कैसे बने चांद-तारे – ब्रहमाँड के बारे में रोचक तथ्य

एक थाल मोतियों से भरा,
सबके सर पर औंधा धरा।
चारों ओर वह थाली फिरे,
मोती उससे एक न गिरे।

यह पहेली बचपन में आपने भी सुनी होगी, जिसका उत्तर है “आसमान”। साफ़ मौसम में रात के समय आपने भी आसमान को तो देखा होगा, जिसमें अनगिनत तारे नज़र आते हैं। वहीं शुक्ल यानि उज्ज्वल पक्ष में चाँद भी आसमान में नज़र आता है।

क्या आप जानते हैं अंतरिक्ष यानि आसमान में यह चाँद तारे कहाँ से आए? अगर नहीं, तो आज हम इस पोस्ट के माध्यम से हम जानेंगे कि यह चाँद-तारे कहाँ से आए या कैसे बनें।

क्या है अंतरिक्ष?

‘अंतरिक्ष ‘शब्द का इस्तेमाल संपूर्ण ब्रह्मांड को परिभाषित करने के लिए किया जाता है,अर्थात पृथ्वी व इसका वातावरण, चंद्रमा, सूर्य तथा बाकी सौर प्रणाली के अतिरिक्त अनंत आकाश में फैले ग्रह और उनके उपग्रह।

‘बाह्य अंतरिक्ष’ यां आऊटर स्पेस का अर्थ पृथ्वी तथा इसके वातावरण के अलावा बाकी सारा अंतरिक्ष है।

बाह्य अंतरिक्ष वहां से शुरू होता है जहां पृथ्वी का वातावरण समाप्त होता है। अल्बर्ट आइंस्टीन ने अंतरिक्ष को ‘परिमित (सीमित) लेकिन अबाध’ के तौर पर परिभाषित किया क्योंकि ब्रह्मांड निरंतर फैल रहा है।

इसका अर्थ यह हुआ कि ‘अंतरिक्ष’ शब्द का इस्तेमाल पृथ्वी व इसके वातावरण के अतिरिक्त हर चीज के लिए किया जाता है। सामान्य शब्दों में अंतरिक्ष का अर्थ ‘कुछ नहीं’ भी है। अर्थात, रिक्त या शून्य, जो खाली या निर्जन है।

ऐसा इसलिए क्योंकि ब्रह्मांड का कुछ हिस्सा ‘मैटर ‘से भरा है’ बाकी खाली है। ग्रह, सूर्य, क्षुद्र, तारे तथा अन्य खगोलीय पिंड मिलकर ‘मैटर’ या पदार्थ बनाते हैं, जो अंतरिक्ष में बिखरा पड़ा है। दूसरे शब्दों में- सितारे, ग्रह, सूर्य, धूल के कण, गैस, मलबे के छोटे- बडे टुकड़े तथा बहुत अधिक खाली स्थान ब्रह्मांड बनाते हैं।

ब्रह्मांड में प्रकाश किसी भी अन्य चीज़ के मुकाबले कहीं अधिक तेजी से यात्रा करता है। यह लगभग 3 लाख किलोमीटर प्रति सैकंड की रफ्तार से यात्रा करता है।

ब्रह्मांड कैसे बना

ऐसा माना जाता है कि ब्रह्मांड महा-विस्फोट (बिगबैंग) से लगभग 1.80 करोड वर्ष पूर्व अस्तित्व में आया। एक विशाल गरम गोला अंतरिक्ष में चक्कर लगा रहा था।

इसके केंद्र में अंत्यत ताप तथा बहुत अधिक दबाव बन जाने के कारण इसमें बड़ा विस्फोट हो गया। इससे खाली अंतरिक्ष में मैटर या पदार्थ बिखर गया। समय के साथ मैटर ठंडा होता गया और इससे सितारे, ग्रह तथा चंद्रमा बने ।

जो पदार्थ विशाल खगोलिय पिंड नहीं बने, वे धूमकेतु अथवा उल्कापिंड बनकर अंतरिक्ष में रह गए। ये धूमकेतु तथा उल्कापिंड महा-विस्फोट के अवशेष हैं इसलिए उन्हें आमतौर पर महा -विस्फोट का मलबा कह दिया जाता है।

ब्रह्मांड कितना बड़ा है

यह एक कठिन प्रश्न है क्योंकि ऐसा देखा गया है कि ब्रह्मांड का निरंतर विस्तार हो रहा है। अंतरिक्ष में दूरियां नापना असंभव है।

हम जानते हैं कि शुक्र (वीनस) पृथ्वी का सबसे नजदीकी ग्रह है लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह पृथ्वी से 4 करोड़ किलोमीटर दूर है ? प्लूटो हमसे 6 अरब किलोमीटर दूर है। सूर्य के अलावा सबसे नजदीकी सितारा प्रोक्सिमा सेंचुरी है। यह 402 खरब किलोमीटर दूर है।

( कुछ रोचक तथ्य )

  • ब्रह्मांड में सबसे दूर की चीजें अत्यंत विशाल खगोलीय वस्तुएं हैं, जिनमें से कई 10 अरब प्रकाश वर्ष दूर हैं।
  • प्रकाश वर्ष वह दूरी है जो रोशनी या प्रकाश एक वर्ष में तय करता है।
  • एक प्रकाश वर्ष लगभग 94,60,00,00,00,000 किलोमीटर या 94 खरब किलोमीटर के बराबर है।
  • सूर्य की पृथ्वी से दूरी 14. 96 करोड़ किलोमीटर है।
  • 3 लाख किलोमीटर प्रति सैकंड की रफ्तार से सूर्य की रोशनी को हम तक पहुंचने में 8 मिनट लगते हैं
  • सूर्य के अलावा हमारे अगले सबसे नजदीकी सितारे तक पहुंचने में प्रकाश को 4 प्रकाश-वर्ष लगते हैं। किलोमीटर में यह दूरी 40,208,000,000,000 किमी यानी 402 ख़रब किमी बनती है।
  • सूर्य इतना विशाल है कि इसमें पृथ्वी के आकार के 13 लाख ग्रह समा सकते हैं।
  • ब्रह्मांड निरंतर फैल रहा है। यानी इसमें सारे ग्रह, क्षुद्र, तारे तथा अन्य खगोलीय पिंड एक दुसरे से लगातार दूर हो रहे हैं।
  • कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि अंतरिक्ष में मौजूद सारा मैटर या पदार्थ एक दिन सिकुड़ना शुरू हो जाएगा, जिस कारण एक बहुत बड़ा संकट उत्पन्न हो जाएगा।

जानिए पतंगों के इतिहास के बारे में!!

