मानव जीवन के बारे में अद्भुत तथ्य!

धरती पर मानव के अस्तित्व में आने से लेकर अब तक, मानव के लिए, सबसे अधिक शोध का विषय मानव ही रहा है. मनुष्य जीवन के बारे में नित नए खुलासे होते रहते हैं तथा नए तथ्य सामने आते रहते हैं. कुछ ऐसे ही तथ्य और आंकड़े हम आपके लिए लेकर आए हैं. यहाँ पेश हैं मानव जीवन के बारे में कुछ ऐसे तथ्य, जिनके बारे में आप बहुत कम जानते होंगे और जिन्हें जान कर आप हैरत में भी पड़ सकते हैं.

  1. मानव जीवन प्रत्याशा (Human Life Expectancy) पिछले 2,00,000 वर्षों की तुलना में 50 वर्ष से ज़्यादा बढ़ी है.
  2. मानव शरीर की त्वचा पर धरती पर रहने वाले कुल जीवों से भी अधिक जीव रहते हैं.
  3. औसतन आदमी अपने जीवन में लगभग 2,50,000 बार अंगड़ाई लेता है.
  4. अमेरिका का औसतन आदमी अपनी पूरी ज़िंदगी में 35 टन से भी ज़्यादा भोजन ग्रहण करता है.
  5. पूरी ज़िंदगी में मानव त्वचा 900 बार खुद को बदलती है.
  6. एक औसतन आदमी अपनी पूरी ज़िंदगी में इतना थूक पैदा करता है, जिससे की दो बड़े स्विमिंग पूलों को भरा जा सके.
  7. औसतन व्यक्ति अपने पूरे जीवन के तीन महीने शौचालय में बैठकर गुज़ार देता है.
  8. औसतन आदमी अपनी पूरी ज़िंदगी 18 करोड़ 37 लाख 55 हजार 600 कदम चलता है.
  9. औसतन आदमी अपनी पूरी ज़िंदगी का एक वर्ष सिर्फ औरतों को घूरने में ही बिता देते हैं.
  10. 80 प्रतिशत से भी ज़्यादा दुनिया के लोग प्रतिदिन 600 रुपए से भी कम पर अपना गुज़ारा करते हैं.
  11. औसतन अमेरिकी अपनी पूरी ज़िंदगी के 5 महीने फोन इस्तेमाल करने में ही गुज़ार देता है.
  12. आपके द्वारा प्राप्त की गयी नियमित उपलब्धियां आपको बड़ी उपलब्धियों से भी ज़्यादा ख़ुशी देती हैं.
  13. जिनके ज़्यादा मित्र होते हैं, वह उन लोगों से 3.7 साल ज़्यादा जीते हैं, जो अकेले रहते हैं.
  14. रोज़ाना तीन घंटों से भी अधिक एक जगह पर बैठने से आपकी जीवन प्रत्याशा के तीन साल कम हो जाते हैं.
  15. औरतें मर्दों से ज़्यादा लंबी उम्र तक जीवित रहती हैं, क्योंकि उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली धीमी होती है.
  16. औसतन आदमी अपनी पूरी ज़िंदगी के छह महीने दाढ़ी बनाने में गुज़ार देते हैं.
  17. जोग्गेर्स (Joggers) इस्तेमाल करने वाले लोग औसतन लोगों से छह साल ज़्यादा जीते हैं.
  18. औसतन अमेरिकी को पूरी ज़िंदगी में कैंसर होने का खतरा 50 प्रतिशत होता है.
  19. अगर आप 7 घंटों से भी कम नींद लेते हो, तो आप की जीवन प्रत्याशा कम हो जाती है.
  20. ज़्यादातर लोग 2 महीनों से ज़्यादा खाने के बिना जीवित रह सकते हैं, लेकिन अगर वह 11 दिनों से नींद ना लें, तो वह जीवित नहीं रह सकते.
  21. पूरी दुनिया में जो लोग पिछले 65 सालों से भी ज़्यादा समय से रह चुके हैं, उनकी कुल आबादी का दो तिहाई हिस्सा आज भी जीवित है.
  22. औसतन ब्रिटिश महिला अपनी पूरी ज़िंदगी में 1 करोड़ 62 हज़ार रुपए मेकअप में खर्च कर देती है.
  23. अगर पूरी दुनिया में हर एक इंसान अपने हाथों को अच्छी तरह से धोये और उन्हें साफ़ रखे, तो हर साल लाखों लोगों की ज़िंदगी बचाई जा सकती है.
  24. औसतन आदमी अपनी पूरी ज़िंदगी के 2 हफ्ते किस्सिंग करने में ही बिता देता है.
  25. 5 में से 1 अमेरिकी का मानना है कि उनके जीवनकाल में ही विश्व का अंत हो जायेगा.
  26. औरतें अपनी पूरी ज़िंदगी के एक साल यह सोच कर ही व्यर्थ कर देती हैं कि उनको कौन से कपड़े पहनने चाहिए और कौन से नहीं.
  27. मनुष्य अपनी ज़िंदगी के 25 साल नींद लेने में ही गुज़ार देता है.
  28. आपका दिमाग पूरी ज़िंदगी में 10 लाख करोड़ बिट्स सूचना जमा कर लेता है.
  29. जब बच्चा जन्म लेता है, तो उनके माता – पिता पहले 2 सालों तक अपनी 6 महीने की नींद को गंवा देते हैं.
  30. हर साल मनुष्य की जीवन प्रत्याशा 3 महीने बढ़ जाती है.
  31. औसतन ब्रिटिश महिला अपने जीवनकाल में अपने पास 111 पर्स रख चुकी होती है.
  32. 82 प्रतिशत अमेरिकी पुनर्जन्म पर विश्वास करते हैं.
  33. एक औसतन आदमी अपनी पूरी ज़िंदगी में इतना पैदल चलता है, जिससे पृथ्वी के पांच बार चक्कर लगाए जा सकते हैं.
  34. एक औसतन आदमी अपनी ज़िंदगी के 6 साल सपने देखने में ही गुज़ार देता है.
  35. आपके द्वारा इस्तेमाल की गई एक सिगरेट आपकी उम्र में 11 मिनट कम कर देती है.
  36. ब्रिटिश की औसतन महिला अपने जीवन काल में 150 अलग-अलग हेयर स्टाइल बनाती है.
  37. मानव के 110 साल जीने की संभावना 70 लाख में से एक है.
  38. अगर हम पूरी पृथ्वी के इतिहास को 24 घंटों में संक्षेपण कर के देखें, तो हम पाएंगे कि जीवन की शुरुआत सुबह के 4 बजे हुई होगी, जमीन पर पौदों की उत्पत्ति 11:41 PM  पर हुई होगी और मानव के इतिहास की शुरुआत 11:58:43 PM पर हुई होगी.

