अनोखा मेला : जानिए पत्थर बरसाने वाले गोटमार मेले की कहानी

गोटमार मेले का आयोजन महाराष्ट्र की सीमा से लगे मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के पांढुरना कस्बे में हर वर्ष भादो मास के कृष्ण पक्ष में अमावस्या पोला त्योहार के दूसरे दिन किया जाता है।

मराठी भाषा बोलने वाले नागरिकों की इस क्षेत्र में बहुलता है और मराठी भाषा में गोटमार का अर्थ पत्थर मारना होता है। शब्द के अनुरूप मेले के दौरान पांढुरना और सावरगांव के बीच बहने वाली नदी के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग एकत्र होते हैं और सूर्योदय से सूर्यास्त तक पत्थर मारकर एक-दूसरे का लहू बहाते हैं।

इस घटना में कई लोग घायल हो जाते हैं। इस पथराव में कुछ लोगों की मृत्यु के मामले भी हुए हैं। बावजूद इसके यहां यह मेला मनाया जाता है। गौरतलब है कि यहां बरसों पुरानी परम्परा को हर साल दोहराया जाता है।

जाम नदी के दोनों किनारों पर बसे इन गावों के लोग नदी के बीच में पहले एक झंडा लगाते हैं फिर इस झंडे को पाने के लिए दोनों ओर से जम कर पत्थर युद्ध होता है। प्रशासन की सख्ती के बाद भी दोनों ओर के लोग ट्राली भर-भरकर पत्थर जमा करते हैं।

इस खूनी खेल के पीछे मान्यता है कि सांवरगांव की एक लड़की को पांढुरणा के लड़के से प्रेम हो गया था। दोनों ने चुपचाप शादी कर ली लेकिन जब इस बात की जानकारी गांव वालों को लगी तो वे इस जोड़े के विरोध में उतर आए और नदी पार कर रहे युगल पर सांवरगांव की तरफ से पत्थरबाजी शुरू हो गई।

जवाब में पांढुरणा वालों ने भी पत्थर चलाए, जिससे लड़की और लड़के की मौत हो गई। तब से इसे परम्परा बना दिया गया और करीब 300 सालों से इसे ऐसे ही निभाया जाता है। हालांकि, कुछ लोग इसे सिर्फ कहानी मानते हैं।

प्रशासन ने कई बार गोटमार में पत्थर की जगह गेंद के इस्तेमाल की पहल की लेकिन इसका कुछ खास असर नहीं हुआ। हर साल यह खेल खेला जाता है और बड़ी संख्या में लोग इसमें घायल होते हैं। देश के अनोखे लेकिन बेहद खतरनाक खेल को खेलने और देखने भी बड़ी तादाद में लोग पहुंचते हैं।

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जानिए देश-विदेश की उन राजकुमारियों के बारे में जिन्होंने शाही जिंदगी छोड़ थाम लिया आम आदमी का दामन

कहते हैं प्यार अंधा होता है लेकिन प्यार में पड़ना भी एक शानदार अनुभव होता है, जिसे हम में से बहुत से लोग महसूस करते हैं। यह व्यक्ति को ख़ुशी और गम दोनों देता हैं। दुनिया में बहुत से ऐसे लोग है जिन्होंने प्यार के लिए बहुत कुछ कुर्बान किया है। आज की हमारी इस पोस्ट में हम आपको देश-विदेश की उन राजकुमारियों में बताने जा रहे हैं जिन्होंने प्यार की खातिर सब कुछ छोड़ दिया। तो चलिए जानते हैं:-

माको

हाल ही में जापान की राजकुमारी माको ने शाही परिवार से बाहर के एक आम इंसान कोमुर से शादी से करने का फैसला किया। माको जापान के मौजूदा राजा नारूहितों के भाई राजकुमार आकिशिनो की बेटी हैं।

माको कोमुर से शादी करने का फैसला किया है। इसके लिए उन्होंने शाही परिवार से मिलने वाली भारी भरकम दौलत भी ठुकरा दी। अक्टूबर में होने वाली इस शादी के लिए उनका बॉयफ्रेंड अमेरिका से लौट भी आया है।

दीया कुमारी

जयपुर के पूर्व महाराज सवाई भवानी सिंह व पद्मिनी देवी की इकलौती संतान थी दीया कुमारी। दीया कुमारी और एक आम आदमी नरेंद्र की पहली मुलाकात 1989 में हुई थी। उस वक्त वह महज 18 साल की थीं।

तब नरेंद्र ग्रेजुएशन के बाद चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने की तैयारी कर रहे थे। एक बार वह महल में आए तभी दीया की मुलाकात नरेंद्र से हुई थी।

हालांकि, समान गोत्र होने के नाते दोनों की शादी को लेकर राजपूत समाज ने नाराजगी जताई थी, मगर दोनों ने अगस्त 1997 में कोर्ट में गुपचुप शादी कर ली थी।

