जानिए मछलियों के अनोखे संसार के बारे में!!

मछलियों का संसार बड़ा विचित्र और रोमांचक होता है। इन्हें जल की रानी या जलपरी भी कहा गया है। पानी में ही जन्म लेने, पलने और विचरण करने वाली इन मछलियों की अनन्त किस्में हैं।

आज इस पोस्ट में हम बात करने जा रहे हैं मछलियों के अनोखे संसार के बारे में, तो चलिए जानते हैं :-

अनेक प्रकार की मछलियां

प्रत्येक वर्ष मछलियों की 200 या 300 नई प्रजातियों की खोज होती है और उनके नाम रखे भी जाते हैं। यह मछलियां विभिन्न प्रकार की होती हैं। इनमें से कुछ मछलियां बहुत छोटी हैं तो वहीं कुछ बहुत बड़ी ।

मछलियों का सुरक्षा कवच

इनके शरीर पर स्केल्स होते हैं, जो एक परत बनाते हैं और इनके लिए सुरक्षा कवच का काम करते हैं। यह मछलियों के लाइफस्टाइल के अनुसार बनते हैं।

उदाहरण के लिए जो मछलियां तटीय स्थानों पर रहती हैं, उनके शरीर पर यह सख्त होता है। जो गहरे पानी में रहती हैं, उनका इतना सख्त कवच नहीं होता। इन स्केल्स पर म्यूकस का कवर भी होता है, जो इनकी त्वचा को चिकनी और सुरक्षित करता है ।

कितना लंबा जीवन

कुछ मछलियों का जीवन बस कुछ हफ्तों का होता है, जबकि कुछ मछलियां 50 साल तक जीती हैं।

कैसे सांस लेती हैं मछलियां

सभी को जीवित रहने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत होती है। मछलियों के पास विशेष अंग (गिल्स) होते हैं जो उनके सिर के दोनों ओर पाए जाते हैं।

वे पानी के अंदर सांस लेने के लिए मुंह को खोलती हैं और गिल्स की तरफ पंप कर देती हैं। इसके बाद यह ग्रुप में उपस्थित मैब्रेन की मदद से पानी में मौजूद ऑक्सीजन को सोख लेती हैं।

इसके बाद गिल्स खुलने से ये पानी बाहर आ जाता है। कुछ मछलियां सांस लेने के लिए बार-बार पानी की सतह पर आती हैं ।

कैसे करती हैं मछलियां आपस में बातचीत

पहले समझा जाता था कि मछलियां बोलना नहीं जानतीं, फिर जब पानी के अंदर आवाज सुनने वाली मशीन का आविष्कार हुआ तब पता चला कि ये कितनी गिटर- पिटर करती हैं।

क्रोकर नामक मछली बिल्कुल कछुए की भांति आवाज निकालती है। कुछ तो विस्फोट जैसी आवाज निकालती हैं। ऐसी आवाज तब निकलती है, जब वे मछुआरे के जाल में फंस जाती हैं।

होता यह है कि उनके पास एक छोटा-सा ‘स्विम ब्लैडर’ होता है। जिसमें गैस भरी होती है ताकि वे आसानी से तैर सकें। और आराम करने के समय वे इस ब्लैडर के आकार को अपने अनुरूप ढाल लेती हैं लेकिन जब वे अचानक मछुआरे के जाल में फंसती हैं, तब उनके पास इतना समय नहीं होता कि वे उस गैस को बाहर कर दें।

जैसे ही वह पानी के बाहर आती हैं, उनका ब्लैडर फट जाता है और विस्फोट-सी आवाज होती है।

रोचक बातें

जैलीफिश, स्टारफिश और ऑक्टोपस मछलियां नहीं हैं। ये इनवर्टिब्रेट्स हैं, यानी इनके पास रीड की हड्डी नहीं होती और न ही ये मछली की प्रजाति में आती हैं।

पंजाब केसरी से साभार……।

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क्यों जलाई जाती है ओलम्पिक खेलों में मशाल, जाने इसका इतिहास और महत्व

भगवान के नाम पर दीया जलाकर या किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत करने की प्रथा न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर के कई देशों में देखी जा सकती है। इसी तरह की प्रथा ओलम्पिक खेलों से पहले मशाल जलाने की है।

आज इस पोस्ट में हम जानेंगे कि क्यों ओलम्पिक खेलों में मशाल जलाई जाती हैं और क्या है इसका महत्व। तो चलिए जाने हैं :-

ओलम्पिक मशाल का इतिहास

ओलम्पिक खेलों की शुरुआत 1896 में ग्रीस यानी यूनान की राजधानी एथेंस में हुई थी। हालाँकि, उस समय मशाल जलाने की प्रथा प्रचलित नहीं थी। मशाल जलाने की प्रथा 1936 में ग्रीक शहर ओलंपिया में शुरू हुई थी।

मान्य़ताओं के अनुसार यूनान के लोग आग को बहुत पवित्र मानते थे और अपने मंदिरों में निरंतर आग जलाकर रखते थे। यही कारण है कि ग्रीस में पूजे जाने वाली देवी हेस्टिया, देवता जूयस और हेरा के टेम्पलस में भी निरंतर आग जलती रहती है। ओलम्पिक में भी ये प्रथा इसी धारणा को लेकर शुरु हुई थी कि आग से खेल की पवित्रता बनी रहेगी।

ओलम्पिक मशाल जलाने की शुरुआत भगवान हेरा के मंदिर से की गई थी। उस समय ओलंपिक की मशाल में आग सूर्य की किरणों के जरिए लगाई जाती थी।

ऐसा इसलिए क्योंकि सूर्य कि किरणों को काफी पवित्र माना जाता था। जिस साल (1936) ओलंपिया शहर से ओलम्पिक मशाल जलाने की शुरुआत हुई थी उस साल ओलम्पिक खेलों की मेजबानी बर्लिन ने की थी।

इसके बाद साल 1952 में ओस्लो ओलम्पिक के दौरान पहली बार ओलम्पिक मशाल को हवाई यात्रा के जरिए ले जाया गया था।

हालांकि उस समय तक दुनियाभर में संचार के साधन उतने विकसित नहीं थे जिस वजह से कभी ओलम्पिक का टेलीविजन पर प्रसारण नहीं हुआ करता था।

लेकिन साल 1960 तक दुनियाभर में संचार क्रांति आ चुकी थी। जिस वजह से रोम ओलम्पिक की मशाल यात्रा का टीवी पर प्रसारण किया गया।

ओलम्पिक मशाल को समुद्र के रास्ते से पहली बार 1968 के मैक्सिको ओलम्पिक में ले जाया गया था। इसके अलावा ओलम्पिक की मशाल को सिडनी ओलम्पिक के दौरान साल 2000 में रेगिस्तान के रास्तों से ले जाते समय ऊटों और घोड़ो पर भी ले जाया जा चुका है। सभी देशों की यात्रा करते हुए मशाल को मेजबान देश तक पहुंचाने की प्रथा आज भी ओलंपिक में होती है।

