बॉलीवुड के इन सितारों ने सिनेमा के साथ राजनीति में भी गाड़े झंडे

लोकसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान हो चुका है। चुनाव की तिथियों की घोषणा के साथ ही राजनैतिक दल प्रत्याशियों की सूची को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं। बॉलीवुड के स्टार्स भी राजनीति में हाथ अज़मा रहें हैं। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, जब कोई सिनेमा जगत का शख्स राजनीति में उतरा हो, बल्कि बॉलीवुड के कई ऐसे स्टार्स हैं, जो फिल्मी जगत में अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाने के बाद राजनीति में भी चमक रहे हैं। आइए जानते हैं सिनेमा जगत की किन- किन हस्तियों ने सियासत में अपना नाम कमाया है।

राज बब्बर

अभिनेता राज बब्बर सिनेमा के साथ- साथ राजनीति के लिए भी जाना पहचाना नाम हैं, वह अक्सर अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं। उन्होंने साल 1989 में राजनीति में कदम रखा था और जनता दल में शामिल हुए थे। फिर बाद में वह समाजवादी पार्टी में शामिल हुए और तीन बार सांसद चुने गए।

साल 1994 से 1999 तक वह राज्यसभा के सांसद बने। साल 2008 में राज बब्बर कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए और साल 2009 में वह चौथी बार संसद चुने गए। फिलहाल अब वह उत्तर प्रदेश की कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हैं।

जया बच्चन

बॉलीवुड स्टार अमिताभ बच्चन की पत्नी जया बच्चन राजनीति के क्षेत्र में काफी सक्रिय रहती हैं। वह साल 2004 में समाजवादी पार्टी से सांसद चुनी गई थीं और उन्होंने साल 2006 तक राज्यसभा में उत्तर प्रदेश को रिप्रेजेंट किया।

इसके बाद जून साल 2006 से लेकर जुलाई 2010 तक उनका दूसरा कार्यकाल रहा। इसके बाद वह साल 2012 में फिर से चुनी गईं और साल 2018 में समाजवादी पार्टी की तरफ से उनका राज्यसभा का चौथा कार्यकाल शुरू हुआ, जो अभी जारी है। उनको बेस्ट वूमन ऑफ पार्लियामेंट का अवॉर्ड भी मिल चुका है।

शत्रुघ्न सिन्हा

बॉलीवुड के शॉटगन यानी शत्रुघ्न सिन्हा “भारतीय जनता पार्टी ” का जाना माना नाम हैं। वह अक्सर अपनी ही पार्टी के खिलाफ बयानबाज़ी करने के चलते चर्चा में रहते हैं। मई 2006 में शत्रुघ्न सिन्हा केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। साल 2009 में उन्होंने बिहार के पटना साहिब से लोकसभा चुनाव लड़ा और उन्होंने एक्टर शेखर सुमन को मात दी। साल 2014 में भी उन्होंने इस सीट से जीत हासिल की। उन्हें 13वीं लोकसभा में वाजपेयी की कैबिनेट में मंत्री बनाया गया।

किरण खेर

अभिनेत्री किरण खेर ने जितनी पहचान बॉलीवुड में अपनी एक्टिंग के दम पर बनाई, उतनी ही पहचान वह राजनेता के तौर पर भी बना चुकी हैं। किरण खेर साल 2009 में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हुईं थीं। उन्होंने साल 2014 में चंड़ीगढ़ से लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। उनकी गिनती उन राजनेताओं में होती है, जो अपनी बात खुलकर कहते हैं। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बहुत बड़ी प्रशंसक भी हैं।

जया प्रदा

एक्ट्रेस जया प्रदा ने साल 1994 में तेलुगु देशम पार्टी जॉइन की थी। साल 1996 में उन्हें आंध्र प्रदेश से राज्यसभा के लिए नामांकित किया गया, लेकिन उनके और पार्टी सुप्रीमो चंद्रबाबू नायडू के बीच विवाद पैदा हुआ, जिसके चलते उन्होंने पार्टी छोड़ दी और उन्होंने समाजवादी पार्टी को ज्वाइन किया। साल 2004 में वह उत्तर प्रदेश के रामपुर से लोकसभा  चुनाव के मैदान में उतरीं और उन्होंने 85000 वोटों के अंतर से जीत हासिल की।

विनोद खन्ना

बॉलीवुड अभिनेता विनोद खन्ना, साल 1997 में बीजेपी के टिकट पर पंजाब के गुरदासपुर से लोकसभा पहुंचे थे। वहीं साल 2002 और 2014 में भी वह इसी सीट से सांसद बने थे। लंबे समय से कैंसर से पीड़ित रहने की वजह से 27 अप्रैल 2017 को उनका निधन हो गया था।

स्मृति ईरानी

अभिनेत्री स्मृति ईरानी ने साल 2003 में भारतीय जनता पार्टी को ज्वाइन किया था। 2004 में वह महाराष्ट्र यूथ विंग की उपाध्यक्ष चुनी गईं। 2014 में हुए लोकसभा चुनाव के बाद वह “कैबिनेट मिनिस्टकर ” बनी। स्मृति ईरानी राज्यसभा की सदस्य भी हैं।

हेमा मालिनी

बॉलीवुड की ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी ने साल 2014 में यूपी की मथुरा सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा और लोकसभा पहुंची। हेमा मालिनी ने साल 1999 में विनोद खन्ना के लिए प्रचार करते हुए बीजेपी ज्वाइन की थी।

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तो आप इस तरह से पकड़ सकते हैं झूठे इंसानों को

कई बार हमारे सामने अगर कोई इंसान झूठ बोलता है, तो हमसे झूठे इंसानों को पकड़ पाना मुश्किल होता है। कई लोग तो ऐसे होते हैं कि आँखो से आँखें मिलाकर झूठ बोल जाते हैं। लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं, जो झूठ बोलते समय कांपते हैं या हिचकिचाते हैं। हाँ मगर किसी के झूठ को पहचानना आसान नहीं, तो मुश्किल भी नहीं है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं, कुछ आसान से टिप्स, जिससे आप पता लगा सकते हैं कि आपके सामने खड़ा इंसान सच बोल रहा है या झूठ। आइए जानते हैं वो कुछ टिप्स-

आवाज़ ही बहुत कुछ कह देती है

कहते हैं कि मोबाइल पर झूठ बोलना ज्यादा आसान होता है, क्योंकि उस वक्त इंसान सामने नहीं होता, इसलिए झूठ बोलने वाले पर तनाव भी काफी कम रहता है। लेकिन, आप मोबाइल पर भी सामने वाले की आवाज़ सुनकर बता सकते हैं कि वह झूठ बोल रहा है या सच।

आप इस बात का ध्यान दें कि आज उनकी आवाज़ रोज की अपेक्षा कुछ अलग तो नहीं है या फिर वह बात करते-करते बार-बार इन शब्दों को तो नहीं यूज़ कर रहा है, जैसे ‘ईमानदारी से कहूं तो’ और ‘मेरे कहने का मतलब है ‘ आदि कुछ। तो आप संभल जाइए, शायद जो आपको बताया जा रहा है वह झूठ भी हो सकता है।

