हावड़ा ब्रिज से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

कोलकाता का हावड़ा ब्रिज दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। इस पुल का निर्माण ब्रिटिश राज में साल 1936 में शुरू हुआ था l 3 फ़रवरी 1943 को इसे जनता के लिए खोल दिया था। यह दुनिया का सबसे व्यस्त पुल है।

अंग्रेजों ने जब इस पुल को बनाने के बारे में सोचा तो वे ऐसा पुल बनाना चाहते थे जिससे कि नदी का जल मार्ग न रुके और पुल के नीचे कोई खंभा भी न हो।

ऊपर पुल बन जाए और नीचे हुगली नदी में पानी के जहाज और नाव भी बिना रुके चलते रहें। जोकि ये झूला अथवा कैंटिलिवर पुल से ही संभव था।

हावड़ा ब्रिज से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

  • आज जहाँ हावड़ा ब्रिज है दरअसल वहाँ कभी पोंटून (Pontoon) सेतु था, जिसे विकसित करके हावड़ा ब्रिज बनाया गया। शुरुआत में इसका नाम ‘न्यू हावड़ा ब्रिज’ था। 14 जून, 1965 में बंगला साहित्य के महान कवि; प्रथम एशियाई और प्रथम भारतीय नोबेल पुरष्कार विजेता ‘रवींद्रनाथ टैगोर’ के सम्मान में इसका नाम बदलकर ‘रवीन्द्र सेतु’ कर दिया गया लेकिन यह आज भी इसे हावड़ा ब्रिज के नाम से ही जाना जाता है।
  • यह पुल 2,313 फ़ीट लम्बा और 269 फ़ीट ऊँचा है। इसकी चौड़ाई 71 फ़ीट है, जिसमें दोनों तरफ 15-15 फ़ीट चौड़े दो फूटपाथ भी हैं। यह पूरा पुल उच्च-तन्य मिश्रधातु (High-tensile alloy) स्टील का बना हुआ है, जिसे Tiscrom कहा जाता है।
  • हावड़ा ब्रिज पर हर रोज 1 लाख से भी ज्यादा गाड़ियाँ गुजरती हैं और 5 लाख पैदलयात्री (वर्तमान में इससे भी ज्यादा) इस पर चलते हैं।
  • अपने निर्माण के समय यह पूरे विश्व में तीसरा सबसे लम्बा पुल था। आज यह अपनी तरह का विश्व का छठा सबसे लम्बा पुल है। हावड़ा ब्रिज के देखभाल की जिम्मेदारी ‘कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट (KoPT)’ की है। इस ट्रस्ट की स्थापना हावड़ा ब्रिज के स्थापना सन् 1870 में हुई थी l
  • इस पुल के निर्माण के लिए तत्कालीन बंगाल सरकार के द्वारा एक एक्ट पारित किया गया,जिसे हावड़ा पुल अधिनियम, 1926 नाम दिया गया।
  • इस पूरे ब्रिज का डिज़ाइन Rendel, Palmer और Tritton के द्वारा किया गया था। अनुमान यह है कि इस बड़े पुल के निर्माण की राशि 333 करोड़ रुपए थी। यह दुनिया में ब्रैकट पुल से एक है। यह पुल 75 साल पुराना है। इसे बनने में लगभग 6 साल लगे। 3 फ़रवरी, 1943 में इसका इस्तेमाल शुरू हुआ, जो आज तक जारी है।
  • इसे बनाने में 26,500 टन स्टील की खपत हुई थी, जिसमें से 87% स्टील ‘टाटा स्टील कम्पनी’ द्वारा ख़रीदा गया था। इस परियोजना के लिए सारी स्टील इंग्लैंड से लायी जा रही थी लेकिन जापान के धमकी की वजह से सिर्फ 3000 टन स्टील ही लाया जा सका। बाकि स्टील की खरीद ‘टाटा स्टील’ से की गयी।
  • पुल का उपयोग करने वाला पहला वाहन “ट्राम” (ट्रॉली कार)था।
  • गर्मियों के दिनों में इसकी लम्बाई करीब 3 फ़ीट तक बढ़ जाती है, क्योंकि अधिक तापमान में धातु (स्टील) पिघलती और फैलती है।
  • इसकी क्षमता 60,000 टन वजन सहने की है लेकिन बढ़ती जनसंख्या ने ट्रैफिक को इतना बढ़ा दिया कि आज हावड़ा ब्रिज पर हर समय 90,000 टन का वजन रहता है इसीलिए कई ट्रामों और ज्यादा वजनी ट्रकों को दूसरे रास्तों या पुलों पर स्थानांतरित किया जा रहा है।
  • इस ब्रिज को बनाने के कॉन्ट्रैक्ट के लिए 20 से भी ज्यादा कम्पनियों को चुना गया था l 1935 में इसका कॉन्ट्रैक्ट एक ब्रिटिश कम्पनी क्लीवलैंड ब्रिज एंड इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड को दिया गया था लेकिन इसकी संरचना ब्रेथवेट बर्न एंड जेसोप कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड नामक कम्पनी द्वारा किया गया।
  • 2006 के शुरुआत में इसकी मरम्मत करवाई गयी थी, जिसमें 8 टन स्टील की खपत हुई थी। इस पूरे प्रक्रिया में 50 लाख रूपये खर्च हुए थे।
  • पक्षियों द्वाराहावड़ा ब्रिज पर की जाने वाली गन्दगी से कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट काफी परेशान है क्योंकि इससे ब्रिज की रासायनिक क्षति हो रही है इसलिए ट्रस्ट हर साल ब्रिज से पक्षियों की गन्दगी हटाने के लिए 5 लाख का कॉन्ट्रैक्ट देता है।
  • आपको को जानकर हैरानी होगी कि हावड़ा ब्रिज ने लगभग हर दौर के फिल्म निर्माताओं को आकर्षित किया है। इसने कई हिंदी, मलयालम, बंगाली, तमिल, अंग्रेजी इत्यादि फिल्मों में अभिनय किया है। यहाँ शूट की गई फ़िल्मों में हावड़ा ब्रिज ,गुंडे, बर्फी, लव आज-कल, तमिल फ़िल्म आधार, मलयालम फ़िल्म कलकत्ता न्यूज़, रोलैंड जोफ़े की अंग्रेज़ी भाषा की फ़िल्म सिटी ऑफ़ जॉय शामिल है।
  • सात दशकों से अधिक समय तक वहां रहने के बाद, हावड़ा ब्रिज ने विश्व की कुछ प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं को देखा है, जिसमें द्वितीय विश्व युद्ध भी शामिल है।

