जाने सैंकड़ों टन वज़न उठाकर भी हवाई जहाज के टायर क्यों नहीं फटते?

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मोटरसाइकिलों, कारों तथा सड़क पर दौड़ने वाले अन्य वाहनों के टायर फटने के बारे में तो आपने देखा या सुना ही होगा। कई बार टायर फटने से हादसे भी हो जाते हैं मगर क्या कभी आपने सोचा है कि सैंकड़ों टन वजन होने के बावजूद भी हवाई जहाज के टायर क्यों नहीं फटते?

हवाई जहाज जब आसमान की ऊंचाइयों से एयरपोर्ट की हवाई पट्टी पर लैंड करता है तो उसके पहिए पर ही पूरा दारोमदार होता है।

भारी-भरकम हवाई जहाज करीब 250 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवाई पट्टी को छूता है लेकिन उसके टायर क्यों नहीं फटते, क्या है इसके पीछे कारण? चलिए जानते हैं इस पोस्ट के माध्यम से:-

हवाई जहाज जब जमीन पर उतरता है, यानी लैंडिंग के दौरान उसकी स्पीड 250 से 300 किलोमीटर प्रति घंटा होती है मगर उसका टायर इसलिए नहीं फटता क्योंकि ये अन्य वाहनों के टायरों से बहुत ही अलग तरीके से बनाए जाते हैं।

किस तरह बनते हैं टायर

हवाई जहाज के टायर में रबड़ के साथ एल्युमीनियम और स्टील को भी मिलाया जाता है। इन सभी को मिला कर हवाई जहाज के विशेष टायर तैयार होते हैं।

खास रबड़ का उपयोग

हवाई जहाज के टायरों को लैंड करते समय हवाई जहाज के वजन और हवाई पट्टी से टकराने तथा घिसने से पैदा होने वाले दबाव का भी सामना करना पड़ता है।

यही कारण है कि इन्हें तैयार करते समय कारों, ट्रकों और अन्य सड़क वाहनों के टायरों वाली रबड़ का उपयोग नहीं किया जाता।

वे दिखने में उनके जैसे हो सकते हैं परंतु हवाई जहाज के टायर एक विशेष प्रकार की रबड़ से बने होते हैं। इसे कंडक्टिव रबड़‘ के रूप में जाना जाता है।

यह एक लचीली रबड़ आधारित सामग्री होती है जिसे विशेष रूप से बिजली के संचालन के लिए डिजाइन किया जाता है।
सरल भाषा में कहें तो इसे इस तरह की सामग्री से तैयार किया जाता है कि जिसमें से बिजली गुजर सके।

हवाई जहाज बिजली को बेअसर करने वाली ‘कंडक्टिव रबड़’ से बने टायरों का इस्तेमाल करते हैं क्योंकि जब हवाई जहाज के टायर तेजी से हवाई पट्टी से टकराते हैं तो उनमें घिसाव की वजह से बिजली भी पैदा होती है।

यदि ‘कंडक्टिव रबड़’ का इस्तेमाल न किया जाए तो उड़ान भरते और लैंड करते समय हवाई जहाज के टायर काफी मात्रा में बिजली पैदा कर सकते हैं जो इसके इलैक्ट्रॉनिक उपकरणों को भी नुक्सान पहुंचा सकती है।

इस विशेष रबड़ की वजह से टायरों के हवाई पट्टी से टकराने पर पैदा होने वाली बिजली उसमें से गुजर कर वापस जमीन में समा जाती है।

भरी जाती है नाइट्रोजन गैस

इसके टायरों में, कार के टायर की बजाय 6 गुना अधिक प्रैशर से हवा भरी जाती है इसलिए ये अधिक वजन के भार को सहन कर पाते हैं।

इनमें हवा या आम गैस की बजाय नाइट्रोजन गैस भरी जाती है क्योंकि नाइट्रोजन अन्य गैसों की तुलना में सूखी और हल्की भी होती है। इस गैस पर तापमान का असर कुछ खास नहीं पड़ता।

क्या है टायरों के न फटने का वैज्ञानिक कारण

टायरों में यह गैस भरी जाती है तो उनके फटने का खतरा इसलिए बहुत कम हो जाता है क्योंकि उनमें हवाई पट्टी के साथ घर्षण होने के कारण आग लगने की सम्भावना नहीं रहती।

टायर में गैस ऑक्सीजन से कभी क्रिया नहीं करती इसलिए तेज रफ्तार के साथ उतरते हवाई जहाज के टायरों के जमीन से टकराने तथा घिसने के बावजूद वे गर्म होकर नहीं फटते।