बॉडी लैंग्वेज

शब्दों से ज्यादा सामने वाले की शारीरिक हाव-भाव पर ध्यान दीजिए। अक्सर झूठ बोलते समय इंसान हाथों को छिपाकर रखता है, हाथ बांधना, पीछे रखना, जेब में डालना या हाथों पर ही बैठ जाना, आदि कुछ। झूठ बोल रहा इंसान काफी तनाव में होता है, मानसिक तनाव शारीरिक तनाव में भी झलकता है।

कंधे उचकाना, अंगुलियां फंसाना, पैर पर पैर रखना, या हाथ पर हाथ रखना, ये कुछ ऐसे शारीरिक तनाव के लक्षण हैं, जो इशारा कर रहे हैं कि उस इंसान से मुंह से जो निकल रहा है, वह सच नहीं है। वह भी तब, जब सामान्य परिस्थितियों में वह अपनी बात कहते समय हाथों का बहुत ज्यादा यूज़ करता हो।

अक्सर झूठ बोलते समय इंसान पैर बहुत हिलाता है, कोई सवाल पूछे जाने पर होठों पर जीभ फिराना या होठ काटना भी झूठ बोलने की निशानी हैं।

बदले-बदले से नज़र आते हैं

अगर आपको शक होता है कि शायद सामने वाला इंसान झूठ बोल रहा है, तो आप उसके बात करने के लहजे और स्पीड पर ध्यान दीजिए। अक्सर झूठ बोलते समय लोग सामान्य से ऊंची आवाज़ में और जल्दी-जल्दी बात करने लगते हैं और झूठ बोलते समय हड़बड़ाने भी लगते हैं।

सांसें भी पोल खोलती हैं

अकसर जब भी सामने वाला इंसान झूठ बोलता है, तो उस समय उसकी सांस कुछ तेज़ चलने लगती है और आवाज़ बहुत उथली हो जाती है, क्योंकि झूठ बोलना उसको नर्वस कर देता है और नर्वस इंसान का ब्लड फ्लो और हार्ट रेट बदल जाता है।

उल्टा चोर कोतवाल को डांटे

कई झूठे इंसान खुद को फंसता देख वह बहुत ज्यादा डिफेंसिव हो जाते हैं, क्यों जाननी है यह बात? यह बात अब इतनी महत्वपूर्ण नहीं है। बार- बार यही बात क्यों पूछ रहे हो, तुम तो इस बात के पीछे ही पड़ गए। ऐसे ही जवाबों के जरिए झूठ बोल रहा इंसान आगे कोई जवाब देने से इंकार कर देता है और फोर्स किए जाने पर उल्टा आपको ही झूठा साबित करने लगता है।

पसीना क्यों आ रहा है

झूठ बोलना अच्छे-अच्छे झूठे इंसानों का पसीना छुड़ा देता है। अगर सामने वाले इंसान को बहुत पसीना आ रहा है, तो समझ लीजिए कि उस पर ये शब्दों का तनाव हावी है। पसीना आना तनाव की बहुत पक्की निशानी है।

चलो कुछ और बात करते हैं

झूठ बोल रहा इंसान ज्यादा देर तक उस टॉपिक पर बात नहीं करना चाहता, इसलिए वह हर संभव कोशिश करता है कि टॉपिक चेंज कर दिया जाए।

नज़रें चुराना अच्छी बात नहीं

अगर सामने वाला इंसान बोलते वक्त आपसे आई कॉन्टैक्ट नहीं कर पा रहा, तो काफी संभावना है कि वह आपसे झूठ बोल रहा है और अगर आपकी लाख कोशिश के बावज़ूद उसने नज़रें मिला भी लीं, तो वह बिना पलकें झपकाए आपको घूरने के अंदाज़ मे देखेगा, या फिर बहुत ज्यादा पलकें झपकाएगा।

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Omg!! दुनिया की सबसे महंगी चॉकलेट, कीमत 6 लाख रुपये !!

चॉकलेट का नाम सुनते ही बड़े हों या फिर बच्चे सभी के मुंह में पानी आ जाता है। बाज़ारों में चॉकलेट की बहुत वेराइटीज़ हैं। आप लोगों ने तक़रीबन हर एक वेराइटीज़ की चॉकलेट खाई होगी। लेकिन क्या आप ने दुनिया की सबसे महंगी चॉकलेट के बारे में सुना है, जिसकी कीमत तक़रीबन 6 लाख से भी ज्यादा है। अगर नहीं, तो आज हम आपको दुनिया की सबसे महंगी चॉकलेट के बारे में बताएंगें।

अगर आपके पास छह लाख रुपये हैं, तो आप दुनिया की इस सबसे महंगी चॉकलेट को खा सकते हैं। यह चॉकलेट पुर्तगाल में चॉकलेट बनाने वाली एक कंपनी ने पेश की है। इस महंगी चॉकलेट का नाम ग्लोरियस है। इसकी कीमत 7 हजार 728 यूरो यानी करीब 6 लाख 20 हजार रुपये है।

इस चॉकलेट की खासियत

यह चॉकलेट 1 हजार बॉनबॉन्स के लिमिटेड एडिशन का हिस्सा है। यह एक्सक्लुसिव 23 कैरट गोल्ड प्लेटेड चॉकलेट है। सिर्फ यह चॉकलेट ही नहीं, बल्कि इसकी पैकेजिंग भी चर्चा का विषय है। चॉकलेट के पैकेट पर काले रंग का वुडन बेस है, जिस पर सोने से सीरियल नंबर छपा हुआ है और क्रिस्टल का क्लोश है। साथ ही पैकेट पर हजारों स्वरॉस्की क्रिस्टल और पर्ल्स लगे हुए हैं। इसके अलावा पैकेट पर सोने का रिबन हैंडल भी लगा है।

इन चीजों से बनी है चॉकलेट

इसके अंदर केसर, वाइट ट्रूफल, खासतौर पर मैडगैस्कर से मंगवाई गई वनीला और गोल्ड फ्लेक्स यानी सोने के लच्छे भरे हुए हैं। दुनिया में सबसे महंगी कही जाने वाली इस चॉकलेट को हीरे का आकार दिया गया है।

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सुपरहिट चुनावी नारे, जिन्होंने बदल दी सरकारें

चुनाव लोकतंत्र की सबसे प्रमुख व्यवस्था है। चुनाव के जरिये जनता अपने प्रतिनिधि चुनते हैं जो बदले में उनकी बात देश की प्रधान इकाई यानि ससंद तक पहुंचाते हैं। ससंद तक पहुँचने के लिए चुनावी उम्मीदवार हर संभव तरीके अपनाते हैं।

हर चुनाव से पहले सभी राजनीतिक दल चुनावी घोषणापत्र बनाते हैं जिसमें वे जनता के सामने अपनी कार्ययोजना को सार्वजनिक करते हैं। साथ ही वर्तमान व्यवस्था के मद्देनजर कुछ चुनावी नारों का सृजन होता है। ऐसे नारे जो एक तरफ तो आकर्षक हों दूसरे उनमें जनता से संबन्धित समस्याओं को लोक लुभावन तरीके से पेश करने का प्रयास किया जाता है ताकि ऐसा लगे कि आम जन की ही आवाज उन नारों से उठती नज़र आए।

