लाल चावल के स्वास्थ्य लाभ गिनते गिनते थक जायेंगे आप

हम में से बहुत से लोग ऐसे हैं जो चावल खाए बिना नहीं रह सकते। आजकल बाज़ार में कई तरह के चावल की किस्में मौजूद हैं और अब लोग सामान्य चावल की बजाय लाल चावल खाना ज्यादा पसंद करते हैं। इसका कारण यह है कि इन में ज्यादा फाइबर और पोषक तत्व होते हैं और यह सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है।

यह आपको वजन घटाने से लेकर दिल को स्‍वस्‍थ रखने और डायबिटीज रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। हालांकि अधिकतर लोग सफेद चावल खाते हैं, जबकि सफेद चावल के बजाए आप लाल चावल के कई स्‍वस्‍थ विकल्‍पों को अपना सकते हैं। आज हम आपको लाल चावल खाने के कुछ अद्भुत फायदे बताने जा रहे हैं।

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स्वास्थ्य लाभ

इन में प्रमुख पोषक तत्व एंथोसायनिन होता है, जो स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाला यौगिक है। यही तत्व इस चावल को एक समृद्ध लाल रंग देता है। इसमें रक्तचाप को कम करने, मधुमेह को रोकने, दृष्टि में सुधार करने और कैंसर कोशिकाओं को कम करने की क्षमता भी होती है।

इसके अलावा, इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुण भी होते हैं। इनमें फाइबर, विटामिन बी1 और बी2, कैल्शियम और आयरन से भी भरपूर होता है।

ब्लड ग्लूकोज को कम कर सकता है

मधुमेह में अनियंत्रित रक्त शर्करा का स्तर आंखों और गुर्दे को ख़राब कर सकता है और हृदय रोग भी पैदा कर सकता है। इन का कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स चीनी के स्तर को नियंत्रण में रखने में मदद करता है, जिससे यह मधुमेह रोगियों के लिए एक अच्छा विकल्प बन जाता है।

अस्थमा से लड़ने में मदद

लाल चावल का नियमित सेवन अस्थमा से लड़ने में मदद कर सकता है। क्‍योंकि लाल चावल में मैग्नीशियम की अच्‍छी मात्रा होती है और मैग्‍नीशियम की मात्रा शरीर के भीतर ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ाती है, यह समग्र श्वसन प्रणाली के लिए अच्छा है।

हड्डियों के लिए अच्छा है

इस में कैल्शियम और मैग्नीशियम होता है, जो हड्डियों के लिए आवश्यक पोषक तत्व हैं। यह गठिया, ऑस्टियोपोरोसिस और हड्डी से संबंधित अन्य बीमारियों को रोक सकती है।

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पाचन में सहायक

लाल चावल घुलनशील और अघुलनशील फाइबर का एक बड़ा स्रोत है, जिसका अर्थ है कि यह मल त्याग को आसान बनाता है और पाचन को बढ़ाता है। डायरिया और कब्ज दोनों से निपटने के लिए ये फाइबर फायदेमंद हो सकता है।

वजन घटाने में मदद है

लाल चावल खाने से लंबे समय तक भूख नहीं लगती और समय के साथ आपके पाचन स्वास्थ्य में सुधार होता है। यह वजन कम करने में सहायता करता है। इन में वसा की मात्रा शून्य होती है, यही कारण है कि यह भूख को कम करने में मदद करता है। यदि आप अपना वजन कम करना चाहते हैं तो यह लाल चावल को एक बेहतर विकल्प हो सकता है।

जानिए कैसे बनते हैं ‘पहाड़’?

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हमारी पृथ्वी की ऊपरी परत सात या आठ विशाल शिलाखंडों में बंटी हुई है। इन्हें टेक्टोनिक प्लेट भी कहा जाता है। ये प्लेटें धीरे-धीरे सरकती रहती हैं। जब ये प्लेटें एक-दूसरे से टकराती हैं तो पर्वत श्रृंखलाओं की उत्पत्ति होती है।

पर्वत को गिरि, अचल, शैल, धरणीधर, धराधर, नग, भूधर और महिधर भी कहा जाता है। आज आपको हम पोस्ट में पर्वतों के बारे में बताने जा रहे हैं कि आखिर कैसे बनते हैं पहाड़?

