यह है दुनिया की 5 सबसे महंगी शराब, कीमत जानकर रह जाएंगे हैरान

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शराब का सेवन सेहत के लिए बहुत ही हानिकारक होता है लेकिन फिर भी लोग बहुत शौक से शराब पीते हैं। कुछ कभी-कभी इसका सेवन करते है, तो कुछ इसके आदी हो जाते है। यूं तो दुनिया में कई तरह के शराब मिलती है, लेकिन आज हम आपको दुनिया की 5 सबसे महंगी शराब के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनकी कीमत जानकर आप हैरान रह जाएंगे।

टकीला ले .925

यह दुनिया की सबसे महंगी शराब है, जिसकी बोतल में 6400 हीरे जड़े हुए हैं। इसे मेक्सिको में  सबसे पहले लॉन्च किया गया था।
इस शराब को आज तक किसी ने नहीं खरीदा है। इसी वजह से आज तक किसी को इसकी कीमत भी मालूम नहीं हुई।

डीवा वोदका

डीवा वोदका (Diva Vodka) को दुनिया की सबसे महंगी वोदका में गिना जाता है। इस बोतल के बीच में अलग तरह का सांचा होता है।

इसमें स्वरोस्की क्रिस्टल (Swarovski Crystals) रखे होते हैं। इनका इस्तेमाल ड्रिंक को गार्निश करने के लिए करते हैं। इस वोदका की कीमत 7 करोड़ 30 लाख रुपये है।

अमांडा डी ब्रिगनैक मिडास

यह दुनिया की सबसे महंगी शैंपेन है, जिसकी एक बोतल की कीमत 1 करोड़ 40 लाख रुपये से ज्यादा है। यह दिखने में भी काफी खूबसूरत लगती है।

डैलमोर 62

ये दुनिया की सबसे महंगी व्हिस्की है, जिसकी आज तक केवल 12 बोतलें ही बिकी हैं। इसकी एक बोतल की कीमत 1 करोड़ 50 लाख रुपये से भी ज्यादा है।

पेनफोल्ड्स एम्पूल

दुनिया की सबसे महंगी रेड वाइन मानी जाती है पेनफोल्ड्स एम्पूल (Penfolds Ampoule)l इस रेड वाइन की बोतल पेन के आकार की होती है। इसकी एक बोतल की कीमत1 करोड़ 20 लाख रुपये के लगभग है।

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ये है ‘मधुमक्खियों का राजा’ जिसे देखकर आपके होश उड़ जाएंगे !!

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मधुमक्खी कीट वर्ग का प्राणी है। प्रत्येक संघ में एक रानी, कई सौ नर और शेष श्रमिक होते हैं। मधुमक्खियाँ छत्ते बनाकर रहती हैं। ये तो बात हुई मधुमक्खी और मधुमक्खियों की रानी की अब हम आपको बताने जा रहें हैं मधुमक्खियों के राजा के बारे में, तो चलिए जानते हैं :-

मधुमक्खियों का राजा कोई नर मधुमक्खी नहीं बल्कि अफ्रीकी देश रवांडा में रहने वाला एक बीकीपर है जिसका नाम है “नादिसाबा” l

इस शख्स का दावा है कि पिछले कई सालों से वह अपने शरीर पर हजारों मधुमक्खियां पाल रहे हैं और वे उन्हें काटती नहीं हैं और हाल ही में उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर चर्चा में आई हैं।

नादिसाबा बताते हैं कि सबसे पहले वह अपने ऊपर रानी मक्खी को रखते हैं और बाकी सब उसके पीछे-पीछे चली आती हैं। रानी मक्खी को वह एक धागे से बांधकर रोकते हैं और बाकी मक्खियां उसे बचाने के लिए आती हैं।

वे रानी को घेर लेती हैं और धीरे-धीरे पूरा शरीर ढक जाता है। हालांकि, नादिसाबा को इन्होंने कभी काटा नहीं है।  नदिसाबा अपने इस असामान्‍य कौशल के कारण मशहूर तो हैं ही, वे इन मधुमक्खियों द्वारा इकट्ठा किए गए शहद को बेचकर खासी कमाई भी करते हैं।

मधुमक्खियां उन्‍हें काटें न इसके लिए समय-समय पर उन पर चीनी का चाशनी का स्‍प्रे करते हैं क्‍योंकि मधुमक्खियों का पेट भरा होने पर उनके डंक मारने की आशंका कम होती है।

इस दौरान कान और नाक को रुई से ढक लिया जाता है ताकि वहां कोई मधुमक्‍खी न घुसे। इसके अलावा वह आंखों के नीचे और होठों पर वैसलीन लगा लेते हैं ताकि वहां मधुमक्खियों को रेंगने से रोका जा सके।

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वायरल वीडियो :- देखें कैसे व्यक्ति शॉर्टकट चक्कर कीचड़ भरे गड्ढे में गिर जाता है।

एक व्यक्ति के दलदल को पार करने के असफल प्रयास का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। दरअसल यह व्यक्ति मार्टिन लुईस नाम का एक ब्रिटिश पर्यटक है। यह घटना मालदीव की यात्रा के दौरान अपनी पत्नी राचेल के साथ सैर के दौरान हुई।

मार्टिन लेविस अपने जूते और ट्राउजर गीले नहीं होने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन कुछ ऐसा हुआ कि पूरी तरह से गंदे पानी में डूब गया, जो उसकी पत्नी राचेल द्वारा रिकॉर्ड की गई एक प्रफुल्लित करने वाली क्लिप है।