देश के पिछले आम चुनाव में जहां भाजपा की और से ‘अब की बार फिर मोदी सरकार’ का नारा बुलंद किया था जबकि कांग्रेस और समर्थक दल ‘चौकीदार चोर है’ के नारे के साथ मैदान उतरे। हालांकि कांग्रेस का नारा फुस्स साबित हुआ और बीजेपी ने पूर्ण बहुमत से सरकार बनाई।

इस लेख में हम कुछ ऐसे ही चुनावी नारों की लिस्ट लेकर आए हैं जिन्होंने सरकारों को बनाने और बिगाड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

1967 के चुनाव में कांग्रेस का चुनाव चिन्ह बैलों की जोड़ी बनाया गया। कांग्रेस का नारा था:

“भूल ना जाना भारत वालो किसी की होड़ा होड़ी में
देखभाल कर मोहर लगाना दो बैलों की जोड़ी पै”

इसके जबाव में जनसंघ (आज की बीजेपी) ने नारा दिया,

देखो दीए का खेल, जली झोंपड़ी, भागे बैल।

गौरतलब है कि तब जनसंघ का चुनाव चिन्ह दीयाबाती था।

इस पर कांग्रेस ने नए नारे के साथ जवाबी हमला बोला। नारा था:

इस दिए में तेल नहीं, सरकार बनाना खेल नहीं।

लेकिन चुनावी नारों की असली धमाल इंदिरा गांधी के शासनकाल में शुरू हुई। 1971 में कांग्रेस ने नारा दिया:

गरीबी हटाओ, इंदिरा लाओ।

अगले चुनाव में यह नारा विपक्ष ने यूं बदल दिया:

इंदिरा हटाओ, देश बचाओ

1975 की इमरजेंसी ने तो कई चुनावी नारों को जन्म दिया। उस दौर में एक नारा बड़ा मशहूर हुआ था:

जमीन गई चकबंदी में, मर्द गए नसबंदी में, नसबंदी के तीन दलाल- इंदिरा, संजय, बंसीलाल।

कांग्रेस के खिलाफ उस चुनाव में नारों की बाढ़ आ गई थी।

संजय की मम्मी, बड़ी निक्कमी, बेटा कार बनाता है, मम्मी बेकार बनाती है।

इन्हीं नारों की बदौलत विपक्ष ने आपातकाल की टीस को खूब कुरेदा और नतीज़ा यह हुआ कि इंदिरा गांधी और कांग्रेस बुरी तरह चुनाव हार गए।

बाद में 1980 में आते-आते जनसंघ, बी.जे.पी. में बदल गया और दीयाबाती कमल के फूल में।

उधर कांग्रेस का चुनाव चिन्ह गाय बछड़ा भी हाथ बन गया। लेकिन उस चुनाव का सबसे दिलचस्प नारा वामपंथियों ने दिया था:

चलेगा मज़दूर उड़ेगी धूल, न बचेगा हाथ न रहेगा फूल।

लेकिन अंतत श्रीकांत वर्मा के लिखे: इस नारे ने बाज़ी मारी:

न जात पर न पात पर, इंदिरा जी की बात पर, मोहर लगेगी हाथ पर’

अगला चुनाव आते-आते इंदिरा की हत्या हो चुकी थी। कांग्रेस के इस नारे ने पार्टी को अकूत बहुमत दिलाया।

‘जब तक सूरज चांद रहेगा इंदिरा तेरा नाम रहेगा’

नारों की सियासत में क्षेत्रीय दल भी पीछे नहीं हैं। किसी जमाने में बिहार में ऊंची जातियों के खिलाफ लालू प्रसाद यादव का नारा:

भूरा बाल साफ करो, जब तक रहेगा समोसे में आलू, तब रहेगा बिहार में लालू।

उधर सपा के खिलाफ बसपा ने नारा दिया था,

चढ़ गुंडों की छाती पर, मुहर लगेगी हाथी पर।

बसपा ने ही एक समय यूपी में नारा दिया था,

तिलक, तराजू और तलवार, इनको मारो जूते चार।

जब सपा और बसपा ने मिलकर बीजेपी को हराया था, उस चुनाव में नारा था,

मिले मुलायम और कांशीराम, हवा में उड़ेगा जय श्री राम।

पंजाब में पिछले चुनाव का बड़ा नारा था- कैप्टन ने सौं चक्की, हर घर इक नौकरी पक्की।

एम.पी. में कांग्रेस का नारा था-

कर्जा माफ, बिजली हाफ, करो कांग्रेस साफ।

जब चला वी.पी. का चक्र

1989 में चुनाव में कांग्रेस सत्ताच्युत हुई और वी.पी. सिंह के नेतृत्व में सरकार बनी। उस दौर का चर्चित नारा था:

राजा नहीं फकीर है, देश की तकदीर है।

यह दीगर बात है कि 1990 में मंडल आयोग आंदोलन ने वी पी.सिंह की तकदीर को बतौर पी.एम. ग्रहण लगा दिया। उनके लिए तब नारा लगा था-::

गोली मारो मंडल को, इस राजा को कमंडल दो।

उसके बाद के चुनाव का सबसे चर्चित नारा बी.जे.पी. ने दिया था- सौगंध राम की खाते हैं, मंदिर वहीं बनाएंगे। फिर बी.जे.पी. का नया नारा आया

अटल, अडवानी कमल निशान, मांग रहा हिंदुस्तान।

उसी चुनाव में यह भी आया:

सबको देखा बारी-बारी, अबकी बारी, अटल बिहारी।

फिर उसके बाद के चुनाव में कोई ऐसा नारा नहीं आया, जो हर किसी की जुबां पर रहा हो।

डिप्रेशन क्या है? इसके लक्षण और इससे कैसे बचा जा सकता है?

आइए जानते हैं क्या है डिप्रेशन यानि अवसाद – आजकल लोग ज़िंदगी की भाग दौड़ में इतना व्यस्त हो जाते हैं कि कुछ समय बाद ही वह डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं. डिप्रेशन एक मानसिक बीमारी है. कुछ लोगों पर थोड़े समय के लिए रहता है. लेकिन कई लोगों में डिप्रेशन खतरनाक रूप ले लेता है.

क्या है डिप्रेशन?

डिप्रेशन एक जटिल बीमारी है जो जैविक यानि वंशानुगत, सामाजिक, आर्थिक आदि कई कारकों के कारण होती है।

अवसाद की स्थिति में व्यक्ति का जिंदगी से जैसे मन भर जाता है. जिन चीज़ों को करने में पहले मजा आता था वह सब कुछ नीरस और बेकार लगने लगता है. काम पर ध्यान केंद्रित करने में परेशानी आती है जिससे  इंसान की रोजमर्रा ज़िंदगी और उसके कामकाज में बुरा प्रभाव पड़ता है.

अवसाद की स्थिति में अकेले रहने का मन करता है. कई बार थोड़ी सा भी इमोशनल हो जाने पर रोने का मन करता है. स्थिति अधिक बिगड़ जाने पर आत्महत्या करने का ख्याल मन में आने लगता है.

क्या कहते हैं आंकड़े?

