एक ऐसा मंदिर जो दिन में दो बार गायब हो जाता है जानिए क्या है रहस्य?

भारत के मंदिर दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं। मंदिरों से जुड़ी पौराणिक कथाएं और मूर्तियों की बनावट भक्तों को आश्चर्यचकित कर देती है। कुछ मंदिर प्राचीन काल के किसी रहस्य के कारण जाने जाते हैं तो वहीं कुछ अपने चमत्कारों के लिए जाने जाते हैं ।

गुजरात में ऐसा ही एक खास मंदिर अपने एक अनोखे चमत्कार के लिए काफी मशहूर है। आज हम आपको इस चमत्कारी मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जो दिन में दो बार लोगों की आँखों के सामने से गायब हो जाता है।

तो चलिए जानते हैं :-

वड़ोदरा, गुजरात से 75 किमी की दूरी पर “संभेश्वर महादेव मंदिर” है। यह खास मंदिर गुजरात के कावी- कंबोई गांव में स्थित है । यह गांव अरब सागर के मध्य कैम्बे तट पर है।

इस मंदिर की खासियत यह है कि इस मंदिर में स्थित शिवलिंग का दर्शन दिन में केवल एक बार किया जा सकता है। यह मंदिर अरब सागर में कम्बे तट पर स्थित है।

यह मंदिर समुद्र तट के किनारे स्थित है, इसी वजह से जब भी समुद्र में ज्वार आता है तो यह मंदिर पूरी तरह से पानी में डूब जाता है, जब ज्वार उतरता है तब यह मंदिर दोबारा से नजर आने लगता है। 

जब मंदिर पूरी तरह से उच्च ज्वार में बह जाता है, तो किसी को भी वहां जाने की अनुमति नहीं दी जाती है। यहां आने वाले सभी भक्तों को एक चिट्टी दी जाती है जिस पर समुद्र में आने का समय लिखा होता है ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना ना करना पड़े।

जब यहां पर ज्वार आता है तब उस समय के दौरान चारों तरफ पानी भर जाता है। ज्वार के समय यहां पर मौजूद शिवलिंग के दर्शन नहीं किए जा सकते हैं, जब ज्वार उतरता है तभी शिवलिंग के दर्शन होते हैं।

इस मंदिर का उल्लेख श्री महादेव पुराण में भी है। जो इस मंदिर की प्राचीनता का प्रमाण है। इसके अलावा, इस मंदिर के निर्माण का उल्लेख स्कंद पुराण में भी है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, ताड़कासुर नाम के एक राक्षस ने बहुत कठोर तपस्या करके भगवान शिव को प्रसन्न किया। और अमरता का वरदान माँगा परन्तु भगवान शिव ने इस वरदान को देने से इनकार कर दिया।

फिर ताड़कासुर ने एक और वरदान मांगा जिसके अनुसार उस असुर को शिव पुत्र के अलावा कोई नहीं मार सकता था। हालांकि, उस शिव पुत्र की आयु भी सिर्फ छह दिन ही होनी चाहिए।

यह वरदान हासिल करने के बाद ताड़कासुर ने तीनों लोकों में हाहाकार मचा दिया था। इससे परेशान होकर सभी देवता और ऋषि- मुनियों ने शिव जी से उसका वध करने की प्रार्थना की थी।

उनकी प्रार्थना स्वीकृत होने के बाद श्वेत पर्वत कुंड से 6 दिन के कार्तिकेय उत्पन्न हुए थे। कार्तिकेय ने ताड़कासुर का वध तो कर दिया, परन्तु जब कार्तिकेय को पता चला कि ताड़कासुर भगवान शिव का भक्त था तो कार्तिकेय ने उसे मारने के लिए खुद को दोषी महसूस किया।

फिर उन्होंने भगवान विष्णु से प्रायश्चित करने का उपाय पूछा, इस पर भगवान विष्णु ने उन्हें एक शिवलिंग स्थापित करने का उपाय सुझाया था, और साथ ही रोज़ाना महादेव से माफी मांगनी को कहा।

इस तरह से उस जगह पर शिवलिंग की स्थापना हुई थी, और तब से इस स्थान को स्तंभेश्वर तीर्थ के नाम से जाना जाता है।स्तंभेश्वर महादेव में हर महाशिवरात्रि और अमावस्या पर खास मेला लगता है।

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जानें ‘कैक्टस’ पानी के बिना कैसे जीवित रहता है?