पहाड़ों का बनना एक लंबी भूवैज्ञानिक प्रक्रिया है और यह हमेशा पहाड़ों के अंदर होती रहती है। यह पृथ्वी के अंदर मौजूद क्रस्ट में तरह- तरह की हलचल होने के कारण होती है। पहाड़ टैक्टॉनिक या ज्वालामुखी से बनते हैं।

ये सारी चीजें मिलकर पहाड़ को 10,000 फुट तक ऊपर उठा देती हैं। उसके बाद नदियां, ग्लेशियर और मौसम इसे घटाकर कम कर देते हैं।

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भारत की प्रमुख पर्वत श्रृंखलाएं

कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक भारत में एक से एक शानदार पहाड़ हैं, पर्वत श्रृंखलाएं और सुंदर एवं मनोरम घाटियां हैं।

हिमालय, अरावली, सतपुड़ा, विंध्याचल, पश्चिमी घाट, पूर्वी घाट, नीलगिरि पर्वत, अनामलाई पर्वत, काडिमोम पहाड़ियां, गारो खासी पहाड़ियां, नागा पहाड़ियां आदि। कुछ प्रमुख पर्वतों में कंचनजंगा, नंदा देवी, काबरू आदि हैं।

पहाड़ हैं तो आबोहवा शुद्ध है

जहां वन होता है वहीं जीव होते हैं। इनके बिना पहाड़ अधूरा और कमजोर है। दूसरी ओर पहाड़ों के कारण ही नदियों का बहना जारी है। मानव एक ओर जहां पहाड़ काट रहा है वहीं नदियों पर बांध बनाकर उनके अस्तित्व को मिटाने पर तुला है तो दूसरी ओर अंधाधुंध तरीके से पेड़ काटे जा रहे हैं।

पहले किसी भी पहाड़ के उत्तर में गांव या शहर को बसाया जाता था ताकि दक्षिण से आने वाले तूफान और तेज हवाओं से शहर की रक्षा हो सके। इसके अलावा सूर्य का ताप सुबह 10 बजे से लेकर अपराह्न 4 बजे तक अधिक होता है।

इस दौरान सूर्य दक्षिण की ओर रहता है। पहाड़ से दक्षिण से आने वाली हानिकारक अल्ट्रावॉयलेट किरणों से सुरक्षा होती है। हिमालय की वादियों में रहने वालों को सांस सहित अनेक बीमारियां कम होती हैं।

चमत्कारिक पहाड़

देश-दुनिया में कई ऐसे चमत्कारिक पहाड़ हैं, जिनके बारे में कई तरह की किंवदंतियां प्रचलित हैं, जैसे भारत के लेह-लद्दाख में एक चुम्बकीय पहाड़ है जिसे मैग्नेटिक हिल भी कहा जाता है।

यह पहाड़ धातु को अपनी ओर खींचता है। इस पहाड़ के ऊपर से गुजरने वाले विमानों को अपेक्षाकृत अधिक ऊंचाई पर उड़ना होता है।

यहां पर अलग-अलग संरचनाओं और रंगों वाले पहाड़ भी हैं। मौसम से संबंध पर्वतों के कारण ही भारत में अच्छे तौर पर 6 ऋतुएं होती हैं, जो किसी अन्य देश में शायद ही देखने को मिलें। ये हैं – वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत और शिशिर।

प्रत्येक मौसम 2 माह का होता है, लेकिन अरावली और विंध्याचल पर्वत श्रृंखलाओं को काट देने के कारण भारत में अब मौसम परिवर्तन होने लगा है। इस परिवर्तन के कारण कृषि पर भी असर पड़ा है।

विकास के नाम पर काट दी गई कई शहरों की छोटी-मोटी पहाड़ियों से भी जलवायु परिवर्तित होने लगा है। पहाड़ है तो पानी है पहाड़ पर हरियाली बादलों को बरसने का न्यौता होती है। सभी प्रमुख नदियां पहाड़ों से ही निकलती हैं।

औषधियों का खजाना पहाड़

पहाड़ कई जड़ी-बूटियों और औषधियों का खजाना भी है। कई जड़ी- बूटियां पहाड़ों पर ही उगती हैं। आयुर्वेद की सबसे महान खोज च्यवनप्राश को माना जाता है, पर शायद ही कोई यह जानता होगा कि यह धोसी पहाड़ी की देन है जो हरियाणा और राजस्थान की सीमा पर स्थित है।

पंजाब केसरी से साभार

बेहद रहस्यमयी है हिमालय का ज्ञानगंज, जानिए क्यों ?

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हिमालय की ऊंची पहाड़ियों में बहुत से रहस्य छिपे हैं। रहस्यमयी इस हिमालय पर्वत में ज्ञानगंज नामक एक ऐसी जगह है जहाँ सिद्ध योगी और साधु रहते हैं। तिब्बती लोग इसे ही शम्भल की रहस्यमय भूमि के रूप में पूजते हैं। ऐसा माना जाता है कि ज्ञानगंज, तिब्बत क्षेत्र में कैलाश पर्वत के निकट स्थित है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस आश्रम का निर्माण विश्वकर्मा जी ने की है। इस जगह पर आज भी भगवान राम, श्रीकृष्ण, बुद्ध आदि शरीर रूप में उपस्थित हैं। इसके साथ ही इस आश्रम में महर्षि वशिष्ठ, विश्वामित्र, महायोगी गोरखनाथ, श्रीमद शंकराचार्य, भीष्म, कृपाचार्य, कणाद, पुलस्त्य, अत्रि आदि को भौतिक रूपों में देखा जा सकता है।

