स्वामी विवेकानंद जी के 10 अनमोल वचन

हमारे देश में ऐसे कई महापुरूष हुए हैं, जिनके जीवन और उनके विचारों से हम सभी को बहुत कुछ सीखने को मिलता है। इन्हीं में से एक हैं स्वामी विवेकानंद।

प्रति वर्ष भारत में 12 जनवरी को “स्वामी विवेकानंद जन्म दिवस” के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को “राष्ट्रीय युवा दिवस” के रूप में भी मनाया जाता है।

स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन को राष्ट्रीय युवा दिवस के तौर पर मनाए जाने का मुख्य कारण है उनके दर्शन, सिद्धांत, विचार, वचन, और आदर्श, जिनका उन्होंने स्वयं भी पालन किया और कई देशों में उन्हें स्थापित भी किया। उनके यही विचार, सिद्धांत और आदर्श युवाओं में नई शक्ति और ऊर्जा का संचार करते हैं।

स्वामी विवेकानंद ने युवाओं का सही मार्गदर्शन करने के लिए सफलता के कई मंत्र दिए, जिन्हें आज भी अपने जीवन में अपना कर लोग सफलता की दिशा में अग्रसर हो सकते हैं।

उनके विचार लोगों की सोच और व्यक्तित्व को बदलने वाले हैं। आज हम इस लेख में स्वामी विवेकानंद जी के 10 अनमोल वचनों के बारे में जानेंगे, तो चलिए शुरू करते हैं

उठो, जागो और तब तक रुको नहीं
जब तक कि तुम अपना लक्ष्य प्राप्त नहीं कर लेते

जितना बड़ा संघर्ष होगा जीत उतनी ही शानदार होगी

ब्रह्मांड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं
वो हम ही हैं जो अपनी आंखों पर हाथ रख लेते हैं
और फिर रोते हैं कि कितना अंधकार है

जो तुम सोचते हो, वो बन जाओगे
यदि तुम खुद को कमजोर सोचते हो, तुम कमजोर हो जाओगे
अगर खुद को ताकतवर सोचते हो, तुम ताकतवर हो जाओगे

जब तक जीना, तब तक सीखना
अनुभव ही जगत में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक है

लोग तुम्हारी स्तुति करें या निंदा, लक्ष्य तुम्हारे ऊपर कृपालु हो या ना हो
तुम्हारा देहांत आज हो या युग में, तुम न्यायपथ से कभी भ्रष्ट ना हो

संगति आप को ऊंचा उठा भी सकती है और यह आपको ऊंचाई से गिरा भी सकती है इसलिए संगति अच्छे लोगों से करें

एक समय में एक काम करो
ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमें डाल दो
और बाकी सब कुछ भूल जाओ

किसी दिन, जब आपके सामने कोई समस्या ना आए तो समझ जाएं कि आप गलत मार्ग पर चल रहे हैं।

 

क्यों मनाया जाता है लोहड़ी का त्यौहार, जानिए कुछ रोचक तथ्य

हर वर्ष जनवरी माह में लोहड़ी का त्यौहार हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है। सिख समुदाय के लिए यह दिन विशेष होता है। फसल के तैयार होने की खुशी में यह पर्व मनाया जाता है। यह पर्व  विशेष रूप से पंजाब और हरियाणा में बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है।

लोहड़ी एवं मकर संक्रांति एक-दूसरे से जुड़े रहने के कारण सांस्कृतिक उत्सव और धार्मिक पर्व का एक अद्भुत त्यौहार है। लोहड़ी को नई फसल की कटाई तथा सर्दी के समापन का प्रतीक भी माना जाता है।

इस दिन से सर्दी कम होने लगती है, वातावरण का तापमान बढ़ने लगता है। लोहड़ी के दिन लोग नए कपड़े पहनते हैं। एक दूसरे को बधाइयां एवं शुभकामनाएं देते हैं।

लोहड़ी की तिथि

ज्योतिषियों की मानें तो मकर संक्रांति तिथि से एक दिन पूर्व लोहड़ी पर्व मनाया जाता है। साल 2024 में लोहड़ी 13 जनवरी के बदले 14 जनवरी को है। लोहड़ी के दिन संक्रांति तिथि संध्याकाल 08 बजकर 57 मिनट पर है।

लोहड़ी का अर्थ

लोहड़ी को पहले तिलोड़ी कहा जाता था। यह शब्द तिल और रोड़ी (गुड़ की रोड़ी) शब्दों को मिलाकर बना है, जो समय के साथ बदल कर लोहड़ी के नाम से जाना जाता हैं।

मकर संक्रांति के दिन तिल-गुड़ खाने और बांटने का महत्व है। पंजाब के कई इलाकों में इसे लोही या लोई भी कहा जाता है।

क्यों मनाई जाती है लोहड़ी?

यह त्यौहार फसलों कीकटाई और बुआई से जुड़ा है। सिखों के लिए लोहड़ी खास मायने रखती है। त्यौहार के कुछ दिन पहले से ही इसकी तैयारी शुरू हो जाती है।

विशेष रूप से शरद ऋतु के समापन पर इस त्यौहार को मनाने का प्रचलन है। पंजाब में यह त्यौहार नए साल की शुरुआत में फसलों की कटाई के उपलक्ष्य के तौर पर मनाया जाता है।

