6 जून का इतिहास

6 जून का इतिहास:-

  • 1674 – क्षत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक हुआ था।
  • 1699 – 16वाँ मुगल बादशाह आलमगीर द्वितीय का जन्म। आलमगीर द्वितीय ने 1754 से 1759 ई. तक राज किया था।
  • 1752 – भयंकर आग लगने के कारण मास्को में करीब 18,000 जलकर राख हो गए थे।
  • 1808 – नेपोलियन के भाई जोसेफ को स्पेन का राजा बनाया गया था।
  • 1919 – हिन्दी सिनेमा के एक प्रसिद्ध गीतकार राजेन्द्र कृष्ण का जन्म।
  • 1929 – अभिनेता, राजनेता और समाजसेवी सुनील दत्त का जन्म।
  • 1936 – प्रसिद्ध फ़िल्म निर्माता डी. रामानायडू का जन्म।
  • 1957 – दर्शन के प्रसिद्ध विद्वान और इलाहाबाद विश्वविद्यालय में दर्शन विभाग के अध्यक्ष रामचंद्र दत्तात्रेय रानाडे का निधन।
  • 1966 – अमेरिका के मिसिसिपी विश्वविद्यालय में रंगभेद के ख़िलाफ आवाज़ उठाने वाले पहले अश्वेत मानवाधिकार कार्यकर्ता, जेम्स मेरिडिथ पर एक व्यक्ति ने गोलियां चलाईं।
  • 1967 – सामाजिक कार्यकर्ता कैप्टन अवधेश प्रताप सिंह का निधन।
  • 1981 – बिहार की बाघमती नदी में एक ट्रेन गिर गई, उसमें सवार 1000 लोगों में से क़रीब 800 की मौत हो गई।
  • 1995 – पाकिस्तान में बाल अपराधियों को कोड़े मारने अथवा उनकी फ़ांसी की सज़ा प्रतिबंधित की गई।
  • 1997 – बैंकॉक में भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका एवं थाईलैंड ने बिस्टेक नामक आर्थिक सहयोग समूह का गठन किया।
  • 2001 – शाही परिवार पर गोलियाँ दीपेन्द्र ने ही चलाई थीं, प्रत्यक्षदर्शी रिश्तेदार राजीव शाही का प्रेस में बयान।
  • 2002 – इस्रायली सेना ने रामल्ला में फ़िलिस्तीनी नेता यासिर अराफात के मुख्यालय पर हमला किया।
  • 2004 – भूतपूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन का निधन।
  • 2005 – ईरान गैस पाइप लाइन योजना पर भारत और पाकिस्तान में सहमति।
  • 2007 – दक्षिण अफ़्रीका की नस्ल विरोधी नेता विनी मैडिकिजेला मंडेला के कनाडा प्रवेश पर रोक।
  • 2008 – कर्नाटक में बी. एस. येदयुरप्पा की अगुवाई वाली बीजेपी की पहली सरकार ने विश्वास मत हासिल किया।
  • 2008 – अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन में जापानी लैव कीबो ने कार्य करना शुरू किया।

भारतीय सिनेमा जगत की कुछ दिलचस्प बातें 
5 जून का इतिहास
History of 5 June 

इन तरीकों से बचाएं पर्यावरण को !!

हर साल आज ही के दिन (5 जून) ‘विश्व पर्यावरण दिवस‘ मनाया जाता है। रोजमर्रा की जिंदगी में अपने परिवेश की रक्षा करने के हमें कई अवसर मिलते हैं लेकिन हममें से कितने लोग हैं जो रुक कर इस बारे में सोचते भी हैं?

पर्यावरण को बचाने के लिए वास्तव में हर व्यक्ति के लिए पहला कदम उठाना आवश्यक है। हर कोई अपनी दिनचर्या के दौरान पर्यावरण की रक्षा के लिए कुछ न कुछ अवश्य कर सकता है।

इसके लिए आपको कोई बहुत मेहनत करने की भी जरूरत नहीं है। बस कचरा कमसे कम पैदा करना, रिसाइकिल हो सकने वाली हर सम्भव चीज को आम कूड़े में न फैंकना, कमरे से निकलते समय बिजली, पंखा, टी.वी. आदि को बंद कर देना कुछ बहुत सरल काम हैं, परंतु ये भी बहुत अंतर पैदा कर सकते हैं।

