रात को सोने से पहले करें इन नियमों का पालन, जरूर मिलेगा फायदा!!

हमारे जीवन में कड़ी मेहनत और काम का जितना महत्व है, उतना ही महत्व आराम को भी देना चाहिए। अच्छी सेहत के लिए जरूरी है कि हर इंसान 24 घंटे में कम से कम 6 से 8 घंटे की नींद ले।

इससे मन प्रसन्न रहता है और काम में भी दिल लगता है। ऐसे में जरूरी है कि हर कोई अच्छी नींद ले। नींद पर हमारी सेहत और जिंदगी का भविष्य भी टिका है, इसलिए सोने से पहले कुछ खास नियमों का भी पालन करना चाहिए।

आइए इनके बारे में जानते हैं:-

  • सोने से पहले बिस्तर पर उन सकारात्मक बातों के बारे में सोचे जो आप जीवन में चाहते हैं। इसमें नकारात्मक बातों और चिंताओं को शामिल नहीं करें। ऐसे ही उठने के 15 मिनट बाद का भी समय महत्वपर्ण होता है। इस दौरान अच्छी और सकारात्मक बातों के बारे में सोचने का असर आपकी अपनी जिंदगी पर भी दिखाई देगा और आप सफलता की ओर अग्रसर होंगे।
  • सोने को लेकर दिशा का ज्ञान भी जरूरी है। अपना पैर दक्षिण और पूरब दिशा में कभी नहीं रखें। पैरों को दरवाजों की ओर भी नहीं रखना चाहिए। इससे सेहत और समृद्धि दोनों का नुकसान होने की आशंका रहती है।
  • जूठे मुंह और बगैर पैर धोए नहीं सोना चाहिए। हाथ-पैर धोकर सोने के बाद आप अगले सबह अनुभव करेंगे कि आपको ज्यादा अच्छी और सकून भरी नींद आई।
  • सोने से पहले अपने ईष्ट देव का एक बार ध्यान जरूर करें और उनकी प्रार्थना करने के बाद सो जाए।
  • रात को सोने से 2 घंटे पहले खाना जरूर खा लेना चाहिए। साथ ही रात का भोजन हमेशा हल्का और सात्विक रखें। खाने के बाद वज्रासन करें, फिर भ्रामरी प्राणायाम करें और आखिर में शवासन करते हुए सोएं।
  • इस बात का भी ख्याल रखें कि जिस बिस्तर पर आप रोज करीब 7-8 घंटे व्यतीत करते हैं, वो मुलायम और आरामदायक हो। चादर और तकिये का रंग ऐसा हो जो आपकी आंखों और मन को शांति और सुकून दे।
  • सीधा यानी पीठ के बल या फिर बाएं करवट होकर सोना सबसे अच्छा होता है। पीठ के बल सोने से शरीर के अधिकांश अंग सामान्य अवस्था में रहते हैं ये सेहत के लिए अच्छा है। पेट के बल सोने से बचें।
  • पीठ के बल सोने का अभ्यास करना चाहिए। बाएं करवट होकर सोना भी अच्छा है। इससे खाना पचने में आसानी होती है। साथ ही रक्त का बहाव सही तरीके से बना रहता है। दाएं ओर सोने से लिवर, पेट, फेफड़ों आदि पर दबाव बनता है।

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घर बैठे इन तरीकों से बढ़ाएं अपना ऑक्सीजन लेवल!!

कोरोना वायरस महामारी ने एक बार फिर खतरनाक रूप ले लिया है। दिन प्रतिदिन बढ़ते संक्रमित मरीजों की संख्या के चलते अब अस्पताल में न तो बेड्स खाली हैं और न ही दवाइयां हैं।

सबसे बड़ी बात यह है कि अब अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी के चलते कोविड मरीजों की जान जा रही है। हर रोज कई मरीज ऑक्सीजन की कमी के चलते दम तोड़ रहे हैं।

कोरोना वायरस सबसे पहले हमारे शरीर की ऊपरी श्वसन प्रणाली जिसमें नाक, साइनस और गले का हिस्सा आता है को प्रभावित करता है।

आज हम आपको इस पोस्ट में बताने जा रह है कि कैसे हम अपने ऑक्सीजन लेवल कैसे बढ़ा सकते हैं तो चलिए जानते हैं :-

डाइट में लाएं बदलाव

शोध में पाया गया है कि आंत में मौजूद माइक्रोबायोटा कई तरह के बैक्टीरियल संक्रमण से हमारी रक्षा करता है। एंटीऑक्सीडेंट पाचन में हमारी ऑक्सीजन की मात्रा को बढ़ाता है।

शरीर में एंटीऑक्सिडेंट की मात्रा बढ़ाने के लिए हमें ब्लूबेरी, क्रैनबेरी, रेड किडनी बीन्स, आटिचोक दिल, स्ट्रॉबेरी, प्लम और ब्लैकबेरी जैसे खाद्य पदार्थों को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए।

इनके अलावा शरीर के लिए जरूरी प्रोटीन विटामिन एफ की मात्रा बढ़ाने के लिए हमें एसिड सोयाबीन, अखरोट और फ्लैक्ससीड्स का सेवन करना जरूरी है जो रक्तप्रवाह में हीमोग्लोबिन (Haemoglobin) की मात्रा बढ़ाने के लिए काम करते हैं। बेहतर होगा आप जंक फूड, सिगरेट, तंबाकू का सेवन बंद कर दें।