इंग्लैंड के 50 वर्षीय मार्टिन अपनी पत्नी राचेल के साथ मालदीव के फुवामुला में छुट्टियां मनाने गए थे, जब यह मजेदार घटना घटी। यह पल कैमरे में कैद हो गया और सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

 

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वीडियो में, मार्टिन को अपने पैरों को दलदल में फंसने से बचाने के लिए अपनी चप्पल उतारने का फैसला करने से पहले धीरे-धीरे कीचड़ पर चलते हुए देखा जा सकता है।

वीडियो में उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है, “मुझे नहीं पता कि मैं कैसे पार करने जा रहा हूँ, देखिए मेरी ट्राउजर गंदी हो रही है और मुझे वहां जाने की कोशिश करनी है।” मार्टिन के कीचड़ भरे पानी में कदम रखते ही गंदे पानी से भरे गड्ढे में गिर जाता है।

जिसे दरखकर राचेल खूब हंसती हैं और उसकी हंसती वीडिओ सुनाई दे रही है। देखते ही देखते यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसे 27 मिलियन से अधिक बार देखा जा चुका है। लुईस ने फिर इस वीडियो को टिकटॉक पर वीडियो साझा किया।

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नीम से त्वचा के लिए होते है चमत्कारी फायदे, जाने कैसे करें इस्तेमाल

नीम में कई सारे गुण होते हैं जो आपकी सेहत और त्वचा के लिए अच्छा होता है, ये आपकी इम्युनिटी को बढ़ाने का भी काम करता है साथ ही साथ कई सारी बिमारियों को भी आपसे दूर रखता है।

यदि आपको त्वचा से सम्बंधित कोई भी समस्या हो तो उसमें नीम बेहतर साबित होता है इसके लिए नीम से बने पैक्स का इस्तेमाल करें नीम त्वचा से गंदगी निकालता है और संक्रमण भी दूर करता है।

मुंहासे, चिपचिपापन या फिर दाग-धब्बों जैसी त्वचा की समस्याओं को दूर करने के लिए नीम की पत्तियों का इस्तेमाल बेहतर नतीजे देता है।

नीम में एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। नीम के औषधीय गुण त्वचा की गहराई से सफ़ाई करते हैं। त्वचा संबंधी कोई समस्या है तो नीम की पत्तियों का उपयोग हर तरह से फ़ायदेमंद होगा।

नीम कई सारी जड़ी-बूटियों में अपना पहला स्थान रखता है और क्योंकि इसमें कई सारे चमत्कारी गुण होते हैं तो आइये जानते हैं :-

नीम और नींबू पैक

तैलीय त्वचा हो, तो चेहरे पर नीम और नींबू का फेसपैक लगाएं। ये त्वचा से निकलने वाले प्राकृतिक तेल को रोकता है। साथ ही यह फेस पैक एंटीबैक्टीरियल होता है।

बनाने की विधि:- मुट्ठीभर नीम की पत्तियों को पीस कर गाढ़ा पेस्ट बनाएं। इसमें एक नींबू निचोड़ दें। इसे चेहरे और गर्दन पर लगभग 20 मिनट तक लगाएं और फिर साफ़ पानी से धो लें। हफ्ते में दो बार लगाएं, त्वचा का तैलीयपन कम होगा।

नीम और बेसन पैक

कई लोगों को मुंहासों की समस्या होती है। नीम से बना फेस पैक मुंहासों के साथ-साथ दाग़ से भी राहत देगा।

बनाने की विधि:- एक चम्मच नीम पाउडर, एक चम्मच बेसन, थोड़ी-सा दही और पानी को मिलाकर पेस्ट बनाने के बाद उसे चेहरे पर लगाएं। पेस्ट को क़रीब 15-20 मिनट तक लगाकर रखें। फिर चेहरा धो लें।

नीम और दूध फेस पैक

नीम चेहरे में जमा गंदगी और धूल को साफ़ करता है और दूध त्वचा को मुलायम बनाता है।

बनाने की विधि:- एक चम्मच बेसन और दो चम्मच नीम पाउडर में लगभग चार-पांच चम्मच दूध मिलाकर पेस्ट तैयार करें। अब इसे चेहरे पर लगाकर बीस मिनट तक सूखने दें और फिर ठंडे पानी से धो लें। दूध की मात्रा ज़रूरत के अनुसार बढ़ा सकते हैं।

नीम और गुलाब पैक

यह पैक टैनिंग से बहुत जल्द राहत देता है।

बनाने की विधि:- मुट्ठीभर नीम की पत्तियां और गुलाब की पंखुड़ियों को पानी मिलाकर अच्छी तरह से बारीक पीसकर पेस्ट बना लें। पेस्ट को बीस मिनट तक चेहरे पर लगा रहने दें और फिर ठंडे पानी से धोएं। चेहरे को और अधिक चमकदार बनाने के लिए पेस्ट लगाने के बाद चेहरे पर बर्फ के टुकड़े लगाएं।

झुर्रियों से छुटकारा

नीम बढ़ती उम्र के साथ चेहरे पर पड़ने वाली झुर्रियों को कम करता है।

बनाने की विधि:- एक मुट्ठी ताजी नीम की पत्तियों का पेस्ट बनाएं। इसमें हल्दी का पाउडर मिलाकर चेहरे पर लगाएं। 10 मिनट बाद चेहरे को गुनगुने पानी से धो लें। झुर्रियों से राहत मिलेगी।

