कुत्ते अपनी सोने वाली जगह पर चक्कर लगाकर क्यों सोते हैं?

आपके मन में यह प्रश्न आता होगा कि कभी-कभी कुत्ते सोने से पहले उस जगह के चक्कर लगाकर उस पर क्यों सोते हैं ? तो यह रहा आपके सवाल का जवाब:-

पहले जगह का चक्कर लगाना फिर उस जगह पर सोना, यह प्रकिर्या जंगल के कुत्तों के लिए बहुत मूल्यवान होती है. लेकिन यह आदत पालतू कुत्तों में भी मौजूद होती है.

यह आदत कुत्तों को उनके पूर्वजों से मिली. जो अपने सोने वाली जगह पर कीड़ों और सापों को डराने के लिए चक्कर लगाते थे.

दूसरा तथ्य कुत्ते पहले सोने की जगह पर घूम कर देखते है की जगह पर सोया जा सकता है की नही.

तीसरा तथ्य यह भी माना जाता है कि कुत्ते ऐसा इसलिए करते हैं ताकि वह अपनी ठीक-ठाक निर्धारित की हुई सोने वाली जगह पर आराम से सो सकें.

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समुद्र पर बसा चीन का एक गांव, जहां तैरते हैं घर

दुनिया में लोग अलग – अलग जगहों पर रहते हैं। कोई गांव में, तो कोई शहर में। कोई गांव पहाड़ों पर होता है, तो कोई गांव नदी के किनारे होता है। क्या आप ने कभी सुना है कोई बस्ती समुद्र में रह रही हो। ज़ी हाँ, समुद्र पर तैरती हुई यह बस्ती चीन में है। समुद्र पर बसे टांका नाम के इस गांव में मछुआरे रहते हैं।

टांका नाम की यह बस्ती चीन के फुजियान राज्य के निंगडे शहर के करीब समुद्र पर बसी है। यहां तकरीबन 7,000 मछुआरे रहते हैं। टांका को ‘जिप्सी ऑन द सी’ नाम से भी जाना जाता है। यह गांव लगभग 1300 वर्ष पुराना है।

चीन में 700 ईस्वी में तांग राजवंश का शासन हुआ करता था। इन मछुआरे ने 700 ईस्वी में शासकों के उत्पीड़न से दुखी होकर समुद्र पर रहने का फैसला किया। उन्होंने समुद्र में अपनी नाव पर घर बनाए और रहने लगे, तब से ये लोग समुद्र पर ही रह रहे हैं और वह कभी-कभार ही जमीन पर आते हैं।

समुद्र पर रहने का सिलसिला बदस्तूर जारी है और उन्हें तब से ही ‘जिप्सीज ऑन द सी’ कहते हैं। उन्होंने कभी भी आधुनिक जीवनशैली को नहीं अपनाया। ये भी कहा जाता है कि टांका जनजाति के लोग जमीन पर रहने वाले लोगों से नफरत करते हैं और उन्हें अपने पास भी नहीं आने देते हैं।

टांका जनजाति के लोगों का पूरा जीवन पानी के घरों और मछलियों के शिकार में ही बीत जाता है। यह लोग मछलियों को पकड़कर अपना जीवन चलाते हैं। चीन में मछलियों को लेकर खासी दीवानगी है। चीन में सालाना 3.2 करोड़ टन मछलियों का उत्पादन किया जाता है। यह पूरी दुनिया में मछलियों के उत्पादन का दो-तिहाई है।

उन्होंने एक घर से दूसरे घर तक जाने के लिए लकड़ी के बड़े-बड़े प्लेटफार्म तैयार किये हुए हैं, जहां वह लोग कार्यक्रम करते हैं और बच्चे भी वहीं खेलते हैं। यह लोग समुद्र किनारे बसे लोगों के साथ शादियां भी नहीं करते। वह अपनी बस्ती में नावों पर ही शादियां करते हैं।

हालांकि, अब इनकी जीवनशैली में बदलाव होने लगे हैं, स्थानीय सरकार के प्रोत्साहन के बाद टांका समूह के कुछ लोगों ने समुद्र के किनारे घर बना लिए हैं। पर टांका समूह के कुछ लोग अभी भी अपने परंपरागत तैरते हुए घरों में ही रहना पसंद करते हैं।

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बॉलीवुड के 18 सितारे जो फर्श से अर्श तक पहुंचे

बॉलीवुड के कई सितारों की ज़िंदगी से हमें बहुत कुछ सिखने को मिलता है, क्योंकि बॉलीवुड में आने से पहले कुछ सितारों ने बहुत संघर्ष किया है। एक सफल आदमी के पीछे उसकी कठिनाइयों का समय, उसकी असफलताएं और बहुत कष्ट होते हैं, जो उसे सफलता की मंजिल तक पहुंचाते हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं बॉलीवुड के 18 ऐसे स्टार, जिन्होंने अभिनेता बनने से पहले बहुत संघर्ष किया।

