अनोखा ‘रोबोट कैफे’ जहाँ इंसानों का नहीं, मशीनों का होगा राज!

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तकनीकी विकास के कारण हमारे जीवन में कई परिवर्तन हुए हैं। आज की दुनिया में लोग ज्यादातर कामों के लिए मशीनों पर निर्भर हैं। जिन कामों को करने में कई घंटे लग जाते थे, आज इंसान उन्हें मशीनों के जरिए मिनटों में पूरा कर लेते हैं और इसका पूरा श्रेय तकनीक को ही जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अब दुनिया में एक ऐसा रोबोट कैफे खुलने जा रहा है, जहां सुपरमॉडल की तरह दिखने वाला रोबोट खाना सर्व करेगा। आइए आपको बताते हैं कि कहां खुलेगा ये कैफे और यहां क्या होगा खास।

दुबई में खुलने जा रहा है ये कैफे

2023 में खुलने वाला यह कैफे दुनिया का पहला ऐसा कैफे होगा जो बिना इंसानों की मदद के पूरी तरह से चलाया जाएगा। दुबई का डोना साइबर-कैफे (Dona Cyber-Cafe) इसके लिए पूरी तरह तैयार है। ये कैफे 24 घंटे खुला रहेगा।

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ग्राहकों की सेवा के लिए सुपरमॉडल रोबोट को नियुक्त किया जाएगा। सुपरमॉडल रोबोट के अलावा, कई सेल्फ-सर्व आइसक्रीम मशीन और रोबोट आर्म्स द्वारा संचालित कॉफी मशीनें भी होंगी।

यह है खासियत

इस कैफे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बिना इंसानों के संचालित होगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक इस कैफे में काम करने वाले रोबोट के पुर्जे रूस से मंगवाए गए हैं और इनका निर्माण आरडीआई रोबोटिक्स कर रहा है।

आरडीआई रोबोटिक्स द्वारा बनाए गए इन रोबोट को रोबो-C2 नाम दिया गया है। इन रोबोट्स को महिलाओं की शक्ल के साथ-साथ उनके जैसे कई हावभावों और गुणों से लैस किया किया गया है।

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रिपोर्ट्स की मानें तो इस रोबोट का लुक ईस्टर्न यूरोपियन मॉडल Diana Gabdullina से प्रेरित है। ये रोबोट लोगों से बातचीत करने के साथ-साथ उनके नाम तक याद रख सकती है। रोबोट के पास कंपनी की भी जानकारी होगी।

ये लोगों को कहानियां सुना सकती है। यहां तक कि ये रोबोट कस्टमर्स के इमोशन भी डिटेक्ट कर सकती है। डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, नई रोबोट यूजर्स के साथ सेल्फी भी क्लिक कर सकती है।

इस तरीके से बड़ों के पैर छूने से मिलेगी उन्‍नति, आएंगी खुशियां

सनातन परंपरा में अपने से बड़े लोगों के पैर छूने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। हिंदू धर्म में कोई भी शुभ कार्य करने से पहले या दिन की शुरुआत करने से पहले माता-पिता गुरु या भगवान के चरण स्पर्श करते हैं।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि पैर छूने के कुछ सही नियम भी होते हैं, जिन्हें नजर अंदाज करना आपको शुभ फल की जगह अशुभ फल दे सकता है। पूजा के समय गुरु या किसी वरिष्ठ के पैर कैसे छुएं।

आइए जानते हैं पैर छूने के सही नियम और इससे जुड़े फायदों के बारे में।

देवी-देवताओं से भी जुड़ी परंपरा

पैर छूने की परंपरा आज से नहीं बल्कि देवी-देवताओं के समय से है। जब गुरु राजमहलों में आते थे तो राजा स्वयं उनके पैर छूकर आशीर्वाद लेते थे। ऐसा माना जाता है कि अपने प्रियजनों के प्रति आतिथ्य दिखाने के लिए उनके पैर छूए जाते हैं, न केवल पैर छूने से बल्कि पैर धोने से भी आशीर्वाद मिलता है।

