Wednesday, June 5, 2024
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जानिए मानव शरीर कितनी गर्मी सहन कर सकता है?

अप्रैल से जुलाई तक गर्मी लोगों को जमकर परेशान करती है। सीधे धूप और गर्मी के सम्पर्क में आने से हमारे शरीर का तापमान बढ़ जाता है। हीट स्ट्रोक और लू और इससे भी ज़्यादा गंभीर स्थिति हाइपर थर्मिया शरीर के तापमान बढ़ने के हाई रूप हैं जिससे मौत भी हो सकती है।

इस पोस्ट के माध्यम से हम देखेंगे कि हमारे शरीर में तापमान सहने की क्या क्षमता है। साथ ही यह भी जानेंगे की गर्मियों में शरीर के तापमान को संतुलन में बनाए रखने के लिए किन बातों पर अमल करना ज़रूरी है।

गर्मियों में आपको खूब पानी पीना चाहिए। जिससे शरीर के अंदर का तापमान सही बना रहता है। हालांकि, यह सवाल भी मन में आता है कि मानव शरीर कितना तापमान झेल सकता है।

सामान्य रूप से शरीर का तापमान लगभग 37 डिग्री सेल्सियस होता है। लगभग 25/35 से 42/48 डिग्री सेंटीग्रेड तक का तापमान शरीर बर्दाश्त कर सकता है।

गर्मी हो या सर्दी हमारे शरीर के अंदर का तंत्र हमेशा शरीर का तापमान 37.5 डिग्री सेल्सियस बनाए रखने के लिए काम करता है। वहीं, मस्तिष्क के पिछले हिस्से को हाइपोथैलेमस कहा जाता है जो शरीर के अंदर के तापमान को नियंत्रित करता है।

पसीना आना, मुंह से सांस लेना, गर्म होने पर किसी खुली और हवादार जगह पर जाना, ये सब एक तरह से शरीर के अंदर बने वो सिस्टम है जिससे शरीर अपना तापमान नियंत्रित रखता है। अक़्सर तापमान बढ़ने पर हमारी धमनियाँ (Blood vessels) भी चौड़ी हो जाती हैं ताकि खून ठीक से शरीर के हर हिस्से तक पहुँच सके।

मानव शरीर 37.5 डिग्री सेल्सियस में काम करने के लिए बना है। लेकिन उससे दो-चार डिग्री ऊपर और 2-4 डिग्री नीचे तक के तापमान को एडजस्ट करने में शरीर को दिक़्क़त नहीं आती।

शरीर कितनी गर्मी सहन कर सकता है यह बाहरी तापमान के अलावा और भी कई चीजों पर निर्भर करता है, जैसे-

  • आप कितने समय से उस तापमान के संपर्क में हैं।
  • मौसम में नमी कितनी होती है।
  • शरीर से पसीना या पानी कैसे निकल रहा है।
  • आपकी शारीरिक गतिविधि क्या है।
  • आपने कैसे कपड़े पहने हैं?

ये चीजें के शरीर बढ़े हुए तापमान को संतुलित करने में भी मदद करती हैं। नमी के कारण शरीर से बहुत अधिक पसीना निकलता है। ऐसे में आपको खूब पानी पीना चाहिए। ज्यादा पसीना आने से पानी की कमी होने लगती है।

यदि शरीर लंबे समय तक सूर्य की किरणों के संपर्क में रहता है, तो इससे बुखार या हर्पीज थर्मिया जैसी स्थिति हो जाती है। अगर बाहर का तापमान धीरे-धीरे बढ़ता है, तो शरीर उसके साथ तालमेल बिठा लेता है, लेकिन अगर अचानक तापमान बढ़ जाता है, जिससे परेशानी होती है।

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