5 महिलाएँ जो हूबहू ऐश्वर्या राय बच्चन की तरह दिखती हैं!!

कहा जाता है कि दुनिया में एक जैसी शक्ल के सात लोग मौजूद होते हैं। और अगर ये हमशक्ल जानी मानी हस्तियों और फ़िल्मी सितारों के हों तो यह अपने आप में ख़ास बात होती है। हालाँकि मशहूर लोगों का हमशक्ल होना अपने आप में एक वरदान है लेकिन इसके नुक्सान भी हो सकते हैं।

वैसे अधिकतर मौक़ों पर ये मशहूर लोगों के हमशक्ल लोग फ़ायदा उठाते हैं और अपना खुद का एक अच्छा- खासा करियर और धन बना लेते हैं। वैसे “हमशक्ल लोगों के विज्ञान” पर सजींदा हैं तो आपको  BBC हिंदी की इस पोस्ट को पढ़ना चाहिए।

ऐश्वर्या राय बच्चन

मशहूर बॉलीवुड अभिनेत्री ऐश्वर्या राय बच्चन अपनी अदाओं के साथ साथ अपनी खूबसूरती के लिए भी पूरे विश्व में जानी जाती है। ऐश्वर्या राय बच्चन ने पूरे विश्व की सबसे खूबसूरत महिलाओं की top list में हमेशा ही अपनी जगह बनाई है। अपने टैलेंट के बलबूते पर ऐश्वर्या राय बॉलीवुड इंडस्ट्री के साथ-२ देश विदेश में भी मशहूर शख़्सयित बन चुकी हैं।

लिहाजा ज्यादा बातें न बनाते हुए हम बता रहें हैं उन पांच औरतों के बारे में जो ऐश्वर्या राय बच्चन की हमशकल होने की वजह से सुर्ख़ियों में रहीं।

स्नेहा उलाल

स्नेहा उलाल ने सन 2005 में बॉलिवुड में डेब्यू किया। ‘लकी: नो टाइम फॉर लव‘  से करियर शुरू करने वालीं स्नेहा आजकल उलाल वेब सीरीज में नजर आ रही हैं। लॉंच पर उनकी तुलना ऐश्वर्या राय बच्चन से की गई थी।

कहा यह भी गया था कि ऐश्वर्या से ब्रेकअप के बाद सलमान उनकी तरह दिखने वाली लड़की को लॉन्च ब्रेक दे रहे थे। स्नेहा का जन्म ओमान के मस्क में हुआ था। इनके पिता मैंगलोर के और माता सिंधी है।

हालांकि, स्नेहा अपने परफॉर्मेंस से लोगों के दिलों में कुछ खास जगह नहीं बना पाईं। स्नेहा ने भले ही बॉलीवुड में ज्यादा फिल्में न की हों, लेकिन साउथ इंडियन फिल्म इंडस्ट्री में काफी छाई हुई हैं।

हालाँकि बाद में स्नेहा ने एक इंटरव्यू में कहा था कि यह केवल उस समय की एक पीआर स्ट्रैटिजी थी। स्नेहा ने एक इंटरव्यू में कहा ‘मैं खुद में काफी कंफर्टेबल हूं और जो तुलना की जाती है, उससे मुझे फर्क नहीं पड़ता है।

वह भी लोगों की पीआर स्ट्रैटिजी थी कि कैसे मेरे बारे में बताया जाए। असल में उस चीज ने बस तुलना पर ही जोर दिया वरना यह कोई बड़ी बात नहीं थी।

मुझे अपने जीवन में पछतावा नहीं है, लेकिन मुझे लगता है कि मैंने अपने अभिनय करियर की शुरुआत बहुत जल्दी कर दी थी।’ – स्नेहा

snehaullal नाम के इनके इंस्टग्राम पर इनके हैंडल पर लगभग सात लाख followers हैं।

मानसी नाइक

मानसी उस वक्त सबसे ज्यादा सुर्खियों में आ गई थी जब उनके कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे और उन्हें ऐश्वर्या राय की हमशक्ल बताया गया था।

मानसी नाइक की आंखे और होंठ बिल्कुल ऐश्वर्या राय की तरह मिलते हैं। सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि मानसी ऐश्वर्या की कार्बन कॉपी लगती हैं। वहीं मानसी खुद भी ऐश्वर्या के गानों पर ही डांस करते हुए वीडियो साझा करती हैं।

मानसी एक मराठी अभिनेत्री होने के साथ-साथ टिक-टॉक स्टार के रूप में भी काफी प्रसिद्ध हैं। मानसी की कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर छाई रहीं, जिसकी तुलना ऐश्वर्या राय के ‘जोधा-अकबर’ वाले लुक से की गई।

 

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शुरुआती फ़िल्म में अच्छा करने के बावजूद मानसी फ़िल्म -जगत में कुछ ख़ास नहीं कर पाई, लेकिन इंटरनेट पर वे सक्रिय रहती हैं।

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मानसी ने बॉक्सर प्रदीप खरेरा के साथ शादी रचाई है। प्रदीप खरेरा हरियाणा के पेशेवर मुक्केबाज खिलाड़ी हैं। वो डब्ल्यूबीसी एशियन टाइटल चैंपियन जीत चुके हैं।

आमना इमरान

आमना इमरान पाकिस्तान की रहने वाली हैं और वह यूए में मेडिकल प्रोफेशनल हैं। अपने काम के साथ-साथ आमना को नए-नए लोगों के साथ जुड़ना काफी पसंद है।

दरअसल, पाकिस्तान की लड़की आमना इमरान की कुछ तस्वीरें जमकर वायरल हो रही हैं। ब्लॉगर आमना की शक्ल काफी हद तक बॉलीवुड अभिनेत्री ऐश्वर्या राय बच्चन से मिलती है।

आमना के सोशल मीडिया अकाउंट पर कई सारी ऐसी तस्वीरें हैं जिसमें वो ऐश्वर्या राय को कॉपी करते दिख रही हैं।