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टैक्नोलॉजी के रिश्तों पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव

टैक्नोलॉजी : आज हम ढेरों गैजेट्स के साथ अपना जीवन बिता रहे हैं. जहाँ भी देख लें, दो लोग बैठे हुए आपस में बातचीत कम करते हैं, अपने टैबलेट्स या फोन पर ज़्यादा व्यस्त नज़र आते हैं. आज हम अपने पार्टनर से ज़्यादा गैजट्स के साथ टाइम बिता रहे हैं और इसके कारण कई बार रिश्ते तक कमज़ोर हो जाते हैं. किसी भी रिश्ते में कम्युनिकेशन होना बहुत ज़रूरी है. हर दिन अपने फेसबुक को अपडेट करने के साथ अपने बैटर हाफ के साथ वक्त बिताएं, ताकि आपके रिश्ते बढ़िया रह सकें.

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वार्निग साइन

यदि आपका पार्टनर वीडियो गेम्स पर ज़्यादा समय बिता रहा है, तो इसे वार्निग साइन समझें, क्योंकि ज़्यादातर विवाहित जोड़ों का तलाक वीडियो गेम्स की लत की वजह से होता है. महिलाएं भी इस लत का शिकार हो जाती हैं. इसलिए दोनों को चाहिए कि देर रात तक चैटिंग या गेम्स में उलझने के बजाये अपने साथी के साथ वॉक करने के लिए निकलें, ताकि उस समय आप अपनी बातें एक दूसरे से सांझा कर सकें.

डिप्रेशन

टैक्नोलॉजी के साथ ज़रुरत से ज़्यादा भागीदारी हमारी सेहत का नुक्सान ही करती है. इस स्थिति में आप आसानी से नर्वस हो जाते हैं या फिर डिप्रेशन में आ जाते हैं. कई बार न चाहते हुए भी आप अपने पार्टनर पर भड़क सकते हैं! ऐसे में आपके रिश्ते पर असर पड़ेगा. अपनी सेहत और रिश्ते बचाने के लिए टी. वी., टैबलेट और स्मार्ट फोन का साथ छोड़ने की कोशिश करें!

फोन एडिक्शन यानि लत

यदि आप अपने स्मार्टफोन से पूरे दिन चिपके रहते हैं या आपका पार्टनर ऐसा कर रहा है, तो संभल जाएं, क्योंकि फोन एडिक्शन इन दिनों काफी कॉमन हो गया है. बहुत से लोग हैं, जो इस एडिक्शन से पीछा छुड़ाना चाहते हैं, परंतु यह आसान नहीं है. जब कभी भी आप अपने पार्टनर के साथ हों, तो फोन या टैब को अलग रख दें, इससे आपका रिश्ता मज़बूत होगा और आप इस लत से भी बच सकेंगे.

गैजेट्स दूर रखें

यूं तो पति-पत्नी के बीच बहस होना आम बात है, परंतु जब बहस टेक्नोलॉजी के मुद्दे पर हो, तो यह बात कुछ ठीक नहीं लगती. एक-दूसरे के लिए टेक्नोलॉजी गैजेट्स से एक दूरी बनाए रखें. रिश्ता मज़बूत करने के लिए यह एक बहुत छोटा-सा, लेकिन लाभदायक त्याग होगा.

नींद पर असर

टेक्नोलॉजी के कारण नींद न आना (यानि Insomnia) बहुत आम हो चुका है. हर रोज़ रात को सोने से पहले लैपटॉप पर समय बिताने से अच्छी नींद पर असर पड़ता है. इसके अलावा रात को देर तक बैठ कर अकेले टी. वी. देखना भी अच्छी नींद में बाधक है. यह आपके शरीर व सेहत के लिए अच्छा नहीं है. साथ ही, इससे किसी भी युगल यानि जोड़े के पारस्परिक रिश्ते में खटास आ सकती है.

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भारत के 15 सबसे विचित्र और रहस्यमयी स्थल!

आज हम आपको बताने जा रहे हैं भारत के कुछ विचित्र और रहस्यमयी स्थल।

राजस्थान के बंदाई में बुलेट बाबा का मंदिर

mysterious-place-in-india-bullet-baba-templeओम बन्ना एक पवित्र दर्शनीय स्थल है. राजस्थान के पाली जिले में लोग देवी देवताओं की मूर्तियों की पूजा नहीं करते हैं, बल्कि एक मोटर साइकिल की पूजा करते हैं. इसके पीछे एक रोचक कहानी है. सन 1988 में ओम सिंह राठौड़ नाम का शख्स अपनी बुलेट मोटरसाइकिल पर अपने ससुराल से अपने गाँव चोटिला आ रहा था.

रास्ते में एक पेड़ से टकराने से उसका एक्सीडेंट हो गया और उसी समय उसकी मृत्यु हो गयी. एक्सीडेंट के बाद उसकी बुलेट को रोहिट थाने ले जाया गया. अगले ही दिन पुलिस कर्मियों को वह बुलेट थाने में नही मिली. ऐसा माना जाता है कि मोटर-साइकिल अपने आप ही चल कर उस स्थान पर चली गयी थी. ऐसा तीन-चार बार हुआ. तभी से लोग इस मोटर साइकिल को पूजनें लगे हैं.

विस्तार से पढ़ें: बुलेट बाबा मंदिर, जहाँ होती है चमत्कारी मोटरसाइकिल की पूजा!

लेपाक्षी में लटका स्तंभ, आंध्र प्रदेश

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लेपाक्षी मंदिर में 70 खंभों के अलावा एक स्तंभ हवा में लटका हुआ है. यह बिना सहारे के मौज़ूद है. लोग मंदिर में आते हैं और स्तंभ के नीचे से वस्तुओं को गुज़ारते हैं. उनका मानना है कि ऐसा करने से उनके जीवन में ख़ुशहाली आएगी. लोगों का यह भी विश्वास है कि यह भगवान शिव का चमत्कार है.

तालकाड़ में मिनी डेजर्ट, कर्नाटक

karnatakaयह स्थान कावेरी नदी के तट पर स्थित है. कर्नाटक के चामराजनगर जिले में रेत के गहरे दफन है. चामराजनगर जिले में पहले 30 से भी अघिक मंदिर थे. 30 मंदिरों में से 5 मंदिर में लिंगम व शिव भगवान के 5 चेहरे प्रतिनिधित्व कर रहे थे. यह माना जाता है कि भगवान शिव की एक विधवा भगत ने इस जगह को शाप दिया था. इसके बाद यह गांव रेगिस्तान में बदल गया. आधे से ज़्यादा मंदिर रेत में दफन हो गयी और कावेरी नदी एक रहस्यमय तरीके से एक घूमते हुए भँवर में तब्दील हो गयी थी.

