गोल्डन रिट्रीवर: बच्चों के साथ जल्दी घुल मिल जाने वाली बहुत ही प्यारी नस्ल

गोल्डन रिट्रीवर कुत्तों की सबसे पसंदीदा नस्लों में से एक है। इस नस्ल के कुत्ते बहुत सहनशील और बुद्धिमान होते हैं। गोल्डन रिट्रीवर नस्ल के कुत्ते खेलकूद में बहुत तेज़ होते हैं। गोल्डन रिट्रीवर नस्ल के कुत्ते बच्चों वाले घर में अधिक पसंद किये जाते हैं।

गोल्डन रिट्रीवर को भारत में बहुत पसंद किया जाता है, क्योंकि ये बच्चों के साथ जल्दी घुल मिल जाने और खेलने कूदने के लिए जाने जाते हैं। इनकी खास बात यह भी है कि ये कुत्ते अपने मालिकों के साथ घूमना और उनके पैरों पर सोना पसंद करते हैं।

Golden Retriever breed

गोल्डन रिट्रीवर का स्वभाव

गोल्डन रिट्रीवर एक शांत और मधुर स्वभाव वाली नस्ल है। गोल्डन रिट्रीवर को सभ्य और आज्ञाकारी बनाने के लिए इसे छोटी उम्र से ही जरूरी ट्रेनिंग देना बहुत आवश्यक होता है। इन्हें प्रशिक्षित करना बहुत आसान होता है।

गोल्डन रिट्रीवर अपने मालिक और परिवार के प्रति बहुत वफादार और समर्पित होते हैं तथा अपने मालिक की आज्ञा का पूर्ण रूप से पालन करते हैं। यह एक फैमिली डॉग ब्रीड है । इसे आप अकेले एक स्थान पर बांध कर नहीं रख सकते ऐसा करने पर यह मायूस और उदास हो जाते हैं।

शारीरिक संरचना

गोल्डन रिट्रीवर एक मध्यम आकार वाली नस्ल है। इनका सिर मध्यम आकार का होता है तथा आंखे गहरी और अंदर की ओर होती हैं । थूथन चौड़ा और मजबूत होता है। कान सिर के समांतर में सामने की ओर लटके हुए होते हैं।

गोल्डन रिट्रीवर की पूछ लंबी होती है जो घने बालों से ढकी हुई होती है। इस नस्ल के कुत्ते मुख्य रूप से गोल्डन और क्रीम कलर में ही देखने को मिलते हैं।

एक व्यस्क गोल्डन रिट्रीवर का वजन 25–35 किलोग्राम एवम हाईट 55–61 सेंटीमीटर तक हो सकती हैं। मादा आम तौर पर नर की तुलना में थोड़ी छोटी होती है।

Golden Retriever breed facts

भोजन

भोजन की मात्रा और किस्म, कुत्ते की उम्र और उसकी नस्ल पर निर्भर करती है। छोटी नस्लों को बड़ी नस्ल के मुकाबले भोजन की कम मात्रा की आवश्यकता होती है।

भोजन उचित मात्रा में दिया जाना चाहिए नहीं तो कुत्ते सुस्त और मोटे हो जाते हैं। संतुलित आहार जिसमें कार्बोहाइड्रेट्स, फैट, प्रोटीन, और विटामिन  शामिल हैं, पालतू जानवरों को स्वस्थ और अच्छे आकार में रखने के लिए आवश्यक होते हैं।

कुत्ते को 6 आवश्यक तत्व जैसे फैट, खनिज, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट्स, पानी और प्रोटीन की आवश्यकता होती है। इसके साथ ही इन्हें सारा समय साफ पानी की आवश्यकता होती है।

पिल्ले को 29 प्रतिशत प्रोटीन और प्रौढ़ कुत्ते को आहार में 18 प्रतिशत प्रोटीन की जरूरत होती है। हम उन्हें ये सारे आवश्यक तत्व उच्च गुणवत्ता वाले सूखा भोजन देकर दे सकते हैं। इन्हें दिन में दो बार 2-3 कप उच्च गुणवत्ता वाला सूखा भोजन देना चाहिए।

कुत्ते को खाने में क्या क्या नहीं देना चाहिए यह जानने के लिए आप ये पोस्ट पढ़ सकते हैं।

पढ़ें : पैट गाइड: कुत्ते को भूल कर भी खाने को न दें ये चीज़ें, हो सकतीं है घातक

स्वास्थ्य

गोल्डन रिट्रीवर्स आम तौर पर स्वस्थ नस्ल है लेकिन बाकी अन्य नस्लों की तरह ही यह भी कुछ अनुवांशिक स्वास्थय समस्यायों से प्रभावित होते हैं जोकि इन्हें अपने पूर्वजों द्वारा विरासत (genetics) में मिली हैं। जिनमें एलर्जी, आंखों की समस्याएं और कभी-कभी चिड़चिड़ापन भी शामिल है।

इस नस्ल में असामान्य रूप से कैंसर होने का खतरा रहता है, संयुक्त राज्य अमेरिका के एक अध्ययन में लगभग 50% मृत्यु का कारण कैंसर पाया गया है, जो अध्ययन में दूसरा सबसे बड़ा कारण है।

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देख रेख

  • कुत्ते को रहने के लिए हवादार, साफ और सुरक्षित वातावरण प्रदान करें। आश्रय बारिश, हवा और आंधी से सुरक्षित होना चाहिए।
  • कुत्ते के लिए 24 घंटे साफ पानी उपलब्ध होना चाहिए। पानी को साफ रखने के लिए बर्तन को आवश्यकतानुसार दिन में कम से कम दो बार या इससे अधिक बार साफ करना चाहिए।
  • सप्ताह में दो बार बालों को कंघी करें, प्रतिदिन ब्रशिंग करें। छोटे बालों वाली नस्ल के लिए सिर्फ ब्रशिंग की ही आवश्यकता होती है लेकिन लंबे बालों वाली नस्ल के लिए ब्रशिंग के बाद कंघी करना आवश्यक होता है।
  • कुत्तों को 10-15 दिनों में एक बार नहलाना चाहिए। नहलाने के लिए औषधीय शैंपू का इस्तेमाल करें।
  • स्वस्थ पिल्लों के लिए गर्भवती मादा की उचित देखभाल करना बहुत आवश्यक होता है। गर्भकाल के समय या पहले उचित अंतराल पर टीकाकरण अवश्य लगवाना चाहिए। गर्भकाल का समय लगभग 55-72 दिन का होता है। गर्भकाल के समय के दौरान अच्छा आहार, वातावरण, व्यायाम और उचित जांच आवश्यक होती है।
  • पिल्लों के जीवन के कुछ हफ्तों के लिए उनकी प्राथमिक गतिविधियों में अच्छे वातावरण, आहार और अच्छी आदतों का विकास शामिल है। कम से कम 2 महीने के नवजात पिल्ले को मां का दूध बहुत आवश्यक होता हैं और यदि मां की मृत्यु हो गई हो या किसी भी मामले में पिल्ला अपनी मां से अलग हो जाए तो शुरूआती फीड या पाउडरड दूध पिल्ले को दिया जाता है।
  • हर 6-12 महीनों के बाद कुत्ते के दांतों की जांच करवाना आवश्यकता होता है।
  • पालतू जानवरों को नियमित टीकाकरण और डीवॉर्मिंग की आवश्यकता होती है ताकि उन्हें स्वास्थ्य समस्याएं ना हों।

