जानें हमेशा खुश रहने के कुछ नुस्खे!!

वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि हम अपनी छोटी-छोटी आदतों और दिनचर्या में कुछ बदलाव करके हमेशा खुश  रह सकते हैं, आज इस पोस्ट में हम कुछ ऐसे नुस्खों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें आप अपनी रोजमर्रा की आदतों में अपनाकर कुछ बदलाव करके हमेशा खुश, सार्थक, सकारात्मक रह सकते हैं।

घर में रखें भावनात्मक चीजें

अनुभव और उन अनुभवों की यादें हमें भौतिक चीजों की तुलना में अधिक खुश करते हैं। यह इसलिए भी होता है क्योंकि ये आपकी सोच और मन को पुरानी सुखद यादों से जोड़ देते हैं इसलिए बेहतर होगा कि आप अपने घर को सकारात्मक यादों की गैलरी बनाएं।

जो करना है सो करना है

यह टिप ‘द हैप्पीनेस प्रोजैक्ट‘ से मिली है। याद रखें कि बर्तन खुद को साफ नहीं करेंगे इसलिए आपको उन्हें साफ करना होगा तो क्यों न इसमें ही आनंद महसूस किया जाए। काम करते हए अपने पसंदीदा गीतों को थोड़ी ऊंची आवाज़ में सुनें और महसूस करें कि आप ऐसे करना पसंद करते हों।

दिन के लिए लक्ष्य निर्धारित करें

‘द आर्ट ऑफ हैपीनेस‘ में दलाई लामा कहते हैं कि, “हर दिन जैसे ही आप जागते हैं, सोचें कि मैं भाग्यशाली हूँ कि मैं आज भी जिंदा हूँ। मेरे पास एक मूल्यवान मानव जीवन है, मैं इसे बर्बाद नहीं करने जा रहा हूँ।”

दैनिक लक्ष्य निर्धारित करने से बहुत फर्क पड़ता है। यह कुछ ऐसा हो सकता है, जैसे कोई भी पसंद का काम करना या आज के मधुर पलों का आनंद लेना या यह कुछ और अधिक विशिष्ट हो सकता है जैसे ‘आज अपने प्रियजनों और चाहने वालों को धन्यवाद कहें’।

कुछ पल खुद के साथ बिताएं

आपकी जो भी आध्यात्मिक या गैर-आध्यात्मिक मान्यताएं हों, अध्ययन बताते हैं कि एक किसी ‘दिव्य’ शक्ति से जुड़ने का संबंध खुशी से है। कुछ बड़ा करने के लिए बस कुछ मिनट अपने साथ बात करते हुए बिताएं। प्रकृति की सैर करें, एक डायरी लिखें।

इन बातों का भी रखें ध्यान:-

  • बुरे लोगों और बुरी चीजों से हमेशा दूर रहें।
  • अपने समय को बिना मतलब बर्बाद न करें।
  • दूसरों को दोष देने से पहले अपनी गलतियों को सुधारें और नई शुरूआत करें।
  • लोगों की बातें न सुनकर अपने दिल की बात सुनें।
  • जिस कार्य को करने से खुशी मिले वही काम करें।
  • आप जितने भी छोटे हों या बड़े, अपनी कोशिशों की ताकत को समझें।
  • घर में पौधे लगाएं क्योंकि ये मन भी खुश रखते हैं।

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हमेशा खुश रहने के असरदार उपाय

OMG: सोने से भी ज़्यादा कीमती है व्हेल की उल्टी

व्हेल मछली को पानी का सबसे बड़ा जीव माना जाता है। ​व्हेल का शरीर बहुत विशाल होता है। यह पानी के जहाज को भी आसानी से पलट सकती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि व्हेल की उल्टी (Whale Vomit) किसी को भी अरबपति बना सकती है? आपको सुनने में यह बात अजीब जरूर लग रही होगी लेकिन यह पूरी तरह से सच है।

व्हेल की उल्टी (Whale Vomit) की कीमत हीरे और सोने के आभूषणों से कई गुना ज्यादा होती है। भारत में भी व्हेल की उल्टी की कीमत करोड़ों-अरबों में है। आज हम आपको बताएंगे कि आखिर किस वजह से व्हेल की उल्टी की कीमत इतनी अधिक है।

तो चलिए जानते हैं :-

व्हेल के शरीर से निकलने वाले अपशिष्ट को कई वैज्ञानिक उल्टी बताते हैं, तो कई इसे मल बताते हैं। कई बार यह पदार्थ रेक्टम के जरिए बाहर आता है, लेकिन कभी-कभी पदार्थ बड़ा होने पर व्हेल इसे मुंह से उगल देती है।

वैज्ञानिक भाषा में इसे एम्बरग्रीस कहते हैं। व्हेल की आंतों से निकलने वाला एम्बरग्रीस काले या स्लेटी रंग का ठोस, मोम जैसा ज्वलनशील पदार्थ होता है। यह पदार्थ व्हेल के शरीर के अंदर उसकी रक्षा करता है।