 केरल में कोदिन्ही जुड़वां गांव (Twin town)

mysterious-place-in-india-twin-village-kodinhiइस गांव में प्रवेश करने पर चारों तरफ हर किसी के जुडवाँ दिखाई देते हैं. कोदिन्ही गांव में 200 से भी अधिक जुड़वा बच्चे हैं. एक घर में तो तीन जुडवाँ बच्चें हैं. कोदिन्ही गांव की महिलाएं, जो गांव से बाहर शादी करतीं हैं, उनके भी जुड़वां बच्चें पैदा होते हैं. डॉक्टरों का मानना है कि इस अजीब घटना का कारण क्षेत्र के पानी में रसायन का मिलना है।

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शिवपुर में उड़ती चटान, महाराष्ट्र

mysterious-place-in-india-maharashtraहजरत कमर अली दरवेश मंदिर कोई असामान्य मंदिर नहीं है. भारत के प्रमुख रहस्यमय स्थानों में सूचीबद्ध है. यह एक विशेष चट्टान है, जिसका वजन 70 किलो है. यह माना जाता है कि एक सूफी संत ने कमर अली नामक इस पत्थर पर एक अभिशाप किया था और करीब 800 सालों से यह पत्थर शरीर निर्माण के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

राजस्थान के देशनोक में  “करणी माता मंदिर”

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करणी माता का मन्दिर एक प्रसिद्ध हिन्दू मन्दिर है. राजस्थान के बीकानेर जिले में स्थित है. बीकानेर से 30 किलोमीटर दूर देशनोक में स्थित है. माता मंदिर में चूहों को अत्यधिक शुभ माना जाता है. यहाँ चूहों की पूजा और रक्षा की जाती हैं. चूहों को पुनर्जन्म रिश्तेदार और करनी माता के परिवार के सदस्यों के रूप में माना जाता हैं. वास्तव में, सफ़ेद चूहों को करणी माता के बेटों के रूप में पूजा जाता है.

बिना दरवाजों के मकान, महाराष्ट्र

mysterious-place-in-india-door-less-houses-Shani-Shignapurशनि शिंगणापुर अहमदनगर से 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक छोटा सा गांव हैं. शनि शिंगणापुर में प्रसिद्ध शनि मंदिर भी है. शनि शिंगणापुर गाँव के घरो, स्कूलों और यहां तक इस गांव के किसी भी इमारत में कोई भी दरवाज़ा नहीं है. इस के बावजूद यहाँ एक भी अपराध नहीं होता है. गांव में अपराध दर शून्य है.

Read in detail: शनि शिंगणापुर: अनोखा गांव जहां घरों में नहीं हैं दरवाजे, शनि देव करते हैं रक्षा!

गुरुत्वाकर्षण पैलेस लखनऊ, उत्तर प्रदेश

mysterious-place-in-india-uttar-pradesh18 वीं सदी में एक आश्चर्यजनक निर्माण, जिसमें बड़ा इमामबाड़ा महल अरबी और यूरोपीय वास्तुकला के मिश्रण से बना एक रहस्यमय ऐतिहासिक स्थल हैं. गुरुत्वाकर्षण पैलेस हॉल की लंबाई लगभग 50 मीटर से भी अधिक हैं. सबसे अनूठी बात यह है कि इसमें एक भी स्तभ नही हैं. 18 वीं सदी में एक आश्चर्यजनक निर्माण, जिसमें बड़ा इमामबाड़ा महल अरबी और यूरोपीय वास्तुकला के मिश्रण से बना एक रहस्यमय ऐतिहासिक स्थल है.

लद्दाख के चुंबकीय हिल, लेह

mysterious-place-in-india-ladakhजम्मू-कश्मीर के लद्दाख  क्षेत्र के लेह में एक ऐसी पहाड़ी है, जिसे मैग्नेटिक हिल के नाम से जाना जाता है. लद्दाख की करामाती पहाड़ियों का सौंदर्य देखने में तो काफी सुंदर हैं, लेकिन ये पहाड़िया समुद्र तल से 11,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित सबसे असामान्य स्थानों में से एक हैं. सामान्यतौर पर फिसलन वाली जगहोँ पर वाहन को गियर में डालकर खड़ा किया जाता है. यदि ऐसा नहीं किया जाए, तो वाहन नीचे की ओर लुढ़ककर खाई में गिर सकता है. लेकिन इस मैग्नेटिक हिल पर वाहन को न्यूट्रल करने खड़ा कर दिया जाए, तब भी यह नीचे की और नहीं जाता.

इस मैग्नेटिक हिल से होकर विमान उड़ा चुके पायलटों का दावा है कि इस हिल के ऊपर से विमान के गुज़रते वक्त हल्के झटके महसूस किए जा सकते हैं. इसी लिए जानकार पायलट इस क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही विमान की गति बढ़ा लेते हैं, ताकि विमान को हिल के चुंबकीय प्रभाव से बचाया जा सके.

E.T कोंग्का दर्रे, लद्दाख

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कोंगका दर्रा या कोंगका ला भारत के जम्मू व कश्मीर राज्य के लद्दाख़ क्षेत्र में स्थित एक पहाड़ी दर्रा है. कोंग्का ला दर्रे 16,970 फुट की ऊंचाई पर भारत और चीन के बीच एक विवादित क्षेत्र है. यही कारण है कि यहाँ कम से कम लोग पहुचते हैं. भारत में सबसे रहस्यमय स्थानों में से एक भी है. स्थानीय लोगों और यात्रियों का दावा है कि यहां यूएफओ (UFO) का दिखाई देना आम बात है. पहले इन बातों पर घ्यान नही दिया गया, लेकिन जून 2006 में गूगल के सेटेलाइट से ली गई फोटो भी सामने आई, जिसने लोगों को चौंका दिया.

उत्तराखंड में चमोली झील

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ग्लेशियर एक सुंदर और खतरनाक जगहों में से एक हैं. रूपकुंड झील ग्लेशियर हिमालय में 16,500 फुट की ऊंचाई पर स्थित है. यह झील कंकाल झील के नाम से भी मशहूर है. रूपकुण्‍ड झील का इतिहास सैकड़ों मौतों से भरा है. 15वीं शताब्‍दी में यहां करीब 600 कंकाल मिले थे. उस दौर में इस इलाके में पहुंचना नामु‍मकिन हुआ करता था, लेकिन यह अब एक पर्यटक स्थल है. यहां सालाना बड़ी संख्‍या में पर्यटक आते हैं. इनमें युवा ज़्यादा होते हैं. लगभग 300-600 कंकाल हर साल रूपकुंड झील की सतह के नीचे देखे जाते हैं.

इडुक्की (Idukki) में लाल वर्षा, केरल

mysterious-place-in-red-rain-idukkiकेरला में आकर्षक तटीय करी इडुक्की या ‘लाल क्षेत्र’ की समृद्ध प्राकृतिक वैभव के साथ भारत के रहस्यमय स्थानों के रूप में प्रसिद्ध है. इडुक्की में लाल रंग की बारिश सबसे पहले 25 जुलाई 2001 को हुईं थी और 2 महीने में समय- समय पर हुई है. खून से लाल मूसलधार बारिश के बाद जब स्थानीय लोगों द्वारा जमीन के गिरे हुए लाल पानी को एकत्रित किया गया, तो वह साफ पानी में बदल गया. वैज्ञानिकों द्वारा विश्लेषण करने के बाद इस घटना का स्पष्टीकरण यह निकला की लाल कण स्थानीय क्षेत्र में बढ़ रही शैवाल हवाई बीजाणुओं के कारण हैं.

कांगड़ा में अमर ज्वाला, हिमाचल प्रदेश

mysterious-place-in-india-jwala-ji-templeज्वाला जी मंदिर हिमालय के कांगड़ा जिले में प्रसिद्ध धार्मिक स्थल में से एक हैं. यह भी भारत के रहस्यमय स्थानों में सूचीबद्ध हैं. इस मंदिर के अंदर खोखले पत्थर के बिच से लौ जल रहीं है, जो कि 100 वर्षों से जल रही है.

