170 सालों से कुलधरा गाँव पड़ा है वीरान

राजस्थान में बहुत सारे मशहूर किले और ऐसी जगहें है, जिनका अपना इतिहास है। लेकिन इनमें से कुछ जगहें भूतिया और रहस्यमई भी है। ऐसा ही एक रहस्यमई गाँव है, कुलधरा, जैसलमेर। कहते है यह गाँव एक रात में ही वीरान हो गया था और अब भी पिछले 170 सालों से वीरान पड़ा है। आइए जानते है इस गाँव के रातों रात वीरान होने की दास्तान:

कुलधरा गाँव अब एक टूरिस्ट प्लेस में बदल चूका है। यह गाँव जैसलमेर शहर से 17 किमी. दूरी पर मौजूद है। इस गाँव के आसपास 84 गांव थे और कुलधरा इन में से एक था। इस गाँव में पालीवाल ब्राह्मण रहते थे। इस गाँव के वीरान होने की 2 कहानियां प्रचलित है।

पहली कहानी

यहां के शासक सलीम सिंह की गन्दी नज़र गाँव की एक खूबसूरत लड़की पर पड़ गयी थी। वह उस लड़की से ज़बरदस्ती शादी करना चाहता था। इसके लिए सलीम सिंह ने ब्राह्मणों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया और उसने लड़की से शादी करने के लिए चंद दिनों की मोहलत दी।

यह ज़बरदस्ती की शादी उनके समुदाय के सम्मान और गौरव के खिलाफ थी। इसलिए गाँव के मुखि ने यह फैसला लिया के वो रातों रात इस गाँव को छोड़ कर चले जायेंगे। जाते समय उन्होंने इस गाँव को श्राप दे दिया कि इस जगह पर कोई भी बस नहीं पायेगा। उस रात के बाद यहां सब वीरान हो गया और आज तक यहां कोई नहीं बस पाया।

दूसरी कहानी

दूसरी कहानी के मुताबिक यहां का शासक सलीम सिंह ब्राह्मणों पर अत्याचार करता था। उसने कर और लगान इतना बढ़ा दिया था कि ब्राह्मणों का व्यापार और खेती करना मुश्किल हो गया था।

वह उनको गुलाम बना के रखता था। उसके इन अत्याचारों से दुखी हो कर ब्राह्मणों ने गाँव छोड़ने का फैसला किया। गाँव छोड़ते वक्त उन्होंने ने गाँव को श्राप दे दिया कि इस जगह पर कोई भी बस नहीं पायेगा।

आज भी है श्राप का असर

कहते है कि वहां आज भी रूहानी ताकतों का कब्ज़ा है। वहां कुछ लोगों ने बसने की कोशिश भी की थी, लेकिन वो असफल हो गए। गाँव में घूमने आने वाले लोगों के मुताबिक ब्राह्मणों की आहट आज भी सुनाई देती है और ऐसे लगता है कि साथ कोई और भी चल रहा है।

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जानिए क्या कहता है आपका दिल

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जानिए क्या कहता है आपका दिल

आज हम आपको हमारे शरीर के महत्वपूर्ण अंग दिल के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में अपनी पहले कही नहीं सुना होगा। तो आइये जानिए इसके बारे में।

आगे पढ़ें दिल के बारे में कुछ ख़ास बातें

सबसे पहले आपको बता दें कि हमारा दिल न ही लेफ्ट साइड और न ही राइट साइड होता है, बलकि छाती के बिलकुल बीच में होता है।

आपके हृदय का वजन 250 से 350 ग्राम होता है।

एक आम व्यक्ति का दिल एक मिनट में 72 बार धड़कता है, और पुरे जीवन तक यह लगभग 250 करोड़ तक धड़कता है. एक नए बच्चे की धड़कन लगभग 70-160 प्रति मिनट होती है।