जबकि सैकड़ों ऋषिगण हजारों वर्षों से ध्यान करते देखे जा सकते हैं। इस स्थान के बारे में सर्वप्रथम स्वामी विशुद्धानंद परमहंस ने लोगों को जानकारी दी थी।

आज हम इस पोस्ट में आपको रहस्यमयी हिमालय में स्थित ज्ञानगंज से जुड़ी किंवदंतीयों के बारे में बताने जा रहें हैं, तो चलिए जानते हैं:

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ज्ञानगंज की किंवदंती

हिमालय की रहस्यमयी घाटियों के भीतर कहीं स्थित है ‘ज्ञानगंज’ जिसे अमरों की भूमि भी कहा जाता हैं। एक पौराणिक मान्यता के अनुसार ज्ञानगंज रहस्यमयी अमर प्राणियों द्वारा बसाया हुआ एक शहर है।

किसी भी बुरे कर्म से रहित महान संत ही मानसिक बाधाओं और आयामों से गुजरकर इस आध्यात्मिक भूमि में स्थान पा सकते हैं। इस पौराणिक साम्राज्य का सटीक स्थान अज्ञात है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि ज्ञानगंज कृत्रिम रूप से मनुष्यों से खुद को छुपाता है।

कुछ का यह भी मानना है कि ज्ञानगंज वास्तविकता के एक अलग तल में मौजूद है और इस प्रकार उपग्रहों द्वारा इसका पता नहीं लगाया जा सकता है।

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बौद्ध शम्बाला – बौद्ध धर्म में संदर्भ

ज्ञानगंज का उल्लेख केवल हिंदू पौराणिक कथाओं में ही नहीं बल्कि बौद्ध धर्म में भी मिलता है। इस किंवदंती की जड़ें तिब्बत में भी खोजी जा सकती हैं। तिब्बत में, इस खगोलीय साम्राज्य को ‘शाम्बाला’ के नाम से जाना जाता है, जो संस्कृत से लिया गया शब्द है, जिसका अर्थ है “खुशी का स्रोत”।

बौद्धों का मानना है कि शम्बाला दुनिया की गुप्त आध्यात्मिक शिक्षाओं की रक्षा करती है। इस पौराणिक भूमि तक पहुँचने के निर्देश कुछ पुराने बौद्ध शास्त्रों में दिए गए हैं, हालाँकि दिशाएँ अस्पष्ट हैं।

बौद्ध भी मानते हैं कि ज्ञानगंज मृत्यु के नियमों का उल्लंघन करता है। इस अमर भूमि में किसी की मृत्यु नहीं होती और चेतना हमेशा जीवित रहती है। इसे शम्भाला और शांगरी-ला के नाम से भी जाना जाता है।

ज्ञानगंज की अवधारणा

प्राचीन ग्रंथों और मान्यताओं के अनुसार, ज्ञानगंज आठ पंखुड़ियों वाले कमल की संरचना जैसा दिखता है। यह बर्फ से ढके पहाड़ों से घिरा हुआ है। जीवन का वृक्ष जो स्वर्ग, पृथ्वी और अधोलोक को जोड़ता है, इसके केंद्र में खड़ा है।

इसे एक झिलमिलाते  क्रिस्टल के रूप में वर्णित किया गया है। तिब्बती बौद्धों का मानना है कि दुनिया में एक महान अराजकता के समय में, इस आध्यात्मिक भूमि के 25वें शासक ग्रह को एक बेहतर युग में ले जाने के लिए प्रकट होंगे।

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जब ज्ञानगंज या शम्भाला का वर्णन करने के लिए कहा गया, तो दलाई लामा ने समझाया कि यह कोई भौतिक स्थान नहीं है जिसे लोग ढूंढ सकें। यह स्वर्ग नहीं बल्कि मानव क्षेत्र में एक शुद्ध भूमि है। इस भूमि पर जाने का एकमात्र तरीका कर्म संबंध है।

हिमालय के अमर प्राणियों द्वारा बसा यह शहर, और इसके निवासी प्रार्थना और ध्यान के माध्यम से दुनिया की नियति का सूक्ष्मता से मार्गदर्शन करते हैं। वे विश्व के आध्यात्मिक उपदेशों, सभी आस्थाओं और विश्वासों की रक्षा करते हुए मानव जाति की भलाई के लिए काम करते हैं।

एक आध्यात्मिक गुरु, गुरु साईं काका ने आध्यात्मिक और अमर शिक्षा प्राप्त करने के लिए कई बार ज्ञानगंज की अपनी यात्रा के बारे में दुनिया को बताया। उनके कथन के अनुसार, उनकी हर यात्रा के दौरान, एक ऋषि ने उन्हें ज्ञानगंज तक पहुँचाया और यह राज्य पूरी तरह से अलग तल या उच्च आयाम पर मौजूद है।

ज्ञानगंज के एक अन्य आगंतुक एल.पी. फैरेल हैं, जो एक अंग्रेज सेना अधिकारी थे, जिन्होंने 1942 में ज्ञानगंज का अनुभव करने का दावा किया था।

