दुनिया के 10 सबसे विषैले और घातक सांप

अपने पिछले लेख भारत के 6 सबसे विषैले और घातक सांप में हमने भारत के 6 सबसे घातक सांपों के बारे में बताया था. अब इस लेख में आपको दुनिया के 10 सबसे खतरनाक और जहरीले सांपों के बारें में बता रहे हैं.

संसार में सांपों की कुल 2500 से अधिक प्रजातियाँ पाई जाती हैं जिनमें से 500 से अधिक विषैले सांपों की प्रजातियां पाई जाती हैं. कुछ सांपों का जहर इतना खतरनाक होता है कि आदमी कुछ ही मिनटों में मर सकता है. वहीँ कुछ सांप इतने जहरीले नहीं होते हैं फिर भी इनके काट लेने पर दहशत में हार्ट अटैक से ही लोग प्राण त्याग देते हैं.

तो आईये देखते हैं वो दस सांप जो दुनिया में सबसे ज्यादा ज़हरीले और घातक हैं.

ताइपन (Taipan)

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ताइपन सांप ऑट्रेलिया में पाया जाने वाला दूसरा सबसे विषैला साँप हैं. ताइपन सांप का रंग अफ्रीका के ब्लैक माम्बा की तरह होता है और इसका जहर इतना खतरनाक होता है कि इसके एक  बार में छोड़े गए जहर से कम से कम 12,000 सूअर की मौत हो सकती हैं. ताइपन सांप जहर में न्यूरोटौक्सिक जहर होता है जो शिकार के शरीर में खून को जमा देता है।

ब्लैक माम्बा (Black Mamba)

black-mamba-snakeब्लैक माम्बा, अफ्रीका में पाया जाने वाला सबसे लम्बा, तेज और जहरीला सांप माना जाता है. ब्लैक माम्बा की लम्बाई लगभग 14 फीट तक होती है और यह 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भाग सकता है. ब्लैक माम्बा परिस्थिति के अनुसार अपना रंग बदल सकता है. यह इतना आक्रामक होता है कि कुछ ही सेकंड में यह लगातार कई बार काट सकता है. काटने के 15 मिनट से लेकर 3 घण्टे के अंदर इंसान की मौत हो जाती है। एंटी वेनीम बनने से पूर्व इसका काटा कोई भी इंसान बच नहीं सकता था.

टाइगर स्नेक (Tiger Snake)

tiger_snakeटाइगर सांप ऑस्ट्रेलिया में पाए जाने वाला बहुत ही ज्यादा विषैला सांप है. टाइगर सांप में न्यूरो टॉक्सिक जहर होता है जिससे शिकार की 30 मिनट से 24 घंटे के अंदर मौत हो जाती है. टाइगर सांप इंसानों के लिए ज्यादा खतरनाक नहीं होते है क्योकि इंसानों को देखकर यह भाग जाते हैं. टाइगर सांप तभी काटता है जब उसको भागने की कोई जगह न मिलें.

फ़िलिपीनी कोबरा (Philippine Cobra)

philippine-cobraफ़िलिपीनी कोबरा, फिलीपींस के उत्तरी भागों में पाया जाने वाला सबसे खतरनाक सांप है. फ़िलिपीनी कोबरा, कोबरा की अन्य प्रजाति से कई गुना ज्यादा जहरीला और खतरनाक होता है. यह शिकार को 3 मीटर की दूरी से लपक कर काटने की क्षमता रखता है. फ़िलिपीनी कोबरा के काटने के बाद इंसान 30 मिनट के अंदर मर सकता है. इसके जहर के मुख्य लक्षण तेजी से सिर चकराना, तेज सिर दर्द होना, अत्यधिक उल्टी होना और सांस लेने में परेशानी आदि होते है. 

सॉ स्केल्ड वाइपर (Saw Scaled Viper)

6-most-dangerous-snakes-in-india-Saw-Scaled-Viperवाइपर लगभग पूरे संसार में पाए जाते हैं. यह धरती पर पाए जाने वाले सबसे जहरीली और खतरनाक सांपों में से हैं. लेकिन, वाइपर की सबसे जहरीली प्रजाति सॉ स्केल्ड वाइपर भारत, चीन और साउथ ईस्ट एशिया में पाई जाती है. सॉ-स्केल्ड वाइपर लम्बाई में छोटा होता है, लेकिन अपनी गुस्सैल, चिड़चिड़ी और अत्यंत आक्रामक प्रवृति और इसकी घातक जहर शक्ति इसे बहुत खतरनाक बना देती है. भारत में सालाना यह लगभग 5,000 मौतों के लिए जिम्मेदार है.

डेथ एडर (Death Adder)

death-adderडेथ एडर सांप ऑस्ट्रेलिया और न्यू गिनी में पाया जाने वाला बहुत ही खतरनाक सांप है. डेथ एडर की खास बात यह है कि यह ज्यादातर साँपो का ही शिकार करता हैं. एडर सांप बहुत तेजी से हमला करता है. डेथ एडर सांप 40-100 मिलीग्राम जहर शिकार के शरीर में छोड़ता हैं और यह 13 सेकंड में ही दोबारा हमला करने की क्षमता रखता हैं. डेथ एडर सांपो मे न्यूरोटॉक्सिक जहर होता है जिसकी वजह से 6 घंटे से कम समय में मौत हो सकती हैं.

रैटलस्नेक (Rattle Snake)

rattle-snakeरैटल सांप उत्तरी अमेरिका में पाया जाने वाला सबसे ज़हरीला और खतरनाक सांप है. रैटल सांप अपनी पुंछ के आखिरी सिरे पर बने छल्लों के कारण आसानी से पहचाना जा सकता है. रैटल सांप जब अपनी पूंछ को हिलाता है तो यह छल्ले झुनझुने की तरह आवाज़ करते हैं.

