दिवाली पर लक्ष्मी पूजा में जरूर शामिल करें ये खास चीजें!

हिन्दू पंचांग के अनुसार दीपावली का पर्व कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाया जाता है। दिवाली की रात मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है।

दिवाली पर देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा में सभी चीजों का उपयोग किया जाता है। लेकिन दिवाली के खास मौके पर पूजा में कुछ खास चीजों को जरूर शामिल करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।

तो चलिए जानते हैं इस पोस्ट इस के माध्यम से कि वे कौन कौन सी चीज़े हैं जिनको दिवाली की पूजा में अवश्य रखना चाहिए, तो चलिए शुरू करते हैं :-

लक्ष्मी जी के पदचिन्ह

शास्त्रों के अनुसार मां लक्ष्मी सुख, समृद्धि, धन और ऐश्वर्य की देवी हैं। मां लक्ष्मी की कृपा से व्यक्ति धनवान और समृद्ध होता है और जीवन से धन की कमी हमेशा के लिए दूर हो जाती है।

मां लक्ष्मी की पूजा में उनके चरणों की पूजा की जाती है। ऐसे में दिवाली के दिन देवी लक्ष्मी की पूजा में सोने, चांदी या धातु के बने पैर रखने चाहिए। यदि आप सोने-चांदी के बने पैरों के निशान नहीं रख सकते हैं तो कागज़ पर बने पैरों की पूजा करनी चाहिए।

दक्षिणावर्त शंख

देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा में शंख का विशेष महत्व है। शंख के बिना मां लक्ष्मी की पूजा अधूरी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दिवाली के दिन देवी लक्ष्मी की पूजा करने से दक्षिणमुखी शंख की पूजा करने से सुख – समृद्धि की प्राप्ति होती है।

माता लक्ष्मी और दक्षिणी शंख की उत्पत्ति समुद्र मंथन के समय हुई थी, इसी कारण दक्षिणी शंख को लक्ष्मी का भाई भी माना जाता है। ऐसे में दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजा में शंख को सही दिशा में रखें।

श्री यंत्र

श्री यंत्र के बिना मां लक्ष्मी की पूजा अधूरी है। इसलिए दिवाली के दिन श्री यंत्र को मां लक्ष्मी की पूजा में जरूर शामिल करें।

खीर

दीवाली के दिन मां लक्ष्मी के भोग में खीर भी शामिल करें। खीर मां लक्ष्मी का प्रिय भोजन है। ऐसे में दिवाली पर मिठाइयों के अलावा घर में ड्राई फ्रूट्स से बनी खीर जरूर चढ़ाएं।

पूजा करना

माना जाता है कि जिस घर में सबसे ज्यादा साफ-सफाई होती है, वहां मां लक्ष्मी का वास होता है। दिवाली पर मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए घर के मुख्य द्वार पर आम, पीपल और अशोक के नए कोमल पत्तों की माला लगाएं। मुख्य द्वार की पूजा से मां लक्ष्मी शीघ्र प्रसन्न होती हैं।

पीला कौड़ियां

पीली कौड़ियों को धन और देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। दिवाली पर देवी लक्ष्मी की पूजा के दौरान पीली कौड़ियों को जरूर शामिल करना चाहिए। पूजा के बाद इन कौड़ियों को तिजोरी में रख दिया जाता है।

पान के पत्ते

पान को हिंदू धर्म में पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल किया गया है। दिवाली के दिन देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा में पान के पत्ते पर स्वस्तिक का चिह्न बनाएं।

गन्ना

मां लक्ष्मी की सवारी ऐरावत हाथी है, इसलिए मां लक्ष्मी को गजलक्ष्मी भी कहा जाता है। ऐरावत हाथी को गन्ना खाना बहुत पसंद है। इसलिए देवी लक्ष्मी की पूजा में गन्ने को जरूर शामिल करना चाहिए।

धनिया

बहुत से लोग धनिये के बीज खरीद कर घर पर रखते हैं। इसे सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। दिवाली के दिन लक्ष्मी इसे पूजा की थाली में रखती हैं।

कमल का फूल

माता लक्ष्मी हमेशा कमल के फूल पर विराजमान रहती हैं और उन्हें कमल के फूल बहुत प्रिय हैं। इसलिए दीपावली के दिन देवी लक्ष्मी की पूजा में कमल के फूल को अवश्य शामिल करें।

दिवाली पर कैसे करे माँ लक्ष्मी की पूजा और क्यों चढ़ाए जाते है खील-बताशे !!!