लेटकर ब्रीदिंग एक्सरसाइज

ऑक्सीजन लेवल के सुधार करने के लिए बैठने के अलावा आप लेटकर भी कर सकते हैं। सबसे पहले अपना एक हाथ पेट के ऊपर और दूसरा अपनी छाती पर रखें।

फर्श पर लेट जाएं और अपने पैरों को कुर्सी पर रखें। गहरी सांस लें और तब तक रोकें जब तक कि पेट हवा से भर न जाए और फिर धीरे से सांसों को छोड़े। इस क्रिया को दिन में दो बार दोहराएं।

सांसों को बदलें

नियमित रूप से फेफड़ों का व्यायाम (Lungs Exercies) करना श्वसन स्वास्थ्य (Respiratory health) को बनाए रखने के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। हालांकि कई लोगों को ब्रीदिंग एक्सरसाइज करते वक्त काफी परेशानी होती है।

हाल ही में यह पता चला है कि कुछ बीमार लोग ऊपरी छाती (Upper chest) और ज्यादा हवा का प्रयोग कर सांस लेते हैं जिससे शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है। ब्रीदिंग एक्सरसाइज का सही तरीका यह है।

सबसे पहले धीमे से डायफ्राम के साथ सांस लें और फिर नासिका से सांस छोड़ें। बता दें कि जब हम नाक से सांस लेते हैं, तो सांस की धीमी गति के कारण हमारे फेफड़े अधिक मात्रा में आक्सीजन अवशोषित करते हैं। इससे ऑक्सीजन लेवल में सुधार आता है

वर्कआउट

अगर आप अपने डेली रुटीन में हेल्दी खान-पान के अलावा वर्कआउट को भी शामिल करते हैं तब आप सेहतमंद रहेंगे और आपके ऑक्सीजन लेवल में भी सुधार होगा। एरोबिक व्यायाम और सिंपल वॉक के जरिए भी आप अपने ऑक्सीजन लेवल को इंप्रूव कर सकते हैं।

जैसा कि अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने भी लोगों को हर रोज 30 मिनट वॉक करने की सला दी है। वॉक सप्ताह में 2 से 3 घंटे जिम में वर्कआउट करने से ज्यादा प्रभावी है।

टहलने से न सिर्फ आपको शारीरिक लाभ मिलेगा बल्कि इससे आपका मूड भी अच्छा रहोगा और आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। वॉक से तनाव को भी कम किया जा सकता है।

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अजीबो-गरीब इंसान:- जिन्होंने खुद को जानवर के रूप में बदल लिया!!

इंसान प्राकृतिक रचना सबसे अच्छा उदाहरण है लेकिन उसके बाद भी कुछ लोग प्राकृति की इस रचना के साथ अलग अलग एक्सपेरिमेंट करते रहते हैं।

आज इस पोस्ट में हम आपको कुछ ऐसे ही लोगों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने खुद को एक जानवर के रूप में बदल लिया। तो चलिए जानते हैं :-

होरेस रिडलर – “द ज़ेबरा मैन”

होरेस रिडलर लंदन का रहने वाला एक स्लाइड शो परफॉर्मर था। होरेस रिडलर ने जेब्रा की तरह पुरे शरीर में टैटू बनवा रखे थे। इनके शरीर पर जेब्रा की तरह ही काली और सफेद पट्टियाँ बनी हुई थी।

होरेस रिडलर ने खुद ही अपना नाम बदलकर “द ग्रेट ओमी” या द ग्रेट जेब्रा रख लिया था। 1965 में 83 साल की उम्र में उनकी मृत्यु हो गई थी। होरेस रिडलर प्रथम विश्व युद्ध में भी लड़ चुके थे।

टॉम लेपर्ड – “लेपर्ड मैन”

लेपर्ड मैन औप स्काई नाम से दुनिया भर में मशहूर टॉम लेपर्ड का एक अलग ही शौक था। टॉम लेपर्ड का जन्म 14 अक्टूबर, 1935 में ब्रिटेन के वुडब्रिज में हुआ था।

उन्हें पहले गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने दुनिया का टैटू मैन माना था और बाद में सबसे अधिक टैटू वाले वरिष्ठ नागरिक के रूप में मान्यता प्राप्त है। 80 वर्ष की आयु में मृत्यु हो गई है।

टॉम लेपर्ड ने शरीर पर लगभग 100% हिस्से में चीते और तेंदुए की तरह टैटू बनवा रखे थे उन्होंने अपने शरीर पर टैटू बनवाने में कुल खर्च लगभग £ 5,500 किये थे। आज दुनिया उन्हें लेपर्ड मैन औप स्काई या लेपर्ड मैन के नाम से जानती है।

लकी डायमंड रिच

लकी डायमंड रिच विश्व का वह इंसान है जिसके पूरे शरीर पर टैटू बनाये गये हैं। इसके शरीर पर हर अंग पर आँख, कान, नाक, गाल इत्यादि जगह पर टैटू बने हुए हैं।

गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने भी यह दावा किया है कि इसके शरीर पर 100% (प्रतिशत) टैटू है इसके लिए उन्हें लगभग 1000 घंटों से भी ज्यादा का समय लगा है।

16 साल की उम्र में पहला टैटू बनवाया और 28 वर्ष की उम्र में उनकी पूरी शरीर में टैटू बन चुका था। इस कारण 2006 में इसका गिनीज़ विश्व कीर्तिमान पुस्तक में उल्लेख किया गया है।

टेड रिचर्ड्स – “पैरेट मैन”