जातिंगा में आत्मघाती पक्षी के प्लेस, असम

mysterious-place-in-india-jatinga-assamमानसून में अंधेरे और धूमिल रातों के दौरान प्रवासी गांव के ऊपर उड़ते पक्षी, सिर के बल पेड़ों, इमारतों, डंडे से टकराने से अघिकतर की मौत हो जाती हैं. भारत में जातिंगा जगहों में सितंबर और अक्टूबर के दौरान हर साल बड़े पैमाने पर पक्षी आत्महत्या करते हैं. पक्षियों के इस तरह दुर्घटनाग्रस्त होने पर वैज्ञानिकों ने अलग- अलग तर्क दिए हैं, लेकिन कोई भी वैज्ञानिक असली वजह का पता नहीं लगा पाया है.

कुलधरा के परित्यक्त गांव, राजस्थान

mysterious-place-in-india-kuldhara-villageकभी पालीवाल ब्राह्मणों का इस गांव में निवास था, अब यहाँ ख़ाली मकान टूटे-फूटे मकान और एक पुराने मंदिर के साथ एक बंजर भूमि से ज़्यादा कुछ नहीं है. 2 सदियों पहले 1500 पालीवाल ब्राह्मण गांव से रात को भाग गए थे, तब से अब तक कोई भी यहाँ नही रहता और अब यह भारत में परित्यक्त स्थानों में से एक है. यह माना जाता है कि जब पालीवाल ब्राह्मण गांव छोड़ कर गए थे, तब वे एक अभिशाप छोड़ गए थे. जिसके बाद यहाँ कोई नहीं बस पाया.

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10 घटनाएँ, जो भारतीय होने पर शर्मिंदा करती हैं!

भारत में आज भी बच्चों को स्कूलों में पढ़ाया जाता है कि भारत एक महान देश है. लेकिन यह नहीं बताया जाता कि भारत में रहने वाले लोग कैसे हैं और उनका व्यवहार कैसा है?

भारत के इतिहास में हुई ऐसी 10 घटनाएँ, जो हमें भारतीय होने पर शर्मिंदा करती हैं – कोई भी देश उस समय तक एक अच्छा देश नहीं कहलाता, जब तक उस देश के लोग अच्छे देशवासी होने का प्रमाण नहीं देते.

इस लेख में हम आपको भारत में हुई ऐसी 10 घटनाओं के बारे में बतायेंगे, जिनको पढ़कर आपको भारतीय होने पर शर्म महसूस होगी.

विभाजन के समय हुई भयानक हिंसा

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सदियों बाद भारत जब ब्रिटिश शासन की गुलामी से आज़ाद हुआ, तो भारत का दो हिस्सों में बंटवारा हो गया. एक हिस्सा पाकिस्तान बना और एक हिस्सा भारत. इस विभाजन के परिणामस्वरुप गुलामी से आज़ाद होने का जश्न शोक में बदल गया.

विभाजन की वजह से हिंदु-मुस्लिमों के बीच भयानक दंगे हुए. इन दंगों की शुरुआत कहाँ से हुई कोई नहीं बता सकता, लेकिन इन दंगों में 2 लाख से 20 लाख लोगों की जान चली गई थी.

अनगिनत बलात्कार की घटनाएँ हुई. दुनिया के इतिहास में इन दंगों की भयावहता की दूसरी ऐसी घटना आज तक कहीं नहीं हुई.

आपातकाल के दौरान अत्याचार

भारत में वर्ष 1975-77 का समय आपातकाल का समय था. सत्ता में कांग्रेस की सरकार थी, जिसने नागरिक अधिकारों का बेहरमी से उल्लंघन किया.

आपातकाल स्थिति में सबसे दुखद घटना दिल्ली के तुर्कमान गेट के पास पड़ती झुग्गी-झोपड़ियों में हुई थी. कांग्रेस अध्यक्ष संजय गांधी ने झुग्गीवासियों को तुर्कमान गेट से हटाने के लिए पुलिस को निर्देश दिए.

पुलिस वालों ने लाठीचार्ज करके और गोलियां चलाकर झुग्गीवासियों को हटाने की कोशिश की थी.

इस भयंकर लाठीचार्ज और गोलीबारी में 150 निर्दोष लोग मारे गए थे और 70,000 से भी ज़्यादा लोग बेघर हो गए थे.

सिख विरोधी दंगे, 1984

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भारत की प्रधान मंत्री इंदिरा गाँधी ने जून 1984 में स्वर्ण मंदिर में छिपे जरनैल सिंह भिंडरावाले और उसके साथीयों को मारने का निर्देश दिया. कुछ महीने बाद अक्टूबर 1984 में इंदिरा गांधी के अंगरक्षक, जो सिख थे, उन्होंने इंदिरा गांधी की हत्या कर दी.

इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस पार्टी से सम्बंधित लोगों ने दिल्ली में सिखों के खिलाफ दंगे शुरू कर दिए और दिल्ली में रह रहे सिखों का बेरहमी से कत्लेआम शुरू कर दिया.

इस घटना में 2,700 सिख मारे गए और 20,000 से ज़्यादा सिखों ने दिल्ली को हमेशा हमेशा के लिए छोड़ दिया.

पुलिस द्वारा कैदियों को जबरदस्ती अंधा बनाना

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यह घटना 1980 को हुई थी, जब बिहार के भागलपुर जिले की पुलिस ने अत्याचार का सबसे भयंकर उदाहरण दुनिया के सामने दिखाया था. भागलपुर जिले की पुलिस ने 31 विचाराधीन कैदियों की आँखों में तेज़ाब डालकर उनको जबरदस्ती अंधा बना दिया था.

हिन्दू-मुस्लिम दंगे, 1996

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दिसंबर 1996 को अयोध्या की राम-जन्म भूमि पर स्थित बाबरी-मस्जिद को तोड़ दिया गया. इसके बाद देश भर में हिन्दू-मुस्लिम दंगे फैल गए, जिसमें 2,000 निर्दोष लोग मारे गए. इन दंगों का असर मुंबई और दिल्ली में सबसे ज़्यादा था.

2002 में गुजरात में होने वाले दंगे

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27 फरवरी 2002 को अज्ञात लोगों की भीड़ ने गोधरा के पास साबरमती एक्सप्रेस में आग लगा दी थी. इस रेल गाड़ी में 58 हिन्दू तीर्थयात्री मारे गए थे.

इस घटना के बाद विश्व हिंदू परिषद ने तीन दिन तक गुजरात को बंद रखने का एलान कर दिया. इन तीन दिनों में लोगों का बेरहमी के साथ कत्ल किया गया और उनके घरों को लूटा गया.

महिलाओं के साथ बलात्कार किए गए. स्थानीय अख़बारों और नेताओं ने उकसाने वाले भाषण दिए. इन दंगों में 2000 से ज़्यादा निर्दोष लोगों ने अपनी जान गंवाई थी.

लक्ष्मणपुर स्नान नरसंहार, अरवल जिला

लक्ष्मणपुर गाँव बिहार के अरवल जिले के नज़दीक पड़ता एक गाँव है. दिसम्बर 1997 में इस गाँव में भयंकर नरसंहार हुआ था.

