ये हैं दुनिया के 5 अजीबोगरीब जीव

पूरे विश्व में विभिन्न प्रजातियों के पशु-पक्षी एवं जीव-जंतु पाए जाते हैं और सभी का अपना एक अलग महत्व है। उनमें से कुछ अपने रंग, मधुर आवाज और अपने आकार के लिए प्रसिद्ध हैं इसलिए वे विभिन्न विशेषताओं के साथ लोकप्रिय हैं।

इनमें से कुछ महासागर की गहराई में और कुछ घने जंगलों के बीच बसे हैं। आज हम दुनिया के कुछ ऐसे अजीबोगरीब जीवों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें आपने पहले न कभी देखा होगा और न ही उनके बारे में सुना होगा तो आइये जानते हैं कुछ ऐसे ही विचित्र जीवों के बारे में :-

ओकापी

ओकापी अफ्री़का के इटुरी वर्षावन, जो कि मध्य अफ्री़का के कांगो लोकतान्त्रिक गणराज्य  में पाया जाने वाला एक जीव है।

यह जिराफ़ का सबसे करीबी रिश्तेदार है। ओकापी का पृष्ठ भाग गहरे भूरे  रंग का होता है और पैरों में अद्भुत सफे़द-काली धारियाँ होती हैं, जिससे दूर से देखने में यह ज़ेब्रा जैसा दिखता है।

इसके शरीर की बनावट जिराफ़ जैसी ही होती है सिवाय लंबी गर्दन के। ओकापी और जिराफ़ दोनों की जीभ लंबी होती है जो नीले रंग की होती है और जिसकी मदद से वह पेड़ों से कोमल पत्तियाँ और कोपलें खाते हैं।

शूबिल

शूबिल अफ्रीका के सूडान और जांबिया में पाई जाती है। इसे इंग्लिश में ‘शूबिल’ तो अरबी में ‘अबू मरकब’ कहते हैं।

अबू मरकब का मतलब होता है जूते के साथ। इनकी चोंच जूते के आकार की होती है। इसी वजह से इनका नाम शूबिल पड़ा है।

शूबिल एक बड़ी चिड़िया है। इसका वजन करीब 8 किलो तक होता है। इसे साफ पानी के पास रहना पसंद है क्योंकि यह मछलियों का शिकार करना पसंद करती है इसीलिए यह अफ्रीका के उन क्षेत्रों में ही पाई जाती हैं, जहां नदी के पास जंगल हो और उस नदी में भरपूर मछलियां हों।

थोर्नी ड्रैगन

ऑस्ट्रेलिया में पाए जाने वाला यह जीव छिपकली की तरह दिखता है। इसकी पूरी बॉडी पर नुकीले कांटे होते हैं। यह मौसम के हिसाब से खुद को बदल सकता है। ये छिपकली आसानी से रेगिस्तान की मिट्टी में छिप जाती है।

इंडियन पर्पल फ्रॉग

भारत में पाई जाने वाली मेंढ़कों की प्रजातियों में से यह सबसे विचित्र प्रजाती है। इनका शरीर अजीब सा मोटा होता है। इसे ‘मावेली’ कहकर भी बुलाया जाता है।

माना जाता है कि बैंगनी रंग का दिखने वाला यह मेंढक कभी डायनासोर के साथ सह-अस्तित्व में था। ये साल भर धरती के अंदर रहते हैं और संभोग के लिए सिर्फ़ दो हफ़्ते धरातल पर बिताते हैं।

पाकु मछली

पाकु फिश को “बॉल कटर” भी कहते हैं। इसकी खासियत यह है कि इसके दांत इंसानों जैसे होते हैं। यह जब मुंह खोलती है तो वह इंसानी मुंह जैसा नज़र आता है और ये अपने शिकार को काटने से चूकती नहीं है।

ब्लू पेरेट फिश

एकदम नीले रंग की यह मछली अटलांटिक महासागर में पायी जाती है। इसकी खासियत यह है कि इसकी तोते की तरह चोंच होती है। मतलब यह कि इसका अलगा भाग तोते की तरह नज़र आता है।

मैंटिस श्रिम्प

इस जीव को सी लोकसटस प्रॉन किलर या थंब स्प्लिंटर्स भी कहते हैं। ये ट्रॉपिकल और सब-ट्रॉपिकल पानी में पाए जाते हैं। ये अधिक्तर वक्त अपने बिल में छिपे रहते हैं।

गोब्लिन शार्क

गोब्लिन शार्क लगभग पूरी दुनिया में पाई पाई  है। यह समुद्री सतह के 100 मीटर की गहराई में रहती है और यह  शार्क  लोगों को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाती।

इसकी खासियत यह है कि इसका मुंह बहुत अजीब होता है। ऐसा लगता है कि इसका सिर गेंडे के सिंग के समान है इसीलिए यह अन्य शार्क मछलियों से भिन्न होती है।

इंस्टाग्राम से जुड़े कुछ दिलचस्प तथ्य

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इंस्टाग्राम से जुड़े कुछ दिलचस्प तथ्य

  • इंस्टाग्राम को 6 अक्टूबर 2010 को लांच किया गया था। इंस्टाग्राम के फाउंडर Kevin Systrom और Mike Krieger हैं और इसका मुख्यालय Melno Park, California में है l
  • शुरुआत में इंस्टाग्राम को कोडनेम कहा जाता था, लेकिन लांच होने से पहले इसका नाम बदलकर इंस्टाग्राम रख दिया गया l
  • इंस्टाग्राम का नाम “इंस्टेंट कैमरा” और “टेलीग्राम” के संयोजन से आता है।
  • 16 जुलाई 2010 को इसके सह-संस्थापक kevin Systrom द्वारा पहली तस्वीर पोस्ट की गई थी। यह तस्वीर एक कुत्ते की थी।
  • क्या आपको पता है कि इंस्टाग्राम को लड़कों से ज्यादा लड़कियां यूज़ करती हैं। इंस्टाग्राम को इस्तेमाल करने वाले लड़के सिर्फ 21% ही हैं बाकी सारी लड़कियां हैं।
  • एक अध्ययन में पता चला है कि इंस्टाग्राम पर 8% खाते नकली हैं।
  • यह अनुमान लगाया गया है कि जिन पोस्टों में कम से कम एक हैशटैग शामिल है, वे 6% अधिक जुड़ाव प्राप्त करते हैं।
  • क्या आपको पता है कि इंस्टाग्राम पर सबसे ज्यादा पिज्जा की तस्वीरें पोस्ट होती हैं। जो इंस्टाग्राम पर सबसे ज्यादा पॉपुलर फ़ूड है।