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अमिताभ बच्चन

बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन ने रेडियो कंपनी में नौकरी पाने के लिए बहुत कोशिश की थी, लेकिन वह नाकाम रहें। संघर्ष के दिनों में वह समुंद्री किश्ती के बेंच पर सोया करते थे। उन्होंने स्टार बनने से पहले 8 वर्ष तक संघर्ष किया था। 1970 के दशक के दौरान उन्होंने बड़ी लोकप्रियता प्राप्त की और तब से ही वह भारतीय सिनेमा के इतिहास में सबसे प्रमुख शख्सयित बन गए।

माधुरी दीक्षित

माधुरी दीक्षित ने जब बॉलीवुड में अपने करियर की शुरुआत की थी, तब उन्हें असफलताओं का मुंह देखना पड़ा था। उस दौरान आलोचकों ने तंज कसते हुए कहा था कि वह बॉलीवुड में सिर्फ अपने डांस की वजह से हैं। 5 वर्ष के लंबे संघर्ष के बाद तेज़ाब फिल्म से उनको एक नई पहचान मिली थी। उसके बाद उन्होंने बैक – टू – बैक हिट फ़िल्में देकर खुद के अभिनय की काबलियत को साबित कर दिया।

बोमन ईरानी

बोमन ईरानी चिप्स तलने वाली भट्‌टी के पास बैठकर अपनी बेहद छोटी सी दुकान संभालते थे। उसके बाद उन्होंने 2 साल मुंबई के प्रसिद्ध ताज होटल में एक वेटर और रूम सर्विस स्टाफ के रूप में काम किया। बॉलीवुड में आने से पहले वह फोटोग्राफी भी किया करते थे। उनके करियर की शुरूआत फिल्‍म ‘एवरीबडी सेस आई एम फाइन (Everybody says I am fine)’ से हुई थी। बॉलीवुड में सफलता पाने के लिए उन्होंने 5 वर्ष संघर्ष किया था। बॉलीवुड में उन्हें एक नई पहचान फिल्म ‘मुन्‍नाभाई एम.बी.बी.एस.’ से मिली थी।

जैकी श्रॉफ

फिल्मों में आने से पहले जैकी श्रॉफ मुंबई के मालाबार हिल के तीन बत्ती एरिया में रहते थे, वह वहां लोकल गुंडे थे, और उन्हें जग्गु दादा के नाम से जाना जाता था। एक बार वह बस स्टॉप पर खड़े थे, उन्हें किसी ने मॉडलिंग करने की पेशकश की, तब से उनकी किस्मत बदल गई थी। फिल्मी करियर की शुरुआत के दौरान वह अपने किरदार के लिए पैदल और लोकल ट्रेनों में जाते थे। उन्होंने फिल्मों में ब्रेक पाने के लिए 6 वर्ष तक संघर्ष किया।

शाहरुख खान

शाहरुख खान के करियर की शुरुआत टेलीविजन से हुई थी। उन्होंने दिल दरिया, फौजी, सर्कस जैसे सीरियल्‍स में काम किया था। उनकी बॉलीवुड करियर की शुरूआत ‘दीवाना’ फिल्म से हुई थी। यह फिल्म उस समय में सुपरहिट हुई थी। इसी फिल्‍म से उनको बॉलीवुड में एक नई पहचान मिली थी। आज उनको ‘बादशाह’ और ‘किंग खान’ के नाम से जाना जाता है।

देव आनंद

फिल्मों में आने से पहले वह मिलिट्री सेंसर ऑफिस में क्लर्क की नौकरी करते थे, जहां उनको 165 रुपए महीना वेतन मिलता था। उनका बॉलीवुड में सफर ‘हम एक हैं’ फिल्म से शुरू हुआ था, पर यह फिल्म असफल हो गई थी। फिल्मी करियर में नई पहचान बनाने के लिए उन्होंने 5-7 वर्ष संघर्ष किया था। 1948 में ‘जिद्दी’ उनकी पहली हिट फिल्म थी, उसके बाद वह बॉलीवुड में बहुत मशहूर हो गए थे। 3 दिसम्बर 2011 को 88 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया था।

दिलीप कुमार

उन्होंने अपनी जिंदगी में 7 वर्ष तक संघर्ष किया था। दिलीप कुमार एक कैंटीन चलाते थे। वहां एक्ट्रेस देविका रानी गई थी। दिलीप कुमार को देखकर देविका रानी ने उन्हें फिल्म में काम करने का मौका दिया। उनका असली नाम युसूफ खान था, देविका रानी ने ही उनका युसूफ खान नाम बदलकर दिलीप कुमार रखा था।

नेहा धूपिया

मिस इंडिया नेहा धूपिया फिल्मों में आने से पहले मॉडलों को स्टेज के पीछे तैयार करने का काम करती थी। 2002 में वह खुद फेमिना मिस इंडिया का हिस्सा बनी, जिसमें उन्होंने फेमिना मिस इंडिया का ताज़ अपने नाम किया। उन्होंने कुछ टीवी सीरियलस में भी काम किया। उन्होंने अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत साल 2003 में अजय देवगन स्टारर फिल्म क़यामत से की थी।