इसके बाद काफी हंगामा हुआ था और दीया कुमारी का राजघराने से रिश्ता भी खत्म हो गया था। दोनों के दो बच्चे हैं। हालांकि, शादी के 21 साल बाद दोनों ने पारिवारिक वजहों से अलग होने का फैसला ले लिया था।

महारानी विक्टोरिया

बात 1887 की है जब इंग्लैंड में महारानी विक्टोरिया का राज था। उनकी जिंदगी में कोई अंग्रेज नहीं, एक भारतीय आया था, जो अंग्रेजों को बड़ा नागवार गुजरा। भारत में आगरा के रहने वाले मुंशी अब्दुल करीम और महारानी की रिलेशनशिप का जिक्र काफी चर्चा में रहा था।

ब्रिटेन की एक लेखिका शरबनी बसु ने अपनी किताब ‘विक्टोरिया एंड अब्दुल’ में महारानी और ‘खूबसूरत, लंबे भारतीय नौजवान करीम’ के करीबी रिश्ते के बारे में लिखा है। उस वक्त 24 साल के करीम को महारानी के लिए आगरा से इंग्लैंड एक तोहफे के तौर पर भेजा गया था।

उन्हें महारानी को उर्दू सिखाने का काम मिला था। बस यहीं से दोनों करीब आ गए। दोनों का साथ 15 साल तक रहा। हालांकि, दोनों के बीच के संबंध कभी खुलकर सामने नहीं आए। मगर एक महारानी ने अपने नौकर के लिए खत लिखे और तब यह काफी बड़ी बात थी।

दोनों के रिश्ते पर हॉलीवुड में एक फिल्म- ‘विक्टोरिया एंड अब्दुल’ भी बनी है। महारानी की मौत के बाद किंग एडवर्ड ने करीम को भारत भेज दिया और दोनों के बीच लिखे गए खतों को नष्ट करने का आदेश दिया। 1909 में करीम की भी मौत हो गई।

स्वीडन की प्रिंसेस विक्टोरिया

स्वीडन की राजकुमारी विक्टोरिया को एक जिम मालिक और ट्रेनर डेनियल वेस्टिलंग से प्यार हुआ और वह उसे अपना दिल दे बैठीं।

उनकी यह मुलाकात 2001 में उस समय हुई, जब वह जिम ट्रेनिंग के लिए डेनियल के जिम में गई थीं और वहीं से उनका प्यार का सिलसिला शुरू हुआ। दोनों ने जून, 2010 में शादी कर ली और उनके दो बच्चे हैं।

प्रिंसेस मैडलिन

यह बात है 2013 से पहले की, जब एक ब्रिटिश फाइनेंसर क्रिस्टोफर नील पर स्वीडन की राजकुमारी मैडलिन का दिल आ गया। अमेरिका के न्यूयॉर्क सिटी में ज्यादातर समय बिताने वाले नील उस वक्त वॉल स्ट्रीट में काम करते थे।

शेयर बाजार की बारीकियों को समझने की खूबी ने कब मैडलीन की धड़कनों के गणित को नाप लिया पता ही नहीं चला। दोस्ती और फिर प्यार के रास्ते पर चलते हुए दोनों ने 2013 में शादी कर ली।

युगाडा की राजकुमारी रूथ कामुटल

अफ्रीकी देश युगांडा की राजकुमारी रूथ कोमुंटेल की अमेरिका के मिसौरी के रहने वाले क्रिस्टोफर थॉमस से वाशिंगटन में मुलाकात हुई। वे दोनों अमेरिकन यूनिवर्सिटी में मिले थे। क्रिस्टोफर मैरीलैंड में एक अकाउंटेंट थे।

यहीं से दोनों की दोस्ती प्यार में बदल गई। अरसे तक क्रिस्टोफर को यह नहीं पता था कि रूथ एक राजकुमारी हैं। दोनों ने 2012 में शादी कर ली। हालांकि, अगले ही साल यानी 2013 में ही दोनों की शादी टूट गई।

डचेस ऑफ अल्बा कायेताना

स्पेन की डचेस ऑफ अल्बा कायेताना अपने समकालीनों से काफी आगे थीं। उन्होंने 2011 में नौकरशाह अलफांसो डियाज से शादी रचा ली थी। उस वक्त महारानी की उम्र 85 साल की थी, और डियाज 60 साल के थे। इस शादी ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं।

रानी भारी भरकम उपाधियां धारण करने में यकीन रखती थीं। हालांकि, शादी के तीन साल बाद ही यानी 2014 में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। मगर, जाते-जाते रानी ने डियाज को अपनी कुल संपत्ति में पांच बिलियन डॉलर देने का ऐलान कर दिया था।

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जानिए कब है विश्वकर्मा पूजा तिथि, पूजन मुहूर्त और महत्व

