नंबर सात के बारे में कुछ मज़ेदार रोचक तथ्य!

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नंबर्स का हमारे जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान है, फिर चाहे वो पैसे के रूप में हो या संख्या के रूप में। लेकिन क्या आपको पता है कि इन सभी नंबर्स में से 7 एक ऐसा नंबर है जो अन्य सभी में से यूनिक है।

वैसे तो सभी नंबर्स यूनिक ही होते हैं परंतु 7 नंबर को दुनिया का सबसे शुभ अंक माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि भगवान ने पूरी दुनिया को 6 दिनों में बनाकर 7 वें दिन ही आराम किया था।

आज की हमारी इस पोस्ट में हम आपको नंबर सात के बारे में कुछ मज़ेदार तथ्यों के बारे में बताने जा रहे हैं, तो चलिए शुरू करते हैं ।

facts about number seven

  • भारतीय संस्कृति में 7 की संख्या बहुत खास मानी गई है, जैसे संगीत के 7 सुर, इंद्रधनुष के 7 रंग, 7 ग्रह, 7 तल, 7 समुद्र, 7 ऋषि, सप्त लोक, सूर्य के 7 घोड़े, सप्त धातु, 7 द्वीप, 7 दिन आदि।
  • हिंदू धर्म में पाताल और स्वर्ग के बीच 7 डिविजन का महत्व बताया गया है।
  • बाइबल में 7 महान चर्च बताए गए हैं। इफिसुस, स्मिर्ना, पेरगाम, थुआतिरा, सार्डिस, फिलाडेल्फिया और लौदीकिया
  • इंसान की चमड़ी में 2 आंतरिक व 5 बाहरी यानी कुल 7 सतह होती है।
  • मान्यता है कि 7 फेरे जीवन की पूर्णता को दर्शाते हैं। इसमें जप, तप, व्रत, नियम, दान, कर्म एवं स्वाध्याय, ये 7 बिंदु ही विवाह परंपरा को पूरा करते हैं।
  • 7 फेरों का 7 जन्मों का भी प्रतीक माना जाता है, क्योंकि हिंदू धर्म में मान्यता है कि पति-पत्नी का संबंध सिर्फ एक जन्म का नहीं बल्कि 7 जन्मों का होता है।
  • वैसे तो धरती पर बहुत से अजूबे हैं लेकिन कुल महत्वपूर्ण 7 अजूबे हैं जिनमें शामिल है चीन की महान दीवार, ताजमहल, कोलोज़ीयम, माचू पिच्चू”, क्राइस्ट रिडीमर, चिचेन इत्जा, पेट्रा
  • वैज्ञानिकों के अनुसार मानव शरीर में 7 सालों बाद कुछ न कुछ परिवर्तन होता रहता है।
  • प्रबंधकों के अनुसार किसी देश की अर्थव्यवस्था हर 7 साल में चक्र परिवर्तन करती है।
  • Book Of Revaluation में 7 भगवान की आत्माओं के बारे में लिखा गया है।
  • हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के ज्योर्ज मिलर ने लिखा है कि एक सामान्य इंसान कम समय में केवल 7 चीजें ही एक साथ याद रख पाता है।
  • एक सबसे अच्छी होटल 7 स्टार होटल को माना जाता है।
  • शरीर में ऊर्जा के 7 केंद्र माने गए हैं। इन केंद्रो को चक्र कहा जाता है। इनके नाम हैं- मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपुर, अनाहत, विशुद्ध, आज्ञा और सहस्रार चक्र। ये चक्र ही हमें जीवनदायिनी शक्ति प्रदान करते हैं।
  • 7 को पूर्ण अंक माना गया है। यानी 7 किसी दूसरे अंक से पूरी तरह विभाजित नहीं होता। इसके पीछे मनोवैज्ञानिक पक्ष ये है कि जिस तरह अंक 7 अविभाजित है, उसी तरह पति-पत्नी का संबंध भी कभी अलग न हो।

खूनी दरवाज़ा : जिसका इतिहास है बेहद खौफनाक

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खूनी दरवाजा जिसे लाल दरवाजा भी कहा जाता है, दिल्ली में बहादुरशाह ज़फ़र मार्ग पर दिल्ली गेट के निकट स्थित है। यह दिल्ली के बचे हुए 13 ऐतिहासिक दरवाजों में से एक है। यह पुरानी दिल्ली के लगभग आधा किलोमीटर दक्षिण में, फ़िरोज़ शाह कोटला मैदान के सामने स्थित है।

इसके पश्चिम में मौलाना आज़ाद चिकित्सीय महाविद्यालय का द्वार है। भारतीय पुरातत्व विभाग ने इसे सुरक्षित स्मारक घोषित किया है।

शुरुआत में यह लाल दरवाजे के नाम से ही जाना जाता था, बाद में इस दरवाजे के पास कुछ दिल दहला देने वाली घटनाओं के कारण इसका नाम बदलकर खूनी दरवाजा कर दिया गया था। इस दरवाजे से जुड़े इतिहास में कई डरावने किस्से भी दर्ज हैं।

