अमेरिकी सरकार के पास एलियंस के शव और यान मौजूद हैं: पूर्व अमेरिकी खुफिया अधिकारी

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अमरीकी कांग्रेस की एक महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान, पूर्व अमेरिकी खुफिया अधिकारी डेविड ग्रुश (David Grusch) ने खुलासा किया है कि अमेरिकी सरकार ने दुर्घटनाग्रस्त अज्ञात उड़ान वस्तुओं (UFO; यूएफओ) को इकट्ठा करने और रिवर्स-इंजीनियरिंग करने के उद्देश्य से एक “बहु-दशक” (multi-decade) कार्यक्रम चलाया था।

ग्रुश, जो 2023 तक अमेरिकी रक्षा विभाग की एजेंसी के भीतर अस्पष्टीकृत विसंगतिपूर्ण घटनाओं की जांच के प्रभारी थे, ने वाशिंगटन में हाउस ओवरसाइट कमेटी के सामने एलियनज़ (alien life) और प्रौद्योगिकी के मुद्दे पर प्रकाश डालते हुए बात की, जैसा कि गार्जियन द्वारा रिपोर्ट किया गया है।

ग्रुश के आरोप और गुप्तचर शिकायत

कांग्रेस के अधिवेशन में ग्रुश ने शपथ लेकर खुलासा किया कि उन्हें ड्यूटी के दौरान लंबे समय से चले आ रहे यूएपी क्रैश पुनर्प्राप्ति (UAP Crash retrieval) और रिवर्स-इंजीनियरिंग (reverse-engineering program) कार्यक्रम के बारे में पता चला  था, लेकिन उसे इसमें दाखिल होने की अनुमति नहीं दी गयी थी।

हालाँकि वह सैन्य व रक्षा एजेंसियों (military & defence agencies) द्वारा संचालित एलियंस और उनके शिल्प (alien craft) के ज्ञान की जांच के प्रमुख थे, इसके बावजूद उन्हें गुप्त सरकारी यूएफओ (secret government UFO) कार्यक्रमों तक पहुंच से वंचित कर दिया गया था। 2022 में उनकी गुप्तचर शिकायत इसी खीज का परिणाम थी।

अपने दावों के परिणामस्वरूप, ग्रुश को गंभीर प्रतिशोध का सामना करना पड़ा जिसने उनके पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन दोनों पर नकारात्मक प्रभाव डाला।

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नुकसान पहुंचाने और छुपाने का दावा

ग्रुश ने पूछताछ के दौरान पुष्टि की कि उन्हें ऐसे व्यक्तियों के बारे में जानकारी थी जिन्हें यूएफओ से संबंधित जानकारी छुपाने के सरकार के प्रयासों में नुकसान पहुँचाया गया था या घायल किया गया था।

इसके अलावा, उन्होंने स्वीकार किया कि मामले में शामिल होने के कारण उन्हें अपनी जान का डर है। कांग्रेस की इस सुनवाई के बाद अटकलें लगाईं जा रहीं हैं कि अमेरिकी सरकार एलियंस जीवन और उन्नत प्रौद्योगिकी के सबूतों को छुपा सकती है। इस सारे मामले में जनता से मिश्रित प्रतिक्रियाएँ मिलीं, जिनमें संदेह भी शामिल था।

सरकार का सहयोग न मिलना

यूएफओ जांच का सह-नेतृत्व करते हुए, रिपब्लिकन कांग्रेस सदस्य टिम बर्चेट(Tim Burchett) ने सरकारी एजेंसियों पर निरीक्षण समिति की जांच में सहयोग की कमी का आरोप लगाया। संबंधित पक्षों से जानकारी और गवाही प्राप्त करने में कठिनाई के कारण निराशा हाथ लगने और संघीय अधिकारियों द्वारा इसमें बाधा डालने के दावे भी किए गए हैं।

एलियंस जीव और यूएफओ की बरामदगी

ग्रुश ने दावा किया कि अमेरिकी सरकार ने दुर्घटनाग्रस्त अंतरिक्षीय वाहन और यहां तक कि एलियंस भी बरामद किए हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या इन विमानों को चलाने वाले पायलटों के शव थे, तो उन्होंने कार्यक्रम के प्रत्यक्ष ज्ञान वाले व्यक्तियों से मिली जानकारी के आधार पर “जैविक जीवाश्म” के होने की पुष्टि की जो गैर-मानवीय थे।

जबकि सुनवाई के दौरान कुछ विवरण रोक दिए गए थे, ग्रुश ने पहले मीडिया साक्षात्कारों में अलग-अलग विवरणों के साथ दावा किया था कि सरकार के पास बड़े एलियंस के यान भी थे।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया और पेंटागन का खंडन

कांग्रेस सदस्य बुर्चेट ने गैर-मानव शवों की बरामदगी के बारे में ग्रश के दावों को विश्वसनीय पाया, उन्होंने जांच से पहले ही एलियंस यान के अस्तित्व में अपना सहमति व्यक्त की है।

हालाँकि, पेंटागन ने ग्रुश के कवर-अप के आरोपों से इनकार किया, जिसमें कहा गया कि जांचकर्ताओं को अंतरिक्षीय सामग्री से संबंधित कार्यक्रमों के अस्तित्व का समर्थन करने वाले सत्यापन योग्य सबूत नहीं मिले हैं।