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पैर छूना बहुत फायदेमंद होता है

आज के समय में किसी के पैर छूना सिर्फ सम्मान के भाव से देखा जाता है। लेकिन, इस परंपरा के पीछे कई ऐसे कारण हैं, जिनके पीछे मानव जाति का कल्याण निहित है।

ऐसा माना जाता है कि अपने से बड़े व्यक्ति के पैर छूने से उसकी सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह आशीर्वाद के रूप में हमारे भीतर प्रवाहित होता है। इससे हमें सुख-समृद्धि मिलती है।

पैर छूने के नियम

इसके अलग-अलग तरीके होते हैं। कुछ झुक जाते हैं या घुटनों के बल बैठ जाते हैं। जब आप किसी के पैर छूना चाहते हैं, तो आपको अपने दोनों हाथों से दोनों पैर स्पर्श करने चाहिए। इसी तरह सजदा करते समय सिर को दोनों हाथों के बीच में रखें और शरीर के ऊपरी हिस्से को झुकाकर पैरों को स्पर्श करें।

नौ ग्रहों का दोष होता है दूर

माना जाता है कि अपने से बड़े किसी के पैर छूने से नवग्रहों से जुड़े दोष भी दूर हो जाते हैं। इसके साथ ही दादी, नानी, बुआ आदि के पैर छूने से चंद्र दोष दूर होता है वहीं बड़े भाई के पैर छूने से मंगल दोष और ननद के पैर छूने से शुक्र मजबूत होता है।

सर्दियों में धूप में बैठने से दिमाग को मिलते हैं ये कमाल के फायदे

जहाँ गर्मी के मौसम में हर व्यक्ति धूप से बचना चाहता है वहीं सर्दी के मौसम में धूप के स्वास्थ्य के लिए अनेक लाभ हैं। जी हां, सर्दियों में रोजाना सिर्फ 10 मिनट धूप में बैठने से भी शरीर को पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी मिल सकती है। धूप सेंकने के कई मानसिक फायदे भी होते हैं। इस पोस्ट में हम जानेंगे धूप में बैठने से क्या-क्या मानसिक फायदे होते हैं चलिए जानते हैं:

सूर्य- अवसाद कम करता है

धूप में बैठने से शरीर को पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी मिलता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि विटामिन डी की कमी से दिमाग का विकास ठीक से नहीं हो पाता है और दूसरी तरफ डिप्रेशन की संभावना काफी बढ़ जाती है। लेकिन अगर आप रोजाना धूप में बैठते हैं तो आप डिप्रेशन को कम कर सकते हैं।

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सोचने की क्षमता बढ़ती है

सर्दियों में धूप लेने से दिमाग की कोशिकाएं सक्रिय रहती हैं और जिससे दिमाग स्वस्थ रहकर संतुलित तरीके से काम करता है। वहीं सोचने की क्षमता भी बढ़ती है। इसलिए अगर आप मानसिक रूप से स्वस्थ रहना चाहते हैं तो रोजाना धूप में जरूर बैठें।

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तनाव होता है कम

सर्दियों में सुबह 10 मिनट धूप लेने से शरीर से मेलाटोनिन हार्मोन रिलीज होता है, जिससे रात को गहरी और अच्छी नींद आती है। इतना ही नहीं सूरज की किरणें सेरोटोनिन को सोख लेती हैं जो मूड को खुशनुमा बनाने में मदद करता है।

हल्दी के ये उपाय करते हैं कई बाधाओं को दूर

हल्दी को बहुत शुभ माना जाता है। यह कई मायनों में जीवन में विशेष फल दिखाता है। आर्थिक संकट को दूर करने के लिए माना जाता है कि हल्दी का उपयोग करना बहुत अच्छा माना जाता है।