पानी व्यर्थ न बहाना, रोशनी के लिए एल.ई डी. बल्बों का उपयोग क्योंकि वे बिजली की कम खपत करते हैं, भी पर्यावरण संरक्षण में बहुत मदद कर सकते हैं।

इन तरीकों से आप भी दे सकते हैं योगदान

  • घर में पैदा होने वाले कूड़े को अलग करें। जब आप ऐसा करना शुरू करते हैं तो आपको उसमें कुछ ऐसी चीजें मिल सकती हैं जिन्हें रिसाइकिल किया जा सकता है।
  • आवश्यक होने परही बिजली के उपकरणों का प्रयोग करें। इसमें पंखा, अवन और एयरकंडीशनर आदि शामिल हैं।
  • कागज की बर्बादी न करें। कागज के लिए हम वृक्ष काटते हैं। इनकी बचत से वृक्षों की सुरक्षा होती है।
  • पैदल चलें, साइकिल का उपयोग करें या बस से स्कूल जाएं। इससे ईंधन की बचत होती है एवं प्रदूषण भी घटता है।
  • ब्रश करते समय पानी बंद रखें। इससे पानी की बचत होती है।
  • जैव बगीचा लगाएं एवं उसके लिए कम्पोस्ट बनाएं। इससे आप प्राकृतिक संसाधनों के प्रभावकारी उपयोग को सीख सकते हैं।
  • वृक्षारोपण करें। वे आपके पर्यावरण को हरा-भरा तथा स्वस्थ रखते हैं।
  • वीडियो गेम / टी.वी. की बजाय खेल का समय प्रकृति के साथ बिताएं। आप ऊर्जा की बचत कर सकते हैं, साथ ही अधिक स्वस्थ रह सकते हैं।
  • प्रकृति का संतुलन बनाए रखने के संदेशवाहक बनें।

पंजाब केसरी से साभार

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जानिए 5 जून यानी ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ का महत्व!!

विश्व पर्यावरण दिवस पूरे विश्व में 5 जून  को मनाया जाता है l आपने इसके बारे में सुना होगा लेकिन सभी लोग नहीं जानते है कि पर्यावरण दिवस क्यों मनाया जाता है l

दरअसल पर्यावरण दिवस, पर्यावरण के प्रति जागरूकता और राजनीतिक चेतना जागृत करने के लिए मनाया जाता है जिससे आम जनता को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया जा सके l

5 जून को ही क्यों?

विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून को ही क्यों मनाया जाता है? दरअसल पर्यावरण प्रदूषण की समस्या पर सन् 1972 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने स्वीडन में पहला पर्यावरण सम्मेलन 5 से 16 जून तक आयोजित किया था जिसमें विश्व भर के 119 देशों ने भाग लिया था l

स्वीडन में हुए पहले सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) का जन्म हुआ इसलिए इसे प्रति वर्ष 5 जून को पर्यावरण दिवस आयोजित करके लोगों को प्रदूषण की समस्या से अवगत कराया जाता है l पर्यावरण दिवस का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता लाना है l

पहले सम्मेलन में भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ‘पर्यावरण की बिगड़ती स्थिति एवं उसका विश्व के भविष्य पर प्रभाव‘ विषय पर व्याख्यान दिया था l पर्यावरण-सुरक्षा की दिशा में यह भारत का पहला कदम था l

क्यों मनाया जाता है पर्यावरण दिवस?

पर्यावरण दिवस बड़े पैमाने पर प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुन्ध दोहन, जंगलों की कटाई और ग्लोबल वार्मिंग से बचाव और भविष्य में आने वाले खतरों से निपटने की इच्छा से मनाया जाता है l

हर साल पर्यावरण दिवस के लिए एक नया विषय और एक नई थीम चुनी जाती है l 19 नवंबर 1986 को लागू हुए पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत जल, वायु, भूमि तथा इनसे संबंधित कारक जैसे मानव, पौधों, सूक्ष्म जीव, अन्य जीवित पदार्थ आते है l

पर्यावरण दिवस का उद्देश्य लोगों को हरित पर्यावरण के महत्व को समझाना और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को याद दिलाना है .

आगे पढ़ें >> कैसे दे सकते हैं योगदान?

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ये खूबसूरत पौधे हैं मच्छरों के ‘दुश्मन’, घर में जरूर लगाएँ इन्हें!

