क्या है ब्लॉकबस्टर फ़िल्म कांतारा में दिखाई गई सदीयों पुरानी भूत कोला परंपरा

बड़े पर्दे के बाद नेटफ्लिक्स (Netflix) पर धूम मचाने वाली फ़िल्म “कांतारा” (KANTARA)  केजीएफ चैप्टर 2 (KGF Chapter 2 – 1200 करोड़) के बाद कन्नड़ फ़िल्म इंडस्ट्री की दूसरी सबसे ज़्यादा कमाई(450 करोड़) करने वाली फ़िल्म है। अगर आपने अभी तक यह फ़िल्म नहीं देखी तो यह Netflix पर उपलब्ध है।

इस फ़िल्म में एक ख़ास रस्म कोला करने का कई बार ज़िक्र है। कोला में गाँव के लोग एक ख़ास पर्व भूत कोला का आयोजन करते दिखाई देते हैं।

आख़िर फ़िल्म में दिखाया गया कोला क्या है और इसका क्या महत्व हैं? इस पोस्ट में हम कोला या भूत कोला के बारे में और फ़िल्म में दिखाई गई इसकी एक विशेष शैली और इसके महत्व पर चर्चा करेंगे।

भूत कोला या दैव कोला

भूत कोला, जिसे दैव कोला या नेमा भी कहा जाता है, भारत के उत्तरी केरल में तुलु नाडु के हिंदुओं और केरल के कासरगोड ज़िले  के कुछ हिस्सों में प्रचलित एक अनुष्ठानिक नृत्य प्रदर्शन है। यह नृत्य अत्यधिक शैलीबद्ध है और ‘भूतराधना’ या तुलु भाषी आबादी द्वारा पूजे जाने वाले स्थानीय देवताओं की पूजा के हिस्से के रूप में किया जाता है।

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भूत कोला (देवताओं के लिए नृत्य) मूल रूप से गाँव के देवता के मंदिर के पास खुले मैदान में किया जाता है। यह शाम के समय शुरू होता है और जैसे-जैसे शाम बीतती है, यह डांस परफॉर्मेंस एक शानदार अनुभव में बदल जाती है।

माना जाता है कि जो शख्स भूत कोला परफॉर्म करता है यानी नर्तक बनता है, उसके अंदर पंजुरी देवता आते हैं और वह गांव वालों के पारिवारिक मुद्दों और विवादों को सुलझाते हैं। वे अपना निर्देश भी गांव वालों के लिए जारी करते हैं। उनके फ़ैसले को सर्वोपरि माना जाता है और हर किसी को इसका पालन करना होता है।

मलयाली तेय्यम से मिलता जुलता नृत्य

इस अनुष्ठानिक नृत्य प्रदर्शन ने यक्षगान लोक रंगमंच(Yakshagana folk theatre) को प्रभावित किया है। भूत कोला पड़ोसी मलयालम भाषी आबादी के तेय्यम से बहुत मिलता जुलता नृत्य आधारित अनुष्ठान है।

यह अनुष्ठान तुलु नाडु के निवासियों के जीवन का एक हिस्सा है। इस फ़िल्म के लेखक, निर्देशक और मुख्य अभिनेता ऋषभ शेट्टी इसी क्षेत्र से सम्बंध रखते हैं शायद इसीलिए वह इस फ़िल्म में इतना जीवंत अभिनय कर पाए हैं।

दैवों की सूची

तुलु नाडु में कई श्रेणियों के विभिन्न देव हैं जिन्हें यह के निवासी अत्यंत श्रद्धा और सम्मान देते हैं।  यहाँ संक्षेप में तुलु लोगों द्वारा पूजे जाने वाले देवों की सूची है। यह मुख्यतः ५ हैं।

