नासा ने की धरती जैसे ग्रहों की खोज जहां पर हो सकता है जीवन संभव

जैसे कि आपको पता है कि नासा (NASA) में कुछ नई खोजें होती रहती हैं। नासा का चैलेंज अब एक धरती जैसे ग्रह को खोजना है, जहां पर भी जीवन संभव हो। वैसे तो नासा कुछ ग्रह को खोज चूका है जो धरती जैसे हैं। आजतक ऐसे कई ग्रह मिले चुके हैं जो धरती जैसी है, जैसे कि Kepler-69c, Alpha Centauri Bb, Tau Ceti b, इत्यादी पर ये असल में धरती जैसे ग्रह हैं।

कहां पर हमारी धरती

हमारी धरती सौर मंडल में जिस जगह पर हैं, उसे हम ‘HABITABLE ZONE’ कहते हैं। आपको बता दें कि फर्क सिर्फ इतना है कि जिन धरती जैसे ग्रहों के बारे में हम आपको बता रहे हैं उनमे से एक भी ‘HABITABLE ZONE’ जगह पर नहीं हैं, जहां पर हमारी धरती मौजूद है। आज तक जितने भी ग्रहों के बारे में नासा ने पता लगाया है, उनमे से एक भी ग्रह पूरी तरह से ‘habitable zone’ में नहीं है।

हमारे सूरज के आस-पास 3 तरह की जगह आपको मिलेगी। सूरज के सामने की तरफ जगह बहुत गर्म होती है, दूसरी वो जगह जो सूरज से बहुत दूर होती है, और वो बहुत ठंडी होती है, और तीसरी वो जगह जो न ज्यादा ठंडी होती है और ना बहुत गर्म।

आपको यह बात भी बता दें कि Habitable जोन में किसी भी ग्रह का होना बहुत ख़ास बात है, क्योकि इसमें ही जीवन संभव है। अगर संयोग से कोई भी ग्रह habitable zone में मिल जाए, तब ये किसी चमत्कार से कम नहीं होगा। जो ग्रह इस zone के बाहर होता है, उस ग्रह में शायद पानी हो, पर वो जो पानी होगा वो बर्फ के रूप में होता हैं। पर ये habitable zone वाला पानी, LIQUID WATER यानि पानी के रूप में होता हैं। NASA की इसी खोज में उसने ऐसे कई अजीब ग्रहों का भी पता लगाया है, जो कुछ जायदा ही अजीब हैं।

55 Cancri E

55 Cancri E को आप हीरा ग्रह भी कह सकते हो, क्योंकि यह ग्रह पूरा का पूरा हीरों से बना हुआ है। हीरा तब बनता है, जब कार्बन को बहुत हैवी प्रेशर में रखा जाता हैं। तो बात ये है की इस ग्रह के ऊपर प्रेशर बहुत जायदा है और इसके सतह पे बहुत सारा कार्बन भी है और इसी के चलते सारा का सारा कार्बन हीरे में बदल गया है। आपको बता दें कि आपको खुश होने की जरुरत नहीं है, क्यूंकि ये धरती से 40 प्रकाश वर्ष दूर है। मतलब अगर कोई प्रकाश की गति से भी इस ग्रह के तरफ आगे बढ़े, तब भी उसे चालीस साल लग जायेंगे। पर उतनी रफ़्तार से जाना भी संभव नहीं है।

HD 189733B

यह ग्रह भी बहुत अद्भुत है, क्योंकि इस ग्रह पर शीशे की बारिश होती है। इस ग्रह का वातावरण सिलिकॉन का बना हुआ है और इसी के चलते ये दिखने में नीले कलर का है। इस ग्रह में तापमान भी बहुत ज्यादा होता है। यह ग्रह धरती से करीब 63 प्रकाश वर्ष दूर है। ज्यादा तापमान की वजह से सिलिकॉन ग्लास में बदल जाता है और यही ग्लास बारिश के रूप में आसमान से गिरती है। सोचिये! एक ग्रह जिस पर कांच बरसता हो, तो क्या होगा।

