इन खूबियों में हमेशा पुरुषों से आगे रहती हैं महिलाएं

0

आचार्य चाणक्य ने अपनी पुस्तक में महिलाओं के ऐसे गुणों का वर्णन किया है, जिसमें पुरुष उन्हें कभी मात नहीं दे सकते। उनका मानना था कि महिलाएं इन गुणों में हमेशा पुरुषों से आगे रहती हैं।

प्राचीन भारत के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री, दार्शनिक और राजनीति विज्ञान के विशेषज्ञ आचार्य चाणक्य द्वारा सदियों पूर्व लिखी गई उनकी नीतियां आज के युग में भी बहुत वास्तविक और उपयोगी सिद्ध होती हैं।

आचार्य चाणक्य को बुद्धिमान, साहसी और ज्ञानी के रूप में जाना जाता है। आचार्य चाणक्य ने अपनी पुस्तक में महिलाओं के ऐसे गुणों का वर्णन किया है, जिसमें पुरुष उन्हें कभी मात नहीं दे सकते। उनका मानना था कि महिलाएं इन गुणों में हमेशा पुरुषों से आगे रहती हैं।

चलिए जानते हैं इस पोस्ट में कि वे कौन कौन से गुण हैं :

महिलाएं ज्यादा साहसी होती हैं

चाणक्य नीति के अनुसार पुरुषों की तुलना में महिलाएं अधिक साहसी होती हैं। ये किसी भी तरह की बुरी स्थिति का डटकर सामना करती हैं, एक महिला पुरुष से 6 गुना ज्यादा साहसी होती है।

चाणक्य कहते हैं कि जब स्त्री के सामने संकट का समय आता है तो स्त्री का साहस स्वत: ही सामने आ जाता है। हिम्मत के मामले में पुरुष कभी भी महिलाओं को मात नहीं दे सकते।

Acharya Chanakya

भावुक होती हैं महिलाएं

चाणक्य नीति के अनुसार स्त्री की आयु जैसे-जैसे बढ़ती है, वह अधिक बुद्धिमान होती जाती है। वहीं, महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले ज्यादा इमोशनल माना जाता है। यह उनकी कमजोरी नहीं बल्कि उनकी आंतरिक शक्ति है, जिसके कारण वे हर स्थिति में अपना अस्तित्व बनाए रखती हैं।

किसी बात को दिल पर नहीं लेती

चाणक्य नीति के अनुसार जो महिलाएं बात बात में रोती हैं उनका दिल बहुत साफ होता है। दरअसल, भावुक महिलाएं अक्सर अपनी कड़वाहट और गुस्से का रोना रोती हैं।

जिसके कारण ऐसी महिलाएं किसी की बात को दिल पर नहीं लेती हैं। सभी को शीघ्र क्षमा करने में विश्वास रखती है। महिलाओं का यह स्वभाव परिवार की सुख-शांति बनाए रखने में मदद करता है।

नियम पर टिकी रहती हैं महिलाएं

आचार्य चाणक्य का मानना है कि जो महिलाएं जल्दी भावुक हो जाती हैं वो अनुशासित रहना पसंद करती हैं। चाणक्य नीति के अनुसार अनुशासन में रहने वाली और नियम-कानूनों का पालन करने वाली महिलाएं न सिर्फ अपनी सफलता की राह सुनिश्चित करने में माहिर होती हैं बल्कि दूसरों के लिए मिसाल भी पेश करती हैं।

महिलाएं ज्यादा एक्सप्रेसिव होती हैं

अधिकांश शोधकर्ता इस बात से सहमत हैं कि महिलाएं भावनात्मक रूप से अधिक एक्सप्रेसिव होती हैं, लेकिन यह नहीं कि वे पुरुषों की तुलना में अधिक भावनाओं का अनुभव करती हैं। कुछ अध्ययनों से पता चला है कि पुरुषों की तुलना में महिलाएं एक्सप्रेसिव होती हैं।

जानिए जेम्स कैमरून द्वारा बनाई गई बेहतरीन फिल्म अवतार से जुड़े कुछ मज़ेदार तथ्य

2009 में, जेम्स कैमरून ने अपनी शानदार और बहुप्रतीक्षित 3डी फिल्म, अवतार रिलीज की। यह फिल्म हॉलीवुड में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों से एक है। मोशन कैप्चर के उपयोग के कारण फिल्म को बड़ी सफलता मिली, जो बाद में फिल्म उद्योग में मुख्यधारा बन गई।

इस पोस्ट में हम जानेंगे इस फिल्म से जुड़े कुछ मज़ेदार तथ्य, तो चलिए शुरू करते हैं:

  • 1997 में बनी फ़िल्म टाइटैनिक भी उस समय बॉक्स आफिस पर सफलता के नए कीर्तिमान रचने वाली फिल्म बन गई थी। टाइटैनिक के लिए कैमरून को बेहतरीन निर्देशन का ऑस्कर पुरस्कार मिला था। लगभग 12 साल के बाद जब उन्होंने अपनी नई फ़िल्म अवतार पेश की तो एक बार फिर उन्होंने अपनी फ़िल्म में भव्यता के पिछले सारे रिकार्ड तोड़ दिए।