  • कोरगज्जा Koragajja तुलु लोगों द्वारा सबसे अधिक पूजे जाने वाले दैव हैं। किसी भी समस्या में मदद के लिए, खोई हुई चीज़ को वापस पाने के लिए, या किसी काम को समय पर पूरा करने के लिए इनकी प्रार्थना की जाती है।
  • पंजुरली Panjurli, एक जंगली सूअर की आत्मा है जिसकी पूजा फसलों की रक्षा के लिए जंगली सूअरों के खतरे को दूर करने के लिए की जाती है। फ़िल्म कांतारा में लोग इसी देवता की पूजा आराधना करते दिखाए गए हैं।तुलु पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव के आनंद उद्यान में एक जंगली सूअर मर गया। युवा सूअर की संतान को देवी पार्वती ने गोद लिया था। जैसे-जैसे वह बड़ा होता गया युवा सूअर उत्पाती होता गया और उसने भगवान शिव के बगीचे में पौधों और पेड़ों को नष्ट करना शुरू कर दिया। इससे भगवान शिव नाराज हो गए और उन्होंने उसे मारने का फैसला किया। देवी पार्वती ने शिव से उसे क्षमा करने के लिए कहा। इसलिए उसे मारने के बजाय, भगवान शिव ने सूअर को पृथ्वी पर भेज दिया और उसे पृथ्वी के लोगों की रक्षा करने का काम सौंपा। यह विशेष रूप से एक भूत (दिव्य आत्मा) बन गया जिसे पंजुरली के नाम से जाना जाता है।

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  • बोब्बर्या (Bobbarya) समुद्रों के देवता, जिनकी ज्यादातर मछुआरा वर्ग के लोग पूजा करते हैं।
  • कालकुड़ा और कल्लूर्ती (Kalkuda and Kallurti) दैव हैं जो भाई और बहन हैं। किंवदंती के अनुसार, कालकुड़ा एक महान मूर्तिकार थे जिन्होंने श्रवण बेलगोला निर्माण किया था। इनकी कहानी भी रोचक जो फिर कभी सही।
  • गुलिगा Gulliga देवता का जन्म देवी पार्वती और भगवान शिव के हाथों हुआ और शिव ने इनको भगवान विष्णु की सेवा में भेजा। गुलिग के उत्पात से ग़ुस्साए विष्णु ने गुलिग को पृथ्वी पर निर्वासित कर दिया।
  • कोटि सेनैय्या, कोटि और चेन्नय्या (Kōṭi Cennayya, Koti and Chennayya) जुड़वाँ नायक हैं जिन्हें योद्धा देवता के रूप में पूजा जाता है

कांतारा फ़िल्म में पंजुरली और गुलिगा देवों का ज़िक्र है। पंजुरली देवता राजा को चेतावनी देता है कि यदि राजा का परिवार या उसके उतराधिकारी अपने वादे से मुकरे और जमीन पर अपना दावा किया तो इससे उसके साथी (पंजुरली के साथी), क्रूर गुलिगा दैव का क्रोध भड़क उठेगा।

जैसा कि मैंने ऊपर बताया इस फ़िल्म में पंजुरली देव की आराधना कर पर्व कोला दिखाया गया है। भूत कोला या दैव नेमा अनुष्ठान में संगीत, नृत्य, गायन और विस्तारित वेशभूषा (Elaborated Costume) शामिल होती है।

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अनुष्ठान में, जहां (स्थान पर) देव वास करते हैं वहाँ उनके समक्ष नृत्य करते हुए उनका गुणगान किया जाता है।

अनुष्ठान में प्राचीन तुलु भाषा में देवता की उत्पत्ति का वर्णन किया जाता हैं और तब से लेकर देव की वर्तमान स्थिति के बारे में बताया जाता है। इस रस्म को पाददान (pāḍdanas) कहा जाता है।

वैसे भूत कोला के अलावा देव पूजा की अन्य मुख्य पद्धतियाँ हैं बंदी Bandi, नेमा Nema और अगेलु तम्बिला (Agelu tambila)।

उम्मीद है कि भूत कोला के बारे में दी गयी जानकारी आपको पसंद आयी। इस पोस्ट को शेयर करें और like करें।

भारत में जगहों के ऐसे अजीबोगरीब नाम जिन्हें सुनकर आप हंसी रोक नहीं पाएंगे!

भारतीयों द्वारा किए जाने वाले अजीबोगरीब काम और जुगाड़ तो आपने देखे होंगे। वहीँ भारत में गाँव और शहरों के अजीबोगरीब नाम भी आपने सुने होंगे। हो सकता है आप भी किसी अजीब से नाम वाले गाँव, शहर या जिले से सम्बन्ध रखते हों।

आज इस पोस्ट के माध्यम से हम आपके लिए लाये हैं अजीबोगरीब नाम वाली जगहों की सूची। कुछ ऐसे नाम जो बेशक होते तो आम चीज़ों के हैं लेकिन किसी जगह, कस्बे, गाँव या शहर का ऐसा नाम सुनने में थोड़ा अजीब लगता है।  तो आइए देखते हैं।

‘भैंसा गांव’, उत्तर प्रदेश के मथुरा तहसील के 247 गांवों में से एक है

‘काला बकरा’ – पंजाब के जालंधर जिले का एक कस्बा

चू***/चुटिया, Chutia, Asam – ओह, ऐसा नाम भी होता है? जी हां, ये जगह असम में है!