जानिए क्यों है गुरुडोंगमार झील सिक्किम की शान

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गुरुडोंगमार झील

सिक्किम हिमालय में स्थित एक बहुत ही शांत, सुंदर और मनभावन स्थान है और यहीं बसी है गुरुडोंगमार झील l यह दुनिया की सबसे ऊंची झीलों में से एक है।

यह खूबसूरत नीले पानी की झील साल के अधिकांश समय जमी रहती है, लेकिन इसकी खासियत यह है कि अत्यधिक ठंड में भी इस झील का एक हिस्सा कभी नहीं जमता।

चारों तरफ से पहाड़ों से घिरी यह झील समुद्र तल से 5430 मीटर ऊपर है, जो लगभग 16 से 17 हजार फीट है। यह झील कंचनजंगा पर्वतमला के उत्तर पूर्व में स्थित है। यह चीन की सीमा से केवल 5 किलोमीटर की दूरी पर है।

इस लेक की खूबसूरती की जितनी तारीफ की जाए कम ही है। दूर-दूर तक फैला इसका नीला पानी और चारों तरफ घिरे पहाड़ इसे ‘जन्नत’ जैसा रूप देते हैं। इस लेक को बौध, सिख और हिंदुओं का पवित्र स्थल माना जाता है।

सर्दियों के मौसम में बर्फ से जमी गुरुडोंगमार झील

धार्मिक रूप से यह झील बौद्ध और सिक्ख धर्म, दोनो का पवित्र स्थल है। कहा जाता है कि जब गुरु पद्मसम्भवा तिब्बत की यात्रा में थे तब उन्होंने इस झील को ही अपनी उपासना के लिए सबसे सही जगह के रूप में चुना था।

माना जाता है कि झील में हमेशा बर्फ जमी रहती थी और यहां पीने के पानी का अभाव था। जब गुरू पद्मसंभव यहां से गुजर तो स्थानीय लोगों ने उनसे पानी की व्यवस्था करने को कहा।

लोगों की इस समस्या से निदान के लिए गुरू ने झील का एक हिस्सा स्पर्श किया और बर्फ पिघल गई। कहा जाता है कि कडाके की ठंड में भी झील का यह हिस्सा बर्फ में तब्दील नहीं होता।

तब से ही यह धार्मिक स्थल के रूप में जाना जाने लगा और श्रद्धालु अपने अपने बर्तनों में झील के उस हिस्से का पानी अपने साथ ले जाते हैं।

इसी तरह गुरु नानक जी से भी संबंधित कथा यहाँ पर प्रचलित है। उनकी भी कथा गुरु पद्मसम्भवा की कथा से मिलती जुलती है।

माना जाता है कि जब गुरू नानकदेव जी तिब्बत के रास्ते से जा रहे थे तो जाते हुए उन्हें प्यास लगी तब वे अपनी प्यास बुझाने के लिए तिब्बत रुके थे उन्होंने अपनी छड़ी से यहां जमी बर्फ में छेद कर पानी पीया और तभी से यहां झील बन गई। कहा जाता है कि भीषण सर्दी के दौरान भी इस झील का कुछ हिस्सा नहीं जमता।

दूर दूर तक फैला नीला जल और पार्श्व में बर्फ से लदी श्वेत चोटियाँ गाहे बगाहे आते जाते बादलों के झुंड से गुफ्तगू करती दिखाई पड़ती हैं।

झील के दूसरी ओर सुनहरे पत्थरों के पीछे गहरे नीले आकाश एक और खूबसूरत परिदृश्य को दर्शाते हैं। यहाँ झील के किनारे एक सर्वधर्म प्रार्थना स्थल भी है।

गढ़कुंडार – जानिए भारत के इस रहस्यमय किले के बारे में

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भारत में कई ऐतिहासिक स्मारक हैं जिनमें राजाओं और महाराजाओं के शासनकाल के दौरान निर्मित कई किले हैं। इनमें से कई किले ऐसे हैं जो अभी भी रहस्य में डूबे हुए हैं।