हर साल 25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मकसद मच्छरों से फैलने वाली खतरनाक बीमारी मलेरिया के बारे में जागरूकता फैलाना है। 2021 में दुनिया भर में मलेरिया से  619,000 मौतें हुईं।

चूंकि मलेरिया मच्छरों से फैलने वाली बीमारी है, इसलिए इससे बचने का सबसे आसान तरीका है कि आप खुद को मच्छरों से बचाना। मच्छरों से न केवल मलेरिया होता है बल्कि डेंगू और चिकनगुनिया जैसी घातक बीमारियां भी होती हैं।

मच्छरों के लिए बाजार में कई तरह के उत्पाद उपलब्ध हैं, लेकिन समस्या यह है कि इनमें कई तरह के रसायन पाए जाते हैं, जो आपके लिए हानिकारक हो सकते हैं।

इसका सबसे अच्छा विकल्प हैं पौधे। दरअसल हमारे आस-पास कुछ ऐसे पौधें हैं जो मच्छरों को भगाने की क्षमता रखते हैं। तो चलिए जानते हैं इन पौधों के बारे में।

गेंदे का पौधा

गेंदे का पौधा सिर्फ सजावटी फूल नहीं है, बल्कि इसमें कई गुण हैं जो इसे घर के लिए एक अद्भुत फूल वाला पौधा बनाते हैं। इस पौधे के फूलों और पंखुड़ियों से एक विशेष सुगंध निकलती है, जो मच्छरों के लिए हानिकारक होती है।

यही वजह है कि मच्छर इसके करीब आने से डरते हैं। इस पौधे को आप अपने घर के आंगन, बालकनी या टैरेस एरिया में रख सकते हैं।

तुलसी का पौधा

तुलसी निर्विवाद रूप से एक आयुर्वेदिक गुणों वाल पौधा है जिसके पत्ते न सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाते हैं बल्कि मच्छरों को भगाने में भी काफी कारगर होते हैं।

ऐसा इसलिए क्योंकि तुलसी के पत्तों में तीखी गंध होती है जिससे मच्छर और मक्खियां दोनों दूर रहते हैं। इसे बगीचों या कंटेनरों में उगाया जा सकता है और घर के आसपास रखा जा सकता है।

सिट्रोनेला पौधा

इस पौधे की घास लगभग 5-6 फीट तक बढ़ती है। आप इसे बगीचे या छत के कोनों में गुच्छों में लगा सकते हैं। आप इसे गमलों में भी लगा सकते हैं। इस पौधे की विशिष्ट गंध मच्छरों को दूर भगाने में मदद करती है।

आप अपने घर को साफ करने के लिए सिट्रोनेला तेल का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। ध्यान रखें कि सिट्रोनेला के पौधे को अच्छी मात्रा में धूप और पानी की जरूरत होती है।

पुदीने का पौधा

पुदीने का पौधा ताजी सांस देने और खाने में एक अनोखा स्वाद जोड़ने का काम करता है। पुदीने की महक में मच्छरों को भगाने की क्षमता होती है। इसी प्रकार पत्तियों से निकलने वाली तेज तीखी गंध अन्य प्रकार के कीड़ों को भी दूर भगाती है।

पुदीना को गमलों में उगाया जा सकता है, और इसके लिए नम मिट्टी और अच्छी जल निकासी की आवश्यकता होती है। जबकि कुछ किस्में छाया में उग सकती हैं, हरे पौधों को कठोर, सीधी धूप से सुरक्षा की आवश्यकता होती है।

हीरों के बारे में टॉप 10 अद्भुत तथ्य !

अधिकांश लोगों को “साफ सफेद” हीरों के बारे में ही जानकारी होती है, जबकि हीरे कई रंगों जैसे गुलाबी, नीले, बैंगनी, लाल, नारंगी या किसी भी अन्य रंग में भी आते हैं। ये रंग पत्थर में छोटी मात्रा में अशुद्धियों के कारण होते हैं। ये बहुत ही कीमती होते है। जिन्हें आज “फैंसी” हीरे का नाम दिया गया है।