हल्दी के कई ज्योतिषीय उपचार हैं। वास्तु और ज्योतिष में हल्दी के कई महत्व बताए गए हैं। हल्दी के साथ, कई लाभकारी उपचार व् उपाय भी बताए जाते हैं।

हल्दी के इन उपायों के साथ जीवन की कई समस्याएं दूर हो सकती हैं। आर्थिक संकट को समाप्त करने के लिए, ज्योतिष में हल्दी के लिए कई उपायों का उल्लेख किया गया है जो विशेष है।

इस पोस्ट में हम जानेंगे हल्दी के कुछ ऐसे उपायों के बारे में जिससे आर्थिक तंगी दूर हो सकती है, तो चलिए शुरू करते हैं:

धन लाभ के उपाय

  • धनवान होना तो हर कोई चाहता है, मगर बहुत मेहतन करने के बाद भी अगर आप पर्याप्त धन अर्जित नहीं कर पा रहे हैं तो श्री गणेश भगवान को हल्दी की गांठ की माला अर्पित करें। आप यह काम बुधवार या बृहस्पतिवार किसी भी दिन कर सकते हैं।
  • हल्दी की गांठ को लाल कपड़े में बांध कर अपनी तिजोरी में रख लें और नियमित उसकी पूजा करें। ऐसा करने से देवी लक्ष्मी को प्रसन्न किया जा सकता है।
  • यदि आपको अटका हुआ धन प्राप्त करना है, तो हल्दी से चवलों को रंग कर उसे लाल कपड़े में बांध कर अपने पर्स में रख लें ऐसा करने से आपका अटका हुआ धन आपको जल्दी प्राप्त हो जाता है।
  • इसके अलावा, इससे नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश नहीं करती है। ज्योतिष के अनुसार, वित्तीय समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए, एक रुपये के सिक्के को पीले कपड़े में बांधने और इसे पूजा के स्थान पर रखने के लिए शुभ माना जाता है।

हल्दी के अन्य टोटके

यदि आप हल्दी की एक गांठ पर मौली बांध कर उसे अपने सिरहाने रख कर सोते हैं, तो आपको बुरे सपने आना बंद हो जाते हैं।

भगवान विष्णु और देवी लक्ष्‍मी की प्रतिमा में यदि आप रोज चुटकी भर हल्दी अर्पित करते हैं तो आपको मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त होता है।

यदि आप सूर्य देव को हल्दी मिश्रित जल अर्पित करती हैं, तो इससे कुंडली में सूर्य दोष का प्रभाव कम हो जाता है।

कठिन चुनौतियों के साथ मिलती है बड़ी सफलता, जानें कुछ प्रेरक वाक्य

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जीवन में जो भी चुनौतियां आएं, उसका डटकर सामना करना चाहिए। क्योंकि चुनौती जितनी बड़ी होगी व्यक्ति को उतनी ही बड़ी सफलता मिलेगी। इसलिए जीवन में संघर्ष से कभी नहीं घबराना चाहिए।

जीवन को अच्छे से जीने में संघर्ष की अहम भूमिका होती है। देखा जाए तो मनुष्य ही नहीं बल्कि पशु-पक्षी भी अपना जीवन व्यतीत करने के लिए संघर्ष करते हैं। पशु हो, पक्षी हों या मनुष्य, सभी संघर्ष करते हैं, फर्क सिर्फ इतना है कि सबका अपना-अपना तरीका होता है।

कुछ लोग संघर्ष करने से डरते हैं लेकिन बेहतर जीवन जीने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। आज के समय में किसी भी व्यक्ति ने जो मुकाम हासिल किया है, उसके पीछे उसका संघर्ष ही कारण है।

