जानिए भारत की शीर्ष 10 प्रसिद्ध महिला उद्यमियों के बारे में

वो दिन अब चले गए जब महिलाओं को कमजोर समझा जाता था। अब महिलाएं हर क्षेत्र में आगे निकल चुकी हैं। पिछले कुछ दशकों में भारतीय समाज में महिलाओं की स्थिति में भारी बदलाव आया है।

आज महिलाएं हर क्षेत्र में आगे हैं। महिलाएं भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं और लगभग हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त की है।

आज हमने 10 प्रसिद्ध महिला उद्यमियों को सूचीबद्ध किया है, जिन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और अन्य महिलाओं को प्रेरित करने के लिए कुछ अलग किया है।

तो आइए जानते हैं भारत की शीर्ष 10 प्रसिद्ध महिला उद्यमियों के बारे में :-

वंदना लूथरा – वीएलसीसी की संस्थापक

VLCC ब्‍यूटी प्रोडक्‍ट के बारे में तो लगभग हर कोई जानता होगा। इस समय एशिया, अफ्रीका सहित 11 देशों में इनके प्रोडक्‍ट इस्‍तेमाल किए जाते हैं और इन सबका श्रेय जाता है वंदना लूथरा को। वह ब्यूटी एंड वेलनेस सेक्टर स्किल काउंसिल (B & WSSC) की चेयरपर्सन भी हैं l

वंदना लूथरा ब्यूटी और फिटनेस के क्षेत्र में जानामाना नाम है। भारत में उनकी कंपनी वीएलसीसी ने आज लोगों के बीच विशेष पहचान बनाई है।

अप्रैल 2013 में, उन्हें भारतीय राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया। वंदना लूथरा ख़ुशी नामक एनजीओ भी चला रही हैं, जो उन लोगों को मुफ्त शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति प्रदान करता है, जो शारीरिक रूप से विकलांग हैं।

फाल्गुनी नायर- न्याका की संस्थापक

फाल्गुनी नायर Nyka के संस्थापक और सीईओ हैं, जो ऑनलाइन सौंदर्य प्रसाधन और वेलनेस उत्पादों को बेचती है।

वह पहले कोटक महिंद्रा कैपिटल कंपनी के पूर्व प्रबंध निदेशक थी फिर 2012 में न्याका की स्थापना की थी और अपनी कंपनी शुरू करने के सपने को आगे बढ़ाने के लिए नौकरी छोड़ दी।

2017 में उन्हें बिजनेस टुडे द्वारा “सबसे शक्तिशाली व्यवसाय” का खिताब मिला और उन्हें इकोनॉमिक टाइम्स में “महिला अहेड” पुरस्कार भी मिला।

किरण मजूमदार शॉ – बायोकॉन लिमिटेड की संस्थापक

किरण मजूमदार-शॉ एक भारतीय महिला व्यवसायी टेक्नोक्रेट, अन्वेषक और बायोकॉन की संस्थापक है, वे बायोकॉन लिमिटेड की अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक तथा सिनजीन इंटरनेशनल लिमिटेड और क्लिनिजीन इंटरनेशनल लिमिटेड की अध्यक्ष हैं।

उन्होंने 1978 में बायोकॉन को शुरू किया और उत्पादों के अच्छी तरह से संतुलित व्यापार पोर्टफोलियो तथा मधुमेह, कैंसर-विज्ञान और आत्म-प्रतिरोध बीमारियों पर केंद्रित शोध के साथ इसे एक औद्योगिक एंजाइमों की निर्माण कंपनी से विकासित कर पूरी तरह से एकीकृत जैविक दवा कंपनी बनाई।

जहाँ तक उनकी योग्यता का सवाल है, उन्होंने अपनी स्नातक और मास्टर डिग्री क्रमशः बैंगलोर विश्वविद्यालय और मेलबर्न विश्वविद्यालय से की है।

2019 में, उन्होंने भारत के 54 वें सबसे अमीर और दुनिया की 65 वीं शक्तिशाली महिला का खिताब जीता।

प्रिया पॉल- पार्क होटल की चेयरपर्सन

प्रिया पॉल एक भारतीय महिला उद्यमी हैं, जो एपीजे (Apeejay) सुरेंद्र समूह की सहायक कंपनी, एपीजे सुरेंद्र पार्क होटल्स की चेयरपर्सन हैं,और “द पार्क होटल्स” श्रृंखला की होटलों का संचालन करती है।

उन्होंने वेलेस्ले कॉलेज (यूएस) से अपनी पढ़ाई खत्म करने के बाद, 21 साल की उम्र में “द पार्क” नई दिल्ली में मार्केटिंग मैनेजर के रूप में अपने पिता के साथ मार्केटिंग मैनेजर के रूप में काम करना शुरू कर दिया।

जनवरी 2012 के गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर प्रिया पॉल को भारत सरकार द्वारा पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

रितु कुमार – द फैशन डिज़ाइनर

रितु कुमार एक भारतीय फैशन डिजाइनर हैं उन्होंने कोलकाता में अपना फैशन करियर शुरू किया। प्रारंभ में वह दुल्हन के कपड़े बनाती थी।

कुछ समय के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रवेश किया और आज कई अलग-अलग शहरों फ्रांस और न्यूयॉर्क में अपना कारोबार चला रही है।

उनकी शिक्षा की बात की जाये तो उन्होने दिल्ली के लेडी इर्विन कालेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त कर अमेरिका में उच्च शिक्षा पूरी की।

उन्हें कई पुरस्कारों से भी नवाज़ा गया है उन्होंने 2012 में लोरियल पेरिस फेमिना वीमेन अवार्ड में अचीवमेंट अवार्ड जीता और 2013 में, उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्म श्री से सम्मानित किया।

श्रद्धा शर्मा- योरस्टोरी की संस्थापक

श्रद्धा शर्मा, YourStory की संस्थापक और सीईओ हैं, जो स्टार्टअप और उद्यमियों के लिए एक डिजिटल-मीडिया प्लेटफॉर्म है।

2008 में YourStory शुरू करने से पहले, श्रद्धा ने CNBC TV18 में सहायक उपाध्यक्ष के रूप में कार्य किया और द टाइम्स ऑफ़ इंडिया में एक ब्रांड सलाहकार भी थीं। श्रद्धा शर्मा ने “सेंट स्टीफन कॉलेज” दिल्ली से इतिहास में स्नातक और मास्टर डिग्री प्राप्त की।