56 साल के टेड रिचर्ड्स ब्रिस्टल (यूके) के रहने वाले हैं और उन्हें तोते बहुत पसंद हैं। तोते उन्हें इस कदर पसंद हैं कि वो खुद भी तोते जैसा दिखना चाहते हैं।

तोते की तरह दिखने की ये चाहत उनपर इस कदर हावी है कि उन्होंने अपने शरीर में बेतहाशा बदलाव किए हैं। टेड ने 1976 में अपना फर्स्ट टैटू करवाया उसके बाद से इन्होंने अपने पूरे बॉडी में टैटू बनवा लिये।

इन्होंने दो चुम्बक भी अपने हाथों में इम्प्लांट करवाए हैं उन्होंने चेहरे पर तोते के जैसे रंगबिरंगे फर लगाकर 110 अनोखे टैटू बनवाये हैं।

इतना ही नहीं इन्होंने चेहरे पर ही 50 पियर्सिंग कराई और अपनी जीभ भी कटवाई है। वह वर्तमान में एक ऐसे सर्जन की तलाश कर रहे हैं जो उनकी नाक को चोंच में बदल सके।

रॉडरिगो ब्रागा – “डॉग मैन”

ब्राजील में रहने वाले इस शख्स का नाम रॉडरिगो ब्रागा है जो कि पेशे से एक आर्टिस्ट है और कुत्तों को बेहद पसंद करते हैं।

वह चाहते थे कि उनका चेहरा भी कुत्ते की तरह ही दिखे इसलिए उन्होंने लोकल अथॉरिटीज से इजाजत लेने के बाद एक बीमार कुत्ते को मार कर उस कुत्ते का चेहरा अपने चेहरे पर लगवा लिया। चेहरा जुड़ने के बाद वह भी कुत्ते की ही तरह दिखने लगे जिसके बाद वह ‘डॉगमैन’ के नाम से जाने जाते हैं।

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Hanuman Jayanti special – हनुमान जी को प्रसन्न करने के अचूक उपाय

हिंदू धर्म में हनुमान जयंती का पर्व बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए हनुमान जयंती का दिन बहुत शुभ दिन माना जाता है।

इस दिन भक्त हनुमान जी के लिए उपवास भी रखते हैं। चैत्र मास की पूर्णिमा को हनुमान जी का जन्म हुआ था। पवनपुत्र हनुमान जी भगवान शिव का 11वां अवतार है। हनुमान जी को प्रसन्न करना बहुत सरल है।

आइए जानते हैं हनुमानजी को प्रसन्न करने के अचूक उपाय:-

  • हनुमानजी को तिल के तेल में मिले हुए सिन्दूर का लेपन करना चाहिए।
  • घर में हर तीसरे माह हनुमान यज्ञ या साल में एक बार हनुमान जयंती पर सुंदरकांड का पाठ जरूर करवाएं। इससे घर में बरकत बनी रहती है।
  • जो नैवेद्य हनुमानजी को अर्पित किया जाता है, उसे साधक को ग्रहण करना चाहिए।
  • प्रसिद्धी के लिए हनुमान जी की गदा में सिंदूर व गाय का घी चढ़ाएं।
  • हनुमान जयंती पर बजरंग बली को प्रसन्न करने के लिए चोला जरूर चढ़ाना चाहिए। इससे आपकी मनोकामना पूरी होती है।
  • हनुमानजी को केसर के साथ घिसा लाल चंदन लगाना चाहिए।
  • हनुमान मंदिर जाकर सरसों के तेल का दिया और बूंदी के लड्डू रखकर हनुमानजी का पाठ करें।
  • साधना काल में ब्रह्मचर्य का पालन अति अनिवार्य है।
  • रुके हुए कार्यों में सफलता के लिए पीपल के पत्‍तों पर राम नाम लिखकर चढ़ाएं।
  • बिगड़े हुए काम में सफलता प्राप्त करने के लिए हनुमान जयंती के दिन हनुमान जी को पान का पत्ता और लौंग जरूर अर्पित करें।
  • लाल व पीले बड़े फूल अर्पित करना चाहिए। कमल, गेंदे, सूर्यमुखी के फूल अर्पित करने पर हनुमानजी प्रसन्न होते हैं।
  • परिवार की खुशहाली के लिए चमेली के फूल अर्पित करें।
  • लाल गुलाब का फूल और माला चढ़ाने से हनुमान जी जल्द प्रसन्न होते हैं और मनचाहा फल प्रदान करते हैं।
  • हनुमान साधना में शुद्धता एवं पवित्रता अनिवार्य है। प्रसाद शुद्ध घी का बना होना चाहिए।
  • इस दिन सुंदरकांड, हनुमानाष्‍टक, बजरंग बाण का पाठ करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है।

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ये हैं दुनिया की 5 सबसे महंगी कारें!!

पसंदीदा कार खरीदना हर किसी का सपना होता है और पिछले कुछ समय से तो कारों की मांग बहुत ज़्यादा बढ़ गई है, लेकिन अगर आपसे कहा जाए कि दुनिया की सबसे महंगी कारों की कीमत 100 करोड़ रुपए से ज्यादा है, तो क्या आप यकीन कर पाएंगे?

