जानिए, दिमाग को स्वस्थ रखने के यह 10 उपाय!

हमारे शरीर के जोड़ों और फेफड़ों की ताकत उम्र के साथ-साथ धीरे- धीरे कम होती रहती है, लेकिन हमारे दिमाग के विचार बढ़ते ही जाते हैं. यह बात कोई मायने नहीं रखती कि आपकी उम्र क्या है? लेकिन आप उम्र के किसी भी पड़ाव में नई-नई चीजें सीख सकते हैं. यह हैं आपके दिमाग को तेज़ करने और इसे स्वस्थ रखने के 10 उपयोगी टिप्स.

नियमित व्यायाम (Regular Exercise)

चिकित्सा वैज्ञानिकों का मानना है कि नियमित व्यायाम करने से आप अपने दिमाग को लंबे समय तक स्वस्थ रख सकते हैं. आपका दिल और फेफड़े ट्रेडमिल पर दौड़ने से मज़बूत होते हैं और पहले से भी ज़्यादा स्वस्थ रहते हैं.
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पौष्टिक भोजन

foods-for-a-nutritious-dietबहुत ज़्यादा या बहुत कम भोजन आपके दिमाग के लिए नुकसानदायक हो सकता है. आपका भोजन उच्च फाइबर, वसा और प्रोटीन वाला होना चाहिए. आपके पेट द्वारा अच्छी तरह से पचाया गया भोजन आपके दिमाग को ऊर्जा प्रदान करता है.

 

अपनी डाइट का ध्यान रखें

keep-track-of-your-dietज़्यादा भोजन खाने से आपका दिमाग सुस्त बन जाता है और लंबे समय में यह आपके दिमाग पर तक बुरा प्रभाव डाल सकता है. वहीँ दूसरी और बहुत कम खाने से आपको एनोरेक्सिया (anorexia) जैसी लत लग सकती है. कई वैज्ञानिक शोधों में पाया गया है कि मानव के दिमाग की स्मृति, भ्रम और व्याकुलता सीधे उसकी खाने की आदतों से जुड़ी होती है.

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अपने शरीर का ध्यान रखें

take-care-of-your-bodyबहुत सारी बीमारियाँ, जैसे कि टाइप 2 मधुमेह, मोटापा और उच्च रक्तचाप मानव के दिमाग पर बहुत बुरा असर डालती हैं. अत: इन बीमारियों को समय रहते कंट्रोल करने में ही भलाई है. अपने दिमाग को स्वस्थ के लिए शराब, धूम्रपान आदि नशों से दूर रहें, साथ ही अपने शरीर को मोटापे से बचाएं.

भरपूर आराम करें

get-completely-resetजब हम आराम करते हैं या अच्छी नींद लेते हैं, तो इससे हमारी यादाश्त में सकारात्मक परिवर्तन आता है. सोते समय हमारा दिमाग बहुत सी कड़वी और गैर-जरूरी यादों को भूल जाता है. वैज्ञानिकों ने अध्ययन किया है, जब हमारे शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिलता, उस समय हमारा दिमाग ज़रूरी चीज़ों को भूलने लगता है और ऐसे में हमारे लिए नई चीज़ों को याद रखना मुश्किल हो जाता है.

अपनी कॉफ़ी का आंनद लें

coffeeवैज्ञानिकों को ऐसे कई प्रमाण मिले हैं, जिससे यह सिद्ध होता है कि संतुलित कॉफ़ी पीने की आदत आपके दिमाग के लिए अच्छी होती है. एक लंबे अध्ययन में सामने आया है कि कॉफ़ी पीने से आप में अल्झाइमर्स (Alzheimer’s) जैसी भूलने की बीमारियों होने की सम्भावना में 30 से 60 प्रतिशत की कमी आ जाती है.

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मच्छली खाना दिमाग के लिए अच्छा है

fishकई अध्ययनों में सामने आया है कि मच्छली खाने से मानव के शरीर को फायदा मिलता है. मच्छली में ओमेगा-3 नाम का आवश्यक फैट एसिड होता है, जो हमारे दिमाग के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है. यह हमारे दिमाग को अवसाद (depression) और मति-भ्रम से बचाता है.

अपनी लाइफ को एन्जॉय करें

enjoy-lifeवैज्ञानिकों का मानना है कि संतुलित जीवन शैली, योग करना और सामाजिक गतिविधियां हमारे में तनाव को कम कर देती हैं. वहीँ तनाव में रहने वाले व्यक्ति का शरीर और दिमाग जल्दी थक जाता है और अच्छी तरह से काम नहीं करता.

बनावटी सप्लीमेंट ना खाएं (Skip the supplements)

skip-the-supplementsहाल ही वैज्ञानिकों ने गैर-प्राकृतिक यानि बनावटी (Artificial) विटामिन और सप्लीमेंट पर अध्ययन किया है, जिसमें पता लगा है कि इन सप्लीमेंट में कई ऐसे तत्व होते हैं, जो हमारे दिमाग पर बुरा प्रभाव छोड़ते हैं. अच्छा हो यदि हम फल, सब्जियों और दूध आदि से मिलने वाले सप्लीमेंट पर ही निर्भर हों.

दिमाग की कसरत करें

brain-exerciseपहेलियाँ सुलझाना, सुडोकु खेलना और शतरंज जैसे खेल आपके दिमाग को अच्छी तरह से शेप में रखते हैं. नियमित रूप से दिमाग वाले खेल खेलने से आप अपने दिमाग को लंबे समय तक स्वस्थ रख सकते हैं, जिससे आपकी यादाश्त भी बढ़ती है.

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मानव के दिमाग के बारे में अदभुत तथ्य

बॉलीवुड के अजीब और दिलचस्प तथ्य

यह हैं बॉलीवुड के अद्भुत और दिलचस्प तथ्य जिनके बारे में आप नहीं जानते हो

बॉलीवुड की अभिनेत्री आलिया भट्ट ने फिल्म “संघर्ष” से चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर फिल्मी करियर की शुरुआत की थी.

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बॉलीवुड के अभिनेता “शाहरुख़ खान” ने अपने करियर की शुरुआत अरुंधति रॉय द्वारा निर्देशित फिल्म “In Which Annie Gives It Those Ones” से की थी.