रोचक तथ्य

  • लोहड़ी को विशेष रूप से पंजाब और हरयाणा में मनाया जाता है। लोहड़ी शब्द इसकी पूजा में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं से मिलकर बना है। इसमें ल (लकड़ी) +ओह (गोहा = सूखे उपले) + ड़ी (रेवड़ी) = ‘लोहड़ी‘ के प्रतीक हैं।
  • साल की सभी ऋतुओं पतझड़, सावन और बसंत में कई तरह के छोटे-बड़े त्यौहार मनाए जाते हैं, जिनमें से एक प्रमुख त्यौहार लोहड़ी भी है। लोहड़ी को पौष के आखिरी दिन और माघ की शुरुआत में सर्दियों का अंत होता है जो ठीक उसी समय होता है जब सूरज अपना रास्ता बदलता है। ऐसा माना जाता है कि लोहड़ी की रात सर्दियों की सबसे ठंडी रात होती है।
  • लोहड़ी की संध्या को लोग लकड़ी जलाकर अग्नि के चारों ओर चक्कर काटते हुए नाचते-गाते हैं और आग में रेवड़ी, मूंगफली, खील, मक्के के दानों की आहुति देते हैं। अग्नि की परिक्रमा करते हैं और आग के चारों ओर बैठकर लोग आग सेंकते हैं।
  • लोहड़ी उत्सव उस घर में और भी खास होता है, जिस घर में नई शादी हुई हो या बच्चा हुआ हो। इन घरों में लोहड़ी विशेष उत्साह के साथ मनाई जाती है। लोहड़ी के दिन बहन और बेटियों को मायके बुलाया जाता है।
  • लोहड़ी को फसल त्यौहार के रूप में भी मनाया जाता है। जैसा कि पारंपरिक रूप से जनवरी गन्ने की फ़सल काटने का समय होता है, और गन्ने से बने उत्पाद जैसे गुड़ और गज्जक लोहड़ी के उत्सव के लिए आवश्यक हैं।
  • लोहड़ी के दिन विशेष पकवान बनते हैं जिसमें गज्जक, रेवड़ी, मूंगफली, तिल-गुड़ के लड्डू, मक्का की रोटी और सरसों का साग प्रमुख होते हैं। इस दिन नववधू किचन में पहली बार सबके लिए खाना बनाती है। लोहड़ी से कुछ दिन पहले से ही छोटे बच्चे लोहड़ी के गीत गाकर लोहड़ी हेतु लकड़ियां, मेवे, रेवडियां, मूंगफली इकट्ठा करने लग जाते हैं।
  • भारत के अलग-अलग राज्यों में मकर संक्रांति के दिन या आसपास कई त्यौहार मनाएं जाते हैं, जो कि मकर संक्रांति के ही दूसरे रूप हैं। जैसे दक्षिण भारत में पोंगल, असम में बिहू और ऐसे ही पंजाब में लोहड़ी मनाई जाती है।
  • इस त्यौहार का महत्वपूर्ण होने का एक और कारण यह भी है कि पंजाबी किसान लोहड़ी के अगले दिन को वित्तीय नया साल मानते हैं, जो सिख समुदाय के लिए भी बहुत महत्व रखता है।
  • वास्तव में लोहड़ी पर गाए जाने वाले लोक गीतों का कारण सूर्य देव को धन्यवाद देना और आने वाले वर्ष के लिए उनकी निरंतर सुरक्षा की कामना करना है। नृत्य और गिद्दा के अलावा, लोहड़ी पर पतंग उड़ाना भी बहुत लोकप्रिय है।
  • लोहड़ी से कई ऐतिहासिक गाथाएं भी जुड़ी हुई हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार सती के त्याग के रूप में यह त्यौहार मनाया जाता है। कथानुसार जब प्रजापति दक्ष के यज्ञ की आग में कूदकर शिव की पत्नीं सती ने आत्मदाह कर लिया था तो उसी दिन की याद में यह पर्व मनाया जाता है।
  • दूसरी मान्यता है कि मुगलकाल में दुल्ला भट्टी नाम का एक लुटेरा था। वह हिन्दू लड़कियों को गुलाम के तौर पर बेचने का ​विरोध करता था। वह उनको आजाद कराकर हिन्दू युवकों से विवाह करा देता था। लोहड़ी के दिन उसके इस नेक काम के लिए गीतों के माध्यम से उसका आभार जताया जाता है।
  • यह भी कहा जाता है कि संत कबीर की पत्नी लोई की याद में यह पर्व मनाया जाता है। यह भी मान्यता है कि सुंदरी और मुंदरी नाम की लड़कियों को राजा से बचाकर एक दुल्ला भट्टी नामक डाकू ने किसी अच्छे लड़कों से उनकी शा‍दी करवा दी थी।
  • ईरान में भी नववर्ष का त्यौहार इसी तरह मनाते हैं। आग जलाकर मेवे अर्पित किए जाते हैं। पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में मनाई जाने वाली लोहड़ी और ईरान का चहार-शंबे सूरी बिल्कुल एक जैसे त्यौहार हैं। इसे ईरानी पारसियों या प्राचीन ईरान का उत्सव मानते हैं।

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‘दुनिया की बढ़ती आबादी’ से जुड़े कुछ रोचक बातें

दुनियाभर में बढ़ती आबादी यानी जनसंख्या परेशानी का एक बड़ा कारण है। इसकी वजह से अशिक्षा, बेरोजगारी, भुखमरी और गरीबी अनियंत्रित होती जा रही है। हर दिन लाखों की संख्या में जनसंख्या बढ़ रही है।

दुनियाभर में इसी बढ़ती आबादी के प्रति जागरूक करने के लिए हर साल 11 जुलाई को ‘वर्ल्ड पॉपुलेशन डे ‘ यानी ‘विश्व जनसंख्या दिवस’ मनाया जाता है। दरअसल, साल 1987 में 11 जुलाई को ही दुनिया की आबादी 5 अरब तक पहुंच गई थी।

ऐसे में बढ़ती जनसंख्या से जुड़े मुद्दों और पर्यावरण तथा विकास पर इसके असर को लेकर दुनियाभर के लोगों को जागरूक करने की जरूरत महसूस हुई। इसी को ध्यान में रखते हुए संयुक्त राष्ट्र ने यह दिवस मनाने की शुरुआत की।

दुनिया की आबादी

‘यूनाइटेड नेशंस पॉपुलेशन फंड’ के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया की कुल आबादी फिलहाल 8 अरब को पार कर चुकी है। इसके अनुसार 15 नवम्बर, 2022 वह दिन था जब दुनिया की आबादी 8 अरब हो गई।

इसमें 65 प्रतिशत आबादी 15 से 64 साल की उम्र के लोगों की है। 65 साल से ऊपर के लोगों की कुल 10 प्रतिशत और 14 साल से कम उम्र के लोगों की 25 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

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भारत बना दुनिया की सबसे अधिक आबादी वाला देश

कुछ समय पहले तक दुनिया में सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश चीन था, जबकि दूसरे स्थान पर भारत था लेकिन संयुक्त राष्ट्र के अप्रैल में जारी आंकड़ों के अनुसार भारत 1 अरब 42.86 करोड़ लोगों के साथ चीन को पीछे छोड़कर दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बन गया है जबकि चीन की जनसंख्या 1 अरब 42.57 करोड़ है। दुनिया की कुल आबादी में 60 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सेदारी एशिया की है।

कुछ रोचक बातें

जनसंख्या के आंकड़े किस तेजी से बढ़ रहे हैं, इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि दुनिया की आबादी 1 अरब होने में लाखों साल लग गए लेकिन 1 से 8 अरब तक पहुंचने में महज 200 साल ही लगे। वहीं 7 अरब से 8 अरब होने में केवल 12 साल लगे हैं।