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कैसे पड़ा नाम खूनी दरवाजा

खूनी दरवाजे का यह नाम तब पड़ा जब यहाँ मुग़ल सल्तनत के तीन शहज़ादों – बहादुरशाह ज़फ़र के बेटों मिर्ज़ा मुग़ल और किज़्र सुल्तान और पोते अबू बकर – को ब्रिटिश जनरल विलियम हॉडसन ने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान गोली मार कर हत्या कर दी।

बहादुरशाह जफर के आत्मसमर्पण के अगले ही दिन विलियम हॉडसन ने तीनों शहजादों को भी समर्पण करने पर मजबूर कर दिया था।

मगर 22 सितम्बर को जब वह इन तीनों को हुमायूं के मकबरे से लाल किले की ओर ले जा रहा था, तो उसने इन्हें इसी जगह पर रोक दिया और नग्न कर इसी दरवाजे के पास गोलियां दाग कर मार डाला था। इसके बाद शवों को इसी हालत में ले जाकर कोतवाली के सामने प्रदर्शित कर दिया गया।

 

औरंगजेब ने अपने भाई का सिर काटकर लटकाया था यहां

इस गेट से जुड़ा सबसे पहला खूनी इतिहास मुगल शासक औरंगजेब से जुड़ा है। यह बात 10 सितंबर 1659 की है, जब औरंगजेब ने दिल्ली की कुर्सी हासिल करने के लिए अपने परिवार को धोखा दिया था।

उसने अपने बड़े भाई दारा शिकोह का सिर कटवाकर उसकी हत्या कर दी थी। इसके बाद उसने इसी दरवाजे पर दारा शिकोह के सिर को लटका दिया था। भाई की हत्या करने के बाद औरंगजेब मुगल साम्राज्य का शासक बना था।

एक अन्य कहानी के अनुसार जब जंहागीर बादशाह बना था तब अकबर के नवरत्नों ने उसका विरोध किया था। जिसके कारण जंहागीर ने उनमें से एक अब्दुल रहीम खानखाना के दो बेटों को इस दरवाजे पर मरवा डाला और इनके शवों को यहीं सड़ने के लिए छोड़ दिया गया।

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1739 में जब नादिर शाह ने दिल्ली पर चढ़ाई की तो इस दरवाजे के पास बहुत खून बहाया था। लेकिन कुछ सूत्रों के अनुसार यह खून-खराबा चाँदनी चौक के दड़ीबा मुहल्ले में स्थित इसी नाम के दूसरे दरवाजे पर हुआ था। इसके अलावा 1947 में विभाजन के दौरान सैकड़ों शरणार्थियों की इसी दरवाजे पर हत्या भी कर दी गई थी।

दरवाजे के आसपास के इलाके में रहने वाले लोग यह भी बताते हैं कि रात में इस दरवाजे के पास से चीखने-पुकारने की आवाजें भी आती रहती हैं।

लोगों का कहना है कि जिन लोगों को यहां मारा गया था उनकी आत्माएं आज भी यहीं भटकती हैं। कुछ लोग यहां तक कहते हैं कि मॉनसून के मौसम में दरवाजे की छत से खून की बूंदें भी टपकती हैं। हालांकि इस तरह के दावे को सिद्ध करने के लिए आजतक कोई भी ऐसा सबूत नहीं मिला है।

 

वास्तु टिप्स – घर बनवाते या खरीदते समय रखें इन बातों का ध्यान

वास्तु टिप्स – घर खरीदना जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण फैसलों में से एक होता है। घर खरीदना एक सपने के पूरा होने जैसा होता है। ज्योतिष में वास्तु का विशेष महत्व होता है। अगर घर का वास्तु ठीक होता है, तो घर पर हमेशा सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है।

वहीं अगर घर के वास्तु में कोई कमी होती है, तो घर के सदस्यों को तमाम तरह की परेशानियों से जूझना पड़ता है। घर बनवाते और खरीदते समय आपको वास्तु के कुछ नियमों का ध्यान रखना चाहिए।

इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको घर बनवाते या खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए के बारे में बताने जा रहे हैं तो चलिए जानते हैं।