दिवाली का त्यौहार आने वाला है और इस त्यौहार की तैयारी काफी समय पहले से होने लगती है। माना जाता है, कि दिवाली के दिन दीपों की रोशनी में मां लक्ष्मी घर में आती हैं। दिवाली पर सभी माँ लक्ष्मी की पूजा करते हैं।

दिवाली पर लोग पूजन सामग्री और खील-बताशे खरीदते हैं। मां लक्ष्मी को दीपावली पर खील-बताशे का प्रसाद जरूर चढ़ाया जाता है।  क्या आप जानते हैं कि माता लक्ष्मी की पूजा खील बताशों से ही क्यों की जाती है? “खील” मतलब होता है धान।  खील मूलत: धान (चावल) का ही एक रूप है। खील चावल से बनती है।

चावल उत्तर भारत की  प्रमुख फसल भी है। वैसे तो  माता लक्ष्मी को बेसन के लड्डू और भगवान गणेश को मोदक का प्रसाद चढ़ाया जाता है। परन्तु दिवाली पर खील-बताशे ही चढ़ाए जाते हैं।

खील-बताशो  का महत्व

दीपावली के पहले ही धान की फसल तैयार हो जाती है, इस कारण लक्ष्मी को फसल के पहले भोग के रूप में खील-बताशे चढ़ाए जाते हैं। खील बताशों का एक ज्योतिषीय महत्व भी है। दीपावली धन और वैभव की प्राप्ति का त्योहार है, और धन-वैभव का दाता शुक्र ग्रह माना जाता है।

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शुक्र ग्रह का प्रमुख धान्य धान होता है। शुक्र को प्रसन्न करने के लिए हम लक्ष्मी को खील-बताशे का प्रसाद चढ़ाते हैं। यही कारण है कि दिवाली के दिन खील-बताशे चढ़ाए जाते हैं।

श्वेत और मीठी सामग्री दोनों शुक्र की ही कारक हैं। अत: इन दोनों को मिलाकर वास्तव में शुक्र ग्रह को ही अनुकूल किया जाता है। मां लक्ष्मी को प्रसन्न कर भी शुक्र को अपने अनुसार किया जा सकता है। दीप पर्व पर संभवत: यही कारण है, कि खील बताशों के बिना लक्ष्मी पूजन संपन्न नहीं माना जाता है।

ऐसे करे मां लक्ष्मी की पूजा

दिवाली पर प्रत्येक व्यक्ति माँ लक्ष्मी की पूजा करता है। दिवाली वाले दिन मां लक्ष्मी की पूजा के लिए अभी से रख ले ये 33 चीजें।  इस दिन मां लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु, भगवान गणेश और भगवान कुबेर की भी पूजा करनी चाहिए।

इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने के लिए कलावा, रोली, सिंदूर, एक नारियल, अक्षत, लाल वस्त्र , फूल, पांच सुपारी, लौंग, पान के पत्ते, घी, कलश, कलश के लिए आम का पल्लव, चौकी, समिधा, हवन कुण्ड, हवन सामग्री, कमल गट्टे, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल), फल, बताशे, मिठाईयां, पूजा में बैठने हेतु आसन, हल्दी, अगरबत्ती, कुमकुम, इत्र, दीपक, रूई, आरती की थाली, कुशा, रक्त चंदनद, श्रीखंड चंदन पूजन सामग्री का इस्तेमाल करना चाहिए।

पूजन शुरू करने से पहले चौकी को धोकर उस पर रंगोली बनाएं और चौकी के चारों तरफ चार दीपक जलाएं। जिस जगह पर आप  मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा को स्थापित करने जा रहे हैं, वहां पर थोड़ा सा चावल जरूर रखें। मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए उनके बायीं ओर भगवान विष्णु की प्रतिमा को स्थापित करें।

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आसन लगाकर उनके सामने बैठ जाएं और खुद को व आसन को इस मंत्र से शुद्ध करें

ऊं अपवित्र : पवित्रोवा सर्वावस्थां गतोऽपिवा। य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तर: शुचि :॥

इस मंत्र से खुद पर और आसन पर 3-3 बार कुशा व पुष्पादि से छीटें लगाएं।

इस तरह  मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख शांति और धन की वर्षा होती है

पूजा करते समय हाथ में पुष्प, फल, सुपारी, पान, चांदी का सिक्का, नारियल (पानी वाला), मिठाई, मेवा, आदि सभी सामग्री थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेकर दिवाली पूजन के लिए संकल्प लें।

सबसे पहले गणेश भगवन की पूजा करें और इसके बाद स्थापित सभी देवी-देवताओं का पूजन करें। कलश की स्थापना करें और मां लक्ष्मी का ध्यान करें। मां लक्ष्मी को इस दिन लाल वस्त्र जरूर पहनाएं। मां लक्ष्मी सभी की मनोकामना को पूरी करती है।

दिवाली वास्तु टिप्स 2023: दिवाली से पहले घर से तुरंत हटा दें ये चीजें, आएगी सुख-समृद्धि

धार्मिक मान्यता के अनुसार दिवाली के दिन देवी लक्ष्मी हर घर में प्रवेश करती हैं और देखती हैं कि वहां साफ-सफाई और सुंदरता है या नहीं। जिन घरों में साफ-सफाई नहीं होती है और जहां गंदगी और टूटी-फूटी चीजें होती हैं, वहां मां लक्ष्मी का वास कभी नहीं होता।