व्हेल समुद्र से दूरी बनाकर रखती है। इसकी वजह से एम्बरग्रिस (Ambergris) को किनारे आने में काफी समय लग जाता है। समुद्र का नमकीन पानी और धूप इस एम्बरग्रिस को चिकनी, काली और भूरी गांठ में तब्दील कर देता है। इसके बाद यह मोम जैसा दिखता है। एम्बरग्रिस के वजन की बात करें तो यह 15 ग्राम से 100 किलो तक हो सकता है।

व्हेल की उल्टी का इस्तेमाल परफ्यूम बनाने में किया जाता है। इस वजह से भी दुनियाभर के बाजारों में इसकी काफी कीमत होती है। एम्बरग्रिस से बने परफ्यूम की खुशबू लंबे समय तक बनी रहती है।

कई देशों में एम्बरग्रिस से सुगंधित धूप और अगरबत्ती भी बनाई जाती है। इसके साथ ही यूरोप के लोगों का मानना है कि एम्बरग्रिस का टुकड़ा साथ रखने से प्लेग रोकने में मदद मिलती है।

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ब्लू व्हेल के बारे में रोचक तथ्य

“उगते सूर्य का पर्वत” है अरुणाचल प्रदेश, जानिए कुछ रोचक तथ्य

अरुणाचल प्रदेश भारत का एक उत्तर-पूर्वी राज्य है। अरुणाचल का अर्थ हिन्दी में “उगते सूर्य का पर्वत” है। इसकी राजधानी ईटानगर है। इस प्रदेश की सीमाएं दक्षिण में असम, दक्षिण-पूर्व में नागालैंड, पूर्व में बर्मा (म्यांमार), पश्चिम में भूटान और उत्तर में तिब्बत से मिलती हैं।

आज इस पोस्ट में हम इस खूबसूरत प्रदेश के बारे में जानेंगे कुछ रोचक तथ्य, तो चलिए जानते हैं:-

इस एक राज्य में बोली जाती हैं 30 से 50 भाषाएं

वर्तमान समय में भाषा की दृष्टि से अरुणाचल प्रदेश एशिया का सबसे अधिक विविधतापूर्ण क्षेत्र है जिसमें 30 से 50 प्रतिशत तक विभिन्न भाषाओं के बोलने वाले रहते हैं।

इनमें से अधिकांश भाषाएं तिब्बती-बर्मी परिवार की हैं। हाल के वर्षों में अरुणाचल प्रदेश में हिन्दी का प्रचलन बढ़ा है और अब यह यहां की जनभाषा बन चुकी है।

भारत की 2011 की जनगणना के अनुसार अरुणाचल प्रदेश की आबादी 1,382,611 थी। वर्तमान में अनुमानित जनसंख्या 1,711,947 के लगभग है। जिसमें मुख्य रूप से पश्चिम में मोनपा लोग, केन्द्र में तानी, पूर्व में ताई और राज्य के दक्षिण में नागा लोग रहते हैं।

यहाँ की प्रमुख जनजाति

63 प्रतिशत अरुणाचलवासी 19 प्रमुख जनजातियों और 85 अन्य जनजातियों से संबद्ध हैं। इनमें से अधिकांश तिब्बती-बर्मी या ताई-बर्मी मूल के हैं।

बाकी 35 प्रतिशत जनसंख्या आप्रवासियों की है, जिनमें 31000 बंगाली, बोडो, हजोन्ग, बांग्लादेश से आये चकमा शरणार्थी और पड़ोसी असम, नागालैंड और भारत के अन्य भागों से आये प्रवासी शामिल हैं। सबसे बड़ी जनजातियों में आदि, गालो, निशि, खम्ति, मोंपा और अपातनी प्रमुख हैं।

यहां होता है सबसे पहले सूर्योदय

भारत में सबसे पहले सूर्योदय अरुणाचल प्रदेश में होता है, इसलिए इसे ‘उगते सूरज की भूमि’ भी कहा जाता है। अरुणाचल प्रदेश के डोंग वैली की देवांग घाटी में भारतीय समयानुसार करीब 2 घंटे पहले सूर्योदय हो जाता है यानी यहां सुबह 4 बजे ही सूर्य निकल आता है।

यह जगह भारत, चीन और म्यांमार के बॉर्डर पर स्थित है। यह घाटी समुद्रतल से 2655 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, इस घाटी में सूर्य की पहली किरण को देखने के लिए सैंकड़ों पर्यटक यहां आते हैं।

इसके अलावा एक और खास बात यह है कि जब दिल्ली में शाम के 4 बजे होते हैं, तब अरुणाचल की देवांग घाटी में रात हो जाती है।

सर्वाधिक लोकप्रिय पर्यटन स्थल

यहां पर एक खूबसूरत बौद्ध मन्दिर है। इस मन्दिर का निर्माण तिब्बती शैली में किया गया है। इस मन्दिर की छत से पूरे ईटानगर के खूबसूरत दृश्य देखे जा सकते हैं।

अरुणाचल प्रदेश का सबसे लोकप्रिय टूरिस्ट डेस्टिनेशन तवांग मठ है। यह 400 साल पुराना है। यह भारत का सबसे बड़ा बौद्ध मठ है और ल्हासा के पोताला महल के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मठ है।

