जानिए कैसा होता है ‘अंतरिक्ष यात्रियों का घर’!!

अंतरिक्ष में इंसानों के घर के रुप में इस्तेमाल होने वाली एक पूरे अंतरिक्ष के स्टेशन की स्थापना अपने आप में किसी करिश्मे से कम नहीं है।

धरती की कक्षा में स्थापित इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आई. एस. एस.) यानी अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र कई सालों से ब्रह्मांड से जुड़े शोध करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। भविष्य के अंतरिक्ष कार्यक्रमों में भी इसका बेहद महत्वपूर्ण योगदान रहेगा।

अंतरिक्ष स्पेस स्टेशन में पृथ्वी से कोई अंतरिक्ष यान जाकर जुड़ सकता है। इसे इसलिए बनाया गया है ताकि वैज्ञानिक लंबे समय तक अंतरिक्ष में काम कर सकें। आई.एस.एस को अंतरिक्ष में छोटे-छोटे टुकड़ों में ले जाकर इसके ऑर्बिट यानी कक्षा में स्थापित किया गया

1998 में सबसे पहला मॉड्यूल रूस के जरिए भेजा गया था। 2 नवंबर 2000 से लगातार अंतरिक्ष यात्री इस स्टेशन में कार्य कर रहे हैं। यह पृथ्वी से लगभग 248 मील की औसत ऊंचाई पर घूमता है।

अंतरिक्ष स्टेशन के बारे में ऐसी अनेक बातें हैं जो बहुत हैरतअंगेज हैं तो चलिए इस पोस्ट के माध्यम से जानते हैं :-

धरती का चक्कर लगाने की रफ्तार

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र लगातार पृथ्वी का चक्कर लगाता रहता है। यह 8 किलोमीटर प्रति सेकंड की बेहद तेज़ रफ्तार से पृथ्वी की परिक्रमा करता है। इतनी तेज़ रफ्तार के कारण एक बार में परिक्रमा करने के लिए इसे मात्र 90 मिनट यानी डेढ़ घंटे का ही समय लगता है।

यह भी पढ़ें :- अंतरिक्ष स्टेशन: ऐसा होता है अंतरिक्ष यात्री का जीवन

हर तरह से सुविधा संपन्न

यह एक बहुत ही बड़ा अंतरिक्ष यान है। इसकी कुल लंबाई लगभग 109 मीटर तक है और इसके अंदर इंसानों के रहने लायक हर सुविधा मौजूद है। यहां एक समय में ज्यादा से ज्यादा 6 लोग रह सकते हैं।

इंसानों द्वारा भेजा गया यह सबसे बड़ा अंतरिक्ष यान है। इसके अंदर का कुल दबाव 32,333 फुट तक का है और यह एक बोइंग 747 विमान जितना बड़ा होता है।

दुनिया की सबसे महंगी चीज

पृथ्वी और अंतरिक्ष दोनों में अगर सबसे कीमती चीजों के बारे में बात करें तो उसमें सबसे पहला स्थान आई.एस.एस. का आता है।

दरअसल, यह 11 लाख करोड़ रुपए की लागत से बनी सबसे महंगी चीजों में से एक है। इस पर होने वाले लगातार खर्चों की वजह से वर्तमान में यह और भी महंगा होता जा रहा है।

हैक हो चुके हैं इसके कंप्यूटर

नासा ने आई.एस.एस की सुरक्षा के प्रति कोई कसर नहीं छोड़ी है परंतु कई बार ऐसे भी मौके आए हैं जहां आई.एस. एस.के कंप्यूटर तक हैक हो चुके हैं।

आकाश में तीसरी सबसे चमकीली चीज है आई.एस.एस.