जब हमारी उम्र 4 हफ़्तों की होती है तब हमारा हृदय काम करना शुरू कर देता है।

हमारा हृदय शरीर से अलग होने के बाद भी तब तक धड़कता रहता है, जब तक उसको ऑक्सीजन मिलती रहती है।

पुरे जीवन में हमारा हृदय लगभग 16 करोड़ लीटर खून पंप कर सकता है, और पुरे दिन में यह 7570 लीटर खून पंप करता है।

आपका दिल शरीर के सभी 75 trillion cells को खून भेजता है, और सिर्फ हमारी आँख के कॉर्निया के cells  को छोड़कर।

हमारे दिल में पाई जाने वाली धमनी ”अरोटा’ की मोटाई एक गार्डन में पाई जाने वाली पाइप के बराबर होती है।

औरतों के हृदय की धड़कन मर्दों के हृदय की धड़कन से प्रति 8 मिनट ज्यादा होती।

चॉक्लेट खाने से हृदय के रोगों की संभावना एक तिहाई कम की जा सकती है।

आपको यह भी बता कि जिस तरह का गाना आप सुन रहे हो उसी के अनुसार आपके हृदय की धड़कन भी बदल जाती है।

आपको बता दें कि जो लोग 8 घंटे से ज्यादा काम करते हैं उनको दिल के दौरे पड़ने की संभावना भी ज्यादा होती है।

अगर आप विटामिन की गोलियां खा रहे हो तो सावधान हो जाइए, क्योंकि इससे कैंसर होने का खतरा भी ज्यादा रहता है।

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दिमाग का 100 परसेंट उपयोग कैसे करें?

हमारा दिमाग कंप्यूटर से भी ज्यादा तेज है, जो हमारी कल्पना से कई गुना ज्यादा बातें याद रखता है। लेकिन जीवन में कुछ मुश्किलें ऐसी आती हैं , जिन में हम असफल हो जाते है। इसी कारण हम अपने आपको कमज़ोर मानने लगते है। हमे लगता है कि हमारा दिमाग 100 परसेंट काम नहीं करता है।

मनुष्य का दिमाग एक बेहतरीन मशीन है, जो इस पेचीदा मशीन को समझ जाता है, वही मनुष्य अपने जीवन में निरंतर सफल होता है। बचपन से लेकर किशोरावस्था तक बच्चों को माता-पिता, शिक्षक और पड़ोसी दिन में बहुत बार टोकते है, जैसे कि तुम्हें कुछ नहीं आता है, तुम कुछ नहीं कर सकते, बीच में मत बोलो, ज्यादा होशियार मत बनो, तुम्हें क्या पता है, हमने दुनियां देखी है, दुनियां बड़ी खराब है आदि।

ऐसी बातों से मनुष्य के दिमाग में नकारात्मक बातें बैठ जाती है। ऐसे में इंसान खुद को कमज़ोर मानने लगता है। इसी लिए हमेशा सकारात्मक सोचना चाहिए ताकि हम अपने आप को कमज़ोर न समझे। तभी हम दिमाग का अच्छे से पूरा उपयोग कर सकते है। आइए जानते है हम अपने दिमाग का 100 परसेंट कैसे उपयोग कर सकते है:-

बुद्धि

इसके लिए बुद्धि का तेज होना भी ज़रूरी है। अपने दिमाग को तेज करने के लिए पहेलियाँ सुलझानी चाहिए। कुछ कोडिंग गेम्स भी खेलनी चाहिए। जिससे आपका दिमाग ज्यादा उपयोग होगा और मुश्किल से मुश्किल कामों को करने में आसानी होगी।

ध्यान

अगर आप कोई भी काम कर रहे हो, तो उस काम पर ध्यान लगाना ज्यादा ज़रूरी है। तभी उस काम को अच्छे से कर पाएंगे। ध्यान लगाने के लिए रोज़ मैडिटेशन और योग करें। ऐसा भोजन बिलकुल न करें, जिसके खाने के बाद आप खुद को असहज महसूस करते हो।