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कैक्टस शुष्क क्षेत्रों तथा रेगिस्तानों में पाए जाते हैं ये पौधे रसदार होते हैं, जो अपने ऊतकों में पानी जमा और संरक्षित कर सकते हैं।

कैक्टस का पौधा सभी पौधों से अनोखा होता है इसे आसानी से पहचाना जा सकता है, लगभग प्रत्येक प्रजाति के कैक्टस के पौधे पर कांटे पाए जाते हैं।

यह एक रेगिस्तानी पौधा है। इसके पौधे में कांटे ही नहीं बल्कि बहुत सुंदर रंग-बिरंगे फूल भी आते हैं। इस पौधे के तने मोटे होते हैं तथा यह 40 फीट लंबे तक हो सकते हैं।

इस पौधे की कई प्रजातियां पाई जाती है, इनमें सबसे छोटी प्रजाति 3 इंच की (fishhook cactus) फिशहूक कैक्टस है तो वहीं 40 फीट लंबा (saguaro cactus) भी होता है।

बढ़ कर, इनके तनों का डिजाइन इस तरह का होता है कि उसकी बहुत कम सतह सीधी सूर्य की तरफ होती है। इनके मोटे तथा रसदार तनों में पानी संग्रह और गर्मियों के अत्यंत गर्म दिनों तथा उच्च तापमान में भी सुरक्षित रहता है।

उन पर चढ़ी मोम जैसी परत पानी का कम से कम नुक्सान होने देने में उनकी और मदद करती है। आमतौर पर कैक्टी या कैक्टस पानी के बिना जीवित नहीं रहते, उन्हें पानी की जरूरत होती है लेकिन ये बहुत ही कम पानी के साथ रेगिस्तानों तथा शुष्क स्थानों पर पनप सकते हैं।

कुछ अन्य पौधे भी हैं, जो रेगिस्तानों में रहते और फलते फूलते हैं। कैक्टस पौधों के तने गूदेदार होते हैं, आमतौर पर कांटों वाले, जो जानवरों से उनकी रक्षा करते हैं। चूंकि उनके पत्ते नहीं होते, इससे उन्हें पानी बाहर नहीं छोड़ने में मदद मिलती है।


शुष्क क्षेत्रों तथा रेगिस्तानों में पाए जाने वाले कैक्टस कहलाने वाले ये पौधे रसदार होते हैं, जो अपने ऊतकों में पानी जमा और संरक्षित कर सकते हैं। इससे भी उन पर चटक रंग के आकर्षक फूल खिलते हैं।

इन्हें जेरोफाइट्स अर्थात बहुत कम पानी की जरूरत वाले पौधों की श्रेणी में रखा गया है। कुछ कैक्टस का आकार विशालकाय होता है, जबकि कुछ बौने या छोटे आकार के होते हैं।

उदाहरण के लिए, विशाल सागुआरो कैक्टस 17 मीटर से अधिक की ऊंचाई प्राप्त कर लेते हैं। ये पौधे बगीचों तथा घरों में उगाए जाते हैं क्योंकि ये सजावटी होते हैं और इन्हें बहुत कम देखभाल की जरूरत होती है।

कैक्टस रेगिस्तानी गर्मियों तथा सर्दियों में निष्क्रिय रहते हैं और अनुकूल मौसम में बढ़ते, फूल देते व अंकुरण के लिए बीजाणु बिखेरते या फैलाते हैं।

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विश्व स्वास्थ्य दिवस के बारे में कुछ रोचक तथ्य

आज विश्व के करीब 200 से ज्यादा देश कोरोना महामारी से जूझ रहे हैं और ऐसे समय में 7 अप्रैल यानि आज के दिन मनाया जाने वाला विश्व स्वास्थ्य दिवस का महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है।

आज दुनियाभर के स्वास्थ्यकर्मी कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की सेवा में और उनकी जान बचाने में लगे हैं। हर साल 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस के रूप में मनाया जाता है।

आइये जानते है विश्व स्वास्थ्य दिवस  के बारे में कुछ रोचक तथ्य

  • विश्व स्वास्थ्य दिवस हर वर्ष 7 अप्रैल को पुरे विश्व में मनाया जाता है।
  • विश्व स्वास्थ्य दिवस की शुरुआत 1950 में हुई थी।
  • 7 अप्रैल, 1948 को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू.एच.ओ.) की स्थापना की गई थी।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (W.H.O.) की स्थापना का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर के लोगों के स्वास्थ्य के स्तर को ऊंचा उठाना है। जिससे दुनिया भर में पोलियो, नेत्रहीनता, कुष्ठ, टी.बी., मलेरिया और एड्स जैसी भयानक बीमारियों की रोकथाम हो सके और मरीजों को समुचित इलाज की सुविधा मिल सके।
  • इस दिन को मानाने का उदेश्य समाज को इन बीमारियों के प्रति जागरूक करना है।
  • सम्पूर्ण विश्व में सफल जीवन के लिए स्वास्थ्य के महत्त्व को समझते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू.एच.ओ.) की स्थापना के दिन 7 अप्रैल को सम्पूर्ण विश्व में विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है।
  • कहते हैं कि स्वास्थ्य ही जीवन है। किन्तु आज की व्यस्त एवं तनावग्रस्त जिंदगी में मनुष्य अपने स्वास्थ्य पर पूर्ण ध्यान नहीं दे पा रहा है।
  • काम, व्यस्तता और तनाव के कारण मनुष्य के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसी जागरूकता के उद्देश्य को लेकर विश्व स्वास्थ्य दिवस हर वर्ष मनाया जाता है।
  • विश्व स्वास्थ्य दिवस के दिन स्वास्थ्य से सम्बंधित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। विभिन्न कार्यक्रमों एवं गोष्ठियों के द्वारा जन-साधारण को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जाता है।
  • मच्छर के प्रकोप को बढ़ने से रोकने के लिए इस दिनअलग-अलग जगहों  में एंटी लार्वा व कीटनाशक का छिड़काव कराया जाता है। संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए आम आदमी को जागरूक किया जाता है।
  • रोगों से बचाव के लिए इस दिन जिला व ब्लॉक स्तर पर कार्यशाला आयोजित की जाती हैं।
  • विश्व स्वास्थ्य दिवस के दिन शिक्षा विभाग के सहयोग से स्कूलों में रोगों के बारे में जागरूकता कैम्प, वाद-विवाद प्रतियोगता, प्रश्नोत्तरी आदि के कार्यक्रम भी आयोजित किये जाते हैं।
  • विश्व स्वास्थ्य दिवस का उदेश्य दुनिया भर में लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और जनहित को ध्यान में रखते हुए सरकार को स्वास्थ्य नीतियों के निर्माण के लिए प्रेरित करना है।
  • विश्व स्वास्थ्य दिवस प्रत्येक वर्ष एक नए विषय के साथ मनाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य दिवस 2020 का विषय है, दुनियाभर के स्वास्थ्य सेवाओं में ”नर्सों का योगदान”।

