“शनिवारवाडा” किले में आज भी भटकती है राजकुमार की आत्मा

वैसे तो भारत के इतिहास में किलों के लिए राजस्थान सबसे ज्यादा मशहूर है। लेकिन महाराष्ट्र के पुणे में भी एक मशहूर किला है, जो मराठा साम्राज्य की शान कहा जाता है। इस किले को ‘शनिवारवाडा फोर्ट’ के नाम से जाना जाता है। इस किले की नींव शनिवार के दिन रखी गयी थी, इसलिए इसका नाम ‘शनिवारवाडा’ पड़ गया। इस किले का निर्माण 1746 ई. में बाजीराव पेशवा ने करवाया था।

कहा जाता है कि बाजीराव की मृत्यु के बाद महल में सत्ता की लालच में षड्यंत्र शुरू हो गए थे। 18 साल की उम्र में नारायण राव की हत्या कर दी गयी थी। नारायण राव के चाचा ने ही उसकी हत्या करवाई थी।

[adinserter block=”33″]जब हत्यारे नारायण को मारने के लिए आये, वह अपने बचाव के लिए ‘काका माला वाचवा’ (चाचा मुझे बचाओ) कहता हुआ भागा। लेकिन उसे किसी ने नहीं बचाया। कहा जाता है कि महल में राजकुमार की आज भी आत्मा भटकती है। अंधेरी रातों में महल में से ‘काका माला वाचवा’ चीखने की आवाज़ें आती है।

1828 ई. में इस महल में आग लग गई थी और महल का बड़ा ह‌िस्सा आग की चपेट में आ गया था। यह आग कैसे और क्यों लगी, यह बात आज तक रहस्य बनी हुई है। कहते है जब महल में आग लगी थी, उस वक्त वहां कुछ बच्चों की आग में जलने से मौत हो गई थी। लेकिन इस बात को दबा दिया गया था।

[adinserter block=”33″]हर रात महल के अंदर से बच्चों के रोने और चिल्लाने के आवाज़ें आती है। पूर्णिमा की रात महल और भी ज्यादा डरावना और भुतहा लगता है। इसी कारण यह महल भारत की टॉप 10 डरावनी और भुतहा जगहों में शामिल हो गया है। यहां सुबह से शाम तक तो पर्यटक आ सकते है, लेकिन शाम होने के बाद इस महल को बंद कर दिया जाता है।

यह महल बेहद खूबसूरत है। महल में कुल पांच दरवाज़ें है, दिल्ली दरवाज़ा, मस्तानी दरवाज़ा, खिड़की दरवाज़ा, नारायण दरवाज़ा और गणेश दरवाज़ा। इस महल में 17-18 वीं सदी की वस्तुओं और मूर्तियों को रखा गया है।

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सेब और बादाम जैसे फल खाने से भी हो सकते है नुकसान जानिए कैसे?

जैसे की हम सबको पता है कि सेब और बादाम खाने से हमारा शरीद फायदेमंद रहता है, लेकिन क्या आपको पता है कि अगर आप गलती से भी सेब के बीज को खा गए, तो वह आपके शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है, क्योंकि इसमें एक खतरनाक एसिड होता है। ऐसे और भी कई फल और सब्ज़ियां है, जिनके कुछ हिस्से आपकी सेहत के लिए हानिकारक हो सकते हैं। तो आइये जानिए इनके बारे में।

सेब

जैसे की हम आपको बता चुके हैं, कि सेब के बीज में एक साइनाइड नाम का घातक एसिड पाया जाता है, जो आपके शरीर के लिए हानिकारक होता है। तो इसीलिए आगे से आप सेब खाते समय ध्यान रखें की कही आप सेब के बीज तो नहीं चबा रहे।

बादाम

वैसे तो बादाम भी हमारे शरीर के लिए बहुत फायदेमंद हैं, जैसे कि बादाम खाने से हमारे शरीर की हड्डियां मजबूत होती हैं, और इससे दिमाग भी तेज़ होता है, और भी बहुत से फायदे है, लेकिन आपको बता दें कि इसके फायदों के साथ इसके नुक्सान भी हैं। जैसे कि अगर आप बादाम को बिना भिगोए और कड़वा बादाम खा रहे हो तो वह आपकी सेहत को नुकसान कर सकता है, क्योंकि इसमें भी साइनाइड एसिड होता है।