  • इंस्टाग्राम को फेसबुक ने 2012 में $ 1 बिलियन डॉलर में खरीदा था।
  • 2018 तक, सेलेना गोमेज़ 138 मिलियन फॉलोअर्स के साथ इंस्टाग्राम पर सबसे अधिक फॉलो की जाने वाली व्यक्ति थीं।
  • इंस्टाग्राम पर कम से कम 1 मिलियन विज्ञापनदाता हैं।
  • लोकप्रियता के क्रम में इंस्टाग्राम का उपयोग करने वाले शीर्ष पांच देश संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, तुर्की, ब्राजील और यूनाइटेड किंगडम हैं।
  • इंस्टाग्राम पर सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला इमोजी हार्ट इमोजी है।
  • शीर्ष तीन सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले फ़िल्टर गिंगहैम, क्लेरेंडन और जूनो हैं।
  • हर महीने, ” इंस्टाग्राम ” के लिए 16 मिलियन से अधिक गूगल खोज होती हैं।
  • लोकप्रियता के क्रम में इंस्टाग्राम पर शीर्ष पांच ब्रांड हैं- नेशनल जियोग्राफिक, नाइकी, विक्टोरिया सीक्रेट, 9 जीएजी और नाइके फुटबॉल।
  • इंस्टाग्राम पर आधे से अधिक शीर्ष ब्रांड हर पोस्ट के लिए एक ही फिल्टर का उपयोग करते हैं।
  • इंस्टाग्राम फेसबुक के बाद दूसरा सबसे अधिक जुड़ा हुआ नेटवर्क है। इसके 60% से अधिक उपयोगकर्ता दैनिक आधार पर लॉग इन करते हैं।
  • सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले हैशटैग #love, #instagood, #me, #cute और #follow हैं।
  • अमेरिका के 96% शीर्ष फैशन ब्रांड्स इंस्टाग्राम का उपयोग करते हैं।
  • हर दिन, एक सौ मिलियन खाते दैनिक आधार पर एक स्टोरी अपलोड करते हैं।
  • इंस्टाग्राम के अधिकांश उपयोगकर्ता 18 से 29 वर्ष के बीच के हैं।
  • इंस्टाग्राम पर सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली फोटो “काइली जेनर” की एक पोस्ट है – इस फोटो को 9 मिलियन से ज्यादा लाइक्स मिले।
  • एक सामान्य दिन में, इंस्टाग्राम पर 80 मिलियन तस्वीरें साझा की जाती हैं।

दुनिया भर में सबसे ज़्यादा उपयोग की जाने वाले कुछ सर्वश्रेष्ठ सोशल मीडिया ऐप्स

इस समय दुनिया भर में बहुत सी सोशल मीडिया ऐप्स है। हर चीज के लिए एक नई ऐप आ रही है। कंपनियां हों या फिर सरकारें, सब कुछ ऐप के जरिये ओपरेट होने लगा है।

किसी भी आनलाइन काम के लिए आपको एक एप्प जरूर चाहिए। आधार कार्ड के लिए ऐप, बैंक के लिए ऐप, मैसेजिंग के लिए ऐप और न जाने किस-किस तरह की ऐप्स हम डाउनलोड करते हैं।

आज हम आपको सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली ऐप्स के बारे में बताने जा रहे हैं :-

फेसबुक

फेसबुक सबसे पॉपुलर सोशल मीडिया ऐप है। फेसबुक के 238 करोड़ ऐक्टिव मंथली यूजर्स हैं। 2004 में शुरू हुई इस साइट ने इंटरनेट पर यूजर्स को आपस में कनेक्ट करने का कार्य किया।

सर्वे में पाया गया कि 37 प्रतिशत स्मार्टफोन यूजर्स के फोन में यह ऐप जरूर मिलेगी। इनमें सबसे ज्यादा 45 प्रतिशत लोग 35 से 54 साल की आयु के लोग हैं।

18-34 साल के 29 प्रतिशत व 55 साल से ज्यादा आयु वाले 37 प्रतिशत लोग उसका यूज़ करते हैं।

इंस्टाग्राम

फेसबुक के बाद अगर कोई ऐप पॉपुलर है तो वह है इंस्टाग्राम। इस ऐप के जरिए आप न सिर्फ वीडियो या फोटो अपलोड कर सकते हैं बल्कि इसके जरिए आप लाइव ब्रॉडकास्ट और स्ट्रीमिंग भी कर सकते हैं।

अगर आपको म्यूजिक और डांस का शौक है तो आप अपने वीडियो अपलोड कर सकते हैं। अगर आपका अकाउंट लोकप्रिय हो जाता है यानी कि आपके फॉलोअर्स बढ़ जाते हैं तो विभिन्न ब्रैंड्स के साथ साझेदारी करके आप कमाई भी कर सकते हैं।

व्हाट्सएप

व्हाट्सएप पहले से ही बहुत सारे सोशल मीडिया और मैसेजिंग के लिए जाना जाता है व्हाट्सएप का उपयोग 180 से अधिक देशों में किया जाता है।

शुरुआत में, इसका उपयोग व्यक्तियों द्वारा अपने रिश्तेदारों और परिजनों के साथ बात चीत और मेसेजेस करने के लिए किया जाता था l

व्हाट्सअप पर हम वॉयस कॉल, वीडियो कॉल, ग्रुप वीडियो कॉल,और हर प्रकार के डॉक्स, अपने चैट और मीडिया का बैकअप लें सकते है।

