नवरात्रि 2023 :- कहाँ से आए देवी माँ के अस्त्र-शस्त्र, जाने क्या है इनका अर्थ!

नव दुर्गा को पापों की विनाशिनी कहा जाता है, देवी के अलग-अलग स्वरूपों में अलग-अलग अस्त्र-शस्त्र हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि देवी माँ जिन अस्त्र-शस्त्र को धारण करती हैं। उसका उद्देश्य क्या है या फिर ये कहां से आए? आखिर माँ भगवती को ये कहां से मिले?
ऐसी मान्यता है कि देवी को देवताओं ने अपने अस्त्र-शस्त्र व हथियार सौपें थे ताकि असुरों के साथ होने वाले युद्धों में विजय प्राप्त हो व धर्म सदैव स्थापित रहे, अधर्म का नाश हो व सद्मार्ग की गति बनी रहे।
आज हम इस पोस्ट में जानेंगे कहाँ से प्राप्त हुए देवी माँ को ये अस्त्र-शस्त्र, तो चलिए जानते हैं :-

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चक्र

माँ भगवती के हाथों में शोभा देते हुए चक्र को भगवान विष्णु ने भक्तों की रक्षा के लिए देवी को प्रदान किया था। भगवान विष्णु ने ये चक्र खुद अपने चक्र से उत्पन्न किया था।

त्रिशुल

माँ दुर्गा को त्रिशुल स्वयं भगवान शंकर ने भेंट किया था। भगवान शिव ने इसे शूल से त्रिशूल निकालकर मां दुर्गा को भेंट किया था। इस त्रिशुल से देवी ने महिषासुर समेत अन्य असुरों का वध किया था।

शंख

माँ दुर्गा के हाथ में जो शंख है उसे वरुण देव ने भेंट किया था। इस शंख की ध्वनि मात्र से धरती, आकाश और पाताल में मौजूद असुर कांप कर भाग जाया करते थे।

वज्र

देवी माता को अपने वज्र से एक दूसरा वज्र निकालकर देवराज इंद्र ने भेंट किया था। यह वज्र अत्यंत शक्तिशाली था कि  उसके प्रहार से सारी असुरी सेना युद्ध के मैदान से भाग खड़ी हुई थी।

दंड

माँ भगवती को यमराज ने अपने कालदंड से निकालकर दंड भेंट किया था। देवी ने युद्ध भूमि में दैत्यों को दंड पाश से बांधकर धरती पर घसीटा था।

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धनुष-बाण

माँ भवानी को धनुष और बाणों से भरा तरकश स्वयं पवन देव ने भेंट किया था। असुरों से युद्ध के दौरान देवी इसी धनुष और बाणों का प्रहार करती थीं।

तलवार

देवी माँ के हाथों में सुशोभित तलवार और ढाल यमराज ने भेंट की थी। पौराणिक कथाओं के अनुसार माँ भगवती ने असुरों का सर्वनाश इसी तलवार और ढाल से किया था।

घंटा

देवराज इंद्र ने ऐरावत हाथी के गले से घंटा उतारकर देवी को दिया था और इस घंटे की भयंकर ध्वनि से असुरों व दैत्यों को घंटे के नाद से मूर्छित कर के उनका विनाश किया था।

फरसा

भगवान विश्वकर्मा ने माँ दुर्गा को अपनी ओर से फरसा प्रदान किया था। चंड-मुंड का सर्वनाश करने वाली देवी ने काली का रूप धारण कर हाथों में तलवार और फरसा लेकर असुरों से युद्ध किया था।

इस दिन से शुरू हो रहे हैं शारदीय नवरात्रि, जानें घटस्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

आश्विन मास में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्रि शुरू हो जाते हैं। हिंदू धर्म में नवरात्रि का बहुत अधिक महत्व होता है। नवरात्रि के 9 दिनों में मां के 9 रूपों की पूजा- अर्चना की जाती है।

मां को प्रसन्न करने के लिए भक्त व्रत भी रखते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के दौरान विधि- विधान से मां दुर्गा की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।

शारदीय नवरात्रि 2023

हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 14 अक्तूबर को रात 11 बजकर 24 मिनट से लग जाएगी, जो 16 अक्तूबर की सुबह 01 बजकर 13 मिनट तक रहेगी।

इस तरह से उदया तिथि के आधार पर शारदीय नवरात्रि 15 अक्तूबर 2023 से शुरू होगी। वहीं इसका समापन 23 अक्तूबर को होगा और 24 अक्तूबर को दशमी तिथि पर विजयादशमी मनाई जाएगी।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखते हुए कलश स्थापना की जाती है और फिर 9 दिनों तक लगातार देवी आराधना का पर्व मनाया जाता है।