हिंदू धर्म में पर्व त्योहारों को विशेष महत्व दिया जाता हैं वहीं देवताओं के शिल्पी, निर्माण और सृजन के देवता कहे जाने वाले भगवान विश्वकर्मा की पूजा आराधना हर साल सितंबर महीने में की जाती हैं।

इस महीने में विश्वकर्मा पूजा या भगवान विश्वकर्मा की जयंती मनाई जाती हैं। विश्वकर्मा पूजा के दिन विशेष तौर पर औजारों, निर्माण कार्य से जुड़ी मशीनों, दुकानों, कारखानों आदि की पूजा की जाती हैं।

मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा की कृपा से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। कारोबार में तरक्की और उन्नति होती हैं जो भी कार्य आरंभ किए जाते हैं वे पूरे होते हैं भगवान विश्वकर्मा को संसार का पहला इंजीनियर भी कहा जाता हैं।

तो आज हम आपको अपने इस लेख द्वारा बता रहे हैं कि इस साल विश्वकर्मा पूजा कब हैं और पूजन का मुहूर्त क्या हैं तो आइए जानते हैं।

जानिए कौन हैं भगवान विश्वकर्मा

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक भगवान विश्वकर्मा पहले वास्तुकार और इंजीनियर हैं इन्होंने स्वर्ग लोक, पुष्पक विमान, द्वारिका नगरी, यमपुरी, कुबेरपुरी आदि का निर्माण किया था। उन्होंने इस संसार की रचना में ब्रह्मा जी की मदद की थी। इस संसार का मानचित्र तैयार किया था।

पूजा मुहूर्त

विश्वकर्मा पूजा का पावन पर्व हर साल उस दिन मनाया जाता है जब सूर्यदेव सिंह राशि से कन्या राशि में प्रवेश करते हैं, इसलिए इस दिन को कन्या संक्रांति के रूप में भी जाना जाता है। इस साल 17 सितंबर को रात 1 बजकर 29 मिनट पर सूर्य की कन्या संक्रांति का क्षण हैं।

इस दिन राहुकाल सुबह 10 बजकर 43 मिनट से दोपहर 12 बजकर 15 मिनट तक हैं राहुकाल को छोड़कर आप विश्वकर्मा पूजा करें। सर्वार्थ सिद्धि योग प्रात: 6 बजकर 7 मिनट से प्रारंभ हो रहा हैं तो आप इस समय से पूजा कर सकते हैं।

हर साल की तरह इस साल भी विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर दिन शुक्रवार को हैं इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग में विश्वकर्मा पूजा मनाया जाएगा।

विश्वकर्मा पूजा के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग प्रात: 6 बजकर 7 मिनट से अगले दिन 10 सितंबर को प्रात: 3 बजकर 36 मिनट तक बना रहेगा।

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जानिए मकर संक्रांति से जुड़े रोचक तथ्य!

जानिए शहद और दालचीनी के एक साथ प्रयोग करने के चमत्कारी फायदे

दालचीनी एक सदाबहार वृक्ष है जोकि 10 से 15 मीटर लम्बा होता है। यह दक्षिण भारत और श्रीलंका में पाया जाता है। इसकी अलग गंध होने के कारण इसकी छाल का इस्तेमाल मसालों में किया जाता है।

इसके स्वाद का कारण इसमें पाया जाने वाला सुगंधित तेल है। यह तेल पीले सुनहरे रंग का होता है। इसका स्वाद गर्म सुगंधित होता है।

वहीं शहद एक मीठा और चिपचिपा द्रव्य है जो मधुमक्खियों द्वारा पैदा किया जाता है। वे इसे फूलों के पराग से पाती हैं। इसमें कैंसर और ट्यूमर रोधी गुण पाए जाते हैं।

जब कच्चे शहद को बड़े पैमाने पर संसाधित तथा गर्म किया जाता है तो इसके फायटोन्यूट्रियंट’ कम हो जाते हैं। शहद में ज्यादातर सूक्ष्म जीव पैदा नहीं होते क्योंकि इसमें पानी की कम क्रियाएं होती हैं।

शहद विश्व के प्रत्येक देश में मिलता है। शहद के कोई भी दुष्प्रभाव नहीं हैं। आज का विज्ञान मानता है कि बेशक शहद मीठा होता है मगर यदि इसका सेवन दवाई के तौर पर उचित मात्रा में किया जाए तो शूगर के मरीजों के लिए यह हानिकारक नहीं हो सकता।

शहद और दालचीनी के एक साथ प्रयोग करने के चमत्कारी फायदे

दालचीनी पाऊडर और शहद के मिश्रण से कई बीमारियों का उपचार होता है। आज के वैज्ञानिक इसे कई बीमारियों के लिए रामबाण मानते हैं।

पश्चिमी देशों में हुए शोध में पाया गया है कि यदि नाश्ते में दालचीनी पाऊडर और शहद के मिश्रण को मक्खन, जैली और जैम के स्थान पर बैड पर निरंतर लगाकर खाया जाए तो इससे कई बीमारियों का उपचार संभव हो सकता है।