दाग-धब्बे दूर होंगे

चेहरे के दाग – धब्बों को कम करने के लिए नीम बहुत ही प्रभावकारी है।

बनाने की विधि:- दो चम्मच नीम पाउडर और एक चम्मच सेब के सिरके में एक चम्मच शहद मिलाकर पेस्ट बना लें। इसे 15 मिनट तक लगा रहने दें और फिर ठंडे पानी से चेहरे को साफ़ कर लें।

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67 कारीगरों ने 32 दिन में तैयार किया था अनुष्का शर्मा का वेडिंग लहंगा, जानिए क्या थी खासियत

साल 2017 में अनुष्का शर्मा और विराट कोहली ने इटली के टस्कनी शहर में स्थित बोर्गो फेनोशिएटो रिजॉर्ट में शादी की थी। जो दुनिया का दूसरा सबसे महंगा होटल है।

दोनों ने अपने विवाह समारोह को पूरी तरह प्राइवेट रखा था, जिसमें परिवार के लोग और करीबी दोस्त ही शामिल हुए थे। इसी शादी में करीब 100 करोड़ रूपए खर्च होने का अनुमान लगाया जाता है, जिसमें अनुष्का की वेडिंग रिंग से लेकर अदाकारा का ब्राइडल जोड़ा शामिल है।

शादी के मुख्य फंक्शन के लिए विराट-अनुष्का ने भारत के मशहूर फैशन डिजाइनर सब्यसाची के कपड़े पहने थे, जिनकी कीमत ही करीब 1 करोड़ रूपए के आसपास थी।

32 दिन में तैयार हुआ था लहंगा

विराट की दुल्हन बनीं अनुष्का शर्मा ने अपने लिए ब्लश पिंक कलर का लहंगा चुना था, जोकि कपल की वेडिंग थीम से पूरी तरह मैच कर रहा था। इस लहंगे को बनाने में 32 दिन का समय लगा था, जिसे तराशने के लिए बंगाल के 67 कारीगरों की मदद ली गई थी।

ग्लैमर एंड ट्रेडिशनल का परफेक्ट मिक्स

हल्के गुलाबी रंग के इस लहंगे में रेशम के धागों से फ्लॉस बने थे, जिसमें विदेशी पक्षियों और तितलियों के छोटे-छोटे रूपांकन को अटैच किया थे। लहंगे की हेमलाइन में डिज़ाइनर का सिग्नेचर वर्क था। ब्लाउज पर भी स्कर्ट पोर्शन के मैचिंग कढ़ाई की थी और इसका दुपट्टा भी बहुत प्यारा था।

सोने-चांदी के अलावा मोतियों का काम

इस बात में कोई दोराय नहीं कि इस पिंक कलर ब्राइडल लहंगे में अनुष्का किसी ड्रीमगर्ल से कम नहीं लग रही थीं। लहंगे को सजाने के लिए सोने-चांदी के तारों के अलावा मोती-क्रिस्टल और बीड्स का इस्तेमाल किया गया था।

मेकअप एंड गहने

पारंपरिक इंडियन दुल्हन बनीं अनुष्का ने अपने लहंगे से मैचिंग की जूलरी पहनी थी, जिसमें गोल्ड-रूबी और डायमंड से बना हार, गले को कवर करता नेकपीस, मोती और गुलाबी स्पिनल में बने झुमके-नथ और माथा पट्टी शामिल थी।

वहीं अपने लुक को कम्पलीट करने के लिए अनुष्का ने मेकअप मिनिमम रखा था, जिसमें उनकी नैचुरल ब्यूटी एकदम निखर के आ रही थी।

आपको जानकर हैरानी होगी कि अनुष्का के इस खूबसूरत लंहगे की कीमत 34 लाख रूपए बताई जाती है। वहीं उनके पूरे लुक की कीमत 40 से 45 लाख रूपए है, जिसमें सब्यसाची के डिज़ाइन किए हुए गहने भी शामिल हैं।

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आज भी याद करते हैं लोग इन प्रसिद्ध प्रेम कहानियों को

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“प्रेम कहानी” यह शब्द भले ही किसी परी कथा सा लगता है, लेकिन इतिहास में कई ऐसे प्रेमी जोड़े थे जिन्होनें अपने इश्क को मुकम्मल बनाने के लिए न जाने कितनी कुर्बानियां दी।

शायद यही वजह है कि उनकी मोहब्बत की दास्तान को आज भी याद किया जाता है। आज इस पोस्ट में हम कुछ ऐसी ही प्रेम कहानियों के बारे में जानेगें जिन्हें लोग आज भी याद करते हैं, तो चलिए जानते हैं :-

रानी रूपमति और बाज बहादुर

रानी रूपमती दिखने में बेहद खूबसूरत थी। उनकी खूबसूरती के साथ-साथ उनकी आवाज़ भी बहुत सुरीली और मनमोहक थी। उनकी इसी बात पर बाज बहादुर अपनी जान छिड़कते थे। वे एक दूसरे से बेपनाह मोहब्बत करते थे।

दोनों ने एक -दूसरे से शादी की। इसी दौरान अकबर ने मालवा पर चढ़ाई कर दी और युद्ध शुरू हो गया। इस युद्ध में बहादुर की हार हुई और उन्हें बंधी बना लिया गया। जब रुपमति को इस बात की खबर मिली तो उसने ज़हरीला हीरा खा कर आत्महत्या कर ली।

