नर कंकाल से भरी है उत्तराखंड की रूपकुंड झील जानिए क्या है रहस्य

0

नर कंकाल से भरी है उत्तराखंड की रूपकुंड झील जानिए क्या है रहस्य

एक ऐसी झील जो सर्दियों के मौसम में पूरी तरह से बर्फ से ढक जाती है और फिर गर्मियों का मौसम आता है और धीरे-धीरे बर्फ पिघलने लगती है। अब आप सोच रहे होंगे कि भला इसमें क्या रॉकेट साइंस है?

दरअसल उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र के अन्तर्गत अनेक सुरम्य ऐतिहासिक स्थल हैं जिनकी जितनी खोज की जाए उतने ही रहस्य सामने आ जाते हैं। इन्ही में से एक है रूपकुंड झील जिसमें अनेक नरकंकाल  तैरते दिखाई देते हैं।

इसके आलावा यहाँ  के आकर्षक एवं मनमोहक स्थलों को देखने के लिए प्राचीन काल से वैज्ञानिक, इतिहासकार, पुरातत्ववेत्ताओं, भूगर्भ विशेषज्ञों एवं जिज्ञासु पर्यटकों के क़दम इन स्थानों में पड़ते रहे हैं।

तो आइये जानतें इस झील के बारे में :-

इस झील के पानी में सैंकड़ों कंकाल तैरते दिखाई देते है

वैज्ञानिकों  का मानना है कि करीब 900 साल पहले  यहाँ इतनी ओला वृष्टि हुई कि यहां रहने वाले सभी लोग मारे गए। कंकालों की DNA जाँच से ये साबित हुआ कि ये  लगभग 900 साल पहले के हैं। हर साल जब बर्फ पिघलती है तो यहाँ  सैंकड़ों कंकाल झील के पानी में तैरते दिखाई देते हैं।  इतने सारे नरकंकालों के यहाँ होने की वजह से ही इस झील का नाम नर कंकाल झील रख दिया गया है।

1942 में मिली नरकंकालों से भरी ये झील

रूपकुंड झील उत्तराखंड के चमोली जिले में हैं। यह हिमालय में बसी एक छोटी-सी घाटी में मौजूद है। यह 16499 फिट ऊँचे हिमालय पर है।  यह चारों तरफ से बर्फ और ग्लेशियर से घिरी हुई है। यह झील बहुत ही गहरी है। इसकी गहराई लगभग 2 मीटर है और यह झील टूरिस्टों के लिए एक आकर्षण का केंद्र है। रूपकुंड झील में मौजूद नरकंकालों की खोज सबसे पहले 1942 में हुई थी।

इसकी खोज नंदा देवी गेम रिज़र्व के रेंजर एच.के माधवल द्वारा की गई थी।  इस जगह के बारे में नेशनल जियोग्राफी को पता चला तो, उन्होंने भी यहाँ अपनी एक टीम भेजी। उनकी टीम ने इस जगह पर 30 और कंकालों की खोज की थी।

साल 1942 से हुई इसकी खोज के साथ आज तक सैकड़ों नर कंकाल मिल चुके हैं। यहाँ हर लिंग और उम्र के कंकाल पाए गए हैं। इसके अलावा यहाँ कुछ गहने, लेदर की चप्पलें, चूड़ियाँ, नाख़ून, बाल, मांस आदि अवशेष भी मिले है जिन्हें संरक्षित करके रखा गया है। ख़ास बात यह है कि कई कंकालों के सिर पर फ्रैक्चर भी है।

स्थानीय लोग इसे देवी का प्रकोप मानते हैं

स्थानीय लोगों के अनुसार, कन्नौज के राजा जसधवल अपनी गर्भवती पत्नी रानी बलाम्पा के साथ यहाँ तीर्थ यात्रा पर निकले थे। दरअसल, वह हिमालय पर मौजूद नंदा देवी मंदिर में माता के दर्शन के लिए जा रहे थे। वहां हर 12 साल पर नंदा देवी के दर्शन की बड़ी महत्ता थी।

राजा बहुत जोरो-शोरों के साथ यात्रा पर निकले थे, लोगो का कहना था कि बहुत मना करने के बावजूद राजा ने दिखावा नही छोड़ा और वह पूरे जत्थे के साथ ढोल नगाड़े बजाते हुए इस यात्रा पर निकले।

ऐसी  मान्यता थी कि देवी इससे नाराज हो जायेंगी और हुआ भी वही।  उस दौरान बहुत ही भयानक और बड़े-बड़े ओले और बर्फीला तूफ़ान आया, जिसकी वजह से राजा और रानी समेत पूरा जत्था रूपकुंड झील में समा गया।

एक रिसर्च में यह कहा गया कि यहाँ एक ट्रेकर्स का समूह निकला हुआ था। यह समूह अपने रास्ते में ही था कि अचानक बर्फीला तूफ़ान आ गया। इस दौरान, गेंद जितने बड़े- बड़े ओले आसमान से बरस रहे थे।

इस भयानक तूफ़ान से कोई इसलिए भी नहीं बच पाया, क्योंकि 35 किलोमीटर दूर -दूर तक सिर छिपाने की जगह ही नहीं थी।  जिसकी वजह से लोगों ने छटपटा कर दम तोड़ दिया।

छींक क्यों आती है जानिए कुछ रोचक तथ्य

हमारे नाक में अचानक गुदगुदी सी शुरू होती है फिर एक चुभने वाली सी खुजली आती है और अचानक नाक से एक जोर का फॉर्स लगता है जिसे छींक कहा जाता है। छींकना हमारे शरीर की एक जटिल शारीरिक प्रक्रिया है जिससे कि फेफड़े और अन्य आंतरिक अंगों को दूषित होने से बचाया जाता है।

छींकना या जिसे मेडिकल भाषा में sternutation कहते हैं वो तब होता है जब सांस लेने के रास्ते में नाक के अंदर जो लाइन्स होती है उनमें जलन होती है। इससे श्लेष्मा झिल्ली में भी जलन होने लग जाती है जो कि हमारे तंत्रिका तंत्र को उत्तेजित कर देती है और हमारे दिमाग को छींक लेने के लिए एक संदेश भेजती है।

छींक आना इंसान के शरीर की इम्यून प्रोसेस का एक हिस्सा है। यह शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है। जब नाक में कुछ प्रवेश कर जाता है तो दिमाग का एक भाग जो छींक का केन्द्र या अनियंत्रित क्रियाओं के लिए उत्तरदायी होता है। यह हिस्सा दिमाग का निचला भाग होता है। इस हिस्से के द्वारा तेजी से सिग्नल भेजे जाते हैं। जिसके कारण गला, आंखें व मुंह कसकर बंद हो जाता है।