अक्षय कुमार

फिल्मों में आने से पहले बॉलीवुड के अभिनेता अक्षय कुमार बैंगकॉक, सिंगापुर और भारत में कपड़े बेचने का काम करते थे। वह बैंगकॉक में वेटर और कुक का काम भी करते थे। उन्होंने फिल्मों में ब्रेक पाने के लिए 5 वर्ष तक संघर्ष किया था। उन्होंने बॉलीवुड में अपने करियर की शुरुआत फिल्म सौगंध से की थी, लेकिन बॉलीवुड में उनको एक नई पहचान फिल्म खिलाड़ी से मिली।

धर्मेंद्र

धर्मेन्द्र को लगता था कि उसे फिल्मों में आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। लेकिन उनको बॉलीवुड में आने के लिए जम कर संघर्ष करना पड़ा। एक टाइम ऐसा था की उनके पास खाने के लिए पैसे भी नहीं होते थे। फिल्म निर्माताओं के दफ्तर में चक्कर लगाने के लिए दूर -दूर तक पैदल जाते थे, ताकि वह खाने के लिए पैसे बचा सकें। उन्होंने फिल्म ‘दिल भी तेरा हम भी तेरे’ से बॉलीवुड में अपने करियर की शुरुआत की थी।

मनोज कुमार

उन्होंने पहले भूतों की कहानियां लिखने का काम किया था। वह एक सीन के लिए 11 रुपए लेते थे। उन्होंने अपनी जिंदगी में 5 वर्षों तक संघर्ष किया। उन्होंने ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 1957 में फैशन नाम की फिल्म से की थी। बहुत सी फिल्मों में उन्होंने देशभगत की भूमिकाएं निभाई, इसीलिए उन्हें ‘भारत कुमार’ के नाम से भी जाना जाता है।

रजनीकांत

उन्होंने एक सफल अभिनेता बनने के लिए 9 वर्षों तक संघर्ष किया। अपने करियर की शुरुआत में उन्होंने कारपेंटर की नौकरी की, फिर वह कुली बन गए। यह नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने बैंगलोर ट्रांसपोर्ट सर्वीस में बस कंडक्टर की नौकरी की। 1973 में उन्होंने कंडक्टर की नौकरी छोड़ कर मद्रास फ़िल्म इंस्टिट्यूट में डिप्लोमा में एडमिशन ले लिया। 1975 में उन्होंने तमिल फ़िल्म से अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत की थी।

ज़ीनत अमान

ज़ीनत अमान ने 1971 में अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत की थी, लेकिन वह बुरी तरह असफल हो गई। फ्लॉप होने के कारण उसने मां के साथ सब कुछ छोड़कर जर्मनी जाने का निश्चय कर लिया था। 1972 में ज़ीनत को फिल्म ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ की ऑफर हुई, इस फिल्म से उन्हें एक नई पहचान मिली।

जॉनी लीवर

जॉनी लीवर बहुत गरीब परिवार से थे। वह सबसे पहले अपने पिता के साथ हिन्दुस्तान लीवर फैक्ट्री में काम करते थे। उनको फिल्म स्टारों की मिमिक्री करने में महारत हासिल थी, इसीलिए वह मुंम्बई आ गए। पहले तो मुंम्बई में उन्होंने सड़कों पर पेन बेचने का काम किया। उन्हें फिल्मों में आने के लिए 4 वर्ष तक संघर्ष करना पड़ा। 1993 में फिल्म-बाज़ीगर से वह बॉलीवुड में काफी मशहूर हुए।

इरफान खान

अपने करियर की शुरुआत में इरफान खान को बहुत संघर्ष करना पड़ा था। उन्होंने टीवी सीरियलस से अपने करियर की शुरुआत की थी। 1998 में फिल्म ‘सलाम बाम्बे’ से उन्होंने बॉलीवुड में अपने करियर की शुरुआत की। 2003 में ‘हासिल’ और ‘मकबूल’ फिल्म से उनको एक नई पहचान मिली थी।

सोनू सूद

उन्होंने अपना फ़िल्मी करियर बनाने के लिए 8 वर्षों तक संघर्ष किया। 1999 में उन्होंने तमिल फिल्मों से अपने करियर की शुरुआत की थी। बॉलीवुड में उन्होंने 2002 में फिल्म ‘शहीद-ए-आजम’ से अपनी शुरुआत की थी, जिसमें उन्‍होंने भगत सिंह का किरदार निभाया था।

गोविंदा

गोविंदा को होटल ताज में प्रबंधक की नौकरी से मना कर दिया गया था, क्योंकि उन्हें अंग्रेजी भाषा का कम ज्ञान था। गोविंदा का पहला जॉब एक खाद का विज्ञापन था। गोविंदा ने अपने फिल्मी करियर की शुरूआत 1986 में ‘इल्जाम’ नामक फिल्म के साथ की थी।

मनोज बाजपेयी

उन्होंने फ़िल्मी करियर के लिए 7 वर्ष तक संघर्ष किया था। 1995 में उन्होंने टीवी सीरियल स्वाभिमान से अपने करियर की शुरुआत की। उनका फिल्मी करियर 1994 में आई ‘बैंडिट क्वीन’ से शुरु हुआ था। लेकिन उनको बॉलीवुड में एक नई पहचान फिल्म ‘सत्या’ से मिली थी।

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2018 में भारत के 10 सबसे अमीर व्यक्ति

 