गधा, गुजरात Gadha Gujrat के सबर कांठा जिले की हिम्मतनगर तहसील का एक गांव है। वैसे ये नाम गड़ा/गढ़ा है लेकिन बाहर के लोग इसे जानबूझ कर गधा ही बुलाते हैं।

टट्टी खाना, तेलंगाना – Tatti Khana, Telangana,  यह राजधानी हैदराबाद में स्थित छोटा-सा एक उपनगर है अपने इस नाम के बावजूद घूमने लायक है।

चुटिया, रांची

कुत्ता, KUTTA, कर्नाटक राज्य में गोनीकोपाल के पास एक छोटा सा गांव है। हालाँकि इसे कन्नड़ में कुट्टा पढ़ा जाता होगा, जिसका मतलब है डंक। पर हम तो हिंदी में फन कर रहे है न?? 😉

लुल्ला नगर, पुणे, महाराष्ट्र – Lulla Nagar, Pune, Maharashtra। इसके बारे में मुझे कुछ नहीं कहना है 🤐

सबसे लंबे नाम का रेलवे स्टेशन Venkatanarasimharajuvaripeta है। संक्षेप में इसे श्री बोला जाता है।

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नरकटियागंज, बिहार (Narkatiaganj Bihar) के पश्चिमी चम्पारण जिला में, नेपाल की सीमा के पास का गाँव है.

पनौती (Panauti, Uttar Pradesh) गाँव उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में स्थित है

सुअर(Suar Uttar Pradesh), यह उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले ने स्थित एक शहर है

दूदू , राजस्थान (Dudu Rajsthan) के जयपुर जिले में स्थित एक विधानसभा क्षेत्र है

चौधरी चरण सिंह- किसानों का मसीहा जिसने किसान को दिया सर्वोच्च स्थान

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भारत के पांचवें प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह (23 दिसंबर 1902 – 29 मई 1987) की जन्म जयंती यानि 23 दिसंबर को भारत में किसान दिवस के रूप में मनाया जाता है। चौधरी चरण सिंह को किसानों का मसीहा भी कहा जाता है।

चौधरी चरण सिंह ने भूमि सुधारों पर काफ़ी सराहनीय काम किया था। साथ ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में और केंद्रीय वित्तमंत्री के रूप में उन्होंने गांवों और किसानों के विकास के महत्वपूर्ण योगदान दिया। चौधरी चरण सिंह ने अपना संपूर्ण जीवन भारतीयता और एक साधारण ग्रामीण किसान की तरह जिया।

किसान दिवस की स्थापना

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Choudhary Charan Singh (1902-1987)

वर्ष 2001 में भारतीय सरकार द्वारा चौधरी चरण सिंह  की जयंती पर उनके कार्यो को ध्यान में रखते हुए 23 दिसम्बर को राष्‍ट्रीय किसान दिवस की घोषणा की गई थी।

‘किसान दिवस‘ मेहनती किसानों को समर्पित है जो भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी कहे जाते हैं। 2001 से लेकर हर वर्ष 23 दिसंबर किसान दिवस के रूप में मनाया जाता है।

किसानों का महत्त्व

भारत एक कृषि प्रधान देश है। इसका मतलब है कि यहां की जनसंख्या का एक बड़ा भाग कृषि पर निर्भर है।

किसान  देश की प्रगति में विशेष सहायक होते हैं। किसान के बल पर देश अपने खाद्यान्नों के उत्पादन को बेहतर करके खुशहाल बन सकते है। पूर्व प्रधानमंत्री चरण सिंह को किसानों के अभूतपूर्व विकास के लिए विशेष योगदान दिया था।

चौधरी चरण सिंह की नीति किसानों व ग़रीबों को ऊपर उठाने की थी। उन्होंने हमेशा यह साबित करने की कोशिश की, कि किसानों के बिना देश व प्रदेश का विकास नहीं हो सकता।