श्रद्धा शर्मा को समावेशी स्टार्टअप समुदाय के निर्माण में उनके प्रयासों के लिए नैस्कॉम इकोसिस्टम इवेंजलिस्ट पुरस्कार प्राप्त हुआ है, इसके अलावा उन्हें 2010 में स्टार्टअप्स के कवरेज के लिए विल्ग्रो जर्नलिस्ट ऑफ़ द इयर पुरस्कार दिया गया था।

2015 में उन्हें दुनिया भर में 500 लिंक्डइन इन्फ्लुएंसर के बीच सूचीबद्ध किया गया था, और उसी वर्ष उन्हें ऑनलाइन इन्फ्लुएंस के लिए लोरियल पेरिस फेमिना पुरस्कार प्राप्त हुआ। 2016 में श्रद्धा शर्मा इंटरनेट श्रेणी के तहत लिंक्डइन में सबसे अधिक देखे जाने वाली सीईओ थीं l

अदिति गुप्ता – मेनस्ट्रुपेडिया की सह-संस्थापक

अदिति गुप्ता एक भारतीय लेखिका हैं और मेनस्ट्रूपीडिया कॉमिक की सह-संस्थापक हैं। वह और उनके पति, दोनों ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ डिज़ाइन एलुमनी, 2012 में मेनस्ट्रूपीडिया कॉमिक्स की स्थापना की।

2014 में उन्हें फोर्ब्स इंडिया अंडर 30 की सूची में नामित किया गया था। 2014 में, उन्होंने “मेनस्ट्रुपेडिया कॉमिक: द फ्रेंडली गाइड टू पीरियड्स टू गर्ल्स” कॉमिक बुक लॉन्च की और उन्हें बहुत सफलता मिली l

इस पुस्तक का स्पेनिश और नेपाली में अनुवाद किया गया है। मेनस्ट्रूपीडिया कॉमिक्स का उपयोग ब्राइट इंग्लिश स्कूल अहमदाबाद, इकोले मोंडिएल वर्ल्ड स्कूल, गल्र्स प्राइमरी स्कूल और कई अन्य लोगों द्वारा किया जाता है।

सुप्रिया पॉल- जोश वार्ता की संस्थापक

सुप्रिया पॉल जोश टॉक की निर्देशक और सीओ-फ़ाउंडर हैं। सुप्रिया ने शोभित बंगा के साथ 2015 में जोश वार्ता की स्थापना की।

आज यह भारत में सबसे तेजी से बढ़ता सामाजिक तकनीकी स्टार्टअप है जो हर महीने 45+ मिलियन तक पहुंच रहा है।

2018 में फोर्ब्स पत्रिका ‘एशिया अंडर 30’ में सुप्रिया को सूचीबद्ध किया गया था और उन्हें सर्वश्रेष्ठ सामग्री निर्माण के लिए “शेप पीपल डिजिटल वीमेन अवार्ड 17” प्राप्त हुआ।

25 जनवरी 2019 में सुप्रिया को भारत के माननीय राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद द्वारा जोश वार्ता के लिए राष्ट्रीय मीडिया पुरस्कार से सम्मानित किया।

राधिका घई अग्रवाल – शॉपक्लूज.कॉम की सह-संस्थापक और सीएमओ

राधिका घई अग्रवाल एक इंटरनेट उद्यमी और यूनिकॉर्न क्लब में प्रवेश करने वाली भारत की पहली महिला हैं। वह 2011 में सिलिकॉन वैली में स्थापित ऑनलाइन मार्केटप्लेस शॉपक्लूज की सह-संस्थापक हैं।

वर्तमान में वह कंपनी के मुख्य व्यवसाय अधिकारी के रूप में कार्य करती है। राधिका के पास रीटेल, ईकॉमर्स, फैशन और लाइफस्टाइल, विज्ञापन और जनसंपर्क (पब्लिक रिलेशन) जैसे विभिन्न इंडस्ट्री में मार्केटिंग का साढ़े दस साल से अधिक का अनुभव है l

अपने इस अनुभव के आधार पर उन्होंने शॉपक्लूस.कॉम की सह-स्थापना कीl इसकी स्थापना से पूर्व राधिका ने नॉर्डस्ट्रॉम के कॉर्पोरेट हेडक्वाटर में स्ट्रेटेजी प्लानिंग की फील्ड में काम कियाl

इसके अतिरिक्त उन्होंने न्यूयॉर्क और अमेरीका के मेनलो पार्क में अपने वेल्थ मैनेजमेंट ग्रुप में गोल्डमैन साक्स (Goldman Sachs) के साथ काम किया l उन्होंने वाशिंगटन यूनिवर्सिटी से एडवर्टाइजिंग और पब्लिक रिलेशन में एमबीए किया है l

शहनाज़ हुसैन – शहनाज़ हर्बल्स की सीईओ

“हर्बल ब्यूटी केयर की रानी” के नाम से जानी जाने वाली शहनाज़ हुसैन एक प्रमुख भारतीय महिला उद्यमी है जिन्हें अपने हर्बल सौंदर्य प्रसाधनों के लिए जाना जाता है जिनमें त्वचा की देखभाल के उत्पाद सबसे प्रमुख हैं।

शहनाज़ ने कलकत्ता में 1979 में पहला फ्रैंचाइज़ी क्लिनिक खोला और एक साल के भीतर, भारत में 80 शहनाज़ हर्बल फ्रैंचाइज़ी क्लीनिक थे। दुनिया भर में लगभग 600 फ्रेंचाइजी क्लीनिक हैं। शहनाज़ हुसैन का 138 देशों में कारोबार चल रहा है l

शहनाज हुसैन की शादी बहुत कम उम्र (16 वर्ष) में हो गई थी , लेकिन वह आज जहां हैं, वहां पहुंचने के लिए सभी बाधाओं से लड़ती हैं। 2006 में भारत सरकार द्वारा पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।

दुनिया की सबसे अमीर महिलाएं – 2020

दुनिया भर में धनी यानी अमीर लोगों की कमी नहीं है l इन अमीरों में कई ऐसे हैं जिन्होंने धन-सम्पति अपनी मेहनत और सूझ-बूझ से कमाई तो कई ऐसे हैं जिन्हें यह धन-सम्पदा विरासत में हासिल हुई l

आज की इस पोस्ट में हम ऐसे ही टॉप 5 अमीर लोगों के बारे में जानकारी लेकर आये हैं l दिलचस्प बात यह है कि ये सभी अमीर लोग महिलाएं हैं l

