामा रा ज्य में मुख्य रूप से पाया जाता था तथा यह प्रवास करके ओहायो, आयोवा, इलिनॉइस आदि अमेरिकी राज्यों में भी जाता था।

Carolina parakeet

इसका आकार 12 इंच का था तथा वजन 280 ग्राम हुआ करता था। मानव विकास के दौरान जंगलों का विनाश हो गया जिससे कि उत्तरी अमेरिका के इस इकलौते तोते के आवास नष्ट हो गए जिससे कि इसकी पूरी प्रजाति का ही विनाश हो गया।

अरबी शुतुरमुर्ग

शुतुरमुर्ग पक्षी अब केवल अफ्रीका में ही पाए जाते हैं l पहले यह अरब के रेगिस्तान में भी पाए जाते थे। इनकी कुछ संख्या जॉर्डन, इसराइल, कुवेत आदि देशों में भी पाई जाती थी। इन्हें मध्य पूर्व का शतुरमुर्ग  कहा जाता था। अरब के अमीर लोगों ने खेल के रूप में इस पक्षी का शिकार करना शुरू कर दिया।

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इस पक्षी का शिकार मांस, अंडों उसके पंखों के लिए किया जाता था। इसके सुंदर पंखों से कई प्रकार के क्राफ्ट्स बनाए जाते थे।  प्रथम विश्व युद्ध के दौरान बंदूक और राइफल के आ जाने से इनका शिकार और भी आसान हो गया और इन्हें केवल मनोरंजन के लिए ही मारा जाने लगा, और धीरे धीरे अरबी शतुरमुर्ग की पूरी प्रजाति ही खत्म हो गई।

संदेश वाहक कबूतर

संदेश वाहक कबूतर भारी मात्रा में उत्तरी अमेरिका में पाए जाते थे, उनके झुंड इधर-उधर उड़ते हुए देखे जा सकते थे। यह कबूतर उत्तरी अमेरिका के जंगलों में पाए जाते थे। जब अमेरिका में, अफ्रीका के लोगों को गुलाम बनाकर लाया गया तो उन्हें सस्ते भोजन के रूप में संदेशवाहक कबूतरों का मांस खिलाया जाता था, क्योंकि इनका शिकार आसानी से किया जा सकता था और यह काफी मात्रा में मौजूद थे।

carrier pigeon

शहरों को आबाद करने के लिए जंगलों का विनाश किया गया, जिससे कि इन संदेशवाहक कबूतरों का आवास ख़त्म हो गया। इन दोनों प्रमुख कारणों से उत्तरी अमेरिका में एक भी संदेशवाहक कबूतर नहीं बचा और यह प्रजाति पूरी तरह से विलुप्त हो गई।

रोजाना किशमिश का सेवन करें, और देखें इसके चमत्कारी फायदे

किशमिश खाने में जितना स्वादिष्ट होता है उतना ही सेहत के लिए फायदेमंद होता है। खासतौर पर सर्दियों में इसका सेवन और भी ज्यादा फायदेमंद होता है।

आयुर्वेद के अनुसार इसमें बहुत सारे औषधीय गुण होते हैं। इसमें मौजूद आयरन, पोटेशियम और फाइबर रक्तचाप को कम करके उचित पाचन को बनाए रखने में मदद करते हैं।

हमें रोजाना 4-5 किशमिश खाने चाहिए। इसका सेवन सर्दी-खांसी और कफ के लिए सबसे अच्छा उपाय माना जाता है।

किशमिश मीठी, ठंडी, दिल के लिए फायदेमंद, डिटॉक्सिफाइंग, ब्लड थिनर है। इसके अलावा किशमिश का सेवन करने से शरीर को कई फायदे होते हैं।

इसमें मौजूद पोषक तत्व कई बीमारियों में फायदेमंद होते हैं। तो आइए जानें रोजाना किशमिश खाने के क्या फायदे हैं।

