शैतान की केतली के नाम से जानी जाती है ये जगह, जहाँ पूरी की पूरी नदी समा जाती है

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कुदरत द्वारा बनाई गई ये दुनिया बहुत ही अजीबो-ग़रीब चीज़ों और रहस्यों से भरी पड़ी है। इन रहस्यों को सुलझाने के लिए हमारे वैज्ञानिक और विशेषज्ञ लगातार कोशिश करते रहते हैं। कुछ रहस्यों पर से तो पर्दा उठ गया है लेकिन कुछ रहस्य अभी भी अनसुलझे हैं।

इन्हीं में से एक है (The Devil’s Kettle) ‘द डेविल्स कैटल’। ये अमेरिका में स्थित एक झरना है, जिसके पास एक कड़ाहीनुमा छेद है, जिसमें पूरी नदी का पानी समा जाता है। ये आश्चर्यचकित करने वाली बात है कि छोटे से इस छेद में कैसे पूरी नदी का पानी समा जाता है और ये पानी आखिर जाता कहां है?

आज के इस लेख में हम आपको इसी रहस्य्मयी झरने के बारे में बताने जा रहे हैं, तो चलिए शुरू करते हैं।

mysterious place The Devil's Kettle

रहस्यों से भरा ये ख़ूबसूरत झरना ‘सुपीरियर लेक’ के उत्तरी किनारे पर (Minnesota) मिनेसोटा में (Judge C. R. Magney State Park) जज सीआर मैगनेसी पार्क में है।

इस झरने का स्तोत्र ब्रुल नदी का पानी है, जो घुमावदार, संकरीले चट्टानी रास्तों से नीचे की ओर गिरता है। झरने की तरह गिरता हुआ ये पानी एक छोटे से छेद में समा जाता है। इस झरने के नाम है ‘द डेविल्स कैटल’ जिसका मतलब ‘शैतान की कड़ाही’ होता है। इसे शैतान की केतली के नाम से भी जाना जाता है।

हालांकि, वैज्ञानिकों ने कई बार इस बात का पता लगाने की कोशिश की है कि आख़िर ये पानी कहां जाता है? लेकिन वे इसके रहस्य से पर्दा उठाने में विफल रहे हैं।

वैज्ञानिकों ने पानी का रास्ता पता लगाने के लिए वॉटरफ़ॉल में पिंग-पॉन्ग बॉल, कलर डाई आदि डाला, ताकि ये रहस्य खुल सके, लेकिन इससे भी कुछ हासिल नहीं हुआ।

झरने का गैलनों लीटर पानी इस कुंड से कहां ग़ायब हो जाता है इसका पता लगाने के कई प्रयास किए गए, लेकिन ये रहस्य अभी तक ज्यों का त्यों है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, सदियों पहले जब साइंस इतना ज्यादा डेवलप नहीं हुआ था तब लोग हर तरह की अनोखी और रहस्यमी चीजों को या तो भगवान से जोड़ देते थे, या तो फिर शैतान से। माना जाता है कि पूरी की पूरी नदी के समा जाने के बाद भी यह कुंड कभी भरता नहीं । इस वजह से स्थानीय लोग इसे Devil’s Kettle कहने लगे।

जाने कैसा रहेगा शारदीय नवरात्रि 2023 का आपकी राशियों पर प्रभाव

शारदीय नवरात्रि का आरंभ आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होता है। इस साल शारदीय नवरात्रि 15 अक्टूबर 2023 से शुरू होने जा रही है। जो 24 अक्टूबर को समाप्त होगा। विजयादशमी यानी दशहरा 24 अक्टूबर को है।

नवरात्रि के नौ दिन बहुत पवित्र माने जाते हैं। हर साल मां अंबे के भक्त पूरी श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ शारदीय नवरात्रि का त्योहार मनाते हैं। इस दौरान मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है।

शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों में मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्रि स्वरूप का दर्शन-पूजन किया जाता है। नौ शक्तियों के मिलन को नवरात्रि कहते हैं।

नवरात्रि में लोग अपनी आध्यात्मिक और मानसिक शक्तियों में वृद्धि के लिए उपवास, संयम, नियम, भजन,पूजन और योग साधना करते हैं। नौ दिनों तक दुर्गासप्तशती का पाठ, हवन और कन्या पूजन अवश्य करना चाहिए।

Shardiya Navratri

नवरात्रि पर्व का राशियों पर होने वाला असर

नवरात्रि पर्व सभी के लिए बहुत-सी खुशियां लेकर आता है। प्रत्येक मनुष्य अपने जीवन में सुख-समृद्धि, यश-वैभव, आर्थिक-मानसिक एवं शारीरिक सुख की चाहत रखता है। जानिए चैत्र नवरात्रि का आपकी राशियों पर क्या प्रभाव होगा।

मेष राशि– मेष राशि का स्वामी मंगल ग्रह को माना गया है। अगर आप नवरात्रि में नौ दिनों तक सिद्धिकुंजिकस्तोत्र का पाठ करते है तो माता आपको मकान, जमीन या वाहन सम्बंधित सुख पा सकते है। इसके साथ ही आप शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों तक किसी असहाय लोगों की मदद करते है तो आपके ऊपर माता रानी की कृपा हमेशा बनी रहेगी।

वृष राशि – वृष राशि का स्वामी शुक्र ग्रह को माना गया है। आप नवरात्रि में नौ दिनों तक सप्तश्लोकी दुर्गा का पाठ करते है तो माता की विशेष कृपा आप पर बनी रहेगी। वित्तीय स्थिति बहुत बेहतर होगी। इसके साथ आप माता के नाम का जप निरन्तर करते रहें। ऐसा करने से आपको जीवन में कभी भी कोई बड़ी बिमारियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।