हीरो के बारे में कुछ अद्भुत तथ्य

  1. वैज्ञानिकों को हाल ही में अंतरिक्ष में चन्द्रमा के आकार का हीरा दिखाई दिया है। उन्होंने इस हीरे का नाम “लूसी” रखा है। क्योंकि यह नाम बीटल्स बैंड ग्रुप के गाने में “लूसी इन द स्काई विद डायमंड” में आता है। इस हीरे का भार 5 लाख खरब पौंड है।
  2. हीरे की खोज सबसे पहले भारत में 4,000 साल पहले हुई थी। जब भारत में हीरों का उत्पादन घटता जा रहा था। तो ब्राजील के मीनास गेरेस शहर में इसका उत्पादन बढ़ने लगा था।
  3. मेक्सिको के वैज्ञानिकों ने दावा किया है, कि वह टकीला को हीरे में बदल सकते हैं। लेकिन उनके लिए इतना टकीला जमा करना बहुत मुश्किल है जिससे एक हीरे की अंगूठी बनाई जा सके।
  4. हीरा और कोयला दोनों कार्बन से ही बनते हैं। लेकिन दोनों का अलग-अलग क्रिस्टल ढांचा होता है। आपने देखा होगा कि कार्बन थोड़ी चमकदार होती है।
  5. हमारी धरती पर इतने ज्यादा हीरे हैं कि यहां पर रहने वाले हर एक इंसान को एक कप हीरो का भर के दिया जा सकता है। लेकिन उद्योगों द्वारा ऐसा करने से सख्ती से मना किया गया है।
  6. ज्यादातर मिलने वाले हीरे 1 से 3 अरब साल पुराने होते हैं। जिनको हीरा बनने से पहले जमीन के अंदर 900-1300 डिग्री सेंटीग्रेड की गर्मी में अरबों सालों का समय लगा था।
  7. हीरे दुनिया के सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ होते हैं। सिर्फ दूसरा हीरा ही हीरे पर खरोंच डाल सकता है।
  8. प्राचीन समय में हिंदू धर्म को मानने वाले लोग अपनी धार्मिक मूर्तियों की आँखों पर हीरों को लगाते थे। उनका यह मानना था कि ऐसा करने भगवान उनको आने वाले खतरे से रक्षा करेंगे।
  9. दुनिया के 80 प्रतिशत हीरों को उद्योगों द्वारा इस्तेमाल में लाया जाता है, क्योंकि दुनिया के 80 प्रतिशत हीरे गहने बनाने के लिए उपयुक्त नहीं होते।
  10. प्राचीन समय में लोग हीरों को अपनी ताकत और साहस दिखाने के लिए पहनते थे।

बैसाखी स्पेशल सॉन्ग : बैसाखी के ये पांच गाने आपको झूमने पर मजबूर कर देंगें

बैसाखी का त्यौहार पंजाब के साथ साथ पुरे भारत में धूम धाम से मनाया जाता है। अगर बैसाखी की बात करें और ढोल नगाड़े, भांगड़ा के साथ पंजाबी गानों का जिक्र न हो तो ऐसा नहीं हो सकता। 14 अप्रैल को बैसाखी का पर्व बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है और इसकी धूम हर तरफ देखने को मिलती है।

बैसाखी के त्यौहार पर आप अपनी प्लेलिस्ट में कुछ गाने भी जोड़ सकते हैं। ये गाने आपके त्यौहार का मजा और भी बढ़ा देंगे तो चलिए देखते हैं :-

आई बैसाखी

मशहूर पंजाबी सिंगर दिलजीत दोसांझ की हिट फिल्म ‘सज्जन सिंह रंग रूज‘ का बैसाखी स्पेशल गाना आपको जोश से भर देता है। इस गाने को सुनकर आप खुद को थिरकने से नहीं रोक पाएंगे।

अपना पंजाब होवे

पंजाबी म्यूजिक सिंगर गुरदास मान का गाया गाना उनके अच्छे गानों में से एक है। जहां यह गीत पंजाब की जीवन शैली को दर्शाता है, वहीं पंजाब की विशिष्ट संस्कृति को भी गाने के बोलों में अच्छी तरह से बुना गया है।

मेरे देश की धरती

बॉलीवुड में ऐसे कई गाने हैं जिन्हें इस त्यौहार के मौके पर बजाया जा सकता है। इन्हीं गानों में से एक है ‘मेरे देश की धरती‘, यह गाना इस त्यौहार पर बिल्कुल फिट बैठता है, क्योंकि बैसाखी का त्यौहार मुख्य रूप से फसल की खुशी में मनाया जाता है और इस गाने को भी खिलते खेतों पर फिल्माया गया है।

ऐसा देश है मेरा

वीर-ज़ारा फिल्म का गाना ‘ऐसा देस है मेरा‘ पंजाब के खूबसूरत ग्रामीण इलाकों को हरे भरे खेतों और खुले नीले आसमान के साथ जीवंत करता है। उदित नारायण, लगा मंगेशकर, गुरदास मान और पृथा मजूमदार द्वारा गाया गया ट्रैक आपका है।

नंबर वन पंजाबी

 

बॉलीवुड फिल्मचोरी चोरी चुपके चुपके‘ का गाना ‘नंबर वन पंजाबी‘ आपके बैसाखी त्यौहार की भावना को दोगुना कर देता है। इस गाने को सुनने के बाद आपके पैर जरूर कांपने लगेंगे।

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जानें क्यों मनाया जाता है बैसाखी का पर्व?

