मीर उस्मान अली खान – अब तक के सबसे अमीर भारतीय !

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जब भी आप किसी से भारत के सबसे अमीर व्यक्ति के बारे में पूछते हैं, तो जो नाम सबसे पहले दिमाग में आते हैं, वे हैं टाटा और बिरला जैसे उद्योगपतियों के।

हालांकि, किसी को भी यह जानकर आश्चर्य नहीं होगा कि अब तक के सबसे अमीर भारतीय (मुद्रास्फीति के लिए एडजस्टेड नेटवर्थ), देश के अपने समय के वे राजा हो सकते हैं, जिन्होंने औपनिवेशिक शासन से पहले भारत के कुछ हिस्सों पर शासन किया था। बाद में देश एक लोकतंत्र बना। लेकिन इनमें से कौन सा राजा सबसे धनी रहा?

1911 से 1948 तक हैदराबाद पर शासन करने वाले मीर उस्मान अली खान निजाम अब तक के सबसे अमीर भारतीय थे उन्होंने 37 वर्षों तक शासन किया।

लेकिन वह वास्तव में कितने अमीर थे और पिछले कई दशकों में मुद्रास्फीति के हिसाब से आज उनकी संपत्ति कितनी होगी? ये सब जानेंगे हम इस लेख के माध्यम से, तो चलिए जानते हैं :-

1948 में रियासत को भारतीय लोकतांत्रिक तह में ले जाने से पहले हैदराबाद के अंतिम निज़ाम, मीर उस्मान अली खान एक अमीर व्यक्ति थे। वे इतने अमीर थे कि कल्पना करना भी मुश्किल है।

वह 1911 में हैदराबाद के निज़ाम के रूप में अपने पिता के उत्तराधिकारी बने और लगभग चार दशकों तक शीर्ष पर रहे। वे महबूब अली खान के दूसरे पुत्र थे।

एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल के नवीनतम अनुमानों से पता चलता है कि मुद्रास्फीति एडजस्ट करने के बाद, मीर उस्मान अली खान की कुल संपत्ति आज 17.47 लाख करोड़ रुपये (230 बिलियन डॉलर या 17,57,36,56,000.00 रुपये) से अधिक होती।

यह वर्तमान में दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति, टेस्ला और स्पेसएक्स के संस्थापक एलन मस्क की कुल संपत्ति 250 बिलियन डॉलर के करीब है।

पेपरवेट की जगह हीरे का इस्तेमाल

कहा जाता है कि निजाम ने पेपरवेट की जगह हीरे का इस्तेमाल किया था। हैदराबाद स्टेट बैंक नामक उनका अपना बैंक था, जिसे उन्होंने 1941 में स्थापित किया था।

बाद में इसका नाम बदल कर स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद और 2017 में, भारतीय स्टेट बैंक में विलय कर दिया गया। निज़ाम भव्य उपहारों के लिए प्रसिद्ध थे, और कहा जाता है कि उन्होंने ब्रिटिश राजकुमारी एलिजाबेथ को उनकी शादी में हीरे के गहने उपहार में दिए थे।

लोक कल्याण के लिए कार्य

निज़ाम ने अपने राज्य का विकास बिजली, रेलवे, सड़क और हवाई मार्ग बनाकर किया। उन्हें शिक्षा पर केंद्रित परोपकार के लिए भी जाना जाता था, जामिया निजामिया, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और दारुल उलूम देवबंद जैसे कुछ प्रमुख विश्वविद्यालयों को बहुत दान दिया।

इसके आलावा हैदराबाद स्टेट के लगभग सभी सार्वजनिक भवनों की स्थापना का श्रेय भी उनको ही जाता है, उदाहरण के लिए हैदराबाद हाई कोर्ट, उस्मानिया जनरल अस्पताल, यूनानी अस्पताल (गवर्नमेंट निज़ामिआ जनरल हॉस्पिटल), असेंबली हॉल, असफिया पुस्तकालय आदि।

मीर उसमान को “आधुनिक हैदराबाद का आर्टिटेक्ट” के रूप में भी जाना जाता था। उनका निधन 24 फरवरी 1967 को हुआ था।

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ये है दुनिया का सबसे छोटा योग प्रशिक्षक, बनाया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड!

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बच्चे गीली मिट्टी के समान होते हैं उन्हें जैसा आकार दो वो वैसे ही आकार में ढल जाते हैं। ऐसा ही एक कारनामा 9 साल के बच्चे ने कर दिखाया है। उसने अपने नाम एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है जिसे जानकर हर भारतीय का सिर गर्व से उठ जाएगा। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के अनुसार 9 साल की उम्र के रेयांश सुरानी ने दुनिया के सबसे कम उम्र के सर्टिफाइट योग प्रशिक्षक बन गए हैं।

चलिए जानते हैं इस पोस्ट के माध्यम से रेयांश सुरानी के बारे में:-

छोटी उम्र से शुरू किया अभ्यास

दरअसल रेयांश अपने माता-पिता के साथ दुबई में रहते हैं। रेयांश ने चार साल की उम्र में योग का अभ्यास करना शुरू कर दिया था, वे अपने माता-पिता को योग करते देखा करते थे और उनके साथ योग में हिस्सा लिया करते थे।