शहद तथा दालचीनी का रोजाना सेवन शरीर की बीमारियों से लड़ने की ताकत को भी बढ़ा कर बैक्टीरियल तथा वायरल इंफैक्शन से रक्षा करता है।

शहद तथा दालचीनी पाऊडर का एक साथ उपयोग करना दिल की बीमारियों, जोड़ों के दर्द, वात रोग, मूत्राशय में संक्रमण, दांतों का दर्द, कोलेस्ट्रोल, प्रतिरक्षा तंत्र, बदहजमी, लम्बी उम्र, कील मुंहासे, चमड़ी रोग, वजन कम होना, कैंसर, बदबूदार सांस और बहरेपन के लिए फायदेमंद है।

भोजन करने से पहले 2 चम्मच शहद पर थोड़ा-सा दालचीनी पाऊडर छिड़क कर खाने से एसिडिटी नहीं होती तथा हाजमा सही रहता है।

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रेड लेडी के नाम से जानी जाती है ये महिला, जो है लाल रंग की दीवानी

हर इंसान का अपना एक शौक होता है और उसी शौक के कारण वह अपने दोस्तों के बीच जाना जाता है। लेकिन दुनिया में ऐसे कई लोग हैं, जो अपने अजीबोगरीब शौक की वजह से मशहूर हैं। ऐसी ही एक महिला हैं जोरिका रिबरनिक, जो अपने अनोखे शौक के कारण ही सारी दुनिया में ‘रेड लेडी’ के नाम से जानी जाती है क्योंकि उसे लाल रंग से कुछ ज्यादा ही लगाव है।

बोस्निया की रहने वाली जोरिका रिबरनिक नामक एक महिला टीचर है। उसे लाल रंग इतना ज़्यादा पसंद है कि वह अपने आस-पास सब कुछ लाल ही देखना चाहती है।

जानकर हैरानी होगी कि जोरिका के घर का हर सामान लाल रंग का होने के साथ ही उसके बाल भी लाल रंग के ही हैं। जोरिका के अनुसार जब वह 18 साल की थी तब उसे लाल रंग की चीजों का ऐसा शौक चढ़ा कि आज तक नहीं उतरा। यहां तक कि वह किसी के अंतिम संस्कार में भी जाती है तो लाल ड्रैस पहन कर ही जाती हैं।

फिलहाल उसके घर में केवल एक वाटर हीटर को छोड़कर हर चीज का रंग लाल है। वह भी इसलिए क्योंकि उसके पति जोरॉन के कहने पर ही उन्होंने अलग रंग का हीटर खरीदा था।

पिछले 4 दशक में जोरिका का यह शौक इतना लोकप्रिय हो गया है कि लोग उसे किसी सैलिब्रिटी से कम नहीं मानते हैं और अब तो सोशल मीडिया पर भी वह खूब लोकप्रिय है।

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सपने में सांप का रहस्य, जानें सपने में साँप दिखने के क्या हैं मायने

साँप को सर्प, नाग, भुजंग आदि नामों से भी जाना जाता है। सांप यदि साक्षात नजर आ जाए तो डर के मारे पसीने छूट जाते हैं। यहां तक कि अगर सपने में सांप दिख जाए तो व्यक्ति घबराकर उठ बैठता है।

साँप और मनुष्य का संबंध सृष्टि के आदि काल से रहा है। हिंदू धर्म-शास्त्रों और पुराणों में सांप से जुड़ी अनेक कथाएं प्रचलित हैं। सांप को हिंदू शास्त्रों में पूजनीय माना गया है। यह भगवान शिव के गले का हार है और भगवान विष्णु की शैय्या है।

एक ओर सांप को जहां पूजनीय माना जाता है वहीं दूसरी ओर इससे जुड़े कई शुभ-अशुभ लक्षण, मिथक और भ्रांतियाँ भी प्रचलित हैं। सपने में सांप को देखने के मिश्रित अर्थ हो सकते हैं। कुछ विशेष परिस्थितियों में यह शुभ होता है तो वहीं दूसरी और कुछ अवसरों में या अशुभ भी हो सकता है।

अगर किसी को सपने में सांप दिखाई देता है तो इसे अपशकुन माना जाता है, लेकिन यह भ्रांति है। सांप के सपने की व्याख्या अलग-अलग संस्कृतियों में वृहद रूप से की गई है। अगर आपको सपने में सांप दिखाई देता है तो इसका फल देखने के लिए यह जानना ज़रूरी है कि यह किस संदर्भ में दिखा है।

