बैसाखी स्पेशल सॉन्ग : बैसाखी के ये पांच गाने आपको झूमने पर मजबूर कर देंगें

बैसाखी का त्यौहार पंजाब के साथ साथ पुरे भारत में धूम धाम से मनाया जाता है। अगर बैसाखी की बात करें और ढोल नगाड़े, भांगड़ा के साथ पंजाबी गानों का जिक्र न हो तो ऐसा नहीं हो सकता। 14 अप्रैल को बैसाखी का पर्व बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है और इसकी धूम हर तरफ देखने को मिलती है।

बैसाखी के त्यौहार पर आप अपनी प्लेलिस्ट में कुछ गाने भी जोड़ सकते हैं। ये गाने आपके त्यौहार का मजा और भी बढ़ा देंगे तो चलिए देखते हैं :-

आई बैसाखी

मशहूर पंजाबी सिंगर दिलजीत दोसांझ की हिट फिल्म ‘सज्जन सिंह रंग रूज‘ का बैसाखी स्पेशल गाना आपको जोश से भर देता है। इस गाने को सुनकर आप खुद को थिरकने से नहीं रोक पाएंगे।

अपना पंजाब होवे

पंजाबी म्यूजिक सिंगर गुरदास मान का गाया गाना उनके अच्छे गानों में से एक है। जहां यह गीत पंजाब की जीवन शैली को दर्शाता है, वहीं पंजाब की विशिष्ट संस्कृति को भी गाने के बोलों में अच्छी तरह से बुना गया है।

मेरे देश की धरती

बॉलीवुड में ऐसे कई गाने हैं जिन्हें इस त्यौहार के मौके पर बजाया जा सकता है। इन्हीं गानों में से एक है ‘मेरे देश की धरती‘, यह गाना इस त्यौहार पर बिल्कुल फिट बैठता है, क्योंकि बैसाखी का त्यौहार मुख्य रूप से फसल की खुशी में मनाया जाता है और इस गाने को भी खिलते खेतों पर फिल्माया गया है।

ऐसा देश है मेरा

वीर-ज़ारा फिल्म का गाना ‘ऐसा देस है मेरा‘ पंजाब के खूबसूरत ग्रामीण इलाकों को हरे भरे खेतों और खुले नीले आसमान के साथ जीवंत करता है। उदित नारायण, लगा मंगेशकर, गुरदास मान और पृथा मजूमदार द्वारा गाया गया ट्रैक आपका है।

नंबर वन पंजाबी

 

बॉलीवुड फिल्म ‘चोरी चोरी चुपके चुपके‘ का गाना ‘नंबर वन पंजाबी‘ आपके बैसाखी त्यौहार की भावना को दोगुना कर देता है। इस गाने को सुनने के बाद आपके पैर जरूर कांपने लगेंगे।

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जानें क्यों मनाया जाता है बैसाखी का पर्व?

जानें क्यों मनाया जाता है बैसाखी का पर्व?

बैसाखी हर्ष और उल्लास का पर्व है जिसे देश के भिन्न-भिन्न भागों में रहने वाले सभी धर्मपंथ के लोग अलग-अलग तरीके से मनाते हैं। हर साल ये पर्व अप्रैल के महीने में मनाया जाता है। इस बार बैसाखी 14 अप्रैल को है। आइए जानते क्यों मनाया जाता है बैसाखी का पर्व।

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अप्रैल में क्यों मनाते हैं बैसाखी

बैसाखी मुख्यत: कृषि पर्व है, जिसे दूसरे नाम से ‘खेती का पर्व‘ भी कहा जाता है। यह पर्व किसान फसल काटने के बाद नए साल की खुशियों के रूप में मानते हैं।

इस महीने अनाज फसल पूरी तरह से पक कर तैयार हो जाती है और पकी हुई फसल को काटने की शुरुआत भी हो जाती है। किसान प्रकृति को अच्छी फसल के लिए धन्यवाद देते है।

खालसा पंथ की स्थापना

इस दिन सिखों के दसवें गुरु – गुरु गोविंद सिंह जी ने आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की नींव रखी थी और आनंदपुर साहब के गुरुद्वारे में पांच प्यारों से वैशाखी पर्व पर ही बलिदान के लिए आह्वान किया गया था।

‘खालसा‘ खालिस शब्द से बना है, जिसका अर्थ शुद्ध, पावन या पवित्र होता है। गुरु गोबिंद सिंह जी ने गुरुओं की वंशावली को समाप्त कर दिया। इसके बाद सिख धर्म के लोगों ने गुरु ग्रंथ साहिब जी को अपना मार्गदर्शक बनाया।

खालसा पंथ की स्थापना के पीछे गुरु गोविंद सिंह जी का मुख्य लक्ष्य लोगों को तत्कालीन मुगल शासकों के अत्याचारों से मुक्त कर उनके धार्मिक, नैतिक और व्यावहारिक जीवन को श्रेष्ठ बनाना था।

इस पंथ के द्वारा गुरु गोविंद सिंह जी ने लोगों को धर्म और जाति के आधार पर भेदभाव छोड़कर इसके स्थान पर मानवीय भावनाओं को आपसी संबंधों में महत्व देने की भी दृष्टि दी।

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ऐसे मनाते हैं बैसाखी

इस दिन अरदास के लिए श्रद्धालु गुरुद्वारों में जाते हैं। आनंदपुर साहिब में बैसाखी का मेला लगता है, वहां दुनियाभर से बहुत भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।