 

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यहीं नहीं आमना इमरान की कई सारी तस्वीरों को देख कर तो सोशल मीडिया यूजर्स को धोखा भी हो रहा है कि ये ऐश्वर्या राय हैं या फिर आमना इमरान। आमना ने बताया था कि वह ऐश्वर्या की बड़ी फैन हैं।

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महलघा जाबेरी

सिर्फ स्नेहा उलाल ही नहीं बॉलीवुड एक्ट्रेस ऐश्वर्या राय बच्चन की एक और हमशक्ल सोशल मीडिया की सनसनी हैं। ऐश्वर्या की इस हमशक्ल का नाम महलघा जाबेरी है। बिल्कुल ऐश्वर्या की तरह नजर आती हैं।

महलघा का जन्म 17 जून 1989 को ईरान के शहर इस्फहान में हुआ है और खुद को फिट रखने के लिए महलघा योग करती हैं जो उनके रूटीन में शामिल है एक इंटरव्यूह में महलघा ने कहा था कि योग ने न सिर्फ मुझे परफेक्ट फिगर पाने में मदद की बल्कि इससे मन को भी शांति मिलती है।

महलघा जबेरी ईरान की रहने वाली हैं और पेशे से मॉडल हैं। वे सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं उनके इंस्‍टाग्राम पर 2.3 मिलियन यानी 23 लाख फॉलोवर्स हैं। महलघा का जन्म ईरान में हुआ लेकिन अब मॉडलिंग करियर के कारण वे अमेरिका के सैन डिएगो में रहती हैं।

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आशिता सिंह

लॉकडाउन के दौरान आशिता ने टिकटॉक पर वीडियो बनाना शुरू किया उनकी वीडियोज को इतना ज़ादा पसंद किया गया कि 7 दिन के अंदर ही उनके 1600 से ज्यादा फॉलोअर्स हो गए और टिकटॉक पर वह ऐश्‍वर्या राय के नाम से मशहूर हो गई।

टिकटॉक पर ऐश्‍वर्या राय के नाम से मशहूर इस लड़की का पूरा नाम आशिता सिंह राठौर है। वैसे तो यह दूसरी कई बॉलीवुड एक्ट्रेस की फिल्मों के गाने और डायलॉग पर लिप-सिंक करते हुए वीडियो बनाती हैं, लेकिन ज्यादातर वीडियो बॉलीवुड अभिनेत्री ऐश्वर्या की फिल्मों से जुड़े हैं।

 

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आशिता अक्सर अपने वीडियोज और तस्वीरें भी इंस्टाग्राम पर शेयर करती रहती हैं। आशिता का इंस्टाग्राम पेज भी उनकी वीडियो और तस्वीरों से भरा है, जिसमे वह ऐश्वर्या राय की फिल्मों के डायलॉग ,और गानों पर लिप-सिंक करती नज़र आती है।

कुछ ही वक़्त में इंस्टाग्राम पर आशिता सिंह राठौर के 23 हज़ार से अधिक फॉलोवर्स हो गए हैं। आशिता की ऐश की तरह ही नीली आंखे, बाल और एक्सप्रेशन है और फैन्स आशिता को ऐश्वर्या की डुप्लीकेट कहकर अपना प्यार दिखा रहे हैं।

जानें अपनी राशि के अनुसार किस रंग से खेलें होली

वैसे तो हर त्यौहार का अपना एक रंग और महत्व होता है, लेकिन हरे, पीले, लाल, गुलाबी आदि असल रंगों का त्यौहार होली बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। होली के आते ही वातावरण में एक मस्ती का आलम छा जाता है।

होली के दिन रंगों के माध्यम से सारी भिन्नताएं मिट जाती हैं और सब बस एक रंग के हो जाते हैं। हर किसी का तन-मन, प्रेम-उल्लास और उमंग के रंगों की फुहार से भर जाता है।

रंगों का हमारे जीवन में जितना सकारात्मक प्रभाव डालते हैं उतना ही नकारात्मक भी, इसलिए ज्योतिषशास्त्र हो या वास्तुशास्त्र हर जगह रंगों का चयन बहुत ही सोच समझकर करने के लिए बताया गया है।

आपको जानकर हैरानी होगी कि अगर अपनी राशि के अनुसार रंगों का प्रयोग किया जाए तो ग्रह दोष अपने आप ही खत्म होने लगते हैं।

तो आइए जान लेते हैं कि इस होली किस राशि के लोगों को किस कलर से होली खेलनी चाहिए?

क्यों मनाई जाती है होली

हिन्दू मान्यताओं के अनुसार हिरण्यकश्यप के पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु की भक्ति में लीन रहते थे। उनकी इस भक्ति से उनके पिता हिरण्यकश्यप नाखुश थे, इसीलिए उनके पिता ने अपने पुत्र को भगवान की भक्ति से हटाने के लिए कई प्रयास किए।

हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को यह वरदान प्राप्त था कि वह आग में नहीं जल सकेगी। एक बार हिरण्यकश्यप ने अपनी ही बहन होलिका के जरिए प्रह्लाद को जिंदा जला देने का आदेश दिया, लेकिन भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की।

जब होलिका प्रह्लाद को जलाने के लिए आग में बैठी, तो वह खुद जल कर मर गई। तभी से इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में जाना जाता है और हिन्दू धर्म में होलिका दहन की परंपरा प्रचलित है। होलिका दहन से अगले दिन दुलहंडी (होली) खेला जाता है।

अपनी राशि के अनुसार किस रंग से खेलें होली

मेष

मेष राशि वाले लोगों को होली के उत्सव के लिए जीवंत लाल रंग का चयन करना चाहिए। मेष राशि के लिए लाल रंग शुभ माना जाता है, इसमें प्रेम और सच्चाई से जुड़े गुण होते हैं।