इस नरसंहार की मुख्य वजह यहाँ पर रहने वाले उच्च जाति के व्यक्ति रणवीर सेना ने लक्ष्मणपुर में रहने वाले दलितों को मारने के लिए योजना बनायी, जिसके बाद 58 निर्दोष दलितों को गोली से मार दिया गया, जिसमें 27 औरतें और 16 बच्चे थे.

इस भयंकर नरसंहार में 1 साल के बच्चे को भी मार दिया था.

निर्भया सामूहिक बलात्कार मामला

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इस मामले ने भारत का नाम पूरी दुनिया में धूमिल कर दिया.

16 दिसम्बर 2012 को दिल्ली की लोकल बस में एक 23 साल की लड़की को बेरहमी से पीटा गया और फिर उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया. उसको चलती बस से फेंक दिया गया. बाद में सिंगापुर के अस्पताल में उसकी मौत हो गई .

इस घटना पर बनी डाक्यूमेंट्री को बीबीसी ने पूरी दुनिया के दर्शकों के सामने रखा, जिसके बाद कई देशों ने अपने देश की महिलाओं को भारत न जाने की हिदायत दी.

माओवादी लड़की की अनकही कहानी

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यह घटना भारत में लड़कियों के खिलाफ होने वाली क्रूरता और अत्याचार का जीता जागता सबूत थी.

भारत के छत्तीसगढ़ राज्य में पड़ते बस्तर क्षेत्र में एक 15 वर्षीय कवासी नाम की लड़की का पुलिस वालों ने बेरहमी से बलात्कार किया था.

कवासी को 350 माओवादियों के साथ पुलिसकर्मियों की हत्या करने के मामले में पकड़ा गया था.

मुज़फ्फरनगर दंगे, 2013

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भारत में साम्प्रदायिक दंगे दशकों से होते आ रहे हैं. इस दशक यह दंगे उत्तरप्रदेश के हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों के बीच मुज्जफरनगर में हुए.

इन दंगों की शुरुआत तब हुई, जब एक समुदाय की लड़की के साथ छेड़छाड़ हुई और उसका विरोध करने पर उसके भाई को कुछ लोगों ने पीट-पीट कर मार डाला.

इसके बाद दोनों समुदायों के बीच दंगे भड़क उठे, जिनमें 62 लोगों की जानें चली गयी और 50,000 से ज़्यादा लोग बेघर हो गए.

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सांप के केंचुली उतारने से जुड़े कुछ रोचक तथ्य!

सांपों की बात करें, तो यह सदियों से हमारी जिज्ञासा का विषय रहे हैं। हिंदू धर्म में सांप को एक दैवीय प्राणी माना गया है। इसे कोई आम जीव नहीं, बल्कि धार्मिक तौर से जोड़कर देखा जाता है। सदियों से सांप कई कारणों से मनुष्यों के आकर्षण का क्रेंद बना हुआ है। सांप का केंचुली उतारना भी इन कारणों में से एक है। आप में से बहुत से लोगों ने सांप का केंचुल देखा होगा। आज हम आपको बता रहे हैं सांप द्वारा केंचुली उतारने से जुड़े कुछ रोचक तथ्य!

  • प्रत्येक रीढ़धारी प्राणियों में त्वचा की ऊपरी परत समय- समय पर मृत हो जाती है तथा इनकी वृद्धि व विकास के साथ-साथ इस मृत त्वचा का स्थान नई त्वचा ले लेती है। इसी प्रकार एक निश्चित समय अंतराल के बाद सांप भी अपनी बाह्य त्वचा की पूरी परत उतार देता है। इसे ही केंचुली उतारना कहते हैं।
  • धार्मिक कथाओं के अनुसार माना जाता है कि केंचुली उतारकर सांप की उम्र बढ़ जाती है और अमरता प्राप्त कर जन्म-मरण के चक्र से छुट जाते हैं।
  • सांप की त्वचा स्वाभाविक रूप से सूखी और खुष्क होकर जलरोधी आवरण (वाटरप्रुफ कोट) वाली होती है और उसकी प्रजाति के अनुसार चिकनी या खुरदुरी हो सकती है।
  • अपनी त्वचा में किसी प्रकार की खराबी या नुकसान एक सांप को जल्दी केंचुली उतारने के लिए लाचार करता है। केंचुली उतारने से एक तो सांप के शरीर की सफाई हो जाती है, दूसरी ओर त्वचा में फैल रहे संक्रमण से भी उसे मुक्ति मिल जाती है।
  • केंचुली उतारने से करीब एक सप्ताह पहले से सांप सुस्त हो जाता है और किसी एकांत स्थान पर चला जाता है। इस समय लिम्फेटिक नामक द्रव्य के कारण सांप की आंखें दूधिया सफेद होकर अपारदर्शक हो जाती है। इस अवस्था में ये भोजन भी नहीं करते।
  • केंचुली उतारने से 24 घंटे पहले सांप की आंखों पर जमा लिम्फेटिक द्रव्य अवशोषित हो जाता है और आंखें साफ होने से वह ठीक से देख पाता है। केंचुली उतारने के बाद प्राप्त नई त्वचा चिकनी और चमकदार होती है। इसलिए इस समय सांप बहुत ही चुस्त और आकर्षक दिखाई देता है।
  • सांप का केंचुली उतारने का तरीका बहुत कष्टदाई होता है। सबसे पहले सांप अपने जबड़ों पर से केंचुली उतारते हैं, क्योंकि यहां केंचुली सबसे अधिक ढीली होती है। शुरुआत में सांप अपने जबड़ों को किसी खुरदुरी सतह पर रगड़ता है ताकि इसमें चीरा आ जाए। अलग हुए भाग को सांप पेड़ के ठूंठ, कांटों, पत्थरों के बीच की खाली जगह में फंसाता है और अपने बदन को सिकोड़कर धीरे-धीरे खसकता है। अपनी पुरानी त्वचा को बदलते समय सांप बहुत ही बैचेन और परेशानी का अनुभव करता है।
  • सांप द्वारा छोड़ी गई केंचुली की सहायता से संबंधित सांप की पहचान की जा सकती है। यह सांप की हूबहू प्रति तो नहीं होती, लेकिन सांप की त्वचा पर पड़े शल्कों की आकृति इनसे शत-प्रतिशत मिलती है।
  • केंचुली पर सांप का रंग नहीं आ पाता, क्योंकि रंगों का निर्माण करने वाली पिगमेंट कोशिका सांप के साथ ही चली जाती है।
  • कोई सांप अपने जीवनकाल में कितनी बार केंचुली उतारेगा, इस सवाल का कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे कि- सांप की उम्र, सेहत, प्राकृतिक आवास, तापमान और आद्रता आदि। सामान्यत: धामन सांप एक साल में 3-4 बार केंचुली उतारता है, वहीं अजगर और माटी का सांप साल में एक ही बार केंचुली उतारते हैं।

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जानिए, दिमाग को स्वस्थ रखने के यह 10 उपाय!

हमारे शरीर के जोड़ों और फेफड़ों की ताकत उम्र के साथ-साथ धीरे- धीरे कम होती रहती है, लेकिन हमारे दिमाग के विचार बढ़ते ही जाते हैं. यह बात कोई मायने नहीं रखती कि आपकी उम्र क्या है? लेकिन आप उम्र के किसी भी पड़ाव में नई-नई चीजें सीख सकते हैं. यह हैं आपके दिमाग को तेज़ करने और इसे स्वस्थ रखने के 10 उपयोगी टिप्स.