  • अगर इंसान को सफल इंसान बनना है तो उसे संघर्ष के दौरान कभी हार नहीं माननी चाहिए।
  • जिंदगी में कभी भी किसी चुनौती से भागना नहीं चाहिए, अगर आप भाग रहे हैं तो आपने खुद ही मुसीबत को न्यौता दे दिया है। और जहां सफलता है, वहां चुनौतियां भी होंगी।
  • आपके जीवन में जो भी समस्याएँ हैं, उसकी तुलना दूसरों की समस्याओं से कभी न करें। जैसे कोई व्यक्ति सफल होता जा रहा है, तो उसकी सफलता से निराश न हों। सफल होने के लिए व्यक्ति को अपना रास्ता खुद बनाना चाहिए।
  • कई बार ऐसा होता है कि हम सफलता की राह में आड़े आ जाते हैं, चुनौती देखकर हम रास्ता बदल लेते हैं। ऐसे व्यक्ति को जीवन में कभी सफलता नहीं मिलती। चुनौतियों का डट कर सामना करना चाहिए।

इन खूबियों में हमेशा पुरुषों से आगे रहती हैं महिलाएं

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आचार्य चाणक्य ने अपनी पुस्तक में महिलाओं के ऐसे गुणों का वर्णन किया है, जिसमें पुरुष उन्हें कभी मात नहीं दे सकते। उनका मानना था कि महिलाएं इन गुणों में हमेशा पुरुषों से आगे रहती हैं।

प्राचीन भारत के प्रसिद्ध अर्थशास्त्री, दार्शनिक और राजनीति विज्ञान के विशेषज्ञ आचार्य चाणक्य द्वारा सदियों पूर्व लिखी गई उनकी नीतियां आज के युग में भी बहुत वास्तविक और उपयोगी सिद्ध होती हैं।

आचार्य चाणक्य को बुद्धिमान, साहसी और ज्ञानी के रूप में जाना जाता है। आचार्य चाणक्य ने अपनी पुस्तक में महिलाओं के ऐसे गुणों का वर्णन किया है, जिसमें पुरुष उन्हें कभी मात नहीं दे सकते। उनका मानना था कि महिलाएं इन गुणों में हमेशा पुरुषों से आगे रहती हैं।

चलिए जानते हैं इस पोस्ट में कि वे कौन कौन से गुण हैं :

महिलाएं ज्यादा साहसी होती हैं

चाणक्य नीति के अनुसार पुरुषों की तुलना में महिलाएं अधिक साहसी होती हैं। ये किसी भी तरह की बुरी स्थिति का डटकर सामना करती हैं, एक महिला पुरुष से 6 गुना ज्यादा साहसी होती है।

चाणक्य कहते हैं कि जब स्त्री के सामने संकट का समय आता है तो स्त्री का साहस स्वत: ही सामने आ जाता है। हिम्मत के मामले में पुरुष कभी भी महिलाओं को मात नहीं दे सकते।

Acharya Chanakya

भावुक होती हैं महिलाएं

चाणक्य नीति के अनुसार स्त्री की आयु जैसे-जैसे बढ़ती है, वह अधिक बुद्धिमान होती जाती है। वहीं, महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले ज्यादा इमोशनल माना जाता है। यह उनकी कमजोरी नहीं बल्कि उनकी आंतरिक शक्ति है, जिसके कारण वे हर स्थिति में अपना अस्तित्व बनाए रखती हैं।

किसी बात को दिल पर नहीं लेती

चाणक्य नीति के अनुसार जो महिलाएं बात बात में रोती हैं उनका दिल बहुत साफ होता है। दरअसल, भावुक महिलाएं अक्सर अपनी कड़वाहट और गुस्से का रोना रोती हैं।

जिसके कारण ऐसी महिलाएं किसी की बात को दिल पर नहीं लेती हैं। सभी को शीघ्र क्षमा करने में विश्वास रखती है। महिलाओं का यह स्वभाव परिवार की सुख-शांति बनाए रखने में मदद करता है।