वृषभ

वृषभ राशि वाले लोगों को होली के लिए बैंगनी और नारंगी रंग का चयन करना चाहिए। शुक्र द्वारा शासित वृषभ राशि सुरक्षा और स्थिरता जैसे गुणों से जुड़ी है। ये रंग विकास, स्थिरता और समृद्धि का प्रतीक हैं।

मिथुन 

मिथुन राशि वाले लोगों को हरे रंग से होली मनानी चाहिए, खासकर दोस्तों के साथ। हरा रंग प्रकृति का प्रतिनिधित्व करता है।

कर्क

कर्क राशि वाले लोगों को इस बार होली उत्सव के लिए नीला रंग चुनना चाहिए। क्योंकि कर्क राशि पर चंद्रमा का शासन है, इसलिए इस उत्सव के दौरान नीला रंग उनके लिए भाग्यशाली माना जाता है।

सिंह

सिंह राशि वाले लोगों को नारंगी रंग से होली खेलनी चाहिए। सिंह राशि पर सूर्य का शासन है। होली खेलते समय सिंह राशि के लिए यह रंग शुभ माना जाता है।

कन्या

कन्या राशि वाले पीले रंग का प्रयोग कर होली मना सकते हैं। बुध कन्या राशि पर शासन करता है, जो पृथ्वी तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। उन्हें सलाह दी जाती है कि यदि संभव हो तो अपनी बहनों और मौसी को नीला गुलाल लगाएं।

तुला

तुला राशि वालों को नीले और केसरिया रंग से होली खेलने की सलाह दी जाती है। शुक्र तुला राशि पर शासन करता है, जो वायु तत्व का प्रतिनिधित्व करता है।

वृश्चिक

वृश्चिक राशि के लोग अपने होली उत्सव के लिए किसी भी रंग का चयन कर सकते हैं क्योंकि वे मंगल के प्रभाव में हैं।

धनु

धनु राशि वालों को होली के लिए पीले रंग का उपयोग करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि यह बृहस्पति द्वारा शासित है और अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। पीला रंग शुभ माना जाता है और होली समारोह के दौरान दैवीय आशीर्वाद लाता है।

मकर

मकर राशि वालों को लाल, बैंगनी और भूरे रंग से होली खेलनी चाहिए। शनि द्वारा शासित मकर राशि पृथ्वी तत्व का प्रतिनिधित्व करती है।

कुंभ

कुंभ राशि वालों को होली के दौरान हल्के रंगों की बजाय गहरे रंगों का चयन करना चाहिए। यह उनके लिए शुभ माना जाता है। कुंभ राशि पर शनि का शासन है।

मीन 

मीन राशि वाले हरे और गुलाबी रंग से होली मना सकते हैं। इनका स्वामी ग्रह बृहस्पति है।

होली पर बन रहा है महायोग, जाने शुभ महूर्त और पूजा विधि!!

प्रत्येक वर्ष फाल्गुन महीने की पूर्णिमा तिथि के दिन होलिका दहन होता है और उसके अगले दिन होली मनायी जाती है।इस वर्ष होलिका दहन 7 मार्च रविवार को और रंगों वाली होली 8 मार्च सोमवार को मनाई जाएगी।

पूरे भारत में यह त्यौहार काफी धूमधाम से मनाया जाता है। ब्रज भूमि में तो हफ्ते भर पहले से ही होली की खुमार छाया रहता है। इस वर्ष भी लड्डू की होली, लट्ठमार होली इन सबकी शुरुआत हो चुकी है और रंग-गुलाल उड़ रहे हैं।

इस बार होली के मौके पर कई शुभ संयोग बन रहे हैं जिसके कारण इस त्यौहार का महत्व और भी अधिक बढ़ गया है।

शुभ मुहूर्त :

होलिका दहन मार्च 7, मंगलवार
होलिका दहन मुहूर्त- मुहूर्त रात्रि 3 से 4:30 बजे शुभ व 4:30 से 6 बजे तक

होली की पूजा विधि

  • होलिका पूजन शाम के समय किया जाता है। इसके लिए आप पूर्व या उत्तर की तरफ अपना मुख करके बैठें।
  • इसके बाद अपने आस -पास पानी की कुछ बूंदे छिड़कें। ऐसा करने से आपके पास की सभी नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है।
  • इसके बाद गोबर से होलिका बनाएं या फिर सार्वजनिक जगह पर जाकर जहां होलिका बनी हो वहां जाकर पूजन करें।
  • होलिका पूजन से पहले गणेश जी का पूजन अवश्य करें।
  • पूजन के लिए एक थाली में रोली, कच्चा सूत, चावल, फूल, साबुत हल्दी, बताशे, फल और एक लोटा पानी अवश्य लें।
  • इसके बाद नरसिहं भगवान का स्मरण करें होलिका पर रोली, चावल, फूल, बताशे अर्पित करें और मौली को होलिका के चारों और लपेटें।

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श्राइकोटी माता मंदिर : एक ऐसा अनोखा मंदिर जहां एक साथ नहीं जा सकते पति-पत्नी

हिंदू धर्म में ऐसी मान्यताएं हैं कि शादी के बाद विवाहित जोड़े को किसी भी शुभ कार्यक्रम, पूजा-पाठ, हवन आदि में एक साथ शामिल होना होता है। तीर्थ और पूजा-पाठ का शुभ फल पति-पत्नी के जोड़े के रूप में ही प्राप्त होता है।

वहीँ दूसरी तरफ देव भूमि हिमाचल प्रदेश में एक ऐसा मंदिर है, जहां पति-पत्नी एक साथ नहीं जा सकते। जी हाँ, आज हम आपको इसी अनोखे मंदिर और इससे जुड़ी रोचक बातें बताने जा रहे हैं, चलिए शुरू करते हैं:

देवभूमि हिमाचल प्रदेश में जिला शिमला के रामपुर में समुद्र तल से 11000 फीट की ऊंचाई पर मां दुर्गा का एक रूप विराजमान है जो श्राई कोटि माता के नाम से बहुत प्रसिद्ध है। इस मंदिर में पति-पत्नी दोनों जाते हैं, लेकिन दर्शन अलग अलग करते हैं।

इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि अगर कोई जोड़ा इस मंदिर में एक साथ जाए तो यह उनके लिए श्राप के समान है। वे अपने निजी जीवन में बहुत सारी समस्याओं का सामना करते हैं और अंततः एक दूसरे से अलग हो जाते हैं।

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पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार एक बार भगवान शिव ने अपने दोनों पुत्रों गणेश और कार्तिकेय को संपूर्ण ब्रह्मांड की परिक्रमा करने के लिए कहा।

कार्तिकेय जी परिक्रमा के लिए निकल गए, लेकिन गणपति जी महाराज ने माता-पिता के चारों ओर चक्कर लगा कर कहा कि माता-पिता के चरणों में ही भ्रमांड है और परिक्रमा पूरी कर ली।

जब तक कार्तिकेय जी घर वापस आए, तब तक गणेश जी का विवाह हो चुका था, जिससे कार्तिकेय जी बहुत गुस्सा हो गए और फिर उन्होंने फैसला किया कि वह जीवन भर कभी विवाह नहीं करेंगे।

जैसे ही मां पार्वती को कार्तिकेय के फैसले के बारे में पता चला, तो वह क्रोधित हो गईं और श्राप दिया कि जो भी जोड़ा इस मंदिर में एक साथ आएगा, वे भविष्य में निश्चित रूप से अलग हो जाएंगे। यही कारण है कि पति-पत्नी इस जगह पर एक साथ नहीं जाते हैं।

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अगर फिर भी कोई ऐसा करता है तो मां के श्राप अनुसार उसे ताउम्र एक दूसरे का वियोग सहना पड़ता है। जो भी परंपरा के अनुसार माता के दर्शन करता है, उसकी समस्त मनोकामना पूरी होती है।

यह मंदिर सदियों से लोगों की आस्था का केंद्र रहा है और मंदिर का रखरखाव माता भीमाकाली ट्रस्ट के पास है। घने जंगल के बीच स्थित इस मंदिर का रास्ता देवदार के घने पेड़ों से और भी रमणीय लगता है। शिमला पहुंचने के बाद नारकंडा होते हुए वाहन और बस से और फिर मनु गांव होते हुए यहां पहुंचा जा सकता है।

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ये है दुनिया का सबसे सुखी इंसान, खुश रहने के अनमोल टिप्स!

हमेशा सुखी और खुश रहने क्या फंडा क्या है? इस दुनिया के झमेले में फंस कर भी खुश और सुखी कैसे रहा जा सकता है।  इस पोस्ट में हम इसी विषय पर कुछ रोचक जानकारी आपके साथ शेयर करने वाले हैं।

दुनिया में शायद ही कोई ऐसा इंसान होगा जिसे कोई दुख या तकलीफ न हो। अगर आपसे कहा जाए कि दुनिया में ऐसा भी एक इंसान है जो दुनिया का सबसे खुश इंसान माना जाता है तो आपको इस बात पर विश्वास ही नहीं होगा क्योंकि हर किसी की जिंदगी में कुछ न कुछ उलझन बनी ही रहती है।

आज हम आपको एक ऐसे ही शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं। हम बात कर रहे हैं माथ्यु रिका के बारे में।

माथ्यु रिका (Matthieu Ricard) का जन्म सन 16 फ़रवरी 1946 को फ्रांस में हुआ था। वह एक फ्रांसीसी लेखक, फोटोग्राफर, अनुवादक और बौद्ध भिक्षु हैं, जो नेपाल में शेचेन तेनी दार्गयेलिंग मठ (Shechen Tennyi Dargyeling Monastery) में रहते हैं।


उन्हें दुनिया का सबसे खुश इंसान होने का दर्जा प्राप्त है। माथ्यु का दावा है कि वह कभी उदास नहीं होते। हालांकि यह सिर्फ उनका दावा नहीं है, वैज्ञानिकों ने उन पर रिसर्च भी की है जिससे यह पता चला है कि वह दुखी नहीं हैं।

एक रिपोर्ट के मुताबिक माथ्यु आखिरी बार 1991 में डिप्रैस हुए थे। साल 2016 में संयुक्त राष्ट्र ने अपनी हैप्पीनेस इंडैक्स रिपोर्ट में माथ्यु को दुनिया का सबसे खुश व्यक्ति घोषित किया था।

माथ्यु रिका (Matthieu Ricard) with Dalai Lama
माथ्यु रिका (Matthieu Ricard) with Dalai Lama

जनसेवा के लिए त्यागा वैज्ञानिक करियर

माथ्यु ने 1972 में पाश्चर संस्थान (Pasteur Institute) से आणविक आनुवंशिकी (molecular genetics) में पीएचडी की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने अपने वैज्ञानिक करियर को त्यागने और तिब्बती बौद्ध धर्म को अपनाने का तथा मुख्य रूप से हिमालय में रह कर जीवन बिताने का फैसला किया।

यूनीलैंड वैबसाइट की एक रिपोर्ट के मुताबिक 76 वर्षीय माथ्यु पर अमरीका की विस्कॉन्सिन यूनिवर्सिटी के न्यूरोसाइंटिस्ट ने शोध किया था। उन्होंने माथ्यु के सिर पर 256 सैंसर लगा दिए जिसमें यह पता चला कि जब रिचर्ड ध्यान करते थे, तो उनके मस्तिष्क में गामा तरंगें उत्पन्न होती थीं। ये गामा तरंगें ध्यान, सीखने और स्मृति से जुड़ी हैं।

रिकार्ड तीन प्रकार के ध्यान का उपयोग करता है: करुणा, खुली जागरूकता और विश्लेषणात्मक। उन्होंने एक दूरस्थ पहाड़ी झोपड़ी में कुल 5 साल एकांत ध्यान में बिताए हैं।