मिथुन राशि– मिथुन राशि का स्वामी बुध ग्रह को माना गया है। आप नवरात्रि में दुर्गासप्तशती का पाठ करते है तो माता रानी आप पर प्रसन्न रहेगी। इसके साथ ही आपको जमीन या मकान व वाहन सुख मिलेगा। आपके जीवन से सभी तरह के अनिष्ट का नाश हो जाता है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। इसके साथ ही चिंताओं, क्लेश, शत्रु बाधा से मुक्ति मिलेगी।

कर्क राशि – कर्क का स्वामी चंद्रमा को माना गया है। आप नवरात्रि में माता की उपासना के साथ- साथ शिव उपासना भी करें। ऐसा करने से माता रानी आपको साहसी और पराक्रमी बनने का वरदान देगी। इसके साथ ही जातक को आध्यात्मिक शक्ति मिलती है। धन में कभी भी कमी नहीं आती है। परिवार में खुशियां बनी रहती है।

सिंह राशि – सिंह राशि का स्वामी सूर्य देव को माना गया है। अगर आप शारदीय नवरात्रि में नौ दिनों तक सिद्धिकुंजिकस्तोत्र का पाठ करते है तो संतान को करियर में सफलता मिलेगी। धन की प्राप्ति होगी। इसके साथ आपको श्री रामचरितमानस का सम्पूर्ण पाठ करनी चाहिए, जिसके आपके जीवन में माता रानी के साथ- साथ भगवान राम की कृपा आपके ऊपर बनी रहेगी।

कन्या राशि – कन्या राशि का स्वामी बुध ग्रह होता है। आप पूरे नवरात्रि में प्रतिदिन दुर्गासप्तशती एवं अरण्यकाण्ड का पाठ करने से आपके जीवन से सभी प्रकार के कलह का नाश हो जायेगा। इसके साथ ही छात्रों को विदेश यात्रा करने का मौका भी मिल सकता है और छात्रों को नौकरी में सफलता मिलेगी।

तुला राशि – तुला राशि का स्वामी शुक्र ग्रह को माना गया है। तुला राशि के जातक को इस नवरात्रि में सप्तश्लोकी दुर्गा का 8 बार पाठ करना चाहिए। ऐसा करने से आपके जीवन में धन तथा सुख समृद्धि ‘ में वृद्धि आएगी। इसके साथ ही समस्त अमंगलों का नाश होता है। माता की कृपा से सुख-शातिं, यश-कीर्ति, धन-धान्य, आरोग्य, बल बुद्धि की प्राप्ति होगी।

वृश्चिक राशि – वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल ग्रह को माना गया है। आप नवरात्रि में दुर्गासप्तशती एवं श्री रामचरितमानस का पाठ करें। इस उपाय को करने से साधक को मानसिक और शारीरिक सुख मिलेगा। कोर्ट-कचहरी आदि से जुड़े मामलों में विजय प्राप्ति का वरदान मिलेगा। इसके साथ ही शत्रु बाधा भी दूर होती है।

धनु राशि – धनु राशि का स्वामी बृहस्पति ग्रह को बताया गया है। आप इस नवरात्रि में दुर्गासप्तशती का सम्पूर्ण पाठ करें। ऐसा करने से आपको धन की प्राप्ति के साथ- साथ कोई बड़ा पुरस्कार प्राप्त होगा। मकान व वाहन सुख की प्राप्ति होगी। इसके साथ ही आप सिद्धिकुंजिकस्तोत्र व सप्तश्लोकी दुर्गा का भी पाठ करें, जिससे आपके जीवन में सुख समृद्धि आएगी।

मकर राशि – मकर राशि का स्वामी शनि है। मकर राशि के जातकों के लिए 4, व 8 के अंक भाग्यशाली होते हैं। मकर राशि के व्यक्ति अति महत्वाकांक्षी होते हैं। यह सम्मान और सफलता प्राप्त करने के लिए लगातार कार्य कर सकते हैं। शनिदेव का प्रिय रंग काला और नीला है। ऐसे में इस राशि के जातकों को नीले रंग के फूलों से मां दुर्गा की पूजा करनी चाहिए।

कुम्भ राशि – कुम्भ राशि का स्वामी शनि ग्रह को माना गया है। आप शारदीय नवरात्रि में राम रक्षा स्तोत्र का पाठ एवं माता के नाम का 100 बार जप करते है तो आपकी संतान को नौकरी में सफलता मिलेगी। धन की प्राप्ति होगी। इसके साथ ही आपके जीवन में सभी तरह की विपत्तियों से रक्षा होगी। आप भय व कष्टों से मुक्ति मिलेगी।

मीन राशि – मीन राशि का स्वामी गुरु ग्रह को माना गया है। अगर आप पूरे नवरात्रि में दुर्गासप्तशती का पाठ करते है तो आपके जीवन में माता रानी की कृपा बनी रहेगी। इसके साथ ही आपको सुख समृद्धि एवं वाहन सुख मिलेगी। अगर आप व्यापार करने तो आपको उसमे लाभ होगी।

नवरात्रि के एक दिन पहले लगने जा रहा है साल का आखिरी सूर्य ग्रहण

साल का आखिरी सूर्य ग्रहण शारदीय नवरात्रि के शुरू होने से एक दिन पहले यानी 14 अक्तूबर को लगेगा। यह साल 2023 का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण होगा। भारतीय समय के अनुसार यह सूर्य ग्रहण 14 अक्तूबर की रात 08 बजकर 34 मिनट से शुरू होगा जो मध्य रात्रि 2 बजकर 24 मिनट तक चलेगा।

यह सूर्य ग्रहण वलयाकार में होगा। जिसमें आसमान में सूर्य एक अंगूठी यानी रिंग के आकार में नजर आएगा। जिस कारण इसे रिंग ऑफ फायर कहा जाता है।

सूर्य ग्रहण में 12 घंटे पहले से ही सुतक काल लग जाता है, इसलिए इस सूर्य ग्रहण का सूतक काल सुबह 8 बजकर 34 मिनट से शुरू हो जाएगा। वैसे तो साल का आखिरी सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा।

सूर्य ग्रहण क्या है?