गढ़कुंडार किला इन्ही किलों में से एक है। यह किला उत्तर प्रदेश राज्य में झाँसी के पास लगभग सत्तर किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

किले में अभी भी 11 वीं शताब्दी में निर्मित पांच मंजिला संरचना है। इन पांच मंजिलों में से तीन मंजिलें जमीनी स्तर से नीचे हैं और दो मंजिलें जमीनी स्तर से ऊपर हैं।

ऐसा अनुमान है कि किले को कम से कम पंद्रह से दो हजार साल पहले बनाया गया था। उस समय प्रांत पर चंदेल, बुंदेल और खंगार वंश के राजाओं का शासन था।

यह किला सुरक्षा के दृष्टिकोण से बहुत मजबूत और बहुत महत्वपूर्ण है। यह किला भारत के सबसे रहस्यमय किलों में गिना जाता है।

काफी समय पहले की बात है यहां पास के ही गांव में एक बरात आई थी। बरात यहां किले में घूमने आई। घूमते-घूमते वो लोग बेसमेंट में चले गए, जिसके बाद वो रहस्यमयी तरीके से अचानक गायब हो गए। जिसके बाद किले के नीचे जाने वाले सभी दरवाजों को बंद कर दिया गया।

किले में प्रवेश करने के सभी मौजूदा द्वार स्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं। यह किला किसी भूल-भुलैय्या की तरह है। किले के अंदर अंधेरा रहने के कारण दिन में भी यह डरावना लगता है।

कहा जाता है कि इस किले में एक खजाने का रहस्य भी छुपा हुआ है इसलिए खजाने को खोजने के लिए कई शौकिया मंडलियां यहां आती थीं।

हालांकि किसी का प्रयास सफल नहीं हुआ, और खजाने की खोज के कारण कई मंडलियां किले से गायब हो गईं। आज तक यह स्पष्ट नहीं है कि वे सभी लोग आखिर कहां गायब हो गए

डिप्रेशन से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

डिप्रेशन एक मानसिक बीमारी है, जो कुछ लोगों को तो थोड़े समय के लिए ही रहती है, लेकिन कई लोगों का यही डिप्रेशन एक भयानक रूप भी ले लेता है, इस स्थिति में लोगों का मन ज़िंदगी से भर जाता है. इसी कारण इंसान की रोजमर्रा ज़िंदगी और उसके कामकाज में बुरा प्रभाव पड़ता है.

कुछ अरसा पहले हमने डिप्रेशन पर यह तथ्यात्मक एक लेख पोस्ट किया था जिस पर पाठकों की काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली जिससे उत्साहित होकर हमने इस पोस्ट के पुराने शीर्षक  डिप्रेशन क्या है? इसके लक्षण और इससे कैसे बचा जा सकता है? पर एक “कारण और निवारण” टाइप का  एक समग्र लेख पोस्ट किया है, जबकि पुरानी तथ्यात्मक पोस्ट को यहाँ स्थानांतरित किया है.

तो ये रहे डिप्रेशन से जुड़े कुछ रोचक तथ्य:

  1. यह बात सिद्ध हुई है कि पूरी दुनिया में 35 करोड़ लोग डिप्रेशन के शिकार हैं.
  2. डिप्रेशन होने के मुख्य लक्षण है, जैसे- निरंतर चिंता करना, काम में मन न लगना, छोटी छोटी बातों पर गुस्सा करना, कम बोलना आदि.
  3. डिप्रेशन में इंसान ऐसे खतरनाक कदम उठाता है, जो उसे नहीं उठाने चाहिए, जैसे कि शरीर को नुकसान पहुंचाना, आत्महत्या करने की कोशिश करना आदि.
  4. ऐसा माना जाता है कि 2030 तक आते- आते डिप्रेशन मनुष्य पर इतना हावी हो जाएगा कि मनुष्य की असमर्थता का दूसरा सबसे बड़ा कारण होगा.
  5. ऐसा नहीं है डिप्रेशन कोई अभी की बीमारी है, यह हमारे पूर्वजों के ज़माने से चली आ रही है, परंतु चिंता का विषय यह है कि 21वीं सदी में इसका प्रभाव पहले से 10 गुना ज़्यादा बढ़ गया है.
  6. महिलाएं पुरुषों के मुकाबले डिप्रेशन की शिकार ज़्यादा होती हैं.
  7. आजकल लोग इंटरनेट (फेसबुक, वाट्सएप) पर फालतू समय व्यतीत करते है, वह अक्सर मानसिक परेशानियों में रहते हैं.
  8. डिप्रेशन की वजह से इंसान अपना लगभग 65% समय तो चिंता में गुज़ार देते हैं.
  9. इंसान 18 से 33 साल की उम्र तक सबसे ज़्यादा तनाव महसूस करता हैं.
  10. तनाव में रहने वाला इंसान खुद से और दूसरों से झूठ बोलने की आदत बना लेता है और वह इंसान हमेशा परिस्थितियों का सामना करने से कतराता है.

डिप्रेशन के समय इंसान यह सोचता है कि वह ज़िंदगी में कुछ नहीं कर सकता और वह अपनी हार स्वीकार कर लेता है. तो आइए जानते हैं इंसान डिप्रेशन से कैसे छुटकारा पा सकते हैं…….