इस साल 15 अक्तूबर को शारदीय नवरात्रि शुरू होने जा रहा है और इस दिन सुबह 11 बजकर 44 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 30 मिनट तक कलश स्थापना का सबसे अच्छा मुहूर्त है। शास्त्रों के अनुसार शुभ मुहूर्त में किया गया कार्य और पूजा-अनुष्ठान हमेशा ही सफल होता है।

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शारदीय नवरात्रि महत्व

धर्म ग्रंथों के अनुसार, नवरात्रि मां भगवती दुर्गा की आराधना करने का श्रेष्ठ समय होता है। इन नौ दिनों के दौरान मां के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है।

नवरात्रि का हर दिन मां के विशिष्ट स्वरूप को समर्पित होता है, और हर स्वरूप की अलग महिमा होती है। आदिशक्ति जगदम्बा के हर स्वरूप से अलग-अलग मनोरथ पूर्ण होते हैं। यह पर्व नारी शक्ति की आराधना का पर्व है।

नवरात्रि के नौ दिन

  • पहला दिन: 15 अक्टूबर 2023, माँ शैलपुत्री पूजा घटस्थापना
  • दूसरा दिन: 16 अक्टूबर 2023, माँ ब्रह्मचारिणी पूजा
  • तीसरा दिन: 17 अक्टूबर 2023, माँ चंद्रघंटा पूजा
  • चौथा दिन: 18 अक्टूबर 2023, माँ कुष्मांडा पूजा
  • पांचवा दिन: 19 अक्टूबर 2023, माँ स्कंदमाता पूजा
  • छठा दिन: 20 अक्टूबर 2023, माँ कात्यायनी पूजा
  • सातवां दिन: 21 अक्टूबर 2023, माँ कालरात्रि पूजा
  • आठवां दिन: 22 अक्टूबर 2023, माँ महागौरी दुर्गा महा अष्टमी पूजा
  • नवमी दिन: 23 अक्टूबर 2023, माँ सिद्धिदात्री दुर्गा महा नवमी पूजा
  • दसवां दिन: 24 अक्टूबर 2023, नवरात्रि दुर्गा विसर्जन, विजय दशमी

पूजा विधि

  • माता की चौकी लगाने के लिए उत्तर-पूर्व में एक स्थान को साफ कर लें और गंगाजल से शुद्ध करें।
  • एक लकड़ी की चौकी बिछाकर उस पर लाल रंग का साफ कपड़ा बिछाकर माता रानी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
  • अब सबसे पहले गणेश जी का ध्यान करें कलश स्थापित करने की विधि आरंभ करें।
  • नारियल में चुनरी लपेट दें और कलश के मुख पर मौली बांधे।
  • कलश में जल भरकर उसमें एक लौंग का जोड़ा, सुपारी हल्दी की गांठ, दूर्वा और रुपए का सिक्का डालें।
  • अब कलश में आम के पत्ते लगाकर उसपर नारियल रखें।
  • अब कलश को मां दुर्गा की प्रतिमा की दायीं ओर कलश को स्थापित करें।
  • अब दीपक प्रज्वलित करके पूजा आरंभ करें।

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रसेल वाइपर : बिजली की रफ़्तार से हमला करता है ये जहरीला सांप

रसेल वाइपर एशिया में पाया जाने वाला एक विषैला सांप है। इस प्रजाति का नाम स्कॉटिश पशु चिकित्सक पैट्रिक रसेल के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने सबसे पहले भारत के कई सांपों का वर्णन किया था। इस सांप को चंद्रबोरहा कहा जाता है क्योंकि इसके पूरे शरीर पर लेंटिकुलर या अधिक सटीक चंद्र चिह्न होते हैं।

रसेल वाईपर को भारत में “कोरिवाला” के नाम से जाना जाता है। हालाँकि यह इंडियन क्रेट से कम जहरीला है, फिर भी यह सांप भारत का सबसे घातक सांप है।

रसेल वाइपर ने भारत में किसी भी अन्य सांप के तुलना में सबसे ज्यादा लोगों को मारा है। देश के सभी इलाकों में पाया जाने वाला ये जहरीला सांप हमला करने से पहले ही तेज आवाज करता है। ये घर के पुरानी दीवार के छेद में, बाल्टी, यहाँ तक की फूलदान के अंदर भी पाया जा सकता है, जो इसे बहुत खतरनाक बनाता है।

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यह बेहद गुस्सैल सांप बिजली की तेज़ी से हमला करने में सक्षम है। ये जो जहर छोड़ता है उसका नाम हेमोटॉक्सिन है। इसके काटने से रक्त नलिकाएं जगह जगह से फट जाती हैं जिससे रक्त स्राव होता है जिससे व्यक्ति की एक घण्टे के अंदर मौत हो जाती है।

यदि समय रहते एंटीवेनम इंजेक्शन लगवा लिया जाये तो मरीज़ की जान बच सकती है। इसके काटने की वजह से भारत में हर साल लगभग 25,000 लोगों की मौत हो जाती है।