साल 2011 में दुनिया की आबादी 7 अरब थी, जो अब 8 अरब से अधिक हो चुकी है। दुनिया की जनसंख्या वृद्धि दर 1965 और 1970 के बीच चरम पर पहुंच गई थी, जब औसतन 2.1 प्रतिशत की दर से हर साल आबादी बढ़ रही थी।

20वीं सदी के मध्य से विकसित देशों में वयस्कों का जीवन काल बढ़ा है। 100 साल की उम्र तक पहुंचने वाले लोगों की संख्या आज के मुकाबले कभी ज्यादा नहीं रही।

एक ऐसा गांव, जहां रहती है केवल 1 महिला

जहां, दिनों दिन जनसंख्या बढ़ रही है, वहीं दुनिया में एक गांव ऐसा भी है जहां केवल 1 अकेली बुजुर्ग महिला रहती है। अमरीका के नेब्रास्का राज्य में स्थित मोनोवी नामक एक बड़ा गांव है, जिसमें खेत भी हैं, गाय-बकरियां भी हैं लेकिन इंसान नहीं रहते। इस गांव में केवल एक महिला रहती है, वह भी अकेले। महिला की उम्र 84 साल है, जिनका नाम एल. सी. आइलर है।

साल 1930 तक यहां 123 लोग रहते थे, लेकिन उसके बाद धीरे-धीरे आबादी घटनी शुरू हो गई। 2000 में इस गांव में केवल एल. सी. आइलर और उनके पति रूडी आइलर ही बचे लेकिन 2004 में उनके पति की मौत हो गई, जिसके बाद से वह अकेली इस गांव में रह रही हैं।

उनका कहना है कि गांव में कोई भी नहीं रहेगा तो दुनिया उनके गांव को भूतिया कहेगी, इसलिए वह अंत तक यहीं रहेंगी। अब सरकार की तरफ से उन्हें आर्थिक सहयोग मिलता है, जिससे गांव को सुंदर रखा जाए। वह गांव की मेयर होने के साथ गांव की क्लर्क और अफसर भी हैं और गांव की पूरी जिम्मेदारी के साथ देखभाल भी करती हैं।

पंजाब केसरी से साभार

“टपकेश्वर मंदिर” जो बनाया गया है पथरीली चट्टानों को काटकर

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टपकेश्वर मंदिर को टपकेश्वर महादेव मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में स्थित यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है।

यह मंदिर टोंस नदी के तट पर एक प्राकृतिक गुफा के शीर्ष पर बना है। गुफा में एक प्राकृतिक शिवलिंग है, जो स्थानीय लोगों के लिए श्रद्धा का स्थान है। बताया जाता है कि टपकेश्वर मंदिर 6,000 साल पुराना है।

ऐतिहासिक टपकेश्वर महादेव मंदिर देहरादून शहर से लगभग 6 किलोमीटर दूर गढ़ी कैंट में स्थित है। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए ढलान में जाती लगभग 100-125 सीढ़ियों को उतरना पड़ता है, तब जाकर मंदिर का द्वार नजर आता है।

Tapkeshwar-Mahadev-Temple-Drona-Cave-Dehradun
Tapkeshwar-Mahadev-Temple-Drona-Cave-Dehradun

यह मंदिर पथरीली चट्टानों को काट कर मंदिर बनाया गया है। यहां कोई मानव निर्मित दीवार नहीं, छत नहीं अपितु चट्टानों को इतनी कारीगरी से काटा गया है कि मनुष्य के खड़े होने लायक ऊंचाई ही मिलती है।

महाभारत काल से जुड़ा इतिहास

कहा जाता है कि इस मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। हिंदू महाकाव्य महाभारत में पांडवों और कौरवों के शिक्षक द्रोणाचार्य यहाँ निवास करते थे। उनके नाम पर इस गुफा को द्रोण गुफा भी कहा जाता है।

कहा जाता है कि जब महर्षि द्रोण हिमालय की ओर तपस्या करने के लिए निकले तो ऋषिकेश में एक ऋषि ने उन्हें तपेश्वर में भगवान भोले की उपासना करने की सलाह दी।

गुरु द्रोण अपनी पत्नी कृपि के साथ तपेश्वर आ गए। गुरु द्रोण जहां शिव से शिक्षा लेने के लिए तपस्या करते थे, वहीं उनकी पत्नी कृपि पुत्र रत्न की प्राप्ति के लिए जप करती थीं।

Tapkeshwar Temple dehradun uttrakhand
Tapkeshwar Temple dehradun uttrakhand

भगवान शिव प्रसन्न हुए और कृपि को अश्वत्थामा जैसा पुत्र प्राप्त हुआ, वहीं द्रोण को शिक्षा देने के लिए भगवान रोज आने लगे। मां कृपि को दूध नहीं होता था, इसलिए वो अश्वत्थामा को पानी पिलाती थीं।

मां के दूध से वंचित अश्वत्थामा को मालूम ही नहीं था कि श्वेत रंग का यह तरल पदार्थ क्या है। अपने अन्य बाल सखाओं को दूध पीते देखकर अश्वत्थामा भी अपनी मां से दूध की मांग करते थे।

दिन प्रतिदिन अश्वत्थामा के बढ़ते हठ के कारण महर्षि द्रोण भी चिंतित रहने लगे। एक दिन महर्षि द्रोण अपने गुरु भाई पांचाल नरेश राजा द्रुपद के पास गए। राजा द्रुपद धन वैभव के मद में चूर थे। वे गुरु द्रोण के आगमन पर प्रसन्न तो हुए लेकिन उन्हें द्रोण के मुख से भगवान शिव की महिमा पसंद नहीं आई।

गुरु द्रोण ने उनसे अपने पुत्र के लिए एक गाय की मांग की। राजसी घमंड में चूर पांचाल नरेश द्रुपद ने कहा कि अपने शिव से गाय मांगों, मेरे पास तुम्हारे लिए गाय नहीं है।

यह बात महर्षि द्रोण को चुभ गई। वो वापस लौटे और बालक अश्वत्थामा को दूध के लिए शिव की आराधना करने को कहा। अश्वत्थामा ने छह माह तक शिवलिंग के सामने बैठकर भगवान की कठोर आराधना शुरू कर दी तभी एक दिन अचानक श्वेत तरल पदार्थ की धारा शिवलिंग के ऊपर गिरने लगी।