नियम पर टिकी रहती हैं महिलाएं

आचार्य चाणक्य का मानना है कि जो महिलाएं जल्दी भावुक हो जाती हैं वो अनुशासित रहना पसंद करती हैं। चाणक्य नीति के अनुसार अनुशासन में रहने वाली और नियम-कानूनों का पालन करने वाली महिलाएं न सिर्फ अपनी सफलता की राह सुनिश्चित करने में माहिर होती हैं बल्कि दूसरों के लिए मिसाल भी पेश करती हैं।

महिलाएं ज्यादा एक्सप्रेसिव होती हैं

अधिकांश शोधकर्ता इस बात से सहमत हैं कि महिलाएं भावनात्मक रूप से अधिक एक्सप्रेसिव होती हैं, लेकिन यह नहीं कि वे पुरुषों की तुलना में अधिक भावनाओं का अनुभव करती हैं। कुछ अध्ययनों से पता चला है कि पुरुषों की तुलना में महिलाएं एक्सप्रेसिव होती हैं।

जानिए जेम्स कैमरून द्वारा बनाई गई बेहतरीन फिल्म अवतार से जुड़े कुछ मज़ेदार तथ्य

2009 में, जेम्स कैमरून ने अपनी शानदार और बहुप्रतीक्षित 3डी फिल्म, अवतार रिलीज की। यह फिल्म हॉलीवुड में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों से एक है। मोशन कैप्चर के उपयोग के कारण फिल्म को बड़ी सफलता मिली, जो बाद में फिल्म उद्योग में मुख्यधारा बन गई।

इस पोस्ट में हम जानेंगे इस फिल्म से जुड़े कुछ मज़ेदार तथ्य, तो चलिए शुरू करते हैं:

  • 1997 में बनी फ़िल्म टाइटैनिक भी उस समय बॉक्स आफिस पर सफलता के नए कीर्तिमान रचने वाली फिल्म बन गई थी। टाइटैनिक के लिए कैमरून को बेहतरीन निर्देशन का ऑस्कर पुरस्कार मिला था। लगभग 12 साल के बाद जब उन्होंने अपनी नई फ़िल्म अवतार पेश की तो एक बार फिर उन्होंने अपनी फ़िल्म में भव्यता के पिछले सारे रिकार्ड तोड़ दिए।

Know some fun facts about James Cameron's best film Avatar

  • इस फिल्म के लिए कैमरून ने फिल्म में दिखाए गए एलियंस के लिए एक अलग भाषा भी बनवाई। जो यूएससी में भाषाविद डॉ. पॉल फ्रॉमर ने बनाई थी। इस भाषा को 1000 शब्दों से बनाया गया था। जिसमें जेम्स कैमरून ने 30 शब्द जोड़े थे। इस फिल्म को बनाने के लिए जेम्स कैमरून ने सेटअप भी अलग से किया था।
  • फ़िल्म की कहानी 22 वीं सदी की है जब मानव एक बेहद महत्वपूर्ण खनिज अनओब्टेनियम को पैंडोरा पर खोद रहे होते है जो एक बड़े गैस वाले गृह का रहने लायक चन्द्रमा है जो अल्फ़ा सेंटारी अंतरिक्षगंगा में स्थित है। इस खनन कॉलोनी का बढ़ना पैंडोरा की प्रजातियों व कबीलो के लिए खतरा बन जाता है। पैंडोरा की प्रजाति नाह्वी, जो मानवों के सामान प्रजाति है इसका विरोध करती है।
  • कहते हैं कि इस फिल्म की कहानी मलयालम के सुपरस्टार मोहनलाल की मूवी ‘वियतनाम कॉलोनी’ से भी काफी हद तक मिलती-जुलती थी। फिल्म रिलीज होने के बाद करीब 7 लोगों ने जेम्स पर कहानी चुराने का आरोप भी लगाया था। बाद में जेम्स ने कोर्ट में एक कॉपी भेजी थी, जिसमें उन्होंने बताया था कि उनको इस फिल्म का आइडिया कहां से आया था और वो केस भी जीत गए थे।