चांद और शुक्र ग्रह के बाद आई.एस.एस अंतरिक्ष में तीसरी सबसे चमकीली चीज़ है। इसे आप आसानी से देख सकते हैं। पृथ्वी से यह किसी उड़ रहे विमान की तरह ही दिखता है। इसे पृथ्वी से नंगी आंखों से देखा जा सकता है।

कुछ रोचक बातें

पूरे सौरमंडल में आई. एस. एस .ही एक ऐसी जगह है जहां आप अंतरिक्ष की गंध को काफी अच्छे तरीके से सूंघ सकते हैं। इस पर रहने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि अंतरिक्ष की गंध ‘मैटेलिक आयोनाइजेशन‘ जैसी होती है। कहने का तात्पर्य है कि अंतरिक्ष ज्यादातर किसी मैटल यानी धातु की तरह महकता है।

स्टेशन से जुड़ी खास बात यह भी है कि इसमें 12. 8 किलोमीटर लंबे तार लगे हैं। वैसे मजे की बात है कि इतने लंबे तार लगे होने के कारण या कई बार पेचीदा भी हो जाता है क्योंकि इसकी देखभाल नियमित रूप से करना बेहद जरूरी है।

इस पर जितने भी अंतरिक्ष यात्री रहते हैं वे दिन में तीन बार खाना कहते हैं। खाना खाते समय वे ऐसे ही बैठकर नहीं खा सकते हैं क्योंकि स्पेस स्टेशन में गुरुत्वाकर्षण ना होने के कारण हर चीज यहां – वहां उड़ती रहती है अगर उन्हें बांधा या पकड़ा न गया हो। ऐसे में खाना खाते समय बड़ी सावधानी से धीरे-धीरे भोजन को मुंह में डालना होता है ताकि खाने के टुकड़े उड़ते हुए इधर-उधर स्टेशन में न फैलें।

नहाने के इंतजाम की बात करें तो वर्तमान समय में स्पेस स्टेशन के अंदर दो स्नान कक्ष मौजूद हैं। इनसे निकलने वाले पानी और स्टेशन में मौजूद क्रू तथा प्रयोगों के लिए रखे जानवरों के मूत्र से ही पीने के लिए पानी को तैयार किया जाता है। इसे कई चरण की फिल्टर प्रक्रिया से साफ किया जाता है। इसी कारण आई.एस.एस. पर कभी पीने के पानी की कमी नहीं होती।

पंजाब केसरी से साभार………।

जाने सर्दियों के मौसम में सर्दी-जुकाम से बचने के लिए क्या खाएं क्या न खाएं!!

सर्दियों का मौसम आ चुका है और ये मौसम ऐसा होता है कि इसमें लोग किसी न किसी रूप में बीमार पड़ ही जाते हैं, इसका कारण मौसम में अचानक हुए बदलाव और हमारे खान पान को माना जाता है।

इस पोस्ट में हम आज बताने जा रहे हैं कि इस मौसम में क्या खाएं और क्या न खाएं जिससे सर्दी-जुकाम जैसी इन्फैक्शन से होने वाली बीमारी से बचा जा सके। तो आइए जानते हैं:-

क्या खाएं

लहसुन

लहसुन में जीवाणुरोधी, ऐंटीफगल और ऐंटीवायरल गुण होते हैं और इन्हीं गुणों की वजह से खासतौर से सर्दियों में ज्यादातर इसका इस्तेमाल किया जाता है। लहसुन को सूप में मिलाकर इसे और लाभकारी बना सकते हैं, जो सर्दी जुकाम के लक्षणों को कम करता है।

यह भी पढ़ें :- घरेलू नुस्खे: लहसुन के चमत्कारी फायदे!!

हरी सब्जियां

बीमार होने पर हरी सब्जियों का अधिक से अधिक सेवन करना चाहिए। पालक, पत्ता गोभी आदि सब्जियों में पर्याप्त मात्रा में विटामिन और मिनरल्स होते हैं। इसके अलावा हरी पत्तेदार सब्जियों में विटामिन ए, विटामिन के और विटामिन सी होता है। साथ ही, इसमें एंटीऑक्सिडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए बहुत जरूरी होते हैं।

यह भी पढ़ें :-कम वसा वाले 10 भोजन

क्या न खाएं

फ्रायड फूड

तले-भुने भोज्य पदार्थों में बहुत अधिक वसा यानी फैट होता है, जो सर्दी-जुकाम को बढ़ाता है। इसके अलावा तले हुए खाद्य पदार्थ पाचन तंत्र को भी प्रभावित करते हैं और खाना सही ढंग से डाइजेस्ट नहीं हो पाता। लिहाजा तले-भुने खाने से परहेज करना ही बेहतर है।

प्रोसेस्ड फूड

डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों में बहुत अधिक मात्रा में फ्रुक्टोज कॉर्न सिरप, सोडियम जैसी शरीर को नुकसान पहुंचाने वाली चीजें मिली होती हैं, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती हैं, इसलिए इस प्रकार की खाद्य सामग्री का सेवन करने से भी बचना चाहिए।

यह भी पढ़ें :-मानवीय शरीर के बारे में कुछ रोचक तथ्य

वायरल वीडियो :- इस 3 साल की छोटी सी बच्ची का डांस आपका दिल जीत लेगा!