ईटानगर में पर्यटक ईटा किला भी देख सकते हैं। इस किले का निर्माण 14-15वीं शताब्दी में किया गया था। इसी किले के नाम पर यहाँ का नाम ईटानगर रखा गया है। पर्यटक इस किले में कई खूबसूरत दृश्य देख सकते हैं। किले की सैर के बाद पर्यटक यहां पर पौराणिक गंगा झील भी देख सकते हैं।

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ये रहस्यमय घाटी कहलाती है दूसरा ‘बरमूडा ट्राएंगल’ यहाँ जाने वाला कभी लौटकर वापस नहीं आता

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यह दुनिया अजब-गजब रहस्यों से भरी हुई है। धरती पर ऐसी कई रहस्यमयी जगहें हैं, जिनके बारे में हमने पता नहीं होता। ऐसी ही एक रहस्यमय जगह अरुणाचल प्रदेश और तिब्बत के बीच में कहीं स्थित है जिसे आज तक कोई भी नहीं ढूंढ पाया है। इस जगह को ‘शांगरी-ला घाटी’ के नाम से जाना जाता है।

शांगरी-ला घाटी के बारे में कहा जाता है कि यहां समय थम जाता है और लोग जब तक चाहें तब तक जिंदा रह सकते हैं। दुनियाभर के कई लोग ‘शांगरी-ला घाटी’ का पता लगाने की नाकाम कोशिश कर चुके हैं, लेकिन आजतक किसी को भी इसमें सफलता नहीं मिली है। शांगरी ला घाटी को “बरमूडा ट्राएंगल“ की तरह बताया जाता है।

यह एक काल्पनिक जगह है

तिब्बती भाषा की किताब ‘काल विज्ञान’ में भी इस घाटी का जिक्र मिलता है। जिसमें लिखा है कि दुनिया की हर चीज़, देश, काल और निमित्त से बंधी है लेकिन इस घाटी में काल यानी समय का असर नहीं है।

वहां प्राण, मन के विचार की शक्ति, शारीरिक क्षमता और मानसिक चेतना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। इस जगह को पृथ्वी का आध्यात्मिक नियंत्रण केंद्र भी कहा जाता है। जिसका जिक्र महाभारत से लेकर वाल्मिकी रामायण और वेदों में भी मिलता है।

जेम्स हिल्टन नाम के लेखक ने अपनी किताब ‘लॉस्ट हॉरीजोन’ में भी इस रहस्यमय जगह के बारे में लिखा है। हालांकि, उनके मुताबिक यह एक काल्पनिक जगह है। वहां लोग सैकड़ों बरसों तक जीवित रहते हैं।

उनकी पुस्तक को पढ़कर कई देशी-विदेशी खोजियों ने शांगरी ला घाटी का पता लगाने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हुए। कुछ तो हमेशा के लिए गायब ही हो गए। माना जाता है कि चीन की सेना एक लामा का पीछा करते हुए इस घाटी तक आई लेकिन शांगरी ला घाटी का पता नहीं लगा सकी।

तिब्बती विद्वान युत्सुंग के अनुसार इस घाटी का संबंध अंतरिक्ष के किसी लोक से है। आध्यात्म क्षेत्र, तंत्र साधना या तंत्र ज्ञान से जुड़े लोगों के लिए यह घाटी भारत के साथ-साथ विश्व में मशहूर है। खैर, इतने सारे दावों और जिक्रों के बाद भी कोई शांगरी-ला घाटी के रहस्य को नहीं सुलझा पाया।

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यह है दुनिया की 5 सबसे महंगी शराब, कीमत जानकर रह जाएंगे हैरान

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शराब का सेवन सेहत के लिए बहुत ही हानिकारक होता है लेकिन फिर भी लोग बहुत शौक से शराब पीते हैं। कुछ कभी-कभी इसका सेवन करते है, तो कुछ इसके आदी हो जाते है। यूं तो दुनिया में कई तरह के शराब मिलती है, लेकिन आज हम आपको दुनिया की 5 सबसे महंगी शराब के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनकी कीमत जानकर आप हैरान रह जाएंगे।

टकीला ले .925

यह दुनिया की सबसे महंगी शराब है, जिसकी बोतल में 6400 हीरे जड़े हुए हैं। इसे मेक्सिको में  सबसे पहले लॉन्च किया गया था।
इस शराब को आज तक किसी ने नहीं खरीदा है। इसी वजह से आज तक किसी को इसकी कीमत भी मालूम नहीं हुई।

डीवा वोदका

डीवा वोदका (Diva Vodka) को दुनिया की सबसे महंगी वोदका में गिना जाता है। इस बोतल के बीच में अलग तरह का सांचा होता है।

इसमें स्वरोस्की क्रिस्टल (Swarovski Crystals) रखे होते हैं। इनका इस्तेमाल ड्रिंक को गार्निश करने के लिए करते हैं। इस वोदका की कीमत 7 करोड़ 30 लाख रुपये है।

अमांडा डी ब्रिगनैक मिडास

यह दुनिया की सबसे महंगी शैंपेन है, जिसकी एक बोतल की कीमत 1 करोड़ 40 लाख रुपये से ज्यादा है। यह दिखने में भी काफी खूबसूरत लगती है।