आलू

आलू तो वैसे भी हम सब दिन भर में एक दो बार खाते ही होंगे, और ज्यादातर हर सब्जी में इसका उपयोग किया जाता है। आपको बता दें कि कभी भी गलती से भी ज्यादा हरे रंग का दिखाई देने वाले आलू का सेवन मत करें, क्योंकि इसमें अत्याधिक मात्रा में क्लोरोफिल होता है।

राजमा

राजमा की सब्जी तो हम सब खाते ही रहतें हैं, और वह बहुत स्वाद भी होती है। आपको बता दें कि अगर आप राजमाह को ऐसे ही मतलब कच्चा खा गए, तो इससे आपके पेट में दर्द होने लग जायेगा।

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गुड़गांव का एक भूतहा घर, जहां अपने आप चलती है खिलौने वाली कार

अगर आप ने कॉन्ज्यूरिंग और द वुमन इन ब्लैक फ़िल्में देखी होगी, तो आपको पता ही होगा जो गुड़िया अपने आप चलने लगे उसकी तुलना में कुछ भी डरावना नहीं है। ऐसे में क्या होगा अगर आपकी खिलौना कार अपने आप ही चलने लगे।

ऐसी एक कहानी पूजा सिंह बताती है कि वो अपने परिवार के साथ सेक्टर 56 के अपार्टमेंट में रहने आई। उनको पहले दिन से ही घर में अनोखी घटनाओं का सामना करना पड़ा। वह बताती है कि एक बार मेरी माँ और चचेरा भाई घर आये हुए थे। किसी ने दरवाज़ा खटखटाया, उनको लगा बहार मैं आई होउंगी, लेकिन जब उन्होंने दरवाज़ा खोला वहां कोई भी नहीं था।

इसके बाद घर में कभी कभी लाइट्स अपने आप ऑन हो जाती और अपने आप ही ऑफ हो जाती थी। फिर भी हम ने इन सब घटनाओं पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया, क्योंकि हम भूतों वाली बातों पर विश्वास नहीं करते थे।

एक शाम फिर एक अनोखी घटना हुई। पूजा कहती है कि मेरी बेटी के पास रिमोट से चलने वाली एक कार है, जिसमें बच्चे बैठ कर सवारी भी कर सकते है। एक शाम अचानक से हॉल में चारों ओर कार अपने आप घूमने लगी। जब कि वह कार रिमोट से चलती और बंद होती है और कार का रिमोट उस वक़्त टेबल पर पड़ा हुआ था, किसी ने भी उस कार के रिमोट को छुआ तक नहीं था।

दरवाज़े का खटखटाना, लाइट्स का अपने आप ऑन और ऑफ होना, रिमोट वाली कार का अपने आप चलना इन सब घटनाओं के बाद उन्होंने अपना घर बदलने में ही भलाई समझी।

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जानिए किसको है बिल बनाने की अनुमति और वह कैसे बनता है

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आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि बिल कैसे बनता है, और किसको है अधिकार इसको बनाने। तो आइये जानिए इसके बारे में।

सबसे पहले आपको बता दें कि कानून बनाने का मुख्य काम संसद में होता है, यह भारत की राजधानी दिल्ली में स्थित है। किसी भी तरह का प्रस्तावित कानून, संसद में एक बिल के रूप में प्रतिस्थापित किया जाता है।

आपको बता दें कि संसद में बिल तभी पास होता है, जब उसको राष्ट्रपति की अनुमति मिलती यानि कि विधेयक (बिल) बनाने का विशेष अधिकार राष्ट्रपति को ही होता उसकी अनुमति के बिना बिल नहीं बनता।