WHO के अनुसार, वर्तमान में दुनिया भर में 26 करोड़ 20 लाख लोग डिप्रेशन का शिकार हैं.  हर साल लगभग 8  लाख लोग डिप्रेशन के कारण मर जाते हैं. दुनिया भर में, 15 से 29 साल के लोगों में, आत्महत्या मृत्यु का दूसरा प्रमुख कारण है। इन आत्महत्या के केसों के पीछे डिप्रेशन मुख्य वजह है.

2012 में डब्ल्यू.एच.ओ. ने मैंटल हैल्थस्टेटस ऑफअडोलसैंट्स इन साउथ-ईस्ट एशिया: एवीडैस फॉर एक्शन रिपोर्ट जारी की जिसमें कहा गया था कि भारत में चार में से एक किशोर अवसाद ग्रस्त था। डब्ल्यू.एच.ओ. की 2017 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 5 करोड़ 70 लाख लोग डिप्रेशन से पीड़ित हैं।

डिप्रेशन का कारण

बचपन में होने वाले शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न जैसे यौन शोषण या दुर्व्यवहार, बार-बार एक स्थान से दूसरे स्थान में तबादला, नकारात्मक घटनाएँ जैसे किसी दिल के करीब संबंधी की मृत्यु, शैक्षिक असफलता, घरेलू या नज़दीकी रिश्तों में कड़वाहट, स्कूल और परिवार में उत्पीड़न और तनाव अवसाद की मुख्य वजहें हैं।

सभी माता-पिता और अभिभावक अपने बच्चों के लिए सर्वश्रेष्ठ चाहते हैं.  लेकिन बचपन में बहुत अधिक टोका-टोकी, आलोचनात्मक और निंदा करने वाले माता-पिता या शिक्षण शैली बच्चे में अपने बारे में नकारात्मक भावनाओं को जन्म दे सकती है। इससे अवसाद हो सकता है।

डिप्रेशन की एक अन्य प्रमुख वजह नशे की लत है. एक बार नशे का आदि हो जाने पर इससे छुटकारा पाना मुश्किल हो जाता है. इससे व्यक्ति आर्थिक, शारीरिक और मानसिक परेशानियों से घिर जाता है. थोड़े ही समय में यह तनाव लगातार रहने वाले अवसाद यानि डिप्रेशन में बदल जाता है.

डिप्रेशन के लक्षण

डिप्रेशन किशोरों और युवा वयस्कों में अधिक देखने को मिलता है. इसका कारण है इस अवस्था में शारीरिक और मानसिक बदलाव ज्यादा होता है. साथ ही युवाओं का दुनिया को देखने-समझने का नजरिया तेजी से बदलता है.

बच्चों, किशोरों और युवा वयस्कों में अवसाद को पहचानना मुश्किल हो सकता है.  लेकिन यहां कुछ संकेत दिए गए हैं जिन्हें आप अपने बच्चे और किशोर या युवा में देख कर समय रहते इससे बचाव कर सकते हैं. इन संकेतों में प्रमुख हैं:

  • मित्रों और घर के सदस्यों से दूरी या बातचीत में कमी
  • उदासीनता, लापरवाही, गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार, जिम्मेदारी की कमी
  • मनोरंजन के क्रियाकलापों में कम रुचि
  • स्कूल में प्रदर्शन में गिरावट
  • अत्यधिक भोजन करना या भूख का बिल्कुल न लगना
  • अचानक वजन में बदल।
  • व्यवहार में बदलाव
  • असामान्य चिड़चिड़ापन और गुस्सा
  • दु:ख, चिड़चिड़ापन, चीखना, बिना किसी कारण – के रोना या थोड़ी-सी आलोचना पर तीव्र प्रतिक्रिया करना
  • शारीरिक दर्द की अस्पष्ट शिकायतें, सिरदर्द, पेट दर्द, पीठ दर्द,
  • ध्यान केन्द्रित करने और निर्णय लेने में कठिनाई
  • मृत्यु के प्रति अति लगाव- आत्महत्या के बारे में बात करना या मजाक करना
  • शराब, ड्रग्स का इस्तेमाल
  • अधिक सोना या कम सोना

डिप्रेशन का उपचार

याद रखें कि अवसाद एक ला-इलाज बीमारी नहीं है। मन और शरीर की उचित देखभाल और एक सकारात्मक सामाजिक वातावरण में आसानी से इसको ठीक किया जा सकता है.

सामान्यत: डिप्रेशन का उपचार एक बहुत ही आसान और बहुत कम खर्चीली प्रक्रिया है जिसमें एक अनुभवी न्यूरोलॉजिस्ट या साइकोलॉजिस्ट व्यक्ति से चंद मिनट बात करके व्यक्ति और उसके डिप्रेशन से जुड़ी जानकारी जुटाता है और कुछ दवाईयां और कुछ व्यायाम सुझा कर व्यक्ति का उपचार करता है. डिप्रेशन की गहनता/मात्रा के हिसाब से व्यक्ति कुछ दिनों या हफ़्तों में सामान्य अनुभव करने लगता है और उसकी दैनिक प्रक्रिया सामान्य हो जाती है.

योग, ध्यान और श्वास तकनीक से उपचार

अवसाद, मस्तिष्क और शरीर में एक जैव रासायनिक प्रक्रिया भी है। योग, ध्यान और श्वास की क्रियाएं जैसे सुदर्शन क्रिया को आर्ट ऑफ लिविंग ने सिखाया है। यह क्रियाएं न्यूरोकैमिकल्स और हार्मोन को रिलीज करने में मदद करती हैं जो अवसाद को कम कर सकता है।

गहरी सांस लेने, अंगों को खींचने के व्यायाम और विश्राम करने से एंडोर्फिन, सैरोटोनिन और जी.ए.बी.ए. जैसेन्यूरोकैमिकल्स मुक्त होते हैं जो किसी व्यक्ति को प्रसन्न और संतुष्ट अनुभव कराते हैं। इससे नींद भी अच्छी आती है जिससे व्यक्ति तनावमुक्त अनुभव करता है.

योग, ध्यान और श्वास और सुदर्शन क्रिया जैसी क्रियाएं अवसाद के उपचार में बहुत ही प्रभावी हैं और इनका कोई नकारात्मक दुष्प्रभाव(side-effect) भी नहीं है।

डिप्रेशन के उपचार में परिवार/अभिभावक का योगदान

एक अभिभावक या निकट-संबंधी खुले और सौहार्दपूर्ण वातावरण में अपने बच्चे या परिवार के सदस्य को अपनी भावनाओं के बारे में बात करने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है। वे उससे उन समस्याओं पर बात कर सकते हैं जिनसे वह जूझ रहा है और उसे विश्वास दिला न सकते हैं कि उन चुनौतियों का सामना करने में वह समर्थ है और वे भी उसके साथ खड़े हैं।

अभिभावक को हर हाल में, बिना किसी संकोच के अपने बच्चों के साथ आमने-सामने बात करने के लिए प्रतिदिन एक समय निर्धारित करना चाहिए. उनके मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ाने और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए लंबे समय तक मददगार सिद्ध होता है.

एक अवसाद-ग्रस्त व्यक्ति या बच्चे को केवल डिप्रेशन से बाहर लाने के लिए उनसे बात नहीं करनी है. बस उसे अपनी भावनाओं को बिना संकोच व्यक्त और शेयर करने की आदत लगानी  है. उसे यह विश्वास दिलाना है कि बिना उपदेश पिलाये उस की बात को सुना और समझा जायेगा.