एक योग्य प्रशिक्षक बनने के लिए रेयांश की राह तब शुरू हुई जब उन्हें पता चला कि उनके माता-पिता भारत के ऋषिकेश में एक योग शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में भाग ले रहे हैं तब उन्होंने एक योग्य प्रशिक्षक बनने के अपने सपने को आगे बढ़ाने का फैसला किया।

200 घंटे का प्रशिक्षण पूरा किया

प्रशिक्षण के दौरान आयुर्वेद के महत्वपूर्ण हिस्सों से भी रेयांश का परिचय हुआ। उन्होंने 200 घंटे का योग शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरा किया और उन्होंने ने 27 जुलाई, 2021 को आनंद शेखर योग स्कूल से अपना प्रमाण पत्र प्राप्त किया।

जब उन्हें यह प्रमाण पत्र दिया गया तो उनकी उम्र 9 साल 220 दिन थी। इस तरह वे दुनिया के सबसे कम उम्र के सर्टिफाइड योग प्रशिक्षक बन गए।

दुबई में रहने के बावजूद रेयांश ने बिना आधुनिक सुख-सुविधाओं वाली जीवनशैली के रहना बहुत जल्द सिख लिया था। नया माहौल उन्हें प्रकृति के और करीब ले आया।

उन्होंने बताया कि पहले उन्हें लगता था कि योग केवल शारीरिक व्यायाम और सांस लेने के बारे में है लेकिन प्रशिक्षण कार्यक्रम के बाद उन्हें अहसास हुआ कि यह सिर्फ बाहर ही नहीं बल्कि अंदर तक असर करता है।

आनंद शेखर योग स्कूल में 200 घंटे का योग शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम चार सप्ताह तक चलने वाला गहन आवासीय कार्यक्रम है।

शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के दौरान रेयांश का दैनिक कार्यक्रम:-

6:30 – प्राणायाम और क्रिया
7:30 – अष्टांग विनयसा/संरेखण प्रवाह
9:00 – नाश्ता
10:00 – योग दर्शन
12:00 – आयुर्वेद / षट्कर्म / योग-शरीर रचना
13:00 – लंच
14:00 – आराम और असाइनमेंट
15:00 – संरेखण कार्यशाला / शिक्षण पद्धति
17:00 – टी ब्रेक
17:30 – हठ प्रवाह और ध्यान
19:30 – रात का खाना

योग कक्षाएं

वर्तमान में कोरोना प्रतिबंधों के चलते रेयांश 10-15 सीखने वालों को लेकर योग कक्षाएं चलाते हैं। हालांकि अभी योग शिक्षक के तौर पर उन्होंने भविष्य की कोई योजना नहीं बनाई है लेकिन वे कहते हैं कि योग सिखाना उन्हें संतुष्टि प्रदान करता है।

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शहीद-ए-आजम भगत सिंह के 10 लोकप्रिय नारे

सरदार भगत सिंह को शहीद-ए-आजम कहा जाता है जो देश की स्वतन्त्रता की लड़ाई हँसते-2 फांसी पर झूल गए थे। आज हम आपको शहीद भगत सिंह जी के कुछ ऐसे नारों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें पढ़कर आज भी आप में देशभक्ति का जज्बा जाग जाएगा।

23 साल की उम्र में अपने देश के लिए जान न्योछावर कर देने वाले भगत सिंह जी का नाम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के रूप में सबसे पहले लिया जाता है।

शहीद-ए-आजम के पूरे परिवार के खून में देशभक्ति दौड़ती थी और इसी वजह से भगत सिंह जी के अंदर भी देशभक्ति का जुनून सवार था। भारत की आज़ादी की लड़ाई में उनका बहुत बड़ा योगदान रहा है।

यह है भगत सिंह जी के दस मशहूर नारे :

इंकलाब जिंदाबाद

प्रेमी, पागल, और कवी एक ही चीज से बने होते हैं।

साम्राज्यवाद का नाश हो।

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मैं एक मानव हूँ और जो कुछ भी मानवता को प्रभावित करता है उससे मुझे मतलब है।

राख का हर एक कण मेरी गर्मी से गतिमान है मैं एक ऐसा पागल हूं जो जेल में भी आज़ाद है।

निष्ठुर आलोचना और स्वतंत्र विचार ये क्रांतिकारी सोच के दो अहम लक्षण हैं।

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ज़रूरी नहीं था की क्रांति में अभिशप्त संघर्ष शामिल हो, यह बम और पिस्तौल का पंथ नहीं था।

व्यक्तियो को कुचल कर, वे विचारों को नहीं मार सकते।

बम और पिस्तौल क्रांति नहीं लाते, क्रान्ति की तलवार विचारों के धार बढ़ाने वाले पत्थर पर रगड़ी जाती है।

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क्रांति मानव जाति का एक अपरिहार्य अधिकार है। स्वतंत्रता सभी का एक कभी न ख़त्म होने वाला जन्म-सिद्ध अधिकार है। श्रम समाज का वास्तविक निर्वाहक है।

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शहीद भगत सिंह के अनमोल युग-प्रवर्तक विचार

क्रांतिकारी भगत सिंह का जन्म 28 सितम्बर 1907 को पंजाब प्रांत, ज़िला-लयालपुर, के बावली गाँव मे हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है। भगत सिंह के पिता का नाम सरदार किशन सिंह और माता का नाम विद्यावती कौर था।

