घर में दीपक जलाते समय रखें इन बातों का ध्यान!!

दिवाली रोशनी का त्यौहार है। हिन्दू धर्म और परंपरा के अनुसार पूजा के समय दीपक जलाने का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि दीपक के बिना पूजा अधूरी होती है।

पूजा के दौरान सुबह-शाम भगवान के समक्ष एक दीपक जलाया जाता है। दिवाली, नवरात्रि या विशेष अनुष्ठानों के दौरान चौबीस घंटे दीपक जलाया जाता है। दीपक को चमक का प्रतीक माना जाता है।

प्रकाश घर में शुद्धता, जीवंतता और सकारात्मकता लाता है इसलिए दीपक जलाना आशा की निशानी माना जाता है। भगवान के समक्ष दीपक जलाने के लिए हमें कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए :-

दीपक जलाने का महत्व

दीपक को ज्ञान और प्रकाश का प्रतीक भी माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार, दीपक को सकारात्मकता और गरीबी को कम करने का साधन माना जाता है।

घर में दीपक जलाना शुभ माना जाता है। इनडोर लाइट्स सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करती हैं। शास्त्रों के अनुसार, भगवान के समक्ष दीपक जलाना अनिवार्य माना जाता है।

भगवान के समक्ष कौन सा दीपक जलाना चाहिए?

किसी भी पूजा को शुरू करने से पहले, शुरुआत में दीपक जलाया जाता है और अग्नि देवता से प्राथना की जाती है कि वे तब तक स्थिर रहें जब तक पूजा करने का संकल्प पूरा नहीं हो जाता।

हम भगवान के पास समक्ष तेल और घी का दीपक जला सकते हैं। कहा जाता है कि घी का दीपक अधिक सकारात्मकता लाता है।

ऐसा माना जाता है कि भगवान के समक्ष दीपक जलाने से लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और वहां स्थिर होती हैं। शुद्ध घी का दीपक जलाना अत्यंत लाभकारी होता है।

दीपक किस दिशा में रखना चाहिए?

दीपक को किस दिशा में जलाना चाहिए उसके लिए कुछ नियम दिए गए हैं, जिस दिशा में दीपक को निर्देशित किया जाना चाहिए:- ऐसा कहा जाता है कि यदि आप एक तेल का दीपक जला रहे हैं, तो आपको इसे अपने बाएं हाथ की ओर रखना चाहिए और यदि आप घी का दीपक जला रहे हैं, तो यह आपके दाहिने हाथ की ओर होना चाहिए।

आर्थिक लाभ के लिए दीपक उत्तर की ओर रखें। अगर आपके घर में बार-बार बीमारी हो रही है, तो दीपक को पूर्व की ओर रखें। ये दोनों दिशाएँ अत्यंत शुभ मानी जाती हैं।

दीपक जलाते समय इन खास बातों ध्यान रखें

  • दीपक जलाने से पहले उसको अच्छे से साफ़ करे लें। साफ़-सुथरा दीपक ही पूजा में मान्य है।
  • पूजा में कभी भी खंडित दीपक नहीं जलाना चाहिए। नहीं तो शुभ फल मिलने की जगह आपको परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
  • इस बात का खास ख्याल रखें कि दीपक हमेशा भगवान की मूर्ति के ठीक सामने लगाएं। कई बार हम भगवान की प्रतिमा के सामने दीपक न लगाकर कहीं और लगा देते है, तो सही नहीं होता है।
  • ध्‍यान रखें कि पूजा के दौरान बीच में दीपक ना बुझे। ऐसा होना अशुभ माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि ऐसा होने पर पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं हो पाता है।
  • घी के दीपक के लिए सफेद रुई की बत्ती इस्‍तेमाल ही करें जबकि तेल के दीपक के लिए लाल धागे की बत्ती श्रेष्ठ रहती है।

दीपावली पर इन राशियों पर बरसेगी माँ की असीम कृपा

दीपावली का त्यौहार शरद ऋतु (उत्तरी गोलार्द्ध) में हर वर्ष मनाया जाने वाला एक प्राचीन सनातन संस्कृति का त्यौहार है। दीपावली कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है।

दीपावली का त्यौहार भारत के सबसे बड़े और सर्वाधिक महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। दीपावली दीपों का त्योहार है। आध्यात्मिक रूप से यह ‘अन्धकार पर प्रकाश की विजय‘ को दर्शाता है।

धनतेरस से भाई दूज तक करीब 5 दिनों तक चलने वाला दिवाली का त्यौहार कार्तिक माह की अमावस्या को आाता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार इस बार यह त्योहार 12 नबंबर 2023 रविवार को मनाया जाएगा और इसके एक दिन पहले धनतेरस और एक दिन बाद भाईदूज का त्यौहार होता है।

दिवाली शुभ मुहूर्त

दीपावली के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त 12 नवंबर की शाम 5 बजकर 40 मिनट से लेकर 7 बजकर 36 मिनट तक है। वहीं लक्ष्मी पूजा के लिए महानिशीथ काल मुहूर्त रात 11 बजकर 39 मिनट से मध्यरात्रि 12 बजकर 31 मिनट तक है।

मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए आने वाला त्योहार बहुत शुभ रहने वाला है। आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव आएंगे। आप इस समय का भरपूर आनंद लेंगे। जीवन में खुशियों का आगमन होगा।

देवी लक्ष्मी आपसे प्रसन्न रहेंगी। इस अवधि में आपके अटके हुए कार्य भी बन पड़ेंगे। आप परिवार के साथ खूब एन्जॉय करेंगे और इस त्योहारी सीजन का आनंद उठाएंगे।

मिथुन राशि

मिथुन राशि के जातक भी बहुत भाग्यशाली हैं। उन्हें दिवाली पर बन 500 साल बाद बन रहे शुभ राजयोग का लाभ मिलने वाला है। आपको हर क्षेत्र में सफलता हासिल होगी।

आपको किसी मांगलिक कार्य में हिस्सा लेने का अवसर मिल सकता है। दफ्तर में कामकाज बढ़िया रहेगा। साथ ही पद-प्रतिष्ठा व सम्मान में इजाफा होगा। आप पर माता लक्ष्मी मेहरबान रहेंगी।

मकर राशि

मकर राशि के जातकों को भी इस साल दिवाली पर बड़ी खुशखबरी मिल सकती है। आपके लिए इस समय बहुत शुभ व् फलदायी रहेगा। मात लक्ष्मी की कृपा आप पर बनी रहेगी। वैवाहिक जीवन मधुर रहेगा।

घर परिवार का माहौल सुखद व सकारात्मक रहेगा। इस राशि के नौकरीपेशा जातकों की तरक्की हो सकती है। वहीं व्यापारियों को भी मुनाफा होने की उम्मीद है। इस बार की दिवाली आपकी झोली खुशियों से भर देगी।

 

जानिए कैसी होती थी मुगल बादशाहों की “दिवाली”

दीपावली का अर्थ होता है ‘दीपों की माला’ यानी दीपकों द्वारा की गई रोशनी। बनारस में देव दीपावली जैसे दीपोत्सव में यही देखने को मिलता है। दीपावली का उल्लेख स्कन्द पुराण में भी मिलता है।

इसके अतिरिक्त 7वीं सदी में राजा हर्षवर्धन के नाटकों में दीपोत्सव का उल्लेख है और 10वीं शताब्दी में राजशेखर के ‘काव्यमीमांसा‘ में भी इसका जिक्र किया गया है। हालांकि, दीपावली केवल हिन्दुओं का ही त्यौहार नहीं है बल्कि अन्य धर्मों द्वारा भी इसे मनाया जाता रहा है।

इसका इतिहास भी काफी दिलचस्प है। इतिहासकारों की मानें तो आज जिस धूमधाम से देश भर में दिवाली मनाई जाती है उसकी शुरूआत मुगलों के शासनकाल में हुई थी। तो चलिए जानते हैं :-

मोहम्मद बिन तुगलक की दिवाली

मुस्लिम बादशाहों द्वारा दीवाली को धूमधाम से मनाने का उल्लेख इतिहास में दर्ज हैं। 14वीं सदी में मोहम्मद बिन तुगलक अपने अंतरमहल में दीवाली मानता था और काफी बड़ा भोज रखता था। जश्न भी होता था लेकिन आतिशबाजी का उल्लेख उसके शासनकाल में कहीं नहीं मिलता है।

बादशाह अकबर की दिवाली

16वीं सदी में अकबर ने धूमधाम से दीवाली मनाने की शुरूआत की। उसके शासनकाल में दीवाली के दिन दरबार को शानदार ढंग से सजाया जाता था।

अकबर ने रामायण का फारसी में अनुवाद कराया था जिसका पाठ भी किया जाता था और इसके बाद श्रीराम की अयोध्या वापसी का नाट्य मंचन होता था।

इसके अलावा अपने मित्र राजाओं के यहां दीवाली के अवसर पर मिठाइयों का वितरण भी करवाते थे। आतिशबाजी की हल्की-फुल्की शुरूआत हो चुकी थी।

शाहजहां की दिवाली

अकबर के बाद 17वीं सदी में शाहजहां ने दिवाली के रूप में और परिवर्तन किया। वह दिवाली के इस अवसर पर 56 राज्यों से अलग-अलग मिठाई मंगाकर 56 प्रकार के थाल सजाते थे। साथ ही शहीदों को याद करते हुए सूरजक्रांत नामक पत्थर पर सूर्य किरण लगाकर उसे पुनः रोशन किया जाता जो साल भर जलता था।

इसके अलावा एक 40 फुट का आकाश दीया जलाया जाता जिसमें 40 मन कपास के बीज का तेल डाला जाता था। शाहजहां के शासनकाल में भव्य आतिशबाजी होती थी जिसमें महिलाओं के लिए अलग तरह से आतिशबाजियां होती थीं।