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“क्या आप क्लोज-अप करते हैं ?” विज्ञापन (ad) में दीपिका पादुकोण ने अपना पहला किरदार निभाया था. यह विज्ञापन दीपिका पादुकोण ने अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत के कुछ साल पहले किया था.

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राजकुमार हिरानी ने एक मशहूर निर्देशक बनने से पहले फेविकोल के विज्ञापन में छोटे से किरदार की भूमिका को निभाया था.

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राजकुमार हिरानी की तरह ही कटरीना कैफ ने भी फ़िल्मी करियर की शुरुआत से पहले सन 2000 में फेविकोल के विज्ञापन में काम किया था.

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देव आनंद और आदित्य पंचोली की फिल्म “अव्वल नंबर” में उनकी मृत सौतेली माँ की फोटो में अमेरिका की मॉडल सिंडी क्राफोर्ड थी.

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फिल्म “रंग दे बसंती” फिल्म की शुरुआत में वह घड़ी दिखाई गई थी, जो भगत सिंह की फांसी के समय ठीक 7:30 PM पर रुक गयी थी. यह घड़ी “रंग दे बसंती” में सू (Sue) नाम की लड़की के दादा की थी, जिन्होंने भगत सिंह की फांसी को अपनी आँखों से देखा था.

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वर्ष 2001 में बनी फिल्म “दिल चाहता है” में आमिर खान की भविष्य की पत्नी किरण राव ने छोटी सी भूमिका निभाई थी.

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जानिए रेशम कीट (Silkworm) रेशम का उत्पादन कैसे करता है!!

रेशम की साड़ी और रेशम के कपड़े हर किसी को पसंद होते हैं। रेशम कीट (Silkworm) ऐसा जीव है, जिससे रेशम बनता है। इसका वैज्ञानिक नाम Bombyx Mori है। दुनिया का सबसे ज़्यादा रेशम का उत्पादन चीन में किया जाता है। चीन में रेशम की खेती और रेशम का कारोबार प्राचीन समय से ही किया जाता है। क्या आप जानते हैं कि रेशम कीट, रेशम का उत्पादन कैसे करता है? अगर नहीं, तो आइए जानते हैं रेशम कीट से रेशम कैसे बनता है।

रेशम कीट से रेशम का उत्पादन

रेशम कीट मात्र दो या तीन दिन तक ही जिंदा रहता है और इतने समय में ही मादा रेशम कीट शहतूत की पत्तियों पर अण्डे दे देती है। हर अण्डे से लगभग 10 दिनों में ही एक मादा रोशम कीट लार्वा निकलता है, जो फिर से 30 से 40 दिनों में पहले लंबा होता है और फिर सुस्त होकर गोल आकृति में आ जाता है।

लगभग 3 दिनों तक रेशम कीट अपने शरीर को हिलाते हुए, लार ग्रन्थियों को निकालता है, जिससे एक लंबे धागे का घोल तैयार होता है, जिसे कोया या ककून (Cocoon) कहते हैं। वायु के संपर्क में आते ही ककून, सूखकर रेशमी धागा बन जाता है, जो लगभग 1000 मीटर लंबा होता है। ककून का बंद लार्वा एक प्यूपा (Pupa) में बदल जाता है।

12 से 15 दिनों के अंदर प्यूपा एक कीट में बदल जाता है, जो क्षारीय स्राव की सहायता से ककून को एक ओर से काटकर बाहर निकल आता है। रेशम को प्राप्त करने के लिए ककून को कीट बनने से पहले ही खौलते पानी में डालकर पूर्णकीट को भीतर-ही-भीतर मार देते हैं और धागे को अलग कर लेते है। इस प्रकार से रेशमकीट से रेशम बनता हैं और इसके बाद इन रेशम के धागों की मदद से कपड़ा आदि वस्तुओं का निर्माण होता हैं।

रेशम के बारे में कुछ तथ्य

  • पूरी दुनिया में रेशम का चलन चीन से प्रारम्भ हुआ था।
  • भारत में सबसे अधिक शहतूत रेशम कीट (Bombyx Mori) का पालन किया जाता है। भारत इस समय रेशम की सभी ज्ञात व्यापार में प्रयोग वाली किस्मों मलबरी, ट्रॉपिकल टसर, ओक टसर, इरी और मूंगा का सफलतापूर्वक उत्पादन करने वाला एकमात्र देश है।
  • साल 1943 में पश्चिम बंगाल के बहरामपुर में केन्द्रीय रेशम अनुसंधान प्रक्षेत्र की स्थापना की गई थी।
  • रेशम का धागा एक तरह का प्रोटीन है, जबकि कपास एवं जूट का सूत सेल्यूलोज होता है।

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भारत के 10 प्रसिद्ध ऐतिहासिक गुरुद्वारे

भारत एक ऐसा देश है, जहाँ के धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल काफी प्रसिद्ध हैं। जैसे हिन्दू धर्म में मंदिर होते है, मुस्लिम धार्मिक स्थलों को मस्जिद कहा जाता है, ऐसे ही सिख धार्मिक स्थलों को गुरुद्वारा कहा जाता है।

भारत में सिख धर्म एक महत्वपूर्ण और व्यापक रूप से प्रचलित धर्म है। पूरे भारत में सिख धर्म को मानने वाले अनुयायी है। आज हम आपको भारत के उन प्रसिद्ध गुरुद्वारों के बारे में बता रहे हैं, जहां अलग ही प्रकार की शांति का अनुभव होता है और जहां न केवल सिख धर्म के लोगों की ही नहीं, बल्कि अन्य धर्मों के लोगों की भी बहुत आस्था है।

श्री हरमंदिर साहिब, अमृतसर, पंजाब (Golden Temple)

श्री हरमंदिर साहिब को श्री दरबार साहिब और स्वर्ण मंदिर (Golden Temple) भी कहा जाता है। इस गुरुद्वारा साहिब को बचाने के लिए महाराजा रणजीत सिंह जी ने इसके ऊपरी हिस्से को सोने से ढंक दिया था, इसलिए इसे स्वर्ण मंदिर का नाम दिया गया था।

श्री हरमंदिर साहिब की नींव सन् 1588 में सिक्खों के पाँचवे गुरु – गुरु अर्जन देव जी ने रखी थी। श्री हरमंदिर साहिब को भारत के मुख्य दर्शनिक स्थलों में गिना जाता है। यहां पूरी दुनिया से पूरे साल बड़ी संख्या में श्रद्धालू आते हैं।