चैन की नींद के लिए अपनाएं ये आसान व्यायाम !!

नींद न आना आजकल आम समस्या हो गई है। इस मुश्किल को दूर करने के लिए हम बहुत से तरीके अपनाते हैं और आज इस लेख में हम आपको कुछ विशेष व्यायामों के बारे में बताने जा रहें हैं जिनकी मदद से आप चैन की नींद ले सकते हैं। तो चलिए जानतें हैं :-

बिग टो पोज़

इस एक्सरसाइज को करने के लिए दोनों पैरों पर खड़े हो जाएं। अब धीरे-धीरे आगे की ओर झुकते हुए पंजों को छूने की कोशिश करें। अब थोड़ा और झुकें और पैरों की उंगलियों को पकड़ने का प्रयास करें ताकि पंजे न उठे।

30 सेकंड से 1 मिनट तक इसी स्थिति में रहें। शरुआत में उंगलियों को पकड़ना संभव नहीं होगा। इसके लिए रोज़ प्रयास करें। कुछ दिनों में आप इस एक्सरसाइज को आसानी से कर सकेंगे।

फायर लॉग पोज़

दाएं पैर को मोड़कर पालथी मारने वाली अवस्था में रखें। अब बाएं पैर के पंजे को दाएं घुटने पर रखें और धीरे-धीरे बाकी पैर को पालथी वाली स्थिति में ले जाएं।

ऐसा करते समय कमर के नीचे के हिस्से में हल्का खिंचाव महसूस होगा। अब सांस बाहर छोड़ते हुए हाथों को आगे की ओर रखें। इस स्थिति में एक मिनट के लिए रुकें, फिर दूसरी तरफ़ से इसी तरह दोहराएं।।

लेग्स अप द वाल पोज़

दीवार के पास पैरों को सीधे दीवार पर टिकाकर रखें। इस समय मन को शांत रखें और शरीर को सीधा रखते हुए, हाथों को भी पूरा खोल लें।

इस पोज में पांच मिनट लेटे रहने के बाद पैरों को आहिस्ता से नीचे ले आएं और सामान्य तौर पर पीठ के बल दो मिनट तक सांसें लेते हुए रिलैक्स करें। इस व्यायाम से पेट और पैरों को पूरा आराम मिलेगा।

ऐसे व्यायामों को दिनचर्या में शामिल करने से शरीर रिलैक्स रहता है जिससे नींद अच्छी आती है।

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किसी महल से कम नहीं हैं यह लाइब्रेरीज!

लाइब्रेरीज वह स्थान है जहाँ विविध प्रकार के ज्ञान, सूचनाओं, स्रोतों, सेवाओं आदि का संग्रह रहता है। किताबों के महत्व को समझते हुए दुनिया में कई विशाल लाइब्रेरीज बनाई गई हैं।

दुनिया में बहुत से खूबसूरत और विचित्र पुस्तकालय हैं लेकिन आज हम आपको कुछ ऐसे पुस्तकालयों के बारे में बताने जा रहे हैं जो देखने में किसी महल से कम नहीं लगते। तो आइए जानते हैं:-

लाइब्रेरी ऑफ कांग्रेस

दुनिया की सबसे बड़ी लाइब्रेरी अमेरिका के वॉशिंगटन में है। इसे ‘लाइब्रेरी ऑफ कांग्रेस’ के नाम से भी जाना जाता है। यह करीब 219 साल पुरानी है। इसकी स्थापना 24 अप्रैल, 1800 में की गई थी।