आकार और आवास

ये सांप गहरे पीले, भूरे या भूरे रंग के होते हैं, जिनके शरीर की लंबाई तक गहरे भूरे रंग के धब्बों की तीन श्रृंखलाएँ होती हैं। इनमें से प्रत्येक धब्बे के चारों ओर एक काला घेरा होता है, जिसकी बाहरी सीमा सफेद या पीले रंग की होती है।

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इसका सिर चपटा और त्रिकोणीय होता है। इस सांप का आकार युवावस्था में 4 फ़ीट तक लंबा होता है। इसके शरीर का बीच का भाग क़रीब 2 से 3 इंच तक मोटा होता है।

ये सांप किसी विशेष निवास स्थान तक ही सीमित नहीं हैं । वे ज्यादातर खुले, घास वाले या झाड़ीदार क्षेत्रों में पाए जाते हैं और घने जंगलों से बचते हैं।

आहार

रसेल वाईपर चूहे और अन्य छोटे जंतुओं को खाता है। वे मुख्य रूप से रात्रिचर वनवासी होते हैं। ये अधिकतर रात को ही शिकार पर निकलता है और दिन के समय धूप में रहना पसंद करते हैं। बाकी समय बिलों में, मिट्टी की दरारों में, या पत्तों के कूड़े के नीचे छिपकर व्यतीत करता है।

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प्रज्जन

रसेल वाइपर ओवोविविपेरस होते हैं जिसका अर्थ है कि मादाएं युवा रहने के लिए बच्चे को जन्म देती हैं। संभोग आम तौर पर वर्ष के शुरुआत में होता है, हालांकि गर्भवती मादाएं किसी भी समय पाई जा सकती हैं।

गर्भधारण की अवधि 6 महीने से अधिक समय तक रहती है। एक समय पर मादा लगभग 20-40 बच्चों (स्नेकलेट्स) को जन्म देती है। जन्म के समय बच्चों की कुल लंबाई 8.5 से 10.2 इंच होती है।

पितृ पक्ष में इन खास उपायों को करने से होते हैं पितृ प्रसन्न

सनातन धर्म में पितृ पक्ष के दौरान पितरों की पूजा की जाती है। इस दौरान पितरों का तर्पण किया जाता है। साथ ही पितरों को मोक्ष दिलाने हेतु पिंडदान और श्राद्ध कर्म करने का भी विधान है।

इस साल 29 सितंबर से लेकर 14 अक्टूबर तक पितृ पक्ष है। गरुड़ पुराण में निहित है कि पितृ पक्ष के दौरान पितरों की पूजा करने से व्यक्ति को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। साथ ही व्यक्ति के आय और सौभाग्य में भी वृद्धि होती है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार पितृ के प्रसन्न रहने से व्यक्ति को जीवन में सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है। साथ ही आने वाली मुसीबत भी टल जाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इन खास उपायों को करने से होते हैं पितृ प्रसन्न:

पितृ पक्ष

हर वर्ष आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से लेकर अमावस्या तिथि तक पितृ पक्ष मनाया जाता है। इस दौरान गया जी में पितरों का पिंडदान किया जाता है।

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उपाए

  • पितृ पक्ष में पूर्वजों के निमित्त विधि विधान से तर्पण और श्राद्ध करें। ब्राह्मण को भोजन कराएं, दान दें। साथ ही साल की हर एकादशी, चतुर्दशी, अमावस्या पर पितरों को जल अर्पित करें और त्रिपंडी श्राद्ध करें।
  • पितृ पक्ष शांति के लिए रोजाना दोपहर के समय पीपल के पेड़ की पूजा करें। पितरों को प्रसन्न करने के लिए पीपल में गंगाजल में काले तिल, दूध, अक्षत और फूल अर्पित करें। पितृ दोष शांति के लिए ये उपाय बहुत कारगर है।
  • पितृ पक्ष में रोजाना घर में शाम के समय दक्षिण दिशा में तेल का दीपक लगाएं। ऐसा रोजाना भी कर सकते हैं। इससे पितृ दोष खत्म हो जाता है।
  • किसी जरुरतमंद को भोजन, दान या गरीब कन्या के विवाह में मदद करने से पितर खुश होते हैं। ऐसा करने से पितृ दोष शांत होने लगता है।
  • घर में पितरों की तस्वीर दक्षिण दिशा में लगाएं। रोजाना उनसे अपनी गलती की क्षमा मांगे। कहते हैं इससे पितृ दोष का प्रभाव कम होने लगता है। जिन लोगों की कुंडली में पितृदोष है। उन्हें ये महा उपाय करना चाहिए। इससे पितृ प्रसन्न होते हैं और पितृ दोष खत्म होता है।
  • इसके बाद पेड़ के पास शुद्ध देसी घी का दीपक जलाते हुए ‘ॐ सर्व पितृ देवाय नम:’ मंत्र का जाप करें।