श्री हेमकुंड साहिब, उत्तराखंड (Shri Hemkund Sahib)

गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब, उत्तराखंड के चमोली जिले में है। यह गुरुद्वारा समुद्र स्तर से 4000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह गुरुद्वारा साहिब सिखों का सबसे पवित्र और प्रसिद्ध तीर्थ स्थान है। यह गुरुद्वारा साहिब एक बर्फ़ीली झील किनारे सात पहाड़ों के बीच स्थित है।

गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब की स्थापना सन् 1960 के आस-पास हुई थी। श्री हेमकुंड साहिब सिखों के दसवें गुरु – गुरु गोबिंद सिंह जी को समर्पित है। श्री हेमकुंड साहिब को दर्शनों के लिए मई से अक्टूबर तक ही खोला जाता है। गुरुद्वारा साहिब को बर्फबारी के कारण अक्टूबर के अंत में बंद कर दिया जाता है और यह अप्रैल महीने तक बंद रहता है।

श्री हजूर साहिब, नांदेड़, महाराष्ट्र (Shri Hazur Sahib)

गुरुद्वारा श्री हजूर साहिब, महाराष्ट्र के नांदेड़ शहर में गोदावरी नदी से कुछ ही दूरी पर स्थित है। गुरुद्वारा श्री हजूर साहिब सिखों के 5 तख्तों में से एक है। इस गुरुद्वारा  साहिब को सच-खण्ड कहा जाता है।

सिखों के 10वें और आखिरी गुरु – श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने कुछ अन्तिम महीने इस स्थान पर गुज़ारे थे। महाराजा रणजीत सिंह के आदेश के बाद इस गुरूद्वारा साहिब का निर्माण सन 1832-1837 के बीच हुआ था। महाराष्ट्र का नांदेड़ एक अनाम सा शहर था, जो गुरु जी के साथ जुड़ने के बाद सचमुच अमर हो गया।

पांवटा साहिब, हिमाचल प्रदेश (Paonta Sahib)

गुरुद्वारा पांवटा साहिब, हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में जमुना नदी के किनारे स्थित है। यह गुरुद्वारा साहिब सिखों के दसवें गुरु – श्री गुरु गोबिंद सिंह जी को समर्पित है।

इस जगह पर गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने जीवन के चार साल बिताए थे और इसी जगह पर गुरु जी ने दशम ग्रन्थ की रचना की थी। यहाँ एक म्यूजियम भी है, जिसमें गुरु गोबिंद सिंह जी का इस्तेमाल किया हुआ सामान भक्तों के दर्शन के लिए रखा गया है।

फतेहगढ़ साहिब, पंजाब (Fatehgarh Sahib)

फतेहगढ़ साहिब, पंजाब के फतेहगढ़ जिले में स्थित है। यह गुरुद्वारा साहिब सिखों का मुख्य धार्मिक स्थल, श्रद्धा और विश्‍वास का प्रतीक है। यहां साल 1704 में गुरु गोबिंद सिंह जी दो छोटे बेटों साहिबज़ादा फतेह सिंह और साहिबज़ादा जोरावर सिंह को फौजदार वज़ीर खान ने दीवार में जिंदा चुनवा दिया था।

उस वक्त साहिबज़ादा फतेह सिंह की उम्र सिर्फ 6 साल और साहिबज़ादा जोरावर सिंह की उम्र सिर्फ 8 साल थी। साहिबज़ादा फतेह सिंह और साहिबज़ादा जोरावर सिंह अंतिम बार यहीं खड़े हुए थे और इसी स्थान पर उन्‍होंने अंतिम सांस ली थी। साहिबज़ादों की शहादत की याद में यह गुरुद्वारा साहिब बनाया गया था।

शीश गंज साहिब, दिल्ली (Sis Ganj Sahib)

गुरुद्वारा शीश गंज साहिब, दिल्ली का सबसे पुराना और ऐतिहासिक गुरुद्वारा है। यह गुरुद्वारा साहिब दिल्ली के चांदनी चौक में स्थित है। यह गुरुद्वारा सिखों के नौवें गुरु – गुरु तेग बहादुर जी और उनके अनुयायियों को समर्पित है। इस जगह गुरू तेग बहादुर जी को मौत की सजा दी गई थी, जब उन्‍होंने मुगल बादशाह औरंगजेब के इस्‍लाम धर्म को अपनाने के प्रस्‍ताव को ठुकरा दिया था।

तख्त श्री दमदमा साहिब, पंजाब (Dam Dama Sahib)

तख्त श्री दमदमा साहिब, पंजाब के बठिंडा से 28 किमी दूर दक्षिण-पूर्व के तलवंडी साबो गांव में स्थित है। दमदमा का मतलब ‘श्वास या आराम स्थान’ होता है। मुगल अत्याचारों के खिलाफ लड़ाई लड़ने के बाद गुरु गोबिंद सिंह जी यहाँ आकर रुके थे। इस वजह से इसे ‘गुरु की काशी’ के रूप में भी जाना जाता है।

मणिकरण साहिब, हिमाचल प्रदेश (Manikaran Sahib)

गुरुद्वारा मणिकरण साहिब, हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के भुंतर से उत्तर पश्चिम में पार्वती घाटी में व्यास और पार्वती नदियों के मध्य बसा है, जो हिन्दुओं और सिक्खों का एक प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। ऐसा कहा जाता है कि यह पहली जगह है, जहाँ गुरू नानक देव जी ने अपनी यात्रा के दौरान ध्यान लगाया था। यह गुरुद्वारा साहिब, जिस पुल पर बना हुआ है, उसी पुल के दूसरे छोर पर भगवान शिव का बहुत ही प्रसिद्ध मंदिर है। इसी वजह से यह जगह और भी खास मानी जाती है।

श्री केशगढ़ साहिब, आनंदपुर, पंजाब (Shri Keshgarh Sahib)

गुरुद्वारा श्री केशगढ़ साहिब, पंजाब के आनंदपुर शहर (जिला रोपड़) में स्थित है। आनंदपुर शहर की स्थापना सन् 1665 में सिखों के नौवें गुरू – गुरु तेग बहादुर सिंह जी ने करवाई थी। सिखों के दसवें गुरु – गुरु गोबिंद सिंह जी ने इस स्थान पर 25 साल व्यतीत किए थे।

तख्त श्री पटना साहिब, पटना, बिहार (Shri Patna Sahib)

तख्त श्री पटना साहिब, बिहार के पटना शहर में स्थित है। यहां सिखों के दसवें गुरु – गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म हुआ था। इस गुरुद्वारा साहिब का निर्माण महाराजा रणजीत सिंह द्वारा करवाया गया है। गुरु गोबिंद सिंह जी के जन्म स्थान के साथ- साथ यह स्थान गुरु नानक देव जी और गुरु तेग बहादुर सिंह जी की पवित्र यात्राओं से भी जुड़ा हुआ है।

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कुछ बादल काले और कुछ सफेद क्यों होते हैं!!