रघुनाथ मंदिर: जानिए जम्मू में स्थित इस खूबसूरत मंदिर के बारे रोचक तथ्य

रघुनाथ मंदिर जम्मू और कश्मीर के भारतीय केंद्र शासित प्रदेश में जम्मू में स्थित एक हिंदू मंदिर है। इसमें सात हिंदू मंदिरों का एक परिसर शामिल है। यह मंदिर न केवल हिंदू धर्म की आस्था की पहचान है बल्कि जम्मू की भी पहचान है।

यह मंदिर अपनी कलात्मकता का विशिष्ट उदाहरण है। रघुनाथ मंदिर भगवान राम को समर्पित है। यह मंदिर उत्तर भारत के प्रमुख और अनोखे मंदिरों में से एक है।

मंदिर का निर्माण पहले डोगरा शासक महाराजा गुलाब सिंह ने 1835 में करवाया था और बाद में उनके बेटे महाराजा रणबीर सिंह ने डोगरा शासन के दौरान 1860 में इसे पूरा करवाया।

मंदिर के मंदिरों के परिसर में कई देवता हैं, लेकिन पीठासीन देवता राम हैं – जिन्हें विष्णु के अवतार रघुनाथ के नाम से भी जाना जाता है। सभी सर्पिल आकार के टावरों में सोने की परत चढ़ी हुई है।

नवंबर 2002 में ऐतिहासिक रघुनाथ मंदिर पर आतंकी हमला भी हो चुका है। जिसके बाद इस मंदिर को कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया था। हमले के 11 साल बाद 2013 में मंदिर के कपाट एक बार फिर भक्तों के लिए खोल दिए गए।

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इस मंदिर में बाहर से पांच कलश हैं जो लंबाई में फैले हुए हैं। मंदिर में राम सीता लक्ष्मण की विशाल मूर्तियां हैं। इस मंदिर की खासियत यह है कि इसमें अलग-अलग कमरों में रामायण महाभारत काल के कई पात्रों की मूर्तियां हैं। गर्भगृह के चारों ओर प्रांगण में विशाल कक्ष हैं, जिनमें ये मूर्तियाँ हैं।

इसके अलावा चारों धाम एक कमरे में देखे जा सकते हैं। बीच में ऎसी व्यवस्था हैं कि चारों ओर से एक-एक धाम-रामेश्वरम, द्वारकाधीष, बद्रीनाथ, केदारनाथ के दर्शन किए जा सकते हैं।

एक कक्ष में बीच में भगवान सत्यनारायण के दर्शन किए जा सकते। इस कक्ष के बीचोबीच उकेरा गया सूर्य बहुत सुन्दर हैं। चारों ओर दीवारों पर बारहमासा दर्शनीय हैं, हर महीने चैत्र, वैशाख आदि के लिए उस माह के मुख्य देवता की मूर्ति हैं।

रघुनाथ मंदिर का निर्माण कैसे हुआ, इससे जुड़ा एक बड़ा ही रोचक किस्सा है। कहा जाता है कि इस मंदिर को बनाने की प्रेरणा महाराज गुलाब सिंह को श्री राम दास वैरागी से मिली थी। कहा जाता है कि रामदास वैरागी ने गुलाब सिंह के राजा बनने की भविष्यवाणी की थी। जो बाद में सच निकला।

रामदास वैरागी भगवान राम के भक्त थे। वह भगवान राम के आदर्शों का प्रचार करने के लिए अयोध्या से जम्मू आए थे। वह सिंबली में झोपड़ी बनाकर रहते थे। रामदास ने सिंबल में जम्मू क्षेत्र में पहला राम मंदिर बनाया। इस मंदिर का रामनवमी का त्यौहार दर्शनीय होता है।

जानिए 2009 में रिलीज हुई हॉलीवुड फिल्म “अवतार ” के बारे में रोचक तथ्य

2009 में रिलीज हुई फिल्म “अवतार” हॉलीवुड में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों से एक है, जिसका लेखन व निर्देशन जेम्स कैमरून द्वारा किया गया है और इसमें सैम वर्थिंगटन, ज़ोई साल्डाना, स्टीफन लैंग, मिशेल रोड्रिग्स, जोएल डेविड मूर, जिओवानी रिबिसी व सिगौरनी व्हिवर मुख्य भूमिकाओं में हैं।

इस पोस्ट में हम जानेंगे अवतार फिल्म से जुड़े कुछ रोचक तथ्य:

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साल 1999 में ही रिलीज करना चाहते थे मूवी

कैमरून ने टाइटैनिक बनाने के दौरान ही फिल्म अवतार की स्क्रिप्ट लिखी और टाइटैनिक रिलीज होने के बाद ही इस पर फिल्म बनाने की घोषणा कर दी थी। बताया जाता है कि जेम्स कैमरून ‘अवतार’ पर साल 1994 से ही काम कर रहे थे।