यूट्यूब

यूट्यूब अमेरिका की एक वीडियो देखने वाली वेबसाइट है, जिसमें पंजीकृत सदस्य वीडियो क्लिप देखने के साथ  अपना वीडियो अपलोड भी कर सकते हैं।

इस ऐप में यूजरस वीडियो अपलोड, देखने, साझा करने और रिपोर्ट कर सकते हैं। इसे पेपल के तीन पूर्व कर्मचारियों, चाड हर्ले, स्टीव चैन और जावेद करीम ने मिल कर फरवरी 2005 में बनाया था, जिसे नवम्बर 2006 में गूगल ने $1.65 बिलियन अमेरिकी डॉलर में खरीद लिया।

स्नैपचैट

2011 में शुरू हुई स्नैपचैट के 33 करोड़ से ज्यादा मासिक यूजर्स हैं और टीन एजर्स के बीच यह खासा पसंद किया जाने वाला ऐप है।

इस प्लैटफॉर्म के सबसे ज्यादा ऐक्टिव यूजर्स की उम्र 13 साल के आसपास है। इस ऐप की खास बात यह है कि इसमें आप एक साथ 16 दोस्तों के साथ लाइव मैसेजिंग और वीडियो चैट कर सकते हैं।

जानिए कैसे ग्रीन टी डार्क सर्कल्स को दूर करेगी “घरेलु उपाए”

आँखें शरीर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है लेकिन आजकल टीवी स्क्रीन और मोबाइल का उपयोग आँखों के चारों ओर डार्क सर्कल्स का कारण बनता जा है जिससे चेहरे की सुंदरता कम होती जा रही है l

कुछ आसान तरीको सॆ आप जल्द ही इससे छुटकारा पा सकते हैं। ग्रीन टी बैग्स आपको डार्क सर्कल्स से छुटकारा दिला सकती है।

आँखों पर ग्रीन टी बैग का उपयोग डार्क सर्कल, पफनेस और लालिमा को कम करके आपकी आँखों की बनावट को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। इससे आंखों में होने वाली जलन में भी बहुत राहत मिलती है।

टी बैग एक किफायती, प्राकृतिक विकल्प है जिसे आप आसानी से घर पर आजमा सकते हैं। टी बैग आँखों पर रखने से आपको काफी आराम मिलेगा। जब तक आपके काले घेरे समाप्त नहीं हो जाते हैं, तब तक आप प्रति दिन इसका उपयोग कर सकते हैं l

कैसे इस्तेमाल करें

जब भी आप चाय पीने जा रहे हों, तो सामान्य रूप से चाय के दो बैग उठाएँ फिर बैग से अतिरिक्त तरल बाहर निचोड़कर उन्हें ठंडा होने दें या उन्हें 10 से 20 मिनट के लिए रेफ्रिजरेटर में ठंडा करें।

टी बैग्स को 15 से 30 मिनट के लिए बंद आँखों पर अप्लाई करें। यदि आप इन टी बैग्स को पिंपल्स पर लगा सकते हैं तो आप पिंपल्स और दाग- धब्बों से भी छुटकारा पा सकते हैं।

अपनी आँखों को धीरे-धीरे उंगलियों से दबाएं या आप धीरे से अपनी आँखों के आसपास के क्षेत्र की मालिश कर सकते हैं।

इसके अलावा आप ककड़ी के स्लाइस का इस्तेमाल भी कर सकते हैं ऐसा करने से दिन भर के तनाव से भी आराम मिलता है।

ग्रीन टी बैग्स उन महिलाओं के लिए भी बहुत फायदेमंद होते हैं जिनकी त्वचा तैलीय होती है। इसके लिए आप इस्तेमाल किए हुए टी बैग्स को वापस पानी में डालकर अपने चेहरे पर लगा सकते हैं।

ये है दुनिया के सबसे विचित्र त्यौहार, जिनके बारे में जानकर आप हैरान रह जाएंगे

त्यौहार धर्म, संस्कृति तथा मान्यताओं पर आधारित होते हैं त्यौहारों का प्रमुख उद्देश्य आर्थिक समृद्धि, रिश्तों को मजबूत बनाना, प्रकृति की कृतज्ञता और ऋतुओं का मानव जीवन मे महत्व बताना होता है।

लेकिन दुनिया में कुछ त्यौहार ऐसे भी हैं जो काफी विचित्र हैं जिनके बारे में जानकर आप हैरान रह जाएंगे। तो आइये जानते हैं कुछ ऐसे विचित्र त्यौहारों के बारे में

बेबी जंपिंग फेस्टिवल

बेबी जंपिंग फेस्टिवल या यूं कहे बच्चों के ऊपर से कूदने का ये अजीबोगरीब फेस्टिवल कहीं और नहीं बल्कि कैस्टिलो स्पेन में मनाया जाता है।

इस फेस्टिवल में नवजात जन्में बच्चों की माएं उन्हें जमीन पर रख देती हैं और शैतान के रूप में तैयार पुरुष बच्चों के ऊपर से कूदते हैं। ऐसा माना जाता है कि नवजात बच्चों को ऐसा करके शैतानी शक्ति से बचाया जाता है।

17 वीं शताब्दी से ही ये फेस्टिवल मनाया जा रहा है साथ ही ये भी माना जाता है कि जो भी बच्चा इस प्रक्रिया से नहीं गुजरता वो जिंदगी भर शैतानी साये में जीता है।

रोसवैल यूएफओ फेस्टिवल

ये फेस्टिवल एक प्रकार की गंभीर मीटिंग होती है जिसमें सभी यूएफओलॉजिस्ट दुर्लभ जीवों के बारे में बात करते है। ये त्यौहार मेक्सिको के रोसवैल में मनाया जाता है।

वेजीटेरियन फेस्टिवल

ये फेस्टिवल पुरे थाईलैंड में मनाया जाता है। यह फेस्टिवल अजीब होने के साथ-साथ बेहद डरावना और खतरनाक फेस्टिवल है। ये फेस्टिवल अपने नाम के बिल्कुल विपरीत है।

इसमें नौ देवताओं के लिए खुद की आहुती दी जाती है, जिसके अंतर्गत प्रतिभागी 9 दिनों के लिए सयंम का अभ्यास करते हैं।