2018 में भारत के 10 सबसे अमीर व्यक्ति

2018 की अमीर लोगों की जारी की गई लिस्ट में दुनिया के सबसे अमीर आदमी ऐमज़ॉन (amazon) के मालिक जेफ बेजोस हैं। अमीर लोगों की लिस्ट में भारत में लगातार पिछले 11 सालों से सबसे टॉप पर मुकेश अंबानी बने हुए हैं। फोर्ब्स मैग्जीन के अनुसार मुकेश अंबानी की संपत्ति अक्टूबर 2018 तक 47.3 बिलियन डॉलर हो चुकी है। आइए जानते है 2018 के भारत के टॉप 10 सबसे अमीर व्यक्तियों के बारे में:

10. गौतम अडानी

उनके पास कुल 11.9 बिलियन डॉलर की संपत्ति है। वह गुज़रात में भारत का सबसे बड़ा मुंद्रा बंदरगाह नियंत्रित करते है। इसके इलावा उनका बिजली उत्पादन, गैस वितरण, तेल एवं गैस खोज, मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक और कोयला खनन का कारोबार पूरी दुनिया में फैला हुआ है।

9. कुमार मंगलम बिरला

उनके पास कुल 12.5 बिलियन डॉलर की संपत्ति है। वह आदित्य बिरला ग्रुप के अध्यक्ष हैं। आदित्य बिरला ग्रुप में ग्रासिम, हिंडाल्को, अल्ट्राटेक सीमेंट, आदित्य बिरला नुवो, आइडिया सेल्युलर, आदित्य बिरला रिटेल, आदित्य बिरला मिनिक्स आदि कंपनियां आती है। आदित्य बिरला ग्रुप का कारोबार भारत के इलावा लगभग 40 और देशों में फैला हुआ है।

8. दिलीप संघवी

उनके पास कुल 12.6 बिलियन डॉलर की संपत्ति है। वह सन फार्मा इंडस्‍ट्रीज लिमिटेड के मालिक है। इस कंपनी को भारत की नंबर एक और दुनिया की चौथी सबसे बड़ी फार्मास्युटिकल कंपनी माना जाता है। उनके पास 1.46 लाख करोड़ रुपए की शेयर होल्डिंग भी है।

7. गोदरेज समूह

गोदरेज समूह के पास कुल 14 बिलियन डॉलर की संपत्ति है। गोदरेज समूह के अध्यक्ष आदि गोदरेज हैं। गोदरेज समूह में गोदरेज कंज्यूमर प्रोड्क्ट, गोदरेज एग्रोवेट और गोदरेज प्रोपर्टीज आदि कंपनिया काम करती है। उन्होंने गोदरेज को एक ‘पारिवारिक कंपनी’ से एक ‘पेशेवर कंपनी’ बनाया और ‘गोदरेज समूह’ को सफलता के नए शिखरों पर पहुंचा दिया।

6. शिव नाडार

उनके पास कुल 14.6 बिलियन डॉलर की संपत्ति है। वह भारत की चौथी सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी एचसीएल टेक्नोलॉजी के मालिक है। वह एक समाज सेवक भी है, उन्होंने नाडार फाउंडेशन को 662 मिलियन डॉलर दान के रूप में दिए है। भारत के सबसे अमीर व्यक्तियों में वह छठे नंबर पर है।

5. पलौंजी शपूर्जी मिस्त्री

उनके पास कुल 15.7 बिलियन डॉलर की संपत्ति है। वह फोर्ब्स कपड़ा और यूरेका फोर्ब्स लिमिटेड के मालिक है। वह टाटा समूह के शेयर धारक है, जिसमें उनका 18.5% हिस्सा है। अमीरों की जारी लिस्ट में भारत में उनका पांचवा नंबर है।

4. हिंदुजा समूह

हिंदुजा समूह के पास कुल 18 बिलियन डॉलर की संपत्ति है। हिंदुजा समूह को दो भाई श्रीचंद हिंदुजा और गोपीचंद हिंदुजा मिलकर चलाते है। हिंदुजा समूह की स्थापना 1914 में उनके पिता परमानंद दीपचंद हिंदुजा द्वारा की गई थी।

3. लक्ष्मी मित्तल

अमीरों की जारी लिस्ट में लक्ष्मी मित्तल तीसरे स्थान पर हैं। उनके पास कुल 18.3 बिलियन डॉलर की संपत्ति है। वह दुनिया की सबसे बड़ी स्टील उत्पादक कंपनी आर्सेलर मित्तल के सीईओ और चेयरमैन हैं। उनको ‘स्टील किंग’ के नाम से भी जाना जाता है। ‘क्वींस पार्क रेंजर्स फुटबाल क्लब’में भी उनकी 33 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

2. अज़ीम प्रेमजी

अमीर लोगों की जारी लिस्ट में भारत में दूसरे नंबर पर अज़ीम प्रेमजी हैं। उनके पास कुल 21 बिलियन डॉलर की संपत्ति है। उनका पूरा नाम अज़ीम हाशिम प्रेमजी है। वह भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनी विप्रो के अध्यक्ष हैं। विप्रो दुनिया की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर आईटी कंपनियों में से एक है। उनको भारत का ‘बिल गेट्स’ भी कहा जाता है।