पढ़ें : पैट गाइड: कुत्ते की देखभाल के लिए ज़रूरी बातें और सावधानियाँ

पिल्ले का चयन करते समय सावधानियां

पिल्ले का चयन आपकी जरूरत, उद्देश्य, उसके बालों की खाल, लिंग और आकार के अनुसार किया जाना चाहिए। पिल्ला वह खरीदें जो 8-12 सप्ताह का हो।

पिल्ला खरीदते समय उसकी आंखे, मसूड़े, पूंछ और मुंह की जांच करें। आंखे साफ और गहरी होनी चाहिए, मसूड़े गुलाबी होने चाहिए और पूंछ तोड़ी हुई नहीं होनी चाहिए और दस्त के कोई संकेत नहीं होने चाहिए।

कीमत

भारत में एक गोल्डन रिट्रीवर डॉग की कीमत 15,000 रुपये से 30,000 रुपये है।

इतिहास का सबसे भीषण स्कूली आतंकी हमला जिसमें मारे गए थें सैंकड़ों बच्चे

सितंबर 2004 में रूस के बेसलान में हुए इस स्कूल बंधक कांड(Beslan school siege) में 330 लोगों की मौत हो गई थी जिनमें 156 स्कूली बच्चे शामिल थे। इसे इतिहास की सबसे घातक स्कूली गोलीबारी माना जाता है।

यह आतंकवादी हमला 1 सितंबर 2004 को शुरू हुआ और तीन दिनों तक चला। रूसी बलों द्वारा किये गए बचाव अभियान में बेसलान नरसंहार में शामिल सभी 31 चेचेन आतंकवादी शामिल मारे गए थे। यह आतंकवादी हमला रियाद-उस सालिहीन(Riyad-us Saliheen – Islamic Brigade of Shaheeds)) द्वारा प्रायोजित था।

इस हमले का मकसद चेचेन्या से रूसी सेना को बाहर निकलने के लिए रूस के शीर्ष नेतृत्व को मजबूर करना था। हालाँकि ऐसा नहीं हुआ और इसमें कई बेकसूर आम नागरिक और बच्चे मारे गए।

घटनाक्रम

1 सितंबर स्थानीय स्कूली शिक्षा प्रणाली का पहला दिन होता है। यह एक उत्सव की तरह होता है जिसमें नए और पुराने छात्रों के अभिभावक स्कूल समारोह में बच्चों के साथ भाग लेते हैं। चेचेन अतिवादिओं ने जानबूझ कर इस दिन को चुना ताकि अधिक से लोगों को बंधक बना कर रूस के साथ सौदा किया जा सके।

बेसलान स्कूल में प्रभावित स्थल में विलाप करती औरत

इसी विचार को ध्यान में रखकर चेचेन आतंकियों ने 1 सितंबर को बेसलान के स्कूल में बच्चों सहित 1000 से भी ज्यादा लोगों को बंधक बना लिया। बेसलान के वन स्कूल में दो नकाबपोश महिलाएं और 30 पुरुष विस्फोटक बेल्ट पहने हुए और गोलियां चलाते हुए घुस गए। स्कूल में दाखिल होते ही आतंकियों ने वहां मौजूद गार्ड समेत दस लोगों को मार दिया, जिससे कोई उन्हें रोक न सके। आतंकियों ने बंधकों को स्कूल के स्पोर्ट्स हॉल में रखा था और बास्केबॉल कोर्ट पर विस्फोटक लगा रखे थे।

हमले की जिम्मेवारी

ऐसी रिपोर्टें थीं कि जुलाई 2004 के दौरान मरम्मत करने वालों के वेश में लोगों ने स्कूल में हथियार और विस्फोटक छुपाए थे, जिसे अधिकारियों ने बाद में नकार दिया था। हालाँकि, कई गवाहों के अनुसार उन्हें स्कूल में छिपे हथियारों को निकालने में मदद करने के लिए मजबूर किया गया था। ऐसे भी दावे थे कि स्पोर्ट्स-हॉल की छत पर एक “स्नाइपर का गोदाम” पहले से ही बनाया गया था।

बेसलान स्कूल घेराबंदी में प्रभावित एक माँ (2006)

हमलावरों ने न्यूयॉर्क टाइम्स के संवाददाता को बताया कि वे रियाद अल-सलीहिन नामक आतंकवादी संगठन से संबंधित हैं, जिसका नेतृत्व कुख्यात चेचन सरगना शमिल बसयेव करता था।

किसी भी स्कूल में सबसे क्रूर नरसंहार

बेसलान नरसंहार को अब तब का सबसे क्रूर नरसंहार माना जाता है। आतंकियों ने यहां निर्दयता की सारी हदें लांग दी थीं। आतंकियों ने सभी लोगों और बच्चों को भूखे प्यासे तीन दिन तक रखा। ऐसे में भूखे-प्यासे बच्चों को पेशाब पीने पर मजबूर होना पड़ा।

BBC द्वारा प्रकाशित हमले में हताहत बच्चों और अन्य लोगों की सूची

कौन हैं चेचेन आतंकवादी

1864 में रूस के तत्कालीन शासक ने चेचेन्या पर कब्जा कर लिया था, लेकिन चेचेन्या ने कभी अपने आपको रूस का हिस्सा नहीं माना। इसके बाद से ही रूस के सैनिकों और चेचेन आतंकियों के बीच से खूनी संघर्ष होता आ रहा है। रूस हमेशा हथियारों के दम पर चेचेन आतंकियों को रोकने की कोशिश करता रहा है।