चीन पतंगों का जन्मस्थान है। ब्रिटेन के प्रसिद्ध विज्ञान-इतिहास विद्वान जोसेफ नीधाम ने पतंगों को चीन की महत्वपूर्ण खोजों में से एक के तौर पर सूचिबद्ध किया था।

वाशिंगटन स्थित अमेरिकन नैशनल स्पेस एंड एविएशन म्यूजियम के एयरक्राफ्ट हाल में एक बड़े साइन बोर्ड पर लिखा है: कि विश्व के पहले विमान चीन की पतंगें तथा आदिकालीन रॉकेट थे।

700-221 ईसा पूर्व के दौरान चीन के जाने-माने दार्शनिक मोजी ने उड़ाने के लिए लकड़ी का एक पक्षी बनाया था, बताया जाता है कि उसके द्वारा बनाया लकड़ी का एक बडा पक्षी तीन दिन तक आकाश में उड़ता रहा और एक बार उसका इस्तेमाल कुछ स्थानों को चिन्हित करने के लिए भी किया गया था।

खेलों व जासूसी में इस्तेमाल

मोजी का मानना था कि यदि इन लकड़ी तथा बांस से बने ‘पक्षियों’ में मोटरें लगा दी जाएं तो वे लोगों और सामान को पर्वतों व नदियों के पार ले जा सकते हैं।

लकड़ी तथा बांस से बने इन आदिकालीन ‘पक्षियों‘, जो आधुनिक पतंगों के पूर्वज हैं, का खेलों में या सैन्य जासूसी के हिस्से के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था। कुछ प्राचीन चीनी दस्तावेज इस बात की विस्तार से जानकारी देते हैं कि कैसे सेना पतंगों पर निर्भर थी।

जब लोगों ने पतंगें बनाने के लिए पहली बार रेशम का इस्तेमाल शुरू किया तो उन्हें ‘फेंग जिन’ या ‘सिल्क फीनिक्स’ कहा जाता था।

पतंग या काइट के प्राचीन नाम का अर्थ ‘कागज का पक्षी’ था और हम जानते हैं कि पतंगों का आविष्कार कागज बनने के बाद हुआ। अलग-अलग समय तथा स्थानों पर पतंगों को अलग-अलग नामों से पुकारा जाता था।

कागज से बनी प्रारंभिक पतंग को खेल में इस्तेमाल किया गया, जिसके साथ एक सीटी लगाई जाती थी, जो उड़ते समय आवाज करती थी।

खूबसूरत डिजाइन्स

काइट फैस्टिवल के लिए लोग हर तरह की पतंगें बनाते थे, जिनमें से कुछ के साथ कागज के डिब्बे या लालटेनें लटकाई गई होती थीं। ये पतंगें आकाश को आवाजों तथा रंगों से भर देती थीं।

चीनी पतंगें अपने खूबसूरत डिजाइन्स तथा अच्छी उड़ान के लिए जानी जाती हैं। इनको कई बार ‘फ्लाईंग पिक्चर्स‘ भी कहा जाता है। कुछ पतंगों को उड़ाने के लिए और कुछ को केवल हवा में स्थिर रख कर चित्रों का प्रदर्शन करने के लिए बनाया जाता है।

पतंगों की दो श्रेणियां

चीन में उड़ाने के लिए बनाई जाने वाली पतंगों की दो श्रेणियां हैं- ‘हल्की ‘ तथा ‘मजबूत‘। दक्षिण चीन में हवाएं आमतौर पर सौम्य होती हैं, इसलिए पतंगें कागज या रेशम से बनाई जाती हैं और विभिन्न आकृतियों में होती हैं, जैसे कि तितलियां,ड्रैगनफ्लाईज व फीनिक्स।

उत्तरी चीन में हवाएं तेज होती हैं, इसलिए पतंगें कागज की दोगुनी मोटाई से बनाई जाती हैं। इन दो सामान्य श्रेणियों में भी पतंगों की कुछ विशेष किस्में होती हैं, जैसे कि ‘स्वैलो’, ‘सैंटीपीड’ तथा ड्रैगन’।

यहां तक कि कुछ पतंगें जोड़ों में भी बनाई जाती हैं, जैसे कि ‘जुड़वां तितलियां‘। पतंगों पर अब तक लिखी गई सर्वाधिक प्रसिद्ध पुस्तक काओ शुएक्विन द्वारा लिखित ‘ए स्टडी ऑफ काइट-मेकिंग इन नॉर्थ एंड साऊथ चाइना’ है।

काओ की पुस्तक में चित्रों सहित विस्तार से पतंग बनाने और उड़ाने की तकनीकों बारे बताया गया है। एक उदाहरण में वह बताते हैं कि कैसे पेपर ड्रम काइट बनानी है, जो फूल गिराती है और उसके साथ लाल रंग की एक लालटेन भी लटकाई गई होती है। काओ कहते हैं, “आकाश से मैंने संगीत सुना, मेरे ऊपर फूल बरसाए गए और आकाश रोशनियों से प्रज्जवलित था।”

‘फिंगर पेटिंग’ के बच्चों को होने वाले फायदे!!