इंटरनेट की दुनिया में आए दिन कोई न कोई वीडियोज़ वायरल होते ही रहते हैं। मगर इनमें से कुछ वीडियोज़ ऐसे भी होते हैं, जिनकी पॉपुलैरिटी कम होने का नाम ही नहीं लेती है। जैसे कि इन दिनों हर जगह श्रीलंकाई सिंगर योहानी दिलोका डिसिल्वा छाई हुई है।

उनका गाना ‘माणिके मंगे हिते‘ काफी समय से बहुत प्रसिद्ध है और सोशल मीडिया पर ऐसे हजारों वीडियो की भरमार है, जिनमें लोगों को मानिके मंगे हिते सॉन्ग पर डांस करते हुए देखा जा सकता है। इसी गाने पर ये 3 साल की बच्ची खूबसूरत डांस करते हुए दिखाई दे रही हैं जिसे लोग बहुत पसंद कर रहे हैं।

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Rasbhari (@rasbhari.taneja)

इस वीडियो में बच्ची ने लाइट कलर का शरारा पहना हुआ है जिसमें वह और भी प्यारी लग रही हैं। लोगों को यह वीडियो इतना पसंद आ रहा है कि वे कमेंट करने करने के लिए मजबूर हो रहे हैं।

इस वीडियो को @rasbhari.taneja नाम के इंस्टाग्राम पेज पर शेयर किया गया है। इसके अलावा कई सोशल मीडिया यूजर्स ने भी इस वीडियो को अपने सोशल मीडिया अकाउंट से शेयर किया है।

यह भी देखें :-

 

ये हैं दुनिया के 5 सबसे खूबसूरत महल!!

राजा-महाराजाओं के वक्त में बने कई खूबसूरत महल सदियों बाद आज भी मजबूती से खड़े हैं। इनमें से कुछ तो इतने खुबसूरत और शानदार हैं कि उन्हें राष्ट्रीय धरोहर माना जाता है।

आज इस पोस्ट में हम आपको देश विदेश के कुछ सबसे खूबसूरत महलों के बारे में बताने जा रहे हैं तो चलिए जानते हैं:-

मैसूर पैलेस, भारत

दक्षिण भारत के मैसूर शहर में स्थित पूर्व शाही परिवार वाडियारों के निवास मैसूर पैलेस को अम्बा विलास पैलेस के नाम से भी जाना जाता है। इस महल में दो दरबार हॉल हैं जहां पुराने समय में बादशाहों की शाही अदालतें लगा करती थीं।

भारत में पर्यटकों के लिए शाही स्मारकों में ताजमहल के बाद मैसूर पैलेस ही सबसे बड़ा आकर्षण का केन्द्र है। यहां प्रतिवर्ष लाखों पर्यटक आते हैं।

फॉरबिडन सिटी, चीन

चीन के शहर बीजिंग के मध्य में स्थित यह महल दुनिया के सबसे खूबसूरत शाही महलों में गिना जाता है। महल का निर्माण 1406 से लेकर 1420 के बीच किया गया था। यह 500 सालों तक कई सम्राटों का निवास स्थान रहा है।

यह अब चीनी सरकार के औपचारिक और राजनीतिक केंद्र का स्थल है। यह महल 7,20,000 स्क्वेयर मीटर क्षेत्र में फैला है और इसमें 980 भवन बने हैं। महल की वास्तुकला में आपको चीनी संस्कृति की झलक दिखाई देगी।

यह भी पढ़ें :- चीन का शादी बाज़ार

समर पैलेस, चीन

चीन के बीजिंग शहर में ही बना यह पैलेस काफी खूबसूरत है और यहां बनी कुनमिंग लेक पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण का केन्द्र बनी रहती है।

यह महल 2.9 स्क्वेयर किलोमीटर के क्षेत्र में फैला है जिसका एक बड़ा हिस्सा पानी से भरा है। यह जगह चीन के साम्राज्यवादी शासकों द्वारा एक ग्रीष्मकालीन आवास के तौर पर उपयोग में लाई जाती थी।

