तुलसी की पत्तियां तोड़ते समय न करें ये गलतियां

हिंदू धर्म से जुड़े लोग घर, आंगन में तुलसी का पौधा जरूर लगाते हैं क्योंकि इससे घर में नैगेटिव एनर्जी का वास नहीं होता।

सिर्फ धार्मिक ही नहीं यह पौधा औषधीय गुणों से भी भरपूर होता है इसलिए लोग तुलसी की पत्तियों का इस्तेमाल करते हैं लेकिन तुलसी की पत्तियों को तोड़ते समय अक्सर लोग गलतियां करते हैं, जैसे शाम के समय तुलसी तोड़ना।

मान्यताओं के अनुसार, सायंकाल के समय राधा रानी का रूप मानी जाने वाली तुलसी माता लीला करती हैं। अगर पत्तियों की ज्यादा आवश्यकता हो तो तोड़ने से पहले पौधे को हिला जरूर लें।

तुलसी को खींचकर या नाखूनों से तोड़ना भी वर्जित है। वहीं अगर आप औषधि के रूप में इसका सेवन कर रहे हैं तो पत्तियों को चबाएं न जीभ पर रखकर चूसें क्योंकि शास्त्रों के अनुसार, तुलसी एक वृक्ष नहीं बल्कि राधा रानी का अवतार है।

तुलसी क्यों है फायदेमंद

वास्तु 10 दिशाओं और 9 ग्रहों पर आधारित है। तुलसी मरकरी यानी बुध ग्रह को प्रभावित करती है। ऐसा इसलिए क्योंकि सिर्फ तुलसी और गंगाजल में ही मरकरी पाया जाता है। मरकरी टैम्प्रेचर को कंट्रोल करने के साथ वातावरण को भी शुद्ध करने का काम करता है।

तुलसी के प्रकार

1. राम तुलसी (ब्राइट ग्रीन के पत्ते)

2. शाम तुलसी (छोटे डार्क ग्रीन कलर के पत्ते)

3. काली तुलसी (छोटे डार्क पत्ते)

आमतौर पर घरों में राम व शाम तुलसी पाई जाती है, जिसे उत्तर, उत्तर-पूर्व, दक्षिण-पूर्व में रखना चहिए। वहीं काली तुलसी को औषधीय के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जिसे दक्षिण पश्चिम दिशा में रखना सही होता है।

तो चलिए अब जानते हैं कि कहां और किस जगह पर होनी चाहिए तुलसी:-

तुलसी रखने की सही दिशा कौन सी? तुलसी के पौधे को न सिर्फ लक्ष्मी माता का स्वरूप माना जाता है बल्कि यह विष्णु को भी बेहद सर्वप्रिय है।

वास्तु के अनुसार इसे उत्तर, उत्तर-पूर्व, दक्षिण-पूर्व में रखें। इसके अलावा तुलसी को भूलकर भी पूर्व और उत्तर पश्चिम दिशा में न लगाएं।

रोजाना जल दें

रविवार को छोड़कर महिलाओं को रोज तुलसी को जल देना चाहिए। इसके घर में सुख संपदा, शांति बनी रहती है और पैसों की कमी भी नहीं होती।

ऐसे दें जल

तुलसी को जल देने के लिए कांसे के लोटे का इस्तेमाल करें। साथ ही महिलाएं शाम के समय तुलसी के सामने दीया जलाएं। इससे घर में सुख शांति बनी रहेगी।

बैडरूम में न लगाएं

तुलसी का पौधा बहुत पवित्र होता है इसलिए इसे कभी भी बैडरूम में नहीं लगाना चाहिए।

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जानिए क्यों आयुर्वेद में तुलसी के पत्तों को चबाने की मनाही है।

यह हैं दुनिया के सबसे महंगे मशरूम

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मशरूम की सब्जी हर कोई खाना पसंद करता है। मशरूम खाने में स्वादिष्ट होने के साथ-साथ सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है।

एंटी-ऑक्सीडेंट्स, प्रोटीन, विटामिन डी, सेलेनियम और जिंक से भरपूर मशरूम का इस्तेमाल कई दवाइयां बनाने के लिए भी किया जाता है।

वास्तव में दुनिया भर में मशरूम की कई किस्में पाई जाती हैं, और उनमें से कुछ की कीमत सामान्य होती है लेकिन कुछ  मशरूम की कीमत 8-10 लाख रुपये प्रति किलोग्राम है।

जी हाँ कई मशरूम इतने दुर्लभ होते हैं कि उनकी कीमत लाखों में होती है। ये मशरूम न केवल विदेशों में बल्कि भारत में भी पाए जाते हैं, जो बहुत महंगे लेकिन शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं।

आइए जानें दुनिया के सबसे महंगे मशरूम के बारे में, जिन्हें खरीदने के लिए लाखों रुपए खर्च पड़ते हैं।

यूरोपियन वाइट ट्रफल

यूरोपियन वाइट ट्रफल मशरूम को दुनिया का सबसे महंगा मशरूम माना जाता है। हालाँकि यह एक प्रकार का कवक है, यह दुनिया के सबसे दुर्लभ मशरूमों में से एक है।

