नींबू का करें इस्तेमाल, पाएं सुन्दर और लम्बे बाल

नींबू के कई स्‍वास्‍थ्‍य और सौंदर्य लाभ हैं। अगर आपके बाल झड़ या कमज़ोर होकर टूट रहे हैं तो घबराये मत, आप नींबू का इस्तेमाल करके ही इस परेशानी से मुक्ति पा सकते हैं। जानिए नींबू का इस्तेमाल करके आपके बालों को क्या-क्या फायदे होंगे।

बालों का झड़ना रोके

सबसे पहले आपको बता दें कि अगर नींबू को नारियल के तेल में मिला कर लगाया जाए तो, तो यह बालों का झड़ना रोक देता है।

बालों को बनाये मज़बूत

नींबू बालों को मजबूत बनाता है। नींबू में विटामिन सी, बी और फॉस्‍फोरस भरे होते हैं, जिससे बालों को कोई नुकसान नहीं होता और बाल घने बन जाते हैं। अगर आपका सिर ऑयली है, तो उस पर रोज नींबू रगड़ने से वह ड्राई हो जाएगा।

सिर कि खुशकी को मिटाए

अगर आपके सिर में खुजली हो रही हो तो नींबू का रस लगाएं, इससे इंफेक्‍शन दूर हो जाएगी।

बालों को मोटा बनाए

अगर बाल मोटे और घने चाहिये तो नींबू के रस के साथ नारियल पानी मिला कर बालों को धोएं।

बाल चमकाए

अगर आपके बाल ड्राय और बेजान हैं तो , उस पर दही और नींबू का रस मिला कर लगाएं, इससे आपके बालों में चमक आ जाएगी।

बालों को बढाए

नींबू के रस को कैस्‍टर ऑयल या ऑलिव ऑयल के साथ मिला कर बालों की मसाज करें। फिर 1 घंटे के बाद हल्‍के शैंपू से सिर धो लें, इससे आपके बाल बढ़ने लग जायेंगे।

रूसी भगाए

नींबू का रस सिर से रूसी कि समस्‍या को दूर करता है।

दो मुंहे बालों से बचाये

दो मुंहे केश भगाए बालों के आखिरी छोर पर नींबू और ऑलिव ऑयल लगाइये।

मजबूत बनाए

नींबू, शहद और दही को मिला कर अपने  सिर पर लगा कर मसाज करें, इससे आपके बाल जड़ से मज़बूत बन जायेंगे।

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आम लोगों के लिए कानून के कुछ खास अधिकार

कानून में सब को बराबर के अधिकार मिले हुए है। बहुत से लोगों को इन अधिकारों के बारे में पता नहीं होता, इसीलिए वह लोग धोखाधड़ी का शिकार हो जाते है। हर एक इंसान को कानूनी अधिकारों के बारे में पता होना चाहिए। पुलिस भी इन अधिकारों को दबा नहीं सकती। आइए जानते है ऐसे अधिकारों के बारे में, जिनकी आपको जानकारी होना ज़रूरी है।

  • सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक थाने में पूछताछ या शिकायत दर्ज़ कराने आई औरतों के साथ पुलिस भद्दा और अश्लील व्यवहार नहीं कर सकती है।
  • अगर कोई रेप पीड़ित महिला रिपोर्ट लिखाने आती है, तो रिपोर्ट और पीड़ित महिला से पूछताछ महिला पुलिसकर्मी ही करेगी। पूछताछ के दौरान पीड़िता के साथ परिवार से कोई भी महिला साथ रह सकती है।
  • पुलिस रेगुलेशन के मुताबिक अगर पुलिस किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करती है, तो थाने में पुलिस की ज़िम्मेदारी होती है कि वह उस व्यक्ति को भोजन कराए। इसके लिए पुलिस को भत्ता भी मिलता है।
  • धारा 167 के मुताबिक अगर पुलिस किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करती है, तो उसे 24 घंटे से ज्यादा देर तक हिरासत में नहीं रख सकती है। पुलिस को गिरफ्तार किया गया व्यक्ति 24 घंटे के अंदर कोर्ट में पेश करना होता है।
  • धारा 150 के मुताबिक अगर पुलिस किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करती है, वो व्यक्ति गिरफ्तार करने का कारण पूछ सकता है और पुलिस को भी कारण बताना पड़ेगा।
  • सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक गिरफ्तार किये गए व्यक्ति को यह अधिकार है कि अपने किसी परिवार वाले को अपनी सूचना फ़ोन पर दे सकता है। टेलीफोन मुहैया कराने की ज़िम्मेदारी पुलिस की होती है।
  • धारा 436 के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति ने ऐसा अपराध किया है, जो जमानत लेने योग्य है, तो उस व्यक्ति को कोर्ट जाने की ज़रूरत नहीं, पुलिस उसको थाने से जमानत दे सकती है।
  • पुलिस रेगुलेशन के मुताबिक अगर कोई पीड़ित व्यक्ति FIR कराने आता है, तो पुलिस उसे FIR दर्ज़ करने से मना नहीं कर सकती और दर्ज़ FIR की कॉपी भी पीड़ित व्यक्ति को दी जाती है।