Gliese 581c

यह एक ख़ास ग्रह है क्योंकि वैज्ञानिकों का मानना है कि इस ग्रह पर भी जीवन बस सकता हैं। लेकिन अगर देखा जाए तो ये ग्रह धरती से भी काफी अलग है। इस ग्रह का एक हिस्सा हमेशा सूरज की तरफ रहता है, और दूसरा हिस्सा हमेशा सूरज से दूर रहता है। इसका मतलब अगर आप इस ग्रह के उस सतह पर रहोगे जो सूरज की तरफ है तो आपका जिंदा शरीर एक सेकंड में भाप बन कर उड़ जायेगा और अगर आप उस जगह पर रहोगे जो सूरज के दूसरी तरफ हैं तब आप तुरंत जम जाओगे। जी हां जैसे की हम आपको बता चुके हैं कि इस ग्रह पर जीवन संभव हैं, इस ग्रह पर एक ऐसी जगह हैं, जहां पर जीवन संभव हैं। उस जगह पर न ही ज्यादा गर्मी है और न ही ज्यादा ठंड।

HD 188 733

HD 188 733 ग्रह में ख़ास बात यह है कि इसके तीन सूरज हैं। अगर आप इस ग्रह पर चले गए तो आप तीन बार सूर्यास्त होते हुए देख सकते हो।

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उड़ीसा का शोक – छत्तीसगढ़ की महानदी

महानदी छत्तीसगढ़ और उड़ीसा की सबसे बड़ी नदी है। भारत की तकरीबन नदियाँ हिमालय के पर्वतों से निकलती है, पर यह नदी रायपुर (छत्तीसगढ़) में सिहावा नामक पर्वत से निकलती है। इस नदी को “छत्तीसगढ़ की गंगा” और “उड़ीसा का शोक” भी कहा जाता है।

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महानदी का सफर

यह नदी रायपुर (छत्तीसगढ़) में सिहावा नामक पर्वत से निकलती है और अपना अधिक रास्ता छत्तीसगढ़ में ही तय करती है। इस नदी की लम्‍बाई 885 किमी है। आखिर में जा के यह नदी बंगाल की खाड़ी में गिर जाती है।

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इतिहास

महाभारत काल में इस नदी के तट पर आर्यों का निवास था। भारतीय प्रजा इस नदी का ही पानी पीती थी। रामायण काल में इस नदी के तट पर पूर्व इक्ष्वाकु वंश के नरेशों ने अपना राज्य स्थापित किया था।

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महानदी के और तीन नाम

इस नदी को कई नामों से जाना जाता है जैसे कि चित्रोत्पला, महानन्दा और नीलोत्पला।

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महानदी की सहायक नदियाँ

शिवनाथ, पैरी, सोंढूर, हसदेव, अरपा आदि इस नदी की सहायक नदियाँ है।

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महानदी के तट पर स्थित मुख्य मंदिर

इस नदी के साथ भी लोगों की बहुत सी धार्मिक भावनाएं जुड़ी हुई है। इस नदी के तट पर जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा आदि मुख्य मंदिर बने हुए है।

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जानिए रेगिस्तान की कुछ रहस्यमई बातें

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रेगिस्तान पृथ्वी का सबसे बंजर स्थान हैं, जहां सालाना 10 इंच से भी कम बारिश होती है। आज हम आपको रेगिस्तान की कुछ रहस्यमई बातों के बारे में बताने जा रहे हैं। तो आइये जानिए इसके बारे में।

आपको बता दें कि यह रेगिस्तान बहुत ही पुराने बने हुए हैं, लगभग 8 से 10 हज़ार साल पहले के ये बने हुए हैं। आमतौर पर रेगिस्तान को मरुस्थल भी कहा जाता है, यह बहुत ही गर्म रहते हैं। वास्तव में पृथ्वी पर दर्ज उच्चतम तापमान 1913 में कैलिफोर्निया और नेवादा की डैथ वैली में 134 डिग्री फारेनहाइट यानी 56.6 डिग्री सैल्सियस मापा गया था।

हालांकि, कई मरुस्थल गर्मियों में दिन के दौरान 100 डिग्री फारेनहाइट यानी 37.8 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान तक पहुंच जाते हैं, परंतु रात में वे ठंडे हो सकते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि, बादल तथा जल वाष्प रात के वक्त गर्मी को वातावरण में रोक कर रखते हैं- ठीक किसी कम्बल की तरह लेकिन मरुस्थल में ऐसा होने के लिए पर्याप्त बादल और जल वाष्प नहीं होते।

आपको बता दें कि कुछ मरुस्थल हमेशा ठंडे रहते हैं। वास्तव में दुनिया का सबसे बड़ा रेगिस्तान अंटार्कटिका है। बेशक यह बर्फ से ढका हुआ है, लेकिन वहां पर बारिश या बर्फबारी शायद ही कभी होती हो, जिस वजह से यह भी एक मरुस्थल है।