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एक टायर का इस्तेमाल कितनी बार होता है

बताया जाता है कि हवाई जहाज का हर टायर 38 टन भार को सहन कर सकता है। एक टायर से 500 बार टेकऑफ और लैंडिंग की जाती है।

इसके बाद 500 और बार इस्तेमाल करने के लिए इन टायरों पर ‘ग्रिप‘ चढ़ाई जाती है। इस तरह एक टायर पर कुल 7 बार ‘ग्निप’ चढ़ाई जाती है।

यानी एक टायर से लगभग 3500 बार टेकऑफ और लैंडिंग होती है। इसके बाद ये किसी काम के नहीं रहते।

कितने टायर होते हैं हवाई जहाजों में

टायरों की संख्या हवाई जहाज के आकार-प्रकार पर निर्भर करती है। छोटे हवाई जहाजों में कम तो बड़े विमानों में अधिक टायर होते हैं।

कुछ हवाई जहाजों में 4 या 6 टायर होते हैं, जबकि अन्य में 10 तक टायर होते हैं। कुछ विशाल यात्री विमानों में इनकी संख्या काफी अधिक होती है।

उदाहरण के लिए ‘एयरबस ए 380‘ जैसे विशाल विमान में 22 टायर तो अन्य यात्री विमान ‘बोइंग 777‘ में 14 टायर होते हैं। वहीं विशाल काय मालवाहक हवाई जहाज ‘एंटोनोव एएन-225‘ में 32 टायर लगाए जाते हैं।

पंजाब केसरी से साभार

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वायरल वीडियो :- शख्स ने दाढ़ी से उठाई 63 किग्रा की महिला

आए दिन सोशल मीडिया पर कई वीडिओज़ वायरल होते रहते हैं। ऐसा ही एक वीडियो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर वीडियो शेयर किया है।

जिसमें एक शख्स ने अपनी दाढ़ी से 63 किलो की महिला को उठाकर रिकॉर्ड कायम किया है। इस वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर किया गया है।

इस शख्स का नाम एंटानास कोंट्रीमास (Antanas Kontrimas) है। उसने अपनी दाढ़ी से 63.80 किलोग्राम तक की महिला को उठाकर वर्ल्ड रिकॉर्ड हासिल किया।

ये वीडिया सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इस पर लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

एक यूजर ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, ‘यह सचमुच प्रभावशाली है‘।

एक और यूजर ने लिखा, ‘आप उनकी आंखों में दर्द देख सकते हैं’ l

वायरल हो रहे वीडियो में आप देख सकते हैं कि एक महिला हार्नेस की मदद से शख्स की दाढ़ी से बंधी हुई है, शुरुआत में यह काम देखने में बेहद मुश्किल लगता है लेकिन एंटानस आसानी से इसमें कामयाबी हासिल कर लेते हैं।

हालांकि ऐसा करते वक्त उन्हें काफी दर्द भी झेलना पड़ता है जो कि उनके चेहरे पर बिलकुल साफ नज़र आता है, लेकिन ये सारा दर्द तब ख़त्म हो गया, जब एंटानस कोंट्रीमास (Antanas Kontrimas) का नाम विश्व रिकॉर्ड दर्ज हो गया।

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फुटवियर के ऐसे अजीबो गरीब डिज़ाइन देखकर आपका सिर चकरा जाएगा !!

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जब भी हम सब घर से बाहर निकलते है तो पैरो में चप्पल या जूते पहनना कभी नहीं भूलते है। फुटवियर रास्ते में आने वाली तकलीफों से हमारे पैरो की सुरक्षा करते है।

हम में से ज्यादातर लोग आरामदायक और पैरो में फिट होने वाले जूतों का प्रयोग करते है जो हमारी पर्सनालिटी को बढ़ाये और दिखने में भी अच्छे लगे।

आजकल की फैशनेबल दुनिया में फुटवियर के डिजाईन रोज बदलते रहते हैं । खासतौर से लड़कियां ऐसे फुटवियर पसंद करती हैं जो ट्रेंड में हों।

लेकिन कई बार डिज़ाइनर ऐसे डिज़ाइन तैयार कर देते हैं जो किसी भी नार्मल इंसान के समझ से बाहर हो सकता है |

आज हम आपसे कुछ ऐसे ही फुटवियर देखने जा रहे हैं जिन्हें देखकर शायद सिर चकरा जाए और आपके मुँह से एक ही बात निकलेगी की “यार इसे पहनकर चलते कैसे होंगे