यह देखकर अश्वत्थामा ने अपने माता पिता को इस आश्चर्य के बारे में बताया। महर्षि द्रोण ने जब देखा तो समझ गए कि यह सब भगवान शिव की महिमा है। फिर एक दिन भगवान भोलेनाथ उन्हें दर्शन देकर बोले की अब अश्वत्थामा को दूध के लिए व्याकुल नहीं होना पड़ेगा।

Tapkeshwar mahadev Temple
Tapkeshwar mahadev Temple

उसी धारा से अश्वत्थामा ने पहली बार दूध का स्वाद चखा। उस समय जो भी भक्त भोले के दर्शन करने तपेश्वर आता था, वो प्रसाद के रूप में दूध प्राप्त करता था।

कहते हैं कि यह सिलसिला कलयुग तक चलता रहा। लेकिन बाद में भगवान् के इस प्रसाद का अनादर होने लगा। यह देखकर शिवशंकर ने दूध को पानी में तब्दील कर दिया, और धीर धीरे यह पानी बूंद बनकर शिवलिंग पर टपकने लगा।

आज तक यह ज्ञात नहीं हुआ कि यह पानी कहां से शिवलिंग के ऊपर टपकता है। पानी टपकने के कारण कलयुग में यह मंदिर भगवान टपकेश्वर के नाम से प्रसिद्ध हो गया।

जीवन बदल देने वाली ये 10 किताबें आपको अवश्य पढ़नी चाहिए

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किताबों में हमारे जीवन को बदलने और हमारी कल्पनाओं को प्रज्वलित करने की अविश्वसनीय शक्ति होती है। किताबें पढ़ने से हमारे अंदर सकारात्मक सोच का विकास होता है और आत्मविश्वास पैदा होता है।

आज हम आपको इस लेख के माध्यम से कुछ ऐसी किताबों के बारे में बताने जा रहे हैं जिससे आपकी ज़िंदगी बदल जाएगी। इन किताबों की कहानियों को पढ़कर यकीनन आपके मन में भी कुछ करने की जज़्बा पैदा होगा।

तो चलिए शुरू करते हैं।

द अल्केमिस्ट : पाउलो कोएल्हो

द अल्केमिस्ट एक बहुत ही शानदार किताब है। यह मूल रूप से एक गडरिये की कहानी है जो एक खजाना ढूंढने निकलता है। यह कहानी आपको जीवन में एक नया नजरिया दे सकती है।

कहानी के कई भागों में आपको यह महसूस होगा कि जिस तरह की परेशानियां सामना गडरिया कर रहा है हम भी सामान्य जीवन में ऐसी परिस्थितियों का अनुभव करते हैं।

The Alchemist book

यदि आप इस किताब को खरीदना चाहते हैं तो अमेज़न के इस लिंक से खरीद सकते हैं।

जीत आपकी : शिव खेड़ा

“जीत आपकी” एक मोटिवेशनल किताब है जो आपको सफलता के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी। इस किताब में लेखक शिव खेड़ा ने अपने अनुभवों के माध्यम से सफलता के महत्वपूर्ण सिद्धांतों को साझा किया है।

इसमें आपको मोटिवेशन, समय के प्रबंधन, लक्ष्य स्थापित करने का महत्व, और सफलता के लिए मानसिक तैयारी के बारे में विस्तार से बताया गया है।

jeet aapki ( shiv kheda )

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“रिच डैड, पुअर डैड” : रॉबर्ट कियोसाकी

इस किताब के बारे में आमतौर पर कहा जाता है कि अगर आप अमीर बनना चाहते हैं तो सबसे पहले इस किताब को पढ़ना चाहिए। अमेरिकन बिजनेसमैन रॉबर्ट कियोसाकी (Robert t. Kiyosaki) ने इस किताब को 25 साल पहले लिखा था। लेकिन इसकी प्रासंगिकता आज भी उतनी ही है या यूँ कहें कि और बढ़ गई है।

इस किताब में कियोसाकी ने दो पिताओं के बारे में बात की है। एक वो अपने खुद के पिता के बारे में और दूसरे एक अपने बेस्ट फ्रेंड के पिता के बारे में।

कियोसाकी बताते हैं उनके पिता जी पीएचडी थे, जो इस किताब में पुअर डैड हैं। दूसरे, उनके बेस्ट फ्रेंड के पिता जी एक बिजनेसमैं है जो इस किताब में रीच डैड हैं। इस कहानी के जरिए कियोसाकी अमीर बनने की सोच के बारे में बताते हैं।

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“विंग्स ऑफ़ फायर” : डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम

यह पुस्तक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जी की जीवनी पर आधरित है। इस पुस्तक में उन्होंने अपने बचपन से लेकर राष्ट्रपति बनने तक के सफर का ज़िक्र किया है। आज हर कोई उनकी तरह बनना चाहता है।

उनकी इस किताब को पढ़कर निराश से निराश व्यक्ति भी अपने जीवन से प्यार करने लगेगा और अगर आप ज़िन्दगी की दौड़ में कुछ करना चाहते हों, तो यह किताब आपको बेहद पसंद आएगी।

“विंग्स ऑफ़ फायर” पुस्तक पढ़कर आप डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम के संघर्षपूर्ण और सफल जीवन से कुछ सीख सकते हैं।

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द लॉ ऑफ़ सक्सेस : नेपोलियन हिल

द लॉ ऑफ़ सक्सेस नेपोलियन हिल द्वारा 1925 में लिखी गई एक पुस्तक है। इस एकमात्र किताब से आप सफलता के सारे सूत्रों को प्राप्त कर सकते हैं।

इस किताब को पढ़ने के बाद आपको शायद कोई और किताब को पढ़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि जितने भी बेसिक्स होते हैं सफलता को प्राप्त करने के लिए वह इस किताब में हैं। तो इस किताब को जरूर पढ़ें।

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थिंक एंड ग्रो रिच : नेपोलियन हिल

थिंक एंड ग्रो रिच पुस्तक नेपोलियन हिल और रोजा ली बीलैंड द्वारा लिखित है जो 1937 में जारी की गई थी। यह व्यक्तिगत-विकास और आत्म-विकास से सम्बन्धित पुस्तक है।

दरअसल इस किताब में नेपोलियन हिल ने सोच के बारे में बताया है कि किस तरह की सोच से हम जीवन में सफल हो सकते हैं। इस पुस्तक में उन्होंने कुछ कामयाब लोगों के नियम बताए हैं यानी कोई भी इनको फॉलो करके सफलता की राह पर चल सकता है।

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सेपियन्स : डॉ युवाल नोआ हरारी