शोध में यह भी पाया गया कि उनके दिमाग का बायां प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स दाएं हिस्से की तुलना में अधिक सक्रिय था। इससे पता चला कि उनके दिमाग का खुश हिस्सा ज्यादा सक्रिय होता है। इसका निष्कर्ष यह निकला कि उन्होंने ध्यान के माध्यम से अपने मन को जगाया है।

माथ्यु रिका के खुश रहने का राज

बता दें कि माथ्यु रिका लोगों को खुश रहने का राज भी बताते हैं। उनका कहना है कि इंसान हमेशा अपने बारे में सोचता है। तब वह पूरी दुनिया को अपना दुश्मन मानता है और उनके साथ प्रतिस्पर्धा में रहता है। उनका कहा है कि यदि व्यक्ति सुखी रहना चाहता है तो उसे अपने बारे में सोचना बंद कर दूसरों के बारे में सोचना शुरू करना होगा।

माथ्यु का कहना है कि जब व्यक्ति में प्रेम, दूसरों के प्रति चिंता और परोपकार की भावना होती है तो वह खुद ही सुखी होने लगता है। उन्होंने अपने एक व्याख्यान में लोगों से कहा था कि यदि लोग प्रतिदिन 15 मिनट ध्यान करें और सुख देने वाली बातों पर विचार करें तो वे खुद ही प्रसन्नता से भर जाते हैं।

क्या है ब्लॉकबस्टर फ़िल्म कांतारा में दिखाई गई सदीयों पुरानी भूत कोला परंपरा

बड़े पर्दे के बाद नेटफ्लिक्स (Netflix) पर धूम मचाने वाली फ़िल्म “कांतारा” (KANTARA)  केजीएफ चैप्टर 2 (KGF Chapter 2 – 1200 करोड़) के बाद कन्नड़ फ़िल्म इंडस्ट्री की दूसरी सबसे ज़्यादा कमाई(450 करोड़) करने वाली फ़िल्म है। अगर आपने अभी तक यह फ़िल्म नहीं देखी तो यह Netflix पर उपलब्ध है।

इस फ़िल्म में एक ख़ास रस्म कोला करने का कई बार ज़िक्र है। कोला में गाँव के लोग एक ख़ास पर्व भूत कोला का आयोजन करते दिखाई देते हैं।

आख़िर फ़िल्म में दिखाया गया कोला क्या है और इसका क्या महत्व हैं? इस पोस्ट में हम कोला या भूत कोला के बारे में और फ़िल्म में दिखाई गई इसकी एक विशेष शैली और इसके महत्व पर चर्चा करेंगे।

भूत कोला या दैव कोला

भूत कोला, जिसे दैव कोला या नेमा भी कहा जाता है, भारत के उत्तरी केरल में तुलु नाडु के हिंदुओं और केरल के कासरगोड ज़िले  के कुछ हिस्सों में प्रचलित एक अनुष्ठानिक नृत्य प्रदर्शन है। यह नृत्य अत्यधिक शैलीबद्ध है और ‘भूतराधना’ या तुलु भाषी आबादी द्वारा पूजे जाने वाले स्थानीय देवताओं की पूजा के हिस्से के रूप में किया जाता है।

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भूत कोला (देवताओं के लिए नृत्य) मूल रूप से गाँव के देवता के मंदिर के पास खुले मैदान में किया जाता है। यह शाम के समय शुरू होता है और जैसे-जैसे शाम बीतती है, यह डांस परफॉर्मेंस एक शानदार अनुभव में बदल जाती है।

माना जाता है कि जो शख्स भूत कोला परफॉर्म करता है यानी नर्तक बनता है, उसके अंदर पंजुरी देवता आते हैं और वह गांव वालों के पारिवारिक मुद्दों और विवादों को सुलझाते हैं। वे अपना निर्देश भी गांव वालों के लिए जारी करते हैं। उनके फ़ैसले को सर्वोपरि माना जाता है और हर किसी को इसका पालन करना होता है।

मलयाली तेय्यम से मिलता जुलता नृत्य

इस अनुष्ठानिक नृत्य प्रदर्शन ने यक्षगान लोक रंगमंच(Yakshagana folk theatre) को प्रभावित किया है। भूत कोला पड़ोसी मलयालम भाषी आबादी के तेय्यम से बहुत मिलता जुलता नृत्य आधारित अनुष्ठान है।

यह अनुष्ठान तुलु नाडु के निवासियों के जीवन का एक हिस्सा है। इस फ़िल्म के लेखक, निर्देशक और मुख्य अभिनेता ऋषभ शेट्टी इसी क्षेत्र से सम्बंध रखते हैं शायद इसीलिए वह इस फ़िल्म में इतना जीवंत अभिनय कर पाए हैं।

दैवों की सूची

तुलु नाडु में कई श्रेणियों के विभिन्न देव हैं जिन्हें यह के निवासी अत्यंत श्रद्धा और सम्मान देते हैं।  यहाँ संक्षेप में तुलु लोगों द्वारा पूजे जाने वाले देवों की सूची है। यह मुख्यतः ५ हैं।