‘फिंगर पेटिंग’ चित्र बनाने का एक मजेदार तरीका है जो कलाकृतियों को एक अनूठी बनावट प्रदान करता है। इसमें ब्रश के स्थान पर अपनी उंगलियों का इस्तेमाल किया जाता जाता है।

उंगलियों में रंग लगाकर उनसे कागज पर तरह- तरह के चित्र तथा आकृतियां तैयार की जाती हैं। ‘फिंगर पेंटिंग’ बच्चों के लिए मनोरंजक ही नहीं, बड़ी फायदेमंद भी मानी जाती है क्योंकि यह उन्हें बहुत कुछ सीखने में मदद करती है, तो चलिए जानते हैं कि कैसे ये बच्चों के लिए फायदेमंद है :-

एक्टिविटी में आसानी

बच्चों की फिंगर्स छोटी होती हैं। अगर वो वाटर कलर के साथ पेंटिंग करते हैं तो उनको आसानी रहती है। दूसरी ओर बच्चे  क्रेयॉन (Crayons) को आसानी से नहीं पकड़ पाते और उनको कलर फिल करने में भी परेशानी आती है जबकि हैंड पेंटिंग उनके लिए आसान होती है क्योंकि इसमें उनको कलर को हाथों में पकड़ना नहीं होता पड़ता।

स्किल डेवलपमेंट

यह एक बहुत अच्छी फिजिकल एक्सरसाइज भी होती है। इसमें बच्चा अपनी उंगलियों, हाथों, कन्धों और गर्दन की मांसपेशियां को अच्छी तरह मूव करते हैं।

उंगलियों के मूवमेंट से बच्चे को राइटिंग स्किल डेवलप करने में आसानी रहती है। वह थोड़ी ही प्रैक्टिस के बाद पेंसिल होल्ड करना भी सीख लेता है।

चमकीले रंग आंखों को आकर्षित करते हैं। उंगलियां पेंट को छूती हैं तो बच्चों को रंगों और आकृतियों के माध्यम से खुद को व्यक्त करने का मौका मिलता है।

हाथों तथा आंखों के बीच तालमेल का विकास

यह हाथों तथा आंखों के बीच तालमेल विकसित करने में मदद करता है और बच्चों को कुछ रंग- बिरंगा बनाने के लिए अपनी कल्पना के घोड़े दौड़ाने का मौका भी देता है।

इन सारे फायदों की वजह से अनेक स्कूलों में भी बच्चों से फिंगर पेटिंग कराई जाती है। बच्चे जब अपनी उंगलियों से चित्र बनाते हैं तो वे अपने हाथों के साथ – साथ बाकी सभी इंद्रियों का भी इस्तेमाल करते हैं।

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जानें चंद्रग्रहण का किस राशि पर कैसा रहेगा असर!!

26 मई यानी आज वैशाख पूर्णिमा को दोपहर 3 बजकर 15 मिनट से चंद्रग्रहण लगने जा रहा है। यह खग्रास चंद्रग्रहण संपूर्ण भारत के पूर्वी हिस्से में नजर आएगा लेकिन सभी राशियों पर इसका असर अगले 15 दिनों तक जरूर दिखने को मिलेगा।

क्योंकि यह चंद्रग्रहण वृश्चिक राशि में लगने जा रहा है तो इसका अधिक असर भी वृश्चिक पर ही होगा। जानिए चंद्रग्रहण का असर सभी राशियों पर कैसा रहेगा।

मेष राशि

मेष राशि से आठवें घर में लग रहा यह चंद्रग्रहण आपके लिए उथल-पुथल वाला हो सकता है। आर्थिक मामलों में आपको काफी संभलकर चलना होगा, गलत निर्णय और लापरवाही से धन का नुकसान हो सकता है।

वृष राशि

पारिवारिक जीवन में तनाव हो सकता है। जीवनसाथी की सेहत को लेकर आपको चिंता और परेशानी हो सकती है। साझेदारी के काम कर रहे हैं तो तालमेल बिगड़ सकता है। जरूरी यात्रा भी टल सकती है। लव लाइफ को लेकर अनिर्णय की स्थिति रहेगी। सेहत का भी ध्यान रखें।

मिथुन राशि

चंद्रग्रहण मिथुन राशि से छठी राशि में होने जा रहा है। ऐसे में आपको अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। अपने कीमती सामनों का भी आपको ख्याल जरूरत है।

अपने कीमती सामनों का भी आपको ख्याल रखना होगा, चोरी या खोने का भय रहेगा। अगले 15 दिनों के बीच मन विचलित और परेशान रहेगा। किसी बात को लेकर चिंता बनी रहेगी। गुप्त शत्रुओं और विरोधियों से सतर्क रहें।

कर्क राशि

चंद्रग्रहण के दौरान आपकी राशि के स्वामी चंद्रमा को ग्रहण लगेगा। ऐसे में कर्क राशि के लोगों को संतान से संबंधित विषयों को लेकर चिंता रह सकती है। शिक्षा में बाधा और परेशानी आएगी।

लव लाइफ के मामले में आपको समझदारी से काम लेना होगा, महत्वपूर्ण फैसले 15 दिनों के लिए टाल देना बेहतर होगा। मानहानि की भी आशंका है इसलिए अपने व्यवहार और वाणी को संयमित रखें।

सिंह राशि

सिंह राशि से चौथे घर में लग रहा 26 मई का चंद्रग्रहण सिंह राशि के लिए लाभप्रद और सुखद रहेगा। आपके जरूरी और अटके काम पूरे हो सकते हैं। अपनी योजनाओं को सफल बना पाएंगे।

माता की ओर से खुशी और सहयोग पाएंगे। भौतिक सुख के साधनों की प्राप्ति होगी। वाहन और घर खरीदने की कोशिश में हैं तो प्रयास सफल होंगे।

कन्या राशि

कन्या से तीसरी राशि वृश्चिक में लग रहा साल का पहला चंद्रग्रहण इनके लिए लाभप्रद रहेगा। आर्थिक मामलों में आप जोखिम भी ले सकते हैं, किस्मत का साथ मिलेगा, धन लाभ पाएंगे।

भाई-बहनों से तालमेल बनाए रखेंगे तो आपको इसका फायदा मिलेगा। गर्भवती महिलाओं को अपना खास ध्यान रखना चाहिए। किसी से वाद-विवाद हो सकता है, संयम से काम लें।

तुला राशि

चंद्रग्रहण तुला राशि के लिए आर्थिक रूप से नुकसानदायक हो सकता है। इन्हें धन के लेन-देन के मामले में सावधानी से काम लेना होगा। मोबाइल और जरूरी चीजों का ध्यान रखें इन पर अनावश्यक खर्च हो सकता है।