जब रानी की मौत की खबर अकबर तक पहुंची तो उसे काफी दुख हुआ और पछतावा हुआ। इसके बाद उसने बाज बहादुर को आज़ाद कर दिया।

बाज फिर वापस सारंगपुर गए और उन्होंने रानी की मजार पर सिर पटक-पटक कर अपने प्राण त्याग दिए थे। 1568 में सारंगपुर के पास अकबर ने मकबरे का निर्माण कराया जिसमें बाज बहादुर के मकबरे पर अकबर ने ‘आशिक-ए-सादिक’ और रूपमती की समाधि पर ‘शहीद-ए-वफा’ लिखवाया।

शाहजहां और मुमताज

इतिहास के पन्नों शाहजहां-मुमताज की प्रेम कहानी सबसे अनोखी है। इनकी मोहब्बत की निशानी आज भी ताजमहल के रूप में मौजूद है। करोड़ों प्रेमी इसकी कसमें खाते हैं।

मुगल बादशाह शाहजहां कि वैसे तो कई बेगमें थी, लेकिन मुमताज से उन्हें इतनी मोहब्बत थी कि उनकी मौत के बाद उन्होंने मुमताज की याद में ताजमहल बनवा दिया।

बाजीराव और मस्तानी

बाजीराव और मस्तानी की प्रेम कहानी पर फिल्म भी बनाई जा चुकी है जिसे लोगों ने काफी पसंद किया। 18वीं सदी की ये प्रेम कहानी इतिहास के पन्नों में अमर है।

बाजीराव एक ऐसा योद्धा था जो कोई भी युद्ध नहीं हारता था। इधर मुस्लिम महिला और हिंदू राजा की बेटी थी मस्तानी। बाजीराव मस्तानी से बेपनाह मोहब्बत करते थे। जबकि बाजीराव की पहले भी शादी हो चुकी थी।

बाजीराव की पहली पत्नी और उनके बच्चों ने भी मस्तानी को छोड़ने के लिए काफी कहा लेकिन इन सबके बावजूद बाजीराव ने किसी की बात नहीं मानी और उन्होंने शादी कर ली। कुछ समय के बाद मस्तानी ने बेटे शमशेर को जन्म दिया जिसका नाम शमशेर था।

जब बाजीराव ने मस्तानी के लिए अलग से महल भी बनवाया था जोकि पुणे में मस्तानी महल है। 1740 में बाजीराव किसी राजनैतिक काम से खरगोन, इंदौर के पास गए थे। वहां उन्हें अचानक तेज बुखार आया औरन उनकी मृत्यु हो गई।

पृथ्वीराज चौहान और रानी संयोगिता

यह कहानी है दिल्ली के सिंहासन पर बैठने वाले अंतिम हिंदू सम्राट पृथ्वीराज चौहान और उनकी पत्नी संयोगिता की है। संयोगिता पृथ्वीराज के परम शत्रु जयचंद की पुत्री थी।

दिल्ली के सिंहासन पर बैठने के बाद युवा संम्राट पृथ्वीराज की ख्याति दूर दूर तक फैल गयी थी। इधर राजकुमारी संयोगिता के रूप के भी खूब चर्चे थे। इन दोनों के बीच प्रेम की कड़ी बना एक चित्रकार। वह देश भर में घूम घूम कर पराक्रमी योद्धाओं के चित्र बनाता था।

इसी तरह पृथ्वीराज का चित्र भी कन्नौज जा पहुंचा। उनका चित्र देखने के बाद राजमहल की लड़कियों के बीच उनके ही चर्चे थे। ये चर्चाएं जब राजकुमारी संयोगिता तक पहुंची तो उनका भी मन हुआ कि पृथ्वीराज का चित्र देखा जाए और जब उन्होंने चित्र देेखा तो पहली ही नज़र में वह पृथ्वीराज पर अपना मन हार बैठीं।

इसी तरह इसी चित्रकार के द्वारा ही संयोगिता का चित्र पृथ्वीराज के पास पहुंचा और इधर भी वही हाल हुआ जो उधर संयोगिता का था। इसी बीच जयचंद ने संयोगिता का स्वयंवर रचने का फैसला किया। पृथ्वीराज को छोड़ उसने सभी राजकुमारों के पास न्यौता भेजा।

इधर पृथ्वीराज को नीचा दिखाने के लिए उसने उनके समान मूर्ति बना कर उसे द्वार पर द्वारपाल की भांति खड़ा कर दिया। संयोगिता जब अपना वर चुनने स्वयंवर में आई तो पृथ्वीराज को वहां ना देख कर निराश हो गयी लेकिन तभी उसकी नज़र द्वार पर पड़ी उनकी मूर्ति पर गयी।

सभी राजकुमारों को छांटती हुई संयोगिता पृथ्वीराज की मूर्ति के पास उसे वरमाला पहनाने पहुंच गयी। जैसे ही संयुक्ता ने उनकी मूर्ति के गले में वरमाला डालनी चाही वैसे ही पृथ्वीराज वहां पहुंच गये और वरमाला मूर्ति की जगह खुद उनके गले में पड़ गयी।

जयचंद ये देख कर गुस्से से लाल हो गया। वो संयोगिता को मारने तलवार ले कर आगे बढ़ा लेकिन उससे पहले ही पृथ्वीराज उसे लेकर वहां से निकल आए। दोनों एक तो हो गये लेकिन इस वजह से जयचंद के मन में पृथ्वीराज के लिए और ज़्यादा द्वेष भर गया।