प्रसिद्ध रेगिस्तान

भारत के राजस्थान प्रदेश में बहुत बड़ा रेगिस्तान है, जो पाकिस्तान तक फैला हुआ है। हालांकि, दुनिया में और भी कई मरुस्थल बेहद विशाल हैं। उदाहरण के लिए अफ्रीका का सहारा मरुस्थल, जो अमेरिका से भी बड़े इलाके में फैला हुआ है। एशिया में विशाल गोबी रेगिस्तान चीन और मंगोलिया में फैला हुआ है। सोनोरान मैक्सिको तथा दक्षिण-पश्चिमी अमेरिका के कुछ हिस्सों में स्थित एक बड़ा मरुस्थल है।

रेगिस्तान में जीवन

अगर आपको लगता है कि मरुस्थल में जीवन संभव नहीं है, तो ऐसा कुछ नहीं बलकि मरुस्थल भी जीवन से भरे हुए हैं। मरुस्थल में ऐसे पौधे और जानवर रहते हैं, जो बिना पानी के जीवित रहने के लिए अनुकूल हो चुके हैं। कुछ पौधे जैसे कैकटस, अपने तनों में अगली बारिश तक पर्याप्त पानी बचा सकते हैं। मेसक्वाइट घास जैसे अन्य पौधों में बहुत छोटी पत्तियां होती हैं जो दिन में पानी बचाने के लिए मुड़ी रहती हैं।

कुछ जानवरों में भी मरुस्थल के अनुकूल ढलने की खूबी पैदा हो चुकी है, जो उन्हें बिना पानी के जीवित रहने में मदद करती है। सोनोरान मरुस्थल में कंगारू रैट को उन बीजों से पानी मिलता है, जिन्हें वे खाते हैं। रेगिस्तानी लोमड़ी जैसे कुछ मांसाहारी जानवरों को अपने शिकार से पर्याप्त तरल मिल जाता है। गर्मी और शुष्कता से बचने के लिए अधिकांश रेगिस्तानी जानवर दिन के वक्त जमीन में या चट्टानों की छाया के नीचे रहते हैं। उनमें से कई रात में शिकार करते हैं, जब मौसम ठंडा होता है।

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कब्रिस्तान पर बना हुआ एक कॉल सेंटर, जहां भूत करते है काम

उद्योग विहार, गुड़गांव के सैफरन कॉल सेंटर (बीपीओ) को सबसे भुतहा जगह माना जाता है। कहते है कि यह कॉल सेंटर एक कब्रिस्तान पर बना हुआ है। इस बीपीओ के कर्मचारी समर अब्बास जो यहां पहले काम करते थे, वह यहां का एक-दोभुतहा किस्सा बताते है।

वह बताते है कि 2005 में, रोज नाम की एक लड़की इस बीपीओ में काम करती थी। रोज बहुत मेहनती लड़की थी, हर कोई उसे पसंद करता था। एक बार उसे किसी की कॉल आई, जो कि बहुत लंबे टाइम तक चली थी, वह बहुत गुस्सा हो रही थी। उसके बाद वह कॉल सेंटर से लंबी छुट्टी लेकर चली गई। जब वह बहुत दिनों की छुट्टी के बाद भी वापिस नहीं आई, तो कंपनी ने उसे ढूंढने का फैसला किया क्योंकि वह किसी कॉल या ईमेल का भी जवाब नहीं दे रही थी।

जहां पर वह रहती थी, कंपनी वालों ने उस मकान मालिक को रोज के बारे में पूछा। मकान मालिक ने बताया कि वह लड़की तो आठ साल पहले ही मर चुकी थी। समर अब्बास कहते है कि वह ना रोज से मिला और ना उसे देखा, क्योंकि वह इस घटना के बाद कंपनी में लगा था। लेकिन वहां पहले से काम करने वाले लोग कहते है यह बात बिलकुल सच है। इन सब बातों से यह नतीजा निकलता है की कंपनी ने एक भूत को काम पर रखा, जिसने बहुत अच्छा काम किया और फिर गायब हो गया। कहते है कि यह कंपनी एक कब्रिस्तान पर बनी हुई थी।

समर कहते है, रोज वाली कहानी तो सिर्फ उसने सुनी हुई है, लेकिन वहां और भी कुछ घटनाएं हुई, जिस समय वह वहां मौजूद था। एक रात 1 बजे, मैं पुरुषों के बाथरूम में गया। मैं उस वक्त नींद में था और अपने चेहरे पर ठंडा पानी छिड़कने लगा। उस वक्त बाथरूम में और कोई भी नहीं था। अचानक किसी लड़की की चिल्लाने की आवाज़ आई। मुझे लगा के महिलाओं के बाथरूम से कोई मदद के लिए चिल्ला रहा है।