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अन्य गवाहों की भी गवाही

सुनवाई में अन्य गवाहों की भी गवाही हुई, जैसे कि पूर्व नौसेना कमांडर डेविड फ्रैवर, जिन्होंने 2004 में एक प्रशिक्षण मिशन के दौरान आकाश में एक अजीब वस्तु को देखने का दावा किया था, और एक सेवानिवृत्त नौसेना पायलट रयान ग्रेव्स (Ryan Graves), जिन्होंने अटलांटिक तट से दूर अजीब हवाई घटना के बारे में गवाही दी थी।

ग्रेव्स ने कई वाणिज्यिक एयरक्रू और भूतपूर्व सैन्य कर्मियों, जिन्होंने इस तरह की अजीब हवाई घटनाओं का सामना किया था, की चिंताओं को मंच पर उठाने के लिए एक यूएपी गैर-लाभकारी संस्था, “अमेरिकन्स फॉर सेफ एयरोस्पेस” (Americans for Safe Aerospace) की स्थापना की।

सुनवाई को लेकर उत्साह और मीडिया की अटकलों के बावजूद, कुछ लोगों ने दावों पर बहुत अधिक विचार करने के प्रति आगाह किया। संशयवादी इस बात पर प्रकाश डालते हैं कि यूएफओ के संबंध में सरकारी लीपापोती के आरोप पहले भी कई बार बिना किसी ठोस सबूत के सामने आए हैं।

अन्य महत्वपूर्ण रहस्यों को बनाए रखने की अमेरिकी सरकार की क्षमता पर सवाल उठाया गया है, जिससे कुछ लोगों को यूएफओ से संबंधित जानकारी को लंबे समय तक छिपाए रखने की वैधता पर संदेह हुआ है।

भगवान शिव का अनोखा मंदिर: यहां घर से भागे प्रेमी जोड़ों का होता है स्वागत!

भारत देवी-देवताओं की भूमि है और पूरे विश्व में प्राचीन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। भारत में विभिन्न देवी-देवताओं के मंदिर स्थित हैं जो अपनी संस्कृति, विश्वास या सिद्धि के कारण जाने जाते हैं।

भारत में कई बेहद रहस्यमयी मंदिर भी हैं, जो अपनी मान्यताओं के लिए जाने जाते हैं। आज हम आपको एक ऐसे शिव मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जिसका संबंध महाभारत से है।

भगवान शिव का प्राचीन मंदिर हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में स्थित है, जिसका नाम शंगचूल महादेव मंदिर है। इस मंदिर में हजारों की संख्या में लोग पूजा-अर्चना करने आते हैं। यह मंदिर दुनिया में एक खास वजह से जाना जाता है।

यह मंदिर प्रेमी जोड़ों को आश्रय देने के लिए प्रसिद्ध है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कुल्लू की सैंज घाटी में स्थित यह मंदिर 128 बीघा में फैला है। मंदिर के साथ यहां की खूबसूरती लोगों के मन को मोह लेती है।

घर से भागे हुए जोड़े और देश भर से शादी करना चाहते हैं इस मंदिर में जाते हैं। इस मंदिर में उनके ठहरने की व्यवस्था की जाती है और ग्रामीण भी उनका स्वागत करते हैं।

मान्यता है कि जोड़े की सुरक्षा भगवान शिव करते हैं और उनको कोई खतरा नहीं रहता है। किसी भी जाति, धर्म या समुदाय के प्रेमी यहां आ सकते हैं। सबके रहने और खाने की व्यवस्था की गई है। पुलिस भी उन्हें नहीं रोकती।

इस गांव के लोगों ने कुछ नियम बनाएं है जिन्हें यहाँ के लोग मानते हैं। जैसे यहां सिगरेट और शराब पीने पर रोक है। साथ ही कोई तेज आवाज में बात और लड़ाई झगड़ा नहीं कर सकता है।

इस क्षेत्र में घोड़ों पर भी प्रतिबंध है। प्रेमी जोड़ों की शादी होने और उनके समस्याओं का हल होने तक उन्होंने यहां से कोई निकाल नहीं सकता है। सुरक्षा का इंतजाम मंदिर के पुजारी करते हैं।

महाभारत काल से जुड़ा है ये मंदिर

मान्यताओं के अनुसार कौरवों के भय से पांडव आकर शंगचूल महादेव की शरण में आ गए। कौरव जब यहां पहुंचे तो भगवान शिव प्रकट हुए और कहा कि जो लोग उनकी शरण में आए हैं, उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता। भगवान महादेव के डर से कौरव वहां से भाग गए।

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कारगिल विजय दिवस : जाने कैसे हुई इस युद्ध की शुरुआत

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कारगिल की जंग में भारत को मिली सफलता को 24 साल हो गए हैं। भारतीय सेना के शौर्य और पराक्रम का प्रतीक कारगिल विजय दिवस हर साल 26 जुलाई को मनाया जाता है।

साल 1999 में कारगिल युद्ध में देश के वीर-जवानों ने पाकिस्तान को धूल चटा दी थी। कारगिल विजय दिवस के मौके पर देशवासी अपने प्राणों की आहुति देकर भारत माता की रक्षा करने वाले वीर जवानों को याद करते हैं और उन्हें श्रद्धाजंलि देते है।

कारगिल युद्ध में भारतीय सैनिकों ने अपने अदम्य शौर्य और वीरता का परिचय देते हुए पाकिस्तान के करीब 3 हजार सैनिकों को मार गिराया था। यह युद्ध 18 हजार फीट की ऊंचाई पर लड़ा गया था।