उनका कहना था कि भारत का संपूर्ण विकास तभी होगा जब किसान, मज़दूर, ग़रीब सभी खुशहाल होंगे। देश में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी कृषि सुधारों पर अधिक बल दिया था।

किसानों के मसीहा का चौधरी चरण सिंह का योगदान

किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह का जन्म 23 दिसम्बर, 1902 को उत्तर प्रदेश के मेरठ ज़िले में हुआ था। उन्होंने खेती और गाँव को महत्व दिया। आज़ादी के बाद चौधरी चरण सिंह पूर्णत: किसानों के लिए लड़ने लगे। चौधरी चरण सिंह की मेहनत के कारण ही ‘‘जमींदारी उन्मूलन बिल ”साल 1952 में पारित हो सका।

इस एक बिल ने सदियों से खेतों में ख़ून पसीना बहाने वाले किसानों को जीने का मौका दिया। उन्होंने समस्त उत्तर प्रदेश में भ्रमण करते हुए कृषकों की समस्याओं का समाधान करने का प्रयास किया।

किसानों के हित में उन्होंने 1954 में उत्तर प्रदेश भूमि संरक्षण कानून को पारित कराया। उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाक़ों में कृषि मुख्य व्यवसाय था।

चौधरी चरण सिंह खुद एक किसान परिवार से सम्बन्ध रखते थे और वह उनकी समस्याओं को अच्छी तरह से समझते थे। राजनेता होने से पहले वे एक अच्छे लेखक भी थे।

उनकी अंग्रेजी पर अच्छी पकड़ थी। लेखक के तौर पर उन्होंने एबॉलिशन ऑफ जमींदारी, इंडियाज पॉवर्टी एंड इट्ज सॉल्यूशंस और लीजेंड प्रोपराइटरशिप जैसी किताबें लिखी हैं।

भारत की इन “श्रापित नदियों” को छूने भर से बिगड़ जाते हैं सारे काम

भारत में नदियों का धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक महत्‍व रहा है। भारत का जब भी प्राचीन और मध्यकाल इतिहास पढ़ा जाता है तो नदियों का जिक्र ज़रूर होता है। कहा जाता है कि प्राचीन काल से लेकर मध्यकाल तक कई गांव और शहर नदियों के किनारे ही होते थे।

fundabook.com अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाली किसी भी कहानी या तथ्य का समर्थन नहीं करता। यह पोस्ट केवल पाठकों के ज्ञान और रोचक तथ्यों के सन्दर्भ में पोस्ट की गयी है। पाठक कृपया अपने विवेक से काम लें।

गंगा, सरस्वती, कावेरी, ब्रह्मपुत्र और सतलुज आदि नदियां भारत की सबसे प्राचीन नदियों में शामिल हैं। भारत के कई हिस्सों में इन पवित्र नदियों की पूजा-पाठ भी होती है। एक तरह से ये सभी नदियां पवित्र मानी जाती हैं।

लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत में कुछ श्रापित नदियां भी मौजूद हैं जी हाँ इस लेख में हम आपको भारत की श्रापित नदियों के बारे में बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं।

फल्गु नदी

फल्गु नदी बिहार के गया जिले की एक प्रमुख नदी है। गया एक ऐसा जिला है जहां पिंडदान या श्राद्ध के लिए हर साल लाखों लोग पहुंचते हैं। लेकिन इस नदी को लेकर कहा जाता है कि यह एक श्रापित नदी है।

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कई लोगों का मानना है कि बिहार की फल्गु नदी को सीता माता ने श्राप दिया था। मान्‍यता है कि माता सीता के श्राप से फल्‍गु नदी का जल धरती के अंदर चला गया था। इस कारण फल्‍गु को भू-सलिला भी कहा जाता है।

चंबल नदी

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चंबल मध्‍यप्रदेश की प्रमुख नदी है। यह नदी “जानापाव पर्वत ” बांगचु पॉइंट महू से निकलती है। इसका प्राचीन नाम “चर्मण्वती ” है। चंबल को डाकुओं का इलाका माना जाता है, पर अब यहां डाकू नहीं रहते, लेकिन इस नदी को लोग अपवित्र जरूर मानते हैं। इस नदी के बारे में कहा जाता है कि यह कई जानवरों के खून से उत्पन्न हुई है।