इस बार दिवाली का पर्व 12 नवंबर को मनाया जा रहा है। ऐसे में आइए जानते हैं कि दिवाली पर लक्ष्मी पूजा से पहले किन चीजों को घर से बाहर फेंक देना चाहिए।

  • दीपावली का पर्व सुख, समृद्धि और धन का पर्व है। दिवाली के दिन घर की सफाई करते समय सबसे पहले आप टूटे शीशे के सामान को घर से तुरंत हटा दें।
  • टूटे शीशे की खिड़कियों की मरम्मत कराएं। वास्तु के अनुसार घर में टूटा हुआ कुछ भी नकारात्मक ऊर्जा और कलह पैदा करता है।
  • घर में रखी बेकार या बंद घड़ियों को दिवाली से पहले हटा देना चाहिए। घर में कभी भी बंद या क्षतिग्रस्त घड़ी नहीं रखें। बंद घड़ियां व्यक्ति की प्रगति और सफलता में बाधा डालती हैं।
  • दिवाली से पहले घर के सभी टूटे हुए सजावटी सामान को तुरंत हटा दें। टूटी चीजों से वास्तु दोष बहुत जल्दी उत्पन्न हो जाते हैं।
  • नष्ट हो चुके इलेक्ट्रॉनिक सामानों को भी बदला जाना चाहिए या बाहर फेंक देना चाहिए।
  • इसके अलावा घर के मुख्य द्वार समेत सभी दरवाजों और फर्नीचर में किसी भी तरह की आवाज नहीं होनी चाहिए। दिवाली से पहले सभी फर्नीचर की मरम्मत कर लेनी चाहिए।
  • बेडरूम में कोई भी चीज़े टूटी फूटी नहीं होनी चाहिए। वास्तु के अनुसार टूटा हुआ बिस्तर या अन्य कोई चीज़े व्यक्ति के वैवाहिक जीवन को प्रभावित करता है।
  • घर में रखे पुराने और टूटे हुए बर्तन, खिलौने, सजावटी सामान, कपड़े, चप्पल और फटी चादर को तुरंत घर से हटा देना चाहिए।
  • दिवाली के दिन पिछले साल का बचा हुआ दीपक कभी नहीं जलाना चाहिए। दिवाली के दिन घर में नया दीया खरीदकर ही जलाना चाहिए।

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दिवाली के खास मौके पर बनाये ये स्वादिष्ट रेसिपी, देखें वीडियो

दिवाली के त्यौहार में तरह-तरह के व्यंजन बनाए जाते हैं, जिनमें से कुछ खास तौर पर मेहमानों के स्वागत के लिए बनाए जाते हैं। आज हम आपके लिए ड्राई फ्रूट कचौरी बनाने की रेसिपी लेकर आए हैं। इसे बनाने में बहुत ही कम समय लगता है। आइए जानते हैं इसे बनाने की विधि के बारे में।

आवश्यक सामग्री

1 कप मैदा, चुटकी भर हींग, चुटकी भर अजवायन, 10 से 12 बादाम और काजू (कटे हुए), थोड़े से किशमिश, 2 चम्मच चीनी, 2 चम्मच सफेद तिल, 2 चम्मच मूंगफली, 2 हरी मिर्च (कटी हुई) , खसखस ​​और नारियल (कद्दूकस किया हुआ), 1 छोटा चम्मच, सौंफ – 1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, छोटी चम्मच अमचूर पाउडर, नमक स्वादानुसार, तलने के लिए तेल

व्यंजन विधि

  • एक चुटकी नमक, अजवायन, 1 छोटा चम्मच गुनगुना तेल और गुनगुना पानी डालकर आटा गूंथ लें।
  • इस आटे को 10 मिनट के लिए कपड़े से ढककर रख दें।
  • भरावन के लिए किशमिश और काजू-बादाम को छोड़कर सभी सामग्री को मिक्सी में पीस लें।
  • इस मिश्रण में काजू बादाम और किशमिश डालें। गूंथे हुए आटे की मोटी लोई लेकर उसमें 1 छोटी चम्मच भरकर कचौरी का आकार देते हुए अच्छी तरह सील कर दीजिए।
  • कड़ाही में तेल गर्म करें और कचौरियों को धीमी आंच पर सुनहरा होने तक तल लें।

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जानिए 2023 में दिवाली का शुभ महूर्त और पूजा के दौरान कौन सी बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

दीपावली हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्यौहार है। हिंदू धर्म में दिवाली का विशेष महत्व है। दिवाली अमावस्या के दिन पड़ती है। जब हर जगह अँधेरा होता है, तब एक दीपक की रोशनी इस अंधेरे को दूर करती है।

यह त्यौहार अंधकार पर प्रकाश की जीत के रूप में मनाया जाता है। अंधेरा कितना भी गहरा क्यों न हो, प्रकाश की एक किरण उसे नष्ट कर सकती है।

आज हम आपको इस पोस्ट में बताने जा रहे हैं दिवाली का शुभ महूर्त, महत्त्व और पूजा के समय ध्यान रखी जाने वाली बातें। तो आइये जानते हैं :-