जेल में शहीद-ए-आजम भगत सिंह

देश की आजादी के लिए जिस तरह भगत सिंह ने पूरी हिम्मत के साथ अंग्रेज सरकार का सामना किया वह हमेशा ही देश की युवा शक्ति के लिए एक प्रेरणास्रोत बने रहेंगे। उनके विचार ऐसे थे जिन्हें सुनके आपके रौंगटे खड़े हो जाएंगे।

शहीद भगत सिंह जी के शहीदी दिवस पर जानें कुछ ऐसे ही विचारों के बारे में जो कि बहुत ही प्रेरणादायक है।

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किसी भी इंसान को मारना आसान है, परन्तु उसके विचारों को नहीं। महान साम्राज्य टूट जाते हैं, तबाह हो जाते हैं, जबकि उनके विचार बच जाते हैं।

जरूरी नहीं था कि क्रांति में अभिशप्त संघर्ष शामिल हो। यह बम और पिस्तौल का पंथ नहीं था।

जिंदगी तो सिर्फ अपने कंधों पर जी जाती है, दूसरों के कंधे पर तो सिर्फ जनाजे उठाए जाते हैं।

प्रेमी, पागल और कवि एक ही चीज से बने होते हैं।

जो व्यक्ति विकास के लिए खड़ा है उसे हर एक रूढ़िवादी चीज की आलोचना करनी होगी, उसमें अविश्वास करना होगा तथा उसे चुनौती देनी होगी।

देशभक्तों को अक्सर लोग पागल कहते हैं।

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इंसान तभी कुछ करता है जब वो अपने काम के औचित्य को लेकर सुनिश्चित होता है  जैसा कि हम विधान सभा में बम फेंकने को लेकर थे।

मेरा धर्म देश की सेवा करना है।

व्यक्तियो को कुचल कर , वे विचारों को नहीं मार सकते।

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क़ानून की पवित्रता तभी तक बनी रह सकती है जब तक की वो लोगों की इच्छा की अभिव्यक्ति करे।

निष्ठुर आलोचना और स्वतंत्र विचार ये क्रांतिकारी सोच के दो अहम् लक्षण हैं।

मैं एक मानव हूँ और जो कुछ भी मानवता को प्रभावित करता है उससे मुझे मतलब है।

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दिल से निकलेगी न मरकर भी वतन की उलफत मेरी मिट्‌टी से भी खुशबू-ए वतन आएगी ।

अपने दुश्मन से बहस करने के लिये उसका अभ्यास करना बहोत जरुरी है।

इंसानों को कुचलकर आप उनके विचारो को नही मार सकते।

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मेरा जीवन एक महान लक्ष्य के प्रति समर्पित है – देश की आज़ादी। दुनिया की अन्य कोई आकषिर्त वस्तु मुझे लुभा नहीं सकती।

दिल से निकलेगी न मरकर भी वतन की उल्फत, मेरी मिट्ठी से भी खूशबू-ए-वतन आएगी।

मैं इस बात पर जोर देता हूँ कि मैं महत्वकांक्षा, आशा और जीवन के प्रति आकर्षण से भरा हुआ हूँ पर ज़रूरत पड़ने पर मैं ये सब त्याग सकता हूँ और वही सच्चा बलिदान है।

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आम तौर पर लोग चीजें जैसी हैं उसके आदि हो जाते हैं और बदलाव के विचार से ही कांपने लगते हैं। हमें इसी निष्क्रियता की भावना को क्रांतिकारी भावना से बदलने की ज़रुरत है।

लिख रह हूँ मैं अंजाम जिसका कल आगाज़ आएगा… मेरे लहू का हर एक कतरा इंकलाब लाएगा।

सोशल मीडिया से रातों-रात स्टार बने ये चेहरे!

हमने अपने प्रिय अभिनेताओं की कई संघर्ष भरी कहानियां सुनी हैं उनकी सफलता के पीछे कई वर्षों की कड़ी मेहनत होती थी। लेकिन आज की कहानी कुछ और है, सोशल मीडिया ने कई लोगों के लिए वरदान का काम किया है, जिससे उन्हें तुरंत प्रसिद्धि और सफलता मिली है। इंटरनेट के जमाने में सोशल मीडिया इतनी पावर फुल हो गई है कि सिर्फ एक क्लिक में वो किसी भी किस्मत पलट सकती है।

आज इस पोस्ट में हम आपको कुछ ऐसे लोगों के बारे में बताने जा रहे हैं सोशल मीडिया से रातों-रात स्टार बन गए, चलिए जानते हैं:-

भुबन बड्याकर

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के कुरालजुरी गांव के रहने वाले बड्याकर उस समय रातों-रात सनसनी बन गए, जब एक यूट्यूब चैनल ने उनका एक वीडियो अपलोड किया, जिसमें उन्होंने ‘कच्चा बादाम‘ गाना गाया था।

यह गाना अब फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हर जगह सुना जा रहा है। बच्चों से लेकर बूढ़ों तक सभी को यह गाना पसंद आ रहा है। फेमस होने से पहले वे मूंगफली बेचा करते थे।

दरअसल काचा बादाम का मतलब कच्ची मूंगफली होता है। बंगाल में मूंगफली को बादाम कहते हैं। भुबन घर की टूटी-फूटी चीज़ों के बदले में मूंगफली बेचते थे।