जब भी हम आसमान की तरफ देखते हैं, सफेद या स्लेटी रंग के बादलों से ढका एक विशाल नीला आसमान दिखाई देता है। ज़्यादातर बादल सफेद होते हैं, लेकिन जब आंधी या बारिश होने वाली होती है, तो काले बादल छा जाते है। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि बादल सफेद, स्लेटी या काले क्यों होते हैं?

क्या ये बादल आसमान की तरह नीले नहीं हो सकते, या सूरज की तरह पीले नहीं हो सकते? असल में इन बादलों के पीछे भी कुछ वैज्ञानिक तर्क है। इन बादलों का सफेद या गहरे रंग का (स्लेटी) होना कोई प्राकृतिक सुन्दरता का नमूना नहीं, बल्कि वैज्ञानिक प्रक्रिया है।

बादलों में बड़ी मात्रा में पानी भरा होता है। यह पानी छोटी-छोटी बूंदों या बर्फ़ के क्रिस्टल्स के रूप में जमा होता है। बादल इन बूंदों को एक निश्चित ऊंचाई पर ले जाकर छोड़ देते हैं। बादल अधिकांश सफेद ही होते हैं, पर कभी-कभी यह स्लेटी या गहरे रंगों के भी दिखते हैं। आइए जानते हैं ऐसा क्यों होता है:-

सफेद रंग के बादलों के पीछे का कारण

दरअसल बादलों में मौजूद पानी की बूंदें सूर्य से निकलने वाली किरणों के सभी रंगों को परावर्तित (Reflect) कर देती है और किरणे कई भागों में बंटकर बिखर जाती हैं, जिस कारण बाकि कोई रंग दिखाई नहीं देता और इस कारण बादलों में सिर्फ सफेद रंग बच जाता है और हमें बादल सफेद रंग के नज़र आते हैं।

काले रंग के बादलों के पीछे का कारण

बादलों के गहरे काले रंग के होने के पीछे का कारण बादलों की मोटाई पर निर्भर करता है। जब बादलों से होकर बहुत ही कम मात्रा में सूर्य की किरणें पास होंगी, तो वो बादल गहरे रंग का या काला दिखाई देगा।

बाकी रंगों के साथ भी ऐसा ही होता है, जब कोई वस्तु किसी रंग को परावर्तित करती है, तो हमें वो वस्तु उसी रंग की दिखाई देती है।

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क्या आप जानते हैं चीन से जुड़े ये 30 अजीबोगरीब तथ्य!!

चीन दुनियाभर में अपने अनोखे आविष्कारों की वजह से मशहूर है। अगर आप चीन में होंगें, तो आपको वहां कुछ न कुछ नया देखने को मिल ही जाएगा। वहां अजीबोगरीब तरीकों से बनी इमारतें, बिल्डिंग और सड़कें आदि और भी बहुत कुछ जिनकी कोई हद नहीं है। चीन दुनिया का ऐसा देश है, जिसके बारे में कुछ न कुछ जानने के लिए लोग हमेशा उत्सुक रहते हैं, चाहे वह उनकी संस्कृति हो या फिर उनका खान-पान। आज हम आपको चीन से जुड़े कुछ अनसुने 30 अजीबोगरीब तथ्य बताने जा रहें हैं।

  1. चीन में जब सैनिको को ट्रेनिंग दी जाती हैं, तो उनकी uniform की कॉलर में पिन लगा दी जाती हैं ताकि वह अपनी गर्दन ऊपर ही रख सके।
  2. शाम सात बजे के समय ज़्यादातर चीनी लोग एक ही टेलीविज़न चैनल देख रहे होते हैं।
  3. चीन में स्वादिष्ट भोजन के नाम पर हर साल 40 लाख बिल्लियां खाई जाती हैं।
  4. चीन में 3 करोड़ लोग गुफा जैसे घरो में रहते हैं।
  5. यहाँ के ज़्यादातर लोगों का पसंदीदा शौक टिकटें इकठी करना है।
  6. चीन में हर 30 सैकेंड में एक ऐसे बच्चे का जन्म होता हैं, जो जन्मजात दोष से प्रभावित होता हैं।
  7. यहाँ के लोग हर सेकंड में 50,000 सिगरेट पी जाते हैं।
  8. English बोलने वाले लोग America से ज़्यादा China में हैं।
  9. दुनिया में जितने सूअर हैं, उनके आधे अकेले China में हैं।
  10. अगर आप “Hot air Balloon” से धरती को देखने निकलोगें, तो China का यांगशुओ शहर सबसे खूबसूरत नज़र आएगा।
  11. यहाँ एक लड़के ने सिर्फ iPad खरीदने के लिए अपनी किडनी बेच दी थी।
  12. China में हर साल 45 बिलियन चॉपस्टिक इस्तेमाल की जाती हैं, इनके लिए हर साल 2 करोड़ पेड़ काटे जाते हैं।
  13. यहाँ के एक शख्स को 12 साल की सज़ा दी गई, क्योंकि उसने आखिरी चाइनीज़ बाघ को मारकर खा लिया था।
  14. China में कोई बिजनेस शुरू करने में सिर्फ 38 दिन का समय लगता हैं।
  15. China में खुदखुशी की इतनी घटनाएं होती हैं कि आपको नदी में से डेड बॉडी निकालने की भी नौकरी मिल सकती हैं।
  16. यह दुनिया का वो देश हैं, जहां सबसे ज़्यादा पत्रकार और Internet इस्तेमाल करने वाले लोग जेल में बंद हैं।
  17. यहाँ Internet की लत से परेशान लोगों के इलाज के लिए कैंप भी हैं।
  18. दुनियाभर में अंडो को पानी में उबाला जाता हैं, लेकिन China में लड़को के पेशाब में अंडे उबाले जाते हैं।
  19. China की आबादी इतनी ज़्यादा है कि अगर कह दिया जाए, एक लाईन बना के चलो, तो यह लाईन कभी खत्म ही नहीं होगी।
  20. यहाँ बिजिंग की हवा में प्रदूषण इतना हैं कि सांस लेने से होने वाला नुकसान दिन में 21 सिगरेट पीने के बराबर हैं।
  21. तीर कमान का उपयोग भी सबसे पहले China में ही किया गया था।
  22. 2010 में, China की शंघाई सिटी में 100 km लंबा ट्रैफिक ज़ाम लगा था ,यह जाम 12 दिनों तक रहा था।
  23. दुनिया का सबसे बड़ा shopping mall चीन में हैं, पर यह mall 2005 तक 99 प्रतिशत खाली था।
  24. यहाँ अमीर लोग अपने बदले दूसरों को जेल भेज सकते हैं।
  25. 2025 तक New York जैसे China में 10 शहर होंगे।
  26. 1400 साल पहले, दुनिया की पहली पेपर मनी China में बनाई गई थी।
  27. यहाँ चिड़िया के घोंसले से बनाए गए सूप की सबसे ज़्यादा मांग हैं, जिस घोंसले का इस्तेमाल इस सूप के लिए होता हैं, वो करीब डेढ़ लाख रुपये प्रति किलो की दर से बिकता है।
  28. अमेरिका की इतनी आबादी नही हैं, जितने China में सेलफोन हैं।
  29. दूसरे देशों में पढ़ाई करने गए 10 चीनी छात्रों में से 7 कभी वापस नहीं लौटेते।
  30. China में साल 2009 से ही Facebook, Twitter और The New York times बंद है।