डैलमोर 62

ये दुनिया की सबसे महंगी व्हिस्की है, जिसकी आज तक केवल 12 बोतलें ही बिकी हैं। इसकी एक बोतल की कीमत 1 करोड़ 50 लाख रुपये से भी ज्यादा है।

पेनफोल्ड्स एम्पूल

दुनिया की सबसे महंगी रेड वाइन मानी जाती है पेनफोल्ड्स एम्पूल (Penfolds Ampoule)l इस रेड वाइन की बोतल पेन के आकार की होती है। इसकी एक बोतल की कीमत1 करोड़ 20 लाख रुपये के लगभग है।

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ये है ‘मधुमक्खियों का राजा’ जिसे देखकर आपके होश उड़ जाएंगे !!

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मधुमक्खी कीट वर्ग का प्राणी है। प्रत्येक संघ में एक रानी, कई सौ नर और शेष श्रमिक होते हैं। मधुमक्खियाँ छत्ते बनाकर रहती हैं। ये तो बात हुई मधुमक्खी और मधुमक्खियों की रानी की अब हम आपको बताने जा रहें हैं मधुमक्खियों के राजा के बारे में, तो चलिए जानते हैं :-

मधुमक्खियों का राजा कोई नर मधुमक्खी नहीं बल्कि अफ्रीकी देश रवांडा में रहने वाला एक बीकीपर है जिसका नाम है “नादिसाबा” l

इस शख्स का दावा है कि पिछले कई सालों से वह अपने शरीर पर हजारों मधुमक्खियां पाल रहे हैं और वे उन्हें काटती नहीं हैं और हाल ही में उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर चर्चा में आई हैं।

नादिसाबा बताते हैं कि सबसे पहले वह अपने ऊपर रानी मक्खी को रखते हैं और बाकी सब उसके पीछे-पीछे चली आती हैं। रानी मक्खी को वह एक धागे से बांधकर रोकते हैं और बाकी मक्खियां उसे बचाने के लिए आती हैं।

वे रानी को घेर लेती हैं और धीरे-धीरे पूरा शरीर ढक जाता है। हालांकि, नादिसाबा को इन्होंने कभी काटा नहीं है।  नदिसाबा अपने इस असामान्‍य कौशल के कारण मशहूर तो हैं ही, वे इन मधुमक्खियों द्वारा इकट्ठा किए गए शहद को बेचकर खासी कमाई भी करते हैं।

मधुमक्खियां उन्‍हें काटें न इसके लिए समय-समय पर उन पर चीनी का चाशनी का स्‍प्रे करते हैं क्‍योंकि मधुमक्खियों का पेट भरा होने पर उनके डंक मारने की आशंका कम होती है।

इस दौरान कान और नाक को रुई से ढक लिया जाता है ताकि वहां कोई मधुमक्‍खी न घुसे। इसके अलावा वह आंखों के नीचे और होठों पर वैसलीन लगा लेते हैं ताकि वहां मधुमक्खियों को रेंगने से रोका जा सके।

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वायरल वीडियो :- देखें कैसे व्यक्ति शॉर्टकट चक्कर कीचड़ भरे गड्ढे में गिर जाता है।

एक व्यक्ति के दलदल को पार करने के असफल प्रयास का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। दरअसल यह व्यक्ति मार्टिन लुईस नाम का एक ब्रिटिश पर्यटक है। यह घटना मालदीव की यात्रा के दौरान अपनी पत्नी राचेल के साथ सैर के दौरान हुई।

मार्टिन लेविस अपने जूते और ट्राउजर गीले नहीं होने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन कुछ ऐसा हुआ कि पूरी तरह से गंदे पानी में डूब गया, जो उसकी पत्नी राचेल द्वारा रिकॉर्ड की गई एक प्रफुल्लित करने वाली क्लिप है।

इंग्लैंड के 50 वर्षीय मार्टिन अपनी पत्नी राचेल के साथ मालदीव के फुवामुला में छुट्टियां मनाने गए थे, जब यह मजेदार घटना घटी। यह पल कैमरे में कैद हो गया और सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

 

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वीडियो में, मार्टिन को अपने पैरों को दलदल में फंसने से बचाने के लिए अपनी चप्पल उतारने का फैसला करने से पहले धीरे-धीरे कीचड़ पर चलते हुए देखा जा सकता है।

वीडियो में उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है, “मुझे नहीं पता कि मैं कैसे पार करने जा रहा हूँ, देखिए मेरी ट्राउजर गंदी हो रही है और मुझे वहां जाने की कोशिश करनी है।” मार्टिन के कीचड़ भरे पानी में कदम रखते ही गंदे पानी से भरे गड्ढे में गिर जाता है।

जिसे दरखकर राचेल खूब हंसती हैं और उसकी हंसती वीडिओ सुनाई दे रही है। देखते ही देखते यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसे 27 मिलियन से अधिक बार देखा जा चुका है। लुईस ने फिर इस वीडियो को टिकटॉक पर वीडियो साझा किया।

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नीम से त्वचा के लिए होते है चमत्कारी फायदे, जाने कैसे करें इस्तेमाल