पितृ के प्रसन्न रहने पर मिलते हैं ये संकेत

  • गरुड़ पुराण के अनुसार, जब पितृ प्रसन्न होते हैं, तो उनकी शुभ कृपा उत्तराधिकारी पर पड़ती है। पितृ के आशीर्वाद से व्यक्ति के आय और सौभाग्य में वृद्धि होती है। करियर और कारोबार में भी मन मुताबिक सफलता मिलती है। व्यक्ति को धन की कमी नहीं रहती है। साथ ही आय के नए स्रोत बनते हैं।
  • ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पितृ दोष लगने पर परिवार में कलह की स्थिति पैदा हो जाती है। वहीं, पितृ के प्रसन्न रहने पर परिवार के सदस्यों के मध्य स्नेह और प्यार बना रहता है। सभी एक दूसरे को सहयोग करते हैं। कुल मिलाकर कहें तो परिवार में उत्सव जैसा माहौल रहता है।
  • पितृ के प्रसन्न रहने पर कौवे भोजन करने घर आते हैं। आसान शब्दों में कहें तो अगर घर के छत पर कौवा आकर बैठता है और दिया गया भोजन प्राप्त करता है, तो ये संकेत है कि पितृ आपसे प्रसन्न हैं। उनकी कृपा आप पर बरस रही है।

पानी के बारे में रोचक तथ्य (Facts about Water in Hindi)

“जल ही जीवन है”, यह एक बहुत ही प्रसिद्ध वाक्य है। हालांकि हम में से अधिकतर लोग जब साफ़-सफाई, नहाई-धुलाई कर रहे होते हैं, या जब अपने दांतों को ब्रश कर रहे होते हैं और एक तरफ खुले नल से पानी बिना वजह बह रहा होता है, तो यह वाक्य ऐसे भुला दिया जाता है जैसे यह झूठ हो। – Fundabook.com, Facts about Water in Hindi

Facts about Water in Hindi
Facts about Water in Hindi

हम में से अधिकतर लोग ये भी नहीं जानते कि अफ्रीका के अधिकतर लोग पीने, नहाने और अन्य इस्तेमाल करने योग्य पानी लाने के लिए हर रोज 5 किलोमीटर से लेकर 30 किलोमीटर का सफर तय करते हैं। भारत के कई हिस्सों में कमोबेश यही हालात हैं और वो दिन दूर नहीं जब यह स्थिति देश के अन्य भागों में भी आम देखी जाएगी।

खैर, इस लेख में हम पानी से जुड़े कुछ रोचक और ध्यान देने योग्य तथ्य (Facts about Water in Hindi) लेकर आये हैं जिनको पढ़ कर शायद आप भी पानी के महत्व को लेकर जागरूक हों और पानी को बचाने में अपना योगदान दे सकें।

  1. पानी दो तत्वों से बना है, हाइड्रोजन(H) और ऑक्सीजन(O)। 2 हाइड्रोजन + 1 ऑक्सीजन = H2O
  2. माना जाता है की पृथ्वी के जन्म के कुछ काल के बाद पृथ्वी पर पानी से भरे या बर्फीले धूमकेतुओं और उल्का पिंडों की बारिश हुई जिनसे सागरों और महासागरों का निर्माण हुआ। वहीं एक दूसरी थियोरी के अनुसार हिम युग का पानी वस्तुत: चट्टानों और खाइयों में जमा रहा और बाद में उससे महासागर बने।
  3. पृथ्वी पर एक अरब 40 घन किलोलीटर पानी है.
  4. इसमें से 97.5% पानी समुद्र में है जोकि खारा है. 1.5 % ताजा पानी बर्फ के रूप में ध्रुव प्रदेशों में है. शेष 1% ताजा पानी नदी, सरोवर, कुओं, झरनों और झीलों में है जो पीने लायक है. इस 1% पानी का 60% हिस्सा खेती और उद्योग कारखानों आदि में खपत होता है, बाकी का 40% हिस्सा पीने, भोजन बनाने, नहाने, कपड़े धोने एवं साफ-सफाई में खर्च होता है।
  5. जब आप इस पोस्ट को पढ़ रहे होंगे तो उस समय 2 अरब 56 करोड़ 23 लाख से ज्यादा लोग पानी की कमी से जूझ रहे होंगे. चिंताजनक बात यह है कि यह संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है.