ओलंपिक मशाल का महत्व

  • मशाल को विश्व ओलम्पिक में ‘ओलम्पिक आंदोलन’ का प्रतीक माना जाता है। यह प्राचीन और आधुनिक खेलों के बीच निरंतरता का भी प्रतीक है।
  • ओलम्पिक में भाग लेने वाले देशों में शांति का संदेश फैलाने के लिए मशाल जलाई जाती है।
  • प्रारंभ में पैराबोलिक कांच की मदद से सूर्य की रोशनी से ओलंपिक मशाल जलाई जाती थी।
  • प्रत्येक ओलम्पिक के लिए एक नई मशाल बनाई जाती है। हालांकि, इसके मूल डिजाइन में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
  • मशाल रिले ओलंपिक लौ को ओलंपिया से मेजबान शहर तक ले जाती है।
  • ओलम्पिक से कई महीने पहले रिले शुरू हो जाती है। यह विभिन्न शहरों और देशों के माध्यम से मशाल ले जाने का समय देता है।
  • यदि मशाल को हवाई जहाज से ले जाना हो तो उसे विशेष सुरक्षा लैम्प में रखा जाता है।
  • मशाल को पूरे सुरक्षा तंत्र में आगे बढ़ाया जाता है। इसके लिए रिले रूट पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था होती है।
  • जिस स्टेडियम में ओलम्पिक का उद्घाटन समारोह होता है वह मशाल रिले का अंतिम चरण होता है। किसी सेलिब्रिटी, राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी द्वारा बड़े कड़ाही के आकार के बर्तन में आग जलाई जाती है। तभी खेल शुरू होता है।
  • ओलंपिक के बाद मशाल बुझा दी जाती है। यानी प्रतियोगिता के अंत की आधिकारिक घोषणा कर दी जाती है।

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फूलों और पेड़ों से ढ़की हैं, ये खूबसूरत रंग-बिरंगी सुरंगे!!

सुरंगे शहरों को आपस में जोड़ती है। सड़कों की तंगी के कारण ही सुरंगो का निर्माण किया जाता है, लेकिन कुछ जगह ऐसी होती है जिनको खुबसूरत दिखाने के लिए भी सुरंगो का निर्माण किया जाता है।

आज हम आपको कुछ ऐसी सुरंगो के बारे में बताने जा रहे हैं जिनको देखकर आप हैरत में पड़ जाएंगे क्योंकि ये सुरंगे फूलों पेड़ो से बनायीं गई। जो बेहद खुबसूरत है। तो चलिए जानते हैं :-

Tunnel of love, Ukraine (टनल ऑफ लव, यूक्रेन)

दुनिया की सबसे बड़ी हरी-भरी सुरंग यूक्रेन के क्लेवेन में स्थित है। यूक्रेन में स्थित ‘टनल ऑफ लव’ के नाम से मशहूर यह सुरंग करीब 1.8 मील लंबी है।

इस सुरंग के अंदर कई खूबसूरत बेल, पेड़, पौधे और झाड़ियां मौजूद हैं जिस कारण प्रकृति की सुंदरता इस सुरंग में आसानी से देखी जा सकती है।

हम आपको बता दें कि यह एक रेलवे सुरंग है जिसके अंदर से ट्रेन भी गुजरती थी, हालांकि वर्तमान में रेलवे इस ट्रैक का उपयोग नहीं करता है।

वैसे तो ये एक रेलवे ट्रैक है लेकिन प्रेमी जोड़े अक्सर यहाँ घूमने आते रहते हैं, जिसकी वजह से इस सुरंग का नाम ” टनल ऑफ़ लव ” पड़ा है।

Jacarandas walk (जोहान्सबर्ग, दक्षिण अफ्रीका)

पेड़-पौधों से बनी हुई इस सुरंग का नाम जकरंदस वाक है। इसके किनारे लगे हुए जकरंदस के पेड़ों की वजह से इसका नाम जकरंदस वाक पड़ा।

इसे दुनिया का सबसे बड़ा मानव निर्मित जंगल भी माना जाता है। इस सड़क के किनारे जकरंदस के पेड़ों की लगभग 40 से ज्यादा प्रजाति मौजूद हैं।

Cypress Tunnel, California (साइप्रस सुरंग, कैलिफ़ोर्निया)

साइप्रस सुरंग कैलिफ़ोर्निया में प्वाइंट रेयस में स्थित है और अमेरिका में सबसे सुंदर प्रकृति की रचनाओं में से एक है। पेड़ों से बनी इस प्राकृतिक सुंगर में से सड़क गुजरती है, जिसमें से गुजरना किसी रोमांच से कम नहीं है।

cherry blossom Tunnel, Japan (चेरी ब्लॉसम टनल, जापान)

यह खूबसूरत सुरंग ‘cherry blossom’ पिंक और व्हाइट रंगों के फूलों से बनी हुई हैं। यह सुरंग बहुत ही सुन्दर और मनमोहक है।

आपको बता दें कि साल के कुछ महीनों में जब इन पेड़ों पर गुलाबी फूल खिलते है तो ये और भी मनमोहक हो जाती है।

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कहानियों की ये किताबें हैं बच्चों के लिए बहुत फायदेमंद!!

कहानियाँ सुनना किसे अच्छी नहीं लगता? पिछले दशक तक हम अक्सर घरों में दादी-नानी द्वारा कहानियाँ सुने जाने के क़िस्से सुना करते थे। हालाँकि यह प्रचलन अब लगभग विलुप्त हो गया है।

आज के दौर में बच्चों का अधिकतर समय मोबाइल पर बीत रहा है जो उनकी मानसिक और शारीरिक सेहत के लिए बिलकुल भी ठीक नहीं है। बच्चों में इस आदत को दूर करने का सबसे आसान तरीक़ा उनमें पढ़ने की आदत को विकसित करना है।

बच्चों का मानसिक विकास कहानियां, चित्रकथाएं, पढ़ने और पहेलियां सुलझाने के साथ ही माता-पिता और शिक्षकों से बेझिझक बातचीत करने से बढ़ता है।

आज इस पोस्ट में हम कुछ ऐसी ही कहानियों की किताबों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें बच्चों को पढ़ने या सुनाने से उनमें हर तरह का ज्ञान और जानकारी का विकास होता है।

तो चलिए जानते हैं ;-

अकबर-बीरबल

जब भी बुद्धिमत्ता, चतुराई की बात होती है, तो सबसे पहला नाम बीरबल का आता है। वहीं, अकबर-बीरबल की जुगलबंदी किसी से छुपी नहीं है।