कर्मनाशा नदी

बिहार और उत्तर प्रदेश राज्य में बहने वाली यह एक प्रमुख नदी है। यह गंगा नदी की एक उपनदी है। इसकी उत्पत्ति बिहार के कैमूर ज़िले में होती है और फिर यह बहते हुए बिहार व उत्तर प्रदेश की सीमा निर्धारित करती है। एक तरह से दोनों राज्यों को यह नदी अलग भी करती है।

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इन दोनों ही राज्यों के लोगों का मानना है कि जो इस नदी का पानी छूता है उसके बने काम चंद मिनटों में बिगड़ जाते हैं। कई लोगों का मानना है कि इस नदी का पानी श्रापित है इसलिए कोई भी इस नदी का पानी छूता नहीं है।

कोसी नदी

कोसी नदी या कोशी नदी नेपाल में हिमालय से निकलती है और बिहार में भीम नगर के रास्ते से भारत प्रज्वल में दाखिल होती है।

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कहते हैं जब भी इस नदी में बाढ़ आती हैं, जो स्थानीय लोग प्रभावित होते हैं और कई लोगों की तो जान भी चली जाती है। हालांकि, लोग इसे श्रापित नहीं कहते, लेकिन इसे शोक नदी के नाम से बुलाते हैं।

जवां और खूबसूरत त्वचा के लिए अपनाएं नाशपाती, होंगे कमाल के फायदे

नाशपाती विटामिन्स, मिनरल्स, एंटीऑक्सिडेंट्स, डाइटरी फाइबर्स, फ्लेवेनॉएड्स भरपूर होती है, तो क्यों न इसे अपने आहार में शामिल किया जाए? यह आंत और प्रतिरक्षा में सुधार के लिए बहुत अच्छी होती है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह रसदार और मीठा फल आपकी त्वचा पर चमत्कारी असर कर सकता है? जी हाँ इसे आप चाहें तो अपने चेहरे पर लगा भी सकते हैं या फिर इसे अपने खाने में भी शामिल कर सकते हैं।

आज इस पोस्ट में हम बताने जा रहे हैं नाशपाती के चमत्कारी फायदों के बारे में, तो चलिए शुरू करते हैं :

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नाशपाती के त्वचा लाभ

जब हम विटामिन सी के बारे में सोचते हैं, तो हमारे दिमाग में खट्टे फल आते हैं। लेकिन अगर आपको खट्टी चीज़ें पसंद नहीं है, तो आप नाशपाती ट्राय कर सकते हैं जिसमें अच्छी मात्रा में विटामिन ए और सी होता है।

नाशपाती त्वचा के रूखेपन और झुर्रियों को भी कम करती है। इस फल के अर्क का उपयोग त्वचा उपचार सामग्री के रूप में भी किया जाता है क्योंकि इसमें न केवल एंटीऑक्सिडेंट होते हैं, बल्कि यूवीबी-अवरोधक क्षमता भी होती है।

मुंहासों की समस्या के लिए

नाशपाती ऐसे लोगों की स्किन के लिए काफी अच्छा है, जिन्हें मुंहासों की समस्या रहती है। इसमें विटामिन और मिनरल्स प्रचुर मात्रा में होते हैं। ये न्यूट्रिएंट्स आपकी स्किन को जवां बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

नाशपाती से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। इसी से मुंहासों में कमी आती है और दूसरी तरह के स्किन इन्फेक्शन होने का खतरा भी कम हो जाता है।

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तैलीय त्वचा के लिए

आप अपनी त्वचा पर तेल को नियंत्रित करने के लिए सिर्फ शहद के साथ मैश की हुई नाशपाती का उपयोग भी कर सकते हैं, जिससे यह तैलीय त्वचा वालों के लिए एकदम सही है।

इसमें डाइटरी फाइबर्स अच्छी मात्रा में होते हैं। डाइटरी फाइबर आपकी स्किन को मुलायम और चमकदार बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

फेस पैक

नाशपाती और दलिया

इसके रस के अर्क के साथ नाशपाती, दलिया और पानी मिलाएं और इसका पेस्ट बना लें। इसे अपने चेहरे पर 10 मिनट के लिए लगाएं और उसके बाद गुनगुने पानी से धो लें।

यह आपकी त्वचा को जवां बनाए रखने में मदद करेगा क्योंकि यह उम्र के साथ-साथ झुर्रियों को भी कम करता है।

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मॉइस्चराइजिंग इंग्रेडिएंट के साथ

एक नाशपाती को मैश करके उसमें ताजी मलाई और शहद मिलाएं और इस पेस्ट को हफ्ते में तीन बार फेस मास्क की तरह इस्तेमाल करें।

स्क्रब के रूप में

एक्सफोलिएशन के बेहतरीन सेशन के लिए आप अपने स्क्रब में नाशपाती को मैश भी कर सकते हैं।

अनोखा ‘रोबोट कैफे’ जहाँ इंसानों का नहीं, मशीनों का होगा राज!