वो ‘टाइटैनिक’ मूवी के बाद साल 1999 में इसे रिलीज करने वाले थे, लेकिन वो जिस तरह का स्पेशल इफेक्ट्स चाहते थे, वो उस समय अवेलेबल नहीं थे। इस वजह से उन्हें इस फिल्म को कुछ समय के लिए टालना पड़ा था।

फिल्म का बजट

इस फिल्म के निर्माण में अधिकृत बजट $280 से $310 मिलियन था, और इसके प्रचार पर $150 मिलियन खर्च हुए।

फ़िल्म का चित्रीकरण बेहद नई व उत्तीर्ण मोशन कैप्चर तकनीक का उपयोग करके किया गया और इसे आम प्रिंट के साथ 3डी में भी रिलीज़ किया गया। इसका 4डी प्रिंट दक्षिण कोरिया के कुछ सिनेमाघरों में रिलीज़ किया गया।

अवतार का प्रीमियर लंदन में 10 दिसम्बर 2009 को हुआ एवं इसे 16 दिसम्बर को विश्वभर में और 18 दिसम्बर को अमेरिका व कनाडा में रिलीज़ किया गया।

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फ़िल्म ने रिलीज़ के पश्चात कई बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड्स तोड़ दिए और उत्तरी अमेरिका व विश्वभर की सर्वाधिक कमाई वाली फ़िल्म बन गई। अवतार ने 2009 में रिलीज के बाद 2.789 बिल‍ियन डॉलर यानी 22,246 करोड़ रुपये की कमाई की थी।

यह दुनिया की सबसे ज्‍यादा कमाई करने वाली फिल्‍म बनी। यह सिनेमा की दुनिया की पहली ऐसी फिल्‍म थी, जिसने 2 बिलियन डॉलर की कमाई के आंकड़े को छुआ था।

इस फिल्म को नौ एकेडेमी पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया जिनमें सर्वश्रेष्ठ पिक्चर और सर्वश्रेष्ठ निर्देशक शामिल हैं। जिसमें से इस फिल्‍म को बेस्‍ट आर्ट डायरेक्‍शन, बेस्‍ट सिनेमेटोग्राफी और बेस्‍ट विजुअल इफेक्‍ट्स का ऑस्‍कर अवॉर्ड मिला।

प्रत्येक व्यक्ति धारण नहीं कर सकता मोती रत्न, जानिए क्यों?

रत्नों के प्रयोग को एक अचूक और कारगर उपाय के रूप में किया जाता है। इनका कई तरह से इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन हमें कुछ रत्न कब पहनने चाहिए और कब नहीं, इस बात पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। इसमें मोती रत्न के प्रयोग और सावधानियों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है क्योंकि इस रत्न का संबंध चंद्रमा से होता है।

हर किसी को मोती नहीं पहनना चाहिए। कोई भी रत्न हमेशा किसी विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही धारण करें। वहीं अगर मोती की बात करें तो यह कुछ लोगों को फायदे की जगह नुकसान पहुंचा सकता है। हर पत्थर का संबंध किसी न किसी ग्रह से होता है।

रत्न शास्त्र में इसका विस्तार से वर्णन किया गया है। रत्नों को नियम-कानून के अनुसार ही विशेषज्ञों की सलाह के बाद ही धारण करना चाहिए, अन्यथा लाभ के स्थान पर हानि हो सकती है। मोती की बात करें तो इसका संबंध चंद्रमा से माना जाता है। इसे धारण करने से मन शांत होता है और क्रोध पर नियंत्रण रहता है।

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ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा मन का कारक है और इसका हमारे जीवन पर भी काफी प्रभाव पड़ता है। इसलिए इसे धारण करना हमेशा लाभकारी नहीं होता है। कुछ जातकों के लिए यह हानिकारक भी साबित हो सकता है।

शुक्र, बुध और शनि की युति चंद्रमा के साथ अनुकूलता की कमी का कारण बनती है। इसके साथ ही यदि मोती कुंडली में खराब भावों का स्वामी हो तो भी इसे धारण करना शुभ नहीं होता है।

मेष और कर्क राशि वालों के लिए मोती बहुत शुभ होता है। लेकिन जिन राशियों का संबंध चंद्रमा के स्वामी से कमजोर है तो यह स्थिति परेशानी देती है।

इसी वजह से जातकों को मोती धारण करने से सकारात्मक परिणाम नहीं मिलते हैं। इसके साथ ही अत्यधिक भावुक लोगों को भी मोती धारण करने से बचना चाहिए।

इन रत्नों के साथ न पहनें मोती

जिन लोगों को मोती धारण करने की सलाह दी गई है वे इस बात का ध्यान रखें कि उन्होंने नीलम, गोमेद और हीरा पहले से धारण नहीं किया है। इन रत्नों से मोती नकारात्मक फल देने लगता है।