अगर हम कीमत की बात करें तो ये 7-9 लाख रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिकती हैं जबकि इस मशरूम की खेती नहीं की जाती, यह पुराने पेड़ों पर एक कवक के रूप में बढ़ता है। इसके अलावा, पूरी दुनिया में इसकी बहुत मांग है और कीमत बहुत अधिक है।

ब्लैक ट्रफ़ल

व्हाइट ट्रफल्स के बाद, ब्लैक ट्रफल्स सबसे महंगे मशरुम के रूप में जाना जाता है। सफेद ट्रफ़ल्स की तरह, काले ट्रफ़ल्स बहुत दुर्लभ और महंगे हैं।

ब्लैक ट्रफल को एक शानदार खाद्य पदार्थ के रूप में माना जाता है। इन मशरूम को खोजने के लिए ट्रेंड डॉग्स का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी कीमत 1 लाख रुपये से लेकर 2 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक है।

मात्सुतके

यह एक जापानी मशरूम है, जिसे मात्सुतके मशरूम कहा जाता है, और यह इसकी सुगंध के लिए प्रसिद्ध है। यह मशरूम हल्के भूरे रंग के होते हैं। ये मशरूम बहुत स्वादिष्ट होते हैं। यह लगभग 3 से 5 लाख रुपये प्रति किलो में मिलता है।

मोरालेस या गुच्छी

मोरालेस या गुच्छी मशरूम दुनिया के सबसे महंगे मशरूमों में से एक है। गुच्छी मशरूम कई औषधीय गुणों से भरपूर होती है। इसका औषधीय नाम मार्कुला एस्क्यूपलेटा है।

हालांकि यह देशभर में इसे स्पंज और मोरालेस मशरूम के नाम से भी जाना जाता है। यह हिमालय में पाए जाने वाले जंगली मशरूम की एक प्रजाति है। बाजार में इसकी कीमत 25 से 30 हजार रुपये प्रति किलो है।

चैंटरलेस

महंगे मशरूमों में नाम चैंटरलैस का नाम भी शामिल हैं। यह मशरूम यूरोप और यूक्रेन में समुद्र तट के पेड़ों के आसपास पाया जाता है। ये मशरूम विभिन्न रंगों में आते हैं और इनकी कीमत 30,000 रुपये से 40,000 रुपये प्रति किलोग्राम है।

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महाशिवरात्रि – जानें इस वर्ष राशियों पर कैसा होगा असर

महाशिवरात्रि हिन्दुओं और भगवान शिव का एक प्रमुख त्यौहार है। इस वर्ष महाशिवरात्रि पर्व 11 मार्च 2021 को गुरुवार के दिन है। फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। माना जाता है कि सृष्टि का प्रारंभ इसी दिन से हुआ।

पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन सृष्टि का आरम्भ अग्निलिंग (जो महादेव का विशालकाय स्वरूप है) के उदय से हुआ। इसी दिन भगवान शिव का विवाह देवी पार्वती के साथ हुआ था।

साल में होने वाली 12 शिवरात्रियों में से इस महाशिवरात्रि को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। भारत सहित पूरी दुनिया में महाशिवरात्रि का पावन पर्व बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है|

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस बार महाशिवरात्रि पर शिव योग के साथ घनिष्ठा नक्षत्र होगा और चंद्रमा मकर राशि में विराजमान रहेंगे।

तो आइये जानते हैं इस वर्ष किस राशि पर रहेगी महादेव की अपार कृपा :-

जानें राशियों पर कैसा होगा असर

मेष राशि:- आपके आर्थिक पक्ष में मजबूती आएगी। परिवार के वरिष्ठ सदस्य, बड़े भाइयों से मतभेद न पैदा होने दें। विद्यार्थियों अथवा प्रतियोगिता में बैठने वाले छात्रों के लिए ग्रह गोचर और अनुकूल रहेगा।

वृष राशि:- शैल पर्वत पर स्थित मल्लिकार्जुन वृष राशि के स्वामी हैं। इस राशि के व्यक्तियों को मल्लिकार्जुन का दर्शन करना चाहिए लेकिन जो लोग मल्लिकार्जुन का दर्शन करने नहीं जा सकते उनके लिए शिव की कृपा पाने का सबसे आसान तरीका है महाशिवरात्रि के दिन किसी भी शिवलिंग की पूजा गंगाजल से करें। शिवलिंग पर आक का फूल और पत्ता चढ़ाएं।

मिथुन राशि:- मिथुन राशि के स्वामी बुध माने जाते हैं। मिथुन जातक भगवान शिव को धतूरा, भांग अर्पित कर सकते हैं, साथ ही इस राशि के जातक गन्ने के रस से शिवजी का अभिषेक करें और ॐ भुतेश्वराय नमः मंत्र का जाप करें।

कर्क राशि:- अपनी सेहत को लेकर सावधान रहें। मौसम परिवर्तन से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं। जमीन से जुड़े मामलों में दिक्कतें आ सकती हैं। आर्थिक तंगी से बचें।

सिंह राशि:- सिंह राशि के स्वामी सूर्य हैं। भगवान शिव की आराधना में सिंह जातकों को कनेर के लाल रंग के पुष्प चढ़ाने चाहिए। इसके साथ ही शिवालय में भगवान श्री शिव चालीसा का पाठ भी करना चाहिए। यह पूजन आपके लिए अति लाभकारी सिद्ध हो सकती है।