सभी गुरुद्वारों में ‘पंचबानी‘ का पाठ पढ़ा जाता है और अरदास के बाद गुरु जी को कड़ा प्रसाद का भोग लगाया जाता है। प्रसाद भोग लगने के बाद सब भक्त ‘गुरु जी के लंगर’ में भोजन करते हैं।

रात होते ही आग जलाकर उसके चारों तरफ एकत्र होते हैं और फसल कटने के बाद आए धन की खुशियां मनाते हैं। नए अन्न को अग्नि को समर्पित किया जाता है और पंजाब का परंपरागत नृत्य भांगड़ा और गिद्दा किया जाता है

जानिए राम नवमी का महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

राम नवमी हिन्दू धर्म का एक पावन त्यौहार है। यह त्यौहार भगवान श्रीराम को समर्पित है। इसी दिन मर्यादा पुरुषोत्त्म श्रीराम का जन्म हुआ था।

इसलिए राम नवमी के दिन भगवान राम की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। रामनवमी का त्यौहार प्रति वर्ष चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी को आता है। इस वर्ष 2023 में यह 30 मार्च को है।

रामनवमी 2023 पूजा का शुभ मुहूर्त

मार्च 30, 2023 को सुबह 11 बजकर 11 मिनट से शुरू होकर दोपहर 01 बजकर 40 मिनट तक

कैसे मनायी जाती है राम नवमी

राम नवमी के दिन भगवान श्रीराम की उपासना की जाती है। श्रीराम की मूर्तियों को गंगा जल से स्नान कराया जाता है। उनकी मूर्ति को पालने में झुलाया जाता है। इस दिन भक्त रामायण का पाठ करते हैं।

इस दिन राम मंदिर में भगवान श्रीराम के भजन-कीर्तन गाए जाते हैं। भक्त झांकियां भी निकालते हैं। लोग उनकी आराधना व्रत-उपवास करते हैं।

राम नवमी का महत्व

हिन्दू धर्म में राम नवमी का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने अयोध्या के राजा दशरथ की पहली पत्नी कौशल्या की कोख से भगवान राम के रूप में मनुष्य जन्म लिया था।

हिन्दू मान्यताओं में भगवान राम को सृष्टि के पालनहार श्री हरि विष्णु का सातवां अवतार माना जाता है। कहा जाता है कि श्री गोस्वामी तुलसीदास जी ने जिस राम चरित मानस की रचना की थी, उसका आरंभ भी उन्होंने इसी दिन से किया था।

राम नवमी की पूजन विधि

  • ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • भगवान राम का नाम लेते हुए व्रत का संकल्प लें।
  • घर के मंदिर में राम की मूर्ति की स्थापना कर उसमें गंगाजल छिड़कें।
  • मूर्ति के सामने घी का दीपक जलाकर रखें।
  • रामलला की मूर्ति को पालने में बैठाएं।
  • रामलला को स्नान कराकर वस्त्र पहनाएं।
  • इसके बाद रामलला को मौसमी फल, मेवे और मिठाई समर्पित करें। खीर का भोग लगाना अति उत्तम माना जाता है।
  • इसके बाद धूप-बत्ती से भगवान् की आरती उतारें।
  • आरती के बाद रामायण का पाठ करें।
  • नौ कन्याओं को घर में बुलाकर उनको भोजन कराएं। साथ ही यथाशक्ति उपहार और भेंट देकर विदा करें।
  • इसके बाद घर के सभी सदस्यों में प्रसाद बांटकर व्रत खोलें।

भगवान राम के बारे में विशेष बातें

  • भगवान श्री राम को मर्यादा का प्रतीक माना जाता है।
  • उन्हें पुरुषोत्तम यानि श्रेष्ठ पुरुष की संज्ञा दी जाती है।
  • राम जी स्त्री पुरुष में भेद नहीं करते। अनेक उदाहरण है जहां वे अपनी पत्नी सीता के प्रति समर्पित व उनका सम्मान करते नज़र आते हैं।
  • भगवान राम समाज  में ऊंच नीच के भेदभाव को भी नहीं मानते। शबरी के झूठे बेर खाने का उदाहरण इसे समझने के लिए सर्वोत्तम है।
  • राम जी वेद शास्त्रों के ज्ञाता और समस्त लोकों पर अपने पराक्रम का परचम लहराने वाले हैं।
  • राम नवमी के दिन धूमधाम के साथ राम जन्मोत्सव मनाते हुए श्रीरामचरित मानस ग्रंथ का पाठ करना चाहिए।
  • इस दिन भगवान् राम को मेवा एवं पंजरी का भोग लगाना चाहिए।
  • रामनवमी के दिन उपवास रखने से जीवन में सुख समृद्धि आती है और सभी तरह के पापों का नाश हो जाता है।

चैत्र नवरात्रि के दिनों में माँ दुर्गा को प्रसन्न करने के अचूक उपाय

नवरात्रि भारतवर्ष में हिंदुओं द्वारा मनाया जाने वाला प्रमुख पर्व है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ अलग- अलग रूपों की पूजा की जाती है।

वैसे तो साल में चार बार चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ के महीनों में नवरात्रि आती है, लेकिन उनमें से केवल चैत्र और आश्विन माह की नवरात्रि ही बड़े स्तर पर मनाई जाती है।

आइए जानते हैं इस बार चैत्र नवरात्रि कब है और क्या है घट स्थापना का मुहूर्त। घट स्थापना का मतलब है कलश की स्थापना करना, इसे सही मुहूर्त में ही करना चाहिए और पूजा विधि का भी खास ख्याल रखना चाहिए।

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चैत्र नवरात्रि घटस्थापना मुहूर्त