चेचेन्या के लोग मूल रूप से उत्तरी काकेशस के निवासी हैं। वे काकेशसी भाषा बोलते हैं। ये इस्लाम धर्म के सुन्नी समुदाय के हैं। चेचेन्या का कुल क्षेत्रफल लगभग 6 हजार वर्ग किलोमीटर है और यहां की आबादी तकरीबन 12 लाख 67 हजार है।

बच्चियों से रेप की खबर, लेकिन गवाहों के अनुसार रेप नहीं हुआ

कई हिंदी वैब साइट के अनुसार आतंकियों ने 8 साल की बच्चियों का रेप किया था और ब्लीडिंग के कारण उनकी मौत हो गयी थी। लेकिन अधिकतर बंधक गवाहों के अनुसार ऐसा कुछ नहीं हुआ था। इसके विपरीत इस्लामी आतंकियों ने कुछ बच्चियों को उनके भड़काऊ वस्त्रों के लिए लताड़ लगायी और उनकों अपने अंगों को ढकने के लिए कहा।

रूस की नाकामी

इस घटना के प्रत्यक्ष दर्शियों के अनुसार रूस ने घटना में आतंकियों से निपटने के दौरान भारी युद्ध सामग्री जैसे टैंको और रॉकेट्स का वेवजह इस्तेमाल किया था जिसकी वजह से अधिक हानि हुई। रूस की ख़ुफ़िया एजेंसी ने इस वारदात का पहले से अंदेशा जताया था लेकिन सरकार और प्रशासन इससे निपटने में नाकाम रहा।

बमों के असमय फटने, छत ढहने और जहरीली गैस की वजह से अधिक मौतें

आतंकियों ने जिम्नेजियम हाल में माइंस और बम प्लांट कर रखे थे जिनमें अकारण ( अस्पष्ट वजह से ) विस्फोट हो गया। इसमें कई बंधकों की मौत हो गयी। इसके कुछ समय के बाद जिम की छत ढह गयी दब कर बहुत सारे बंधकों और कुछ आतंकियों की मौत हो गयी।

रूसी सुरक्षाबलों ने आतंकियों से निपटने और संकट को हल करने के लिए लोगों बेहोश करने के लिए जहरीली गैस का इस्तेमाल किया जिसमें कई बच्चों की मौत हो गयी।

अन्य तथ्य

  • आतंक का यह सिलसिला करीब तीन दिनों तक चला था। रूसी सैनिक बच्चों के चलते कोई आक्रामक कार्रवाई नहीं कर पा रहे थे।
  • चेचेन आतंकियों की डिमांड थी रूसी सरकार चेचेन्या से रशियन आर्मी को हटा ले, लेकिन रूस ने इससे साफ इनकार कर दिया था।
  • रूसी सरकार ने आतंकियों के सामने न झुकते हुए कमांडो कार्रवाई का आदेश दिया था। स्कूल में आतंकियों समेत सभी लोगों के बेहोश करने के लिए जहरीली गैस का भी उपयोग किया था, लेकिन गैस की ज्यादा मात्रा से कई बच्चों की दम घुटने से मौत हो गई थी। इसके अलावा सैकड़ों बच्चे आर्मी और आतंकियों के बीच हुई मुठभेड़ में मारे गए थे। ऑपरेशन 3 सितंबर को खत्म हुआ था।
  • तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के अनुसार, “इस घटना में हुई मौतें एक बार फिर ये याद दिलाती हैं कि आतंकवादी सभ्य समाज को भयभीत करने के लिए किस हद तक जा सकते हैं”।

कब है जन्माष्टमी और क्या है इसका महत्व

कृष्ण जन्माष्टमी भाद्रपद माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन मनाई जाती है। इस दिन भगवान कृष्ण के बाल गोपाल स्वरूप की पूजा की जाती है।

भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में यह पर्व देशभर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। कृष्ण जन्मोत्सव के दिन लोग व्रत रखते हैं और रात में 12 बजे कान्हा के जन्म के बाद उनकी पूजा करके व्रत का पारण करते हैं। इस दिन भगवान श्री कृष्ण के बाल गोपाल स्वरूप की पूजा की जाती है।

ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से भगवान श्री कृष्ण सभी मुरादें शीघ्र पूर्ण कर देते हैं। वहीं महिलाएं संतान प्राप्ति की कामना के साथ यह व्रत करती हैं। कृष्ण जन्माष्टमी के दिन लड्डू गोपाल को प्रसन्न करने के लिए कई तरह के पकवान अर्पित किए जाते हैं। उन्हें झूला झुलाया जाता है। ऐसे में चलिए जानते हैं साल 2023 में कृष्ण जन्माष्टमी कब है-

कृष्ण जन्माष्टमी 2023 कब है?

 पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 6 सितंबर 2023 को दोपहर 03 बजकर 37 मिनट से हो रही है। वहीं इस तिथि का समापन अगले दिन 7 सितंबर 2023 शाम 04 बजकर 14 मिनट पर होगा।

जन्माष्टमी का महत्व

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्यौहार देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है। हिंदू धर्म में इस पर्व का विशेष महत्व है और इसे हिंदुओं के प्रमुख त्यौहारों में से एक माना जाता है।

माना जाता है कि सृष्टि के पालनहार श्री हरि विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में आंठवा अवतार लिया था। देश के सभी राज्यों में अलग-अलग तरीके से इस त्यौहार को मनाया जाता है।

इस दिन बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सभी लोग अपनी श्रद्धानुसार दिनभर व्रत रखते हैं और भगवान कृष्ण की महिमा का गुणगान करते हैं। दिनभर घरों और मंदिरों में भगवान कृष्ण के भजन कीर्तन चलते हैं वहीं मंदिरों में झांकियां भी निकाली जाती हैं।

पूजन विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं। घर के मंदिर में साफ- सफाई करें।
  • घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।
  • सभी देवी-देवताओं का जलाभिषेक करें।
  • इस दिन भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप यानी लड्डू गोपाल की पूजा की जाती है।
  • लड्डू गोपाल का जलाभिषेक करें।
  • इस दिन लड्डू गोपाल को झूले में बैठाएं।
  • लड्डू गोपाल को झूला झूलाएं।
  • अपनी इच्छानुसार लड्डू गोपाल को भोग लगाएं। इस बात का ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है।
  • लड्डू गोपाल की सेवा पुत्र की तरह करें।
  • इस दिन रात्रि पूजा का महत्व होता है, क्योंकि भगवान श्री कृष्ण का जन्म रात में हुआ था।
  • लड्डू गोपाल को मिश्री, मेवा का भोग भी लगाएं। लड्डू गोपाल की आरती करें।
  • इस दिन अधिक से अधिक लड्डू गोपाल का ध्यान रखें। 

कृष्ण जन्माष्टमी पर करें बांसुरी से जुड़े ये वास्तु उपाय, आएगी जीवन में खुशहाली!