संसद में पेश किये जाने वाले बिल दो तरह के होते हैं।

सरकारी बिल

गैर-सरकारी विधेयक

सरकारी विधेयक मंत्रिमंडल के सदस्यों द्वारा पेश किये जाते हैं, जबकि गैर-सरकारी विधेयक अन्य सदस्यों द्वारा ले जाते हैं, जो मंत्रिपरिषद के सदस्य नहीं होते हैं।

विधेयक बनने की प्रक्रिया।

प्रथम वाचन

इसमें बिल की प्रतिस्थापना के साथ-साथ विधेयक का प्रथम वाचन प्रारम्भ हो जाता है। यह अवस्था बड़ी सरल होती है। आपको बता दें कि जो मंत्री विधेयक को प्रस्तावित करता है, वह अध्यक्ष को सूचित करता है। अध्यक्ष यह प्रश्न सदन के सामने रखता है। जब सभी मंत्रियों का सामान्य मत हो जाता है, तो इस विधेयक को प्रस्थापित करने के लिए बुलाया जाता है।

द्वितीय वाचन

सामान्य चर्चा के पश्चात सदन के पास चार विकल्प होते हैं।

सदन स्वयं विधेयक पर विस्तृत धारावार चर्चा करें।

विधेयक सदन की प्रवर समिति को भेज दें।

दोनों सदनों की संयुक्त समिति को भेज दें।

जनमत जानने के लिए जनता में वितरित करें।

यदि विधेयक प्रवर समिति को सौपा जाता है। तो संबंधित समिति विधेयक का विस्तृत निरीक्षण करती है। समिति चाहे तो वह विषय विशेषज्ञों तथा विधिवेताओं से भी उनकी राय ले सकती है। पूरे विचार विमर्श के पश्चात समिति अपनी रिपोर्ट सदन को भेज देती है।

तृतीय वाचन

द्वितीय वाचन पूरा हो जाने के बाद, मंत्री विधेयक को पास करने के लिए सदन से अनुरोध करता है। इस अवस्था में प्राय: कोर्इ चर्चा नहीं की जाती। सदस्य केवल विधेयक विरोध या पास करने के लिए बिल का समर्थन अथवा उसका विरोध कर सकते हैं। इसके लिए उपस्थित तथा मतदान करने वाले सदस्यों का साधारण बहुमत आवश्यक है।

द्वितीय सदन में बिल का कार्य

आपको बता दें कि जब विधेयक किसी एक सदन से पास हो जाता है, तो उसको दूसरे सदन में भेज दिया जाता है। यहां पर भी वही तीन वाचनों वाली प्रक्रिया अपनार्इ जाती है। जो कुछ इस प्रकार होती हैं।

अगर विधेयक दोनों सदनों में पास होता है, तो उसको राष्ट्रपति की अनुमति के लिए भेज दिया जाता है।

अगर विधेयक में कुछ संशोधन करना हो, तो उसको संशोधन की दशा में बिल पहले पास करने वाले सदन को वापस भेज दिया जाता है। इस दशा में पहला सदन संशोधनों पर विचार करेगा और अगर वो उन्हें स्वीकार कर लेता है, तो बिल राष्ट्रपति की अनुमति के लिए भेज दिया जाता हैं, यदि पहला सदन संशोधनों को मानने से मना कर दे, तब इसे गतिरोध माना जाता है।

दूसरा सदन भी विधेयक को अस्वीकार कर सकता है, वो भी गतिरोध ही कहलाता है। दोनों सदनों की गतिरोध को समापित करने के लिए बिल को राष्ट्रपति की अनुमति के लिए भेज दिया जाता है, क्योंकि राष्ट्रपति के पास कुछ विकल्प होतें हैं, इसको हल करने के लिए।

जब राष्ट्रपति अपनी अनुमति प्रदान करता है, तो बिल या कानून बन जाता है।

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170 सालों से कुलधरा गाँव पड़ा है वीरान

राजस्थान में बहुत सारे मशहूर किले और ऐसी जगहें है, जिनका अपना इतिहास है। लेकिन इनमें से कुछ जगहें भूतिया और रहस्यमई भी है। ऐसा ही एक रहस्यमई गाँव है, कुलधरा, जैसलमेर। कहते है यह गाँव एक रात में ही वीरान हो गया था और अब भी पिछले 170 सालों से वीरान पड़ा है। आइए जानते है इस गाँव के रातों रात वीरान होने की दास्तान:

कुलधरा गाँव अब एक टूरिस्ट प्लेस में बदल चूका है। यह गाँव जैसलमेर शहर से 17 किमी. दूरी पर मौजूद है। इस गाँव के आसपास 84 गांव थे और कुलधरा इन में से एक था। इस गाँव में पालीवाल ब्राह्मण रहते थे। इस गाँव के वीरान होने की 2 कहानियां प्रचलित है।

पहली कहानी

यहां के शासक सलीम सिंह की गन्दी नज़र गाँव की एक खूबसूरत लड़की पर पड़ गयी थी। वह उस लड़की से ज़बरदस्ती शादी करना चाहता था। इसके लिए सलीम सिंह ने ब्राह्मणों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया और उसने लड़की से शादी करने के लिए चंद दिनों की मोहलत दी।

यह ज़बरदस्ती की शादी उनके समुदाय के सम्मान और गौरव के खिलाफ थी। इसलिए गाँव के मुखि ने यह फैसला लिया के वो रातों रात इस गाँव को छोड़ कर चले जायेंगे। जाते समय उन्होंने इस गाँव को श्राप दे दिया कि इस जगह पर कोई भी बस नहीं पायेगा। उस रात के बाद यहां सब वीरान हो गया और आज तक यहां कोई नहीं बस पाया।

दूसरी कहानी

दूसरी कहानी के मुताबिक यहां का शासक सलीम सिंह ब्राह्मणों पर अत्याचार करता था। उसने कर और लगान इतना बढ़ा दिया था कि ब्राह्मणों का व्यापार और खेती करना मुश्किल हो गया था।

वह उनको गुलाम बना के रखता था। उसके इन अत्याचारों से दुखी हो कर ब्राह्मणों ने गाँव छोड़ने का फैसला किया। गाँव छोड़ते वक्त उन्होंने ने गाँव को श्राप दे दिया कि इस जगह पर कोई भी बस नहीं पायेगा।

आज भी है श्राप का असर

कहते है कि वहां आज भी रूहानी ताकतों का कब्ज़ा है। वहां कुछ लोगों ने बसने की कोशिश भी की थी, लेकिन वो असफल हो गए। गाँव में घूमने आने वाले लोगों के मुताबिक ब्राह्मणों की आहट आज भी सुनाई देती है और ऐसे लगता है कि साथ कोई और भी चल रहा है।

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जानिए क्या कहता है आपका दिल

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जानिए क्या कहता है आपका दिल

आज हम आपको हमारे शरीर के महत्वपूर्ण अंग दिल के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में अपनी पहले कही नहीं सुना होगा। तो आइये जानिए इसके बारे में।

आगे पढ़ें दिल के बारे में कुछ ख़ास बातें

सबसे पहले आपको बता दें कि हमारा दिल न ही लेफ्ट साइड और न ही राइट साइड होता है, बलकि छाती के बिलकुल बीच में होता है।

आपके हृदय का वजन 250 से 350 ग्राम होता है।

एक आम व्यक्ति का दिल एक मिनट में 72 बार धड़कता है, और पुरे जीवन तक यह लगभग 250 करोड़ तक धड़कता है. एक नए बच्चे की धड़कन लगभग 70-160 प्रति मिनट होती है।

जब हमारी उम्र 4 हफ़्तों की होती है तब हमारा हृदय काम करना शुरू कर देता है।

हमारा हृदय शरीर से अलग होने के बाद भी तब तक धड़कता रहता है, जब तक उसको ऑक्सीजन मिलती रहती है।

पुरे जीवन में हमारा हृदय लगभग 16 करोड़ लीटर खून पंप कर सकता है, और पुरे दिन में यह 7570 लीटर खून पंप करता है।

आपका दिल शरीर के सभी 75 trillion cells को खून भेजता है, और सिर्फ हमारी आँख के कॉर्निया के cells  को छोड़कर।