ऐसा कहा भी जाता है कि बीरबल को बादशाह अकबर के नवरत्नों में से एक अनमोल रत्न माना जाता था। अकबर-बीरबल से जुड़ी ऐसी कई कहानियां हैं, जो हर किसी को गुदगुदाती हैं।

साथ ही एक खास सीख भी दे जाती हैं। अकबर-बीरबल की कहानियां हमेशा से सभी के लिए प्रेरणादायक रही हैं। बीरबल ने अपनी चतुराई और बुद्धिमता से कई बार बादशाह अकबर के दरबार में आए मुश्किल मामलों को सुलझाया।

अलिफ लैला

अलिफ लैला अरब देशों की कहानियों का एक ऐसा संग्रह है, जिसमें प्रेम, धोखा, ग़म, ख़ुशी, सुख-दुख और वास्तविकता का अद्भुत समन्वय मिलता है।

ये शब्द अरबी भाषा के ‘अलफ लैला’ से लिया गया है, जिसका अर्थ होता है – एक हजार रातें। अलिफ लैला की कहानियां बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के बीच लोकप्रिय हैं।

इसी में अलीफ लैला सिंदबाद की कहानियां भी शामिल हैं। एक जमाने में तो इसकी कहानियां बच्चों के मनोरंजन का प्रमुख साधन हुआ करती थीं। ये कहानियां न सिर्फ उनका मनोरंजन करेंगी, बल्कि उनका बौद्धिक विकास और तार्किक शक्ति को भी सुदृढ़ करेंगी।

पंचतंत्र

पंचतंत्र की कहानियां भारतीय इतिहास की सबसे पुरानी कहानियों में से एक हैं। ये कहानियां पांच भागों में लिखी जाती हैं। जिन्हें जानवर के पात्रों से बयां किया जाता है।

ये कहानियां बेहद आम विषयों पर लिखी जाती हैं। आपने भी नानी और दादी से ऐसी कई कहानियां बचपन में सुनी होंगी।

तेनाली रामा

भारत में ऐसे कई महान ज्ञानी हुए हैं, जिनकी बुद्धिमत्ता का लोहा हर किसी ने माना है। उनके व्यक्तित्व व चतुराई से जुड़े किस्से हर किसी को प्रभावित व रोमांचित करते हैं।

तेनालीरामा की बुद्धिमानी से भला कौन परिचित नहीं है। तेनाली रामा की जीवनी विजयनगर नगर से ही शुरू होती है। जहां वह महाराज कृष्णदेव राय के सबसे प्रिय मंत्री हुआ करते थे।

वह उन्हें हर उलझन से निकालने में मदद करते थे। तेनाली रामा के किस्से तब भी प्रसिद्ध थे और आज भी हैं। बच्चों के मानसिक विकास के लिए तेनाली रामा की कहानियों को हमेशा अच्छा जरिया माना गया है।

राज्य पर किसी तरह की आपत्ति आने पर महाराज तेनाली रामा से ही सलाह लिया करते थे। यही नहीं तेनाली रामा से जुड़े ऐसे कई चुटीले किस्से हैं, जो न सिर्फ हर किसी को गुदगुदाते हैं, बल्कि हंसी-हंसी में एक सीख भी दे जाते हैं।

मुल्ला नसरुद्दीन

बच्चों को कहानी के किरदार हमेशा से रोमांचित और आकर्षित करते रहे हैं। वहीं, अगर कहानी के किरदार असल जिंदगी से ताल्लुक रखते हों, तो वो बच्चों के मन-मस्तिष्क पर एक अलग ही छाप छोड़ जाते हैं।

ऐसा ही एक किरदार मुल्ला नसरुद्दीन का भी है। तुर्क देश में जन्मा यह महान रचनाकार आज भी अपनी हास्य प्रवृत्ति और उनसे जुड़े किस्से, चुटकुलों और कहानियों में जिंदा है।

इसका कारण यह है कि इन्होंने अपनी बातों को कहानियों, किस्सों और चुटकुलों में इस तरह तब्दील कर दिया कि ये आज भी लोगों का मनोरंजन कर रहे हैं। साथ ही हंसी-हंसी में जीवन की बड़ी सीख भी दे जाते हैं।

इनकी रचनाओं में वाक्पटुता और तेज दिमाग का ऐसा बेहतरीन ताना-बाना देखने को मिलता है, जो शायद ही कहीं और देखने को मिले।

विक्रम बेताल

विक्रम बेताल की कहानियां, जिसे बेताल पच्चीसी के नाम से भी जाना जाता है। यह 25 कहानियों का संग्रह है, जिसमें कई प्ररेणादायक और नेतृत्व क्षमता को बढ़ाने वाली कहानियां शामिल हैं।

इन सभी कहानियों को बेताल (एक पिशाच) तब सुनाता है, जब राजा विक्रम उसे जंगल से पकड़कर एक योगी के पास ले जा रहे होते हैं।

हर बार बेताल रास्ता लंबा होने के कारण राजा विक्रम को कहानी सुनाता, जिन कहानियों का संग्रह विक्रम बेताल की कहानियों के नाम से प्रसिद्ध है।

कहानी सुनाने से पहले बेताल, राजा के सामने एक शर्त भी रखता था कि अगर कहानी खत्म होने के बाद उसने मुंह से आवाज निकाली, तो वो वापस उड़कर पेड़ से लटक जाएगा।

उधर, जब भी बेताल कहानी सुनाकर खत्म करता, तो राजा से एक सवाल पूछता और कहता, राजन अगर तुमने जवाब पता होने पर भी नहीं दिया, तो मैं तुम्हारा सिर तोड़ दूंगा।

इस वजह से राजा को मजबूर होकर जवाब देना पड़ता था और पहली शर्त के अनुसार राजा के बोलते ही बेताल वापस जाकर पेड़ से उल्टा लटक जाता था। ऐसा होते-होते बेताल ने राजा को 25 कहानियां सुनाई।

शेखचिल्ली

दादी-नानी की कहानियों में एक मजेदार नाम ‘शेखचिल्ली’ का भी आता है। शेख चिल्ली की कहानी पढ़ने वालों और सुनने वालों को ठहाका लगाने पर मजबूर करती है। माना जाता है कि शेखचिल्ली नामक व्यक्ति हरियाणा से संबंध रखता था।

वहां उसके नाम का एक मकबरा भी है। इस दिलचस्प व्यक्ति के नाम कई मजेदार कहानियां दर्ज हैं, जिसमें यह उटपटांग कारनामे करता दिखाई देता है।

शेख चिल्ली के किस्से में आप इसे कभी किसी बुरे सपने से जूझता, तो कभी ख्याली पुलाव बनाता पाएंगे। इन साहब की निडरता देखकर भी आप दंग रह जाएंगे, क्योंकि किराए के शाही कपड़े पहनकर जश्न में शरीक होने का साहस शेखचिल्ली ही दिखा सकता है।