  1. यदि आपको लगता है कि आप डिप्रेशन में जा रहे हैं, तो आप किसी मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर (mental health professional) की सहायता ले सकते हैं.
  2. अगर आप इससे बाहर आना चाहते है, तो आप इसकी वजह जानें और फिर सोचे कि उस वजह से कैसे बाहर निकल सकते हैं.
  3. “कल क्या होगा” यह सोच- सोच कर हम अपनी परेशानियों को और भी बढ़ा देते है, इसलिए हमें आज के बारे में ही सोचना चाहिए और आज को बेहतर बनाने की कोशिश करनी चाहिए.
  4. तनाव या दबाव को दूर करने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप गाने सुनें. इससे तनाव में कमी आती है और इससे इंसान खुद को तरोताज़ा महसूस करता है.
  5. इंसान डिप्रेशन को कम करने के लिए अक्सर शराब, ड्रग्स और नशीली चीज़ों का सहारा लेता है. नशीली चीज़ों का सेवन करने से कुछ देर के लिए तनाव दूर हो जाता है, लेकिन धीरे- धीरे इसकी लत बन जाती है. इसलिए इंसान को नशीली चीज़ों से दूर ही रहना चाहिए.

अंत में हमारा यही सुझाव है कि इंसान अपनी समस्याओं को छुपाते हैं और उन्हें लगता है कि दूसरों को बताएंगे, तो उनका मज़ाक ना बन जाएँ. यह रवैया इंसान की दिक्कत को कम करने की बजाय और भी बढ़ा देता है. यदि आप बहुत ज़्यादा तनाव महसूस कर रहे हैं, तो किसी मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक के पास ज़रूर जाएं.

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ये हैं दुनिया के 5 अजीबोगरीब जीव

पूरे विश्व में विभिन्न प्रजातियों के पशु-पक्षी एवं जीव-जंतु पाए जाते हैं और सभी का अपना एक अलग महत्व है। उनमें से कुछ अपने रंग, मधुर आवाज और अपने आकार के लिए प्रसिद्ध हैं इसलिए वे विभिन्न विशेषताओं के साथ लोकप्रिय हैं।

इनमें से कुछ महासागर की गहराई में और कुछ घने जंगलों के बीच बसे हैं। आज हम दुनिया के कुछ ऐसे अजीबोगरीब जीवों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें आपने पहले न कभी देखा होगा और न ही उनके बारे में सुना होगा तो आइये जानते हैं कुछ ऐसे ही विचित्र जीवों के बारे में :-

ओकापी

ओकापी अफ्री़का के इटुरी वर्षावन, जो कि मध्य अफ्री़का के कांगो लोकतान्त्रिक गणराज्य  में पाया जाने वाला एक जीव है।

यह जिराफ़ का सबसे करीबी रिश्तेदार है। ओकापी का पृष्ठ भाग गहरे भूरे  रंग का होता है और पैरों में अद्भुत सफे़द-काली धारियाँ होती हैं, जिससे दूर से देखने में यह ज़ेब्रा जैसा दिखता है।

इसके शरीर की बनावट जिराफ़ जैसी ही होती है सिवाय लंबी गर्दन के। ओकापी और जिराफ़ दोनों की जीभ लंबी होती है जो नीले रंग की होती है और जिसकी मदद से वह पेड़ों से कोमल पत्तियाँ और कोपलें खाते हैं।

शूबिल

शूबिल अफ्रीका के सूडान और जांबिया में पाई जाती है। इसे इंग्लिश में ‘शूबिल’ तो अरबी में ‘अबू मरकब’ कहते हैं।

अबू मरकब का मतलब होता है जूते के साथ। इनकी चोंच जूते के आकार की होती है। इसी वजह से इनका नाम शूबिल पड़ा है।

शूबिल एक बड़ी चिड़िया है। इसका वजन करीब 8 किलो तक होता है। इसे साफ पानी के पास रहना पसंद है क्योंकि यह मछलियों का शिकार करना पसंद करती है इसीलिए यह अफ्रीका के उन क्षेत्रों में ही पाई जाती हैं, जहां नदी के पास जंगल हो और उस नदी में भरपूर मछलियां हों।

थोर्नी ड्रैगन

ऑस्ट्रेलिया में पाए जाने वाला यह जीव छिपकली की तरह दिखता है। इसकी पूरी बॉडी पर नुकीले कांटे होते हैं। यह मौसम के हिसाब से खुद को बदल सकता है। ये छिपकली आसानी से रेगिस्तान की मिट्टी में छिप जाती है।

इंडियन पर्पल फ्रॉग

भारत में पाई जाने वाली मेंढ़कों की प्रजातियों में से यह सबसे विचित्र प्रजाती है। इनका शरीर अजीब सा मोटा होता है। इसे ‘मावेली’ कहकर भी बुलाया जाता है।

माना जाता है कि बैंगनी रंग का दिखने वाला यह मेंढक कभी डायनासोर के साथ सह-अस्तित्व में था। ये साल भर धरती के अंदर रहते हैं और संभोग के लिए सिर्फ़ दो हफ़्ते धरातल पर बिताते हैं।

पाकु मछली

पाकु फिश को “बॉल कटर” भी कहते हैं। इसकी खासियत यह है कि इसके दांत इंसानों जैसे होते हैं। यह जब मुंह खोलती है तो वह इंसानी मुंह जैसा नज़र आता है और ये अपने शिकार को काटने से चूकती नहीं है।