हिंदू कैलेंडर के अनुसार हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है। ऐसा माना जाता है कि बांसुरी भगवान कृष्ण को सबसे प्रिय है।

वास्तु शास्त्र में भी बांसुरी को बहुत शुभ माना गया है। ऐसे में बांसुरी से जुड़े कुछ उपाय करके आप अपने जीवन को खुशहाल बना सकते हैं। आइए जानते हैं क्या हैं ये उपाय…

वास्तु दोष दूर होगा

बांसुरी भगवान कृष्ण को बहुत प्रिय थी। वह हमेशा बांसुरी अपने साथ रखते थे। ऐसे में अगर आपके घर में वास्तु दोष है और इससे आप परेशान हैं तो जन्माष्टमी के दिन घर में एक बांसुरी लाकर रात्रि में कृष्ण जी की पूजा में अर्पित करें और दूसरे दिन उस बांसुरी को अपने घर में पूर्व की दीवार पर तिरछी लगा दें। वास्तु के अनुसार, ऐसा करने से आपके घर का वास्तु दोष धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगा।

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व्यापार में लाभ के लिए

वास्तु शास्त्र के अनुसार जिस घर में लकड़ी की बांसुरी होती है उस घर में कान्हा की कृपा हमेशा बनी रहती है। बांसुरी को शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

ऐसे में घर के मुख्य द्वार पर बांस की सुंदर बांसुरी टांगना समृद्धि को आमंत्रित करेगा। इसके अलावा यदि आपका व्यवसाय अच्छा नहीं चल रहा है तो अपने कार्यालय या दुकान के मुख्य द्वार के ऊपर दो बांसुरी लगाएं।

चली जाएगी नकारात्मक ऊर्जा

बांसुरी बजाने पर उससे उत्पन्न ध्वनि से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार वातावरण में होता है। ऐसे में अगर आपको लगता है कि घर में नकारात्मक शक्तियों का वास है तो भगवान कृष्ण को चांदी की बांसुरी चढ़ाएं।

यदि आप चांदी की बांसुरी नहीं खरीद सकते हैं, तो आप बांस की बांसुरी भी खरीद सकते हैं। श्रीकृष्ण को बांसुरी अर्पित करने के बाद उस बांसुरी को अपने घर के ड्राइंग रूम में रख दें।

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दाम्पत्य जीवन में प्यार के लिए

यदि पति-पत्नी के बीच अनबन हो तो जन्माष्टमी के दिन एक बांसुरी लेकर आएं और उस बांसुरी को भगवान कृष्ण को अर्पित करने के बाद उस बांसुरी को अपने बिस्तर के पास रखें। ऐसा करने से आपका दांपत्य जीवन सुखमय रहेगा।

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जन्माष्टमी: कब और कैसे करें जन्माष्टमी व्रत

जन्माष्टमी हिन्दू धर्म में मनाए जाने वाले महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है। इस पर्व को बाल-गोपाल श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व केवल भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी पूरी श्रद्धा और उल्लास से मनाया जाता है।

हर साल हिन्दू कैलेंडर के भाद्रपद माह की अष्टमी तिथि को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है। हिन्दू धर्म की मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म पांच हजार साल पहले भाद्रपद मास में रोहिणी नक्षत्र में अष्टमी तिथि की आधी रात को हुआ था।

जन्माष्टमीकब है जन्माष्टमी व्रत

इस साल 2023 को स्मार्त यानि गृहस्थियों के लिए जन्माष्टमी व्रत 6 सितम्बर को है l परंपरा के अनुसार अष्टमी की आधी रात के बाद ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद पूजा की जाती है।

इस दिन व्रतानुष्ठान अष्टमी तिथि से शुरू होती है और अगले दिन नवमी पर खत्म होती है। फिर भी कई लोग, अर्द्धरात्रि पर रोहिणी नक्षत्र का योग होने पर सप्तमी और अष्टमी पर व्रत रखते हैं। कुछ भक्तगण उदयव्यापिनी अर्थात शुरू होती अष्टमी पर उपवास करते हैं।

शास्त्रकारों ने व्रत -पूजन, जपादि के लिए अर्द्धरात्रि अर्थात अष्टमी और नवमी के बीच की रात्रि में रहने वाली तिथि को ही मान्यता दी है।

विशेषकर स्मार्त लोग अर्द्धरात्रिव्यापिनी अष्टमी को यह व्रत करते हैं। पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, चंडीगढ़ आदि में में स्मार्त धर्मावलम्बी अर्थात गृहस्थ लोग इसी परम्परा का अनुसरण करते हुए सप्तमी युक्ता अर्द्धरात्रिकालीन वाली अष्टमी को व्रत, पूजा आदि करते आ रहे हैं जबकि मथुरा, वृंदावन सहित उत्तर प्रदेश आदि प्रदेशों में उदयकालीन अष्टमी के दिन ही कृष्ण जन्मोत्सव मनाते आ रहे हैं।

भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मथुरा की परम्परा को आधार मानकर मनाई जाने वाली जन्माष्टमी के दिन ही केन्द्रीय सरकार अवकाश की घोषणा करती है। वैष्णव संप्रदाय के अधिकांश लोग उदयकालिक नवमी युता जन्माष्टमी व्रत के लिए ग्रहण करते हैं।

कैसे करें जन्माष्टमी व्रत

व्रत अष्टमी तिथि से शुरू होता है। इस दिन सुबह उठकर स्नान आदि करने के बाद घर के मंदिर को साफ सुथरा करें और जन्माष्टमी की तैयारी शुरू करें।

रोज की तरह पूजा करने के बाद बाल कृष्ण लड्डू गोपाल जी की मूर्ति मंदिर में रखें और इसे अच्छे से सजाएं। माता देवकी, वासुदेव, बलदेव, नंद, यशोदा जी का चित्र भी लगा सकते हैं।

इसके बाद, जप-ध्यान व व्रतानुष्ठान करके ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र जाप करें। पूरा दिन व्रत रखें। फलाहार कर सकते हैं। इसके साथ ही यथा संभव भगवान का भजन-कीर्तन, स्वाध्यान, पाठ व भगवान से संबन्धित प्रसंगों का अध्ययन व सेवन करें।

मन और वाणी को संयम में रखें। काम, क्रोध, लोभ, द्वेष, हिंसा, क्लेश, दुर्वचन, ठेस लगाना आदि अप्रिय कार्यों और मांस-मदिरा आदि दुर्व्यसनों से दूर रहने का अभ्यास करना ही उपवास है। इसके लिए ध्यान करें। उपवास केवल अन्न से सिद्ध नहीं होता बल्कि यह क्रिया-कलापों और आचरण से भी परिलक्षित होना अनिवार्य है।

जन्माष्टमी पर मंत्र साधना

भगवान कृष्ण की आराधना के लिए आप यह मंत्र पढ़ सकते हैं

ज्योत्स्नापते नमस्तुभ्यं नमस्त ज्योतिशां पते!
नमस्ते रोहिणी कान्त अध्य मे प्रतिगृह्यताम्!!