सूर्य ग्रहण अमावस्या के दिन होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है और जब तीनों वस्तुएं संरेखित होती हैं। आंशिक सूर्य ग्रहण तब होगा जब चंद्र डिस्क आंशिक रूप से सौर डिस्क को कवर कर लेगी।

कहां-कहां दिखाई देगा यह सूर्य ग्रहण

साल का आखिरी सूर्य ग्रहण को उत्तरी अमेरिका, कनाडा, आइलैंड, अर्जेटीना, क्यूबा, पेरु, उरुग्वे और ब्राजील में देखा जा सकेगा। भारत में यह सूर्य ग्रहण नहीं दिखाई देगा।

ग्रहण के वक्त इन बातों का रखे ध्यान

सूर्य ग्रहण के दौरान कोशिश करना चाहिए कि रखा हुआ भोजन ना करें। मान्यता है कि सूर्य की किरणें, ग्रहण के प्रभाव से दूषित हो जाती हैं, जो आप के रखे हुए भोजन को भी विशैला बना देती है।

ग्रहण के बाद व्यक्ति को स्नान करना चाहिए, साथ ही घर की भा साफ-सफाई करनी चाहिए। यदि आप के घर में पूजा स्थान या मंदिर हो तो उसकी भी सफाई जरूर करें। इससे घर की नकरात्मकता और दोष दूर होते हैं।

सूर्य ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को कुछ खास सावधानियां बरतनी चाहिए। ग्रहण के वक्त उन्हें घर के अंदर ही रहना चाहिए। साथ ही कोशिश करें कि ग्रहण के वक्त वो सोए नहीं, बल्कि ध्यान और जप करें।

सूर्य ग्रहण के बारे में रोचक तथ्य और जानकारी

सूर्य ग्रहण तब लगता है जब चन्द्रमा, धरती और सूर्य के बीच में से होकर गुजरता है। धरती से देखने पर सूर्य पूर्ण अथवा आंशिक रूप से चन्द्रमा द्वारा ढक जाता है।

सूर्य ग्रहणग्रहण से धरती का जो हिस्सा प्रभावित होता है उसे छाया क्षेत्र कहा जाता है।

सूर्य ग्रहण मुख्यत: तीन तरह का होता है। पूर्ण सूर्य ग्रहण, आंशिक सूर्य ग्रहण और वलयाकार सूर्य ग्रहण।

सूर्य ग्रहण तीन प्रकार का होता है
सूर्य ग्रहण तीन प्रकार का होता है
  1. पूर्ण सूर्य ग्रहण

पूर्ण सूर्य ग्रहण उस समय घटित होता है जब चन्द्रमा पृथ्वी के नजदीक रहते हुए पृथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता है। धरती के काफी नजदीक होने के कारण चन्द्रमा धरती के उस भाग को पूरी तरह अपने छाया क्षेत्र में ले लेता है।

इसके फलस्वरूप सूर्य की रोशनी पृ्थ्वी तक पहुँच नहीं पति और पृ्थ्वी पर अंधकार जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इसमेँ पूरे के पूरा सूर्य दिखाई नहीं देता। इस प्रकार होने वाला ग्रहण पूर्ण सूर्य ग्रहण कहलाता है।

  1. आंशिक सूर्य ग्रहण

आंशिक सूर्यग्रहण में सूर्य का केवल कुछ ही भाग चन्दमा द्वारा ढका जाता है। इससे सूर्य का कुछ भाग ग्रहण ग्रास में तथा कुछ भाग ग्रहण से अप्रभावित रहता है। पृथ्वी के उस क्षेत्र विशेष में लगा ग्रहण आंशिक सूर्य ग्रहण कहलाता है।

  1. वलयाकार सूर्य ग्रहण

वलयाकार सूर्य ग्रहण में चन्द्रमा पृथ्वी के काफ़ी दूर रहते हुए पृथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता है। चन्द्रमा सूरज को इस प्रकार से ढकता है, कि सूरज का केवल बीच वाला हिस्सा ही छाया क्षेत्र में आता है।

पृथ्वी से देखने पर चन्द्रमा द्वारा सूर्य पूरी तरह ढका दिखाई नहीं देता है और सूर्य के बाहर का हिस्सा प्रकाशित होने के कारण यह कंगन या वलय यानि छल्ले के रूप में चमकता दिखाई देता है। कंगन आकार में बने सूर्यग्रहण को ही वलयाकार सूर्य ग्रहण कहलाता है।