डॉ युवाल नोआ हरारी द्वारा लिखित किताब ‘सेपियन्स’ में मानव जाति के संपूर्ण इतिहास को बहुत ही खूबसूरत ढंग से प्रस्तुत किया गया है। यह प्रस्तुतिकरण अपने आप में अद्वितीय है।

इसमें धरती पर विचरण करने वाले पहले इंसानों से लेकर संज्ञानात्मक, कृषि और वैज्ञानिक क्रांतियों की प्रारम्भिक खोजों से लेकर विनाशकारी परिणामों तक को शामिल किया गया है।

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लेखक ने जीव-विज्ञान, मानवशास्त्र, जीवाश्म विज्ञान और अर्थशास्त्र के गहन ज्ञान के आधार पर इस रहस्य का अन्वेषण किया है कि इतिहास के प्रवाह ने आख़िर कैसे हमारे मानव समाजों, हमारे चारों ओर के प्राणियों और पौधों को आकार दिया है। यही नहीं, इसने हमारे व्यक्तित्व को भी कैसे प्रभावित किया है।

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अनटेम्ड : ग्लेनॉन डॉयल

“अनटैम्ड ” ग्लेनॉन डॉयल का तीसरा संस्मरण है इससे पहले उन्होंने कैरी ऑन, वॉरियर , लव वॉरियर पुस्तक लिखी थी। पितृसत्ता को ध्वस्त करने वाली महिला की इस कहानी के माध्यम से, आप सीखेंगे कि खुद पर भरोसा कैसे करें।

यह पुस्तक सभी महिलाओं के लिए एक प्रेरक जागृति आह्वान है। यह पुस्तक महिलाओं को उनके अंदर मौजूद लालसा की आवाज को उजागर करने के लिए प्रोत्साहित करती है।

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बिलव्ड : टोनी मॉरिसन

बिलव्ड अमेरिकी उपन्यासकार टोनी मॉरिसन का 1987 का उपन्यास है। यह उपन्यास मार्गरेट गार्नर की सच्ची कहानी से प्रेरित है, जो 1856 में अपने परिवार के साथ केंटुकी की गुलामी से भागकर ओहायो में आज़ाद हो गई थी।

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“सिद्धांत” : रे डेलियो

रे डेलियोद्वारा लिखित पुस्तक सिद्धांत में उन नियमों और रूपरेखाओं का वर्णन किया गया है जिनका उपयोग वह अपने जीवन को आगे बढ़ाने के लिए करते हैं। यह पुस्तक सफलता प्राप्त करने के लिए सत्य की खोज, निर्णय लेने और प्रणालियों के कार्यान्वयन की खोज करती है।

इसके बाद, रे उन प्रबंधन सिद्धांतों पर चर्चा करते हैं जिनका उपयोग उन्होंने अपने मल्टीबिलियन-डॉलर हेज फंड, ब्रिजवाटर के निर्माण के लिए किया था।

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अलग-२ भाषाओं में ‘ऐसे दी जाती हैं नव वर्ष की बधाई’

नव वर्ष यानी 1 जनवरी का दिन सम्पूर्ण विश्व में धूमधाम से मनाया जाता है। इस अवसर पर लोग एक-दूसरे को आने वाले वर्ष के शुभ होने के लिए शुभकामनाएं तथा बधाइयां देते हैं।

इसके लिए विश्व भर में रहने वाले लोग अपनी-अपनी भाषा का उपयोग करते हैं। इसी प्रकार हमारे देश में कश्मीर से कन्याकुमारी तक विभिन्न प्रांतों में भिन्न-भिन्न भाषाएं बोली जाती हैं और लोग अपनी-अपनी भाषा में नव वर्ष की बधाइयां देते हैं।

 

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विभिन्न देशी-विदेशी भाषाओं में नव वर्ष की बधाई ऐसे दी जाती है।

  1. अफगानी भाषा में- ‘नवरोज मुबारक’
  2. स्पेनिश में- ‘फेलिज अनो नूएवो’
  3. जर्मन में- ‘फ्रोहेस न्यूएस जाअर’
  4. डेनिश में- ‘गॉडत नयतार’
  5. फ्रैंच में- ‘बोनी एनी’
  6. बुल्गेरियन में- ‘चेस्तिता नावो गोदिना’
  7. अफ्रिकांस में- ‘जेलूकिगे नूवे जार’
  8. चीन की मंडारिन भाषा में -‘शिननियान क्वाईले’
  9. डैनिश में- ‘जेलूकिग निऊवाजार’
  10. अरेबिक में- ‘सनत जादिदात साइएदा’
  11. तुर्किश में- ‘येनि विलिन कुतलु ओलसन’
  12. थाई में- ‘सवास्दी पी हिम’
  13. पोलिश में – ‘सेजेइसलीवेगो नोवेगो रोकू’
  14. नार्वेजियन में- ‘गोड्त न्यात्तर’
  15. ग्रीक में- ‘एफ्तिचेसमिनो तो नियो एतोस’
  16. हंगेरियन में- ‘बोलडाग उज एवेत’
  17. इंडोनेशियन में- ‘सेलामत ताहुन बारू’
  18. ईराकी में- ‘सनह दिदाअ’
  19. आइरिश में-‘अथभिलियानुआ फी महईसे दहयीट’
  20. नेपाली में-‘नव वर्षको हर्दिकमंगलमयशुभकामना’
  21. स्वीडिश में – ‘गोट नायत अर’
  22. इतालवी में- ‘फेलिसे ऐनेनो न्यूओवो’
  23. फिलिपींस में- ‘मालिगायांग बागोंग ताओन’
  24. पुर्तगाली में- ‘फेलिज अनो नोवो’
  25. श्रीलंका (सिंघलीज) में – ‘सुभाह नवा वर्षक’

भारतीय भाषाओं में नव वर्ष की बधाइयां

  1. हिन्दी में- ‘नव वर्ष मंगलमय हो’, ‘नूतन वर्ष शुभ हो’
  2. संस्कृत में – ‘शुभं नववर्षम्’, ‘नववर्ष मंगलमय अस्तु’, ‘नूतन वर्षम् सुखदम भवः’
  3. पंजाबी में- ‘नवें साल दियां लख लख बधाइयां’, “नवें साल दियां मुबारकां’
  4. बंगाली में- ‘शुबो नाबोबोर्टी’
  5. सिंधी में- ‘नायूओ साल मुबारक हौजे’
  6. उड़िया में- ‘नववर्ष शुभेच्छा’
  7. गुजराती में- ‘नूतन वर्ष अभिनंदन’
  8. तमिल में- ‘पुथादू वलत्तूक्कल’
  9. तेलुगु में – ‘नूतन सम्वत्सर शुभकांशालू’
  10. उर्दू में- ‘नया साल मुबारक’
  11. कन्नड़ में- ‘होसा वर्षदा शुभसाया
  12. मराठी में- ‘नवीन वर्षच्या शुभेच्छा’
  13. राजस्थानी में – ‘नवें साल री बधाइयां’