सहदेव दिर्दो

साल 2021 में छत्तीसगढ़ के 12 साल के सहदेव दिर्दो ने एक खास लहजे में ‘बच्चन का प्यार‘ गाना गाकर रातों-रात सनसनी मचा दी थी। वायरल वीडियो में सहदेव अपनी क्लास के अंदर ‘बचपन का प्यार’ गाना गाते हुए नजर आ रहे थे।

सहदेव का वीडियो लोगों को काफी पसंद आया था, जिस वजह से हर कोई इस पर रील बना रहा था। इतना ही नहीं, कई बॉलीवुड स्टार्स ने भी सहदेव के वीडियो पर रील बनाई है।

 

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इस वीडियो को देखने के बाद रैपर बादशाह ने उनके साथ एक म्यूजिक वीडियो भी बनाया, जो काफी हिट साबित हुआ। इसके अलावा सहदेव को कई टीवी शो में बतौर गेस्ट भी देखा गया था।

दानानीर मोबिन

पिछले साल, पाकिस्तान के 19 वर्षीय दानानीर मोबिन के ‘पावरी हो रही है‘ वीडियो ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया था। लोगों ने उनकी पार्टी को ‘पावरी’ कहकर इतना पसंद किया कि दाननीर रातों-रात इंटरनेट स्टार बन गई।

 

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उनका वीडियो वायरल होते ही सभी ने उन्हें गूगल पर सर्च करना शुरू कर दिया। दाननीर मोबीन के इंस्टाग्राम पर 1.9 मिलियन फॉलोअर्स हैं।

प्रिया प्रकाश वारियर

2018 में एक लड़की का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वह लड़की कोई और नहीं बल्कि मलयालम एक्ट्रेस प्रिया प्रकाश वारियर थीं, हालांकि वीडियो वायरल होने के बाद लोगों को उनके बारे में पता चला।

वायरल हुए वीडियो ने लाखों लोगों का दिल चुरा लिया। वह 2018 में भारत में Google के माध्यम से सबसे अधिक खोजी जाने वाली शख्सियत बन गईं।

रानू मंडल

सोशल मीडिया की सनसनी बनने की कहानी में रानू मंडल का नाम भी आता है। पश्चिम बंगाल के राघाट रेलवे स्टेशन पर भीख मांगकर गुजारा करने वाली रानू ने सपने में भी नहीं सोचा था कि वो एक सोशल मीडिया स्टार बन जाएगी।

वह लता मंगेशकर  के गाने गाकर भीख मांगती थीं और किसी ने उनका “एक प्यार का नगमा है” गाने का वीडियो रिकॉर्ड कर उसे सोशल मीडिया पर डाल दिया। सिर्फ एक छोटे से वीडियो ने रातों-रात रानू मंडल को पूरे देश में मशहूर कर दिया।

प्रोफेसर संजीव श्रीवास्तव

2018 में मध्य प्रदेश के विदिशा के रहने वाले प्रोफेसर संजीव श्रीवास्तव डांसिंग अंकल के नाम से मशहूर हुए। संजीव श्रीवास्तव गोविंदा शैली में नृत्य करने की अपनी प्रतिभा के लिए चर्चा में आए।

संजीव श्रीवास्तव का डांस टैलेंट तब सामने आया जब उन्होंने एक शादी समारोह में गोविंदा का मशहूर गाना “आपके आ जाने से” पर परफॉर्म किया।

संजीव श्रीवास्तव ने गोविंदा के सटीक डांस मूव्स को कॉपी कर सबको चौंका दिया और उनका डांस सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो गया।

इतना ही नहीं मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर उनके वीडियो की तारीफ की। संजीव श्रीवास्तव को भी गोविंदा के साथ टीवी रियलिटी शोज में उनके टैलेंट की वजह से डांस करने का मौका मिला।

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विक्रम साराभाई के बारे में कुछ रोचक तथ्य!

विक्रम साराभाई एक भारतीय भौतिक विज्ञानी और खगोलशास्त्री थे जिन्होंने अंतरिक्ष अनुसंधान शुरू किया और भारत में परमाणु ऊर्जा विकसित करने में मदद की। उन्हें विज्ञान का जनक भी कहा जाता है, इसका कारण विज्ञान के क्षेत्र में उनका बेजोड़ योगदान है।

इस पोस्ट में विक्रम साराभाई के बारे में कुछ रोचक तथ्य दिए गए हैं जिनके बारे में हम में से बहुत से लोग नहीं जानते हैं तो चलिए जानते हैं :-