रैटल सांप की विशेषता यह है कि इनके छोटे बच्चे बेहद खतरनाक और व्यस्क सांप से ज्यादा जहरीले होते हैं. रैटल सांपों के शरीर में हेमोटोक्सिक ज़हर पाया जाता है जो की इंसानों के शरीर में मानव ऊतक (Human Tissue) को ख़त्म कर देता हैं. रैटल सांप के काटने के 10 मिनट के अंदर एन्टीडोट ले लेने पर बचने के कुछ हद तक चांस होते हैं.

इस्टर्न ब्राउन स्नेक (Eastern Brown Snake)

eastern-brown-snakeईस्टर्न ब्राउन सांप ऑस्ट्रेलिया में पाया जाने वाला सबसे खतरनाक और जहरीला सांप होता है. ईस्टर्न ब्राउन सांप का जहर इतना जहरीला होता है कि इसके जहर का 14,000 वां हिस्सा भी किसी इंसान की जान ले सकता है यह सांप ऑस्ट्रेलिया के भीड़-भाड़ इलाकों के पास ज्यादा पाया जाता है. ईस्टर्न ब्राउन सांप का छोटा सा बच्चा भी किसी इंसान की जान ले सकता है.

इंनलैंड ताइपन  (Inland Taipan)

Inland-taipanइंनलैंड ताइपन धरती पर पाए जाने वाले सांपों में सबसे खतरनाक और जहरीला सांप माना जाता है. इंनलैंड ताइपन सांप के एक डंक से व्यक्ति के शरीर में कम से कम 110 मिलीग्राम जहर जाता है, क्या आपको पता है कि 110 मिलीग्राम जहर से 100 व्यक्ति और 250,000 चूहे तक मार सकते हैं. ताइपन का जहर रैट्ल सांप से दस गुणा और सामान्य सांपों से 50 गुना ज्यादा खतरनाक और जहरीला होता है. ताइपन सांपों को भीड़ भाड़ से दूर शांत वातावरण में रहना पसंद करते हैं. इसलिए इंनलैंड ताइपन द्वारा लोगों को काटने का मामला आज तक सामने नहीं आया है.

समुद्री सांप (Belcher’s Sea Snake) 

belchers-sea-snakeदुनिया का सबसे जहरीला समुद्री सांप, साउथ ईस्ट एशिया और नॉर्थन ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है. यह सांप इतने खतरनाक और जहरीले होते है कि इसके 110 मिलीग्राम जहर से लगभग 1000 इंसानों की मौत हो सकती है. यह सांप समुद्र में पाए जाते है जिसकी वजह से इंसानों को इनसे कम खतरा होता है. इन सांपों का शिकार अधिककतर मछुआरे बनते हैं जब उनके जाल में यह फंस जाते हैं गलती से मछुआरे इनका शिकार हो जाते हैं.

एक ऐसा अनोखा मंदिर जहाँ होती है भगवान शिव के अंगूठे की पूजा

वैसे तो दुनियाभर में भगवान शिव के कई मंदिर हैं। लेकिन कुछ मंदिर ऐसे भी हैं, जो बाकी सभी आम मंदिरों से बेहद अलग हैं। वह इसलिए क्योंकि इन मंदिरों में या तो कोई चमत्कार होता है या फिर इन मंदिरों में खास तरह से पूजा की जाती है।

आज हम आपको एक ऐसे शिव मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जो अपने आप में ही अलग है वह इसलिए क्योंकि इस मंदिर में न तो भगवान शिव की मूर्ति है और न ही शिवलिंग। दरअसल यहाँ पर भगवान शिव के पैर के अंगूठे की पूजा की जाती है तो चलिए जानते हैं इस अनोखे मंदिर के बारे में :

कहाँ पर स्थित है ये मंदिर

राजस्थान के एक मात्र हिल स्टेशन माउंट आबू को अर्धकाशी के नाम से भी जाना जाता है। यहां पर भगवान शिव के कई प्राचीन मंदिर हैं। पुराणों के अनुसार वाराणसी भगवान शिव की नगरी है तो माउंट आबू भगवान शंकर की उपनगरी।

अचलगढ़ का अचलेश्वर माहदेव मंदिर माउंट आबू से लगभग 11 किलोमीटर दूर उत्तर दिशा में अचलगढ़ की पहाड़ियों पर किले के पास है। कहा जाता हैं कि यहां का पर्वत भगवान शिव के अंगूठे की वजह से टिका हुआ है। जिस दिन यहां से भगवान शिव के अंगूठा गायब हो जाएगा उस दिन यह पर्वत भी नष्ट हो जाएगा।

इस मंदिर को लेकर कहा जाता है कि यहां जो भी आता है, वह धनवान हो जाता है। सच्चे दिल से मांगी गई दुआ, यहां जरूर कबूल होती है। अचलगढ़ का अचलेश्वर महादेव मंदिर की खास बात यही है कि यहां भगवान शिव के पैर के अंगूठे की खास पूजा की जाती है।

पौराणिक कथा

unique temple Lord Shiva's thumb worshiped

माउंट आबू की पहाड़ियों पर स्थित अचलगढ़ मंदिर पौराणिक मंदिर है जिसकी भव्यता देखते ही बनती है। इस मंदिर की काफी मान्यता है और माना जाता है कि इस मंदिर में महाशिवरात्रि, सोमवार के दिन, सावन महीने में जो भी भगवान शिव के दरबार में आता है भगवान शंकर उसकी मुराद पूरी कर देते हैं।

