एलोरा के कैलाश मन्दिर से जुड़े कुछ अनसुने रहस्य

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दुनिया में कई मंदिर ऐसे हैं जो अपनी खूबसूरती के लिए जाने जाते हैं लेकिन भारत में एक मंदिर ऐसा भी है जो अपनी खूबसूरती के पीछे कई रहस्य छुपाये हुए कई सेंकडो सालो से खड़ा हुआ है। यह मंदिर महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में प्रसिद्ध एलोरा की गुफाओं में स्थित है।

एलोरा की गुफाएं सबसे प्राचीन मानी जाती है। यह  पत्थर को काटकर बनाई गई 34 गुफाएं हैं और एक रहस्यमई प्राचीन हिंदू मंदिर है। इस मंदिर को किसी आम मंदिर की तरह पत्थरों से जोड़कर नहीं बल्कि केवल एक अकेले पहाड़ को काटकर बनाया गया है।

  • एलोरा में कैलाश मंदिर राष्ट्रकूट वंश द्वारा भगवान शिव के लिए एक मंदिर के रूप में बनाया गया था। शायद, यह शिव के रहस्यमय निवास पर्वत कैलाश का एक दर्शन था।
  • एलोरा में कैलाश मंदिर एक बहुमंजिला परिसर है, जिसे कैलाश पर्वत की तरह बनाया गया है – जो भगवान शिव का पौराणिक घर है।
  • 1682 में मुगल शासक औरंगजेब ने हजार सैनिकों के एक दल को इस मंदिर को पूरी तरह से नष्ट करने का काम सौंपा था। यह हजार सैनिक लगातार 3 साल तक इस मंदिर को नुकसान पहुंचाने का काम करते रहे। परन्तु इसके बावजूद भी वे पूरी तरह से इस मंदिर को नष्ट नहीं कर पाए। जब औरंगजेब को यह समझ आया कि इस मंदिर को नष्ट करना नामुमकिन है तो उसने मंदिर को नष्ट करने का काम रोक दिया।
  • आज तक कोई सही अनुमान नहीं लगा पाया है कि यह मंदिर कितने साल पुराना है क्योंकि इसे केवल एक पहाड़ को काटकर बनाया है और पहाड़ की उम्र और मंदिर की उम्र में अंतर होगा। पहाड़ तो कई लाख साल पुराना हो सकता है और फिर बाद में उसे काटकर मंदिर का निर्माण कई हजार साल बाद ही किया गया होगा।

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  • आर्किओलॉजिक्ल और जिओलॉजी डिपार्टमेंट की रिसर्च से यह पता चला है कि यह कोई सामान्य मंदिर नहीं है। इस मंदिर के नीचे एक सीक्रेट अंडरग्राउंड सिटी है लेकिन नीचे जाने का रास्ता आम आदमियों के लिए बंद है।
  • आर्किओलॉजिक्ल के अनुसार पत्थर को काटकर ऐसा मंदिर बनाने के लिए लगभग 400000 टन पत्थर को काटकर यहां से निकाला गया होगा लेकिन अगर रिकॉर्ड की बात करें तो इतिहास कहता है कि कैलाश मंदिर को बनाने में केवल 18 वर्षों का समय लगा था लेकिन यह मुमकिन नहीं है। अगर हम मान ले कि इस मंदिर को बनाने वाले मजदूरों ने दिन के 12 घंटे बिना रुके काम किया होगा तो भी 18 साल में चार लाख टन पत्थर को हटाने के लिए हर साल में कम से कम 22,222 टन पत्थरों को हटाया गया होगा। इसका मतलब यह होता है कि 60 टन पत्थरों को रोज और 5 टन पत्थरों को हर घंटे से निकाला गया होगा। तब भी केवल चट्टान को हटाया जा सकेगा। फिर चट्टान काटने के बाद मंदिर में बनी मूर्तियों में की गई अद्भुत शिल्पकारी मंदिर में बने भवन आदि को बनाने में कितना समय लगा होगा । यह सब बातें मंदिर को और अधिक रहस्य्मय बनाती है क्योंकि आज से कई 100 साल पहले जब आज की तरह कोई आधुनिक उपकरण नहीं थे तो केवल कुछ पत्थरों के औजारों से इस तरह की भव्य इमारत को कैसे बनाया गया होगा।
  • हैरान कर देने वाली बात तो यह है कि इस मंदिर से काट कर निकला गया पत्थर यहाँ आसपास मिलो दूर कहीं भी दिखाई नहीं देता। उस काल में जब बड़ी क्रेन जैसी मशीनें और कुशल औजार नहीं थे तो इतना सारा पत्थर कैसे काटा गया होगा और इस मंदिर स्थल से कैसे हटाया गया होगा। इस मंदिर में बारिश के पानी को संग्रहित करने के लिए वॉटर ड्रेनिंग सिस्टम भी देखने को मिलता है साथ ही यहाँ पूल, सीढ़ियां खम्बे खूबसूरत से तैयार किये गए है।