कन्या राशि:- बुध का यह गोचर आपके लिए लाभकारी हो सकता है। इस अवधि में आपको स्वास्थ्य लाभ मिलेगा। पुरानी बीमारियां ठीक होने लगेंगे। आसपास के शत्रुओं से सतर्क रहें। सोच-समझकर काम करेंगे तो अच्छा रहेगा।

तुला राशि:- इस राशि के स्वामी शुक्र माने जाते हैं इसलिए दही से शिवजी का अभिषेक करें और शांति से शिवाष्टक का पाठ करें।

वृश्चिक राशि:- इस राशि के लोग दूध और घी से शिवजी का अभिषेक करें। वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल हैं। भोले भंडारी की पूजा आपको गुलाब के फूलों व बिल्वपत्र की जड़ से करनी चाहिए। इस दिन रूद्राष्टक का पाठ करने से आपकी राशि के अनुसार सौभाग्यशाली परिणाम मिलने लगते हैं और ॐ अन्गारेश्वराय नमः मंत्र का जाप करें।

धनु राशि:- आपके पराक्रम में वृद्धि होगी। मित्र और भाई-बहन आपकी मदद करेंगे। जो निर्णय लेंगे उसी में पूर्णरूप से सफल रहेंगे। धर्म-कर्म के मामलों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेंगे और दान पुण्य भी करेंगे।

मकर राशि:- आपकी आर्थिक तरक्की होगी। अपनी वाणी कुशलता एवं सौम्य स्वभाव के बल पर विषम परिस्थितियों पर भी विजय प्राप्त कर लेंगे। परिवार में सुख-शांति बनी रह सकती है।

कुंभ राशि:- कुंभ राशि के स्वामी भी शनि हैं। कुंभ जातकों को गन्ने के रस से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए, साथ ही धन लाभ पाने के लिये शिवाष्टक का पाठ आपको करना चाहिए। जल्द ही अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। इस राशि के लोग दूध, दही, शक्कर, घी, शहद सभी से शिवजी का अभिषेक करें और ॐ शिवाय नमः मंत्र का जाप करें।

मीन राशि:- मीन राशि के स्वामी बृहस्पति हैं। मीन जातकों को पंचामृत, दही, दूध एवं पीले रंग के फूल शिवलिंग पर अर्पित करने चाहिए। घर में सुख समृद्धि व धनधान्य में वृद्धि के लिए पंचाक्षरी मंत्र नम: शिवाय का चंदन की माला से 108 बार जाप करें।

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महिलाओं के बारे में कुछ रोचक तथ्य

महिलाएं भगवान् द्वारा बनाई सबसे अदभुत रचना है। किसी भी देश की महानता और संस्कृति में महिलाओं का विशेष स्थान होता है और वेदों में भी महिलाओं को विशेष दर्जा प्राप्त है।

आज हम आपको महिलाओं से जुड़ी कुछ रोचक बातें बताने जा रहे हैं जिनको जानकर आप हैरान हो जायेंगे। तो आइये जानते हैं महिलाओं के बारे में कुछ रोचक तथ्य :-

  • महिलाओं को पुरुषों की तुलना में ज्यादा रंग दिखाई देते हैं। न्यूकासल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का मानना है कि महिलाओं की तुलना में पुरुषों को कम रंग दिखाई देते हैं।
  • जब एक महिला एक पुरुष के प्रति आकर्षित होती है, तो वह सामान्य से अधिक ऊँचे पिच में बात करती है।
  • “मैं क्या पहनूँ” यही सोचने में महिलाएं अपने जीवन का एक साल बिता देती हैं।
  • क्या आप जानते हैं दुनिया की पहली कम्प्यूटर प्रोग्रामर एक महिला थी।
  • फिजिकल डिफरेंस की वजह से महिलाओं का सिर्फ दिमाग का आकार छोटा होता है पर उसमें निहित कोशिकाएं बराबर ही होती हैं। पुरुषों की तुलना में महिलाओं का मस्तिष्क नौ प्रतिशत छोटा होता है। इसका यह मतलब नहीं है कि उनकी बुद्धि छोटी होती है। यह मामला बराबर का होता है।
  • अमेरिका में 30% बिज़नेस की मालिक महिलाएं हैं।
  • महिलाएं झूठ बोलना कतई पसंद नहीं करती, खास तौर से रिलेशनशिप के मामलों में।
  • महिलाओं को डेट्स बहुत याद रहती है। उनकी दोस्ती किससे, किस दिन, कब, कहां और क्यों हुई, सारा लेखा जोखा उनके पास रहता है। अगर आप कभी उनसे कोई बात करें तो वह गड़े मुर्दे उखाड़ देगी, ऐसी बातें याद दिलाएगी जो आपको याद ही न हों।
  • 80% महिलाएं अपने दर्द को व्यक्त करने के लिए चुप्पी का उपयोग करती हैं।
  • महिला और पुरुष समान मात्रा में भावनाओं का अनुभव करते हैं। फर्क सिर्फ इतना होता है कि महिलाएं अपनी भावनाओं को पुरुषों की तुलना में ज़्यादा दिखाती है।
  • एक रिसर्च के मुताबिक जीभ से चाटने से लेकर खाना खाते वक्त महिलाएं अपने जीवनकाल में करीब दो किलोग्राम लिपस्टिक खा जाती हैं। एक लिपस्टिक 2.5 ग्राम की होती है तो करीब 800 लिपस्टिक का मटीरियल महिलाओं के पेट में पाया जा सकता है।
  • महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण पुरुषों से अलग होते हैं। डिप्रेशन, मोटापा आदि की बात की जाए तो वह भी महिलाओं में ज़्यादा होने की संभावना होती है। इसका कारण प्रेग्नेंसी, खुद पर ध्यान ना देना या हॉर्मोन में बदलाव कुछ भी हो सकता है। मोटापा, डिप्रेशन आदि के कारण महिलाओं में दिल की बीमारी का खतरा ज़्यादा बढ़ जाता है।
  • महिलाओं को पुरुषों की तुलना में अधिक बुरे और अधिक भावनात्मक सपने आते हैं।
  • सीबीएस डेट्रायट के एक शोध से पता चला है कि महिलाओं को मासिक धर्म में ऐंठन और हार्ट अटैक का दर्द बराबर हो सकता है। इस स्थिति को डिसमेनोरिया (Dysmenorrhea) के नाम से जाना जाता है।
  • महिलाएं जिन्हें पसंद करती हैं उनके खिलाफ एक शब्द भी सुनना पसंद नहीं करती।
  • महिलाओं को पुरुषों की तुलना में अधिक बोलने वाला माना जाता है। यह कोई नई बात नहीं लग रही पर क्या आप जानते हैं कि महिलाएं पुरुष की तुलना में एक ही दिन में करीब 13 हजार शब्द ज़्यादा बोलने की सक्षम होती हैं।
  • लड़कियां जिससे प्यार करती हैं उसके बारे में हर मिनट सोचती रहती हैं।
  • अगर कोई भी लड़की स्पेशियली आपके लिए कुछ पका कर लाये , तो समझ लीजिए कि आप उसके लिए बेहद खास हैं।
  • महिलाएं इतनी ज़्यादा संवेदनशील होती हैं कि अगर कोई लड़का बेहद सेंटीमेंटल बात कह दे, तो वह उसे जिंदगी भर नहीं भूलती।