पूजा का शुभ महूर्त

दीपावली के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त 12 नवंबर की शाम 5 बजकर 40 मिनट से लेकर 7 बजकर 36 मिनट तक है। वहीं लक्ष्मी पूजा के लिए महानिशीथ काल मुहूर्त रात 11 बजकर 39 मिनट से मध्यरात्रि 12 बजकर 31 मिनट तक है। ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार इस मुहूर्त में लक्ष्मी पूजा करने से जीवन में अपार सुख-समृद्धि की प्राप्ति होगी।

महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम जब लंका विजय कर पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ वनवास पूरा कर अयोध्या वापस आए थे। तब अयोध्या का हर घर और चौराहा दीपों की रोशनी से जगमग था।

हर अयोध्यावासी ने भगवान राम के वनवास से नगर आगमन पर अपने घर को दीपों से सजाया था। तब से हर वर्ष कार्तिक मास की अमावस्या को दिवाली मनाई जाती है।

पूजा के दौरान इस बात का ध्यान रखना जरूरी है।

  • दीपावली के दिन, लक्ष्मी पूजा से पहले घर की सफाई करें और वातावरण की शुद्धि और शुद्धता के लिए पूरे घर पर गंगाजल छिड़कें। घर के दरवाजे पर रंगोली और दीपक भी लगाएं।
  • पूजा स्थल पर चौघड़िया रखें और उस पर लाल कपड़े से लक्ष्मी और गणपति की मूर्ति रखें या दीवार पर लक्ष्मी की तस्वीर लगाएं। चौरांग के पास जल से भरा कलश रखें।
  • देवी लक्ष्मी और गणपति की मूर्तियों पर हल्दी कुमकुम लगाएं और जल, चावल, फल, गुड़, हल्दी, गुलाल आदि चढ़ाएं और देवी महालक्ष्मी की स्तुति करें।
  • इसके साथ ही देवी सरस्वती, काली, भगवान विष्णु और कुबेर की पूजा करें।
  • लक्ष्मी पूजन पूरे परिवार को मिलकर करना चाहिए।
  • लक्ष्मी पूजा के बाद तिजोरी, मशीनरी और व्यावसायिक उपकरणों की पूजा करें।

धनतेरस पर कुबेर यंत्र की पूजा भी है बेहद जरुरी, जाने विशेष नियम और ध्यान रखें ये बातें!!

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी के दिन धनतेरस का त्यौहार मनाया जाता है। सनातन धर्म में धनतेरस के दिन भगवान धनवंतरि की पूजा के साथ ही कुबेर यंत्र की भी पूजा का विधान है।

मान्यता है कि भगवान धनवंतरि की पूजा के साथ ही कुबेर यंत्र की भी पूजा का विधान है। मान्यता है कि धनतेरस के दिन अगर इस यंत्र की पूजा की जाए तो जीवन में धन की कमी नहीं होती है। तो आइए जानते हैं कि कुबेर यंत्र की पूजा और नियम :-

कुबेर यंत्र

यह धन अधिपति धनेश कुबेर का यंत्र है, इस यंत्र के प्रभाव से यक्षराज कुबेर प्रसन्न होकर अतुल सम्पत्ति की रक्षा करते हैं। यह यंत्र स्वर्ण और रजत पत्रों से भी निर्मित होता है, जहां लक्ष्मी प्राप्ति की अन्य साधनायें असफ़ल हो जाती हैं, वहां इस यंत्र की उपासना से शीघ्र लाभ होता है।

कुबेर यंत्र विजय दसमीं धनतेरस दीपावली तथा रविपुष्य नक्षत्र और गुरुवार या रविवार को बनाया जाता है। कुबेर यंत्र की स्थापना गल्ले, तिजोरियों व बन्द अलमारियों में की जाती है। लक्ष्मी प्राप्ति की साधनाओं में यह यंत्र अपना महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

विशष नियम

  • धनतेरस के शुभ मुहूर्त में भगवान धनवंतरि की पूजा के बाद धन के स्वामी कुबेर की पूजा करें। लेकिन ध्यान रखें जब भी कुबेर महराज की पूजा करें तो वहां कुबेर यंत्र जरूर रखें।
  • इस यंत्र को दक्षिण दिशा की और मुख करके ही स्थापित करें। इसके बाद हाथ में गंगाजल लेकर विनियोग मंत्र ‘अस्य श्री कुबेर मंत्रस्य विश्वामित्र ऋषि:वृहती छन्द: शिवमित्र धनेश्वरो देवता समाभीष्टसिद्धयर्थे जपे विनियोग:’ पढ़ें।
  • विनियोग मंत्र पढ़ने के बाद हाथ में लिया हुआ जल भूमि पर छिड़क दें और कुबेर मंत्र ‘ऊं श्रीं, ऊं ह्रीं श्रीं, ऊं ह्रीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय: नम:’ का जप करें। लेकिन ध्यान रखें कि मंत्र का स्पष्टरूप से उच्चारण करना जरूरी है।
  • इसकी पूजा करते समय इन मंत्रों में से कोई भी एक मंत्र पढ़ सकते हैं। इसमें अष्टाक्षर मंत्र ‘ऊं वैश्रवणाय स्वाहा:,’ षोडशाक्षर मंत्र ‘ ऊं श्री ऊं ह्रीं श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नम:’ का जप भी कर सकते हैं। इसके अलावा पंच त्रिंशदक्षर मंत्र ‘ऊं यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन धान्याधिपतये धनधान्या समृद्धि देहि दापय स्वाहा’ कहा जाता है कि इन मंत्रों के जप से धन के स्वामी कुबेरजी अत्यंत प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा से जीवन में कभी भी धन की कमी नहीं होती।