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कॉमेडी किंग कपिल शर्मा के बारे में कुछ दिलचस्प बातें!

कॉमेडियन कपिल शर्मा फिल्म अभिनेता, टी.वी. होस्ट, निर्देशक के साथ-साथ एक गायक भी हैं. कपिल शर्मा अपने कॉमेडी शो से आपका सप्ताहांत पूरी तरह से रोमांचिक कर देते  है. उनका शो भारत सहित पूरी दुनिया में रहने वाले भारतीय पसंद करते हैं. क्या आप जानते हैं कि जो आदमी हमें इतना हंसाता है, उसकी निजी ज़िंदगी कैसी है? अभिनेता अनुपम खेर के शो “कुछ भी हो सकता है” में कपिल शर्मा ने अपनी निजी ज़िंदगी के कुछ ऐसे दिलचस्प किस्से शेयर किए थे, जिसके बारे में आप शायद ही जानते होंगे.

कपिल शर्मा का जन्म अमृतसर, पंजाब में हुआ था। इनके पिता पुलिस डिपार्टमेंट में हेड कांस्टेबल थे और माँ जनक रानी एक गृहणी है। कपिल ने एक स्थानीय (लोकल) पीसीओ से काम करना शुरू किया। इन्होंने अपनी पढाई हिन्दू कॉलेज, अमृतसर से की है.

कपिल शर्मा के परिवार के सदस्य पुलिस में हैं

कपिल शर्मा ने स्टैंड-अप कॉमेडी में बहुत बार पुलिस का किरदार निभाया है. असल जिंदगी में उसके परिवार के ज़्यादातर सदस्य पुलिसकर्मी हैं. उनके पिता श्री जीतेंद्र कुमार पंजाब पुलिस में हेड कांस्टेबल थे और उनके बड़े भाई भी पुलिस में है. वह मज़ाक में कहते हैं “पैदा होते ही मैने देखा इतने सारे पुलिस ऑफिसर! मैंने ऐसी क्या गलती कर दी?”

कपिल शर्मा अपने परिवार से बहुत प्यार करते हैं

जब पहली बार कपिल शर्मा ने एक शो में सबसे अच्छे कॉमेडियन का पुरुस्कार जीता था, तो उनको 10 लाख रूपये इनाम में मिले थे. कपिल शर्मा ने अपनी बहन को फ़ोन किया और जब बताया कि उन्होंने 10 लाख रूपये इनाम में जीते हैं, एक बार तो उसकी बहन को यह बात सुनकर यकीन ही नहीं हुआ. फिर कपिल शर्मा ने उस जीती हुई राशि को अपनी बहन की शादी के खर्च में लगा दिया. उसने कहा “पूरे परिवार में सबसे भव्य शादी मेरी बहन की थी और मैं उसकी शादी को ऐसा ही बनाना चाहता था“.

अपनी सफलता पर अहंकार नहीं

उनका मानना है कि दुनिया में मशहूर होना एक अलग बात है, लेकिन मशहूर होने के साथ-साथ अपने अंदर मानवता को कायम रखना अलग बात है. उन्होंने शो में कहा “कि वह उदासीन किस्म के व्यक्ति हैं. जब वह थके हुए एअरपोर्ट से निकलते हैं, तो उनके फैन उनको घेर लेते हैं और उनके साथ तस्वीर लेने की इच्छा जताते हैं. थके होने के बावजूद भी वह अपने फैन को मना नहीं करते. वह उनके साथ तस्वीरें खिंचवाते रहते हैं, क्योंकि वह अपने फैन्स से बहुत प्यार करते हैं.

हर समय लोगों को हंसाना बहुत मुश्किल काम होता है

कपिल शर्मा का मानना है कि हर समय लोगों को हंसाते रहना एक बहुत मुश्किल काम होता है. कपिल शर्मा ने शो में कहा “अब मैं लोगों को हंसाना एक जिम्मेदारी मानता हूँ. मेरे दर्शक मुझसे उन्हें हंसाने की उम्मीद करते हैं. मुझे अब लोगों को हंसाने में दबाव सा महसूस होता है. लेकिन मुझे लगता है कि मुझे ईश्वर द्वारा लोगों को हंसाने के लिए चुना गया है और मैं लोगों को हंसाने का काम पूरी निष्ठा से करता रहूँगा.