Know some fun facts about James Cameron's best film Avatar

  • इस फिल्म के लिए कैमरून ने फिल्म में दिखाए गए एलियंस के लिए एक अलग भाषा भी बनवाई। जो यूएससी में भाषाविद डॉ. पॉल फ्रॉमर ने बनाई थी। इस भाषा को 1000 शब्दों से बनाया गया था। जिसमें जेम्स कैमरून ने 30 शब्द जोड़े थे। इस फिल्म को बनाने के लिए जेम्स कैमरून ने सेटअप भी अलग से किया था।
  • फ़िल्म की कहानी 22 वीं सदी की है जब मानव एक बेहद महत्वपूर्ण खनिज अनओब्टेनियम को पैंडोरा पर खोद रहे होते है जो एक बड़े गैस वाले गृह का रहने लायक चन्द्रमा है जो अल्फ़ा सेंटारी अंतरिक्षगंगा में स्थित है। इस खनन कॉलोनी का बढ़ना पैंडोरा की प्रजातियों व कबीलो के लिए खतरा बन जाता है। पैंडोरा की प्रजाति नाह्वी, जो मानवों के सामान प्रजाति है इसका विरोध करती है।
  • कहते हैं कि इस फिल्म की कहानी मलयालम के सुपरस्टार मोहनलाल की मूवी ‘वियतनाम कॉलोनी’ से भी काफी हद तक मिलती-जुलती थी। फिल्म रिलीज होने के बाद करीब 7 लोगों ने जेम्स पर कहानी चुराने का आरोप भी लगाया था। बाद में जेम्स ने कोर्ट में एक कॉपी भेजी थी, जिसमें उन्होंने बताया था कि उनको इस फिल्म का आइडिया कहां से आया था और वो केस भी जीत गए थे।

Know some fun facts about James Cameron's best film Avatar

  • जेम्स कैमरून को बचपन से ही साइंस फिक्शन किताबें बहुत पसंद थीं। कहा जाता है कि उन्हें इस फिल्म को बनाने का आइडिया भी यहीं से आया था। कैमरून ने टाइटैनिक बनाने के दौरान ही फिल्म अवतार की 80 पेजों की स्क्रिप्ट लिखी और टाइटैनिक रिलीज होने के बाद ही इस पर फिल्म बनाने की घोषणा कर दी।
  • आपको जानकर हैरानी होगी कि ऑडिशन के समय सैम वर्थिंगटन अपनी कार में ही रह रहे थे। सैम वर्थिंगटन के अनुसार, उन्हें एक फोन कॉल के जरिए कास्टिंग के लिए आमंत्रित किया गया था। कॉल करने वाले व्यक्ति ने उन्हें स्क्रिप्ट के बारे में कुछ नहीं बताया, न ही उन्होंने उन्हें निर्देशक का नाम भी बताया था।
  • निर्देशक जेम्स कैमरून को सेट पर सख्त होने के लिए जाना जाता था, उन्हें काम के दौरान किसी भी प्रकार की खलल पसंद नहीं थी जिसके लिए उन्होंने एक नेल गन भी रखी थी जिसका उपयोग वे उन सेल फोनों पर करते थे जो काम के दौरान बज उठते थे।
  • जेम्स कैमरून ने इस फिल्म को बनाने की घोषणा तो कर दी लेकिन फिल्म बनाने के लिए उन्हें हाइटेक टेक्नोलॉजी की जरूरत थी क्योंकि उनके अधिकतर किरदार फिक्शन थे। लिहाजा वो उस समय इस आइडिया पर आगे काम नहीं कर पाए, लेकिन उन्होंने अपनी इस कहानी पर फिल्म बनाने का आइडिया नहीं छोड़ा।
  • फिल्म में सुनाई देने वाली अधिकांश जानवरों की आवाजें जुरासिक पार्क से डायनासोर की हैं, जिसमें विशेष रूप से टी-रेक्स और रैप्टर्स।

Know some fun facts about James Cameron's best film Avatar

  • संगीतकार जेम्स हॉर्नर ने कहा कि यह उनकी सबसे कठिन फिल्म थी और उनके करियर की सबसे बड़ी चुनौती थी। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा कि उन्होंने डेढ़ साल तक सुबह 4:00 बजे से रात 10:00 बजे तक संगीत पर काम किया।
  • जेक सुली की भूमिका निभाने के लिए मैट डेमन और जेक गिलेनहाल कैमरून की पहली पसंद थे, लेकिन कैमरून ने मुख्य भूमिका में सैम वर्थिंगटन को कास्ट करने का फैसला किया।
  • फिल्म में 40% लाइव एक्शन और 60% फोटो-यथार्थवादी सीजीआई है। सीजीआई दृश्यों के लिए बहुत सी मोशन कैप्चर तकनीक का उपयोग किया गया था।

जानिए “उमानंद” मंदिर से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

उमानंद देवलोई एक प्राचीन शिव मंदिर है जो ब्रह्मपुत्र नदी के मध्य में उमानंद द्वीप (मयूर द्वीप) में स्थित है जो कामरूप के उपायुक्त या गुवाहाटी में कचहरी घाट के कार्यालय के सामने स्थित है।