मैं मदद के लिए बाहर गया और मेरी सहकर्मी मुझे ऐसे घूर रही थी, जैसे उसे कोई सदमा लगा हो। उसने मुझसे पूछा कि क्या तुमने भी किसी के चिल्लाने की आवाज़ सुनी। लेकिन बाथरूम में उसके अलावा और कोई भी नहीं था। एक घटना तब की थी, जब कंपनी का परिवहन क्षेत्र बेसमेंट में था। एक सुबह 3 से 4 बजे के बीच, मैं खाना खाने के लिए बाहर जा रहा था और मैंने देखा कि परिवहन सुपरवाइजर बेसमेंट से बाहर भाग रहा था।

मेरे पूछने पर उसने बताया कि वो अपना काम खत्म करने बाद कुर्सी पर सोने की कोशिश कर रहा था और उसने अपने पैर डेस्क पर टिकाये हुए थे। किसी ने उसके पैरों को खींचा, लेकिन उसने इस बात को नज़रअदांज कर दोबारा सोने की कोशिश की। इस तरह उसके साथ दो बार हुआ। तीसरी बार उसे किसी ने कुर्सी से उठाया और फर्श पर फेंक दिया। उस वक्त वह परिवहन कमरे में अकेला था, इसलिए वह डर कर भाग रहा था।

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जानिए इंटरनेट के फायदे और नुकसान के बारे में

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इंटरनेट एक दुसरे से जुड़े कई कंप्यूटरों का जाल है, जो राउटर एवं सर्वर के माध्यम से दुनिया के किसी भी कंप्यूटर को आपस में जोड़ता है। आपको बता दें कि इंटरनेट को हिंदी में अंतराजाल भी कहते हैं। हम इसकी मदद से दुनिया से जुड़ पा रहे हैं। जैसे कि आपको पता है कि अगर किसी चीज़ के फायदे हैं तो दूसरी तरफ उसके नुकसान भी होते हैं। तो आइये जानिए इंटरनेट के कितने फायदे और नुकसान हैं।

इंटरनेट के फायदे

ऑनलाइन शॉपिंग

आज के समय में आप इंटरनेट की मदद से घर बैठे ही सब समान ख़रीद सकते यानि कि आप ऑनलाइन शॉपिंग कर सकते है, आपको दुकान में जाने की कोई जरूरत नहीं हैं। इससे आप अपने महत्वपूर्ण समय की बचत कर सकते हैं।

व्यापार को बढ़ावा

व्यापार को बढ़ावा देने के लिए भी अंतराजाल का विशेष रोल हैं। विश्व की सभी बड़ी कंपनियां अपने व्यापार को आगे बढ़ाने के लिए इंटरनेट की मदद ले रही हैं, जैसे कि ऑनलाइन एडवरटाइजिंग, एफिलिएट मार्केटिंग और वेबसाइट की मदद से अपने व्यापार को इंटरनेट के माध्यम से पूरे विश्व भर में फ़ैलाने की कोशिश कर रही हैं।

ऑनलाइन ऑफिस

कुछ ऑनलाइन मार्केटिंग और कम्युनिकेशन से जुड़ी कंपनियां है, जिसके कर्मचारी अपने घर पर ही लैपटॉप और मोबाइल फोन पर अंतराजाल के माध्यम से मार्केटिंग का काम करते हैं।

फ्रीलांसिंग

फ्रीलांसर का अर्थ होता है इंटरनेट पर अपने कौशल का इस्तेमाल करके कुछ पैसा कमाना। आज अंतराजाल पर लोग वेबसाइट बनाकर, ऑनलाइन सर्वे, एफिलिएट मार्केटिंग, ब्लॉगिंग, YouTube पर वीडियो अपलोड करके और कई अन्य तरीकों से घर बैठे पैसा कमा रहे हैं।

ऑनलाइन नौकरी की जानकारी

अंतराजाल की मदद से आप आसानी से नौकरियों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। अब आप आसानी से घर बैठे जॉब पोर्टल वेबसाइट की मदद से किसी भी नौकरी के विषय में जान सकते हैं और उनके वेबसाइट पर जाकर नौकरी के लिए आवेदन भी कर सकते हैं।

मनोरंजन

इस युग में इंटरनेट सबसे अच्छा मनोरंजन का साधन बन चुका है। जब भी आपके पास खाली समय हो तो आप इंटरनेट की मदद से गाना सुन सकते हैं, फिल्में और टेलीविज़न आदि देख सकते हैं। साथ ही हम ऑनलाइन अपने दोस्तों से सोशल मीडिया या सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट पर भी चैट कर सकते हैं।