शुद्धिकरण की प्रक्रिया के लिए मांसाहार खाने पर पाबंदी है। इसके साथ ही अपने शरीर के अंगो में भाले, चाकू और धातु की छड़ से छेद करना होता है।

मछरों का फेस्टिवल

इस अजीबोगरीब मछरों के फेस्टिवल को टेक्सास के क्लूट में मनाया जाता है। तीन दिवसीय इस फेस्टिवल में नए प्रकार के विचित्र खेलों का आयोजन किया जाता है।

बोलस दे फुएगो

इस त्यौहार के बारे में जानने के बाद आप आग से दूरी बना लेगें। य़े त्यौहार एल साल्वाडोर में मनाया जाता है जो बेहद खतरनाक होता है।

नेजला के एक छोटे से शहर में लोग एक स्थान पर इक्कटे हो जाते है और एक दूसरे के ऊपर आग के गोले फेंकते हैं।

कोनकी सूमो फेस्टिवल

ये फेस्टिवल जापान के यामाजी मंदिर में मनाया जाता है। कोनकी का मतलब रोना होता है। जापान के इस पारंपरिक त्यौहार में दो सूमो लड़ाका हाथ में छोटा बच्चा लिए एक दूसरे के सामने खड़े हो जाते हैं।

ये काफी विचित्र है कि प्रतियोगिता तब शुरू होती है जब दोनों बच्चों में से कोई पहले रोता है साथ ही जो ज्यादा देर तक और तेज आवाज में रोता है वो बच्चा प्रतियोगिता जीत जाता है।

कैट फ़ूड फेस्टिवल

इस फेस्टिवल के बारे में आप जैसा सोच रहें हैं वैसा बिल्कुल नहीं है बल्कि उसके विपरीत है। यहां बिल्लियों को खाना नहीं खिलाया जाता बल्कि बिल्लियों को ही खाने के रूप में परोसा जाता है।

पेरू के लोगों का मानना है कि बिल्ली का मांस एक स्वास्थ्य पूरक है। ये फेस्टिवल दक्षिणी लीमा, पेरू में मनाया जाता है।

हदाका मत्सूरी, नग्न परेड

ये परेड जापान के ओकायामा में सैदाईजी मंदिर के पास निकाली जाती है हालांकि इसमें लोग पुरे नहीं बल्कि अर्धनग्न होते है और करीब 10000 पुरुष लंगोट पहनकर निकलते हैं।

परेड के दौरान प्रतिभागी संतों द्वारा फेके गए तावीज को पाने की कोशिश करते हैं। सभी पुरुष अपने साथ एक कागज में नाम, पता, ब्लड ग्रुप और फोन नंबर लेकर आते हैं।

यूट्यूब से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

आपने अपने जीवनकाल में कम से कम एक बार यूट्यूब का उपयोग तो जरूर किया होगा। यूट्यूब एक वीडियो साझा करने वाली वेबसाइट है और उपयोगकर्ताओं को वीडियो अपलोड करने, देखने और साझा करने की अनुमति देती है। आज हम आपको यूट्यूब से जुड़े कुछ रोचक तथ्यों के बारे में बताने जा रहे हैं :-

  • यूट्यूब की स्थापना 14 फरवरी (वेलेंटाइन डे के दिन), 2005 को तीन पूर्व-पेपल कर्मचारियों द्वारा की गई थी। यू ट्यूब को  चाड हर्ले, स्टीव चेन और जावेद करीम  द्वारा 2005 में  बनाया गया था।  इससे पहले वे  ‘Paypal’ पेपल में काम करते थे
  • 9 अक्टूबर 2006 में यूट्यूब को गूगल ने 65 अरब डॉलर में खरीद लिया था। ये उस समय की सबसे बड़ी ऑनलाइन डील थी l
  • पहली बार यूट्यूब वीडियो 23 अप्रैल, 2005 को अपलोड किया गया था। यह सैन डिएगो चिड़ियाघर में इसके सह-संस्थापक का एक वीडियो था।
  • प्रारंभ में, यूट्यूब को “ट्यून इन हुक अप” नामक एक वीडियो डेटिंग साइट बनाया गया था।
  • यूट्यूब पर एक बिलियन से अधिक उपयोगकर्ता हैं, जो इंटरनेट पर लगभग एक-तिहाई है।
  • यूट्यूब पर सबसे पुराना बिल्ली का वीडियो 1894 का है। इसमें दो बिल्लियों की बॉक्सिंग खेल रही है।
  • 2014 में प्रसिद्ध यूट्यूब स्टार, ग्रम्पी कैट ने यूट्यूब से सबसे अधिक पैसे कमाए। Gwyneth Paltrow – एक ऑस्कर-विजेताअभिनेत्री है ।
  • यू.एस. के अलावा सबसे अधिक यूट्यूब वियुर सऊदी अरब के हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि सऊदी अरब में टीवी, फेसबुक और ट्विटर पर प्रतिबंध है, लेकिन यूट्यूब अप्रतिबंधित है।
  • सबसे लोकप्रिय ट्यूटोरियल, में जिन्हें सबसे ज़्यादा सर्च किया गया है उसमे से पहला है  “हाउ टू किस” और  दूसरा “टाई बांधने का तरीका” है।
  • गूगल के बाद यूट्यूब इन्टरनेट का दूसरा सबसे बड़ा सर्च इंजन है, बिंग, याहू ! और आस्क को एक साथ जोड़ दिया जाये तब भी यूट्यूब इनसे बड़ा है।
  • जावेद करीम की सेन डिएगो चिड़ियाघर की “Me At the Zoo’ नाम की वीडियो दुनिया की पहली वीडियो थी जो यूट्यूब पर डाली गई थी।
  • दुनिया में ऐसे 10 शहर ऐसे है जहां “यूट्यूब स्पेस ” नाम की जगह है। यहां पर 10 हज़ार से अधिक सब्सक्राइबर्स वाले लोग जाकर वीडियो बना सकते है। वीडियो बनाने के लिए वहां काफी सुविधाएं दी जाती है। भारत में यह जगह मुंबई में है।
  • गूगल दुनिया की सबसे बड़ी विज्ञापन कंपनी है, और यूट्यूब का मुद्रीकरण शुरू करने में इसे लंबा समय नहीं लगा। सेवा का पहला विज्ञापन अगस्त 2007 में प्रसारित किया गया था, जब गूगल  ने यह साइट खरीदी थी।