  • कोरगज्जा Koragajja तुलु लोगों द्वारा सबसे अधिक पूजे जाने वाले दैव हैं। किसी भी समस्या में मदद के लिए, खोई हुई चीज़ को वापस पाने के लिए, या किसी काम को समय पर पूरा करने के लिए इनकी प्रार्थना की जाती है।
  • पंजुरली Panjurli, एक जंगली सूअर की आत्मा है जिसकी पूजा फसलों की रक्षा के लिए जंगली सूअरों के खतरे को दूर करने के लिए की जाती है। फ़िल्म कांतारा में लोग इसी देवता की पूजा आराधना करते दिखाए गए हैं।तुलु पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव के आनंद उद्यान में एक जंगली सूअर मर गया। युवा सूअर की संतान को देवी पार्वती ने गोद लिया था। जैसे-जैसे वह बड़ा होता गया युवा सूअर उत्पाती होता गया और उसने भगवान शिव के बगीचे में पौधों और पेड़ों को नष्ट करना शुरू कर दिया। इससे भगवान शिव नाराज हो गए और उन्होंने उसे मारने का फैसला किया। देवी पार्वती ने शिव से उसे क्षमा करने के लिए कहा। इसलिए उसे मारने के बजाय, भगवान शिव ने सूअर को पृथ्वी पर भेज दिया और उसे पृथ्वी के लोगों की रक्षा करने का काम सौंपा। यह विशेष रूप से एक भूत (दिव्य आत्मा) बन गया जिसे पंजुरली के नाम से जाना जाता है।

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  • बोब्बर्या (Bobbarya) समुद्रों के देवता, जिनकी ज्यादातर मछुआरा वर्ग के लोग पूजा करते हैं।
  • कालकुड़ा और कल्लूर्ती (Kalkuda and Kallurti) दैव हैं जो भाई और बहन हैं। किंवदंती के अनुसार, कालकुड़ा एक महान मूर्तिकार थे जिन्होंने श्रवण बेलगोला निर्माण किया था। इनकी कहानी भी रोचक जो फिर कभी सही।
  • गुलिगा Gulliga देवता का जन्म देवी पार्वती और भगवान शिव के हाथों हुआ और शिव ने इनको भगवान विष्णु की सेवा में भेजा। गुलिग के उत्पात से ग़ुस्साए विष्णु ने गुलिग को पृथ्वी पर निर्वासित कर दिया।
  • कोटि सेनैय्या, कोटि और चेन्नय्या (Kōṭi Cennayya, Koti and Chennayya) जुड़वाँ नायक हैं जिन्हें योद्धा देवता के रूप में पूजा जाता है

कांतारा फ़िल्म में पंजुरली और गुलिगा देवों का ज़िक्र है। पंजुरली देवता राजा को चेतावनी देता है कि यदि राजा का परिवार या उसके उतराधिकारी अपने वादे से मुकरे और जमीन पर अपना दावा किया तो इससे उसके साथी (पंजुरली के साथी), क्रूर गुलिगा दैव का क्रोध भड़क उठेगा।

जैसा कि मैंने ऊपर बताया इस फ़िल्म में पंजुरली देव की आराधना कर पर्व कोला दिखाया गया है। भूत कोला या दैव नेमा अनुष्ठान में संगीत, नृत्य, गायन और विस्तारित वेशभूषा (Elaborated Costume) शामिल होती है।

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अनुष्ठान में, जहां (स्थान पर) देव वास करते हैं वहाँ उनके समक्ष नृत्य करते हुए उनका गुणगान किया जाता है।

अनुष्ठान में प्राचीन तुलु भाषा में देवता की उत्पत्ति का वर्णन किया जाता हैं और तब से लेकर देव की वर्तमान स्थिति के बारे में बताया जाता है। इस रस्म को पाददान (pāḍdanas) कहा जाता है।

वैसे भूत कोला के अलावा देव पूजा की अन्य मुख्य पद्धतियाँ हैं बंदी Bandi, नेमा Nema और अगेलु तम्बिला (Agelu tambila)।

उम्मीद है कि भूत कोला के बारे में दी गयी जानकारी आपको पसंद आयी। इस पोस्ट को शेयर करें और like करें।

भारत में जगहों के ऐसे अजीबोगरीब नाम जिन्हें सुनकर आप हंसी रोक नहीं पाएंगे!

भारतीयों द्वारा किए जाने वाले अजीबोगरीब काम और जुगाड़ तो आपने देखे होंगे। वहीँ भारत में गाँव और शहरों के अजीबोगरीब नाम भी आपने सुने होंगे। हो सकता है आप भी किसी अजीब से नाम वाले गाँव, शहर या जिले से सम्बन्ध रखते हों।

आज इस पोस्ट के माध्यम से हम आपके लिए लाये हैं अजीबोगरीब नाम वाली जगहों की सूची। कुछ ऐसे नाम जो बेशक होते तो आम चीज़ों के हैं लेकिन किसी जगह, कस्बे, गाँव या शहर का ऐसा नाम सुनने में थोड़ा अजीब लगता है।  तो आइए देखते हैं।

‘भैंसा गांव’, उत्तर प्रदेश के मथुरा तहसील के 247 गांवों में से एक है

‘काला बकरा’ – पंजाब के जालंधर जिले का एक कस्बा

चू***/चुटिया, Chutia, Asam – ओह, ऐसा नाम भी होता है? जी हां, ये जगह असम में है!

गधा, गुजरात Gadha Gujrat के सबर कांठा जिले की हिम्मतनगर तहसील का एक गांव है। वैसे ये नाम गड़ा/गढ़ा है लेकिन बाहर के लोग इसे जानबूझ कर गधा ही बुलाते हैं।

टट्टी खाना, तेलंगाना – Tatti Khana, Telangana,  यह राजधानी हैदराबाद में स्थित छोटा-सा एक उपनगर है अपने इस नाम के बावजूद घूमने लायक है।

चुटिया, रांची

कुत्ता, KUTTA, कर्नाटक राज्य में गोनीकोपाल के पास एक छोटा सा गांव है। हालाँकि इसे कन्नड़ में कुट्टा पढ़ा जाता होगा, जिसका मतलब है डंक। पर हम तो हिंदी में फन कर रहे है न?? 😉

लुल्ला नगर, पुणे, महाराष्ट्र – Lulla Nagar, Pune, Maharashtra। इसके बारे में मुझे कुछ नहीं कहना है 🤐

सबसे लंबे नाम का रेलवे स्टेशन Venkatanarasimharajuvaripeta है। संक्षेप में इसे श्री बोला जाता है।

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नरकटियागंज, बिहार (Narkatiaganj Bihar) के पश्चिमी चम्पारण जिला में, नेपाल की सीमा के पास का गाँव है.