तो चलिए देखते है कुछ अजीबो गरीब फुटवियर डिज़ाइन :-

1 कोबरा सिक्योरिटी

2 ह्यूमन फ़ीट शूज

3 मॉन्स्टर शूज

4 3डी प्रिंटेड शूज

5 सैंडकैसल टावर इरेक्शन हाई हील्स

6 लॉन्ग शूज / 2 इन 1 शूज

7 एलियंस हील

8 सेव बेबी शूज

9 रैट शूज

 

10 फुल स्टाइल लेकिन नो यूज़

11 डबल फेसड बूट्स

12 फ्लिपर हील्स

14 हाई हील बट नो हील्स

15 रिवाल्वर हील

16 फुट इन माउथ / इनक्रेडिबल शू फेस

17 हर जगह मैगॉट्स !

18 स्नेकस्किन शूज

19 इट्स स्विमिंग टाइम

20 स्पाइरल शू डिज़ाइन

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स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है टहलना!!

टहलना स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। टहलने से भोजन अच्छे से पचता है तथा हमारा शरीर भी स्वस्थ रहता है। आज के समय में ज्यादातर लोग टहलने के स्थान पर जिम इत्यादि को अधिक महत्व देते हैं।

आज की इस पोस्ट में हम आपको टहलने से होने वाले फायदों के बारे में बताने जा रहें हैं तो चलिए जानते हैं :-

  • टहलना न केवल शरीर बल्कि मानसिक स्वास्थ के लिए भी अच्छा होता है। अगर आप स्वस्थ रहना चाहते हैं तो सुबह की ताजी हवा में टहलना आपके लिए फायदेमंद है। कई रिसर्च में भी यह बात साफ हो चुकी है कि टहलने से डायबिटीज और स्‍तन कैंसर जैसी कई भयानक रोगों से भी छुटकारा पाया जा सकता है।
  • टहलने से सारे शरीर तंत्र की कार्य प्रणाली ठीक समय पर अपना कार्य करती है। शरीर में लाल रक्त कणों का निर्माण होता है जिससे शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है।
  • टहलने से शरीर के सभी अंग अच्छे से काम करने लगते हैं। रोज टहलने से शरीर को भरपूर मात्रा में ऑक्सीजन मिलता है। ऑक्सीजन का फ्लो अच्छा होने से फेफेड़े स्वस्थ्य होते हैं
  • सुबह घूमने से हमारे शरीर को विटामिन डी मिलता है। विटामिन डी हमारी त्वचा के रास्ते शरीर में जाकर कैल्शियम को अनलॉक करता है। इससे हमारी हड्डियां मजबूत होती है।
  • टहलना कई मायनों में एक सुरक्षित व्‍यायाम माना जाता है। फिटनेस विशेषज्ञ भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि घुटनों और जोड़ों के लिए टहलना बहुत फायदेमंद है।
  • टहलना महज शारीरिक व्यायाम ही नहीं है बल्कि यह मन में प्रसन्नता का संचार करने का काम भी करता है। यदि आप क्रोध में हैं तो थोड़ा टहलिए। थोड़ी देर में ही आप महसूस करने लगेंगे कि आपका क्रोध कम हुआ है।
  • टहलने से वजन घटाने में भी मदद मिलती है। इससे मधुमेह और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित किया जा सकता है। टहलना पीठ-दर्द के शिकार लोगों के लिए भी बेहद अच्छा है।
  • विभिन्न वैज्ञानिक शोधों ने प्रमाणित किया है कि गर्भवती महिलाओं के लिए टहलना एक सर्वश्रेष्ठ व्यायाम है। जो गर्भवती महिलाएं नियमित रूप से टहलती हैं, उन्हें प्रसव के समय अधिक कष्ट नहीं होता और नवजात शिशु भी स्वस्थ व निरोग रहता है।
  • रोजाना तेज गति से टहलना आपकी मांसपेशियों को ताकत देता है। इससे टांगों की मांसपेशियों को विशेष रूप से लाभ होता है। इतना ही नहीं, नियमित रूप से टहलना आपकी कार्यक्षमता यानी स्‍टेमिना में भी इजाफा करता है।
  • टहलने से गहरी नींद आने में मदद मिलती है।

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क्यों की जाती है पीपल की पूजा, जानिए क्या है मान्यताएं!!