चैत्र नवरात्रि की घटस्थापना चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को होती है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 21 मार्च को रात 10 बजकर 52 मिनट से लेकर 22 मार्च को रात 08 बजकर 20 मिनट तक रहेगी। इसलिए घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 22 मार्च को सुबह 06 बजकर 23 मिनट से लेकर सुबह 07 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। यानी घटस्थापना के लिए आपको कुल 01 घंटा 09 मिनट की अवधि मिलेगी।

ऐसे करें माँ दुर्गा को प्रसन्न

चैत्र नवरात्रि के दौरान भक्त माँ दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए नौ दिनों का उपवास रखते हैं। इन नौ दिनों में तीन देवी पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती के नौ रुपों की पूजा होती है, जिन्हें नवदुर्गा कहते हैं।

भक्त ये 9 दिन देवी माँ की पूजा और नवरात्रि मंत्रों का जप करते हुए बिताते हैं। चैत्र नवरात्रि के पहले तीन दिनों को ऊर्जा माँ दुर्गा को समर्पित है।

अगले तीन दिन, धन की देवी, माँ लक्ष्मी को समर्पित है और आखिर के तीन दिन ज्ञान की देवी, माँ सरस्वती को समर्पित हैं।

यह माना जाता है कि जो भक्त बिना किसी इच्छा की पूर्ति के लिए नवदुर्गा की पूजा करते हैं, तो वह भक्त मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर कर मोक्ष प्राप्त करते हैं। चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों के कुछ पूजा अनुष्ठान नीचे दिए गए हैं।

  • घट स्थापना नवरात्रि के पहले दिन सबसे आवश्यक है, यह ब्रह्मांड का प्रतीक है। घर की शुद्धि और खुशाली के लिए इसे पवित्र स्थान पर रखें।
  • आप नवरात्रि पूजा शुरू करने से पहले देसी घी का दीपक जलाएं, जो कि घर और परिवार में शांति का प्रतीक है। यह घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म करता है और भक्तों में मानसिक संतोष बढ़ाता है।
  • नवरात्रि में घर में जौ की बीजाई करते है। ऐसी मान्यता है कि जौ इस सृष्टी की पहली फसल थी, इसीलिए इसे हवन में भी चढ़ाया जाता है। वसंत ऋतू में आने वाली पहली फसल भी जौ ही है, जिसे देवी माँ को चैत्र नवरात्रि के दौरान अर्पण करते है।
  • नवरात्रि के 9 दिनों में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना शुभ माना जाता है, क्योंकि दुर्गा सप्तशती शांति, समृद्धि, धन और शांति का प्रतीक है।
  • कन्या पूजन के दिन कन्या को फूल, इलायची, फल, सुपारी, मिठाई, श्रृंगार की वस्तुएं, कपड़े, घर का भोजन (खासकर: जैसे की हलवा, काले चने और पूरी) प्रस्तुत करें।

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इन बातों का रखें ध्यान

  • त्योहार के शुरू होने से पहले, अपने घर में देवी का स्वागत करने के लिए घर की साफ सफाई करें।
  • उपवास करते वक्त सात्विक भोजन जैसे कि आलू, कुट्टू का आटा, दही, फल, आदि खाएं।
  • इन दिनों चमड़े का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  • नवरात्रि के दिनों में क्रोध से बचे रहें।
  • हर दिन सत्संग करें और कम से कम 2 घंटे का मौन रखें।

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आज से शुरू हो रही है चैत्र नवरात्रि, जानिए शुभ महूर्त और पूजा विधि!

नवरात्रि हिंदू धर्म में एक पवित्र त्योहार है नवरात्रि के 9 दिनों में मां के 9 रूपों की पूजा- अर्चना की जाती है। वैसे तो साल में चार बार चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ के महीनों में नवरात्रि आती है, लेकिन उनमें से केवल चैत्र और आश्विन माह की नवरात्रि ही बड़े स्तर पर मनाई जाती है। इस बार चैत्र नवरात्रि 22 मार्च 2023 दिन बुधवार से लेकर 30 मार्च 2023 दिन गुरुवार तक मनाया जाएगा।

आज हम इस पोस्ट में जानेंगे चैत्र नवरात्रि का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि, तो चलिए जानते हैं:-

घटस्थापना का शुभ मुहूर्त

घटस्थापना मुहूर्त – 06:23 सुबह से 07:32 सुबह तक
अवधि – 01 घंटा 09 मिनट
घटस्थापना मुहूर्त प्रतिपदा तिथि को आता है
घटस्थापना मुहूर्त द्वि-स्वभाव मीणा लग्न के दौरान आता है
प्रतिपदा तिथि प्रारंभ – 21 मार्च 2023 को रात्रि 10:52 बजे
प्रतिपदा तिथि समाप्त 22 मार्च 2023 को रात्रि 08:20 बजे

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कलश स्थापना विधि

चैत्र नवरात्रि के पहले दिन सुबह उठकर स्नान आदि करके साफ वस्त्र पहनें। फिर मंदिर की साफ-सफाई करके गंगाजल छिड़कें। इसके बाद लाल कपड़ा बिछाकर उस पर थोड़े चावल रखें।

मिट्टी के एक पात्र में जौ बो दें और इस पात्र पर जल से भरा हुआ कलश स्थापित करें। ऐसा माना जाता है कि नवरात्रि में कलश की स्थापना से घर में सुख-समृद्धि आती है।

नवरात्रि में सबसे पहले कलश की पूजा की जाती है और फिर मां दुर्गा की पूजा शुरू होती है। ऐसा माना जाता है कि  भगवान विष्णु कलश के मुख पर निवास करते हैं और रुद्र अर्थात भगवान शिव कंठ में निवास करते हैं और ब्रह्माजी मूल रूप से निवास करते हैं। इसलिए कलश की पूजा करने से त्रिदेव की पूजा होती है।