हिमेजी कैसल, जापान

यह हिलटॉप महल हाओगो प्रीफेकर में स्थित है। महल परिसर में 83 भवन शामिल हैं और हिमेजी कैसल पारम्परिक जापानी महल वास्तुकला का सबसे पुराना उदाहरण माना जाता है।

इसका बाहरी हिस्सा चमकदार सफेद रंग का है और कई लोग कहते हैं कि यह संरचना एक उड़ान जैसी दिखती है। समुराई योद्धा अकामात्सु नोरिमूरा ने 1333 में एक किले के रूप में इस महल का निर्माण करवाया।

इसकी प्रारम्भिक संरचना पिछली कई शताब्दियों के दौरान अनेक बार बदली गई। अर्थात महल के नित-नए मालिकों ने इसमें अपनी पसंद से कई बदलाव किए।

महल चमत्कारिक रूप से विश्व युद्ध से बच गया, भले ही आसपास के इलाकों में खूब बमबारी की गई थी। आज यह यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है।

विंटर पैलेस, रूस

सेंट पीटर्सबर्ग में नेवा नदी के किनारे स्थित विंटर पैलेस रूस के पूर्वशाही परिवार का शीतकालीन निवास था। इसका निर्माण 1762 में पूरा हुआ। इसमें कुल 460 कमरे हैं।

इतालवी वास्तुकार रस्त्रेल्ली द्वारा बनाया हुआ यह रूसी वास्तुकला का एक प्रसिद्ध नमूना है। सन् 1918 से यह महल सोवियत राजकीय चित्रशाला के अधिकार में है। इस महल कोविश्व के सर्वाधिक दर्शनीय स्थलों में से एक गिना जाता है।

यूरोप के कुछ खास महल

  • यूरोप के महल काफी हद तक पूर्व के खलीफाओं के विशाल महलों से प्रभावित हैं जिन्हें 7वीं तथा 8वीं शताब्दियों के दौरान बनाया गया था। ये अपने बगीचों तथा भरपूर सजावट के लिए प्रसिद्ध हैं।
  • इस्ताम्बुल स्थित टोपाकापी महल 400 से भी अधिक वर्षों के लिए ओट्टोमन सुल्तानों का भव्य आवास था। अंततः जब सुल्तानों का शासन खत्म हुआ तो 1924 में इसे अजायबघर में बदल दिया गया।

  • वेनिस के ‘डाजेस पैलेस‘ में पूर्वी देशों की छाप दिखाई देती है जिसे वेनेटिशन व्यापारी पूर्व से लाए थे।
  • फ्लोरेंस स्थित भव्य सिटी पैलेस को शानदार आर्कीटैक्ट ब्रुनेलेभी ने 1440 में ल्यूका पिटी नामक व्यापारी के लिए डिजाइन किया था। इसे 1550 में मेडिसी परिवार ने अपने निमंत्रण में ले लिया था।
  • हैम्पटन कोर्ट पैलेस, जो लंदन के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है, का काम 1514 में राजा हैनरी अष्टम के पसंदीदा दरबारी वोल्सी ने शुरू करवाया था लेकिन जब वोल्सी उनका पसंदीदा नहीं रहा तो यह काम राजा ने अपने हाथ में ले लिया।
  • मैड्रिड में एस्कोरियल ग्रेनाइट का बना एक विशाल महल है जिसे फिलिप द्वितीय ने बनवाया था। इसका काम 1563 में शुरू हुआ तथा 1584 में पूर्ण हुआ।

पंजाब केसरी से साभार

यह भी पढ़ें :-

जानिए सिंदूर के 10 चमत्कारी टोटके !!