इस मंदिर का नाम उमानंद हिंदी के दो शब्दों से आया है। पहला शब्द ‘उमा’ जो कि भगवान शिव की पत्नी माता पार्वती का एक नाम है और दूसरा शब्द ‘आनंद’ जिसका अर्थ है खुशी।

इसे दुनिया के सबसे छोटे आबाद नदी द्वीप के रूप में जाना जाता है। ब्रह्मपुत्र के तट पर उपलब्ध स्थानीय नौकाएं आगंतुकों को द्वीप तक ले जाती हैं। जिस पहाड़ पर मंदिर बना है उसे भस्मकाल के नाम से जाना जाता है। मंदिर का परिवेश अद्भुत और दिव्य है। मंदिर के चारों ओर प्रकृति का अनुपम सौंदर्य है, यह प्रकृति प्रेमियों का आश्रय स्थल है।

interesting-facts-related-to-Umanand-temple

ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव यहां भयानंद के रूप में निवास करते थे। कालिका पुराण के अनुसार सृष्टि के प्रारंभ में शिव ने इसी स्थान पर अपने शरीर पर भस्म लगाई थी और माता पार्वती को ज्ञान प्रदान किया था।

ऐसा कहा जाता है कि जब भगवान शिव इस पहाड़ी पर ध्यान कर रहे थे तो कामदेव ने उन्हें बाधित किया जिससे वे शिव के क्रोध की आग से जलकर राख हो गए और इसलिए पहाड़ी को भस्मकाल नाम मिला।

उमानंद मंदिर का निर्माण 1681 से 1694 में हुआ था। इस मंदिर का निर्माण अहोम वंश के राजा और सबसे मजबूत शासकों में से एक राजा गदाधर सिंह ने करवाया था।

1897 में विनाशकारी भूकंप से मूल मंदिर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। बाद में, एक स्थानीय व्यापारी द्वारा मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया था। उमानंद मंदिर को कुशल असमिया श्रमिकों द्वारा खूबसूरती से तैयार किया गया था।

उमानंद मंदिर में भगवान शिव के अलावा, भगवान विष्णु, सूर्य, गणेश और अन्य हिंदू देवताओं की मूर्तियां मंदिर में स्थापित हैं। उमानंद मंदिर को पूजा करने के लिए एक बहुत ही पवित्र स्थान माना जाता है। कहा जाता है कि अगर भक्त की नीयत शुद्ध हो तो यहां हर मनोकामना पूरी होती है। यह गुवाहाटी में घूमने के लिए सबसे खूबसूरत जगहों में से एक है।

interesting-facts-related-to-Umanand-temple

इस पर्वत को भस्मकूट भी कहा जाता है। कालिका पुराण में कहा गया है कि यहाँ उर्वसीकुंड स्थित है और यहाँ देवी उर्वशी का निवास है जो कामाख्या के भोग के लिए अमृत लाती है और इसलिए इस द्वीप उर्वशी द्वीप के नाम से भी जाना जाता है।

ऐसा माना जाता है कि, अमावस्या के दिन यहाँ पूजा की जाती है जब यह सोमवार को आता है। यहां प्रतिवर्ष त्यौहार का आयोजन किया जाता है जिसे शिव चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है।

अवतार 2 : केट विंसलेट का खतरनाक अवतार देखकर हैरान रह जायेंगे आप

जेम्स कैमरून द्वारा निर्देशित आगामी हॉलीवुड फिल्म अवतार 2 का फैंस को बेसब्री से इंतजार है। दुनियाभर में धमाल मचाने वाली फिल्म ‘अवतार’ के सीक्वल को लेकर सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है।

‘अवतार 2’ का फर्स्ट लुक भी सामने आ गया है, जिसमें ‘टाइटैनिक’ फेम एक्ट्रेस केट विंसलेट (Kate Winslet) का खतरनाक लुक देखने को मिल रहा है।

केट विंसलेट 26 साल बाद एक बार फिर ‘टाइटैनिक’ के डायरेक्टर जेम्स कैमरून के साथ ‘अवतार 2’ में काम कर रही हैं। ‘टाइटैनिक’ के बाद दोनों की ये दूसरी फिल्म है।

Avatar-2-You-will-be-surprised-to-see-Kate-Winslet's-dangerous-avatar-1

जानकारी के लिए बता दें कि, फिल्म का पहला लुक ‘एम्पायर मैगजिन’ के स्पेशल अवतार एडिशन के कवर पेज पर रिलीज किया गया है। पोस्टर में ‘रोनाल’ बनीं केट विंसलेट का गुस्सैल वाला लुक देखा जा सकता है।

एलियन के रूप में केट विंसलेट नुकीले दांतों और बड़ी आंखों में बेहद डरावनी लग रही हैं। फिल्म का पोस्टर सामने आने बाद से सोशल मीडिया पर छा गया है।

रोनाल “मेटकायना” जनजाति का नेतृत्व करेंगी, ये पेंडोरा के विशाल महासागरों पर राज करते हैं। फिल्म में केट एक प्रमुख भूमिका में हैं। केट ने फिल्म में कुछ अलौकिक स्टंट भी किए हैं और उन्होंने “सात मिनट और 14 सेकंड” के लिए पानी के नीचे अपनी सांस रोक रखी थी।