पूजा विधि

  • माता की चौकी लगाने के लिए उत्तर-पूर्व में एक स्थान को साफ कर लें और गंगाजल से शुद्ध करें।
  • एक लकड़ी की चौकी बिछाकर उस पर लाल रंग का साफ कपड़ा बिछाकर माता रानी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
  • अब सबसे पहले गणेश जी का ध्यान करें कलश स्थापित करने की विधि आरंभ करें।
  • नारियल में चुनरी लपेट दें और कलश के मुख पर मौली बांधे।
  • कलश में जल भरकर उसमें एक लौंग का जोड़ा, सुपारी हल्दी की गांठ, दूर्वा और रुपए का सिक्का डालें।
  • अब कलश में आम के पत्ते लगाकर उसपर नारियल रखें।
  • कलश को मां दुर्गा की प्रतिमा की दायीं ओर कलश को स्थापित करें।
  • दीपक प्रज्वलित करके पूजा आरंभ करें।

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मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप

नवरात्रि के नौ दिनों तक हर रोज मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। हर स्वरूप की पूजा का अलग-अलग महत्व और तरीका है। जानें किस तिथि के दिन मां के किस स्वरूप की पूजा की जाएगी।

चैत्र नवरात्रि 2023 तिथि 

चैत्र नवरात्रि प्रथम दिन (22 मार्च 2023 ) प्रतिपदा तिथि, मां शैलपुत्री पूजा, घटस्थापना चैत्र नवरात्रि दूसरा दिन (23 मार्च 2023 ) – द्वितीया तिथि, मां ब्रह्मचारिणी पूजा चैत्र नवरात्रि तीसरा दिन (24 मार्च 2023 ) – तृतीया तिथि, मां चंद्रघण्टा पूजा चैत्र नवरात्रि चौथा दिन (25 मार्च 2023 ) – चतुर्थी तिथि, मां कुष्माण्डा पूजा
चैत्र नवरात्रि पांचवां दिन (26 मार्च 2023) पंचमी तिथि, मां स्कंदमाता पूजा
चैत्र नवरात्रि छठा दिन (27 मार्च 2023 ) – षष्ठी तिथि, मां कात्यायनी पूजा
चैत्र नवरात्रि सातवां दिन (28 मार्च 2023 ) – सप्तमी तिथि, मां कालरात्री पूजा
चैत्र नवरात्रि आठवां दिन (29 मार्च 2023 ) – अष्टमी तिथि, मां महागौरी पूजा, महाष्टमी
चैत्र नवरात्रि नवां दिन (30 मार्च 2023 ) – नवमी तिथि, मां सिद्धीदात्री पूजा, दुर्गा महानवमी, राम नवमी
चैत्र नवरात्रि दसवां दिन – 10वें दिन नवरात्रि व्रत का पारण किया जाएगा

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5 महिलाएँ जो हूबहू ऐश्वर्या राय बच्चन की तरह दिखती हैं!!

कहा जाता है कि दुनिया में एक जैसी शक्ल के सात लोग मौजूद होते हैं। और अगर ये हमशक्ल जानी मानी हस्तियों और फ़िल्मी सितारों के हों तो यह अपने आप में ख़ास बात होती है। हालाँकि मशहूर लोगों का हमशक्ल होना अपने आप में एक वरदान है लेकिन इसके नुक्सान भी हो सकते हैं।

वैसे अधिकतर मौक़ों पर ये मशहूर लोगों के हमशक्ल लोग फ़ायदा उठाते हैं और अपना खुद का एक अच्छा- खासा करियर और धन बना लेते हैं। वैसे “हमशक्ल लोगों के विज्ञान” पर सजींदा हैं तो आपको  BBC हिंदी की इस पोस्ट को पढ़ना चाहिए।

ऐश्वर्या राय बच्चन

मशहूर बॉलीवुड अभिनेत्री ऐश्वर्या राय बच्चन अपनी अदाओं के साथ साथ अपनी खूबसूरती के लिए भी पूरे विश्व में जानी जाती है। ऐश्वर्या राय बच्चन ने पूरे विश्व की सबसे खूबसूरत महिलाओं की top list में हमेशा ही अपनी जगह बनाई है। अपने टैलेंट के बलबूते पर ऐश्वर्या राय बॉलीवुड इंडस्ट्री के साथ-२ देश विदेश में भी मशहूर शख़्सयित बन चुकी हैं।

लिहाजा ज्यादा बातें न बनाते हुए हम बता रहें हैं उन पांच औरतों के बारे में जो ऐश्वर्या राय बच्चन की हमशकल होने की वजह से सुर्ख़ियों में रहीं।

स्नेहा उलाल

स्नेहा उलाल ने सन 2005 में बॉलिवुड में डेब्यू किया। ‘लकी: नो टाइम फॉर लव‘  से करियर शुरू करने वालीं स्नेहा आजकल उलाल वेब सीरीज में नजर आ रही हैं। लॉंच पर उनकी तुलना ऐश्वर्या राय बच्चन से की गई थी।

कहा यह भी गया था कि ऐश्वर्या से ब्रेकअप के बाद सलमान उनकी तरह दिखने वाली लड़की को लॉन्च ब्रेक दे रहे थे। स्नेहा का जन्म ओमान के मस्क में हुआ था। इनके पिता मैंगलोर के और माता सिंधी है।