बहुत से लोगों को इस बात पर यकीन नहीं होगा, लेकिन यह बिलकुल सच है। आज हम आपको कुछ ऐसी ही कारों के बारे में बता रहे हैं। इनके फीचर्स और डिजाइन देखकर हर कोई हैरान रह जाएगा।

तो चलिए जानते हैं दुनिया की सबसे महंगी कारों के बारे में :-

Bugatti La Voiture Noire

दुनिया की सबसे महंगी कार में बुगाटी का नाम सबसे पहले आता है। इसकी कीमत करीब 132 करोड़ रुपए है। कार्बन फाइबर से निर्मित यह कार अब तक की सबसे महंगी कार है।

दो साल पहले इस कार को जेनेवा इंटरनेशनल मोटर शो में पहली बार प्रदर्शित किया था। इस कार को ‘द ब्लैक कार’ के नाम से भी जाना जाता है। इस कार की टॉप स्पीड 420 किमी प्रतिघंटा है, जो हैरान कर देने वाली है।

Lamborghini Veneno

दुनिया की 5 सबसे महंगी कारों की लिस्ट में पहला नंबर है लेम्बोर्गिनी वेनेनो भी दुनिया की सबसे महंगी कारों की लिस्ट में आती है। इस खूबसूरत कार की कीमत 33.3 करोड़ रुपये है।

बता दें कि लेम्बोर्गिनी वेनेनो को 7 साल पहले 2013 में लॉन्च किया गया था। लेम्बोर्गिनी ने वेनेनो की केवल 14 ही यूनिट मैन्युफैक्चर की थी।

Mercedes-Maybach Exelero

हमारी लिस्ट में तीसरा नंबर है मर्सिडीज-मेबैक एक्सलेरो का आता है। इस कार की कीमत 55.65 करोड़ रु है। खास बात ये है कि मर्सिडीज-मेबैक एक्सलेरो की केवल आज तक एक ही यूनिट तैयार की गई है।

मर्सिडीज दुनिया भर में अपनी लग्जरी कारों के लिए मशहूर है। मर्सिडीज एक 94 साल पुरानी जर्मन कार है हालांकि इस कंपनी की जड़ें 1883 में जाकर मिलती हैं।

Rolls Royce Sweptail

रॉल्स रॉयस का नाम दुनिया की सबसे महंगी कारों में है। इसकी कीमत करीब 92 करोड़ रुपए है। खास बात यह है कि इस कार की डिजाइन बनाने में कार निर्माताओं को करीब 5 साल लग गए।

इस कार का लुक बेहद रॉयल है। वैसे तो रॉल्स रॉयस कंपनी की अधिकतर कारें महंगी होती हैं, लेकिन यह कार एकदम अनोखी है।

Koenigsegg CCXR Travita

कोएनिगसेग CCXR ट्रेविटा एक ऐसी कार है जिसके सिर्फ 3 पीस बनाए गए हैं। इसकी वजह ये है कि यह कार बहुत महंगी है।

आप इसकी सबसे ज़्यादा कीमत 5 या 10 करोड़ तक लगा पाएंगे लेकिन यह कार उससे कई ज़्यादा महंगी है यह  लगभग 32 करोड़ 43 लाख रुपए की है।

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जूते भी कर सकते हैं ‘मालामाल’ जानिए कैसे ?

जूते की एक जोड़ी पर अपनी सारी जमापूंजी दांव लगाने का विचार बेतुका लग सकता है फिर भी अनगिनत ‘स्त्रीकर्स’ (एक प्रकार के जूते) का मूल्यवान संपत्ति के रूप में ऑनलाइन लेन-देन बढ़ता जा रहा है।

कोरोना फैलने के बाद से तो इसमें लोगों की रुचि और भी बढ़ गई है। इसमें दिलचस्पी लेने वाले लोगों का सवाल है कि भला अन्य चीजों में निवेश क्यों करें जब जूते की एक सही जोड़ी आपको रातों-रात मालामाल कर सकती है?

डिजाइनर स्नीकर्स (एक प्रकार के जूते) और अन्य लग्जरी फैशन का कारोबार महामारी के दौरान खूब फलफूल रहा है। ‘स्टॉकएक्स’ जैसी कम्पनियों के लिए यह अच्छी खबर है।

यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां लोग स्नीकर्स, इलैक्ट्रॉनिक्स, स्ट्रीट वियर, कलैक्टिबल्स, घड़ियों और हैंडबैग्स के साथ-साथ वीडियो गेम कंसोल का लेनदेन करते हैं। ‘स्टॉकएक्स’ अब 3.8 बिलियन डॉलर मूल्य की कम्पनी बन चुकी है।

कम्पनी के सी.ई.ओ. स्कॉट कटलर कहते हैं, “उपभोक्ता खरीद और निवेश व्यवहार दोनों में बदलाव हमारी कम्पनी के लिए विशाल अवसर प्रदान कर रहे हैं।”

वैबसाइट हैंडबैग, घड़ियां और अन्य मूल्यवान संग्रह जैसी नवीनतम चीजों के साथ ही स्ट्रीटवियर से लेकर जॉर्डन और अन्य दुर्लभ जूते भी बेचती है। ‘लुइस विटन’ के स्त्रीकर्स जिनकी बड़ी मांग है।

अलग तरह का निवेश

कलात्मक, पुराने जमाने की चीजों या व्हिस्की की तरह यह बाजार भी अपनी एक अलग तरह की निवेश श्रेणी में विकसित हो चुका है। मूल रूप से ‘स्टॉकएक्स’ एक निवेश वस्तु के रूप में जूतों को चरम पर ले गई है।

अब ‘डो जोन्स’ या ‘डैक्स’ जैसे सूचकांकों के बजाय इस वैबसाइट पर ट्रेडर्स एक निवेश प्लेटफॉर्म की तरह अपने जूता पोर्टफोलियो’ की परफॉर्मेंस पर निगाह रखते हैं।