सूर्य ग्रहण के बारे में रोचक तथ्य

  • इतिहासकारों और खगोलविदों के अनुसार 14 अक्टूबर, 2134 ई.पू. यानि आज से 4154 साल पहले प्राचीन चीन में  लगने वाला सूर्य ग्रहण मानव इतिहास में दर्ज़ पहला सूर्य ग्रहण था।
  • माना जाता है कि चीनियों की तरह बेबीलोन के निवासी भी ग्रहण की भविष्यवाणी करने में समर्थ थे। उनके द्वारा दर्ज़ पहला ग्रहण मई 3, 1375 ई॰पू॰ में घटित हुआ था।
  • प्राचीन चीनियों की तरह, बेबीलोन के लोगों का भी मानना था कि सूर्य ग्रहण राजाओं और शासकों के लिए अपशकुन था।
  • किंवदंती के अनुसार चीन में सौर ग्रहणों को सम्राट के स्वास्थ्य और सफलता के साथ जुड़ा माना जाता था। और यह अनुमान लगाने में नाकाम रहने का मतलब था कि सम्राट को खतरे में डालना।
  • सूर्य ग्रहण की भविष्यवाणी करने समर्थ होने के बाद वे ग्रहण के दौरान सम्राट की गद्दी पर एक अस्थाई सम्राट की नियुक्ति कर देते थे। इससे असली सम्राट देवताओं के कोप से बच जाता था, ऐसा उनका मानना था।
  • ह्सी (Hsi) और हो (Ho) नाम के दो चीनी ज्योतिषियों को सूर्य ग्रहण की भविष्यवाणी करने में विफल रहने के लिए मृत्युदंड दे दिया गया था। यही पहला दर्ज़ सूर्य ग्रहण था।
  • ग्रीक इतिहासकार हेरोडोटस के अनुसार, 585 ईसा पूर्व में एक सूर्य ग्रहण की वजह से लिडियन और मेड्स के बीच युद्ध रुक गया। दोनों पक्षों ने दिन में अंधेरे आसमान को एक दूसरे के साथ शांति बनाने के संकेत के रूप में देखा।
  • प्राचीन यूनानी खगोलशास्त्रियों ने सबसे पहले ग्रहणों की सटीक भविष्यवाणी करना शुरू किया था।
  • सूर्यग्रहण क्यों होता है, पहले इस बात के कयास ही लगाए जाते थे लेकिन सटीक जानकारी नहीं थी। सन 1609 में  खगोल विज्ञानी जोहान्स केपलर ने पहली बार सूर्यग्रहण का पूर्ण वैज्ञानिक विवरण दिया।
  • 1973 में वैज्ञानिकों ने कॉनकार्ड विमान में अपने उपकरणों के साथ ग्रहण पट्टी पर ग्रहण का तीन हजार किमी तक पीछा किया था और लगभग 72 मिनट तक ग्रहण का अध्ययन किया था।
  • भारत में धारणा है कि ग्रहण के दौरान पका हुआ भोजन दूषित हो जाता है (की मनाही है) लेकिन भारत के खगोलशास्त्री इससे सहमत नहीं हैं। उनके अनुसार यह केवल भ्रांति है।

नवरात्रि के 9 दिनों में, जानिए किस दिन कौन सा भोग लगाएं!!

नवरात्रि का हिन्दु धर्म में बहुत महत्व है। नवरात्रि में दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यता यह है कि जो व्यक्ति मां दुर्गा की पूजा आराधना सच्ची श्रद्धा और निष्ठा से करता है उसे मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

नवरात्रि के पर्व के दौरान माता को प्रसन्न करने के लिए प्रतिदिन माता के स्वरूप के अनुसार, भोग लगाने का भी विधान है। नवरात्रि के नौ दिनों में माता के नौ रूपों- शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघंटा, कूष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।

यह सब माता दुर्गा के स्वरूप हैं। आइए अब जानते हैं कि नवरात्रि के नौ दिनों में माता के इन रूपों को प्रसन्न करने के लिए किन पदार्थों का भोग लगाना शुभ माना जाता है।

माता शैलपुत्री

इस दिन माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है। शैलपुत्री शब्द का अर्थ है पहाड़ों की पुत्री। इस दिन व्रत के बाद रात्रि के समय माता की पूजा करते समय, केले का भोग माता शैलपुत्री को लगाना चाहिए।

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माता ब्रह्मचारिणी

नवरात्रि के दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। इस दिन दुर्गा माता के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा की जाती है, और उन्हें घी या दूध से बने पदार्थों का भोग लगाना शुभ माना जाता है।

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चंद्रघंटा माता

तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की पूजा की जाती है और माता को नमकीन पदार्थों अथवा मक्खन का भोग लगाया जाता है। चंद्रघंटा का अर्थ है चांद के समान चमकने वाली।

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कूष्माण्डा माता

नवरात्रि के चौथे दिन माता कूष्माण्डा की पूजा की जाती है। इस दिन माता के कूष्माण्डा स्वरूप को मिश्री का भोग लगाना चाहिए इसके अलावा आप मिठे पदार्थों का भोग भी माता को लगा सकते हैं।

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स्कंद माता

पांचवे दिन स्कंदमाता की पूजा की जाती है, और माता को सफेद खीर या दूध का भोग लगाना शुभ माना जाता है।

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कात्यायनी माता

माता कात्यायनी की पूजा नवरात्रि के षष्ठम दिन की जाती है। माता को प्रसन्न करने के लिए इस दिन मालपुए का भोग लगाना चाहिए।

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कालरात्रि माता

माता कालरात्रि की पूजा नवरात्रि के सातवें दिन की जाती है। इस दिन दुर्गा माता के कालरात्रि स्वरूप को प्रसन्न करने के लिए शहद का भोग लगाया जाता है।

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महागौरी

नवरात्रि के आठवें दिन माता महागौरी का पूजन किया जाता है। माता महागौरी को इस दिन गुड़ या नारियल का भोग लगाया जाता है।

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सिद्धिदात्री

नवरात्रि के अंतिम दिन माता सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि माता सर्व सिद्धि देने वाली हैं। इस दिन माता को धान के हलवे का भोग लगाना शुभ माना जाता है।

नवरात्रि 2023 :- कहाँ से आए देवी माँ के अस्त्र-शस्त्र, जाने क्या है इनका अर्थ!