हालांकि, स्नेहा अपने परफॉर्मेंस से लोगों के दिलों में कुछ खास जगह नहीं बना पाईं। स्नेहा ने भले ही बॉलीवुड में ज्यादा फिल्में न की हों, लेकिन साउथ इंडियन फिल्म इंडस्ट्री में काफी छाई हुई हैं।

हालाँकि बाद में स्नेहा ने एक इंटरव्यू में कहा था कि यह केवल उस समय की एक पीआर स्ट्रैटिजी थी। स्नेहा ने एक इंटरव्यू में कहा ‘मैं खुद में काफी कंफर्टेबल हूं और जो तुलना की जाती है, उससे मुझे फर्क नहीं पड़ता है।

वह भी लोगों की पीआर स्ट्रैटिजी थी कि कैसे मेरे बारे में बताया जाए। असल में उस चीज ने बस तुलना पर ही जोर दिया वरना यह कोई बड़ी बात नहीं थी।

मुझे अपने जीवन में पछतावा नहीं है, लेकिन मुझे लगता है कि मैंने अपने अभिनय करियर की शुरुआत बहुत जल्दी कर दी थी।’ – स्नेहा

snehaullal नाम के इनके इंस्टग्राम पर इनके हैंडल पर लगभग सात लाख followers हैं।

मानसी नाइक

मानसी उस वक्त सबसे ज्यादा सुर्खियों में आ गई थी जब उनके कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे और उन्हें ऐश्वर्या राय की हमशक्ल बताया गया था।

मानसी नाइक की आंखे और होंठ बिल्कुल ऐश्वर्या राय की तरह मिलते हैं। सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि मानसी ऐश्वर्या की कार्बन कॉपी लगती हैं। वहीं मानसी खुद भी ऐश्वर्या के गानों पर ही डांस करते हुए वीडियो साझा करती हैं।

मानसी एक मराठी अभिनेत्री होने के साथ-साथ टिक-टॉक स्टार के रूप में भी काफी प्रसिद्ध हैं। मानसी की कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर छाई रहीं, जिसकी तुलना ऐश्वर्या राय के ‘जोधा-अकबर’ वाले लुक से की गई।

 

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शुरुआती फ़िल्म में अच्छा करने के बावजूद मानसी फ़िल्म -जगत में कुछ ख़ास नहीं कर पाई, लेकिन इंटरनेट पर वे सक्रिय रहती हैं।

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मानसी ने बॉक्सर प्रदीप खरेरा के साथ शादी रचाई है। प्रदीप खरेरा हरियाणा के पेशेवर मुक्केबाज खिलाड़ी हैं। वो डब्ल्यूबीसी एशियन टाइटल चैंपियन जीत चुके हैं।

आमना इमरान

आमना इमरान पाकिस्तान की रहने वाली हैं और वह यूए में मेडिकल प्रोफेशनल हैं। अपने काम के साथ-साथ आमना को नए-नए लोगों के साथ जुड़ना काफी पसंद है।

दरअसल, पाकिस्तान की लड़की आमना इमरान की कुछ तस्वीरें जमकर वायरल हो रही हैं। ब्लॉगर आमना की शक्ल काफी हद तक बॉलीवुड अभिनेत्री ऐश्वर्या राय बच्चन से मिलती है।

आमना के सोशल मीडिया अकाउंट पर कई सारी ऐसी तस्वीरें हैं जिसमें वो ऐश्वर्या राय को कॉपी करते दिख रही हैं।

 

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यहीं नहीं आमना इमरान की कई सारी तस्वीरों को देख कर तो सोशल मीडिया यूजर्स को धोखा भी हो रहा है कि ये ऐश्वर्या राय हैं या फिर आमना इमरान। आमना ने बताया था कि वह ऐश्वर्या की बड़ी फैन हैं।

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महलघा जाबेरी

सिर्फ स्नेहा उलाल ही नहीं बॉलीवुड एक्ट्रेस ऐश्वर्या राय बच्चन की एक और हमशक्ल सोशल मीडिया की सनसनी हैं। ऐश्वर्या की इस हमशक्ल का नाम महलघा जाबेरी है। बिल्कुल ऐश्वर्या की तरह नजर आती हैं।

महलघा का जन्म 17 जून 1989 को ईरान के शहर इस्फहान में हुआ है और खुद को फिट रखने के लिए महलघा योग करती हैं जो उनके रूटीन में शामिल है एक इंटरव्यूह में महलघा ने कहा था कि योग ने न सिर्फ मुझे परफेक्ट फिगर पाने में मदद की बल्कि इससे मन को भी शांति मिलती है।

महलघा जबेरी ईरान की रहने वाली हैं और पेशे से मॉडल हैं। वे सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं उनके इंस्‍टाग्राम पर 2.3 मिलियन यानी 23 लाख फॉलोवर्स हैं। महलघा का जन्म ईरान में हुआ लेकिन अब मॉडलिंग करियर के कारण वे अमेरिका के सैन डिएगो में रहती हैं।

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आशिता सिंह

लॉकडाउन के दौरान आशिता ने टिकटॉक पर वीडियो बनाना शुरू किया उनकी वीडियोज को इतना ज़ादा पसंद किया गया कि 7 दिन के अंदर ही उनके 1600 से ज्यादा फॉलोअर्स हो गए और टिकटॉक पर वह ऐश्‍वर्या राय के नाम से मशहूर हो गई।

टिकटॉक पर ऐश्‍वर्या राय के नाम से मशहूर इस लड़की का पूरा नाम आशिता सिंह राठौर है। वैसे तो यह दूसरी कई बॉलीवुड एक्ट्रेस की फिल्मों के गाने और डायलॉग पर लिप-सिंक करते हुए वीडियो बनाती हैं, लेकिन ज्यादातर वीडियो बॉलीवुड अभिनेत्री ऐश्वर्या की फिल्मों से जुड़े हैं।