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तकनीकी विकास के कारण हमारे जीवन में कई परिवर्तन हुए हैं। आज की दुनिया में लोग ज्यादातर कामों के लिए मशीनों पर निर्भर हैं। जिन कामों को करने में कई घंटे लग जाते थे, आज इंसान उन्हें मशीनों के जरिए मिनटों में पूरा कर लेते हैं और इसका पूरा श्रेय तकनीक को ही जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अब दुनिया में एक ऐसा रोबोट कैफे खुलने जा रहा है, जहां सुपरमॉडल की तरह दिखने वाला रोबोट खाना सर्व करेगा। आइए आपको बताते हैं कि कहां खुलेगा ये कैफे और यहां क्या होगा खास।

दुबई में खुलने जा रहा है ये कैफे

2023 में खुलने वाला यह कैफे दुनिया का पहला ऐसा कैफे होगा जो बिना इंसानों की मदद के पूरी तरह से चलाया जाएगा। दुबई का डोना साइबर-कैफे (Dona Cyber-Cafe) इसके लिए पूरी तरह तैयार है। ये कैफे 24 घंटे खुला रहेगा।

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ग्राहकों की सेवा के लिए सुपरमॉडल रोबोट को नियुक्त किया जाएगा। सुपरमॉडल रोबोट के अलावा, कई सेल्फ-सर्व आइसक्रीम मशीन और रोबोट आर्म्स द्वारा संचालित कॉफी मशीनें भी होंगी।

यह है खासियत

इस कैफे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बिना इंसानों के संचालित होगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक इस कैफे में काम करने वाले रोबोट के पुर्जे रूस से मंगवाए गए हैं और इनका निर्माण आरडीआई रोबोटिक्स कर रहा है।

आरडीआई रोबोटिक्स द्वारा बनाए गए इन रोबोट को रोबो-C2 नाम दिया गया है। इन रोबोट्स को महिलाओं की शक्ल के साथ-साथ उनके जैसे कई हावभावों और गुणों से लैस किया किया गया है।

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रिपोर्ट्स की मानें तो इस रोबोट का लुक ईस्टर्न यूरोपियन मॉडल Diana Gabdullina से प्रेरित है। ये रोबोट लोगों से बातचीत करने के साथ-साथ उनके नाम तक याद रख सकती है। रोबोट के पास कंपनी की भी जानकारी होगी।

ये लोगों को कहानियां सुना सकती है। यहां तक कि ये रोबोट कस्टमर्स के इमोशन भी डिटेक्ट कर सकती है। डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, नई रोबोट यूजर्स के साथ सेल्फी भी क्लिक कर सकती है।

इस तरीके से बड़ों के पैर छूने से मिलेगी उन्‍नति, आएंगी खुशियां

सनातन परंपरा में अपने से बड़े लोगों के पैर छूने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। हिंदू धर्म में कोई भी शुभ कार्य करने से पहले या दिन की शुरुआत करने से पहले माता-पिता गुरु या भगवान के चरण स्पर्श करते हैं।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि पैर छूने के कुछ सही नियम भी होते हैं, जिन्हें नजर अंदाज करना आपको शुभ फल की जगह अशुभ फल दे सकता है। पूजा के समय गुरु या किसी वरिष्ठ के पैर कैसे छुएं।

आइए जानते हैं पैर छूने के सही नियम और इससे जुड़े फायदों के बारे में।

देवी-देवताओं से भी जुड़ी परंपरा

पैर छूने की परंपरा आज से नहीं बल्कि देवी-देवताओं के समय से है। जब गुरु राजमहलों में आते थे तो राजा स्वयं उनके पैर छूकर आशीर्वाद लेते थे। ऐसा माना जाता है कि अपने प्रियजनों के प्रति आतिथ्य दिखाने के लिए उनके पैर छूए जाते हैं, न केवल पैर छूने से बल्कि पैर धोने से भी आशीर्वाद मिलता है।