चंद्रग्रहण के 15 दिनों के बीच सोच-समझकर बोलें, लोग आपकी बातों को गलत अर्थों में ले सकते हैं। निकट संबंधियों से तनाव हो सकता है।

वृश्चिक राशि

चंद्रग्रहण आपकी राशि में लगने जा रहा है, ऐसे में इस ग्रहण का सबसे ज्यादा असर आपकी राशि पर दिखेगा। आपको सेहत के मामले में बहुत ही ध्यान रखने की जरूरत है। सर्दी, जुकाम, मानसिक तनाव की समस्या हो सकती है।

रक्तचाप के रोगियों को खान-पान का ध्यान रखना चाहिए। बड़े फैसले गंभीरता से लेना चाहिए नुकसान की आशंका है। मन में विचारों का तूफान उठता रहेगा इसलिए संयम से काम लेना जरूरी रहेगा। कोई अनजाना भय भी परेशान कर सकता है।

धनु राशि

धनु राशि से 12 वीं राशि में लगने जा रहा साल का पहला चंद्रग्रहण आर्थिक मामलों में अनुकूल नहीं है। इन्हें धन का नुकसान हो सकता है।

मन में कई चिंताएं रहेंगी जिससे नींद की कमी हो सकती है। आपके लिए बेहतर होगा कि मान-सम्मान का ध्यान रखते हुए काम करें। गैर जरूरी खर्चों से आप चिंतित होंगे।

मकर राशि

धनु राशि से 12 वीं राशि में लगने जा रहा साल का पहला चंद्रग्रहण आर्थिक मामलों में अनुकूल नहीं है। इन्हें धन का नुकसान हो सकता है।

मन में कई चिंताएं रहेंगी जिससे नींद की कमी हो सकती है। आपके लिए बेहतर होगा कि मान-सम्मान का ध्यान रखते हुए काम करें। गैर जरूरी खर्चों से आप चिंतित होंगे।

मकर राशि

26 मई का चंद्रग्रहण कुंभ राशि से दसवीं राशि में होने जा रहा है। आपको अपने कार्यक्षेत्र में लापरवाही से बचना होगा। अधिकारियों से मतभेद हो सकता है।

वाहन चलाते समय आपको अधिक सजग और सतर्क रहना चाहिए। जोखिम वाले काम से आपको बचना चाहिए। पारिवारिक जीवन में तालमेल बनाए रखें।

मीन राशि

चंद्रग्रहण मीन राशि के भाग्य स्थान में होने जा रहा है। पिता और पिता समान किसी व्यक्ति की सेहत को लेकर चिंता हो सकती है। धर्म-कर्म में मन नहीं लगेगा।

भाग्य का बहुत साथ नहीं मिलेगा इसलिए जो भी काम करें उसमें अच्छी तरह सोच-विचार कर आगे बढें। संतान की सेहत को लेकर भी आपको चिंता हो सकती है।

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आज दिखाई देगा सुपरमून, जाने क्या है मायने और क्यों नज़र आएगा चंद्रमा लाल?

आज यानि 26 मई का दिन बेहद खास है। लोग चंद्रग्रहण और सुपर मून दोनों खगोलीय घटनाएं एक साथ देख पाएंगे। बुधवार को चांद सफेद की बजाय सुर्ख लाल रंग का नजर आएगा। सात फीसदी बड़ा और 30 फीसदी अधिक सुर्ख रोशनी बिखेरता चांद सुपर ब्लड मून कहलाएगा।

चंद्रग्रहण की शुरुआत

चंद्रग्रहण की शुरुआत दोपहर 2:17 मिनट से शुरू होकर 7:19 मिनट तक रहेगी। इसी दौरान सुपर ब्लड मून की घटना को शाम 6:49 मिनट पर 35 मिनट तक देखा जा सकेगा। हालांकि भारत से सुपर मून आंशिक रूप से नजर आएगा।

आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) नैनीताल के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शशिभूषण पांडे ने बताया कि पश्चिमी-दक्षिण अमरीका, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण-पूर्वी एशिया आदि देशों में लोग पूर्ण चंद्रग्रहण देख पाएंगे, लेकिन भारत में केवल उपच्छाया चंद्रग्रहण ही नजर आएगा।

उन्होंने बताया कि पिछले सुपर ब्लड मून और चंद्रग्रहण की घटना 21 जनवरी 2019 को हुई थी। वहीं अगली बार यह घटना 16 मई 2022 को घटित होगी।

डॉ. पांडे ने बताया कि चंद्रग्रहण के समय पृथ्वी की छाया के कारण चंद्रमा धरती से काला नजर आता है। उन्होंने बताया कि इस दौरान चंद सेकेंड के लिए चंद्रमा लाल भी दिखाई देगा। यह तब होता है, जब सूर्य की रोशनी परिवर्तित होकर चंद्रमा तक जाती है।

क्या है सुपरमून ?

सुपरमून क्या होता है? अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने कहा कि 2021 में अन्य पूर्ण चंद्रमाओं की तुलना में फ्लावर मून पृथ्वी के सबसे निकट पहुंचेगा। जिसके कारण यह वर्ष के सबसे निकटतम और सबसे बड़े पूर्ण चंद्रमा के रूप में दिखाई देगा।

पृथ्वी का चक्कर काटते समय ऐसी स्थिति बनती है जब चंद्रमा पृथ्वी के सबसे नजदीक होता है यानी सबसे कम दूरी होती है। इस दौरान कक्षा में करीबी बिंदु से इसकी दूरी करीब 28,000 मील रहती है। इसी परिघटना को सुपरमून कहा जाता है।

सुपर का क्या अर्थ है?