दुनिया में 80 नव वर्ष आज जो कैलेंडर दुनियाभर में प्रचलित है, उसे ईसाई धर्मगुरु पोप ग्रेगोरी अष्टम ने साल 1582 में तैयार किया था। इसे ग्रेगोरियन कैलेंडर नाम दिया गया।

1 जनवरी को नया साल इसी कैलेंडर के अनुसार मनाया जाता है दुनिया भर में केवल उसी दिन नया वर्ष नहीं मनाया जाता है।

आपको जानकर हैरानी होगी कि साल भर में करीब 58 दिन दुनिया के किसी न किसी देश में नया साल मन रहा होता है। दरअसल, दुनियाभर में अलग-अलग सभ्याताएं हैं।

इस हिसाब से साल के 365 दिनों में 80 नववर्ष आते हैं लेकिन इनमें से कई तारीखें एक ही दिन पड़ती हैं, इस कारण से साल के 12 महीनों में से EAMMAD 58 दिन नया साल मनाया जाता है।

इसमें एक चौंकाने वाली बात यह भी है कि हर महीने ऐसा कोई न कोई दिन जरूर होता है जब कहीं न कहीं नया साल मनाया जाता है।

चिंपैंजी का यह वीडियो आपका दिल जीत लेगा, वीडियो देखें

इंसान और जानवर के बीच की बातचीत हमेशा से ही सभी के लिए आकर्षक रही है। ऐसी ही एक बातचीत ने हाल ही में इंटरनेट पर तहलका मचा दिया है और वायरल हो गया है।

हृदयस्पर्शी आदान-प्रदान में एक चिंपैंजी को एक व्यक्ति के हाथों से पानी पीते हुए और उसे कुल्ला करने में मदद करते हुए दिखाया गया है। यह वीडियो किसी और ने नहीं बल्कि वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर और फ्रेंच डायरेक्टर जेसी पियरी ने पोस्ट किया है।

वीडियो देखें

 

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जानिए राशि के अनुसार कैसा रहेगा आपका नया साल 2024

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नया साल आने वाला है। नया साल 2024 सभी के जीवन में ढेर सारी उम्मीदें लेकर आने वाला है। आने वाला नया साल 2024 कुछ राशियों के लिए सफलता के नए अवसर लेकर आ रहा है तो कुछ राशियों के लिए चुनौतियां।

आज पोस्ट में हम आपको बताने जा रहें है राशियों के अनुसार आने वाला साल कैसा रहने वाला है, चलिए जानते हैं

मेष राशि

मेष राशिफल 2024 के अनुसार, आपकी राशि के स्वामी ग्रह मंगल महाराज वर्ष की शुरुआत में धनु राशि में आपके नवम भाव में सूर्य महाराज के साथ स्थित होंगे जिससे लंबी यात्राओं के योग बनेंगे। आपके सम्मान में बढ़ोतरी होगी। समाज में आपको एक अच्छा ओहदा मिल सकता है।

आप धर्म-कर्म के मामलों में भी व्यस्त रहेंगे। व्यापार में उन्नति के अच्छे योग बनेंगे। स्वास्थ्य में सुधार होगा। देव गुरु बृहस्पति वर्ष की शुरुआत में आपके प्रथम भाव में बने रहकर आपके प्रेम भाव, आपके वैवाहिक जीवन, आपके व्यापार और आपके धर्म के भाव को मजबूत बनाएंगे जिससे आपको इन सभी क्षेत्रों में अनुकूल परिणामों की प्राप्ति होगी।

इसके बाद 1 मई को देव गुरु बृहस्पति आपके दूसरे भाव में जाकर आर्थिक उन्नति के योग बनाएंगे। आपको वर्ष की शुरुआत में राजयोग सरीखे परिणाम मिलने वाले हैं इसलिए दिल खोलकर अवसरों का लाभ उठाएं।

राहु महाराज पूरे महीने द्वादश भाव में बने रहेंगे जिससे खर्चे लगातार बने रहेंगे। यह खर्चे व्यर्थ के होंगे इसलिए आपको इन पर नियंत्रण लगाने के लिए प्रयास करना होगा।

वृषभ राशिफल

वृषभ राशिफल 2024 के अनुसार, वर्ष 2024 की शुरुआत में देव गुरु बृहस्पति द्वादश भाव में बने रहकर खर्चों में बढ़ोतरी करेंगे लेकिन आप धर्म कर्म और अच्छे कार्यों में भी लगे रहेंगे। 1 मई के बाद देव गुरु बृहस्पति आपकी राशि में आ जाएंगे। तब इन समस्याओं में कमी आएगी लेकिन आपको अपने स्वास्थ्य पर थोड़ा ध्यान देना पड़ेगा।

योगकारक ग्रह शनि देव जी के पूरे वर्ष दशम भाव में रहने से आप मेहनत भी कराएंगे। अच्छा प्रतिफल भी मिलेगा। भाग्य और कर्म का संबंध बनने से आपको अपने करियर में राज योग का प्रभाव मिलेगा। करियर में उन्नति होगी।

राहु की उपस्थिति पूरे वर्ष आपके एकादश भाव में बनी रहेगी जिससे मनचाही इच्छाओं की पूर्ति होगी। सामाजिक तौर पर आपकी लोकप्रियता बढ़ेगी। दोस्तों और सामाजिक दायरे में बढ़ोतरी होगी। आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा।

हालांकि, वार्षिक भविष्यफल 2024 (Rashifal 2024) के अनुसार, इस वर्ष की शुरुआत में प्रेम संबंधों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। पूरे वर्ष केतु महाराज पंचम भाव में बैठे रहेंगे जिससे अपने प्रियतम को ठीक से समझ न पाने के कारण रिश्ते में समस्याएं आ सकती हैं।

बीच-बीच में शुक्र ग्रह का प्रभाव आपके रिश्ते को संभालता रहेगा लेकिन आपको अपने रिश्ते की अहमियत समझनी होगी। करियर में सुखद और आशा जनक परिणामों की प्राप्ति होगी। मेहनत का लाभ मिलेगा। इस वर्ष अच्छी उन्नति के योग बन रहे हैं। मार्च से अप्रैल और दिसंबर के महीने में अच्छे उन्नति हो सकती है।