सभी जानते हैं कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कमतर नहीं हैं l इंजीनियरिंग हो चाहे बैंकिंग सेक्टर, राजनीति हो चाहे व्यवसाय, सिनेमा हो चाहे इंटरनेट हर जगह महिलाएं मजबूती के साथ अपनी मौजूदगी दर्ज़ करवा रही हैं l

तो यह रही, अमेरिकी मैगज़ीन फोर्ब्स के अनुसार वर्ष 2020 में दुनिया की पाँच सबसे अमीर महिलाएं

एलिस वॉल्ट्न

दुनिया में खुदरा बाज़ार की सबसे बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी वालमार्ट (Walmart) के संस्थापक सैम वाल्टन की बेटी एलिस वाल्टन दुनिया की सबसे अमीर महिला हैं।

वर्ष 2020 में फोर्ब्स  द्वारा जारी दुनिया की 10 सबसे अमीर महिलाओं की सूची में उनका नाम पहले स्थान पर है तथा इनकी कुल संपत्ति $54.4 बिलियन है।

हालाँकि ऐलिस को वालमार्ट में हिस्सेदारी पैतृक संपत्ति के तौर पर मिली है लेकिन उनकी विशेष रूचि कला के प्रोत्साहन तथा समाजसेवा के क्षेत्र में रही है।

वर्ष 2011 में उन्होंने क्रिस्टल ब्रिज म्यूज़ियम ऑफ़ अमेरिकन आर्ट (Crystal Bridges Museum of American Art) की स्थापना की है।

इसके साथ ही उन्होंने अमेरिका की स्वास्थ्य समस्याओं को दूर करने के लिए एक विशाल हॉस्पिटल की स्थापना की घोषणा की है।

फ्रांस्वा बैटनकोर्ट

सौंदर्य प्रसाधन बनाने वाली विश्व प्रसिद्ध फ़्रांसीसी कंपनी लोरेअल (L’Oreal) की मालकिन फ्रांस्वा बेटनकोर्ट वर्तमान में दुनिया की सबसे अमीर महिलाओं में से एक हैं।

वर्ष 2020 में फोर्ब्स द्वारा जारी दुनिया की 10 सबसे अमीर महिलाओं की सूची में फ्रांस्वा का नाम दूसरे स्थान पर है तथा इनकी कुल संपत्ति $48.9 बिलियन है।

हम आपको बताते चलें कि लोरेअल कंपनी की स्थापना वर्ष 1909 में यूजीन शुलर द्वारा की गई थी जो कि फ्रांस्वा के नाना थे।

यूजीन शुलर की मौत के बाद इस कंपनी का कार्यभार लिलियन बेटनकोर्ट को जो कि फ्रांस्वा की माँ थी तथा वर्ष 2017 में लिलियन बेटनकोर्ट की मौत के बाद फ्रांस्वा बेटनकोर्ट लोरेअल की मालकिन बनीं।

जूलिया कोच

अमेरिकी कंपनी कोच इंडस्ट्रीज (Koch Industries) के पूर्व मालिक डेविड कोच की विधवा जूलिया कोच वर्तमान में दुनिया की तीसरी सबसे अमीर महिला हैं।

वर्ष 2020 में फोर्ब्स द्वारा जारी दुनिया की 10 सबसे अमीर महिलाओं की सूची में जूलिया कोच का नाम तीसरे स्थान पर है तथा इनकी कुल संपत्ति $38.2 बिलियन है।

वर्ष 2019 में इनके पति की मौत के बाद कोच इंडस्ट्रीज की 46 प्रतिशत हिस्सेदारी जूलिया को प्राप्त हुई। इसी वजह से उनका नाम वर्ष 2020 के फोर्ब्स की सूची में शामिल किया गया।

कोच इंडस्ट्रीज इंजीनियरिंग तथा रसायनिक उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। इनके पति डेविड एक व्यवसायी होने के साथ-साथ राजनीतिज्ञ, समाजसेवी तथा रसायनिक इंजीनियर भी थे।

मैकेंज़ी बेज़ोस

दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति तथा अमेज़न (Amazon) के संस्थापक जेफ़ बेज़ोस की पूर्व पत्नी मैकेंज़ी बेज़ोस (वास्तविक नाम मैकेंज़ी स्कॉट) दुनिया की चौथी सबसे अमीर महिला हैं।

वर्ष 2020 में फोर्ब्स द्वारा जारी दुनिया की 10 सबसे अमीर महिलाओं की सूची में मैकेंज़ी का नाम चौथे स्थान पर है तथा इनकी कुल संपत्ति $36 बिलियन है।

48 वर्षीय मैकेंजी ने दुनिया का सबसे महंगा तलाक लिया है। मैकेंजी को कंपनी के 25% शेयर मिले हैं। आप को बता दें कि मैकेंजी अमेज़न की पहली कर्मचारी भी थी।

मैकेंजी एक उपन्यासकार हैं।  मैकेंजी ने डी टेस्टिंग ऑफ़ लूथर अलब्राइट और ट्रैप्स सहित कई किताबें भी लिखी हैं। दिलचस्प बात यह है कि अमेज़न की कामयाबी में मैकेंजी की बहुत भूमिका है।

वर्ष 2019 में जेफ़ बेज़ोस से तलाक के बाद इन्हें मुआवजे के तौर पर $36 बिलियन की संपत्ति प्राप्त हुई जिसके बाद वो उस साल दुनिया की पाँचवी सबसे अमीर महिला बनीं।

हालाँकि व्यक्तिगत रूप से उपन्यासकार, उद्यमी तथा समाजसेवी मैकेंज़ी ने यह घोषणा की है की वह अपनी संपत्ति का आधा हिस्सा चैरिटी में दान कर देंगी।

जैकलीन मार्स

अमेरिकी मल्टीनेशनल कंपनी मार्स, इंकॉर्पोरेटेड (Mars, Incorporated) के संस्थापक फ्रैंकलिन मार्स की पोती जैकलीन मार्स दुनिया की 5वीं सबसे अमीर महिला हैं।

वर्ष 2020 में फोर्ब्स द्वारा जारी दुनिया की 10 सबसे अमीर महिलाओं की सूची में जैकलीन का नाम पांचवे स्थान पर है तथा इनकी कुल संपत्ति $24.7 बिलियन है।