 

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आशिता अक्सर अपने वीडियोज और तस्वीरें भी इंस्टाग्राम पर शेयर करती रहती हैं। आशिता का इंस्टाग्राम पेज भी उनकी वीडियो और तस्वीरों से भरा है, जिसमे वह ऐश्वर्या राय की फिल्मों के डायलॉग ,और गानों पर लिप-सिंक करती नज़र आती है।

कुछ ही वक़्त में इंस्टाग्राम पर आशिता सिंह राठौर के 23 हज़ार से अधिक फॉलोवर्स हो गए हैं। आशिता की ऐश की तरह ही नीली आंखे, बाल और एक्सप्रेशन है और फैन्स आशिता को ऐश्वर्या की डुप्लीकेट कहकर अपना प्यार दिखा रहे हैं।

जानें अपनी राशि के अनुसार किस रंग से खेलें होली

वैसे तो हर त्यौहार का अपना एक रंग और महत्व होता है, लेकिन हरे, पीले, लाल, गुलाबी आदि असल रंगों का त्यौहार होली बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। होली के आते ही वातावरण में एक मस्ती का आलम छा जाता है।

होली के दिन रंगों के माध्यम से सारी भिन्नताएं मिट जाती हैं और सब बस एक रंग के हो जाते हैं। हर किसी का तन-मन, प्रेम-उल्लास और उमंग के रंगों की फुहार से भर जाता है।

रंगों का हमारे जीवन में जितना सकारात्मक प्रभाव डालते हैं उतना ही नकारात्मक भी, इसलिए ज्योतिषशास्त्र हो या वास्तुशास्त्र हर जगह रंगों का चयन बहुत ही सोच समझकर करने के लिए बताया गया है।

आपको जानकर हैरानी होगी कि अगर अपनी राशि के अनुसार रंगों का प्रयोग किया जाए तो ग्रह दोष अपने आप ही खत्म होने लगते हैं।

तो आइए जान लेते हैं कि इस होली किस राशि के लोगों को किस कलर से होली खेलनी चाहिए?

क्यों मनाई जाती है होली

हिन्दू मान्यताओं के अनुसार हिरण्यकश्यप के पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु की भक्ति में लीन रहते थे। उनकी इस भक्ति से उनके पिता हिरण्यकश्यप नाखुश थे, इसीलिए उनके पिता ने अपने पुत्र को भगवान की भक्ति से हटाने के लिए कई प्रयास किए।

हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को यह वरदान प्राप्त था कि वह आग में नहीं जल सकेगी। एक बार हिरण्यकश्यप ने अपनी ही बहन होलिका के जरिए प्रह्लाद को जिंदा जला देने का आदेश दिया, लेकिन भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की।

जब होलिका प्रह्लाद को जलाने के लिए आग में बैठी, तो वह खुद जल कर मर गई। तभी से इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में जाना जाता है और हिन्दू धर्म में होलिका दहन की परंपरा प्रचलित है। होलिका दहन से अगले दिन दुलहंडी (होली) खेला जाता है।

अपनी राशि के अनुसार किस रंग से खेलें होली

मेष

मेष राशि वाले लोगों को होली के उत्सव के लिए जीवंत लाल रंग का चयन करना चाहिए। मेष राशि के लिए लाल रंग शुभ माना जाता है, इसमें प्रेम और सच्चाई से जुड़े गुण होते हैं।

वृषभ

वृषभ राशि वाले लोगों को होली के लिए बैंगनी और नारंगी रंग का चयन करना चाहिए। शुक्र द्वारा शासित वृषभ राशि सुरक्षा और स्थिरता जैसे गुणों से जुड़ी है। ये रंग विकास, स्थिरता और समृद्धि का प्रतीक हैं।

मिथुन 

मिथुन राशि वाले लोगों को हरे रंग से होली मनानी चाहिए, खासकर दोस्तों के साथ। हरा रंग प्रकृति का प्रतिनिधित्व करता है।

कर्क

कर्क राशि वाले लोगों को इस बार होली उत्सव के लिए नीला रंग चुनना चाहिए। क्योंकि कर्क राशि पर चंद्रमा का शासन है, इसलिए इस उत्सव के दौरान नीला रंग उनके लिए भाग्यशाली माना जाता है।

सिंह

सिंह राशि वाले लोगों को नारंगी रंग से होली खेलनी चाहिए। सिंह राशि पर सूर्य का शासन है। होली खेलते समय सिंह राशि के लिए यह रंग शुभ माना जाता है।

कन्या

कन्या राशि वाले पीले रंग का प्रयोग कर होली मना सकते हैं। बुध कन्या राशि पर शासन करता है, जो पृथ्वी तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। उन्हें सलाह दी जाती है कि यदि संभव हो तो अपनी बहनों और मौसी को नीला गुलाल लगाएं।

तुला

तुला राशि वालों को नीले और केसरिया रंग से होली खेलने की सलाह दी जाती है। शुक्र तुला राशि पर शासन करता है, जो वायु तत्व का प्रतिनिधित्व करता है।

वृश्चिक

वृश्चिक राशि के लोग अपने होली उत्सव के लिए किसी भी रंग का चयन कर सकते हैं क्योंकि वे मंगल के प्रभाव में हैं।

धनु

धनु राशि वालों को होली के लिए पीले रंग का उपयोग करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि यह बृहस्पति द्वारा शासित है और अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। पीला रंग शुभ माना जाता है और होली समारोह के दौरान दैवीय आशीर्वाद लाता है।

मकर

मकर राशि वालों को लाल, बैंगनी और भूरे रंग से होली खेलनी चाहिए। शनि द्वारा शासित मकर राशि पृथ्वी तत्व का प्रतिनिधित्व करती है।

कुंभ

कुंभ राशि वालों को होली के दौरान हल्के रंगों की बजाय गहरे रंगों का चयन करना चाहिए। यह उनके लिए शुभ माना जाता है। कुंभ राशि पर शनि का शासन है।

मीन 

मीन राशि वाले हरे और गुलाबी रंग से होली मना सकते हैं। इनका स्वामी ग्रह बृहस्पति है।

होली पर बन रहा है महायोग, जाने शुभ महूर्त और पूजा विधि!!