तो आइए देखते हैं सपने में सांप को देखने के कुछ प्रसिद्ध अर्थ।

सपने में साँप को देखने का अर्थ या रहस्य

सपने में सांप द‍िखने का रहस्य, जानें सपनों में सांप नजर आने के क्या हैं मायने

  • सपने में यदि आप किसी मंदिर में सांप देख लेते हैं या जाग्रत अवस्था में किसी मंदिर में सांप दिखाई दे जाए तो इसे शुभ माना जाता है। मंदिर में सांप दिखना इस बात का संकेत है कि आपकी मनोकामनाएं निकट भविष्य में ही पूर्ण होने वाली है।
  • यदि आप सांप को पेड़ पर चढ़ते हुए देखें तो इसका अर्थ है कि आपके जीवन में जल्द ही कोई शुभ घटना होने वाली है। यह तरक्की का भी संकेत है। साथ ही अचानक लाभ या रुका हुआ धन वापस मिलने का संकेत भी माना जाता है।
  • सपने में यदि शिवलिंग पर सांप लिपटा हुआ दिखाई दे तो यह भी शुभ संकेत है। इसका अर्थ यह हुआ कि भगवान शिव का आशीर्वाद आने के साथ है और जिस कार्य को पूरा करने के लिए आप लंबे समय से इंतेजार हैं उसमें शीघ्र ही सफलता मिलने वाली है।
  • यदि कोई निर्धन व्यक्ति सांप को पेड़ पर से उतरते देखता है तो यह उसके लिए शुभ संकेत है। यह प्रबल धन प्राप्ति का संकेत माना जाता है।
  • यदि आप किसी विशेष कार्य के लिए जा रहे हैं और उस समय कोई सांप आपके दाहिने हाथ की ओर से रास्ता काट दे तो यह शुभ होता है। यह इस बात का संकेत करता है कि आप जिस काम के लिए निकल रहे हैं वह पूरा हो जाएगा।
  • सपने में श्वेत सांप देखना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह धन का प्रतीक है।
  • सपने में मरा हुआ सांप देखना ठीक नहीं है। यह निकट भविष्य में किसी बड़े संकट का सूचक है। इसके अशुभ प्रभाव से बचने के लिए पांच सोमवार शिवमंदिर में जाकर शिवलिंग पर जल या कच्चा दूध अर्पित करें।
  • कोई धनवान व्यक्ति सपने में पेड़ पर से सांप को उतरते देखे तो यह उसके लिए बड़ी धनहानि का संकेत है। ऐसा सपना देखें तो आर्थिक मामलों में सावधानी रखने की जरूरत होती है।
  • किसी आवश्यक कार्य के लिए घर से निकलते समय यदि बाएं हाथ की ओर से कोई सांप आपका रास्ता काट जाए तो सावधान रहने की आवश्यकता है। यह इस बात का संकेत है कि आप जिस कार्य के लिए जा रहे हैं उसके पूरा होने में संशय है। ऐसा हो तो वापस घर में आकर भगवान शिव से प्रार्थना करके निकलें।
  • सपने में नाग-नागिन के जोड़े को प्रेम करते देखना अशुभ सूचक है। यदि साक्षात नाग-नागिन प्रणय करते दिखें तो वहां से हट जाएं। यह बड़ी हानि की सूचना देता है।
  • सपने में सांप का डंसना इस बात की सूचना है कि आपको जल्द ही गंभीर रोग होने वाला है या किसी प्रकार का संकट आने वाला है। लेकिन इस सपने के अर्थ के बारे में विद्वानों में मतभेद है।
  • कुछ स्वप्नफल विचारकों के अनुसार सपने में साँप के द्वारा डसना इस बात की और इशारा करता है कि आपको बहुत अधिक ख्याति या सफलता प्राप्त होने वाली है।
  • यदि सपने में सांप आपका पीछा कर रहा है और आप बहुत घबराए हुए हैं तो यह समझा जाएगा कि आप भविष्य के प्रति डरे हुए हैं, कोई चिंता आपको खाए जा रही है या किसी बात को लेकर आप डरे हुए हैं। यह भी हो सकता है कि आप किसी सच को स्वीकार करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं या उस राज के खुल जाने का आपको डर है। हालांकि यह सपना अशुभ माना जाता है।
  • सपने में सांप और नेवले की लड़ाई देखने का अर्थ है कि आप कानूनी पचड़े में फंस सकते हैं और आपको कोर्ट कचहरी के चक्कर काटना पड़ सकते हैं।
  • सपने में सांप द्वारा दांत दिखाना या काट लिए जाने की पोजिशन बनाकर दांत दिखाना इस बात का संकेत है कि आपको कोई धोखा दे सकता है या किसी भी प्रकार से नुकसान पहुंचा सकता है।
  • रात में सोते समय अगर सपने में सफेद या सुनहरा या चमकीला सांप नजर आए, तो यह भी किस्मत खुलने का इशारा होता है। यह भी कहा जाता है कि पूर्वजों का आशीर्वाद मिलेगा।
  • सपने में सांप आपको कहीं जाते हुए दिखाई दे या आपको देखकर छुप जाए तो समझा जाता है कि पितृदेव अपकी रक्षा कर रहे हैं।
  • सपने में सांप को बिल में जाते हुए देखने का अर्थ है अचानक धन की प्राप्ति होना। बिल से बाहर निकलते देखना धनहानि है।
  • सपने में बार बार सांप का दिखाई देने का अर्थ है कि आपको पितृदोष हैं या आपके पितृ आपसे नाराज हैं। इसका अर्थ यह भी हो सकता है कि आपकी कुंडली में कालसर्प दोष है।
  • सपने में खुदाई करते समय सांप निकलता हुआ दिखाई दे तो समझो धन प्राप्त होगा।