मार्स इंकॉर्पोरेटेड कंपनी पूरी दुनिया में अपने चॉकलेट, कैंडी, फ़ूड प्रोडक्ट्स, ड्रिंक्स और कन्फेक्शनरी, आदि के लिए विख्यात है।

जानिए अमरुद खाने से होने वाले जबदस्त फायदें

अमरूद बहुत से लोगों का पसंदीदा फल है। अमरुद खाने का मज़ा ही कुछ अलग है। इसमें विटामिन सी, कैल्शियम और आयरन होता है।

ऐसे पोषक तत्वों से भरपूर अमरुद  का सेवन हमारी सेहत के लिए बहुत अच्छा होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अमरुद खाने के अलग-अलग फायदे हैं। आइए जानें कि अमरुद खाने से शरीर को क्या-क्या फायदें होते हैं।

पेट की समस्या से राहत मिलती है

पेट खराब होने की समस्या अक्सर होती है। उपाय के तौर पर पके हुए अमरूद के टुकड़ों को नमक के साथ खाएं। इससे पेट की समस्या ठीक होती है। अमरुद के बीज पेट साफ करने में मदद करते हैं।

पेट साफ हो जाता है

कई लोग कब्ज की समस्या से पीड़ित रहते हैं ऐसे व्यक्तियों को प्रतिदिन नाश्ते में हो सके तो अमरुद खाना चाहिए। यदि आप कब्ज से पीड़ित हैं, तो आपको सुबह और शाम अमरुद  खाने से फायदा होगा।

गैस एसिडिटी पर प्रभावी है

यदि गैस, एसिडिटी की समस्या हो तो अमरुद  के बीज कारगर हैं। यह गैस और अपच की समस्या को भी खत्म करता है।

खून की कमी को पूरा करता है

इसमें आयरन और विटामिन सी  भरपूर मात्रा में होता है, आयरन हीमोग्लोबिन बढ़ाने का काम करता है। विटामिन सी शरीर में आयरन को अवशोषित करने में मदद करता है।

ये दोनों कारक हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए आवश्यक हैं। एनीमिया से पीड़ित लोगों को अमरूद का सेवन करना फायदेमंद होता है।

बवासीर पर फायदेमंद है

बवासीर होने की स्थिति में अमरुद का छिलका बहुत फायदेमंद होता है। अमरुद का जूस पीने से भी बवासीर की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। बवासीर के रोगियों को इस जूस को कम से कम 1 महीने तक लगातार पीना चाहिए।

विशेषज्ञों के अनुसार अमरूद की पत्तियां चबाने से शरीर का बुखार कम हो जाता है। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को अमरूद खाने से बचना चाहिए।

यह ठंडा होता है इसलिए इसमें अधिक रेशेदार तत्व होते हैं। इससे गर्भवती महिलाओं को दस्त हो सकते हैं और स्तनपान कराने वाली महिलाओं में जुकाम हो सकता है।

जानिए क्यों आयुर्वेद में तुलसी के पत्तों को चबाने की मनाही है।

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तुलसी के पौधे का धार्मिक और आयुर्वेदिक दृष्टि से विशेष महत्‍व है। एक ओर जहां हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे की पूजा की जाती है, तो वहीँ दूसरी ओर इसके सेवन से कई बीमारियां भी ठीक होती हैं।

आयुर्वेद में तुलसी के पत्तों का औषधीय रूप से उपयोग किया जाता है। इसमें औषधीय गुण भी पाए जाते  हैं। आयुर्वेद में तुलसी को सेहत के लिए फायदेमंद बताया गया है।

इसमें माइक्रोबियल-रोधी, सूजन-रोधी, गठिया-रोधी, लिवर को सुरक्षा देने वाले, डायबिटीज-रोधी और दमा-रोधी गुण पाए जाते हैं l

आइए जानते हैं तुलसी कैसे शरीर के लिए असरकारक औषधि का काम करती है :-

डॉक्टर कोरोना वायरस के लिए भी तुलसी के पत्तों के काढ़े की सलाह देते हैं। तुलसी के पत्ते मौसमी बुखार और सर्दी, खांसी के लिए भी रामबाण इलाज है।

आयुर्वेद में भी तुलसी के पत्ते की चाय पीने की सलाह दी जाती है। इससे कई बीमारियों से राहत मिलती है। हालाँकि आयुर्वेद में तुलसी के पत्तों को चबाना मना है।

इसलिए तुलसी के पत्तों को नहीं चबाते

तुलसी की पत्तियों में काफी मात्रा में लौह तत्व व पारा पाया जाता है, जो हमारे दांतों को नुकसान पहुंचा सकता है इसलिए आयुर्वेद में तुलसी को चबाने से मना किया गया है।

इसके अलावा तुलसी के पत्ते में कुछ मात्रा में आर्सेनिक भी पाया जाता है, जो दांतों को नुकसान पहुंचा सकता है। यदि प्रतिदिन तुलसी की पत्तियों को चबाएंगे तो वह मुंह में मौजूद क्षार तत्वों से मिल जाने पर दांतो में सड़न संबंधित खतरा बढ़ जाता है।

तुलसी की पत्तियां प्राकृतिक रूप से में थोड़ी अम्लीय यानि एसिडिक होती हैं, जिससे दांतों में दर्द की शिकायत हो सकती है इसलिए तुलसी के पत्ते लेते समय ध्यान रखें कि इसे चबाने के बजाय चाय या अर्क बनाकर इनका सेवन करना बेहतर है।

इम्यून सिस्टम को बेहतर करती है तुलसी

आपको ये जानकर हैरान होगी कि तुलसी मानसिक तनाव को कम करने के साथ-साथ इम्यून सिस्टम को भी ठीक करती है। अनेक शोध में पता चला है कि तुलसी में एंटी-स्ट्रेस गुण पाए जाते हैं।

इसके अलावा तुलसी शरीर में कोर्टिसोल के स्तर को भी संतुलित करती है। गौरतलब है कि कोर्टिसोल एक प्रकार का हार्मोन होता है, जिसका संबंध मानसिक तनाव से होता है।

तुलसी से श्वसन संबंधी बीमारियों, ब्रोंकाइटिस, फेफड़ों आदि का संक्रमण भी दूर हो जाता है।

तुलसी के पत्तों का सेवन कैसे करें

सबसे सरल और आसान तरीका तुलसी के पत्तों से बनी चाय पीना है। इसके लिए तुलसी के पत्तों को पानी में उबालें और इसका सेवन करें।