नव दुर्गा को पापों की विनाशिनी कहा जाता है, देवी के अलग-अलग स्वरूपों में अलग-अलग अस्त्र-शस्त्र हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि देवी माँ जिन अस्त्र-शस्त्र को धारण करती हैं। उसका उद्देश्य क्या है या फिर ये कहां से आए? आखिर माँ भगवती को ये कहां से मिले?
ऐसी मान्यता है कि देवी को देवताओं ने अपने अस्त्र-शस्त्र व हथियार सौपें थे ताकि असुरों के साथ होने वाले युद्धों में विजय प्राप्त हो व धर्म सदैव स्थापित रहे, अधर्म का नाश हो व सद्मार्ग की गति बनी रहे।
आज हम इस पोस्ट में जानेंगे कहाँ से प्राप्त हुए देवी माँ को ये अस्त्र-शस्त्र, तो चलिए जानते हैं :-

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चक्र

माँ भगवती के हाथों में शोभा देते हुए चक्र को भगवान विष्णु ने भक्तों की रक्षा के लिए देवी को प्रदान किया था। भगवान विष्णु ने ये चक्र खुद अपने चक्र से उत्पन्न किया था।

त्रिशुल

माँ दुर्गा को त्रिशुल स्वयं भगवान शंकर ने भेंट किया था। भगवान शिव ने इसे शूल से त्रिशूल निकालकर मां दुर्गा को भेंट किया था। इस त्रिशुल से देवी ने महिषासुर समेत अन्य असुरों का वध किया था।

शंख

माँ दुर्गा के हाथ में जो शंख है उसे वरुण देव ने भेंट किया था। इस शंख की ध्वनि मात्र से धरती, आकाश और पाताल में मौजूद असुर कांप कर भाग जाया करते थे।

वज्र

देवी माता को अपने वज्र से एक दूसरा वज्र निकालकर देवराज इंद्र ने भेंट किया था। यह वज्र अत्यंत शक्तिशाली था कि  उसके प्रहार से सारी असुरी सेना युद्ध के मैदान से भाग खड़ी हुई थी।

दंड

माँ भगवती को यमराज ने अपने कालदंड से निकालकर दंड भेंट किया था। देवी ने युद्ध भूमि में दैत्यों को दंड पाश से बांधकर धरती पर घसीटा था।

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धनुष-बाण

माँ भवानी को धनुष और बाणों से भरा तरकश स्वयं पवन देव ने भेंट किया था। असुरों से युद्ध के दौरान देवी इसी धनुष और बाणों का प्रहार करती थीं।

तलवार

देवी माँ के हाथों में सुशोभित तलवार और ढाल यमराज ने भेंट की थी। पौराणिक कथाओं के अनुसार माँ भगवती ने असुरों का सर्वनाश इसी तलवार और ढाल से किया था।

घंटा

देवराज इंद्र ने ऐरावत हाथी के गले से घंटा उतारकर देवी को दिया था और इस घंटे की भयंकर ध्वनि से असुरों व दैत्यों को घंटे के नाद से मूर्छित कर के उनका विनाश किया था।

फरसा

भगवान विश्वकर्मा ने माँ दुर्गा को अपनी ओर से फरसा प्रदान किया था। चंड-मुंड का सर्वनाश करने वाली देवी ने काली का रूप धारण कर हाथों में तलवार और फरसा लेकर असुरों से युद्ध किया था।

इस दिन से शुरू हो रहे हैं शारदीय नवरात्रि, जानें घटस्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

आश्विन मास में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्रि शुरू हो जाते हैं। हिंदू धर्म में नवरात्रि का बहुत अधिक महत्व होता है। नवरात्रि के 9 दिनों में मां के 9 रूपों की पूजा- अर्चना की जाती है।

मां को प्रसन्न करने के लिए भक्त व्रत भी रखते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के दौरान विधि- विधान से मां दुर्गा की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।

शारदीय नवरात्रि 2023

हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 14 अक्तूबर को रात 11 बजकर 24 मिनट से लग जाएगी, जो 16 अक्तूबर की सुबह 01 बजकर 13 मिनट तक रहेगी।

इस तरह से उदया तिथि के आधार पर शारदीय नवरात्रि 15 अक्तूबर 2023 से शुरू होगी। वहीं इसका समापन 23 अक्तूबर को होगा और 24 अक्तूबर को दशमी तिथि पर विजयादशमी मनाई जाएगी।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखते हुए कलश स्थापना की जाती है और फिर 9 दिनों तक लगातार देवी आराधना का पर्व मनाया जाता है।

इस साल 15 अक्तूबर को शारदीय नवरात्रि शुरू होने जा रहा है और इस दिन सुबह 11 बजकर 44 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 30 मिनट तक कलश स्थापना का सबसे अच्छा मुहूर्त है। शास्त्रों के अनुसार शुभ मुहूर्त में किया गया कार्य और पूजा-अनुष्ठान हमेशा ही सफल होता है।

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शारदीय नवरात्रि महत्व

धर्म ग्रंथों के अनुसार, नवरात्रि मां भगवती दुर्गा की आराधना करने का श्रेष्ठ समय होता है। इन नौ दिनों के दौरान मां के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है।