इंटरनेट के नुक्सान

इन्टरनेट फ्री नहीं होता है

जैसे की आपको पता है कि इंटरनेट फ्री नहीं होता, इसके कनेक्शन के लिए आपको पैसे देने पड़ते हैं, तो इसीलिए आपको जितनी इसकी जरूरत है उतना ही इसका उपयोग करना चाहिए।

हैकिंग

आपको बता दें कि आप जिस वेबसाइट पर अपना अकाउंट रजिस्टर करते हैं उनमें से लगभग 50-60% कंपनियां आपके निजी जानकारियों को बेचती हैं या उनका दुरुपयोग करती है। कुछ लोग अंतराजाल की मदद से आपकी जरूरी जानकारियों को भी हैक कर सकते हैं। अभी हाल ही में विश्व भर के कई कंप्यूटर पर Ransomware Attack हुआ था, जिसमें कई लोगों का करोड़ों का नुक्सान हुआ था।

समय की बर्बादी

किसी काम के लिए अगर इंटरनेट का उपयोग किया जाए तो अच्छा है, लेकिन अगर आपका इसका दुरूपयोग कर रहे हो तो इससे आपको कोई फयादा तो नहीं होगा बलकि आपका कीमती समय भी बर्बाद होगा।

इंटरनेट की लत और स्वास्थ्य प्रभाव

आपके बता दें कि इंटरनेट की लत किसी नशे से कम नहीं हैं। कुछ ऐसे भी लोग होते हैं जो अंतराजाल पर लगे रहते हैं. वह न ही कुछ खाते हैं और ना ही कुछ पीते हैं। ऐसे में उनके शरीर कमज़ोर होने लग जाता हैं और भी कई प्रकार के बुरे प्रभाव शरीर पर पड़ते हैं जैसे वज़न बढना, पैरों और हाथों में दर्द, आँखों में दर्द और सूखापन, मानसिक तनाव, कमर में दर्द आदि।

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जानिए अडोल्फ हिटलर के बारे में जिसके नाम से ही कांपता था पूरा विश्व

आज हम आपको अडोल्फ हिटलर के बारे में कुछ ऐसी बातें बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में आपने पहले कभी नहीं सुना होगा। सबसे पहले आपको बता दें कि अडोल्फ हिटलर एक क्रूर स्वभाव का व्यक्ति था। उसने लोगों पर बहुत अत्याचार किया था और उसके नाम से ही पूरा विश्व कांपता था।

जानिए अडोल्फ हिटलर के जीवन से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण बातें

मशहूर अडोल्फ हिटलर का जन्म 20 अप्रैल 1889 में ऑस्ट्रिया में हुआ था।

वह एक प्रसिद्ध जर्मन राजनेता एवं तानाशाह थे। वे ‘राष्ट्रीय समाजवादी जर्मन कामगार पार्टी’ (NSDAP) के नेता भी थे। इस पार्टी को प्राय: ‘नाजी पार्टी’ के नाम से जाना जाता है।

हिटलर के पिता ने तीन शादियां की थी। पहली बार अपने से बहुत ज्यादा उम्र की औरत से शादी की थी। दूसरी बार अपनी बेटी की उम्र की औरत से शादी की और आख‍िर में तीसरी बार हिटलर की मां से शादी की थी।

जवानी के समय हिटलर को एक यहूदी लड़की से प्यार हो गया था। मगर हिटलर के पास उस समय इतनी भी हिम्‍मत नहीं थी, कि वह उस लड़की से अपने प्‍यार का इज़हार कर सकता।

अडोल्फ हिटलर की मां 1908 में अस्पतालमें दाखिल थी, और एक दिन कैंसर से उसकी माँ की मौत हो गई। उनकी देख-रेख करने वाले डॉक्टर का कहना था की उन्होंने पहले बार किसी लड़के को अपनी मां की मौत पर इतना रोते हुए देखा है।

हिटलर अपनी मां की कब्र पर रोते समय कुछ इस तरह के शब्द बोल रहा था- ” माँ, तुम मुझे छोड़कर कुयों चली गई माँ.. तुम्हें पता है मैं तुमसे कितना प्यार करता हूँ..अब मैं तुम्हारे बिना कैसे जिऊंगा माँ..तूने बहुत से दुःख झेले हैं माँ.. मैं भी तुझे कोई सुख भी नहीं दे पाया… अब तू चैन से सो जा माँ..”