जानें क्यों मनाया जाता है बैसाखी का पर्व?

बैसाखी हर्ष और उल्लास का पर्व है जिसे देश के भिन्न-भिन्न भागों में रहने वाले सभी धर्मपंथ के लोग अलग-अलग तरीके से मनाते हैं। हर साल ये पर्व अप्रैल के महीने में मनाया जाता है। इस बार बैसाखी 14 अप्रैल को है। आइए जानते क्यों मनाया जाता है बैसाखी का पर्व।

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अप्रैल में क्यों मनाते हैं बैसाखी

बैसाखी मुख्यत: कृषि पर्व है, जिसे दूसरे नाम से ‘खेती का पर्व‘ भी कहा जाता है। यह पर्व किसान फसल काटने के बाद नए साल की खुशियों के रूप में मानते हैं।

इस महीने अनाज फसल पूरी तरह से पक कर तैयार हो जाती है और पकी हुई फसल को काटने की शुरुआत भी हो जाती है। किसान प्रकृति को अच्छी फसल के लिए धन्यवाद देते है।

खालसा पंथ की स्थापना

इस दिन सिखों के दसवें गुरु – गुरु गोविंद सिंह जी ने आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की नींव रखी थी और आनंदपुर साहब के गुरुद्वारे में पांच प्यारों से वैशाखी पर्व पर ही बलिदान के लिए आह्वान किया गया था।

खालसा‘ खालिस शब्द से बना है, जिसका अर्थ शुद्ध, पावन या पवित्र होता है। गुरु गोबिंद सिंह जी ने गुरुओं की वंशावली को समाप्त कर दिया। इसके बाद सिख धर्म के लोगों ने गुरु ग्रंथ साहिब जी को अपना मार्गदर्शक बनाया।

खालसा पंथ की स्थापना के पीछे गुरु गोविंद सिंह जी का मुख्य लक्ष्य लोगों को तत्कालीन मुगल शासकों के अत्याचारों से मुक्त कर उनके धार्मिक, नैतिक और व्यावहारिक जीवन को श्रेष्ठ बनाना था।

इस पंथ के द्वारा गुरु गोविंद सिंह जी ने लोगों को धर्म और जाति के आधार पर भेदभाव छोड़कर इसके स्थान पर मानवीय भावनाओं को आपसी संबंधों में महत्व देने की भी दृष्टि दी।

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ऐसे मनाते हैं बैसाखी

इस दिन अरदास के लिए श्रद्धालु गुरुद्वारों में जाते हैं। आनंदपुर साहिब में बैसाखी का मेला लगता है, वहां दुनियाभर से बहुत भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।

सभी गुरुद्वारों में ‘पंचबानी‘ का पाठ पढ़ा जाता है और अरदास के बाद गुरु जी को कड़ा प्रसाद का भोग लगाया जाता है। प्रसाद भोग लगने के बाद सब भक्त ‘गुरु जी के लंगर’ में भोजन करते हैं।

रात होते ही आग जलाकर उसके चारों तरफ एकत्र होते हैं और फसल कटने के बाद आए धन की खुशियां मनाते हैं। नए अन्न को अग्नि को समर्पित किया जाता है और पंजाब का परंपरागत नृत्य भांगड़ा और गिद्दा किया जाता है

जानिए राम नवमी का महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

राम नवमी हिन्दू धर्म का एक पावन त्यौहार है। यह त्यौहार भगवान श्रीराम को समर्पित है। इसी दिन मर्यादा पुरुषोत्त्म श्रीराम का जन्म हुआ था।

इसलिए राम नवमी के दिन भगवान राम की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। रामनवमी का त्यौहार प्रति वर्ष चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी को आता है। इस वर्ष 2023 में यह 30 मार्च को है।