प्रत्येक वर्ष फाल्गुन महीने की पूर्णिमा तिथि के दिन होलिका दहन होता है और उसके अगले दिन होली मनायी जाती है।इस वर्ष होलिका दहन 7 मार्च रविवार को और रंगों वाली होली 8 मार्च सोमवार को मनाई जाएगी।

पूरे भारत में यह त्यौहार काफी धूमधाम से मनाया जाता है। ब्रज भूमि में तो हफ्ते भर पहले से ही होली की खुमार छाया रहता है। इस वर्ष भी लड्डू की होली, लट्ठमार होली इन सबकी शुरुआत हो चुकी है और रंग-गुलाल उड़ रहे हैं।

इस बार होली के मौके पर कई शुभ संयोग बन रहे हैं जिसके कारण इस त्यौहार का महत्व और भी अधिक बढ़ गया है।

शुभ मुहूर्त :

होलिका दहन मार्च 7, मंगलवार
होलिका दहन मुहूर्त- मुहूर्त रात्रि 3 से 4:30 बजे शुभ व 4:30 से 6 बजे तक

होली की पूजा विधि

  • होलिका पूजन शाम के समय किया जाता है। इसके लिए आप पूर्व या उत्तर की तरफ अपना मुख करके बैठें।
  • इसके बाद अपने आस -पास पानी की कुछ बूंदे छिड़कें। ऐसा करने से आपके पास की सभी नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है।
  • इसके बाद गोबर से होलिका बनाएं या फिर सार्वजनिक जगह पर जाकर जहां होलिका बनी हो वहां जाकर पूजन करें।
  • होलिका पूजन से पहले गणेश जी का पूजन अवश्य करें।
  • पूजन के लिए एक थाली में रोली, कच्चा सूत, चावल, फूल, साबुत हल्दी, बताशे, फल और एक लोटा पानी अवश्य लें।
  • इसके बाद नरसिहं भगवान का स्मरण करें होलिका पर रोली, चावल, फूल, बताशे अर्पित करें और मौली को होलिका के चारों और लपेटें।

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श्राइकोटी माता मंदिर : एक ऐसा अनोखा मंदिर जहां एक साथ नहीं जा सकते पति-पत्नी

हिंदू धर्म में ऐसी मान्यताएं हैं कि शादी के बाद विवाहित जोड़े को किसी भी शुभ कार्यक्रम, पूजा-पाठ, हवन आदि में एक साथ शामिल होना होता है। तीर्थ और पूजा-पाठ का शुभ फल पति-पत्नी के जोड़े के रूप में ही प्राप्त होता है।

वहीँ दूसरी तरफ देव भूमि हिमाचल प्रदेश में एक ऐसा मंदिर है, जहां पति-पत्नी एक साथ नहीं जा सकते। जी हाँ, आज हम आपको इसी अनोखे मंदिर और इससे जुड़ी रोचक बातें बताने जा रहे हैं, चलिए शुरू करते हैं:

देवभूमि हिमाचल प्रदेश में जिला शिमला के रामपुर में समुद्र तल से 11000 फीट की ऊंचाई पर मां दुर्गा का एक रूप विराजमान है जो श्राई कोटि माता के नाम से बहुत प्रसिद्ध है। इस मंदिर में पति-पत्नी दोनों जाते हैं, लेकिन दर्शन अलग अलग करते हैं।

इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि अगर कोई जोड़ा इस मंदिर में एक साथ जाए तो यह उनके लिए श्राप के समान है। वे अपने निजी जीवन में बहुत सारी समस्याओं का सामना करते हैं और अंततः एक दूसरे से अलग हो जाते हैं।

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पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार एक बार भगवान शिव ने अपने दोनों पुत्रों गणेश और कार्तिकेय को संपूर्ण ब्रह्मांड की परिक्रमा करने के लिए कहा।

कार्तिकेय जी परिक्रमा के लिए निकल गए, लेकिन गणपति जी महाराज ने माता-पिता के चारों ओर चक्कर लगा कर कहा कि माता-पिता के चरणों में ही भ्रमांड है और परिक्रमा पूरी कर ली।

जब तक कार्तिकेय जी घर वापस आए, तब तक गणेश जी का विवाह हो चुका था, जिससे कार्तिकेय जी बहुत गुस्सा हो गए और फिर उन्होंने फैसला किया कि वह जीवन भर कभी विवाह नहीं करेंगे।

जैसे ही मां पार्वती को कार्तिकेय के फैसले के बारे में पता चला, तो वह क्रोधित हो गईं और श्राप दिया कि जो भी जोड़ा इस मंदिर में एक साथ आएगा, वे भविष्य में निश्चित रूप से अलग हो जाएंगे। यही कारण है कि पति-पत्नी इस जगह पर एक साथ नहीं जाते हैं।

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अगर फिर भी कोई ऐसा करता है तो मां के श्राप अनुसार उसे ताउम्र एक दूसरे का वियोग सहना पड़ता है। जो भी परंपरा के अनुसार माता के दर्शन करता है, उसकी समस्त मनोकामना पूरी होती है।

यह मंदिर सदियों से लोगों की आस्था का केंद्र रहा है और मंदिर का रखरखाव माता भीमाकाली ट्रस्ट के पास है। घने जंगल के बीच स्थित इस मंदिर का रास्ता देवदार के घने पेड़ों से और भी रमणीय लगता है। शिमला पहुंचने के बाद नारकंडा होते हुए वाहन और बस से और फिर मनु गांव होते हुए यहां पहुंचा जा सकता है।

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ये है दुनिया का सबसे सुखी इंसान, खुश रहने के अनमोल टिप्स!