संतान प्राप्ति के लिए: संतान की इच्छा रखने वाले दंपति, संतान गोपाल मंत्र का जाप पति-पत्नी दोनों मिलकर करें।

देवकीसुत गोविंद वासदेव जगत्पते!
देहिमे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत:!! दूसरा मंत्र:
क्लीं ग्लौं श्यामल अंगाय नमः!!

विवाह में हो रहे विलम्ब के लिए:

ओम् क्ली कृष्णाय गोविंदाय गोपीजनवल्लभाय स्वाहा।

इन मंत्रों की एक माला अर्थात 108 मंत्र कर सकते हैं।

जन्माष्टमी व्रत यानि व्रतराज

कृष्ण जन्माष्टमी के दिन पूजन के साथ-साथ व्रत रखना बहुत फलदायी माना जाता है। इसे व्रत व्रतराज भी कहा जाता है। इस व्रत का विधि-विधान से पालन करने से कई गुना पुण्य की प्राप्ति होती है। यह व्रत सबसे आसान व्रत कहा जा सकता है जिसमें फलाहार, उबले आलू, साबुदाना आदि का सेवन किया जा सकता है।

रात्रि बारह बजे तक व्रत का पालन

जन्माष्टमी का व्रत रात बारह बजे तक किया जाता है। इस व्रत को करने वाले रात बारह बजे तक कृष्ण जन्म का इंतजार करते हैं। उसके पश्चात् पूजा आरती होती है और फिर प्रसाद मिलता है। प्रसाद के रूप में धनिया और माखन मिश्री दिया जाता है क्योंकि ये दोनों ही वस्तुएं श्री कृष्ण को अत्यंत प्रिय हैं। उसके पश्चात् प्रसाद ग्रहण करके व्रत पारण किया जा सकता है। हालांकि सभी के यहां परम्पराएं अलग-अलग होती हैं। कोई प्रात:काल सूर्योदय के बाद व्रत पारण करते हैं तो कोई रात में प्रसाद खाकर व्रत खोल लेते हैं। आप अपने परिवार की परम्परा के अनुसार ही व्रत पारण करें।।

दिन भर अन्न ग्रहण नहीं करें। मध्य रात्रि को एक बार फिर पूजा की तैयारी शुरू करें। रात को 12 बजे भगवान के जन्म के बाद भगवान की पूजा करें और भजन करें। गंगा जल से श्री कृष्ण को स्नान कराएं और उन्हें सुंदर वस्त्र और आभूषण पहनाएं। भगवान को झूला झुलाएं और फिर भजन, गीत-संगीत के बाद प्रसाद का वितरण करें।

चंद्रयान मिशन 3 : जानिए इससे जुड़े कुछ रोचक तथ्य

चंद्रयान-3 चाँद पर खोजबीन करने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा भेजा गया तीसरा भारतीय चंद्र मिशन है। इसमें चंद्रयान-2 के समान एक लैंडर और एक रोवर है, लेकिन इसमें ऑर्बिटर नहीं है।

यह मिशन चंद्रयान-2 की अगली कड़ी है, क्योंकि पिछला मिशन सफलता पूर्वक चाँद की कक्षा में प्रवेश करने के बाद सॉफ्ट लैंडिंग में विफल हो गया था, सॉफ्ट लैंडिंग का पुनः सफल प्रयास करने के लिए  इस नए चंद्र मिशन को प्रस्तावित किया गया था।

चंद्रयान-3 का लॉन्च सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (शार), श्रीहरिकोटा से 14 जुलाई, 2023 शुक्रवार को दोपहर 2:35 बजे हुआ था। यह यान चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास की सतह पर 23 अगस्त 2023 को सायं 06:04 बजे के आसपास सफलतापूर्वक उतर चुका है।

इसी के साथ भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक अंतरिक्ष यान उतारने वाला पहला और चंद्रमा पर उतरने वाला चौथा देश बन गया है।

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रोचक तथ्य

  • चंद्रयान -3 को भेजने के लिए एलवीएम3 एम4 लॉन्चर का इस्तेमाल किया गया था।
  • चंद्रयान 2 की लागत एक हॉलीवुड फिल्म के बजट से भी कम थी और चंद्रयान 3 मिशन की लागत उससे भी लगभग 30% कम है।
  • रोवर प्रज्ञान सहित 1752 किलोग्राम वजन वाले विक्रम लैंडर की मिशन लाइफ एक चंद्र दिवस है। जोकि चांद का एक दिन और पृथ्वी के 14 दिनों के बराबर होता है।
  • चंद्रयान चंद्रमा की मिट्टी के नजदीक-सतह प्लाज्मा (आयन और इलेक्ट्रॉन) घनत्व को मापेगा। चंद्रयान-3 चंद्रमा के लैंडिंग वाली जगह के आसपास भूकंपीयता (seismicity) को भी मापेगा। यह मिशन यह पता लगाने में मदद करेगा कि चंद्रमा की मिट्टी पर किस प्रकार के रसायन पाए जाते हैं।

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  • चीन के साथ भारत चंद्रमा पर ऑपरेटिंग रोवर रखने वाला दूसरा देश बन गया है।
  • भारत चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला चौथा देश बन गया है। इससे पहले चीन, अमेरिका और सोवियत संघ यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं।

  • भारत ने पहली बार साल 2009 में चंद्रयान-1 के जरिये ये पता लगाया था कि चंद्रमा के उस क्षेत्र (दक्षिणी ध्रुव) में जहां अंधेरा रहता है, वहां पानी जमा हुआ है। चंद्रयान-1 भारत का पहला मून मिशन था, जिसे 22 अक्टूबर को श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया गया था। चंद्रयान -3 ने अब वो काम पूरा किया है, जिसे चंद्रयान -1 ने अधूरा छोड़ दिया था।