तब दिल्ली में आतिशबाजियों की धूम हुआ करती थी। इस पर्व को पूरी तरह हिन्दू तौर-तरीकों से मनाया जाता था। भोज भी एकदम सात्विक होता था।

मोहम्मद शाह की दिवाली

मोहम्मद शाह का शासन 1719 से 1748 तक रहा। वह संगीत और साहित्य प्रेमी था और उसे मोहम्मद शाह ‘रंगीला‘ के नाम से भी जाना जाता था। ‘रंगीला’ नाम से ही समझ आ रहा है कि वह काफी शौकीन मिजाज बादशाह था।

दिवाली पर वह अपनी तस्वीर बनवाता और अकबर तथा शाहजहां से भी दोगुने चौगुने अंदाज में दिवाली का जश्न मनाता था। उसने दिवाली के त्यौहार को और ज्यादा भव्यता दी। उसके शासनकाल में लाल किले को शानदार तरीके से सजाया जाता था।

अलग-अलग तरह के पकवान बनते थे जो केवल महल में ही नहीं बल्कि आम जनता में भी बांटे जाते थे।
इतिहासकारों का कहना है कि दीवाली की जो परम्परा मोहम्मद शाह ‘रंगीला’ ने शुरू की उसी का निर्वाह हम आज भी कर रहे हैं।

मुग़लों के बाद यहां तक कि अंग्रेजों के देश पर कब्जे और उनके द्वारा मुगलों को नाममात्र के शासक तक सीमित कर दिया गया, तब भी दिवाली भव्य बनी रही।

बहादुर शाह जफर अक्सर लाल किले में दीवाली की थीम पर आधारित नाटकों का आयोजन करते थे जिसे आम जनता भी देख सकती थी। मुगलकाल के बाद अंग्रेजों के आने पर भी दिवाली पर आतिशबाजी की जाती थी और अंग्रेज भी उसका आनंद उठाते थे।

 

दिवाली पर राशि के अनुसार इन रंगों के कपड़े पहनकर करें माँ लक्ष्मी की पूजा, होगी धन की वर्षा

दिवाली साल के सबसे पवित्र त्योहारों में से एक है। भारतवर्ष में मनाए जाने वाले सभी त्यौहारों में दीपावली का सामाजिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से अत्यधिक महत्त्व है। इसे दीपोत्सव भी कहते हैं।

यह न केवल भारत में मनाया जाता है, बल्कि नेपाल, इंडोनेशिया, फिजी, मॉरीशस, मलेशिया, श्रीलंका, थाईलैंड और यहां तक ​​कि सिंगापुर में भी मनाया जाता है।

इस पर्व में लोग घर को दीयों और रोशनी से सजाते हैं और अलग-अलग रंगों के कपड़े पहनते हैं। खासतौर पर महिलाएं। ज्योतिष शास्त्रों की मानें तो यदि इस दिन राशि के अनुसार कुछ ख़ास रंगों के कपड़े पहनकर माँ की पूजा की जाए तो आपके जीवन में खुशहाली और धन की वर्षा होगी।

चलिए जानते हैं इस पोस्ट के माध्यम से कि राशि के अनुसार किस रंग के कपड़े पहनकर करें माँ लक्ष्मी की पूजा:-

मेष राशि

दीपावली के दिन मेष राशि के जातक लाल रंग के वस्त्र पहन सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि मेष राशि का शुभ रंग लाल होता है। अब क्योंकि लाल रंग देवी लक्ष्मी को बेहद प्रिय है, ऐसे में हो सकता है कि देवी आपसे प्रसन्न होकर आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी कर दें।

वृषभ राशि

वृषभ राशि के जातक का शुभ रंग सफेद होता है। इसलिए दीपावली के मौके पर इस राशि के लोगों को सफेद रंग के वस्त्र पहनने चाहिए। इससे आपके अंदर पॉजिटिव एनर्जी का संचार होगा।

मिथुन राशि

मिथुन राशि का शुभ रंग पीला माना जाता है। इसलिए दिवाली के मौके पर पीले रंग के वस्त्र धारण करें। क्योंकि पीला रंग भगवान गणेश को भी अति प्रिय है, इसलिए दिवाली के मौके पर इस रंग के कपड़े पहनना आपके लिए शुभ साबित हो सकता है।

कर्क राशि

कर्क राशि के जातकों को दिवाली पर सफेद रंग के कपड़े पहनने चाहिए। ये रंग इस राशि के लोगों के लिए काफी अच्छा होता है। ये रंग शांति और सकारात्मकता का प्रतीक है।

सिंह राशि

सिंह राशि का शुभ रंग सुनहरा यानी गोल्डन होता है। गोल्डन रंग आपके लुक को निखारने के साथ-साथ आपकी किस्मत को भी निखार सकता है।

कन्या राशि

कन्या राशि का शुभ रंग हरा होता है। पूजा पाठ के लिए हरा रंग शुभ माना जाता है। इसलिए इस दिन हरे रंग के कपड़े पहनें।