विद्यार्थियों को शिक्षा में समस्याएं आ सकती हैं लेकिन कुछ विशेष विषयों में आप की पकड़ मजबूत बनेगी। वित्तीय तौर पर आपको लाभ मिलता रहेगा और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। गुप्त धन प्राप्ति के योग भी वर्ष की शुरुआत में आपको मिल सकते हैं लेकिन खर्च भी बने रहने की संभावना है।

पारिवारिक जीवन को देखें तो वर्ष की शुरुआत अनुकूल रहेगी लेकिन आपके माताजी और पिताजी के स्वास्थ्य समस्याएं बनी रह सकती हैं। वैवाहिक जीवन में जीवनसाथी की समस्त शारीरिक समस्याएं बढ़ सकती हैं। वर्ष की शुरुआत में बुध और शुक्र सप्तम भाव में, द्वादश भाव में बृहस्पति, दशम भाव में शनि और राहु एकादश भाव में होने से व्यापार के लिए आदर्श स्थितियों का निर्माण करेंगे।

स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से वर्ष की शुरुआत कमजोर रहेगी। पंचम भाव में केतु, द्वादश भाव में बृहस्पति, अष्टम भाव में मंगल और सूर्य स्वास्थ्य में समस्याएं खड़ी कर सकते हैं। हालांकि वर्ष के मध्य में धीरे-धीरे स्वास्थ्य में सुधार के योग बनते नजर आएंगे।

मिथुन राशिफल

मिथुन राशिफल 2024 के अनुसार, ग्रहों की स्थिति इस ओर इशारा कर रही है कि वर्ष की शुरुआत आपके लिए अनुकूल रहेगी। देव गुरु बृहस्पति एकादश भाव में विराजमान होकर अनेक सफलताएं प्रदान करेंगे। आर्थिक रूप से यह बहुत मजबूती प्रदान करेंगे। प्रेम संबंधों में भी प्रेम को बढ़ाते रहेंगे। वैवाहिक संबंधों में भी समस्याओं में कमी आएगी।

शनि भाग्य के स्वामी होकर भाग्य स्थान में रहकर आपके भाग्य की वृद्धि करेंगे जिससे रुके हुए कार्य भी बनने लगेंगे। आपको सफलता प्राप्त होती रहेगी। समाज में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा। राहु और केतु आपके दशम और चतुर्थ भाव में रहेंगे जो शारीरिक रूप से समस्याएं दे सकते हैं। पारिवारिक जीवन में भी अशांति पैदा हो सकती है।

कर्क राशि

कर्क राशिफल 2024 की भविष्यवाणियों के अनुसार, वर्ष की शुरुआत में देव गुरु बृहस्पति दशम भाव में विराजमान हो कर करियर और परिवार के बीच संतुलन स्थापित करने में आपकी मदद करेंगे और 1 मई के बाद यह आपके ग्यारहवें भाव में जाकर आपकी आमदनी में वृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेंगे। धर्म-कर्म के मामले में आपकी रूचि जागेगी।

राहु पूरे वर्ष आपके नवम भाव में बने रहेंगे जिससे आपको तीर्थ स्थानों के दर्शन और विशेष नदियों में स्नान करने का मौका मिल सकता है। लंबी यात्राओं के योग बनेंगे। यह वर्ष यात्राओं से भरा रहने वाला है। वर्ष की शुरुआत में शुक्र और बुध पंचम भाव में विराजमान रहेंगे।

इसके परिणाम स्वरूप यह समय प्रेम और आर्थिक लिहाज से अनुकूल रहेगा। सूर्य और मंगल के छठे भाव में और शनि महाराज के आठवें भाव में होने से स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं के प्रति आपको सावधानी रखनी होगी और खर्चों पर नियंत्रण रखने के लिए प्रयास करने होंगे।

सिंह राशिफल

सिंह राशिफल 2024 के अनुसार, यह साल सिंह जातकों के लिए अनुकूलता लेकर आने वाला है। पूरे वर्ष शनि महाराज आपके सप्तम भाव में विराजमान रहेंगे जिससे आपके वैवाहिक जीवन को मजबूत बनाएंगे और आपके जीवन साथी के व्यक्तित्व में सुधार होगा। वह मजबूत व्यक्तित्व के स्वामी बनेंगे।

इसके अतिरिक्त आपके व्यापार में भी स्थाई वृद्धि होने के योग बनेंगे। आप चाहें तो व्यापार का विस्तार भी कर सकते हैं। लंबी – लंबी यात्राएं इस वर्ष आपको करने का मौका मिलेगा। विदेश जाने के मौके भी मिल सकते हैं। बृहस्पति महाराज वर्ष की शुरुआत में नवम भाव में रहकर आपको सही निर्णय लेने में मदद करेंगे।

धर्म कर्म के कार्यों में आपकी रुचि बढ़ेगी और घर पर ही कार्यक्रमों का आयोजन होगा। आपके पिताजी से आपके संबंध सुधरेंगे। उसके बाद 1 मई को देव गुरु बृहस्पति दशम भाव में जाकर परिवार और काम के बीच स्थितियों को सुधारेंगे। राहु महाराज के पूरे साल अष्टम भाव में बने रहने से आपको स्वास्थ्य का ध्यान रखना पड़ेगा।

कन्या राशि

कन्या राशिफल 2024 के अनुसार, इस वर्ष आपको ग्रहों के गोचर के अनुसार अपने स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पड़ेगी। वर्ष की शुरूआत से ही शनि महाराज आपके छठे भाव में विशेष रूप से विराजमान रहकर आपके आठवें और बारहवें भाव को भी देखेंगे।

इससे आपको स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है लेकिन यही शनिदेव इन समस्याओं से मुक्ति दिलाने में भी मददगार बनेंगे, बस आपको एक संतुलित और अनुशासित जीवन व्यतीत करना होगा और अच्छी दिनचर्या का पालन करना होगा। जीवन में अनुशासन लाने से आपके सभी काम बनने लगेंगे।

शनिदेव की स्थिति नौकरी में अच्छी सफलता दिला सकती है। देव गुरु बृहस्पति वर्ष के पूर्वार्ध में 1 मई तक आपके अष्टम भाव में रहेंगे जिससे धर्म-कर्म के मामले में मन तो खूब लगेगा लेकिन व्यर्थ खर्च भी होंगे और आपके कामों में रुकावटें आ सकती हैं लेकिन 1 मई के बाद यह आपके नवम भाव में चले जाएंगे जिससे सभी कामों में सफलता मिलनी शुरू हो जाएगी।