ज्ञान

दिमाग को तेज करने के लिए ज्ञान भी जरूरी है और ज्ञान किताबों से मिलता है। एक अच्छी किताब पढ़ने से आप बहुत सारा ज्ञान पा सकते है। क्युकि किताबों में लेखकों ने अपने जीवनभर का ज्ञान और अनुभव दिया होता है।

याददाश्त

याददाश्त के लिए मेहनत और ध्यान ज़रूरी है। कुछ भी याद करने के लिए नोट्स और नेमोनिक्स आदि का उपयोग करें। इससे आपको याद करने में ज्यादा आसानी होगी।

सीखना

सबसे ज्यादा तेजी से सीखने का गुण बच्चों में होता है और वह आसानी से बातों को याद कर लेते है। बच्चों की तरह जिज्ञासा बढ़ाने के लिए आस पास की चीज़ों और रोचक बातों में ध्यान लगाए। इससे आप बढ़ती उम्र में भी ज्ञान बढ़ा पायेगें।

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जानिए ट्रैफिक नियम में होने वाले चालानों के बारे में

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आज हम आपको ट्रैफिक नियम के सम्बंदित महत्वपूर्ण जानकारी देने जा रहे हैं। जैसे कि आपको पता है कि प्रतिदिन कुछ लोग जहां ट्रैफिक नियम का पालन करते हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग इन नियमो का उल्लंघन भी करते हैं। जब कोई भी ट्रैफिक नियम की उल्लंघन करता है तो ट्रैफिक पुलिस उसको रोक लेती है, और वह उसकी गाड़ी की चाबी तक निकल लेती है। क्या आपको पता है कि ट्रैफिक पुलिस या कॉन्सटेबल के दुवारा आपकी गाड़ी की चाबी को निकलना नियमों के खिलाफ है। जानिए ट्रैफिक नियम के तहत अगर आप नियम की उल्लंघन करते हो तो आपके साथ क्या करवाई हो सकती है, और वह कौन कर सकता है।

कौनसा रूल तोडा तो कितना होगा आपको चालान

सबसे पहले आपको बता दें कि अगर आप रेड सिग्नल को पार कर रहे हो तो आपका चालान तो कटेगा ही और साथ में आपका लाइसेंस भी जब्त किया जायेगा, और अगर आप शराब पीकर गाड़ी चला रहे हो तो तब भी आपके साथ ऐसा ही किया जायेगा।

आपको यह भी बता दें कि कोई भी कॉन्सटेबल आपकी गाड़ी का चालान नहीं काट सकता तो आगे से आप ध्यान रखें कि कहीं कोई कॉन्सटेबल तो नहीं आपकी गाड़ी का चालान काट रहा।

अगर वाहन चलाते समय कोई भी फ़ोन से बात कर रहा होता है, तो उसको 1000 रु तक का जुर्माना हो सकता है, और इसके साथ ही 3 महीने तक लाइसेन्स जब्त करने का प्रावधान भी हैं।

आपको बता दें कि मोटरसाइकिल पर अगर तीन व्यक्ति सवारी कर रहे हैं तो पुलिस दुवारा आपका 100 रु तक का चालान काटा जा सकता हैं।

आपका जो चालान काटा जाता है उसको नियमित समय में भरना होता है, अगर आप ऐसा नहीं करते तो आपका वाहन भी जब्त किया जा सकता हैं।

प्रेशर हॉर्न का उपयोग करने वालों को 100 रु या इससे अधिक की राशि चालान की रूप में चुकानी पड़ सकती हैं।

अगर आप हेलमेट नहीं पहनते तब भी आपका चालान काटा जाता है।

आपको बता दें कि अगर आप निर्धारित सीमा से अधिक की गति पर वाहन चला रहे हो तो आपको 400 से 1,000 रुपये के बीच जुर्माना पड़ सकता है। यह गलती दोहराने पर आपको 5000 तक का जुर्माना पड़ सकता है