  • विक्रम साराभाई का पूरा नाम विक्रम अंबालाल साराभाई था उनका जन्म पश्चिमी भारत में गुजरात राज्य के अहमदाबाद शहर में 12 अगस्त 1919 को हुआ था। वह गुजरात के एक संपन्न परिवार से थे, जिसके पास भारत में कई मिलों और उद्योगों का स्वामित्व था। उनका परिवार समाज के वंचित लोगों के लिए किए गए सामाजिक कार्यों के लिए जाना जाता था।
  • उन्होंने अहमदाबाद में गुजरात कॉलेज से अपनी शिक्षा प्राप्त की और फिर कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में अध्ययन करने के लिए इंग्लैंड चले गए।
  • उन्होंने प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्यांगना मृणालिनी साराभाई से शादी की। हालाँकि, उनके परिवार के सदस्य शादी में शामिल नहीं हो सके क्योंकि वे महात्मा गांधी के नेतृत्व वाले भारत छोड़ो आंदोलन का एक मजबूत हिस्सा थे।
  • विक्रम साराभाई कला और संस्कृति के संरक्षक थे और उन्होंने अपनी पत्नी मृणालिनी साराभाई के साथ मिलकर प्रदर्शन कला की दर्पण अकादमी की स्थापना की।
  • भारत को स्वतंत्रता मिलने के बाद, विक्रम साराभाई ने विज्ञान के क्षेत्र में शोध कार्य के लिए परिवार और दोस्तों द्वारा स्थापित एक धर्मार्थ ट्रस्ट की मांग की। यह अहमदाबाद में भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला की उत्पत्ति थी जो आज तक अंतरिक्ष और विज्ञान के लिए एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थान है।
  • उन्होंने भारत सरकार को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की स्थापना के लिए राजी किया। यह रूसी उपग्रह स्पुतनिक के प्रक्षेपण के तुरंत बाद था, और विक्रम साराभाई ने सरकार को यह स्पष्ट कर दिया कि भारत भी चंद्रमा पर कदम रखने वाले राष्ट्रों की लीग में हो सकता है। तब वह केवल 28 वर्ष के थे।
  • विक्रम साराभाई के प्रयास ही भारत में टेलीविजन लाए। नासा के साथ उनके लगातार संचार ने 1975 में सैटेलाइट इंस्ट्रक्शनल टेलीविज़न एक्सपेरिमेंट (SITE) का आधार बनाया। इसने भारत में केबल टेलीविजन के आने को और आगे बढ़ाया।

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  • यह सुनिश्चित करने के लिए कि समाज का समग्र विकास विवेकपूर्ण तरीके से हो, उन्होंने कई संस्थानों की स्थापना की, जिनमें शामिल हैं:-
  1. भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल), अहमदाबाद
  2. भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), अहमदाबाद
  3. सामुदायिक विज्ञान केंद्र, अहमदाबाद
  4. प्रदर्शन कला के लिए दर्पण अकादमी, अहमदाबाद (उनकी पत्नी के साथ)
  5. विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र, तिरुवनंतपुरम
  6. अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र, अहमदाबाद (साराभाई द्वारा स्थापित छह संस्थानों/केंद्रों के विलय के बाद यह संस्थान अस्तित्व में आया)
  7. फास्टर ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर (एफबीटीआर), कलपक्कम
  8. परिवर्तनीय ऊर्जा साइक्लोट्रॉन परियोजना, कलकत्ता
  9. इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ईसीआईएल), हैदराबाद
  10. यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल), जादूगुडा, बिहार
  • वह 1961 में कस्तूरभाई लालभाई के साथ भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM), अहमदाबाद के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। यह देश में स्थापित होने वाला दूसरा आईआईएम था।
  • उनके दूरदर्शी कार्यों के लिए उन्हें 1966 में पद्म भूषण और 1972 में (उनके निधन के बाद) पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था।

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  • विक्रम साराभाई ने 1971 में ‘परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग’ पर ‘चौथे संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन’ के उपाध्यक्ष के रूप में भारत का नाम रौशन किया।
  • उन्होंने थुम्बा इक्वेटोरियल रॉकेट लॉन्चिंग स्टेशन (Thumba Equatorial Rocket Launching Station) को विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और भारत में साउंडिंग रॉकेट बनाने के लिए एक कार्यक्रम शुरू किया।
  • चंद्रयान 2 के लैंडर का नाम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया था। जिसे 20 सितंबर, 2019 को एक चंद्र दिन के लिए कार्य करने के लिए डिज़ाइन किया गया था, जो लगभग 14 पृथ्वी दिनों के बराबर था।
  • विक्रम साराभाई की बच्चों को विज्ञान शिक्षा प्रदान करने में गहरी रुचि थी जिसके लिए उन्होंने सामुदायिक विज्ञान केंद्रों की अवधारणा की।
  • 30 दिसंबर 1971 को 52 वर्ष की उम्र में केरल के कोवलम के हल्सियोन कैसल में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। ऐसा कहा जाता है कि वह थुंबा इक्वेटोरियल रॉकेट लॉन्चिंग स्टेशन की आधारशिला रखने के लिए तिरुवनंतपुरम गए थे।

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जानें दुनिया के सबसे डरावने भुतहा जंगल के बारे में, दिन में भी जाने से डरते हैं लोग!

