जानिए पतंगों के इतिहास के बारे में!!

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चीन पतंगों का जन्मस्थान है। ब्रिटेन के प्रसिद्ध विज्ञान-इतिहास विद्वान जोसेफ नीधाम ने पतंगों को चीन की महत्वपूर्ण खोजों में से एक के तौर पर सूचिबद्ध किया था।

वाशिंगटन स्थित अमेरिकन नैशनल स्पेस एंड एविएशन म्यूजियम के एयरक्राफ्ट हाल में एक बड़े साइन बोर्ड पर लिखा है: कि विश्व के पहले विमान चीन की पतंगें तथा आदिकालीन रॉकेट थे।

700-221 ईसा पूर्व के दौरान चीन के जाने-माने दार्शनिक मोजी ने उड़ाने के लिए लकड़ी का एक पक्षी बनाया था, बताया जाता है कि उसके द्वारा बनाया लकड़ी का एक बडा पक्षी तीन दिन तक आकाश में उड़ता रहा और एक बार उसका इस्तेमाल कुछ स्थानों को चिन्हित करने के लिए भी किया गया था।

खेलों व जासूसी में इस्तेमाल

मोजी का मानना था कि यदि इन लकड़ी तथा बांस से बने ‘पक्षियों’ में मोटरें लगा दी जाएं तो वे लोगों और सामान को पर्वतों व नदियों के पार ले जा सकते हैं।

लकड़ी तथा बांस से बने इन आदिकालीन ‘पक्षियों‘, जो आधुनिक पतंगों के पूर्वज हैं, का खेलों में या सैन्य जासूसी के हिस्से के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था। कुछ प्राचीन चीनी दस्तावेज इस बात की विस्तार से जानकारी देते हैं कि कैसे सेना पतंगों पर निर्भर थी।

जब लोगों ने पतंगें बनाने के लिए पहली बार रेशम का इस्तेमाल शुरू किया तो उन्हें ‘फेंग जिन’ या ‘सिल्क फीनिक्स’ कहा जाता था।

पतंग या काइट के प्राचीन नाम का अर्थ ‘कागज का पक्षी’ था और हम जानते हैं कि पतंगों का आविष्कार कागज बनने के बाद हुआ। अलग-अलग समय तथा स्थानों पर पतंगों को अलग-अलग नामों से पुकारा जाता था।

कागज से बनी प्रारंभिक पतंग को खेल में इस्तेमाल किया गया, जिसके साथ एक सीटी लगाई जाती थी, जो उड़ते समय आवाज करती थी।

खूबसूरत डिजाइन्स

काइट फैस्टिवल के लिए लोग हर तरह की पतंगें बनाते थे, जिनमें से कुछ के साथ कागज के डिब्बे या लालटेनें लटकाई गई होती थीं। ये पतंगें आकाश को आवाजों तथा रंगों से भर देती थीं।

चीनी पतंगें अपने खूबसूरत डिजाइन्स तथा अच्छी उड़ान के लिए जानी जाती हैं। इनको कई बार ‘फ्लाईंग पिक्चर्स‘ भी कहा जाता है। कुछ पतंगों को उड़ाने के लिए और कुछ को केवल हवा में स्थिर रख कर चित्रों का प्रदर्शन करने के लिए बनाया जाता है।

पतंगों की दो श्रेणियां

चीन में उड़ाने के लिए बनाई जाने वाली पतंगों की दो श्रेणियां हैं- ‘हल्की ‘ तथा ‘मजबूत‘। दक्षिण चीन में हवाएं आमतौर पर सौम्य होती हैं, इसलिए पतंगें कागज या रेशम से बनाई जाती हैं और विभिन्न आकृतियों में होती हैं, जैसे कि तितलियां,ड्रैगनफ्लाईज व फीनिक्स।

उत्तरी चीन में हवाएं तेज होती हैं, इसलिए पतंगें कागज की दोगुनी मोटाई से बनाई जाती हैं। इन दो सामान्य श्रेणियों में भी पतंगों की कुछ विशेष किस्में होती हैं, जैसे कि ‘स्वैलो’, ‘सैंटीपीड’ तथा ड्रैगन’।

यहां तक कि कुछ पतंगें जोड़ों में भी बनाई जाती हैं, जैसे कि ‘जुड़वां तितलियां‘। पतंगों पर अब तक लिखी गई सर्वाधिक प्रसिद्ध पुस्तक काओ शुएक्विन द्वारा लिखित ‘ए स्टडी ऑफ काइट-मेकिंग इन नॉर्थ एंड साऊथ चाइना’ है।

काओ की पुस्तक में चित्रों सहित विस्तार से पतंग बनाने और उड़ाने की तकनीकों बारे बताया गया है। एक उदाहरण में वह बताते हैं कि कैसे पेपर ड्रम काइट बनानी है, जो फूल गिराती है और उसके साथ लाल रंग की एक लालटेन भी लटकाई गई होती है। काओ कहते हैं, “आकाश से मैंने संगीत सुना, मेरे ऊपर फूल बरसाए गए और आकाश रोशनियों से प्रज्जवलित था।”