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तिरुपति बालाजी मंदिर के कुछ बहुत ही रोचक तथ्य

देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में तिरुपति बालाजी मंदिर अत्यंत प्रसिद्ध है। यहां की कई चमत्कारी कथाएं प्रचलित हैं। आइए जानें उनमे से कुछ आश्चर्यजनक चमत्कार:-

  • भगवान बालाजी के सिर पर आज भी रेशमी बाल हैं और उनमें उलझने नहीं आती और वह हमेशा ताजा लगते है।
  • मुख्यद्वार के दाएं और बालाजी के सिर पर अनंताळवारजी के द्वारा मारे गए निशान हैं। बालरूप में बालाजी को ठोड़ी से रक्त आया था, उसी समय से बालाजी के ठोड़ी पर चंदन लगाने की प्रथा शुरू हुई।
  • बालाजी को प्रतिदिन नीचे धोती और उपर साड़ी से सजाया जाता है।
  • बालाजी के वक्षस्थल पर लक्ष्मीजी निवास करती हैं। हर गुरुवार को निजरूप दर्शन के समय भगवान बालाजी की चंदन से सजावट की जाती है उस चंदन को निकालने पर लक्ष्मीजी की छबि उस पर उतर आती है। बाद में उसे बेचा जाता है।
  •  बताया जाता है सन् 1800 में मंदिर परिसर को 12 साल के लिए बंद किया गया था। किसी एक राजा ने 12 लोगों को मारकर दीवार पर लटकाया था उस समय विमान में वेंकटेश्वर प्रकट हुए थे ऎसा माना जाता है।
  • मंदिर से 23 किलोमीटर दूर एक गांव है, उस गांव में बाहरी व्यक्ति का प्रवेश निषेध है। वहां पर लोग नियम से रहते हैं। वहां की महिलाएं ब्लाउज नहीं पहनती। वहीं से लाए गए फूल भगवान को चढ़ाए जाते हैं और वहीं की ही अन्य वस्तुओं को चढाया जाता है जैसे- दूध, घी, माखन आदि।
  • गर्भगृह मे जलने वाले चिराग कभी बुझते नही हैं, वे कितने ही हजार सालों से जल रहे हैं किसी को पता भी नही है।
  • बालाजी की पीठ को जितनी बार भी साफ करो, वहां गीलापन रहता ही है, वहां पर कान लगाने पर समुद्र घोष सुनाई देता है।
  • बालाजी को प्रतिदिन नीचे धोती और उपर साड़ी से सजाया जाता है।
  • भगवान बालाजी गर्भगृह के मध्य भाग में खड़े दिखते हैं मगर वे दाई तरफ के कोने में खड़े हैं बाहर से देखने पर ऎसा लगता है।
  • बालाजी के जलकुंड में विसर्जित वस्तुए तिरूपति से 20 किलोमीटर दूर वेरपेडु में बाहर आती हैं।

जानिए कृष्णा नदी का सबसे लम्बा सफर

कृष्णा नदी भारत की चौथी सबसे बड़ी नदी है। यह नदी कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश से होकर बहती है। इस नदी पर स्थित सबसे बड़ा शहर विजयवाड़ा है। महाभारत में इस नदी को कृष्णवेणा कहा गया है। आइए जानते है कृष्णा नदी के बारे में कुछ और बातें:

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कृष्णा नदी का सफर

यह नदी महाराष्ट्र राज्य के महाबलेश्वर पर्वत से बहना शुरू होती है। उसके बाद यह नदी कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, विजयवाड़ा से होकर गुज़रती है और दक्षिण-पूर्व से होती हुई बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है। इस नदी की लम्बाई 1290 कि.मी. और समुद्र तल से उंचाई 1337 मीटर है।

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विजयवाड़ा में इस नदी का सफर

विजयवाड़ा इस नदी के तट पर स्थित सबसे बड़ा शहर है। इस शहर के पास आ के यह नदी एक डेल्टा बनाती है। इस डेल्टा पर 20 फुट ऊँचा बाँध बनाकर कुछ नहरें निकाली गई हैं, जिससे 10,00,000 एकड़ भूमि की सिंचाई होती है। विजयवाड़ा में इस नदी की चौड़ाई लगभग 1300 गज है।

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पुराणों के अनुसार कृष्णा नदी को विष्णु का अंश माना गया है। हजारों श्रद्धालु कृष्णा नदी की पूजा और दर्शन करने के लिए आते है। जिन जिलों से यह नदी गुज़रती है, वहां के मंदिरों में देवी, देवताओं की पूजा अराधना होती है। नवरात्रि के दिनों में विजयवाड़ा में बहुत ज्यादा संख्या में श्रद्धालु पूजा करने के लिए आते हैं।

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कृष्णा नदी की सहायक नदियां

तुंगभद्रा, मूसी, अमरावती, भीमा, कोयना और पंचगंगा इस नदी की सहायक नदियां हैं। भीमा नदी सबसे लम्बी सहायक नदी है।

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जानिए कैसे बने अब्राहम लिंकन अनेक असफलताओं के बाद इतने सफल इंसान

आज हम आपको अमेरिका के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन की कुछ ख़ास बातों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके बारे में आपने पहले कही नहीं सुना होगा। अब्राहम लिंकन अमेरिका के 16 वें राष्ट्पति थे। उनका जन्म 12 फरवरी 1809 ईसवी को एक गरीब परिवार में हुआ था। गरीब परिवार में पैदा होने के कारण अब्राहम को अपनी जिंदगी में काफी मेहनत करनी पड़ी थी। अब्राहम बार-बार असफल होने के बाद ही अमेरिका के राष्ट्रपति बने थे।

अब्राहम लिंकन के जीवन की कुछ महत्वपूर्ण बातें

  • आपको बता दें कि जिस दिन ही लिंकन का जन्म हुआ था, उस दिन ही महान वैज्ञानिक ‘चार्ल्स डार्विन’ का जन्म हुआ था।
  • लिंकन अमेरिका के सबसे लम्बे कद के राष्ट्रपति थे। उनका कद लगभग 6 फुट 4 इंच था।
  • 9 साल की उम्र में ही लिंकन की माता का देहांत हो गया था, और इसके बाद उनकी सौतेली मां ने ही उनको पाला और उनकी सगी माँ जितना प्यार और प्रोत्साहन दिया।
  • लिंकन ने वकालत भी की थी परन्तु उसके लिए उन्होंने कोई डिग्री नहीं करी बल्कि खुद ही वकालत के विषय का अध्ययन किया था।
  • लिंकन की जिंदगी में बहुत सी असफलता आई थी, पर उन्होंने कभी हार नहीं मानी थी। वह 21 वर्ष की उम्र में वार्ड मेंबर का चुनाव हार गए थे, 27 साल की उम्र में उनकी पत्नी ने उनको तलाक दे दिया था, 32,37,42 और 47 की उम्र में संसद में लगातार चुनाव हार गए थे ।
  • जब लिंकन इतने निराशा वाले वक्त से गुज़र रहे थे तब उन दिनों वे चाक़ू छुरियों से दूर रहते थे क्यूंकि उन्हें लगता था कि वह खुद को नुक्सान ना पहुंचाले।
  • 52 वर्ष की उम्र में वह राष्ट्रपति बने और जब लिंकन राष्ट्रपति बने, तो एक महीने के बाद ही अमेरिका में गृह-युद्ध शुरू हो गया था, और आपको बता दें कि लिंकन इस युद्ध को जितने में सफल भी रहे थे।
  • लिंकन के पास एक बिल्ली थी जो वाइट हाउस में डिनर टेबल पर बैठकर खाना खाती थी।
  • एक दिन जब लिंकन अपने पड़ोसी से ‘जॉर्ज वाशिंगटन‘ की जीवनी की पुस्तक लेकर घर आये, तो अचानक से बारिश होने लग गई, और घर कच्चा होने के कारण किताब भीग गई थी। लिंकन इससे बहुत उदास हो गए थे, क्योंकि वह नई पुस्तक नहीं खरीद सकते थे, पुस्तक के बदले में उनको पड़ोसी के खेत में काम करना पड़ा था।
  • लिंकन अमेरिका के पहले राष्ट्रपति थे जो दाढ़ी रखते थे और तो और वह इकलोते राष्ट्रपति है जिनके नाम पर पेटेंट है।
  • 1842 में लिंकन ने मैरी टोड से शादी जिसके बाद उनके 4 बेटे हुए परन्तु उनके 3 बेटे 18 की उम्र तक होते होते मर गए।
  • 1876 में लिंकन की मौत के बाद २ चोरों ने उनकी कब्र में से उनकी लाश निकलने की कोशिश करी परन्तु वे नाकामयाब रहे। ऐसा करने के पीछे उनका मकसद वो पैसा था जो वो मांगते लाश के बदले।