अपने इन्हीं कारनामों के कारण शेखचिल्ली कई बार हंसी का पात्र भी बन जाता है। वहीं, शेख चिल्ली की कहानियों में आप इसकी चतुराई भी खूब देखेंगे।

शेखचिल्ली के किस्से मजेदार होने के साथ-साथ सीख देने का काम भी करते हैं। इसलिए, बच्चों के मनोरंजन के लिए शेख चिल्ली की कहानियां अच्छी मानी जा सकती हैं।

सिंहासन बत्तीसी

कहानियां सबसे ज्यादा बच्चों को पसंद होती हैं। उन्हें न सिर्फ कहानियां सुनने में मजा आता है, बल्कि उससे कई चीजें सीखते भी हैं। ऐसी ही राजा विक्रमादित्य की सिंहासन बत्तीसी की कहानियां भी हैं।

ऐसा कहा जाता है कि राजा विक्रमादित्य के सिंहासन पर 32 पुतलियां लगी हुई थीं, जो राजा भोज को सिंहासन बत्तीसी की कहानी सुनाती हैं।

हर पुतली महाराज विक्रमादित्य की दानवीरता और फैसले लेने के कौशल से जुड़े किस्से राजाभोज को सुनाकर उड़ जाती हैं।

इन सभी कहानियों से बच्चों का मानसिक विकास तो होगा ही, साथ ही इनसे बच्चों को कठिन परिस्थिति में सही फैसला लेने का हौसला भी मिलेगा।

इन कहानियों से बच्चों को सही और गलत का फर्क भी समझ आएगा। साथ ही उन्हें समझ आएगा कि जीवन में दान और पुण्य का क्या महत्व है।

परी कथाएं

कहानियां हमेशा से बच्चों के लिए ज्ञान और मनोरंजन का स्रोत रही हैं। बचपन में सुनी इन कहानियों में बच्चे अपने जीवन के पहले दोस्त बनाते हैं, जो उनके मन-मस्तिष्क पर अहम छाप जोड़ जाते हैं।

इनमें परियां हमेशा से बच्चों की सबसे प्रिय मित्र रही हैं और परी कथाएं की कहानियां सबसे पसंदीदा कहानियों में से एक हैं।

ये परिकथाएं बच्चों को एक जादुई दुनिया में ले जाती हैं, जहां उन्हें अपने सपनों का संसार नजर आता है, जीवन जीने की शिक्षा के साथ, अच्छाई में विश्वास करने की सीख भी मिलती है।

ये परी कथा कहानियां बचपन से ही उन्हें इस बात का एहसास करवाती हैं कि जीत हमेशा अच्छाई की होती है ।

महाभारत की कहानियां

महाभारत का युद्ध द्वापर युग में लड़ा गया। महर्षि वेदव्यास ने इस पूरी घटना को संस्कृत महाकाव्य का रूप दिया। इस महाकाव्य में कई प्रेरणादायक कहानियां शामिल हैं। ये कहानियां बच्चों को धर्म और कर्म का पालन करना सिखाती हैं।

महाभारत की कथा में बहुत से महान पात्र हैं, जिनसे बच्चों का मार्गदर्शन हो सकता है। वीर अर्जुन, भगवान श्री कृष्ण, धर्मराज युधिष्ठर, भीष्म पितामह, गुरु द्रोणाचार्य, दानवीर कर्ण और महात्मा विदुर ऐसे ही कुछ चरित्र हैं।

सिर्फ इतना ही नहीं ऐसी कई घटनाएं महाभारत कथा का हिस्सा हैं, जो कुछ न कुछ शिक्षा जरूर देती हैं।

इनके द्वारा आप अपने बच्चों का परिचय भारत के इतिहास और संस्कृति से करवा सकते हैं। श्रीकृष्ण की देखरेख में अर्जुन ने जितने भी निर्णय लिए वो विवेक और बुद्धि का इस्तेमाल करने के अच्छे उदाहरण हैं।

कृष्ण-अर्जुन संवाद सुनने से बच्चों में निर्णय लेने की क्षमता का विकास हो सकता है। महाभारत की कथा में श्री कृष्ण के चरित्र की मदद से आप अपने बच्चों में भगवान के प्रति आस्था पैदा कर सकते हैं।

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ये हैं दुनिया के सबसे खतरनाक रास्ते, जिन्हें देखकर किसी की भी रूह कांप जाए

हमारी दुनिया बड़ी अनोखी है। यहां हर कदम पर रोमांच है। कहीं रेतीले मैदान हैं तो कहीं गहरे महसागर हैं कहीं पठार हैं तो कहीं पहाड़ हैं।

आज इस पोस्ट में हम बात करने जा रहे हैं कुछ ऐसे रास्तों के बारे में जो बेहद ही खतरनाक हैं जिनपर चलना हर किसी के बस की बात नहीं।

खासकर कमजोर दिल वाले तो इन रास्तों पर जा ही नहीं सकते। इन खतरनाक और डरावने रास्तों पर चलना तो दूर देखने मात्र से ही लोगों की रूह कांप जाती है। तो चलिए जानते हैं :-

हुशान क्लिफसाइड पाथ चीन

चीन का हुशान क्लिफसाइड पाथ हुशान यलो नदी के बेसिन के पास ऑरडॉस लूप सेक्शन के साउथवेस्ट में शानक्सी प्रांत के क्विनलिंग माउंटेंन्स के पूर्वी छोर पर स्थित है।

हुशान की उत्तरी चोटी पर 1614 मीटर की ऊंचाई पर दो पैदल रास्ते बनाये गए हैं इन्हें ‘हुआ शान यु’ के नाम से जाना जाता है।

हर साल यहां हज़ारों टूरिस्ट आते हैं। सरकार ने इस जगह पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतज़ाम किए हुए हैं, लेकिन लोगों की लापरवाहियों के चलते दुर्घटना हो ही जाती है।

युएयांग का नया रास्ता

ये रास्ता बनाया था चीन की स्पाइडर मैन की अमेजिंग आर्मी ने, वो भी अपनी जिंदगी दांव पर लगाकर। यह रास्ता चीन के हुनान राज्य के युएयांग में मौजूद है। यह 300 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद है। इस रास्ते को देखकर भी सांसे अटक जाती हैं।

एल केमिनिट डेल रे

स्पेन का ‘एल केमिनटी डेल रे’ दुनिया के सबसे खतरनाक रास्तों में से एक माना जाता है। इसे ‘किंग्स पाथ-वे’ भी कहा जाता है । यह 110 साल पुराना है जिसका निर्माण सन 1905 में स्पेन के दक्षिणी क्षेत्र में किया गया था।