नियमित व्यायाम (Regular Exercise)

चिकित्सा वैज्ञानिकों का मानना है कि नियमित व्यायाम करने से आप अपने दिमाग को लंबे समय तक स्वस्थ रख सकते हैं. आपका दिल और फेफड़े ट्रेडमिल पर दौड़ने से मज़बूत होते हैं और पहले से भी ज़्यादा स्वस्थ रहते हैं.
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पौष्टिक भोजन

foods-for-a-nutritious-dietबहुत ज़्यादा या बहुत कम भोजन आपके दिमाग के लिए नुकसानदायक हो सकता है. आपका भोजन उच्च फाइबर, वसा और प्रोटीन वाला होना चाहिए. आपके पेट द्वारा अच्छी तरह से पचाया गया भोजन आपके दिमाग को ऊर्जा प्रदान करता है.

 

अपनी डाइट का ध्यान रखें

keep-track-of-your-dietज़्यादा भोजन खाने से आपका दिमाग सुस्त बन जाता है और लंबे समय में यह आपके दिमाग पर तक बुरा प्रभाव डाल सकता है. वहीँ दूसरी और बहुत कम खाने से आपको एनोरेक्सिया (anorexia) जैसी लत लग सकती है. कई वैज्ञानिक शोधों में पाया गया है कि मानव के दिमाग की स्मृति, भ्रम और व्याकुलता सीधे उसकी खाने की आदतों से जुड़ी होती है.

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अपने शरीर का ध्यान रखें

take-care-of-your-bodyबहुत सारी बीमारियाँ, जैसे कि टाइप 2 मधुमेह, मोटापा और उच्च रक्तचाप मानव के दिमाग पर बहुत बुरा असर डालती हैं. अत: इन बीमारियों को समय रहते कंट्रोल करने में ही भलाई है. अपने दिमाग को स्वस्थ के लिए शराब, धूम्रपान आदि नशों से दूर रहें, साथ ही अपने शरीर को मोटापे से बचाएं.

भरपूर आराम करें

get-completely-resetजब हम आराम करते हैं या अच्छी नींद लेते हैं, तो इससे हमारी यादाश्त में सकारात्मक परिवर्तन आता है. सोते समय हमारा दिमाग बहुत सी कड़वी और गैर-जरूरी यादों को भूल जाता है. वैज्ञानिकों ने अध्ययन किया है, जब हमारे शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिलता, उस समय हमारा दिमाग ज़रूरी चीज़ों को भूलने लगता है और ऐसे में हमारे लिए नई चीज़ों को याद रखना मुश्किल हो जाता है.

अपनी कॉफ़ी का आंनद लें

coffeeवैज्ञानिकों को ऐसे कई प्रमाण मिले हैं, जिससे यह सिद्ध होता है कि संतुलित कॉफ़ी पीने की आदत आपके दिमाग के लिए अच्छी होती है. एक लंबे अध्ययन में सामने आया है कि कॉफ़ी पीने से आप में अल्झाइमर्स (Alzheimer’s) जैसी भूलने की बीमारियों होने की सम्भावना में 30 से 60 प्रतिशत की कमी आ जाती है.

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मच्छली खाना दिमाग के लिए अच्छा है

fishकई अध्ययनों में सामने आया है कि मच्छली खाने से मानव के शरीर को फायदा मिलता है. मच्छली में ओमेगा-3 नाम का आवश्यक फैट एसिड होता है, जो हमारे दिमाग के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है. यह हमारे दिमाग को अवसाद (depression) और मति-भ्रम से बचाता है.

अपनी लाइफ को एन्जॉय करें

enjoy-lifeवैज्ञानिकों का मानना है कि संतुलित जीवन शैली, योग करना और सामाजिक गतिविधियां हमारे में तनाव को कम कर देती हैं. वहीँ तनाव में रहने वाले व्यक्ति का शरीर और दिमाग जल्दी थक जाता है और अच्छी तरह से काम नहीं करता.

बनावटी सप्लीमेंट ना खाएं (Skip the supplements)

skip-the-supplementsहाल ही वैज्ञानिकों ने गैर-प्राकृतिक यानि बनावटी (Artificial) विटामिन और सप्लीमेंट पर अध्ययन किया है, जिसमें पता लगा है कि इन सप्लीमेंट में कई ऐसे तत्व होते हैं, जो हमारे दिमाग पर बुरा प्रभाव छोड़ते हैं. अच्छा हो यदि हम फल, सब्जियों और दूध आदि से मिलने वाले सप्लीमेंट पर ही निर्भर हों.

दिमाग की कसरत करें

brain-exerciseपहेलियाँ सुलझाना, सुडोकु खेलना और शतरंज जैसे खेल आपके दिमाग को अच्छी तरह से शेप में रखते हैं. नियमित रूप से दिमाग वाले खेल खेलने से आप अपने दिमाग को लंबे समय तक स्वस्थ रख सकते हैं, जिससे आपकी यादाश्त भी बढ़ती है.

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मानव के दिमाग के बारे में अदभुत तथ्य

बॉलीवुड के अजीब और दिलचस्प तथ्य

यह हैं बॉलीवुड के अद्भुत और दिलचस्प तथ्य जिनके बारे में आप नहीं जानते हो

बॉलीवुड की अभिनेत्री आलिया भट्ट ने फिल्म “संघर्ष” से चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर फिल्मी करियर की शुरुआत की थी.

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बॉलीवुड के अभिनेता “शाहरुख़ खान” ने अपने करियर की शुरुआत अरुंधति रॉय द्वारा निर्देशित फिल्म “In Which Annie Gives It Those Ones” से की थी.

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“क्या आप क्लोज-अप करते हैं ?” विज्ञापन (ad) में दीपिका पादुकोण ने अपना पहला किरदार निभाया था. यह विज्ञापन दीपिका पादुकोण ने अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत के कुछ साल पहले किया था.

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राजकुमार हिरानी ने एक मशहूर निर्देशक बनने से पहले फेविकोल के विज्ञापन में छोटे से किरदार की भूमिका को निभाया था.

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राजकुमार हिरानी की तरह ही कटरीना कैफ ने भी फ़िल्मी करियर की शुरुआत से पहले सन 2000 में फेविकोल के विज्ञापन में काम किया था.

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देव आनंद और आदित्य पंचोली की फिल्म “अव्वल नंबर” में उनकी मृत सौतेली माँ की फोटो में अमेरिका की मॉडल सिंडी क्राफोर्ड थी.

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फिल्म “रंग दे बसंती” फिल्म की शुरुआत में वह घड़ी दिखाई गई थी, जो भगत सिंह की फांसी के समय ठीक 7:30 PM पर रुक गयी थी. यह घड़ी “रंग दे बसंती” में सू (Sue) नाम की लड़की के दादा की थी, जिन्होंने भगत सिंह की फांसी को अपनी आँखों से देखा था.

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वर्ष 2001 में बनी फिल्म “दिल चाहता है” में आमिर खान की भविष्य की पत्नी किरण राव ने छोटी सी भूमिका निभाई थी.