हीर और रांझा

पंजाब के झंग शहर में, जाट परिवार में जन्मीं हीर, अमीर, खानदानी और बेहद खूबसूरत थी। वहीं रांझा चनाब नदी के किनारे बसे गांव तख्त हजारा के जाट परिवार में जन्मा था। उसका पूरा नाम था धीदो और रांझा जटोंक उपजाति थी। वह चार भाईयों में सबसे छोटा था वह।

राँझा चारो भाइयों में सबसे छोटा होने के कारण अपने पिता का बहुत लाडला था। राँझा के दुसरे भाई खेती में कड़ी मेहनत करते रहते थे और राँझा बाँसुरी बजाता रहता था। जिस कारण उसके भाई रांझा से नफ़रत करते थे।

पिता के देहांत भाई भाभियों ने रांझा के साथ बुरा व्यवहार करना शुरू कर दिया और राँझा घर छोड़कर दिया। भटकते हुए वह हीर के गांव झंग पहुंचा, जहां हीर को उसने पहली बार देखा। वहां वह हीर के घर उसने गाय-भैंसों को चराने का काम किया।

खाली समय में वह छांव में बैठकर बांसुरी बजाया करता था। हीर तो उसके मन को मोह ही चुकी थी, रांझे की बांसुरी सुन हीर भी मंत्रमुग्ध सी हो गई। अब हीर भी उसे पसंद करने लगी थी। दोनों के मन में एक दूसरे के लिए कब मोहब्बत पैदा हुई। इस बात का पता जब हीर के घर पर चला तो हीर की शादी जबरदस्ती एक सैदा खेड़ा नामक आदमी से कर दी गई।

यह सुन कर राँझा पूरी तरह टूट गया था अब रांझे के लिए यहां कुछ बचा न था। उसका मन अब दुनिया-जहान में लगता न था।

वह जोग यानि संन्यास लेने बाबा गोरखनाथ के डेरे, टिल्ला जोगियां चला गया। वह अपना कान छिदाकर बाबा का चेला बन गया। अब वह अलख-निरंजन कहते हुए पंजाब के अलग-अलग क्षेत्रों में घूमने लगा।

एक दिन अचानक वह हीर के ससुराल पहुंच गया। दोनों एक दुसरे को देखकर अपने प्रेम को रोक नहीं पाए और भागकर हीर के गांव आ गए।

हीर के मां-बाप उन्हें शादी करने की इजाजत तो दे दी, लेकिन हीर के चाचा को यह बिल्कुल बर्दाश्त नहीं था। जलन के कारण ही हीर का वह ईर्ष्यालु चाचा कैदो, हीर को लड्डू में जहर डालकर खिला देता है।

जब तक यह बात रांझा को पता चलती है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। वह इस दुख को बर्दाश्त नहीं कर पाया और उसने भी वही जहरीला लड्डू खा लिया, जिसे खाकर हीर की मौत हुई। हीर के साथ-साथ रांझा ने भी दम तोड़ दिया और इस प्रेमकहानी का अंत हो गया।

महेंद्र और मूमल

इन दोनों को आप राजस्थान के लैला मजनू भी कह सकते हैं। महेंद्र शादीशुदा थे ये जानते हुए भी खूबसूरत राजकुमारी मूमल ने अपना दिल महेंद्र को दे दिया। दोनों एक-दूसरे से बेपनाह मोहब्बत करने लगे।

धीरे-धीरे उनका प्रेम परवान चढ़ा। महेंद्र एक तेज रफ्तार वाले ऊंट पर सवार होकर रोज रात में जैसलमेर जाते और सुबह उमर कोट लौट आते। जब महेंद्र के परिवार को इसका पता चला तो उन्होंने ऊंट की टांग तोड़ दी।

लेकिन महेंद्र को वे फिर भी न रोक पाए। महेंद्र ने दूसरा ऊंट लिया और जैसलमेर के लिए निकल पड़े। परंतु वे गलती से जैसलमेर की बजाए बाड़मेर पहुंच गए। जब उन्हें अपनी गलती का पता चला तो वे वापस जैसलमेर की ओर चल पड़े।

इस दौरान मुमल, महेंद्र की प्रतिक्षा करती रही। मूमल का दिल बहलाने के लिए उसकी बहन ने आदमी की तरह वेश धरकर उनके साथ बिस्तर पर लेटी रही। जब महेंद्र महल में आए तो मुमल के साथ किसी आदमी को लेटा देख बेहद निराश हो गए।

वे बिन कुछ कहे अपनी लकड़ी की बेंत छोड़कर वहां से चले गए। मुमल ने महेंद्रा को मनाने को बहुत कोशिश की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। महेंद्रा कभी वापिस लौट कर नहीं आया और मूमल उसका इंज़ार करती रह गई ।

सोनी-महिवाल

पंजाब में जन्में प्रेम के दो पंछी सोनी और महिवाल की प्रेम कहानी आज भी सच्ची प्रेमकहानी के रूप में जानी जाती है। कहा जाता है कि दोनों एक-दूसरे से बेइंतेहां मोहब्बत करते थे।

लेकिन सोनी के पिता ने जब उसकी जबरन शादी कर दी तो दीवाना महिवाल उसके गांव जा पहुंचा। यह शादी उनके बीच दरार न डाल सकी और दोनों मिलते रहे।

लेकिन बाद में जब दोनों की एक साथ मौत हो गई और दोनों हमेशा के लिए एक हो गए, तो वे सच्चे की एक मिसाल बन गए।

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जानिए कौन है हिमानी बुंदेला, जो बनी “कौन बनेगा करोड़पति” की पहली करोड़पति !!