कपिल शर्मा एक भावुक व्यक्ति हैं

आपको लगता होगा कि कपिल शर्मा तो हर समय लोगों को हंसाते रहते हैं और वह हंसमुख स्वभाव के होंगे. लेकिन निजी ज़िंदगी में वह बहुत भावुक किस्म के व्यक्ति हैं. उन्होंने कहा “मैं लोगों पर बहुत जल्दी विश्वास कर लेता हूँ और मुझे जल्दी से रोना भी आ जाता है. ऐसा भी समय होता था, जब सभी लोग मुझे रुलाने की कोशिश करते थे, लेकिन मैं नहीं रोता था और कई बार मैं रोता ही रहता था. जब मैं अपने पिता के अंतिम संस्कार में था, तो मैं एक बार भी नहीं रोया था, लेकिन जब अंतिम संस्कार की औपचारिकताएं खत्म हो गयी, तो मैं बहुत रोया था. मैं अब भी अपने पिता के बारे में सोचकर रोता हूँ.

अपने संघर्ष को निवेश के रूप में मानता हूँ

कपिल शर्मा ने एक मशहूर कॉमेडियन बनने से पहले अपनी ज़िंदगी जीने के लिए बहुत ही अजीब किस्म के काम किए थे. वह पहले एक पी.सी.ओ (P.C.O) में काम करते थे, उन्होंने अपनी जीविका के लिए पेप्सी स्टोर में क्रेट्स उठाने का भी काम किया था. कपिल शर्मा ने इन सभी अनुभवों को प्रारंभिक निवेश की तरह लिया.

कपिल शर्मा ने अपनी ज़िंदगी में कोई लक्ष्य नहीं रखा

उनका मानना है कि वह अपने आपको बहुत भाग्यशाली व्यक्ति मानते हैं और वह अपनी ज़िंदगी से बहुत ज़्यादा की उम्मीद नहीं करते. उन्होंने कहा “मेरा ज़िंदगी में हमेशा से कुछ भी बनने का लक्ष्य नहीं रहा और मैं अपनी ज़िंदगी में कुछ बड़ा करने की उम्मीद भी नहीं करता. मुझे जो भी मिलता है, मैं उसी से खुश हो जाता हूँ. जब मैं फैक्ट्री में काम करता था, तो मैंने अपने कमाए हुए पैसों से म्यूजिक सिस्टम खरीदा था और मुझे उस समय म्यूजिक सिस्टम से ही बहुत ख़ुशी मिली थी, क्योंकि मुझे संगीत सुनना बहुत अच्छा लगता है “

अपनी सफलता का श्रेय अपनी माँ को देते हैं

किसी भी सफल आदमी के पीछे एक औरत का हाथ होता है और कपिल शर्मा के अनुसार उनकी सफलता का श्रेय उनकी माँ को जाता है. कपिल ने अनुपम खेर के शो में यह भी कहा कि मेरी माँ ने मुझे ज़िंदगी के हर मोड़ में प्रोत्साहित किया और आज मैं अपनी माँ की वजह से ही यहाँ तक पहुंचा हूँ. ज़िंदगी में हर हालत में मेरी माँ ने मुझे और मेरे बड़े भाई को वह सब कुछ दिया, जिसकी हमें जरूरत थी. मुझे लोगों को हंसाने का हुनर अपनी माँ से मिला है.

ज़िंदगी में किसी के साथ कुछ भी हो सकता है

कपिल शर्मा का मानना है कि ज़िंदगी में किसी के साथ कुछ भी हो सकता है. जब कपिल शर्मा ने ज़िंदगी में पहली बार कॉमेडी रियलिटी शो मुकाबले में अपना ऑडिशन दिया था, तो पहले ऑडिशन में उनको रिजेक्ट कर दिया गया था, लेकिन बाद में उसको फ़ोन आया कि उसको मुकाबले में चुन लिया गया है. जिसके बाद उस कॉमेडी रियलिटी शो को जीत लिया. कपिल शर्मा का मानना है अगर ज़िंदगी में एक रिजेक्ट व्यक्ति को मना करने के बाद फिर उसको स्वीकार कर लिया जाता है, तो ज़िंदगी में कुछ भी हो सकता है.

कुछ अन्य बातें

फरवरी 2013 में, कपिल शर्मा, फोर्ब्स इंडिया पत्रिकाओं में शीर्ष 100 हस्तियों के बीच में चुने गए थे और वह उस सूची में 96 वें स्थान पर थे. लोक सभा चुनाव 2014 में इन्हें दिल्ली चुनाव आयोग के द्वारा दिल्ली का ब्रांड अम्बेसेडर बनाया गया। कपिल शर्मा ने अब्बास-मस्तान की प्रदर्शित हिट फिल्म “किस किस को प्यार करूँ” में मुख्य भूमिका निभाई थी.

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मलाणा गाँव- रहस्यमयी व सबसे पुराना गणतंत्र

मलाणा- एक प्राचीन गांव

मलाणा, हिमाचल राज्य की कुल्लू घाटी के उत्तर पूर्व में स्थित एक प्राचीन गांव है. यह गांव पार्वती घाटी में चंद्रखानी (Chandrakhani) और देओटिब्बा (Deotibba) नाम की पहाड़ियों से घिरा हुआ मलाणा नदी के किनारे स्थित है. मलाणा गांव आधुनिक दुनिया से अप्रभावित है और इस गांव में रहने वाले लोगों की अपनी जीवन शैली और सामाजिक सरंचना है. यहां के लोग अपने रीति-रिवाजों का बड़ी सख्ती से पालन करते हैं. इस गाँव पर बहुत सी डाक्यूमेंट्रीज, जैसे कि Malana: Globalization of a Himalayan Village, और Malana, A Lost Identity बनी हुई हैं.

इतिहास

मलाणा गांव का इतिहास बहुत पुराना है. बहुत समय पहले इस गांव में “जमलू ऋषि” रहा करते थे. उन्होंने ही इस गांव के नियम-कानून बनाए थे. इस गांव का लोकतंत्र दुनिया का सबसे प्राचीन लोकतंत्र है. ऐसा माना जाता है कि जमलू ऋषि को आर्यों के समय से भी पहले से पूजा जाता है. जमलू ऋषि का उल्लेख पुराणों में भी आता है.