भारतीय संस्कृति में पीपल को देववृक्ष माना जाता है। हिंदू धर्म में इस वृक्ष का बहुत महत्व है। इसे सभी वृक्षों से शुद्ध और पूजनीय माना जाता है। इसे विश्व वृक्ष, चैत्य वृक्ष और वासुदेव भी कहा जाता है।

पीपल के पत्ते-पत्ते में विष्णु भगवान का वास होता है। इसे पूजने के पीछे कई धार्मिक और वैज्ञानिक कारण भी हैं। तो चलिए जानें इसके पूजन से जुड़े कुछ ऐसे ही कारणों को।

पौराणिक कथा

एक पौराणिक कथा के अनुसार लक्ष्मी और उसकी छोटी बहन दरिद्रा विष्णु भगवान के पास गई और प्रार्थना करने लगी कि हे प्रभो! हम कहां रहें? इस पर विष्णु भगवान ने दरिद्रा और लक्ष्मी को पीपल के वृक्ष पर रहने की अनुमति प्रदान कर दी।

इस तरह वे दोनों पीपल के वृक्ष में रहने लगीं। साथ ही विष्णु भगवान की ओर से उन्हें यह वरदान मिला कि जो व्यक्ति शनिवार को पीपल की पूजा करेगा, उसे शनि ग्रह के प्रभाव से मुक्ति मिलेगी। उस पर लक्ष्मी की अपार कृपा रहेगी।

स्कंद पुराण अनुसार पीपल के मूल (जड़) में विष्णु, तने में केशव, शाखाओं में नारायण, पत्तियों में भगवान हरि और फलों में समस्त देवताओं से युक्त भगवान सदैव निवास करते हैं।

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वैज्ञानिक कारण

वैज्ञानिक दृष्टि से पीपल प्राणवायु का केंद्र है। यानी यह वृक्ष पर्याप्त मात्रा में कार्बन डाई ऑक्साइड ग्रहण करता है और ऑक्सीजन छोड़ता है।

ऑक्सीजन के अतिरिक्त इस वृक्ष में अन्य अनेक विशेषताएं हैं जैसे इसकी छाया सर्दी में गर्मी देती है और गर्मी में शीतलता देती है। इसके अतिरिक्त पीपल के पत्तों से स्पर्श करने से वायु में मिले संक्रामक वायरस नष्ट हो जाते हैं।

आयुर्वेद के अनुसार इसकी छाल, पत्तों और फल आदि से अनेक प्रकार की रोगनाशक दवाएं बनती हैं। इस दृष्टि से भी पीपल पूजनीय हैं इसलिए इसे पूजा जाता है।

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गाड़ियों के पीछे लिखी ये 20 मज़ेदार लाइनें पढ़कर आप हंसी नहीं रोक पाएंगे!!

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आपने ट्रक या किसी टैक्सी के पीछे लिखी ये लाइनें या कोट्स तो देखे ही होंगे, जैसे “ओके टाटा“, “हॉर्न प्लीज“, “हम दो हमारे दो“, “मेरा भारत महान” आदि। लेकिन क्या आपने कभी कुछ ऐसे कोट्स भी पढ़ें है जिन्हें पढ़कर आप अपनी हंसी न रोक पाए हो। आज हम आपको इस पोस्ट में गाड़ियों के पीछे लिखी कुछ मज़ेदार लाइनें दिखाने रहे हैं जिन्हें देखने के बाद आप हंसी नहीं रोक पाएंगे।

1 “बुरी नज़र वाले, तू सौ साल जिये, तेरे बच्चे दारू पी पी के मरे”

2 “धीरे चलोगे तो सौ बार मिलेंगे, तेज चलोगे तो हरिद्वार मिलेंगे”

3 “राम युग में दूध मिला कृष्णा युग में घी, इस युग में दारू मिली खूब दबाकर पी”

4 “आई ऍम सुनामी” 

5 “कीचड़ में पैर रखोगे तो धोना पड़ेगा, ड्राइवर से शादी करोगी तो रोना पड़ेगा”

6 “नो गर्ल फ्रेंड, नो टेंशन”

7 “मालिक की जिंदगी ब्रेड और केक पर, ड्राइवर की जिंदगी स्टीयरिंग और ब्रेक पर”

8 “बेखुदी की जिंदगी हम जिया नहीं करते, जाम दूसरों से चीन कर हम पिया नहीं करते”
“तुमको आगे निकलना है तो निकल जाओ, पीछे हम भी किसी का किया नहीं करते”

9 “दिल दिया था हीरा समझ के, काट दिया तूने खीरा समझ के”  

10 कुत्ता भी बिना वजह नहीं भौंकता !