अभिभावक अपने बच्चे के मित्रों को जानें और उनके भी मित्र बनें। श्री श्री रविशंकर अक्सर उन माता-पिता को यह सलाह देते हैं जो अपने बच्चे के व्यवहार को बदलना चाहते हैं। वह कहते हैं कि अगर हम अपने बच्चे को प्रभावित करना चाहते हैं और उसके किसी व्यवहार को बदलना चाहते हैं, तो हमें उसके दोस्तों को जानना होगा और उन्हें भी प्रभावित करना होगा।

डिप्रेशन के उपचार में बाधा

दुनिया की अधिकतर आबादी अवसाद को नज़र-अंदाज़ करती है। इसका मुख्य कारण है कि अविकसित और गरीब देशों में यह बहुत आम है।

अवसाद को संकोच और प्रतिष्ठा का विषय समझा जाता है इसलिए भी लोग इसके बारे में बात करने से कतराते हैं।

कई मामलों में तो अवसाद-ग्रस्त व्यक्ति को पता ही नहीं होता की वह अवसाद ग्रस्त है इसलिए भी इसका उपचार संभव नहीं हो पाता है।

वयस्कों पर किये गए एक बहुपक्षीय अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन में, भारत में अवसाद के शिकार 20-37 प्रतिशत लोगों ने किसी न किसी कारण कोई चिकित्सीय सहायता पाने की कोशिश नहीं की।

अंत में हमारा यही सुझाव है कि इंसान अपनी समस्याओं को छुपाते हैं और उन्हें लगता है कि दूसरों को बताएंगे, तो उनका मज़ाक ना बन जाएँ. यह रवैया इंसान की दिक्कत को कम करने की बजाय और भी बढ़ा देता है. यदि आप बहुत ज़्यादा तनाव महसूस कर रहे हैं, तो किसी मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक के पास ज़रूर जाएं.

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ये हैं थाईलैंड के अजीबोगरीब मंदिर, कोई बीयर, कोई बोट, तो कोई चिकन को समर्पित!

अगर आप सोचते हैं कि बैंकॉक केवल अपनी आकर्षक नाइटलाइफ और थाई मसाज के लिए ही जाना जाता है, ऐसा बिलकुल नहीं है। बैंकॉक मंदिरों का भी शहर है। यहां दुनिया के सबसे खूबसूरत और अनोखे मंदिर हैं, कोई ताबूत के लिए, तो कोई बीयर के लिए यह मंदिर मशहूर हैं। अगर आप थाईलैंड घूमने जा रहे हैं, तो बैंकॉक और आस-पास के इन मंदिरों में ज़रूर घूमने जाएं। आइए जानते हैं थाईलैंड के इन अनोखे और खूबसूरत मंदिरों के बारे में –

ताबूत मंदिर, बैंकॉक

थाईलैंड में एक ‘द कॉफिन टेंपल’ नाम का मंदिर मौजूद है। इस मंदिर में जाकर लोग ताबूत खरीदते हैं। यह ताबूत उन लोगों को समर्पित किए जाते हैं, जिनकी डेथ के बाद कोई उनका अंतिम क्रियाकर्म करनेवाला न हो, या फिर जो लोग ताबूत खरीद सकने में असमर्थ हों। इस मंदिर को वाट हुआ लैंफॉन्ग (Wat Hua Lamphong) भी कहा जाता है।

द बीयर बोतल टेंपल, खुन हान, सिसाकेट

क्या आप ने कभी सोचा या फिर देखा है कि किसी मंदिर का निर्माण बीयर की बोतलों से हुआ हो, नहीं ना। लेकिन ऐसा मंदिर सच में है, ‘द बीयर बोतल टेंपल’ नाम का यह मंदिर थाइलैंड के सिसाकेट में स्थित है। पहली बार इस मंदिर की छत को देखने पर आपको कुछ भी असामान्य दिखाई नहीं देगा।

लेकिन इसे बारीकी से देखने पर पता चलेगा कि इस मंदिर की पूरी छत बीयर की बोतलों से बनी हुई है। मंदिर और आसपास की इमारतों को एक मिलियन से अधिक खाली बोतलों से बनाया गया है, जिनमें ज्यादातर बीयर और एनर्जी ड्रिंक की बोतलें हैं।

द व्हाइट टेंपल, चियांग राय

थाईलैंड के चियांग राय में स्थित द व्हाइट टेंपल अपनी खूबसूरत बनावट की वजह से दुनियाभर में बहुत प्रसिद्ध है। यह मंदिर किसी स्वर्ग से कम नहीं है। इसको वाट रोंग खुन मंदिर नाम से जाना जाता है। इस बौद्ध मंदिर की खासियत इसकी अद्वितीय नक्काशी है।

इसका निर्माण सन् 1997 में थाई आर्टिस्ट चालरेमशाई कॉसिपिपैट ने किया था, तब से ही यह लोगों को खूब आकर्षित करता आया है। इस मंदिर में हैंड्स ऑफ हेल है, हैंड्स ऑफ हेल यानि कि यह नरक से आते हुए हाथ हैं, जो पर्यटकों को संदेश देते हैं।

द बोट टेंपल, बैंकॉक

द बोट टेंपल नाम का यह मंदिर नाव के आकार की इमारत के रूप में बना है। यह मंदिर वाट यनावा का हिस्सा है, जो सफान तकसीन बीटीएस स्टेशन के पास और चाओ फ्राया नदी के बगल में मौजूद है। यह मंदिर यहां होनेवाले एक एनुअल फेस्टिवल के दौरान स्थानीय निवासियों द्वारा कवर कर दिया जाता है।

द चिकन एंड मंकी टेंपल, अयुथया

इस मंदिर का मुख्य आकर्षण हेल स्कल्पचर गार्डन और सैकड़ों बंदर हैं, जो मंदिर के बगल में रहते हैं। मंदिर के बगल में रहते यह बंदर बहुत ही मिलनसार हैं। हेल स्कल्पचर गार्डन जैसा दूसरा गार्डन आपको शायद ही कहीं देखने को मिले। इस गार्डन में नरक की यातनाओं को दिखाने का प्रयास किया गया है।

डोनाल्ड डक टेंपल, बैंकॉक

अभी इस मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा है और इसे पूरी तरह तैयार होने में अभी कई साल लग सकते हैं। लेकिन फिर भी इस मंदिर में आप घूम सकते हैं और उन तस्वीरों को निहार सकते हैं, जो यहां उकेरी जा चुकी हैं। इनमें डोनाल्ड डक की तस्वीरें और स्टेच्यू शामिल हैं।

डेविड बेकहम मंदिर, बैंकॉक

इस मंदिर के मुख्य पुजारी मैनचेस्टर यूनाइटेड के बड़े प्रशंसक हैं। उन दिनों में जब फुटबॉल के प्रसिद्ध खिलाड़ी डेविड बेकहम का करियर चरम पर था, तब उन्होंने मंदिर के गर्भ गृह में बेकहम की भी एक मूर्ति लगवाने का निर्णय लिया था। यह मंदिर केवल विशेष अवसरों पर ही खोला जाता है।

लेकिन अन्य दिनों में अगर आप इस मंदिर में जाना चाहते हैं तो इस मंदिर की परिक्रमा करते हुए यह खोजने का प्रयास करना होता है कि कोई आपको मंदिर के अंदर बुला ले। अगर अंदर से कोई आपकी विनती स्वीकार कर दर्शन का लाभ देता है, तो आप सामान्य दिनों में भी इस मंदिर में जा सकते हैं।

बैंकॉक फैलिक श्राइन

थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक की यात्रा पर पहली बार जानेवाले ज्यादातर यात्री इस धार्मिक स्थल को देखकर शर्म से लाल हो जाते हैं। इसका कारण इस धार्मिक स्थल की एक अनोखी पूजा पद्धति है। ख्लोंग नदी के किनारे पर स्थित चाओ माई के मंदिर में लकड़ी के पेनिस का चढ़ावा चढ़ाया जाता है। इसके पीछे मान्यता यह है कि ऐसा करने से प्रजनन क्षमता बढ़ती है।

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अच्छी जिंदगी जीने के उपाय! एक दो को अपना कर आप भी रह सकते हमेशा खुश!