  • किशमिश खाने से रक्त परिसंचरण में सुधार होता है और यह त्वचा की रंगत को निखारता है, यदि इसे भिगो कर खाया जाये तो कुछ हद तक एनीमिया को कम करने में मदद मिलती है।
  • इसमें पोटैशियम की भरपूर मात्रा होती है। लहसुन की चटनी के साथ रोजाना एक चम्मच किशमिश खाने से रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
  • इसके एंटीऑक्सिडेंट शरीर में कोशिकाओं के लिए हानिकारक मुक्त कणों की मात्रा को कम करते हैं। इससे कैंसर से बचाव होता है
  • किशमिश में फाइबर होते हैं। बिस्तर पर जाने से एक घंटे पहले उबले हुए दूध के साथ इसका सेवन करने से पेट से संबंधित बीमारियों को दूर किया जा सकता है। विशेष रूप से कब्ज के लिए इस उपाय को आजमाना फायदेमंद है। यह पाचन में भी सुधार करता है।
  • इसमें बैक्टीरिया के विकास को रोकने की क्षमता होती है इसीलिए बुखार होने पर किशमिश खाना चाहिए। बुखार से जल्दी छुटकारा पाने के लिए इसका सेवन करना फायदेमंद होता है।
  • बीटा कैरोटीन आंखों की सेहत के लिए फायदेमंद है। किशमिश बीटा कैरोटीन में समृद्ध हैं इसलिए आंखों की सेहत में सुधार के लिए भी इसका सेवन करना चाहिए।
  • दिन में दो बार किशमिश का उचित सेवन गले के लिए भी फायदेमंद है।
  • इसमें ऑक्सालिक एसिड होता है। इससे दांत मजबूत होते हैं। यह मसूड़ों की समस्याओं से बचाता है।
  • इसके सेवन से शरीर से टॉक्सिन्स दूर होते हैं और बालों के गिरने की समस्या भी दूर होती है।
  • यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को सीमित करने में मदद करता है जो दिल के दौरे के जोखिम को कम करता है।

सैमसंग गैलेक्सी A02s और A12 लॉन्च, जाने क्या है कीमत और विशेषताएं

सैमसंग गैलेक्सी A02s और गैलेक्सी A12 लॉन्च, जाने क्या है कीमत और विशेषताएं

सैमसंग ने अपने दो स्मार्टफोन सैमसंग गैलेक्सी A02s और A12 लॉन्च किए हैं। ये दोनों मोबाइल लंबे समय से सुर्खियों में हैं। तो चलिए जानते हैं इन नए फ़ोन्स के बारे में :-

कीमत

सैमसंग गैलेक्सी A12 को 179 यूरो यानि 15,800 रुपये में लॉन्च किया गया है। सैमसंग गैलेक्सी A02s को यूरोप में 150 यूरो में लॉन्च किया गया है, जो कि 13,300 रुपये है। दोनों ही फोन में बड़ी स्क्रीन, पावरफुल बैटरी और शानदार फीचर हैं। दोनों स्मार्टफोन को यूरोप में आधिकारिक बना दिया गया है, और जनवरी 2021 से बिक्री शुरू हो जाएगी।

सैमसंग गैलेक्सी A02s की विशेषताएं

सैमसंग के इस फोन में 6.5 इंच का एचडी + इन्फिनिटी-वी डिस्प्ले है। इसका स्क्रीन रिज़ॉल्यूशन 720×1520 पिक्सल है। कंपनी ने इसे 3GB रैम और 32GB स्टोरेज के साथ लाल, काले और सफेद रंग में लॉन्च किया है। एंड्रॉयड10 पर बेस्ड इस फोन में कंपनी ने Qualcomm SM4250 Snapdragon 450 प्रोसेसर लगाया है।

इस फोन में 5000 mAh (एमएएच) की बैटरी है। 15 वाट फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ है। इसमें 5 मेगापिक्सल का सेल्फी कैमरा है जिसमें 13 मेगापिक्सल और 2-2 मेगापिक्सल का डेप्थ सेंसर और माइक्रो लेंस है।