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  • जेम्स कैमरून को बचपन से ही साइंस फिक्शन किताबें बहुत पसंद थीं। कहा जाता है कि उन्हें इस फिल्म को बनाने का आइडिया भी यहीं से आया था। कैमरून ने टाइटैनिक बनाने के दौरान ही फिल्म अवतार की 80 पेजों की स्क्रिप्ट लिखी और टाइटैनिक रिलीज होने के बाद ही इस पर फिल्म बनाने की घोषणा कर दी।
  • आपको जानकर हैरानी होगी कि ऑडिशन के समय सैम वर्थिंगटन अपनी कार में ही रह रहे थे। सैम वर्थिंगटन के अनुसार, उन्हें एक फोन कॉल के जरिए कास्टिंग के लिए आमंत्रित किया गया था। कॉल करने वाले व्यक्ति ने उन्हें स्क्रिप्ट के बारे में कुछ नहीं बताया, न ही उन्होंने उन्हें निर्देशक का नाम भी बताया था।
  • निर्देशक जेम्स कैमरून को सेट पर सख्त होने के लिए जाना जाता था, उन्हें काम के दौरान किसी भी प्रकार की खलल पसंद नहीं थी जिसके लिए उन्होंने एक नेल गन भी रखी थी जिसका उपयोग वे उन सेल फोनों पर करते थे जो काम के दौरान बज उठते थे।
  • जेम्स कैमरून ने इस फिल्म को बनाने की घोषणा तो कर दी लेकिन फिल्म बनाने के लिए उन्हें हाइटेक टेक्नोलॉजी की जरूरत थी क्योंकि उनके अधिकतर किरदार फिक्शन थे। लिहाजा वो उस समय इस आइडिया पर आगे काम नहीं कर पाए, लेकिन उन्होंने अपनी इस कहानी पर फिल्म बनाने का आइडिया नहीं छोड़ा।
  • फिल्म में सुनाई देने वाली अधिकांश जानवरों की आवाजें जुरासिक पार्क से डायनासोर की हैं, जिसमें विशेष रूप से टी-रेक्स और रैप्टर्स।

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  • संगीतकार जेम्स हॉर्नर ने कहा कि यह उनकी सबसे कठिन फिल्म थी और उनके करियर की सबसे बड़ी चुनौती थी। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा कि उन्होंने डेढ़ साल तक सुबह 4:00 बजे से रात 10:00 बजे तक संगीत पर काम किया।
  • जेक सुली की भूमिका निभाने के लिए मैट डेमन और जेक गिलेनहाल कैमरून की पहली पसंद थे, लेकिन कैमरून ने मुख्य भूमिका में सैम वर्थिंगटन को कास्ट करने का फैसला किया।
  • फिल्म में 40% लाइव एक्शन और 60% फोटो-यथार्थवादी सीजीआई है। सीजीआई दृश्यों के लिए बहुत सी मोशन कैप्चर तकनीक का उपयोग किया गया था।

जानिए “उमानंद” मंदिर से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

उमानंद देवलोई एक प्राचीन शिव मंदिर है जो ब्रह्मपुत्र नदी के मध्य में उमानंद द्वीप (मयूर द्वीप) में स्थित है जो कामरूप के उपायुक्त या गुवाहाटी में कचहरी घाट के कार्यालय के सामने स्थित है।

इस मंदिर का नाम उमानंद हिंदी के दो शब्दों से आया है। पहला शब्द ‘उमा’ जो कि भगवान शिव की पत्नी माता पार्वती का एक नाम है और दूसरा शब्द ‘आनंद’ जिसका अर्थ है खुशी।

इसे दुनिया के सबसे छोटे आबाद नदी द्वीप के रूप में जाना जाता है। ब्रह्मपुत्र के तट पर उपलब्ध स्थानीय नौकाएं आगंतुकों को द्वीप तक ले जाती हैं। जिस पहाड़ पर मंदिर बना है उसे भस्मकाल के नाम से जाना जाता है। मंदिर का परिवेश अद्भुत और दिव्य है। मंदिर के चारों ओर प्रकृति का अनुपम सौंदर्य है, यह प्रकृति प्रेमियों का आश्रय स्थल है।