यहां लगभग 470 भाषाओं की किताबें मौजूद हैं, जो करीब 1349 किलोमीटर लंबी अलमारियों में रखी हैं। इस लाइब्रेरी में 3000 से भी ज़्यादा लोग काम करते हैं।

ब्रिटिश लाइब्रेरी

लंदन में स्थित “ब्रिटिश लाइब्रेरी’ दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी लाइब्रेरी मानी जाती है। यहां लगभग 15 करोड़ किताबें और अन्य दस्तावेज मौजूद हैं।

इस लाइब्रेरी की स्थापना ब्रिटिश लाइब्रेरी अधिनियम 1972 के तहत एक जुलाई 1973 को एक स्वतंत्र संस्था के रूप में की गई थी।

न्यूयॉर्क पब्लिक लाइब्रेरी

दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी लाइब्रेरी अमेरिका की ‘न्यूयॉर्क पब्लिक लाइब्रेरी’ है। साथ ही यह अमेरिका की दूसरी सबसे बड़ी लाइब्रेरी है।

यहां पांच करोड़ 30 लाख के आसपास किताबें और अन्य दस्तावेज मौजूद हैं। साल 1895 में इसकी स्थापना हुई थी।

द नेशनल लाइब्रेरी ऑफ चायना

द नेशनल लाइब्रेरी ऑफ चायना नाम की ये लाइब्रेरी चीन की नेशनल लाइब्रेरी है। यहां 35 लाख से अधिक किताबें हैं। ये एशिया के सबसे बड़े पुस्तकालयों में से एक है।

लाइब्रेरी एंड अर्काइव

दुनिया की सबसे बड़ी लाइब्रेरी में चौथे स्थान पर कनाडा का ‘लाइब्रेरी एंड अर्काइव’ है, यहां चार करोड़ 50 लाख से भी ज़्यादा किताबें और अन्य दस्तावेज रखे हुए हैं।

सिर्फ किताबों की संख्या यहां करीब दो करोड़ है। यह लाइब्रेरी ओटावा में स्थित है, जिसकी स्थापना साल 2004 में की गई थी।

रशियन स्टेट लाइब्रेरी

रूस की राजधानी मॉस्को में स्थित ‘रशियन स्टेट लाइब्रेरी’ दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी लाइब्रेरी है। यहां चार करोड़ 30 लाख के आसपास किताबें और अन्य प्राचीन और नए दस्तावेज हैं।

इसमें सिर्फ किताबों की संख्या एक करोड़ 70 लाख के करीब है। ये किताबें और दस्तावेज 275 किलोमीटर लंबी अलमारियों में रखी हुई हैं।

Stadtbibliothek सिटी लाइब्रेरी

यह लाइब्रेरी (Stuttgart) स्टुटगार्ट शहर, जर्मनी में है। इस लाइब्रेरी में प्रशासन ने हर संस्कृति के हिसाब से अलग-अलग विभाग बनाए हैं, बच्चों के लिए पुस्तकालय, संगीत पुस्तकालय, कला पुस्तकालय, सूचना साक्षरता, वृद्ध लोगों के उपयोग करने के लिए भी अलग विभाग हैं।

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जानिए चमत्कारी कैलाश मानसरोवर झील से जुड़े कुछ रोचक तथ्य!!

कैलाश मानसरोवर को हिंदू धर्म के सबसे पवित्र स्थलों में एक माना जाता है। यहां साक्षात भगवान शिव निवास करते हैं, उनके दर्शन के लिए हजारों-लाखों शिवभक्त हर वर्ष यहां आते हैं।

माना जाता है कि यहीं पर आदि शंकराचार्य ने भी अपने शरीर का त्याग किया था। यही प्रथम तीर्थकर ऋषभदेव ने निर्वाण प्राप्त किया था।

जगह से संबंधित कई रोमांचक कहानियां हैं, कुछ संतों का मानना ​​था कि इस पर्वत पर 500 से अधिक आत्माएं निवास करती हैं और केवल जब एक आत्मा मोक्ष की इच्छा रखती है, तो दूसरी आत्मा को इसके पवित्र स्थान पर निवास करने की अनुमति है।

कुछ अन्य लोगों द्वारा एक और दिलचस्प कहानी है कि आत्मा हर साल केवल तीन अवसरों पर इस पर्वत पर इकट्ठा होती है – बुद्ध पूर्णिमा, गुरु पूर्णिमा और कार्तिक पूर्णिमा।

तो चलिए जानते हैं चमत्कारी इस झील से जुड़े कुछ रोचक तथ्य:-

चार महान नदियों का उद्गम स्थल

कैलाश पर्वत चार महान नदियों सिंध, ब्रह्मपुत्र, सतलुज और कर्णाली या घाघरा का उद्गम स्थल है। इसके अलावा इसकी चोटियों के बीच दो झील स्थित हैं।

पहला, मानसरोवर झील जो दुनिया में सबसे ऊंचाई पर स्थित शुद्ध पानी की सबसे बड़ी झीलों में से एक है इसका आकर सूर्य के सामान है।