अयोध्या राम मंदिर से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

अयोध्या, इस स्थान को भगवान राम की जन्मभूमि के रूप में जाना जाता है। अयोध्या को अवध शहर के रूप में भी जाना जाता है। यह पवित्र क्षेत्र फैजाबाद के पूर्व में घाघरा नदी पर स्थित है। इसमें कई मंदिर हैं और यह प्राचीन भारत के सबसे प्रतिष्ठित शहरों में से एक है।

काफी लंबे समय के इंतजार के बाद अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर बनने जा रहा है। 22 जनवरी 2024 को इसमें श्रीराम की मूर्ति की प्राणप्रतिष्ठा की जायेगी।

आज हम आपको अयोध्या नगरी के बारे में कुछ रोचक जानकारी देने जा रहे हैं। आइए जानते हैं अयोध्या नगरी के बारे में:-

2,587 स्थानों से पवित्र मिट्टी का इस्तेमाल किया जाएगा

राम मंदिर की नींव रखने के लिए कई धार्मिक स्थानों से पवित्र मिट्टी एकत्र की गई है। भारत में 2,587 पवित्र स्थानों से मिट्टी एकत्र की गई है:-

जिसमें यमुनोत्री, हल्दीघाटी, झाँसी का किला, कानपुर के चित्तौड़गढ़ में नरसंहार घाट, चित्तौड़गढ़ में शिवाजी का किला, बिठूर में ब्रह्माजी की खूंटी, प्रयाग में चंद्रशेखर शहीद हुए, स्वर्ण मंदिर, नाना राव पेशवा किला, बंगाल, केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगा, बद्रीनाथ, गंगा जैसे पवित्र स्थान हैं।

मेघालय में सिन्टू केसर, जोवाई और नर्तियांग, कामख्या मंदिर, रामेश्वरम में अग्नि सिद्धांत और साथ ही आगरा में बटेश्वर गांव में पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के पैतृक घर से मिट्टी एकत्र की गई है।

150 नदियों के पवित्र जल का इस्तेमाल किया जाएगा

नींव रखने में 150 नदी के पवित्र जल का उपयोग किया जाएगा, जिसे दो भाइयों राधेश्याम पांडे और शबद वैज्ञानिक महाकवि त्रिफला द्वारा एकत्र किया गया है। संग्रह में आठ नदियों, तीन समुद्रों, और श्रीलंका के सोलह स्थानों से पवित्र जल है।

इसके अतिरिक्त, मानसरोवर के पवित्र जल को भी लाया गया है। मेधालय के जयंतिया हिल्स – म्येनडु और म्यंतांग में भी दो नदियों से पानी एकत्र किया गया है। पश्चिम जयंतिया हिल्स में स्थित 600 साल पुराना दुर्गा मंदिर इसे एक पवित्र स्थल बनाता है।

टाइम कैप्सूल

मंदिर के नीचे 2,000 फीट की दूरी पर टाइम कैप्सूल रखा गया है। इस टाइम कैप्सूल का मकसद यह है कि सालों बाद भी यदि कोई श्रीराम जन्मभूमि के बारे में जानना चाहे तो वो इससे जान सकता है। कैप्सूल में राम जन्मभूमि, अयोध्या और भगवान राम से संबंधित तथ्य होंगे।

मंदिर के लिए विशेष ‘श्री राम’ ईंटें

तमिलनाडु के साधु सोने और चांदी से बने दो ईंट लेकर आए हैं, जिन पर तमिल भाषा में श्रीराम लिखा हुआ है। सोने-चांदी के इन ईंटों को राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र को दान किया जाएगा जिनका उपयोग मंदिर निर्माण के लिए किया जाएगा।

अयोध्या में ’शिलान्यास’ होने से पहले, 1989 में देश भर के भक्तों से राम शिल्स नामक इन ईंटों को एकत्र किया गया था।

मंदिर निर्माण में लोहे या स्टील का कोई उपयोग नहीं किया जाएगा

मंदिर का निर्माण केवल पत्थरों का उपयोग करके किया जाएगा और इसे बनाने के लिए किसी भी तरह के लोहे और स्टील का उपयोग नहीं किया जाएगा। निर्माण के लिए केवल लकड़ी, सफेद सीमेंट और तांबे का उपयोग किया जाएगा।

भगवान हनुमान की जन्मभूमि से पत्थर का उपयोग किया जायगा

कर्नाटक के अंजनद्री हिल से पत्थर, जिसे भगवान हनुमान की जन्मभूमि कहा जाता है, का उपयोग राम मंदिर के निर्माण में किया जाएगा।

मंदिर को सोमपुरा आर्किटेक्ट्स द्वारा डिजाइन किया गया है

अहमदाबाद स्थित 15 वीं पीढ़ी के वास्तुकार परिवार सोमपुरवासी जिन्होंने भारत और विदेशों में 200 से अधिक मंदिरों का निर्माण किया है, अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण करेंगे।

चंद्रकांत सोमपुरा ने 30 साल ने पहले मंदिर का स्केच डिजाइन किया था, जिसे अब संशोधित और पुन: उपयोग किया जा रहा है।

सोमपतियों ने गुजरात में सोमनाथ मंदिर और अक्षरधाम को डिजाइन किया, साथ ही मुंबई में स्वामीनारायण मंदिर और कलकत्ता में बिड़ला मंदिर सहित कई अन्य।

मंदिर निर्माण में एल एंड टी को शामिल किया जाएगा

मंदिर निर्माण में दिग्गज कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण शुरू करेगी, जिसके अगले 3-3.5 वर्षों में पूरा होने की उम्मीद है।