अजब – गजब:- एक ही पेड़ पर 8 तरह के फल, जानें कुछ रोचक बातें

आपने अलग-अलग तरह के फल खाएं होंगे, लेकिन शायद आपने कभी एक ही पेड़ में लगे 8 तरह के फल नहीं खाएं होंगे। आज हम आपको जिस फल के बारे में बताने जा रहे हैं उसका नाम है “फ्रूट सैलड ट्री”l

‘फ्रूट सैलड ट्री” जैसा नाम से ही स्पष्ट है। जिस तरह सैलड में कई सब्जियां होती हैं, ठीक इसी तरह फ्रूट सैलड ट्री पर कई तरह के फल उगते हैं। इस पर 6 से 8 तरह के एक ही प्रजाति के फल उग सकते हैं।

जैसे खट्टा फल नींबू, संतरा, चकोतरा आदि। अभी इस तरह के पेड़ पर अलग-अलग प्रजाति के फल जैसे सेब और केला एक साथ नहीं उगाया जा सकता है। आइए इस फ्रूट के बारे में जानते हैं…

जेम्स और केरी वेस्ट का था आइडिआ

1990 के शुरुआती दशक में ऑस्ट्रेलिया के जेम्स और केरी वेस्ट ने यह आइडिया पेश किया था। पहले फ्रूट सैलड ट्री को ऑस्ट्रेलिया में ही सफलतापूर्वक उगाया गया था।

बाद में ऑस्ट्रेलिया से ये पेड़ दुनिया के अन्य हिस्सों में पहुंचे। फ्रूट सैलड ट्री को खुले मैदान में या फिर गमले में उगाया जा सकता है।

चार प्रकार के फ्रूट सैलेड ट्री

मुख्य रूप से फ्रूट सैलड ट्री चार प्रकार के होते हैं। जिनके नाम स्टोन फ्रूट (stone fruit), सिट्रस फ्रूट (citrus fruit). मल्टि ऐपल (multi apple) और मल्टि नाशी (multi nashi) है।

स्टोन फ्रूट ट्री में बेर, खूबानी, आडू और शफतालू को उगाया जा सकता है। गर्म जलवायु में इसकी पैदावार अच्छी होती है। सिट्रस फ्रूट सैलड ट्री पर ।

नींबू, संतरा, चकोतरा, टैंगलो, पोमेलो, मैंडरिन आदि के फल उगाए जा सकते हैं। मल्टि ऐपल ट्री में तरह के सेब जैसे हरे, पीले और लाल सेब की पैदावार हो सकती है। मल्टि नाशी ट्री में कई तरह की नाशपाती की पैदावार हो सकती है।

इस ट्री के फायदे

इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि छोटी सी जगह में आप कई फ्रूट उगा सकते हैं लेकिन इसमें एक खामी भी है। खामी यह है कि इसमें अलग प्रजाति के फल जैसे सेब और केला की एक साथ पैदावार नहीं हो सकती।

कैसे उगाया जाता है ये पेड़

इसे रात भर में एक बाल्टी पानी में भिगोकर रखा जाता है। उसके बाद आप इसे किसी खुली जगह या फिर गमले में भी लगा सकते हैं।