11 “वाहन चलाते समय सौंदर्य दर्शन ना करें, वरना देव दर्शन हो सकते हैं”   

12 “गलत ओवरटेक से यमराज बहुत खुश होते हैं”

13 “पलट कर देख ले जालिम तमन्ना हम भी रखते हैं, अगर तुम 70 पे भी चलते है। तो हम 80 पे भी चलते हैं” 

14 इराक का पानी..पेट्रोल..!

15 “मालिक महान है मगर चमचो से संजय परशान है”

16 “भगवान बचाए इन तीनों से, पुलिस, डॉ हसीनों से”

17 “हम भी कभी राईस थे दिल की दुनिया लुटा बैठे, हालत कुछ ऐसे पलटे हम ऑटो चला बैठे”  

18 “दम है तो क्रॉस कर, नहीं तो बर्दाश्त कर” 

19 “मैं भी बड़ा होकर ट्रक बनूंगा”  

20 “महाराजा ऑफ़ रासन ड्राइविंग”  

 

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वायरल वीडियो :- देसी जुगाड़ से शख्स ने दो स्कूटर जोड़कर बनाई जबरदस्त गाड़ी!!

सोशल मीडिया पर हर दिन कुछ न कुछ वायरल होता ही रहता हैं। इनमें से कुछ वीडियो फनी होते होते हैं वहीं कुछ हैरान कर देने वाले होते हैं। ऐसा ही एक वीडियो आजकल इंटरनेट पर खूब वायरल हो रहा है जिसमें एक आदमी ने देसी जुगाड़ से दो स्कूटर को जोड़कर एक जबस्दस्त गाड़ी बना दी। इस वीडियो को देखकर हर कोई हैरान रह गया कि आखिर ये अनोखा स्कूटर कैसे तैयार किया गया है।

इस वीडियो को @adilnargolwala नाम के ट्विटर यूजर ने शेयर किया है। इस वीडियो में कैप्शन में लिखा है, ‘आवश्यकता सभी आविष्कारों की जननी है’

अक्सर यह देखा गया है कि अगर परिवार बड़ा है तो एक साथ बिना कार के कहीं जाना मुश्किल होता है। एक साथ जाने के लिए या तो गड़ी मंगवानी पड़ती है या फिर किसी एक का जाना कैंसल हो जाता है।

इसी परेशानी का बहुत ही शानदार हल निकाला है इस व्यक्ति ने और दो स्कूटर से ऐसी गाड़ी बना दी जिसमें पूरा परिवार  एक साथ बैठकर कहीं भी जा सकता है।

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जानिए कैसे हुई ‘मनुष्य और कुत्ते’ की दोस्ती !!

कुत्ते हर किसी को अच्छे लगते हैं और यही कारण है कि पालतू कुत्ते परिवार के सदस्य की तरह होते हैं। यदि जानवरों में वफादारी की बात की जाएं तो सबसे पहले कुत्ते का नाम आता है जिसकी वफादारी के आगे सभी जानवर फेल है।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर कैसे बना कुत्ता इतना वफादार और कैसे हुई मनुष्य और कुत्ते बीच दोस्ती। अगर नहीं जानते तो चलिए इस लेख के माध्यम से जानते हैं :-

ऐसे हुई ‘मनुष्य और कुत्ते’ की दोस्ती

कुत्ते का एक छोटा-सा पिल्ला अपने माता-पिता के साथ जंगल के पास रहता था। एक दिन उसके माता-पिता खाना ढूंढने के लिए निकले। शाम होने लगी लेकिन वे वापस नहीं आए। पिल्ले को डर लगने लगा।

बाद में पता चला कि किसी गाड़ी से टकराकर दोनों की मृत्यु हो गई थी। पिल्ले को बहुत रोना आया। उसे मम्मी पापा की याद आ रही थी। रोता-रोता वह जंगल की ओर चल पड़ा।

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तभी उसे एक हिरण मिला। हिरण को उस पर दया आ गई और वह पिल्ले को अपने घर ले गया। रात हुई तो उसने पिल्ले को सोने के लिए जगह दी लेकिन पिल्ले को नींद नहीं आ रही थी।

हर छोटी-सी आवाज पर वह बाहर निकल कर भौंकने लगता था। हिरण को इस बात पर बहुत गुस्सा आया। उसने कहा, “अगर तुम ऐसे ही बार बार बाहर जाकर भौंकोगे तो शेर को हमारे बारे में पता चल जाएगा। वह आकर हम दोनों को मार देगा।”

पिल्ला चुप तो हो गया लेकिन उसके मन में एक ही विचार आ रहा था, “हिरण शेर से डरता है इसलिए मुझे शेर के ही पास रहना चाहिए।” अगले दिन वह शेर के पास पहुंचा।