  6. चीन के लगभग 70 करोड़ लोग अशुद्ध पानी पीने को मजबूर हैं।
  7. गन्दा पानी पीने से हर घंटे 200 बच्चे मर जाते हैं।
  8. आंकड़े बताते हैं कि विश्व के करीब 1.5 अरब लोगों को पीने का शुद्ध पानी नहीं मिल रहा है।
  9. विकासशील देशों में 80% बीमारियाँ दूषित पानी के कारण होती हैं।
  10. कई देशों में कृषि के लिए पीने योग्य पानी की निकासी 90% से अधिक है: कंबोडिया 94%, पाकिस्तान 94%, वियतनाम 95%, मेडागास्कर 97%, ईरान 92%, इक्वाडोर 92%
  11. विश्व भर में हर साल लगभग 35 लाख लोग गंदे पानी की वजह से होने वाली बीमारियों के कारण मारे जाते हैं।
  12. मानव मस्तिष्क का 75% हिस्सा पानी है और एक जीवित पेड़ का 75% हिस्सा पानी है।
  13. एक व्यक्ति भोजन के बिना एक महीने तक ज़िंदा रह सकता है, लेकिन पानी के बिना केवल एक सप्ताह।
  14. पानी हमारी पृथ्वी की एक गहन अंत: परस्पर-संबन्ध प्रणाली (deeply interconnected system) का हिस्सा है। हम जमीन पर जो कुछ उंडेलते हैं वह अंतत: पानी में मिल जाता है। ऐसे ही जो भी द्रव्य हम वातावरण में वाष्प या गैसीय रूप में छोड़ते हैं वह भी वह अंतत: पानी में मिल जाता है।
  15. इसी परस्पर-संबन्ध प्रणाली के आधार पर हम यह कह सकते हैं कि हो सकता है कि जो पानी आप पी रहे हों उसके अणु(molecules) वही हों जो कभी डायनासौर ने पिए हों!
  16. पानी जमने पर 9% तक फैल जाता है। जमा हुआ पानी यानि बर्फ पानी की तुलना में हल्का होता है। यही कारण है कि बर्फ पानी में तैरता है।
  17. साफ पानी बिजली का कुचालक है। पानी में घुलने वाले तत्वों की वजह से पानी में करंट प्रवाहित हो पाता है। जैसे कि नमक मिला हुआ पानी जैसे कि पेशाब करंट का सुचालक है।
  18. आम धारणा है कि ठंडे पानी की अपेक्षा गर्म पानी जल्दी जम जाता है। हालांकि यह क्यों होता है यह स्पष्ट नहीं है और वैज्ञानिकों में इस बारे में मतभेद है।
  19. प्राणियों में जिराफ बिना पानी पिए सबसे लंबे समय तक ज़िंदा रह सकता है।

यदि हम लोगों ने अभी से पानी बचाने के लिए ठोस कदम न उठाए तो हमारी आने वाली पीढ़ियाँ पानी को तरस जाएंगी। लेकिन क्या हमें इस बात की परवाह है?

दुनिया के कुछ रोचक तथ्य !

दुनिया में कुछ ऐसे रोचक तथ्य हैं। जिनके बारे में हम नहीं जानते। इन रोचक तथ्यों में हमारे जीवन से जुड़ी कई बातें  हैं, जो हमारे लिए बहुत उपयोगी हो सकती हैं। आइये जानते है कुछ ऐसे ही रोचक तथ्यों के बारे