जीवन बहुत जटिल और बहुत उतार-चढ़ाव से भरी है. जीवन में खुशियाँ हैं तो दुःख भी हैं. दरअसल सुख और दुःख एक दूसरे के पूरक हैं. इनके बीच में एक संतुलन बना कर जीवन को जीने का लुत्फ़ लिया जा सकता है.

जिंदगी हमें जीने के अनंत मौके प्रदान करती है. ख़ुशी का एक मौका हाथ से निकल जाने का मतलब यह नहीं है कि ऐसा मौका फिर नहीं मिलेगा. दरअसल हम खुद ही मान लेते हैं कि इससे अच्छा हमारे लिए कुछ नहीं तो अंततः यही सच भी हो जाता है. इस तरह से हम आने वाले अवसरों को स्वयं ही ठुकरा देते हैं.

अच्छी जिन्दगी जीना इतना मुश्किल है नहीं जितना लगता है. दरअसल यह छोटी-2 चीज़ों के बारे में है जो मिलकर हमारे जीवन में एक बड़ा अंतर ला देती हैं. ऐसी ही कुछ बहुत ही बेसिक सी और छोटी-छोटी चीज़ें हैं जिन्हें अपने जीवन में अपना कर आप अपनी जिंदगी को खुशनुमा सकते हैं.

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  • सबसे पहले स्वयं से प्रेम करें. अपने लिए जियें ना की दूसरों के लिए. आप को कोई इतना खुश कभी नहीं कर सकता जितना कि आप स्वयं को कर सकते हैं.
  • अपने/अपनी सबसे अच्छे/अच्छी दोस्त से शादी करें. अगर आपको अपने मित्र के साथ समय बिताना सबसे अच्छा लगता है तो उसी से शादी कर लें.
  • हमेशा पैसे के लिए ही काम मत करें.  धन अपेक्षाकृत महत्वहीन है. आपका धन आपकी ख़ुशी से मापा जाता है नाकि आपके बैंक बैलेंस से.
  • हमेशा जिंदगी में कुछ ना कुछ सीखते रहें. अगर सीखना छोड़ देंगे तो जिंदगी में हमेशा असफलता का सामना करेंगे.
  • जितना संभव हो सके दूसरों की गलतियों को माफ़ करते रहें. यदि कोई जानबूझ कर आपको नीचा दिखाना चाहता है तो उसे किनारा कर लें. ऐसे व्यक्ति से उलझना बेवकूफी है.
  • आपके द्वारा अच्छी तरह से व्यतीत किया जीवन दूसरों के लिए भी सबक बनता है जिससे व्यापक स्तर पर बदलाव आता है.

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  • हमेशा याद रखें कि जीवन में आगे क्या होने वाला है यह कोई भी नहीं जानता.
  • “मैं नहीं जानता/जानती” कहने में आपको कोई शर्म नहीं होनी चाहिए. शर्म अपनी कमियों को स्वीकार करने में
    नहीं बल्कि सीखने से इनकार करने में है.
  • कुछ समय अपने लिए भी निकालें. जिन्दगी को बहुत गंभीरता से लेने का कष्ट न करें. जब भी संभव हो पार्टी करें और मौज मनाएं.
  • प्रेम जिंदगी का सबसे महत्वपूर्ण तोहफा है. यदि आपकी जिन्दगी में प्रेम नहीं है तो आपकी जिंदगी लगभग अर्थहीन है. प्रेम का अर्थ पाना नहीं बल्कि बिना स्वार्थ के देना है.
  • जिंदगी बहुत ज्यादा आसान हो जाती है जब आप लोगों में उनकी बुराई को छोड़कर उनकी अच्छाईयों को देखते हैं.
  • जो आपके पास है उसी में खुश रहना सीखें. उसमें खुश नहीं हैं तो जी-जान से उसको पाने की कोशिश करें, आपको कोई नहीं रोक सकता.
  • कोई भी आपकी समस्याओं का समाधान नहीं कर सकता. आप ही अपनी समस्याओं का समाधान कर सकते हैं. हर समस्या को एक अवसर की तरह देखें.
  • आपका धनी और बुद्धिमान होना व्यर्थ है अगर आप समाज की उन्नति में अपना योगदान नहीं कर रहे.
  • अपने जीवन में लोगों को महत्त्व दें. लोग ही आपके सबसे बड़े संसाधन एसेट हैं और मजबूत रिश्ते आपकी return और ब्याज हैं.
  • वह काम करें जिससे आप प्यार करते हैं, ना की वह जो आपको अच्छा नहीं लगता.
  • दूसरों के जीवन के बारे में भी जानने की इच्छा रखें. क्योंकि आपको उनकी जिंदगी से भी कुछ अच्छा सीखने के लिए मिल सकता है.

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  • समय आपकी सोच से भी तेज गुजर जाता है. इसका सावधानी से इस्तेमाल करें.
  • जिंदगी में कुछ बातों को सीखा नहीं जाता उन्हें सिर्फ अनुभव ही किया जा सकता है.
  • भौतिक चीजों से अपने आप को ज्यादा जोड़कर न रखें. सब मोह माया है! 🙂
  • ज्यादा सुनना और कम बात करना सबसे बेहतर है.
  • अपने अतीत से बाहर निकलकर अपने वर्तमान में रहें.
  • आलोचनाओं का सामना करके आगे बढ़ें.
  • अपनी गलतियों को स्वीकार करें और उनसे सीखें.
  • हर दिन अपने आप को कुछ ना कुछ नया करने की चुनौती दें.
  • क्वांटिटी से ज्यादा क्वालिटी पर ध्यान दें.
  • ईमानदारी सबसे अच्छी नीति है.
  • अपने आप से झूठ न बोलें.