यदि आप चाहें, तो आप अपनी पसंद के लिए अन्य मसाले और जड़ी बूटियों को भी जोड़ सकते हैं। इस चाय को पीने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह कैफीन मुक्त है।

तुलसी के पत्ते खाने से उच्च रक्तचाप कम होता है। रोजाना तुलसी के पत्ते की चाय पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है।

बिठूर गाँव – जोकि ऐतिहासिक घटनाओं का गवाह है l

“बिठूर गाँव” जिसने भारत के इतिहास की कई महत्वपूर्ण घटनाओं को देखा है। इस खूबसूरत गाँव का उल्लेख भारत में प्राचीन काल से है।

कहा जाता है कि कई ऐतिहासिक घटनाएं यहां हुई थीं। बिठूर, उत्तर प्रदेश में कानपुर के पश्चिमोत्तर दिशा में स्थित एक नगरपंचायत है।

मेरठ के अलावा बिठूर में भी सन 1857 में भारतीय स्वतंत्रता का प्रथम संग्राम का श्रीगणेश हुआ था। यह शहर उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर से 22 किलोमीटर दूर कन्नौज रोड पर स्थित है।

तो आइये जानते हैं बिठूर गाँव के बारे में

  • बिठूर उत्तर प्रदेश में गंगा किनारे एक ऐसा छोटा सा क़स्बा है जो किसी ज़माने में सत्ता का केंद्र हुआ करता था।
  • कानपुर के पास आज यहाँ की पुरानी ऐतिहासिक इमारतें और मंदिर जीर्ण-शीर्ण हालत में पड़ी हैं; लेकिन स्थानीय लोगों के पास इतिहास की वो यादें हैं जिनका पाठ हर बच्चे को स्कूल में पढ़ाया जाता है।
  • नानाराव, तात्या टोपे 1857 के विद्रोह के मुख्य नेता थे। आज भी, टोपे परिवार के सदस्य यहां रहते हैं।
  • उसी दौर में कानपुर से अपनी जान बचाकर भाग रहे अंग्रेज़ों को सतीचौरा घाट पर मौत के घाट उतार दिया गया। बाद में उसके बदले में अंग्रेज़ों ने गाँव के गाँव तबाह कर दिए और एक एक को पेड़ से लटका कर फाँसी दे दी।
  • वाल्मीकि का जन्म इसी गाँव में हुआ था और यहीं पर वाल्मीकि ने तपस्या के माध्यम से रामायण की रचना की थी।
  • जीत के बाद अँग्रेज़ों ने बिठूर में नानाराव पेशवा के महल को तो मटियामेट कर ही दिया था l जब ताँत्या टोपे के रिश्तेदारों को 1860 में ग्वालियर जेल से रिहा किया गया तो उन्होंने बिठूर लौटकर पाया कि उनका घर भी जला दिया गया है।
  • रानी लक्ष्मीबाई, जिन्होंने अंग्रेजों के लिए बहादुरी से लड़ाई लड़ी और कहा कि वह मैं मेरी झांसी को नहीं छोड़ेंगी, उन्होंने अपना बचपन इसी गांव में बिताया।
  • इस गांव को 52 घाटों के शहर के रूप में जाना जाता है, परन्तु इस गाँव में अब  केवल 29 घाट बचे हैं।
  • जिस वाल्मीकि ऋषि के आश्रम में सीता माता  ने अपने पुत्रों लव और कुश को जन्म दिया, वह आश्रम थोड़ी ही दूर पर एक पहाड़ी पर है।
  •  पठार घाट पर एक भव्य शिव मंदिर भी है।
  • यहीं पर ब्रह्मा ने ब्रह्मांड का निर्माण किया और फिर अश्वमेध यज्ञ किया था।

रोचक तथ्य: एप्पल के स्टीव जॉब्स की कार पर कभी नंबर प्लेट क्यों नहीं लगी?

स्टीव जॉब्स को कौन नहीं जानता। अगर आपने “एप्पल” का iPhone, iPad या iMac फोन या कंप्यूटर यूज किया है तो फिर तो जानते ही होंगे. अगर आप फिर भी नहीं जानते हैं तो आपको बता दें की दुनिया के सबसे तेज, टेक्नोलॉजी में बेजोड़, टिकाऊ और महंगे फोन बनाने वाली कंपनी “एप्पल” के संस्थापक थे स्टीव जॉब्स, जिनका 5 अक्टूबर 2011 को निधन हो गया था.

Steve Jobs - Stay Hungry Stay Foolishहालांकि, स्टीव अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि जब वो अपनी कार चलाते थे तो उस पर नंबर प्लेट कभी नहीं लगाते थे। फिर भी ना ही उन्हें कभी पुलिस ने पकड़ा और ना ही कभी उन पर कभी कानूनी कार्यवाही हुई ।

शायद आप जानते होंगे कि संयुक्त राज्य अमेरिका के क़ानून काफी सख्त हैं और उनका पालन भी कड़े तरीके से करवाया जाता है. आपने कई सेलिब्रिटी का चालान किये जाने की ख़बरें भी पढ़ी होंगी.

तो अगर आपको लगता है कि स्टीव जॉब्स इतने बड़े आदमी या सेलिब्रिटी होने की वजह से बच जाते थे?

या क्या हर बार पकड़े जाने पर वह सिर्फ जुर्माना भर कर छूट जाते थे? धन की कमी तो थी नहीं ! या क्या उन्हें कैलिफ़ोर्निया प्रान्त सरकार ने उनको विशेष छूट दे रखी थी?

वे यातायात क़ानून से कैसे बचे रहे? इसके पीछे की कहानी काफी दिलचस्प है.