इस मंदिर की पौराणिक कहानी है कि जब अर्बुद पर्वत पर स्थित नंदीवर्धन हिलने लगा तो हिमालय में तपस्या कर रहे भगवान शंकर की तपस्या भंग हो गई क्योंकि इसी पर्वत पर भगवान शिव की प्यारी गाय कामधेनु और बैल नंदी भी थे इसलिए पर्वत के साथ नंदी व गाय को भी बचाना था।

भगवान शंकर ने हिमालय से ही अंगूठा फैलाया और अर्बुद पर्वत को स्थिर कर दिया। नंदी व गाय बच गई और अर्बुद पर्वत भी स्थिर हो गया।भगवान शिव के अर्बुदांचल में वास करने का स्कंद पुराण में प्रमाण मिलता है। स्कंद पुराण के अर्बुद खंड में ये बात सामने आती है कि भगवान शंकर और विष्णु ने एक रात पूरे अर्बुद पर्वत की सैर करते हैं।

माउंट आबू की गुफाओं में आज भी सैकड़ों साधु तप करते है क्योंकि कहते हैं यहां की गुफाओं में भगवान शंकर आज भी वास करते हैं और जिससे प्रसन्न होते हैं उसे साक्षात दर्शन भी देते हैं।

unique Achaleshwar Mahadev Temple

नहीं भरता अंगूठे के नीचे गड्ढे में पानी

यहां भगवान भोले अंगूठे के रुप में विराजते हैं और शिवरात्रि व सावन के महीने में इस रूप के दर्शन का विशेष महत्व है। यहां पर भगवान के अंगूठे के नीचे एक प्राकृतिक खड्ढा बना हुआ है। इस खड्ढे में कितना भी पानी डाला जाएं लेकिन यह कभी भरता नहीं है। इसमें चढ़ाया जाने वाला पानी कहां जाता है यह आज भी एक रहस्य है।

अचलेश्वर महादेव मंदिर परिसर के चौक में चंपा का विशाल पेड़ है। मंदिर में बाएं ओर दो कलात्मक खंभों पर धर्मकांटा बना हुआ है। इस क्षेत्र के शासक राजसिंहासन पर बैठने के समय अचलेश्वर महादेव से आशीर्वाद प्राप्त कर धर्मकांटे के नीचे प्रजा के साथ न्याय की शपथ लेते थे।

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अचलेश्वर माहदेव मंदिर गूगल मैप

दुनिया की खूबसूरत झीलों में से एक हैं “पैंगोंग झील” जाने इससे जुड़े कुछ रोचक तथ्य

“पैंगोंग त्सो” झील को दुनिया की सबसे बड़ी और अनोखी झीलों में से एक माना जाता है। इस झील को पांगोंग त्सो भी कहा जाता है। लद्दाखी भाषा में पैंगोंग का अर्थ है समीपता और तिब्बती भाषा में त्सो का अर्थ झील होता है।

पैंगोंग झील का नाम एक तिब्बती शब्द बैंगोंग सह से पड़ा है जिसका अर्थ है एक संकरी और मुग्ध झील। हिमालयी क्षेत्र में बसी ये एक मात्र झील है।

पैंगोंग झील समुद्र तल से 4350 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक लंबी, संकरी, गहरी एवं चारों तरफ से हिमालय पर्वत से घिरी हुई है। ये झील लेह से करीब 135 किमी दूर है और भारत के लद्दाख़ से तिब्बत पहूँचती है।

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रोचक तथ्य

  • इस झील का 1/3 (45 km) किलोमीटर क्षेत्र भारत (लद्दाख) में स्थित है, जबकि इसका 2/3 (90 km) किलोमीटर क्षेत्र तिब्बत (चीन) में पड़ता है। माना जाता है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) (LAC- Line of actual control) इस झील के मध्य से होकर गुजरती है। हालांकि इसकी सटीक स्थिति को लेकर अक्सर भ्रम की स्थिति बनी रहती है।
  • इस झील का पानी इतना खारा है कि इसमें मछली या फिर अन्य कोई जलीय जीवन है ही नहीं। हालांकि कई प्रवासी पक्षियों के लिए यह एक महत्त्वपूर्ण प्रजनन स्थल जरूर है। इस झील का औसत तापमान माइनस 18 डिग्री से माइनस 40 डिग्री के बीच बना रहता है।
  • माना जाता है कि पैंगोंग झील का पानी रंग बदलता है। ये झील अपनी कलर बदलने की क्षमता के लिए प्रसिद्ध है। इसका रंग ब्लू के शेड्स से ग्रीन और फिर लाल में बदल जाता है।

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  • ये दुनिया की सबसे अधिक ऊंचाई वाली झीलों में से एक है, जिसका पानी खारा है, इसके बावजूद इस झील का पानी सर्दियों में पूरा जम जाता है।
  • वैसे तो लद्दाख में आपको कई मठ मिल जाएंगे, लेकिन पैंगोंग झील के पास मौजूद हेमिस मठ यहां बहुत मशहूर है। यहां का शांत माहौल और सभ्यता हर किसी को पसंद आता है। इस जगह में एक लाइब्रेरी भी है, जिसमें तिब्बती बुक्स का कलेक्शन मौजूद है।
  • माना जाता है कि 1962 के युद्ध के दौरान यही वो जगह थी, जहां से चीन ने अपना मुख्य आक्रमण शुरू किया था। भारतीय सेना ने भी चुशूल घाटी के दक्षिण-पूर्वी छोर के पहाड़ी दर्रे रेजांग ला से वीरतापूर्वक युद्ध लड़ा था। पिछले कुछ सालों में चीन ने पैंगोंग झील के अपनी ओर के किनारों पर सड़कों का निर्माण भी किया है।
  • पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह झील यक्ष राज कुबेर का मुख्य स्थान है। ऐसा माना जाता है कि भगवान कुबेर की ‘दिव्य नगरी’ इसी झील के आसपास कहीं स्थित है। इसका उल्लेख रामायण और महाभारत में भी मिलता है।
  • पैंगोंग लेक की प्राकृतिक सुंदरता इसे एक लोकप्रिय पर्यटक स्थल के साथ-साथ शूटिंग और फिल्मांकन के लिए भी एक पसंदीदा गंतव्य है। जहाँ दिल से, 3 इडियट्स, हीरोज, जब तक है जान, सनम रे, वक़्त और टशन जैसी सुपरहिट फिल्मो के ब्लॉकबस्टर सीन यहां शूट किए गए हैं।