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जानिए रेशम कीट (Silkworm) रेशम का उत्पादन कैसे करता है!!

रेशम की साड़ी और रेशम के कपड़े हर किसी को पसंद होते हैं। रेशम कीट (Silkworm) ऐसा जीव है, जिससे रेशम बनता है। इसका वैज्ञानिक नाम Bombyx Mori है। दुनिया का सबसे ज़्यादा रेशम का उत्पादन चीन में किया जाता है। चीन में रेशम की खेती और रेशम का कारोबार प्राचीन समय से ही किया जाता है। क्या आप जानते हैं कि रेशम कीट, रेशम का उत्पादन कैसे करता है? अगर नहीं, तो आइए जानते हैं रेशम कीट से रेशम कैसे बनता है।

रेशम कीट से रेशम का उत्पादन

रेशम कीट मात्र दो या तीन दिन तक ही जिंदा रहता है और इतने समय में ही मादा रेशम कीट शहतूत की पत्तियों पर अण्डे दे देती है। हर अण्डे से लगभग 10 दिनों में ही एक मादा रोशम कीट लार्वा निकलता है, जो फिर से 30 से 40 दिनों में पहले लंबा होता है और फिर सुस्त होकर गोल आकृति में आ जाता है।

लगभग 3 दिनों तक रेशम कीट अपने शरीर को हिलाते हुए, लार ग्रन्थियों को निकालता है, जिससे एक लंबे धागे का घोल तैयार होता है, जिसे कोया या ककून (Cocoon) कहते हैं। वायु के संपर्क में आते ही ककून, सूखकर रेशमी धागा बन जाता है, जो लगभग 1000 मीटर लंबा होता है। ककून का बंद लार्वा एक प्यूपा (Pupa) में बदल जाता है।

12 से 15 दिनों के अंदर प्यूपा एक कीट में बदल जाता है, जो क्षारीय स्राव की सहायता से ककून को एक ओर से काटकर बाहर निकल आता है। रेशम को प्राप्त करने के लिए ककून को कीट बनने से पहले ही खौलते पानी में डालकर पूर्णकीट को भीतर-ही-भीतर मार देते हैं और धागे को अलग कर लेते है। इस प्रकार से रेशमकीट से रेशम बनता हैं और इसके बाद इन रेशम के धागों की मदद से कपड़ा आदि वस्तुओं का निर्माण होता हैं।

रेशम के बारे में कुछ तथ्य

  • पूरी दुनिया में रेशम का चलन चीन से प्रारम्भ हुआ था।
  • भारत में सबसे अधिक शहतूत रेशम कीट (Bombyx Mori) का पालन किया जाता है। भारत इस समय रेशम की सभी ज्ञात व्यापार में प्रयोग वाली किस्मों मलबरी, ट्रॉपिकल टसर, ओक टसर, इरी और मूंगा का सफलतापूर्वक उत्पादन करने वाला एकमात्र देश है।
  • साल 1943 में पश्चिम बंगाल के बहरामपुर में केन्द्रीय रेशम अनुसंधान प्रक्षेत्र की स्थापना की गई थी।
  • रेशम का धागा एक तरह का प्रोटीन है, जबकि कपास एवं जूट का सूत सेल्यूलोज होता है।

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भारत के 10 प्रसिद्ध ऐतिहासिक गुरुद्वारे

भारत एक ऐसा देश है, जहाँ के धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल काफी प्रसिद्ध हैं। जैसे हिन्दू धर्म में मंदिर होते है, मुस्लिम धार्मिक स्थलों को मस्जिद कहा जाता है, ऐसे ही सिख धार्मिक स्थलों को गुरुद्वारा कहा जाता है।

भारत में सिख धर्म एक महत्वपूर्ण और व्यापक रूप से प्रचलित धर्म है। पूरे भारत में सिख धर्म को मानने वाले अनुयायी है। आज हम आपको भारत के उन प्रसिद्ध गुरुद्वारों के बारे में बता रहे हैं, जहां अलग ही प्रकार की शांति का अनुभव होता है और जहां न केवल सिख धर्म के लोगों की ही नहीं, बल्कि अन्य धर्मों के लोगों की भी बहुत आस्था है।

श्री हरमंदिर साहिब, अमृतसर, पंजाब (Golden Temple)

श्री हरमंदिर साहिब को श्री दरबार साहिब और स्वर्ण मंदिर (Golden Temple) भी कहा जाता है। इस गुरुद्वारा साहिब को बचाने के लिए महाराजा रणजीत सिंह जी ने इसके ऊपरी हिस्से को सोने से ढंक दिया था, इसलिए इसे स्वर्ण मंदिर का नाम दिया गया था।

श्री हरमंदिर साहिब की नींव सन् 1588 में सिक्खों के पाँचवे गुरु – गुरु अर्जन देव जी ने रखी थी। श्री हरमंदिर साहिब को भारत के मुख्य दर्शनिक स्थलों में गिना जाता है। यहां पूरी दुनिया से पूरे साल बड़ी संख्या में श्रद्धालू आते हैं।

श्री हेमकुंड साहिब, उत्तराखंड (Shri Hemkund Sahib)

गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब, उत्तराखंड के चमोली जिले में है। यह गुरुद्वारा समुद्र स्तर से 4000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह गुरुद्वारा साहिब सिखों का सबसे पवित्र और प्रसिद्ध तीर्थ स्थान है। यह गुरुद्वारा साहिब एक बर्फ़ीली झील किनारे सात पहाड़ों के बीच स्थित है।

गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब की स्थापना सन् 1960 के आस-पास हुई थी। श्री हेमकुंड साहिब सिखों के दसवें गुरु – गुरु गोबिंद सिंह जी को समर्पित है। श्री हेमकुंड साहिब को दर्शनों के लिए मई से अक्टूबर तक ही खोला जाता है। गुरुद्वारा साहिब को बर्फबारी के कारण अक्टूबर के अंत में बंद कर दिया जाता है और यह अप्रैल महीने तक बंद रहता है।

श्री हजूर साहिब, नांदेड़, महाराष्ट्र (Shri Hazur Sahib)

गुरुद्वारा श्री हजूर साहिब, महाराष्ट्र के नांदेड़ शहर में गोदावरी नदी से कुछ ही दूरी पर स्थित है। गुरुद्वारा श्री हजूर साहिब सिखों के 5 तख्तों में से एक है। इस गुरुद्वारा  साहिब को सच-खण्ड कहा जाता है।

सिखों के 10वें और आखिरी गुरु – श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने कुछ अन्तिम महीने इस स्थान पर गुज़ारे थे। महाराजा रणजीत सिंह के आदेश के बाद इस गुरूद्वारा साहिब का निर्माण सन 1832-1837 के बीच हुआ था। महाराष्ट्र का नांदेड़ एक अनाम सा शहर था, जो गुरु जी के साथ जुड़ने के बाद सचमुच अमर हो गया।

पांवटा साहिब, हिमाचल प्रदेश (Paonta Sahib)

गुरुद्वारा पांवटा साहिब, हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में जमुना नदी के किनारे स्थित है। यह गुरुद्वारा साहिब सिखों के दसवें गुरु – श्री गुरु गोबिंद सिंह जी को समर्पित है।