यदि कुंडली में चंद्रमा छठे भाव, आठवें या 12वें भाव का स्वामी हो तो ऐसे लोगों को मोती नहीं पहनना चाहिए। इसके साथ ही शरीर में कफ, जल तत्व जैसी समस्या हो तो मोती धारण करने से बचना चाहिए। नहीं तो समस्या खत्म होने की बजाय बढ़ सकती है

अगर आप बालों के गिरने से हैं परेशान, तो जरूर अपनाएं ये घरेलु उपाय

बालों का झड़ना हम सभी के सामने एक बड़ी समस्या है। हम अपने बालों के लिए क्या कुछ नहीं करते, लेकिन कोई असर नहीं होता।

आजकल लोगों की जीवनशैली और खान-पान इतनी बुरी हो गई है कि इसका सीधा असर बालों पर पड़ता है। ऊपर से प्रदूषण और हेयर प्रोडक्ट के केमिकल के कारण भी बालों पर असर पड़ता है, जो बाद में बालों के झड़ने का कारण बन जाता है।

बालों के झड़ने के लिए आयुर्वेदिक उपचार एक लोकप्रिय विकल्प है क्योंकि इनमें प्राकृतिक तत्व होते हैं और प्राचीन काल से बालों के झड़ने के लिए एक प्रभावी उपचार रहा है।

इस पोस्ट में हम आपको कुछ ऐसे घरेलु उपाए बताने जा रहे हैं जिनसे आप बालों का झड़ना रोक सकते हैं:

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भृंगराज

भृंगराज का अर्थ है “जड़ी बूटियों का राजा।” अपने नाम के अनुरूप, यह न केवल बालों के विकास को बढ़ावा देने में मदद करता है बल्कि गंजेपन की समस्या को भी दूर करता है। इसके इस्तेमाल से गंजेपन की समस्या से बचा जा सकता है। यह आमतौर पर पाउडर और तेल के रूप में उपलब्ध होता है।

आंवला

आंवला न केवल बालों के झड़ने के लिए आयुर्वेदिक समाधान के रूप में प्रयोग किया जाता है बल्कि रक्त को शुद्ध करने और अपचन के इलाज के लिए भी एक प्रभावी उपाय है।

यह कंडीशनिंग घटक डैंड्रफ और स्कैल्प के अतिवृद्धि से मुकाबला करके स्कैल्प के स्वास्थ्य में सुधार करता है। जब शिकाकाई के साथ संयोजन में इसका उपयोग किया जाता है, तो यह एक प्राकृतिक डाई के रूप में कार्य करता है जो प्राकृतिक भूरा रंग प्रदान करता है।

नीम

नीम का उपयोग त्वचा की स्थिति और बालों के झड़ने के इलाज के लिए किया जाता है। स्कैल्प पर नीम के नियमित इस्तेमाल से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और जड़ें मजबूत होती हैं।

नीम का उपयोग रूसी और जुओं के इलाज के लिए भी किया जाता है। स्कैल्प के रूखेपन, पपड़ी बनना, डैंड्रफ, एग्जिमा, सोराइसिस और अत्यधिक सीबम से प्रभावित होने पर बालों की जड़ों को नुकसान से बचता है।

अश्वगंधा

अश्वगंधा या इंडियन विंटर चेरी बालों के विकास के लिए एक अद्भुत जड़ी बूटी है। यह बालों के झड़ने के लिए सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली आयुर्वेदिक दवाओं में से एक है।

हार्मोन कोर्टिसोल बालों के झड़ने का कारण बनता है और बालों के विकास को धीमा कर देता है। अश्वगंधा, जब खोपड़ी पर लगाया जाता है, कोर्टिसोल के स्तर को नियंत्रित करता है और बालों के झड़ने को रोकता है। यह एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि को भी बढ़ाता है और स्कैल्प सर्कुलेशन में मदद करता है।

जानिए नाखून का आकार आपके व्यक्तित्व के बारे में क्या बताता है

जब हम किसी के साथ बातचीत करते हैं, तो हमारी नज़र अक्सर सामने वाले की शारीरिक विशेषताओं जैसे कि आँख, कान, हाथ, पैर को जरूर जाती है। आपको जानकर हैरानी होगी लेकिन हमारे शरीर के अंग हमारे स्वभाव के बारे में भी बताते हैं। समुद्र शास्त्र के अनुसार किसी व्यक्ति के नाखून देखकर भी उसके स्वभाव के बारे में बहुत कुछ जाना जा सकता है।

आज हम आपको इस पोस्ट में नाखून की शेप के अनुसार व्यक्ति के स्वभाव के बारे में बताएंगे, तो चलिए शुरू करते हैं

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लंबे नाखून

यदि आपके नाखून लंबे हैं, तो आप अत्यधिक रचनात्मक, कल्पनाशील और सावधानीपूर्वक हैं। आप शांत, स्वतंत्र और व्यावहारिक होते हैं। आप उन स्थितियों में भी तर्कसंगत कार्य कर सकते हैं जिनमें आपको तार्किक होने की आवश्यकता होती है।