सिंदूर को हिंदू धर्म में बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि विवाहित स्त्रियों द्वारा सिंदूर को मांग में भरने से उनके पति की आयु लंबी होती है। साथ ही घर में सुख शांति बनी रहती है। पूजा को सिंदूर के बिना अधूरा माना जाता है। सिंदूर का इस्तेमाल सदियों से टोटकों में भी किया जाता रहा है। आइए आज इस पोस्ट के माध्यम से सिंदूर के कुछ ऐसे टोटकों के बारे में जानते हैं जिनसे आप कई तरह के लाभ प्राप्त कर सकते हैं, तो चलिए जानते हैं

10 miraculous tricks of vermilion

चमत्कारी टोटके

  • अगर आपके घर में पैसों की तंगी रहती है तो इसके लिए नारियल पर सिंदूर लगाकर उसे लाल रंग के कपड़े में बांधकर उसकी पूजा करें। आप इस नारियल को अपनी दुकान के गल्ले में रखें और मां लक्ष्मी से धन प्राप्ति की प्रार्थना करें। धीरे धीरे आपकी आर्थिक दिक्कत दूर हो जाएंगी।
  • सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर पांच मंगलवार और शनिवार तक हनुमान जी को चढ़ाएं इससे आपकी सारी परेशानियां दूर हो जाएंगी। सिंदूर अर्पित करने के बाद गुड़ और चने का प्रसाद भी जरूर बांटे।
  • अगर आप समाज में सम्मान पाना चाहते हैं तो एक पान के पत्ते पर फिटकरी और सिंदूर बांधकर बुधवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे किसी पत्थर के नीचे दबा कर रख आएं। लौटते वक्त गलती से भी पीछे पलटकर न देखें। आपको ऐसा लगातार तीन बुधवार तक करना होगा।
  • शादीशुदा रिश्ते में प्यार बढ़ाने के लिए रात को सोते समय पत्नी अपनी पति के तकिये के नीचे सिंदूर की एक पुड़िया और पति अपनी पत्नीं के तकिये के नीचे कपूर की दो टिकियां रख दें। सुबह होते ही सिंदूर की पुड़िया घर से बाहर फेंक दें और कपूर को निकालर कमरे में जला दें।
  • अगर आपको रक्त से संबंधी कोई रोग है या कोई बीमारी आपका पीछा नहीं छोड़ रही है तो इसके लिए आप सिंदूर को व्यक्ति के ऊपर से उतारकर बहते हुए जल में प्रवाहित करें इससे बीमारी में तेजी से लाभ मिलता है। यह उपाय पांच बार करें।
  • यदि आप लंबे समय से नौकरी की तलाश में हैं और आपको सफलता नहीं मिल रही है तो किसी भी शुक्ल पक्ष के गुरुवार को पीले वस्त्र पर अपनी अनामिका अंगुली से केसर मिले हुए सिंदूर से 63 नंबर लिखें फिर उसे ले जाकर माता लक्ष्मी के मंदिर में मां के चरणों में अर्पित करें। ऐसा लगातार तीन गुरुवार तक करने से आपको सफलता ज़रूर मिलेगी।
  • घर के मुख्य द्वार पर तेल में सिंदूर मिलाकर लगाने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश नहीं होता है। इसे 40 दिन तक लगातार करें, लाभ मिलने लगेगा।
  • घर के मुख्य दरवाजे पर सिंदूर लगाने से आपके परिवार पर देवी लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। घर के प्रवेश द्वार पर सिंदूर चढ़ी हुई गणेश प्रतिमा स्थापित करने से सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
  • यदि आप चालक हैं और आपको सड़क पर दुर्घटना का डर सताता रहता है तो मंगलवार के दिन हनुमानजी के मंदिर में सिंदूर दान करें। ऐसा करने से आपका दुर्घटना का भय खत्म हो जाता है।
  • यदि आपकी जन्म कुण्डली में सूर्य और मंगल ग्रह का दोष है और उनकी महादशा या अंतर्दशा चल रही है, तो इसके लिए सिंदूर को बहते जल में प्रवाहित कर दें। ऐसा करने से संबंधित ग्रह का प्रभाव कम हो जाएगा और सूर्य व मंगल शुभ फल देने लगेंगे।

यह भी पढ़ें :-

OMG :- इस आइलैंड पर मसालों की जगह खाई जाती है मिट्टी

प्रत्येक देश का अपना अलग रहन सहन होता है। अगर बात खाने पीने के मामले की जाए तो, दुनिया के अलग-अलग देशों में भिन्न भिन्न प्रकार के व्यंजन बनाए जाते हैं और व्यंजनों को बनाने के लिए मसालों का इस्तेमाल तो जरूर किया जाता है क्योंकि मसालों के बिना खाने में किसी भी प्रकार का स्वाद नहीं आता।

लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनिया का एक देश ऐसा भी है जहां पर लोग मिट्टी को मसाले की तरह इस्तेमाल करते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि ये मिट्टी न केवल बेहद स्‍वादिष्‍ट है, बल्कि सेहत के लिए भी अच्छी होती है इसलिए वहां के लोग इस मिट्टी को खाने में मसाले की तरह इस्तेमाल हैं।

कहाँ पर है ये जगह

दरअसल यह ईरान का होरमूज आइलैंड (Hormuz Island) है। यह आइलैंड अपने खूबसूरत पहाड़ों की वजह से दुनिया भर प्रसिद्ध है।

इन पहाड़ों की मिट्टी इतनी रंग-बिरंगी है कि इस आइलैंड को रैनबो आइलैंड भी कहा जाता है। लेकिन यह बात कम ही लोग जानते हैं कि इन पहाड़ों की मिट्टी को मसाले की तरह खाया जाता है।

यह मिट्टी बहुत स्‍वादिष्‍ट होती है जिस कारण लोग इसे मसालों की तरह इस्तेमाल करते हैं।

यह भी पढ़ें :-शीर्ष भारतीय मसाले और उनके स्वास्थ्य लाभ

क्या है मिट्टी की खासियत

यह खूबसूरत आईलैंड फारस की खाड़ी में स्थित है और यहां की मिट्टी में भरपूर खनिज हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यहां की मिट्टी में बहुत ज्यादा आयरन और लगभग 70 तरह के खनिज पाया जाता है।

यहाँ के पहाड़ों पर नमक के टीले भी मौजूद हैं। इन पहाड़ों पर शेल, मिट्टी और आयरन की परते हैं जिसकी वजह से पहाड़ रंग बिरंगे नज़र आते हैं।

कल लगने वाला है साल का आखिरी सूर्य ग्रहण

साल का आखिरी सूर्य ग्रहण कल यानि 04 दिसंबर 2021 को लगने जा रहा है। इससे 15 दिन पहले चंद्र ग्रहण लगा था। चलिए इस पोस्ट के माध्यम से जानते है इस साल के आखिरी सूर्य ग्रहण के बारे में :-

क्या होता है सूर्य ग्रहण

जब चन्द्रमा, पृथ्वी और सूर्य के मध्य से होकर गुजरता है और पृथ्वी से देखने पर सूर्य पूर्ण या आंशिक रूप से ढक जाता है, तब सूर्य ग्रहण लगता है। जबकि हिंदू धार्मिक मान्‍यताओं के अनुसार, इस समय राहु और केतु की बुरी छाया धरती पर पड़ती है, जिससे ग्रहण लगता है।

कब शुरू होगा ग्रहण

इस सूर्य ग्रहण की शुरुआत 4 दिसंबर की सुबह 10 बजकर 49 मिनट से होगी और इसकी समाप्ति दोपहर 3 बजकर 7 मिनट पर होगी। सूर्य ग्रहण की कुल अवधि लगभग चार घंटे की होगी।

कहां दिखाई देगा सूर्य ग्रहण

यह सूर्य ग्रहण अन्टार्कटिका और दक्षिण महासागर, अफ्रीका के कई देश नामिबिया, दक्षिण अफ्रीका समेत दक्षिण अमेरिका और ऑस्ट्रेलियाई में भी दिखाई देगा। भारत में यह ग्रहण नहीं दिखाई देगा। भारत समेत एशिया में सूर्य ग्रहण नहीं दिखाई देगा।

सूतक काल

शास्त्रों के अनुसार सूर्य ग्रहण के दौरान सूतक काल का विशेष महत्व बताया गया है, लेकिन इस बार सूर्य ग्रहण के दौरान सूतक के नियमों का पालन नहीं किया जाएगा।

साल का आखिरी सूर्य ग्रहण उपछाया है, जब पूर्ण सूर्य ग्रहण की स्थिति बनती है तभी सूतक के नियमों का पालन किया जाता है। बता दें सूर्य ग्रहण का सूतक ग्रहण लगने से 12 घंटे पहले शुरू हो जाता है।

इस दौरान कई कार्यों को करने की मनाही होती है। सूतक काल में मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं, इस दौरान कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है।

इन 20 अजीब फैशन स्टाइल्स को देखकर आपका सिर चकरा जाएगा!!