 

वायरल वीडियो: हिमाचल के चम्बा में दिखा दुर्लभ सांप

वायरल वीडियो: हिमालय के पहाड़ों में दुर्लभ प्रजाति का सांप देखने को मिला है। हिमाचल प्रदेश के जिला चंबा में सोशल मीडिया में इन दिनों सफेद सांप का वीडियो वायरल हो रहा है। कहा जा रहा है कि यह एल्बिनो सांप हैं, जो सफेद रंग का होता है। इंटरनेट पर वीडियो वायरल होने के बाद लोग कई तरह की बातें कर रहे हैं।

कुछ लोगों का कहना है कि यह साक्षात देवता है हालांकि वन विभाग के अनुसार जो सफेद सांप वीडियो में दिखाया जा रहा है। वह किसी दुर्लभ प्रजाति से नहीं है। जिस प्रकार से इंसान को त्वचा रोग होने पर शरीर सफेद हो जाता है। उसी प्रकार सांप भी कई बार ऐसी बीमारी की चपेट में आने से सफेद हो सकते हैं।

यह वीडियो चंबा जिला के किस क्षेत्र में बनाया गया है। इसका पता लगाने के लिए वन विभाग प्रयास कर रहा है।

वन विभाग का यह भी मानना है कि सफेद रंग के सांप बड़ी मुश्किल से दिखाई देते हैं। वन खंड अधिकारी सुनील कुमार ने बताया कि विभाग वायरल वीडियो में दिखाए जा रहे सांप का पता लगाने का प्रयास कर रहा है।

इंफोसिस के संस्थापक नारायण मूर्ति का पुराना वीडियो वायरल, करीना को बताया था अहंकारी

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आई.टी. क्षेत्र की बड़ी कंपनी इंफोसिस के संस्थापक नारायण मूर्ति का एक पुराना वीडियो अचानक सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। इस वीडियो में मूर्ति ने बॉलीवुड एक्ट्रैस करीना कपूर खान पर अहंकारी होने के गंभीर आरोप लगाए हैं।

फ्लाइट में साथ सफर करने की एक घटना का जिक्र करते हुए मूर्ति ने कहा कि करीना ने वहां मौजूद अपने फैन्स का सम्मान नहीं किया। आई.आई.टी.- कानपुर में छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही थी। हालांकि साथ में मौजूद पत्नी सुधा ने तुरंत ही पति की बात को काट भी दिया था।

 

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क्या कहा था नारायण मूर्ति ने

नारायण मूर्ति आई.आई.टी. कानपुर में अपनी पत्नी के साथ बतौर चीफ गैस्ट पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने कहा था कि एक दिन मैं लंदन से आ रहा था और मेरे बगल वाली सीट पर करीना कपूर बैठी थीं। इतने सारे लोग उनके पास आए और हेलो कहा लेकिन उन्होंने प्रतिक्रिया देने की भी जहमत तक नहीं उठाई।

मुझे थोड़ा आश्चर्य हुआ, जो कोई भी मेरे पास आया, मैं खड़ा हुआ और हमने एक मिनट या आधे मिनट तक चर्चा की। वे बस यही उम्मीद कर रहे थे।

Old video viral Infosys founder Narayan Murthy telling Kareena she was arrogant

पत्नी सुधा मूर्ति ने दी थी सफाई

इसी बातचीत के दौरान सुधा मूर्ति ने उन्हें टोकते हुए कहा कि उनके लाखों प्रशंसक हैं। वह थक गई होंगी। एक सॉफ्टवेयर कंपनी के मालिक के तौर पर मूर्ति के 10 हजार फॉलोअर्स होंगे लेकिन फिल्म एक्ट्रैस के मिलियंस फॉलोअर्स होते हैं।

पत्नी के इस बयान पर वहां मौजूद छात्रों ने हंसते हुए खूब तालियां भी बजाई। इसके बावजूद नारायण मूर्ति ने अपनी बात को पूरा किया और कहा कि समस्या यह नहीं है।

मुद्दा यह है कि जब कोई प्यार दिखाता है, तो आप भी उसे वापस दिखा सकते हैं। मुझे लगता है कि यह बहुत महत्वपूर्ण है। ये सब आपके अहंकार को कम करने के तरीके हैं।

 

 

अमेरिकी सरकार के पास एलियंस के शव और यान मौजूद हैं: पूर्व अमेरिकी खुफिया अधिकारी

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अमरीकी कांग्रेस की एक महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान, पूर्व अमेरिकी खुफिया अधिकारी डेविड ग्रुश (David Grusch) ने खुलासा किया है कि अमेरिकी सरकार ने दुर्घटनाग्रस्त अज्ञात उड़ान वस्तुओं (UFO; यूएफओ) को इकट्ठा करने और रिवर्स-इंजीनियरिंग करने के उद्देश्य से एक “बहु-दशक” (multi-decade) कार्यक्रम चलाया था।

ग्रुश, जो 2023 तक अमेरिकी रक्षा विभाग की एजेंसी के भीतर अस्पष्टीकृत विसंगतिपूर्ण घटनाओं की जांच के प्रभारी थे, ने वाशिंगटन में हाउस ओवरसाइट कमेटी के सामने एलियनज़ (alien life) और प्रौद्योगिकी के मुद्दे पर प्रकाश डालते हुए बात की, जैसा कि गार्जियन द्वारा रिपोर्ट किया गया है।