तो ये रहे सपने में सांप को देखने के कुछ अर्थ। यदि आप कुछ और अर्थ जानते हैं और हमसे शेयर करना चाहते हैं तो नीचे कॉमेंट करें, हम कोशिश करेंगे कि हम इसे अपनी पोस्ट में सम्मिलित करें।

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जानें हमेशा खुश रहने के कुछ नुस्खे!!

वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि हम अपनी छोटी-छोटी आदतों और दिनचर्या में कुछ बदलाव करके हमेशा खुश  रह सकते हैं, आज इस पोस्ट में हम कुछ ऐसे नुस्खों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें आप अपनी रोजमर्रा की आदतों में अपनाकर कुछ बदलाव करके हमेशा खुश, सार्थक, सकारात्मक रह सकते हैं।

घर में रखें भावनात्मक चीजें

अनुभव और उन अनुभवों की यादें हमें भौतिक चीजों की तुलना में अधिक खुश करते हैं। यह इसलिए भी होता है क्योंकि ये आपकी सोच और मन को पुरानी सुखद यादों से जोड़ देते हैं इसलिए बेहतर होगा कि आप अपने घर को सकारात्मक यादों की गैलरी बनाएं।

जो करना है सो करना है

यह टिप ‘द हैप्पीनेस प्रोजैक्ट‘ से मिली है। याद रखें कि बर्तन खुद को साफ नहीं करेंगे इसलिए आपको उन्हें साफ करना होगा तो क्यों न इसमें ही आनंद महसूस किया जाए। काम करते हए अपने पसंदीदा गीतों को थोड़ी ऊंची आवाज़ में सुनें और महसूस करें कि आप ऐसे करना पसंद करते हों।

दिन के लिए लक्ष्य निर्धारित करें

‘द आर्ट ऑफ हैपीनेस‘ में दलाई लामा कहते हैं कि, “हर दिन जैसे ही आप जागते हैं, सोचें कि मैं भाग्यशाली हूँ कि मैं आज भी जिंदा हूँ। मेरे पास एक मूल्यवान मानव जीवन है, मैं इसे बर्बाद नहीं करने जा रहा हूँ।”

दैनिक लक्ष्य निर्धारित करने से बहुत फर्क पड़ता है। यह कुछ ऐसा हो सकता है, जैसे कोई भी पसंद का काम करना या आज के मधुर पलों का आनंद लेना या यह कुछ और अधिक विशिष्ट हो सकता है जैसे ‘आज अपने प्रियजनों और चाहने वालों को धन्यवाद कहें’।

कुछ पल खुद के साथ बिताएं

आपकी जो भी आध्यात्मिक या गैर-आध्यात्मिक मान्यताएं हों, अध्ययन बताते हैं कि एक किसी ‘दिव्य’ शक्ति से जुड़ने का संबंध खुशी से है। कुछ बड़ा करने के लिए बस कुछ मिनट अपने साथ बात करते हुए बिताएं। प्रकृति की सैर करें, एक डायरी लिखें।

इन बातों का भी रखें ध्यान:-

  • बुरे लोगों और बुरी चीजों से हमेशा दूर रहें।
  • अपने समय को बिना मतलब बर्बाद न करें।
  • दूसरों को दोष देने से पहले अपनी गलतियों को सुधारें और नई शुरूआत करें।
  • लोगों की बातें न सुनकर अपने दिल की बात सुनें।
  • जिस कार्य को करने से खुशी मिले वही काम करें।
  • आप जितने भी छोटे हों या बड़े, अपनी कोशिशों की ताकत को समझें।
  • घर में पौधे लगाएं क्योंकि ये मन भी खुश रखते हैं।

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हमेशा खुश रहने के असरदार उपाय

OMG: सोने से भी ज़्यादा कीमती है व्हेल की उल्टी

व्हेल मछली को पानी का सबसे बड़ा जीव माना जाता है। ​व्हेल का शरीर बहुत विशाल होता है। यह पानी के जहाज को भी आसानी से पलट सकती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि व्हेल की उल्टी (Whale Vomit) किसी को भी अरबपति बना सकती है? आपको सुनने में यह बात अजीब जरूर लग रही होगी लेकिन यह पूरी तरह से सच है।