यह बहुत ही खतरनाक रास्ता है स्पेन के हाइड्रोलिक पावर प्लांट में काम करने वाले मजदूरों के लिए ये रास्ता बनाया गया था। लेकिन सन 2000 में दो लोगों की गिरने से मौत होने के बाद इस रास्ते को बंद कर दिया गया था।

द क्लिक ऑफ़ मदर, आयरलैंड

यह रास्ता अटलांटिक सागर से 700 मीटर की ऊँचाई पर बना हुआ है। यह डुलिन कस्बे के समीप स्थित है। यहाँ पर भी बहुत से लोग साहसी अभियान के लिए आते है। इस रास्ते पर चलना बेहद मुश्किल भरा है लेकिन फिर भी यहाँ लोग साईकिल चलाते है।

रोच वेयरांड, फ्रांस

फ्रांस के अल्पस के सेंट पियरे डि इंट्रीमॉन्ट में स्थित रोच वेयरांड पर जाना हर किसी के बस की बात नहीं है। यह अल्पस रीजन के सेंट पियरे डि इंट्रीमॉन्ट में स्थित है। यहां अच्छे से अच्छे मजबूत कलेजे वाले लोगों की भी रूह कांप जाती है।

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यह है दुनिया का सबसे जहरीला पौधा, जिसे छूने मात्र से हो जाती है इंसान की मृत्यु

यह बात तो हम सभी जानते हैं कि हमारे वातावरण के लिए पेड़ पौधे कितने जरूरी हैं। इतना ही नहीं हम अपने घरों के आसपास हरियाली लाने के लिए पेड़ पौधे लगाते हैं।

यूं तो पौधे कुदरत के साथ साथ हमें कई सारे फायदे देते हैं। लेकिन कुछ पेड़ पौधे ऐसे भी होते हैं जो बेहद खतरनाक होते हैं इन्हीं में से एक है जाइंट होगवीड, जो किलर ट्री के नाम से मशहूर है।

इस पौधे का वैज्ञानिक नाम हेरकिलम मेंटागेजिएनम है। यह पौधा इतना जहरीला होता है कि इसे छूने भर से हाथों में छाले पड़ जाते हैं।

देखने में यह पौधा इतना खूबसूरत है कि इसे देखकर हरकिसी का मन इसे छूने की लिए ललचा जाता है लेकिन महज 48 घंटे में इसका साइड इफेक्ट शरीर पर दिखने लगता है।

वैज्ञानिको का मानना है कि यह पौधा सांप से भी ज्यादा जहरीला होता है। अगर आपने कभी इस पेड़ को स्पर्श कर दिया तो कुछ ही घंटों में आपको महसूस होगा की आपकी पूरी त्वचा जलने लगी है।

आपको बता दें कि इस पौधे की लंबाई 14 फीट की होती है। इस पौधे को लेकर डॉक्टर का कहना है कि यदि कोई इस पौधे को स्पर्श कर ले तो उनकी आंखों की रोशनी जाने का खतरा रहता है।

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मीराबाई चानू – घोर ग़रीबी और असफलता से ओलंपिक पदक का सफ़र

भारतीय महिला भारोत्तोलक “साईखोम मीरा बाई चानू” ने टोक्यो ओलंपिक की 49 किग्रा स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। मीरा बाई चानू ओलंपिक गेम्स के पहले दिन मेडल जीतने वाली पहली महिला बन गई हैं।

मीरा बाई चानू ने सिल्वर जीतकर भारत का भारोत्तोलन स्पर्धा में मेडल जीतने का 21 साल लंबा इंतजार खत्म किया है।

भारतीय वेटलिफ़्टर मीराबाई चानू टोक्यो ओलंपिक में भारत को पहला मेडल

26 साल की चानू ने क्लीन एवं जर्क में 115 किग्रा और स्नैच में 87 किग्रा से कुल 202 किग्रा वजन उठाकर रजत पदक अपने नाम किया।

इससे पहले कर्णम मल्लेश्वरी ने सिडनी ओलंपिक 2000 में देश को भारोत्तोलन में कांस्य पदक दिलाया था।

चीन की होऊ झिऊई ने कुल 210 किग्रा (स्नैच में 94 किग्रा, क्लीन एवं जर्क में 116 किग्रा) से स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इंडोनेशिया की ऐसाह विंडी कांटिका ने कुल 194 किग्रा (84 किग्रा +110 किग्रा) का वजन उठाकर कांस्य पदक हासिल किया।

मीराबाई चानू का बचपन

साईखोम मीराबाई चानू का जन्म 8 अगस्त 1994 को मणिपुर के नोंगपेक काकचिंग गांव में हुआ था. शुरुआत में मीराबाई का सपना तीरंदाज बनने का था, लेकिन किन्हीं कारणों से उन्होंने वेटलिफ्टिंग को अपना करियर चुनना पड़ा.

बताते हैं कि मीराबाई बचपन में तीरंदाज यानी आर्चर बनना चाहती थीं. लेकिन कक्षा आठ तक आते-आते उनका लक्ष्य बदल गया. दरअसल कक्षा आठ की किताब में मशहूर वेटलिफ्टर कुंजरानी देवी का जिक्र था.

भारोत्तोलन की शुरुआत

मणिपुर से आने वालीं मीराबाई चानू का जीवन संघर्ष से भरा रहा है. मीराबाई का बचपन पहाड़ से जलावन की लकड़ियां बीनते बीता. वह बचपन से ही भारी वजन उठाने की आदि हैं.

जब वह सिर्फ 12 साल की थीं, वह आसानी से जलाऊ लकड़ी का एक बड़ा गट्ठर उठा कर घर ले जाती थी जब कि उनके बड़े भाई के लिए इसे उठाना भी मुश्किल हो जाता था।

घोर असफलता से ओलंपिक पदक का सफ़र

2016 रियो ओलंपिक में मीराबाई अपने वर्ग में सामान्य वजन भी नहीं उठा पायीं थी और अपने राउंड को ख़त्म भी नहीं कर पायीं थी, और प्वाइंटस टेबल में उनके नाम के आगे लिखा था – Did not finish। यह काफ़ी शर्मनाक और दिल तोड़ने वाला प्रदर्शन था।

जब भारत के खेल प्रेमियों ने यह ख़बर पढ़ीं तो मीराबाई रातों रात भारतीय प्रशंसकों की नज़र में विलेन बन गईं थीं. नौबत यहाँ तक आई कि 2016 के बाद वो डिप्रेशन में चली गईं और उन्हें हर हफ्ते मनोवैज्ञानिक के सेशन लेने पड़े.

इस असफलता के बाद एक बार तो मीरा ने खेल को अलविदा कहने का मन बना लिया था. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में ज़बरदस्त वापसी की.

मीराबाई चानू ने 2018 में ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रमंडल खेलों में 48 किलोवर्ग के भारोत्तोलन में गोल्ड मेडल जीता था और अब ओलंपिक मेडल.