ग्रुश के आरोप और गुप्तचर शिकायत

कांग्रेस के अधिवेशन में ग्रुश ने शपथ लेकर खुलासा किया कि उन्हें ड्यूटी के दौरान लंबे समय से चले आ रहे यूएपी क्रैश पुनर्प्राप्ति (UAP Crash retrieval) और रिवर्स-इंजीनियरिंग (reverse-engineering program) कार्यक्रम के बारे में पता चला  था, लेकिन उसे इसमें दाखिल होने की अनुमति नहीं दी गयी थी।

हालाँकि वह सैन्य व रक्षा एजेंसियों (military & defence agencies) द्वारा संचालित एलियंस और उनके शिल्प (alien craft) के ज्ञान की जांच के प्रमुख थे, इसके बावजूद उन्हें गुप्त सरकारी यूएफओ (secret government UFO) कार्यक्रमों तक पहुंच से वंचित कर दिया गया था। 2022 में उनकी गुप्तचर शिकायत इसी खीज का परिणाम थी।

अपने दावों के परिणामस्वरूप, ग्रुश को गंभीर प्रतिशोध का सामना करना पड़ा जिसने उनके पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन दोनों पर नकारात्मक प्रभाव डाला।

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नुकसान पहुंचाने और छुपाने का दावा

ग्रुश ने पूछताछ के दौरान पुष्टि की कि उन्हें ऐसे व्यक्तियों के बारे में जानकारी थी जिन्हें यूएफओ से संबंधित जानकारी छुपाने के सरकार के प्रयासों में नुकसान पहुँचाया गया था या घायल किया गया था।

इसके अलावा, उन्होंने स्वीकार किया कि मामले में शामिल होने के कारण उन्हें अपनी जान का डर है। कांग्रेस की इस सुनवाई के बाद अटकलें लगाईं जा रहीं हैं कि अमेरिकी सरकार एलियंस जीवन और उन्नत प्रौद्योगिकी के सबूतों को छुपा सकती है। इस सारे मामले में जनता से मिश्रित प्रतिक्रियाएँ मिलीं, जिनमें संदेह भी शामिल था।

सरकार का सहयोग न मिलना

यूएफओ जांच का सह-नेतृत्व करते हुए, रिपब्लिकन कांग्रेस सदस्य टिम बर्चेट(Tim Burchett) ने सरकारी एजेंसियों पर निरीक्षण समिति की जांच में सहयोग की कमी का आरोप लगाया। संबंधित पक्षों से जानकारी और गवाही प्राप्त करने में कठिनाई के कारण निराशा हाथ लगने और संघीय अधिकारियों द्वारा इसमें बाधा डालने के दावे भी किए गए हैं।

एलियंस जीव और यूएफओ की बरामदगी

ग्रुश ने दावा किया कि अमेरिकी सरकार ने दुर्घटनाग्रस्त अंतरिक्षीय वाहन और यहां तक कि एलियंस भी बरामद किए हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या इन विमानों को चलाने वाले पायलटों के शव थे, तो उन्होंने कार्यक्रम के प्रत्यक्ष ज्ञान वाले व्यक्तियों से मिली जानकारी के आधार पर “जैविक जीवाश्म” के होने की पुष्टि की जो गैर-मानवीय थे।

जबकि सुनवाई के दौरान कुछ विवरण रोक दिए गए थे, ग्रुश ने पहले मीडिया साक्षात्कारों में अलग-अलग विवरणों के साथ दावा किया था कि सरकार के पास बड़े एलियंस के यान भी थे।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया और पेंटागन का खंडन

कांग्रेस सदस्य बुर्चेट ने गैर-मानव शवों की बरामदगी के बारे में ग्रश के दावों को विश्वसनीय पाया, उन्होंने जांच से पहले ही एलियंस यान के अस्तित्व में अपना सहमति व्यक्त की है।

हालाँकि, पेंटागन ने ग्रुश के कवर-अप के आरोपों से इनकार किया, जिसमें कहा गया कि जांचकर्ताओं को अंतरिक्षीय सामग्री से संबंधित कार्यक्रमों के अस्तित्व का समर्थन करने वाले सत्यापन योग्य सबूत नहीं मिले हैं।

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अन्य गवाहों की भी गवाही

सुनवाई में अन्य गवाहों की भी गवाही हुई, जैसे कि पूर्व नौसेना कमांडर डेविड फ्रैवर, जिन्होंने 2004 में एक प्रशिक्षण मिशन के दौरान आकाश में एक अजीब वस्तु को देखने का दावा किया था, और एक सेवानिवृत्त नौसेना पायलट रयान ग्रेव्स (Ryan Graves), जिन्होंने अटलांटिक तट से दूर अजीब हवाई घटना के बारे में गवाही दी थी।

ग्रेव्स ने कई वाणिज्यिक एयरक्रू और भूतपूर्व सैन्य कर्मियों, जिन्होंने इस तरह की अजीब हवाई घटनाओं का सामना किया था, की चिंताओं को मंच पर उठाने के लिए एक यूएपी गैर-लाभकारी संस्था, “अमेरिकन्स फॉर सेफ एयरोस्पेस” (Americans for Safe Aerospace) की स्थापना की।

सुनवाई को लेकर उत्साह और मीडिया की अटकलों के बावजूद, कुछ लोगों ने दावों पर बहुत अधिक विचार करने के प्रति आगाह किया। संशयवादी इस बात पर प्रकाश डालते हैं कि यूएफओ के संबंध में सरकारी लीपापोती के आरोप पहले भी कई बार बिना किसी ठोस सबूत के सामने आए हैं।

अन्य महत्वपूर्ण रहस्यों को बनाए रखने की अमेरिकी सरकार की क्षमता पर सवाल उठाया गया है, जिससे कुछ लोगों को यूएफओ से संबंधित जानकारी को लंबे समय तक छिपाए रखने की वैधता पर संदेह हुआ है।

भगवान शिव का अनोखा मंदिर: यहां घर से भागे प्रेमी जोड़ों का होता है स्वागत!