आज हम आपको बताने जा रहे हैं छींक से जुड़ी कुछ ऐसी ही रोचक बातें जिन्हें सुनकर आपको जरूर हैरानी होगी।

  • छींक के बाद लोगों को ”गॉड ब्लेस यू” कहते हुए सुना होगा मगर ये जानकर शायद आपको बहुत हैरानी होगी कि छींक आपके स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छी है। छींकने से शरीर के हानिकारक जर्म बाहर निकलते हैं और यह प्रतिरोधी तंत्र की प्रक्रिया का जरूरी हिस्सा है। सेहतमंद जीवन के लिए छींक का आना भी जरूरी है।
  • यदि आपको छींके आ रही हैं तो आपको नींद नहीं आ सकती है या यूं कहें जब आप सोते हैं तो छींक नहीं आ सकती है, क्योंकि उस समय नसें आराम की अवस्था में होती हैं। आपके साथ छींक से जुड़ी नसों को भी आराम मिलता है इसलिए कभी भी नींद के दौरान आपको छींक नहीं आ सकती है।
  • छींक एक ऐसी क्रिया है जिसके आने पर हमारा शरीर भी नियंत्रण नहीं कर पाता है, क्योंकि इसकी गति बहुत तेज होती है। छींक की रफ्तार 100 मील प्रतिघंटा होती है। एक छींक के साथ लगभग 100000 जर्म वातारण में मुक्त होते हैं।
  • आपने ये तो सुना होगा कि धूप में रहने से स्किन डल हो जाती है, लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि धूप में ज़्यादा रहना छींक का कारण भी बन सकता है। जी हां तेज धूप से छींक की नसें सक्रिय हो जाती हैं। जिससे धूप में चलते वक्त भी छींक आ जाती है।
  • कुछ लोगों के छींकने की आवाज बहुत तेज़ होती है लेकिन आपको जान कर हैरानी होगी कि यह आवाज़ नाक से नहीं बल्कि मुंह से आती है। जब तेजी से हवा का दबाव बाहर निकलता है तो हमारे मुंह से ‘आछू’ की आवाज आती है लेकिन ये आछू भाषा के हिसाब से अलग-अलग होता है। फ्रेंच में एट्कम, इटैलियन में हप्सू, जापानी में हाकुशॉन और स्वीडिश में अट्जो कहते हैं। जबकि आछू इंग्लिश शब्द है।
  • शायद आपको ये बात अजीब लगे, लेकिन छींकने की वजह सेक्स भी हो सकता है। शोधों की मानें तो सेक्स के दौरान पैरासिंपेथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय हो जाता है। जिससे सेक्स के बाद कई बार कुछ लोगों को बहुत छींक आती है।
  • कभी-कभी आपको इतनी जोरदार छींक आती है कि आपका अंग-अंग हिला हुआ सा महसूस होता है। छींकने के बाद ऐसा लगना लाजमी है, क्योंकि जब आप छींकते हैं तब आपके गले, डायफ्राम, पेट और सीने की मांसपेशियों में खिंचाव महसूस होता है। जिसके कारण इन अंगों का वर्कआउट हो जाता है।
  • कुछ लोगों को थ्रेडिंग करवाते समय या उसके बाद छींक आती है दरअसल, भौहों के ठीक नीचे जो नस होती है। वह श्वसन नली से जुड़ी होती है। इस नली से जुड़ी कोई भी गतिविधि छींक के रूप में इस नस पर प्रतिक्रिया करती है।

मिट्टी के घड़े का पानी स्वास्थ्य के लिए होता है लाभदायक जानिए कैसे

पुराने जमाने में घर में बड़े बुर्जुग साफ और ठंडा पानी पीने के लिए मिट्टी के घड़े का इस्तेमाल करते थे। टेक्नोलॉजी के इस युग में हम फ्रीज में रखे ठंडे पानी पीने के आदी हो चुके हैं कई स्वास्थय विशेषज्ञों की मानें तो फ्रीज का पानी सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।

ज़मीन में कई विटामिंस और मिनरल्स पाए जाते हैं। इसी कारण मिट्टी से बने मटके में पानी पीना भी स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक माना जाता है। गर्मियों में खासतौर पर इसका इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि इसमें पानी काफी ठंडा रहता है।

आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. अबरार मुल्तानी मानना है कि मिट्टी के मटके का पानी पीने से मैग्नीशियम मिलता है, जो डिप्रेशन को ठीक करने में मदद करता है इसी तरह यह कैल्शियम का भी सोर्स है जो हडि्डयों और जोड़ों के लिए फायदेमंद है।