  • घर में पूजा स्थान का विशेष महत्व होता है, क्योंकि पूजा स्थान ही होता है, जहां से सबसे ज्यादा सकारात्मक ऊर्जा आती है। पूजा स्थान को उत्तर-पूर्व दिशा में ही बनवाएं। भगवान के कैलेंडर या तस्‍वीरें या फिर धार्मिक आस्‍था से जुड़ी वस्‍तुएं सिर्फ पूजा स्थान पर ही रखें, इन वस्तुओं को बेडरूम में ना रखें।
  • घर का मुख्य दरवाज़ा अंदर की तरफ खुलने को वास्तु शास्त्र में शुभ माना जाता है। घर का मुख्‍य दरवाज़ा दक्षिण मुखी नहीं होना चाहिए। मुख्य दरवाज़े के सामने बिजली का खंभा, वृक्ष आदि नहीं होना चाहिए।
  • बाथरूम घर के मध्य में या मुख्य दरवाज़े के सामने अशुभ होते हैं। अगर बाथरूम मुख्य दरवाज़े के सामने हैं, तो इसके दरवाज़े को बंद रखें।
  • किचन की दिशा ईशान कोण में नहीं होनी चाहिए।
  • बेडरूम हमेशा नैऋत्य कोण में होना चाहिए। सभी कमरों में प्राकृतिक प्रकाश और हवा का संचार होना चाहिए।
  • घर बनवाते या खरीदते समय इस बात का भी ध्यान रखें कि सामने की तरफ सीढ़ियां या लिफ्ट न हों।
  • आपके घर में पैसे रखने का स्थान दक्षिण दिशा में हो और उस तिजोरी का खुलने वाला हिस्सा उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
  • ईशान कोण अधिक से अधिक खुला और हवादार होना चाहिए। घर का निर्माण कार्य कराते समय ईशान कोण को हमेशा गहरा या नीचा रखना चाहिए और नैऋत्य कोण यानी दक्षिण और पश्चिम का कोना हमेशा बाकी कोनों से ऊंचा होना चाहिए।
  • घर का आकार सदैव आयताकार या वर्गाकार होना चाहिए। हमेशा ध्यान रखें कि घर कभी भी L या C आकार का नहीं होना चाहिए। इस तरह के आकार के घर शुभ नहीं माने जाते।
  • बच्चों के पढ़ने का कमरा उत्तर पूर्व दिशा में होना चाहिए। बच्चे इस दिशा की और देख कर पढ़ाई करें, इस से उन्हें लाभ होगा।

भाई दूज पर तिलक करते समय इस दिशा में होना चाहिए भाई का मुंह, बहनें भी रखें इन बातों का ध्यान

भाई दूज का पर्व कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इस साल भाई दूज का पर्व 14 और 15 नवंबर 2023 को मनाया जाएगा। रक्षाबंधन की तरह यह पर्व भी हर भाई-बहन के लिए बेहद खास है।

इस त्यौहार को भाई दूज, भाई टीका और यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। हर साल भाई दूज दिवाली के दो दिन बाद मनाया जाता है। कहा जाता है कि भाई दूज के दिन तिलक लगाने से भाई को लंबी उम्र के साथ सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

मान्यताओं के अनुसार बहनों को भाई का तिलक करते समय शुभ मुहूर्त के अलावा कुछ अन्य नियमों का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। आइए जानते हैं इन नियमों के बारे में…

तिलक लगाते समय इन बातों का रखें ध्यान

भाई दूज के दिन बहन रोली का तिलक लगाकर अपने भाई की पूजा करती है, लेकिन तिलक लगाते समय दिशा का ध्यान रखना चाहिए।

वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार तिलक करते समय भाई का मुख या तो उत्तर या उत्तर-पश्चिम दिशा में होना चाहिए और बहन का मुख उत्तर-पूर्व या पूर्व में होना चाहिए। साथ ही भाई दूज के दिन बहन को अपने भाई का तिलक करने से पहले कुछ भी खाना-पीना नहीं चाहिए।

भाई दूज पर ऐसे करें तिलक

भाई दूज के दिन सबसे पहले आटे की लोई बना लें। इसके बाद चौकोर पर लकड़ी की एक डंडी रख दें और उस पर भाई को बिठा दें। ध्यान रहे कि भाई का मुख पूर्व दिशा की ओर हो।

फिर भाई के माथे पर तिलक करें। तिलक लगाने के बाद भाई के हाथ पर कलावा बांधें। इसके बाद दीप जलाकर भाई की आरती करें और उनकी लंबी आयु की कामना करें।

बहन-भाई को भूल कर भी न करें ये गलतियां

  • भाई दूज के दिन बहन और भाई को आपस में बहस या झगड़ा नहीं करना चाहिए।
  • बहन को भाई से मिले उपहार का अनादर नहीं करना चाहिए।
  • भाई दूज के दिन बहन को भाई का तिलक करने से पहले कुछ भी खाना-पीना नहीं चाहिए।
  • इस दिन भूलकर भी बहन और भाई को एक दूसरे से झूठ नहीं बोलना चाहिए।
  • भाइयों को तिलक लगाते समय बहनों को इस दिन भी काले कपड़े नहीं पहनने चाहिए।

जानिए कब है भाई दूज, शुभ मुहूर्त और तिलक करने की विधि

भाई दूज का त्यौहार भाई बहन के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। भाई दूज का त्यौहार दिवाली के दो दिन बाद कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है।

इस दिन बहनें अपने भाइयों के हाथ पर कलावा बांधती है और माथे पर तिलक लगाकर एवं देवता से उसकी लंबी उम्र की कामना करती है।

दिवाली के 2 दिन बाद आने वाले इस पर्व का महत्व माना जाता है कि इस पर्व को सबसे पहले यमराज और उसकी बहन यमुना द्वारा बनाया गया था।