हिटलर का सपना एक पेंटर बनने का था. मगर उसे 1907 और 1908 में Accdemy of fine arts ने दो बार रिजेक्ट कर दिया था।

महज 16 साल की उम्र में उन्होंने स्कूल को छोड़कर पोस्टकार्ड पर चित्र बनाकर अपना निर्वाह किया था।

हिटलर की मूंछो को ‘टुथब्रश मुछें’ कहा जाता है। ये मूंछे उसने इसीलिए रखी थी, वह चार्ली चैपल का बहुत बड़ा फैन था इसीलिए उसके जैसी मूंछे रखनी चाहता था।

प्रथम विश्वयुद्ध छिड़ने पर हिटलर सेना में भर्ती हो गये थे, और उसको दो बार ‘आयरन क्राॅस’ से भी सम्मानित किया गया था।

हिटलर की वजह से मानव इतिहास का सबसे विनाशकारी युद्ध छिड़ा था। ये युद्ध दूसरा विश्व युद्ध था, जिसकी वजह से करोड़ों लोगों की जान चली गई थी।

हिटलर की जाति नीति के कारण लगभग 1 करोड़ 10 लाख लोगों की मौत हुई थी। दूसरे विश्व युद्ध के कारण लगभग 6 करोड़ लोगों ने अपनी जान गंवाई थी।

दुनिया में अपना खौफ पैदा करने वाला जर्मनी का तानाशाह हिटलर खुद भी हमेशा मौत के डर के साए में रहता था।

आश्चर्य की बात यह है कि, जिस व्यक्त‍ि ने इंसानों के साथ क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं थी और जिसके नाम से दुनिया डरती थी, वह हिटलर शुद्ध रूप से शाकाहारी था. इतना ही नहीं, उसने पशु क्रूरता के खिलाफ भी एक कानून बनाया था।

आधुनिक इतिहास में पहली बार हिटलर वह पहला इंसान था, जिसने धूम्रपान विरोधी अभियान का आगाज किया था।

हिटलर की जिंदगी का वो दिन सबसे ख़ास दिन था, जब 1938 के साल में टाइम्स मैगज़ीन ने उसको ‘द मैन ऑफ द ईयर’ का टाइटल दिया था।

आस्चर्ज की बात यह है कि सन् 1939 में एडोल्फ हिटलर को शांति के नोबेल पुरस्कार के लिए भी नामांकित किया गया था।

आपको बता दें कि ज्यादातर विशेषज्ञों का यह मानना है कि हिटलर ने मित्र की सेना के बर्लिन पहुँचने पर अपनी पत्नी ईवा के साथ एक भूमिगत में आत्महत्या कर ली थी।

जोराई विलियम्स और उनके सेह-लेखक सिमोन डेस्टन ने अपनी किताब ‘Grey wolf-Escape of Adolf Hitler’ में यह दावा किया है कि दरअसल हिटलर 1945 में बर्लिन स्थित भूमिगत बंकर में नहीं मरा था, बल्कि अमेरिका से हुए एक गुपत समझौते के तहत ईवा ब्राउन के साथ दक्षिण अमेरिका देश अर्जेंटीना चला गया था, और वहां वो 1962 मतलब अपनी मृत्यु तक रहा था।

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उत्तराखंड का एक गांव, जहां इंसान नहीं सिर्फ भूत रहते है!!

आप सब ने भूतिया जगह या फिर भूतिया घर के बारे में सुना होगा। लेकिन कभी यह सुना है कि पूरे गांव पर ही भूतों का राज़ हो। जी हाँ, भारत में एक ऐसा गांव है, जहां इंसान नहीं बल्कि भूत रहते है। भूतों के कारण यह गांव बिलकुल वीरान पड़ा है। लेकिन ऐसा क्या हुआ होगा, जो यह गांव भुतहा बन गया। इस गांव के वीरान और भुतहा होने के पीछे बहुत दर्द भरी कहानी है।

इस गांव का नाम ‘स्‍वाला’ है, जो उत्तराखंड के चंपावत जिले में स्तिथ है। 1952 में गांव में एक ऐसी घटना हुई, जिसके बाद यहां सब बर्बाद हो गया। 1952 में एक दिन गांव से बटालियन की पी.ए.सी की एक गाड़ी जा रही थी, जिसमें आठ जवान सवार थे।

बैलेंस बिगड़ने के कारण वह गाड़ी खाई में गिर गई। गाड़ी में फसे जवान मदद के लिए चिल्लाने लगे। लेकिन गांव वाले जवानों को बचाने की बजाए उनका सामान लूटने लगे। कोई भी मदद ना मिलने के कारण जवानों की तड़प-तड़प कर मौत हो गई।