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जानिए अपने शरीर की कुछ रहस्यमई बातों के बारे में

आज हम आपको हमारे शरीर की कुछ ऐसी बातों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में आपको शायद ही पता हो, अगर आप इन बातों के बारे में जानना चाहते हैं तो इस पोस्ट को पूरा पढ़ें।

शरीर की त्वचा

सबसे पहले आपको बता दें कि आपके शरीर में से हर सेकंड 600 स्किन कोशिका बाहर निकल जाती है। आपके शरीर पर छोटे-छोटे कीटाणु होते हैं, और वह आपको दिखाई नहीं देते और आपकी त्वचा पर रहते हैं, वह उन कोशिकाओं को खा जाते हैं, तो इसी वजह से आपके शरीर में से इतनी कोशिकाऐं बाहर निकल जाती हैं।

डी.एन.ए

आपको यह भी बता दें कि जो आपके शरीर में DNA होती है, वह आपके शरीर के बारे में सारी जानकारी देती है. हर इंसान के अंदर पाई जाने वाली DNA को अगर खोल दिया जाये, तो उसकी लम्बाई लगभग 1600 करोड़ किलोमीटर होगी। मतलब यंहा से प्लूटो तक और वापस वंहा से धरती तक, इतनी लम्बाई है आपकी पूरी DNA की। अगर हम अपने फेपड़ों को खोल दें तो वो लगभग एक टेनिस कोर्ट के बराबर के साइज का हो जाएगा।

लार

कई बार जब आप अपने पसंदीदा खाने को देखते हैं, तो आपका मन उसको खाने को करता है, और आपके मुंह में लार आती है। वैसे तो इस लार का काम जो हम खाना खाते है उसको नरम करना होता है, इससे खाना आसानी से पच जाता है। आपको हैरानी वाली बात बता दें कि अगर किसी भी इंसान की पूरी जीवन की लार को एकत्रित किया जाये और उसे मापा जाये तो वो इतनी होगी की वो पूरे 2 स्विमिंग पूल को भर देगी।

हाइड्रोक्लोरिक एसिड

क्या आप जानते हो कि आप जो भी खाना खाते हैं वो अलग-अलग प्रक्रियासे होकर गुज़रता है। सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया खाने को पचाने की होती है। इस प्रक्रिया को करने के लिए हमारे पेट में एक एसिड होता है, जिसे HYDROCHLORIC ACID कहते है, जो इस प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार होता है। आपको बता दें कि यह एसिड इतना ताकतवर होता है कि वह खाने को आसानी से गला देता है, इतना ही नहीं बलकि यह एक ब्लेड को भी गला सकता  है।

आंख

आपको बता दें कि हमारी आँख की मेगापिक्सेल 576 होती है, जो कि किसी अच्छे डिजिटल कमरे से कहीं ज़्यादा है। यही कारण है कि, हम अपनी आँखों से इतना साफ़-साफ़ देख पातें  हैं, और बहुत से रंगों को आसानी से पहचान लेतें  हैं।

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बंदर जो प्यास बुझाने के लिए पीता है कुछ ऐसा जिसे पीने से डरते है लोग

इंसान हो या जानवर जब भी किसी को प्यास लगती है तो वह पानी पीकर ही अपनी प्यास को बुझाता है, लेकिन हरियाणा के पानीपत में एक ऐसा बंदर है जिसके साथ ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. पानीपत में एक ऐसा बंदर है जो प्यास लगने पर पानी पीने के बजाय बाइक या किसी भी अन्य वाहन से पेट्रोल चुराकर पीता है.

पानीपत में पिछले काफी समय से लोगों की बाइक से पेट्रोल कम या खत्म होने की शिकायत सामने आने लगीं तो उन्होंने इसकी छानबीन शुरू की. छानबीन करने के दौरान लोगों के सामने एक चौंका देने वाला खुलासा हुआ जिसे जानने के बाद सभी की आंखें फटी की फटी रह गई.