चंद्रमा के निकट आ जाने से यह आकार में बड़ा और चमकीला दिखता है। वैसे, सुपरमून और सामान्य चंद्रमा के बीच कोई अंतर निकालना कठिन है जब तक कि दोनों स्थिति की तस्वीरों को किनारे से ना देखें। चंद्र ग्रहण से क्या मतलब है।

चंद्र ग्रहण तब लगता है जब चंद्रमा पृथ्वी की छाया में पूरी तरह या आंशिक रूप से छिप जाता है। यह परिघटना पूर्णिमा के दौरान होती है। इसलिए पहले पूर्णिमा के चंद्रमा को समझने का प्रयास करते हैं।

पृथ्वी की तरह ही चंद्रमा का आधा हिस्सा सूरज की रोशनी में प्रकाशित रहता है। पूर्ण चंद्र की स्थिति तब बनती है जब चंद्रमा और सूरज पृथ्वी के विपरीत दिशा में होते हैं।’ इससे रात में चंद्रमा तश्तरी की तरह नजर आता है।

प्रत्येक चंद्र कक्षा में दो बार चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य दोनों के समान क्षैतिज तल पर होता है। अगर यह पूर्ण चंद्रमा से मेल खाती है तो सूरज, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी रेखा में आते हैं और चंद्रमा पृथ्वी की छाया से होकर गुजरेगा। इससे पूर्ण चंद्र ग्रहण होता है।

हनुमान चालीसा पाठ से दूर होते हैं सारे दुःख, पर न करें ये काम

श्रीहनुमान चालीसा हिन्दी और अवधी साहित्य के महान सन्त कवि गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित एक महान और प्रसिद्ध रचना है। जैसे कि नाम से ज्ञात होता है, यह चालीस छंदों और दो दोहों में अवधी भाषा में लिखी गयी है।

श्रीहनुमान चालीसा श्रीरामभक्त श्रीहनुमानजी की सुंदर स्तुति है जिसमें उनकी श्रीराम भक्ति, वीरता, सरलता, निर्भयता, सौंदर्य आदि गुणों का सुंदर ढंग से चित्रण किया गया है। यह गोस्वामी तुलसीदासजी की सर्वश्रेष्ठ रचनाओं में से एक है।

हनुमान चालीसा पाठ से दूर होते हैं सारे दुःख, पर न करें ये काममान्यता है कि श्रीहनुमानजी ने तुलसीदासजी को दर्शन देकर श्रीराम लक्ष्मण के दर्शन पाने का मार्ग सुझाया था।

श्रीहनुमान चालीसा-पाठ से मिटते हैं सारे दुःख

श्रीहनुमानजी की स्तुति करने से दुःख, क्लेश और भय आदि विकारों को मिटाने के सरलतम उपाए श्रीहनुमान चालीसा में बताए गये है। माना जाता है श्रीहनुमानजी अजर-अमर हैं और कलियुग में विचरते रहते हैं।

माना जाता है कि जो भी साधक सच्चे और शुद्ध मन से श्रीहनुमान चालीसा का पाठ करता है और श्रीहनुमानजी का ध्यान करता है बजरंगबली उसे शीघ्र ही दर्शन देकर सारे भयों से मुक्त कर देते हैं।

लेकिन न करें ये काम

लेकिन हनुमान चालीसा का पाठ करने के साथ ही साधक को काम, क्रोध, लोभ, मोह से बचना चाहिए। खासतौर पर पर-स्त्री गमन, पराई स्त्री पर बुरी नज़र रखने और कामुक विचारों आदि से दूर रहना चाहिए।

चूंकि श्रीहनुमानजी बाल-ब्रह्मचारी हैं इसलिए यदि उनकी भक्ति करते हैं तो इन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। ऐसा न करने पर श्रीहनुमान जी की कृपा दृष्टि मिलना कठिन होता है, ऐसा माना जाता है।

श्रीहनुमान चालीसा

दोहा:
श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।

चौपाई:

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुं लोक उजागर।।

रामदूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।।

महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी।।

कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा।।

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
कांधे मूंज जनेऊ साजै।

संकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग बन्दन।।

विद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर।।

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया।।

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा।।

भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्र के काज संवारे।।

लाय सजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।।

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।।

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।।

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा।।

जम कुबेर दिगपाल जहां ते।
कबि कोबिद कहि सके कहां ते।।

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा।।

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
लंकेस्वर भए सब जग जाना।।

जुग सहस्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू।।

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।।

दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।।

राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे।।

सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रक्षक काहू को डर ना।।

आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हांक तें कांपै।।

भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै।।

नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा।।

संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।।

सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा।

और मनोरथ जो कोई लावै।
सोइ अमित जीवन फल पावै।।

चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा।।

साधु-संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे।।

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता।।

राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा।।

तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम-जनम के दुख बिसरावै।।

अन्तकाल रघुबर पुर जाई।
जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।।

और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।।

संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।

जै जै जै हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।

जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई।।

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा।।

तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।।

दोहा:

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।
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आगे पढ़ें >> श्री हनुमान चालीसा व्याख्या, सरलतम शब्दों में

अजीबोगरीब चीजें जमा करने का ‘विश्व रिकॉर्ड’!!

उत्तरी जर्मनी के एक संग्रहालय में उड़ने में असमर्थ पेंगुइन पक्षियों को समर्पित एक जोड़े के अजीबोगरीब संग्रह की छोटी-सी झलक देखी जा सकती है। अब वे इससे जुड़ा पांचवां विश्व रिकॉर्ड बनाने वाले हैं।

अजीबोगरीब चीजें जमा करना कई लोगों का शौक होता है। जर्मन युगल बिरगिटबॅरेंड्स और स्टीफन किरचॉफ को भी ऐसा ही एक शौक है।

गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अनुसार ‘दुनिया के पेंगुइन संबंधित वस्तुओं के सबसे बड़े संग्रह’ का रिकॉर्ड उनके ही नाम है। पेंगुइन से जुड़ी चीजें जमा करने के लिए उनके नाम चार ‘गिनीज रिकॉर्ड्स’ हैं।

उनका पिछला रिकॉर्ड 2011 का है जब उनके पास 11,000 से अधिक वस्तुओं का संग्रह था। अब वे जर्मन इंस्टीच्यूट ऑफ रिकॉर्ड्स से मान्यता पाने की दिशा में काम कर रहे हैं। उनकी सूची में वर्तमान में 26,000 से अधिक पेंगुइन जैसी चीजें दर्ज हो चुकी हैं।

