करी पत्ते के हैं बेहद चमत्कारी फायदे, जानिए कैसे ?

करी पत्ते का उपयोग रसोई में कई रैसिपी में स्वाद बढ़ाने लिए करते देखा होगा। जिस डिश में करी पत्ते के डाला जाता है उसका स्वाद बढ़ जाता है लेकिन क्या आप जानते हैं करी पत्ता खाने के और कितने लाभ है।

इसमें कई ऐसे कई सारे तत्व पाए जाते हैं जो सेहत के लिए वरदान है। इसका इस्तेमाल त्वचा और बालों के लिए भी बहुत ही अच्छा माना जाता है।

इसके अलावा इसके कई ऐसे फायदे भी हैं जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। आज हम आपको इस पोस्ट में करी पत्तों के फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं तो आइए जानते हैं :-

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स्किन के लिए फायदेमंद

ऐंटीऑक्सिडेंट, एंटी बैक्टीरियल और एंटी फंगल गुणों से भरपूर करी पत्ता स्किन के लिए बहुत फायदेमंद है। करी पत्ता में भरपूर मात्रा में विटामिन्स भी पाई जाती हैं जो आंखों की रोशनी बढ़ाने के साथ साथ आपकी त्वचा को चमकदार बनाने मदद करती हैं।

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लीवर के लिए फायदेमंद

करी पत्ते में टैनिन और कारबाजोले एल्कलॉइड जैसे तत्व मौजूद होते हैं। करी पत्ते में हेप्टोप्रोटेक्टिव गुण पाए जाते हैं जो लिवर को हेल्दी रखने में मदद कर सकता है। इसमें मौजूद विटमिन सी लीवर को सेहतमंद रखता है।

वजन कंट्रोल करता है

करी पत्तों के नियमित सेवन से आप तेजी से अपने बढ़ते वजन को कंट्रोल में कर सकते हैं। इसके लिए आपको सिर्फ करी पत्ते से उबले पानी में शहद और नींबू का रस मिलाकर पीना है कुछ दिनों तक इसका सेवन करने वजन आसानी कंट्रोल होने लगता है।

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एनीमिया के खतरे से बचाता है

करी पत्ते में आयरन और फॉलिक एसिड पाया जाता है। जो एनिमिक पेसेंट में खून की कमी को तेजी से पूरा करने लगता है। इस वजह से यह एनीमिया के खतरे से सुरक्षित रखता है।

डेंड्रफ की प्रॉब्लम से छुटकारा दिलाता है

अगर आप भी डैंड्रफ के लिए ट्रीटमेंट कराकर थक चुके हैं जो करी पत्ता आपकी इस समस्या को आसानी से दूर कर सकता है।

इसके लिए आपको करी पत्तों का पतला पेस्ट बनाकर दही के साथ मिलाकर सिर में लगाने होगा और डैंड्रफ की समस्या आसानी से दूर हो जाएगी और इससे बाल जल्दी सफेद नहीं होते।

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डायबिटीज में फायदेमंद

देश में लगभग हर दूसरे घर में डायबिटीज के पेसेंट हैं ऐसे में करी पत्ता आपके लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है। अगर आप इसके चार से पांच पत्ते नियमित रूप से चबाते हैं तो आपकी डायबिटीज अपने आप कंट्रोल में आ जाती है।

कॉलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में मददगार

कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए करी पत्ते का इस्तेमाल करना लाभदायक माना जाता है क्योंकि करी पत्ते में विटामिन सी के साथ एंटीऑक्सीडेंट और एंटीइन्फ्लामेट्री गुण मौजूद होते हैं जो कोलेस्ट्रॉल के लेवल को कंट्रोल कर सकता है।

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मोमबत्ती के ये 10 डिज़ाइन देखकर आपके मुँह में पानी आ जाएगा !!