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ये हैं दुनिया की सबसे महंगी आइसक्रीम, कीमत जानकर उड़ जाएंगे आपके होश

आइसक्रीम खाना किसे पसंद नहीं, दुनियाभर में आइसक्रीम के दीवानों की कमी नहीं है। दुखी होने पर भी लोग आइसक्रीम खाना अच्छा मानते हैं। कहा जाता है कि इसमें हैपी हार्मोन्स होते हैं। बाज़ार में ग्राहकों के लिए आइसक्रीम की ढेरों वेराइटीज़ हैं। अब तक आप भी कई तरह की आइसक्रीमस का स्वाद चख चुके होंगे, लेकिन क्या आप दुनिया की उन चुनिंदा आइसक्रीमस के बारे में जानते हैं, जो सबसे ज्यादा महंगी हैं। आज हम आपको ऐसी आइसक्रीमस के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके दाम सुनकर आपको पसीना आ जाएगा। ये हैं दुनिया की पांच सबसे महंगी आइसक्रीमस-

स्ट्रॉबेरी एट अरनोड्स

स्ट्रॉबेरी एट अरनोड्स की कीमत 39 लाख डॉलर है। इस फ्रेंच वनीला आइस्क्रीम में स्ट्रॉबेरी, मिंट और विह्पड क्रीम होती है। इसके साथ 7.09 कैरट के पिंक डायमंड की इंगेजमेंट रिंग और 25,000 डॉलर की वाइन भी मिलती है।

एबसरडिटी संडे

एबसरडिटी संडे की कीमत 60,000 डॉलर है। यह आइसक्रीम खरीदने पर आपको एक शानदार हॉलिडे पैकेज भी मिलेगा, आपको तंजानिया घूमने का मौका मिलेगा, जिसमें रहने और खाने पीने की व्यवस्था पांच सितारा होटल में कराई जाती है।

फ्रोजन हॉट चॉकलेट

फ्रोजन हॉट चॉकलेट की कीमत 25000 डॉलर है। इस आइसक्रीम में दुनिया के सबसे अनोखे और महंगे कोकोआ का इस्तेमाल किया जाता है। इसे सोने की कटोरी में परोसा जाता है, इस कटोरी के बेस पर सफेद डायमंड लगे होते हैं। किसी समय यह दुनिया की सबसे महंगी आइसक्रीम थी, जिसके बाद इसका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिपोर्ट में भी शामिल हुआ था।

गोल्डन ओपुलेंस संडे

गोल्डन ओपुलेंस संडे की कीमत 1,000 डॉलर है। इसे चॉकलेट और वनीला बीन के कॉम्बिनेशन से बनाया जाता है। इसे सुंदर दिखाने के लिए इस पर सोने के पानी में चीनी का घोल मिलाकर इसे तैयार किया जाता है, साथ ही इसमें बादाम का भी इस्तेमाल किया जाता है। गोल्डन ओपुलेंस संडे बनवाने के लिए 48 घंटे पहले ऑर्डर देना पड़ता है।

द विक्टोरिया

द विक्टोरिया की कीमत 1,000 डॉलर है। चॉकलेट और वनीला से बनी इस आइसक्रीम का लुक काफी रॉयल है। इस में 24 कैरट गोल्ड भी लगा होता है और इसे गोल्डन कैरेमलाइज्ड पीनट्स और सोने की परत से सजाकर सर्व किया जाता है।

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256 साल तक ज़िंदा रहे शख़्स ने मौत से पहले बताया था लंबी ज़िंदगी का राज़, 1933 में हुई मौत

अब तक सबसे लंबी उम्र जीने वाले व्यक्ति की उम्र क्या रही होगी? लगभग 120-30 साल? अगर आपको बताया जाये कि अब तक प्रमाणित सबसे ज्यादा उम्र तक जीवित रहे व्यक्ति की उम्र 256 थी तो यकीन ही नहीं होगा. है न?  यह कोई मिथक या काल्पनिक कहानी नहीं है। आगे पढ़ें!

जी हाँ, ली चिंग यूएन (Li Ching Yuen) ही वह शख्स था जो पूरे 256 साल तक जीवित रहा था।

Li ching का जन्म 3 मई 1677 को चीन के क़ीजियांग ज़िले में हुआ था, जबकि उनकी मृत्यु 6 मई 1933 को हुई थी। हालांकि कुछ स्रोत उनका जन्म साल 1736 मानते हैं। अगर उनका जन्म 1736 में भी हुआ माना जाये तो भी वह 197 साल जिंदा रहे जो की आम इंसान की आयु से बहुत ज्यादा है।

साल 1928 में ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ के एक संवाददाता ने लिखा था कि ली के पड़ोस में रहने वाले कई बूढ़े लोगों का कहना था कि उनके दादा लोग भी ली को जानते थे और वह भी एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति के रूप में! इसका मतलब यह हुआ कि मुमकिन हैं कि ली की उम्र 250 साल से ज्यादा रही हो।

कैसे हुई ली के बारे में खोज?

1930 के न्यूयॉर्क टाइम्स के लेख के अनुसार, चेंगदू विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर वू चुंग-चीह(Wu Chung Chieh) ने इंपीरियल चीनी सरकार (Imperial Chinese government) के 1827 के एक रिकॉर्ड को खोज निकाला जिसमें Li Ching Yuen को उनके 150वें जन्मदिन पर सरकार की तरफ से बधाई दी गयी थी। यही नहीं एक अन्य पत्र में Li Ching Yuen को उनके 200वें जन्मदिन पर भी बधाई संदेश भेजा गया था।

कौन थे Li ching Yuen?

Li ching Yuen जाने-माने हर्बल यानि जड़ी-बूटी विशेषज्ञ (herbalist), मार्शल आर्टिस्ट और सैन्य सलाहकार थे. Li ching महज 10 साल की उम्र से ही हर्बल औषधियों का बिज़नेस करने लगे थे. उन्हें हर्बल के साथ-साथ मार्शल आर्ट्स में भी महारथ हासिल थी. ली 71 साल की उम्र में मार्शल आर्ट्स ट्रेनर के तौर पर चीन की सेना में शामिल हुए थे. कहा जाता है कि Li ching ने 24 शादियां की थीं, जिनसे उनके 200 से अधिक बच्चे थे.

सबसे लंबी उम्र

ली बचपन से ही पढ़ने और लिखने में सक्षम थे. आम तौर पर स्वीकार की गई कहानियों के अनुसार उन्होंने कांसू, शांसी, तिब्बत, अन्नाम, सियाम और मंचूरिया में जड़ी-बूटियों की खोज की थी। पहले एक सौ साल तक वह इस व्यवसाय में बने रहे। बाद में अन्य लोगों द्वारा इकट्ठा की गई जड़ी-बूटियों को बेचने का व्यवसाय किया। उन्होंने अन्य चीनी जड़ी बूटियों के साथ लिंगजी, गोजी बेरी, जंगली जिनसेंग, शू वू और गोटू कोला आदि जड़ी बूटियों बेचा

लंबी उम्र का रहस्य

सौ साल का होने के बाद अपनी ज़िन्दगी के अगले 40 साल ली ने सिर्फ़ जड़ी बूटियों के सहारे गुज़ारे। इन जड़ी बूटियों के साथ-साथ चावल की शराब को एक आहार के रूप में प्रयोग किया।

ली चिंग-यूएन ने अपना अधिकांश जीवन पहाड़ों में बिताया और किगोंग(Qigong) नामक कसरत की एक तकनीक में कुशल थे।

Li ching से जब लंबी उम्र का रहस्य पूछा गया तो उनका जबाव कुछ ऐसे था। “अपने दिल को शांत रखो, कबूतर की तरह बिना सुस्ती के चलो, कछुए की तरह बैठो,  और एक कुत्ते की तरह नींद लो।”

Li ching की ज़िंदगी में पहाड़ों की ज़िंदगी, व्यायाम और खान-पान का बहुत बड़ा हाथ रहा. वह तन और मन की शांति को लंबी उम्र तक जीने का सबसे बड़ा कारण मानते थे। अंदाजन, मन की शांति और बेहतरीन श्वास तकनीक का मिश्रण ही उनकी अविश्वसनीय दीर्घायु का रहस्य थी।

क्या कोई इससे भी ज्यादा जिया?