नीम में कई सारे गुण होते हैं जो आपकी सेहत और त्वचा के लिए अच्छा होता है, ये आपकी इम्युनिटी को बढ़ाने का भी काम करता है साथ ही साथ कई सारी बिमारियों को भी आपसे दूर रखता है।

यदि आपको त्वचा से सम्बंधित कोई भी समस्या हो तो उसमें नीम बेहतर साबित होता है इसके लिए नीम से बने पैक्स का इस्तेमाल करें नीम त्वचा से गंदगी निकालता है और संक्रमण भी दूर करता है।

मुंहासे, चिपचिपापन या फिर दाग-धब्बों जैसी त्वचा की समस्याओं को दूर करने के लिए नीम की पत्तियों का इस्तेमाल बेहतर नतीजे देता है।

नीम में एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। नीम के औषधीय गुण त्वचा की गहराई से सफ़ाई करते हैं। त्वचा संबंधी कोई समस्या है तो नीम की पत्तियों का उपयोग हर तरह से फ़ायदेमंद होगा।

नीम कई सारी जड़ी-बूटियों में अपना पहला स्थान रखता है और क्योंकि इसमें कई सारे चमत्कारी गुण होते हैं तो आइये जानते हैं :-

नीम और नींबू पैक

तैलीय त्वचा हो, तो चेहरे पर नीम और नींबू का फेसपैक लगाएं। ये त्वचा से निकलने वाले प्राकृतिक तेल को रोकता है। साथ ही यह फेस पैक एंटीबैक्टीरियल होता है।

बनाने की विधि:- मुट्ठीभर नीम की पत्तियों को पीस कर गाढ़ा पेस्ट बनाएं। इसमें एक नींबू निचोड़ दें। इसे चेहरे और गर्दन पर लगभग 20 मिनट तक लगाएं और फिर साफ़ पानी से धो लें। हफ्ते में दो बार लगाएं, त्वचा का तैलीयपन कम होगा।

नीम और बेसन पैक

कई लोगों को मुंहासों की समस्या होती है। नीम से बना फेस पैक मुंहासों के साथ-साथ दाग़ से भी राहत देगा।

बनाने की विधि:- एक चम्मच नीम पाउडर, एक चम्मच बेसन, थोड़ी-सा दही और पानी को मिलाकर पेस्ट बनाने के बाद उसे चेहरे पर लगाएं। पेस्ट को क़रीब 15-20 मिनट तक लगाकर रखें। फिर चेहरा धो लें।

नीम और दूध फेस पैक

नीम चेहरे में जमा गंदगी और धूल को साफ़ करता है और दूध त्वचा को मुलायम बनाता है।

बनाने की विधि:- एक चम्मच बेसन और दो चम्मच नीम पाउडर में लगभग चार-पांच चम्मच दूध मिलाकर पेस्ट तैयार करें। अब इसे चेहरे पर लगाकर बीस मिनट तक सूखने दें और फिर ठंडे पानी से धो लें। दूध की मात्रा ज़रूरत के अनुसार बढ़ा सकते हैं।

नीम और गुलाब पैक

यह पैक टैनिंग से बहुत जल्द राहत देता है।

बनाने की विधि:- मुट्ठीभर नीम की पत्तियां और गुलाब की पंखुड़ियों को पानी मिलाकर अच्छी तरह से बारीक पीसकर पेस्ट बना लें। पेस्ट को बीस मिनट तक चेहरे पर लगा रहने दें और फिर ठंडे पानी से धोएं। चेहरे को और अधिक चमकदार बनाने के लिए पेस्ट लगाने के बाद चेहरे पर बर्फ के टुकड़े लगाएं।

झुर्रियों से छुटकारा

नीम बढ़ती उम्र के साथ चेहरे पर पड़ने वाली झुर्रियों को कम करता है।

बनाने की विधि:- एक मुट्ठी ताजी नीम की पत्तियों का पेस्ट बनाएं। इसमें हल्दी का पाउडर मिलाकर चेहरे पर लगाएं। 10 मिनट बाद चेहरे को गुनगुने पानी से धो लें। झुर्रियों से राहत मिलेगी।

दाग-धब्बे दूर होंगे

चेहरे के दाग – धब्बों को कम करने के लिए नीम बहुत ही प्रभावकारी है।

बनाने की विधि:- दो चम्मच नीम पाउडर और एक चम्मच सेब के सिरके में एक चम्मच शहद मिलाकर पेस्ट बना लें। इसे 15 मिनट तक लगा रहने दें और फिर ठंडे पानी से चेहरे को साफ़ कर लें।

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67 कारीगरों ने 32 दिन में तैयार किया था अनुष्का शर्मा का वेडिंग लहंगा, जानिए क्या थी खासियत

साल 2017 में अनुष्का शर्मा और विराट कोहली ने इटली के टस्कनी शहर में स्थित बोर्गो फेनोशिएटो रिजॉर्ट में शादी की थी। जो दुनिया का दूसरा सबसे महंगा होटल है।