प्यार के बारे में 40 मनोवैज्ञानिक रोचक तथ्य

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प्यार बहुत खूबसूरत एहसास है, जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। लोग इस एहसास को विभिन्न तरीकों से महसूस करते हैं। यह व्यक्ति को ख़ुशी और गम दोनों देता हैं।

वे सभी पल, जिनमें प्यार शामिल है, हमारे मस्तिष्क और हृदय की मनोवैज्ञानिक प्रतिक्रिया है। हम जो महसूस करते हैं, वह हमारे शरीर, मन और आत्मा को प्रभावित करता है।

इस पोस्ट में हम आपको आज आपको प्यार के बारे में कुछ मनोवैज्ञानिक तथ्यों के बारे में बताने जा रहे हैं तो चलिए शुरू करते हैं

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प्यार के बारे में मनोवैज्ञानिक रोचक तथ्य

  1. प्रेम शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द ‘लुभवति‘ से हुई है जिसका अर्थ है इच्छा।
  2. मनोवैज्ञानिकों के अनुसार प्यार को जितना छिपाने की कोशिश की जाती है उतना ही वह सामने आ जाता है।
  3. प्यार को दर्शाने के लिए ‘दिल‘ के प्रतीक का इस्तेमाल 1250 से किया जा रहा है।
  4. पुरुष महिलाओं की तुलना में जल्दी प्यार में पड़ जाते हैं। जहाँ महिलाओं को 15 दिन लगते हैं, वहीँ पुरुषों को सिर्फ 8 सेकंड।
  5. आपके बता दें कि जब आपको किसी के प्यार में पड़ने का डर रहता है, तो उसको “फिलोफोबिआ” कहते हैं।
  6. आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि दुनिया भर के 2 प्रतिशत कपल्स अपने लव का इज़हार पहली बार किसी मॉल या सुपरमार्केट में करते हैं।
  7. पूरी दुनिया में रोजाना करीब 30 लाख लोग अपने पार्टनर के साथ डेट्स पर जाते हैं।psycology-facts-love
  8. मनोवैज्ञानिक के अनुसार किसी को गले लगाना आपके नर्वस सिस्टम में पेनकिलर की तरह असर करता हैं।
  9. लव में पड़ने के बाद कम से कम 2 दोस्त आपसे जरूर दूर हो जाते हैं।
  10. आपको बता दें कि रोमांटिक मूड में ही आपका दिमाग ज्यादा काम करता हैं।
  11. आपने जरूर सुना होगा प्यार अंधा होता है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह सच है, दो प्यार करने वालों को प्यार के सिवा कुछ नहीं दिखाई देता।
  12. दुनियाभर में प्रतिदिन करीब 30 लाख लोगों (स्त्री-पुरुष) को अपना पहला प्रेम होता है।
  13. प्यार के इजहार के मामलों में देखा गया है कि 90 % पुरूष ही स्त्री के सामने प्यार का इजहार करते हैं। सिर्फ 10 % स्त्री ही पुरूषों के सामने अपने प्यार का इजहार करती है।
  14. मनोविज्ञान के अनुसार प्यार में पड़ना को जैविक प्रक्रिया मानते है। यह प्रक्रिया हर किसी के शरीर में उत्पन्न तो होती है, पर उसे कुछ ही लोग अच्छे से बनाएं नहीं रख पाते हैं।
  15. वैज्ञानिकों के अनुसार, प्यार की वजह से शरीर के हार्मोन में एक तरह की गड़बड़ी हो जाती है। जैसे कुछ हार्मोन का घट जाना या बढ़ जाना।
  16. जिससे आप प्यार करते हैं उससे आप ज्यादा समय तक बात किए बिना नहीं रह सकते।
  17. हेल्थ एण्ड ह्यूमन सर्विसेज की एक रिर्पोट के अनुसार, प्यार में पड़ने पर स्त्री और पुरूष के शरीर और दिमाग पर काफी अच्छा प्रभाव पड़ता है। जिससे उनकी उम्र कुछ साल बढ़ जाती है।
  18. प्यार पर किए गए एक शोध के अनुसार, प्यार में पड़े इंसान का दिमाग नशा करने वाले इंसान की तरह काम करने लगता है। इससे उसे परमसुख की अनुभूति होती है।
  19. किसी के प्यार में पड़ जाने को मनोवैज्ञानिक मनोरोग कहते हैं। इस रोमांटिक रिलेशनशीप को ओब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर कहा जाता है।
  20. एक लंबे शोध में पता चला है कि नंवबर माह में सबसे ज्यादा पुरूष अपनी पसंद की स्त्री से आई लव यू कहते हैं।
  21. वैज्ञानिकों के अनुसार, किसी को किसी से प्यार उसके रंग, रूप या बाॅडी स्ट्रेक्चर देख कर नहीं बल्कि दिल की वजह से होता है। इसलिए कहा जाता है प्यार दिमाग से नहीं दिल से होता है।