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पैर छूना बहुत फायदेमंद होता है

आज के समय में किसी के पैर छूना सिर्फ सम्मान के भाव से देखा जाता है। लेकिन, इस परंपरा के पीछे कई ऐसे कारण हैं, जिनके पीछे मानव जाति का कल्याण निहित है।

ऐसा माना जाता है कि अपने से बड़े व्यक्ति के पैर छूने से उसकी सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह आशीर्वाद के रूप में हमारे भीतर प्रवाहित होता है। इससे हमें सुख-समृद्धि मिलती है।

पैर छूने के नियम

इसके अलग-अलग तरीके होते हैं। कुछ झुक जाते हैं या घुटनों के बल बैठ जाते हैं। जब आप किसी के पैर छूना चाहते हैं, तो आपको अपने दोनों हाथों से दोनों पैर स्पर्श करने चाहिए। इसी तरह सजदा करते समय सिर को दोनों हाथों के बीच में रखें और शरीर के ऊपरी हिस्से को झुकाकर पैरों को स्पर्श करें।

नौ ग्रहों का दोष होता है दूर

माना जाता है कि अपने से बड़े किसी के पैर छूने से नवग्रहों से जुड़े दोष भी दूर हो जाते हैं। इसके साथ ही दादी, नानी, बुआ आदि के पैर छूने से चंद्र दोष दूर होता है वहीं बड़े भाई के पैर छूने से मंगल दोष और ननद के पैर छूने से शुक्र मजबूत होता है।

सर्दियों में धूप में बैठने से दिमाग को मिलते हैं ये कमाल के फायदे

जहाँ गर्मी के मौसम में हर व्यक्ति धूप से बचना चाहता है वहीं सर्दी के मौसम में धूप के स्वास्थ्य के लिए अनेक लाभ हैं। जी हां, सर्दियों में रोजाना सिर्फ 10 मिनट धूप में बैठने से भी शरीर को पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी मिल सकती है। धूप सेंकने के कई मानसिक फायदे भी होते हैं। इस पोस्ट में हम जानेंगे धूप में बैठने से क्या-क्या मानसिक फायदे होते हैं चलिए जानते हैं:

सूर्य- अवसाद कम करता है

धूप में बैठने से शरीर को पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी मिलता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि विटामिन डी की कमी से दिमाग का विकास ठीक से नहीं हो पाता है और दूसरी तरफ डिप्रेशन की संभावना काफी बढ़ जाती है। लेकिन अगर आप रोजाना धूप में बैठते हैं तो आप डिप्रेशन को कम कर सकते हैं।

Sunlights-Benefits

सोचने की क्षमता बढ़ती है

सर्दियों में धूप लेने से दिमाग की कोशिकाएं सक्रिय रहती हैं और जिससे दिमाग स्वस्थ रहकर संतुलित तरीके से काम करता है। वहीं सोचने की क्षमता भी बढ़ती है। इसलिए अगर आप मानसिक रूप से स्वस्थ रहना चाहते हैं तो रोजाना धूप में जरूर बैठें।

Sunlights-Benefits

तनाव होता है कम

सर्दियों में सुबह 10 मिनट धूप लेने से शरीर से मेलाटोनिन हार्मोन रिलीज होता है, जिससे रात को गहरी और अच्छी नींद आती है। इतना ही नहीं सूरज की किरणें सेरोटोनिन को सोख लेती हैं जो मूड को खुशनुमा बनाने में मदद करता है।

हल्दी के ये उपाय करते हैं कई बाधाओं को दूर

हल्दी को बहुत शुभ माना जाता है। यह कई मायनों में जीवन में विशेष फल दिखाता है। आर्थिक संकट को दूर करने के लिए माना जाता है कि हल्दी का उपयोग करना बहुत अच्छा माना जाता है।

हल्दी के कई ज्योतिषीय उपचार हैं। वास्तु और ज्योतिष में हल्दी के कई महत्व बताए गए हैं। हल्दी के साथ, कई लाभकारी उपचार व् उपाय भी बताए जाते हैं।