पूरे भारत से सोने और चांदी की ईंटों का दान

मंदिर निर्माण के लिए पूरे भारत से सोने और चांदी की ईंटों का दान राम मंदिर ट्रस्ट को किया गया है।  इस कार्य के लिए सेलिब्रिटीज से लेकर राजनेताओं तक सभी का योगदान रहा है।

मंदिर के निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश बुलियन एसोसिएशन ने 33 किलोग्राम से अधिक वजन की चांदी की ईंटें दान में दी हैं।

हैदराबाद के स्वयंसेवी संगठन पवन कुमार फाउंडेशन राम मंदिर के निर्माण के लिए मंदिर ट्रस्ट को 34 चांदी और सोने की ईंट दान करेगा।

यहां तक कि तमिलनाडु के संतों ने तमिल में ‘श्री राम’ के साथ दो सोने और चांदी की ईंटें दान कीं। सोने की ईंट का वजन 5 किलो और चांदी का वजन 20 किलो है।

अहमदाबाद के जैन समुदाय ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए 24 किलो चांदी की ईंटें भी दान की हैं। कांग्रेस नेता कमलनाथ ने भी मप्र कांग्रेस की ओर से 11 चांदी की ईंटें दान करने की घोषणा की।

ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को 40 किलो वजन की चांदी की ईंट मिली, जिसका उपयोग भूमि पूजन समारोह के दौरान किया गया था।

करोड़ों में मौद्रिक दान किए गए हैं

राम मंदिर के निर्माण के लिए सिर्फ सोने और चांदी की ईंटें ही नहीं, बल्कि भारी मात्रा में दान किया जा रहा है जिसमें आध्यात्मिक गुरु मोरारी बापू ने 5 करोड़ रुपये के दान की घोषणा की, यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने 6.60 लाख रुपये का दान दिया, जबकि यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने 11 लाख रुपये का दान दिया।

भव्य मंदिर की प्रमुख विशेषताएं

  • दो मंजिला मंदिर की लंबाई 268 फीट, चौड़ाई 140 फीट और ऊंचाई 128 फीट है। भूमि तल में भगवान राम के जन्म और उनके बचपन की कहानी को चित्रित किया जाएगा, जबकि पहली मंजिल में राम दरबार का एक लेआउट होगा।
  • मंदिर का निर्माण बंसी पहाड़पुर ’नामक गुलाबी बलुआ पत्थर का उपयोग करके किया जाएगा, जिसे राजस्थान के भरतपुर से लाया जाएगा।
  • राम मंदिर 10 एकड़ भूमि पर बनाया जाएगा और शेष 57 एकड़ मंदिर परिसर के रूप में विकसित किया जाएगा। संरचना में पाँच मंडप हैं – कुडू, रंग, नृत्य, कीर्तन और प्रथना।
  • मुख्य संरचना में 360 स्तंभ होंगे, और इसे वास्तु शास्त्र को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया जाएगा। प्रतिष्ठित शहर शैली में निर्मित होने के लिए, शिल्पा की विशिष्टताओं को मंदिर के निर्माण में शामिल किया जाएगा।

जानिए रेड सैंड बोआ सांप की कीमत क्यों है करोड़ों में

रेड सैंड बोआ सांप एक बहुत ही दुर्लभ प्रजाति का सांप है यह Boidae प्रजाति का है यह सांप भारत, पाकिस्तान तथा ईरान में पाया जाता है l

इस सांप के बारे में कई तरह के वहम है जैसे कि इसके दो मुंह होते हैं तथा यह विषैला नहीं  होता है लेकिन यह गलत हैं इसके पूरे शरीर की संरचना बेलनाकार होती है यह लंबाई में औसत 2 फुट तक होते हैं लेकिन इनकी अधिकतम लंबाई 3 फुट तक हो सकती हैl

इनका सर थोड़ा नुकीले आकार का होता है जिसके ऊपर छोटी नाक तथा छोटी छोटी आंखें होती है इनकी रोचक बात यह है कि इनका सर और पूंछ दोनों लगभग समान आकार की होती हैं जिसकी वजह से लोगों को लगता है कि इसके दो मुंह हैं।

इनका रंग हल्का लाल भूरा तथा हल्का पीला भूरा होता है रेड सैंड बोआ सांप छोटे चूहों तथा अन्य छोटे जीवों को अपना शिकार बनाते हैं यह सांप आमतौर पर मुलायम रेतीली मिट्टी में रहना पसंद करता है जिससे कि इनको रेंगने में आसानी होती है l

यह सांप बहुत धीमी गति से रेंगता है इसी वजह से इनको आसानी से पकड़ा जा सकता है आइए जानते हैं इस सांप को लेकर कुछ धारणाएं तथा अंधविश्वास जो इसे इतना महंगा बनाती है

इस सांप से जुड़े अंधविश्वास

दो मुहे सांप को लेकर कई देशों में और भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में यह मान्यता है कि यह सांप मनुष्य के भीतर सुपर नेच्युरल पावर पैदा कर देता है। ऐसे व्यक्ति को भूत, भविष्य और वर्तमान की घटनाओं की जानकारी मिल जाती है।

वह लोगों का भला-बुरा करने में भी सक्षम हो जाता है। यह भी सुनने को मिल जाता है कि इस सांप के माध्यम से तांत्रिक प्रयोग कर लोग धन, सम्पत्ति भी प्राप्त करते हैं।

चीन और जापान जैसे देशों में यह धारणा है कि जो पुरुष इसके मांस का सेवन करता है वह आजीवन जवान रहता है जबकि ये सारे अंधविश्वास गलत हैं और इनका हकीकत से कोई लेना देना नहीं है।

विप्लुप्ति की कगार पर पहुंच गया है रेड सैंड बोआ सांप

वन्य-जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-4 में रेड सैंड बोआ को शामिल किया गया है, जिसके तहत इसका पालन, शिकार, इसे पकड़ना या इसकी तस्करी करना एक कानूनी अपराध है ।

तस्करी हेतु लगातार इसका शिकार हो रहा है, जिसके चलते सांपो की यह प्रजाति आज विलुप्त होने की कगार पर खडी है