Avatar-2-You-will-be-surprised-to-see-Kate-Winslet's-dangerous-avatar-1

इस दिन रिलीज होगी फिल्म

‘अवतारः द वे ऑफ वॉटर’ में सैम वर्थिंगटन के जेक और जो सलदाना नेटियरी के जीवन की कहानी को आगे बढ़ाया जाएगा। दोनों अब माता-पिता बन गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘अवतारः द वे ऑफ वॉटर’ इसी साल 16 दिसंबर 2022 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

जानिए क्यों लगे 13 साल ‘अवतार 2’ बनाने में

हॉलीवुड को एक से बढ़कर एक फिल्म देने वाले निर्देशक जेम्स कैमरून इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘अवतार 2’ को लेकर सुर्खियां बटोर रहे हैं। साल 2009 में आई फिल्म ‘अवतार’ के दुनियाभर में परचम लहराने के बाद अब जेम्स कैमरून इस फिल्म की सीक्वल रिलीज करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।

लोगों के बीच निर्देशक की ‘अवतार: द वे ऑफ वॉटर’ के लिए भरपूर क्रेज देखने को मिल रहा है। फैंस को काफी समय से इंतजार था, जो अब जल्द ही खत्म होने वाला है।

लेकिन सभी के दिमाग में एक प्रश्न जरूर होगा कि आखिर जेम्स कैमरून को दूसरा पार्ट बनाने में इतना लंबा समय क्यों लगा। रिलीज से पहले अब निर्देशक ने लोगों के इस सवाल का जवाब दे दिया है, चलिए जानते हैं जेम्स कैमरून ने क्या कहा…

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Avatar (@avatar)

हॉलीवुड के डायरेक्टर जेम्स कैमरून की फिल्म ‘अवतार 2’ इसी साल 16 दिसंबर को रिलीज होने जा रही है। 23 सितंबर को इस फिल्म का पहला पार्ट रिलीज किया गया था और अब जेम्स कैमरून की फिल्म ‘अवतार 2′ 13 साल बाद सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।

इस फिल्म का पूरा नाम ‘अवतार: द वे ऑफ वॉटर’ है। जेम्स कैमरून ने हाल रही में एक इंटरव्यू में ये जानकारी दी है

कि यह फिल्म पानी के नीचे बनी हैं इसके लिए जेम्स कैमरून को पानी के नीचे गति पकड़ने के लिए सही तकनीक की जरूरत थी। जिसकी वजह से मुझे इसे बनाने में इतना समय लगा।

हम इस फिल्म को एक अलग समय में पेश करेंगे। क्योंकि जो चीजें साल 2009 में लोगों का मनोरंजन करने के लिए थी शायद वह अब मनोरंजन नहीं है।’

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Avatar (@avatar)

जेम्स कैमरून की इस फिल्म का पहला पार्ट ‘अवतार’ साल 2009 में आया था और वह इसका सीक्वल ‘अवतार: द वे ऑफ वाटर’ मूल फिल्म के 13 साल बाद अब 16 दिसंबर को रिलीज हो रहा है।

फिल्म की एडवांस बुकिंग पूरी दुनिया में शुरू हो चुकी है। भारत में भी इसको बढ़िया रेस्पॉन्स मिल रहा है। इसकी एडवांस बुकिंग काफी अच्छी चल रही है, जो कोई हैरानी वाली बात नहीं है क्योंकि ‘अवतार: द वे ऑफ वाटर’ भारत में अंग्रेजी के अलावा हिंदी, तमिल, तेलुगू, कन्नड़ और मलयालम में भी रिलीज हो रही है।

लाल चावल के स्वास्थ्य लाभ गिनते गिनते थक जायेंगे आप

हम में से बहुत से लोग ऐसे हैं जो चावल खाए बिना नहीं रह सकते। आजकल बाज़ार में कई तरह के चावल की किस्में मौजूद हैं और अब लोग सामान्य चावल की बजाय लाल चावल खाना ज्यादा पसंद करते हैं। इसका कारण यह है कि इन में ज्यादा फाइबर और पोषक तत्व होते हैं और यह सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है।

यह आपको वजन घटाने से लेकर दिल को स्‍वस्‍थ रखने और डायबिटीज रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। हालांकि अधिकतर लोग सफेद चावल खाते हैं, जबकि सफेद चावल के बजाए आप लाल चावल के कई स्‍वस्‍थ विकल्‍पों को अपना सकते हैं। आज हम आपको लाल चावल खाने के कुछ अद्भुत फायदे बताने जा रहे हैं।

benefits-of-red-rice

स्वास्थ्य लाभ

इन में प्रमुख पोषक तत्व एंथोसायनिन होता है, जो स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाला यौगिक है। यही तत्व इस चावल को एक समृद्ध लाल रंग देता है। इसमें रक्तचाप को कम करने, मधुमेह को रोकने, दृष्टि में सुधार करने और कैंसर कोशिकाओं को कम करने की क्षमता भी होती है।

इसके अलावा, इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुण भी होते हैं। इनमें फाइबर, विटामिन बी1 और बी2, कैल्शियम और आयरन से भी भरपूर होता है।