नवरात्रि का हर दिन मां के विशिष्ट स्वरूप को समर्पित होता है, और हर स्वरूप की अलग महिमा होती है। आदिशक्ति जगदम्बा के हर स्वरूप से अलग-अलग मनोरथ पूर्ण होते हैं। यह पर्व नारी शक्ति की आराधना का पर्व है।

नवरात्रि के नौ दिन

  • पहला दिन: 15 अक्टूबर 2023, माँ शैलपुत्री पूजा घटस्थापना
  • दूसरा दिन: 16 अक्टूबर 2023, माँ ब्रह्मचारिणी पूजा
  • तीसरा दिन: 17 अक्टूबर 2023, माँ चंद्रघंटा पूजा
  • चौथा दिन: 18 अक्टूबर 2023, माँ कुष्मांडा पूजा
  • पांचवा दिन: 19 अक्टूबर 2023, माँ स्कंदमाता पूजा
  • छठा दिन: 20 अक्टूबर 2023, माँ कात्यायनी पूजा
  • सातवां दिन: 21 अक्टूबर 2023, माँ कालरात्रि पूजा
  • आठवां दिन: 22 अक्टूबर 2023, माँ महागौरी दुर्गा महा अष्टमी पूजा
  • नवमी दिन: 23 अक्टूबर 2023, माँ सिद्धिदात्री दुर्गा महा नवमी पूजा
  • दसवां दिन: 24 अक्टूबर 2023, नवरात्रि दुर्गा विसर्जन, विजय दशमी

पूजा विधि

  • माता की चौकी लगाने के लिए उत्तर-पूर्व में एक स्थान को साफ कर लें और गंगाजल से शुद्ध करें।
  • एक लकड़ी की चौकी बिछाकर उस पर लाल रंग का साफ कपड़ा बिछाकर माता रानी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
  • अब सबसे पहले गणेश जी का ध्यान करें कलश स्थापित करने की विधि आरंभ करें।
  • नारियल में चुनरी लपेट दें और कलश के मुख पर मौली बांधे।
  • कलश में जल भरकर उसमें एक लौंग का जोड़ा, सुपारी हल्दी की गांठ, दूर्वा और रुपए का सिक्का डालें।
  • अब कलश में आम के पत्ते लगाकर उसपर नारियल रखें।
  • अब कलश को मां दुर्गा की प्रतिमा की दायीं ओर कलश को स्थापित करें।
  • अब दीपक प्रज्वलित करके पूजा आरंभ करें।

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रसेल वाइपर : बिजली की रफ़्तार से हमला करता है ये जहरीला सांप

रसेल वाइपर एशिया में पाया जाने वाला एक विषैला सांप है। इस प्रजाति का नाम स्कॉटिश पशु चिकित्सक पैट्रिक रसेल के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने सबसे पहले भारत के कई सांपों का वर्णन किया था। इस सांप को चंद्रबोरहा कहा जाता है क्योंकि इसके पूरे शरीर पर लेंटिकुलर या अधिक सटीक चंद्र चिह्न होते हैं।

रसेल वाईपर को भारत में “कोरिवाला” के नाम से जाना जाता है। हालाँकि यह इंडियन क्रेट से कम जहरीला है, फिर भी यह सांप भारत का सबसे घातक सांप है।

रसेल वाइपर ने भारत में किसी भी अन्य सांप के तुलना में सबसे ज्यादा लोगों को मारा है। देश के सभी इलाकों में पाया जाने वाला ये जहरीला सांप हमला करने से पहले ही तेज आवाज करता है। ये घर के पुरानी दीवार के छेद में, बाल्टी, यहाँ तक की फूलदान के अंदर भी पाया जा सकता है, जो इसे बहुत खतरनाक बनाता है।

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यह बेहद गुस्सैल सांप बिजली की तेज़ी से हमला करने में सक्षम है। ये जो जहर छोड़ता है उसका नाम हेमोटॉक्सिन है। इसके काटने से रक्त नलिकाएं जगह जगह से फट जाती हैं जिससे रक्त स्राव होता है जिससे व्यक्ति की एक घण्टे के अंदर मौत हो जाती है।

यदि समय रहते एंटीवेनम इंजेक्शन लगवा लिया जाये तो मरीज़ की जान बच सकती है। इसके काटने की वजह से भारत में हर साल लगभग 25,000 लोगों की मौत हो जाती है।

आकार और आवास

ये सांप गहरे पीले, भूरे या भूरे रंग के होते हैं, जिनके शरीर की लंबाई तक गहरे भूरे रंग के धब्बों की तीन श्रृंखलाएँ होती हैं। इनमें से प्रत्येक धब्बे के चारों ओर एक काला घेरा होता है, जिसकी बाहरी सीमा सफेद या पीले रंग की होती है।

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इसका सिर चपटा और त्रिकोणीय होता है। इस सांप का आकार युवावस्था में 4 फ़ीट तक लंबा होता है। इसके शरीर का बीच का भाग क़रीब 2 से 3 इंच तक मोटा होता है।

ये सांप किसी विशेष निवास स्थान तक ही सीमित नहीं हैं । वे ज्यादातर खुले, घास वाले या झाड़ीदार क्षेत्रों में पाए जाते हैं और घने जंगलों से बचते हैं।