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स्टैच्यू ऑफ यूनिटी: लौहपुरुष की अदभुत प्रतिमा के बारे रोचक तथ्य!

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स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (Statue of Unity) यानि दुनिया की सबसे ऊंची सरदार वल्लभभाई पटेल ( Vallabhbhai Patel) की प्रतिमा का आज(बुधवार) को गुजरात में लोकार्पण हो गया. लौहपुरुष सरदार पटेल की आज 141वीं जयंती है.

आपके बता दें कि सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को हुआ था। एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के रूप में उन्होंने भारत देश को स्वतंत्रता दिलाने के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था. लेकिन भारत के स्वंतंत्र होने के बाद भारत की सैंकड़ो रियासतों को भारत में विलय करने में जिस विवेक, समझदारी, दृढ-निश्चय, कठिन परिश्रम और लगन का परिचय दिया जिसके कारण उन्हें भारत का लौह पुरुष भी कहा जाता है। सरदार पटेल भारत के पहले गृहमंत्री भी थे।

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी प्रतिमा के बारे में

सरदार पटेल की महानता के चलते ही एक यादगार रूप में नर्मदा नदी के तट पर उनकी बहुत विशाल, सुन्दर और भव्य प्रतिमा बनाई गई है, जिसको स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का नाम दिया गया है। यह प्रतिमा नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर बांध से 3.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

आपको बता दें कि “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” देखने में बहुत अद्भुत है और इसको काफी दूरी से देखा जा सकता है. प्रतिमा की कुल ऊंचाई 182 मीटर के करीब है। इसे विश्व की विशालतम प्रतिमा माना जा रहा है.

इस प्रतिमा का कुल वज़न 1700 टन है. मूति॔ के पैर की ऊंचाई 80 फ़ीट, हाथ की ऊंचाई 70 फ़ीट, कंधे की ऊंचाई 140 फ़ीट और चेहरे की ऊंचाई 70 फ़ीट है। ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ न्यूयॉर्क में स्थित प्रसिद्ध स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी के आकार से लगभग दोगुना ऊँची है।

इस मूर्ति को लार्सन एंड टुब्रो कंपनी ने बनाया है, और इसको बनाने में लगभग 3 साल का समय लगा है। इस प्रतिमा बनाने में 1,347 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि 235 करोड़ रुपये प्रदर्शनी हॉल और सभागार केंद्र पर खर्च किये गये. वहीं 657 करोड़ रुपये निर्माण कार्य पूरा होने के बाद अगले 15 साल तक ढांचे के रखरखाव पर खर्च किए किए जाएंगे. 83 करोड़ रुपये पुल के निर्माण पर खर्च किये गये.