जानिए मिट्टी से बने मटके में पानी पीने के फायदे

  • मिट्टी से बने मटके में पानी मौसम के हिसाब से ठंडा होता है। यह मटके की एक ऐसी क्वालिटी होती है, जो अन्य किसी चीज़ें में नहीं मिल पाती। यह सिर्फ पानी को ठंडा ही नहीं करते बल्कि हमारी बॉडी में पानी के साथ कई ऐसी जरूरी चीजें पहुंचाते हैं, जो ज़मीन में पाई जाती है।
  • मिट्टी का नेचर ऐल्कलाइन (क्षारीय) होता है, जो बॉडी में पीएच बैलेंस मेंटेन करने का काम करता है। मानव शरीर एसिडिक नेचर के लिए जाना जाता है। ऐसे में क्षारीय मिट्टी एसिडिक वाटर में रिएक्ट कर पीएच बैलेंस को संतुलित करती है। इससे एसिडिटी और गैस्ट्रोनोमिक पैन में राहत मिलती है।
  • मिट्टी के घड़े में पानी पीने से मेटाबॉलिज्म बूस्ट होता है जबकि प्लास्टिक बॉटल्स और कंटेनर्स में पानी पीने से खतरनाक केमिकल जैसे बीपीए पाया जाता है। यह टेस्टोस्टेरोन लेवल को संतुलित करता है जबकि प्लास्टिक इसे कम करता है। इसमें जो मिनरल्स पाए जाते हैं, उनसे डाइजेशन इम्प्रूव होता है।
  • यह गले के लिए भी काफी लाभदायक होता है। कफ और कोल्ड का शिकार होने वालों के लिए मटके का पानी पीना काफी उचित माना जाता है। गर्मियों में जो लोग सांस लेने की बीमारी से पीड़ित रहते हैं, उनके लिए भी मटके का पानी बेस्ट होता है। फ्रीज का पानी काफी ज्यादा ठंडा होता है और कई बार इसे पीने से गले संबंधी दिक्कतें शुरू हो जाती हैं।
  • गर्मियों में सनस्ट्रोक (लू) बहुत सामान्य बात है। मिट्टी का घड़ा इससे भी बचाता है, क्योंकि यह बॉडी को जरूरी न्यूट्रिएंट्स और विटामिंस उपलब्ध करवाता है इससे बॉडी का ग्लुकोज मेंटेन रहता है और यह हीट स्ट्रोक से बचाता है। मिट्टी के घड़े को हर दो से तीन दिन में अच्छे से साफ कर इस्तेमाल करना चाहिए।
  • फ्रिज के पानी की अपेक्षा यह अधिक फायदेमंद है क्योंकि इसे पीने से कब्ज और गला खराब होने जसी समस्याएं नहीं होती। इसके अलावा यह सही मायने में शरीर को ठंडक देता है।
  • मिट्टी के घड़े में स्टोर किए गए पानी को पीने से सबसे बड़ा फायदा पेट को होता है। यह पेट से जुड़ी कई प्रकार की समस्याएं जैसे कब्ज, एसिडिटी, पेट में ऐंठन को दूर करने के लिए सकारात्मक असर दिखा सकता है। वैज्ञानिक अध्ययन में इस बात का दावा भी किया जा चुका है कि मिट्टी के घड़े या फिर मिट्टी से बने हुए बर्तन में स्टोर किए गए पानी को पीने से पेट से जुड़ी कई प्रकार की समस्याओं से राहत पाई जा सकती है।

मार्क जुकरबर्ग से जुड़े कुछ ऐसे तथ्य जो आपने कहीं नहीं पढ़ें होंगे

मार्क जुकरबर्ग से जुड़े कुछ ऐसे तथ्य जो आपने कहीं नहीं पढ़ें होंगे

  • जुकरबर्ग फेसबुक के CEO होने के बावजूद केवल $1 सैलेरी लेते हैं।
  • उन्होंने 2010 में “बिल गेट्स” और “वारेन बफेट” के साथ “द गिविंग प्लेज” पर हस्ताक्षर किए जिसके अनुसार वह अपने धन का आधा हिस्सा 50 % दान में देंगे। 2014 में, जकरबर्ग ने पश्चिम अफ्रीका में इबोला वायरस की महामारी से निपटने के लिए $ 25 मिलियन का दान दिया था।
  • जब जुकरबर्ग 12 वर्ष के थे, तो उन्होंने एक तात्कालिक संदेश प्रोग्राम बनाया, जिसका नाम जुकनेट था, जो उनके दंत चिकित्सक पिता को दवाखाने में आने वाले रोगियों के बारे में सूचित करता था l
  • जुकरबर्ग वर्तमान में फोर्ब्स की 400 सबसे अमीर अमेरिकियों की सूची में 10 पर नंबर पर हैं।
  • जुकरबर्ग अपनी पत्नी “प्रिसिला चान” से एक पार्टी में टॉयलेट की कतार में इंतज़ार करते हुए मिले थे।
  • जुकरबर्ग फ्रेंच, हिब्रू और ग्रीक भाषा लिख और बोल सकते हैं वह मैंडरिन भी बोल सकते हैं l वे लैटिन जैसी प्राचीन भाषाओं में भी रुचि रखते थे।
  • उनकी पसंदीदा पुस्तकों में से एक “द एनेड” है, और पसंदीदा टीवी शो में से एक “द वेस्ट विंग” है, जिसे “आरोन सोरकिन” ने बनाया था, यह वही व्यक्ति है जिसने “फेसबुक द सोशल नेटवर्क” के निर्माण के आधार पर फिल्म भी लिखी थी।
  • जुकरबर्ग ने पहली बार डमीज़ बुक के लिए C ++ से कोड करना सीखा।
  • शुरुवात में याहू व MTV ने एक करोड़ डॉलर में फेसबुक साइट को खरीदना चाहा था परन्तु मार्क ने मना कर दियाl उन्होंने कहा, ” पहले मैं सूचना आदान-प्रदान का खुला वैश्विक प्लेटफॉर्म बना लूं फिर मुनाफे के बारे में विचार करूंगा।
  • वर्ष 2016 में जुकरबर्ग ने 365 मील चलने का लक्ष्य रखा उन्होंने गर्मियों के दौरान अपने इस लक्ष्य को पूरा किया।
  • 2010 में जुकरबर्ग ने चीनी भाषा इसलिए सीखी ताकि वे अपनी पत्नी प्रिसिला चान के माता-पिता के साथ चीनी भाषा में बातचीत कर सकें।
  • मार्क जुकरबर्ग को गूगल प्लस पर सबसे ज्यादा फॉलो किया जाता है और आज भी वे नंबर. 1 पर हैं।
  • क्या आप जानते है कि जुकरबर्ग ने अपनी पत्नी “प्रिसिला चान” के लिए खुद ही वेडिंग रिंग डिजाइन की थी।
  • जुकरबर्ग के माता-पिता ने उनके साथ काम करने के लिए एक कंप्यूटर ट्यूटर को रखा था, लेकिन जुकरबर्ग इतने तेज़ थे कि ट्यूटर ने कहा कि उन्हें किसी ट्यूटर की आवश्यकता नहीं हैं।
  • जुकरबर्ग ने कॉलेज के दिनों में फेसमैश नामक एक प्रोग्राम बनाया था। फेसमैश कॉलेज कैंपस में सबसे आकर्षक शख्स का पता लगाने के उद्देश्य से तैयार किया गया था। यह फेसबुक का प्रारंभिक स्तर था जो कि साल 2003 में बनाई गई थी। बाद में फेसमैश को साल 2010 में 30201 डॉलर में बेच दिया गया।
  • क्या आप जानते हैं कि मार्क जुकरबर्ग ने साल 2009 में पूरा साल केवल एक ही टाइ यह दिखाने के लिए पहनी थी कि 2008 के बाद का यह साल उनके लिए कितना महत्वपूर्ण है।
  • जब जुकरबर्ग हाई स्कूल में थे, तो उन्होंने एक mp3 प्लेयर “सिनाप्स मीडिया प्लेयर” नामक एक ऐप बनाया, जो उपयोगकर्ता के पसंदीदा गीतों के लिए था और उनकी पसंद के आधार पर प्लेलिस्ट बनाता था, यह ऐप, Spotify या पेंडोरा का प्रारंभिक स्वरुप था।
  • जुकरबर्ग 2011 में शाकाहारी बन गए थे और उन्होंने प्रण लिया था कि वे अब मांस उसी जानवर का खाएंगे जिसे उन्होंने खुद मारा होगा।
  • मार्क के ट्विटर पर 2,50,000 फॉलोअर्स हैं परन्तु क्या आप जानते हैं कि इस सोशल साइट से जुड़ने के चार साल बाद तक उन्होंने केवल 19 ट्वीट किए हैं।
  • जुकरबर्ग ने 2011 में गूगल के सोशल नेटवर्क पर पॉपुलेरिटी के मामले में गूगल के फाउंडर “लैरी पेज आर सर्गेइ बिन” को भी पीछे छोड़ दिया था।
  • जुकरबर्ग “द सोशल नेटवर्क” फिल्म के प्रशंसक नहीं थे क्यूंकि उनके अनुसार फिल्म में दिए गए कुछ तर्क गलत थे।
  • अभी जुकरबर्ग हाई स्कूल में ही थे कि उन्हें कई कंपनियों (एओएल और माइक्रोसॉफ्ट सहित) द्वारा नौकरी की पेशकश के लिए संपर्क किया गया था लेकिन जुकरबर्ग ने उन सभी को ठुकरा दिया था।
  • जुकरबर्ग कइ कानूनी मामलों में फंसे है। वे केवल 23 साल की उम्र में ही अरबपति बन गए थे और उन पर बौद्धिक चोरी, निन्दा (intellectual theft, blasphemy) और फेलियर टू अपहोल्ड कॉन्ट्रैक्ट जैसे कानूनी मामले चल रहे हैं। उनका सबसे लंबा कानूनी मामला दो जुड़वां भाइयों कैमरन आर टायलर विकलवॉस के साथ चला। दोनों भाइयों ने मार्क पर उनका फेसबुक आइडिया चोरी करने का आरोप लगाया था।