रहस्य्मयी मंदिर: जहाँ बिना किसी आधार के हवा में लटक रहा है मंदिर का खंभा

भारत को यदि मंदिरों का देश कहा जाये तो गलत नहीं होगा। यहां ऐसे कई मंदिर हैं जो अपनी भव्यता और अनोखी मान्यताओं के लिए जाने जाते हैं। वहीँ कुछ मंदिर बेहद रहस्य्मयी है, जिनका रहस्य आज तक वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा पाए हैं।

ऐसा ही एक रहस्य्मयी मंदिर आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में भी है। इस मंदिर की सबसे खास और रहस्यमयी बात यह है कि इस मंदिर का एक खंभा बिना किसी आधार के हवा में लटक रहा है

वैसे तो इस मंदिर में अन्य खंभे भी हैं लेकिन हवा में लटका हुआ वो एक खंभा अनेकों रहस्य और चमत्कार समेटे हुए है। लेकिन इसका रहस्य आज तक कोई नहीं जान पाया है।

आज की हमारी इस पोस्ट में हम आपको इसी रहस्य्मयी मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं तो चलिए शुरू करते हैं :

कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 1583 में विरुपन्ना और विरन्ना नाम के दो भाइयों ने 16वीं सदी में कराया था, जो विजयनगर के राजा के यहां काम करते थे। हालांकि पौराणिक मान्यता के अनुसार इस मंदिर को ऋषि अगस्त्य ने बनवाया था। इस मंदिर का नाम है “लेपाक्षी मंदिर“।

unique Lepakshi Temple Lord Shiva hindi
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इस मंदिर में भगवान शिव के क्रूर और रौद्र रूप भगवान वीरभद्र विराजमान हैं। इसी कारण से इस मंदिर को वीरभद्र मंदिर भी कहा जाता है। अब यह मंदिर “हैंगिंग पिलर टेंपल” के नाम से भी दुनियाभर में विख्यात हो चुका है।

इस मंदिर में कुल 70 खंभे हैं, जिसमें से एक खंभे का जमीन से जुड़ाव नहीं है। मंदिर में मौजूद हवा में लटके इस खंबे को आकाश स्तंभ के रूप में भी जाना जाता है। यह खंबा जमीन से आधा इंच के करीब ऊपर उठा हुआ है।

कहा जाता है कि मंदिर का खंभा पहले जमीन से जुड़ा हुआ था, लेकिन ब्रिटिश काल में एक इंजीनियर ने ये जानने की कोशिश की थी कि ये मंदिर खंभों पर कैसे टिका हुआ है। इसके लिए उसने एक खंभे को खिसकाया था, उसके बाद से ही यह खम्बा हवा में ही लटक रहा है।

unique lord shiva temple leepakshi
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इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि हवा में लटके इस खंबे के नीचे से अगर कपड़ा निकाला जाए तो उस व्यक्ति के घर में सुख-समृद्धि (सुख-समृद्धि के लिए हटाएं ये वास्तु दोष) का वास हमेशा बना रहता है।

खंबे के हवा में लटकने के पीछे एक कथा भी प्रचलित है। माना जाता है कि भगवान वीरभद्र की उत्पत्ति दक्ष प्रजापति के यज्ञ के बाद हुई थी। इसके अलावा यहां भगवान शिव के अन्य रूप अर्धनारीश्वर, कंकाल मूर्ति, दक्षिणमूर्ति और त्रिपुरातकेश्वर भी मौजूद हैं। यहां विराजमान माता को भद्रकाली कहा जाता है।

मंदिर के सामने विशाल नंदी की मूर्ति है जो एक ही पत्थर पर बनी है। कहा जाता है कि दुनिया में यह नंदी की सबसे बड़ी मूर्ति है।

unique lord shiva Lepakshi-Temple
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मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर का जिक्र रामायण में भी मिलता है। कहा जाता है यह वही जगह है जहां जटायु रावण से युद्ध करने के बाद जख्मी होकर गिर गये थे और राम को रावण का पता बताया था।

मंदिर में एक बड़े से पैर का निशान भी है, जिसे त्रेता युग का गवाह माना जाता है। कोई इसे भगवान राम के पैर का निशान तो कोई माता सीता के पैर का निशान मानते हैं।

lepakshi- lord shiva temple

जब अंधविश्वास की वजह से मारे गए 900 से ज्यादा लोग!

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1 जुलाई 2018 को दिल्ली के बुराड़ी में एक ही परिवार के 11 सदस्यों द्वारा आत्महत्या किये जाने के बारे में आपने सुना होगा। पुलिस की अंतिम रिपोर्ट के अनुसार आत्महत्या की यह घटना सांझा भ्रम, मनोविकृति या अंधविश्वास से प्रेरित थीं। वैसे भी मनोविकार व अंधविश्वास लोगों से क्या कुछ नहीं करवा लेते  हैं।

सामूहिक आत्महत्या की यह घटना बुराड़ी और दिल्ली वासियों के लिए सदमे से कम नहीं थी। लेकिन शायद आप नहीं जानते होंगे कि 45 साल पहले दक्षिणी अमेरिका के पास स्थित गुयाना के जोंसटाउन में करीब 900 से अधिक लोगों ने एक साथ आत्महत्या कर ली थी।

18 नवंबर, 1978 को यह दिल दहला देने वाली घटना घटी थी। गुयाना की  इस घटना को अबतक की सबसे बड़ी आत्महत्या की घटनाओं में से एक माना जाता है। इस घटना के बारे में, जो भी सुनता है हैरानी में पड़ जाता है।

दरअसल इस घटना क पीछे जिस व्यक्ति का हाथ था वह खुद को एक धर्मगुरु कहता था जिसका नाम था जिम जॉन्स। वो खुद को भगवान का अवतार बताता था।

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जिम जॉन्स ने लोगों के बीच खुद को महान साबित करने के लिए जरूरतमंद लोगों की मदद के नाम पर साल 1956 में ‘पीपल्स टेंपल‘ (लोगों का मंदिर) नाम के  एक चर्च की स्थापना की और अपनी धार्मिक बातों और अंधविश्वास के दम पर उसने हजारों लोगों को अपना अनुयायी बना लिया।

जिम जॉन्स कम्युनिष्ट विचारधारा का व्यक्ति था और उसके विचार अमेरिकी सरकार से बिल्कुल अलग थे। इसलिए वो अपने अनुयायियों के साथ शहर से दूर गुयाना के जंगलों में चला गया और वहीं पर उसने एक छोटा सा गांव भी बसा दिया। लेकिन कुछ दिनों के बाद ही उसकी असलियत लोगों के बीच आने लगी।