दूसरा झील, राक्षस झील है जो दुनिया में सबसे ऊंचाई पर स्थित खारे पानी की सबसे बड़ी झीलों में से एक है और इसका आकार चन्द्रमा के सामान है।

मानसरोवर में होती है पापों की मुक्ति

प्राचीन शास्त्रों में कहा गया है कि हर आदमी को जिंदगी में कम से कम एक बार कैलाश पर्वत जरूर जाना चाहिए और मानसरोवर झील में स्नान करना चाहिए।

स्नान करने का सबसे उपयुक्त समय प्रातः 3 बजे से 5 बजे का है, जिसे ब्रह्ममुहूर्त के नाम से जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस समय देवता भी स्नान करने के लिए इस झील पर आते हैं।

हिन्दू पौराणिक कथाओं में इस बात का भी उल्लेख किया गया है, कि मानसरोवर झील में पवित्र डुबकी लगाने से कई जन्मों के सभी पाप मिट जाते हैं और व्यक्ति मृत्यु के बाद “रुद्रलोक” पहुंच जाता है।

चारों ओर एक अलौकिक शक्ति

कैलाश पर्वत और उसके आस पास के वातावरण पर अध्यन कर रहे वैज्ञानिक ज़ार निकोलाइ रोमनोव और उनकी टीम ने तिब्बत के मंदिरों में धर्मं गुरूओं से मुलाकात की थी।

उन धर्म गुरूओं ने बताया कि कैलाश पर्वत के चारों ओर एक अलौकिक शक्ति का प्रवाह होता है जिसमें तपस्वी आज भी आध्यात्मिक गुरूओं के साथ टेलिपेथी संपर्क करते है।

सूर्योदय के समय दिखता है स्वास्तिक

कैलाश पर्वत के ठंडे पहाड़ों पर जब सूर्योदय के समय सूर्य की किरणें पड़ती है तो विशाल स्वास्तिक की आकृति बनती है, जिसे देखकर ऐसा लगता है कि भगवान सूर्य भगवान शिव को श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

ॐ की ध्वनि सुनाई देती है

कैलाश पर्वत को ॐ पर्वत के रूप में भी जाना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि कैलाश पर्वत पर पहुंचने पर ॐ की आवाज़ सुनाई पड़ती है।

इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि भगवान शिव के निवास स्थान के रूप में प्रसिद्ध इस स्थान एक अद्भुत शांति की अनुभूति होती है।

इस पवित्र स्थान पर है एक चमत्कारी वृक्ष

बौद्ध धर्म में कहा गया है कि कैलाश मानसरोवर के बीचों बीच एक चमत्कारी वृक्ष है, जिसके फूलों से सभी प्रकार के शारीरिक और मानसिक रोगों को दूर किया जा सकता है।

रावण ने की थी यहाँ तपस्या

रामायण की कथा के अनुसार यहां राक्षसराज रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कड़ी तपस्या की थी। तपस्या के असफल होने पर उसने क्रोधित होकर कैलाश पर्वत को अपने हाथों पर उठा लिया था,

जिस पर स्वयं महादेव ने उसका मान-मर्दन किया था। भस्मासुर ने भी यही तप कर किसी को भी भस्म कर देने वाला अमोघ वरदान प्राप्त किया था।

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दुनिया के 7 सबसे खूबसूरत पुस्तकालय!

अच्छी किताबें  इंसान के लिए सबसे अच्छी मित्र मानी गयी है। इस नज़रिए से देखा जाए तो लाइब्रेरी या पुस्तकालय मानव मात्र के लिए उपलब्ध सबसे अद्वितीय वरदानों में से हैं।

दुनिया भर में हज़ारों खूबसूरत पुस्तकालय हैं, जो एक छोटे कमरे से लेकर विशाल परिसर के विभिन्न आकारों और रूपों में हैं,

लेकिन इन सबसे हट कर कुछ ऐसे भी खूबसूरत पुस्तकालय भी हैं जिन्हें दुनिया भर के सबसे खूबसूरत और आकर्षक पुस्तकालयों की एलीट सूची रखा गया है।

आज के इस लेख में हम इस सूची में से 7 सबसे ख़ूबसूरत पुस्तकालयों के बारे में चर्चा करेंगे।

केंद्रीय पुस्तकालय: सिएटल, वाशिंगटन, यू.एस.ए.(USA)

सिएटल में केंद्रीय पुस्तकालय बेहद आधुनिक और परिष्कृत है। पूरी दुनिया के लोग यहां इस पुस्तकालय को देखने के लिए आते है। खुलने के पहले साल में ही दो मिलियन से अधिक पर्यटकों ने इस लाइब्रेरी का दौरा किया था।

इसे डच आर्किटेक्ट रेम कुल्हास और अमेरिकी डिज़ाइनर जोशुआ रामस द्वारा डिजाइन किया गया है। आपको बता दें कि चमकदार, अद्वितीय इमारत कला इस लाइब्रेरी को अलग स्थान प्रदान करती है।