तो आइये जानते हैं भाई दूज का शुभ मुहूर्त और तिलक करने की विधि:-

भाई दूज तिलक शुभ मुहूर्त

इस साल भाई दूज का त्योहार दो दिन यानी 14 और 15 नवंबर 2023 को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार कार्तिक माह के शुक्ल द्वितीया तिथि की शुरुआत 14 नवंबर 2023 को दोपहर 02 बजकर 36 से शुरू हो रही है। इसका समापन 15 नवंबर 2023 को दोपहर 01 बजकर 47 पर होगा।

bhai dooj 2023

तिलक करने की विधि

भाईदूज के दिन सुबह स्नान करें। उसके बाद भगवान् की पूजा करनी चाहिए। फिर सूर्य देव को अर्द्ध दें और सूर्य देव की  पूजा करें और कहें कि मेरे भाई को चिरंजीवी होने का वरदान दें।

इसी वरदान के साथ भाई को टीका लगाने की विधि शुरू करनी चाहिए। इसके लिए आप पिसे हुए चावल के आटे या घोल से चौक बनाएं और शुभ मुहूर्त में इस चौक पर भाई को बिठाएं।

फिर भाई के माथे पर चावल का तिलक लगाएं, हाथ में कलावा बांधें और उन्हें सूखा नारियल, पान सुपारी, कुछ पैसे देकर मुंह मीठा करें और उन्हें भोजन कराएं।

भाईदूज से जुड़ी पौराणिक कथा

कई ऐसी पौराणिक कहानियां प्रचलित हैं, जिन्हें भाईदूज की शुरुआत का कारण मानते हैं। जिनमें से एक भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी है।

एक पौराणिक कथा के अनुसार, जब वह राक्षस नरकासुर को मारने के बाद घर लौटे तो उनका स्वागत उनकी बहन (सुभद्रा) ने फूल, फल और मिठाई से किया।

सुभद्रा ने दीया जलाकर और भगवान श्रीकृष्ण के माथे पर तिलक लगाकर एक हजार से ज्यादा सालों तक भाई के जीवित रहने की कामना की। कहते हैं कि इसके बाद ही भाईदूज मनाने की परपंरा बन गई।

भाई का बहन के घर जाकर भोजन करना काफी शुभ माना जाता है अगर वह शादीशुदा हो तो वह अपने भाई को अपने हाथों से बनाकर भोजन कराएं। भाई अपनी बहन को अपने सामर्थ्य के अनुसार कुछ ना कुछ भेंट अवश्य दे।

घर में दीपक जलाते समय रखें इन बातों का ध्यान!!

दिवाली रोशनी का त्यौहार है। हिन्दू धर्म और परंपरा के अनुसार पूजा के समय दीपक जलाने का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि दीपक के बिना पूजा अधूरी होती है।

पूजा के दौरान सुबह-शाम भगवान के समक्ष एक दीपक जलाया जाता है। दिवाली, नवरात्रि या विशेष अनुष्ठानों के दौरान चौबीस घंटे दीपक जलाया जाता है। दीपक को चमक का प्रतीक माना जाता है।

प्रकाश घर में शुद्धता, जीवंतता और सकारात्मकता लाता है इसलिए दीपक जलाना आशा की निशानी माना जाता है। भगवान के समक्ष दीपक जलाने के लिए हमें कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए :-

दीपक जलाने का महत्व

दीपक को ज्ञान और प्रकाश का प्रतीक भी माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार, दीपक को सकारात्मकता और गरीबी को कम करने का साधन माना जाता है।

घर में दीपक जलाना शुभ माना जाता है। इनडोर लाइट्स सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करती हैं। शास्त्रों के अनुसार, भगवान के समक्ष दीपक जलाना अनिवार्य माना जाता है।

भगवान के समक्ष कौन सा दीपक जलाना चाहिए?

किसी भी पूजा को शुरू करने से पहले, शुरुआत में दीपक जलाया जाता है और अग्नि देवता से प्राथना की जाती है कि वे तब तक स्थिर रहें जब तक पूजा करने का संकल्प पूरा नहीं हो जाता।

हम भगवान के पास समक्ष तेल और घी का दीपक जला सकते हैं। कहा जाता है कि घी का दीपक अधिक सकारात्मकता लाता है।

ऐसा माना जाता है कि भगवान के समक्ष दीपक जलाने से लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और वहां स्थिर होती हैं। शुद्ध घी का दीपक जलाना अत्यंत लाभकारी होता है।

दीपक किस दिशा में रखना चाहिए?