छानबीन में ये बात सामने आई कि पेट्रोल चोरी के पीछे कोई इंसान नहीं बल्कि एक बन्दर है. इस बन्दर को पेट्रोल पीने की लत लग गई है. इस बंदर को अब कोई केला या फिर मूंगफली खाने को देता है तो ये नहीं खाता है, इसे सिर्फ और सिर्फ पेट्रोल चाहिए. यह बंदर पेट्रोल के इलावा न तो कुछ ख्य रहा है और न ही कुछ पी रहा है।  आज तक इस बंदर ने कभी किसी पर हमला नहीं किया है.

बंदर हर दिन मोटरसाइकिल के बगल में शांति के साथ बैठ जाता था, वह धैर्यपूर्वक इंतजार करता कि वहां कोई व्यक्ति खड़ा तो नहीं है. इसके बाद वह मोटरसाइकिल के पेट्रोल सप्लाई पाइप को निकालता और पेट्रोल को पीने लगता है.

बेहद रोचक तथ्य जो आपका दिमाग हिला देंगे

एक शहर जहाँ 350 की रफ्तार से चलती है कारें !!

मोनाको है तो फ्रांस की बगल में छोटा-सा देश, पर कार, कैसिनो और क्लाइमेट के बल पर पूरी दुनिया में मशहूर है। फार्मूला वन कार रेस, ग्लैमरस कैसिनो, जीरो इनकम टैक्स, सुरक्षा, सुविधाएं और चौबीसों घंटे की चमक-दमक दौलतमंदों को यहां घूमने और बसने के लिए अैक्ट करती हैं।

 

महज 1.95 वर्ग किलोमीटर में फैला यह शहरी देश, जिसे आप एक घंटे से कम समय में पूरा घूम सकते हैं। मोंटे कार्लो की यह तस्वीर मोनाको में हुई फार्मूला-1 रेस की है, जिसे लोग याट पर बैठकर भी देख सकते हैं।

हाल ही में यहां साल की छठी एफवन रेस हुई, यह रेडबुल के डेनियल रिकिया ने जीती। यह अकेली एफवन रेस है, जो शहर के बीच से गुज़रती है। बेहद तीखे और संकरे मोड़ के कारण इस रेस को सबसे कठिन माना जाता है।

यहां रेसर के लिए एक बार पिछड़ने के बाद वापसी करना मुश्किल हो जाता है। पूर्व रेसर जूनियन पाल्मर ने मोनाको अप्री की जगह बदलने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह रेस नहीं है। यहां बस तेजी से कारें दौड़ती हैं। उनमें काम्पिटीशन नहीं होता। कार की रफ्तार 350 किलोमीटर प्रति घंटा तक होती है।

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क्या सचमुच राजा सिकंदर ने जीता था दुनिया को?

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आज हम आपको दुनिया के उस राजे के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने पूरी दुनिया जितने का सपना देखा और वह उसको पूरा करने में नाकाम रहा था. जी आप जान गए होंगे कि हम दुनिया के प्रसिद्ध राजा सिकंदर की बात कर रहे हैं. आपको यह भी बता दें कि सिकंदर राजा ही एक ऐसा राजा था, जिसका अंग्रेजी और हिंदी दोनों में नाम अलग-अलग था. अंग्रेजी में उसका नाम ‘Alexander’ था और हिंदी में ‘सिकंदर’ था. आइये जानिए सिकंदर के बारे में वो बातें जो आपने आज तक नहीं सुनी होगी।


सिकंदर राजा का जनम

आपको बता दें कि सिकंदर फिलिप मकदूनिया के राजा का बेटा था, और उसका जनम 356 ईस्वी में ग्रीक में हुआ था. जब सिकंदर की उम्र 19 साल की थी, जब उनके पिता का देहांत हो गया था. पिता के मरने के बाद सिकंदर ने राजा बनने के लिए अपने भाईओं को मार दिया था।