दरअसल, जिम जॉन्स अपने अनुयायियों (चाहे वो महिला हो या पुरुष) से दिनभर काम कराता था और रात में जब वो थक-हारकर सोने के लिए जाते तो वो उन्हें सोने भी नहीं देता था और अपना भाषण शुरू कर देता था। इस दौरान उसके सिपाही घर-घर जाकर देखते थे कि कहीं कोई सो तो नहीं रहा।

अगर कोई भी सोता हुआ पाया जाता था वो उन्हें कड़ी सजा दी जाती थी। यहां तक कि वो लोगों को गांव से बाहर भी नहीं जाने देता था। पुरुष और महिलाएं जब काम करती थीं, तो उनके बच्चों को एक कम्युनिटी हॉल में रखा जाता था। उसके सिपाही गांव के चारों ओर दिन-रात पहरा देते रहते थे, ताकि कोई वहां से भाग न जाए।

जिम जॉन्स ने अपने अंधविश्वास का जाल इस कदर फैला रखा था कि वो जो कहता, लोग उसे मान लेते। इस बीच अमेरिकी सरकार को वहां हो रही गतिविधियों के बारे में पता चला तो सरकार ने कार्रवाई करने की सोची। लेकिन इस बात का पता जिम जोंस को भी चल गया और उसने अपने सभी अनुयायियों को एक जगह इकट्ठा होने को कहा।

कहा जाता है कि इस दौरान जॉन्स ने लोगों से कहा, अमेरिकी सरकार हम सबको मारने आ रही है। इससे पहले कि वो हमें गोलियों से छलनी करें, हम सबको पवित्र जल पी लेना चाहिए। ऐसा करने से हम गोलियों के दर्द से बच जाएंगे।

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जिम ने लोगों से कहा कि अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो वो हमें बम से उड़ा देंगे और जो बच जाएंगे उनके साथ जानवरों जैसा सलूक करेंगे। महिलाओं के साथ रेप करेंगे, बच्चों को तरह-तरह की तकलीफें देंगे। इसलिए हमें खुद को उनसे बचाने के लिए पवित्र जल पीना पड़ेगा।

जॉन्स ने पहले ही एक बड़े से टब में खतरनाक जहर मिलाकर एक सॉफ्ट ड्रिंक बनवा लिया था और लोगों को पीने के लिए दे दिया। जिसने भी जहरीला ड्रिंक पीने से मना किया, उन्हें जबरन पिलाया गया। इस तरह एक अंधविश्वासी के चक्कर में पड़ कर 900 से ज्यादा लोगों ने अपनी जान गंवा दी थी। इनमें 300 से अधिक बच्चे भी शामिल थे।

इस घटना को अब तक के सबसे बड़े नरसंहारों में से एक माना जाता है। कहा जाता है कि लोगों के मरने के बाद जिम जॉन्स का शव भी एक जगह पाया गया था। उसने खुद को गोली मार ली थी या शायद किसी ने उसके कहने पर उसे गोली मारी थी।

रक्षाबंधन 2023: इस रंग की राखी बांधें भाई को खुल जाएगी किस्मत!

प्रत्येक श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को बड़ी धूम धाम से रक्षा बंधन का त्यौहार मनाया जाता है। राखी के नाम से प्रसिद्ध ये त्यौहार भाई-बहन के असीम प्रेम का प्रतीक होता है।

इस साल भद्रा के कारण रक्षाबंधन का त्यौहार दो दिन 30 अगस्त और 31 अगस्त को मनाया जाएगा। रक्षाबंधन वाले दिन बहनें भाई के दाहिने कलाई पर प्यार की राखी बांधती हैं। इसके साथ ही वे भाई के सुखी और समृद्ध जीवन की कामना करती हैं।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि आप अपने भाई को उसकी राशि के अनुसार राखी बांधते हैं, तो निश्चित रूप से वह आपके भाई के सुख और सौभाग्य को बढ़ाने वाला साबित होगा।

आइए ज्योतिष के माध्यम से जानते हैं कि आपके भाई की राशि के अनुसार कौन सी राखी उसे सभी संकटों से बचाने वाली साबित होगी। तिलक लगाकर लाल रंग की राखी बांधनी चाहिए।

मेष राशि

अगर आपके भाई की राशि मेष है, तो आपको अपने भाई के लिए लाल रंग की राखी लेनी चाहिए। दरअसल, मेष राशि के लोगों पर मंगल ग्रह का प्रभाव होता है। ऐसे में लाल रंग उनके जीवन में ऊर्जा का संचार करता है।

वृष राशि

अगर आपके भाई की राशि वृष है, तो आप उनके लिए नीली रंग की राखी खरीद सकते हैं। नीली रंग की राखी आपके भाई के जीवन में सफलता लेकर आएगी। साथ ही उनके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होगा।

मिथुन राशि

मिथुन राशियों के भाइयों के लिए हरे रंग की राखी शुभ मानी जाती है। मिथुन राशि पर बुध का प्रभाव होता है, इसलिए इन लोगों के लिए हरे रंग को अधिक भाग्यशाली माना जाता है। रक्षाबंधन पर हरी राखी बांधने से आपके भाई के जीवन में खुशियां आएंगी। साथ ही उनकी बौद्धिक क्षमता भी बढ़ेगी।

कर्क राशि

कर्क राशि वालों पर चंद्रमा का प्रभाव होता है। यह अच्छे स्वास्थ्य को इंगित करता है। अगर आपके भाई की राशि कर्क है, तो आपको उनकी कलाई पर सफेद रंग की राखी बांधनी चाहिए। सफेद रंग कर्क राशि के लोगों के लिए काफी शुभ माना जाता है।

सिंह राशि

सिंह राशि पर सूर्य का वास होता है। अगर आपका भाई सिंह राशि का है, तो आप उनके लिए लाल या पीली रंग की राखी ले सकते हैं। लाल या पीली रंग की राखी आपके भाई के लिए शुभ संकेत लेकर आ सकती है।

कन्या राशि

अगर आपका भाई कन्या राशि का है, तो उस पर बुध का प्रभाव होता है। ऐसे में आपको अपने भाई की कलाई पर गहरे हरे रंग की राखी बांधनी चाहिए। गहरे हरे रंग की राखी आपके भाई के लिए काफी शुभ होगा। हर राखी आपके भाई के रुके हुए सारे कार्यों को पूरा करने में मदद करेगा।

तुला राशि

तुला राशि के लोग शुक्र ग्रह के स्वामी होते हैं। अगर आपके भाई की राशि तुला है, तो उनकी कलाई पर गुलाबी रंग की राखी बांध सकते हैं। इस रंग की राखी आपके भाई के जीवन को खुशियों से भर देगी। साथ ही आपके भाई की लंबी उम्र के लिए भी जरूरी है।

वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि वाले भाइयों पर मंगल का वास होता है। इस राशि के भाई की कलाई पर आपको मेहरून रंग की राखी बांधनी चाहिए। मेहरुन रंग की राखी आपके भाई पर आने वाले संकटों को दूर करने में मदद करेगा। उनके जीवन को खुशियों से भरेगा और सकारात्मक ऊर्जा मिलेगी।

धनु राशि

अगर आपका भाई धनु राशि का है, तो याद रखें कि उस पर शुक्र का प्रभाव है। इसलिए आपको अपने भाई की कलाई पर पीले रंग की राखी बांधनी चाहिए। पीले रंग की राखी आपके भाई को सफलता की ओर ले जाएगी। इससे आपके भाई को व्यावसायिक सफलता मिलने से कोई नहीं रोक सकता है।

मकर राशि

मकर राशि वाले लोगों पर शनि का प्रभाव होता है। अगर आपके भाई की राशि मकर है, तो आपको उन्हें नीले रंग की राखी बांधनी चाहिए। नीले रंग की राखी आपके भाई के जीवन में सफलता लेकर आएगी।

कुंभ राशि

अगर आपका भाई कुंभ राशि का है, तो गहरे हरे रंग की राखी आपके भाई के लिए शुभ हो सकता है। गहरे हरे रंग की राखी आपके भाई के जीवन की रक्षा करेगी। आपके भाई के साथ कुछ भी गलत नहीं होने देगी।

मीन राशि

मीन राशि के लोगों पर शुक्र ग्रह का प्रभाव होता है। इस राशि के भाईयों के लिए पीला रंग सबसे अच्छा रहेगा। इसलिए अगर आपके भाई की राशि मीन है, तो उनके लिए पीले रंग की राखी खरीदें। पीले रंग की राखी आपके भाई को बीमारियों से दूर रखने में मदद करेगा।

राखी बांधते समय करें इस मंत्र को बोले

ऊँ येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।

तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।

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रक्षाबन्धन : 30 या 31 अगस्त, कब बांधी जाएगी भाई को राखी, जाने इस पोस्ट के माध्यम से

रक्षाबन्धन एक हिन्दू व जैन त्यौहार  है जो प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। राखी ईश्वर की ओर से बांधा जाने वाला साक्षात सुरक्षा कवच है। 

रक्षाबन्धन का पर्व भाई-बहनों के आपसी प्रेम का प्रतीक है। रक्षाबंधन पर बहनें अपने भाईयों की कलाई पर राखी बांधती हैं। मुहूर्त शास्त्र के अनुसार रक्षाबन्धन का त्योहार हमेशा भद्रा रहित काल में मनाना शुभ होता है। अगर रक्षाबंधन के दिन भद्रा होती है तो ऐसे में बहनों को अपने भाईयों की कलाई में राखी नहीं बांधनी चाहिए।

भद्रा की समाप्ति के बाद ही राखी बांधना चाहिए। इस बार रक्षा बंधन की तिथि  को लेकर कुछ मतभेद है। दरअसल इस वर्ष श्रावण माह की पूर्णिमा तिथि पर भद्रा का साया रहने के कारण रक्षाबंधन 30 और 31 अगस्त को मनाने को लेकर असमंजस बना हुआ है।

जानते हैं रक्षाबंधन का त्योहार 30 या 31 अगस्त कब मनाएं और शुभ महूर्त :-

रक्षाबन्धन का महत्व

रक्षाबन्धन पर्व को भाई-बहन के प्रेम और सदभाव के पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है इसके बदले में भाई बहन को भेंट देता है एवं सदैव उसकी रक्षा करने का वचन भी देता है। अच्छे मुहूर्त अथवा भद्रारहित काल में भाई की कलाई में राखी बांधने से भाई को कार्य सिद्धि और विजय प्राप्त होती है।

रक्षाबन्धन के दौरान कब पड़ रही है भद्रा काल ?

इस साल भद्रा काल होने के कारण रक्षाबन्धन  का मुहूर्त  30 अगस्त को है या 31 को। इसको लेकर सभी असमंजस में है। इस साल पूर्णिमा तिथि 30 अगस्त को सुबह 10:58 मिनट से शुरू होगी, जो 31 अगस्त 2023 को सुबह 07:05 तक चलेगी।

लेकिन शास्त्रों  के अनुसार पूर्णिमा के साथ ही भद्राकाल भी शुरू हो जाएगा। इसमें हिन्दू पंचांग के अनुसार राखी बांधना शुभ नहीं रहता है। ऐसे में एक ही दिन पूर्णिमा और भद्रा लगने के कारण आपको मुहूर्त का खास ख्याल रखना होगा।

राखी बांधने का शुभ महूर्त

रक्षाबन्धन का शुभ मुहूर्त 30 अगस्त को रात 09 बजकर 01 मिनट के बाद से शुरू होगा और इस मुहूर्त का समापन 31 अगस्त को सूर्योदय काल में सुबह 07 बजकर 05 बजे पर होगा.

क्यों नहीं बांधते भद्रा में राखी?

हिन्दू शास्त्रों के अनुसार कहा जाता है कि शूर्पणखा ने अपने भाई रावण को भद्रा काल में ही राखी बांधी थी, जिस वजह से रावण के पूरे कुल का सर्वनाश हो गया था। इसलिए ऐसा माना जाता है कि बहनों को भद्राकाल में राखी नहीं बांधनी चाहिए।

इन बातों का भी रखें ख्याल?

  • राखी बांधते समय अच्छे से नहा-धोकर साफ सुथरे कपड़े पहनें।
  • रक्षाबंधन वाले दिन भाई को राखी बांधते समय मुहूर्त का खास ख्याल रखें।
  • राखी से पहले जब भाई की पूजा करें, तो उस समय अक्षत यानि चावल के दाने टूटे हुए न हो।
  • आरती करते समय थाल में रखा हुआ दिया शुद्ध हो, वो टुटा हुआ नहीं होना चाहिए।
  • राखी बांधते समय भाई या बहन का चेहरा दक्षिण दिशा की तरफ नहीं होना चाहिए। इस दिशा में मुख करते हुए राखी बांधने पर उम्र कम होती है।
  • राखी बांधते समय भाई को टिका लगाते समय रोली या चंदन का इस्तेमाल करें। इस समय सिंदूर का इस्तेमाल न करें क्योंकि सिंदूर सुहाग की निशानी होता है।