तुला राशि

तुला राशि के लोगों के लिए लाल रंग शुभ माना जाता है। दिवाली पर लाल रंग के कपड़े जरूर पहनें। इससे देवी लक्ष्मी प्रसन्न होकर आप पर अपनी कृपा बरसा सकती हैं।

वृश्चिक राशि

इस राशि का शुभ रंग लाल माना जाता है। लाल रंग के कपड़े दीपावली के दिन जरूर पहनें। ये आपको तेज प्रदान करेगा।

धनु राशि

इस राशि के लोगों के लिए पीला रंग शुभ माना जाता है। इसलिए इस राशि के लोगों को दिवाली पर पीले रंग के कपड़े पहनने चाहिए।

मकर राशि

इस राशि का शुभ रंग नीला माना जाता है। नीला रंग देखने में बहुत सुंदर लगता है। ये रंग आपके भीतर शांति का संचार करेगा। इसलिए दिवाली पर इस राशि के लोगों को नीले रंग के कपड़े जरूर पहनने चाहिए।

कुंभ राशि

कुंभ राशि के लिए आसमानी रंग यानी स्काई ब्लू कलर शुभ माना जाता है। दिवाली के दिन आपको आसमानी रंग के वस्त्र पहनने चाहिए।

मीन राशि

मीन राशि के लिए भी पीला रंग शुभ माना जाता है। पीला रंग मां लक्ष्मी और भगवान गणेश, दोनों को प्रिय है। इसलिए दिवाली पर मीन राशि के जातकों को पीले रंग के कपड़े जरूर पहनने चाहिए।

आईये देखें कि अलग-2 धर्म और देश क्यों और कैसे मनाते हैं दिवाली का त्यौहार

दिवाली हिंदू धर्म में मनाया जाने वाला सबसे बड़ा त्यौहार है। धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक लिहाज से दिवाली भारत वर्ष और विश्व भर के हिंदू, सिख और अन्य धर्मों के बीच बहुत ही महत्वपूर्ण त्यौहार है।

दिवाली की शुरुआत, नाम और उद्देश्य

दीपावली का अर्थ है दीपों की माला अर्थात बहुत सारे दीयों को एक साथ जलाना। अंधकार को बुराई, पाप और असत्य का प्रतीक माना जाता है जबकि प्रकाश को अच्छाई, पुण्य और सत्य का प्रतीक समझा जाता है।

इसलिए दीप जला कर यह प्रकट किया जाता है कि अच्छाई, पुण्य और सत्य के साथ हैं न कि बुराई के साथ। साथ ही यह छुट्टी, आराम, ख़ुशी, उत्सव और उल्लास का पर्व है। हिन्दू धर्म के साथ ही इस त्यौहार को सिख, बौद्ध तथा जैन धर्म के लोग भी मनाते हैं।

आईये देखते हैं कि विभिन्न धर्मों के लोग दिवाली को किन कारणों से मानते हैं।

हिन्दू धर्म में दिवाली

हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार जब आयोध्या के भावी राजा मर्यादा पुरषोतम भगवान राम चौदह वर्ष का वनवास काट कर आयोध्या वापिस लौटे तो आयोध्या के निवासियों ने घी के दीपक जला कर उनका स्वागत किया।

साथ ही राज्य भर में निवासियों ने अपने परमप्रिय राजा के वापिस आने की ख़ुशी में गाँव-२ नगर-२ में हर्षोउल्लास में कई दिनों तक नाच-गा कर उत्सव मनाये। उन्होंने एक दूसरे को गले लगा कर बधाईयां दी और उपहार आदि भेंट किये। हिन्दू धर्म में मर्यादा पुरषोतम राम को हिन्दुओं के मुख्य देवता भगवान् विष्णु का अवतार माना जाता है।

वनवास के अंतिम भाग में रावण ने माता सीता का अपहरण कर लिया था। श्री राम ने वानर, भालुओं की सेना लेकर रावण की स्वर्ण नगरी पर चढ़ाई कर रावण का वध किया और माता सीता को मुक्त करा लिया था।

उनकी इस जीत की ख़ुशी में भी आयोध्या वासियों के उल्लास को बढ़ा दिया था। हिन्दू कैलेंडर पञ्चाङ्ग के अनुसार हर वर्ष उसी दिन यह त्यौहार मनाया जाने लगा और इसे दिवाली या दीपावली का नाम दे दिया गया।

रावण को अंधकार, पाप और असत्य का प्रतीक माना गया है और श्री राम को प्रकाश, पुण्य और सत्य का। इसीलिए दिवाली को प्रकाश का पर्व भी माना जाता है। बृहदारण्यक उपनिषद में वर्णित ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ अर्थात् ‘अंधेरे से ज्योति अर्थात प्रकाश की ओर जाइए’ को यह त्यौहार सत्यापित करता है ऐसा माना जाता है।