1. मुकेश अंबानी

अक्टूबर 2018 जारी लिस्ट के अनुसार अमीरों में उनका भारत में पहला नंबर और दुनिया में 19वां रैंक है। उनके पास कुल 47.3 बिलियन डॉलर की संपत्ति है। वह रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक एवं कंपनी के सबसे बड़े शेयर धारक हैं। यह कंपनी उनके स्वर्गीय पिता धीरूभाई अंबानी द्वारा स्थापित की गई थी।

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भारत एक ऐसा देश है जिसमे अंधविश्वासों को ज्यादा बढ़ावा दिया जाता है, खासकर औरतें इसमें ज्यादा विश्वास रखती हैं। आपको बता दें कि हर अंधविश्वासों को मानने के पीछे कोई न कोई वजह तो जरूर होती है। आज हम आपको इन्हीं अंधविश्वास से जुड़े कुछ रोचक बातें बताने जा रहे हैं।

क्यों काटती है बिल्ली रास्ता

एक सबसे बड़ा अंधविश्वास यह भी है हमारे लोग मानते हैं कि अगर कोई बिल्ली रास्ता काट जाए तो वहीं रूक जाना चाहिए जा फिर वापिस हो जाना चाहिए, ऐसा इसलिए है क्योंकि हमे ये लगता है की उस सड़क को पार करने से हम कोई अनर्थ कार्य कर देंगे जो हमे नहीं करना चाहिए।

यह है बिल्ली के रास्ता काटने की सच्चाई, बात दरअसल यह है कि पुराने ज़माने में न तो ज्यादा वाहन होते थे और न ही बस चला करती थीं। तो उस ज़माने में आने-जाने के लिए लोग घोड़ा गाड़ी का इस्तेमाल करते थें। किसी समय अगर रात को बिल्ली रास्ते में आ जाती तो उसे देखकर घोड़ा डर जाता था क्योंकि रात को बिल्ली की आँखें चमकती हैं। ऐसे में घोड़े गाड़ियों का संतुलन बिगड़ जाता था और जिसके कारण उस गाड़ी में बैठे लोगों को चोट लग जाया करती थीं। बेशक समय काफी बदल चुका है लेकिन लोगों की मान्यताएं आज भी वंही की वंही अटकी हुई हैं।

दुकान में नींबू और हरी मिर्च क्यों लगाते हैं दुकानदार

क्या आप जानते हो कि दूकानदार अपनी दुकान के मुख्य दरवाज़े के ऊपर नींबू और हरी मिर्च क्यों लगाते हैं। लोगों का मानना हैं कि अलक्ष्मी नामक एक देवी है जो बड़े-बड़े व्यापारियों के घर ख़राब किस्मत ले आती है और उसको भगाने के लिए वह ऐसा करते हैं ताकि जब भी अलक्ष्मी उनका धंदा चौपट करने आये तो वो बाहर ही बाहर उस नींबू और मिर्च को खा कर प्रसन्न होकर लौट जाए और उनका कोई नुकसान न करें।  यह तो सिर्फ उनका मानना है, असल में जिस धागे से नींबू और मिर्च को बाँधा जाता है,  वह धागा नींबू से निकलते अम्ल(acid) को सोख लेता है और इससे निकलती गंध के चलते कीड़े, मकोड़े और कीट दुकान के अंदर नहीं आतें।

पीपल के पेड़ की ही पूजा क्यों

आपने पीपल के पेड़ की पूजा तो होते हुए देखी होगी, पर क्या आपने कभी सोचा है की पीपल के पेड़ की ही पूजा क्यों होती है? जैसे हीं रात होती है, सभी पेड़ ऑक्सीजन लेते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़तें हैं। लेकिन पीपल ही एक मात्र ऐसा पेड़ है जो रात के वक़्त भी हमे सुध ऑक्सीजन देता है और यही नहीं पीपल के पेड़ से हम कई तरह के आयुर्वेदिक दवाएं भी बनाते हैं। इसी वजह से ही पीपल एक ख़ास पेड़ है, इसीलिए लोग इसकी पूजा करते हैं।

दही-चीनी का संबंध

घर से बाहर जाने से पहले दही-चीनी को खाना बहुत अच्छा माना जाता हैं। लोगों का मानना है कि आप जो भी काम के लिए जा रहे हो उसमे आपको सफलता मिलती हैं। आपको बता दें कि ऐसा कुछ नहीं है असल में जो दहीं और चीनी हैं वह हमारे पेट में गड़बड़ी होने से बचाती हैं।

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महाभारत की द्रौपदी के बारे में कुछ रोचक तथ्य

महाभारत से बहुत सी लोकप्रिय कथाएं जुड़ी हुई है। द्रौपदी महाभारत के मुख्य पात्रों में से एक है। द्रौपदी एक संपूर्ण नारी थी। एक प्रतिष्ठित कुरु राज्य की रानी होने के बावजूद द्रौपदी ने सब से ज़्यादा कष्ट सहा था। आइए जानते है द्रौपदी के बारे में कुछ रोचक तथ्य:

द्रौपदी के पांच नाम

द्रौपदी को पांचाली (अर्थात पांचाल राज्य की), यज्ञसेनी (अर्थात यज्ञ या आहुति से उत्पन्न), महाभारती (भारत के पांच महान वंशजों की पत्नी) और सैरंध्री इन पांच नामों से भी जाना जाता था।

महाकाली का अवतार

द्रौपदी महाकाली का अवतार थी। वह भगवान कृष्ण की सहायता के लिए पैदा हुई थी, ताकि वह सभी अभिमानी राजाओं को नष्ट कर सके।

भगवान शिव का वरदान

द्रौपदी को पांच पति भगवान शिव के वरदान से मिले थे। वह अपने पिछले जन्म में 14 गुणों वाला पति चाहती थी। एक व्यक्ति में ये 14 गुण होने असंभव थे। इसीलिए भगवान शिव ने उन्हें पांच व्यक्तियों की पत्नी बनने का वरदान दिया और कहा उसके अगले जन्म में उसे ये 14 गुण इन पांच पतियों में मिलेगें।

कुत्तों को दिया था श्राप

पांडवों से विवाह के बाद वे सभी इस बात पर सहमत हुए थे कि एक समय में केवल एक भाई ही द्रौपदी के कक्ष में जा सकेगा, अन्य और कोई नहीं और जाने से पहले वह अपने जूते दरवाज़े पर रख देगा। जूतों से यह पता रहेगा कि कक्ष में पहले ही कोई है। एक दिन युधिष्ठिर द्रौपदी के साथ कक्ष में थे और तभी एक कुत्ता दरवाज़े के बाहर से उनके जूते चुरा ले गया।

इस बात से अनजान अर्जुन कक्ष में प्रवेश कर गए और उन्होंने युधिष्ठिर को द्रौपदी के साथ देख लिया। द्रौपदी को बहुत शर्मिंदगी महसूस हुई और उसने क्रोध में आकर जूते चुराने वाले कुत्ते को यह श्राप दे दिया, “सारी शर्म को भूलकर सारा संसार तुम्हें सार्वजनिक रूप से मैथुन करते हुए देखेगा”।

ऋषि दुर्वासा ने बचाया था

चीर हरण के समय ऋषि दुर्वासा के एक वरदान ने द्रौपदी की रक्षा की थी। एक बार गंगा में स्नान करते वक्त ऋषि दुर्वासा की लंगोटी गंगा नदी में बह गई। तब द्रौपदी ने अपने वस्त्र का एक कपड़ा फाड़कर उन्हें ढांकने के लिए दिया। इसीलिए ऋषि ने उसे कपड़े की एक न अंत होने वाली पट्टी का वरदान दिया था। जब दुशासन ने द्रौपदी का चीर हरण किया, उसी वरदान ने द्रौपदी की रक्षा की थी।

पांचों पतियों में से किसे अधिक प्रेम करती थी

द्रौपदी पांचों पतियों में से अर्जुन को सबसे ज्यादा प्रेम करती थी,पर अर्जुन  कृष्ण की बहन सुभद्रा से सबसे ज़्यादा प्यार करते थे। पांचों में से महाबली भीम द्रौपदी को सबसे अधिक प्रेम करते थे।

द्रौपदी की शर्त

द्रौपदी ने पांचों पांडवों की पत्नी बनने के बाद यह शर्त रखी थी कि वह अपना राज्य किसी अन्य स्त्री के साथ नहीं बांटेगी, पांडव अपनी अन्य पत्नियों को इंद्रप्रस्थ नहीं ला सकते थे। लेकिन अर्जुन कृष्ण जी की सलाह पर अपनी पत्नी सुभद्रा को वहां लाने में सफल हुए थे।

द्रौपदी के स्वयंवर में दुर्योधन ने नहीं लिया था सहभाग

द्रौपदी के स्वयंवर से पहले ही दुर्योधन का विवाह कलिंग की राजकुमारी भानुमति से हो चुका था। दुर्योधन ने भानुमति को यह वचन दिया था कि उसके इलावा वह किसी और को अपनी पत्नी नहीं बनाएगा और उसने इस वचन को निभाया। इसीलिए दुर्योधन ने द्रौपदी के स्वयंवर में सहभाग नहीं लिया था।

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सुखी और खुशनुमा ज़िंदगी जीने के तरीके

आजकल ज़िंदगी भाग दौड़ और तनाव से भरी  है। इस कारण हमारा स्वभाव भी चिड़चिड़ा रहने लगा है। धन, ऐशो आराम आदि होने के बावजूद भी हम ज़िंदगी से संतुष्ट नहीं है।

हमें यह समझना बहुत ज़रूरी है कि ज़िंदगी में धन, ऐशो आराम के साथ-साथ खुशी भी बहुत ज़रूरी है। लेकिन सवाल उठता है कि आखिर खुश कैसे रहा जाए? इसलिए हमने थोड़ी बहुत रिसर्च करके कुछ पॉइंट्स की लिस्ट बनाई है जिससे आपको ख़ुशी को तलाशने और अपनाने में मदद मिल सकती है।