दीपक को किस दिशा में जलाना चाहिए उसके लिए कुछ नियम दिए गए हैं, जिस दिशा में दीपक को निर्देशित किया जाना चाहिए:- ऐसा कहा जाता है कि यदि आप एक तेल का दीपक जला रहे हैं, तो आपको इसे अपने बाएं हाथ की ओर रखना चाहिए और यदि आप घी का दीपक जला रहे हैं, तो यह आपके दाहिने हाथ की ओर होना चाहिए।

आर्थिक लाभ के लिए दीपक उत्तर की ओर रखें। अगर आपके घर में बार-बार बीमारी हो रही है, तो दीपक को पूर्व की ओर रखें। ये दोनों दिशाएँ अत्यंत शुभ मानी जाती हैं।

दीपक जलाते समय इन खास बातों ध्यान रखें

  • दीपक जलाने से पहले उसको अच्छे से साफ़ करे लें। साफ़-सुथरा दीपक ही पूजा में मान्य है।
  • पूजा में कभी भी खंडित दीपक नहीं जलाना चाहिए। नहीं तो शुभ फल मिलने की जगह आपको परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
  • इस बात का खास ख्याल रखें कि दीपक हमेशा भगवान की मूर्ति के ठीक सामने लगाएं। कई बार हम भगवान की प्रतिमा के सामने दीपक न लगाकर कहीं और लगा देते है, तो सही नहीं होता है।
  • ध्‍यान रखें कि पूजा के दौरान बीच में दीपक ना बुझे। ऐसा होना अशुभ माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि ऐसा होने पर पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं हो पाता है।
  • घी के दीपक के लिए सफेद रुई की बत्ती इस्‍तेमाल ही करें जबकि तेल के दीपक के लिए लाल धागे की बत्ती श्रेष्ठ रहती है।

दीपावली पर इन राशियों पर बरसेगी माँ की असीम कृपा

दीपावली का त्यौहार शरद ऋतु (उत्तरी गोलार्द्ध) में हर वर्ष मनाया जाने वाला एक प्राचीन सनातन संस्कृति का त्यौहार है। दीपावली कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है।

दीपावली का त्यौहार भारत के सबसे बड़े और सर्वाधिक महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। दीपावली दीपों का त्योहार है। आध्यात्मिक रूप से यह ‘अन्धकार पर प्रकाश की विजय‘ को दर्शाता है।

धनतेरस से भाई दूज तक करीब 5 दिनों तक चलने वाला दिवाली का त्यौहार कार्तिक माह की अमावस्या को आाता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार इस बार यह त्योहार 12 नबंबर 2023 रविवार को मनाया जाएगा और इसके एक दिन पहले धनतेरस और एक दिन बाद भाईदूज का त्यौहार होता है।

दिवाली शुभ मुहूर्त

दीपावली के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त 12 नवंबर की शाम 5 बजकर 40 मिनट से लेकर 7 बजकर 36 मिनट तक है। वहीं लक्ष्मी पूजा के लिए महानिशीथ काल मुहूर्त रात 11 बजकर 39 मिनट से मध्यरात्रि 12 बजकर 31 मिनट तक है।

मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए आने वाला त्योहार बहुत शुभ रहने वाला है। आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव आएंगे। आप इस समय का भरपूर आनंद लेंगे। जीवन में खुशियों का आगमन होगा।

देवी लक्ष्मी आपसे प्रसन्न रहेंगी। इस अवधि में आपके अटके हुए कार्य भी बन पड़ेंगे। आप परिवार के साथ खूब एन्जॉय करेंगे और इस त्योहारी सीजन का आनंद उठाएंगे।

मिथुन राशि

मिथुन राशि के जातक भी बहुत भाग्यशाली हैं। उन्हें दिवाली पर बन 500 साल बाद बन रहे शुभ राजयोग का लाभ मिलने वाला है। आपको हर क्षेत्र में सफलता हासिल होगी।

आपको किसी मांगलिक कार्य में हिस्सा लेने का अवसर मिल सकता है। दफ्तर में कामकाज बढ़िया रहेगा। साथ ही पद-प्रतिष्ठा व सम्मान में इजाफा होगा। आप पर माता लक्ष्मी मेहरबान रहेंगी।

मकर राशि

मकर राशि के जातकों को भी इस साल दिवाली पर बड़ी खुशखबरी मिल सकती है। आपके लिए इस समय बहुत शुभ व् फलदायी रहेगा। मात लक्ष्मी की कृपा आप पर बनी रहेगी। वैवाहिक जीवन मधुर रहेगा।

घर परिवार का माहौल सुखद व सकारात्मक रहेगा। इस राशि के नौकरीपेशा जातकों की तरक्की हो सकती है। वहीं व्यापारियों को भी मुनाफा होने की उम्मीद है। इस बार की दिवाली आपकी झोली खुशियों से भर देगी।

 

जानिए कैसी होती थी मुगल बादशाहों की “दिवाली”

दीपावली का अर्थ होता है ‘दीपों की माला’ यानी दीपकों द्वारा की गई रोशनी। बनारस में देव दीपावली जैसे दीपोत्सव में यही देखने को मिलता है। दीपावली का उल्लेख स्कन्द पुराण में भी मिलता है।

इसके अतिरिक्त 7वीं सदी में राजा हर्षवर्धन के नाटकों में दीपोत्सव का उल्लेख है और 10वीं शताब्दी में राजशेखर के ‘काव्यमीमांसा‘ में भी इसका जिक्र किया गया है। हालांकि, दीपावली केवल हिन्दुओं का ही त्यौहार नहीं है बल्कि अन्य धर्मों द्वारा भी इसे मनाया जाता रहा है।

