क्यों कहा जाता है जयपुर को पिंक सिटी, जाने कुछ रोचक तथ्य

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जयपुर राजस्थान राज्य की राजधानी है। जयपुर भारत का एक ऐतिहासिक और खूबसूरत शहर है जो अपने भवनों की प्रमुख रंग योजना के कारण ” पिंक सिटी ” के रूप में भी जाना जाता है।

यह शहर पर्यटकों, संस्कृति, साहित्यिक कलाकारों, इतिहास प्रेमियों, वास्तुकला के प्रति उत्साही, कला, फ़ोटोग्राफ़ी के लिए बहुत प्रसिद्ध है।

इस शहर की स्थापना सवाई जयसिंह ने की थी इसलिए इस शहर को जयपुर नाम दिया गया था। 1818 में ईस्ट इंडिया कंपनी से संधि करने के बाद जयपुर में आधुनिक बदलावों की शुरुआत हुई।

क्यों कहा जाता है जयपुर को पिंक सिटी ?

जयपुर शहर का रंग पहले पीला और सफेद हुआ करता था और इसे केवल जयपुर ही कहा जाता था। सवाई राम सिंह I के शासन के दौरान, 1876 में एचआरएच अल्बर्ट एडवर्ड प्रिंस ऑफ वेल्स (जो बाद में किंग एडवर्ड VII, भारत के सम्राट बने) के स्वागत के लिए शहर को गुलाबी रंग में रंगा गया।

कहा जाता है कि गुलाबी रंग मेहमानों के स्वागत को दर्शाता है, इसलिए जयपुर के महाराजा राम सिंह ने मेहमानों के स्वागत के लिए पूरे शहर को गुलाबी रंग में रंग दिया।

उसके बाद से जयपुर पिंक सिटी कहलाने लगा। कहा जाता है कि जयपुर की ऐतिहासिक इमारतों के निर्माण में गुलाबी पत्थरों का इस्तेमाल किया गया था इसलिए भी जयपुर को गुलाबी नगरी कहा जाता है।

गुलाबी नगरी से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

  • महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने 18 नवंबर 1727 को जयपुर शहर की स्थापना की थी।
  • जयपुर के आकर्षणों में से एक है सिटी पैलेस। यहाँ आप आर्ट गैलरी, म्यूज़ियम, आँगन, बगीचा और विशाल महल, दीवान-ऐ-ख़ास, दीवान-ऐ-आम, सात मंज़िला चन्द्रमहल, गोविन्द देव मंदिर, म्यूज़ियम, राजस्थानी शैली की चित्रकारी और कारीगरी आदि को देख सकते हैं।
  • जंतर मंतर विश्व की सबसे बड़ी वेधशाला है। इसका निर्माण महाराजा जय सिंह द्वितीय के समय में कराया गया था। धुपघड़ी वेधशाला, यहाँ खगोलीय वेधशाला दुनिया की सबसे बड़ी वेधशालायों में से है। इस स्थल पर आप इस वेधशाला का जी भरकर लुफ्त उठा सकते हैं साथ ही यह भी जान सकते हैं कि कैसे नक्षत्रों व सितारों की गतिविधियों का पुरातन में पता लगाया जाता था।
  • नाहरगढ़ किले से पूरा जयपुर शहर दिखाई देता हे। इस किले का निर्माण 1734 में करवाया गया था। फिल्म ‘रंग दे बसंती’ और शुद्ध देशी रोमांस, फिल्म के लिए भी कुछ सीन यहीं पर फिमाए गए हैं।
  • महाराजा सवाई मान सिंह द्वितीय के शासनकाल के दौरान बने सवाई मानसिंह स्टेडियम में लगभग 30,000 लोगों के बैठने की क्षमता है और उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की मेजबानी की है।
  • जवाहर सर्किल एशिया का सबसे बड़ा सर्कुलर पार्क है, जिसे हाइवे ट्रैफिक सर्किल पर विकसित किया गया है। यह जवाहरलाल नेहरू मार्ग पर सांगानेर हवाई अड्डे के पास मालवीय नगर के साथ स्थित है।
  • हवा महल जयपुर का प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल है। महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने इस महल को 1799 में बनवाया था । हवा महल में कुल 953 खिड़कियाँ बनाई गई थी, ताकि हवा आसानी से आ-जा सके इसलिए ये महल विश्व भर में हवा महल के नाम से जाना जाता है। इस महल की जालीनुमा खिडकियों से ठंडी हवाएं आतीं है, इसलिए इसको ‘पैलेस ऑफ़ विंड्स’ भी कहा जाता था।

  • कहा जाता है कि इस महल में से राजघराने की महिलाएं ठंडी हवा का लुफ्त उठाती थीं और बहार होने वाली गतिविधियों पर अपनी कड़ी दृष्टि रखती थीं। यह महल मधुमक्खी के छत्ते जैसा प्रतीत होता है। इसकी महीन नक्काशी इसे जयपुर की शान बनाती है।
  • जयपुर के आलीशान इमारतों में केंद्रीय संग्राहलय (अल्बर्ट म्यूज़ियम) का नाम भी जुड़ा हुआ है। यहाँ इस महल की नक्काशी, हस्तकला आदि को आप करीब से महसूस कर सकते हैं देख सकते हैं।
  • जयपुर स्थित चांदपोल, सूरजपोल, अजमेरी गेट, सांगानेरी गेट, छोटी चौपड़, बड़ी चौपड़, चौड़ा रास्ता सभी एक दूसरे से चोरस रास्तों से जुड़े हुए हैं।
  • जयपुर के आमेर किले में हाथी की सवारी की जाती हे। जो पर्यटक में बहुत ज्यादा प्रसिद्ध हे।

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