ब्लू पेरेट फिश

एकदम नीले रंग की यह मछली अटलांटिक महासागर में पायी जाती है। इसकी खासियत यह है कि इसकी तोते की तरह चोंच होती है। मतलब यह कि इसका अलगा भाग तोते की तरह नज़र आता है।

मैंटिस श्रिम्प

इस जीव को सी लोकसटस प्रॉन किलर या थंब स्प्लिंटर्स भी कहते हैं। ये ट्रॉपिकल और सब-ट्रॉपिकल पानी में पाए जाते हैं। ये अधिक्तर वक्त अपने बिल में छिपे रहते हैं।

गोब्लिन शार्क

गोब्लिन शार्क लगभग पूरी दुनिया में पाई पाई  है। यह समुद्री सतह के 100 मीटर की गहराई में रहती है और यह  शार्क  लोगों को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाती।

इसकी खासियत यह है कि इसका मुंह बहुत अजीब होता है। ऐसा लगता है कि इसका सिर गेंडे के सिंग के समान है इसीलिए यह अन्य शार्क मछलियों से भिन्न होती है।

इंस्टाग्राम से जुड़े कुछ दिलचस्प तथ्य

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इंस्टाग्राम से जुड़े कुछ दिलचस्प तथ्य

  • इंस्टाग्राम को 6 अक्टूबर 2010 को लांच किया गया था। इंस्टाग्राम के फाउंडर Kevin Systrom और Mike Krieger हैं और इसका मुख्यालय Melno Park, California में है l
  • शुरुआत में इंस्टाग्राम को कोडनेम कहा जाता था, लेकिन लांच होने से पहले इसका नाम बदलकर इंस्टाग्राम रख दिया गया l
  • इंस्टाग्राम का नाम “इंस्टेंट कैमरा” और “टेलीग्राम” के संयोजन से आता है।
  • 16 जुलाई 2010 को इसके सह-संस्थापक kevin Systrom द्वारा पहली तस्वीर पोस्ट की गई थी। यह तस्वीर एक कुत्ते की थी।
  • क्या आपको पता है कि इंस्टाग्राम को लड़कों से ज्यादा लड़कियां यूज़ करती हैं। इंस्टाग्राम को इस्तेमाल करने वाले लड़के सिर्फ 21% ही हैं बाकी सारी लड़कियां हैं।
  • एक अध्ययन में पता चला है कि इंस्टाग्राम पर 8% खाते नकली हैं।
  • यह अनुमान लगाया गया है कि जिन पोस्टों में कम से कम एक हैशटैग शामिल है, वे 6% अधिक जुड़ाव प्राप्त करते हैं।
  • क्या आपको पता है कि इंस्टाग्राम पर सबसे ज्यादा पिज्जा की तस्वीरें पोस्ट होती हैं। जो इंस्टाग्राम पर सबसे ज्यादा पॉपुलर फ़ूड है।

  • इंस्टाग्राम को फेसबुक ने 2012 में $ 1 बिलियन डॉलर में खरीदा था।
  • 2018 तक, सेलेना गोमेज़ 138 मिलियन फॉलोअर्स के साथ इंस्टाग्राम पर सबसे अधिक फॉलो की जाने वाली व्यक्ति थीं।
  • इंस्टाग्राम पर कम से कम 1 मिलियन विज्ञापनदाता हैं।
  • लोकप्रियता के क्रम में इंस्टाग्राम का उपयोग करने वाले शीर्ष पांच देश संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, तुर्की, ब्राजील और यूनाइटेड किंगडम हैं।
  • इंस्टाग्राम पर सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला इमोजी हार्ट इमोजी है।
  • शीर्ष तीन सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले फ़िल्टर गिंगहैम, क्लेरेंडन और जूनो हैं।
  • हर महीने, ” इंस्टाग्राम ” के लिए 16 मिलियन से अधिक गूगल खोज होती हैं।
  • लोकप्रियता के क्रम में इंस्टाग्राम पर शीर्ष पांच ब्रांड हैं- नेशनल जियोग्राफिक, नाइकी, विक्टोरिया सीक्रेट, 9 जीएजी और नाइके फुटबॉल।
  • इंस्टाग्राम पर आधे से अधिक शीर्ष ब्रांड हर पोस्ट के लिए एक ही फिल्टर का उपयोग करते हैं।
  • इंस्टाग्राम फेसबुक के बाद दूसरा सबसे अधिक जुड़ा हुआ नेटवर्क है। इसके 60% से अधिक उपयोगकर्ता दैनिक आधार पर लॉग इन करते हैं।
  • सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले हैशटैग #love, #instagood, #me, #cute और #follow हैं।
  • अमेरिका के 96% शीर्ष फैशन ब्रांड्स इंस्टाग्राम का उपयोग करते हैं।
  • हर दिन, एक सौ मिलियन खाते दैनिक आधार पर एक स्टोरी अपलोड करते हैं।
  • इंस्टाग्राम के अधिकांश उपयोगकर्ता 18 से 29 वर्ष के बीच के हैं।
  • इंस्टाग्राम पर सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली फोटो “काइली जेनर” की एक पोस्ट है – इस फोटो को 9 मिलियन से ज्यादा लाइक्स मिले।
  • एक सामान्य दिन में, इंस्टाग्राम पर 80 मिलियन तस्वीरें साझा की जाती हैं।