बांस से की प्रैक्टिस

बिना ख़ास सुविधाओं वाला उनका गांव इंफ़ाल से कोई 200 किलोमीटर दूर था. उन दिनों मणिपुर की ही महिला वेटलिफ़्टर कुंजुरानी देवी स्टार थीं और एथेंस ओलंपिक में खेलने गई थीं.

2007 में जब प्रैक्टिस शुरु की तो पहले-पहल उनके पास लोहे का बार नहीं था तो वो बाँस से ही प्रैक्टिस किया करती थीं.

गाँव में ट्रेनिंग सेंटर नहीं था तो 50-60 किलोमीटर दूर ट्रेनिंग के लिए जाया करती थीं. डाइट में रोज़ाना दूध और चिकन चाहिए था, लेकिन एक आम परिवार की मीरा के लिए वो मुमकिन न था।

11 साल में वो अंडर-15 चैंपियन बन गई थीं और 17 साल में जूनियर चैंपियन. जिस कुंजुरानी को देखकर मीरा के मन में चैंपियन बनने का सपना जागा था, अपनी उसी आइडल के 12 साल पुराने राष्ट्रीय रिकॉर्ड को मीरा ने 2016 में तोड़ा- 192 किलोग्राम वज़न उठाकर.

मीराबाई चानू की 9 प्रमुख उपलब्धियां

  • 2020 टोक्यो ओलंपिक में रजत पदक
  • ग्लासगो, 2014 राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक।
  • महिला वरिष्ठ राष्ट्रीय भारोत्तोलन चैम्पियनशिप, 2016 में स्वर्ण पदक।
  • विश्व भारोत्तोलन चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक, अनाहेम, यूएसए, 2017
  • 2018 के लिए राजीव गांधी खेल रत्न
  • 2018 में पद्म श्री से सम्मानित
  • महिला सीनियर नेशनल डब्ल्यूएल चैंपियनशिप, मैंगलोर, जनवरी 2018 में स्वर्ण पदक
  • राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक, गोल्ड कोस्ट ऑस्ट्रेलिया, 2018
  • अप्रैल 2021 में ताशकंद में आयोजित एशियाई चैंपियनशिप में 119 किलोग्राम भार उठाकर क्लीन एंड जर्क में विश्व रिकॉर्ड बनाया।

7 साल का सिक्स पैक एब्स वाला बच्चा जो मैस्सी की तरह फ़ुटबाल खेलता है!

ईरान में जन्मे और वर्तमान में ब्रिटेन के लिवरपूल में रहने वाले अरात होसैनी (आरत ) एक ऐसा अदभुत बालक यानि वंडरकिड है जैसा हमने शायद कभी तक नहीं देखा है। कुछ साल बाद अरत का नाम यदि दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फुटबॉल खिलाड़ियों में शामिल होता है तो हमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

सिर्फ सात साल की उम्र में अरत होसैनी एक शानदार ड्रिबलर (फ़ुटबाल प्लेअर) है और इंटरनेट पर उसके असंख्य वीडियो हैं जिनमें वह डिफेंडरों के झुंड को शानदार ढंग से छका कर गोल करता दिखता है।

आरत इंस्टाग्राम स्टार है और इंस्टाग्राम पर उसके 57 लाख फ़ॉलोअर हैं।

ईरान के बाबोल शहर में जन्में आरत होसैनी अपने सिक्स पैक एब और सॉकर प्लेयर होने के कारण पहले ही सोशल मीडिया स्टार बन चुके थे और अब वह फुटबाल स्टार मेसी जैसा बनना चाहते है जिसकी झलक उनके फ़ुट्बॉल खेलते विडीओज़ में साफ़ नज़र आती है।

एक अन्य वीडीयो में वह कमाल के बैलेन्स के साथ ज़मीन पर पड़ी गेंद को माथे से छूता है और फिर उसी लय में वापिस अपनी पोजिशन पर वापिस आ जाता है। ऐसा लगता है कि यह वह स्लो-मोशन में कर रहा है लेकिन ऐसा नहीं है, जोकि उसके ट्रेनर पिता को देख कर समझ में आ जाता है ।

आइए जानते हैं कहानी छोटी सी उम्र में इतना नाम कमाने वाले लिटिल चैम्पियन की

आरत होसैनी की ट्रेनिंग

आरत के पिता मोहम्मद होसैनी ने आरत की ट्रेनिंग काफी कम उम्र में ही शुरू कर दी थी। आरत ने 9 महीने की उम्र से जिम्नास्टिक करना शुरू किया था l वे आरत  को प्रतिदिन  लगभग 20 मिनट तक प्रशिक्षण देते थे। आरत  के पिता अपने बेटे की तस्वीरें अपने इंस्टाग्राम पेज पर पोस्ट करते रहते थे।

आरत दो साल की उम्र पूरी होने तक अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियां बन चुका था। आरत को फ़ुटबाल खेलना काफी पसंद है।

सोशल मीडिया स्टार

आरत का जन्म इंग्लैंड के लिवरपूल में हुआ था और अब वह लिवरपूल एकेडमी में स्पोर्ट्स ट्रेनिंग ले रहे हैं। सोशल मीडिया पर आरत की फैन फॉलोइंग काफी ज़्यादा है। इंस्टाग्राम पर इनके 4 मिलियन फॉलोअर हैं। इनकी लगभग हर एक पोस्ट पर मिलियन लाइक हैं।

इंस्टाग्राम पर डेब्यू

आरत के पिता मोहम्मद का कहना है कि ‘मेरे बेटे की प्रतिभा और अनोखे टैलेंट को देखने के बाद आसपास के लोगों ने सलाह दी कि इंस्टाग्राम पर उसका एक पेज बनाना चाहिए। आरत के इंस्टाग्राम पेज को न केवल ईरान में बल्कि विदेशों में भी पसंद किया गया।

लियोनेल मेसी का फैन

आरत दीवार पर चढ़ने की कला में भी माहिर है। आरत चाहते हैं कि बड़े होकर बार्सिलोना सॉकर क्लब के लिए खेलें। उनके पसंदीदा खिलाड़ी लियोनेल मेसी हैं। आरत मेसी की तरह ही खेलना चाहते हैं।

पिता को कई आरोपों का सामना करना पड़ा

आरत के पिता पर कई बार यह आरोप भी लगे कि वह अपने बेटे को बचपन से वंचित रख रहे हैं वह अपने बेटे से पैसे कमाने के लिए ऐसा करा रहे हैं। जिस पर उन्होंने कहा कि बेटा हमेशा से एथलेटिक्स एक्टिविटीज में एक्टिव रहा है। मैंने सिर्फ एक पिता के तौर पर उसकी उन चीजों में मदद की है जो वह करना चाहता है।