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ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव यहां भयानंद के रूप में निवास करते थे। कालिका पुराण के अनुसार सृष्टि के प्रारंभ में शिव ने इसी स्थान पर अपने शरीर पर भस्म लगाई थी और माता पार्वती को ज्ञान प्रदान किया था।

ऐसा कहा जाता है कि जब भगवान शिव इस पहाड़ी पर ध्यान कर रहे थे तो कामदेव ने उन्हें बाधित किया जिससे वे शिव के क्रोध की आग से जलकर राख हो गए और इसलिए पहाड़ी को भस्मकाल नाम मिला।

उमानंद मंदिर का निर्माण 1681 से 1694 में हुआ था। इस मंदिर का निर्माण अहोम वंश के राजा और सबसे मजबूत शासकों में से एक राजा गदाधर सिंह ने करवाया था।

1897 में विनाशकारी भूकंप से मूल मंदिर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। बाद में, एक स्थानीय व्यापारी द्वारा मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया था। उमानंद मंदिर को कुशल असमिया श्रमिकों द्वारा खूबसूरती से तैयार किया गया था।

उमानंद मंदिर में भगवान शिव के अलावा, भगवान विष्णु, सूर्य, गणेश और अन्य हिंदू देवताओं की मूर्तियां मंदिर में स्थापित हैं। उमानंद मंदिर को पूजा करने के लिए एक बहुत ही पवित्र स्थान माना जाता है। कहा जाता है कि अगर भक्त की नीयत शुद्ध हो तो यहां हर मनोकामना पूरी होती है। यह गुवाहाटी में घूमने के लिए सबसे खूबसूरत जगहों में से एक है।

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इस पर्वत को भस्मकूट भी कहा जाता है। कालिका पुराण में कहा गया है कि यहाँ उर्वसीकुंड स्थित है और यहाँ देवी उर्वशी का निवास है जो कामाख्या के भोग के लिए अमृत लाती है और इसलिए इस द्वीप उर्वशी द्वीप के नाम से भी जाना जाता है।

ऐसा माना जाता है कि, अमावस्या के दिन यहाँ पूजा की जाती है जब यह सोमवार को आता है। यहां प्रतिवर्ष त्यौहार का आयोजन किया जाता है जिसे शिव चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है।

अवतार 2 : केट विंसलेट का खतरनाक अवतार देखकर हैरान रह जायेंगे आप

जेम्स कैमरून द्वारा निर्देशित आगामी हॉलीवुड फिल्म अवतार 2 का फैंस को बेसब्री से इंतजार है। दुनियाभर में धमाल मचाने वाली फिल्म ‘अवतार’ के सीक्वल को लेकर सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है।

‘अवतार 2’ का फर्स्ट लुक भी सामने आ गया है, जिसमें ‘टाइटैनिक’ फेम एक्ट्रेस केट विंसलेट (Kate Winslet) का खतरनाक लुक देखने को मिल रहा है।

केट विंसलेट 26 साल बाद एक बार फिर ‘टाइटैनिक’ के डायरेक्टर जेम्स कैमरून के साथ ‘अवतार 2’ में काम कर रही हैं। ‘टाइटैनिक’ के बाद दोनों की ये दूसरी फिल्म है।

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जानकारी के लिए बता दें कि, फिल्म का पहला लुक ‘एम्पायर मैगजिन’ के स्पेशल अवतार एडिशन के कवर पेज पर रिलीज किया गया है। पोस्टर में ‘रोनाल’ बनीं केट विंसलेट का गुस्सैल वाला लुक देखा जा सकता है।

एलियन के रूप में केट विंसलेट नुकीले दांतों और बड़ी आंखों में बेहद डरावनी लग रही हैं। फिल्म का पोस्टर सामने आने बाद से सोशल मीडिया पर छा गया है।