मोमबत्ती का वास्तु शास्त्र में बहुत खास महत्व होता है। माना जाता है कि कैंडल्स जलाने से घर में एनर्जी का संतुलन बना रहता है। ये नेगेटिव एनर्जी को दूर करके उसे पॉजिटिव एनर्जी में बदल देती है।

आजकल बाजार में कई तरह की अलग-अलग डिज़ाइन वाली मोमबत्तियां देखने को मिलती हैं। घर में अलग-अलग स्टाइल और रंगों की मोमबत्तियां बहुत ही सुंदर लगती हैं।

आज के समय में लोग घर को सजाने के लिए भी मोमबत्तियों का इस्तेमाल करते हैं। ये न सिर्फ घर में रोशनी करती हैं बल्कि घर के माहौल में चार चांद लगा देती हैं और उसे खुशनुमा बना देती है।

आज पोस्ट में हम आपको मोमबत्तियों के कुछ ऐसे डिज़ाइन बताने जा रहे हैं जिन्हें देखकर ये समझ पाना मुश्किल है कि ये मोमबत्ती है या कोई खाने की डिश, तो चलिए देखते हैं :-

1) ये तरबूज नहीं मोमबत्ती हैं!!

2) इसे देखकर आपके मुँह में पानी आ गया होगा लेकिन ये केवल ओरियो और दूध की तरह दिखने वाली मोमबत्ती है।

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3) ये नींबू की तरह स्लाइस लग रहे हैं पर ये मोमबत्ती है!

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4) इसे फ्लेवर्ड फ्रूट शेक न समझे, यह कैंडल्स है!

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5) कैंडी कॉर्न के तरह दिखने वाली मोमबत्ती

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6) ये खूबसूरत सी दिखने वाली कोई डिश नहीं बल्कि कैंडल्स है

7) इसे देखकर तो आप जरूर सोच रहे होंगे कि ये क्रिसमस कपकेक है लेकिन यह भी एक मोमबत्तियों का सेट है।

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8) चेरी चीज़ केक स्लाइस नहीं मोमबत्ती ही है भाई!

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9) ये है कीवी कैंडल्स

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10) गलती से इसे लेमन ड्रिंक समझ कर मत पी लेना, ये भी कैडल्स है!

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जानिए कहानी ‘गुड़िया’ की!!

गुड़िया भला किसे अच्छी नहीं लगतीं। पुराने जमाने से ही ये मानव जीवन का अभिन्न हिस्सा रही हैं।

गुड़िया क्या है?

इस प्रश्न का उत्तर डिक्शनरी में कुछ इस प्रकार मिलता है, “बच्चे का खिलौना, कठपुतली आदि जिसका निर्माण मानवीय चेहरे से मिलती जुलती आकृति में किया गया हो।”

पुराने जमाने में इनके चेहरे विभिन्न ऐतिहासिक हस्तियों के आधार पर बनाए जाते थे और सम्भवतः आरम्भिक दौर में इनका निर्माण क्ले, फर या लकड़ी से किया जाता था।

प्राचीन काल की गुड़िया

आज पूर्व ऐतिहासिक काल की गुड़िया मौजूद नहीं है। हालांकि खुदाई में बैबीलोनियन काल की ऐसी एलबैस्टर गुड़िया बरामद हुई हैं जिनकी भुजाएं हिलती थीं।

2000 ईसा पूर्व की मिस्त्री क्रबों में भी चपटी लकड़ी के टुकड़ों से बनाई हुई गुड़िया बरामद हुई हैं जिनके बाल मिट्टी अथवा लकड़ी के बीड्स से बनाए गए थे।

पुरातन काल में यूनान और रोम में बच्चों की कब्रों के साथ गुड़िया भी दफनाई जाती थीं। यूनान तथा रोम में बड़ी होने पर लड़कियां अपनी गुड़िया देवी को अर्पित कर दिया करती थीं क्योंकि बड़ी होने पर उन्हें उनसे खेलने की अनुमति नहीं होती थी।

अधिकांश पुरातन गुड़िया जो पाश्चात्य देशों में बच्चों को कब्रों में पाई गईं वे बहुत सादगी भरपूर होती थीं और आमतौर पर इनका निर्माण क्ले, चिथड़ों, लकड़ी अथवा हड्डियों से किया जाता था।

कुछ अधिक बेहतरीन किस्म की गुड़िया हाथी दांत अथवा मोम से भी बनाई जाती थीं। इनका निर्माण चाहे जिस पदार्थ से भी किया जाता हो, उनके पीछे उद्देश्य मात्र यही होता था कि इनका निर्माण यथासंभव अधिक से अधिक मानवीय चेहरों में मिलता जुलता किया जाए।