सिख धर्म में दिवाली

सिख धर्म में दिवाली को बंदी-छोड़ दिवस के रूप में मनाया जाता है. दीपावली त्यौहार सिख समुदाय द्वारा ऐतिहासिक रूप से मनाया जाता है। इस दिन सिक्खों के छठे गुरु श्री गुरु हरगोविंद व अन्य राजाओं को मुग़ल राजा जहांगीर ने ग्वालियर किले की कैद से मुक्त किया था। उनके अमृतसर पहुंचने पर दिवाली मनाई गयी थी।

सिक्खों के लिए यह दिन इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि 1577 में इसी दिन सिखों के सबसे पवित्र स्थान अमृतसर के स्वर्ण मन्दिर का शिलान्यास हुआ था

जैन धर्म में दिवाली

जैन धर्म में दिवाली जैन तीर्थंकर महावीर जी के निर्वाण दिवस के रूप में मनाई जाती है। 527 ई. पू. में इसी दिन भगवान महावीर के परिनिर्वाण यानि मृत्यु पर उनके अनुयायी 18 राजाओं के समूह ने दीप जला कर उन्हें श्रद्धांजलि दी थी। ये सभी राजा महावीर के अंतिम प्रवचन के लिए एकत्र हुए थे।

उन्होंने यह कह कर दीप जलाये की एक महान प्रकाशपुंज के लिए एक प्रकाशदीप की श्रद्धांजलि से अच्छा भला क्या हो सकता है। तभी से जैन धर्म को मानने वाले दिवाली पर दीपक जलाते हैं। जैन लोग इस पर्व पर लक्ष्मी पूजन भी करते हैं।

बौद्ध धर्म में दिवाली

नेपाल के नेवाड़ लोग जो वज्रयाणा बोध धर्म के इष्टदेवों को मानते हैं वे लोग दिवाली पर लक्ष्मी का पूजन करते हैं। वे लोग पांच दिनों तक इस पर्व को मानते हैं।

इसी दिन आर्य समाज के प्रवर्तक स्वामी दयानंद तथा स्वामी रामतीर्थ का निर्वाण भी दिवस है जिस कारण दिवाली आर्य समाज के लिए दिवाली बहुत महत्व रखती है।

विभिन्न देशों में दिवाली

इसके अलावा विश्व भर में विभिन्न धर्मों के मानने वालों में दिवाली को बड़े पैमाने पर सौहार्द, भाईचारे और विश्व शान्ति की कामना के रूप में मनाया जाता है। ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, न्यूज़ीलैंड, फिजी आदि देशों में स्थानीय लोग प्रवासी भारतीयों के साथ इस पर्व को हर्षोउल्लास के साथ मनाते हैं।

दिवाली नेपाल, भारत, श्रीलंका, म्यांमार, मारीशस, गुयाना, त्रिनिदाद और टोबैगो, सूरीनाम, मलेशिया, सिंगापुर, फिजी, पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया की बाहरी सीमा पर स्थित क्रिसमस द्वीप में एक सरकारी छुट्टी है।

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दिवाली पर लक्ष्मी पूजा में जरूर शामिल करें ये खास चीजें!

हिन्दू पंचांग के अनुसार दीपावली का पर्व कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाया जाता है। दिवाली की रात मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है।

दिवाली पर देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा में सभी चीजों का उपयोग किया जाता है। लेकिन दिवाली के खास मौके पर पूजा में कुछ खास चीजों को जरूर शामिल करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।

तो चलिए जानते हैं इस पोस्ट इस के माध्यम से कि वे कौन कौन सी चीज़े हैं जिनको दिवाली की पूजा में अवश्य रखना चाहिए, तो चलिए शुरू करते हैं :-

लक्ष्मी जी के पदचिन्ह

शास्त्रों के अनुसार मां लक्ष्मी सुख, समृद्धि, धन और ऐश्वर्य की देवी हैं। मां लक्ष्मी की कृपा से व्यक्ति धनवान और समृद्ध होता है और जीवन से धन की कमी हमेशा के लिए दूर हो जाती है।

मां लक्ष्मी की पूजा में उनके चरणों की पूजा की जाती है। ऐसे में दिवाली के दिन देवी लक्ष्मी की पूजा में सोने, चांदी या धातु के बने पैर रखने चाहिए। यदि आप सोने-चांदी के बने पैरों के निशान नहीं रख सकते हैं तो कागज़ पर बने पैरों की पूजा करनी चाहिए।

दक्षिणावर्त शंख

देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा में शंख का विशेष महत्व है। शंख के बिना मां लक्ष्मी की पूजा अधूरी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दिवाली के दिन देवी लक्ष्मी की पूजा करने से दक्षिणमुखी शंख की पूजा करने से सुख – समृद्धि की प्राप्ति होती है।

माता लक्ष्मी और दक्षिणी शंख की उत्पत्ति समुद्र मंथन के समय हुई थी, इसी कारण दक्षिणी शंख को लक्ष्मी का भाई भी माना जाता है। ऐसे में दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजा में शंख को सही दिशा में रखें।

श्री यंत्र

श्री यंत्र के बिना मां लक्ष्मी की पूजा अधूरी है। इसलिए दिवाली के दिन श्री यंत्र को मां लक्ष्मी की पूजा में जरूर शामिल करें।