हल्दी के इन उपायों के साथ जीवन की कई समस्याएं दूर हो सकती हैं। आर्थिक संकट को समाप्त करने के लिए, ज्योतिष में हल्दी के लिए कई उपायों का उल्लेख किया गया है जो विशेष है।

इस पोस्ट में हम जानेंगे हल्दी के कुछ ऐसे उपायों के बारे में जिससे आर्थिक तंगी दूर हो सकती है, तो चलिए शुरू करते हैं:

धन लाभ के उपाय

  • धनवान होना तो हर कोई चाहता है, मगर बहुत मेहतन करने के बाद भी अगर आप पर्याप्त धन अर्जित नहीं कर पा रहे हैं तो श्री गणेश भगवान को हल्दी की गांठ की माला अर्पित करें। आप यह काम बुधवार या बृहस्पतिवार किसी भी दिन कर सकते हैं।
  • हल्दी की गांठ को लाल कपड़े में बांध कर अपनी तिजोरी में रख लें और नियमित उसकी पूजा करें। ऐसा करने से देवी लक्ष्मी को प्रसन्न किया जा सकता है।
  • यदि आपको अटका हुआ धन प्राप्त करना है, तो हल्दी से चवलों को रंग कर उसे लाल कपड़े में बांध कर अपने पर्स में रख लें ऐसा करने से आपका अटका हुआ धन आपको जल्दी प्राप्त हो जाता है।
  • इसके अलावा, इससे नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश नहीं करती है। ज्योतिष के अनुसार, वित्तीय समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए, एक रुपये के सिक्के को पीले कपड़े में बांधने और इसे पूजा के स्थान पर रखने के लिए शुभ माना जाता है।

हल्दी के अन्य टोटके

यदि आप हल्दी की एक गांठ पर मौली बांध कर उसे अपने सिरहाने रख कर सोते हैं, तो आपको बुरे सपने आना बंद हो जाते हैं।

भगवान विष्णु और देवी लक्ष्‍मी की प्रतिमा में यदि आप रोज चुटकी भर हल्दी अर्पित करते हैं तो आपको मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त होता है।

यदि आप सूर्य देव को हल्दी मिश्रित जल अर्पित करती हैं, तो इससे कुंडली में सूर्य दोष का प्रभाव कम हो जाता है।

कठिन चुनौतियों के साथ मिलती है बड़ी सफलता, जानें कुछ प्रेरक वाक्य

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जीवन में जो भी चुनौतियां आएं, उसका डटकर सामना करना चाहिए। क्योंकि चुनौती जितनी बड़ी होगी व्यक्ति को उतनी ही बड़ी सफलता मिलेगी। इसलिए जीवन में संघर्ष से कभी नहीं घबराना चाहिए।

जीवन को अच्छे से जीने में संघर्ष की अहम भूमिका होती है। देखा जाए तो मनुष्य ही नहीं बल्कि पशु-पक्षी भी अपना जीवन व्यतीत करने के लिए संघर्ष करते हैं। पशु हो, पक्षी हों या मनुष्य, सभी संघर्ष करते हैं, फर्क सिर्फ इतना है कि सबका अपना-अपना तरीका होता है।

कुछ लोग संघर्ष करने से डरते हैं लेकिन बेहतर जीवन जीने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। आज के समय में किसी भी व्यक्ति ने जो मुकाम हासिल किया है, उसके पीछे उसका संघर्ष ही कारण है।

  • अगर इंसान को सफल इंसान बनना है तो उसे संघर्ष के दौरान कभी हार नहीं माननी चाहिए।
  • जिंदगी में कभी भी किसी चुनौती से भागना नहीं चाहिए, अगर आप भाग रहे हैं तो आपने खुद ही मुसीबत को न्यौता दे दिया है। और जहां सफलता है, वहां चुनौतियां भी होंगी।
  • आपके जीवन में जो भी समस्याएँ हैं, उसकी तुलना दूसरों की समस्याओं से कभी न करें। जैसे कोई व्यक्ति सफल होता जा रहा है, तो उसकी सफलता से निराश न हों। सफल होने के लिए व्यक्ति को अपना रास्ता खुद बनाना चाहिए।
  • कई बार ऐसा होता है कि हम सफलता की राह में आड़े आ जाते हैं, चुनौती देखकर हम रास्ता बदल लेते हैं। ऐसे व्यक्ति को जीवन में कभी सफलता नहीं मिलती। चुनौतियों का डट कर सामना करना चाहिए।