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उसने शेर को अपनी कहानी सुनाई। उसने शेर से प्रार्थना की कि वह उसे अपने साथ रहने दें। शेर को पिल्ले पर दया आ गई। वह राजी हो गया। रात को फिर वही हुआ। पिल्ला बार-बार भौंकने लगता था। शेर को गुस्सा आ गया।

वह बोला, “अगर तुम इस तरह भौंकोगे तो मनुष्य को हमारे बारे में पता चल जाएगा। वह हमें पकड़ लेगें।” पिल्ले को आश्चर्य हुआ कि शेर भी किसी से डरता है लेकिन उसने तय किया कि वह अगले ही दिन मनुष्य के पास जाएगा।

सुबह होते ही वह शहर की ओर चल पड़ा। उसे जो पहला मनुष्य मिला वह उससे बोला, “मैं अकेला हूँ, क्या आप मुझे अपने साथ रहने देंगे?” मनुष्य ने जब उसके माता-पिता के बारे में सुना तो उसे पिल्ले पर दया आ गई। वह पिल्ले को अपने घर ले गया।

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रात हुई और पिल्ला अपनी आदत के अनुसार बाहर जाकर भौंकने लगा लेकिन मनुष्य नाराज नहीं हुआ बल्कि वह खुश हुआ। वह अब निश्चित था कि यदि कोई चोर उसके घर में आएगा तो कुत्ते से डरकर भाग जाएगा।

साथ ही कुछ गड़बड़ होगी तो कुत्ता भौंकेगा और उसकी नींद भी खुल जाएगी। इस तरह मनुष्य और कुत्ता दोस्त बन गए। यह दोस्ती आज भी वैसी ही चल रही है।

पंजाब केसरी से साभार

ताकत और पोषण का खजाना है ‘शकरकंद’ जाने इसके चमत्कारी फायदों के बारे में

शकरकंद को ‘स्वीट पोटैटो‘ के नाम से भी जाना जाता है। इसमें ऊर्जा का खजाना होता है। अक्सर लोग इसे आलू से जोड़कर देखते हैं लेकिन पोषक तत्वों और स्वास्थ्य के लिहाज से इसके कई फायदे हैं।

चलिए इस पोस्ट के माध्यम से जानते हैं शकरकंद के बारे में:-

चमत्कारी फायदे

  • शकरकंद में कैलोरी और स्टार्च की सामान्य मात्रा होती है। वहीं, सैचुरेटेड फैट और कॉलेस्ट्रॉल की मात्रा इसमें न के बराबर रहती है। इसमें फाइबर, एंटी आक्सीडेंट्स, विटामिन और लवण भरपुर पाए जाते हैं।
  • शकरकंद में भरपूर मात्रा में विटामिन ‘बी 6‘ पाया जाता है, जो शरीर में होमोसिस्टीन‘ नामक एक अमीनो एसिड’ के स्तर को कम करने में सहायक होता है। दरअसल, इस ‘अमीनो एसिड’ की मात्रा बढ़ने पर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है
  • शकरकंद विटामिन ‘डी’ का एक बहुत अच्छा स्रोत है। यह विटामिन दांतों, हड्डियों, त्वचा और नसों के विकास तथा मजबूती के लिए आवश्यक होता है।
  • इस में भरपूर मात्रा में आयरन होता है। आयरन की कमी से हमारे शरीर में एनर्जी नहीं रहती। रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है और ब्लड सैल्स का निर्माण भी ठीक से नहीं होता। शकरकंद आयरन की कमी को दूर करने में मददगार रहता है।
  • शकरकंद में ‘कैरोटीनॉयड‘ नामक तत्व पाया जाता है जो ब्लड शूगर को नियंत्रित करता है। वहीं इसमें मौजूद ‘विटामिन ‘बी 6’ डायबिटिक हार्ट डिजीज में भी काफी फायदेमंद रहता है।
  • यह विटामिन ‘ए’ का भी बहुत अच्छा माध्यम है। इसके सेवन से शरीर की 90 प्रतिशत तक विटामिन ‘ए’ की पूर्ति हो जाती है।
  • शकरकंद पोटाशियम का एक बहुत अच्छा माध्यम है यह नर्वस सिस्टम की सक्रियता को सही बनाए रखने के लिए आवश्यक है। साथ ही किडनी को भी स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

पंजाब केसरी से साभार

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ये हैं भारत के 10 सबसे खूबसूरत गार्डन!!