0

समय के साथ फैशन में बदलाव होते रहे हैं। फैशन में रहने का कीड़ा हर किसी को होता हैं। बस फर्क सिर्फ इतना हैं कि सबका ड्रेसिंग सेन्स अलग – अलग होता हैं।

किसी को फॉर्मल्स पसंद होता है, किसी को वेस्टर्न, तो किसी को इन सब से हट के कुछ अलग। फैशन के साथ एक्सपेरिमेंट करना तो समझ आता है, लेकिन बहुत सारे लोगों को शायद ये नहीं मालूम होता कि कहां तक ये एक्सपेरिमेंट किए जाएं।

आज कल फैशन के नाम पर लोगों को ना जाने क्या क्या परोसा जा रहा है। ऐसे ही कुछ अजीब फैशन स्टाइल को देखकर आश्चर्य भी होता हैं और हंसी भी आती है।

आज इस लेख में हम आपको कुछ ऐसे फैशन स्टाइल से रूबरू कराएंगे जिन्हें देख आपका दिमाग भी चकरा जाएगा। तो चलिए देखते हैं :-

1) लगता है डिजाइनर हेजहोग (जंगली चुहिया) से प्रेरित है

2) यह पोशाक कुछ ज़्यादा ही डरावना है।

3) रेड स्पाइडर लुक

4) पियानो पोशाक!

5) ये कुछ ज़्यादा ही अजीब है!

6) फैशन की कोई सीमा नहीं होती।

7) हैवी ड्रेस, है ना?

8) लगता है डिजाइनर ने एक शर्ट डिजाइन करने का फैसला किया होगा, लेकिन बाद में अपना विचार बदल दिया होगा।

9) यह पोशाक एक टावर की तरह लगती है!

10) समुद्री जानवर

11) कूल लुक

12) ऐसा लगता है कि जब डिजाइनर इस डिजाइन को बना रहा था तो फलों के बारे सोच रहा था!

13) पत्थर की औरत

14) बोरे से बनी पोशाक

15) तारों का जाल!

16) यह देखकर तो मेरे मुंह में पानी आने लगा।

17) डेनिम का नया फैशन ट्रेंड

18) लगता है इस पोशाक को बनाने में कई कारीगरों के हाथ लगे हैंl

19) हड्डियां शरीर के अंदर क्यों छुपी होती है, इन्हें भी दिखने का मौका मिलना चाहिए।

20) कलाकार बरसात के मौसम के बारे में सोच रहा होगा और इसलिए पोशाक रेनकोट के समान है।

यह भी पढ़ें :- अजीबोग़रीब शौक :- ड्रैगन की तरह दिखता है यह शख्स!

इस अनोखे मंदिर में भक्तों को प्रसाद में मिलता है सोना चांदी!!

भारत अद्भूत और प्राचीन मंदिरों के लिए पूरी दुनिया भर में प्रसिद्ध है। भारत में बहुत से खूबसूरत मंदिर मौजूद हैं इनमें से कई बेहद पुराने और कई बेहद अनोखे मंदिर हैं।

ऐसा ही एक अनोखा मंदिर मध्य प्रदेश में स्थित है। जहां प्रसाद के रूप में लड्डू या मिठाई की बजाए सोना – चांदी मिलता है।

देखा जाए तो ये विश्व का पहला ऐसा मंदिर है जहां सोना-चांदी प्रसाद के रूप में मिलता हैं। यह मंदिर दिखने में बेहद खूबसूरत है जो सोने-चांदी से सजा हुआ रहता है।

तो चलिए जानते हैं इस अनोखे मंदिर के बारे में:-

केवल कुछ दिनों के लिए खुलते हैं मंदिर के कपाट

दरअसल हम ज‍िस मंद‍िर की बात कर रहे हैं वह मध्य प्रदेश के रतलाम के माणक में स्थित है। इस मंद‍िर का नाम महालक्ष्‍मी मंद‍िर है। इसके कपाट केवल धनतेरस के ही द‍िन खुलते हैं।

इस मंदिर में श्रद्धालु केवल महालक्ष्मी ही नहीं बल्कि कुबेर महाराज जी की पूजा करने के ल‍िए भी आते हैं। धनतेरस के दिन ब्रह्म मुहूर्त में खुलने वाले इस मंद‍िर के कपाट भाई-दूज के द‍िन बंद कर दिए जाते हैं।