आज हम इस पोस्ट में हम जानेंगे कैसे हुई इस युद्ध की शुरुआत:-

ऐसे हुई थी शुरुआत

लड़ाई की शुरुआत उस समय हुई जब पाकिस्तानी सैनिकों और आतंकवादियों ने भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की। घुसपैठियों ने खुद को प्रमुख स्थानों पर तैनात किया, जिससे उन्हें संघर्ष की शुरुआत के दौरान रणनीतिक तौर पर लाभ भी मिलाl

स्थानीय चरवाहों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर भारतीय सेना ने घुसपैठ वाले सभी स्थानों का पता लगाया और फिर ‘ऑपरेशन विजय’ की शुरुआत की गई ।

शुरुआत में बेशक अधिक ऊंचाई पर होने के कारण पाकिस्तान की सेना को फायदा मिल रहा था लेकिन इससे भी भारतीय सैनिकों का मनोबल कम नहीं हुआ और आखिर में उन्होंने जीत का परचम लहरा दिया।

सेना ने फिर 26 जुलाई, 1999 को घोषणा करते हुए बताया कि मिशन सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। उसी दिन के बाद से हर साल कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है।

हालांकि भारत के लिए ये जीत काफी महंगी भी साबित हुई। आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि भारत के 527 सैनिक शहीद हुए थे, जबकि पाकिस्तान के 357-453 सैनिक मारे गए।

कारगिल युद्ध के खत्म होने के बाद पाकिस्तान ने इसमें किसी भी तरह की भूमिका होने से इनकार कर दिया और कहा कि भारत ‘कश्मीरी स्वतंत्रता सेनानियों’ से लड़ रहा था।

हालांकि युद्ध में लड़ने वाले सैनिकों को बाद में पाकिस्तान ने सम्मानित किया। इन्हें हार मिलने के बाद मेडल से नवाजा गया, जिससे पाकिस्तान का दावा दुनिया का सबसे बड़ा झूठ साबित हुआ।

वहीं भारत ने कारगिल युद्ध के बाद रक्षा क्षेत्र में बजट का बड़ा हिस्सा खर्च करने का फैसला लिया।

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विजय दिवस पर जानिए इस दिन की कुछ  ऐतिहासिक बातें

Kargil War Story: सिक्कों ने बचाई थी इस परमवीर चक्र विजेता की जान, ज़ुबानी पढ़कर रोमांच से भर जाएँगे आप

Kargil War Story: सिक्कों ने बचाई थी इस परमवीर चक्र विजेता की जान, ज़ुबानी पढ़कर रोमांच से भर जाएँगे आप

26 जुलाई 1999 के दिन भारतीय सेना ने कारगिल युद्ध के दौरान चलाए गए ‘ऑपरेशन विजय‘ को सफलतापूर्वक अंजाम देकर भारत भूमि को घुसपैठियों के चंगुल से मुक्त कराया था। इसी की याद में ’26 जुलाई’ अब हर वर्ष कारगिल दिवस के रूप में मनाया जाता है – Kargil vijay diwas

कारगिल वॉर के हीरो योगेंद्र सिंह यादव की जान एक सिक्के ने बचाई। उन्होंने दुश्मनों से लड़ते हुए कारगिल युद्ध में विजय के बाद हिल टॉप पर तिरंगा फहराया था। वक्त गुजरने के साथ यादें धुंधली हो जाती हैं। कारगिल विजय को पूरे 23 साल हो गए। कारगिल की यादें उनके जहन में आज भी जिंदा हैं।

योगेंद्र सिंह यादव सिर्फ 19 साल की उम्र में युद्ध के दौरान सर्वोच्च वीरता सम्मान, परमवीर चक्र से सम्मानित होने वाले सबसे कम उम्र के व्यक्ति हैं. सिर्फ 16 साल की उम्र में वे 1996 में भारतीय सेना के 18 ग्रेनेडिएर्स में भर्ती हुए थे.

उन्होंने बर्फ से ढकी चट्टान पर चढ़ाई शुरू की, आधे रास्ते में ही दुश्मन के एक बंकर ने उन्हें देख लिया और उन पर मशीन गन और रॉकेट से फायरिंग शुरू कर दी थी. तीन गोलियां लगने के बावजूद ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव चढ़ाई करते रहे और पहाड़ी की चोटी पर पहुंच कर रेंगते हुए पाकिस्तानी बंकर तक चले गए. उन्होंने बंकर पर ग्रेनेड फेंका जिससे चार पाकिस्तानी सैनिक मौके पर ही मारे गए. उनकी कोशिशों से प्लाटून के बाकी सदस्यों के लिए चट्टान पर चढ़ने का रास्ता साफ हो गया था.

वही यादें उनका हौसला बढ़ाती हैं और हर मोर्चे पर ताकत देती हैं। वह कहते हैं 20 मई 1999 का दिन मैं कभी नहीं भूल सकता। तब मेरी उम्र मात्र 19 साल और नौकरी ढाई साल की थी। पांच मई को मेरी शादी थी। छुट्टियां लेकर घर आया था। 20 मई को हेडक्वार्टर से बुलावा आ गया। मेरी बटालियन को द्रास सेक्टर के तोलोलिंग पहाड़ी फतह करने का टास्क मिला।

तोलोलिंग पहाड़ी पाकिस्तानी फौज के कब्जे में थी। मेरी पल्टन के जांबाज फौजियों ने 22 दिन की लंबी लड़ाई के बाद तोलोलिंग पहाड़ी पर कारगिल युद्ध की पहली विजय के साथ तिरंगा फहरा था। तोलोलिंग के बाद पलटन का अगला टास्क टाइगर हिल टॉप था।

युद्ध के बाद सूबेदार मेजर योगेंद्र सिंह यादव एक प्रेस कांफ्रेंस में
युद्ध के बाद सूबेदार मेजर योगेंद्र सिंह यादव एक प्रेस कांफ्रेंस में