इस संबंध में 600 ईसा पूर्व में एक बड़ी प्रगति का 25 संकेत मिलता है जब उस दौर की बनी हुई ऐसी गुड़िया बरामद हुई जिनके अंग हिलते थे और जिनके कपड़े उतारे जा सकते थे।

पुरातन कालीन गुड़िया के दौर के बाद यूरोप इनके उत्पादन का एक बहुत बड़ा केंद्र बन गया। शुरू-शुरू में ये लकड़ी से बनाई जाती थीं।

लकड़ी से प्लास्टिक का सफर

बहरहाल समय बीतने के साथ-साथ इनके निर्माण स्तर में भी उत्तरोत्तर सुधार आता गया और इसमें इस्तेमाल की जाने 3 वाली निर्माण सामग्री में लकड़ी एवं कागज की लुगदी आदि का इस्तेमाल किया जाने लगा।

इन मिश्रणों की ढलाई प्रेशर में की जाती थी जिसके परिणामस्वरूप यह अधिक टिकाऊ बनती थीं। अब तक इनका सामूहिक निर्माण भी शुरू हो गया था।

हर व्यापारी अपने सामान के निर्माण में उपयक्त सामग्री को राज रखने की कोशिश करता है और पुराने जमाने के निर्माता भी इसका अपवाद नहीं थे।

वे भी इनके निर्माण में उपयुक्त होने वाली सामग्री को रहस्य के आवरण में ही रखते थे ताकि अन्य निर्माताओं को इसका पता न चले।

समय के साथ-साथ गुड़िया की निर्माण प्रक्रिया और इसमें प्रयुक्त सामग्री में सुधार होता चला गया। इंगलैंड में 1850 और 1930 के बीच अत्यंत शानदार मोम की गुड़िया का निर्माण हुआ।

अब खांचे बनाकर मोम मिट्टी और प्लास्टर से गुड़िया का निर्माण शुरू हो गया। 19वीं शताब्दी तक चीन, जर्मनी, फ्रांस, डेनमार्क भी इनके निर्माण में कूद चुके थे और तरह-तरह की गुड़िया लोगों के आकर्षण का केंद्र बन चुकी थीं। 1880 के दशक में फ्रांस में बनी बेब नामक गुड़िया अत्यंत लोकप्रिय हुई।

सन् 1900 के आते-आते अधिक यथार्थवादी गुड़िया बनाई जाने लगीं। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद गुड़िया निर्माताओं ने प्लास्टिक का उपयोग शुरू कर दिया।

इसके अलावा 1950 और 1960 में इनके निर्माण में फोम, रबड़ तथा विनाइल के उपयोग से सिर में विग लगाने की बजाय बालों का बिठाना संभव हो गया।

सबसे ज्यादा बिकने वाली गुड़िया

आज की तारीख में तो यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि गुड़िया का निर्माण अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक बहुत बड़ा व्यवसाय बन चुका है और इसके बिना बच्चों के मनोरंजन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। ‘बार्बी’ आज की तारीख में विश्वभर में सर्वाधिक बिकने वाली गुड़िया हैं।

पंजाब केसरी से साभार

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सऊदी शाही परिवार ने उड़ाए करोड़ों रूपये इन 6 चीज़ों पर, जानकर दंग रह जाएंगे आप

सउदी अरब मध्यपूर्व में स्थित एक सुन्नी मुस्लिम देश है। यह एक इस्लामी राजतंत्र है जिसकी स्थापना 1750 के आसपास सउद द्वारा की गई थी। ये तो हम सब जानते हैं कि ये एक अमीर देश है और यहां क लोग पैसा पानी की तरह बहाते हैं।

आज की पोस्ट में हम आपको बताने जा रहें हैं सऊदी शाही परिवार की 6 सबसे महंगी चीज़ों में बारे जिन पर इन्होनें करोड़ों रुपए उड़ा दिए, तो चलिए जानते हैं:-