आप आमतौर पर नरम स्वभाव के होते हैं लेकिन कभी-कभी आप अभिभूत हो जाते हैं जिससे या तो आप चुप हो जाते हैं या अपना आपा खो देते हैं।

चौड़े नाखून

यदि आपके नाखून चौड़े हैं, तो आप प्रत्यक्ष, खुले विचारों वाले और अभिव्यंजक हैं। आप जिम्मेदार होने के साथ साथ भरोसेमंद भी होते हैं। आप हमेशा ध्यान रखते हैं कि आपके शब्दों और कार्यों का दूसरों पर प्रभाव पड़ सकता है।

ऐसे व्यक्ति विश्लेषणात्मक और चरित्र के अच्छे निर्णायक होते हैं। कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी आपकी खुद पर बहुत अच्छी पकड़ रहती है।

गोल/अंडाकार नाखून

यदि आपके गोल / अंडाकार नाखून हैं, तो आप रचनात्मक, सकारात्मक, खुले विचारों वाले और खुशमिजाज व्यक्ति हैं। आप जल्दी सीखने वाले हैं। आपके पास असाधारण सामाजिक कौशल हैं।

आप लोकप्रिय होना और पहचाना जाना पसंद करते हैं इसलिए कभी-कभी आप दूसरों को खुश करने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। आप हर तरह के लोगों के साथ आसानी से घुलमिल जाते हैं।

वर्गाकार आकार के नाखून

यदि आपके नाखून वर्गाकार हैं, तो आप तेज़ दिमाग वाले और बहादुर होते हैं। हालांकि चीजों के प्रति आपके गंभीर रवैये के कारण आप अनम्य लग सकते हैं। जब आपके काम और लक्ष्यों की बात आती है तो आप एक दृढ़निश्चयी और उद्देश्यपूर्ण व्यक्ति होते हैं।

आप बहुत मिलनसार और बात करने में मज़ेदार हो सकते हैं, लेकिन आपका यह पक्ष केवल उन लोगों के लिए जाना जाता है जिन्होंने आपके साथ घनिष्ठ संबंध स्थापित किया है। आप स्वतंत्र रूप से घूमना पसंद करते हैं।

बादाम के आकार के नाखून

यदि आपके बादाम के आकार के नाखून हैं, तो आप एक विश्वसनीय, ईमानदार, कल्पनाशील और भावनात्मक रूप से संवेदनशील व्यक्ति हैं। आप लोगों के प्रति दयालु और ईमानदार रहना पसंद करते हैं।

आप अच्छे व्यवहार वाले और विनम्र व्यक्ति होते हैं। आप साधन संपन्न और दूसरों की मदद करना पसंद करते हैं। आप चीजों को लेकर भावुक हो सकते हैं।

आप शायद ही कभी अपना आपा खोते हैं, लेकिन जब आप अन्याय, क्रूरता, या ऐसी चीजें देखते हैं जिन्हें आप स्वीकार नहीं कर सकते हैं तो बहुत जल्दी भड़क जाते हैं।

अजीबोगरीब परम्परा : यहां मौत के बाद शव को ‘घरों में रखते हैं सालों-साल’

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दुनिया में कई ऐसी जनजातियां हैं, जिनके बारे में लोग आज भी अनजान हैं। वे अपने पुराने समय के रीति-रिवाजों और अजीबोगरीब परम्परा का पालन करते आए हैं और अपनी मान्यताओं के अनुसार ही जीवन व्यतीत करते हैं। इंडोनेशिया में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिलता है।

मौत होने पर शव को रखते हैं साथ

इंडोनेशिया के तोराजन समाज में परम्परा है कि परिवार के सदस्य की मौत हो जाने पर न तो उसका अंतिम संस्कार करते हैं और न ही शव को दफनाते हैं, उन्हें अपने साथ ही रखते हैं। वे मृत्यु को भी अपने जीवन का एक अहम हिस्सा मानते हैं। इतना ही नहीं, परिवार के मृत सदस्य के साथ ही जीवन बिताते हैं।

बीमार समझते हैं, न कि शव

इस परम्परा में वे हमारे जैसी लाइफस्टाइल के बिल्कुल विपरीत जीवन जीते हैं। इंडोनेशिया में सुलावेसी के पहाड़ों में रहने वाले तोराजन समाज के लोग मृत सदस्यों के साथ ऐसा व्यवहार करते हैं, जैसे वे बीमार हैं, न कि शव ।

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उनकी त्वचा और मांस को सड़ने से बचाने के लिए फॉर्मेल्डिहाइड और पानी की एक परत लगाई जाती है। बदबू फिर भी तेज होती है, इसलिए परिवार गंध दबाने के लिए कुछ खास सूखे पौधों को शरीर के पास रख देते हैं।