टाइगर हिल टॉप पूरी तरह पाकिस्तानी फौज के कब्जे में था। वहां पहुंचना आसान नहीं था। जुनून और जज्बे के साथ मेरी पल्टन ने दुश्मनों की तरफ कदम बढ़ाते हुए चढ़ाई शुरू कर दी। पाकिस्तानी फौज पहाड़ी की चोटी पर थी। उसके लिए टारगेट बहुत आसान था।

मैंने और मेरी पल्टन के जवानों ने रास्ता साफ करने के लिए पांच पाकिस्तानी जवानों को ढेर कर दिया। पाकिस्तानी फौज ने ताबड़तोड़ गोलीबारी कर हिंदुस्तानी फौज का रास्ता रोक दिया। पाकिस्तानी फौज की गोलीबारी से बचते हुए मैं अपने सात जांबाज जवानों के साथ टाइगर हिल टॉप पहुंचा। दोनों तरफ से गोलीबारी हुई। हमारे पास बारूद कम था। तब कुछ समझ नहीं आ रहा था। जुनून सिर्फ टाइगर हिल टॉप पर तिरंगा फहराने का था। पाकिस्तानी फौज की आंखों में धूल झोंकने के लिए हमने प्लान के तहत गोलीबारी बंद कर दी। इससे पाक फौज गलतफहमी का शिकार हो गई।

उन्हें लगा कि गोलीबारी में हिंदुस्तानी फौजी मर गए। रणनीति के तहत अचानक पाकिस्तानी फौज पर हमला बोल दिया और कई पाकिस्तानी मारे गए। कुछ पाकिस्तानी फौजी भाग निकले और हमने टाइगर हिल टॉप पर कब्जा कर लिया। जीत का जश्न मना पाते उससे पहले ही 35 मिनट बाद पाक की तरफ  से दोबारा हमला हो गया। पाक फौजियों की संख्या काफी अधिक थी। आमने-सामने की लड़ाई में मेरे सभी साथी मारे गए। मैं भी बुरी तरह जख्मी हो गया। हाथों और पैरों में कई गोलियां लगी थी। लहूलुहान जमीन पर गिरा था। पाक फौजियों ने शहीद हिंदुस्तानी फौजियों के साथ क्रूरता की।

शहीदों के पार्थिव शरीर को बूटों से कुचला और गोलियां बरसाई। जमीन पर पड़ा मैं सब देख रहा था। पाक फौजी वापस होने लगे। एक सैनिक ने जाते-जाते मेरे हाथ और पैरों में गोलियां दागी। उस वक्त दर्द को मैं भूल गया। पाक सैनिक ने एक गोली मेरे सीने में दागी। मेरी जैकेट की जेब में सिक्के थे। सिक्कों ने मेरी जान बचा ली। सीने में गोली लगते ही मुझे एहसास हो गया मैं जिंदा नहीं बचूंगा। भगवान मेरे साथ था। हाथ में गोली लगने से वो सुन्न हो गया था। ऐसा लगा हाथ जिस्म से अलग है। मैंने हाथ उखाड़ने की कोशिश की। लेकिन हाथ जिस्म से अलग नहीं हुआ।

मुझे एहसास हो चुका था मेरी मौत नहीं हो सकती। मैंने दर्द को भुलाकर हिम्मत जुटाई और रैंगते हुए शहीद सैनिकों के पास गया। कोई जिंदा नहीं था। काफी रोया। मेरे पास एक हैंड ग्रेनेड बचा था। उसे खोलकर फेंकने की ताकत नहीं थी। कोशिश की और ग्रेनेड खोलने के साथ फट गया और बाल बाल बचा। फिर अपने साथी की राइफल उठाई और ताबड़तोड़ गोलियां चलाते हुए एक नाले से लुढ़ककर नीचे आ गया। खाने को कुछ नहीं था। ठंड से जिस्म अकड़ गया था। खुद को भरतीय फौज के बेस तक पहुंचाया।

वहां पहुंचने पर पाकिस्तानी फौज की पूरी प्लानिंग की जानकारी दी। 72 घंटे से आधे डिब्बा बिस्कुट पर जिंदा था। तीन दिन के बाद होश आया। तब तक मेरी बटालियन ने टाइगर हिल टॉप पर कब्जा कर तिरंगा फहराने के साथ कारगिल युद्ध में विजय फतह कर ली थी।
–  सूबेदार योगेंद्र सिंह यादव, परमवीर चक्र विजेता

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श्रावण मास विशेष: शिव पूजन और इन 15 प्रभावशाली मंत्रों से मिलेंगे आश्चर्यजनक पुण्य फल

4 जुलाई 2023 से श्रावण मास आरंभ हो चुका है। श्रावण का महीना भगवान भोलेनाथ का पवित्र माह माना गया है। इस मास में भोलेनाथ शिव की विशेष पूजा आराधना की जाती है।

अगर आप ने इन 11 खास बातों को ध्यान में रख कर भगवान शिव की पूजा की, तो आपको भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त होगी। आइए जानते हैं शिव पूजन की 11 विशेष लाभकारी बातें।