इसका इतिहास भी काफी दिलचस्प है। इतिहासकारों की मानें तो आज जिस धूमधाम से देश भर में दिवाली मनाई जाती है उसकी शुरूआत मुगलों के शासनकाल में हुई थी। तो चलिए जानते हैं :-

मोहम्मद बिन तुगलक की दिवाली

मुस्लिम बादशाहों द्वारा दीवाली को धूमधाम से मनाने का उल्लेख इतिहास में दर्ज हैं। 14वीं सदी में मोहम्मद बिन तुगलक अपने अंतरमहल में दीवाली मानता था और काफी बड़ा भोज रखता था। जश्न भी होता था लेकिन आतिशबाजी का उल्लेख उसके शासनकाल में कहीं नहीं मिलता है।

बादशाह अकबर की दिवाली

16वीं सदी में अकबर ने धूमधाम से दीवाली मनाने की शुरूआत की। उसके शासनकाल में दीवाली के दिन दरबार को शानदार ढंग से सजाया जाता था।

अकबर ने रामायण का फारसी में अनुवाद कराया था जिसका पाठ भी किया जाता था और इसके बाद श्रीराम की अयोध्या वापसी का नाट्य मंचन होता था।

इसके अलावा अपने मित्र राजाओं के यहां दीवाली के अवसर पर मिठाइयों का वितरण भी करवाते थे। आतिशबाजी की हल्की-फुल्की शुरूआत हो चुकी थी।

शाहजहां की दिवाली

अकबर के बाद 17वीं सदी में शाहजहां ने दिवाली के रूप में और परिवर्तन किया। वह दिवाली के इस अवसर पर 56 राज्यों से अलग-अलग मिठाई मंगाकर 56 प्रकार के थाल सजाते थे। साथ ही शहीदों को याद करते हुए सूरजक्रांत नामक पत्थर पर सूर्य किरण लगाकर उसे पुनः रोशन किया जाता जो साल भर जलता था।

इसके अलावा एक 40 फुट का आकाश दीया जलाया जाता जिसमें 40 मन कपास के बीज का तेल डाला जाता था। शाहजहां के शासनकाल में भव्य आतिशबाजी होती थी जिसमें महिलाओं के लिए अलग तरह से आतिशबाजियां होती थीं।

तब दिल्ली में आतिशबाजियों की धूम हुआ करती थी। इस पर्व को पूरी तरह हिन्दू तौर-तरीकों से मनाया जाता था। भोज भी एकदम सात्विक होता था।

मोहम्मद शाह की दिवाली

मोहम्मद शाह का शासन 1719 से 1748 तक रहा। वह संगीत और साहित्य प्रेमी था और उसे मोहम्मद शाह ‘रंगीला‘ के नाम से भी जाना जाता था। ‘रंगीला’ नाम से ही समझ आ रहा है कि वह काफी शौकीन मिजाज बादशाह था।

दिवाली पर वह अपनी तस्वीर बनवाता और अकबर तथा शाहजहां से भी दोगुने चौगुने अंदाज में दिवाली का जश्न मनाता था। उसने दिवाली के त्यौहार को और ज्यादा भव्यता दी। उसके शासनकाल में लाल किले को शानदार तरीके से सजाया जाता था।

अलग-अलग तरह के पकवान बनते थे जो केवल महल में ही नहीं बल्कि आम जनता में भी बांटे जाते थे।
इतिहासकारों का कहना है कि दीवाली की जो परम्परा मोहम्मद शाह ‘रंगीला’ ने शुरू की उसी का निर्वाह हम आज भी कर रहे हैं।

मुग़लों के बाद यहां तक कि अंग्रेजों के देश पर कब्जे और उनके द्वारा मुगलों को नाममात्र के शासक तक सीमित कर दिया गया, तब भी दिवाली भव्य बनी रही।

बहादुर शाह जफर अक्सर लाल किले में दीवाली की थीम पर आधारित नाटकों का आयोजन करते थे जिसे आम जनता भी देख सकती थी। मुगलकाल के बाद अंग्रेजों के आने पर भी दिवाली पर आतिशबाजी की जाती थी और अंग्रेज भी उसका आनंद उठाते थे।

 

दिवाली पर राशि के अनुसार इन रंगों के कपड़े पहनकर करें माँ लक्ष्मी की पूजा, होगी धन की वर्षा

दिवाली साल के सबसे पवित्र त्योहारों में से एक है। भारतवर्ष में मनाए जाने वाले सभी त्यौहारों में दीपावली का सामाजिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से अत्यधिक महत्त्व है। इसे दीपोत्सव भी कहते हैं।

यह न केवल भारत में मनाया जाता है, बल्कि नेपाल, इंडोनेशिया, फिजी, मॉरीशस, मलेशिया, श्रीलंका, थाईलैंड और यहां तक ​​कि सिंगापुर में भी मनाया जाता है।