गुरु ने दिखाया रास्ता

जैसे कि हम सब जानते हैं कि सिकंदर का दुनिया जितने का बहुत बड़ा सपना था, तो आपको बता दें कि यह सपना उसको उसके गुरु अरस्तु ने दिखाया था. अरस्तु एक महान इंसान थे, आज-कल की पुस्तकों में भी अरस्तु के विचारों का उल्लेख जरूर होता है।

विजयपथ का सफर

सिकंदर ने अपने विजयपथ के दौरान सबसे पहले अपने राज्य के आसपास क्षेत्रों को जितना शुरू किया था। फ़ारसी राज्य को जितने के लिए सिकंदर को 10 साल का समय लग गया था. इसके बाद वह अपनी सेना को लेकर एशिया की तरफ चला गया था।

पोरस के साथ हुआ भयंकर युद्ध

आपको बता दें कि जब सिकंदर राजा भारत आया तो उसने छोटे-छोटे राज्य को जितना शुरू कर दिया था, लेकिन जब उसका युद्ध पोरस के साथ हुआ तो उसकी सेना को काफी ठेस पहुंची थी, और अंत उसने पोरस के राजा पुरु सिंध को युद्ध रोकने को कहा और वह उनके बीच यह समझौता हुआ की जिस राज्य को सिकंदर जीतेगा उस पर पोरस का कब्ज़ा होगा।

नदी के किनारे से वापिस घर लोटा सिकंदर

सिकंदर की सेना युद्ध करते-करते थक चुकी थी और वह जब व्यास नदी पर पहुंची, तो उनको सन्देश मिल चूका था कि नदी के पार नंदवंशी राजा के पास सैनिकों की संख्या बहुत ज्यादा है, और उनको एहसास हुआ कि वह नंदवंशी को हराना बहुत मुश्किल है, तो सिकंदर को अपनी सेना के साथ नदी के किनारे से ही वापिस लौटना पड़ा था।

सिकंदर की मौत

सिकंदर का सबसे बड़ा सपना था विश्व विजेता बनने का, जो कि पूरा नहीं हो सका था. इसके पश्चात वह उदास रहने लगा और शराब का सेवन भी ज्यादा करने लग गया था. अंत 33 साल की उम्र में मलेरिया की वजह से उसकी मौत हो गई थी।

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साइकिल के आविष्कार से जुड़े रोचक तथ्य!

साइकिल का आविष्कार एक क्रांतिकारी अविष्कार था जिसने हमारे जीवन में महत्वपूर्ण परिवर्तन किया। क्या आपको पता है कि साइकिल का आविष्कार कैसे हुआ, किसने किया और कब किया था? तो आइये जानिए इसके अविष्कार के बारे में।

सबसे पहले आपको बता दें कि ‘बाइसाइकिल‘ एक फ्रांसीसी शब्द है। वर्ष 1860 में पहली बार फ्रांस में ही दो पहियों वाली सवारी को ‘बाइसाइकिल’ कहा गया था।

वर्ष 1880 में इंगलैंड के निवासी हैंस रोनाल्ड ने चेन वाली बाइसाइकिल का आविष्कार किया था। यह बाइसाइकिल बनाते समय इस बात पर ख़ास ध्यान रखा गया था कि, साइकिल के दोनों टायर एक जैसे होने चाहिए।

वर्ष 1890 के मध्य में बीसवीं सदी तक की अवधि को ‘गोल्डन एज ऑफ बाइसाइकिल‘ कहा जाता है। इसी समय साइकिल को नई शक्ल मिली थी, और इसमें बराबर आकार के पहिए, स्टीयरिंग और पहियों में चेन भी इसी दौरान लगाई गई थी।