रोनाल “मेटकायना” जनजाति का नेतृत्व करेंगी, ये पेंडोरा के विशाल महासागरों पर राज करते हैं। फिल्म में केट एक प्रमुख भूमिका में हैं। केट ने फिल्म में कुछ अलौकिक स्टंट भी किए हैं और उन्होंने “सात मिनट और 14 सेकंड” के लिए पानी के नीचे अपनी सांस रोक रखी थी।

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इस दिन रिलीज होगी फिल्म

‘अवतारः द वे ऑफ वॉटर’ में सैम वर्थिंगटन के जेक और जो सलदाना नेटियरी के जीवन की कहानी को आगे बढ़ाया जाएगा। दोनों अब माता-पिता बन गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘अवतारः द वे ऑफ वॉटर’ इसी साल 16 दिसंबर 2022 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

जानिए क्यों लगे 13 साल ‘अवतार 2’ बनाने में

हॉलीवुड को एक से बढ़कर एक फिल्म देने वाले निर्देशक जेम्स कैमरून इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘अवतार 2’ को लेकर सुर्खियां बटोर रहे हैं। साल 2009 में आई फिल्म ‘अवतार’ के दुनियाभर में परचम लहराने के बाद अब जेम्स कैमरून इस फिल्म की सीक्वल रिलीज करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।

लोगों के बीच निर्देशक की ‘अवतार: द वे ऑफ वॉटर’ के लिए भरपूर क्रेज देखने को मिल रहा है। फैंस को काफी समय से इंतजार था, जो अब जल्द ही खत्म होने वाला है।

लेकिन सभी के दिमाग में एक प्रश्न जरूर होगा कि आखिर जेम्स कैमरून को दूसरा पार्ट बनाने में इतना लंबा समय क्यों लगा। रिलीज से पहले अब निर्देशक ने लोगों के इस सवाल का जवाब दे दिया है, चलिए जानते हैं जेम्स कैमरून ने क्या कहा…

 

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हॉलीवुड के डायरेक्टर जेम्स कैमरून की फिल्म ‘अवतार 2’ इसी साल 16 दिसंबर को रिलीज होने जा रही है। 23 सितंबर को इस फिल्म का पहला पार्ट रिलीज किया गया था और अब जेम्स कैमरून की फिल्म ‘अवतार 2′ 13 साल बाद सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।

इस फिल्म का पूरा नाम ‘अवतार: द वे ऑफ वॉटर’ है। जेम्स कैमरून ने हाल रही में एक इंटरव्यू में ये जानकारी दी है

कि यह फिल्म पानी के नीचे बनी हैं इसके लिए जेम्स कैमरून को पानी के नीचे गति पकड़ने के लिए सही तकनीक की जरूरत थी। जिसकी वजह से मुझे इसे बनाने में इतना समय लगा।

हम इस फिल्म को एक अलग समय में पेश करेंगे। क्योंकि जो चीजें साल 2009 में लोगों का मनोरंजन करने के लिए थी शायद वह अब मनोरंजन नहीं है।’

 

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जेम्स कैमरून की इस फिल्म का पहला पार्ट ‘अवतार’ साल 2009 में आया था और वह इसका सीक्वल ‘अवतार: द वे ऑफ वाटर’ मूल फिल्म के 13 साल बाद अब 16 दिसंबर को रिलीज हो रहा है।

फिल्म की एडवांस बुकिंग पूरी दुनिया में शुरू हो चुकी है। भारत में भी इसको बढ़िया रेस्पॉन्स मिल रहा है। इसकी एडवांस बुकिंग काफी अच्छी चल रही है, जो कोई हैरानी वाली बात नहीं है क्योंकि ‘अवतार: द वे ऑफ वाटर’ भारत में अंग्रेजी के अलावा हिंदी, तमिल, तेलुगू, कन्नड़ और मलयालम में भी रिलीज हो रही है।