रामनवमी 2023 पूजा का शुभ मुहूर्त

मार्च 30, 2023 को सुबह 11 बजकर 11 मिनट से शुरू होकर दोपहर 01 बजकर 40 मिनट तक

कैसे मनायी जाती है राम नवमी

राम नवमी के दिन भगवान श्रीराम की उपासना की जाती है। श्रीराम की मूर्तियों को गंगा जल से स्नान कराया जाता है। उनकी मूर्ति को पालने में झुलाया जाता है। इस दिन भक्त रामायण का पाठ करते हैं।

इस दिन राम मंदिर में भगवान श्रीराम के भजन-कीर्तन गाए जाते हैं। भक्त झांकियां भी निकालते हैं। लोग उनकी आराधना व्रत-उपवास करते हैं।

राम नवमी का महत्व

हिन्दू धर्म में राम नवमी का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने अयोध्या के राजा दशरथ की पहली पत्नी कौशल्या की कोख से भगवान राम के रूप में मनुष्य जन्म लिया था।

हिन्दू मान्यताओं में भगवान राम को सृष्टि के पालनहार श्री हरि विष्णु का सातवां अवतार माना जाता है। कहा जाता है कि श्री गोस्वामी तुलसीदास जी ने जिस राम चरित मानस की रचना की थी, उसका आरंभ भी उन्होंने इसी दिन से किया था।

राम नवमी की पूजन विधि

  • ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • भगवान राम का नाम लेते हुए व्रत का संकल्प लें।
  • घर के मंदिर में राम की मूर्ति की स्थापना कर उसमें गंगाजल छिड़कें।
  • मूर्ति के सामने घी का दीपक जलाकर रखें।
  • रामलला की मूर्ति को पालने में बैठाएं।
  • रामलला को स्नान कराकर वस्त्र पहनाएं।
  • इसके बाद रामलला को मौसमी फल, मेवे और मिठाई समर्पित करें। खीर का भोग लगाना अति उत्तम माना जाता है।
  • इसके बाद धूप-बत्ती से भगवान् की आरती उतारें।
  • आरती के बाद रामायण का पाठ करें।
  • नौ कन्याओं को घर में बुलाकर उनको भोजन कराएं। साथ ही यथाशक्ति उपहार और भेंट देकर विदा करें।
  • इसके बाद घर के सभी सदस्यों में प्रसाद बांटकर व्रत खोलें।

भगवान राम के बारे में विशेष बातें

  • भगवान श्री राम को मर्यादा का प्रतीक माना जाता है।
  • उन्हें पुरुषोत्तम यानि श्रेष्ठ पुरुष की संज्ञा दी जाती है।
  • राम जी स्त्री पुरुष में भेद नहीं करते। अनेक उदाहरण है जहां वे अपनी पत्नी सीता के प्रति समर्पित व उनका सम्मान करते नज़र आते हैं।
  • भगवान राम समाज  में ऊंच नीच के भेदभाव को भी नहीं मानते। शबरी के झूठे बेर खाने का उदाहरण इसे समझने के लिए सर्वोत्तम है।
  • राम जी वेद शास्त्रों के ज्ञाता और समस्त लोकों पर अपने पराक्रम का परचम लहराने वाले हैं।
  • राम नवमी के दिन धूमधाम के साथ राम जन्मोत्सव मनाते हुए श्रीरामचरित मानस ग्रंथ का पाठ करना चाहिए।
  • इस दिन भगवान् राम को मेवा एवं पंजरी का भोग लगाना चाहिए।
  • रामनवमी के दिन उपवास रखने से जीवन में सुख समृद्धि आती है और सभी तरह के पापों का नाश हो जाता है।

चैत्र नवरात्रि के दिनों में माँ दुर्गा को प्रसन्न करने के अचूक उपाय

नवरात्रि भारतवर्ष में हिंदुओं द्वारा मनाया जाने वाला प्रमुख पर्व है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ अलग- अलग रूपों की पूजा की जाती है।

वैसे तो साल में चार बार चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ के महीनों में नवरात्रि आती है, लेकिन उनमें से केवल चैत्र और आश्विन माह की नवरात्रि ही बड़े स्तर पर मनाई जाती है।

आइए जानते हैं इस बार चैत्र नवरात्रि कब है और क्या है घट स्थापना का मुहूर्त। घट स्थापना का मतलब है कलश की स्थापना करना, इसे सही मुहूर्त में ही करना चाहिए और पूजा विधि का भी खास ख्याल रखना चाहिए।