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मलाणा में रहने वाले निवासी आर्यों के वंशज माने जाते हैं. जबकि अन्य परंपरा के अनुसार मलाणा गांव के लोग अपने आपको सिकंदर के सैनिकों का वंशज मानते हैं. बहुत समय पहले मुगल शासक अकबर अपनी बीमारी का इलाज करवाने यहां पर आया था. जब अकबर पूरी तरह से ठीक हो गया, तो उसने यहां पर रहने वाले लोगों को कर से मुक्त करवा दिया था.

सामाजिक सरंचना

मलाणा गांव की सामाजिक सरंचना यहां के ऋषि जमलू देवता के अविचलित विश्वास व् श्रद्धा पर टिकी हुई है. पूरे गांव के प्रशासन को एक ग्राम परिषद के माध्यम से ऋषि जमलू के नियमों द्वारा नियंत्रित किया जाता है. इस ग्राम परिषद में 11 सदस्य होते हैं, जिनको ऋषि जमलू के प्रतिनिधियों के रूप में जाना जाता है. इस परिषद द्वारा लिया गया फैसला अंतिम होता है और यहां पर गांव के बाहर वालों के कोई नियम लागू नहीं होते. इस गांव की राजनीतिक व्यवस्था प्राचीन “ग्रीस” की राजनीतिक व्यवस्था से मिलती है. इस वजह से मलाणा गांव को “हिमालय का एथेंस” भी कहा जाता है.
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भाषा व बोली

मलाणा के निवासी एक रहस्यमयी भाषा बोलते हैं, जो Kanashi / Raksh (रक्ष) के नाम से जानी जाती है. कुछ लोग इसे राक्षस बोली मानते हैं. मलाणा की भाषा, संस्कृत और कई तिब्बती बोलियों का एक मिश्रण लगती है, लेकिन यह आस पास बोली जाने वाली किसी भाषा या बोली से मेल नहीं खाती.

कुछ भी छुआ तो जुर्माना

मलाणा के निवासी अपने आप को हर हाल में श्रेष्ठ मानते हैं और बाहर से आने वाले किसी भी व्यक्ति को घर, पूजा-स्थलों, स्मारकों, कलाकृतियों या दीवारों को छूने की इजाजत नहीं देते. अपनी विचित्र परंपराओं लोकतांत्रिक व्यवस्था के कारण पहचाने जाने वाले इस गांव में हर साल हजारों की संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं. इनके रुकने की व्यवस्था इस गांव में नहीं है. पर्यटक गांव के बाहर टेंट में रहते हैं.
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अगर इस गांव में किसी ने मकान-दुकान या यहां के किसी निवासी को छू (टच) लिया, तो यहां के लोग उस व्यक्ति से एक हजार से दो हज़ार तक रुपए वसूलते हैं. इस सूचना को दर्शाने के लिए जगह-जगह बोर्ड लगे हैं.

कुख्यात “मलाणा क्रीम”

मलाणा क्रीम “भांग/चरस मार्किट” में सबसे महंगी और सबसे अच्छी चरस मानी जाती है. इसका कारण यहाँ की चरस में पाया जाने वाला उच्च-गुणवता का तेल है. स्थानीय पुलिस व प्रशासन मलाणा में भांग की खेती को हतोत्साहित करने के लिए समय समय पर अभियान चलाते हैं, फिर भी काफी मात्रा में यहाँ से भांग की तस्करी बाहरी देशों में की जाती है.
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मलाणा गाँव सदा से ही इतिहासकारों के लिए शोध का विषय रहा है और आगे भी रहेगा.

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बॉलीवुड सितारों के बारे में कुछ ऐसी बातें जो आप नहीं जानते!

वैसे तो बॉलीवुड के हर अभिनेता-अभिनेत्री की निजी ज़िंदगी से जुड़ी हर छोटी से छोटी बात भी बड़ी खबर बन जाती है, लेकिन कुछ छोटी बातें ऐसी भी होती हैं, जो शायद ही लाइमलाइट का हिस्सा बनती हैं. इस पोस्ट में हम आपके चहेते बॉलीवुड सितारों से जुड़ी कुछ ऐसी ही रोचक बातें आपके साथ शेयर कर रहें हैं, जो आप नहीं जानते होंगे.

सलमान खान

  • सलमान खान को नहाने के साबुन इकठ्ठा करने का शौक है. उनके बाथरुम में बहुत सारे अलग-2 तरह के साबुनों का संग्रह हैं. उनके सबसे पसंदीदा साबुन कुदरती फलों और सब्जियों से बने साबुन हैं.
  • सलमान खान ने अब तक किसी अभिनेत्री को किसी भी फिल्म में लिप-किस नहीं किया है.

शाहरुख़ खान

  • शाहरुख़ खान को मुंह से आवाज़ करके खाना अच्छा नहीं लगता.
  • उनको आइसक्रीम खाना भी अच्छा नहीं लगता.
  • शाहरुख़ खान को 2 बार एअरपोर्ट पर सिर्फ इस वजह से पकड़ा जा चुका है, क्योंकि उनके नाम के पीछे खान लगता है.
  • शाहरुख़ खान अपने माता-पिता की कब्र पर साल में 4-5 बार जाते हैं.

आमिर खान

  • आमिर खान ने एक बार अपने सर से पूरे बाल कटा लिए थे, क्योंकि एक लड़की ने उनके प्यार को रिजेक्ट कर दिया था.
  • आमिर खान साल में सिर्फ एक फिल्म ही करते हैं.
  • आमिर खान कई अभिनेत्रियों के हाथ की हथेली पर थूक चुके हैं. कहा जाता है कि वह ऐसा उनकी (अभिनेत्री) हस्त-रेखा पढने के नाम पर शरारतवश ऐसा करते हैं.

रणबीर कपूर

  • रणबीर कपूर अब भी अपनी माँ से हर हफ्ते 1500 रूपये जेब खर्च के लिए लेते हैं.
  • रणबीर कपूर को रॉकस्टार फिल्म के लिए गिटार सीखना पड़ा था.

ऋतिक रोशन

  • ऋतिक रोशन जब कभी घर से बाहर निकलते हैं, तो वह अपने साथ कैमरा ले जाना नहीं भूलते. वह ऐसा बचपन से करते आ रहे हैं. ऋतिक रोशन को फोटो लेना और अपने द्वारा ली गयी फोटो इकट्ठा करना बहुत अच्छा लगता है. उनके पास तस्वीरों का बहुत बड़ा संग्रह है.
  • ऋतिक रोशन के दाहिने हाथ में दो अंगूठे हैं.
  • ऋतिक रोशन को बचपन से बोलते समय हकलाने की आदत है.