इन सभी धारणाओं के चलते तथा रेड सैंड बोआ सांप की बहुत कम उपलब्धता ही इसे इतना महंगा बनाती है l ब्लैक मार्केट में इसकी कीमत 2 से 4 करोड रुपए तक हो सकती है यह कीमत इस सांप के वजन तथा ग्राहकों की उपलब्धता के हिसाब से बढ़ या घट सकती है

रेड सैंड बोआ सांप से जुड़ा सच

सच तो यह है कि रेड सेंड बोआ सांप भी अन्य सांपों की तरह एक जहरीला सांप होता है जो चूहे, कीड़े-मकोड़े तथा छोटे जानवरों को अपना शिकार बनाता है।

यह आदमी से दूर ही रहता है, वैज्ञानिकों के अनुसार अभी तक एक भी ऐसा केस सामने नहीं आया है जिसमें दो मुंहे सांप ने किसी व्यक्ति को काटा हो।

यह लोगों के लिए पूरी तरह से निरापद तथा हानिरहित है। इसमें ऐसे कोई भी तत्व या पदार्थ नहीं पाए गए हैं जिससे ऊपर बताई गई कोई बीमारी, शक्ति या ईश्वरीय शक्ति प्राप्त हो सके।

उत्तरी ध्रुव नॉर्थ पोल से जुड़ी कुछ रोचक जानकारी

उत्तरी ध्रुव नॉर्थ पोल से जुड़ी कुछ रोचक जानकारी

  • उत्तरी ध्रुव, पृथ्वी पर उत्तरी गोलार्ध में स्थित वह बिंदु है जहां पृथ्वी का घूर्णन अक्ष उसकी सतह से मिलता है l
  • उत्तरी ध्रुव को नॉर्थ पोल, ज्योग्राफिकल नॉर्थ पोल और टेरेसट्रीयल नॉर्थ पोल भी कहा जाता है l
  • उत्तरी ध्रुव का लेटीट्यूड अक्षांश 90 डिग्री है, सभी देशांतर रेखाएं उत्तरी ध्रुव पर मिलती है इसलिए उत्तरी ध्रुव को किसी भी डिग्री देशांतर से व्यक्त किया जा सकता है l
  • आपको जानकर हैरानी होगी कि उत्तरी ध्रुव पर आप जिस भी दिशा में कदम बढाएंगे वह दिशा दक्षिण ही होगी क्यूंकि उत्तरी ध्रुव पर जाकर सिर्फ एक ही दिशा बचती है l
  • उत्तरी ध्रुव आर्कटिक महासागर के ऊपर स्थित है, अत्यधिक ठंड होने की वजह से यहां समुद्र के ऊपर बर्फ की एक मोटी परत जमी रहती है l
  • उत्तरी ध्रुव का सबसे नजदीक द्वीप कफड़लुब्बेन द्वीप (Kaffedlubben island) है जो कि नॉर्थ पोल से 700 मील की दूरी पर है l
  • आपको जानकर आश्चर्य होगा कि यहां 6 महीने तक दिन रहता है तथा वर्ष के 6 महीने रात रहती है ऐसा उत्तरी ध्रुव के पृथ्वी के घूर्णन अक्ष के करीब होने की वजह से होता है यह परिघटना अलास्का, नॉर्वे और आर्कटिक सर्कल में पड़ने वाले कई दूसरे देशों में भी देखी जा सकती है l
  • उत्तरी ध्रुव पर गर्मियों के दौरान सूर्य हमेशा क्षितिज के ऊपर रहता है तथा सर्दियों के मौसम में यह हमेशा क्षितिज के नीचे रहता है l
  • उत्तरी ध्रुव पर सूर्य उदय 20 मार्च के आसपास होता है तथा सूर्य 3 महीनों का समय लेकर आकाश में अपने उच्चतम स्थान5 डिग्री ऊपर तक आकाश में ऊंचा उठता है इसके बाद यह धीरे-धीरे डूबने लगता है तथा 23 सितंबर के लगभग अस्त हो जाता है l
  • पृथ्वी के सभी स्थानों पर समय का मापन आकाश में सूर्य की स्थिति के अनुसार दर्शाया जाता है जैसे कि सुबह सूर्योदय होता है तथा दिन के मध्य में सूर्य हमारे सर के ऊपर पहुंच जाता है तथा शाम को पश्चिम में अस्त हो जाता है l
  • उत्तरी ध्रुव पर यह व्यवस्था पूरी तरह गड़बड़ा जाती है क्योंकि उत्तरी ध्रुव पर सूर्य वर्ष में केवल एक बार ही उदय और एक बार ही अस्त होता है इसलिए वहां समय का निर्धारण संभव नहीं है l
  • पृथ्वी के भौतिक उत्तरी ध्रुव पर सबसे पहले पहुंचने का दावा 2 लोगों ने किया था l उनमे से फ्रेडरिक कुक (Frederick cook) ने दावा किया कि वे 21 अप्रैल सन 1908 को अपने दो एस्किमो साथियों अहवलेह और एतुकिशुक (Ahwelah & Etukishook) के साथ उत्तरी ध्रुव पर सबसे पहले पहुंच गए थे l उत्तरी ध्रुव पर सबसे पहले पहुंचने का दूसरा दावा रॉबर्ट एडविन पेअरी (Robert Edwin Peary) और मैथ्यू हेंसन (Matthew Henson) ने किया, उन्होंने कहा कि वह 6 अप्रैल 1909 को अपने चार एस्किमो साथियों Ootah, Seeglo, Egingwah, Ooqueah के साथ उत्तरी ध्रुव पर सबसे पहले पहुंचे l
  • (Ann Bancroft) एन बैनक्रॉफ्ट उत्तरी ध्रुव पर पहुंचने वाली सबसे पहली महिला थी।
  • उत्तरी ध्रुव दक्षिणी ध्रुव की तुलना में थोड़ा गर्म है सर्दियों में उतरी धुर्व पर तापमान -50 डिग्री सेल्सियस से -13 डिग्री सेल्सियस तक रहता है गर्मियों में उतरी ध्रुव का तापमान जीरो डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रहता है।
  • उत्तरी ध्रुव पर जमी हुई बर्फ दो से चार मीटर मोटी होती है इसके नीचे ज़मीन नहीं बल्कि ठंडा आर्कटिक महासागर है।