कुछ मज़ेदार रोचक तथ्य

कुछ मज़ेदार रोचक तथ्य

  • यह तो सभी जानते हैं कि ताश के पत्तों में 4 राजा होते हैं, लेकिन एक बात जो कम ही लोगों को पता होती है वो यह है कि इनमें से तीन राजाओं के तो मूँछें होती हैं लेकिन एक की नहीं होती, और वो राजा होता है “किंग ऑफ़ हार्ट्स” l ब्रिटिश न्यूज़ पेपर ” द गार्डियन ” के अनुसार शुरू में इस राजा के भी मूँछें होती थीं, लेकिन एक बार जब कार्ड्स को रिडिजाइन किया जा रहा था तब डिज़ाइनर उसकी मूँछें बनाना भूल गया और तब से किंग ऑफ़ हार्ट्स बिना मूंछों वाला राजा हो गया l
  • फोटो खींचते समय “say cheese” कहने का प्रचलन है ताकि हमारी मुस्कुराती हुई फोटो आ सके लेकिन आपको जानकार आश्चर्य होगा कि कुछ सौ साल पहले विक्टोरियन काल में लोग फोटो खींचते समय “Say Prunes” कहते थे, ताकि फोटो में उनके चेहरे पर गंभीरता दिखे l दरअसल, उस समय अधिक हँसना गरीबों और शराब पीने वालों से जोड़ कर देखा जाता था, शायद यही कारण है कि जब हम पुराने समय के राजा-महाराजाओं की पोट्रेट देखते हैं तो हमें कहीं भी  “स्माइलिंग फेस ” देखने को नहीं मिलता है।
  • मॉडर्न फिजिक्स की मदर कही जाने वाली महान वैज्ञानिक “मैडम क्यूरी ” का नाम तो आपने जरूर सुना होगा। उन्हें उनके “रेडियो एक्टिव” पदार्थों पर किये गए शोध और पॉलोनियम तथा रेडियम की खोज के लिए जाना जाता है, लेकिन शायद आप यह नहीं जानते कि रेडियो एक्टिव एलिमेंट्स में उनकी रूचि ही उनके मरने का कारण बनी l इन्ही रेडियो एलिमेंट्स से एक्सपोज़र की वजह से उन्हें अप्लास्टिक एनीमिया नामक बीमारी हो गयी जिसने उनकी जान ले ली l
  • प्याज़ काटते वक़्त आँखों से पानी आना आम बात है लेकिन क्या आप जानते है कि यदि  प्याज़ काटते समय च्विंगम चबाई जाए तो आंसू नहीं निकलते।
  • आई फोन का नाम आते ही दिमाग में एप्पल कंपनी , के शानदार प्रोडक्ट की इमेज बन जाती है, परन्तु  आपको जानकार आश्चर्य होगा कि पहली मोबाइल डिवाइस जिसे आई फोन नाम दिया गया था वो एप्पल ने नहीं बल्कि सिस्को कंपनी ने बनायीं थी।
  • कई बार पेरेंट्स से पैसे मांगने पर वे कहते हैं… यहाँ पैसों का कोई पेड़ नहीं लगा या पैसों कि कोई बारिश नहीं हो रही जो तुम्हे हर समय पैसे देते रहें …लेकिन ब्रहमांड में कुछ जगहें ऐसी भी हैं जहाँ पैसे तो छोड़िए हीरों यानी डायमंड्स की बारिश होती है… शनि ग्रह और बृहस्पति ऐसे ही दो ग्रह हैं जहाँ के वातावरण में बड़ी मात्रा में कार्बन मौजूद है और मौसम में बदलाव की वजह से कार्बन पर बिजली गिरती है तो वह बिल्कुल हार्ड हो कर ग्रेफाइट बन जाता है और नीचे गिरने लगता है…जहाँ एटमोस्फियरिक प्रेशर उसे तब तक हार्ड बनाता जाता है जब तक कि वह डायमंड ना बन जाए…और इस तरह वहां हीरों की बारिश होने लगती है।
  • जहाँ हिंदुस्तान में इंसानों की सुविधा के लिए भी फ्लाई ओवर्स या ब्रिज का अभाव है वहीँ नीदरलैंड के “The Hague ” शहर में सिर्फ इसलिए एक ब्रिज का निर्माण किया गया ताकि गिलहरियाँ बिना किसी खतरे के हाइवे पार कर सकें। इस ब्रिज को बनाने में लगभग 1 करोड़ 8 लाख रुपये लगे।
  • जब भी समुद्री डाकुओं की बात होती है तो एक आँख पर पट्टी बांधे किसी आदमी की इमेज दिमाग में बन जाती है लेकिन आपको जान कर आश्चर्य होगा कि दुनिया की सबसे सफल समुद्री डाकू कोई आदमी नहीं बल्कि एक चायनीज़ औरत थी… उसका नाम “चिंग शी” था और वह चेंग I  नाम के एक खतरनाक डाकू की विधवा थी। माना जाता है कि एक समय 1800 समुद्री डाकू जहाजों पर उसकी हुकूमत चलती थी और उसके लिए अस्सी हज़ार आदमी काम करते थे।
  • अगर आपसे पुछा जाए कि दुनिया की सबसे ज़्यादा प्रिंट होने वाली बुक कौन सी है तो शायद आप बाइबिल, क़ुरान, गीता या फिर हैरी पॉटर के बारे में सोचें, लेकिन आपको जान कर आश्चर्य होगा कि फर्नीचर और होम असेस्सरीज़ बेचने वाले IKEA स्टोर का कैटलॉग दुनिया में सबसे अधिक प्रिंट होने वाली बुक का रिकॉर्ड रखता है। लगभग 2 दर्जन भाषाओं में इसकी हर साल 20 करोड़ प्रतियाँ छपती हैं
  • पासवर्ड एक यूनिक कोड होता है जिसे हम चीजों को सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल करते हैं..ऐसे में हर किसी का पासवर्ड अलग-अलग होना चाहिए ,लेकिन एक रिसर्च में इस बात का दावा किया गया है कि दुनिया में करीब दो करोड़ लोगों का एक ही पासवर्ड है और वह है-‘123456’। 123456 के बाद दूसरे नंबर पर ‘123456789’ का इस्तेमाल किया गया।
  • ये तो हम सब जानते हैं कि रक्त दान से किसी का जीवन बचाया जा सकता है , लेकिन अगर मैं पूछूँ कि कोई अकेला व्यक्ति अपने जीवन काल में रक्त दान करके कितने लोगों की जान बचा सकता है तो आप 10, 15 या 20 लोगों के बारे में सोचेंगे, लेकिन आपको जानकार हैरानी होगी कि ऑस्ट्रेलिया के द मैन विद द गोल्डन आर्म… 81 वर्षीय “जेम्स हैरिसन” ने 1954 से लेकर 2018 तक 1137 बार ब्लड डोनेट किया और उससे 24 लाख बच्चों की जान बचायी गयी।  दरअसल, उनके खून में एक बहुत रेयर प्रकार का ब्लड प्लाज्मा है जो गर्भावस्था के दौरान बच्चों को होने वाली (rhesus) रिसस डिजीज के इलाज में उपयोगी है, और यही कारण है कि वे अकेले ही इतने लोगों की जान बचा पाए।