  1. प्रातः सूर्योदय से पहले जागें और शौच आदि से निवृत्त होकर स्नान करें।
  2. पूजा स्थल को स्वच्छ कर वेदी स्थापित करें।
  3. शिव मंदिर में जाकर भगवान शिवलिंग को दूध चढ़ाएं।
  4. फिर पूरी श्रद्धा के साथ महादेव के व्रत का संकल्प लें।
  5. दिन में दो बार (सुबह और शाम) भगवान शिव की प्रार्थना करें।
  6. पूजा के लिए तिल के तेल का दीया जलाएं और भगवान शिव को पुष्प अर्पण करें।
  7. मंत्रोच्चार सहित शिव को सुपारी, पंच अमृत, नारियल एवं बेल की पत्तियां चढ़ाएं।
  8. व्रत के दौरान श्रावण व्रत कथा का पाठ अवश्य करें।
  9. पूजा समाप्त होते ही प्रसाद का वितरण करें।
  10. संध्याकाल में पूजा समाप्ति के बाद व्रत खोलें और सामान्य भोजन करें।
  11. मंत्र- श्रावण के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें।

श्रावण मास में भगवान शिव के कुछ 15 प्रभावशाली मंत्र है। इन मंत्रों का जप जीवन में हर तरह की शुभता, अनुकूलता और प्रगति लाता है। इन मंत्रों के जप से आपके जीवन के हर कष्टों का निवारण होकर आप सुखमय जीवन व्यतीत करेंगे। आइए जानते हैं ये 15 प्रभावशाली मंत्र।

  1. ॐ शिवाय नम:
  2. ॐ सर्वात्मने नम:
  3. ॐ त्रिनेत्राय नम:
  4. ॐ हराय नम:
  5. ॐ इन्द्रमुखाय नम:
  6. ॐ श्रीकंठाय नम:
  7. ॐ वामदेवाय नम:
  8. ॐ तत्पुरुषाय नम:
  9. ॐ ईशानाय नम:
  10. ॐ अनंतधर्माय नम:
  11. ॐ ज्ञानभूताय नम:
  12. ॐ अनंतवैराग्यसिंघाय नम:
  13. ॐ प्रधानाय नम:
  14. ॐ व्योमात्मने नम:
  15. ॐ युक्तकेशात्मरूपाय नम:

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श्रावण मास विशेष: जानिए सबसे पहले कांवड़ यात्रा की शुरुआत कैसे हुई और इससे जुड़े कुछ प्रमुख नियम

सावन आते ही शुरू हो जाती है कांवड़ यात्रा। सैकड़ों कांवड़िये कांवड़ में जल भर करके मीलों की दूरी तय करके शिव धाम पहुंचकर शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि कांवड़ यात्रा की शुरुआत कैसे हुई या फिर किसने शुरू की यह प्रथा? साथ ही सबसे पहले कांवड़ से जल भर करके शिवलिंग का जलाभिषेक किसने किया?

कांवड़ियों के लिए बागपत के पुरा महादेव मंदिर का इतना महत्‍व क्‍यों है? कांवड़ यात्रा की शुरुआत कैसे हुई, इसके बारे में अलग- अलग मान्यताएं प्रचलित हैं। आइए जानते हैं कांवड़ यात्रा के बारे में प्रचलित मान्यताएं।

  • कुछ विद्वानों का मानना है कि त्रेता युग में श्रवण कुमार हिमाचल के उना क्षेत्र से अपने माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार लाए और उन्हें गंगा स्नान कराया था। वापसी में वे अपने साथ गंगाजल भी ले गए और इसे ही कावड़ यात्रा की शुरुआत माना जाता है।
  • कुछ अन्‍य मान्‍यताओं के अनुसार सबसे पहले प्रभु श्री राम ने शिव का जलाभिषेक किया। श्रीराम ने बिहार के सुल्तानगंज से कांवड़ में गंगाजल भरकर, बाबाधाम में शिवलिंग का जलाभिषेक किया था।
  • पुराणों के अनुसार समुद्र मंथन से निकले विष को पी लेने के कारण भगवान शिव का कंठ नीला हो गया और वे नीलकंठ कहलाए। विष के प्रभाव को खत्म करने के लिए लंका के राजा रावण ने कांवड़ में जल भरकर बागपत स्थित पुरा महादेव में भगवान शिव का जलाभिषेक किया था।
  • यह भी मान्यता है कि विष के प्रभावों को दूर करने के लिए देवताओं ने सावन में शिव पर मां गंगा का जल चढ़ाया था और तब कांवड़ यात्रा का प्रारंभ हुआ।
  • कांवड़ यात्रा को लेकर प्रचलित मान्यताओं में से एक वेस्ट यूपी से भी जुड़ी हैं। मान्यता है कि सबसे पहले भगवान परशुराम ने बागपत के पास स्थित पुरा महादेव मंदिर में कावड़ से गंगाजल लाकर जलाभिषेक किया था। जलाभिषेक करने के लिए भगवान परशुराम गढ़मुक्तेश्वर से गंगाजल लेकर आए थे।

बागपत-मेरठ जिला सीमा पर हिंडन के तट पर स्थित इस मंदिर के बारे में माना जाता है कि इसे भगवान परशुराम ने स्‍थापित किया था। यही वजह है कि कांवड़ियों के लिए महादेव के मंदिर का खास महत्‍व है। बागपत के पुरा महादेव मंदिर में हर साल लाखों कांवड़िये पहुंचते हैं।