इस तरह हुई शुरूआत

स्नीकर्स का संग्रह करने वाले जोश लुबनेर को इस बात का अहसास था कि ये उनके लिए सोने की खान साबित हो सकते हैं उन्होंने 2016 में ‘स्टॉक्सएक्स’ को क्लीवलैंड कैवेलियर्स बास्केटबॉल टीम के मालिक ग्रेग श्वार्ट्ज और डैन गिल्बर्ट के साथ मिल कर स्थापित किया था।

इसकी शुरूआत डाई-हार्ड कलैक्टरों के लिए एक छोटे से प्रयास के रूप में हुई लेकिन उस वक्त एक ‘अंडरग्राऊंड मार्कीट’ से विकसित होते हुए आज यह एक प्रमुख कारोबारी स्थल बन चुका है और कोरोना वायरस तो इसे और भी ज़्यादा तेजी प्रदान कर रहा है।

इन्वैस्टमैंट बैंक ‘काऊवेन एंड कम्पनी’ के एक अध्ययन के अनुसार कोरोना महामारी स्नीकर्स और स्ट्रीट वियर मार्कीट के डिजिटल परिवर्तन में तेजी ला रही है।

विश्लेषकों का अनुमान है कि अमरीका में सैकेंड हैंड’ चीजों का बाजार में लेन-देन 2 बिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है और इसमें 20 प्रतिशत की वार्षिक दर से वृद्धि हो रही है।

एक तरह की सम्पत्ति बने स्नीकर्स

स्नीकर्स एक ‘बूमिंग एसैट क्लास’ बन चुके हैं जो निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में इन्हें भी शामिल करने के अवसर दे रहे हैं। गत वर्ष ‘स्टॉकएक्स’ 7.5 मिलियन लेन-देन करते हुए अपने राजस्व को 400 मिलियन डॉलर तक ले गया।

डैट्रोइट स्थित इस कम्पनी का कहना है कि यह 2020 के मध्य से ही मुनाफे में है और जल्द ही अपना ‘आई.पी.ओ.’ लांच करना इसका मकसद है।

नीलामी में करोड़ों में बिके जूते

स्नीकर्स की नीलामी भी अब खूब ध्यान आकर्षित कर रही है। चीनी मिट्टी और चमड़े से बने ‘ट्रेनर्स’ की एक जोड़ी (एडिडास और मीसेन के बीच सहयोग से बना एक अनूठा जूता) गत वर्ष दिसम्बर में न्यूयॉर्क की एक नीलामी में 126,000 डॉलर यानी लगभग 94 लाख रुपए में बिकी।

बास्केटबॉल दिग्गज माइकल जॉर्डन द्वारा इस्तेमाल नाइकी एयर स्नीकर्स की एक जोड़ी ने सोदबी की नीलामी में गत वर्ष 560,000 डॉलर यानी लगभग 4 करोड़ 17 रुपए प्राप्त किए थे।

इससे पहले वर्ष 2019 में 1972 में बने नाइकी वेफल रेसिंग फ्लैट ‘मून शू’ के लिए नीलामी में सवा 3 करोड़ मिले थे।

हॉलीवुड की कुछ मशहूर फिल्मों के दिलचस्प तथ्य!

हॉलीवुड की फिल्म हर फिल्म के कथानक यानि Plot में कोई न कोई राज छिपा होता है। “इन्सेप्शन” (Inception) से लेकर “फाइट क्लब” (Fight Club) जैसी फिल्मों के कथानक अपने आप में अलग हट कर या यूं कहें, तो कल्पना की हद तक जाते लगते हैं।

फिल्म के निर्माण और कथानक में कितने दिलचस्प तथ्य छुपे होते हैं, यह आप इस पोस्ट को पढ़ कर अंदाजा लगा सकते हैं। यह हैं हॉलीवुड की फिल्मों के, India Today द्वारा संकलित, कुछ अद्भुत और रोचक तथ्य:-

“फाइंडिंग निमो” (Finding Nemo)

Finding Nemo के मुख्य चरित्र Nemo को “मोंस्टर इंक” (Monster’s, Inc) फिल्म के एक दृश्य में देखा गया था। गौरतलब है कि “मोंस्टर इंक” फिल्म “फाइंडिंग निमो” से 2 साल पहले प्रदर्शित की जा चुकी थी।

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द अवेंजर्स (The Avengers)

The Avengers के मुख्य पात्र जेरेमी रेंनेर(Jeremy Renner) ने “द अवेंजर्स” फिल्म में तीरंदाजी के रोल को निभाने के लिए तीरंदाजी के हुनर को ओलिंपिक के एक तीर-अंदाज खिलाड़ी से सीखा था।

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“इन्सेप्शन” (Inception)

Inception फिल्म में दर्शकों को बहुत सारे ऐसे संकेत दिए गये जिससे लगता था कि यह फिल्म सचमुच सपने पर आधारित फिल्म है। इस फिल्म में कई दृश्यों में बार-बार 3502 नंबर को दिखाया गया है।

इससे पता चलता है कि पूरा सपना इस फिल्म का मुख्य चरित्र “कोब”(Cobb) का था। इस फिल्म में जिस होटल रूम में “कोब” और “मॉल”(Mal) ने अपनी सालगिरह मनाई उस रूम का नंबर भी 3502 था।

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द डार्क नाईट (The Dark Knight )

बैटमैन फिल्म सीरीज में “डार्क नाईट” (The Dark Knight) ही ऐसी फिल्म थी जिसमें फिल्म के नाम में “बैटमैन” का नाम शामिल नहीं था।

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आइस-ऐज (Ice Age)