मार्क जुकरबर्ग से जुड़े कुछ रोचक तथ्य!!

इस दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं एक वो लोग जो दुनिया की बनाई गई राह पर चलते हैं और दूसरे वे जिनका इस दुनिया में आना ही विशेष होता है। वे अपने कार्यो से सफलता की नींव तैयार करते हैं।

सफलताओं की  इसी कड़ी में फेसबुक के फाउंडर और सी.ई ओ. मार्क जुकरबर्ग का भी नाम आता है जो दुनिया के सबसे युवा अरबपति हैं। मार्क जुकरबर्ग ने फेसबुक रूपी मंच से दुनिया को  एक साथ लाने का प्रयास किया है।

आइये जानते हैं मार्क जुकरबर्ग से जुड़े कुछ रोचक तथ्यों के बारे में

  • दुनिया की सबसे बड़ी सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग का पूरा नाम मार्क इलयट जुकरबर्ग है।
  • मार्क जुकरबर्ग का जन्म 14 मई 1984 को वाइट प्लेन्स ,न्यू यॉर्क USA में हुआ था। उनके पिता एडवर्ड जुकरबर्ग एक दंतचिकित्सक है और उनकी माँ करेंन जुकरबर्ग एक मनोचिकित्सक है।
  • जुकरबर्ग ने हाई स्कूल में रहते हुए पास के मर्सी कॉलेज से कंप्यूटर स्नातक की पढ़ाई की।
  • मार्क जुकरबर्ग विश्व के 14 वें अमीर इंसान हैं। वे दुनिया के सबसे कम उम्र में बनने वाले अरबपति हैं। फेसबुक की आपार सफलता ने इन्हें यह पहचान दिलाई है।
  • यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान ही मार्क ने एक वेबसाइट शुरु की थी जिसका नाम “फेसमैश” था। इस साइट ने कॉलेज में तो कोई खास कमाल नहीं दिखाया लेकिन जब मार्क ने इसी साइट को “फेसबुक. कॉम” के नाम से पब्लिक में लांच किया तो इसने धमाल मचा दिया।
  • मार्क जुकरबर्ग बचपन से कंप्यूटर की पढाई में इतने तेज थे कि अपने स्कूल के कंप्यूटर टीचर को भी फेल कर देते थे और अक्सर टीचर इनके सवालों का जवाब देने में खुद को असमर्थ पाते थे।
  • 35 वर्षीय मार्क जुकरबर्ग कलर ब्लाईंडनैस की बीमारी से पीड़ित है तभी तो इन्होंने अपनी साइट के लिए गहरे नीले रंग का प्रयोग किया है, जिससे इन्हें देखने में किसी तरह की कोई परेशानी न हो।
  • स्कूल के दिनों में मार्क अपने दोस्तों के लिए तरह -तरह के नए विडियो गेम्स बनाते रहते थे जिसके कारण मार्क अपने दोस्तों में प्रोग्रामिंग एक्सपर्ट के नाम से मशहूर थे।
  • जब मार्क ने हावर्ड यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया था तो पढाई के दौरान उन्होंने कोर्स मैच नाम का ऐसा सॉफ्टवेयर बनाया जो स्टूडेंट्स को अपनी इच्छा और रूचि के अनुसार इस सॉफ्टवेयर के जरिये सही सब्जेक्ट और कोर्स चुनने में मदद करता था।
  • क्या आप जानते है मार्क जुकरबर्ग दिमाग के इतने तेज हैं इन्होने उस समय की सबसे पॉपुलर सिक्योरिटी में सबसे स्ट्रांग कॉलेज की वेबसाइट को हैक कर लिया था।
  • महज 19 साल की उम्र में पहली बार मार्क जुकरबर्ग ने द फेसबुक वेबसाइट बनाया l शुरुआत में यह वेबसाइट हावर्ड यूनिवर्सिटी में बहुत प्रसिद्ध हुई फिर बाद में मार्क ने इसका प्रचार USA के कई कॉलेज में शुरू किया जोकि बहुत कम समय में ही तेजी से लोगो के बीच पॉपुलर होने लगी थी और फिर यही वेबसाइट फेसबुक के नाम से पूरी दुनिया में फेमस हो गयी।
  • जुकरबर्ग ने सबसे पहले हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में अपने डॉरमेट्री से फेसबुक लॉन्च किया।
  • फेसबुक इंक कारपोरेशन कंपनी कैलिफोर्निया में है जिसके जरिये फेसबुक को ऑपरेट किया जाता है।
  • मार्क जुकरबर्ग के फेसबुक की पॉपुलैरिटी से प्रभावित होकर वर्ष 2010 में “द सोशल नेटवर्क” नामक एक फिल्म भी बनी जिसमें मार्क जुकरबर्ग के सफलताओ को दिखाया गया है।
  • मार्क जुकरबर्ग ने फेसबुक की शुरुआत इसलिए की थी ताकि फेसबुक के माध्यम से दुनिया को हम अपने बारे में बता सकें ।
  • मार्क जुकरबर्ग का मानना है कि आज के दौर में एक मंच पर एक अरब से अधिक लोगो को आपस में जोड़ना वाकई सुखद और रोमांचित करने वाला अनुभव है जिसे शब्दों में बया नही किया जा सकता है।