कहते है उस घटना के बाद जवानों की आत्माएं उस गांव में भटकने लगी। गांव में बहुत अजीब घटनाएं होने लगी। आत्माओं ने गांव में इतना कोहराम मचाया कि गांव वालों का जीना मुश्किल कर दिया था।

गांव वालों को उनके चीखने की आवाज़ें सुनाई देती और उनको लगता के कोई और भी साथ चल रहा है। इन सब घटनाओं से तंग होकर गांव वाले गांव छोड़ कर भाग गए। लोग कहते है कि गांव में जवानों की आत्माएं आज भी भटकती है, इसीलिए यह गांव वीरान पड़ा है।

जिस खाई में जवानों की गाड़ी गिरी थी, उस जगह पर जवानों की आत्मा की शांति के लिये नवदुर्गा का मंदिर बनवाया गया है। जो भी लोग उस रास्ते से गुज़रते है उस मंदिर में भी ज़रूर रुकते है।

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जानिए कैसे पहचाने किसी पुलिस वाले को उसकी वर्दी से

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एक पुलिस कर्मचारी की वर्दी उसके लिए बहुत महत्वपूर्ण होती हैं, क्योंकि एक पुलिस वाले की पहचान उसकी वर्दी से ही होती हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि कैसे किसी पुलिस वाले की वर्दी से आप उसके पद को पहचान सकते हो। तो आइये जानिए इसके बारे में।

कॉन्स्टेबल

राज्य पुलिस में सबसे छोटा पद कॉन्स्टेबल का होता है। कॉन्स्टेबल वर्दी पर कोई बैच नहीं लगाते हैं, उनको सिर्फ वर्दी ही पहननी होती हैं।

हेड कॉन्स्टेबल

हेड कॉन्स्टेबल का पद कॉन्स्टेबल से उच्चा होता है। हेड कॉन्स्टेबल पुलिसकर्मी की वर्दी के आर्म स्लीव पर तीन स्ट्रिप लगी होती हैं।

ए.एस.आई. (सहायक उप निरीक्षक)

हेड कॉन्स्टेबल से अगली रैंक ए.एस.आई. यानि असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर की होती हैं। ए.एस.आई. अपने कंधे पर एक स्टार लगाते हैं, और आधा इंच की चौड़ाई की पट्टी लगी होती हैं, जिसमें एक लाल और एक नीली पट्टी होती हैं।

सब इंस्पेक्टर

ए.एस.आई. के बाद उच्च पद सब इंस्पेक्टर का होता हैं। सब इंस्पेक्टर की वर्दी पर ए.एस.आई. की तरह एक नीले और लाल रंग की स्ट्रिप लगी होती हैं, लेकिन एक स्टार के स्थान पर दो स्टार लगे होते हैं।

इंस्पेक्टर

इंस्पेक्टर एक थाने का इंचार्ज होता हैं। इंस्पेक्टर की वर्दी पर सब इंस्पेक्टर की तरह एक लाल और नीली रंग की स्ट्रिप लगी होती हैं, लेकिन दो स्टार के स्थान पर तीन स्टार लगे होते हैं।

डी.एस.पी.

इंस्पेक्टर से उच्च पद डी.एस.पी. का होता हैं। वह अपने कंधे पर तीन स्टार लगाता हैं। डी.एस.पी. की वर्दी पर स्टार के साथ-साथ लाल और नीली रंग वाली पट्टी नहीं होती हैं।

एडिश्नल एसपी

डी.एस.पी. से उच्च पद एडिश्नल एस.पी. का होता हैं। ए.ए.सपी. अपनी वर्दी पर स्टार और पट्टी की बजाय एक अशोक स्तंभ लगाता हैं।

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खाएं इन चीज़ों को और अपनी त्वचा को रखें सुंदर

आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि कौन सी खाने वाली चीजें आपकी त्वचा को सुंदर बनाने में आपकी मदद कर सकती हैं. तो आइये जानिए इन चीजों के बारे में.

संतरा

संतरा भी आपके शरीर के लिए बहुत फायदेमंद हैं. वह आपके शरीर के blood circulation को सही रखता हैं. ये आपके दिल की बिमारियों को भी दूर करता हैं. आपको बता दें कि संतरा खाने से आपके चेहरे पर pimples, wrinkles उन सबको ये कम कर देता हैं.

टमाटर

टमाटर के अंदर विटामिन-A विटामिन-C ये दोनों आपकी त्वचा को एक तेज़ प्रदान करते हैं, जिसके कारण आपकी त्वचा चमकती है. टमाटर में केमिकल को मिला कर बहुत से प्रोडक्ट्स तैयार किये जा सकते हैं.