इस मूर्ति के निर्माण की जिम्मेदारी प्रसिद्ध शिल्पकार राम वी. सुतार की थी और उन्होंने यह कार्य बड़े अच्छे से निभाया है. इस मूर्ति के कारण उनके नाम की चर्चा अब विश्व भर में है। राम वी. सुतार को साल 2016 में सरकार ने पद्म भूषण अवार्ड से सम्मानित किया था। इसके अलावा वे ‘बांबे आर्ट सोसायटी’ के लाइफ टाइम अचीवमेंट समेत अन्य पुरस्कार से भी नवाजे गए थे।

राम वी. सुतार इन दिनों मुंबई के समुंदर में लगने वाली शिवाजी की प्रतिमा की डिजाइन भी तैयार करने में जुटे हैं. महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि यह प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को भी पीछे छोड़ देगी और दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा होगी.

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी स्मारक की आधारशिला 31 अक्तूबर, 2013 को पटेल की 138 वीं वर्षगांठ के मौके पर रखी गई थी, जब पीएम नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे. इसके लिये बीजेपी ने पूरे देश में लोहा इकट्ठा करने का अभियान भी चलाया गया.

“शनिवारवाडा” किले में आज भी भटकती है राजकुमार की आत्मा

वैसे तो भारत के इतिहास में किलों के लिए राजस्थान सबसे ज्यादा मशहूर है। लेकिन महाराष्ट्र के पुणे में भी एक मशहूर किला है, जो मराठा साम्राज्य की शान कहा जाता है। इस किले को ‘शनिवारवाडा फोर्ट’ के नाम से जाना जाता है। इस किले की नींव शनिवार के दिन रखी गयी थी, इसलिए इसका नाम ‘शनिवारवाडा’ पड़ गया। इस किले का निर्माण 1746 ई. में बाजीराव पेशवा ने करवाया था।

कहा जाता है कि बाजीराव की मृत्यु के बाद महल में सत्ता की लालच में षड्यंत्र शुरू हो गए थे। 18 साल की उम्र में नारायण राव की हत्या कर दी गयी थी। नारायण राव के चाचा ने ही उसकी हत्या करवाई थी।

[adinserter block=”33″]जब हत्यारे नारायण को मारने के लिए आये, वह अपने बचाव के लिए ‘काका माला वाचवा’ (चाचा मुझे बचाओ) कहता हुआ भागा। लेकिन उसे किसी ने नहीं बचाया। कहा जाता है कि महल में राजकुमार की आज भी आत्मा भटकती है। अंधेरी रातों में महल में से ‘काका माला वाचवा’ चीखने की आवाज़ें आती है।

1828 ई. में इस महल में आग लग गई थी और महल का बड़ा ह‌िस्सा आग की चपेट में आ गया था। यह आग कैसे और क्यों लगी, यह बात आज तक रहस्य बनी हुई है। कहते है जब महल में आग लगी थी, उस वक्त वहां कुछ बच्चों की आग में जलने से मौत हो गई थी। लेकिन इस बात को दबा दिया गया था।

[adinserter block=”33″]हर रात महल के अंदर से बच्चों के रोने और चिल्लाने के आवाज़ें आती है। पूर्णिमा की रात महल और भी ज्यादा डरावना और भुतहा लगता है। इसी कारण यह महल भारत की टॉप 10 डरावनी और भुतहा जगहों में शामिल हो गया है। यहां सुबह से शाम तक तो पर्यटक आ सकते है, लेकिन शाम होने के बाद इस महल को बंद कर दिया जाता है।

यह महल बेहद खूबसूरत है। महल में कुल पांच दरवाज़ें है, दिल्ली दरवाज़ा, मस्तानी दरवाज़ा, खिड़की दरवाज़ा, नारायण दरवाज़ा और गणेश दरवाज़ा। इस महल में 17-18 वीं सदी की वस्तुओं और मूर्तियों को रखा गया है।

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सेब और बादाम जैसे फल खाने से भी हो सकते है नुकसान जानिए कैसे?