टीवी के पॉपुलर गेम शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ ने ना जानें कितने लोगों की जिंदगी को बदला है। बॉलिवुड के महानायक अमिताभ बच्चन के शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के 13वें सीजन की पहली करोड़पति बनी हैं हिमानी बुंदेला।

आज के इस लेख में हम जानेगें हिमानी बुंदेला के बारे में, तो चलिए जानते हैं :-

हिमानी बुंदेला आगरा की रहने वाली हैं। केवल 25 साल की उम्र में हिमानी बुंदेला ‘कौन बनेगा करोड़पति’ सीज़न 13 की पहली करोड़पति बन गयी हैं। उनकी कामयाबी की अहमियत इसलिए भी है कि वो देख नहीं सकतीं।

हिमानी जब 15 साल की थीं तब उनकी आंखों की रोशनी एक दुर्घटना में चली गई। आर्थिक रूप से सामान्य परिवार ने हिमानी की आंखों के चार-चार ऑपरेशन का ख़र्चा उठाया, लेकिन आंखों की रोशनी नहीं लौटी लेकिन हिमानी ने कभी हिम्मत नहीं हारी।

नए सिरे से शुरुआत की और अपने परिवार में सरकारी नौकरी हासिल करने वाली पहली शख़्स बनीं। उन्होंने ग्रेजुएशन किया और इसके बाद बीएड करने के बाद केंद्रीय विद्यालय में बतौर टीचर सलेक्शन हो गया।

एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि वह ‘केबीसी के लिए 2009 से कोशिश कर रही थी’ उन्होंने कहा मुझे बचपन से ही टीवी देखने का शौक़ था।

जब मैं रियलिटी शो देखती थी और लोगों को परफ़ॉर्मेंस करते देखती थी तो मेरे मन में भी आता था कि क्या मैं भी टीवी पर आ सकती हूँ ?

फिर मैंने केबीसी देखा तो महसूस हुआ कि इस शो में तो हम जेनरल नॉलेज के दम पर जा सकते हैं और तभी मैंने तय कर लिया कि मुझे एक दिन उस हॉट सीट पर बैठना है और अमिताभ सर से मिलना है।

मैंने साल 2009 से ही ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में रजिस्ट्रेशन की कोशिश शुरू कर दी थी, लेकिन हर बार कोशिश फ़ेल हो जाती थी, रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाता था।

इस बीच मेरी दुनिया बदल गई, और आंखों की रोशनी चली गई लेकिन दस साल के बाद 2019 में रजिस्ट्रेशन सफल रहा, पर हॉट सीट पर बैठने का मौका नहीं मिल पाया। 2019 से 2021 तक लगातार तीन बार रजिस्ट्रेशन सफ़ल हुआ और आख़िरकार मौका 2021 में मिला।

अनोखी प्रेम कहानी :- 83 साल के व्यक्ति ने 27 साल की लड़की से रचाई शादी

कहते है कि प्यार अँधा होता है। प्यार की कोई उम्र नहीं होती है। आज के इस लेख में हम एक ऐसी ही अनोखी प्रेम कहानी के बारे में जानेगें। जिसे पढ़ने के बाद आप जरूर कहेंगे कि प्यार सच में अँधा होता है।

तो चलिए जानते हैं :-

यह मामला इंडोनेशिया से सामने आया है। जहां पर एक 83 साल के शख्स ने 27 साल की लड़की से शादी की है। इन दोनों को पहली नज़र में ही प्यार हो गया था।

आपको बता दें कि सुदीर्गों नाम के व्यक्ति ने 27 साल की महिला नूरैनी से शादी की है हालांकि उसकी खुद की उम्र 83 साल है। तो वहीं उनके बड़े बेटे की उम्र 51 साल की है।

आपको बता दें कि लड़की के पिता की उम्र सदीर्गो के बड़े बेटे से भी कम है। इसका मतलब है कि अपने पिता से भी ज्यादा उम्र के शख्स से इस महिला ने शादी की है और वह उसके बच्चों की सौतेली मां बनी है।

कैसे हुई दोनों की पहली मुलाकात

सुदीर्गो उस महिला के माता-पिता के पास एक मामले में सुझाव देने के लिए गए थे। उसी दौरान उनकी नज़र उस महिला पर पड़ी।

मीडिया से बात करते हए महिला ने कहा कि पहली नज़र में ही हम दोनों को एक दूसरे से प्यार हो गया था। हम लोग उसके बाद से किसी बहाने मिलते रहे।

शादी का प्रस्ताव

मीडिया से बात करते हुए इस बुजुर्ग ने बताया कि मैं अब उम्र के उस पड़ाव पर हं जहां मेरे लिए रोमांटिक रिलेशन ऐसा कुछ भी नहीं है। लेकिन इस महिला से मिलने के बाद मुझे एक अलग सा एहसास हआ। इसीलिए मैंने उनसे अपने प्यार का इजहार किया और शादी का प्रस्ताव भी रखा।

आसानी से मान गए लड़की के परिवार वाले

दोनों के रिश्ते में सबसे खास बात यह है कि महिला के परिवार वाले भी शादी के लिए आसानी से मान गए। दोनों को शादी करने के लिए किसी तरह की कोई भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। हालांकि बुजुर्ग के बड़े बेटे ने कई बार इस रिश्ते को लेकर चिंता जताई थी। लेकिन बाद में उन्हें भी कोई दिक्कत नहीं हुई।