ब्लड ग्लूकोज को कम कर सकता है

मधुमेह में अनियंत्रित रक्त शर्करा का स्तर आंखों और गुर्दे को ख़राब कर सकता है और हृदय रोग भी पैदा कर सकता है। इन का कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स चीनी के स्तर को नियंत्रण में रखने में मदद करता है, जिससे यह मधुमेह रोगियों के लिए एक अच्छा विकल्प बन जाता है।

अस्थमा से लड़ने में मदद

लाल चावल का नियमित सेवन अस्थमा से लड़ने में मदद कर सकता है। क्‍योंकि लाल चावल में मैग्नीशियम की अच्‍छी मात्रा होती है और मैग्‍नीशियम की मात्रा शरीर के भीतर ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ाती है, यह समग्र श्वसन प्रणाली के लिए अच्छा है।

हड्डियों के लिए अच्छा है

इस में कैल्शियम और मैग्नीशियम होता है, जो हड्डियों के लिए आवश्यक पोषक तत्व हैं। यह गठिया, ऑस्टियोपोरोसिस और हड्डी से संबंधित अन्य बीमारियों को रोक सकती है।

benefits-of-red-rice

पाचन में सहायक

लाल चावल घुलनशील और अघुलनशील फाइबर का एक बड़ा स्रोत है, जिसका अर्थ है कि यह मल त्याग को आसान बनाता है और पाचन को बढ़ाता है। डायरिया और कब्ज दोनों से निपटने के लिए ये फाइबर फायदेमंद हो सकता है।

वजन घटाने में मदद है

लाल चावल खाने से लंबे समय तक भूख नहीं लगती और समय के साथ आपके पाचन स्वास्थ्य में सुधार होता है। यह वजन कम करने में सहायता करता है। इन में वसा की मात्रा शून्य होती है, यही कारण है कि यह भूख को कम करने में मदद करता है। यदि आप अपना वजन कम करना चाहते हैं तो यह लाल चावल को एक बेहतर विकल्प हो सकता है।

जानिए कैसे बनते हैं ‘पहाड़’?

0

हमारी पृथ्वी की ऊपरी परत सात या आठ विशाल शिलाखंडों में बंटी हुई है। इन्हें टेक्टोनिक प्लेट भी कहा जाता है। ये प्लेटें धीरे-धीरे सरकती रहती हैं। जब ये प्लेटें एक-दूसरे से टकराती हैं तो पर्वत श्रृंखलाओं की उत्पत्ति होती है।

पर्वत को गिरि, अचल, शैल, धरणीधर, धराधर, नग, भूधर और महिधर भी कहा जाता है। आज आपको हम पोस्ट में पर्वतों के बारे में बताने जा रहे हैं कि आखिर कैसे बनते हैं पहाड़?

पहाड़ों का बनना एक लंबी भूवैज्ञानिक प्रक्रिया है और यह हमेशा पहाड़ों के अंदर होती रहती है। यह पृथ्वी के अंदर मौजूद क्रस्ट में तरह- तरह की हलचल होने के कारण होती है। पहाड़ टैक्टॉनिक या ज्वालामुखी से बनते हैं।

ये सारी चीजें मिलकर पहाड़ को 10,000 फुट तक ऊपर उठा देती हैं। उसके बाद नदियां, ग्लेशियर और मौसम इसे घटाकर कम कर देते हैं।

how-'mountains'-are-made

भारत की प्रमुख पर्वत श्रृंखलाएं

कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक भारत में एक से एक शानदार पहाड़ हैं, पर्वत श्रृंखलाएं और सुंदर एवं मनोरम घाटियां हैं।

हिमालय, अरावली, सतपुड़ा, विंध्याचल, पश्चिमी घाट, पूर्वी घाट, नीलगिरि पर्वत, अनामलाई पर्वत, काडिमोम पहाड़ियां, गारो खासी पहाड़ियां, नागा पहाड़ियां आदि। कुछ प्रमुख पर्वतों में कंचनजंगा, नंदा देवी, काबरू आदि हैं।

पहाड़ हैं तो आबोहवा शुद्ध है

जहां वन होता है वहीं जीव होते हैं। इनके बिना पहाड़ अधूरा और कमजोर है। दूसरी ओर पहाड़ों के कारण ही नदियों का बहना जारी है। मानव एक ओर जहां पहाड़ काट रहा है वहीं नदियों पर बांध बनाकर उनके अस्तित्व को मिटाने पर तुला है तो दूसरी ओर अंधाधुंध तरीके से पेड़ काटे जा रहे हैं।

पहले किसी भी पहाड़ के उत्तर में गांव या शहर को बसाया जाता था ताकि दक्षिण से आने वाले तूफान और तेज हवाओं से शहर की रक्षा हो सके। इसके अलावा सूर्य का ताप सुबह 10 बजे से लेकर अपराह्न 4 बजे तक अधिक होता है।

इस दौरान सूर्य दक्षिण की ओर रहता है। पहाड़ से दक्षिण से आने वाली हानिकारक अल्ट्रावॉयलेट किरणों से सुरक्षा होती है। हिमालय की वादियों में रहने वालों को सांस सहित अनेक बीमारियां कम होती हैं।