लाइब्रेरी में पूरे साल में विभिन्न कला प्रदर्शनियां, पुस्तक हस्ताक्षर समारोह और अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

 ट्रिनिटी कॉलेज लाइब्रेरी: डबलिन, आयरलैंड

डबलिन में ट्रिनिटी कॉलेज लाइब्रेरी आयरलैंड की सबसे पुरानी लाइब्रेरी है, जिसे 1592 में क्वीन एलिजाबेथ 1 द्वारा स्थापित किया गया था।

यह लाइब्रेरी दुनिया की सबसे बड़ी सिंगल चैम्बर लाइब्रेरी होने का दावा करती है, जिसे लांग रूम भी कहा जाता है। इस पुस्तकालय में 200,000 से अधिक पुरानी पुस्तकें हैं।

गीज़ेल लाइब्रेरी, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय: सैन डिएगो, यू.एस.ए.(USA)

सैन डिएगो की गीज़ेल लाइब्रेरी दुनिया की सबसे आधुनिक इमारतों में से एक है। पहली नज़र में यह एक अंतरिक्ष यान की तरह दिखती है। आर्किटेक्ट विलियम परेरा, ने 1970 में यह खूबसूरत पुस्तकालय तैयार किया था।

इसे विज्ञान-फाई (SYFY) फिल्मों, लघु कथाओं और उपन्यासों में दिखाया गया है। इस पुस्तकालय में रात्रिभोज भी आयोजित किया जाता है, जिसमे पाठकों और प्रमुख लेखकों को आमंत्रित किया जाता है।

टीयू डेल्फ़्ट लाइब्रेरी: नीदरलैंड्स

टीयू डेल्फ्ट लाइब्रेरी का निर्माण 1997 मे हुआ था। इस लाइब्रेरी के संग्रहालय है में 862,000 से अधिक किताबें है। इसकी छत 5,500 वर्ग मीटर मे शामिल हैं।

बिब्लियोथेका एलेक्सांद्रिना: अलेक्जेंड्रिया, मिस्र

बिब्लियोथेका एलेक्ज़ेंडरिना अलेक्जेंड्रिया की प्राचीन रॉयल लाइब्रेरी है, जो यूनानी दुनिया में सबसे बड़ी और सबसे प्रभावशाली पुस्तकालय थी। यह पुस्तकालय 2,300 साल पहले महान अलेक्जेंडर द्वारा बनाई गई थी ।

इस लाइब्रेरी में पुस्तकों के प्राचीन संग्रहालय और विज्ञान को कवर करने वाले चार संग्रहालय हैं, और इसमे 15 स्थायी प्रदर्शनी भी शामिल हैं, जिनमें “अलेक्जेंड्रिया के इंप्रेशन”, “अरबी कैलिग्राफी” और “प्रिंटिंग का इतिहास” शामिल है।

सिटी लाइब्रेरी: स्टुटगार्ट, जर्मनी

लाइब्रेरी क्षेत्र में स्टटगार्ट सिटी लाइब्रेरी सबसे दिलचस्प इमारतों में से एक है। कोरिया मे जन्मे यी ईन यंग द्वारा इस लाइब्रेरी को डिज़ाइन किया गया था।

इसमें एक रैखिक आकार का “दिल” है, जो एक मल्टी सटोरी बैठक के रूप में कार्य करता है और छत के माध्यम से सूरज की रोशनी प्रदान करता है।

बिशन पब्लिक लाइब्रेरी, सिंगापुर

बिशन कम्युनिटी लाइब्रेरी बिशन के केंद्र में स्थित है, जो की 4,000 वर्ग मीटर तक फैली हुई है। यह खूबसूरत पुस्तकालय एक पेड़ घर (Tree House) की तरह दिखता है।

इस पुस्तकालय के अंदर पढ़ने के लिए निजी स्थान भी हैं। इसमे खास बात यह है की इसकी पूरी इमारत ग्लास की बनी है जिसके अंदर पढ़ने और चलने का मज़ा कुछ अलग ही है।

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जानें फ्रूट्स खाने का सही समय!!

जब बात हेल्दी डाइट की आती है तो उसमें फ्रूट्स को जरूर शामिल किया जाता है। इसका कारण यह है कि मिनरल्स, विटामिन्स और फाइबर से भरपूर फलों में ढेर सारे पोषक तत्व होते हैं, कैलोरीज की मात्रा भी बेहद कम होती है।

फलों में नैचरल शुगर होता है जिसे हेल्दी माना जाता है और बिना किसी साइड इफेक्ट के आप आराम से फल खा सकते हैं लेकिन फलों के सेवन को लेकर कई तरह के मिथक भी होते हैं।

जैसे- फल खाली पेट खाना चाहिए या नहीं, फल को भोजन के साथ खाना चाहिए या नहीं, रात में सोने से पहले फल खाना चाहिए या नहीं?