  • उत्तरी ध्रुव पर ध्रुवीय भालु- पोलर बीयर पाए जाते हैं यहां पोलर बियर ही मुख्य रूप से पाए जाने वाले प्राणी है।
  • पक्षियों की कई प्रजातियां उत्तरी ध्रुव में देखी गई है जिनमें से स्नो बंटिंग, नॉर्थन फुलमर ब्लैक लेग्गड़ किट्टीवेक (snow bunting, northern fulmar black legged kittiwake) प्रमुख है l
  • उत्तरी ध्रुव के ठीक नीचे के पानी में बहुत ही कम मछलियां मिलती हैं क्योंकि वर्ष भर यह पानी अत्यधिक ठंडा रहता है अत्यधिक गहराई पर यहां श्रिम्प और एमपीफोड्स जैसे प्राणी ही पाए जाते हैं।
  • अंतर्राष्ट्रीय नियमों के मुताबिक नॉर्थ पोल पर किसी भी देश का कब्जा नहीं है, उत्तरी ध्रुव के आसपास आर्कटिक क्षेत्र में रूस, कनाडा, नॉर्वे, डेनमार्क यूनाइटेड स्टेट्स आफ अमेरिका देश पाए जाते हैं।
  • उत्तरी ध्रुव पर तापमान बहुत कम है तथा वहां पर जमीन भी नहीं है मोटी बर्फ की परत के नीचे केवल महासागर है इसलिए वहां मानव बस्तियां नहीं है पंरतु आर्कटिक सर्कल में कुछ जनजातियां रहती हैं जिनमें एस्किमो और

    इनुइत (Inuit) जाति प्रमुख है।

ऑक्टोपस से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

ऑक्टोपस एक समुद्री जीव है। इसका नाम ग्रीक शब्द से लिया गया है जिसका मतलब होता है “आठ पैर” l यह दुनिया के हर महासागर में रहते हैं तोआइये जानते हैं ऑक्टोपस से जुड़े कुछ दिलचस्प तथ्य:-

  • आपको जानकर आश्चर्य होगा कि ऑक्टोपस की दो-चार नही बल्कि 300 प्रजातियाँ पाई जाती है जो समुद्र की गहराईयों में या समुद्रतल पर रहते हैं और भोजन की तलाश में सुबह-शाम समुद्र के उपरी हिस्से में आते है |
  • ऑक्टोपस को हिंदी में “अष्टबाहु” कहा जाता है क्योंकि इसकी आठ भुजाएं होती है परन्तु वास्तव में इसकी 6 भुजाएं होती हैं और 2 पावं होते हैं।
  • ऑक्टोपस बहुत ही भूखे होते हैं वे भूख लगने पर अपनी ही भुजाएं खा जाते हैं।
  • ऑक्टोपस के पास 3 दिल होते है। इनमें से दो दिल खून की सप्लाई करने का काम करते हैं तो तीसरा हार्ट खून को बाकी शरीर में सर्कुलेट करता है l ऑक्टोपस के खून का रंग नीला होता है। इसके नीले खून में हीमोसायनिन नामक कॉपर-आयरन से भरपूर प्रोटीन पायी जाती है l
  • आमतौर पर ऑक्टोपस कई सारे आकार के होते हैं सबसे ज्यादा मिलने वाला “वल्गरिस ऑक्टोपस” 13-35 इंच लम्बे होते हैं और वजन 4-9 किलोग्राम होता है।
  • ऑक्टोपस का जीवनकाल बहुत ही कम होता है। यह कम से कम 6 महीने तक और ज्यादा से ज्यादा 5 साल तक जीते हैं।

  • ऑक्टोपस काफी तेज दिमाग वाले होते है | इनमें करीब 500 मिलियन न्यूरोन्स पाए जाते है l इनके Ganglion न्यूरोन्स नर्वस सिस्टम में सेंट्रल ब्रेन हर हाथ के नीचे होते है जो उनके हर मूवमेंट को कंट्रोल में रखते है l
  • ये दरियाई जीव केकड़े और झींगा खाना पसंद करता है।
  • ऑक्टोपस को उत्तर और दक्षिण कोरिया देश में जीवित ही खाया जाता है।
  • इसकी खास बात है कि ऑक्टोपस की भुजा कटने के बाद भी, उसकी भुजा दोबारा से आ जाती है।
  • ऑक्टोपस की कुछ प्रजातियां बहुत जहरीली होती हैं उनके महज एक बार काटने से किसी व्यक्ति की मौत हो सकती है । इसके जहर के कारण कुछ वैज्ञानिको ने इसे समुद्र की गहराई  का राक्षस भी कहा है ।
  • आपको ये जानकर हैरानी होगी कि दक्षिणी कनाड़ा में एक विशाल ऑक्टोपस वर्ष 1957 में मिला था। जिसका वजन करीबन 271 किलोग्राम था इसकी भुजाएं 5 मीटर लम्बी थीं।
  • ऑक्टोपस के आठो हाथो पर दो लाइन में गोल आकार निशान होते है जिसमें लगे संवेदी (रिसेप्टर्स) उन्हें किसी भी चीज को स्पर्श कर पहचानने में मदद करते है l इन (Sucker) सकर्स से ही ऑक्टोपस अपने शिकार को पकड़ते है और मुंह में ले जाते हैं|
  • दुनिया में सबसे छोटे ऑक्टोपस का नाम वोल्फी (Wolfi) ऑक्टोपस है।
  • जब एक बच्चा ऑक्टोपस जन्म लेता है तो उसका आकार एक पिस्सू के बराबर होता है।
  • मादा ऑक्टोपस भूख लगने पर नर को संभोग के बहाने मार देती है और उसे खा जाती है।
  • बड़े – बड़े आकार के ऑक्टोपस शार्क की कुछ प्रजातियों को भी मार सकते है।