चमत्कारिक पहाड़

देश-दुनिया में कई ऐसे चमत्कारिक पहाड़ हैं, जिनके बारे में कई तरह की किंवदंतियां प्रचलित हैं, जैसे भारत के लेह-लद्दाख में एक चुम्बकीय पहाड़ है जिसे मैग्नेटिक हिल भी कहा जाता है।

यह पहाड़ धातु को अपनी ओर खींचता है। इस पहाड़ के ऊपर से गुजरने वाले विमानों को अपेक्षाकृत अधिक ऊंचाई पर उड़ना होता है।

यहां पर अलग-अलग संरचनाओं और रंगों वाले पहाड़ भी हैं। मौसम से संबंध पर्वतों के कारण ही भारत में अच्छे तौर पर 6 ऋतुएं होती हैं, जो किसी अन्य देश में शायद ही देखने को मिलें। ये हैं – वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत और शिशिर।

प्रत्येक मौसम 2 माह का होता है, लेकिन अरावली और विंध्याचल पर्वत श्रृंखलाओं को काट देने के कारण भारत में अब मौसम परिवर्तन होने लगा है। इस परिवर्तन के कारण कृषि पर भी असर पड़ा है।

विकास के नाम पर काट दी गई कई शहरों की छोटी-मोटी पहाड़ियों से भी जलवायु परिवर्तित होने लगा है। पहाड़ है तो पानी है पहाड़ पर हरियाली बादलों को बरसने का न्यौता होती है। सभी प्रमुख नदियां पहाड़ों से ही निकलती हैं।

औषधियों का खजाना पहाड़

पहाड़ कई जड़ी-बूटियों और औषधियों का खजाना भी है। कई जड़ी- बूटियां पहाड़ों पर ही उगती हैं। आयुर्वेद की सबसे महान खोज च्यवनप्राश को माना जाता है, पर शायद ही कोई यह जानता होगा कि यह धोसी पहाड़ी की देन है जो हरियाणा और राजस्थान की सीमा पर स्थित है।

पंजाब केसरी से साभार

बेहद रहस्यमयी है हिमालय का ज्ञानगंज, जानिए क्यों ?

0

हिमालय की ऊंची पहाड़ियों में बहुत से रहस्य छिपे हैं। रहस्यमयी इस हिमालय पर्वत में ज्ञानगंज नामक एक ऐसी जगह है जहाँ सिद्ध योगी और साधु रहते हैं। तिब्बती लोग इसे ही शम्भल की रहस्यमय भूमि के रूप में पूजते हैं। ऐसा माना जाता है कि ज्ञानगंज, तिब्बत क्षेत्र में कैलाश पर्वत के निकट स्थित है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस आश्रम का निर्माण विश्वकर्मा जी ने की है। इस जगह पर आज भी भगवान राम, श्रीकृष्ण, बुद्ध आदि शरीर रूप में उपस्थित हैं। इसके साथ ही इस आश्रम में महर्षि वशिष्ठ, विश्वामित्र, महायोगी गोरखनाथ, श्रीमद शंकराचार्य, भीष्म, कृपाचार्य, कणाद, पुलस्त्य, अत्रि आदि को भौतिक रूपों में देखा जा सकता है।

जबकि सैकड़ों ऋषिगण हजारों वर्षों से ध्यान करते देखे जा सकते हैं। इस स्थान के बारे में सर्वप्रथम स्वामी विशुद्धानंद परमहंस ने लोगों को जानकारी दी थी।

आज हम इस पोस्ट में आपको रहस्यमयी हिमालय में स्थित ज्ञानगंज से जुड़ी किंवदंतीयों के बारे में बताने जा रहें हैं, तो चलिए जानते हैं:

Gyanganj-of-the-Himalayas-is-very-mysterious-2

ज्ञानगंज की किंवदंती

हिमालय की रहस्यमयी घाटियों के भीतर कहीं स्थित है ‘ज्ञानगंज’ जिसे अमरों की भूमि भी कहा जाता हैं। एक पौराणिक मान्यता के अनुसार ज्ञानगंज रहस्यमयी अमर प्राणियों द्वारा बसाया हुआ एक शहर है।

किसी भी बुरे कर्म से रहित महान संत ही मानसिक बाधाओं और आयामों से गुजरकर इस आध्यात्मिक भूमि में स्थान पा सकते हैं। इस पौराणिक साम्राज्य का सटीक स्थान अज्ञात है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि ज्ञानगंज कृत्रिम रूप से मनुष्यों से खुद को छुपाता है।

कुछ का यह भी मानना है कि ज्ञानगंज वास्तविकता के एक अलग तल में मौजूद है और इस प्रकार उपग्रहों द्वारा इसका पता नहीं लगाया जा सकता है।

Gyanganj-of-the-Himalayas-is-very-mysterious-2

बौद्ध शम्बाला – बौद्ध धर्म में संदर्भ

ज्ञानगंज का उल्लेख केवल हिंदू पौराणिक कथाओं में ही नहीं बल्कि बौद्ध धर्म में भी मिलता है। इस किंवदंती की जड़ें तिब्बत में भी खोजी जा सकती हैं। तिब्बत में, इस खगोलीय साम्राज्य को ‘शाम्बाला’ के नाम से जाना जाता है, जो संस्कृत से लिया गया शब्द है, जिसका अर्थ है “खुशी का स्रोत”।