इस पर्व में लोग घर को दीयों और रोशनी से सजाते हैं और अलग-अलग रंगों के कपड़े पहनते हैं। खासतौर पर महिलाएं। ज्योतिष शास्त्रों की मानें तो यदि इस दिन राशि के अनुसार कुछ ख़ास रंगों के कपड़े पहनकर माँ की पूजा की जाए तो आपके जीवन में खुशहाली और धन की वर्षा होगी।

चलिए जानते हैं इस पोस्ट के माध्यम से कि राशि के अनुसार किस रंग के कपड़े पहनकर करें माँ लक्ष्मी की पूजा:-

मेष राशि

दीपावली के दिन मेष राशि के जातक लाल रंग के वस्त्र पहन सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि मेष राशि का शुभ रंग लाल होता है। अब क्योंकि लाल रंग देवी लक्ष्मी को बेहद प्रिय है, ऐसे में हो सकता है कि देवी आपसे प्रसन्न होकर आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी कर दें।

वृषभ राशि

वृषभ राशि के जातक का शुभ रंग सफेद होता है। इसलिए दीपावली के मौके पर इस राशि के लोगों को सफेद रंग के वस्त्र पहनने चाहिए। इससे आपके अंदर पॉजिटिव एनर्जी का संचार होगा।

मिथुन राशि

मिथुन राशि का शुभ रंग पीला माना जाता है। इसलिए दिवाली के मौके पर पीले रंग के वस्त्र धारण करें। क्योंकि पीला रंग भगवान गणेश को भी अति प्रिय है, इसलिए दिवाली के मौके पर इस रंग के कपड़े पहनना आपके लिए शुभ साबित हो सकता है।

कर्क राशि

कर्क राशि के जातकों को दिवाली पर सफेद रंग के कपड़े पहनने चाहिए। ये रंग इस राशि के लोगों के लिए काफी अच्छा होता है। ये रंग शांति और सकारात्मकता का प्रतीक है।

सिंह राशि

सिंह राशि का शुभ रंग सुनहरा यानी गोल्डन होता है। गोल्डन रंग आपके लुक को निखारने के साथ-साथ आपकी किस्मत को भी निखार सकता है।

कन्या राशि

कन्या राशि का शुभ रंग हरा होता है। पूजा पाठ के लिए हरा रंग शुभ माना जाता है। इसलिए इस दिन हरे रंग के कपड़े पहनें।

तुला राशि

तुला राशि के लोगों के लिए लाल रंग शुभ माना जाता है। दिवाली पर लाल रंग के कपड़े जरूर पहनें। इससे देवी लक्ष्मी प्रसन्न होकर आप पर अपनी कृपा बरसा सकती हैं।

वृश्चिक राशि

इस राशि का शुभ रंग लाल माना जाता है। लाल रंग के कपड़े दीपावली के दिन जरूर पहनें। ये आपको तेज प्रदान करेगा।

धनु राशि

इस राशि के लोगों के लिए पीला रंग शुभ माना जाता है। इसलिए इस राशि के लोगों को दिवाली पर पीले रंग के कपड़े पहनने चाहिए।

मकर राशि

इस राशि का शुभ रंग नीला माना जाता है। नीला रंग देखने में बहुत सुंदर लगता है। ये रंग आपके भीतर शांति का संचार करेगा। इसलिए दिवाली पर इस राशि के लोगों को नीले रंग के कपड़े जरूर पहनने चाहिए।

कुंभ राशि

कुंभ राशि के लिए आसमानी रंग यानी स्काई ब्लू कलर शुभ माना जाता है। दिवाली के दिन आपको आसमानी रंग के वस्त्र पहनने चाहिए।

मीन राशि

मीन राशि के लिए भी पीला रंग शुभ माना जाता है। पीला रंग मां लक्ष्मी और भगवान गणेश, दोनों को प्रिय है। इसलिए दिवाली पर मीन राशि के जातकों को पीले रंग के कपड़े जरूर पहनने चाहिए।

आईये देखें कि अलग-2 धर्म और देश क्यों और कैसे मनाते हैं दिवाली का त्यौहार

दिवाली हिंदू धर्म में मनाया जाने वाला सबसे बड़ा त्यौहार है। धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक लिहाज से दिवाली भारत वर्ष और विश्व भर के हिंदू, सिख और अन्य धर्मों के बीच बहुत ही महत्वपूर्ण त्यौहार है।

दिवाली की शुरुआत, नाम और उद्देश्य

दीपावली का अर्थ है दीपों की माला अर्थात बहुत सारे दीयों को एक साथ जलाना। अंधकार को बुराई, पाप और असत्य का प्रतीक माना जाता है जबकि प्रकाश को अच्छाई, पुण्य और सत्य का प्रतीक समझा जाता है।

इसलिए दीप जला कर यह प्रकट किया जाता है कि अच्छाई, पुण्य और सत्य के साथ हैं न कि बुराई के साथ। साथ ही यह छुट्टी, आराम, ख़ुशी, उत्सव और उल्लास का पर्व है। हिन्दू धर्म के साथ ही इस त्यौहार को सिख, बौद्ध तथा जैन धर्म के लोग भी मनाते हैं।