सैमसंग गैलेक्सी A12 की विशेषताएं

गैलेक्सी A12 में 720×1560 पिक्सल का 6.5 इंच स्क्रीन रिज़ॉल्यूशन है। कंपनी ने फोन को ब्लैक, रेड और व्हाइट तीन कलर्स में लॉन्च किया है, इसमें 3 GB रैम और 32 GB स्टोरेज और 4 GB रैम प्लस 64 GB स्टोरेज और 6 GB रैम प्लस 128 GB स्टोरेज है।

एंड्रॉयड 10 आधारित फोन में ऑक्टा कोर प्रोसेसर है। गैलेक्सी A12 में 5000 mAh की बैटरी है जिसमें 15 वॉट फास्ट चार्जिंग सपोर्ट है।

इस फोन में 8 मेगापिक्सल का सेल्फी कैमरा और 48 मेगापिक्सल का प्राइमरी सेंसर है। इसमें 2 मेगापिक्सल का डेप्थ सेंसर और 2 मेगापिक्सल का माइक्रो लेंस है।

जानिए व्हाट्सएप पर आ रहे नए फीचर्स के बारे में

दुनिया भर में व्हाट्सएप के अरबों यूजर्स हैं। व्हाट्सएप अपने यूजर्स के लिए नए फीचर्स लेकर आ रहा है। व्हाट्सएप दुनिया में सबसे प्रसिद्ध इंस्टेंट मैसेंजर है।

फेसबुक के स्वामित्व वाले व्हाट्सएप को लगातार नए फीचर्स मिल रहे हैं। जल्द ही इस ऐप में कुछ नए फीचर्स जोड़े जाएंगे। यूजर्स को इन नए फीचर्स के बारे में जानने के लिए काफी दिलचस्पी है।

तो चलिए जानते हैं इन नए फीचर्स के बारे में:

रीड लेटर

व्हाट्सएप का नया फीचर एप आर्काइव्ड चैट (Archived Chat) फीचर की जगह लेगा। यह फीचर लगभग एक पुराने वेकेशन फीचर की तरह काम करेगा। जिसे व्हाट्सएप से हटा दिया गया था। आप अपनी इच्छानुसार इस विकल्प को इनेबल या डिसेबल कर सकते हैं।

भेजने से पहले वीडियो म्यूट करें

जैसा कि नाम से ही पता चल रहा है इस फीचर की मदद से आप विडियो भेजने से पहले म्यूट कर सकेंगे। व्हाट्सएप के जरिए विडियो शेयर करने से पहले उस आइकन पर टैप करने से वीडियो को म्यूट किया जा सकेगा। ये फीचर पहले से ही इंस्टाग्राम और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं।

रिपोर्ट टु वॉट्सऐप

यह फीचर व्हाट्सएप के सबसे महत्वपूर्ण फीचर्स में से एक है। इस फीचर की मदद से आप किसी भी यूजर को जो आपको अनचाहे मेसेज भेजता है उसे रिपोर्ट कर सकते हैं। फीचर से किसी कॉन्टैक्ट को आसानी से रिपोर्ट किया जा सकेगा।

नए इमोजी

यह नया फीचर नहीं है लेकिन जल्द भारत में व्हाट्सएप पर 138 नए इमोजी के लिए सपॉर्ट आने की उम्मीद है। लेटेस्ट अपडेट के साथ एंड्रॉयड बीटा यूजर्स के लिए यह फीचर उपलब्ध है।

एलोरा के कैलाश मन्दिर से जुड़े कुछ अनसुने रहस्य

दुनिया में कई मंदिर ऐसे हैं जो अपनी खूबसूरती के लिए जाने जाते हैं लेकिन भारत में एक मंदिर ऐसा भी है जो अपनी खूबसूरती के पीछे कई रहस्य छुपाये हुए कई सेंकडो सालो से खड़ा हुआ है। यह मंदिर महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में प्रसिद्ध एलोरा की गुफाओं में स्थित है।

एलोरा की गुफाएं सबसे प्राचीन मानी जाती है। यह  पत्थर को काटकर बनाई गई 34 गुफाएं हैं और एक रहस्यमई प्राचीन हिंदू मंदिर है। इस मंदिर को किसी आम मंदिर की तरह पत्थरों से जोड़कर नहीं बल्कि केवल एक अकेले पहाड़ को काटकर बनाया गया है।