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आखिर क्यों ‘पारिजात वृक्ष’ को इतना पवित्र माना जाता है जानिए क्या है खासियत

भारत में प्राचीन काल से ही वृक्षों की पूजा अर्चना होती चली आ रही हैं, फिर चाहे वो पीपल का पेड़ हो या बरगद का। हमारे देश में बहुत से ऐसे वृक्ष है जिनका बड़ा धार्मिक महत्व है। ऐसा ही एक अद्भुत वृक्ष है ‘पारिजात’।

पारिजात वृक्ष भगवान श्री राम का बहुत प्रिय है। इस पौधे के साथ-साथ इस पर आने वाले नाजुक सफेद फूल और उसकी मनमोहक खुशबू का भी हिंदू पौराणिक कथाओं में बहुत महत्व है।

पारिजात का वृक्ष 10-15 फीट ऊंचा होता है। कहीं कहीं इसकी ऊँचाई 25 से 30 फीट तक भी चली जाती है। खासतौर पर ये बागबगीचों की शोभा होता है। इसके फूल बेहद खूबसूरत होते हैं।

पारिजात पर काफी संख्या में फूल लगते हैं या आप कह सकते हैं कि यह वृक्ष फूलों से लदा होता है। यह मध्य भारत और हिमालय की नीची तराइयों में अधिक पैदा होता है।

इस अद्भुत वृक्ष की खास बात यह है कि इसमें फूल तो जरूर खिलते हैं लेकिन वे भी रात के समय और सुबह होते-होते वे सब मुरझा जाते हैं।

इन फूलों को खासतौर पर लक्ष्मी पूजन के लिए इस्तेमाल किया जाता है लेकिन केवल उन्हीं फूलों को इस्तेमाल किया जाता है जो अपने आप पेड़ से टूटकर नीचे गिर जाते हैं, क्योंकि इस पेड़ से फूलों को तोड़ने की मनाही है।

ज्योतिष ज्योतिष विज्ञान में भी पारिजात का विशेष महत्व बताया गया है। आज इस पोस्ट में हम जानेगें कि क्यों यह पौधा इतना महत्वपूर्ण है, तो चलिए जानते हैं :-

कैसे हुई इस पेड़ की उत्पत्ति

इस पेड़ की उत्पत्ति के बारे में मान्यता है कि एक बार देवराज इंद्र महर्षि दुर्वासा के श्राप के कारण श्री हीन हो गए। जिससे उनका स्वर्ग लोक से वैभव, समृद्धि और संपन्नता खत्म हो गई। इससे सभी देवता बेहद परेशान और दुखी थे। इसके निवारण के लिए वे ​एक दिन भगवान विष्णु के पास गए।

उन्होंने फिर देवताओं को असुरों की मदद से सागर मंथन करने की सलाह दी। देवताओं और असुरों की मदद से सागर मंथन हुआ, जिसमें से पहले विष निकला। उसे ग्रहण कर भगवान शिव नीलकंठ कहलाए।

फिर इसके बाद सागर से एक-एक करके 14 रत्न निकले। उसमें कल्पवृक्ष के साथ ‘पारिजात’ या ‘हरसिंगार’ का पेड़ भी था। उन 14 रत्नों में कामधेनु गाय, उच्चैःश्रवा घोड़ा, ऐरावत हाथी, कौस्तुभ मणि, कल्पद्रुम, रंभा, माता लक्ष्मी, वारुणी (मदिरा), चन्द्रमा, पारिजात वृक्ष, शंख, धन्वंतरि वैद्य और अमृत शामिल थे।

देवराज इंद्र ने सागर मंथन से निकले रत्नों में से पारिजात वृक्ष को स्वर्ग में स्थापित कर दिया। ‘हरिवंश पुराण’ में भी इस वृक्ष का उल्लेख मिलता है जिसमें कहा गया है कि इस वृक्ष को छूने भर से देव नर्तकी उर्वशी की थकान मिट जाती थी।

भगवान श्रीकृष्ण द्वारा धरती पर किया गया स्थापित

एक बार नारद मुनि इस वृक्ष से कुछ फूल इन्द्र लोक से लेकर आये और कृष्ण भगवान को दिए। कृष्ण ने वे फूल लेकर पास बैठी अपनी पत्नी रुक्मणी को दे दिए।

यह बात दासियों द्वारा सत्यभामा तक पहुंची जो भी श्रीकृष्ण की धर्मपत्नी थीं। जब भगवान द्वारका स्थित सत्यभामा के महल में पहुंचे तो सत्यभामा ने उनसे पारिजात वृक्ष लाने का हठ पकड़ लिया। बहुत मनाने पर भी वह नहीं मानी।

फिर श्रीकृष्ण ने अपना एक दूत स्वर्गलोक पारिजात का वृक्ष लाने के लिए भेजा लेकिन देवराज इंद्र ने दूत को वृक्ष देने से इंकार कर दिया। फ़िर भगवान श्रीकृष्ण स्वयं ही स्वर्गलोक गए जहां उन्हें वृक्ष लाने के लिए देवराज इंद्र से युद्ध करना पड़ा।

जब भगवान श्रीकृष्ण इंद्रदेव को पराजित करने के बाद जाने लगे तो इंद्र ने क्रोध में आकर वृक्ष पर कभी फल ना आने का श्राप दिया। इसी वजह से इस पर फूल तो आते हैं पर फल एक भी नहीं।