आहार

रसेल वाईपर चूहे और अन्य छोटे जंतुओं को खाता है। वे मुख्य रूप से रात्रिचर वनवासी होते हैं। ये अधिकतर रात को ही शिकार पर निकलता है और दिन के समय धूप में रहना पसंद करते हैं। बाकी समय बिलों में, मिट्टी की दरारों में, या पत्तों के कूड़े के नीचे छिपकर व्यतीत करता है।

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प्रज्जन

रसेल वाइपर ओवोविविपेरस होते हैं जिसका अर्थ है कि मादाएं युवा रहने के लिए बच्चे को जन्म देती हैं। संभोग आम तौर पर वर्ष के शुरुआत में होता है, हालांकि गर्भवती मादाएं किसी भी समय पाई जा सकती हैं।

गर्भधारण की अवधि 6 महीने से अधिक समय तक रहती है। एक समय पर मादा लगभग 20-40 बच्चों (स्नेकलेट्स) को जन्म देती है। जन्म के समय बच्चों की कुल लंबाई 8.5 से 10.2 इंच होती है।

पितृ पक्ष में इन खास उपायों को करने से होते हैं पितृ प्रसन्न

सनातन धर्म में पितृ पक्ष के दौरान पितरों की पूजा की जाती है। इस दौरान पितरों का तर्पण किया जाता है। साथ ही पितरों को मोक्ष दिलाने हेतु पिंडदान और श्राद्ध कर्म करने का भी विधान है।

इस साल 29 सितंबर से लेकर 14 अक्टूबर तक पितृ पक्ष है। गरुड़ पुराण में निहित है कि पितृ पक्ष के दौरान पितरों की पूजा करने से व्यक्ति को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। साथ ही व्यक्ति के आय और सौभाग्य में भी वृद्धि होती है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार पितृ के प्रसन्न रहने से व्यक्ति को जीवन में सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है। साथ ही आने वाली मुसीबत भी टल जाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इन खास उपायों को करने से होते हैं पितृ प्रसन्न:

पितृ पक्ष

हर वर्ष आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से लेकर अमावस्या तिथि तक पितृ पक्ष मनाया जाता है। इस दौरान गया जी में पितरों का पिंडदान किया जाता है।

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उपाए

  • पितृ पक्ष में पूर्वजों के निमित्त विधि विधान से तर्पण और श्राद्ध करें। ब्राह्मण को भोजन कराएं, दान दें। साथ ही साल की हर एकादशी, चतुर्दशी, अमावस्या पर पितरों को जल अर्पित करें और त्रिपंडी श्राद्ध करें।
  • पितृ पक्ष शांति के लिए रोजाना दोपहर के समय पीपल के पेड़ की पूजा करें। पितरों को प्रसन्न करने के लिए पीपल में गंगाजल में काले तिल, दूध, अक्षत और फूल अर्पित करें। पितृ दोष शांति के लिए ये उपाय बहुत कारगर है।
  • पितृ पक्ष में रोजाना घर में शाम के समय दक्षिण दिशा में तेल का दीपक लगाएं। ऐसा रोजाना भी कर सकते हैं। इससे पितृ दोष खत्म हो जाता है।
  • किसी जरुरतमंद को भोजन, दान या गरीब कन्या के विवाह में मदद करने से पितर खुश होते हैं। ऐसा करने से पितृ दोष शांत होने लगता है।
  • घर में पितरों की तस्वीर दक्षिण दिशा में लगाएं। रोजाना उनसे अपनी गलती की क्षमा मांगे। कहते हैं इससे पितृ दोष का प्रभाव कम होने लगता है। जिन लोगों की कुंडली में पितृदोष है। उन्हें ये महा उपाय करना चाहिए। इससे पितृ प्रसन्न होते हैं और पितृ दोष खत्म होता है।
  • इसके बाद पेड़ के पास शुद्ध देसी घी का दीपक जलाते हुए ‘ॐ सर्व पितृ देवाय नम:’ मंत्र का जाप करें।

पितृ के प्रसन्न रहने पर मिलते हैं ये संकेत

  • गरुड़ पुराण के अनुसार, जब पितृ प्रसन्न होते हैं, तो उनकी शुभ कृपा उत्तराधिकारी पर पड़ती है। पितृ के आशीर्वाद से व्यक्ति के आय और सौभाग्य में वृद्धि होती है। करियर और कारोबार में भी मन मुताबिक सफलता मिलती है। व्यक्ति को धन की कमी नहीं रहती है। साथ ही आय के नए स्रोत बनते हैं।
  • ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पितृ दोष लगने पर परिवार में कलह की स्थिति पैदा हो जाती है। वहीं, पितृ के प्रसन्न रहने पर परिवार के सदस्यों के मध्य स्नेह और प्यार बना रहता है। सभी एक दूसरे को सहयोग करते हैं। कुल मिलाकर कहें तो परिवार में उत्सव जैसा माहौल रहता है।
  • पितृ के प्रसन्न रहने पर कौवे भोजन करने घर आते हैं। आसान शब्दों में कहें तो अगर घर के छत पर कौवा आकर बैठता है और दिया गया भोजन प्राप्त करता है, तो ये संकेत है कि पितृ आपसे प्रसन्न हैं। उनकी कृपा आप पर बरस रही है।

पानी के बारे में रोचक तथ्य (Facts about Water in Hindi)

“जल ही जीवन है”, यह एक बहुत ही प्रसिद्ध वाक्य है। हालांकि हम में से अधिकतर लोग जब साफ़-सफाई, नहाई-धुलाई कर रहे होते हैं, या जब अपने दांतों को ब्रश कर रहे होते हैं और एक तरफ खुले नल से पानी बिना वजह बह रहा होता है, तो यह वाक्य ऐसे भुला दिया जाता है जैसे यह झूठ हो। – Fundabook.com, Facts about Water in Hindi