  22. जब कोई प्यार में पड़ जाता है। उसका दिमाग काफी अच्छी तरह काम करता है। उसे दुनियादारी की काफी समझ आ जाती है। वह अधिक सोशल बन जाता है, लोगों की मदद करने लगता है। हर बूरे काम से तौबा कर लेता है।
  23. प्यार करने पर दिमाग में रोमांटिक मूड पैदा होता है। जिससे व्यक्ति को शान्त, खुशमिजाज और एनर्जेटिक बन जाते है।
  24. यह जानकर आपको हैरानी होगी कि सिर्फ इंसान ही नहीं जानवर और पक्षी भी प्यार का इजहार करते हैं। ऐसे कुछ जानवर और पक्षी है जो अपने लिए किसी एक को लाइफटाइम के लिये पार्टनर चुनते हैं। उसके बिछुड़ने पर तड़प-तड़प कर जान देते हैं या उसकी याद में जिंदगी गुजार देते हैं।
  25. जब आप किसी के साथ चलते हैं तो उस वक्त आप नार्मल स्पीड से चलते हैं। जबकि प्रेमी-प्रेमिका जब साथ चलते हैं। धीमी गति से चलते हैं। इसका मतलब कह सकते वे ज्यादा से ज्यादा एक-दूसरे के साथ गुजारना पसंद करते हैं।
  26. लड़के द्वारा किसी लड़की के प्यार में पड़ने पर उसके कम से कम दो दोस्त उससे दूर हो जाते हैं। ऐसा क्यों होता है, इस बारे में वैाानिक स्पष्ट नतीजे पर पहुंच नहीं पाएं है।
  27. एक रिर्पोट के अनुसार, ऑनलाइन प्यार में पड़ने वालों में से 23 प्रतिशत आगे चल कर शादी कर लेते हैं।
  28. एक जानकारी के अनुसार, 18 से 22 वर्ष की उम्र युवा प्यार में अधिक पड़ते हैं। इस उम्र में ब्रेकअप के मामले भी अधिक देखे गए है। 22 से 28 साल वाले काफी सर्तक होकर प्यार की ओर कदम बढ़ाते हैं। 28 के बाद कम ही युवा प्यार के बारे में सोचते हैं। समझा जाता है कि  तब तक उन्हें दुनियादारी की समझ आ जाती है।
  29. वैज्ञानिको का मानना है, सही उम्र में किया गया प्यार उम्र भर रहता है। कच्ची उम्र का प्यार अधिक दिनों तक नहीं चलता। मनोवैज्ञानिक कच्ची उम्र के प्यार को प्यार नहीं आकर्षण यानी अट्रैक्शन मानते हैं।
  30. प्यार और सेक्स को लेकर दिमाग अलग-अलग तरीके से सोचता है। प्यार के बारे में सोचने वाले शान्त होते हैं। जबकि सेक्स की सोचने वाले आक्रामक हो जाते हैं।
  31. अच्छे से सेटल लोगों की बजाएं स्ट्रगल करने वाले जैसे जाॅब की तलाश, कैरियर के स्ट्रगल में लगे, घर से दूर रहने वाले या फिर जिनका कोई सही ठिकाना ना ऐसे लोग जल्दी प्यार में पड़ जाते हैं।psycology-love-facts-
  32. शोध में पता चला है कि कुछ खास कलर जैस रेड, पींक, ग्रीन, यलो ड्रेस प्यार करने के लिए आकर्षित करती है।
  33. प्यार किसी भी इंसान के जीवन में काफी महत्तवपूर्ण होता है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में लंबे समय तक किये गए अध्ययन में पता चला है सफल और असफल प्यार इंसान की जिंदगी बना सकता है बिगाड़ भी सकता है।
  34. दो प्यार करने वालों की पसंद और नापसंद एक जैसी होती है। यदि कोई चीज़ पसंद ना भी हो तो भी वे एक दूसरे की पसंद नापसंद को अपना लेते हैं।
  35. वैज्ञानिकों के अनुसार, लड़का जब प्यार करता है वह दिमाग से करता है। लड़की जब प्यार करती है। वह दिल से करती है। इसलिए वह अपने प्यार के लिए सबकुछ छोड़ने के लिए तैयार हो जाती है।
  36. प्यार में ब्रेकअप होने के बाद लड़के या लड़की दोनों को आहत पहुंता है। लड़की बहुत ही जल्द इससे निकल जाती है। जबकि लड़के इससे जल्दी निकल नहीं पाते हैं।
  37. प्यार हंमेशा सुखद हो ऐसा नहीं है यह हंसाता भी है रूलाता भी है। प्यार मिल गया तो सुखद नहीं तो दुखद। प्यार यदि किसी को क्रिएटिव बना सकता है तो क्रिमनल भी बना सकता है।
  38. जिंदगी को रोमांच बनाने के लिए लव की अपनी कुछ अलग ही अहमियत हैं। अगर किसी की जिंदगी में लव नहीं है, तो वो अवसाद और अकेलेपन का शिकार हो सकता हैं।
  39. लड़की अपने पहले प्यार को भूल नहीं पाती। जबकि लड़के किसी दूसरी लड़की के प्यार में पड़ जाने के बाद इसे भूल जाते हैं।
  40. ज्यादा बोलने वाली लड़कियां और कम बोलने वाले लड़कों में बहुत गहरा प्रेम होता है और इन दोनों लोगों का जोड़ा प्रेमियों में सबसे मजेदार होता है।