  • एलोरा में कैलाश मंदिर राष्ट्रकूट वंश द्वारा भगवान शिव के लिए एक मंदिर के रूप में बनाया गया था। शायद, यह शिव के रहस्यमय निवास पर्वत कैलाश का एक दर्शन था।
  • एलोरा में कैलाश मंदिर एक बहुमंजिला परिसर है, जिसे कैलाश पर्वत की तरह बनाया गया है – जो भगवान शिव का पौराणिक घर है।
  • 1682 में मुगल शासक औरंगजेब ने हजार सैनिकों के एक दल को इस मंदिर को पूरी तरह से नष्ट करने का काम सौंपा था। यह हजार सैनिक लगातार 3 साल तक इस मंदिर को नुकसान पहुंचाने का काम करते रहे। परन्तु इसके बावजूद भी वे पूरी तरह से इस मंदिर को नष्ट नहीं कर पाए। जब औरंगजेब को यह समझ आया कि इस मंदिर को नष्ट करना नामुमकिन है तो उसने मंदिर को नष्ट करने का काम रोक दिया।
  • आज तक कोई सही अनुमान नहीं लगा पाया है कि यह मंदिर कितने साल पुराना है क्योंकि इसे केवल एक पहाड़ को काटकर बनाया है और पहाड़ की उम्र और मंदिर की उम्र में अंतर होगा। पहाड़ तो कई लाख साल पुराना हो सकता है और फिर बाद में उसे काटकर मंदिर का निर्माण कई हजार साल बाद ही किया गया होगा।

  • आर्किओलॉजिक्ल और जिओलॉजी डिपार्टमेंट की रिसर्च से यह पता चला है कि यह कोई सामान्य मंदिर नहीं है। इस मंदिर के नीचे एक सीक्रेट अंडरग्राउंड सिटी है लेकिन नीचे जाने का रास्ता आम आदमियों के लिए बंद है।
  • आर्किओलॉजिक्ल के अनुसार पत्थर को काटकर ऐसा मंदिर बनाने के लिए लगभग 400000 टन पत्थर को काटकर यहां से निकाला गया होगा लेकिन अगर रिकॉर्ड की बात करें तो इतिहास कहता है कि कैलाश मंदिर को बनाने में केवल 18 वर्षों का समय लगा था लेकिन यह मुमकिन नहीं है। अगर हम मान ले कि इस मंदिर को बनाने वाले मजदूरों ने दिन के 12 घंटे बिना रुके काम किया होगा तो भी 18 साल में चार लाख टन पत्थर को हटाने के लिए हर साल में कम से कम 22,222 टन पत्थरों को हटाया गया होगा। इसका मतलब यह होता है कि 60 टन पत्थरों को रोज और 5 टन पत्थरों को हर घंटे से निकाला गया होगा। तब भी केवल चट्टान को हटाया जा सकेगा। फिर चट्टान काटने के बाद मंदिर में बनी मूर्तियों में की गई अद्भुत शिल्पकारी मंदिर में बने भवन आदि को बनाने में कितना समय लगा होगा । यह सब बातें मंदिर को और अधिक रहस्य्मय बनाती है क्योंकि आज से कई 100 साल पहले जब आज की तरह कोई आधुनिक उपकरण नहीं थे तो केवल कुछ पत्थरों के औजारों से इस तरह की भव्य इमारत को कैसे बनाया गया होगा।
  • हैरान कर देने वाली बात तो यह है कि इस मंदिर से काट कर निकला गया पत्थर यहाँ आसपास मिलो दूर कहीं भी दिखाई नहीं देता। उस काल में जब बड़ी क्रेन जैसी मशीनें और कुशल औजार नहीं थे तो इतना सारा पत्थर कैसे काटा गया होगा और इस मंदिर स्थल से कैसे हटाया गया होगा। इस मंदिर में बारिश के पानी को संग्रहित करने के लिए वॉटर ड्रेनिंग सिस्टम भी देखने को मिलता है साथ ही यहाँ पूल, सीढ़ियां खम्बे खूबसूरत से तैयार किये गए है।