दोनों ने अपने विवाह समारोह को पूरी तरह प्राइवेट रखा था, जिसमें परिवार के लोग और करीबी दोस्त ही शामिल हुए थे। इसी शादी में करीब 100 करोड़ रूपए खर्च होने का अनुमान लगाया जाता है, जिसमें अनुष्का की वेडिंग रिंग से लेकर अदाकारा का ब्राइडल जोड़ा शामिल है।

शादी के मुख्य फंक्शन के लिए विराट-अनुष्का ने भारत के मशहूर फैशन डिजाइनर सब्यसाची के कपड़े पहने थे, जिनकी कीमत ही करीब 1 करोड़ रूपए के आसपास थी।

32 दिन में तैयार हुआ था लहंगा

विराट की दुल्हन बनीं अनुष्का शर्मा ने अपने लिए ब्लश पिंक कलर का लहंगा चुना था, जोकि कपल की वेडिंग थीम से पूरी तरह मैच कर रहा था। इस लहंगे को बनाने में 32 दिन का समय लगा था, जिसे तराशने के लिए बंगाल के 67 कारीगरों की मदद ली गई थी।

ग्लैमर एंड ट्रेडिशनल का परफेक्ट मिक्स

हल्के गुलाबी रंग के इस लहंगे में रेशम के धागों से फ्लॉस बने थे, जिसमें विदेशी पक्षियों और तितलियों के छोटे-छोटे रूपांकन को अटैच किया थे। लहंगे की हेमलाइन में डिज़ाइनर का सिग्नेचर वर्क था। ब्लाउज पर भी स्कर्ट पोर्शन के मैचिंग कढ़ाई की थी और इसका दुपट्टा भी बहुत प्यारा था।

सोने-चांदी के अलावा मोतियों का काम

इस बात में कोई दोराय नहीं कि इस पिंक कलर ब्राइडल लहंगे में अनुष्का किसी ड्रीमगर्ल से कम नहीं लग रही थीं। लहंगे को सजाने के लिए सोने-चांदी के तारों के अलावा मोती-क्रिस्टल और बीड्स का इस्तेमाल किया गया था।

मेकअप एंड गहने

पारंपरिक इंडियन दुल्हन बनीं अनुष्का ने अपने लहंगे से मैचिंग की जूलरी पहनी थी, जिसमें गोल्ड-रूबी और डायमंड से बना हार, गले को कवर करता नेकपीस, मोती और गुलाबी स्पिनल में बने झुमके-नथ और माथा पट्टी शामिल थी।

वहीं अपने लुक को कम्पलीट करने के लिए अनुष्का ने मेकअप मिनिमम रखा था, जिसमें उनकी नैचुरल ब्यूटी एकदम निखर के आ रही थी।

आपको जानकर हैरानी होगी कि अनुष्का के इस खूबसूरत लंहगे की कीमत 34 लाख रूपए बताई जाती है। वहीं उनके पूरे लुक की कीमत 40 से 45 लाख रूपए है, जिसमें सब्यसाची के डिज़ाइन किए हुए गहने भी शामिल हैं।

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आज भी याद करते हैं लोग इन प्रसिद्ध प्रेम कहानियों को

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“प्रेम कहानी” यह शब्द भले ही किसी परी कथा सा लगता है, लेकिन इतिहास में कई ऐसे प्रेमी जोड़े थे जिन्होनें अपने इश्क को मुकम्मल बनाने के लिए न जाने कितनी कुर्बानियां दी।

शायद यही वजह है कि उनकी मोहब्बत की दास्तान को आज भी याद किया जाता है। आज इस पोस्ट में हम कुछ ऐसी ही प्रेम कहानियों के बारे में जानेगें जिन्हें लोग आज भी याद करते हैं, तो चलिए जानते हैं :-

रानी रूपमति और बाज बहादुर

रानी रूपमती दिखने में बेहद खूबसूरत थी। उनकी खूबसूरती के साथ-साथ उनकी आवाज़ भी बहुत सुरीली और मनमोहक थी। उनकी इसी बात पर बाज बहादुर अपनी जान छिड़कते थे। वे एक दूसरे से बेपनाह मोहब्बत करते थे।

दोनों ने एक -दूसरे से शादी की। इसी दौरान अकबर ने मालवा पर चढ़ाई कर दी और युद्ध शुरू हो गया। इस युद्ध में बहादुर की हार हुई और उन्हें बंधी बना लिया गया। जब रुपमति को इस बात की खबर मिली तो उसने ज़हरीला हीरा खा कर आत्महत्या कर ली।

जब रानी की मौत की खबर अकबर तक पहुंची तो उसे काफी दुख हुआ और पछतावा हुआ। इसके बाद उसने बाज बहादुर को आज़ाद कर दिया।

बाज फिर वापस सारंगपुर गए और उन्होंने रानी की मजार पर सिर पटक-पटक कर अपने प्राण त्याग दिए थे। 1568 में सारंगपुर के पास अकबर ने मकबरे का निर्माण कराया जिसमें बाज बहादुर के मकबरे पर अकबर ने ‘आशिक-ए-सादिक’ और रूपमती की समाधि पर ‘शहीद-ए-वफा’ लिखवाया।