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चैत्र नवरात्रि घटस्थापना मुहूर्त

चैत्र नवरात्रि की घटस्थापना चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को होती है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 21 मार्च को रात 10 बजकर 52 मिनट से लेकर 22 मार्च को रात 08 बजकर 20 मिनट तक रहेगी। इसलिए घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 22 मार्च को सुबह 06 बजकर 23 मिनट से लेकर सुबह 07 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। यानी घटस्थापना के लिए आपको कुल 01 घंटा 09 मिनट की अवधि मिलेगी।

ऐसे करें माँ दुर्गा को प्रसन्न

चैत्र नवरात्रि के दौरान भक्त माँ दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए नौ दिनों का उपवास रखते हैं। इन नौ दिनों में तीन देवी पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती के नौ रुपों की पूजा होती है, जिन्हें नवदुर्गा कहते हैं।

भक्त ये 9 दिन देवी माँ की पूजा और नवरात्रि मंत्रों का जप करते हुए बिताते हैं। चैत्र नवरात्रि के पहले तीन दिनों को ऊर्जा माँ दुर्गा को समर्पित है।

अगले तीन दिन, धन की देवी, माँ लक्ष्मी को समर्पित है और आखिर के तीन दिन ज्ञान की देवी, माँ सरस्वती को समर्पित हैं।

यह माना जाता है कि जो भक्त बिना किसी इच्छा की पूर्ति के लिए नवदुर्गा की पूजा करते हैं, तो वह भक्त मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर कर मोक्ष प्राप्त करते हैं। चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों के कुछ पूजा अनुष्ठान नीचे दिए गए हैं।

  • घट स्थापना नवरात्रि के पहले दिन सबसे आवश्यक है, यह ब्रह्मांड का प्रतीक है। घर की शुद्धि और खुशाली के लिए इसे पवित्र स्थान पर रखें।
  • आप नवरात्रि पूजा शुरू करने से पहले देसी घी का दीपक जलाएं, जो कि घर और परिवार में शांति का प्रतीक है। यह घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म करता है और भक्तों में मानसिक संतोष बढ़ाता है।
  • नवरात्रि में घर में जौ की बीजाई करते है। ऐसी मान्यता है कि जौ इस सृष्टी की पहली फसल थी, इसीलिए इसे हवन में भी चढ़ाया जाता है। वसंत ऋतू में आने वाली पहली फसल भी जौ ही है, जिसे देवी माँ को चैत्र नवरात्रि के दौरान अर्पण करते है।
  • नवरात्रि के 9 दिनों में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना शुभ माना जाता है, क्योंकि दुर्गा सप्तशती शांति, समृद्धि, धन और शांति का प्रतीक है।
  • कन्या पूजन के दिन कन्या को फूल, इलायची, फल, सुपारी, मिठाई, श्रृंगार की वस्तुएं, कपड़े, घर का भोजन (खासकर: जैसे की हलवा, काले चने और पूरी) प्रस्तुत करें।

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इन बातों का रखें ध्यान

  • त्योहार के शुरू होने से पहले, अपने घर में देवी का स्वागत करने के लिए घर की साफ सफाई करें।
  • उपवास करते वक्त सात्विक भोजन जैसे कि आलू, कुट्टू का आटा, दही, फल, आदि खाएं।
  • इन दिनों चमड़े का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  • नवरात्रि के दिनों में क्रोध से बचे रहें।
  • हर दिन सत्संग करें और कम से कम 2 घंटे का मौन रखें।

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आज से शुरू हो रही है चैत्र नवरात्रि, जानिए शुभ महूर्त और पूजा विधि!

नवरात्रि हिंदू धर्म में एक पवित्र त्योहार है नवरात्रि के 9 दिनों में मां के 9 रूपों की पूजा- अर्चना की जाती है। वैसे तो साल में चार बार चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ के महीनों में नवरात्रि आती है, लेकिन उनमें से केवल चैत्र और आश्विन माह की नवरात्रि ही बड़े स्तर पर मनाई जाती है। इस बार चैत्र नवरात्रि 22 मार्च 2023 दिन बुधवार से लेकर 30 मार्च 2023 दिन गुरुवार तक मनाया जाएगा।

आज हम इस पोस्ट में जानेंगे चैत्र नवरात्रि का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि, तो चलिए जानते हैं:-