  • दुनिया में 11 प्रतिशत लोग बाएं हाथ का इस्तेमाल करते हैं।
  • विश्व की दो सबसे अधिक कॉमन इस्तेमाल होने वाली भाषाएं मैंड्रियन चायनीज, स्पैनिश और अंग्रेजी है।
  • इंसान की सबसे छोटी हड्डी कान में होती है।
  • पैसा पहले नंबर की ऐसी चीज है जिसके बारे में जोड़े सबसे अधिक बहस करते हैं।
  • एक दिन में हम इतनी बार पलके झपकाते हैं कि वह आधे घंटे की आंखें बंद होने के बराबर होता है।
  • इंसान की जीभ सबसे अधिक तेजी से ठीक होती है।
  • जब आसमान की बिजली गिरती है तब तापमान 30,000 डिग्री तक हो सकता है।
  • हर बार जब भीहु हम पूरा चांद देखते हैं तो हर बार इसकी एक ही साइड ही दिखती है।
  • शहद अकेला ऐसा प्राकृतिक पदार्थ है जो कभी खराब नहीं होता।
  • ऑस्ट्रेलिया अकेला ऐसा महाद्वीप है, जहां कोई भी एक्टिव ज्वालामुखी नहीं है।
  • दुनिया की सबसे लंबी स्ट्रीट टोरंटो की योंगे स्ट्रीट है। कनाडा स्थित यह स्ट्रीट 1,896 किमी लंबी है।
  • अगले 40 सालों में रोबोट मानव से भी बुद्धिमान हो जायेंगे। इस बात को इंटेल (Intel) कंपनी ने सिद्ध किया है कि आने वाले 40 सालों में रोबोट वह कार्य करने में सक्षम हो जायेंगे जो मानव कभी भी नहीं कर सकता।
  • इंटेल ऐसे पावरफुल सिस्टम को तैयार कर रही है जो वायरलेस होगा और इसमें किसी भी तार का इस्तेमाल नहीं होगा।
  • स्विट्जरलैंड में दुनिया में सबसे अधिक चॉकलेट खाई जाती है। यहां हर व्यक्ति एक साल में 10 किलो के औसत से चॉकलेट खाता है।
  • पानी जिसको हम साइंस में H2O  कहते हैं, पानी हमारे जीवन का बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है। वैज्ञानिकों को अभी तक यह नहीं पता लग पाया है कि पानी कार्य कैसे करता है।
  • मानव के आधे से भी ज्यादा हड्डियाँ हाथों और पैरों में होती हैं।
  • अगर आप लगातार 8 साल, 7 महीने और 6 दिनों तक चिल्लाते रहेंगे तो आप इतनी ऊर्जा उत्पाद कर सकते हैं जिससे आप एक कॉफ़ी के कप को गर्म कर सकें।
  • उत्तर कोरिया में इन्टरनेट इस्तेमाल करने वालों की कुल आबादी सिर्फ 605 है।
  • ओसामा बिन लादेन और हिट्लर दोनों की मौत 1 मई को हुई थी।
  • दुनिया के 85 प्रतिशत पौधे समुद्र के अंदर होते हैं।
  • अगर आपका दिमाग जहाज के दुर्घटना होने से 90 सेकंड पहले शांत अवस्था में है तो आपके बचने की संभावना ज्यादा होती है।
  • आपके शरीर की कोशिकाएं आपके दिमाग के द्वारा नियंत्रण की जाती हैं अगर आपके दिमाग में नकरात्मक विचार आ रहे हैं तो आप की पाचन प्रक्रिया कि क्षमता पहले से कम हो जाती है।
  • हमारा दिमाग एक मिनट में 1,000 शब्दों को पढ़ सकता है।

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क्यों पितृपक्ष में कौए को दिया जाता है भोजन, जानिए क्या है महत्व

पितृपक्ष शुरू हो चुके हैं। अपने पूर्वजों को स्मरण करने, श्रद्धा और भक्ति से उन्हें सेवा करने और जल तर्पण करने का समय चल है। इस समय पितरों को जल देकर और कौवों को भोजन देकर उन्हें तृप्त कराया जाता है। इस दौरान कौवे का आना और भोजन ग्रहण करना शुभ होता है।

महत्व

पितृपक्ष के दौरान श्राद्ध में भोजन का एक अंश कौओं को भी दिया जाता है। पितृपक्ष में कौओं को भोजन देने का विशेष महत्व होता है। ​कौआ यमराज का प्रतीक माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि कौआ आपके श्राद्ध का भोजन ग्रहण कर लेता है, तो आपके पितर आपसे प्रसन्न और तृप्त माने जाते हैं। यदि कौआ भोजन नहीं करता है तो इसका अर्थ है कि आपके पितर आपसे नाराज़ और अतृप्त हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कौओं को देवपुत्र माना जाता है। व्य​क्ति जब शरीर का त्याग करता है और उसके प्राण निकल जाते हैं तो वह सबसे पहले कौआ का जन्म पाता है। माना जाता है कि कौए को दिया गया भोजन पितरों को ही प्राप्त होता है।

कौआ अतिथि के आने की सूचना देने वाला तथा पितरों का आश्रम स्थल माना गया है। ऐसी भी मान्यता है कि कौए ने अमृत का पान कर लिया था, जिससे उसकी स्वाभाविक मौत नहीं होती है।

माता सीता से जुड़ी है यह कथा

एक मान्यता के अनुसार त्रेता युग में जयंत ने कौए का रूप धारण कर माता सीता के पैर में चोंच मारकर उनको कष्ट पहुंचाया था।

यह देखते ही प्रभु श्रीराम उस कौए पर क्रोधित हुए और उन्होंने तिनके को अस्त्र बनाकर उसकी एक आँख पर प्रहार किया, जिससे उसकी एक आँख क्षतिग्रस्त हो गई।

पश्चाताप होने पर कौए रुपी जयंत ने अपने अपराध के लिए प्रभु श्रीराम से क्षमा मांगी। तब प्रभु ने उसके उस रूप को वरदान दिया कि उसे अर्पित किया गया भोजन पितरों को मिलेगा। तभी से श्राद्ध में कौवों को भोजन कराया जाता है।