ठंड और गर्मी के मौसम में साल में दो बार उसमें खाद डाली जाती है। पेड़ रोपने के 6 से 18 महीने के अंदर पेड़ पर फल लगने शुरू हो जाते हैं।

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पेड़ अपनी पत्तियां क्यों गिराते हैं, जानिए क्या है कारण

पतझड़ी पेड़ अपनी पत्तियां गर्मी के सूखे दिनों में पानी बचाने के मकसद से गिराते हैं। हमारे यहां पतझड़ का मौसम करीब तीन महीने का रहता है। अलग-अलग पेड़ों के लिए पतझड़ का समय भी अलग-अलग होता है।

कुछ पेड़ों के लिए पतझड़ बीत चुका है तो कुछ के लिए अभी चल रहा है। इतना ही नहीं, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भी पतझड़ का मौसम अलग-अलग समय आता है। कहीं सितंबर से नवंबर तक चलता है तो कहीं फरवरी से शुरू होकर अप्रैल-मई तक।

सवाल यह उठता है कि आखिर पेड़ अपनी पत्तियों को गिराते ही क्यों है? क्या इसमें भी उनका कोई फायदा होता है? गर्मियों से पहले पतझड़ी पेड़ अपनी पत्तियों को आने वाले गर्मी के सूखे दिनों में पानी बचाने के मकसद से गिराते हैं, वहीं ठंडे देशों के पतझड़ी पेड़ ऐसा सर्दी के दिनों में बर्फबारी से होने वाले नुकसान से बचने के लिए करते हैं।

पत्तियों के गिरने की शुरुआत उनके पीले पड़ने से होती है। सभी जानते हैं कि पेड़ अपना भोजन पत्तियों से बनाते हैं। जब पत्तियां गिरने लगती हैं तो उस समय भोजन निर्माण की प्रक्रिया भी रुक जाती है।

इस प्रक्रिया में कई पत्तियां अपना नाइटोजन और कार्बन निकालकर प्रोटीन के रूप में जड़ों और छाल में जमा कर देती हैं। यही संग्रहित प्रोटीन बाद में नाइट्रोजन के स्रोत के रूप में नई पत्तियों और फूलों के विकास के काम में आता है।

यह भी देखा गया है कि कई पतझड़ी पेड़ तभी फूलते हैं, जब वे पत्ती विहीन अवस्था में होते हैं, जैसे अमलतास, सेमल और टेसू।

पत्तियां नहीं होने से फूल दूर से ही स्पष्ट नजर आने लगते हैं और इसलिए कीट-पतंगे और पक्षी उनकी ओर ज़्यादा आकर्षित होते हैं।

सवाल यह भी है कि क्या वास्तव में पतझड़ी पेड़ों में हर साल प्रति पेड़ लाखों-करोड़ों नए पत्ते उगाना, कुछ महीने उनका उपयोग करना और फिर उन्हें त्याग देना उचित है?

विकासवादियों के अनुसार दुनिया में पतझड़ी पेड़ 10 करोड़ वर्ष पूर्व ही आए हैं, जबकि चीड़ और देवदार जैसे सदाबहार पेड़ 17 करोड़ वर्षों से यहां राज कर रहे हैं।

अतः पतझड़ी पेड़ प्रकृति के नए आविष्कार हैं जो विपरीत परिस्थितियों के लिए ज्यादा अनुकूलित हैं। चीड़ और देवदार जैसे सदाबहार पेड़ अपनी पत्तियां नहीं गिराते और उन्हें इसका भारी नुकसान भी उठाना पड़ता है,

जैसे बर्फबारी के दौरान उनकी ऊपरी शाखाएं टूट जाती हैं और उन पर पत्तियां खाने वाले शाकाहारियों का भी दबाव बढ़ जाता है, क्योंकि पतझड़ी पेड़-पौधे तो अपनी पत्तियां पहले ही गिरा चुके होते हैं।

आर्थिक दृष्टि से भी अहम है पतझड़ का मौसम

उपग्रह इस मौसम में जो चित्र भेजते हैं। उनमें पुथ्वी कछ ज्यादा ही रंगीन नजर आती है। इन चित्रों में गहरे, हरे, पीले, लाल व भूरे रंग के बदलाव की स्पष्ट तरंगें देखने को मिलती हैं।

रंग परिवर्तन की यह लहर दक्षिण यूरोप में 60 से 70 किलोमीटर प्रति दिन की रफ्तार से चलती है और सारा क्लोरोफिल देखते-देखते दो-तीन सप्ताह में नष्ट हो जाता है।

पत्तियों से जब क्लोरोफिल टूटता है तो वे पत्तियां पीली, नारंगी या लाल दिखाई देने लगती हैं। उनका पीलापन कैरोटीन और लाल रंग एंथोसाइन जैसे पदार्थों के कारण होता है।

यूरोपीय देशों में प्रकृति के इस बदले हुए रूप को देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ती है। पूर्वी उत्तरी अमेरिका में तो पतझड़ पर पर्यटन से अरबों डॉलर की कमाई होती है।

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धरती को नुकसान पंहुचा रहे “मांसाहारी “

6 करोड़ लोग प्रति वर्ष भूख से मर जाते हैं। क्या इसका कारण हमारे द्वारा खाया जाने वाले मांस है? जरा निम्नलिखित तथ्यों पर गौर करें..