व्हेल की उल्टी (Whale Vomit) की कीमत हीरे और सोने के आभूषणों से कई गुना ज्यादा होती है। भारत में भी व्हेल की उल्टी की कीमत करोड़ों-अरबों में है। आज हम आपको बताएंगे कि आखिर किस वजह से व्हेल की उल्टी की कीमत इतनी अधिक है।

तो चलिए जानते हैं :-

व्हेल के शरीर से निकलने वाले अपशिष्ट को कई वैज्ञानिक उल्टी बताते हैं, तो कई इसे मल बताते हैं। कई बार यह पदार्थ रेक्टम के जरिए बाहर आता है, लेकिन कभी-कभी पदार्थ बड़ा होने पर व्हेल इसे मुंह से उगल देती है।

वैज्ञानिक भाषा में इसे एम्बरग्रीस कहते हैं। व्हेल की आंतों से निकलने वाला एम्बरग्रीस काले या स्लेटी रंग का ठोस, मोम जैसा ज्वलनशील पदार्थ होता है। यह पदार्थ व्हेल के शरीर के अंदर उसकी रक्षा करता है।

व्हेल समुद्र से दूरी बनाकर रखती है। इसकी वजह से एम्बरग्रिस (Ambergris) को किनारे आने में काफी समय लग जाता है। समुद्र का नमकीन पानी और धूप इस एम्बरग्रिस को चिकनी, काली और भूरी गांठ में तब्दील कर देता है। इसके बाद यह मोम जैसा दिखता है। एम्बरग्रिस के वजन की बात करें तो यह 15 ग्राम से 100 किलो तक हो सकता है।

व्हेल की उल्टी का इस्तेमाल परफ्यूम बनाने में किया जाता है। इस वजह से भी दुनियाभर के बाजारों में इसकी काफी कीमत होती है। एम्बरग्रिस से बने परफ्यूम की खुशबू लंबे समय तक बनी रहती है।

कई देशों में एम्बरग्रिस से सुगंधित धूप और अगरबत्ती भी बनाई जाती है। इसके साथ ही यूरोप के लोगों का मानना है कि एम्बरग्रिस का टुकड़ा साथ रखने से प्लेग रोकने में मदद मिलती है।

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ब्लू व्हेल के बारे में रोचक तथ्य

“उगते सूर्य का पर्वत” है अरुणाचल प्रदेश, जानिए कुछ रोचक तथ्य

अरुणाचल प्रदेश भारत का एक उत्तर-पूर्वी राज्य है। अरुणाचल का अर्थ हिन्दी में “उगते सूर्य का पर्वत” है। इसकी राजधानी ईटानगर है। इस प्रदेश की सीमाएं दक्षिण में असम, दक्षिण-पूर्व में नागालैंड, पूर्व में बर्मा (म्यांमार), पश्चिम में भूटान और उत्तर में तिब्बत से मिलती हैं।

आज इस पोस्ट में हम इस खूबसूरत प्रदेश के बारे में जानेंगे कुछ रोचक तथ्य, तो चलिए जानते हैं:-

इस एक राज्य में बोली जाती हैं 30 से 50 भाषाएं

वर्तमान समय में भाषा की दृष्टि से अरुणाचल प्रदेश एशिया का सबसे अधिक विविधतापूर्ण क्षेत्र है जिसमें 30 से 50 प्रतिशत तक विभिन्न भाषाओं के बोलने वाले रहते हैं।

इनमें से अधिकांश भाषाएं तिब्बती-बर्मी परिवार की हैं। हाल के वर्षों में अरुणाचल प्रदेश में हिन्दी का प्रचलन बढ़ा है और अब यह यहां की जनभाषा बन चुकी है।

भारत की 2011 की जनगणना के अनुसार अरुणाचल प्रदेश की आबादी 1,382,611 थी। वर्तमान में अनुमानित जनसंख्या 1,711,947 के लगभग है। जिसमें मुख्य रूप से पश्चिम में मोनपा लोग, केन्द्र में तानी, पूर्व में ताई और राज्य के दक्षिण में नागा लोग रहते हैं।

यहाँ की प्रमुख जनजाति

63 प्रतिशत अरुणाचलवासी 19 प्रमुख जनजातियों और 85 अन्य जनजातियों से संबद्ध हैं। इनमें से अधिकांश तिब्बती-बर्मी या ताई-बर्मी मूल के हैं।

बाकी 35 प्रतिशत जनसंख्या आप्रवासियों की है, जिनमें 31000 बंगाली, बोडो, हजोन्ग, बांग्लादेश से आये चकमा शरणार्थी और पड़ोसी असम, नागालैंड और भारत के अन्य भागों से आये प्रवासी शामिल हैं। सबसे बड़ी जनजातियों में आदि, गालो, निशि, खम्ति, मोंपा और अपातनी प्रमुख हैं।