पनौती (Panauti, Uttar Pradesh) गाँव उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में स्थित है

सुअर(Suar Uttar Pradesh), यह उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले ने स्थित एक शहर है

दूदू , राजस्थान (Dudu Rajsthan) के जयपुर जिले में स्थित एक विधानसभा क्षेत्र है

चौधरी चरण सिंह- किसानों का मसीहा जिसने किसान को दिया सर्वोच्च स्थान

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भारत के पांचवें प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह (23 दिसंबर 1902 – 29 मई 1987) की जन्म जयंती यानि 23 दिसंबर को भारत में किसान दिवस के रूप में मनाया जाता है। चौधरी चरण सिंह को किसानों का मसीहा भी कहा जाता है।

चौधरी चरण सिंह ने भूमि सुधारों पर काफ़ी सराहनीय काम किया था। साथ ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में और केंद्रीय वित्तमंत्री के रूप में उन्होंने गांवों और किसानों के विकास के महत्वपूर्ण योगदान दिया। चौधरी चरण सिंह ने अपना संपूर्ण जीवन भारतीयता और एक साधारण ग्रामीण किसान की तरह जिया।

किसान दिवस की स्थापना

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Choudhary Charan Singh (1902-1987)

वर्ष 2001 में भारतीय सरकार द्वारा चौधरी चरण सिंह  की जयंती पर उनके कार्यो को ध्यान में रखते हुए 23 दिसम्बर को राष्‍ट्रीय किसान दिवस की घोषणा की गई थी।

किसान दिवस‘ मेहनती किसानों को समर्पित है जो भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी कहे जाते हैं। 2001 से लेकर हर वर्ष 23 दिसंबर किसान दिवस के रूप में मनाया जाता है।

किसानों का महत्त्व

भारत एक कृषि प्रधान देश है। इसका मतलब है कि यहां की जनसंख्या का एक बड़ा भाग कृषि पर निर्भर है।

किसान  देश की प्रगति में विशेष सहायक होते हैं। किसान के बल पर देश अपने खाद्यान्नों के उत्पादन को बेहतर करके खुशहाल बन सकते है। पूर्व प्रधानमंत्री चरण सिंह को किसानों के अभूतपूर्व विकास के लिए विशेष योगदान दिया था।

चौधरी चरण सिंह की नीति किसानों व ग़रीबों को ऊपर उठाने की थी। उन्होंने हमेशा यह साबित करने की कोशिश की, कि किसानों के बिना देश व प्रदेश का विकास नहीं हो सकता।

उनका कहना था कि भारत का संपूर्ण विकास तभी होगा जब किसान, मज़दूर, ग़रीब सभी खुशहाल होंगे। देश में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी कृषि सुधारों पर अधिक बल दिया था।

किसानों के मसीहा का चौधरी चरण सिंह का योगदान

किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह का जन्म 23 दिसम्बर, 1902 को उत्तर प्रदेश के मेरठ ज़िले में हुआ था। उन्होंने खेती और गाँव को महत्व दिया। आज़ादी के बाद चौधरी चरण सिंह पूर्णत: किसानों के लिए लड़ने लगे। चौधरी चरण सिंह की मेहनत के कारण ही ‘‘जमींदारी उन्मूलन बिल ”साल 1952 में पारित हो सका।

इस एक बिल ने सदियों से खेतों में ख़ून पसीना बहाने वाले किसानों को जीने का मौका दिया। उन्होंने समस्त उत्तर प्रदेश में भ्रमण करते हुए कृषकों की समस्याओं का समाधान करने का प्रयास किया।

किसानों के हित में उन्होंने 1954 में उत्तर प्रदेश भूमि संरक्षण कानून को पारित कराया। उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाक़ों में कृषि मुख्य व्यवसाय था।

चौधरी चरण सिंह खुद एक किसान परिवार से सम्बन्ध रखते थे और वह उनकी समस्याओं को अच्छी तरह से समझते थे। राजनेता होने से पहले वे एक अच्छे लेखक भी थे।

उनकी अंग्रेजी पर अच्छी पकड़ थी। लेखक के तौर पर उन्होंने एबॉलिशन ऑफ जमींदारी, इंडियाज पॉवर्टी एंड इट्ज सॉल्यूशंस और लीजेंड प्रोपराइटरशिप जैसी किताबें लिखी हैं।

भारत की इन “श्रापित नदियों” को छूने भर से बिगड़ जाते हैं सारे काम

भारत में नदियों का धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक महत्‍व रहा है। भारत का जब भी प्राचीन और मध्यकाल इतिहास पढ़ा जाता है तो नदियों का जिक्र ज़रूर होता है। कहा जाता है कि प्राचीन काल से लेकर मध्यकाल तक कई गांव और शहर नदियों के किनारे ही होते थे।

fundabook.com अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाली किसी भी कहानी या तथ्य का समर्थन नहीं करता। यह पोस्ट केवल पाठकों के ज्ञान और रोचक तथ्यों के सन्दर्भ में पोस्ट की गयी है। पाठक कृपया अपने विवेक से काम लें।

गंगा, सरस्वती, कावेरी, ब्रह्मपुत्र और सतलुज आदि नदियां भारत की सबसे प्राचीन नदियों में शामिल हैं। भारत के कई हिस्सों में इन पवित्र नदियों की पूजा-पाठ भी होती है। एक तरह से ये सभी नदियां पवित्र मानी जाती हैं।

लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत में कुछ श्रापित नदियां भी मौजूद हैं जी हाँ इस लेख में हम आपको भारत की श्रापित नदियों के बारे में बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं।