हमारे दिल में पाई जाने वाली धमनी ”अरोटा’ की मोटाई एक गार्डन में पाई जाने वाली पाइप के बराबर होती है।

औरतों के हृदय की धड़कन मर्दों के हृदय की धड़कन से प्रति 8 मिनट ज्यादा होती।

चॉक्लेट खाने से हृदय के रोगों की संभावना एक तिहाई कम की जा सकती है।

आपको यह भी बता कि जिस तरह का गाना आप सुन रहे हो उसी के अनुसार आपके हृदय की धड़कन भी बदल जाती है।

आपको बता दें कि जो लोग 8 घंटे से ज्यादा काम करते हैं उनको दिल के दौरे पड़ने की संभावना भी ज्यादा होती है।

अगर आप विटामिन की गोलियां खा रहे हो तो सावधान हो जाइए, क्योंकि इससे कैंसर होने का खतरा भी ज्यादा रहता है।

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दिमाग का 100 परसेंट उपयोग कैसे करें?

हमारा दिमाग कंप्यूटर से भी ज्यादा तेज है, जो हमारी कल्पना से कई गुना ज्यादा बातें याद रखता है। लेकिन जीवन में कुछ मुश्किलें ऐसी आती हैं , जिन में हम असफल हो जाते है। इसी कारण हम अपने आपको कमज़ोर मानने लगते है। हमे लगता है कि हमारा दिमाग 100 परसेंट काम नहीं करता है।

मनुष्य का दिमाग एक बेहतरीन मशीन है, जो इस पेचीदा मशीन को समझ जाता है, वही मनुष्य अपने जीवन में निरंतर सफल होता है। बचपन से लेकर किशोरावस्था तक बच्चों को माता-पिता, शिक्षक और पड़ोसी दिन में बहुत बार टोकते है, जैसे कि तुम्हें कुछ नहीं आता है, तुम कुछ नहीं कर सकते, बीच में मत बोलो, ज्यादा होशियार मत बनो, तुम्हें क्या पता है, हमने दुनियां देखी है, दुनियां बड़ी खराब है आदि।

ऐसी बातों से मनुष्य के दिमाग में नकारात्मक बातें बैठ जाती है। ऐसे में इंसान खुद को कमज़ोर मानने लगता है। इसी लिए हमेशा सकारात्मक सोचना चाहिए ताकि हम अपने आप को कमज़ोर न समझे। तभी हम दिमाग का अच्छे से पूरा उपयोग कर सकते है। आइए जानते है हम अपने दिमाग का 100 परसेंट कैसे उपयोग कर सकते है:-

बुद्धि

इसके लिए बुद्धि का तेज होना भी ज़रूरी है। अपने दिमाग को तेज करने के लिए पहेलियाँ सुलझानी चाहिए। कुछ कोडिंग गेम्स भी खेलनी चाहिए। जिससे आपका दिमाग ज्यादा उपयोग होगा और मुश्किल से मुश्किल कामों को करने में आसानी होगी।

ध्यान

अगर आप कोई भी काम कर रहे हो, तो उस काम पर ध्यान लगाना ज्यादा ज़रूरी है। तभी उस काम को अच्छे से कर पाएंगे। ध्यान लगाने के लिए रोज़ मैडिटेशन और योग करें। ऐसा भोजन बिलकुल न करें, जिसके खाने के बाद आप खुद को असहज महसूस करते हो।

ज्ञान

दिमाग को तेज करने के लिए ज्ञान भी जरूरी है और ज्ञान किताबों से मिलता है। एक अच्छी किताब पढ़ने से आप बहुत सारा ज्ञान पा सकते है। क्युकि किताबों में लेखकों ने अपने जीवनभर का ज्ञान और अनुभव दिया होता है।

याददाश्त

याददाश्त के लिए मेहनत और ध्यान ज़रूरी है। कुछ भी याद करने के लिए नोट्स और नेमोनिक्स आदि का उपयोग करें। इससे आपको याद करने में ज्यादा आसानी होगी।