आज हम इस लेख में बात करने जा रहे हैं फ्रूट्स खाने के सही समय की, तो चलिए जानते हैं :-

दिन का समय फल खाने के लिए सबसे अच्छा समय है।

आपने कई लोगों को यह कहते सुना होगा कि सुबह की तुलना में दिन का समय फल खाने के लिए सबसे अच्छा होता है लेकिन इस दावे को साबित करने के लिए कोई वैज्ञानिक तथ्य मौजूद नहीं है।

लेकिन इसके पीछे ये तर्क दिया जाता है कि दिन के समय शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है और फल में नैचरल शुगर की मात्रा अधिक होती है और इसलिए अगर इसे दिन के समय खाया जाए तो यह ब्लड शुगर लेवल को बढ़ाकर पाचन तंत्र को उत्तेजित करता है।

सोने से पहले

सोने से पहले या फिर बीच रात में अगर कुछ स्नैकिंग करने का मन हो तो प्रोसेस्ड फूड की जगह फ्रूट्स खाना एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है।

अमेरिका के नैशनल स्लीप फाउंडेशन की मानें तो सोने से ठीक पहले अगर एक केला खाया जाए तो नींद अच्छी आती है और रात में पैरों में होने वाली ऐंठन की समस्या भी दूर होती है क्योंकि केले में पोटैशियम होता है।

इसके अलावा ऐप्रिकॉट्स और डेट्स जैसे फल जिनमें मैग्नीशियम अधिक होता है, अगर इनका सेवन सोने से पहले किया जाए तो शरीर रिलैक्स हो जाता है और नींद अच्छी आती है।

खाली पेट फल खाना चाहिए

बहुत से लोगों का यह मानना है कि अगर खाली पेट फल खाया जाए तो वह ज्यादा फायदेमंद होता है। इसके पीछे ये तर्क दिया जाता है कि अगर फल को भोजन के साथ खाया जाए तो पाचन की प्रक्रिया धीमी हो जाती है और इस वजह से पेट में गैस, पेट फूलना और बदहजमी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।

हालांकि फ्रूट्स में फाइबर होता है और पचने में देर लगने की वजह से फल खाने के बाद लंबे समय तक भूख नहीं लगती, जिससे आप बाइंज इटिंग करने से बच जाते हैं।

लिहाजा आप खाली पेट फल खा सकते हैं इसमें कोई दिक्कत नहीं है लेकिन अगर आप भोजन के साथ या भोजन के बाद फल खाते हैं तो उसमें भी कोई हानि नहीं है।

कुल मिलाकर ये कहा जा सकता है कि फल खाने का कोई फिक्स टाइन नहीं होता। फल हेल्दी, पोषक तत्वों से भरपुर और वेट लॉस में मदद करने वाले होते हैं इसलिए इन्हें आप दिन के किसी भी समय खा सकते हैं।

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जानिए रंगों से कैसे करें बालों का बचाव!

होली का त्यौहार देश में बेहद ही धूमधाम से मनाया जाता है। धुलण्डी के दिन रंगों से खेलना लोगों को काफी अच्छा लगता है। हालांकि, रंगों का असर आपकी त्वचा और बालों पर पड़ता है।

रंग ना सिर्फ बालों को रूखा और बेजान बनाते है, बल्कि इसके कारण डेंड्रफ, खुजली और बाल टूटने जैसी समस्या भी आने लगती है। ऐसे में अक्सर लोग होली खेलने से बचते हैं।

जिन लोगों के बाल हल्के और ड्राई होते है, वह तो होली पर घर से बाहर निकलना भी पसंद नहीं करते क्योंकि होली पर रंग-गुलाल बालों में डाल दिया जाता है। इस वजह से बाल रूखे और बेजान हो जाते हैं।

इस लेख में हम आपको बताएंगे कि कैसे हम रंगों से बालों का बचाव कर सकते हैं:-

  • रंग-गुलाल खेलने के बाद शैम्पू के बाद कंडीशनर का उपयोग करना बेहद जरूरी है। इससे बालों को रंगों के दुष्प्रभावों से बचाने में मदद मिलती है।
  • बाल धोने के बाद हेयर सीरम या हेयर क्रीम का प्रयोग करें। तेल लगाना हो तो दो छोटे चम्मच जैतून का तेल या एक छोटा चम्मच सरसों का तेल और एक छोटा चम्मच कैस्टर ऑयल मिलाकर बालों की जड़ों में अच्छी तरह से मसाज करें।
  • बालों को सामान्य तापमान वाले साफ़ पानी से धोएं। पानी ठंडा न हो इसका ख्याल रखें। इससे जड़ों में चिपका रंग काफ़ी हद तक निकल जाएगा। इसके बाद सौम्य शैम्पू से बालों को अच्छी तरह से धो लें।
  • बालों से रंग निकालने के लिए हेयर पैक लगाना अच्छा उपाय है। एक बड़ा चम्मच दही, एक बड़ा चम्मच बेसन और थोड़ा-सा नींबू का रस मिलाकर पैक तैयार कर लें। इसे बालों में लगाकर कुछ देर मसाज करें और फिर सौम्य शैम्पू से धो लें।
  • गुनगुने तेल से बालों की मालिश करें। फिर बाल धाएं। डेंड्रफ है तो तेल में नींबू का रस मिलाकर मसाज करें। इससे रंग जल्दी निकलेगा और डेंड्रफ से भी राहत मिलेगी।
  • होली खेलने से पहले बालों में कोकोनट मिल्क लगाएं। यदि पहले नहीं लगा पाए हैं तो शैम्प करने के एक घंटे पहले लगाएं और फिर सौम्य शैम्पू से बाल धो लें।

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पांच पहाड़ियों से घिरा हुआ है खूबसूरत राजगीर, जानिए क्या है खासियत!