शाहजहां और मुमताज

इतिहास के पन्नों शाहजहां-मुमताज की प्रेम कहानी सबसे अनोखी है। इनकी मोहब्बत की निशानी आज भी ताजमहल के रूप में मौजूद है। करोड़ों प्रेमी इसकी कसमें खाते हैं।

मुगल बादशाह शाहजहां कि वैसे तो कई बेगमें थी, लेकिन मुमताज से उन्हें इतनी मोहब्बत थी कि उनकी मौत के बाद उन्होंने मुमताज की याद में ताजमहल बनवा दिया।

बाजीराव और मस्तानी

बाजीराव और मस्तानी की प्रेम कहानी पर फिल्म भी बनाई जा चुकी है जिसे लोगों ने काफी पसंद किया। 18वीं सदी की ये प्रेम कहानी इतिहास के पन्नों में अमर है।

बाजीराव एक ऐसा योद्धा था जो कोई भी युद्ध नहीं हारता था। इधर मुस्लिम महिला और हिंदू राजा की बेटी थी मस्तानी। बाजीराव मस्तानी से बेपनाह मोहब्बत करते थे। जबकि बाजीराव की पहले भी शादी हो चुकी थी।

बाजीराव की पहली पत्नी और उनके बच्चों ने भी मस्तानी को छोड़ने के लिए काफी कहा लेकिन इन सबके बावजूद बाजीराव ने किसी की बात नहीं मानी और उन्होंने शादी कर ली। कुछ समय के बाद मस्तानी ने बेटे शमशेर को जन्म दिया जिसका नाम शमशेर था।

जब बाजीराव ने मस्तानी के लिए अलग से महल भी बनवाया था जोकि पुणे में मस्तानी महल है। 1740 में बाजीराव किसी राजनैतिक काम से खरगोन, इंदौर के पास गए थे। वहां उन्हें अचानक तेज बुखार आया औरन उनकी मृत्यु हो गई।

पृथ्वीराज चौहान और रानी संयोगिता

यह कहानी है दिल्ली के सिंहासन पर बैठने वाले अंतिम हिंदू सम्राट पृथ्वीराज चौहान और उनकी पत्नी संयोगिता की है। संयोगिता पृथ्वीराज के परम शत्रु जयचंद की पुत्री थी।

दिल्ली के सिंहासन पर बैठने के बाद युवा संम्राट पृथ्वीराज की ख्याति दूर दूर तक फैल गयी थी। इधर राजकुमारी संयोगिता के रूप के भी खूब चर्चे थे। इन दोनों के बीच प्रेम की कड़ी बना एक चित्रकार। वह देश भर में घूम घूम कर पराक्रमी योद्धाओं के चित्र बनाता था।

इसी तरह पृथ्वीराज का चित्र भी कन्नौज जा पहुंचा। उनका चित्र देखने के बाद राजमहल की लड़कियों के बीच उनके ही चर्चे थे। ये चर्चाएं जब राजकुमारी संयोगिता तक पहुंची तो उनका भी मन हुआ कि पृथ्वीराज का चित्र देखा जाए और जब उन्होंने चित्र देेखा तो पहली ही नज़र में वह पृथ्वीराज पर अपना मन हार बैठीं।

इसी तरह इसी चित्रकार के द्वारा ही संयोगिता का चित्र पृथ्वीराज के पास पहुंचा और इधर भी वही हाल हुआ जो उधर संयोगिता का था। इसी बीच जयचंद ने संयोगिता का स्वयंवर रचने का फैसला किया। पृथ्वीराज को छोड़ उसने सभी राजकुमारों के पास न्यौता भेजा।

इधर पृथ्वीराज को नीचा दिखाने के लिए उसने उनके समान मूर्ति बना कर उसे द्वार पर द्वारपाल की भांति खड़ा कर दिया। संयोगिता जब अपना वर चुनने स्वयंवर में आई तो पृथ्वीराज को वहां ना देख कर निराश हो गयी लेकिन तभी उसकी नज़र द्वार पर पड़ी उनकी मूर्ति पर गयी।

सभी राजकुमारों को छांटती हुई संयोगिता पृथ्वीराज की मूर्ति के पास उसे वरमाला पहनाने पहुंच गयी। जैसे ही संयुक्ता ने उनकी मूर्ति के गले में वरमाला डालनी चाही वैसे ही पृथ्वीराज वहां पहुंच गये और वरमाला मूर्ति की जगह खुद उनके गले में पड़ गयी।

जयचंद ये देख कर गुस्से से लाल हो गया। वो संयोगिता को मारने तलवार ले कर आगे बढ़ा लेकिन उससे पहले ही पृथ्वीराज उसे लेकर वहां से निकल आए। दोनों एक तो हो गये लेकिन इस वजह से जयचंद के मन में पृथ्वीराज के लिए और ज़्यादा द्वेष भर गया।

हीर और रांझा

पंजाब के झंग शहर में, जाट परिवार में जन्मीं हीर, अमीर, खानदानी और बेहद खूबसूरत थी। वहीं रांझा चनाब नदी के किनारे बसे गांव तख्त हजारा के जाट परिवार में जन्मा था। उसका पूरा नाम था धीदो और रांझा जटोंक उपजाति थी। वह चार भाईयों में सबसे छोटा था वह।