दुनिया भर में सबसे ज़्यादा उपयोग की जाने वाले कुछ सर्वश्रेष्ठ सोशल मीडिया ऐप्स

इस समय दुनिया भर में बहुत सी सोशल मीडिया ऐप्स है। हर चीज के लिए एक नई ऐप आ रही है। कंपनियां हों या फिर सरकारें, सब कुछ ऐप के जरिये ओपरेट होने लगा है।

किसी भी आनलाइन काम के लिए आपको एक एप्प जरूर चाहिए। आधार कार्ड के लिए ऐप, बैंक के लिए ऐप, मैसेजिंग के लिए ऐप और न जाने किस-किस तरह की ऐप्स हम डाउनलोड करते हैं।

आज हम आपको सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली ऐप्स के बारे में बताने जा रहे हैं :-

फेसबुक

फेसबुक सबसे पॉपुलर सोशल मीडिया ऐप है। फेसबुक के 238 करोड़ ऐक्टिव मंथली यूजर्स हैं। 2004 में शुरू हुई इस साइट ने इंटरनेट पर यूजर्स को आपस में कनेक्ट करने का कार्य किया।

सर्वे में पाया गया कि 37 प्रतिशत स्मार्टफोन यूजर्स के फोन में यह ऐप जरूर मिलेगी। इनमें सबसे ज्यादा 45 प्रतिशत लोग 35 से 54 साल की आयु के लोग हैं।

18-34 साल के 29 प्रतिशत व 55 साल से ज्यादा आयु वाले 37 प्रतिशत लोग उसका यूज़ करते हैं।

इंस्टाग्राम

फेसबुक के बाद अगर कोई ऐप पॉपुलर है तो वह है इंस्टाग्राम। इस ऐप के जरिए आप न सिर्फ वीडियो या फोटो अपलोड कर सकते हैं बल्कि इसके जरिए आप लाइव ब्रॉडकास्ट और स्ट्रीमिंग भी कर सकते हैं।

अगर आपको म्यूजिक और डांस का शौक है तो आप अपने वीडियो अपलोड कर सकते हैं। अगर आपका अकाउंट लोकप्रिय हो जाता है यानी कि आपके फॉलोअर्स बढ़ जाते हैं तो विभिन्न ब्रैंड्स के साथ साझेदारी करके आप कमाई भी कर सकते हैं।

व्हाट्सएप

व्हाट्सएप पहले से ही बहुत सारे सोशल मीडिया और मैसेजिंग के लिए जाना जाता है व्हाट्सएप का उपयोग 180 से अधिक देशों में किया जाता है।

शुरुआत में, इसका उपयोग व्यक्तियों द्वारा अपने रिश्तेदारों और परिजनों के साथ बात चीत और मेसेजेस करने के लिए किया जाता था l

व्हाट्सअप पर हम वॉयस कॉल, वीडियो कॉल, ग्रुप वीडियो कॉल,और हर प्रकार के डॉक्स, अपने चैट और मीडिया का बैकअप लें सकते है।

यूट्यूब

यूट्यूब अमेरिका की एक वीडियो देखने वाली वेबसाइट है, जिसमें पंजीकृत सदस्य वीडियो क्लिप देखने के साथ  अपना वीडियो अपलोड भी कर सकते हैं।

इस ऐप में यूजरस वीडियो अपलोड, देखने, साझा करने और रिपोर्ट कर सकते हैं। इसे पेपल के तीन पूर्व कर्मचारियों, चाड हर्ले, स्टीव चैन और जावेद करीम ने मिल कर फरवरी 2005 में बनाया था, जिसे नवम्बर 2006 में गूगल ने $1.65 बिलियन अमेरिकी डॉलर में खरीद लिया।

स्नैपचैट

2011 में शुरू हुई स्नैपचैट के 33 करोड़ से ज्यादा मासिक यूजर्स हैं और टीन एजर्स के बीच यह खासा पसंद किया जाने वाला ऐप है।

इस प्लैटफॉर्म के सबसे ज्यादा ऐक्टिव यूजर्स की उम्र 13 साल के आसपास है। इस ऐप की खास बात यह है कि इसमें आप एक साथ 16 दोस्तों के साथ लाइव मैसेजिंग और वीडियो चैट कर सकते हैं।

जानिए कैसे ग्रीन टी डार्क सर्कल्स को दूर करेगी “घरेलु उपाए”

आँखें शरीर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है लेकिन आजकल टीवी स्क्रीन और मोबाइल का उपयोग आँखों के चारों ओर डार्क सर्कल्स का कारण बनता जा है जिससे चेहरे की सुंदरता कम होती जा रही है l

कुछ आसान तरीको सॆ आप जल्द ही इससे छुटकारा पा सकते हैं। ग्रीन टी बैग्स आपको डार्क सर्कल्स से छुटकारा दिला सकती है।

आँखों पर ग्रीन टी बैग का उपयोग डार्क सर्कल, पफनेस और लालिमा को कम करके आपकी आँखों की बनावट को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। इससे आंखों में होने वाली जलन में भी बहुत राहत मिलती है।