ये हैं भारत की टॉप 10 यूनिवर्सिटीज, जहां पर पढ़ना हर विद्यार्थी का है सपना

भारत प्राचीन काल से ही शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा है l नालंदा, तक्षशिला एवं विक्रमशिला के खंडहर विश्वविद्यालय इसके प्रमुख उदाहरण है।

समय के साथ-साथ भारत में शिक्षा और भी बेहतर होती जा रही है। अब भारत का नाम भी दुनिया के उन खास देशों में आता है, जो पढ़ाई-लिखाई के मामले में सबसे आगे हैं। धीरे-धीरे लोगों को शिक्षा का महत्व पता चलता जा रहा है और लोग शिक्षा के प्रति जागरूक हो रहे हैं।

एक समय ऐसा था जब अच्छी यूनिवर्सिटीज में पढ़ने के लिए लोगों को विदेश जाना पढ़ता था, लेकिन अब इसकी जरूरत भी समय के साथ-साथ खत्म होती जा रही है क्योंकि भारत में भी कुछ यूनिवर्सिटी ऐसी हैं जो शिक्षा के मामले में दुनिया भर में जानी जाती हैं।

आइये जानते हैं भारत की टॉप 10 यूनिवर्सिटीज के बारे में:-

कलकत्ता यूनिवर्सिटी

भारत की टॉप यूनिवर्सिटीज में ‘कलकत्ता यूनिवर्सिटी ’ का नाम सबसे पहले आता है। कलकत्ता यूनिवर्सिटी की स्थापना 1857 में की गयी थी और यह दिल्ली यूनिवर्सिटी के बाद दूसरी बहुअयामी यूनिवर्सिटी है।

कलकत्ता यूनिवर्सिटी की ब्रिक्स लिस्ट में 52वां रैंक है और एशिया में इसका रैंक 149वां है। कलकत्ता यूनिवर्सिटी का दावा है कि  इसके पास भारत का सबसे बड़ा नेनो साइंस और नेनो टेक्नोलॉजी सेंटर है।

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी

 

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी देश की जानी-मानी यूनीवर्सिटीज में से एक है। आप को इस बात की जानकारी नहीं होगी कि राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) के द्वारा किए गए सर्वे में इसे भारत का सबसे अच्छा विश्वविद्यालय घोषित किया गया है। इस यूनिवर्सिटी में करीब 8,500 से ज़्यादा विधार्थी पढ़ाई कर रहे हैं।

बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय

वाराणसी में स्थित काशी हिन्दू विश्वविद्यालय या बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (बी.एच.यू.) की स्थापना मदन मोहन मालवीय द्वारा सन् 1916 में वसंत पंचमी के शुभ अवसर पर की गई थी। यह एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय है। यह एशिया का सबसे बड़ा रेसिडेंशियल विश्वविद्यालय है जिसमे 30 हजार से अधिक छात्र पढ़ते हैं l

यहाँ लगभग 34 देशों से छात्र पढ़ाई करने के लिए आते हैं। नेशनल इंस्टिटूशन रैंकिंग फ्रेमवर्क (NIRF) ने इस यूनिवर्सिटी को सर्वश्रेष्ठ 5 यूनिवर्सिटीज में शामिल किया है।

दिल्ली यूनिवर्सिटी

दिल्ली यूनिवर्सिटी की स्थापना सन 1922 में की गई थी। दिल्ली यूनिवर्सिटी को भारत की सबसे बेहतरीन यूनिवर्सिटी माना जाता है। दिल्ली यूनिवर्सिटी को ब्रिक्स लिस्ट में 46वां स्थान मिला है और एशिया में इसकी रैंक 91वीं है।

यहां 3 लाख से ज़्यादा स्टूडेंट्स तरह-तरह की शिक्षा प्राप्त करते हैं। यह यूनिवर्सिटी केमिस्ट्री, जियोलॉजी, हिस्ट्री, सोशियोलॉजी और जूलॉजी में डिग्री प्रदान करती है।

इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ़ साइंस

बैंग्लोर में स्थित भारत की सबसे अग्रणी यूनिवर्सिटी ‘इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ़ साइंस’ है जिसका ब्रिक्स लिस्ट में पांचवां स्थान है और यह एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग में 34 वें नंबर पर है।

इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ़ साइंस, भारत की टॉप यूनिवर्सिटीज में से एक है जो अपनी टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग रिसर्च के कारण पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ़ साइंस लगभग 400 एकड़ में फैला हुआ है और इसमें लगभग 40 विभाग हैं।

जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी

जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ली में स्थित भारत का एक प्रमुख सार्वजनिक विश्‍वविद्यालय है। इसे केन्द्रीय विश्‍वविद्यालय का स्तर हासिल है। यह नई दिल्ली के दक्षिणी क्षेत्र के ओखला में यमुना के किनारे स्थित हैं|