कांवड़ यात्रा के प्रमुख नियम

  • कांवड़ यात्रा के दौरान किसी भी तरह का नशा, मांस मदिरा या तामसिक भोजन नहीं करना चाहिए। कांवड़ यात्रा पूरी तरह पैदल की जाती है। यात्रा प्रारंभ होने से लेकर पूर्ण होने तक सफर पैदल ही किया जाता है। यात्रा में वाहन का प्रयोग नहीं किया जाता।
  • कांवड़ में गंगा या किसी पवित्र नदी का ही जल ही रखा जाता है, किसी कुंवे या तालाब का नहीं। कावड़ को हमेशा स्नान करने के बाद ही स्पर्श करना चाहिए और ध्यान रखना चाहिए कि यात्रा के समय कांवड़ या आपसे चमड़ा स्पर्श ना हो। कावड़ियों को हमेशा जत्थे के साथ ही रहना चाहिए।
  • कांवड़ यात्रा के दौरान ध्यान रखना चाहिए कि अगर आप कहीं रुक रहे हैं तो कांवड़ को भूमि या किसी चबूतरे पर ना खें। कांवड़ को हमेशा स्टैंड या डाली पर ही लटकाकर रखें। अगर गलती से जमीन पर कांवड़ को रख दिया है तो फिर से कांवड़ में पवित्र जल भरना होता है।
  • कांवड़ यात्रा करते समय पूरे रास्ते बम बम भोले या जय जय शिव शंकर का उच्चारण करते रहना चाहिए। साथ ही यह भी ध्यान रखना चाहिए कि कांवड़ को किसी के ऊपर से लेकर ना जाएं।

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जानिए क्यों किए जाते हैं सावन महीने के व्रत – क्या है महत्व और इस पवित्र महीने की विशेषताएं

सावन का महीना मतलब चारों तरफ हरियाली। इस बार सावन का महीना 4 जुलाई से शुरू हो रहा है और 31 अगस्त तक रहेगा। इस बार सावन के महीने में चार सोमवार पड़ेंगे, सावन का महीना भगवान शिव को बहुत प्रिय होता है।

सावन में सोमवार के व्रत रखने का विशेष महत्व बताया गया है। कहा जाता है कि सोमवार व्रत को करने से भगवान शिव प्रसन्न होकर अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण कर देते हैं। सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से भी सावन सोमवार व्रत रखने की मान्यता है।

सावन महीने का महत्व

भगवान शिव के प्रिय महीने सावन में शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। भक्त सावन सोमवार के व्रत रखते हैं। इस दिन को सावन की सोमवारी के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि इस व्रत को करने से भगवान शिव प्रसन्न होकर अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

सावन के महीने में भक्त गंगा नदी या अन्य पवित्र नदियों से जल लाते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं, जिसके द्वारा देवो के देव महादेव को प्रसन्न करने का प्रयास किया जाता है।

सावन सोमवार 2023 की तिथियां-

हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन का महीना 04 जुलाई से शुरू होगा। अधिकमास के कारण सावन में 8 सोमवार रहेंगे.

  • 10 जुलाई- सावन का पहला सोमवार
  • 17 जुलाई- सावन का दूसरा सोमवार
  • 24 जुलाई- सावन का तीसरा सोमवार
  • 31 जुलाई- सावन का चौथा सोमवार
  • 07 अगस्त – सावन का पांचवा सोमवार
  • 14 अगस्त- सावन का छठा सोमवार
  • 21 अगस्त-  सावन का सातवां सोमवार
  • 28 अगस्त- सावन का आठवां सोमवार
  • 31 अगस्त- सावन समाप्त

विशेषताएं

  • सावन मास में भगवान शिव की पूजा-आराधना का विशेष विधान है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह महीना वर्ष का पांचवां माह है और अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार सावन का महीना जुलाई-अगस्त में आता है।
  • सावन के पावन मास में शिव भक्तों के द्वारा कांवड़ यात्रा का आयोजन किया जाता है। इस दौरान लाखों शिव भक्त देवभूमि उत्तराखंड में स्थित शिवनगरी हरिद्वार और गंगोत्री धाम की यात्रा करते हैं। वे इन तीर्थ स्थलों से गंगा जल से भरी कांवड़ को अपने कंधों पर रखकर पैदल लाते हैं और बाद में वह गंगा जल शिव को चढ़ाया जाता है। सालाना होने वाली इस यात्रा में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं को कांवरिया अथवा कांवड़िया कहा जाता है।
  • इस दौरान सावन सोमवार व्रत का सर्वाधिक महत्व बताया जाता है। दरअसल श्रावस मास भगवान भोलेनाथ को सबसे प्रिय है। इस माह में सोमवार का व्रत और सावन स्नान की परंपरा है। श्रावण मास में बेल पत्र से भगवान भोलेनाथ की पूजा करना और उन्हें जल चढ़ाना बहुत फलदायी माना गया है।
  • शिव पुराण के अनुसार जो कोई व्यक्ति इस माह में सोमवार का व्रत करता है भगवान शिव उसकी समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं। सावन के महीने में लाखों श्रद्धालु ज्योर्तिलिंग के दर्शन के लिए हरिद्वार, काशी, उज्जैन, नासिक समेत भारत के कई धार्मिक स्थलों पर जाते हैं।
  • सावन के महीने का प्रकृति से भी गहरा संबंध है क्योंकि इस माह में वर्षा ऋतु होने से संपूर्ण धरती बारिश से हरी-भरी हो जाती है। ग्रीष्म ऋतु के बाद इस माह में बारिश होने से मानव समुदाय को बड़ी राहत मिलती है। इसके अलावा सावन मास में कई पर्व भी मनाए जाते हैं।
  • भारत के पश्चिम तटीय राज्यों (महाराष्ट्र, गोवा एवं गुजरात) में श्रावण मास के अंतिम दिन नारियल पूर्णिमा मनायी जाती है।
  • पौराणिक मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि जब देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन हो रहा था तब उस मंथन से 14 रत्न निकले। उन चौदह रत्नों में से एक हलाहल विष भी था, जिससे सृष्टि नष्ट होने का भय था। तब सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान शिव ने उस विष को पी लिया और उसे अपने गले से नीचे नहीं उतरने दिया। विष के प्रभाव से महादेव का कंठ नीला पड़ गया और इसी कारण उनका नाम नीलकंठ पड़ा। कहते हैं रावण शिव का सच्चा भक्त था। वह कांवर में गंगाजल लेकर आया और उसी जल से उसने शिवलिंग का अभिषेक किया और तब जाकर भगवान शिव को इस विष से मुक्ति मिली।
  • सावन मास शिवजी के साथ मां पार्वती को भी समर्पित है। भक्त सावन महीने में सच्चे मन और पूरी श्रद्धा के साथ महादेव का व्रत धारण करता है, उसे शिव का आशीर्वाद अवश्य प्राप्त होता है। विवाहित महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाने और अविवाहित महिलाएं अच्छे वर के लिए भी सावन में शिव जी का व्रत रखती हैं।
  • सावन के इस पवित्र महीने में भक्तों के द्वारा तीन प्रकार के व्रत रखे जाते हैं:
  1. सावन सोमवार व्रत : श्रावण मास में सोमवार के दिन जो व्रत रखा जाता है उसे सावन सोमवार व्रत कहा जाता है। सोमवार का दिन भी भगवान शिव को समर्पित है।
  2. सोलह सोमवार व्रत : सावन को पवित्र माह माना जाता है इसलिए सोलह सोमवार के व्रत प्रारंभ करने के लिए यह बेहद ही शुभ समय माना जाता है।
  3. प्रदोष व्रत : सावन में भगवान शिव एवं मां पार्वती का आशीर्वाद पाने के लिए प्रदोष व्रत प्रदोष काल तक रखा जाता है।