टी बैग एक किफायती, प्राकृतिक विकल्प है जिसे आप आसानी से घर पर आजमा सकते हैं। टी बैग आँखों पर रखने से आपको काफी आराम मिलेगा। जब तक आपके काले घेरे समाप्त नहीं हो जाते हैं, तब तक आप प्रति दिन इसका उपयोग कर सकते हैं l

कैसे इस्तेमाल करें

जब भी आप चाय पीने जा रहे हों, तो सामान्य रूप से चाय के दो बैग उठाएँ फिर बैग से अतिरिक्त तरल बाहर निचोड़कर उन्हें ठंडा होने दें या उन्हें 10 से 20 मिनट के लिए रेफ्रिजरेटर में ठंडा करें।

टी बैग्स को 15 से 30 मिनट के लिए बंद आँखों पर अप्लाई करें। यदि आप इन टी बैग्स को पिंपल्स पर लगा सकते हैं तो आप पिंपल्स और दाग- धब्बों से भी छुटकारा पा सकते हैं।

अपनी आँखों को धीरे-धीरे उंगलियों से दबाएं या आप धीरे से अपनी आँखों के आसपास के क्षेत्र की मालिश कर सकते हैं।

इसके अलावा आप ककड़ी के स्लाइस का इस्तेमाल भी कर सकते हैं ऐसा करने से दिन भर के तनाव से भी आराम मिलता है।

ग्रीन टी बैग्स उन महिलाओं के लिए भी बहुत फायदेमंद होते हैं जिनकी त्वचा तैलीय होती है। इसके लिए आप इस्तेमाल किए हुए टी बैग्स को वापस पानी में डालकर अपने चेहरे पर लगा सकते हैं।

ये है दुनिया के सबसे विचित्र त्यौहार, जिनके बारे में जानकर आप हैरान रह जाएंगे

त्यौहार धर्म, संस्कृति तथा मान्यताओं पर आधारित होते हैं त्यौहारों का प्रमुख उद्देश्य आर्थिक समृद्धि, रिश्तों को मजबूत बनाना, प्रकृति की कृतज्ञता और ऋतुओं का मानव जीवन मे महत्व बताना होता है।

लेकिन दुनिया में कुछ त्यौहार ऐसे भी हैं जो काफी विचित्र हैं जिनके बारे में जानकर आप हैरान रह जाएंगे। तो आइये जानते हैं कुछ ऐसे विचित्र त्यौहारों के बारे में

बेबी जंपिंग फेस्टिवल

बेबी जंपिंग फेस्टिवल या यूं कहे बच्चों के ऊपर से कूदने का ये अजीबोगरीब फेस्टिवल कहीं और नहीं बल्कि कैस्टिलो स्पेन में मनाया जाता है।

इस फेस्टिवल में नवजात जन्में बच्चों की माएं उन्हें जमीन पर रख देती हैं और शैतान के रूप में तैयार पुरुष बच्चों के ऊपर से कूदते हैं। ऐसा माना जाता है कि नवजात बच्चों को ऐसा करके शैतानी शक्ति से बचाया जाता है।

17 वीं शताब्दी से ही ये फेस्टिवल मनाया जा रहा है साथ ही ये भी माना जाता है कि जो भी बच्चा इस प्रक्रिया से नहीं गुजरता वो जिंदगी भर शैतानी साये में जीता है।

रोसवैल यूएफओ फेस्टिवल

ये फेस्टिवल एक प्रकार की गंभीर मीटिंग होती है जिसमें सभी यूएफओलॉजिस्ट दुर्लभ जीवों के बारे में बात करते है। ये त्यौहार मेक्सिको के रोसवैल में मनाया जाता है।

वेजीटेरियन फेस्टिवल

ये फेस्टिवल पुरे थाईलैंड में मनाया जाता है। यह फेस्टिवल अजीब होने के साथ-साथ बेहद डरावना और खतरनाक फेस्टिवल है। ये फेस्टिवल अपने नाम के बिल्कुल विपरीत है।

इसमें नौ देवताओं के लिए खुद की आहुती दी जाती है, जिसके अंतर्गत प्रतिभागी 9 दिनों के लिए सयंम का अभ्यास करते हैं।

शुद्धिकरण की प्रक्रिया के लिए मांसाहार खाने पर पाबंदी है। इसके साथ ही अपने शरीर के अंगो में भाले, चाकू और धातु की छड़ से छेद करना होता है।

मछरों का फेस्टिवल

इस अजीबोगरीब मछरों के फेस्टिवल को टेक्सास के क्लूट में मनाया जाता है। तीन दिवसीय इस फेस्टिवल में नए प्रकार के विचित्र खेलों का आयोजन किया जाता है।

बोलस दे फुएगो

इस त्यौहार के बारे में जानने के बाद आप आग से दूरी बना लेगें। य़े त्यौहार एल साल्वाडोर में मनाया जाता है जो बेहद खतरनाक होता है।

नेजला के एक छोटे से शहर में लोग एक स्थान पर इक्कटे हो जाते है और एक दूसरे के ऊपर आग के गोले फेंकते हैं।

कोनकी सूमो फेस्टिवल

ये फेस्टिवल जापान के यामाजी मंदिर में मनाया जाता है। कोनकी का मतलब रोना होता है। जापान के इस पारंपरिक त्यौहार में दो सूमो लड़ाका हाथ में छोटा बच्चा लिए एक दूसरे के सामने खड़े हो जाते हैं।

