जानिए ‘अंकों’ से जुड़े कुछ अंधविश्वास

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यह वाकई बड़ी अजीब बात है कि अंकों के साथ कितने वहम जोड़े जाते हैं। उदाहरण के लिए हर तीन का अंक मनहूस माना जाता है इसलिए तीन आदमी मिल कर कोई काम आरंभ नहीं करते, या तो वे दो होते हैं या चार।

हालांकि, तीन का अंक इतना मनहूस या बेकार नहीं। हिन्दू त्रिमूर्ति में तीन बड़े देवता ब्रह्मा, विष्णु और महेश जबकि ईसाइयों की त्रिमूर्ति परमात्मा, परमात्मा का बेटा और होली घोस्ट पर आधारित है। शंकर भगवान के तीन नेत्र हैं। उनमें से तीसरा नेत्र जो माथे में है, जब खुलता है तो प्रलय आ जाती है।

इस पोस्ट में हम आपको बताने जा रहे हैं अंकों’ से जुड़े कुछ अंधविश्वास के बारे में

यूरोप में तेरह का अंक अत्यंत अशुभ समझा जाता है। कहते हैं इस वहम की शुरूआत इस प्रकार हुई थी कि यीशू मसीह ने सलीब पर लटकाए जाने से पहले अपने बारह शिष्यों के साथ अंतिम खाना खाया था। उसके बाद उनके एक शिष्य, जिसके नाम के तेरह अक्षर थे, ने उन्हें धोखा देकर शत्रुओं के हवाले कर दिया था। उस दिन से तेरह का अंक अत्यंत मनहूस समझा गया।

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कोई व्यक्ति होटल के कमरा नम्बर तेरह में ठहरना पसंद नहीं करता, बल्कि बहुत से होटलों में तेरह नम्बर कमरा ही नहीं होता। इसी प्रकार कोई बीमार नहीं चाहता कि उसे किसी अस्पताल में तेरह नम्बर के कमरे में रखा जाए। उसका ख्याल होता है कि उसकी वहां अवश्य मौत हो जाएगी।

महीने की तेरह तारीख को कोई नया काम आरंभ नहीं किया जाता क्योंकि यह समझ लिया जाता है कि उसमें सफलता प्राप्त नहीं होगी। कोई व्यक्ति तेरह तारीख को विवाह नहीं करना चाहता।

काबूजियर‘, जिन्होंने चंडीगढ़ शहर की योजना तैयार की थी, उन्होंने किसी सैक्टर का नाम तेरह नहीं रखा था।

1971 में एक अंतर्राष्ट्रीय अभियान माऊंट एवरेस्ट को जीतने के लिए चलाया गया। उसमें तेरह देशों के नागरिक शामिल हुए, मगर वे अपने मिशन में बुरी तरह असफल रहे।

हैरानी की बात यह है कि विज्ञान के आश्चर्यजनक विकास के बावजूद अभी तक लोग वहमों से मुक्ति नहीं पा सके।

इसके अलावा सात का अंक जादू के साथ जोड़ा जाता है। मंत्र को सात बार पढ़कर किसी चीज की सफलता के लिए प्रार्थना की जाती है। पुराने समय में जो राजा हुआ करता था, उसकी सदा सात रानियां हुआ करती थीं। जब ‘परिवार कल्याण’ अस्तित्व में नहीं आया था, सात बच्चों को बड़ा भाग्यशाली समझा जाता था।

पंजाब केसरी से साभार