बिरगिट औरस्टीफन जर्मनी के बंदरगाह शहर कक्सहैवन में एक पेंगइन संग्रहालय चलाते हैं जिसमें उनकी लगभग 4,000 वस्तुएं प्रदर्शित हैं। ये चीजें मोम, धातु, लकड़ी से लेकर चीनी मिट्टी सहित विभिन्न सामग्रियों से बनी हैं।

सबसे बड़ी आकृति 1.9 मीटर ऊंची है। पेंगुइन-थीम वाले पैन और तौलियों के साथ ही एक कंकाल और 6 अलग-अलग प्रकार के ‘टैक्सिडेरमी पेंगुइन’ भी प्रदर्शनी का हिस्सा हैं।

उनका घर भी किसी संग्रहालय से अलग नहीं दिखता जहां चारों ओर पेंगुइन से प्रेरित चीजें ही नजर आती हैं। यह समझने के लिए कि उनका घर कितना पेंगुइन-थीम वाला है। विचार करें कि उनके पास पेंगइन डिजाइन वाले विस्तरों के कितने सैट हैं – इनकी संख्या ही 260 है।

इस बीच विरगिट और स्टीफन ने कसम खा ली है कि अगला रिकॉर्ड उनका आखिरी होगा क्योंकि इसके बाद वे और चीजें जमा नहीं करेंगे।

अब उन्होंने पेंगुइन के डिजाइन वाली चीजों की तलाश करना बंद कर दिया है और अन्य संग्रहकर्ताओं से भी चीजें स्वीकार नहीं करते हैं। 2017 में उन्हें एक पेंगुइन प्रेमी से 6,000 से अधिक वस्तुएं मिलीं जो अपने संग्रह को बांट रहा था।

उन चीजों को छांटने तथा रिकॉर्ड तैयार करने में ही लगभग डेढ़ साल का समय लग गया। उन्हें इन चीजों को रखने के लिए स्थान भी किराए पर लेना पड़ा।

18 साल की उम्र में शुरू हुआ पेंगुइन प्रेम

पेंगुइन के प्रति बिरटिग का लगाव 18 साल की उम्र में शुरू हुआ था। इसकी वजह पूछने पर वह कहती हैं, “मुझे ये जानवर अद्भुत लगते हैं।” जब स्टीफन उनकी जिंदगी में आए तो उन्होंने भी उनके शौक को अपना लिया।

2006 में बना पहला रिकॉर्ड

2006 में उनके संग्रह, जिसमें तब 2,520 चीजें थीं, को आधिकारिक तौर पर दुनिया भर में सबसे बड़े पेंगुइन संग्रह के रूप में दर्ज किया गया। उन्होंने पेंगुइन को प्राकृतिक माहौल में देखने के लिए न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका से लेकर अंटार्कटिका तक यात्रा की है।

“पंजाब केसरी” से साभार

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बेकिंग सोडा है बड़े काम का, जानिए कैसे?

बेकिंग सोडा साफ़-सफ़ाई के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। ये दाग़ छुड़ाने के साथ ही गंध भी दूर भगाता है। इसके और क्या-क्या उपयोग हैं, चलिए जानते हैं।

टाइल्स को चमकाएं

टाइल्स गंदी होने पर एक बाल्टी में आधा कप बोकिंग सोडा मिलाएं। इस पानी से फर्श साफ़ करें। हफ्ते में एक दिन इस मिश्रण से पोछा लगाने पर गंदगी नहीं जमेगी। इसके अलावा दीवारों के टाइल्स भी पानी के इस मिश्रण से साफ़ कर सकते हैं।

स्लैब की चिकनाहट हटाए

किचन स्लैब पर लगातार खाना बनता है। इस कारण उस पर चिकनाई जमा होने लगती है, जो आसानी से साफ़ नहीं होती। इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए गर्म पानी में सोडा मिलाकर प्रभावित जगह पर डाल दीजिए। आधे घंटे बाद स्क्रब से साफ़ कर दीजिए, चिकनाई दूर हो जाएगी।

अवन रहेगा साफ़

अवन की सफाई के लिए मुलायम कपड़े को हल्का-सा गीला कर लें और उस पर बेकिंग सोडा छिड़क दें। अब कपड़े से अवन को साफ़ करें। दाग गहरे हैं तो रात को बेकिंग सोडा छिड़ककर हल्का-सा पानी डाल दें। सुबह कपड़े से पोंछ दें। दाग निकल जाएंगे।

कपड़ों की धुलाई

कपड़े धोते समय डिटर्जेंट के साथ दो बड़े चम्मच सोडा डाल दें। इससे कपड़े अधिक साफ़ दिखेंगे और गंदगी भी दूर होगी। सफेद कपड़े कुछ समय बाद पीले दिखाई देते हैं। सफेद कपड़ों को धोते समय भी थोड़ा-सा सोडा डाल दें, सफेदी बरकरार रहेगी।

सिंक के दाग़ छडाएं

सिंक में पानी के या झूठन के दाग़ पड़ गए हैं तो सोडा और पानी मिलाकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को पूरी सिंक में लगा दें। एक घंटे लगा रहने दें फिर ब्रश से रगड़कर साफ़ करें और पानी से धो दें। सिंक चमक उठेगा।

कंघी रहेगी साफ़

कंघी या मेकअप ब्रश को साफ़ रखना बेहद जरूरी होता है इसलिए बड़े बर्तन में एक कप पानी और एक चम्मच सोडा मिलाएं। इसमें कंघी को आधे घंटे के लिए भिगो दें, सारी गंदगी अपने आप निकल जाएगी। मेकअप ब्रश व कंघी को एक साथ न डालें।

गंध दूर भगाएं

प्याज-लहसुन काटने के बाद हाथों से गंध आती है, जो काफ़ी समय तक रहती है। ऐसा न हो इसके लिए हथेलियों पर बेकिंग सोडा डालकर रगड़ें और कुछ देर बाद धो लें। गंध दूर हो जाएगी।

चींटियों से छुटकारा

गर्मियों में चींटिया होना आम हैं इसलिए नमक और सोडा को बराबर मात्रा में मिलाकर जहां चीटियां आती हों वहां बुरक दें। चीटियां आना बंद हो जाएंगी।