फै़ल्कन पक्षियों के लिए फ़्लाइट सीट्स बुक

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फ़ैल्कन UAE का राष्ट्रीय पक्षी है और इसलिए इन्हें फ़्लाइट्स में ऑन-बोर्ड ले जाया जा सकता है। सऊदी के एक राजकुमार ने अपने 80 फै़ल्कन पक्षियों के लिए फ़्लाइट सीट्स बुक की थी।

इंसानों की तरह पक्षियों का भी पासपोर्ट बनता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक़ 2002-2013 के बीच UAE सरकार ने परिंदों को 28,000 पासपोर्ट इशू किए थे। सुनने में अजीब लगने वाला ये किस्सा मिडिल ईस्ट में बेहद आम है।

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218 करोड़ की ड्रेस

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हम आमतौर पर 20-25 हजार रुपये की सबसे महंगी पोशाक पहनते हैं, अगर कोई सेलिब्रिटी है तो वह लाखों की पोशाक पहनता है लेकिन जो ड्रेस राजा अब्दुल्ला की बेटी ने पहनी थी वह करीब 218 करोड़ रुपये की थी।उनकी शादी 2015 में हुई थी।

वह पोशाक पूरी तरह से सोने की बनी हुई थी। उस पोशाक को कुछ इस तरीके से बनया गया था जिससे वह ड्रेस पिरामिड सा दिखाई दे रही थी।

बाघ और शेर पालने का शौक़

 

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दुबई के राजकुमार हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतौम ने इंस्टाग्राम पर अपने पालतु शेर फ़्रॉस्टी के साथ कई तस्वीरें शेयर की हैं।

इंटरनेट पर वह अक्सर अपने पालतू जानवरों के साथ तस्वीरें और वीडियो शेयर करते रहते हैं। हालांकि एनिमल वेलफ़ेयर वालों के सालों तक दबाव बनाने के बाद, 2017 में गल्फ़ देशों ने जंगली और ख़तरनाक जानवरों का निजी स्वामित्व पर बैन लगा दिया था।

सोने की गाड़ियाँ

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लग्जरी कारों का शौक हर किसी को होता है। लेकिन क्या होगा अगर आपको सोने की गाड़ी मिल जाए? सऊदी अरबपति तुर्की बिन अब्दुल्ला के पास बेंटले, लेम्बोर्गिनी, रोल्स रॉय जैसी कई लग्जरी कारें हैं और ये सभी सोने से बनी हैं।

हीरों की अंगूठी नहीं, कार

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सऊदी अरब के राजकुमार अलवलीद बिन तलाल के पास कई लक्ज़री गाड़ियां हैं। राजकुमार तलाल के पास एक मर्सिडीज़ बेन्ज़ है जिसमें हीरे लगे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, राजकुमार की गाड़ी को छूने वाले से राजकुमार तलाल 1000 डॉलर चार्ज करते थे।

तोहफे के रूप में गोल्डन टॉयलेट

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बादशाह अबदुल्लाह ने अपनी बेटी को शादी के तोहफ़े में गोल्डन टॉयलेट दिया। 2011 में फ़ोर्ब्स ने अबदुल्लाह और उसके परिवार की कुल संपत्ति 21 बिलियन डॉलर बताई।

सोशल मीडिया पर चौंकाने वाला वीडियो वायरल!!

सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल होते रहते हैं। आमतौर पर बच्चों के जितने भी वीडियो वायरल होते हैं वो या तो डांस का वीडियो होता है या फिर कोई गाना गा रहा है या फिर कोई फनी वीडियो होता है लेकिन आज की हमारी इस पोस्ट में हम जिस वीडियो के बारे में बताने जा रहे हैं वो बेहद चौंकाने वाला है।

 

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दरअसल सोशल मीडिया पर एक छोटी सी बच्ची का यह वीडियो लोगों को काफी चौंका रहा है। वायरल हो रहे इस वीडियो में एक 6-7 साल की बच्ची 20 फीट से ज्यादा बड़े और भारी-भरकम अजगर के साथ खेलती हुई नज़र आ रही है।

इस वीडियो को ‘snake-world‘ नाम के एक यूजर ने इंस्टाग्राम पर शेयर किया। लोग इस विडियो को बहुत पसंद कर रहे है। इस चौंकाने वाले वीडियो को देखकर लोग अलग अलग प्रतिक्रियाऐं दे रहे हैं,

Shocking video viral on social media

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जानिए कौन है मिस यूनिवर्स हरनाज़ कौर संधू ?