बिहार में मौजूद सबसे खूबसूरत ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों में एक है राजगीर। यह पांच पहाड़ियों से घिरा हुआ है और इसकी खूबसूरती बारिश के मौसम में काफी बढ़ जाती है।

पटना से लगभग 100 किलोमीटर दूर नालंदा जिले में पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच मौजूद राजगीर में हिंदू, जैन और बौद्ध तीनों धर्मों के धार्मिक स्थल मौजूद हैं।

यह सिर्फ धार्मिक कारणों के लिए ही फेमस नहीं है, बल्कि एक खूबसूरत हेल्थ रेसॉर्ट के रूप में भी फेमस है। आज हम राजगीर की खूबसूरती के बारे में बात करने जा रहे हैं। तो चलिए जानते हैं :-

भीम और जरासंध के बीच यहाँ हुई थी कुश्ती

राजगीर का संबंध द्वापर काल से हैं। आपने महाभारत में भीम और जरासंध की लड़ाई के बारे में तो जरूर सुना होगा। मगध के शासक जरासंध की राजधानी राजगीर ही थी।

भीम और जरासंध के बीच जिस अखाड़े में कुश्ती हुई थी, वह आज भी राजगीर में मौजूद है। राजगीर में हिंदू, जैन और बौद्ध तीनों धर्मों के धार्मिक स्थल मौजूद हैं।

राजगृह है पूराना नाम

मगध साम्राज्य की पुरानी राजधानी रही राजगीर का पूराना नाम राजगृह था। इस खूबसूरत और बेहद पुराने शहर में विश्व शांति स्तूप से लेकर घूमने की ढेर सारी जगहें मौजूद हैं। यहां मौजूद ब्रह्माकुंड और सप्तधाराओं में स्नान करने का विशेष महत्व है।

राजगीर में कुल 22 कुंड और 52 धाराएं

यहाँ कुल 22 कुंड और 52 धाराएं मौजूद हैं, जो इस स्थान की खूबसूरती को कई गुणा बढ़ा देती हैं। राजगीर के 22 कुंडों में ब्रह्माकुंड, सप्तधारा, व्यास, अनंत, मार्कंडेय, गंगा-यमुना, काशी, सूर्य, चंद्रमा, सीता, राम-लक्ष्मण, गणेश, अहिल्या, नानक, मखदुम, सरस्वती, अग्निधारा, गोदावरी, वैतरणी, दुखहरनी, भरत और शालीग्राम कुंड शामिल हैं।

औषधीय गुणों से युक्त हैं राजगीर के कुंड

राजगीर के सभी 22 कुंडों के पानी को पवित्र और औषधीय गुणों से युक्त माना जाता है। यहां आने वाले लोग इन कुंडों में स्नान करते हैं।

दर्शनीय स्थल

राजगीर के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में विश्व शांति स्तूप, सोन भंडार, जरासंध का अखाड़ा, बिंबिसार की जेल, नौलखा मंदिर, जापानी मंदिर, बाबा सिद्धनाथ मंदिर, जैन मंदिर, गृद्धकूट पर्वत, लाल मंदिर, घोड़ा कटोरा डैम, वेणुवन, सुरक्षा दीवार, जेठियन बुद्ध पथ, सप्तवर्णी गुफा आदि शामिल हैं।

480 एकड़ में हो रहा है सफारी का निर्माण

राजगीर के स्वर्णगिरि और वैभवगिरि पर्वत के बीच 480 एकड़ भूमि पर जू सफारी का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है।  इसके बाद पर्यटक खुले में घूमते हुए शेर, भालू, बाघ और चीता सहित अन्य जानवरों को देख सकेंगे।

जू सफारी के होंगे पांच हिस्से

राजगीर में निर्माणाधीन जू सफारी के पांच हिस्से होंगे। इसमें हिरण, भालु, तेंदुआ, बाघ और शेर को रखा जाएगा। जू सफारी में जानवर खुले क्षेत्र में रहेंगे और दर्शक बंद गाड़ी में बैठ कर जानवरों को देखेंगे।

जू सफारी में जानवरों को डबल प्रोटेक्शन में रखा जाएगा। भालू सफारी करीब 20 हेक्टेयर इलाके में बन रही है, जहां यहां नर और मादा भालुओं को देखा जा सकेगा।

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