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दुनिया में कई तरह के स्थान हैं। ऐसे कई स्थान हैं जहां जाने के बाद मन को शांति और सुकून मिलता है। वहीं कई इतनी रहस्यमय जगह और भुतहा जंगल हैं, जहां लोग जाने से डरते हैं।

आज हम आपको ट्रांसिल्वेनिया प्रांत के एक भुतहा जंगल के बारे में बताने जा रहे हैं। यह जगह रोमानिया के ट्रांसिल्वेनिया में स्थित है, जहाँ ऐसी रहस्यमय घटनाएं घटती हैं कि लोग वहाँ जाने से भी कतराते हैं।

यह जगह है “होया बासु” , जिसे दुनिया में सबसे अधिक भुतहा जंगलों में से एक माना जाता है। यहां होने वाली रहस्यमयी घटनाओं के कारण इस जगह को ‘रोमानिया का बरमूडा त्रिकोण‘ या ट्रांसिल्वेनिया कहा जाता है।

होया बासु जंगल लगभग 700 एकड़ में फैला हुआ है। ऐसा माना जाता है कि इस जंगल में प्रवेश करते ही लोग रहस्यमय तरीके से गायब हो जाते हैं। जंगल में अब तक सैकड़ों लोग लापता हो चुके हैं, जिनका कोई सुराग नहीं मिला है।

होया बासु के जंगल में पेड़ मुड़े और टेढ़े दिखाई देते हैं, जो रोशनी में भी डरावने लगते हैं। लोग इस जगह को यूएफओ और भूत के साथ जोड़ते हैं। इसके अलावा यह कहा जाता है कि यहां कई लोग रहस्यमय तरीके से गायब हो गए हैं।

पहली बार होया बासु वन के बारे में लोगों को तब पता चला जब इस क्षेत्र में एक चरवाहा लापता हो गया। सदियों पुरानी कथा के अनुसार, जंगल में जाते ही वह व्यक्ति रहस्यमय तरीके से गायब हो गया। आश्चर्य की बात यह है कि यह उस समय वह 200 भेड़ों के साथ था जोकि उसके साथ ही गायब हो गई थीं।

कुछ साल पहले एक सैन्य तकनीशियन ने दावा किया था कि उसने इस जंगल में एक उड़ने वाली चट्टान को देखा है। इसके अलावा 1968 में एमिल बरनिया नामक एक व्यक्ति ने आकाश में एक अलौकिक शरीर होने का दावा किया था।

यहां आने वाले कुछ पर्यटकों ने भी कुछ इसी तरह की घटनाओं का उल्लेख किया था। लोगों का कहना है कि इस जंगल में रहस्यमयी शक्तियों का निवास है।

यहां लोगों को अजीब सी आवाजें भी सुनाई देती हैं। यही कारण है कि इस जंगल को बहुत ही भयानक कहा जाता है। इसी तरह की एक घटना वर्ष 1870 में हुई थी जब पास के गाँव में रहने वाले एक किसान की बेटी गलती से इस जंगल में घुस गई और उसके बाद गायब हो गई।

लोग उस समय हैरान रह गए जब वह लड़की ठीक पाँच साल बाद जंगल से वापस आई, लेकिन वह अपनी याददाश्त पूरी तरह खो चुकी थी। हालांकि, कुछ समय बाद उसकी भी मौत हो गई।

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आखिर क्यों कहा जाता है इस जंगल को “सुसाइड पॉइंट”?

दुनिया बहुत सी अनगिनत रहस्य्मय जगहों से भरी पड़ी है। जिनके बारे में इंसान तो क्या बल्कि वैज्ञानिक भी पता नहीं लगा पाए हैं। आज के इस लेख में हम आपको एक ऐसी रहस्यमयी जगह के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे ‘सुसाइड फॉरेस्ट या सुसाइड पॉइंट” के नाम से जाना जाता हैं तो चलिए जानते हैं :-

कहाँ पर है ये फॉरेस्ट

सुसाइड फॉरेस्ट माउंट फूजी के नॉर्थवेस्ट में स्थित है। यह इलाका प्राकृतिक रूप से बेहद खूबसूरत है, यहां करीब 300 साल पुराने अद्भुत पेड़ हैं। यह 35 स्क्वेयर किमी के बड़े एरिया में फैला हुआ है। यह जंगल इतना घना है कि इसे पेड़ों का सागर भी कहते हैं।

ऐसा कहा जाता है कि इस जंगल में जो एक बार चला गया उसका वापस लौटकर आना बेहद मुश्किल है। यहां आने के बाद लोग आत्महत्या कर लेते हैं। इस वजह से इस जंगल को ‘सुसाइड फॉरेस्ट‘ कहा जाता है।

इसे सुसाइड प्वाइंट में दूसरा स्थान मिला है। यह जापान की राजधानी टोक्यो से महज दो घंटे से भी कम दुरी पर है।

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क्या है कारण आत्महत्या का

ओकिघारा सुसाइट फॉरेस्ट आत्महत्या करने के लिए यह दुनिया की सबसे मशहूर जगह है। यहां 2002 में ही 78 लोगों ने आत्महत्या की थी। कहा जाता है कि एक बार प्राचीन जापान में जब कुछ लोग अपना भरण-पोषण करने में असमर्थ थे तो उन्हें ओकिघारा के इस जंगल में छोड़ दिया गया था,

जहां पर उन सबकी भूख, प्यास से मौत हो गई थी और वही भूत इस जंगल में आज शिकार करते हैं। कहा तो यह भी जाता है कि जिन लोगों ने यहां सुसाइड किया है उनकी आत्माओं का भी यहां वास है।

जापान के ज्योतिषियों का कहना है कि जंगलों में आत्महत्या के पीछे पेड़ों पर रहने वाली शक्तियों का हाथ है, जो इस तरह की घटनाओं को अंजाम देती रहती हैं।