हमेशा सुखी और खुश रहने क्या फंडा क्या है? इस दुनिया के झमेले में फंस कर भी खुश और सुखी कैसे रहा जा सकता है।  इस पोस्ट में हम इसी विषय पर कुछ रोचक जानकारी आपके साथ शेयर करने वाले हैं।

दुनिया में शायद ही कोई ऐसा इंसान होगा जिसे कोई दुख या तकलीफ न हो। अगर आपसे कहा जाए कि दुनिया में ऐसा भी एक इंसान है जो दुनिया का सबसे खुश इंसान माना जाता है तो आपको इस बात पर विश्वास ही नहीं होगा क्योंकि हर किसी की जिंदगी में कुछ न कुछ उलझन बनी ही रहती है।

आज हम आपको एक ऐसे ही शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं। हम बात कर रहे हैं माथ्यु रिका के बारे में।

माथ्यु रिका (Matthieu Ricard) का जन्म सन 16 फ़रवरी 1946 को फ्रांस में हुआ था। वह एक फ्रांसीसी लेखक, फोटोग्राफर, अनुवादक और बौद्ध भिक्षु हैं, जो नेपाल में शेचेन तेनी दार्गयेलिंग मठ (Shechen Tennyi Dargyeling Monastery) में रहते हैं।


उन्हें दुनिया का सबसे खुश इंसान होने का दर्जा प्राप्त है। माथ्यु का दावा है कि वह कभी उदास नहीं होते। हालांकि यह सिर्फ उनका दावा नहीं है, वैज्ञानिकों ने उन पर रिसर्च भी की है जिससे यह पता चला है कि वह दुखी नहीं हैं।

एक रिपोर्ट के मुताबिक माथ्यु आखिरी बार 1991 में डिप्रैस हुए थे। साल 2016 में संयुक्त राष्ट्र ने अपनी हैप्पीनेस इंडैक्स रिपोर्ट में माथ्यु को दुनिया का सबसे खुश व्यक्ति घोषित किया था।

माथ्यु रिका (Matthieu Ricard) with Dalai Lama
माथ्यु रिका (Matthieu Ricard) with Dalai Lama

जनसेवा के लिए त्यागा वैज्ञानिक करियर

माथ्यु ने 1972 में पाश्चर संस्थान (Pasteur Institute) से आणविक आनुवंशिकी (molecular genetics) में पीएचडी की डिग्री प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने अपने वैज्ञानिक करियर को त्यागने और तिब्बती बौद्ध धर्म को अपनाने का तथा मुख्य रूप से हिमालय में रह कर जीवन बिताने का फैसला किया।

यूनीलैंड वैबसाइट की एक रिपोर्ट के मुताबिक 76 वर्षीय माथ्यु पर अमरीका की विस्कॉन्सिन यूनिवर्सिटी के न्यूरोसाइंटिस्ट ने शोध किया था। उन्होंने माथ्यु के सिर पर 256 सैंसर लगा दिए जिसमें यह पता चला कि जब रिचर्ड ध्यान करते थे, तो उनके मस्तिष्क में गामा तरंगें उत्पन्न होती थीं। ये गामा तरंगें ध्यान, सीखने और स्मृति से जुड़ी हैं।

रिकार्ड तीन प्रकार के ध्यान का उपयोग करता है: करुणा, खुली जागरूकता और विश्लेषणात्मक। उन्होंने एक दूरस्थ पहाड़ी झोपड़ी में कुल 5 साल एकांत ध्यान में बिताए हैं।

शोध में यह भी पाया गया कि उनके दिमाग का बायां प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स दाएं हिस्से की तुलना में अधिक सक्रिय था। इससे पता चला कि उनके दिमाग का खुश हिस्सा ज्यादा सक्रिय होता है। इसका निष्कर्ष यह निकला कि उन्होंने ध्यान के माध्यम से अपने मन को जगाया है।

माथ्यु रिका के खुश रहने का राज

बता दें कि माथ्यु रिका लोगों को खुश रहने का राज भी बताते हैं। उनका कहना है कि इंसान हमेशा अपने बारे में सोचता है। तब वह पूरी दुनिया को अपना दुश्मन मानता है और उनके साथ प्रतिस्पर्धा में रहता है। उनका कहा है कि यदि व्यक्ति सुखी रहना चाहता है तो उसे अपने बारे में सोचना बंद कर दूसरों के बारे में सोचना शुरू करना होगा।

माथ्यु का कहना है कि जब व्यक्ति में प्रेम, दूसरों के प्रति चिंता और परोपकार की भावना होती है तो वह खुद ही सुखी होने लगता है। उन्होंने अपने एक व्याख्यान में लोगों से कहा था कि यदि लोग प्रतिदिन 15 मिनट ध्यान करें और सुख देने वाली बातों पर विचार करें तो वे खुद ही प्रसन्नता से भर जाते हैं।