फल्गु नदी

फल्गु नदी बिहार के गया जिले की एक प्रमुख नदी है। गया एक ऐसा जिला है जहां पिंडदान या श्राद्ध के लिए हर साल लाखों लोग पहुंचते हैं। लेकिन इस नदी को लेकर कहा जाता है कि यह एक श्रापित नदी है।

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कई लोगों का मानना है कि बिहार की फल्गु नदी को सीता माता ने श्राप दिया था। मान्‍यता है कि माता सीता के श्राप से फल्‍गु नदी का जल धरती के अंदर चला गया था। इस कारण फल्‍गु को भू-सलिला भी कहा जाता है।

चंबल नदी

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चंबल मध्‍यप्रदेश की प्रमुख नदी है। यह नदी “जानापाव पर्वत ” बांगचु पॉइंट महू से निकलती है। इसका प्राचीन नाम “चर्मण्वती ” है। चंबल को डाकुओं का इलाका माना जाता है, पर अब यहां डाकू नहीं रहते, लेकिन इस नदी को लोग अपवित्र जरूर मानते हैं। इस नदी के बारे में कहा जाता है कि यह कई जानवरों के खून से उत्पन्न हुई है।

कर्मनाशा नदी

बिहार और उत्तर प्रदेश राज्य में बहने वाली यह एक प्रमुख नदी है। यह गंगा नदी की एक उपनदी है। इसकी उत्पत्ति बिहार के कैमूर ज़िले में होती है और फिर यह बहते हुए बिहार व उत्तर प्रदेश की सीमा निर्धारित करती है। एक तरह से दोनों राज्यों को यह नदी अलग भी करती है।

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इन दोनों ही राज्यों के लोगों का मानना है कि जो इस नदी का पानी छूता है उसके बने काम चंद मिनटों में बिगड़ जाते हैं। कई लोगों का मानना है कि इस नदी का पानी श्रापित है इसलिए कोई भी इस नदी का पानी छूता नहीं है।

कोसी नदी

कोसी नदी या कोशी नदी नेपाल में हिमालय से निकलती है और बिहार में भीम नगर के रास्ते से भारत प्रज्वल में दाखिल होती है।

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कहते हैं जब भी इस नदी में बाढ़ आती हैं, जो स्थानीय लोग प्रभावित होते हैं और कई लोगों की तो जान भी चली जाती है। हालांकि, लोग इसे श्रापित नहीं कहते, लेकिन इसे शोक नदी के नाम से बुलाते हैं।

जवां और खूबसूरत त्वचा के लिए अपनाएं नाशपाती, होंगे कमाल के फायदे

नाशपाती विटामिन्स, मिनरल्स, एंटीऑक्सिडेंट्स, डाइटरी फाइबर्स, फ्लेवेनॉएड्स भरपूर होती है, तो क्यों न इसे अपने आहार में शामिल किया जाए? यह आंत और प्रतिरक्षा में सुधार के लिए बहुत अच्छी होती है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह रसदार और मीठा फल आपकी त्वचा पर चमत्कारी असर कर सकता है? जी हाँ इसे आप चाहें तो अपने चेहरे पर लगा भी सकते हैं या फिर इसे अपने खाने में भी शामिल कर सकते हैं।

आज इस पोस्ट में हम बताने जा रहे हैं नाशपाती के चमत्कारी फायदों के बारे में, तो चलिए शुरू करते हैं :

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नाशपाती के त्वचा लाभ

जब हम विटामिन सी के बारे में सोचते हैं, तो हमारे दिमाग में खट्टे फल आते हैं। लेकिन अगर आपको खट्टी चीज़ें पसंद नहीं है, तो आप नाशपाती ट्राय कर सकते हैं जिसमें अच्छी मात्रा में विटामिन ए और सी होता है।

नाशपाती त्वचा के रूखेपन और झुर्रियों को भी कम करती है। इस फल के अर्क का उपयोग त्वचा उपचार सामग्री के रूप में भी किया जाता है क्योंकि इसमें न केवल एंटीऑक्सिडेंट होते हैं, बल्कि यूवीबी-अवरोधक क्षमता भी होती है।

मुंहासों की समस्या के लिए

नाशपाती ऐसे लोगों की स्किन के लिए काफी अच्छा है, जिन्हें मुंहासों की समस्या रहती है। इसमें विटामिन और मिनरल्स प्रचुर मात्रा में होते हैं। ये न्यूट्रिएंट्स आपकी स्किन को जवां बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

नाशपाती से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। इसी से मुंहासों में कमी आती है और दूसरी तरह के स्किन इन्फेक्शन होने का खतरा भी कम हो जाता है।

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तैलीय त्वचा के लिए

आप अपनी त्वचा पर तेल को नियंत्रित करने के लिए सिर्फ शहद के साथ मैश की हुई नाशपाती का उपयोग भी कर सकते हैं, जिससे यह तैलीय त्वचा वालों के लिए एकदम सही है।

इसमें डाइटरी फाइबर्स अच्छी मात्रा में होते हैं। डाइटरी फाइबर आपकी स्किन को मुलायम और चमकदार बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

फेस पैक

नाशपाती और दलिया

इसके रस के अर्क के साथ नाशपाती, दलिया और पानी मिलाएं और इसका पेस्ट बना लें। इसे अपने चेहरे पर 10 मिनट के लिए लगाएं और उसके बाद गुनगुने पानी से धो लें।

यह आपकी त्वचा को जवां बनाए रखने में मदद करेगा क्योंकि यह उम्र के साथ-साथ झुर्रियों को भी कम करता है।

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मॉइस्चराइजिंग इंग्रेडिएंट के साथ

एक नाशपाती को मैश करके उसमें ताजी मलाई और शहद मिलाएं और इस पेस्ट को हफ्ते में तीन बार फेस मास्क की तरह इस्तेमाल करें।

स्क्रब के रूप में

एक्सफोलिएशन के बेहतरीन सेशन के लिए आप अपने स्क्रब में नाशपाती को मैश भी कर सकते हैं।