जैसे की हम सबको पता है कि सेब और बादाम खाने से हमारा शरीद फायदेमंद रहता है, लेकिन क्या आपको पता है कि अगर आप गलती से भी सेब के बीज को खा गए, तो वह आपके शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है, क्योंकि इसमें एक खतरनाक एसिड होता है। ऐसे और भी कई फल और सब्ज़ियां है, जिनके कुछ हिस्से आपकी सेहत के लिए हानिकारक हो सकते हैं। तो आइये जानिए इनके बारे में।

सेब

जैसे की हम आपको बता चुके हैं, कि सेब के बीज में एक साइनाइड नाम का घातक एसिड पाया जाता है, जो आपके शरीर के लिए हानिकारक होता है। तो इसीलिए आगे से आप सेब खाते समय ध्यान रखें की कही आप सेब के बीज तो नहीं चबा रहे।

बादाम

वैसे तो बादाम भी हमारे शरीर के लिए बहुत फायदेमंद हैं, जैसे कि बादाम खाने से हमारे शरीर की हड्डियां मजबूत होती हैं, और इससे दिमाग भी तेज़ होता है, और भी बहुत से फायदे है, लेकिन आपको बता दें कि इसके फायदों के साथ इसके नुक्सान भी हैं। जैसे कि अगर आप बादाम को बिना भिगोए और कड़वा बादाम खा रहे हो तो वह आपकी सेहत को नुकसान कर सकता है, क्योंकि इसमें भी साइनाइड एसिड होता है।

आलू

आलू तो वैसे भी हम सब दिन भर में एक दो बार खाते ही होंगे, और ज्यादातर हर सब्जी में इसका उपयोग किया जाता है। आपको बता दें कि कभी भी गलती से भी ज्यादा हरे रंग का दिखाई देने वाले आलू का सेवन मत करें, क्योंकि इसमें अत्याधिक मात्रा में क्लोरोफिल होता है।

राजमा

राजमा की सब्जी तो हम सब खाते ही रहतें हैं, और वह बहुत स्वाद भी होती है। आपको बता दें कि अगर आप राजमाह को ऐसे ही मतलब कच्चा खा गए, तो इससे आपके पेट में दर्द होने लग जायेगा।

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गुड़गांव का एक भूतहा घर, जहां अपने आप चलती है खिलौने वाली कार

अगर आप ने कॉन्ज्यूरिंग और द वुमन इन ब्लैक फ़िल्में देखी होगी, तो आपको पता ही होगा जो गुड़िया अपने आप चलने लगे उसकी तुलना में कुछ भी डरावना नहीं है। ऐसे में क्या होगा अगर आपकी खिलौना कार अपने आप ही चलने लगे।

ऐसी एक कहानी पूजा सिंह बताती है कि वो अपने परिवार के साथ सेक्टर 56 के अपार्टमेंट में रहने आई। उनको पहले दिन से ही घर में अनोखी घटनाओं का सामना करना पड़ा। वह बताती है कि एक बार मेरी माँ और चचेरा भाई घर आये हुए थे। किसी ने दरवाज़ा खटखटाया, उनको लगा बहार मैं आई होउंगी, लेकिन जब उन्होंने दरवाज़ा खोला वहां कोई भी नहीं था।

इसके बाद घर में कभी कभी लाइट्स अपने आप ऑन हो जाती और अपने आप ही ऑफ हो जाती थी। फिर भी हम ने इन सब घटनाओं पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया, क्योंकि हम भूतों वाली बातों पर विश्वास नहीं करते थे।

एक शाम फिर एक अनोखी घटना हुई। पूजा कहती है कि मेरी बेटी के पास रिमोट से चलने वाली एक कार है, जिसमें बच्चे बैठ कर सवारी भी कर सकते है। एक शाम अचानक से हॉल में चारों ओर कार अपने आप घूमने लगी। जब कि वह कार रिमोट से चलती और बंद होती है और कार का रिमोट उस वक़्त टेबल पर पड़ा हुआ था, किसी ने भी उस कार के रिमोट को छुआ तक नहीं था।

दरवाज़े का खटखटाना, लाइट्स का अपने आप ऑन और ऑफ होना, रिमोट वाली कार का अपने आप चलना इन सब घटनाओं के बाद उन्होंने अपना घर बदलने में ही भलाई समझी।

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गुरूग्राम का एम.जी. रोड़ जहाँ सफ़ेद साड़ी में चुड़ैल गाड़ी के पीछे भागती है!!