खीर

दीवाली के दिन मां लक्ष्मी के भोग में खीर भी शामिल करें। खीर मां लक्ष्मी का प्रिय भोजन है। ऐसे में दिवाली पर मिठाइयों के अलावा घर में ड्राई फ्रूट्स से बनी खीर जरूर चढ़ाएं।

पूजा करना

माना जाता है कि जिस घर में सबसे ज्यादा साफ-सफाई होती है, वहां मां लक्ष्मी का वास होता है। दिवाली पर मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए घर के मुख्य द्वार पर आम, पीपल और अशोक के नए कोमल पत्तों की माला लगाएं। मुख्य द्वार की पूजा से मां लक्ष्मी शीघ्र प्रसन्न होती हैं।

पीला कौड़ियां

पीली कौड़ियों को धन और देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। दिवाली पर देवी लक्ष्मी की पूजा के दौरान पीली कौड़ियों को जरूर शामिल करना चाहिए। पूजा के बाद इन कौड़ियों को तिजोरी में रख दिया जाता है।

पान के पत्ते

पान को हिंदू धर्म में पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल किया गया है। दिवाली के दिन देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा में पान के पत्ते पर स्वस्तिक का चिह्न बनाएं।

गन्ना

मां लक्ष्मी की सवारी ऐरावत हाथी है, इसलिए मां लक्ष्मी को गजलक्ष्मी भी कहा जाता है। ऐरावत हाथी को गन्ना खाना बहुत पसंद है। इसलिए देवी लक्ष्मी की पूजा में गन्ने को जरूर शामिल करना चाहिए।

धनिया

बहुत से लोग धनिये के बीज खरीद कर घर पर रखते हैं। इसे सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। दिवाली के दिन लक्ष्मी इसे पूजा की थाली में रखती हैं।

कमल का फूल

माता लक्ष्मी हमेशा कमल के फूल पर विराजमान रहती हैं और उन्हें कमल के फूल बहुत प्रिय हैं। इसलिए दीपावली के दिन देवी लक्ष्मी की पूजा में कमल के फूल को अवश्य शामिल करें।

दिवाली पर कैसे करे माँ लक्ष्मी की पूजा और क्यों चढ़ाए जाते है खील-बताशे !!!

दिवाली का त्यौहार आने वाला है और इस त्यौहार की तैयारी काफी समय पहले से होने लगती है। माना जाता है, कि दिवाली के दिन दीपों की रोशनी में मां लक्ष्मी घर में आती हैं। दिवाली पर सभी माँ लक्ष्मी की पूजा करते हैं।

दिवाली पर लोग पूजन सामग्री और खील-बताशे खरीदते हैं। मां लक्ष्मी को दीपावली पर खील-बताशे का प्रसाद जरूर चढ़ाया जाता है।  क्या आप जानते हैं कि माता लक्ष्मी की पूजा खील बताशों से ही क्यों की जाती है? “खील” मतलब होता है धान।  खील मूलत: धान (चावल) का ही एक रूप है। खील चावल से बनती है।

चावल उत्तर भारत की  प्रमुख फसल भी है। वैसे तो  माता लक्ष्मी को बेसन के लड्डू और भगवान गणेश को मोदक का प्रसाद चढ़ाया जाता है। परन्तु दिवाली पर खील-बताशे ही चढ़ाए जाते हैं।

खील-बताशो  का महत्व

दीपावली के पहले ही धान की फसल तैयार हो जाती है, इस कारण लक्ष्मी को फसल के पहले भोग के रूप में खील-बताशे चढ़ाए जाते हैं। खील बताशों का एक ज्योतिषीय महत्व भी है। दीपावली धन और वैभव की प्राप्ति का त्योहार है, और धन-वैभव का दाता शुक्र ग्रह माना जाता है।

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शुक्र ग्रह का प्रमुख धान्य धान होता है। शुक्र को प्रसन्न करने के लिए हम लक्ष्मी को खील-बताशे का प्रसाद चढ़ाते हैं। यही कारण है कि दिवाली के दिन खील-बताशे चढ़ाए जाते हैं।

श्वेत और मीठी सामग्री दोनों शुक्र की ही कारक हैं। अत: इन दोनों को मिलाकर वास्तव में शुक्र ग्रह को ही अनुकूल किया जाता है। मां लक्ष्मी को प्रसन्न कर भी शुक्र को अपने अनुसार किया जा सकता है। दीप पर्व पर संभवत: यही कारण है, कि खील बताशों के बिना लक्ष्मी पूजन संपन्न नहीं माना जाता है।

ऐसे करे मां लक्ष्मी की पूजा

दिवाली पर प्रत्येक व्यक्ति माँ लक्ष्मी की पूजा करता है। दिवाली वाले दिन मां लक्ष्मी की पूजा के लिए अभी से रख ले ये 33 चीजें।  इस दिन मां लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु, भगवान गणेश और भगवान कुबेर की भी पूजा करनी चाहिए।

इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने के लिए कलावा, रोली, सिंदूर, एक नारियल, अक्षत, लाल वस्त्र , फूल, पांच सुपारी, लौंग, पान के पत्ते, घी, कलश, कलश के लिए आम का पल्लव, चौकी, समिधा, हवन कुण्ड, हवन सामग्री, कमल गट्टे, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल), फल, बताशे, मिठाईयां, पूजा में बैठने हेतु आसन, हल्दी, अगरबत्ती, कुमकुम, इत्र, दीपक, रूई, आरती की थाली, कुशा, रक्त चंदनद, श्रीखंड चंदन पूजन सामग्री का इस्तेमाल करना चाहिए।

पूजन शुरू करने से पहले चौकी को धोकर उस पर रंगोली बनाएं और चौकी के चारों तरफ चार दीपक जलाएं। जिस जगह पर आप  मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा को स्थापित करने जा रहे हैं, वहां पर थोड़ा सा चावल जरूर रखें। मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए उनके बायीं ओर भगवान विष्णु की प्रतिमा को स्थापित करें।

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आसन लगाकर उनके सामने बैठ जाएं और खुद को व आसन को इस मंत्र से शुद्ध करें

ऊं अपवित्र : पवित्रोवा सर्वावस्थां गतोऽपिवा। य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तर: शुचि :॥

इस मंत्र से खुद पर और आसन पर 3-3 बार कुशा व पुष्पादि से छीटें लगाएं।

इस तरह  मां लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख शांति और धन की वर्षा होती है

पूजा करते समय हाथ में पुष्प, फल, सुपारी, पान, चांदी का सिक्का, नारियल (पानी वाला), मिठाई, मेवा, आदि सभी सामग्री थोड़ी-थोड़ी मात्रा में लेकर दिवाली पूजन के लिए संकल्प लें।

सबसे पहले गणेश भगवन की पूजा करें और इसके बाद स्थापित सभी देवी-देवताओं का पूजन करें। कलश की स्थापना करें और मां लक्ष्मी का ध्यान करें। मां लक्ष्मी को इस दिन लाल वस्त्र जरूर पहनाएं। मां लक्ष्मी सभी की मनोकामना को पूरी करती है।

दिवाली वास्तु टिप्स 2023: दिवाली से पहले घर से तुरंत हटा दें ये चीजें, आएगी सुख-समृद्धि

धार्मिक मान्यता के अनुसार दिवाली के दिन देवी लक्ष्मी हर घर में प्रवेश करती हैं और देखती हैं कि वहां साफ-सफाई और सुंदरता है या नहीं। जिन घरों में साफ-सफाई नहीं होती है और जहां गंदगी और टूटी-फूटी चीजें होती हैं, वहां मां लक्ष्मी का वास कभी नहीं होता।

इस बार दिवाली का पर्व 12 नवंबर को मनाया जा रहा है। ऐसे में आइए जानते हैं कि दिवाली पर लक्ष्मी पूजा से पहले किन चीजों को घर से बाहर फेंक देना चाहिए।

  • दीपावली का पर्व सुख, समृद्धि और धन का पर्व है। दिवाली के दिन घर की सफाई करते समय सबसे पहले आप टूटे शीशे के सामान को घर से तुरंत हटा दें।
  • टूटे शीशे की खिड़कियों की मरम्मत कराएं। वास्तु के अनुसार घर में टूटा हुआ कुछ भी नकारात्मक ऊर्जा और कलह पैदा करता है।
  • घर में रखी बेकार या बंद घड़ियों को दिवाली से पहले हटा देना चाहिए। घर में कभी भी बंद या क्षतिग्रस्त घड़ी नहीं रखें। बंद घड़ियां व्यक्ति की प्रगति और सफलता में बाधा डालती हैं।
  • दिवाली से पहले घर के सभी टूटे हुए सजावटी सामान को तुरंत हटा दें। टूटी चीजों से वास्तु दोष बहुत जल्दी उत्पन्न हो जाते हैं।
  • नष्ट हो चुके इलेक्ट्रॉनिक सामानों को भी बदला जाना चाहिए या बाहर फेंक देना चाहिए।
  • इसके अलावा घर के मुख्य द्वार समेत सभी दरवाजों और फर्नीचर में किसी भी तरह की आवाज नहीं होनी चाहिए। दिवाली से पहले सभी फर्नीचर की मरम्मत कर लेनी चाहिए।
  • बेडरूम में कोई भी चीज़े टूटी फूटी नहीं होनी चाहिए। वास्तु के अनुसार टूटा हुआ बिस्तर या अन्य कोई चीज़े व्यक्ति के वैवाहिक जीवन को प्रभावित करता है।
  • घर में रखे पुराने और टूटे हुए बर्तन, खिलौने, सजावटी सामान, कपड़े, चप्पल और फटी चादर को तुरंत घर से हटा देना चाहिए।
  • दिवाली के दिन पिछले साल का बचा हुआ दीपक कभी नहीं जलाना चाहिए। दिवाली के दिन घर में नया दीया खरीदकर ही जलाना चाहिए।