स्टीव जॉब्स के पास सिल्वर कलर की बिना नंबर की Mercedes SL55 AMG रहती थी। इस पर उन्होंने कभी नंबर प्लेट नहीं लगाई. दरअसल जॉब्स ने कैलिफोर्निया के एक परिवहन क़ानून का फायदा उठाया जिसके अनुसार किसी नयी गाड़ी पर 6 महीने तक नंबर प्लेट न लगाने की छूट रहती है।

स्टीव की कार जॉब्स पार्किंग में अपंग लोगों के लिए बनाई गई पार्किंग में खड़ी है

तो इस के लिए जॉब्स ने कार (leasing ) कंपनी के साथ एक व्यवस्था की, कि कम्पनी लीज़(lease) के छठे महीने के दौरान स्टीव जॉब्स की कार को नई कार से बदल देगी, एक हूबहू सिल्वर मर्सिडीज SL55 AMG के साथ। और इस प्रकार नंबर प्लेट को लगाने की कोई कानूनी आवश्यकता ही नहीं रही थी।

स्टीव जॉब्स की कार में नंबर प्लेट न होने की क्या थी वजह

अब आप सोच रहे होंगे कि स्टीव जॉब्स ऐसा क्यों करते थे? इसके पीछे की वजह यह है कि स्टीव चाहते थे कि उन्हें कोई ट्रैक ना कर सके।

“क्योंकि लोग कभी-कभी मेरा पीछा करते हैं, और अगर मेरे पास लाइसेंस प्लेट होगी तो वे पता कर लेंगे कि मैं कहाँ रहता हूँ”, वाल्टर इसाकसन(Walter Isaacson) द्वारा स्टीव जॉब्स की जीवनी के एक अंश के अनुसार स्टीव जॉब्स ने कहा था.

हालाँकि जॉब्स मानते थे की गूगल मैप के आ जाने से यह अब तर्कसंगत नहीं रह गया था. फिर भी वे संतुष्ट थे कि यह करना उन्हें अच्छा लगता था.

आखिर एक जीनियस और “हट के” व्यक्ति का शौक कर सोच भी स्पेशल और “हट के” ही होंगे, है ना!

वैसे आपने ऊपर कार की तस्वीर में एक बात नोट की होगी। स्टीव की कार जॉब्स पार्किंग में अपंग लोगों के लिए बनाई गई पार्किंग में खड़ी है. दरअसल स्टीव जॉब्स अपंगों के लिए बनाई गई पार्किंग में अपनी कार पार्क करने के लिए भी “कुख्यात” थे 🙂

हावड़ा ब्रिज से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

कोलकाता का हावड़ा ब्रिज दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। इस पुल का निर्माण ब्रिटिश राज में साल 1936 में शुरू हुआ था l 3 फ़रवरी 1943 को इसे जनता के लिए खोल दिया था। यह दुनिया का सबसे व्यस्त पुल है।

अंग्रेजों ने जब इस पुल को बनाने के बारे में सोचा तो वे ऐसा पुल बनाना चाहते थे जिससे कि नदी का जल मार्ग न रुके और पुल के नीचे कोई खंभा भी न हो।

ऊपर पुल बन जाए और नीचे हुगली नदी में पानी के जहाज और नाव भी बिना रुके चलते रहें। जोकि ये झूला अथवा कैंटिलिवर पुल से ही संभव था।

हावड़ा ब्रिज से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

  • आज जहाँ हावड़ा ब्रिज है दरअसल वहाँ कभी पोंटून (Pontoon) सेतु था, जिसे विकसित करके हावड़ा ब्रिज बनाया गया। शुरुआत में इसका नाम ‘न्यू हावड़ा ब्रिज’ था। 14 जून, 1965 में बंगला साहित्य के महान कवि; प्रथम एशियाई और प्रथम भारतीय नोबेल पुरष्कार विजेता ‘रवींद्रनाथ टैगोर’ के सम्मान में इसका नाम बदलकर ‘रवीन्द्र सेतु’ कर दिया गया लेकिन यह आज भी इसे हावड़ा ब्रिज के नाम से ही जाना जाता है।
  • यह पुल 2,313 फ़ीट लम्बा और 269 फ़ीट ऊँचा है। इसकी चौड़ाई 71 फ़ीट है, जिसमें दोनों तरफ 15-15 फ़ीट चौड़े दो फूटपाथ भी हैं। यह पूरा पुल उच्च-तन्य मिश्रधातु (High-tensile alloy) स्टील का बना हुआ है, जिसे Tiscrom कहा जाता है।
  • हावड़ा ब्रिज पर हर रोज 1 लाख से भी ज्यादा गाड़ियाँ गुजरती हैं और 5 लाख पैदलयात्री (वर्तमान में इससे भी ज्यादा) इस पर चलते हैं।
  • अपने निर्माण के समय यह पूरे विश्व में तीसरा सबसे लम्बा पुल था। आज यह अपनी तरह का विश्व का छठा सबसे लम्बा पुल है। हावड़ा ब्रिज के देखभाल की जिम्मेदारी ‘कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट (KoPT)’ की है। इस ट्रस्ट की स्थापना हावड़ा ब्रिज के स्थापना सन् 1870 में हुई थी l
  • इस पुल के निर्माण के लिए तत्कालीन बंगाल सरकार के द्वारा एक एक्ट पारित किया गया,जिसे हावड़ा पुल अधिनियम, 1926 नाम दिया गया।
  • इस पूरे ब्रिज का डिज़ाइन Rendel, Palmer और Tritton के द्वारा किया गया था। अनुमान यह है कि इस बड़े पुल के निर्माण की राशि 333 करोड़ रुपए थी। यह दुनिया में ब्रैकट पुल से एक है। यह पुल 75 साल पुराना है। इसे बनने में लगभग 6 साल लगे। 3 फ़रवरी, 1943 में इसका इस्तेमाल शुरू हुआ, जो आज तक जारी है।
  • इसे बनाने में 26,500 टन स्टील की खपत हुई थी, जिसमें से 87% स्टील ‘टाटा स्टील कम्पनी’ द्वारा ख़रीदा गया था। इस परियोजना के लिए सारी स्टील इंग्लैंड से लायी जा रही थी लेकिन जापान के धमकी की वजह से सिर्फ 3000 टन स्टील ही लाया जा सका। बाकि स्टील की खरीद ‘टाटा स्टील’ से की गयी।
  • पुल का उपयोग करने वाला पहला वाहन “ट्राम” (ट्रॉली कार)था।
  • गर्मियों के दिनों में इसकी लम्बाई करीब 3 फ़ीट तक बढ़ जाती है, क्योंकि अधिक तापमान में धातु (स्टील) पिघलती और फैलती है।
  • इसकी क्षमता 60,000 टन वजन सहने की है लेकिन बढ़ती जनसंख्या ने ट्रैफिक को इतना बढ़ा दिया कि आज हावड़ा ब्रिज पर हर समय 90,000 टन का वजन रहता है इसीलिए कई ट्रामों और ज्यादा वजनी ट्रकों को दूसरे रास्तों या पुलों पर स्थानांतरित किया जा रहा है।
  • इस ब्रिज को बनाने के कॉन्ट्रैक्ट के लिए 20 से भी ज्यादा कम्पनियों को चुना गया था l 1935 में इसका कॉन्ट्रैक्ट एक ब्रिटिश कम्पनी क्लीवलैंड ब्रिज एंड इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड को दिया गया था लेकिन इसकी संरचना ब्रेथवेट बर्न एंड जेसोप कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड नामक कम्पनी द्वारा किया गया।
  • 2006 के शुरुआत में इसकी मरम्मत करवाई गयी थी, जिसमें 8 टन स्टील की खपत हुई थी। इस पूरे प्रक्रिया में 50 लाख रूपये खर्च हुए थे।
  • पक्षियों द्वाराहावड़ा ब्रिज पर की जाने वाली गन्दगी से कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट काफी परेशान है क्योंकि इससे ब्रिज की रासायनिक क्षति हो रही है इसलिए ट्रस्ट हर साल ब्रिज से पक्षियों की गन्दगी हटाने के लिए 5 लाख का कॉन्ट्रैक्ट देता है।
  • आपको को जानकर हैरानी होगी कि हावड़ा ब्रिज ने लगभग हर दौर के फिल्म निर्माताओं को आकर्षित किया है। इसने कई हिंदी, मलयालम, बंगाली, तमिल, अंग्रेजी इत्यादि फिल्मों में अभिनय किया है। यहाँ शूट की गई फ़िल्मों में हावड़ा ब्रिज ,गुंडे, बर्फी, लव आज-कल, तमिल फ़िल्म आधार, मलयालम फ़िल्म कलकत्ता न्यूज़, रोलैंड जोफ़े की अंग्रेज़ी भाषा की फ़िल्म सिटी ऑफ़ जॉय शामिल है।
  • सात दशकों से अधिक समय तक वहां रहने के बाद, हावड़ा ब्रिज ने विश्व की कुछ प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं को देखा है, जिसमें द्वितीय विश्व युद्ध भी शामिल है।