80 प्रतिशत मक्का, मांस के लिए पाले जाने वाले पशुओं द्वारा खा लिया जाता है जबकि केवल 20 प्रतिशत मनुष्यों के खाने के लिए छोड़ा जाता है।

20 शाकाहारियों का पेट उतनी जमीन से भरा जा सकता है जितनी कि 1 मांसाहारी की भूख मिटाने के लिए जरूरत होती है। लगभग 5.45 किलो गेहूं से बनाई जा सकती हैं 12 ब्रैड तथा केवल 1 मांसाहारी हैमबर्गर।

1 किलो पशु प्रोटीन प्राप्त करने के लिए मुर्गियों को 5 किलो पौध प्रोटीन खिलाया जाता है। मांस केंद्रित भोजन के समर्थन में फसल उगाने के लिए 26 करोड़ एकड़ अछूते जंगल साफ कर दिए गए।

विश्व के पैट्रोलियम भंडार केवल 13 वर्षों तक बचे रहेंगे अगर सभी मनुष्य मांसाहारी होंगे लेकिन यदि सभी मनुष्य शाकाहारी हों तो 260 वर्षों तक।

5000 गैलन (लगभग 18927 लीटर) पानी का इस्तेमाल मात्र 1 पाऊंड (लगभग 454 ग्राम) बीफ तैयार करने के लिए किया जाता है।

1पाऊंड सेबों के लिए केवल 49 गैलन (लगभग 18550 लीटर) पानी की जरूरत है। पशुधन में मात्र 1 जानवर इतना पानी पी जाता है, जो 1 युद्धपोत के पानी की आपूर्ति के लिए पर्याप्त होता है।

इंसानी शरीर शाकाहार के लिए ही बना है, ये हैं इसके प्रमाण

पैतृक वंशानुक्रम

हमारे सबसे करीबी पूर्वज यानी कि प्राइमेट्स (नर-वानर या मनुष्य सदृश्यजानवर) शाकाहारी हैं। हमारी जैविक व्यवस्था इस संबंधमें परिवर्तित नहीं हुई है। अभी भी मनुष्य उन प्राइमेट्स जैसा दिखाई देता है, जिनसे इसका विकास हुआ है।

पालन-पोषण

हमारे पूर्वजों ने अपने बच्चों को फल चुनना और तोड़ना सिखाया न कि शिकार करना। यह अभी तक भी हमारे पालन-पोषण का काफी हद तक तरीका बना हुआ है।

सहज प्रवृत्ति

हम कच्चे मांस की बजाय फलों की खुशबू की ओर अधिक आकर्षित होते हैं।

जबड़े

मनुष्य शाकाहारी जीवों की तरह अपने जबड़े दाएं-बाएं तथा ऊपर-नीचे चला सकता है।
मांसाहारी जीव अपने जबड़े केवल ऊपर-नीचे चला सकते हैं।

आहार नली

मनुष्य की पाचन नलीशाकाहारी जीवों की तरह लंबी होती है, हमारी रीढ़ से कई गुना लंबी। शाकाहारी जीवों की आहार नली इससे कहीं कम लंबाई की होती है।

गाय : रीढ़ से 16 गुना, सिंह : रीढ़ से 3 गुना, मनष्य : रीढ़ से 12 गना

दांत

मनुष्य में शाकाहारियों की तरह कैनाइन्स (कुत्ते जैसे तीखे दांत) तथा इनसिजर्स (कृतक) की बजाय मोलार्स (चबाने वाले दांत) अधिक होते हैं, ताकि वे रेशेदार शाकाहारी चीज़ों को पीस सकें। मांसाहारी जीवों में मांस को चीरने-फाड़ने के लिए कैनाइन्स तथा इनसिजर्स अधिक होते हैं।

लार

मनुष्य की लार क्षारीय होती है, जैसे कि शाकाहारी जीवों की । मांसाहारी जीवों की लार अम्लीय होती है।

रात्रि दृष्टि (नाइट विजन)

मांसाहारी जीवों की रात्रि दृष्टि बहुत तेज होती है, ताकि अंधेरे में शिकार करने में उन्हें मदद कर सके। मनुष्य को शिकार करने की जरूरत नहीं होती और न ही वह करता है।

शाकाहारी जीवों की तरह मनुष्य खुद को पसीना बहा कर ठंडा करते हैं, जबकि मांसाहारी जीव हांफ कर खुद को ठंडा करते हैं।

पानी पीने का तरीका

सभी शाकाहारी जीवों की तरह मनुष्य पानी को अपने होंठों से खींच कर या चूस कर पीते हैं। मांसाहारी जीव अपनी जीभ में लपेट कर पानी को अपने मुंह में डालते हैं। यह एक और प्रमाण है इंसानी शरीर शाकाहार के लिए ही बना है।

गंगाजल के ये चमत्कारी टोटके खोल देंगे किस्मत के ताले

हिंदू धर्म में पूजा-पाठ या किसी भी धार्मिक काम में गंगाजल को विशेष महत्व होता है। लोग किसी शुभ दिन व खास मौके पर गंगा नदी में स्नान करने जाते हैं।

मान्यता है कि इससे जीवन की परेशानियां दूर होकर मोक्ष की प्राप्ति होती है। पुराणों के अनुसार, गंगाजल को अमृत माना जाता है।