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दिवाली के खास मौके पर बनाये ये स्वादिष्ट रेसिपी, देखें वीडियो

दिवाली के त्यौहार में तरह-तरह के व्यंजन बनाए जाते हैं, जिनमें से कुछ खास तौर पर मेहमानों के स्वागत के लिए बनाए जाते हैं। आज हम आपके लिए ड्राई फ्रूट कचौरी बनाने की रेसिपी लेकर आए हैं। इसे बनाने में बहुत ही कम समय लगता है। आइए जानते हैं इसे बनाने की विधि के बारे में।

आवश्यक सामग्री

1 कप मैदा, चुटकी भर हींग, चुटकी भर अजवायन, 10 से 12 बादाम और काजू (कटे हुए), थोड़े से किशमिश, 2 चम्मच चीनी, 2 चम्मच सफेद तिल, 2 चम्मच मूंगफली, 2 हरी मिर्च (कटी हुई) , खसखस ​​और नारियल (कद्दूकस किया हुआ), 1 छोटा चम्मच, सौंफ – 1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, छोटी चम्मच अमचूर पाउडर, नमक स्वादानुसार, तलने के लिए तेल

व्यंजन विधि

  • एक चुटकी नमक, अजवायन, 1 छोटा चम्मच गुनगुना तेल और गुनगुना पानी डालकर आटा गूंथ लें।
  • इस आटे को 10 मिनट के लिए कपड़े से ढककर रख दें।
  • भरावन के लिए किशमिश और काजू-बादाम को छोड़कर सभी सामग्री को मिक्सी में पीस लें।
  • इस मिश्रण में काजू बादाम और किशमिश डालें। गूंथे हुए आटे की मोटी लोई लेकर उसमें 1 छोटी चम्मच भरकर कचौरी का आकार देते हुए अच्छी तरह सील कर दीजिए।
  • कड़ाही में तेल गर्म करें और कचौरियों को धीमी आंच पर सुनहरा होने तक तल लें।

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जानिए 2023 में दिवाली का शुभ महूर्त और पूजा के दौरान कौन सी बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

दीपावली हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्यौहार है। हिंदू धर्म में दिवाली का विशेष महत्व है। दिवाली अमावस्या के दिन पड़ती है। जब हर जगह अँधेरा होता है, तब एक दीपक की रोशनी इस अंधेरे को दूर करती है।

यह त्यौहार अंधकार पर प्रकाश की जीत के रूप में मनाया जाता है। अंधेरा कितना भी गहरा क्यों न हो, प्रकाश की एक किरण उसे नष्ट कर सकती है।

आज हम आपको इस पोस्ट में बताने जा रहे हैं दिवाली का शुभ महूर्त, महत्त्व और पूजा के समय ध्यान रखी जाने वाली बातें। तो आइये जानते हैं :-

पूजा का शुभ महूर्त

दीपावली के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त 12 नवंबर की शाम 5 बजकर 40 मिनट से लेकर 7 बजकर 36 मिनट तक है। वहीं लक्ष्मी पूजा के लिए महानिशीथ काल मुहूर्त रात 11 बजकर 39 मिनट से मध्यरात्रि 12 बजकर 31 मिनट तक है। ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार इस मुहूर्त में लक्ष्मी पूजा करने से जीवन में अपार सुख-समृद्धि की प्राप्ति होगी।

महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम जब लंका विजय कर पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ वनवास पूरा कर अयोध्या वापस आए थे। तब अयोध्या का हर घर और चौराहा दीपों की रोशनी से जगमग था।

हर अयोध्यावासी ने भगवान राम के वनवास से नगर आगमन पर अपने घर को दीपों से सजाया था। तब से हर वर्ष कार्तिक मास की अमावस्या को दिवाली मनाई जाती है।

पूजा के दौरान इस बात का ध्यान रखना जरूरी है।

  • दीपावली के दिन, लक्ष्मी पूजा से पहले घर की सफाई करें और वातावरण की शुद्धि और शुद्धता के लिए पूरे घर पर गंगाजल छिड़कें। घर के दरवाजे पर रंगोली और दीपक भी लगाएं।
  • पूजा स्थल पर चौघड़िया रखें और उस पर लाल कपड़े से लक्ष्मी और गणपति की मूर्ति रखें या दीवार पर लक्ष्मी की तस्वीर लगाएं। चौरांग के पास जल से भरा कलश रखें।
  • देवी लक्ष्मी और गणपति की मूर्तियों पर हल्दी कुमकुम लगाएं और जल, चावल, फल, गुड़, हल्दी, गुलाल आदि चढ़ाएं और देवी महालक्ष्मी की स्तुति करें।
  • इसके साथ ही देवी सरस्वती, काली, भगवान विष्णु और कुबेर की पूजा करें।
  • लक्ष्मी पूजन पूरे परिवार को मिलकर करना चाहिए।
  • लक्ष्मी पूजा के बाद तिजोरी, मशीनरी और व्यावसायिक उपकरणों की पूजा करें।