कॉमिक्स : हमारे बचपन के साथी, जाने कब और कैसे हुई इनकी शुरुआत

एक ऐसा वक्त भी था, जब दुनिया आज की तरह तकनीक के इशारों पर नहीं नाचती थी। तब बच्चों की सबसे प्यारी दोस्त कॉमिक्स हुआ करती थी। गर्मी की छुट्टी का मतलब ढेर सारी कॉमिक्स और मस्ती हुआ करती थी।

लेकिन वक्त बदलने के साथ बच्चों के दोस्त और पसंद भी बदलने लगी है। वह भले ही अब गुजरे जमाने की बात हो, लेकिन कॉमिक्स से लोगों का जुड़ाव कम नहीं हुआ है।

जब हम कॉमिक्स की बात करते हैं तो सबसे पहले याद आती है सुपरहीरोज पर बनी कॉमिक्स की, जो बच्चों को बेहद पसंद है आज इस पोस्ट में हम इन्हीं कॉमिक्स के बारे में बात करने जा रह हैं तो चलिए जानते हैं :-

मार्वल कॉमिक्स

पल्प मैगजीन के पब्लिशर मार्टिन गुडमैन ने सन् 1939 में एक कॉमिक्स कंपनी टाइमली पब्लिकेशन बनाई, जिसे बाद में मार्वल कॉमिक्स के नाम से जाना गया।

इसके बाद आधुनिक मार्वल कॉमिक बनाने का श्रेय फेमस राइटर स्टैन ली को जाता है, उन्होंने सन् 1961 में द फैंटास्टिक फोर के साथ मार्वल कॉमिक्स की शुरुआत की थी।

इसमें अवेंजर्स, एक्स-मैन, फैंटास्टिक फोर और गार्जियन्स ऑफ गैलेक्सी जैसे सुपरहीरोज की टीम भी शामिल है। साथ ही डॉक्टर डूम, ग्रीन गोब्लिन, मैगनेटो, गेलेक्ट्स, थानोस, अल्ट्रॉन, डॉक्टर ऑक्टोपस, लोकी, वेनॉम, एपॉकेलिप्स, किंगपिन और रेड स्कल जैसे खलनायक शामिल है। इसके सारे पात्र काल्पनिक हैं।

मार्वल में स्पाइडर-मैन, द एक्स मैन, आयरन मैन, द हल्क, थॉर, कैप्टन अमेरिका, वूल्वरिन (कॉमिक्स), ब्लैक पैंथर, ह्यूमन टॉर्च ,ऐंट-मैन, डॉक्टर स्ट्रेंज, वास्प, डेडपूल, हॉकआई, ब्लैक विडो, स्टार-लॉर्ड, डेयरडेविल, कैप्टन मार्वेल और पनिशर जैसे सुपर हीरो की कॉमिक्स शामिल हैं। ज्यादातर कैरेक्टर पर हॉलिवुड में मूवी भी बन चुकी हैं, लेकिन कॉमिक की अपनी एक जगह और फैन हैं।

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डीसी कॉमिक्स

यह डीसी एंटरटेनमेंट की प्रकाशन इकाई है, जो वार्नर ब्रदर्स की एक सहायक कंपनी है। यह अमेरिका की सबसे बड़ी और सबसे पुरानी कॉमिक पुस्तक कंपनियों में से एक है, जिनमें बैटमैन, सुपरमैन, वंडर वूमन और साथ में कुछ खलनायक जैसे- लेक्स लुथर, जोकर, केटवोमेन आदि शामिल हैं।

सुपरमैन डीसी कॉमिक्स द्वारा प्रकाशित एक काल्पनिक सुपरहीरो या महानायक है। लेखक जेरी सीगल एवं आर्टिस्ट जॉय शस्टर ने इसकी रचना की थी।

वर्ष 1938 में 30 जून को सुपरमैन पहली बार कॉमिक्स के पन्नों पर नजर आया था। उसके बाद सुपरमैन दुनियाभर के बच्चों का पसंदीदा किरदार बन गया और इसे आज भी पसंद किया जाता है।

भारत में बनी कॉमिक्स

भारत में कॉमिक्स प्रकाशन की शुरुआत देखें तो शरू में विदेशों के कॉमिक्स पात्रों को हिन्दी में ट्रांसलेट करके पब्लिश किया था, जिसमें सर्वप्रथम नाम आता है ‘इंद्रजाल कॉमिक्स’ का, जिसने 1964 में ‘द फैंटम्स बेल्ट’ के नाम से महान कॉमिक्स लेखक और चित्रकार ली फॉक के फेमस कैरेक्टर फैन्टम की कॉमिक्स प्रकाशित की थी।

इसके बाद बात आती है हिंदी कॉमिक की, जिसमें बहादुर को पहला भारतीय कॉमिक हीरो माना जाता है। केसरिया कुर्ता और नीली डेनिम पहनने वाला बहादुर डाकुओं से लड़ता था।

इस किरदार के रचयिता हैं आबित सुरती जो मुंबई में रहते हैं। इसे इंद्रजाल कॉमिक्स द्वारा सबसे पहले 1976 में पब्लिश किया गया था।

साठ के दशक में अमर चित्र कथा प्रकाशन का जन्म हुआ, जिसमें पौराणिक कथाओं का जिक्र होता था। मशहूर कार्टूनिस्ट प्राण ने 1971 में चाचा चौधरी कार्टून की रचना की।

इसके अलावा उन्होंने श्रीमती जी, पिंक, बिल्लू और रमन जैसे किरदारों को जन्म दिया, जिसे बच्चों में आज भी पसंद किया जाता है। इसके बाद डायमंड कॉमिक्स, मधु मुस्कान, आदर्श चित्र कथा, गोवरसंस कॉमिक्स आदि हैं।

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कहानियों की ये किताबें आपके बच्चे की लाइफ़ बना देंगी!

कहानियाँ सुनना किसे अच्छी नहीं लगता? पिछले दशक तक हम अक्सर घरों में दादी-नानी द्वारा कहानियाँ सुने जाने के क़िस्से सुना करते थे। हालाँकि यह प्रचलन अब लगभग विलुप्त हो गया है।

आज के दौर में बच्चों का अधिकतर समय मोबाइल पर बीत रहा है जो उनकी मानसिक और शारीरिक सेहत के लिए बिलकुल भी ठीक नहीं है। बच्चों में इस आदत को दूर करने का सबसे आसान तरीक़ा उनमें पढ़ने की आदत को विकसित करना है।

इसकी शुरुआत कहानियों की किताबों से की जाती है। बच्चों में सचित्र कहानियों के प्रति एक ख़ास लगाव होता है। इसलिए रंग-बिरंगी चित्रों से सजी कहानियों को पढ़ कर बच्चे पढ़ने के प्रति आकर्षित होते हैं।