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सावन में एक बार जरूर करें रुद्राभिषेक, होते हैं विशेष लाभ!!

भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए रुद्राभिषेक सर्वोत्म उपाय है। रुद्राभिषेक का अर्थ रुद्र आर्थात भगवान शिव का अभिषेक करने से है। शिवरात्रि, प्रदोष और सावन के महीने में रुद्राभिषेक करने का विशेष महत्व होता है।

रुद्राभिषेक को लेकर ऐसी मान्यता है कि इससे हमारी कुंडली के महापाप भी जलकर भस्म हो जाते हैं और हम में शिवत्व का उदय होता है, भगवान शिव का शुभाशीर्वाद प्राप्त होता है।

सभी मनोरथ पूर्ण करने के लिए एकमात्र सदाशिव रुद्र के पूजन से सभी देवता स्वत: ही प्रसन्न हो जाते हैं। आज इस पोस्ट में हम आपको रुद्राभिषेक से होने वाले विशेष लाभ के बारे में बताने जा रहे हैं। तो चलिए जानते हैं:-

  • असाध्य रोगों को शांत करने के लिए कुशोदक से रुद्राभिषेक करें।
  • भवन-वाहन की मनोकामना पूर्ण करने के लिए दही से रुद्राभिषेक करें।
  • लक्ष्मी प्राप्ति के लिए गन्ने के रस से रुद्राभिषेक करें। सावन के महीने में आपको धन की प्राप्ति होगी। इसके अलावा धन वृद्धि के लिए शहद और घी से अभिषेक करें।
  • तीर्थ के जल से अभिषेक करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • इत्र मिले जल से अभिषेक करने से बीमारी नष्ट होती है।
  • पुत्र प्राप्ति के लिए दुग्ध से और यदि संतान उत्पन्न होकर मृत पैदा हो तो गोदुग्ध से रुद्राभिषेक करें। ऐसा करने से आपको जल्द ही स्वस्थ संतान की प्राप्ति होगी।
  • सरसों के तेल से अभिषेक करने पर शत्रु पराजित होता है। गोदुग्ध से तथा शुद्ध घी द्वारा अभिषेक करने से आरोग्यता प्राप्त होती है।

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सावन के महीने में नहीं करना चाहिए इन चीज़ों का सेवन, जानिए क्या है धार्मिक और वैज्ञानिक मान्यताएं?

सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है और इस महीने में पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ महादेव की पूजा की जाती है। इसके साथ ही सावन के महीने में कुछ चीजों का सेवन करने को मना किया जाता है।

इनमें दूध, दही, बैंगन और हरी पत्तेदार सब्जियां प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके अलावा लहसुन, प्याज और मांस मदिरा का सेवन करने से भी रोका जाता है।

आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि इन चीजों को न खाने के पीछे क्या कारण है और क्या कहती हैं धार्मिक मान्यताएं:-

दूध, दही

लोगों के बीच में दूध, दही को लेकर ऐसी धार्मिक मान्यता प्रचलित है कि सावन में दूध और दही से भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है, इसलिए ऐसा मानते हैं कि दूध और दही खाने से बचना चाहिए।

वहीं इसके पीछे वैज्ञानिक तर्क यह भी है कि सावन का महीना बारिश का होता है और इस महीने में घास और पेड़-पौधों पर कई प्रकार के कीड़े-मकोड़े पनपते हैं। इस घास और पौधों को गाय-भैंस के चारे के तौर पर खाती हैं।

इस तरह ये कीड़े घास-फूस के साथ इनके पेट में पहुंचने का डर होता है और यहां से ये दूध में भी मिल सकते हैं। इसलिए दूध पीने को मना किया जाता है। दूध से ही दही और पनीर बनता है कि इसलिए डेयरी उत्पादों को खाने से रोका जाता है।