21 सालों बाद मिस यूनिवर्स का खिताब जीतकर हरनाज़ कौर संधू ने भारत को पूरी दुनिया में गौरवान्वित किया है। आपको बता दें कि इजरायल में स्थित इलियट शहर में LIVA मिस डिवा यूनिवर्स 2021 का आयोजन किया गया था।

इस प्रतियोगिता में दुनिया भर से कुल 75 महिलाओं ने हिस्सा लिया था लेकिन भारत की हरनाज कौर संधू ने बाजी मार ली, तो चलिए आपको बताते हैं कि कौन है हरनाज संधू?

 

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कौन हैं हरनाज

हरनाज़ कौर संधू चंडीगढ़ की रहने वाली हैं और पेश से एक मॉडल हैं। उन्हें एक्टिंग, सिंगिंग, डांसिंग, योगा, स्विमिंग, घुड़सवारी और कुकिंग का शौक है। साल 2017 में वो मिस चंडीगढ़ बनी थीं।

इसके बाद साल 2019 में वो ‘फेमिना मिस इंडिया पंजाब’ Femina Miss India Punjab भी रह चुकी हैं। इतना ही नहीं उन्होंने पंजाबी फिल्मों “यारा दिया पू बरन” और “बाई जी कुट्टंगे” में भी अभिनय किया है।

हरनाज़ ने पराग्वे की नादिया फरेरा और दक्षिण अफ्रीका की लालेला मसवाने को हराकर ताज अपने नाम किया। इससे पहले सन 2000 में इंडिया से लारा दत्ता ने मिस यूनिवर्स जीता था और सन 1994 में सुष्मिता सेन ने जीता था।

इन सवालो का जवाब देकर मिस यूनिवर्स बनी हरनाज संधू

मैक्सिको की एंड्रिया मेजा ने हरनाज संधू को मिस यूनिवर्स का ताज पहनाया। एंड्रिया मेजा ने पिछले साल 2020 में मिस यूनिवर्स का खिताब अपने नाम किया था।

इजराइल के ऐलट में आयोजित हुए इस 70वें संस्करण समारोह के अंतिम दौर में हरनाज संधू से पूछा गया था कि आज युवा महिलाएं जो दबाव झेल रहीं है, उससे निपटने के लिए क्या सलाह देना चाहेंगी?

इस प्रतियोगिता में अंतिम सवाल-जवाब चरण में संधू से पूछा गया था कि वर्तमान समय में युवा महिलाएं जो दबाव महसूस कर रही हैं, उससे निपटने के लिए वह उन्हें क्या सलाह देंगी।

इस का जवाब देते हुए संधू ने कह था, वर्तमान समय में युवा जिस बड़े दबाव का सामना कर रहे हैं, वह है खुद पर विश्वास करना। यह जानना कि आप अद्वितीय हैं और यही आपको सुंदर बनाता है।

दूसरों के साथ खुद की तुलना करना बंद करें और दुनिया भर में हो रही महत्वपूर्ण चीजों के बारे में बात करें। यही आपको समझने की जरूरत है।

बाहर आएं और खुद के लिए बात करें क्योंकि आप ही अपनी जिंदगी के नेतृत्वकर्ता हैं, आप ही खुद की आवाज हैं। 

संधू ने कहा कि वह खुद पर भरोसा करती हैं और इसी वजह से वह इस निर्णायक मोड़ पर खड़ी हैं और उनके इस जवाब ने उन्हें इतिहास रचने का मौका दिया।

सर्दी में दूध के गुणों को दो गुना कर देती हैं ये चीज़े

अगर आपको बार-बार चाय और कॉफी पीने की आदत है तो इसे बदल दें। यह आदत आपको बेहद नुक्सान पहुंचाती है। सर्दी के मौसम में अक्सर ऐसा होता है कि लोग खुद को गर्म रखने के लिए चाय या कॉफी का सेवन करते हैं लेकिन कई बार ये मात्रा काफी ज्यादा हो जाती है।