जानिए क्यों है गुरुडोंगमार झील सिक्किम की शान

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गुरुडोंगमार झील

सिक्किम हिमालय में स्थित एक बहुत ही शांत, सुंदर और मनभावन स्थान है और यहीं बसी है गुरुडोंगमार झील l यह दुनिया की सबसे ऊंची झीलों में से एक है।

यह खूबसूरत नीले पानी की झील साल के अधिकांश समय जमी रहती है, लेकिन इसकी खासियत यह है कि अत्यधिक ठंड में भी इस झील का एक हिस्सा कभी नहीं जमता।

चारों तरफ से पहाड़ों से घिरी यह झील समुद्र तल से 5430 मीटर ऊपर है, जो लगभग 16 से 17 हजार फीट है। यह झील कंचनजंगा पर्वतमला के उत्तर पूर्व में स्थित है। यह चीन की सीमा से केवल 5 किलोमीटर की दूरी पर है।

इस लेक की खूबसूरती की जितनी तारीफ की जाए कम ही है। दूर-दूर तक फैला इसका नीला पानी और चारों तरफ घिरे पहाड़ इसे ‘जन्नत’ जैसा रूप देते हैं। इस लेक को बौध, सिख और हिंदुओं का पवित्र स्थल माना जाता है।

सर्दियों के मौसम में बर्फ से जमी गुरुडोंगमार झील

धार्मिक रूप से यह झील बौद्ध और सिक्ख धर्म, दोनो का पवित्र स्थल है। कहा जाता है कि जब गुरु पद्मसम्भवा तिब्बत की यात्रा में थे तब उन्होंने इस झील को ही अपनी उपासना के लिए सबसे सही जगह के रूप में चुना था।

माना जाता है कि झील में हमेशा बर्फ जमी रहती थी और यहां पीने के पानी का अभाव था। जब गुरू पद्मसंभव यहां से गुजर तो स्थानीय लोगों ने उनसे पानी की व्यवस्था करने को कहा।

लोगों की इस समस्या से निदान के लिए गुरू ने झील का एक हिस्सा स्पर्श किया और बर्फ पिघल गई। कहा जाता है कि कडाके की ठंड में भी झील का यह हिस्सा बर्फ में तब्दील नहीं होता।

तब से ही यह धार्मिक स्थल के रूप में जाना जाने लगा और श्रद्धालु अपने अपने बर्तनों में झील के उस हिस्से का पानी अपने साथ ले जाते हैं।

इसी तरह गुरु नानक जी से भी संबंधित कथा यहाँ पर प्रचलित है। उनकी भी कथा गुरु पद्मसम्भवा की कथा से मिलती जुलती है।

माना जाता है कि जब गुरू नानकदेव जी तिब्बत के रास्ते से जा रहे थे तो जाते हुए उन्हें प्यास लगी तब वे अपनी प्यास बुझाने के लिए तिब्बत रुके थे उन्होंने अपनी छड़ी से यहां जमी बर्फ में छेद कर पानी पीया और तभी से यहां झील बन गई। कहा जाता है कि भीषण सर्दी के दौरान भी इस झील का कुछ हिस्सा नहीं जमता।

दूर दूर तक फैला नीला जल और पार्श्व में बर्फ से लदी श्वेत चोटियाँ गाहे बगाहे आते जाते बादलों के झुंड से गुफ्तगू करती दिखाई पड़ती हैं।

झील के दूसरी ओर सुनहरे पत्थरों के पीछे गहरे नीले आकाश एक और खूबसूरत परिदृश्य को दर्शाते हैं। यहाँ झील के किनारे एक सर्वधर्म प्रार्थना स्थल भी है।

गढ़कुंडार – जानिए भारत के इस रहस्यमय किले के बारे में

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भारत में कई ऐतिहासिक स्मारक हैं जिनमें राजाओं और महाराजाओं के शासनकाल के दौरान निर्मित कई किले हैं। इनमें से कई किले ऐसे हैं जो अभी भी रहस्य में डूबे हुए हैं।

गढ़कुंडार किला इन्ही किलों में से एक है। यह किला उत्तर प्रदेश राज्य में झाँसी के पास लगभग सत्तर किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

किले में अभी भी 11 वीं शताब्दी में निर्मित पांच मंजिला संरचना है। इन पांच मंजिलों में से तीन मंजिलें जमीनी स्तर से नीचे हैं और दो मंजिलें जमीनी स्तर से ऊपर हैं।