ऐसे में ज्योतिष व वास्तुशास्त्र के अनुसार, कुछ उपाय या टोटके करने से जीवन की समस्याएं दूर होकर मनोकामनाओं को पूरा किया जा सकता है। तो आइए जानते हैं उन टोटकों के बारे में…

  • जो लोग अच्छी नौकरी की तलाश में हैं वे गंगाजल से जुड़ा यह उपाय कर सकते हैं। इसके लिए पीतल के लोटे में गंगाजल भरकर शिव जी को चढ़ाएं। बाद में उसमें बिल्वपत्र और कमल पुष्प डालकर महादेव को अर्पित करें। इससे कारोबार व नौकरी से जुड़ी परेशानी दूर होकर घर में सुख-समृद्धि व शांति का वास होगा।
  • भगवान शिव जी को गंगाजल अतिप्रिय  है। ऐसे में ज्योतिष व वास्तु शास्त्र के अनुसार, नियमित रूप से भोलेनाथ को गंगाजल चढ़ाना चाहिए। इससे जीवन की परेशानियां दूर होकर सुख मिलता है साथ ही मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • वास्तु शास्त्र के अनुसार घर पर गंगाजल रखने से कर्ज से मुक्ति मिलने के साथ आय के नए स्त्रोत बनते हैं। इसके लिए गंगाजल को पीतल की बोतल में डाल उसे अपने कमरे के उत्तर-पूर्व कोण में रखें। माना जाता है कि इससे कर्ज से परेशानी दूर होकर जीवन में खुशहाली आती है।
  • पुराणों के अनुसार गंगा जल को घर पर हमेशा रखना चाहिए। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने के साथ सुख-समृद्धि व शांति बनी रहती है। घर में खुशियों का आगमन होने के साथ अन्न व धन की बरकत बनी रहती है।
  • जिन घरों में लोग अक्सर बीमार रहते हैं उन्हें रोजाना गंगाजल का सेवन करना चाहिए। मान्यता है कि इससे इससे सेहत में सुधार होने के साथ बीमारियां दूर रहती है।

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ऐतिहासिक धरोहर है ‘अग्रसेन की बावड़ी’

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भारत की राजधानी दिल्ली का बहुत ही अद्भुत और गौरवशाली इतिहास रहा है। दिल्ली के संदर्भ में कहा जाता है कि यह नगर 7 बार उजड़ा है और 7 बार बसा है फिर भी आज दिल्ली अपने समृद्ध इतिहास से सम्पन्न है।

शहर की बड़ी-बड़ी इमारतों के बीच में आप गर्व से इठलाती प्राचीन व मध्यकालीन इमारतों को आराम से देख सकते हैं जिन्हें भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग ने आने वाली पीढ़ियों के लिए संजो कर रखा है।

कई इमारतें ऐसी भी हैं जिनके आज केवल अवशेष देखने को मिलते हैं परंतु इन्हें भी संरक्षित रखा गया है। भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग ने दिल्ली शहर में 1200 धरोहर स्थल घोषित किए हैं जोकि विश्व के किसी भी अन्य शहर की तुलना में कहीं ज्यादा हैं।

इन्हीं धरोहरों में से एक है ‘अग्रसेन की बावड़ी’। दिल्ली के दिल में स्थित यह बावली मशहूर पर्यटन स्थल तो है ही परंतु यह प्राचीन भारतीय वर्षा जल संरक्षण परम्परा का भी अप्रतिम उदाहरण है।

माना जाता है कि इस बावड़ी का निर्माण महाभारत काल में करवाया गया था परंतु इसके पुनः जीर्णोद्धार का कार्य महाराजा अग्रसेन द्वारा 14वीं शताब्दी में करवाया गया।

यह बावड़ी इस बात को सिद्ध करती है कि प्राचीन भारत तकनीकी रूप से सशक्त था और उस समय के लोग यह भी समझते थे कि हम बारिश के पानी को ऐसे ही बहने नहीं दे सकते, इसे संरक्षित करने के लिए इन बावड़ियों का निर्माण किया गया।

ये बावड़ियां एक जमाने में पेयजल का मुख्य स्रोत हुआ करती थीं। घर के नल में आसानी से जल उपलब्ध होने से यह तात्पर्य कदापि नहीं है कि हम अपनी इन अनमोल धरोहरों को नगण्य रूप में देखें।

ये बावड़ियां जल संकट के इस युग में भी हमें इतिहास से परिचित कराते हुए जल संरक्षण के प्रति जागरूक होने की प्रेरणा देती हैं।

प्रत्येक नागरिक को अपने इस इतिहास पर गौरवान्वित होना चाहिए और इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाते हुए वर्षा जल संरक्षण की पद्धति को अपनाना चाहिए।

युवाओं के आकर्षण का केंद्र

यह बावड़ी अपने ऊपरी तल पर 60 मीटर लम्बी व भूतल पर 15 मीटर चौड़ी है। इस बावली में कुल 105 सीढ़ियां हैं जिनकी सहायता से नीचे के जल तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।

इस बावड़ी के निर्माण में लाल बलुए पत्थर का प्रयोग किया गया है तथा इसकी स्थापत्य शैली उत्तरकालीन तुगलक व लोदी काल से मेल खाती है। कनॉट प्लेस के हैली रोड पर स्थित यह बावली खास तौर पर युवाओं के लिए आकर्षण का केंद्र है।