क्यों खरीदा जाता है धनतेरस पर झाड़ू, जानिए क्या है महत्व

कार्तिक माह (पूर्णिमान्त) की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन समुद्र-मंन्थन के समय भगवान धन्वन्तरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए इस तिथि को धनतेरस या धनत्रयोदशी के नाम से जाना जाता है। भारत सरकार ने धनतेरस को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है।

धनतेरस पर कुछ न कुछ वस्तु खरीदने की परम्परा है। मसलन बर्तन, सोना, चांदी, भूमि-मकान और वाहन। लेकिन इन सबके अलावा एक विशेष वस्तु है झाडू। जो कि धनतेरस के दिन खरीदना आवश्यक माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऐसा क्यों किया जाता है? चलिए इस पोस्ट के माध्यम से जानते हैं :-

पौराणिक मान्यताएं

पौराणिक मान्यता के अनुसार धनतेरस के दिन जिन चीजों की खरीदारी की जाती है। इस दिन झाड़ू खरीदने की भी परंपरा है जिसे बहुत ही शुभ माना जाता है। धनतेरस के दिन घर में एक नई झाड़ू जरूर खरीदना चाहिए।

मत्स्य पुराण के अनुसार झाड़ू को मां लक्ष्मी का रूप माना जाता है। घर में झाड़ू के पैर लग जाए तो इसे भी अशुभ माानते हैं। इसलिए घर में झाड़ू से घर साफ करने के बाद ऐसी जगह रखा जाता है जहां पैर नहीं लगे। क्योंकि झाड़ू का मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है।

मान्यताओं के मुताबिक झाड़ू को सुख-शांति बढ़ाने और दुष्ट शक्तियों का सर्वनाश करने वाला भी बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि झाड़ू घर से दरिद्रता हटाती है। ऐसा भी माना जाता है कि धनतेरस पर घर में नई झाड़ू से झाड़ लगाने से कर्ज से भी मुक्ति मिलती है इसलिए इस दिन झाड़ू खरीदने की पुरानी परंपरा  है।

शास्त्रों के अनुसार धनतेरस के दिन झाड़ू खरीदने से लक्ष्मी माता रुठकर घर से बाहर नहीं जाती हैं और वह घर में स्थिर रहती है। इस दिन लोग झाड़ू खरीदकर अपने घरों में रखते हैं। झाड़ू से घर में सकारात्मकता का संचार होता है। यही वजह है कि हर घर में सफाई के तौर पर सबसे पहले झाड़ू लगाया जाता है।

दिवाली पर यह 5 उपाय करने से होगी धन की तंगी दूर !!!

दिवाली के 5 दिन धन के संकट को दूर करने के लिए सबसे शुभ माने गए हैं। शास्त्रों के अनुसार व्यक्ति यदि अपने मूल कर्ज से निवृत्ति का उपाय नहीं करता है, तो उसे इस जीवन में अर्थ, उपकार, दया के रूप में किसी भी तरह का उधार लेना ही पड़ता है। इस उधार को उतारने के पश्चात ही मनुष्य लक्ष्मी को प्राप्त कर सकता है।