सीखना

सबसे ज्यादा तेजी से सीखने का गुण बच्चों में होता है और वह आसानी से बातों को याद कर लेते है। बच्चों की तरह जिज्ञासा बढ़ाने के लिए आस पास की चीज़ों और रोचक बातों में ध्यान लगाए। इससे आप बढ़ती उम्र में भी ज्ञान बढ़ा पायेगें।

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जानिए ट्रैफिक नियम में होने वाले चालानों के बारे में

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आज हम आपको ट्रैफिक नियम के सम्बंदित महत्वपूर्ण जानकारी देने जा रहे हैं। जैसे कि आपको पता है कि प्रतिदिन कुछ लोग जहां ट्रैफिक नियम का पालन करते हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग इन नियमो का उल्लंघन भी करते हैं। जब कोई भी ट्रैफिक नियम की उल्लंघन करता है तो ट्रैफिक पुलिस उसको रोक लेती है, और वह उसकी गाड़ी की चाबी तक निकल लेती है। क्या आपको पता है कि ट्रैफिक पुलिस या कॉन्सटेबल के दुवारा आपकी गाड़ी की चाबी को निकलना नियमों के खिलाफ है। जानिए ट्रैफिक नियम के तहत अगर आप नियम की उल्लंघन करते हो तो आपके साथ क्या करवाई हो सकती है, और वह कौन कर सकता है।

कौनसा रूल तोडा तो कितना होगा आपको चालान

सबसे पहले आपको बता दें कि अगर आप रेड सिग्नल को पार कर रहे हो तो आपका चालान तो कटेगा ही और साथ में आपका लाइसेंस भी जब्त किया जायेगा, और अगर आप शराब पीकर गाड़ी चला रहे हो तो तब भी आपके साथ ऐसा ही किया जायेगा।

आपको यह भी बता दें कि कोई भी कॉन्सटेबल आपकी गाड़ी का चालान नहीं काट सकता तो आगे से आप ध्यान रखें कि कहीं कोई कॉन्सटेबल तो नहीं आपकी गाड़ी का चालान काट रहा।

अगर वाहन चलाते समय कोई भी फ़ोन से बात कर रहा होता है, तो उसको 1000 रु तक का जुर्माना हो सकता है, और इसके साथ ही 3 महीने तक लाइसेन्स जब्त करने का प्रावधान भी हैं।

आपको बता दें कि मोटरसाइकिल पर अगर तीन व्यक्ति सवारी कर रहे हैं तो पुलिस दुवारा आपका 100 रु तक का चालान काटा जा सकता हैं।

आपका जो चालान काटा जाता है उसको नियमित समय में भरना होता है, अगर आप ऐसा नहीं करते तो आपका वाहन भी जब्त किया जा सकता हैं।

प्रेशर हॉर्न का उपयोग करने वालों को 100 रु या इससे अधिक की राशि चालान की रूप में चुकानी पड़ सकती हैं।

अगर आप हेलमेट नहीं पहनते तब भी आपका चालान काटा जाता है।

आपको बता दें कि अगर आप निर्धारित सीमा से अधिक की गति पर वाहन चला रहे हो तो आपको 400 से 1,000 रुपये के बीच जुर्माना पड़ सकता है। यह गलती दोहराने पर आपको 5000 तक का जुर्माना पड़ सकता है

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जानिए अपने शरीर की कुछ रहस्यमई बातों के बारे में

आज हम आपको हमारे शरीर की कुछ ऐसी बातों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में आपको शायद ही पता हो, अगर आप इन बातों के बारे में जानना चाहते हैं तो इस पोस्ट को पूरा पढ़ें।

शरीर की त्वचा

सबसे पहले आपको बता दें कि आपके शरीर में से हर सेकंड 600 स्किन कोशिका बाहर निकल जाती है। आपके शरीर पर छोटे-छोटे कीटाणु होते हैं, और वह आपको दिखाई नहीं देते और आपकी त्वचा पर रहते हैं, वह उन कोशिकाओं को खा जाते हैं, तो इसी वजह से आपके शरीर में से इतनी कोशिकाऐं बाहर निकल जाती हैं।