घटस्थापना का शुभ मुहूर्त

घटस्थापना मुहूर्त – 06:23 सुबह से 07:32 सुबह तक
अवधि – 01 घंटा 09 मिनट
घटस्थापना मुहूर्त प्रतिपदा तिथि को आता है
घटस्थापना मुहूर्त द्वि-स्वभाव मीणा लग्न के दौरान आता है
प्रतिपदा तिथि प्रारंभ – 21 मार्च 2023 को रात्रि 10:52 बजे
प्रतिपदा तिथि समाप्त 22 मार्च 2023 को रात्रि 08:20 बजे

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कलश स्थापना विधि

चैत्र नवरात्रि के पहले दिन सुबह उठकर स्नान आदि करके साफ वस्त्र पहनें। फिर मंदिर की साफ-सफाई करके गंगाजल छिड़कें। इसके बाद लाल कपड़ा बिछाकर उस पर थोड़े चावल रखें।

मिट्टी के एक पात्र में जौ बो दें और इस पात्र पर जल से भरा हुआ कलश स्थापित करें। ऐसा माना जाता है कि नवरात्रि में कलश की स्थापना से घर में सुख-समृद्धि आती है।

नवरात्रि में सबसे पहले कलश की पूजा की जाती है और फिर मां दुर्गा की पूजा शुरू होती है। ऐसा माना जाता है कि  भगवान विष्णु कलश के मुख पर निवास करते हैं और रुद्र अर्थात भगवान शिव कंठ में निवास करते हैं और ब्रह्माजी मूल रूप से निवास करते हैं। इसलिए कलश की पूजा करने से त्रिदेव की पूजा होती है।

पूजा विधि

  • माता की चौकी लगाने के लिए उत्तर-पूर्व में एक स्थान को साफ कर लें और गंगाजल से शुद्ध करें।
  • एक लकड़ी की चौकी बिछाकर उस पर लाल रंग का साफ कपड़ा बिछाकर माता रानी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
  • अब सबसे पहले गणेश जी का ध्यान करें कलश स्थापित करने की विधि आरंभ करें।
  • नारियल में चुनरी लपेट दें और कलश के मुख पर मौली बांधे।
  • कलश में जल भरकर उसमें एक लौंग का जोड़ा, सुपारी हल्दी की गांठ, दूर्वा और रुपए का सिक्का डालें।
  • अब कलश में आम के पत्ते लगाकर उसपर नारियल रखें।
  • कलश को मां दुर्गा की प्रतिमा की दायीं ओर कलश को स्थापित करें।
  • दीपक प्रज्वलित करके पूजा आरंभ करें।

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मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप

नवरात्रि के नौ दिनों तक हर रोज मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। हर स्वरूप की पूजा का अलग-अलग महत्व और तरीका है। जानें किस तिथि के दिन मां के किस स्वरूप की पूजा की जाएगी।

चैत्र नवरात्रि 2023 तिथि 

चैत्र नवरात्रि प्रथम दिन (22 मार्च 2023 ) प्रतिपदा तिथि, मां शैलपुत्री पूजा, घटस्थापना चैत्र नवरात्रि दूसरा दिन (23 मार्च 2023 ) – द्वितीया तिथि, मां ब्रह्मचारिणी पूजा चैत्र नवरात्रि तीसरा दिन (24 मार्च 2023 ) – तृतीया तिथि, मां चंद्रघण्टा पूजा चैत्र नवरात्रि चौथा दिन (25 मार्च 2023 ) – चतुर्थी तिथि, मां कुष्माण्डा पूजा
चैत्र नवरात्रि पांचवां दिन (26 मार्च 2023) पंचमी तिथि, मां स्कंदमाता पूजा
चैत्र नवरात्रि छठा दिन (27 मार्च 2023 ) – षष्ठी तिथि, मां कात्यायनी पूजा
चैत्र नवरात्रि सातवां दिन (28 मार्च 2023 ) – सप्तमी तिथि, मां कालरात्री पूजा
चैत्र नवरात्रि आठवां दिन (29 मार्च 2023 ) – अष्टमी तिथि, मां महागौरी पूजा, महाष्टमी
चैत्र नवरात्रि नवां दिन (30 मार्च 2023 ) – नवमी तिथि, मां सिद्धीदात्री पूजा, दुर्गा महानवमी, राम नवमी
चैत्र नवरात्रि दसवां दिन – 10वें दिन नवरात्रि व्रत का पारण किया जाएगा

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