यह है वो उपाय जिससे धन की तंगी को दूर कर सकते है

  • दिवाली से पहले धन तेरस का त्यौहार आता है , इस दिन 13 दीपक जलाएं और हर दीपक में एक कौड़ी डाल दें। दीपक पूर्ण हो जाए तब ये 13 कौड़ी लेकर साफ करें और तिजोरी में रख दें।
  • नरक चतुर्दशी (रूप चतुर्दशी) के दिन पवित्रता से पांच प्रकार के फूल की माला में दूर्वा व बिल्वपत्र लगाकर देवी को अर्पित करें। अर्पित करते समय मौन रखें। यह प्रयोग प्रभावकारी होता है। ऐसा करने से यश में वृद्धि होती है।
  • दीपावली की रात्रि में ग्यारह बजे के बाद एकाग्रता से बैठकर आँखे बंद करके ध्यान करें l ध्यान करते समय ऐसा सोचें, जैसे की सामने महालक्ष्मी कमलासन पर विराजमान हो और आप उनके ऊपर कमल के फूल चढ़ा रहे हैं। ध्यान करते समय मन ही मन में कुल 108 मानसिक कमल पुष्प अर्पित करें। ऐसा करने से लक्ष्मी की कृपा होती है। साथ ही विष्णु सहस्रनाम या गोपाल सहस्रनाम का पाठ करें तो अति उत्तम है।
  • अन्नकूट के दिन भोजन बनाकर अपने कुल के देवता के मंदिर में, अपने पित्तरों को, गाय को, ऋषियों के निमित्त ब्राह्मण को, अपने कुल के पक्षी और किसी भिखारी को भोजन करवाए। साथ ही वृक्ष को जल चढ़ाए, सूर्य को जल चढ़ाए, अग्नि में घी अर्पित करें, चींटियों को आटा तथा मछली को आटे की गोली देने से घर में धन की कमी दूर होती है, और बरकत आती है।
  • भाईदूज के दिन सुबह शुद्ध पवित्र होकर पवित्र रेशमी धागा गुरु व ईष्ट देव को याद करके धूप दीप के बाद उनके दाहिने हाथ में यह डोरा बांधें। डोरा बांधते समय ईश्वर का स्मरण करते रहें। यह प्रयोग वर्षपर्यंत सुरक्षा देता है।

साल भर धन की कमी नहीं होगी, धनतेरस पर जरूर खरीदे ये 5 चीजें !!

धनतेरस पर मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए भक्तजन तमाम तरह के प्रयास करते हैं। लेकिन ज्योतिषशास्त्र की मानें तो यहां बताए गये कुछ आसान से टिप्स से ही मां लक्ष्मी आपके ऊपर प्रसन्न हो सकती हैं।

जी हां इसके लिए आपको कुछ विशेष करने की आवश्यकता नहीं है बल्कि कुछ विशेष करने की आवश्यकता नहीं है बल्कि कुछ 5 चीजें हैं, जिन्हें आपको धनतेरस के दिन खरीदना होगा। बस फिर देखिए कैसे मां लक्ष्मी की कृपा से आपके जीवन में धन वर्षा होने लगेगी…..

  • धनतेरस के दिन कुमकुम जरूर खरीद लाएं। इसके बाद उसे मां लक्ष्मी के चरणों में अर्पित करके खुद भी लगा लें। मान्यता है कि ऐसा करने से माता लक्ष्मी अत्यंत प्रसन्न होती हैं और जीवन को धन-धान्य से भर देती हैं।
  • धनतेरस के दिन मां लक्ष्मी के पचिह्न जरूर खरीद लाएं। इसे घर के मुख्य द्वार पर लगाएं। मान्यता है कि मां लक्ष्मी के पदचिह्न लगाने से माता लक्ष्मी अत्यंत प्रसन्न होती हैं क्योंकि यह उन्हें घर में आमंत्रित करने का निमंत्रण होता है। लेकिन ध्यान रखें कि मां लक्ष्मी के पचिह्न की आरती जरूर कर लें। इसके साथ ही मां से घर में वास करने की प्रार्थना करें।
  • धनतेरस के दिन से दीप जलाने की परंपरा शुरू हो जाती है। इसलिए इस दिन पांच रुपए का एक दीपक खरीद लाएं और रात्रि का भोजन करने के बाद उसे दक्षिण की ओर मुख करके जलाएं। लेकिन ध्यान रखें कि इसे जलाने के बाद इसे पीछे मुड़ कर नहीं देखें। मान्यता है कि यह दीपक अकाल मृत्यु से बचाकर घर के लोगों को निरोगी रखता है।
  • धनतेरस के दिन साबुत धनिया जरूर खरीद लाएं इसके बाद इसे मां लक्ष्मी और भगवान धनवंतरी के चरणों में अर्पित कर दें। इसके बाद लक्ष्मी माता और भगवान धनवंतरी के सामने घी का दीपक जलाकर आरती कर लें। फिर माता के चरणों में धनिया अर्पित कर दें और आरती के बाद धनिया को प्रसाद स्वरूप घर के सभी सदस्यों को बांट दें।
  • धनतेरस के दिन धनिया, दीपक, पचिह्न और कुमकुम की ही तरह बताशा खरीदना भी अत्यंत जरूरी होता है। मान्यता है कि यह माता लक्ष्मी का प्रिय भोग है। लेकिन ध्यान रखें कि रंगीन बताशा न लें बल्कि सफेद बताशा ही खरीदें। इसके बाद इसे माता लक्ष्मी को अर्पित कर दें। इसके साथ ही माता से प्रार्थना करें कि उनकी कृपा जीवन भर बनी रहे।