यह भी पढ़ें :-800 साल पुराने इस महादेव मंदिर में सूर्य की किरणें करती हैं शिवजी का अभिषेक

सालों से चली आ रही परम्परा

इस मंदिर के इतिहास के बारे में कहा जाता है कि पुराने ज़माने में राजा-महाराजा, राज्य की सुख-समृद्धि के लिए धन और सोना चांदी चढ़ाया करते थे और तभी से यह परंपरा चली आ रही है।

आज भी भक्त माता के चरणों में गहने, पैसे और अन्य कीमती चीज़े चढ़ाते हैं ताकि उनके घर की सुख-समृद्धि बनी रहे।

मां लक्ष्‍मी के इस मंद‍िर में सोने-चांदी और नोटों की गड्डियां चढ़ाने की यह परंपरा सद‍ियों से चली आ रही है। यहां आने वाले श्रद्धालु, माता के चरणों में जो भी आभूषण और नकदी अर्पित करते हैं।

बाद में उसे भक्‍तों को प्रसाद के रूप में व‍ितर‍ित कर द‍िया जाता है। इसके अलावा श्रद्धालुओं को श्रीयंत्र, सिक्के, कौड़‍ियां और अक्षत कुमकुम लगी कुबेर पोटली भी प्रसाद के रूप में दी जाती है।

यह भी पढ़ें :-

भारत के 5 ऐसे मंदिर जहां पुरुषों को जाने की अनुमति नहीं है

एक ऐसा मंदिर जो दिन में दो बार गायब हो जाता है जानिए क्या है रहस्य?

दुनिया का सबसे सुंदर मंदिर, जहां भगवान ने अपने नाखूनों से बना डाली झील

एक रहस्यमयी मंदिर जिसका दरवाज़ा खुलता है सिर्फ महाशिवरात्रि पर !!!!

अनोखा मंदिर : जहां मांगी जाती हैं बेटी पैदा होने की मन्नत !!

साबुन का झाग हमेशा सफेद ही क्यों होता है?

0

साबुन का इस्तेमाल तो हर कोई करता हैं और अक्सर आपने देखा होगा कि साबुन चाहे किसी भी कलर का हो, लेकिन साबुन का झाग हमेशा सफेद ही होता है, ऐसा क्यों? तो चलिए जानते हैं इस पोस्ट के माध्यम से:-

क्यों होता है झाग का रंग सफ़ेद

दरअसल किसी भी चीज का अपना कोई रंग नहीं होता। उस पर जब प्रकाश की किरणें पड़ती हैं तो वह बाकी रंगों को सोखकर जिस रंग को परावर्तित (Reflect) करती हैं, वही उसका रंग होता है।

झाग कोई ठोस पदार्थ नहीं है। यह पानी, हवा और साबुन से मिलकर बनी एक पतली लेयर होती है।

यह परत (लेयर) जब गोल आकार ले लेती है तो हम इसे बुलबुला कहते हैं। साबुन का झाग बहुत सारे छोटे बुलबुलों का समूह होता है।

झाग बनाने वाले छोटे-छोटे बुलबुले भी इसी तरह की सतरंगी पारदर्शी परतों से बने होते हैं, लेकिन ये इतने बारीक होते हैं कि हम इन सतरंगी परतों को नहीं देख पाते।

यह भी पढ़ें :-जानिए सबसे पहले साबुन कब बना

साबुन के एक बुलबुले पर प्रकाश किरणें पड़ते ही अलग-अलग दिशा में परावर्तित (Reflect) होने लगती हैं यानी उसके अंदर प्रकाश किरणें किसी एक दिशा में जाने के बजाय अलग-अलग दिशा में बिखर जाती हैं।

यही कारण है कि साबुन का एक बड़ा बुलबुला हमें पारदर्शी सतरंगी परत जैसा दिखाई देता है।

वहीं, दूसरा कारण यह है कि इन बुलबुलों में प्रकाश किरणें इतनी तेजी से घूमती हैं कि ये एक ही समय पर लगभग सभी रंगों को परावर्तित कर देती हैं यानी यदि कोई वस्तु एक साथ सभी रंगों को परिवर्तित कर दे तो उसका रंग सफेद दिखाई देता है। इसी वजह से साबुन के झाग का रंग सफेद दिखता है।

यह भी पढ़ें :- बरसात के मौसम में रखें इन खास बातों का ध्यान!!