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आज है गूगल का 20वां जन्मदिन

आज इंटरनेट के सबसे बड़े सर्च इंजन गूगल का 20वां जन्मदिन है। इस मौके को यादगार बनाने के लिए गूगल ने एक ख़ास तरह का डूडल बनाया है। 25वें बर्थडे पर गूगल ने (G20GLE) लिखा है। इस डूडल में गूगल ने बीते 20 साल के दौरान बनाए गए बेहतरीन डूडल का एक संग्रह तैयार किया है। इन डूडल्स को देख आप यकीनन गूगल की पुरानी दिलचस्प यादों में खो जाएंगे।

किसने बनाया था गूगल को

साथ ही गूगल ने एक वीडियो दिखाया है। जहां वो गूगल का पूरा सफर दिखा रहा है। गूगल की शुरुआत दो छात्रों ने की थी.यह एक कॉलेज प्रोजेक्ट था जिसे आज हम गूगल के नाम से जानते हैं। लैरी पेज और सर्जी बिन 1995 में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी (में पी.एच.डी.) कर रहे थे। उन्होंने Google.stanford.edu एड्रेस पर एक इंटरनेट सर्च इंजन बनाया था.पहले इसका नाम BackRub रखा गया। जिसके बाद उसका नाम GOOGLE रखा दिया गया।

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15 सितंबर 1995 को रजिस्टर हुआ गूगल का डोमेन

15 सितंबर 1995 को रजिस्टर हुआ था गूगल डॉट कॉम (google.com) का डोमेन. इस लिहाज़ से गूगल का जन्मदिन 15 सितंबर को होना चाहिए. हालांकि सर्च इंजन के संस्थापक लैरी पेज और सर्जी बिन ने 4 सितंबर 1998 को गूगल को एक कंपनी के तौर पर रजिस्टर किया और कंपनी के नाम पर पहला बैंक अकाउंट भी खुलवाया था.इस लिहाज़ से 4 सितंबर को भी गूगल का जन्मदिन मनाया जा सकता है.

साल में चार बार आता है गूगल का जन्मदिन

गूगल अब तक चार अलग-अलग तारीखों पर अपना जन्मदिन मना चुका है. गूगल के 15वें जन्मदिन पर कंपनी ने खुद यह बात स्वीकार की थी कि उन्हें नहीं पता कि गूगल का असली जन्मदिन कब है. गूगल ने अलग-अलग सालों में 7 सितंबर, 8 सितंबर, 26 सितंबर और 27 सितंबर को अपना जन्मदिन मनाया है.

साल 2002 में गूगल ने 27 सितंबर को अपना चौथा जन्मदिन मनाया था. इसके अगले साल 7 सितंबर और उसके अगले साल 8 सितंबर को भी गूगल ने अपना जन्मदिन मनाया था. हालांकि साल 2006 से अब तक गूगल 27 सितंबर को ही अपना जन्मदिन मनाता आ रहा है.

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पितृ पक्ष 2023: जानिए सपने में पूर्वजों का दिखना क्या संकेत देता है

इस साल पितृ पक्ष 29 सितंबर से प्रारंभ हो रहा है, जो 14 अक्टूबर तक रहेगा। 14 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ इसका समापन होगा। पूरे वर्ष में 15 दिन होते हैं जिन्हें श्राद्ध पक्ष या पितृ पक्ष के रूप में जाना जाता है। साल के ये 15 दिन पूरी तरह से पितरों को समर्पित होते हैं।

इस दौरान लोग अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं और उनके लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे अनुष्ठान करते हैं ताकि उनके पूर्वजों को शांति और संतुष्टि मिल सके।

अक्सर आपने पूर्वजों के सपने में आने की बात जरूर सुनी होगी। स्वप्न शास्त्र के मुताबिक, सपने में पितरों के आने की कोई ना कोई खास वजह जरूर होती है।

आज इस पोस्ट में हम जानेंगे सपने में पूर्वजों का दिखना क्या संकेत देता है, तो चलिए जानते हैं :-

 

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सपने में कब और क्यों आते हैं पितृ?

ऐसी मान्यताएं हैं कि मृत्यु होने के बाद जब किसी इंसान की ख्वाहिश अधूरी रह जाती है तो वो अपने वंशजों को सपने में में दिखाई देने लगते हैं। ऐसा कहते हैं कि पितृ केवल उन्हीं लोगों को दिखाई देते हैं जो उनकी अधूरी इच्छाओं को पूरा कर पाने में योग्य हैं।

जब तक उनकी ये ख्वाहिश पूरी नहीं होती, तब तक उनकी आत्मा को शांति नहीं मिलती है। हालांकि ऐसे सपनों का अर्थ पितरों की मुद्रा या भाव पर भी निर्भर करता है।