Facts about Water in Hindi
Facts about Water in Hindi

हम में से अधिकतर लोग ये भी नहीं जानते कि अफ्रीका के अधिकतर लोग पीने, नहाने और अन्य इस्तेमाल करने योग्य पानी लाने के लिए हर रोज 5 किलोमीटर से लेकर 30 किलोमीटर का सफर तय करते हैं। भारत के कई हिस्सों में कमोबेश यही हालात हैं और वो दिन दूर नहीं जब यह स्थिति देश के अन्य भागों में भी आम देखी जाएगी।

खैर, इस लेख में हम पानी से जुड़े कुछ रोचक और ध्यान देने योग्य तथ्य (Facts about Water in Hindi) लेकर आये हैं जिनको पढ़ कर शायद आप भी पानी के महत्व को लेकर जागरूक हों और पानी को बचाने में अपना योगदान दे सकें।

  1. पानी दो तत्वों से बना है, हाइड्रोजन(H) और ऑक्सीजन(O)। 2 हाइड्रोजन + 1 ऑक्सीजन = H2O
  2. माना जाता है की पृथ्वी के जन्म के कुछ काल के बाद पृथ्वी पर पानी से भरे या बर्फीले धूमकेतुओं और उल्का पिंडों की बारिश हुई जिनसे सागरों और महासागरों का निर्माण हुआ। वहीं एक दूसरी थियोरी के अनुसार हिम युग का पानी वस्तुत: चट्टानों और खाइयों में जमा रहा और बाद में उससे महासागर बने।
  3. पृथ्वी पर एक अरब 40 घन किलोलीटर पानी है.
  4. इसमें से 97.5% पानी समुद्र में है जोकि खारा है. 1.5 % ताजा पानी बर्फ के रूप में ध्रुव प्रदेशों में है. शेष 1% ताजा पानी नदी, सरोवर, कुओं, झरनों और झीलों में है जो पीने लायक है. इस 1% पानी का 60% हिस्सा खेती और उद्योग कारखानों आदि में खपत होता है, बाकी का 40% हिस्सा पीने, भोजन बनाने, नहाने, कपड़े धोने एवं साफ-सफाई में खर्च होता है।
  5. जब आप इस पोस्ट को पढ़ रहे होंगे तो उस समय 2 अरब 56 करोड़ 23 लाख से ज्यादा लोग पानी की कमी से जूझ रहे होंगे. चिंताजनक बात यह है कि यह संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है.

  6. चीन के लगभग 70 करोड़ लोग अशुद्ध पानी पीने को मजबूर हैं।
  7. गन्दा पानी पीने से हर घंटे 200 बच्चे मर जाते हैं।
  8. आंकड़े बताते हैं कि विश्व के करीब 1.5 अरब लोगों को पीने का शुद्ध पानी नहीं मिल रहा है।
  9. विकासशील देशों में 80% बीमारियाँ दूषित पानी के कारण होती हैं।
  10. कई देशों में कृषि के लिए पीने योग्य पानी की निकासी 90% से अधिक है: कंबोडिया 94%, पाकिस्तान 94%, वियतनाम 95%, मेडागास्कर 97%, ईरान 92%, इक्वाडोर 92%
  11. विश्व भर में हर साल लगभग 35 लाख लोग गंदे पानी की वजह से होने वाली बीमारियों के कारण मारे जाते हैं।
  12. मानव मस्तिष्क का 75% हिस्सा पानी है और एक जीवित पेड़ का 75% हिस्सा पानी है।
  13. एक व्यक्ति भोजन के बिना एक महीने तक ज़िंदा रह सकता है, लेकिन पानी के बिना केवल एक सप्ताह।
  14. पानी हमारी पृथ्वी की एक गहन अंत: परस्पर-संबन्ध प्रणाली (deeply interconnected system) का हिस्सा है। हम जमीन पर जो कुछ उंडेलते हैं वह अंतत: पानी में मिल जाता है। ऐसे ही जो भी द्रव्य हम वातावरण में वाष्प या गैसीय रूप में छोड़ते हैं वह भी वह अंतत: पानी में मिल जाता है।
  15. इसी परस्पर-संबन्ध प्रणाली के आधार पर हम यह कह सकते हैं कि हो सकता है कि जो पानी आप पी रहे हों उसके अणु(molecules) वही हों जो कभी डायनासौर ने पिए हों!
  16. पानी जमने पर 9% तक फैल जाता है। जमा हुआ पानी यानि बर्फ पानी की तुलना में हल्का होता है। यही कारण है कि बर्फ पानी में तैरता है।
  17. साफ पानी बिजली का कुचालक है। पानी में घुलने वाले तत्वों की वजह से पानी में करंट प्रवाहित हो पाता है। जैसे कि नमक मिला हुआ पानी जैसे कि पेशाब करंट का सुचालक है।
  18. आम धारणा है कि ठंडे पानी की अपेक्षा गर्म पानी जल्दी जम जाता है। हालांकि यह क्यों होता है यह स्पष्ट नहीं है और वैज्ञानिकों में इस बारे में मतभेद है।
  19. प्राणियों में जिराफ बिना पानी पिए सबसे लंबे समय तक ज़िंदा रह सकता है।

यदि हम लोगों ने अभी से पानी बचाने के लिए ठोस कदम न उठाए तो हमारी आने वाली पीढ़ियाँ पानी को तरस जाएंगी। लेकिन क्या हमें इस बात की परवाह है?