दही

दही में प्रोटीन और कैल्शियम का बहुत ही अच्छा श्रोत होता है. प्रोटीन आपके शरीर की मांसपेशियों को बनाने में मदद करता है और कैल्शियम आपकी हड्डियों को मज़बूत करता है. ऐसा कहा जाता है कि सारी बिमारियों आपके पेट से जन्म लेती है, इसीलिए आपको अच्छा भोजन खाना चाहिए क्योंकि जो आप खाते हो उसका सीधा असर आपके पेट पर पड़ता है. दही आपके खाने को पचाने में भी आपकी मदद करती हैं,  इसीलिए दही का सेवन करना आपके शरीर के लिए फायदेमंद हैं.

गाजर

गाजर आपके आँखों के लिए अमृत के समान है. ये आपके आँखों की रौशनी को कमज़ोर नहीं होने देती। गाजर आपके आँखों की RETINA के लिए बहुत लाभदायक होता है. गाजर आपके त्व्त्चा को और निखरता है और आपके समझने की शक्ति को 5-6 गुणा तक बढ़ा देता है.

पालक साग़

पालक इन सब में से सबसे ज्यादा खास है. पालक इन सब में से सबसे HEALTHIEST है. और बिलकुल गाजर की तरह ही ये आपके आँखों के लिए बहुत अच्छा होता है. आपकी त्वचा FREE RADICALS के चलते बर्बाद होता है, पालक इसी FREE RADICALS को मार देता है जिससे आपका त्वचा फिर से चमकने लगती है.

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ताजमहल के किनारे बहती यमुना नदी

यमुना नदी भारत की प्राचीन और पवित्र नदियों में से एक है। ब्रजमंडल की यह नदी सबसे महत्त्वपूर्ण नदी है। यमुना श्री कृष्ण की परम भगत है। यह नदी भक्ति की प्रतीक भी मानी जाती है। शास्त्रों के अनुसार गंगा नदी सफेद और यमुना नदी काली है। भगवान श्री कृष्‍ण का सबसे प्रिय स्‍थान वृन्दावन भी यमुना नदी के तट पर ही बसा हुआ है।

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यमुना नदी का सफर

यह नदी बंदरपूछ के पश्चिमी ढाल पर स्थित यमुनोत्री ग्लेशियर से निकलती है, जो कि 6387 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यमुनोत्तरी पर्वत से निकलकर यह नदी अनेक पहाड़ी दरों और घाटियों में प्रवाहित होती हुई छोटी और बड़ी पहाड़ीयों, नदियों को अपने अंचल में समेटती हुई आगे बढ़ती है और फिर दिल्ली, आगरा से होती हुई आखिर में यह नदी इलाहाबाद में आकर गंगा नदी में मिल जाती है। इस नदी की लम्बाई 1211 किमी है।

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यमुना नदी के कुछ और तथ्य

अपने प्रदेश की अन्य नदियों की तरह यह नदी भी पूर्व की और बहती है। इस नदी को कालिंदी के नाम से भी जाना जाता है। इस नदी के किनारे दिल्‍ली, आगरा, मथुरा, हमीरपुर, इलाहाबाद आदि शहर बसे हुए है। दुनियां के सात अजुबों में शामिल ताजमहल, इसी नदी के किनारे पर स्थित है। मथुरा में इस नदी के 24 घाट ब्रज क्षेत्र है।

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यमुना की सहायक नदियाँ

इस नदी की सहायक नदियाँ चम्बल, सेंगर, छोटी सिन्ध, बेतवा और केन हैं।

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यमराज की बहन है यमुना नदी

शास्त्रों के अनुसार यह नदी यमराज की बहन है। यहां इस नदी को यमी से नाम से जाना जाता है। यमराज और यमी परम तेजस्वी सूर्य की संतान है। कहते है कि सूर्य की पत्नी छाया जो दिखने में काली थी, उनकी संतान यमराज और यमुना भी श्याम वर्ण पैदा हुए थे। इस नदी का जल पहले कुछ नीला और काला था, इसीलिए इसे काली गंगा भी कहते है।

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यमुना नदी की पवित्रता

केशी घाट के पास यमुना नदी को काफी ज्यादा पवित्र माना जाता है, क्यूंकि केशी नामक राक्षस का वध करने के बाद भगवान कृष्ण ने यहीं स्नान किया था। हिन्दू धर्म में माना जाता है कि यहां स्नान करने से सारे पाप धुल जाते हैं।

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