ऑफिशल रेकॉर्ड्स के अनुसार 2003 से यहाँ पर करीब 105 डेडबॉडीज खोजी जा चुकी हैं इनमें से ज्यादतर बुरी-तरह सड़ चुकी थीं, और कुछ को जानवरों ने खा लिया था।

जंगल के एंट्री पर लगे बोर्ड़ पर लिखा है अजीब मैसेज

इस जंगल के एंट्री पर एक बोर्ड लगा हुआ है जिसमें लिखा है- ‘ध्यान से अपने बच्चों, परिवार और अपने जीवन के बारे में सोचें जोकि आपके माता-पिता का दिया अनमोल तोहफा है’।

अब ऐसे अजीबो गरीब मैसेज पढ़ने के बाद हर कोई डर जाता है और हैरानी वाली बात तो यह है कि इस जंगल में कोई भी मॉडर्न टेक्नॉलजी जैसे कम्पस, मोबाइल फोन काम नहीं करते।

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स्टैग बीटल: दुनिया का सबसे महंगा कीट जो आपको रातों रात बना सकता है करोड़पति

दुनिया में बहुत से लोग पालतू जानवर रखने के शौकीन होते हैं और उनकी देखभाल के लिए वे हजारों रुपये खर्च करते हैं। पहले हमने आपको बच्चों के साथ जल्दी घुल-मिल जाने वाले पालतू कुत्तों के बारे में जानकारी दी थी और आज इस लेख में हम बात कर रहे हैं “स्टैग बीटल” की, जिसकी कीमत जानकर आप हैरान रह जायेंगे, तो चलिए जानते हैं :-

स्टैग बीटल बना सकता है आपको करोड़पति

जहां कई लोग कीड़ों से नफरत करते हैं, वहीं एक ऐसा कीड़ा भी हैं जिसे पाने के लिए लोग एक दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह रातों-रात किसी को भी करोड़पति बना सकती है।

दुनिया इस सबसे महंगे कीट को हरिण भृंग के नाम से जानती है। यह भृंग केवल 2 से 3 इंच आकार का होता है और इसे पृथ्वी पर सबसे छोटी, सबसे अजीब और दुर्लभ प्रजातियों में से एक कहा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस कीट से कई तरह की दवाएं भी बनाई जाती हैं।

क्यों है स्टैग बीटल इतना महंगा?

आम लोगों की बात की जाये करें तो शायद ही कोई कीड़े के लिए एक पैसा भी खर्च करे, लेकिन इस दुर्लभ बीटल के लिए लोग हजारों खर्च करने को तैयार रहते हैं। हरिण भृंग लुकानिडे परिवार का सदस्य है, जो इसकी 1,200 कीट प्रजातियों में से एक है.

यह 5 सेमी (2 इंच) का कीड़ा अपनी अलग और अजीब प्रजाति के कारण सबसे महंगे जानवरों में से एक माना जाता है। इसकी मुख्य पहचान इसके ब्लैकहैड से निकलने वाले इसके सींग हैं।

इसका औसत आकार 2 से 4.8 इंच के बीच होता है। कुछ साल पहले एक जापानी ब्रीडर ने अपनी स्टैग बीटल को 89,000 डॉलर (करीब 65 लाख रुपये) में बेचा था। अब लोग इसके लिए करोड़ों रुपये देने को तैयार हैं ।

क्या खाते हैं स्टैग बीटल

स्टैग बीटल के लार्वा सड़ती हुई लकड़ी को खाते हैं। वे सुरंगों और कक्षों के एक विशिष्ट नेटवर्क को पीछे छोड़ते हैं। वयस्क स्टैग बीटल फलों के रस, पेड़ के रस और पानी को भोजन के रूप ग्रहण करते हैं।

इनकी जीभ नारंगी रंग की होती है। वयस्क स्टैग बीटल ठोस लकड़ी को नहीं खा सकते हैं। स्टैग बीटल एक वयस्क बनने के बाद कुछ ही महीनों तक जीवित रहते हैं।

कुछ रोचक तथ्य

इन कीड़ों के सिर और वक्ष चमकदार काले और पंखों के मामले शाहबलूत भूरे रंग के होते हैं।

नर स्टैग बीटल में बड़े जबड़े होते हैं जो हिरण के सींग की तरह दिखते हैं। मादाओं के इतने ‘बड़े मुंह’ नहीं होते हैं, लेकिन उनके जबड़े वास्तव में पुरुषों की तुलना में बहुत मजबूत होते हैं।

नर हरिण भृंग अक्सर संभोग के मौसम के दौरान अन्य नरों से कुश्ती लड़ने के लिए अपने सींगों का उपयोग करते हैं। वे एक दूसरे को पकड़ने की कोशिश करते हैं और विजेता हारने वाले को जमीन पर फेंक देता है।

अधिकांश स्टैग बीटल एक वयस्क के रूप में उभरने के बाद केवल कुछ हफ्तों तक रहते हैं। इनके लिए गर्म जगहें ज्यादा उपयोगी साबित होती हैं क्योंकि सर्दियों के दौरान कई स्टैग बीटल मर जाते हैं। सर्द जगहों पर भी ये कीड़े खाद के ढेर जैसी गरम जगहों में जिंदा रह सकते हैं। स्टैग बीटल अंडे से वयस्क होने तक सात साल का जीवन चक्र पूरा करता है।