एनीमेशन फिल्म “Ice Age” में एक अजीब-सा गिलहरी जैसा पात्र था। यह पात्र असल में गिलहरी नहीं बल्कि चूहे और गिलहरी की विशेषताओं को मिला कर “स्कार्ट” नाम का जीव था जिसको आवाज “आइस ऐज” के निर्देशक ने स्वयं दी थी।

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“द शिंडलर लिस्ट” (The Schindler List)

“द शिंडलर लिस्ट” (The Schindler List) सबसे महंगी “ब्लैक एंड व्हाईट” मूवी थी। इस फिल्म को बनाने की लागत 145 करोड़ 56 लाख थी।

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“द परसूट ऑफ़ हैप्पीनेस” (The Pursuit of Happiness)

“द परसूट ऑफ़ हैप्पीनेस” (The Pursuit of Happiness) फिल्म के अंत में जो आदमी अभिनेता विल स्मिथ के पास से गुजरता है, यह फिल्म उसी व्यक्ति Chris Gardner के जीवनी पर आधारित थी।

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टाइटैनिक (Titanic)

जिस स्कैच सीन में लेओनार्दो डी कैप्रियो (Leonardo DiCaprio) ने अभिनेत्री केट विंसलेट (Kate Winslet) का नग्न स्कैच बनाया था उसमें स्कैच बनाते दिखाए गये हाथ फिल्म के निर्देशक जेम्स कैमरून के थे। जैक के स्कैच बुक में दिखाए गये सभी स्कैच भी जेम्स कैमरून के ही बनाये हुए थे।

“साइलेंस ऑफ़ द लैम्ब” (Silence of the lamb)

हॉलीवुड की फिल्म “साइलेंस ऑफ़ द लैम्ब” (Silence of the lamb) का के मुख्य पात्र हेनीबाल लेक्टर (Hannibal Lecter) ने फिल्म में एक बार भी अपनी पलक नहीं झपकाई थी।

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हैरी पॉटर (Harry Potter)

फिल्म हैरी पॉटर (Harry Potter) में जिस औरत ने मिर्टल (लड़की जो हमेशा बाथरूम में रोती रहती थी) का किरदार निभाया था, उसकी असल जिंदगी में उम्र 37 साल थी, लेकिन उसको हैरी पोर्टर फिल्म में एक स्कूल की लड़की दिखाया गया था।

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कैसिनो रॉयल (Casino Royal)

“कैसिनो रॉयल” (Casino Royal) पहली ऐसी जेम्स-बांड फिल्म थी जो चीन के सिनेमा घरों में प्रदर्शित की गयी थी। इस फिल्म के एक दृश्य में 19 करोड़ की गाड़ी “Aston Martin DBS” को भी नष्ट करते हुए दिखाया गया था।

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सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है काला लहसुन !!!

सफेद लहसुन तो हर किसी ने खाया ही होगा, साथ ही उसके औषधीय गुणों के बारे में भी सभी जानते होंगे, लेकिन सफेद लहसुन के अलावा काला लहसुन भी होता है, जो बहुत कम देखने को मिलता है।

औषधीय गुणों में यह सफेद लहसुन की तरह ही गुणकारी होता है और कुछ बीमारियों में कारगर इलाज करता है।
आज इस पोस्ट में हम आपको बताने जा रहे हैं काले लहसुन के बारे में, तो चलिए जानते हैं:-

क्या है काला लहसुन

काले लहसुन में भी सामान्य लहसुन की तरह ही एलिसिन पाया जाता है जबकि इसमें ऐंटीबैक्टीरियल, ऐंटीवायरल के गुण भी पाए जाते हैं, जो सेहत के लिए गुणकारी साबित होते हैं। सामान्य लहसुन को पकाकर काला लहसुन बनाया जाता है।

इसके लिए लहसुन को दो सप्ताह तक भिन्न-भिन्न तापमानों पर पकाया जाता है। इसके बाद लहसुन की कलियां सुख जाती है अथवा जल जाती है। इस वजह से लहसुन का रंग काला हो जाता है।

जबकि लहसुन के छिलके का रंग भूरा हो जाता है। इस अभिक्रिया से लहुसन में ऐंटीऑक्सिडेंट्स गुण संयोजित होते हैं, जिसके कई स्वास्थ्य लाभ होते हैं।

एंटी-ऑक्सिडेंट्स से भरपूर

काला लहसुन जब फर्मेंटेशन प्रक्रिया से गुजरता तो इसके भीतर यूनिक एंटी-ऑक्सिडेंट्स गुण आ जाते हैं, जिसके एंटी-इन्फ्लैमेटरी फायदे हैं। इसके अलावा इसके भीतर पॉलिफेनॉल, फ्लेवोनॉइड और अल्कलॉइड की मात्रा भी अधिक होती है।

एलिसिन से भरपूर, बढ़ाता है रक्त संचार

लहसुन का सेवन करने से हार्ट संबंधी बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। दरअसल सफेद लहसुन में एलिसिन नामक तत्व पाया जाता है, जो खून को पतला करने में अहम भूमिका निभाता है।

वहीं काले लहसुन में एलिसिन ज्यादा मात्रा में पाया जाता है इसलिए दिल के रोगियों के लिए यह ज्यादा फायदेमंद होता है।

कैंसर के इलाज में है मददगार

काला लहसुन पेट के कैंसर, ब्लड कैंसर और कोलन कैंसर के इलाज में काफी मददगार साबित होता है। इसके सेवन से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है।