धर्मेन्द्र

  • शोले” फिल्म की शूटिंग के वक्त धर्मेन्द्र ने कथित तौर पर लाइटमैन को रिश्वत दे रखी थी, क्योंकि वह हेमा मालिनी के साथ बार-बार रोमांटिक दृश्य फिल्माना चाहते थे. लाइट मैन बार-बार लाइट खराब होने का बहाना लगा रहा था, जिससे सीन लम्बा खिंच रहा था.
  • धर्मेन्द्र ने अपनी पहली पत्नी प्रकाश कौर से तलाक लेने के लिए इस्लाम धर्म अपना लिया था, क्योंकि वह हेमा-मालिनी से शादी करना चाहते थे.

राज कपूर

राज कपूर बहुत अंधविश्वासी थे. उन्होंने अपनी फिल्म सत्यम शिवम सुन्दरम फिल्म के सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने से पहले शराब पीना, मांसाहारी भोजन करना छोड़ दिया था. लेकिन फिर भी यह फिल्म बुरी तरह पिट गयी थी.

अमिताभ बच्चन

  • अमिताभ बच्चन हमेशा से ही समय के पाबंद रहे हैं. वह फिल्म की शूटिंग के सेट पर चौंकीदार और गेटकीपर से भी पहले पहुंच जाते हैं, जिससे उन्हें गेट भी खुद खोलना पड़ता था.
  • अमिताभ बच्चन ने अभिनेता बनने से पहले माल-भाड़ा दलाल (Freight Broker) का काम किया.

ऐश्वर्या

  • ऐश्वर्या के पालतू कुत्ते का नाम “गुल्लू” है.
  • ऐश्वर्या का सबसे पहला विज्ञापन कैमलिन (Camlin) पेंसिल का था, जब वह 9वी कक्षा में पढ़ती थीं.

सुष्मिता सेन

  • सुष्मिता सेन को साँपों से प्यार है. उन्होंने अजगर (Python) पाल रखा है.
  • सुष्मिता सेन ने दो बच्चों को गोद ले रखा है. एक बच्चे को गोद लेने की प्रक्रिया में उन्हें अदालत जाना पड़ा था.

मीना कुमारी

ट्रेजेडी क्वीन मीना कुमारी के दाहिने हाथ में छह उँगलियाँ थी. वह हमेशा अपने दाहिने हाथ को छिपाने की कोशिश करती थी.

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117 सालों से लगातार जल रहा ये बल्ब!!!

बल्ब के आविष्कार के बाद से अब तक कई बदलाव आए। लोगों ने सीएफएल का इस्तेमाल किया और अब एलईडी लाइट्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि अब एलईडी लाइट्स का ज़माना है, फिर भी पुराने पीली रौशनी वाले बल्ब अब भी कई जगह देखे जा सकते हैं। किसी भी बल्ब की लाइफ एक साल से ज़्यादा नहीं होती है। लेकिन इस दुनिया में एक बल्ब ऐसा भी है, जो 117 सालों से न केवल सही सलामत है, बल्कि वह बल्ब लगातार जल भी रहा है।

दमकल केंद्र में लगा यह बल्ब

यह बल्ब अमेरिकी प्रांत कैलिफोर्निया के एक दमकल केंद्र में लगा हुआ है। यह साल 1901 से लगातार जल रहा है। “सेंटेनियल लाइट” के नाम से मशहूर हो चूका यह बल्ब अभी तक फ्यूज़ नहीं हुआ है। यह बल्ब 4 वॉट बिजली से चलता है और दिन के 24 घंटे जला रहता है।

1937 में पहली बार किया गया बंद

दमकल केन्द्र में कार्यरत कर्मियों ने डेलीमेल की एक खबर के हवाले से कहा है कि इस बल्ब को पहली बार साल 1937 में बिजली की लाइन बदलने के लिए बंद किया गया था और तार बदलने के बाद यह बल्ब फिर जलने लगा।

तार खराब हुई लेकिन बल्ब नहीं

साल 2013 में यह बल्ब अचानक बंद हो गया। लोगों को लगा यह बल्ब फ्यूज़ हो गया है। लेकिन जब इलेक्ट्रीशियन ने जांच की, तो पाया कि बल्ब तो सही सलामत है, बल्कि वहां पर लगी 76 साल पुरानी तार खराब हो गई है। तार की मरम्मत के बाद यह बल्ब फिर से जलने लगा।

गिनीज बुक में है नाम दर्ज

इस बल्ब को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल किया जा चुका है। साल 2010 में इस बल्ब को एक फ्रेंच-स्पेनिश डॉक्यूमेंट्री में भी शामिल किया गया था।

2001 में मनाया गया शताब्दी वर्ष

आपको जानकर हैरानी होगी कि साल 2001 में इस बल्ब का 100वां जन्मदिन मनाया गया था, जिसे दिखाने के लिए सीधे वेबकैमरा का उपयोग किया गया था।

म्यूजियम बन गया बल्ब

अब इस बल्ब को देखने के लिए दूर-दूर से लोग यहां आते हैं। करीब तीन दशकों से इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग आ रहे हैं। सच पूछा जाए, तो यह बल्ब अपने आप में एक म्यूजियम बन चुका है।

कंपनियों ने जानबूझ कर घटाई बल्बों की उम्र

डॉक्यूमेंट्री के अनुसार इस बल्ब को बनाने के बाद कंपनी को लगा कि अगर सारे बल्ब बहुत ही लंबे समय तक चलते रहे, तो लोगों को बल्ब बदलने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी और बिक्री थम जाएगी। डॉक्यूमेंट्री के मुताबिक 1924 में बल्ब कंपनियों के बीच एक गोपनीय बैठक हुई। इसी मीटिंग में बल्ब की उम्र घटाने की बात तय हुई। साल 1920 के दशक तक एक बिजली का बल्ब औसतन 2,500 घंटे जलता था, लेकिन आज एक बिजली का बल्ब 1,000 घंटे से ज़्यादा नहीं चलता।

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