एक्सपर्ट्स के अनुसार चाय और कॉफी से बेहतर है कि आप कुछ खास चीजों को मिलाकर दूध पिएं। इससे शरीर को गर्म रखने में मदद मिलेगी और ये सेहत के लिए फायदेमंद होगा। दिन में 2-3 बार एक एक कप दूध ये चीजें मिलाकर पिएं।

हल्दी

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हल्दी में एक खास तत्व ‘कर्कयुमिन‘ होता है। ये आपको कैंसर, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रैशर जैसी बीमारियों से बचाता है।

इसके अलावा हल्दी में एंटीबैक्टीरियल और एंटी इंफ्लामैंट्री गुण भी होते हैं। सुबह नाश्ते के समय और रात को सोने से पहले हल्दी वाला दूध पिएं।

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अदरक

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अदरक वाला दूध पीना भी आपको फायदा पहुंचाएगा। अदरक में एक खास तत्व ‘जिजेरॉल‘ होता है, जो आपको कई बीमारियों से बचाता है।

अदरक वाला दूध बनाने के लिए थोड़ा-सा अदरक कूट कर दूध में मिलाएं और उबाल आने तक दूध को पकाएं। इसके बाद छानकर पी लें। इसे रात में पिएं। इससे पेट साफ रहेगा और आपको जुकाम-खांसी की समस्या नहीं होगी।

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मेवों का पाऊडर

काजू, बादाम, पिस्ता, अखरोट जैसी चीजों को एक साथ पीस लें। इस पाऊडर को एक गिलास दूध में मिलाकर नियमित रूप से पिएं। मेवों के एंटीऑक्सीडेंट्स आपकी सेहत को फायदा पहुंचाएंगे।

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बीजों का पाऊडर

मेवों के पाऊडर की तरह कुछ स्वस्थ बीजों से भी आप पाऊडर तैयार कर सकते हैं। कद्दू के बीज, सूरजमुखी के बीज, अलसी के बीज, चिया के बीज में एंटीऑक्सीडेंट्स की अच्छी मात्रा होती है। इन सभी को बराबर मात्रा में पीस लें और दूध में मिलाकर पिएं।

पंजाब केसरी से साभार

रेत के सहारे जिन्दा है ये महिला!!

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कभी-कभी कुछ ऐसे मामले सुनाई देते है जो सुनने में तो अजीब-सा लगता है लेकिन हकीकत में सही है। कुछ इसी तरह का एक वाकया उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के कटारी गांव में देखने-सुनने के मिलता है जहां एक बुजुर्ग महिला यदि रेत न खाएं तो उनकी तबीयत खराब हो जाएगी।

आज स्थिति यह है कि दिन-प्रतिदिन इनके रेत खाने की रफ्तार और मात्रा बढ़ती जा रही है। 75 वर्षीय कुसुमावती के लिए रेत खाना उनकी दिनचर्या बन चुकी है। सुबह चाहे नाश्ता भले न करती हों, लेकिन समय से रेत जरूर खाती हैं।

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इस अजीबो-गरीब आदत की वजह से गांव में चर्चा का विषय बन चुकी कुसुमावती बताती हैं कि प्रतिदिन एक पाव से आधा किलो तक वह रेत खाती हैं।

आश्चर्य की बात है कि उनकी यह आदत करीब 60 साल से है लेकिन वह पूरी तरह से स्वस्थ और निरोग हैं। सोशल मीडिया पर उनकी कई तस्वीरें वायरल हो रही हैं।

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वैद्य के कहने पर शुरू किया था रेत खाना

कुसुमावती देवी बताती हैं कि जब वह 15 साल की थीं, तब पेट दर्द होने पर एक वैद्य के कहने पर इन्होंने दूध में रेत मिला कर पीती थी। इसके बाद धीरे-धीरे उन्होंने रेत खानी शुरू कर दी। अब तो यह उनकी दिनचर्या बन चुकी है।

सुबह चाहे नाश्ता भले न करती हों लेकिन रेत जरूर खाती हैं और वह भी गंगा की रेत जिसके लिए इनके नाती-पोते बाकायदा इंतजाम करते हैं। वह रेत को खाने से पहले साफ पानी से धोती हैं और सुखाने के लिए छोड़ देती हैं।