यहां होता है सबसे पहले सूर्योदय

भारत में सबसे पहले सूर्योदय अरुणाचल प्रदेश में होता है, इसलिए इसे ‘उगते सूरज की भूमि’ भी कहा जाता है। अरुणाचल प्रदेश के डोंग वैली की देवांग घाटी में भारतीय समयानुसार करीब 2 घंटे पहले सूर्योदय हो जाता है यानी यहां सुबह 4 बजे ही सूर्य निकल आता है।

यह जगह भारत, चीन और म्यांमार के बॉर्डर पर स्थित है। यह घाटी समुद्रतल से 2655 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, इस घाटी में सूर्य की पहली किरण को देखने के लिए सैंकड़ों पर्यटक यहां आते हैं।

इसके अलावा एक और खास बात यह है कि जब दिल्ली में शाम के 4 बजे होते हैं, तब अरुणाचल की देवांग घाटी में रात हो जाती है।

सर्वाधिक लोकप्रिय पर्यटन स्थल

यहां पर एक खूबसूरत बौद्ध मन्दिर है। इस मन्दिर का निर्माण तिब्बती शैली में किया गया है। इस मन्दिर की छत से पूरे ईटानगर के खूबसूरत दृश्य देखे जा सकते हैं।

अरुणाचल प्रदेश का सबसे लोकप्रिय टूरिस्ट डेस्टिनेशन तवांग मठ है। यह 400 साल पुराना है। यह भारत का सबसे बड़ा बौद्ध मठ है और ल्हासा के पोताला महल के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मठ है।

ईटानगर में पर्यटक ईटा किला भी देख सकते हैं। इस किले का निर्माण 14-15वीं शताब्दी में किया गया था। इसी किले के नाम पर यहाँ का नाम ईटानगर रखा गया है। पर्यटक इस किले में कई खूबसूरत दृश्य देख सकते हैं। किले की सैर के बाद पर्यटक यहां पर पौराणिक गंगा झील भी देख सकते हैं।

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यह दुनिया अजब-गजब रहस्यों से भरी हुई है। धरती पर ऐसी कई रहस्यमयी जगहें हैं, जिनके बारे में हमने पता नहीं होता। ऐसी ही एक रहस्यमय जगह अरुणाचल प्रदेश और तिब्बत के बीच में कहीं स्थित है जिसे आज तक कोई भी नहीं ढूंढ पाया है। इस जगह को ‘शांगरी-ला घाटी’ के नाम से जाना जाता है।

शांगरी-ला घाटी के बारे में कहा जाता है कि यहां समय थम जाता है और लोग जब तक चाहें तब तक जिंदा रह सकते हैं। दुनियाभर के कई लोग ‘शांगरी-ला घाटी’ का पता लगाने की नाकाम कोशिश कर चुके हैं, लेकिन आजतक किसी को भी इसमें सफलता नहीं मिली है। शांगरी ला घाटी को “बरमूडा ट्राएंगल“ की तरह बताया जाता है।

यह एक काल्पनिक जगह है

तिब्बती भाषा की किताब ‘काल विज्ञान’ में भी इस घाटी का जिक्र मिलता है। जिसमें लिखा है कि दुनिया की हर चीज़, देश, काल और निमित्त से बंधी है लेकिन इस घाटी में काल यानी समय का असर नहीं है।

वहां प्राण, मन के विचार की शक्ति, शारीरिक क्षमता और मानसिक चेतना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। इस जगह को पृथ्वी का आध्यात्मिक नियंत्रण केंद्र भी कहा जाता है। जिसका जिक्र महाभारत से लेकर वाल्मिकी रामायण और वेदों में भी मिलता है।

जेम्स हिल्टन नाम के लेखक ने अपनी किताब ‘लॉस्ट हॉरीजोन’ में भी इस रहस्यमय जगह के बारे में लिखा है। हालांकि, उनके मुताबिक यह एक काल्पनिक जगह है। वहां लोग सैकड़ों बरसों तक जीवित रहते हैं।

उनकी पुस्तक को पढ़कर कई देशी-विदेशी खोजियों ने शांगरी ला घाटी का पता लगाने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हुए। कुछ तो हमेशा के लिए गायब ही हो गए। माना जाता है कि चीन की सेना एक लामा का पीछा करते हुए इस घाटी तक आई लेकिन शांगरी ला घाटी का पता नहीं लगा सकी।

तिब्बती विद्वान युत्सुंग के अनुसार इस घाटी का संबंध अंतरिक्ष के किसी लोक से है। आध्यात्म क्षेत्र, तंत्र साधना या तंत्र ज्ञान से जुड़े लोगों के लिए यह घाटी भारत के साथ-साथ विश्व में मशहूर है। खैर, इतने सारे दावों और जिक्रों के बाद भी कोई शांगरी-ला घाटी के रहस्य को नहीं सुलझा पाया।

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