इसकी स्थापना 1920 में ब्रिटिश शासन के दौरान की गई थी। यह 1988 में भारतीय संसद के एक अधिनियम द्वारा केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाया गया।

हैदराबाद यूनिवर्सिटी

 

हैदराबाद विश्वविद्यालय भारत का एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय है। इसे “सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ हैदराबाद” या “एचयू” के नाम से भी जाना जाता है। इस विश्वविद्यालय की स्थापना प्रो. गुलबक्ष सिंह द्वारा 1974 को की गई थी।

यह विश्वविद्यालय करीब 2324 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। जिसके अंतर्गत 46 विभाग एवं केंद्र आते हैं।

जादवपुर यूनिवर्सिटी

कोलकाता में स्थित जादवपुर यूनिवर्सिटी की स्थापना 1955 में की गई थी। इसके दो कैम्पस हैं – मेन कैम्पस जादवपुर में और नया कैम्पस साल्ट लेक पर स्थिति है। इसके अलावा इसका तीसरा कैम्पस मेन कैम्पस के सामने ही जल्दी खोला जा रहा है

मणिपाल अकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन, मणिपाल

मणिपाल उच्च शिक्षा अकादमी भारत का एक समविश्वविद्यालय है। यह ‘मणिपाल विश्वविद्यालय’ के नाम से अधिक प्रसिद्ध है। यह कर्नाटक के मणिपाल में स्थित है। इसमें 58 देशों के लगभग 24000 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करते हैं।

इस विश्वविद्यालय की शाखाएँ बंगलुरु, मंगलोर सिक्किम, जयपुर, दुबई, मलेशिया तथा एण्टीगुआ में भी हैं। यह कॉमनवेल्थ विश्वविद्यालय संघ का एक सदस्य है।

सावित्रीबाई फुले पुणे विद्यापीठ

सावित्रीबाई फुले पुणे विद्यापीठ, पुणे के उत्तरपश्चिम में स्थित है। यह भारत के प्रमुख विश्वविद्यालयों में से एक है। इसकी स्थापना सावित्रीबाई फुले ने अपने पति ज्योतिराव गोविंदराव फुले के साथ मिलकर 10 फरवरी, 1949 को की थी। 400 एकड़ में फैले इस विश्वविद्यालय में 46 शैक्षणिक विभाग हैं।

जानिए प्याज काटते समय आंसू क्यों निकलते हैं, ऐसा क्या करें जिससे आंसू न आएं

प्याज ऐसी चीज है जिसके बिना सब्जी बनाना बेहद मुश्किल होता है। प्याज भले ही महंगा हो या हमें खूब रुलाए, लेकिन बिना इसके हम सब्जी नहीं बनाते, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर प्याज काटते समय हमें आंसू क्यों आते हैं ।

प्याज काटते समय आंसू क्यों आते हैं?

दरअसल प्याज में एक साइन-प्रोपेंथियल-एस-ऑक्साइड नामक रसायन पाया जाता है जो कि प्याज काटते समय हमारी आँखों की लेक्राइमल ग्लैंड को उत्तेजित करता है और इस वजह से आँखों में आंसू आ जाते हैं।

पहले वैज्ञानिकों का मानना था कि ऐसा प्याज में मौजूद एलीनेस नामक एंजाइम के कारण होता है लेकिन शोध में पाया गया कि  इसमें “लेक्राइमेट्री-फैक्टर सिंथेस नामक एंजाइम पाया जाता है और इसे काटते समय इसमें से ये लेक्राइमेटरी-फैक्टर सिंथेस एंजाइम निकलता है।

ये एंजाइम प्याज के अमीनो एसिड को सल्फेनिक एसिड में बदल देता है और साथ ही सल्फेनिक एसिड, साइन-प्रोपेंथियल-एस-ऑक्साइड में बदल जाता है।

जब ये साइन-प्रोपेंथियल-एस-ऑक्साइड हवा के माध्यम से हमारी आँखों के संपर्क में आता है तो इसके कारण हमारी आँखों की लेक्राइमल ग्लैंड में परेशानी होती है और इससे आँखों में जलन और आंसू आने लगते हैं।

क्या करें जिससे आँखों से आंसू न निकले

  • प्याज को ठंडा करें

प्याज को काटने से पहले उसे फ्रीजर में 10-15 मिनट तक ठंडा होने के लिए रख दें।

  • गरम पानी या भाप के पास काटें

गरम केतली या गरम पैन के पानी से आपको मदद मिल सकती है | भाप प्याज से बाहर निकल रहे उसके एसिड को निष्क्रिय कर देती है |

  • पानी में डाल कर इसे काटें

प्याज को बहते पानी या पानी से भरे कटोरे में काटने से भी आंसू नहीं आते।

  • काटने से पहले पानी में भिगोएं

प्याज को पानी में भिगोएं इससे प्याज के एंजाइम निष्क्रिय हो जाएंगे हालांकि ऐसा करने से उसके स्वाद में भी थोडा अंतर आ जाता है।

  • विनेगर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं

आप चाहें तो प्याज को छिलकर कुछ देर के लिए विनेगर और पानी के घोल में भी डुबोकर रख सकते हैं।  ऐसा करने से भी आँखों में आंसू नहीं आएंगे।

बेयर ग्रिल्स के बारे में कुछ रोचक तथ्य

बेयर ग्रिल्स के बारे में कुछ रोचक तथ्य

बेयर ग्रिल्स का पूरा नाम एडवर्ड माइकल ग्रिल्स है, और यह नाम बेयर की बड़ी बहन के द्वारा दिया गया था।  बेयर का जन्म 7 जून 1974 को हुआ था। ग्रिल्स का पालन-पोषण चार साल की उम्र तक डोनाघडी, उत्तरी आयरलैंड में हुआ। बेयर ग्रिल्स ब्रिटिश साहसकर्मी, लेखक और टेलीविज़न प्रस्तुतकर्ता हैं।

वे अपनी टेलीविज़न श्रृंखला बॉर्न सरवाइवर के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं, जिसे संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड में “मैन वर्सस वाइल्ड” के रूप में जाना जाता है।