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भारत में प्राकृतिक सुंदरता और संसाधनों की कोई कमी नहीं है। यहां पर प्रकृति की ऐसी-ऐसी चीजें देखने को मिलती हैं, जिसके बारे में आप सोच भी नहीं सकते हैं। भारत में रेगिस्तान, कल-कल बहती नदियां, वन-जीव और सुगंधित फूलों से भरे खूबसूरत गार्डन है।

आज इस पोस्ट के माध्यम से हम जानेगें भारत के बेहद खूबसूरत उद्यानों के बारे में, तो चलिए जानते हैं:-

वृन्दावन गार्डन, कर्नाटक

वृन्दावन उद्यान भारत के कर्नाटक राज्य के मैसूर नगर में स्थित एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। वृन्दावन गार्डन मैसूर से 20 कि.मी. दूर कृष्णराज सागर बांध के नीचे बनाया गया है।

हर वर्ष लगभग 20 लाख पर्यटकों द्वारा देखा जाने वाला यह उद्यान मैसूर के मुख्य आकर्षणों में से एक है। इस खूबसूरत गार्डन को कश्मीर के शालीमार गार्डन की तरह मुगल स्टाइल में बनाया गया है।

इस गार्डन का खास आकर्षण म्यूजिकल और डांसिंग फाउंटेन है। यह लोगों के लिए सुबह और शाम में खुलता है। यह गार्डन पूरी दुनिया में अपनी सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है।

सिम्स पार्क, कुन्नूर

सिम्स पार्क तमिलनाडु के हिल स्टेशन कुन्नूर का सबसे बड़ा आकर्षण है। इस उद्यान की स्थापना श्री जे डी सिम्स और मेजर मरे द्वारा 1874 में की गई थी। सिम पार्क में 1000 विदेशी पेड़-पौधे हैं।

फर्न्स, पाइन्स, मंगोलिया और कामेलिया जैसे पुराने और कम पाए जाने वाले पेड़ आपको यहां दिखेंगे। इस गार्डन में हर साल फ्रूट शो भी होता है।

गुलाब बाग, उदयपुर

गुलाब बाग उदयपुर का सबसे बड़ा और खुबसुरत गार्डन है। गुलाब बाग जिसे सज्जन निवास उद्यान के रूप में भी जाना जाता है, महाराणा सज्जन सिंह द्वारा 1850 के दशक के दौरान बनाया गया था। इसे 100 एकड़ जमीन पर बनवाया था।

गुलाब के फूलों की वजह से इस गार्डन का नाम गुलाब गार्डन रखा गया। इस गार्डन में आपको गुलाब के फूलों के इतने प्रकार मिल जायेंगे जो कहीं और देखने को नहीं मिलेंगे।

इस बगीचे की गिनती विश्व के खूबसूरत बगीचों में होती है। इस बगीचे के अंदर एक मिनी चिड़ियाघर भी है हालाँकि इस चिड़ियाघर में बहुत कम संख्या में जानवरों की प्रजातियां पाई जाती है।

हैंगिंग गार्डन, मुंबई

हैंगिंग गार्डन, कमला नेहरू पार्क के ठीक बगल में मालाबार हिल के ऊपर स्थित एक टैरेस गार्डन है। जिसे 1880 में श्री उल्हास गपोकर द्वारा बनाया गया था और यह सुंदर पार्क फ़िरोज़शाह मेहता को समर्पित हैं इसीलिए इस गार्डन को फ़िरोज़शाह मेहता गार्डन के रूप में भी जाना जाता है।

यह गार्डन बड़ी संख्या में पर्यटकों और स्थानीय लोगों को शहर की दैनिक हलचल से दूर अपना कुछ समय शांत वातावरण और मनमोहक सुन्दरता में व्यतीत करने के लिए अपनी ओर आकर्षित करता है।

बॉटनिकल गार्डन, ऊटी

सन् 1847 में बोटानिकल गार्डन का निर्माण विलियम ग्राहम द्वारा, जॉर्ज हेय की देखरेख में किया गया था। 55 एकड़ में फैले इस खुबसुरत गार्डन में कई लॉन हैं जिनमें फूलदार पौधे, तालाबों में लिली के पौधे और कई औषधीय पेड़-पौधे मौजूद हैं।

गार्डन के छः मुख्य भाग हैं- लोअर गार्डन, न्यू गार्डन, इटैलियन गार्डन, कन्सर्वटॉरी जहाँ विलुप्त होती प्रजातियों को संरक्षित किया गया है, फाउंटेन टेरेस और नर्सरी