आइए देखते हैं खुशनुमा ज़िंदगी जीने के कुछ प्रामाणिक तरीके

प्यार को अपनाएं

अगर आप को लोगों से बहुत प्यार मिल रहा है, उनकी भावनाओं की कदर करें। जितना आपको प्यार मिल रहा है, बदले में आप भी उतना ही प्यार दें। इससे आपके रिश्ते मजबूत होंगे और वही रिश्ते जीवन में हमेशा खुशी देंगे।

दूसरों की भी सुने

अगर आपको को कोई अच्छी और ज्ञान की बात बता रहा है, उसे ध्यान से सुने। दूसरों से ज्ञान लेकर आगे अपने दोस्तों से भी शेयर करें। इससे आपका ज्ञान तो बढ़ेगा ही, साथ ही रिश्तों में और मिठास आएगी और इसी कारण आपकी ज़िंदगी में खुशहाली भी रहेगी।

बाहर घूमने जाएं

नई- नई जगहों पर घूमने जाएं, जिससे नया अनुभव तो मिलता ही है, साथ में मनोरंजन भी हो जाता है। अच्छी जगहों पर घूमने से मूड भी अच्छा रहता है। दीर्घकाल में यह तनाव को दूर करने में मदद करता है।

दूसरों की तारीफ करें

दूसरों की तारीफ करनी चाहिए, जिससे वो भी आपको आदर और सम्मान देंगे। ऐसा करने से सामने वाले को प्रेरणा तो मिलेगी ही, आपको भी बहुत खुशी मिलेगी। हाँ यह ध्यान रखें कि झूठी तारीफ़ न करें वरना यह चापलूसी मानी जायेगी।

दिल और लगन से करें काम

किसी भी काम को बोझ नहीं समझना चाहिए। मेहनत और दिल से किये गए काम से ही आपको खुशी मिलेगी और उस काम में सफलता भी मिलेगी। इससे आपको आगे बढ़ने की प्रेरणा भी मिलेगी।

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चीन में मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल के चलते, बनाने पड़ रहे हैं मोबाइल ट्रैक

दुनिया में साइकिल ट्रैक, रेलवे ट्रैक, रेसिंग ट्रैक आदि बने होते है। क्या आप ने कभी सोचा है दुनिया में मोबाइल ट्रैक भी बनाया जाएगा। लेकिन मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल के चलते अब मोबाइल ट्रैक की ज़रूरत भी पड़ गई है। सड़क पर पैदल चलते वक्त मोबाइल का इस्तेमाल करने से दिनों दिन हादसे बढ़ते ही जा रहें है। इसीलिए चीन ने तो इस प्रॉब्लम का भी नया फॉर्मूला खोज निकाला है।

सड़क पर पैदल चलते वक्त जो मोबाइल का इस्तेमाल करते है, चीन ने उन लोगों के लिए मोबाइल ट्रैक बनाया है। इस ट्रैक को ‘The heads-down tribe’ का नाम दिया गया है। यह ट्रैक वहां के एक मॉल वैरुई प्लाजा शॉपिंग मॉल के बाहर बनाया गया है। इस ट्रैक की लंबाई 100 मीटर और चौड़ाई 80 सेंटीमीटर है।

चीन में सड़क पर पैदल चलते वक्त फोन का इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या बहुत ज्यादा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक इस के कारण वहां हर साल 68,000 लोगों की मौत होती है। इस ट्रैक पर अब लोग सेफ्टी के साथ अपने गैजेट्स का यूज कर सकेंगें।

इस ट्रैक पर बहुत तरह के कैरिकेचर बनाकर इसे आकर्षक बनाया गया है। यह ट्रैक पूरा कलरफुल बनाया गया है और इस पर बहुत आकर्षक मैसेजेस भी लिखे हुए है। इस ट्रैक को कारों की लाइन और गड्डों से दूर बनाया गया है, ताकि फोन यूज करने वालों के साथ कोई हादसा ना हो।

इस ट्रैक से सबसे ज्यादा यंगस्टर्स आकर्षित हो कर इसका इस्तेमाल कर रहें है। इस ट्रैक पर आकर्षक मैसेजेस लिखने की वजह यह भी है कि इन मैसेजेस को पढ़कर लोगों में रुचि पैदा होगी और वह मोबाइल यूज करने की बजाय इन मैसेजेस को पढ़ते हुए, इस ट्रैक का इस्तेमाल करना बेहतर समझेंगें।

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भोपाल गैस कांड: भारत का सबसे दर्दनाक हादसा

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भारत के मध्य प्रदेश राज्य के भोपाल शहर में 3 दिसम्बर सन् 1984 को एक भयानक औद्योगिक दुर्घटना हुई थी, जिसे भोपाल गैस कांड या फिर भोपाल गैस त्रासदी भी कहा जाता है। आपको बता दें कि भोपाल में स्थित यूनियन कार्बाइड नामक कंपनी के कारखाने से एक मिथाइल आइसो साइनाइट ज़हरीली गैस का रिसाव हुआ था। जिससे लगभग 15,000 से अधिक लोगो की जान चली गई थी।

पूर्व-घटना चरण

सन 1969 में यू.सी.आइ.एल.कारखाने का निर्माण हुआ था। जहाँ पर मिथाइल आइसो साइनाइट नामक पदार्थ से कीटनाशक बनाने की प्रक्रिया आरम्भ हुई थी।