  • बेयर ग्रिल्स UK में 2006 से 2011 तक चले टी वी सीरियल “मैन वर्सस वाइल्ड” के कारण प्रसिद्ध हुए। “मैन वर्सस वाइल्ड” का असली नाम “बॉर्न सर्वाइवर बेयर ग्रिल्स” था।
  • बेयर ग्रिल्स ईसाई धर्म को मानते हैं और उनका भगवान में बहुत विश्वास है।
  • स्कूल पूरा होने के बाद बेयर ग्रिल्स इंडियन आर्मी में शामिल होना चाहते थे।
  • बेयर ने ब्रिटिश स्पेशल एयर सर्विस (21 SAS) में तीन वर्ष तक सेवा की है।
  • 1998 में, जब वे केवल 23 साल की उम्र के थे तब उनकी रीढ की हड्डी 3 जगह से टूटने के बावजूद भी उन्होंने सबसे कम उम्र में माउंट एवेरेस्ट की चोटी पर चढ़ने का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था।
  • माउंट एवेरेस्ट पर चढ़ने से एक साल पहले, ऊंचाई से कूदते समय उनके पैराशूट में छेद हो गया और वो पीठ के बल गिर पड़े। जिसकी वजह से उनकी रीढ की हड्डी तीन जगह से टूट गई थी। बेयर ग्रिल्स ऐसी बहुत-सी जगहों पर गए हैं जहाँ उनसे पहले कोई इंसान नही गया।
  • बेयर ग्रिल्स माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाले ब्रिटेन के सबसे युवा लोगों में से एक हैं। जुलाई 2009 में ग्रिल्स, 35 साल की उम्र में चीफ़ स्काउट के पद पर नियुक्त होने वाले सबसे युवा व्यक्ति थे।
  • बेयर ग्रिल्स ने भारत में हिमालय में रहकर इंडियन आर्मी से ट्रेनिंग भी ली है।
  • बेयर ग्रिल्स अपने घर पर गिटार और पियानो बजाना पसंद करते हैं। बेयर ग्रिल्स ने 2002 में लंदन यूनिवर्सिटीज हिस्पैनिक स्टडीज  में डिग्री प्राप्त की थी।
  • बेयर ग्रिल्स ने 7600m की ऊंचाई पर हॉट एयर बैलून के नीचे डिनर करने का वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाया है।
  • बेयर ग्रिल्स अपने परिवार से इतना प्यार करते है कि शूटिंग पर जाते समय वे अपने परिवार की फोटो जूतों में डालकर ले जाते हैं। बेयर ग्रिल्स के तीन बच्चे हैं।
  • बेयर ग्रिल्स शो करने के बाद घर जाते ही पेट के कीड़े मारने की दवाई खाते हैं।
  • बेयर ग्रिल्स ने आज तक सबसे गंदी चीज़ बकरे के कच्चे अंडकोष(testicles) खाए हैं।

योग (Yoga) से होने वाले ये लाभ आप नहीं जानते होंगे!!

हजारों सालों से योग (Yoga) लोगों द्वारा प्रयोग में लाया जा रहा है. योग करने के क्या लाभ हैं, यह आप तभी जान सकते हैं, जब आप योग करेंगें. योग आपकी ज़िंदगी में शारीरिक और आध्यात्मिक अनुशासन लेकर आता है. आज हम आपको योग से होने वाले कुछ लाभों के बारे में बताने जा रहे हैं.

भावनाओं पर नियंत्रण

योग करने से आप इस बात को अच्छी तरह से समझेंगे कि ज़िंदगी में आपकी किसी से भी प्रतियोगिता नहीं है और आप स्वयं अपने आप के लिए, अपने आप को बेहतर बनायेंगे. योग करने से आपके अंदर खुद पर नियंत्रण रखने की क्षमता आ जाएगी.

आपके अंदर ज़्यादा विश्वास आने लगेगा

योग करने से आप अपने आप से और अपने शरीर से अच्छी तरह से जुड़ेंगे. आप अपनी ज़िंदगी के हर पल को खुल कर जीने लगेंगे. जब विन्यास (Vinyasa) योग करेंगे, तो आप खुद महसूस करेंगे कि आप अपने शरीर से क्या- क्या कर सकने की क्षमता रखते हैं. योग से आप अपनी मांसपेशियों को मज़बूत कर लेंगे.

आप अपने खाने के भोजन के प्रति ओर भी जागरूक हो जाओगे

योग करने से आप अपने खाने के प्रति ओर भी ज़्यादा जागरूक हो जायेंगे, क्योंकि योग सीधा आपके दिमाग पर अच्छा प्रभाव डालता है, जिससे आपको ज़्यादा मीठा भोजन और तला हुआ भोजन करने का मन नहीं करेगा. आपकी स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है. आपको योग करने से इतना अच्छा महसूस होगा कि आपको हर काम आसान लगने लगेगा. इससे अलग आपके शरीर की पाचनक्रिया भी पहले से बेहतर होगी .

योग से आपको अच्छी नींद आयेगी

कैथरीन वुडयार्ड (Catherine Woodyard), जो एक मशहूर शोधकर्ता है. उनका मानना है कि योग करने से आपको अच्छी नींद आती है. जब आपको अच्छी नींद आती है, तो आपकी उत्पादकता भी बढ़ जाती है, आप में तनाव भी कम हो जाता है.

आप में अपने कार्यों के प्रति ओर भी जागरूकता आ जाएगी

आपको अपने शरीर के बारे में अच्छी तरह से पता लगेगा कि आपका शरीर अलग-अलग स्थितियों में कैसे प्रतिकिर्या देता है. पूरे दिन आपकी सोच सकरात्मक रहेगी, जिससे आप हर कार्य को अच्छे ढंग से करेंगे.

सांस लेने की क्रिया को समझेंगे

योग करने से आपको सांस लेने की अलग- अलग तकनीकों के बारे में पता चलेगा. जिससे आप मनोवैज्ञानिक रूप से और शरीरक रूप से मज़बूत बनेंगे और पूरे दिन में आने वाले तनाव से मुक्त हो जायेंगे.

योग से आप में दर्द को सहने की क्षमता आयेगी

हार्वर्ड हेल्थ वेबसाइट का मानना है कि जो लोग पिछले कई सालों से दर्द से पीड़ित थे, उनका दर्द योग करने से हफ्ते भर में ही कम हो गया. अगर कोई व्यक्ति गर्दन के दर्द से और पीठ के दर्द से ग्रस्त है, तो उनको योग से बहुत राहत मिलेगी.

इन बातों से पता चलता है कि योग के बहुत सारे लाभ है, जिनके बारे में हम अभी तक अनजान हैं.

यह भी पढ़ें:-