भारत देवी-देवताओं की भूमि है और पूरे विश्व में प्राचीन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। भारत में विभिन्न देवी-देवताओं के मंदिर स्थित हैं जो अपनी संस्कृति, विश्वास या सिद्धि के कारण जाने जाते हैं।

भारत में कई बेहद रहस्यमयी मंदिर भी हैं, जो अपनी मान्यताओं के लिए जाने जाते हैं। आज हम आपको एक ऐसे शिव मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जिसका संबंध महाभारत से है।

भगवान शिव का प्राचीन मंदिर हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में स्थित है, जिसका नाम शंगचूल महादेव मंदिर है। इस मंदिर में हजारों की संख्या में लोग पूजा-अर्चना करने आते हैं। यह मंदिर दुनिया में एक खास वजह से जाना जाता है।

यह मंदिर प्रेमी जोड़ों को आश्रय देने के लिए प्रसिद्ध है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कुल्लू की सैंज घाटी में स्थित यह मंदिर 128 बीघा में फैला है। मंदिर के साथ यहां की खूबसूरती लोगों के मन को मोह लेती है।

घर से भागे हुए जोड़े और देश भर से शादी करना चाहते हैं इस मंदिर में जाते हैं। इस मंदिर में उनके ठहरने की व्यवस्था की जाती है और ग्रामीण भी उनका स्वागत करते हैं।

मान्यता है कि जोड़े की सुरक्षा भगवान शिव करते हैं और उनको कोई खतरा नहीं रहता है। किसी भी जाति, धर्म या समुदाय के प्रेमी यहां आ सकते हैं। सबके रहने और खाने की व्यवस्था की गई है। पुलिस भी उन्हें नहीं रोकती।

इस गांव के लोगों ने कुछ नियम बनाएं है जिन्हें यहाँ के लोग मानते हैं। जैसे यहां सिगरेट और शराब पीने पर रोक है। साथ ही कोई तेज आवाज में बात और लड़ाई झगड़ा नहीं कर सकता है।

इस क्षेत्र में घोड़ों पर भी प्रतिबंध है। प्रेमी जोड़ों की शादी होने और उनके समस्याओं का हल होने तक उन्होंने यहां से कोई निकाल नहीं सकता है। सुरक्षा का इंतजाम मंदिर के पुजारी करते हैं।

महाभारत काल से जुड़ा है ये मंदिर

मान्यताओं के अनुसार कौरवों के भय से पांडव आकर शंगचूल महादेव की शरण में आ गए। कौरव जब यहां पहुंचे तो भगवान शिव प्रकट हुए और कहा कि जो लोग उनकी शरण में आए हैं, उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता। भगवान महादेव के डर से कौरव वहां से भाग गए।

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कारगिल विजय दिवस : जाने कैसे हुई इस युद्ध की शुरुआत

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कारगिल की जंग में भारत को मिली सफलता को 24 साल हो गए हैं। भारतीय सेना के शौर्य और पराक्रम का प्रतीक कारगिल विजय दिवस हर साल 26 जुलाई को मनाया जाता है।

साल 1999 में कारगिल युद्ध में देश के वीर-जवानों ने पाकिस्तान को धूल चटा दी थी। कारगिल विजय दिवस के मौके पर देशवासी अपने प्राणों की आहुति देकर भारत माता की रक्षा करने वाले वीर जवानों को याद करते हैं और उन्हें श्रद्धाजंलि देते है।

कारगिल युद्ध में भारतीय सैनिकों ने अपने अदम्य शौर्य और वीरता का परिचय देते हुए पाकिस्तान के करीब 3 हजार सैनिकों को मार गिराया था। यह युद्ध 18 हजार फीट की ऊंचाई पर लड़ा गया था।

आज हम इस पोस्ट में हम जानेंगे कैसे हुई इस युद्ध की शुरुआत:-

ऐसे हुई थी शुरुआत

लड़ाई की शुरुआत उस समय हुई जब पाकिस्तानी सैनिकों और आतंकवादियों ने भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की। घुसपैठियों ने खुद को प्रमुख स्थानों पर तैनात किया, जिससे उन्हें संघर्ष की शुरुआत के दौरान रणनीतिक तौर पर लाभ भी मिलाl

स्थानीय चरवाहों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर भारतीय सेना ने घुसपैठ वाले सभी स्थानों का पता लगाया और फिर ‘ऑपरेशन विजय’ की शुरुआत की गई ।

शुरुआत में बेशक अधिक ऊंचाई पर होने के कारण पाकिस्तान की सेना को फायदा मिल रहा था लेकिन इससे भी भारतीय सैनिकों का मनोबल कम नहीं हुआ और आखिर में उन्होंने जीत का परचम लहरा दिया।

सेना ने फिर 26 जुलाई, 1999 को घोषणा करते हुए बताया कि मिशन सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। उसी दिन के बाद से हर साल कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है।

हालांकि भारत के लिए ये जीत काफी महंगी भी साबित हुई। आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि भारत के 527 सैनिक शहीद हुए थे, जबकि पाकिस्तान के 357-453 सैनिक मारे गए।

कारगिल युद्ध के खत्म होने के बाद पाकिस्तान ने इसमें किसी भी तरह की भूमिका होने से इनकार कर दिया और कहा कि भारत ‘कश्मीरी स्वतंत्रता सेनानियों’ से लड़ रहा था।