इस लेख में हमने कुछ चुनिंदा संग्रह चुने हैं जिन्हें पढ़ कर बच्चों में सही-ग़लत की समझ, नैतिकता, परिश्रम और शिक्षा का महत्व, सच्चाई, ईमानदारी, अनुशासन, आज्ञाकारिता, चतुरता, साहस और अच्छा व्यक्तित्व आदि गुण विकसित हो सकते हैं।

तो आइए देखते हैं बेहद रोचक कहानियों के कुछ चुनिंदा संग्रह

पंचतंत्र की 101 कहानियाँ
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पंचतन्त्र की कहानियाँ बहुत जीवन्त हैं। इनमे लोकव्यवहार को बहुत सरल तरीके से समझाया गया है। बहुत से लोग इस पुस्तक को नेतृत्व क्षमता विकसित करने का एक सशक्त माध्यम मानते हैं। इस पुस्तक की महत्ता इसी से प्रतिपादित होती है कि इसका अनुवाद विश्व की लगभग हर भाषा में हो चुका है।
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अकबर बीरबल
अकबर और बीरबल की कहानियाँ हम बचपन से पढ़ते और सुनते आये हैं जिनसे बीरबल की बुद्धिमता और चतुराई का अंदाजा लगाया जा सकता है, ये कहानियाँ अत्यंत रोचक तो हैं साथ ही इनमें ज्ञान, प्रेरणा और सीखने योग्य भी बहुत कुछ है।  अभी ख़रीदें
 

 

 

 

 

 

 

 

 

Alif Laila (Hindi Edition) [Omprakash Sharma] तक अलिफ लैला की कहानियां

अलिफ लैला की कहानी अरब देश की एक प्रचलित लोक कथा है जो पूरी दुनिया में सदियों से सुनी व पढ़ी जाती रही है। यह एक ऐसी नवयुवती की कहानी है, जिसने एक ज़ालिम बादशाह से विवाह करने के बाद न केवल उसका हृदय परिवर्तित कर दिया, अपितु अनेक नवयुवतियों का जीवन भी बचा लिया। उस युवती की प्रत्येक रात अमावस्या की रात बनकर आती थी और प्रत्येक सवेरा उसे कुछ साँसों का अवकाश देकर चला जाता था, किन्तु उस ज़ालिम बादशाह के साथ विवाह करने के बाद उस युवती ने नवजीवन प्राप्त किया। अभी खरीदें 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

तेनाली रामा

तेनाली रामा जिन्हें तेनाली राम या तेनाली रमन के नाम से भी जाना जाता है एक भारतीय कवि, विद्वान, विचारक और श्री कृष्णदेवराय के दरबार में एक विशेष सलाहकार थे। उनके व्यक्तित्व व चतुराई से जुड़े किस्से हर किसी को प्रभावित व रोमांचित करते हैं।  अभी खरीदें 

 

 

 

 

 

 

 

 

मुल्ला नसरुद्दीन (Marathi Edition) [चारुलता पाटील, गिरीश सहस्रबुद्धे] तक मुल्ला नसरुद्दीन

मुल्ला नसरुद्दीन सूफी परंपरा में सबसे लोकप्रिय प्राचीन फारसी पात्रों में से एक है। उनकी चतुराई और बुद्धिमत्ता के किस्से बच्चों और बड़ों दोनों को समान रूप से पसंद आते हैं। यह पुस्तक विचारोत्तेजक और विनोदी कहानियों का एक सुंदर सचित्र संकलन है जो बच्चे की कल्पना को पकड़ती है और अंत तक उनकी रुचि को बनाए रखती है।

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विक्रम बेताल

बैताल पच्चीस कथाओं से युक्त एक कथा ग्रन्थ है। इसके रचयिता बेताल भट्टराव थे। जो न्याय के लिये प्रसिद्ध राजा विक्रम के नौ रत्नों में से एक थे। ये कथाएं राजा विक्रम की न्याय-शक्ति का बोध कराती हैं। बेताल प्रतिदिन एक कहानी सुनाता है और अन्त में राजा से ऐसा प्रश्न कर देता है कि राजा को उसका उत्तर देना ही पड़ता है। उसने शर्त लगा रखी थी कि अगर राजा बोलेगा तो वह उससे रूठकर फिर से पेड़ पर जा लटकेगा। लेकिन यह जानते हुए भी सवाल सामने आने पर राजा से चुप नहीं रहा जाता। अभी खरीदें 

 

 

 

 

 

 

 

 

शेखचिल्ली

शेखचिल्ली वो नाम है, जो अपनी कल्पनाओं और खयाली पुलाव के लिए प्रसिद्ध रहा है। अगर कुरुक्षेत्र महाभारत के लिए प्रसिद्ध है तो उससे कुछ ही दूरी पर स्थित थानेसर शेखचिल्ली के कारनामों के लिए प्रसिद्ध है। भारत में शेख चिल्ली को एक मजेदार कैरेक्टर के रूप में देख जाता है जो अक्सर ख्यालों में खो जाता है और हवाई-किलें बनाया करता है। पर जब उसे होश आता है तो वो खुद को लोगों के बीच पाता है और सबके लिए हंसी का पात्र बन जाता है। अभी खरीदें 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

सिंहासन बत्तीसी 

सिंहासन बत्तीसी ३२ कथाओं का संग्रह है जिसमें ३२ पुतलियाँ विक्रमादित्य के विभिन्न गुणों का कथा के रूप में वर्णन करती हैं। इन कथाओं की भूमिका भी कथा ही है जो राजा भोज की कथा कहती है। ३२ कथाएँ ३२ कथाएँ ३२ पुतलियों के मुख से कही गई हैं जो एक सिंहासन में लगी हुई हैं। यह सिंहासन राजा भोज को विचित्र परिस्थिति में प्राप्त होता है। अभी खरीदें 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

परी कथाएं

परियों की कहानियां काल्पनिक होती है जिसमे विभिन्न लोककथनीय पात्रों का जैसे कि अप्सराएँ, पिशाच, राक्षस, जादूगर, दानव और, बात करने वाले पशु और पक्षिओं का समावेश होता है, साथ ही विभिन्न विस्मयकारी घटनाओं और आमतौर पर एक लम्बे काल का वर्णन होता है। परी एक मजेदार पात्र है जिसे बड़े हो या छोटे सब पसंद करते है जिस की कहानी सबको अच्छी लगती है । अभी खरीदें

 

 

 

 

 

 

 

 

 

महाभारत की कहानियां

वेद व्यास द्वारा रचित महाभारत हिन्दू धर्म और वैदिक परम्परा का सार है। वर्तमान समय में महाभारत की कई ऐसी कहानियां भी हैं, जिससे शायद ही आप परिचित हों। सामान्य पाठकों को यह रुचिकर प्रतीत हो इसके लिए महाभारत की अलग-अलग कहानियों का संकलन इस पुस्तक में किया गया है। अभी खरीदें

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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