रेत न खाएं तो तबीयत हो जाती है खराब

कुसुमावती पोल्ट्री फार्म चलाती हैं और खेत के एक छोटे से हिस्से में घर बनाकर रहती हैं। उनके 2 बेटे हैं और इन बेटों के 3 बच्चे भी हैं।

एक भरा-पूरा परिवार है लेकिन अपनी जिद की वजह से वह एक अलग घर में रहती हैं। गांव के लोगों के अनुसार उन्हें ध्यान नहीं है कि यह कब से कुसुमावती रेत खा रही हैं लेकिन पिछले 40-45 वर्षों से दिन में 3 समय उन्हें रेत खाते देखा गया है।

कुसुमावती का कहना है कि यदि वह रेत न खाएं तो उनकी तबीयत खराब हो जाएगी। स्थिति यह है कि दिन-प्रतिदिन इनके बालू खाने की रफ्तार और मात्रा बढ़ती जा रही है लेकिन हैरान करने वाली बात है।

वह आज भी बीमारियों से अछूती हैं लेकिन डॉक्टरों को इस पर आश्चर्य है और वे उन्हें रेत न खाने की सलाह दे चुके हैं। डॉक्टरों के अनुसार यह एक गलत धारणा है कि रेत से पेट दर्द या पेट के अन्य रोग दूर हो जाते हैं।

आयुर्वेद में भी ऐसा कोई इलाज नहीं है। रेत पाचन क्रिया को प्रभावित करती है।

पंजाब केसरी से साभार

जानिए फेफड़ों को स्वस्थ रखने के उपाय!!

जब हम डॉक्टर के पास जाते हैं, तो वह सबसे पहले स्टेथोस्कोप से हमारी धड़कन सुनता है जिसे सुनने के लिए डॉक्टर हमसे लम्बी गहरी सांस लेने को कहता है क्योंकि ये सांसें हमारी सेहत के बारे में बहुत कुछ बताती हैं। आज इस पोस्ट में हम जानेगें फेफड़ों को स्वस्थ रखने के उपाय, तो चलिए जानते हैं :-

चलती रहती हैं सांसें

श्वास खुद-ब-खुद चलती रहती हैं। हम सांस लेने के तरीके के बारे में नहीं सोचते। हम एक दिन में लगभग 30 हजार बार सांस लेते हैं। सांस लेने और छोड़ने का काम करते हैं हमारे फेफड़े यानी लंग्स।

हमारे शरीर में दो फेफड़े होते हैं जो हमारे सीने में सीधी तरफ राइट रिब केज के पीछे और दूसरी तरफ हमारे दिल के पीछे स्थित होते हैं। फेफड़ों का यह जोड़ा हमारे जीवन को चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

फेफड़ों का मुख्य काम वातावरण से प्राणवायु लेकर उसे रक्त परिसंचरण में प्रवाहित करना और रक्त से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर उसे वातावरण में छोड़ना है ताकि हमारे सभी अंगों को जीवित रहने के लिए महत्वपूर्ण ईंधन प्राप्त होता रहे।

हृदयघात से बचाव

फेफड़े रक्त के थक्कों और वायु के बुलबुले के गठन को छान कर वायु के प्रवाह को रोकते हैं, जो हृदय के लिए घातक हो सकता है।

रक्त का स्तर

फेफड़े हमारे शरीर में रक्त के स्तर को बनाए रखने में दिल के साथ मिल कर काम करते हैं। इसी कारण रक्त स्तर संतुलित रहता है।

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फेफड़ों को अधिक देखभाल की जरूरत

हमारी दुनिया प्रदूषण, कार्बन उत्सर्जन, कम होते हरे आवरण, जलावायु परिवर्तन और कई अन्य गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों से जूझ रही है।

इन स्थितियों को देखते हुए फेफड़ों को सांस लेने की प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है। ऐसे में फेफड़ों का अधिक ख्याल रखने की जरूरत होती है।

विषाक्त पदार्थों से बचें

हमें इंडोर और आऊटडोर विषाक्त पदार्थों के सम्पर्क में आने से बचना चाहिए। वायु प्रदूषण हमारे लिए घातक है। वाहनों, कारखानों और विमानों के उत्सर्जन के कारण हवा में बढ़ता प्रदूषकों का स्तर हवा में मौजूद ऑक्सीजन की मात्रा को कम कर रहा है।