इस जगह पर गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने जीवन के चार साल बिताए थे और इसी जगह पर गुरु जी ने दशम ग्रन्थ की रचना की थी। यहाँ एक म्यूजियम भी है, जिसमें गुरु गोबिंद सिंह जी का इस्तेमाल किया हुआ सामान भक्तों के दर्शन के लिए रखा गया है।

फतेहगढ़ साहिब, पंजाब (Fatehgarh Sahib)

फतेहगढ़ साहिब, पंजाब के फतेहगढ़ जिले में स्थित है। यह गुरुद्वारा साहिब सिखों का मुख्य धार्मिक स्थल, श्रद्धा और विश्‍वास का प्रतीक है। यहां साल 1704 में गुरु गोबिंद सिंह जी दो छोटे बेटों साहिबज़ादा फतेह सिंह और साहिबज़ादा जोरावर सिंह को फौजदार वज़ीर खान ने दीवार में जिंदा चुनवा दिया था।

उस वक्त साहिबज़ादा फतेह सिंह की उम्र सिर्फ 6 साल और साहिबज़ादा जोरावर सिंह की उम्र सिर्फ 8 साल थी। साहिबज़ादा फतेह सिंह और साहिबज़ादा जोरावर सिंह अंतिम बार यहीं खड़े हुए थे और इसी स्थान पर उन्‍होंने अंतिम सांस ली थी। साहिबज़ादों की शहादत की याद में यह गुरुद्वारा साहिब बनाया गया था।

शीश गंज साहिब, दिल्ली (Sis Ganj Sahib)

गुरुद्वारा शीश गंज साहिब, दिल्ली का सबसे पुराना और ऐतिहासिक गुरुद्वारा है। यह गुरुद्वारा साहिब दिल्ली के चांदनी चौक में स्थित है। यह गुरुद्वारा सिखों के नौवें गुरु – गुरु तेग बहादुर जी और उनके अनुयायियों को समर्पित है। इस जगह गुरू तेग बहादुर जी को मौत की सजा दी गई थी, जब उन्‍होंने मुगल बादशाह औरंगजेब के इस्‍लाम धर्म को अपनाने के प्रस्‍ताव को ठुकरा दिया था।

तख्त श्री दमदमा साहिब, पंजाब (Dam Dama Sahib)

तख्त श्री दमदमा साहिब, पंजाब के बठिंडा से 28 किमी दूर दक्षिण-पूर्व के तलवंडी साबो गांव में स्थित है। दमदमा का मतलब ‘श्वास या आराम स्थान’ होता है। मुगल अत्याचारों के खिलाफ लड़ाई लड़ने के बाद गुरु गोबिंद सिंह जी यहाँ आकर रुके थे। इस वजह से इसे ‘गुरु की काशी’ के रूप में भी जाना जाता है।

मणिकरण साहिब, हिमाचल प्रदेश (Manikaran Sahib)

गुरुद्वारा मणिकरण साहिब, हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के भुंतर से उत्तर पश्चिम में पार्वती घाटी में व्यास और पार्वती नदियों के मध्य बसा है, जो हिन्दुओं और सिक्खों का एक प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। ऐसा कहा जाता है कि यह पहली जगह है, जहाँ गुरू नानक देव जी ने अपनी यात्रा के दौरान ध्यान लगाया था। यह गुरुद्वारा साहिब, जिस पुल पर बना हुआ है, उसी पुल के दूसरे छोर पर भगवान शिव का बहुत ही प्रसिद्ध मंदिर है। इसी वजह से यह जगह और भी खास मानी जाती है।

श्री केशगढ़ साहिब, आनंदपुर, पंजाब (Shri Keshgarh Sahib)

गुरुद्वारा श्री केशगढ़ साहिब, पंजाब के आनंदपुर शहर (जिला रोपड़) में स्थित है। आनंदपुर शहर की स्थापना सन् 1665 में सिखों के नौवें गुरू – गुरु तेग बहादुर सिंह जी ने करवाई थी। सिखों के दसवें गुरु – गुरु गोबिंद सिंह जी ने इस स्थान पर 25 साल व्यतीत किए थे।

तख्त श्री पटना साहिब, पटना, बिहार (Shri Patna Sahib)

तख्त श्री पटना साहिब, बिहार के पटना शहर में स्थित है। यहां सिखों के दसवें गुरु – गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म हुआ था। इस गुरुद्वारा साहिब का निर्माण महाराजा रणजीत सिंह द्वारा करवाया गया है। गुरु गोबिंद सिंह जी के जन्म स्थान के साथ- साथ यह स्थान गुरु नानक देव जी और गुरु तेग बहादुर सिंह जी की पवित्र यात्राओं से भी जुड़ा हुआ है।

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कुछ बादल काले और कुछ सफेद क्यों होते हैं!!

जब भी हम आसमान की तरफ देखते हैं, सफेद या स्लेटी रंग के बादलों से ढका एक विशाल नीला आसमान दिखाई देता है। ज़्यादातर बादल सफेद होते हैं, लेकिन जब आंधी या बारिश होने वाली होती है, तो काले बादल छा जाते है। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि बादल सफेद, स्लेटी या काले क्यों होते हैं?

क्या ये बादल आसमान की तरह नीले नहीं हो सकते, या सूरज की तरह पीले नहीं हो सकते? असल में इन बादलों के पीछे भी कुछ वैज्ञानिक तर्क है। इन बादलों का सफेद या गहरे रंग का (स्लेटी) होना कोई प्राकृतिक सुन्दरता का नमूना नहीं, बल्कि वैज्ञानिक प्रक्रिया है।

बादलों में बड़ी मात्रा में पानी भरा होता है। यह पानी छोटी-छोटी बूंदों या बर्फ़ के क्रिस्टल्स के रूप में जमा होता है। बादल इन बूंदों को एक निश्चित ऊंचाई पर ले जाकर छोड़ देते हैं। बादल अधिकांश सफेद ही होते हैं, पर कभी-कभी यह स्लेटी या गहरे रंगों के भी दिखते हैं। आइए जानते हैं ऐसा क्यों होता है:-

सफेद रंग के बादलों के पीछे का कारण

दरअसल बादलों में मौजूद पानी की बूंदें सूर्य से निकलने वाली किरणों के सभी रंगों को परावर्तित (Reflect) कर देती है और किरणे कई भागों में बंटकर बिखर जाती हैं, जिस कारण बाकि कोई रंग दिखाई नहीं देता और इस कारण बादलों में सिर्फ सफेद रंग बच जाता है और हमें बादल सफेद रंग के नज़र आते हैं।

काले रंग के बादलों के पीछे का कारण

बादलों के गहरे काले रंग के होने के पीछे का कारण बादलों की मोटाई पर निर्भर करता है। जब बादलों से होकर बहुत ही कम मात्रा में सूर्य की किरणें पास होंगी, तो वो बादल गहरे रंग का या काला दिखाई देगा।

बाकी रंगों के साथ भी ऐसा ही होता है, जब कोई वस्तु किसी रंग को परावर्तित करती है, तो हमें वो वस्तु उसी रंग की दिखाई देती है।

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