चांदी चमक जाएगी

चांदी के बर्तन, आभूषण रखे-रखे काले पड़ जाते हैं। इन्हें साफ़ करने के लिए पानी में सोडा डालकर पेस्ट बनाएं और इस पेस्ट को बर्तन या गहनों पर स्पॉन्ज या ब्रश की मदद से लगा दें। आधे या एक घंटे बाद कपड़े से रगड़कर साफ़ कर दें।

चीनी के बर्तन

कांच व चीनी के बर्तन (कप, प्लेट, अचार की बरनी आदि) इस्तेमाल करते-करते पीले पड़ जाते हैं। इन पर पानी-सोडे का पेस्ट बनाकर लगा दें और कुछ देर बाद धो दें। बर्तनों का पीलापन आसानी से दूर हो जाएगा।

शावर के छेद खोलें

बाथरूम में शावर व जेट में पानी के साथ पत्थर और गंदगी आने की वजह से उनके छेद बंद हो जाते हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए सिरके में बेकिंग सोडा मिलाकर इस मिश्रण को एक पॉलिथिन में भर दें और शावर व जेट को इसमें डालकर रातभर के लिए छोड़ दें। छेद आसानी से खुल जाएंगे।

फ्रिज करें साफ़

फ्रिज की ट्रे पर सोडा छिड़ककर छोड़ दें। आधे घंटे बाद गीले कपड़े से फ्रिज को पोंछ दें। गंदगी, दाग़ के निशान के साथ-साथ दुर्गध भी दूर हो जाएगी।

सागर की गहराइयों मे छुपे कुछ राज़ !!

कहते हैं सागर की गहराइयों में क़ुदरत के बहुत से राज़ छुपे हैं, जिनसे इंसान आज भी पर्दा नहीं उठा पाया है। इसके साथ ही इंसानी ज़िंदगी की तबाही के भी बहुत से राज़ समंदर ने अपने सीने में छुपा रखे हैं।

आज इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको बताने जा रहे हैं सागर से जुड़े एक ऐसे ही राज़ के बारे में :-

अटलांटिक महासागर पर ‘एलियन्‍स’ या ‘उड़न तश्‍तरी’!

अमेरिकी सेना को अटलांटिक महासागर के ऊपर क्यूब के आकार की एक रहस्यमय वस्तु उड़ते हुए नजर आई है। चांदी के रंग में क्यूब जैसी यह वस्तु अटलांटिक महासागर के ऊपर उड़ान भरती नज़र आई थी।

UFO द्वारा यह घटना वर्ष 2018 और 2020 की गर्मियों की में देखी गई थी। इसकी तस्वीरों को अमेरिका के खुफिया संगठनों के बीच बड़े पैमाने पर शेयर किया गया था। इस पूरी रिपोर्ट को अनाइडेन्टफाइड एरियल फेनोमेना (UAP) टास्क फोर्स ने तैयार किया था।

UAP की रिपोर्ट में कहा गया था कि यह रहस्यमय ऑब्जेक्ट समुद्र से निकला और आकाश में चक्कर लगाने लगा। इस वस्‍तु के हर कोने से सफेद लाइट न‍िकल रही थी। देखने में यह त्रिकोण के आकार का विमान नज़र आ रहा था।

बाल्टिक सागर विसंगति

2011 में, 87 मीटर की गहराई पर बाल्टिक सागर के तल पर, गोताखोरों को एक रहस्यमय वस्तु मिली, जिसने दुनिया भर के वैज्ञानिकों को उलझन में डाल दिया।

इस रहस्यमय वस्तु को “बाल्टिक विसंगति” या “बाल्टिक यूएफओ” उपनाम दिया गया था, क्योंकि यह एक विदेशी अंतरिक्ष यान की तरह दिखता था। इसका व्यास लगभग 60 मीटर था, और इसका आकार बेलनाकार था।

कुछ भूवैज्ञानिकों का मानना ​​है कि यह प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होने वाली चट्टान है, जबकि अन्य आश्वस्त हैं कि यह वास्तव में एक यूएफओ है जो समुद्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

विशेषज्ञों का मानना ​​है कि आइस एज से पहले इसे हजारों साल पहले बनाया गया था। हालांकि अभी यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि यह वास्तव में क्या है।

बिमिनी रोड

साल 1968 में एक स्कूबा डाइविंग की टीम ने समुद्र के अंदर एक ऐसी रहस्यमई चीज ढूंढ निकाली, जिस पर यकीन करना मुश्किल है।

यह रहस्यमई चीज़ एक सड़क थी। आखिर समुद्र के इतने नीचे यह सड़क कहां से आ सकती है और उस सड़क का नाम बीमिनी रोड रखा गया।

यह रहस्यमई सड़क अलग-अलग पत्थरों से मिलकर बनी हुई थी। जिसमें से ज्यादातर पत्थर 10 से 13 फीट लंबे और 7 से 10 फीट चौड़े हैं। हैरानी वाली बात तो यह है, कि यह सभी पत्थर एक आकार के कटे हुए हैं।

हर पत्थरों एक के बाद एक इस तरह से मौजूद हैं। जिसे देख कर कोई भी कह सकता है, कि इन पत्थरों का आकार कुदरती तो नहीं हो सकता, बल्कि इन्हें एकदम सही आकार में काट कर रखा गया है।

ताकि एक बिल्कुल सही रास्ता तैयार हो सके। अजीब चीज तो यह है, कि आगे चलकर यह सभी पत्थर एक के ऊपर एक जुड़े हुए मिलते हैं।

सबसे रहस्यमई बात तो यह है, कि कोई नहीं जानता कि यह रास्ता किसने बनवाया थी और आखिर यह कहां जाकर खत्म होता है क्योंकि आखरी पत्थर का ज्यादातर हिस्सा ओसियन फ्लोर में धंसा हुआ है।

धँसा हुआ पिरामिड

पुर्तगाल में टर्सेरिया और साओ मिगेल के द्वीपों के बीच एक विशाल सूर्य के पिरामिड की खोज की गई थी। इसके बारे में अनुमान है कि यह लगभग 20,000 वर्षों से पानी के भीतर रहा है, जिसका अर्थ है कि यह अंतिम हिमयुग के समय मौजूद था।