हालांकि युद्ध में लड़ने वाले सैनिकों को बाद में पाकिस्तान ने सम्मानित किया। इन्हें हार मिलने के बाद मेडल से नवाजा गया, जिससे पाकिस्तान का दावा दुनिया का सबसे बड़ा झूठ साबित हुआ।

वहीं भारत ने कारगिल युद्ध के बाद रक्षा क्षेत्र में बजट का बड़ा हिस्सा खर्च करने का फैसला लिया।

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Kargil War Story: सिक्कों ने बचाई थी इस परमवीर चक्र विजेता की जान, ज़ुबानी पढ़कर रोमांच से भर जाएँगे आप

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26 जुलाई 1999 के दिन भारतीय सेना ने कारगिल युद्ध के दौरान चलाए गए ‘ऑपरेशन विजय‘ को सफलतापूर्वक अंजाम देकर भारत भूमि को घुसपैठियों के चंगुल से मुक्त कराया था। इसी की याद में ’26 जुलाई’ अब हर वर्ष कारगिल दिवस के रूप में मनाया जाता है – Kargil vijay diwas

कारगिल वॉर के हीरो योगेंद्र सिंह यादव की जान एक सिक्के ने बचाई। उन्होंने दुश्मनों से लड़ते हुए कारगिल युद्ध में विजय के बाद हिल टॉप पर तिरंगा फहराया था। वक्त गुजरने के साथ यादें धुंधली हो जाती हैं। कारगिल विजय को पूरे 23 साल हो गए। कारगिल की यादें उनके जहन में आज भी जिंदा हैं।

योगेंद्र सिंह यादव सिर्फ 19 साल की उम्र में युद्ध के दौरान सर्वोच्च वीरता सम्मान, परमवीर चक्र से सम्मानित होने वाले सबसे कम उम्र के व्यक्ति हैं. सिर्फ 16 साल की उम्र में वे 1996 में भारतीय सेना के 18 ग्रेनेडिएर्स में भर्ती हुए थे.

उन्होंने बर्फ से ढकी चट्टान पर चढ़ाई शुरू की, आधे रास्ते में ही दुश्मन के एक बंकर ने उन्हें देख लिया और उन पर मशीन गन और रॉकेट से फायरिंग शुरू कर दी थी. तीन गोलियां लगने के बावजूद ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव चढ़ाई करते रहे और पहाड़ी की चोटी पर पहुंच कर रेंगते हुए पाकिस्तानी बंकर तक चले गए. उन्होंने बंकर पर ग्रेनेड फेंका जिससे चार पाकिस्तानी सैनिक मौके पर ही मारे गए. उनकी कोशिशों से प्लाटून के बाकी सदस्यों के लिए चट्टान पर चढ़ने का रास्ता साफ हो गया था.

वही यादें उनका हौसला बढ़ाती हैं और हर मोर्चे पर ताकत देती हैं। वह कहते हैं 20 मई 1999 का दिन मैं कभी नहीं भूल सकता। तब मेरी उम्र मात्र 19 साल और नौकरी ढाई साल की थी। पांच मई को मेरी शादी थी। छुट्टियां लेकर घर आया था। 20 मई को हेडक्वार्टर से बुलावा आ गया। मेरी बटालियन को द्रास सेक्टर के तोलोलिंग पहाड़ी फतह करने का टास्क मिला।

तोलोलिंग पहाड़ी पाकिस्तानी फौज के कब्जे में थी। मेरी पल्टन के जांबाज फौजियों ने 22 दिन की लंबी लड़ाई के बाद तोलोलिंग पहाड़ी पर कारगिल युद्ध की पहली विजय के साथ तिरंगा फहरा था। तोलोलिंग के बाद पलटन का अगला टास्क टाइगर हिल टॉप था।

युद्ध के बाद सूबेदार मेजर योगेंद्र सिंह यादव एक प्रेस कांफ्रेंस में
युद्ध के बाद सूबेदार मेजर योगेंद्र सिंह यादव एक प्रेस कांफ्रेंस में

टाइगर हिल टॉप पूरी तरह पाकिस्तानी फौज के कब्जे में था। वहां पहुंचना आसान नहीं था। जुनून और जज्बे के साथ मेरी पल्टन ने दुश्मनों की तरफ कदम बढ़ाते हुए चढ़ाई शुरू कर दी। पाकिस्तानी फौज पहाड़ी की चोटी पर थी। उसके लिए टारगेट बहुत आसान था।

मैंने और मेरी पल्टन के जवानों ने रास्ता साफ करने के लिए पांच पाकिस्तानी जवानों को ढेर कर दिया। पाकिस्तानी फौज ने ताबड़तोड़ गोलीबारी कर हिंदुस्तानी फौज का रास्ता रोक दिया। पाकिस्तानी फौज की गोलीबारी से बचते हुए मैं अपने सात जांबाज जवानों के साथ टाइगर हिल टॉप पहुंचा। दोनों तरफ से गोलीबारी हुई। हमारे पास बारूद कम था। तब कुछ समझ नहीं आ रहा था। जुनून सिर्फ टाइगर हिल टॉप पर तिरंगा फहराने का था। पाकिस्तानी फौज की आंखों में धूल झोंकने के लिए हमने प्लान के तहत गोलीबारी बंद कर दी। इससे पाक फौज गलतफहमी का शिकार हो गई।