ऐसा अनुमान है कि किले को कम से कम पंद्रह से दो हजार साल पहले बनाया गया था। उस समय प्रांत पर चंदेल, बुंदेल और खंगार वंश के राजाओं का शासन था।

यह किला सुरक्षा के दृष्टिकोण से बहुत मजबूत और बहुत महत्वपूर्ण है। यह किला भारत के सबसे रहस्यमय किलों में गिना जाता है।

काफी समय पहले की बात है यहां पास के ही गांव में एक बरात आई थी। बरात यहां किले में घूमने आई। घूमते-घूमते वो लोग बेसमेंट में चले गए, जिसके बाद वो रहस्यमयी तरीके से अचानक गायब हो गए। जिसके बाद किले के नीचे जाने वाले सभी दरवाजों को बंद कर दिया गया।

किले में प्रवेश करने के सभी मौजूदा द्वार स्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं। यह किला किसी भूल-भुलैय्या की तरह है। किले के अंदर अंधेरा रहने के कारण दिन में भी यह डरावना लगता है।

कहा जाता है कि इस किले में एक खजाने का रहस्य भी छुपा हुआ है इसलिए खजाने को खोजने के लिए कई शौकिया मंडलियां यहां आती थीं।

हालांकि किसी का प्रयास सफल नहीं हुआ, और खजाने की खोज के कारण कई मंडलियां किले से गायब हो गईं। आज तक यह स्पष्ट नहीं है कि वे सभी लोग आखिर कहां गायब हो गए

डिप्रेशन से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

डिप्रेशन एक मानसिक बीमारी है, जो कुछ लोगों को तो थोड़े समय के लिए ही रहती है, लेकिन कई लोगों का यही डिप्रेशन एक भयानक रूप भी ले लेता है, इस स्थिति में लोगों का मन ज़िंदगी से भर जाता है. इसी कारण इंसान की रोजमर्रा ज़िंदगी और उसके कामकाज में बुरा प्रभाव पड़ता है.

कुछ अरसा पहले हमने डिप्रेशन पर यह तथ्यात्मक एक लेख पोस्ट किया था जिस पर पाठकों की काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली जिससे उत्साहित होकर हमने इस पोस्ट के पुराने शीर्षक  डिप्रेशन क्या है? इसके लक्षण और इससे कैसे बचा जा सकता है? पर एक “कारण और निवारण” टाइप का  एक समग्र लेख पोस्ट किया है, जबकि पुरानी तथ्यात्मक पोस्ट को यहाँ स्थानांतरित किया है.

तो ये रहे डिप्रेशन से जुड़े कुछ रोचक तथ्य:

  1. यह बात सिद्ध हुई है कि पूरी दुनिया में 35 करोड़ लोग डिप्रेशन के शिकार हैं.
  2. डिप्रेशन होने के मुख्य लक्षण है, जैसे- निरंतर चिंता करना, काम में मन न लगना, छोटी छोटी बातों पर गुस्सा करना, कम बोलना आदि.
  3. डिप्रेशन में इंसान ऐसे खतरनाक कदम उठाता है, जो उसे नहीं उठाने चाहिए, जैसे कि शरीर को नुकसान पहुंचाना, आत्महत्या करने की कोशिश करना आदि.
  4. ऐसा माना जाता है कि 2030 तक आते- आते डिप्रेशन मनुष्य पर इतना हावी हो जाएगा कि मनुष्य की असमर्थता का दूसरा सबसे बड़ा कारण होगा.
  5. ऐसा नहीं है डिप्रेशन कोई अभी की बीमारी है, यह हमारे पूर्वजों के ज़माने से चली आ रही है, परंतु चिंता का विषय यह है कि 21वीं सदी में इसका प्रभाव पहले से 10 गुना ज़्यादा बढ़ गया है.
  6. महिलाएं पुरुषों के मुकाबले डिप्रेशन की शिकार ज़्यादा होती हैं.
  7. आजकल लोग इंटरनेट (फेसबुक, वाट्सएप) पर फालतू समय व्यतीत करते है, वह अक्सर मानसिक परेशानियों में रहते हैं.
  8. डिप्रेशन की वजह से इंसान अपना लगभग 65% समय तो चिंता में गुज़ार देते हैं.
  9. इंसान 18 से 33 साल की उम्र तक सबसे ज़्यादा तनाव महसूस करता हैं.
  10. तनाव में रहने वाला इंसान खुद से और दूसरों से झूठ बोलने की आदत बना लेता है और वह इंसान हमेशा परिस्थितियों का सामना करने से कतराता है.

डिप्रेशन के समय इंसान यह सोचता है कि वह ज़िंदगी में कुछ नहीं कर सकता और वह अपनी हार स्वीकार कर लेता है. तो आइए जानते हैं इंसान डिप्रेशन से कैसे छुटकारा पा सकते हैं…….

  1. यदि आपको लगता है कि आप डिप्रेशन में जा रहे हैं, तो आप किसी मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर (mental health professional) की सहायता ले सकते हैं.
  2. अगर आप इससे बाहर आना चाहते है, तो आप इसकी वजह जानें और फिर सोचे कि उस वजह से कैसे बाहर निकल सकते हैं.
  3. “कल क्या होगा” यह सोच- सोच कर हम अपनी परेशानियों को और भी बढ़ा देते है, इसलिए हमें आज के बारे में ही सोचना चाहिए और आज को बेहतर बनाने की कोशिश करनी चाहिए.
  4. तनाव या दबाव को दूर करने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप गाने सुनें. इससे तनाव में कमी आती है और इससे इंसान खुद को तरोताज़ा महसूस करता है.
  5. इंसान डिप्रेशन को कम करने के लिए अक्सर शराब, ड्रग्स और नशीली चीज़ों का सहारा लेता है. नशीली चीज़ों का सेवन करने से कुछ देर के लिए तनाव दूर हो जाता है, लेकिन धीरे- धीरे इसकी लत बन जाती है. इसलिए इंसान को नशीली चीज़ों से दूर ही रहना चाहिए.

अंत में हमारा यही सुझाव है कि इंसान अपनी समस्याओं को छुपाते हैं और उन्हें लगता है कि दूसरों को बताएंगे, तो उनका मज़ाक ना बन जाएँ. यह रवैया इंसान की दिक्कत को कम करने की बजाय और भी बढ़ा देता है. यदि आप बहुत ज़्यादा तनाव महसूस कर रहे हैं, तो किसी मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक के पास ज़रूर जाएं.

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