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जानिए हल्दी के सेवन से होने वाले जबरदस्त फायदों के बारे में

हल्दी एक ओर जहां खाने का स्वाद और रंग बढ़ा देती है, वहीं दूसरी ओर इसका उपयोग सौंदर्य वृद्धि और त्वचा की समस्याओं को दूर करने में भी किया जाता है, इसके अलावा हल्दी शरीर को स्वस्थ रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आज इस पोस्ट में हम जानेंगे हल्दी से होने वाले जबरदस्त फायदों के बारे में :-

  • हल्दी में एंटीसेप्टिक और एंटीबायोटिक गुण होते हैं, इसलिए सर्दी-ज़ुकाम और कफ की समस्या होने पर हल्दी वाले दूध का सेवन करना लाभकारी होता है। यह शरीर को वायरस से लड़ने में भी मदद करता है। सर्दी के मौसम में इसका सेवन करना अधिक लाभकारी होता है।
  • खून के रिसाव को रोकने या चोट को ठीक करने के लिए हल्दी का आमतौर पर उपयोग किया जाता है, इसे चोट पर लगाने से यह दर्द में राहत मिलती है और घाव जल्दी भरता है।
  • हल्दी में मौजूद करक्यूमिन कैंसर को बढ़ने से रोकता है।
  • हल्दी का लेप चेहरे की रंगत निखारता है। दो टेबलस्पून बेसन में आधा चम्मच हल्दी और तीन चम्मच ताज़ा दही मिलाकर अपने चेहरे पर लगाएं और सूखने पर धो लें।
  • पेट की सेहत के लिए हल्दी को अच्छा माना जाता है। यह पित्ताशय में पित्त के निर्माण में मदद करती है। पित्त पाचन में सुधार करता है और पाचन सुचारू रहता है। अगर आप जंक फूड बहुत खाते हैं, तो आपको हर दिन हल्दी वाले पानी का सेवन करना चाहिए।

  • हल्दी को नैचुरल लिवर डिटॉक्सीफायर माना जाता है। इसके इस्तेमाल से रक्त में मौजूद विषैले तत्व बाहर निकलते हैं और ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होता है। रक्त का धमनियों में प्रवाह बढ़ जाता है और हार्ट संबंधी परेशानियां नहीं होती।
  • हल्दी का सेवन शरीर को मजबूत बनाता है। प्रतिदिन सुबह के समय एक गिलास दूध में आधा चम्मच हल्दी मिलाकर पीने से शरीर सुडौल हो जाता है। गुनगुने दूध के साथ हल्दी के सेवन से शरीर में जमा अतिरिक्त फैट धीरे-धीरे कम होने लगता है। इसमें उपस्थित कैल्शियम और अन्य तत्व वजन कम करने में भी मददगार होते हैं।
  • गठिया रोग में हल्दी के लड्डू विशेष लाभ देते हैं इसके लिए आग में भुनी हुई हल्दी की गांठों को घिसकर उसमें गुड़ मिलाकर लड्डू बनाएं। आप चाहें तो इसमें काजू भी मिला सकते हैं। इन लड्डुओं का सेवन प्रतिदिन सुबह नींबू या तुलसी की चाय के साथ करना चाहिए।
  • हाथ-पैरों में होने वाले दर्द से राहत पाने के लिए भी हल्दी वाला दूध फायदेमंद होता है।
  • इसके सेवन से हड्डियां मजबूत होती हैं। दूध में हल्दी मिलाकर पीने से हड्डियों से जुड़ी समस्याओं से छुटकारा मिलता है।
  • ब्लड शुगर बढ़ने पर हल्दी वाले दूध का सेवन करना लाभकारी होता है इससे शुगर लेवल कम होता है।
  • बॉडी को डिटॉक्स करने के लिए गर्म पानी में नींबू, हल्दी पाउडर और शहद मिलाकर पिएं। यह शरीर के टोक्सिन्स को बाहर निकालने में मददगार होता है।
  • कई महिलाओं को मासिक धर्म के समय अधिक दर्द व पेट में ऐंठन का सामना करना पड़ता है। इससे बचने के लिए हल्दी का इस्तेमाल किया जा सकता है। ईरान में हुए एक शोध के अनुसार, करक्यूमिन में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होता है, जो मासिक धर्म से पहले पीएमएस के लक्षणों को कम कर सकता है। मासिक धर्म के दौरान हल्दी दूध का सेवन फायदेमंद हो सकता है।
  • आंखों की रोशनी को बढ़ाने के लिए हल्दी के कोमल पत्तों का रस निकालकर छान लें और इसकी दो-दो बूंद हर रोज़ डालें। इससे नेत्र ज्योति बढ़ती है।
  • सोने से आधे घंटे पहले हल्दी वाला दूध पीने से नींद अच्छी आती है।
  • इससे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाती है। इसमें मौजूद लाइपोपॉलीसकराइड नाम का पदार्थ प्रतिरक्षा प्रणाली को बढाता है।
  • इसमें रक्त को साफ़ करने वाले तत्व होते हैं। हल्दी त्वचा से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करती है। यह त्वचा को साफ, स्वच्छ और सूंदर बनती है।

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