डी.एन.ए

आपको यह भी बता दें कि जो आपके शरीर में DNA होती है, वह आपके शरीर के बारे में सारी जानकारी देती है. हर इंसान के अंदर पाई जाने वाली DNA को अगर खोल दिया जाये, तो उसकी लम्बाई लगभग 1600 करोड़ किलोमीटर होगी। मतलब यंहा से प्लूटो तक और वापस वंहा से धरती तक, इतनी लम्बाई है आपकी पूरी DNA की। अगर हम अपने फेपड़ों को खोल दें तो वो लगभग एक टेनिस कोर्ट के बराबर के साइज का हो जाएगा।

लार

कई बार जब आप अपने पसंदीदा खाने को देखते हैं, तो आपका मन उसको खाने को करता है, और आपके मुंह में लार आती है। वैसे तो इस लार का काम जो हम खाना खाते है उसको नरम करना होता है, इससे खाना आसानी से पच जाता है। आपको हैरानी वाली बात बता दें कि अगर किसी भी इंसान की पूरी जीवन की लार को एकत्रित किया जाये और उसे मापा जाये तो वो इतनी होगी की वो पूरे 2 स्विमिंग पूल को भर देगी।

हाइड्रोक्लोरिक एसिड

क्या आप जानते हो कि आप जो भी खाना खाते हैं वो अलग-अलग प्रक्रियासे होकर गुज़रता है। सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया खाने को पचाने की होती है। इस प्रक्रिया को करने के लिए हमारे पेट में एक एसिड होता है, जिसे HYDROCHLORIC ACID कहते है, जो इस प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार होता है। आपको बता दें कि यह एसिड इतना ताकतवर होता है कि वह खाने को आसानी से गला देता है, इतना ही नहीं बलकि यह एक ब्लेड को भी गला सकता  है।

आंख

आपको बता दें कि हमारी आँख की मेगापिक्सेल 576 होती है, जो कि किसी अच्छे डिजिटल कमरे से कहीं ज़्यादा है। यही कारण है कि, हम अपनी आँखों से इतना साफ़-साफ़ देख पातें  हैं, और बहुत से रंगों को आसानी से पहचान लेतें  हैं।

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बंदर जो प्यास बुझाने के लिए पीता है कुछ ऐसा जिसे पीने से डरते है लोग

इंसान हो या जानवर जब भी किसी को प्यास लगती है तो वह पानी पीकर ही अपनी प्यास को बुझाता है, लेकिन हरियाणा के पानीपत में एक ऐसा बंदर है जिसके साथ ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. पानीपत में एक ऐसा बंदर है जो प्यास लगने पर पानी पीने के बजाय बाइक या किसी भी अन्य वाहन से पेट्रोल चुराकर पीता है.

पानीपत में पिछले काफी समय से लोगों की बाइक से पेट्रोल कम या खत्म होने की शिकायत सामने आने लगीं तो उन्होंने इसकी छानबीन शुरू की. छानबीन करने के दौरान लोगों के सामने एक चौंका देने वाला खुलासा हुआ जिसे जानने के बाद सभी की आंखें फटी की फटी रह गई.

छानबीन में ये बात सामने आई कि पेट्रोल चोरी के पीछे कोई इंसान नहीं बल्कि एक बन्दर है. इस बन्दर को पेट्रोल पीने की लत लग गई है. इस बंदर को अब कोई केला या फिर मूंगफली खाने को देता है तो ये नहीं खाता है, इसे सिर्फ और सिर्फ पेट्रोल चाहिए. यह बंदर पेट्रोल के इलावा न तो कुछ ख्य रहा है और न ही कुछ पी रहा है।  आज तक इस बंदर ने कभी किसी पर हमला नहीं किया है.

बंदर हर दिन मोटरसाइकिल के बगल में शांति के साथ बैठ जाता था, वह धैर्यपूर्वक इंतजार करता कि वहां कोई व्यक्ति खड़ा तो नहीं है. इसके बाद वह मोटरसाइकिल के पेट्रोल सप्लाई पाइप को निकालता और पेट्रोल को पीने लगता है.

बेहद रोचक तथ्य जो आपका दिमाग हिला देंगे