बौद्धों का मानना है कि शम्बाला दुनिया की गुप्त आध्यात्मिक शिक्षाओं की रक्षा करती है। इस पौराणिक भूमि तक पहुँचने के निर्देश कुछ पुराने बौद्ध शास्त्रों में दिए गए हैं, हालाँकि दिशाएँ अस्पष्ट हैं।

बौद्ध भी मानते हैं कि ज्ञानगंज मृत्यु के नियमों का उल्लंघन करता है। इस अमर भूमि में किसी की मृत्यु नहीं होती और चेतना हमेशा जीवित रहती है। इसे शम्भाला और शांगरी-ला के नाम से भी जाना जाता है।

ज्ञानगंज की अवधारणा

प्राचीन ग्रंथों और मान्यताओं के अनुसार, ज्ञानगंज आठ पंखुड़ियों वाले कमल की संरचना जैसा दिखता है। यह बर्फ से ढके पहाड़ों से घिरा हुआ है। जीवन का वृक्ष जो स्वर्ग, पृथ्वी और अधोलोक को जोड़ता है, इसके केंद्र में खड़ा है।

इसे एक झिलमिलाते  क्रिस्टल के रूप में वर्णित किया गया है। तिब्बती बौद्धों का मानना है कि दुनिया में एक महान अराजकता के समय में, इस आध्यात्मिक भूमि के 25वें शासक ग्रह को एक बेहतर युग में ले जाने के लिए प्रकट होंगे।

Gyanganj-of-the-Himalayas-is-very-mysterious-2

जब ज्ञानगंज या शम्भाला का वर्णन करने के लिए कहा गया, तो दलाई लामा ने समझाया कि यह कोई भौतिक स्थान नहीं है जिसे लोग ढूंढ सकें। यह स्वर्ग नहीं बल्कि मानव क्षेत्र में एक शुद्ध भूमि है। इस भूमि पर जाने का एकमात्र तरीका कर्म संबंध है।

हिमालय के अमर प्राणियों द्वारा बसा यह शहर, और इसके निवासी प्रार्थना और ध्यान के माध्यम से दुनिया की नियति का सूक्ष्मता से मार्गदर्शन करते हैं। वे विश्व के आध्यात्मिक उपदेशों, सभी आस्थाओं और विश्वासों की रक्षा करते हुए मानव जाति की भलाई के लिए काम करते हैं।

एक आध्यात्मिक गुरु, गुरु साईं काका ने आध्यात्मिक और अमर शिक्षा प्राप्त करने के लिए कई बार ज्ञानगंज की अपनी यात्रा के बारे में दुनिया को बताया। उनके कथन के अनुसार, उनकी हर यात्रा के दौरान, एक ऋषि ने उन्हें ज्ञानगंज तक पहुँचाया और यह राज्य पूरी तरह से अलग तल या उच्च आयाम पर मौजूद है।

ज्ञानगंज के एक अन्य आगंतुक एल.पी. फैरेल हैं, जो एक अंग्रेज सेना अधिकारी थे, जिन्होंने 1942 में ज्ञानगंज का अनुभव करने का दावा किया था।

रघुनाथ मंदिर: जानिए जम्मू में स्थित इस खूबसूरत मंदिर के बारे रोचक तथ्य

रघुनाथ मंदिर जम्मू और कश्मीर के भारतीय केंद्र शासित प्रदेश में जम्मू में स्थित एक हिंदू मंदिर है। इसमें सात हिंदू मंदिरों का एक परिसर शामिल है। यह मंदिर न केवल हिंदू धर्म की आस्था की पहचान है बल्कि जम्मू की भी पहचान है।

यह मंदिर अपनी कलात्मकता का विशिष्ट उदाहरण है। रघुनाथ मंदिर भगवान राम को समर्पित है। यह मंदिर उत्तर भारत के प्रमुख और अनोखे मंदिरों में से एक है।

मंदिर का निर्माण पहले डोगरा शासक महाराजा गुलाब सिंह ने 1835 में करवाया था और बाद में उनके बेटे महाराजा रणबीर सिंह ने डोगरा शासन के दौरान 1860 में इसे पूरा करवाया।

मंदिर के मंदिरों के परिसर में कई देवता हैं, लेकिन पीठासीन देवता राम हैं – जिन्हें विष्णु के अवतार रघुनाथ के नाम से भी जाना जाता है। सभी सर्पिल आकार के टावरों में सोने की परत चढ़ी हुई है।

नवंबर 2002 में ऐतिहासिक रघुनाथ मंदिर पर आतंकी हमला भी हो चुका है। जिसके बाद इस मंदिर को कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया था। हमले के 11 साल बाद 2013 में मंदिर के कपाट एक बार फिर भक्तों के लिए खोल दिए गए।

beauty-of-Jammu-Raghunath-Temple

इस मंदिर में बाहर से पांच कलश हैं जो लंबाई में फैले हुए हैं। मंदिर में राम सीता लक्ष्मण की विशाल मूर्तियां हैं। इस मंदिर की खासियत यह है कि इसमें अलग-अलग कमरों में रामायण महाभारत काल के कई पात्रों की मूर्तियां हैं। गर्भगृह के चारों ओर प्रांगण में विशाल कक्ष हैं, जिनमें ये मूर्तियाँ हैं।