माना जाता है कि, 1817 में जर्मनी के बैरन कार्ल वॉन ड्रेइस ने सर्वप्रथम साइकिल की रूप-रेखा तैयार की थी। दो पहियों वाली वह पहली बाइसाइकिल थी। वर्ष 1817 में उन्होंने 14 कि.मी. तक इसकी सवारी की थी।

वह अपनी सवारी को ‘रनिंग मशीन‘ कहते थे। इसमें पैडल नहीं लगा हुआ था। इसे चलाने के लिए बाइसाइकिल की सीट पर बैठकर चालक को जमीन पर दौड़ लगानी पड़ती थी।

क्या आप जानते हैं?

एक कार की जगह 15 साइकिलें खड़ी हो सकती हैं।

दुनिया की सबसे बड़ी टंडम साइकिल लगभग 20 मीटर लम्बी है, जिस पर 23 लोग बैठ सकते हैं।

पहली साइकिल रेस 31 मई, 1868 को हुई थी। इसका आयोजन पैरिस के पार्क दे सेंट क्लाऊड में किया गया था। यह रेस 1200 मीटर की थी। इसके विजेता रहे थे इंगलैंड के जेम्स मूरे।

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व्यक्ति जो मनुष्य से नहीं पक्षियों से बात करता है

जब ईश्वर किसी इंसान के शरीर में कोई कमी छोड़ देते हैं तो अक्सर उसे कोई न कोई ऐसी खुबी भी देते हैं जो आम इंसानों में देखने को नहीं मिलती है। ऐसे ही एक शख्स हैं रजाली बिन मोहम्मद हाबिदिन। बचपन से ही सुनने में लाचार रजाली सिंगापुर के जूरोंग बर्ड पार्क में पक्षियों की देखरेख का काम करते हैं। दिलचस्प है कि पार्क में नियुक्त अन्य केयरटेकरों की तुलना में पक्षियों के साथ उसके संबंध कहीं अधिक प्रगाढ़ हैं और इसी वजह से पार्क के सभी कर्मचारी अब उसे ‘बर्ड विस्परर’ (पक्षियों से कानाफूसी करने वाला) कहने लगे हैं।

बचपन में ही सुनने की 80 प्रतिशत क्षमता खो देनेवाले रजाली को पार्क में काम करते हुए दो दशक से अधिक हो चुके हैं और अब वह डिप्टी हैड एवियन कीपर के पद पर नियुक्त हैं। वह इशारों, शारीरिक भाव- भंगिमाओं तथा ख-खर जैसी आवाजेंनिकाल कर पक्षियों के साथ ‘बात’ करते हैं।

इशारों ही इशारों में वह कहते हैं, वे सभी मेरे मित्र हैं। ”पार्क के एक असिस्टैंट क्यूरेटर एंगेलिन लिम कहते हैं” वह न जाने कैसे पक्षियों के साथ संवाद स्थापित करना जानते हैं। जो हममें से और कोई नहीं कर पाता है। वह केवल देख कर जान जाते हैं कि कोई पक्षी ठीक है या नहीं।”

हालांकि, सहकर्मियों के साथ बात करना उनके लिए पक्षियों से कहीं अधिक कठिन है। एक दर्जन कर्मचारियों का नेतृत्व करने वाले रजाली को उन्हें निर्देश देने के लिए कई तरह के इशारे करने पड़ते हैं और उनकी बात समझने के लिए उनके होंठ पढ़ने पड़ते हैं।

करीब 5 हजार पक्षियों वाले इस पार्क में तोतों से लेकर होर्नबिल तक विभिन्न प्रजातियों के पक्षी रखे गए हैं। इनमें विश्व के सबसे बड़े तोते’ हायासिंथ मैकाऊ’ भी शामिल हैं। | सभी पक्षी उन्हें अच्छे से जानते हैं और उनके निर्देशों का सहर्ष पालन करते हैं। रजाली के हाथों से खाना तो उन्हें विशेष रूप से प्रिय है।

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