इसके साथ ही लिवर की समस्या के लिए भी काफी असरदार होता है। इसके सेवन से लिवर को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होता है। काला लहसुन दिमाग को स्वस्थ रखने का काम भी करता है।

मोटापे को कम करता है

विशेषज्ञों की मानें तो इसमें एंटीऑक्सिडेंट्स और पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो बढ़ते वजन को कम करने अथवा नियंत्रित करने में सहायक होते हैं। इसके लिए आप रोजाना काले लहसुन का सेवन कर सकते हैं।

ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है

अगर आपकी डाइट में नियमित रूप से काला लहसुन शामिल होता है तो इससे आप अपने ब्लड शुगर को आसानी से नियंत्रित रख सकते हैं।

पिछले कई शोध में इस बात का खुलासा हुआ है कि जिन चीजों में काफी ज्यादा मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट तत्व पाए जाते हैं वो डायबिटीज को रोकने के लिए काफी फायदेमंद होते हैं।

यह हार्ट फंक्शन को बेहतर बनाता है

काला लहसुन रक्त परिसंचरण, हृदय समारोह में सुधार करता है, और हृदय की विफलता का निदान करता है। फ्रंटियर्स इन फिजियोलॉजी में प्रकाशित समीक्षा के अनुसार शोधकर्ताओं ने पाया है कि काला लहसुन आपको मधुमेह से भी बचा सकता है।

काले लहसुन में ताजे लहसुन की तुलना में लगभग पांच गुना अधिक पॉलीफेनोल होते हैं, जो आपके दिल को क्षति से बचाने में अधिक प्रभावी बनाता है।

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प्रकृति से प्रेरित “अनूठे अविष्कार” !!

प्रकृति के पास हमारी अनेक समस्याओं के समाधान हैं। वैज्ञानिकों को समाधान के अप्रत्याशित तरीके ढूंढने के लिए प्रेरणा मिल रही है। बदबूदार छोटा-सा फल दूरियन इलैक्ट्रिक कारों को चार्ज कर सकता है तो समुद्री स्पंज बेहतर अंतरिक्ष यान बनाने में भी काम आ सकते हैं।

मकड़े के जाल से लेंस

मकड़े अपने जाले से हर तरह के कीटों को फांस लेते हैं, अब इंसान इन्हीं जालों का इस्तेमाल कर ऐसे ऑप्टिकल लेंस बना रहा है जो इंसान की नंगी आंखों से नहीं दिख सकने वाले वायरसों की तस्वीर ले सकेंगे।

जर्नल ऑफ अप्लायड साइंस में प्रकाशित एक रिसर्च रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने बताया कि उन्होंने नर मकड़े के पैर से निकलने वाले जालों की मदद से लैंसों के लिए सपोर्ट तैयार किया है।

प्रयोगों के दौरान वैज्ञानिकों ने मकड़े के जालों को मोम से ढंक दिया और फिर इस पर जाल उंडेल दिया। जब यह गाढ़ा हुआ तो स्वाभाविक रूप से जालों ने गुंबदों की शक्ल ले ली। फिर रिसर्चरों ने इसे अल्ट्रावॉयलेट अवन में पका लिया।

इससे तैयार हुआ ऑप्टिकल लेंस लाल रक्त कोशिका के आकार का है। इसका इस्तेमाल वायरस या किसी जैव ऊतक के भीतरी हिस्से की तस्वीर लेने में हो सकता है।

यह पूरी तरह से प्राकृतिक है और जहरीला भी नहीं है इसलिए इसे शरीर के भीतर भी आराम से इस्तेमाल किया जा सकता है।

ततैया से सीख कर बनी सूई

बिना ज्यादा चीरफाड़ किए ट्यूमर और खून के थक्कों को निकालना अब और भी आसान हो जाएगा। एक ऐसी सूई की खोज हुई है जिसकी प्रेरणा परजीवी ततैया से मिली है।

ये कीट अपने अंडे कैटरपिलर जैसे जीवों में एक खोखली सूई की मदद से डाल देते हैं। इस सूई का नाम है ओविपोसिटर। नीदरलैंड की डेल्फ्ट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने ओविपोसिटर की यांत्रिकी का अध्ययन किया तो देखा कि उसमें ब्लेड बारी-बारी से ऊपर और नीचे जाते हैं।

इससे पैदा हुआ घर्षण अंडों को आगे धकेलता है। इसकी मदद से रिसर्चरों ने ऐसी सूई डिजाइन की है जिसमें ओविपोसिटर की तरह ही स्लाइडिंग रॉड लगे हैं।

उनका कहना है कि यह सुई शरीर के अंदरूनी हिस्सों तक पहुंचकर वहां से नुक्सानदेह संरचनाओं को बाहर निकालने और दवाइयों को वहां तक पहुंचाने में कारगर है।

इससे मरीज को कम तकलीफ होगी और वह जल्दी से ठीक भी हो सकेंगे। अब यह किसने सोचा था कि कैटरपिलर को अंदर ही अंदर खाने वाले ततैया के परजीवी लार्वा से सीख कर ऐसी सूई भी बनाई जा सकेगी।

समुद्री स्पंज से अंतरिक्ष यान

प्रशांत महासागर की गहराई में एक बेहद जालीदार समुद्री स्पंज मिलता है जिसे वीनस नाम दिया गया है। यह मजबूत गगनचुंबी इमारतों, लंबें पुलों और हल्के अंतरिक्ष यान बनाने में काफी मददगार है। नेचर मैटीरियल्स की एक रिसर्च रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।