ये काफी विचित्र है कि प्रतियोगिता तब शुरू होती है जब दोनों बच्चों में से कोई पहले रोता है साथ ही जो ज्यादा देर तक और तेज आवाज में रोता है वो बच्चा प्रतियोगिता जीत जाता है।

कैट फ़ूड फेस्टिवल

इस फेस्टिवल के बारे में आप जैसा सोच रहें हैं वैसा बिल्कुल नहीं है बल्कि उसके विपरीत है। यहां बिल्लियों को खाना नहीं खिलाया जाता बल्कि बिल्लियों को ही खाने के रूप में परोसा जाता है।

पेरू के लोगों का मानना है कि बिल्ली का मांस एक स्वास्थ्य पूरक है। ये फेस्टिवल दक्षिणी लीमा, पेरू में मनाया जाता है।

हदाका मत्सूरी, नग्न परेड

ये परेड जापान के ओकायामा में सैदाईजी मंदिर के पास निकाली जाती है हालांकि इसमें लोग पुरे नहीं बल्कि अर्धनग्न होते है और करीब 10000 पुरुष लंगोट पहनकर निकलते हैं।

परेड के दौरान प्रतिभागी संतों द्वारा फेके गए तावीज को पाने की कोशिश करते हैं। सभी पुरुष अपने साथ एक कागज में नाम, पता, ब्लड ग्रुप और फोन नंबर लेकर आते हैं।

यूट्यूब से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

आपने अपने जीवनकाल में कम से कम एक बार यूट्यूब का उपयोग तो जरूर किया होगा। यूट्यूब एक वीडियो साझा करने वाली वेबसाइट है और उपयोगकर्ताओं को वीडियो अपलोड करने, देखने और साझा करने की अनुमति देती है। आज हम आपको यूट्यूब से जुड़े कुछ रोचक तथ्यों के बारे में बताने जा रहे हैं :-

  • यूट्यूब की स्थापना 14 फरवरी (वेलेंटाइन डे के दिन), 2005 को तीन पूर्व-पेपल कर्मचारियों द्वारा की गई थी। यू ट्यूब को  चाड हर्ले, स्टीव चेन और जावेद करीम  द्वारा 2005 में  बनाया गया था।  इससे पहले वे  ‘Paypal’ पेपल में काम करते थे
  • 9 अक्टूबर 2006 में यूट्यूब को गूगल ने 65 अरब डॉलर में खरीद लिया था। ये उस समय की सबसे बड़ी ऑनलाइन डील थी l
  • पहली बार यूट्यूब वीडियो 23 अप्रैल, 2005 को अपलोड किया गया था। यह सैन डिएगो चिड़ियाघर में इसके सह-संस्थापक का एक वीडियो था।
  • प्रारंभ में, यूट्यूब को “ट्यून इन हुक अप” नामक एक वीडियो डेटिंग साइट बनाया गया था।
  • यूट्यूब पर एक बिलियन से अधिक उपयोगकर्ता हैं, जो इंटरनेट पर लगभग एक-तिहाई है।
  • यूट्यूब पर सबसे पुराना बिल्ली का वीडियो 1894 का है। इसमें दो बिल्लियों की बॉक्सिंग खेल रही है।
  • 2014 में प्रसिद्ध यूट्यूब स्टार, ग्रम्पी कैट ने यूट्यूब से सबसे अधिक पैसे कमाए। Gwyneth Paltrow – एक ऑस्कर-विजेताअभिनेत्री है ।
  • यू.एस. के अलावा सबसे अधिक यूट्यूब वियुर सऊदी अरब के हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि सऊदी अरब में टीवी, फेसबुक और ट्विटर पर प्रतिबंध है, लेकिन यूट्यूब अप्रतिबंधित है।
  • सबसे लोकप्रिय ट्यूटोरियल, में जिन्हें सबसे ज़्यादा सर्च किया गया है उसमे से पहला है  “हाउ टू किस” और  दूसरा “टाई बांधने का तरीका” है।
  • गूगल के बाद यूट्यूब इन्टरनेट का दूसरा सबसे बड़ा सर्च इंजन है, बिंग, याहू ! और आस्क को एक साथ जोड़ दिया जाये तब भी यूट्यूब इनसे बड़ा है।
  • जावेद करीम की सेन डिएगो चिड़ियाघर की “Me At the Zoo’ नाम की वीडियो दुनिया की पहली वीडियो थी जो यूट्यूब पर डाली गई थी।
  • दुनिया में ऐसे 10 शहर ऐसे है जहां “यूट्यूब स्पेस ” नाम की जगह है। यहां पर 10 हज़ार से अधिक सब्सक्राइबर्स वाले लोग जाकर वीडियो बना सकते है। वीडियो बनाने के लिए वहां काफी सुविधाएं दी जाती है। भारत में यह जगह मुंबई में है।
  • गूगल दुनिया की सबसे बड़ी विज्ञापन कंपनी है, और यूट्यूब का मुद्रीकरण शुरू करने में इसे लंबा समय नहीं लगा। सेवा का पहला विज्ञापन अगस्त 2007 में प्रसारित किया गया था, जब गूगल  ने यह साइट खरीदी थी।