रोज दोपहर के खाने के लिए करते हैं आमंत्रित

परंपरागत रूप से इस समाज के लोग मृत सदस्य को रोजाना दोपहर के खाने के लिए आमंत्रित करते हैं। ऐसा वे तब तक करते हैं, जब तक कि शवों को आखिरकार दफना न दिया जाए। सूत्रों के अनुसार, परिवार अपने मृत सदस्य के शव को सालों-साल तक अपने घरों में रखते हैं।

घर के अलग कमरे में रखते हैं लोग

हर दिन मृतक को खाना खिलाने और उसके साथ समय बिताने के लिए शव को एक अलग कमरे में बिस्तर पर रखा जाता है। यह तब तक किया जाता है जब तक कि परिवार मृत सदस्य का उचित अंतिम संस्कार नहीं कर देता ।

दफनाने के बाद रखते हैं ऐसा ख्याल

हालांकि, जब अंतिम संस्कार करने का वक्त आता है तो शव को कब्र में दफनाया जाता है। दफनाने के बाद भी शव की नियमित देखभाल की जाती है और साफ-सफाई का ध्यान रखा जाता है। मेनने (पूर्वजों की देखभाल) नामक एक परम्परा के अनुसार उन्हें नए कपड़े दिए जाते हैं।

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ताबूत में उपहार रखने की परम्परा

तोराजन परम्परा में ताबूत में गिफ्ट रखने की प्रथा है- उनकी मनपसंद चीजें जैसे उनकी बनाई विशेष मूर्ति, मोबाइल, पर्स, कंगन और घड़ी आदि। कुछ लोग अपने प्रियजनों के साथ हीरा व अन्य महंगी चीज़ें भी रख देते हैं। कई बार इस कारण डकैती भी हो जाती है। कुछ तोराजन मृतकों के साथ रखने वाले अपने उपहारों को गुप्त रखते हैं।

पंजाब केसरी से साभार

ये हैं दुनिया की सबसे महंगी खाने की चीजें, जिन्हें केवल अमीर लोग ही खरीद सकते हैं

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दुनियाभर में कई तरह की खाने पीने की चीज़ें मिलती हैं जिनकी कीमतें सामान्य होती हैं और आम आदमी आसानी से खरीद सकता है लेकिन आज हम आपको दुनिया की उन चीजों के बारे में बताएंगे, जिनकी कीमत आपके होश उड़ा देगी।

हालांकि इन महंगी चीजों को दुनिया में कुछ ही लोग खाते हैं। क्योंकि आम आदमी इन्हें खाने की तो बात ही छोड़िए इन्हें छूने की सोच भी नहीं सकता। तो चलिए जानते हैं :

काले तरबूज

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काला तरबूज दुनिया के सबसे महंगे खाद्य पदार्थों में से एक है। यह फल जापान में उगाया जाता है। इसे ब्लैक वॉटरमेलन और डेनसुक वॉटरमेलन के नाम से भी जाना जाता है। इसके महंगे होने का कारण यह है कि इसकी पैदावार बेहद कम होती है। इसलिए इसे दुर्लभ तरबूज भी कहा जाता है।

एक साल में करीब 100 काले तरबूज की पैदावार होती है। हालांकि, कई मायनों में यह दूसरे तरबूज से अलग भी होता है। जैसे- स्‍वाद, बाहरी हिस्‍सा और बीजों के मामले में यह अलग होता है।

अगर आप इनकी कीमत के बारे में सुनेंगे तो शायद आप सामान्य तरबूज भी खाने से पहले सोचेंगे। आपको बता दें कि करीब 7.71 किलो वाले एक तरबूज की कीमत 4 लाख रुपये है।

सफेद कावियर

सफेद कावियर दुनिया के कुछ सबसे महंगे खाने वाली चीजों में आती है। दरअसल, कावियर मछली के अंडे होते हैं। यह इतने लोकप्रिय हैं कि इसे देखते ही इसके शौकीनों के मुंह में पानी आ जाता है।

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ये कावियर लंदन में केवल केवियर हाउस एंड प्रुनियर नाम के स्टोर पर ही मिलते हैं। सफेद कैवियार लगभग $34,500 (₹25 लाख) प्रति किलोग्राम के हिसाब से बेचा जाता है।

मात्सुटेक मशरूम 

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मात्सुकी मशरूम मशरूम की एक दुर्लभ किस्म है, कहा जाता है कि इसका स्वाद मीठा होने के साथ-साथ तीखा भी होता है। इसकी उच्च लागत का कारण यह है कि इस मशरूम को उगाना कोई आसान काम नहीं है और यह हर जगह नहीं उगता है। मत्सुटेक मशरूम साल में सिर्फ एक बार ही उगता है। इसकी कीमत की बात करें तो यह 43,985 रुपये प्रति किलोग्राम है।

कोपी लुवाक कॉफी

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कोपी लुवाक को दुनिया की सबसे महंगी कॉफी कहा जाता है। कहा जाता है कि इस कॉफी का स्वाद लेने के लिए दुनिया भर से लोग इंडोनेशिया आते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि कोपी लुवाक का एक बैग 700 डॉलर प्रति किलोग्राम तक बिकता है।