 

जानिए किसको है बिल बनाने की अनुमति और वह कैसे बनता है

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आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि बिल कैसे बनता है, और किसको है अधिकार इसको बनाने। तो आइये जानिए इसके बारे में।

सबसे पहले आपको बता दें कि कानून बनाने का मुख्य काम संसद में होता है, यह भारत की राजधानी दिल्ली में स्थित है। किसी भी तरह का प्रस्तावित कानून, संसद में एक बिल के रूप में प्रतिस्थापित किया जाता है।

आपको बता दें कि संसद में बिल तभी पास होता है, जब उसको राष्ट्रपति की अनुमति मिलती यानि कि विधेयक (बिल) बनाने का विशेष अधिकार राष्ट्रपति को ही होता उसकी अनुमति के बिना बिल नहीं बनता।

संसद में पेश किये जाने वाले बिल दो तरह के होते हैं।

सरकारी बिल

गैर-सरकारी विधेयक

सरकारी विधेयक मंत्रिमंडल के सदस्यों द्वारा पेश किये जाते हैं, जबकि गैर-सरकारी विधेयक अन्य सदस्यों द्वारा ले जाते हैं, जो मंत्रिपरिषद के सदस्य नहीं होते हैं।

विधेयक बनने की प्रक्रिया।

प्रथम वाचन

इसमें बिल की प्रतिस्थापना के साथ-साथ विधेयक का प्रथम वाचन प्रारम्भ हो जाता है। यह अवस्था बड़ी सरल होती है। आपको बता दें कि जो मंत्री विधेयक को प्रस्तावित करता है, वह अध्यक्ष को सूचित करता है। अध्यक्ष यह प्रश्न सदन के सामने रखता है। जब सभी मंत्रियों का सामान्य मत हो जाता है, तो इस विधेयक को प्रस्थापित करने के लिए बुलाया जाता है।

द्वितीय वाचन

सामान्य चर्चा के पश्चात सदन के पास चार विकल्प होते हैं।

सदन स्वयं विधेयक पर विस्तृत धारावार चर्चा करें।

विधेयक सदन की प्रवर समिति को भेज दें।

दोनों सदनों की संयुक्त समिति को भेज दें।

जनमत जानने के लिए जनता में वितरित करें।

यदि विधेयक प्रवर समिति को सौपा जाता है। तो संबंधित समिति विधेयक का विस्तृत निरीक्षण करती है। समिति चाहे तो वह विषय विशेषज्ञों तथा विधिवेताओं से भी उनकी राय ले सकती है। पूरे विचार विमर्श के पश्चात समिति अपनी रिपोर्ट सदन को भेज देती है।

तृतीय वाचन

द्वितीय वाचन पूरा हो जाने के बाद, मंत्री विधेयक को पास करने के लिए सदन से अनुरोध करता है। इस अवस्था में प्राय: कोर्इ चर्चा नहीं की जाती। सदस्य केवल विधेयक विरोध या पास करने के लिए बिल का समर्थन अथवा उसका विरोध कर सकते हैं। इसके लिए उपस्थित तथा मतदान करने वाले सदस्यों का साधारण बहुमत आवश्यक है।

द्वितीय सदन में बिल का कार्य

आपको बता दें कि जब विधेयक किसी एक सदन से पास हो जाता है, तो उसको दूसरे सदन में भेज दिया जाता है। यहां पर भी वही तीन वाचनों वाली प्रक्रिया अपनार्इ जाती है। जो कुछ इस प्रकार होती हैं।

अगर विधेयक दोनों सदनों में पास होता है, तो उसको राष्ट्रपति की अनुमति के लिए भेज दिया जाता है।

अगर विधेयक में कुछ संशोधन करना हो, तो उसको संशोधन की दशा में बिल पहले पास करने वाले सदन को वापस भेज दिया जाता है। इस दशा में पहला सदन संशोधनों पर विचार करेगा और अगर वो उन्हें स्वीकार कर लेता है, तो बिल राष्ट्रपति की अनुमति के लिए भेज दिया जाता हैं, यदि पहला सदन संशोधनों को मानने से मना कर दे, तब इसे गतिरोध माना जाता है।

दूसरा सदन भी विधेयक को अस्वीकार कर सकता है, वो भी गतिरोध ही कहलाता है। दोनों सदनों की गतिरोध को समापित करने के लिए बिल को राष्ट्रपति की अनुमति के लिए भेज दिया जाता है, क्योंकि राष्ट्रपति के पास कुछ विकल्प होतें हैं, इसको हल करने के लिए।

जब राष्ट्रपति अपनी अनुमति प्रदान करता है, तो बिल या कानून बन जाता है।

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