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जानिए अपनी राशि के अनुसार किस रंग से खेलें होली

वैसे तो हर त्यौहार का अपना एक रंग और महत्व होता है, लेकिन हरे, पीले, लाल, गुलाबी आदि असल रंगों का त्यौहार होली बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। होली के आते ही वातावरण में एक मस्ती का आलम छा जाता है।

होली के दिन रंगों के माध्यम से सारी भिन्नताएं मिट जाती हैं और सब बस एक रंग के हो जाते हैं। हर किसी का तन-मन, प्रेम-उल्लास और उमंग के रंगों की फुहार से भर जाता है।

आइए जानते हैं अपनी राशि के अनुसार किस रंग से खेलें होली।

कब है होली

होली 2019 तिथि की बात करें तो, इस बार होली 21 मार्च 2019 को है और 20 मार्च 2019 को होलिका दहन है। होलिका दहन और होली के शुभ मुहूर्त का समय 20 मार्च की सुबह 10:44 से शुरू होकर 21 मार्च की शाम 07:12 तक है।

क्यों मनाई जाती है होली

हिन्दू मान्यताओं के अनुसार हिरण्यकश्यप के पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु की भक्ति में लीन रहते थे। उनकी इस भक्ति से उनके पिता हिरण्यकश्यप नाखुश थे, इसीलिए उनके पिता ने अपने पुत्र को भगवान की भक्ति से हटाने के लिए कई प्रयास किए।

हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को यह वरदान प्राप्त था कि वह आग में नहीं जल सकेगी। एक बार हिरण्यकश्यप ने अपनी ही बहन होलिका के जरिए प्रह्लाद को जिंदा जला देने का आदेश दिया, लेकिन भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की।

जब होलिका प्रह्लाद को जलाने के लिए आग में बैठी, तो वह खुद जल कर मर गई। तभी से इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में जाना जाता है और हिन्दू धर्म में होलिका दहन की परंपरा प्रचलित है। होलिका दहन से अगले दिन दुलहंडी (होली) खेला जाता है।

अपनी राशि के अनुसार किस रंग से खेलें होली

मेष – वृश्चिक राशि

इन राशियों का स्वामी मंगल है, जो ऊर्जा का कारक है और वहीं गुस्से का भी। इन दोनों राशि के लोगों के लिए गुलाबी और पीला रंग उत्तम रहेगा।

वृषभ – तुला राशि

इन राशियों का स्वामी शुक्र है और शुभ रंग सिल्वर है, लेकिन इस कलर का उपयोग करना ठीक नहीं रहेगा। इन दोनों राशि के लोग आसमानी और हल्के नीले रंगों का प्रयोग करें और अपने आसपास के माहौल को खुशनुमा बनाएं।

मिथुन – कन्या राशि

इन राशियों का स्वामी बुध है। इन राशि के लोग हल्के हरे रंग, गुलाबी, पीले, नारंगी, आसमानी रंगों का प्रयोग कर इस त्योहार को यादगार बनाएं।

कर्क राशि

इस राशि का स्वामी चन्द्रमा है। इसका रंग सफेद है, इसीलिए आप कोई भी रंग दही में मिलाकर प्रयोग करें। इस प्रकार रंगों भरी होली भी हो जाएगी और दही के प्रयोग से चेहरे पर हानिकारक प्रभाव भी कम होगा। इस राशि के लोग भावुक होते हैं, तो उनके साथ होली की मस्ती सादगी से ही होनी चाहिए।

सिंह राशि

इस राशि का स्वामी सूर्य है, इसीलिए इस राशि के रंग भी बड़े सुहावने हैं, जैसे गुलाबी हल्के हरे, नारंगी, पीले आदि। इन रंगों से आपका प्रभाव भी बढ़ेगा। इस राशि वाले लोग उत्साही होते हैं, तो इनके साथ खूब मस्ती वाली होली खेली जा सकती है।

मकर – कुंभ राशि

इन राशियों का स्वामी शनि है और इनका रंग आसमानी, नीला और फिरोजी होता है। ये राशि के लोग हरे रंग का भी प्रयोग कर सकते हैं। इन राशि वालों के साथ होली खेलना बड़ा ही दिलचस्प होता है।

धनु – मीन राशि

इन राशियों का स्वामी गुरु है, जो संत प्रवृत्ति का कारक है। इनका रंग पीला, नारंगी और गुलाबी हैं। ये राशि वाले लोग सादगीपसंद होते हैं। इनके साथ सलीके से होली खेलकर इनका दिल जीत सकते हैं।

होली पूजन विधि

लकड़ी और कंडों की होली के साथ घास लगाकर होलिका खड़ी करके उसका पूजन करने से पहले हाथ में असद, फूल, सुपारी, पैसा लेकर पूजन कर जल के साथ होलिका के पास छोड़ दें और अक्षत, चंदन, रोली, हल्दी, गुलाल, फूल तथा गूलरी की माला पहनाएं।

इसके बाद होलिका की तीन परिक्रमा करते हुए नारियल का गोला, गेहूं की बाली तथा चना को भूंज कर इसका प्रसाद सभी को वितरित करें। होली की पूजा करने से घर में सुख-शांति, समृद्धि, संतान प्राप्ति होती है।

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