  • यदि सपने में आपके पितृ आपको हंसते हुए या खुश दिखाई दें तो ये उनके प्रसन्न होने का संकेत होता है। पितृ जब किसी इंसान से खुश होते हैं तो उनके जीवन की सारी बाधाएं, सारी समस्याएं खुद-ब-खुद समाप्त होने लगती हैं। पितरों का आशीर्वाद मिलने से वे जीवन में बड़ी उपलब्धियां भी भी हासिल कर सकते हैं।
  • यदि सपने में पितृ आपको बाल संवारते हुए दिखाई दें तो इसका भी एक खास मतलब होता है। इसका अर्थ है कि आप पर जो मुसीबत आने वाली थी, पितरों ने आपको उससे बचा लिया है। इसे एक शुभ संकेत की तरह समझें।
  • यदि सपने में पितृ आपको शांत मुद्रा में दिखाई दे रहे हैं तो समझ लीजिए, वे आपसे पूर्णत: संतुष्ट हैं। ये कोई बड़ी खुशखबरी मिलने का भी संकेत हो सकता है। आपको संतान पक्ष से कोई शुभ समाचार मिल सकता है। पेशवर जीवन या करियर के मोर्चे पर कोई बड़ी सफलता भी आपके हाथ लग सकती है। यदि आपको सपने में रोते हुए पितृ दिखाई दे रहे हैं तो ये बहुत ही अशुभ संकेत है। ऐसा होने पर आपको सावधानी बरतनी चाहिए।
  • पितरों का रोना आप पर किसी भारी संकट के आने का संकेत हो सकता है। इसे इग्नोर करने की बजाए पहचानने की जरूरत है। ऐसे में पितरों की शांति के लिए श्राद्ध कर्म और पिंडदान करना बहुत जरूरी हो जाता है।

भारत के इस जगह में पूर्णिमा की रात चांद जैसी चमकती है धरती, बेहद खूबसूरत होता है नज़ारा

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भारत में ऐसी बहुत सी ऐसी जगहें हैं जो बेहद खूबसूरत और आकर्षक हैं। दुनिया भर से लोग भारत की इन खूबसूरत जगहों का दीदार करने के लिए आते हैं। ऐसी ही एक जगह भारत के लेह ज़िले में स्थित है।

इस जगह को चांद की धरती भी कहा जाता है। इस जगह का नाम लामायुरू या लामायुरो (Lamayouro) है। दरअसल यह एक गांव है जहाँ दुनियाभर से लोग घूमने आते हैं।

इस पोस्ट में हम आपको इसी खूबसूरत जगह के बारे में बताने जा रहे हैं तो चलिए शुरू करते हैं :

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लामायुरु गांव

चांद की धरती कहा जाना वाला यह गांव लेह से 127 किमी दूर बसा है। समुद्र से 3510 मीटर ऊंचे और माइनस 40 डिग्री तापमान होने के बावजूद भी यहां घूमने का सपना हर सैलानी का होता है।

पूर्णिमा की रात को यहां की जमीन चांद की तरह चमकने लगती है इसलिए इस जगह को मूनलैण्ड के नाम से भी जाना जाता है। यहां पर लामायुरु मोनेस्ट्री है जिसे देखने के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।

लामायुरू मोनेस्ट्री से जुड़ी किंवदंती

लामायुरू मोनेस्ट्री लद्दाख के सबसे पुराने मठों में से एक है, जबकि यह लद्दाख में सबसे बड़ा मौजूदा गोम्पा भी है। इसके साथ कई किंवदंतियाँ जुड़ी हुई हैं, जिनमें से एक यह है कि लामायुरू में एक विशाल झील मौजूद थी। इस झील को महासिद्धाचार्य नरोपा ने गाँव और मठ की नींव रखने के लिए सुखा दिया था।

इस प्रकार, पानी सूखने के बाद, भूमि पर चाँद जैसे गड्ढे और संरचनाएँ बनने लगीं। बेशक, इस किंवदंती का कोई ठोस प्रमाण नहीं है और यह केवल एक कहानी है जो सदियों से बताई जाती रही है।

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लामायुरू मठ सबसे अधिक आश्चर्यजनक स्तूपों और रंगीन चट्टानों का घर है जिन पर जटिल विवरण में प्रार्थनाएं उकेरी गई हैं। मठ में कार्डिनल राजाओं की कई उज्ज्वल और ज्वलंत प्राचीन पेंटिंग भी हैं।

इसमें मूल रूप से पांच मुख्य इमारतें थीं, लेकिन वर्तमान में, केवल एक केंद्रीय इमारत मौजूद है, जो अपने आप में दुनिया भर के यात्रियों, भक्तों और फोटोग्राफरों को अपनी ओर आकर्षित करती है।

लामायुरु लद्दाख में सबसे बड़े और सबसे पुराने गोम्पों में से एक है, जिसकी आबादी लगभग 150 स्थायी भिक्षुओं की है। अतीत में, इसमें 400 भिक्षु रहते थे, जिनमें से कई अब आसपास के गांवों में गोम्पों में स्थित हैं।