वादे के अनुसार कृष्ण ने उस वृक्ष को लाकर सत्यभामा की वाटिका में लगवा दिया लेकिन उन्हें सबक सिखाते हुए कुछ ऐसा किया जिस कारण रात को वृक्ष पर पुष्प तो उगते थे लेकिन वे उनकी पहली पत्नी रुक्मणी की वाटिका में ही गिरते थे।इस प्रकार इस वृक्ष कि स्थापना धरती पर हुई।

पारिजात नाम की ‘राजकुमारी’

एक मान्यता यह भी है कि ‘पारिजात’ नाम की एक राजकुमारी हुआ करती थी, जिसे भगवान सूर्य से प्रेम हो गया था। तमाम कोशिश के बाद भी भगवान सूर्य ने पारिजात के प्रेम को स्वीकार नहीं किया, जिससे खिन्न होकर राजकुमारी पारिजात ने आत्महत्या कर ली।

जिस स्थान पर पारिजात की क़ब्र बनी, वहीं से पारिजात नामक वृक्ष ने जन्म लिया। इसी कारण पारिजात वृक्ष को रात में देखने से ऐसा लगता है, जैसे वह रो रहा हो। लेकिन सूर्य उदय के साथ ही पारिजात की टहनियां और पत्ते सूर्य को आगोश में लेने को आतुर दिखाई पड़ते हैं।

औषधीय गुणों का भंडार

पारिजात में औषधीय गुणों का भी भण्डार है :-

  • पारिजात बवासीर रोग के निदान के लिए रामबाण औषधि है।
  • इसके फूल हृदय के लिए भी उत्तम औषधि माने जाते हैं।
  • पारिजात की पत्तियों को पीस कर शहद में मिलाकर सेवन करने से सूखी खाँसी ठीक हो जाती है।
  • इसी तरह पारिजात की पत्तियों को पीसकर त्वचा पर लगाने से त्वचा संबंधी रोग ठीक हो जाते हैं।
  • पारिजात की पत्तियों से बने हर्बल तेल का भी त्वचा रोगों में भरपूर इस्तेमाल किया जाता है।
  • पारिजात की कोंपल को यदि पाँच काली मिर्च के साथ महिलाएं सेवन करें तो महिलाओं को स्त्री रोग में लाभ मिलता है।
  • इसकी पत्तियों का जूस क्रोनिक बुखार को ठीक कर देता है।

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जानिए खूबसूरत फिंच बर्ड के बारे में कुछ रोचक तथ्य

फिंच बर्ड एक बहुत खूबसूरत पालतू पक्षी है। फिंच पक्षी (Finch Bird) की पूरी दुनिया में कई प्रजातियां पाई जाती हैं। ये जंगलों, रेगिस्तान और पहाड़ी इलाकों में भी मिल जाते हैं। यह एक आकर्षक और छोटे आकार का पक्षी है।

इसकी आवाज बहुत मधुर होती है। यह एक कलरफुल पक्षी है, जिसकी वजह से इसे पालतू बनाया जाता है। अलग-अलग प्रजाति के फिंच का कलर अलग होता है। मेल फिंच फीमेल से ज्यादा कलरफुल होते हैं।

आज इस पोस्ट में हम इस खूबसूरत पक्षी के बारे में कुछ रोचक तथ्यों के बारे में बताने जा रहे हैं, तो चलिए जानते हैं :-

  • फीमेल फिंच हल्का नीला और पीला अंडा देती है। इन अंडों की संख्या 2 से 6 के लगभग होती है। करीब 14 दिन के बाद इन अंडों से बच्चे बाहर आते हैं।
  • फिंच बर्ड की लंबाई लगभग 3 से 6 इंच होती है। इसका वजन करीब 10 ग्राम से 30 ग्राम तक होता है।
  • जंगल में फिंच पक्षी का औसत जीवनकाल केवल 6 वर्ष होता है, जबकि पालतू फिंच करीब 20 वर्षों तक जीवित रह सकता है।
  • फिंच के बच्चों पर बाल नहीं होते। करीब 3 हफ्ते तक घोंसले में रहने के बाद बच्चे बाहर निकलते हैं।
  • यह मुख्यतः पौधों की पत्तियां, फूल, बीज, टहनी को खाता है। कुछ फिंच प्रजाति के पक्षी फल भी खाते हैं, जैसे जेब्रा फिंच ज़मीन पर पड़े बीजों को खाता है।

कुछ फेमस फिंच प्रजातियां

जेब्रा फिंच

जेब्रा फिंच ज्यादातर ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है। इसके गर्दन और पूंछ पर जेब्रा की तरह सफेद और काली धारियां होती हैं। इसकी चोंच ट्राइएंगल शेप की होती है।

आउल फिंच

एक नज़र में देखने में यह एक छोटे उल्लू जैसा दिखाई देता है, इसीलिए इसका नाम आउल फिंच रखा गया है। गले पर पाए जाने वाली दो काली धारियां इन्हें और भी खास बनाती हैं।

स्ट्रॉबेरी फिंच

यह फिंच बर्ड ज्यादातर एशिया में पाया जाता है। इसका शरीर लाल और उसके ऊपर व्हाइट डॉट्स होते हैं और मॉनसून के दिनों में ये ज्यादातर नज़र आते हैं।

ब्लू फिंच

इसका पूरा शरीर नीला होता है और चोंच पीली होती है। यह ब्राजील और बोलिविया में पाए जाते हैं।

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