पिरामिड की ऊंचाई लगभग 60 मीटर है और इसके आधार की चौड़ाई लगभग 8000 वर्ग मीटर है। विशाल पिरामिड की नोक सतह से लगभग 40 फीट नीचे है जबकि संरचना लगभग एक परिपूर्ण पिरामिड है।

इसके पास में पिको द्वीप है, जिसके बारे में माना जाता है कि यह एक ऐसी सभ्यता थी, जो हजारों साल पहले यहाँ मौजूद थी।

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“हिटलर कभी चैन की नींद न सो सका”, हिटलर के बारे में रोचक तथ्य

विश्व का शायद ही कोई व्यक्ति हिटलर के नाम से अपरिचित होगा। दूसरे विश्व युद्ध के लिए जिम्मेदार हिटलर विशेषकर अपने सनकी व्यक्तित्व के कारण हमेशा चर्चित रहा है। उसके रहन सहन तथा खान-पान से जुड़ी कुछ अनजानी बातें यहां आपको बता रहे हैं:

  • जर्मनी का तानाशाह बनने के बाद हिटलर अपनी सुरक्षा के संबध में इतना अधिक चिंतित रहने लगा कि वह चैन की नींद नहीं सो पाया। दिन – रात उसको यही गम सताने लगा कि उसकी कभी भी हत्या हो सकती है। इस कारण वह काफी हद तक अन्धविश्वासी तथा शंकालु बन गया।

  • हिटलर को नींद बहुत कम आती थी इसीलिए वह अपना काम प्रायः रात में ही करता था। रात में भोजन के बाद विश्व के प्रमुख अखबारों की खबरें विभिन्न भाषाओं के विशेषज्ञों द्वारा जर्मन भाषा में हिटलर को बताई जाती थीं।
  • हिटलर के निवास स्थान के इर्द-गिर्द हवाई जहाजों को मार गिराने वाली तोपें लगी हुई थीं।महल की और जाने वाली हर सड़क के नीचे बारूदी सुरंगे बनई हुई थीं। हर दरवाज़े पर ईलैक्ट्रिक आई(बिजली की आंख)लगी थी। और अगर कोई छिप कर किसी दरवाजे पर घुसने की कोशिश करता तो फौरन पता चल जाता तथा अपने आप महल के दरवाजे बंद हो जाते।
  • अंतिम दो वर्षों में हिटलर की आंखे काफ़ी कमजोर हो गईं लेकिन वह इस दोष को स्वीकार करने में अपना अपमान समझता था।गोपनीय मंत्रणाओं में तो वह अवश्य चश्मा लगा लेता था लेकिन भारी भीड़ के सम्मुख उसने कभी चश्मा नहीं लगाया।उसके भाषण मुख्यतः मोटे अक्षरों वाले टाइपराइटर पर ही टाइप किए जाते थे।
  • हिटलर के महल के एक कमरे में दुनियाभर के नक्शे थे। लंदन का तो नक्शा ऐसा था कि उसमें वहां का एक-एक घर चित्रित था। यूरोप और जर्मनी का कांसे का बना एक नक्शा भी इस कमरे में था।
  • विभिन्न पत्रों को लिखते समय वह भिन्न-भिन्न रंग की पैंसिलें प्रयोग में लाता था। शत्रु को लाल रंग की पेंसिल से, मित्र को हरे रंग की पेंसिल से,और अति गोपनीय संदेशो को वह बहुधा नीली पेंसिल से लिखा करता था।
  • हिटलर के पास प्रतिदिन 600 पत्र आया करते थे। महल में 2 अत्यंत शक्तिशाली रेडियो सैट व ट्रांसमीटर सैट भी भी थे। इनकी कार्य प्रणाली गुप्त रहती थी। इनके माध्यम से हिटलर अपनी फौजों को आदेश दे सकता था।
  • हिटलर के महल में 5 कमरे ऐसे थे जिनमें सिर्फ हिटलर और उसका ज्योतिषि ही जा सकते थे। उन कमरों का नाम, चेंबर्स ऑफ स्टार्स, यानी नक्षत्र कक्ष था। उसका ज्योतिषि अवस्तेज 35 वर्ष का था। दुबले-पतले और काले रंग के इस व्यक्ति का दावा था कि वह सितारों की सहायता से भविष्य के बारे में बहुत कुछ बता सकता है। जब वह हिटलर के पास होता तो कोई भी हिटलर के कमरे में नहीं जा सकता था।
  • हिजलिज नामक नौकर पर भी हिटलर को पूर्ण विश्वास था। 10 से भी अधिक वर्षों तक हिटलर के साथ रहा और हिटलर की गुप्त सभाओं तथा यात्राओं में वह हमेशा उपस्थित रहता था।
  • सन 1942 के आसपास हिटलर के पास मर्सिडीज की दो जुड़वां कारें थीं। प्रत्येक कार की लंबाई 20 फुट तथा वजन 10 हजार पौंड था। कार की सुरक्षा के लिए सवा इंच मोटी लोहे की चादर और आधा इंच मोटा शीशा लगा रहता था। इन कारों का प्रयोग वह यूरोप के पराजित देशों की यात्राओं के समय करता था।
  • हिटलर के कपड़े कभी नाप पर पूरे नहीं उतरते थे क्योंकि वह दर्जी को नाप देने से चिढ़ता था। असैनिक पोशाक के लिए सिर्फ स्याह और भूरा रंग पंसद था।
  • हिटलर को अपने कुत्ते के साथ- साथ पक्षियों से बहुत प्यार था ।उसने निवास स्थान पर दुनिया भर के पक्षी संग्रह किये थे।
    हिटलर उन पक्षियों को अपने हाथों से दान देता था। एक बार उसका एक प्यारा पक्षी मर गया तो हिटलर की आँखों में आंसू आ गए। उस पक्षी को बकायदा दफनाया गया तथा उसकी स्मृति में कब्र पर कांसे की एक तख्ती लगाई गई।

“पंजाब केसरी” से साभार

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