दूर-दूर तक नज़र आते हरे घास के मैदान, रंग-बिरंगे अलग-अलग प्रजाति के फूल-पौधे और साफ़-खुशबूदार हवा, इस उद्यान का मुख्य आकर्षण हैं ।

इसके अलावा इस उद्यान में एक मंकी पज़ल ट्री (Monkey Puzzle Tree) नामक पेड़ है जिसपर स्वयं मंकी भी नहीं चढ़ सकते।

मुगल गार्डन, दिल्ली

भारत की राजधानी नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन के पीछे के भाग में स्थित मुगल गार्डन अकेला ऐसा उद्यान है, जहां विश्वभर के रंग-बिरंगे फूल देखने को मिलते हैं। यहां विविध प्रकार के फूलों और फलों के पेड़ों का संग्रह है।

13 एकड़ में फैले इस उद्यान में ब्रिटिश शैली के साथ – साथ मुगल शैली का मिश्रण दिखाई देता है। यह उद्यान चार भागों में बंटा हुआ है और चारों एक दूसरे से भिन्न हैं।

यहां कई छोटे-बड़े बगीचे हैं जैसे पर्ल गार्डन, बटरफ्लाई गार्डन और सकरुलर गार्डन, आदि।

लाल बाग, बैंगलोर

लाल बाग़ कर्नाटक के बेंगलुरु शहर में स्थित एक ख़ूबसूरत बाग़ है। इस बाग का निर्माण कार्य हैदर अली ने 1760 में शुरू किया था और बाद में उनके बेटे टीपू सुल्तान ने इसे पूरा किया।

करीब 240 एकड़ भूभाग में फैले इस बाग में दूर तक फैली हरियाली, सैंकड़ों वर्ष पुराने पेड़, सुंदर झीलें, कमल के तालाब, गुलाबों की क्यारियाँ, सजावटी फूल पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।

लाल बाग़ में वनस्पतियों की 1000 से ज्यादा प्रजातियां पाई जाती हैं। यह स्थान बंगलोर के सुंदरतम स्थानों में से एक है जिसे लाल बाग बॉटनिकल गार्डन, या लाल बाग वनस्पति उद्यान कहते हैं।

लाल बाग के बीचोबीच शीशा निर्मित एक बड़ा ग्लास-हाउस है जहां वर्ष में दो बार, जनवरी और अगस्त में पुष्प प्रदर्शनी का आयोजन किया जाता है।

रॉक गार्डन, चंडीगढ़

रॉक गार्डन ऑफ़ चंडीगढ़ एक शिल्पकृत गार्डन है। ये मुख्य रूप से नेक चन्द सैनी गार्डन के नाम से भी जाना जाता है। इसका निर्माण नेक चन्द सैनी ने करवाया था। पहले यह इतना बड़ा नहीं था लेकिन वर्तमान में यह लगभग 40 एकड़ में विस्तृत है।

इस गार्डन की खासियत यह है कि इसे टूटे हुए कांच, पुरानी चूड़ियों, टाइल्स, सिरेमिक बर्तन, इत्यादि से बनाया गया है।

आज पार्क में इन मूर्तियों के अलावा, वॉटरफॉल, क्रिएटिव वॉल, स्विंग्स, एक बड़ा एक्वेरियम, रचनात्मक दीवारें, एक विशाल मछलीघर है जो प्राचीन रोमन एक्वाडक्ट्स से मिलते जुलते हैं।

ट्यूलिप गार्डन, श्रीनगर

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इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्यूलिप गार्डन भारत में अपनी तरह का एक अनूठा उद्यान है। यह श्रीनगर में जबरवान रेंज की तलहटी में स्थित है।

यह एशिया के सबसे बड़े ट्यूलिप गार्डन के रूप में प्रसिद्ध है। यह उद्यान 2007 में खोला गया था। कहा जाता है यहां ट्यूलिप फूलों की 70 से भी अधिक वैरायटीज पाई जाती हैं।

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इंडियन बोटेनिकल गार्डन, कोलकाता

इंडियन बोटेनिकल गार्डन कोलकाता के हावड़ा जिले के शिबपुर में है। यह गार्डन हुगली नदी के किनारे पर बना हुआ है। यहाँ 1700 अलग-अलग तरह के पेड़-पौधे लगाए गए हैं।

बोटेनिकल गार्डन ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा 1787 में बनाया गया था। इस गार्डन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ पर विश्व का सबसे चौड़ा बरगद का पेड़ है जो 14,500 वर्ग मीटर में फैला हुआ है।

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