Dailyhunt की एक रिपोर्ट के अनुसार, Li ching के एक स्टूडेंट के अनुसार, Li की मुलाक़ात एक ऐसे शख्स से हुई थी, जो 500 साल से ज़्यादा उम्र का था! उसी ने Li को लम्बी उम्र तक जीने के लिए Qigong व्यायाम सिखाया था और खान पान के दिशा-निर्देश दिये थे! माना जाता है कि 500 साल के उसी व्यक्ति से प्रेरणा लेकर Li ching लम्बी उम्र तक जी पाए थे। हालांकि 500 वर्ष के उस व्यक्ति के बारे में कोई रिकार्ड उपलब्ध नहीं है लेकिन संभव तो है न कि उसको लंबी उम्र का राज उसके गुरु से ही मिला हो?

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लक्ष्मी व धन लाभ प्राप्ति के आसान व अचूक टोटके

लक्ष्मी यानि धन एक ऐसी वस्तु है जिसके बिना किसी भी व्यक्ति का काम नहीं चलता। धन प्राप्ति के लिए लोग नौकरी, व्यवसाय या व्यापार आदि करते हैं। अनेक लोग धन पाने के लिए बुरे और घृणित कर्म करने से भी नहीं चूकते। इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि प्रत्येक व्यक्ति धन लाभ के लिए अपनाअपना तरीका अपनाता है।

इसके अलावा लोग लाभ प्राप्त करने तथा हानि से बचने के भी उपाय करते हैं। आप टोने-टोटके द्वारा धन लाभ प्राप्त करने और हानि को कम करने के उपाय करके अपना जीवन सुखमय बना सकते हैं।

यहां हम धन लाभ प्रदायक ऐसे चमत्कारी टोने-टोटकों का उल्लेख कर रहे हैं, जिनके उपयोग से लक्ष्मी का आगमन सरलतापूर्वक हो जाता है।

  • हर रोज प्रात:काल भगवती लक्ष्मी को लाल पुष्प चढ़ा कर दूध से बनी मिठाई का भोग लगाएं।
  • काली मिर्च के दाने 5 अपने सिर से 7 बार घुमाकर 4 दानों को चारों दिशाओं में फेंक दें तथा पांचवें दाने को आकाश की ओर उछाल दें। यह टोटका करने से अचानक धन लाभ होगा।
  • पीपल के एक पत्ते पर ‘राम’ लिखकर उस पर कोई मिष्ठान रखकर हनुमान मंदिर में चढ़ा आएं।
  • अगर व्यवसाय में लाभ नहीं हो रहा हो तो शुक्रवार के दिन से नित्य गोधूलि वेला में श्रीमहालक्ष्मी के सामने जलाएं। या तुलसी के पौधे के पास गाय के घी का दीपक जलाएं
  • बटुआ खाली नहीं रहेगा: शनिवार के दिन पीपल का एक अखंडित पत्ता तोड़ लाएं। फिर उसे गंगाजल से धोकर उसके ऊपर हल्दी तथा दही के घोल से अपने दाएं हाथ की अनामिका उंगली द्वारा एक वर्ग के भीतर ‘ह्रीं’ अंकित कर दें। तत्पश्चात् धूप-दीप दिखाकर यह पत्ता मोड़कर अपने बटुए में रख लें। प्रत्येक शनिवार को उक्त पूजा के साथ वह पत्ता एक नए तोड़े पत्ते से बदलते रहें। आपका बटुआ कभी खाली नहीं रहेगा। पुराना पत्ता घर से बाहर किसी पवित्र स्थान पर डाल दें।
  • शुक्ल पक्ष के प्रथम शुक्रवार से लगातार 3 शुक्रवार तक सायंकाल लक्ष्मी नारायण मंदिर में जाकर 9 वर्ष से छोटी 11 कन्याओं को खीर के साथ मिश्री का भोजन कराएं तथा उपहार में चमकीला लाल वस्त्र दें।
  • बकाया लेने का टोटका: किसी व्यक्ति से अपना बकाया धन प्राप्त करने के लिए रात्रिकाल किसी चौराहे पर जाकर एक छोटा सा गड्ढा खोदें। फिर उस व्यक्ति का नाम लेते हुए उसमें एक अभिमंत्रित गोमती चक्र दबा दें। कुछ ही समय में वह आपका पैसा वापस कर देगा। यदि उस गड्ढे पर हरा नींबू निचोड़ दें तो अधिक शीघ्र लाभ मिलेगा।
  • झाडू ऐसी जगह रखें कि किसी को दिखाई न दे।
  • अगर अचानक धन प्राप्ति के आवश्यकता हो तो सोमवार के दिन श्मशान में स्थित महादेव मंदिर जाकर दूध में शुद्ध शहद मिलाकर चढ़ाएं।
  • प्रत्येक अमावस्या को पूरे घर की सफाई करके घर के मंदिर में धूप-दीप दिखाने से भी धन का आगमन होता है।
  • यदि वाद-विवाद एवं दुर्घटना आदि के कारण, धन का अपव्यय हो रहा हो तो चमकीले लाल वस्त्र तथा लाल मसूर का उपयोग न करें।
  • धन हानि से बचने का टोटका: शुक्ल पक्ष के प्रथम सोमवार को 11 अभिमंत्रित गोमती चक्रों को पीले कपड़े पर रखकर उन सभी पर हल्दी से तिलक करें और शिवजी का स्मरण करके कपड़े की पोटली का रूप दें। फिर उस पोटली को हाथ में लेकर सारे घर में घूमते हुए घर से बाहर आकर बहते जल में प्रवाहित कर दें। धन हानि नहीं होगी।
  • अगर धन संचय नहीं हो रहा हो तो तिजोरी में लाल वस्त्र बिछाएं।
  • तिजोरी में गुंजा के बीज रखने से भी धन की प्राप्ति होती है।
  • महीने के पहले वीरवार को 3 अभिमंत्रित गोमती चक्र 3 धनकारक पीली कौड़ियां तथा हल्दी की 3 गांठ को सम्मिलित रूप से किसी पीले कपड़े में बांधकर तिजोरी में रख दें। इसके प्रभाव से धन वृद्धि होगी।
  • अचानक धन प्राप्ति के लिए अपनी मनोकामना कहते हुए बरगद की जटा में गांठ लगा दें। जब धन लाभ हो जाए तो उसे खोल दें।
  • गोलक में छेद बनाकर शोधित श्रीलक्ष्मी फल रख लें। फिर उसको नित्य धूप-दीप दिखाएं और सुविधानुसार उसमें पैसे डालते रहें। इस टोटके से वह अपेक्षाकृत कम समय में ही पैसों से भर जाएगा।

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