उन्हें लगा कि गोलीबारी में हिंदुस्तानी फौजी मर गए। रणनीति के तहत अचानक पाकिस्तानी फौज पर हमला बोल दिया और कई पाकिस्तानी मारे गए। कुछ पाकिस्तानी फौजी भाग निकले और हमने टाइगर हिल टॉप पर कब्जा कर लिया। जीत का जश्न मना पाते उससे पहले ही 35 मिनट बाद पाक की तरफ  से दोबारा हमला हो गया। पाक फौजियों की संख्या काफी अधिक थी। आमने-सामने की लड़ाई में मेरे सभी साथी मारे गए। मैं भी बुरी तरह जख्मी हो गया। हाथों और पैरों में कई गोलियां लगी थी। लहूलुहान जमीन पर गिरा था। पाक फौजियों ने शहीद हिंदुस्तानी फौजियों के साथ क्रूरता की।

शहीदों के पार्थिव शरीर को बूटों से कुचला और गोलियां बरसाई। जमीन पर पड़ा मैं सब देख रहा था। पाक फौजी वापस होने लगे। एक सैनिक ने जाते-जाते मेरे हाथ और पैरों में गोलियां दागी। उस वक्त दर्द को मैं भूल गया। पाक सैनिक ने एक गोली मेरे सीने में दागी। मेरी जैकेट की जेब में सिक्के थे। सिक्कों ने मेरी जान बचा ली। सीने में गोली लगते ही मुझे एहसास हो गया मैं जिंदा नहीं बचूंगा। भगवान मेरे साथ था। हाथ में गोली लगने से वो सुन्न हो गया था। ऐसा लगा हाथ जिस्म से अलग है। मैंने हाथ उखाड़ने की कोशिश की। लेकिन हाथ जिस्म से अलग नहीं हुआ।

मुझे एहसास हो चुका था मेरी मौत नहीं हो सकती। मैंने दर्द को भुलाकर हिम्मत जुटाई और रैंगते हुए शहीद सैनिकों के पास गया। कोई जिंदा नहीं था। काफी रोया। मेरे पास एक हैंड ग्रेनेड बचा था। उसे खोलकर फेंकने की ताकत नहीं थी। कोशिश की और ग्रेनेड खोलने के साथ फट गया और बाल बाल बचा। फिर अपने साथी की राइफल उठाई और ताबड़तोड़ गोलियां चलाते हुए एक नाले से लुढ़ककर नीचे आ गया। खाने को कुछ नहीं था। ठंड से जिस्म अकड़ गया था। खुद को भरतीय फौज के बेस तक पहुंचाया।

वहां पहुंचने पर पाकिस्तानी फौज की पूरी प्लानिंग की जानकारी दी। 72 घंटे से आधे डिब्बा बिस्कुट पर जिंदा था। तीन दिन के बाद होश आया। तब तक मेरी बटालियन ने टाइगर हिल टॉप पर कब्जा कर तिरंगा फहराने के साथ कारगिल युद्ध में विजय फतह कर ली थी।
–  सूबेदार योगेंद्र सिंह यादव, परमवीर चक्र विजेता

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श्रावण मास विशेष: शिव पूजन और इन 15 प्रभावशाली मंत्रों से मिलेंगे आश्चर्यजनक पुण्य फल

4 जुलाई 2023 से श्रावण मास आरंभ हो चुका है। श्रावण का महीना भगवान भोलेनाथ का पवित्र माह माना गया है। इस मास में भोलेनाथ शिव की विशेष पूजा आराधना की जाती है।

अगर आप ने इन 11 खास बातों को ध्यान में रख कर भगवान शिव की पूजा की, तो आपको भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त होगी। आइए जानते हैं शिव पूजन की 11 विशेष लाभकारी बातें।

  1. प्रातः सूर्योदय से पहले जागें और शौच आदि से निवृत्त होकर स्नान करें।
  2. पूजा स्थल को स्वच्छ कर वेदी स्थापित करें।
  3. शिव मंदिर में जाकर भगवान शिवलिंग को दूध चढ़ाएं।
  4. फिर पूरी श्रद्धा के साथ महादेव के व्रत का संकल्प लें।
  5. दिन में दो बार (सुबह और शाम) भगवान शिव की प्रार्थना करें।
  6. पूजा के लिए तिल के तेल का दीया जलाएं और भगवान शिव को पुष्प अर्पण करें।
  7. मंत्रोच्चार सहित शिव को सुपारी, पंच अमृत, नारियल एवं बेल की पत्तियां चढ़ाएं।
  8. व्रत के दौरान श्रावण व्रत कथा का पाठ अवश्य करें।
  9. पूजा समाप्त होते ही प्रसाद का वितरण करें।
  10. संध्याकाल में पूजा समाप्ति के बाद व्रत खोलें और सामान्य भोजन करें।
  11. मंत्र- श्रावण के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें।

श्रावण मास में भगवान शिव के कुछ 15 प्रभावशाली मंत्र है। इन मंत्रों का जप जीवन में हर तरह की शुभता, अनुकूलता और प्रगति लाता है। इन मंत्रों के जप से आपके जीवन के हर कष्टों का निवारण होकर आप सुखमय जीवन व्यतीत करेंगे। आइए जानते हैं ये 15 प्रभावशाली मंत्र।

  1. ॐ शिवाय नम:
  2. ॐ सर्वात्मने नम:
  3. ॐ त्रिनेत्राय नम:
  4. ॐ हराय नम:
  5. ॐ इन्द्रमुखाय नम:
  6. ॐ श्रीकंठाय नम:
  7. ॐ वामदेवाय नम:
  8. ॐ तत्पुरुषाय नम:
  9. ॐ ईशानाय नम:
  10. ॐ अनंतधर्माय नम:
  11. ॐ ज्ञानभूताय नम:
  12. ॐ अनंतवैराग्यसिंघाय नम:
  13. ॐ प्रधानाय नम:
  14. ॐ व्योमात्मने नम:
  15. ॐ युक्तकेशात्मरूपाय नम:

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