कारकों का योगदान

नवम्बर 1984 तक कारखाना के कई सुरक्षा उपकरण न तो ठीक हालात में थे और न ही सुरक्षा के अन्य मानकों का पालन किया गया था। समस्या भी यह थी कि टैंक संख्या 610 में नियमित रूप से ज़्यादा एम.आई.सी. गैस भरी थी तथा गैस का तापमान भी निर्धारित 4.5 डिग्री की जगह 20 डिग्री था।

गैस का निस्तार

2-3 दिसम्बर की रात्रि को टैंक इ-610 में पानी का रिसाव हो जाने के कारण दबाव पैदा हो गया था और टैंक का अन्तरूनी तापमान 200 डिग्री के पार पहुँच गया था, जिसके तत पश्चात इस विषैली गैस का रिसाव वातावरण में हो गया था।

दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभाव

भोपाल की लगाभग 5 लाख 20 हज़ार लोगों की जनता इस ज़हरीली गैस से सीधि रूप से प्रभावित हुई थी। 2,259 लोगों की इस गैस की चपेट में आ कर आकस्मिक ही मृत्यु हो गयी थी।

स्वास्थ्य देखभाल

रिसाव के तुरन्त बाद  राज्य सरकार ने गैस पीड़ितों के लिये कई अस्पताल भी खोले थे।

आर्थिक पुनर्वास

जुलाई 1985 में मध्य प्रदेश के वित्त विभाग ने राहत कार्य के लिये लगभग एक करोड़ चालीस लाख डॉलर कि धन राशि लगाने का निर्णय लिया था।

कुशवाहा परिवार का बचना

इस गैस काण्ड में भोपाल का कुशवाहा परिवार बिना किसी हानि के बच गया था। क्योंकि उस परिवार में प्रतिदिन अग्रिहोत्र किया जाता था और उस दिन भी किया जा रहा था।यज्ञ को वातावरण में प्रदूषण के समाधान के लिये वैज्ञानिक उपकरण माना जाता है।

यूनियन कार्बाइड कारखाने के विरुद्ध प्रभार

दुर्घट्ना के 4 दिन के पश्चात, 7 दिसम्बर 1984 को यु.सी.सी. के अध्य्क्ष और सी.ई.ओ. वारेन एन्डर्सन की गिरफ्तारी हुई परन्तु 3 घन्टे के बाद उन्हे 2100 डॉलर के मामूली जुर्माने पर मुक्त कर दिया गया था।

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जानिए अलग- अलग रंगों के धागों को कलाई में बांधने के महत्व

हम अक्सर देखते है लोगों ने कलाई या गले में अलग- अलग रंगों के धागे पहने होते है। घर में भी पूजा के बाद अक्सर इन धागों को पहना जाता है। कुछ लोग तो शोंक के लिए इन धागों को पहनते है, तो कुछ लोगों की धागों को धारण के पीछे अपनी अलग- अलग मान्यताएं होती है। आइए जानते है हिंदू धर्म में अलग-अलग रंग के इन धागों के क्या महत्व है।

लाल धागा

लाल धागे को भगवान के आशीर्वाद के रूप में पहना जाता है। लाल धागा पहनना बहुत पुरानी परंपरा है। उस वक्त यज्ञ के दौरान लाल धागे को पहना जाता था। कहा जाता है कि लाल धागा पहनने से सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि आते है और मनोकामनाएँ भी पूरी होती है।

पीला धागा

पीले रंग का धागा पहनने से इंसान में एकाग्रता और आत्मविश्वास बढ़ता है। पीला रंग शुद्धता का प्रतीक माना जाता है इसीलिए विवाह और गृह-प्रवेश जैसे शुभ कामों में इस रंग के धागे का बहुत महत्व होता है। कहते है यह वैवाहिक जीवन को सुखमय और सफल बनाने के लिए भी शुभ है।

काला धागा

काले धागे को बुरी नज़र से बचने के लिए पहना जाता है। बच्चों को बुरी नज़र से बचाने के लिए काला धागा उनकी कमर में बांधा जाता है और बड़े इस धागे को अपनी कलाई या बाजु में पहनते है। काले रंग का सबंध शनि ग्रह से भी है। इसीलिए यह धागा शनि ग्रह दोषों को दूर करता है।

केसरिया धागा

हिंदू धर्म में केसरिया रंग को सबसे पवित्र माना जाता है। यह साधु- संतों का रंग होता है, वह इस रंग के सूत्र और वस्त्र पहनते है। ख्याति, शक्ति और समृद्धि के लिए केसरिया धागे को पहना जाता है। इसका संबंध गुरु ग्रह से भी माना जाता है।

जनेऊ

जनेऊ सफेद रंग के तीन धागों से बना एक पवित्र सूत्र होता है, इन तीन धागों का महत्व ब्रहमा, विष्णु और शिव से है। यह सूत्र ब्राह्मण  बाएं कंधे से दाएं बाजू की ओर शरीर में धारण करते है। जनेऊ को सिर्फ पुरुष वर्ग ही धारण करते है। कहा जाता है कि जनेऊ स्वास्थ्य के लिए अच्छा रहता है। जनेऊ पहनने से हृदय रोग की आशंका कम हो जाती है।

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