स्पंज का इस्तेमाल इमारतों और पुलों में तो कई सदियों से हो रहा है लेकिन वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि वीनस स्पंज की नलीदार अस्थियां इसे पारंपरिक स्पंज के मुकाबले वजन के अनुपात में ज्यादा ताकतवर बनाती हैं।

हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक और रिसर्च रिपोर्ट के सह लेखक जेम्स वीवर का कहना है कि हम स्पंज के कंकाल तंत्र में उसकी संरचना और काम के बीच संबंध का 20 से ज्यादा साल से अध्ययन कर रहे हैं और यह प्रजाति हमें लगातार हैरान कर रही है।

दूरियन से सैकेंड्स में मोबाइल चार्ज

कुछ लोगों के लिए दूरियन रसदार और स्वादिष्ट हैं तो कुछ लोगों के लिए इतने बदबूदार कि उन्हें दक्षिण एशिया के होटलों ने प्रतिबंधित कर दिया है।

हालांकि दूरियन का फल अब अपने मशहूर होने की कुछ और वजहें सामने लाया है। यह मोबाइल फोन और इलैक्ट्रिक कारों को चार्ज कर सकता है।

जर्नल ऑफ एनर्जी स्टोरेज में छपी एक रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने ब्यौरा दिया कि कैसे उन्होंने इस फल से मिलने वाला एक बेहद हल्का और छिद्रित मैटीरियल बनाने में कामयाबी हासिल की है। इसे एयरोजेल कहा जाता है।

सिडनी यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफैसर विसैंट गोम्स के अनुसार एयरोजेल ‘ग्रेट सुपर- कैपेसिटर’ हैं, जो ऊर्जा के भंडार के रूप में उसे रखने और फिर बांटने का काम कर सकते हैं।

गोम्स ने बताया, “सुपर कैपेसिटर छोटे आकार की बैटरी में भी बड़ी मात्रा में और वह भी बेहद कम समय में ऊर्जा का भंडार जमा कर सकते हैं।” यह ऊर्जा मोबाइल फोन, टैबलेट और लैपटॉप को कुछ ही सैकेंड के भीतर चार्ज कर सकती है।

जल महल के बारे में कुछ रोचक तथ्य !!

जल महल राजस्थान की राजधानी जयपुर के मानसागर झील के मध्य स्थित प्रसिद्ध ऐतिहासिक महल है। अरावली पहाडिय़ों के गर्भ में स्थित यह महल झील के बीचों बीच होने के कारण इसे ‘आई बॉल’ भी कहा जाता है।

इसे ‘रोमांटिक महल’ के नाम से भी जाना जाता था। जयसिंह द्वारा निर्मित यह महल मध्‍यकालीन महलों की तरह मेहराबों, बुर्जो, छतरियों एवं सीढीदार जीनों से युक्त वर्गाकार रूप में निर्मित भवन है।

जलमहल अब पक्षी अभ्‍यारण के रूप में भी विकसित हो रहा है। यहाँ की नर्सरी में 1 लाख से अधिक वृक्ष लगे हैं जहाँ राजस्थान के सबसे ऊँचे पेड़ पाए जाते हैं।

 रोचक तथ्य

  • यह इमारत 266 पुरानी है जिसे 1750 में बनवाया गया। जल महल के आकर्षक टैरेस गार्डन को चमेली बाग के नाम से जाना जाता है।
  • यह पांच मंजिला इमारत है, जब यह झील पानी से भरी होती है, तो इसके चार मंजिला पानी के नीचे डुब जाती है, और केवल ऊपरी मंजिल ही दिखाई देती है।
  • इस पूरे महल को लाल बलुआ पथर से बनाया गया है, इसकी कई जगहों पर संगमरमर का इस्तेमाल किया गया है।
  • यहां से मान सागर झील और नाहरगढ़ हिल्स के चारो तरफ के नज़ारे बहुत आकर्षक नज़र आते है।
  • जलमहल एक आवासीय संरचना के बजाय एक पिकनिक स्पॉट के रूप में बनाया गया था, इसलिए इसके अंदर कोई व्यक्तिगत कक्ष नहीं हैं।
  • जलमहल की झील के अंदर अधिकतम गहराई 4.9 मीटर (15 फीट) है। यह मुगल स्थापत्य शैली के प्रभाव के साथ वास्तुकला की राजपूत शैली में निर्मित पांच मंजिला संरचना है जबकि इसकी चार मंज़िलें पानी के नीचे हैं, जिसके कारण केवल महल का शीर्ष ही दिखाई देता है, जिससे आपको आभास होता है कि महल झील के पानी पर तैर रहा है।
  • जलमहल अब पक्षी अभ्‍यारण के रूप में भी विकसित हो रहा है। जल महल के नर्सरी में 1 लाख से ज्‍यादा वृक्ष लगे हुए हैं। इसकी खास बात है कि यह राजस्थान के सबसे उंचे पेड़ों वाली नर्सरी है।
  • मकर संक्रान्ति के दिन यहां पर हर साल इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल का आयोजन किया जाता है। जिसमें कई तरह की पतंगे उड़ाई जाती है और हर साल विदेशी यहां पर काइट फेस्टिवल का आनंद उठाते हैं।
  • कहा जाता है कि राजा इस महल को अपनी रानियों के साथ कुछ खास समय बिताने के लिए भी इस्तेमाल करते थे।
  • जलमहल झील में डूबा रहता है, इस तक पहुंचने के लिए नाव की सवारी ही एकमात्र रास्ता है। महल को सरकार द्वारा एक संरक्षित संपत्ति घोषित किया गया है।

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