नमक को क्यों कहा जाता है न

सावन के महीने में कुछ लोग धार्मिक कारणों से नमक का त्याग कर देते हैं या फिर नमक का प्रयोग केवल एक वक्त के खाने में करते हैं।

वैज्ञानिक तर्क यह है कि इस बारिश के इस मौसम में हमारे शरीर में सोडियम की मात्रा पहले से ही काफी बढ़ी रहती है। ऐसे में सोडियमयुक्त नमक लेना आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। अगर आप नमक छोड़ नहीं सकते हैं तो सावन के महीने में सेंधा नमक का प्रयोग करें तो बेहतर होगा।

बैंगन और पत्तेदार सब्जियां

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ लोग सावन में बैंगन और पत्तेदार सब्जियां नहीं खाते हैं। बैंगन को धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अशुद्ध माना जाता है। तो वहीं विज्ञान कहता है कि सावन के महीने में बैंगन में कीड़े पड़ जाते हैं।

वहीं हरी पत्तेदार सब्जियों में भी कीड़े लग जाते हैं। अगर आप इन सब्जियों को खाएंगे तो संभव है कि आपके पेट में जाकर ये कीड़े और बैक्टीरिया बीमारी पैदा कर सकते हैं।

प्याज, लहसुन

धार्मिक मान्यताएं कहती हैं कि सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति का महीना होता है और ऐसे में हमें प्याज लहसुन नहीं खाना चाहिए। ये वस्तुएं हमें सत्कर्म के मार्ग से भ्रमित करती हैं।

वहीं वैज्ञानिक तर्क यह है कि सावन के महीने में हमारा पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है। ऐसे में प्याज और लहसुन से बनी सब्जियां अधिक गरिष्ठ होने की वजह से खाना पचा पाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है।

मांस मदिरा

इन वस्तुओं को तामसिक चीजों को श्रेणी में रखा जाता है जो कि आपके मन को भक्ति के मार्ग से भटकाकर गलत दिशा में धकेलती हैं। इसलिए सावन के महीने में मांस और मदिरा के सेवन को मना किया जाता है।

इसके साथ ही सावन में लाल मिर्च के स्थान पर हरी मिर्च और काली मिर्च खाने को कहा जाता है। मान्यता है कि अधिक मसालेदार भोजन खाने से मन में बुरे विचार आते हैं।

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आज से शुरू हो रहा है सावन का महीना, जाने कैसे करें महादेव की पूजा-अर्चना

हिंदू धर्म में सावन का महीना बहुत महत्वपूर्ण होता है। ये महीना विशेष रूप से भगवान शिव को समर्पित होता है। शिवभक्तों के लिए ये महीना बहुत महत्वपूर्ण होता है।

कहते हैं कि इस महीने में विधि- विधान से भगवान शिव की पूजा करने से आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। सावन का महीना 4 जुलाई को शुरू होगा और 31 अगस्त तक चलेगा, वहीं सावन के पहला सोमवार 10 जुलाई 2023 को पड़ेगा।

मान्यता है कि इस महीने में भगवान विष्णु पाताल लोक में रहते हैं और इसी वजह से इस महीने भगवान शिव ही पालनकर्ता होते हैं। सावन के महीने में त्रिदेवों की सारी शक्तियां भगवान शिव के पास ही होती हैं।

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श्रावण का अर्थ

श्रावण शब्द श्रवण से बना है जिसका अर्थ है “सुनना”। अर्थात सुनकर धर्म को समझना। इस माह में पतझड़ से मुरझाई हुई प्रकृति पुनर्जन्म लेती है। श्रावण माह में सिर्फ सावन सोमवार ही नहीं संपूर्ण माह ही व्रत रखना जाता है।
जिस तरह गुड फ्राइडे के पहले ईसाइयों में 40 दिन के उपवास चलते हैं और जिस तरह इस्लाम में रमजान माह में रोजे (उपवास) रखे जाते हैं उसी तरह हिन्दू धर्म में श्रावण मास को पवित्र और व्रत रखने वाला माह माना गया है।

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आधी परिक्रमा करना ही शुभ

शिवलिंग से दक्षिण दिशा में ही बैठकर पूजन करने से मनोकामना पूर्ण होती है। शिवलिंग पूजा में दक्षिण दिशा में बैठकर भक्त को भस्म का त्रिपुण्ड लगाना चाहिए।

रुद्राक्ष की माला पहननी चाहिए और बिना कटे-फटे हुए बेलपत्र अर्पित करने चाहिए। शिवलिंग की कभी पूरी परिक्रमा नहीं करनी चाहिए। आधी परिक्रमा करना ही शुभ होती है।

सावन सोमवार की पूजन विधि

सावन में पड़ने वाले सोमवार को विशेष ​पूजन विधि के साथ भगवान शिव को प्रसन्न किया जाता है। सावन सोमवान के दिन सुबह स्नान आदि करने के बाद दाएं हाथ में जल करें व्रत का संकल्प करें।

इसके बाद भगवान शिव का गंगाजल से ​अभिषेक करें और पंचामृत अर्पित करें। ध्यान रखें कि पंचामृत में दूध, दही, घी, गंगाजल और शहद शामिल होता है। इसके बाद शिवजी को सफेद चंदन का तिलक लगाएं और सफेद फूल अर्पित करें।

फिर धतूरा, बेल पत्र और सुपारी ​अर्पित करें। इसके बाद घी का दीपक जलाएं और सावन सोमवार की व्रत कथा पढ़ें। साथ ही आरती भी करें।

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