आईये देखते हैं कि विभिन्न धर्मों के लोग दिवाली को किन कारणों से मानते हैं।

हिन्दू धर्म में दिवाली

हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार जब आयोध्या के भावी राजा मर्यादा पुरषोतम भगवान राम चौदह वर्ष का वनवास काट कर आयोध्या वापिस लौटे तो आयोध्या के निवासियों ने घी के दीपक जला कर उनका स्वागत किया।

साथ ही राज्य भर में निवासियों ने अपने परमप्रिय राजा के वापिस आने की ख़ुशी में गाँव-२ नगर-२ में हर्षोउल्लास में कई दिनों तक नाच-गा कर उत्सव मनाये। उन्होंने एक दूसरे को गले लगा कर बधाईयां दी और उपहार आदि भेंट किये। हिन्दू धर्म में मर्यादा पुरषोतम राम को हिन्दुओं के मुख्य देवता भगवान् विष्णु का अवतार माना जाता है।

वनवास के अंतिम भाग में रावण ने माता सीता का अपहरण कर लिया था। श्री राम ने वानर, भालुओं की सेना लेकर रावण की स्वर्ण नगरी पर चढ़ाई कर रावण का वध किया और माता सीता को मुक्त करा लिया था।

उनकी इस जीत की ख़ुशी में भी आयोध्या वासियों के उल्लास को बढ़ा दिया था। हिन्दू कैलेंडर पञ्चाङ्ग के अनुसार हर वर्ष उसी दिन यह त्यौहार मनाया जाने लगा और इसे दिवाली या दीपावली का नाम दे दिया गया।

रावण को अंधकार, पाप और असत्य का प्रतीक माना गया है और श्री राम को प्रकाश, पुण्य और सत्य का। इसीलिए दिवाली को प्रकाश का पर्व भी माना जाता है। बृहदारण्यक उपनिषद में वर्णित ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ अर्थात् ‘अंधेरे से ज्योति अर्थात प्रकाश की ओर जाइए’ को यह त्यौहार सत्यापित करता है ऐसा माना जाता है।

सिख धर्म में दिवाली

सिख धर्म में दिवाली को बंदी-छोड़ दिवस के रूप में मनाया जाता है. दीपावली त्यौहार सिख समुदाय द्वारा ऐतिहासिक रूप से मनाया जाता है। इस दिन सिक्खों के छठे गुरु श्री गुरु हरगोविंद व अन्य राजाओं को मुग़ल राजा जहांगीर ने ग्वालियर किले की कैद से मुक्त किया था। उनके अमृतसर पहुंचने पर दिवाली मनाई गयी थी।

सिक्खों के लिए यह दिन इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि 1577 में इसी दिन सिखों के सबसे पवित्र स्थान अमृतसर के स्वर्ण मन्दिर का शिलान्यास हुआ था

जैन धर्म में दिवाली

जैन धर्म में दिवाली जैन तीर्थंकर महावीर जी के निर्वाण दिवस के रूप में मनाई जाती है। 527 ई. पू. में इसी दिन भगवान महावीर के परिनिर्वाण यानि मृत्यु पर उनके अनुयायी 18 राजाओं के समूह ने दीप जला कर उन्हें श्रद्धांजलि दी थी। ये सभी राजा महावीर के अंतिम प्रवचन के लिए एकत्र हुए थे।

उन्होंने यह कह कर दीप जलाये की एक महान प्रकाशपुंज के लिए एक प्रकाशदीप की श्रद्धांजलि से अच्छा भला क्या हो सकता है। तभी से जैन धर्म को मानने वाले दिवाली पर दीपक जलाते हैं। जैन लोग इस पर्व पर लक्ष्मी पूजन भी करते हैं।

बौद्ध धर्म में दिवाली

नेपाल के नेवाड़ लोग जो वज्रयाणा बोध धर्म के इष्टदेवों को मानते हैं वे लोग दिवाली पर लक्ष्मी का पूजन करते हैं। वे लोग पांच दिनों तक इस पर्व को मानते हैं।

इसी दिन आर्य समाज के प्रवर्तक स्वामी दयानंद तथा स्वामी रामतीर्थ का निर्वाण भी दिवस है जिस कारण दिवाली आर्य समाज के लिए दिवाली बहुत महत्व रखती है।

विभिन्न देशों में दिवाली

इसके अलावा विश्व भर में विभिन्न धर्मों के मानने वालों में दिवाली को बड़े पैमाने पर सौहार्द, भाईचारे और विश्व शान्ति की कामना के रूप में मनाया जाता है। ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, न्यूज़ीलैंड, फिजी आदि देशों में स्थानीय लोग प्रवासी भारतीयों के साथ इस पर्व को हर्षोउल्लास के साथ मनाते हैं।

दिवाली नेपाल, भारत, श्रीलंका, म्यांमार, मारीशस, गुयाना, त्रिनिदाद और टोबैगो, सूरीनाम, मलेशिया, सिंगापुर, फिजी, पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया की बाहरी सीमा पर स्थित क्रिसमस द्वीप में एक सरकारी छुट्टी है।

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