इसके अलावा चारों धाम एक कमरे में देखे जा सकते हैं। बीच में ऎसी व्यवस्था हैं कि चारों ओर से एक-एक धाम-रामेश्वरम, द्वारकाधीष, बद्रीनाथ, केदारनाथ के दर्शन किए जा सकते हैं।

एक कक्ष में बीच में भगवान सत्यनारायण के दर्शन किए जा सकते। इस कक्ष के बीचोबीच उकेरा गया सूर्य बहुत सुन्दर हैं। चारों ओर दीवारों पर बारहमासा दर्शनीय हैं, हर महीने चैत्र, वैशाख आदि के लिए उस माह के मुख्य देवता की मूर्ति हैं।

रघुनाथ मंदिर का निर्माण कैसे हुआ, इससे जुड़ा एक बड़ा ही रोचक किस्सा है। कहा जाता है कि इस मंदिर को बनाने की प्रेरणा महाराज गुलाब सिंह को श्री राम दास वैरागी से मिली थी। कहा जाता है कि रामदास वैरागी ने गुलाब सिंह के राजा बनने की भविष्यवाणी की थी। जो बाद में सच निकला।

रामदास वैरागी भगवान राम के भक्त थे। वह भगवान राम के आदर्शों का प्रचार करने के लिए अयोध्या से जम्मू आए थे। वह सिंबली में झोपड़ी बनाकर रहते थे। रामदास ने सिंबल में जम्मू क्षेत्र में पहला राम मंदिर बनाया। इस मंदिर का रामनवमी का त्यौहार दर्शनीय होता है।

जानिए 2009 में रिलीज हुई हॉलीवुड फिल्म “अवतार ” के बारे में रोचक तथ्य

2009 में रिलीज हुई फिल्म “अवतार” हॉलीवुड में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों से एक है, जिसका लेखन व निर्देशन जेम्स कैमरून द्वारा किया गया है और इसमें सैम वर्थिंगटन, ज़ोई साल्डाना, स्टीफन लैंग, मिशेल रोड्रिग्स, जोएल डेविड मूर, जिओवानी रिबिसी व सिगौरनी व्हिवर मुख्य भूमिकाओं में हैं।

इस पोस्ट में हम जानेंगे अवतार फिल्म से जुड़े कुछ रोचक तथ्य:

Interesting-facts-about-the-world's-biggest-movie-Avatar

साल 1999 में ही रिलीज करना चाहते थे मूवी

कैमरून ने टाइटैनिक बनाने के दौरान ही फिल्म अवतार की स्क्रिप्ट लिखी और टाइटैनिक रिलीज होने के बाद ही इस पर फिल्म बनाने की घोषणा कर दी थी। बताया जाता है कि जेम्स कैमरून ‘अवतार’ पर साल 1994 से ही काम कर रहे थे।

वो ‘टाइटैनिक’ मूवी के बाद साल 1999 में इसे रिलीज करने वाले थे, लेकिन वो जिस तरह का स्पेशल इफेक्ट्स चाहते थे, वो उस समय अवेलेबल नहीं थे। इस वजह से उन्हें इस फिल्म को कुछ समय के लिए टालना पड़ा था।

फिल्म का बजट

इस फिल्म के निर्माण में अधिकृत बजट $280 से $310 मिलियन था, और इसके प्रचार पर $150 मिलियन खर्च हुए।

फ़िल्म का चित्रीकरण बेहद नई व उत्तीर्ण मोशन कैप्चर तकनीक का उपयोग करके किया गया और इसे आम प्रिंट के साथ 3डी में भी रिलीज़ किया गया। इसका 4डी प्रिंट दक्षिण कोरिया के कुछ सिनेमाघरों में रिलीज़ किया गया।

अवतार का प्रीमियर लंदन में 10 दिसम्बर 2009 को हुआ एवं इसे 16 दिसम्बर को विश्वभर में और 18 दिसम्बर को अमेरिका व कनाडा में रिलीज़ किया गया।

Interesting-facts-about-the-world's-biggest-movie-Avatar

फ़िल्म ने रिलीज़ के पश्चात कई बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड्स तोड़ दिए और उत्तरी अमेरिका व विश्वभर की सर्वाधिक कमाई वाली फ़िल्म बन गई। अवतार ने 2009 में रिलीज के बाद 2.789 बिल‍ियन डॉलर यानी 22,246 करोड़ रुपये की कमाई की थी।

यह दुनिया की सबसे ज्‍यादा कमाई करने वाली फिल्‍म बनी। यह सिनेमा की दुनिया की पहली ऐसी फिल्‍म थी, जिसने 2 बिलियन डॉलर की कमाई के आंकड़े को छुआ था।

इस फिल्म को नौ एकेडेमी पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया जिनमें सर्वश्रेष्ठ पिक्चर और सर्वश्रेष्ठ निर्देशक शामिल हैं। जिसमें से इस फिल्‍म को बेस्‍ट आर्ट डायरेक्‍शन, बेस्‍ट सिनेमेटोग्राफी और बेस्‍ट विजुअल इफेक्‍ट्स का ऑस्‍कर अवॉर्ड मिला।