क्या उपाय अपनाएं

एयर प्यूरीफायर का प्रयोग

हमारा वातावरण बहुत से अदृश्य धूल कणों से भरा है जो एलर्जी’ और सांस की बीमारियों के लिए जिम्मेदार हैं। एयर ह्यूमिडिफायर, एयर प्यूरीफायर आदि की मदद से अपने आस-पास के वातावरण को शुद्ध रखें। घर में भी प्रदूषण फैलाने वाली कई चीजें हैं इसलिए घर में हवा की निकासी का पूरा ध्यान रखें।

संक्रमण को दूर रखें

सामान्य संक्रमण से बचने के लिए स्वच्छता संबंधी आदतों का पालन करना अच्छा होता है। इनमें हाथ धोना, अपने दांतों को नियमित रूप से दिन में दो बार ब्रश करने, रोगों से बचने के लिए टीके लगवाने, उन लोगों से बचने जो कुछ समय से सर्दी और फ्लू से पीड़ित हैं आदि आदतें शामिल हैं।

नियमित व्यायाम करें

कोई भी एरोबिक या कार्डियोवैस्कुलर व्यायाम रोज करें ताकि हृदय और फेफड़े मजबूत रहें। व्यायाम से शरीर की ऑक्सीजन उपयोग करने की क्षमता में सुधार होता है और फेफड़े बेहतर तरीके से काम करते हैं।

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पौष्टिक भोजन करें

एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर खाद्य पदार्थ फेफड़ों के लिए फायदेमंद हैं। भोजन में अदरक, अनार, हल्दी, गाजर आदि का सेवन करें।

पंजाब केसरी से साभार

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इन 20 अजीब टैटूज को देखकर आप ज़रूर कहेंगे “हद है यार”

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आजकल टैटू बनवाना एक फैशन बन गया है। कुछ लोग अपने प्यार को दर्शाने के लिए उनके नाम या तस्वीर के टैटू बनवाते हैं तो कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो बहुत ही अजीबोगरीब टैटूज बनवा लेते हैं।

जिन्हें देखकर सोचने पर मजबूर होना पड़ता है कि आखिर इन्होंने ये टैटू बनवाया ही क्यों? आज की पसत में हम आपको कुछ ऐसे ही अजीब टैटूज दिखने जा रहे हैं तो चलिए शुरू करते हैं :

1) भाई ये असली है, या नकली

2) लगता है इनकी काफी अच्छी दोस्ती होगी !

3) ये बेहतर आईडिया है

4) लगता है ये व्यक्ति हेलो किटी का टैटू बनवा कर दुखी है।

5) इस व्यक्ति ने एक ही टैटू पूरी बॉडी पर बनवा दिया, हद है।

6) शायद यह आदमी यह दिखाना चाह रहा है कि वह चारों ओर देख सकता है।

7) लगता है इसे दर्द नहीं होता।

8) इस व्यक्ति ने तो पूरी कॉमिक स्ट्रिप का टैटू ही बनवा दिया!

9) इस टैटू को देखकर लगता है जैसे ये शेर अभी बीमार है।

10) इन्होनें तो पार्लर जाने का झंझट ही ख़त्म कर दिया।

11) इस शख्स ने इन अजीबोगरीब टैटू डिजाइनों से अपने चेहरे को ही भर दिया है।

12) भाई एक बार स्पेलिंग तो देख लेते!

13) गर्दन पर टैटू करवाना काफी रिस्की हो सकता है

14) इस प्रकार के टैटू कुछ समय के बाद उबाऊ लगने लगते हैं

15) इन्होनें तो अपनी आँख को भी नहीं छोड़ा!

16) ड्रैगन लेडी

17) अगर आपके पास एक अच्छा शरीर है तो उसे इस तरह टैटू के पीछे क्यों छिपाएं।

18) बाइसेप्स को बाइसेप्स ही रहने दे डी वी डी न बनाएं

19) बिल्कुल नॉलेज अच्छी है लेकिन इसका उपयोग अच्छे टैटू चुनने के लिए किया जाना चाहिए।

20) पीठ पीछे बात करने वाले सावधान

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