राँझा चारो भाइयों में सबसे छोटा होने के कारण अपने पिता का बहुत लाडला था। राँझा के दुसरे भाई खेती में कड़ी मेहनत करते रहते थे और राँझा बाँसुरी बजाता रहता था। जिस कारण उसके भाई रांझा से नफ़रत करते थे।

पिता के देहांत भाई भाभियों ने रांझा के साथ बुरा व्यवहार करना शुरू कर दिया और राँझा घर छोड़कर दिया। भटकते हुए वह हीर के गांव झंग पहुंचा, जहां हीर को उसने पहली बार देखा। वहां वह हीर के घर उसने गाय-भैंसों को चराने का काम किया।

खाली समय में वह छांव में बैठकर बांसुरी बजाया करता था। हीर तो उसके मन को मोह ही चुकी थी, रांझे की बांसुरी सुन हीर भी मंत्रमुग्ध सी हो गई। अब हीर भी उसे पसंद करने लगी थी। दोनों के मन में एक दूसरे के लिए कब मोहब्बत पैदा हुई। इस बात का पता जब हीर के घर पर चला तो हीर की शादी जबरदस्ती एक सैदा खेड़ा नामक आदमी से कर दी गई।

यह सुन कर राँझा पूरी तरह टूट गया था अब रांझे के लिए यहां कुछ बचा न था। उसका मन अब दुनिया-जहान में लगता न था।

वह जोग यानि संन्यास लेने बाबा गोरखनाथ के डेरे, टिल्ला जोगियां चला गया। वह अपना कान छिदाकर बाबा का चेला बन गया। अब वह अलख-निरंजन कहते हुए पंजाब के अलग-अलग क्षेत्रों में घूमने लगा।

एक दिन अचानक वह हीर के ससुराल पहुंच गया। दोनों एक दुसरे को देखकर अपने प्रेम को रोक नहीं पाए और भागकर हीर के गांव आ गए।

हीर के मां-बाप उन्हें शादी करने की इजाजत तो दे दी, लेकिन हीर के चाचा को यह बिल्कुल बर्दाश्त नहीं था। जलन के कारण ही हीर का वह ईर्ष्यालु चाचा कैदो, हीर को लड्डू में जहर डालकर खिला देता है।

जब तक यह बात रांझा को पता चलती है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। वह इस दुख को बर्दाश्त नहीं कर पाया और उसने भी वही जहरीला लड्डू खा लिया, जिसे खाकर हीर की मौत हुई। हीर के साथ-साथ रांझा ने भी दम तोड़ दिया और इस प्रेमकहानी का अंत हो गया।

महेंद्र और मूमल

इन दोनों को आप राजस्थान के लैला मजनू भी कह सकते हैं। महेंद्र शादीशुदा थे ये जानते हुए भी खूबसूरत राजकुमारी मूमल ने अपना दिल महेंद्र को दे दिया। दोनों एक-दूसरे से बेपनाह मोहब्बत करने लगे।

धीरे-धीरे उनका प्रेम परवान चढ़ा। महेंद्र एक तेज रफ्तार वाले ऊंट पर सवार होकर रोज रात में जैसलमेर जाते और सुबह उमर कोट लौट आते। जब महेंद्र के परिवार को इसका पता चला तो उन्होंने ऊंट की टांग तोड़ दी।

लेकिन महेंद्र को वे फिर भी न रोक पाए। महेंद्र ने दूसरा ऊंट लिया और जैसलमेर के लिए निकल पड़े। परंतु वे गलती से जैसलमेर की बजाए बाड़मेर पहुंच गए। जब उन्हें अपनी गलती का पता चला तो वे वापस जैसलमेर की ओर चल पड़े।

इस दौरान मुमल, महेंद्र की प्रतिक्षा करती रही। मूमल का दिल बहलाने के लिए उसकी बहन ने आदमी की तरह वेश धरकर उनके साथ बिस्तर पर लेटी रही। जब महेंद्र महल में आए तो मुमल के साथ किसी आदमी को लेटा देख बेहद निराश हो गए।

वे बिन कुछ कहे अपनी लकड़ी की बेंत छोड़कर वहां से चले गए। मुमल ने महेंद्रा को मनाने को बहुत कोशिश की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। महेंद्रा कभी वापिस लौट कर नहीं आया और मूमल उसका इंज़ार करती रह गई ।

सोनी-महिवाल

पंजाब में जन्में प्रेम के दो पंछी सोनी और महिवाल की प्रेम कहानी आज भी सच्ची प्रेमकहानी के रूप में जानी जाती है। कहा जाता है कि दोनों एक-दूसरे से बेइंतेहां मोहब्बत करते थे।

लेकिन सोनी के पिता ने जब उसकी जबरन शादी कर दी तो दीवाना महिवाल उसके गांव जा पहुंचा। यह शादी उनके बीच दरार न डाल सकी और दोनों मिलते रहे।

लेकिन बाद में जब दोनों की एक साथ मौत हो गई और दोनों हमेशा के लिए एक हो गए, तो वे सच्चे की एक मिसाल बन गए।

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