आपको संतान संबंधी सुखद समाचार भी मिलने की संभावना बनेगी। राहु पूरे वर्ष आपके सप्तम भाव में बने रहेंगे इसलिए आपको व्यापार और निजी जीवन दोनों क्षेत्रों में सावधानी बरतनी होगी।

तुला राशिफल

तुला राशिफल 2024 के अनुसार, तुला राशि के जातकों को इस पूरे वर्ष मेहनत, कार्यकुशलता और इमानदारी पर विश्वास रखना होगा क्योंकि वर्ष की शुरुआत से पूरे वर्ष शनि महाराज आपके पंचम भाव में रहेंगे और वहां से आपके सप्तम, एकादश और द्वितीय भाव पर दृष्टि बनाए रखेंगे।

आप जितना ईमानदारी और मेहनत से काम करेंगे, उतना ही आपका वैवाहिक जीवन और आपका आर्थिक पक्ष मजबूत होगा। देव गुरु बृहस्पति 1 मई तक आपके सप्तम भाव में रहकर प्रथम, तृतीय और एकादश भाव को देखेंगे जिससे आपका स्वास्थ्य सुधरेगा।

आपके व्यापार और निजी संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी तथा आपकी आमदनी अच्छे से बढ़ने लगेगी लेकिन 1 मई को देव गुरु बृहस्पति अष्टम भाव में जाएंगे जिससे खर्चों में बढ़ोतरी होने के योग बनेंगे। हालांकि आपका धर्म-कर्म में मन लगेगा लेकिन खर्च ज्यादा बढ़ने से मानसिक तनाव बढ़ सकता है।

राहु महाराज पूरे महीने आपके छठे भाव में बने रहेंगे इसलिए स्वास्थ्य समस्याएं सामने आएंगी लेकिन वे आती-जाती रहेंगी। खर्चों पर नियंत्रण रखना आपके लिए थोड़ा चुनौती पूर्ण होगा।

वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशिफल 2024 के अनुसार, नया साल 2024 वृश्चिक राशि वालों के लिए नई उम्मीद लेकर आएगा। वर्ष की शुरुआत में शुक्र और बुध आपकी ही राशि में रहकर आपको खुशनुमा बनाएंगे। आपका व्यवहार और चुंबकीय व्यक्तित्व आकर्षण का केंद्र बनेगा।

लोग आपकी ओर खिंचे चले आएंगे। वर्ष की शुरुआत में राशि स्वामी मंगल महाराज दूसरे भाव में सूर्य देव के साथ उपस्थित रहेंगे जिससे आपको आर्थिक तौर पर उन्नति प्राप्त होगी। देव गुरु बृहस्पति 1 मई तक छठे भाव में रहेंगे जिससे स्वास्थ्य समस्याएं और खर्च बढ़ने की स्थिति रहेगी।

हालांकि उसके बाद 1 मई को आपके सप्तम भाव में आकर समस्याओं में कमी करेंगे। वह वैवाहिक जीवन और निजी जीवन को अनुकूल बनाएंगे। राहु महाराज पूरे साल आपके पंचम भाव में बने रहेंगे और आपकी बुद्धि को प्रभावित करेंगे।

जल्दबाजी में आकर कोई भी गलत निर्णय लेने से बचने की कोशिश‌ करें। प्रेम संबंधों में राहु की मौजूदगी आपको और कुछ भी करने वाला बना सकती है।

धनु राशिफल

राशिफल 2024 के अनुसार धनु राशि के जातकों के लिए वर्ष 2024 उम्मीदों से भरा साल रहने वाला है लेकिन वर्ष की शुरुआत में सूर्य और मंगल आपकी राशि में रहकर आपको गर्म दिमाग बनाएंगे। आपको उग्रता में आकर कुछ भी बोलने और कोई भी व्यवहार या निर्णय लेने से बचना चाहिए क्योंकि इससे आपका न केवल व्यापार और बल्कि आपका निजी जीवन भी प्रभावित हो सकता है।

वर्ष की शुरुआत में देव गुरु बृहस्पति महाराज आपके पंचम भाव में विराजमान रहेंगे। आपके प्रेम संबंधों को सुधारेंगे। आपके भाग्य की बढ़ोतरी करेंगे और आपकी आमदनी में भी अच्छी उन्नति देखने को मिलेगी। संतान से संबंधित अच्छे समाचार मिल सकते हैं या संतान हो सकती है। विद्यार्थियों को भी अच्छे परिणाम मिलेंगे।

1 मई के बाद देव गुरु बृहस्पति आपके छठे भाव में चले जाएंगे जिससे स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ सकती हैं और आपको इन सभी क्षेत्रों में, जिनमें बृहस्पति महाराज अच्छे परिणाम दे रहे थे, कुछ उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। शनि महाराज पूरे वर्ष तीसरे भाव में रहकर आपको साहस और पराक्रम देंगे।

यदि आप इस वर्ष अपने आलस्य को छोड़ देंगे तो जीवन में बहुत कुछ प्राप्त कर पाएंगे। राहु महाराज पूरे वर्ष आपके चौथे और केतु महाराज दशम भाव में बने रहेंगे जिससे करियर में उतार-चढ़ाव की स्थिति रहेगी और पारिवारिक संबंधों में भी रस्साकशी की स्थिति बन सकती है।

मकर राशिफल

मकर राशिफल 2024 के अनुसार, साल 2024 मकर राशि वालों के लिए आर्थिक रूप से अनुकूल परिणाम लेकर आने वाला है। आपके राशि स्वामी आपके दूसरे भाव के स्वामी भी हैं। वहीं शनि महाराज दूसरे भाव में पूरे वर्ष बने रहने के कारण आर्थिक रूप से आपको मजबूत बनाते रहेंगे।

आप चुनौतियों से डरेंगे नहीं और उनका डटकर सामना करेंगे। प्रेम संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी। देव गुरु बृहस्पति 1 मई तक चौथे भाव में रहकर पारिवारिक जीवन में खुशियां लेकर आएंगे और करियर को भी सफलता देंगे।

1 मई से आपके पंचम भाव में जाकर संतान संबंधित समाचारों के कारण बन सकते हैं। पूरे वर्ष आपके तीसरे भाव में रहकर आपके जोखिम लेने की प्रवृत्ति को बढ़ाएंगे और आपके व्यापार में भी आपको अच्छी सफलता प्रदान कर सकते हैं। दूसरों के मामलों में हस्तक्षेप करने से बचना आपके लिए सफलता दायक होगा।

कुंभ राशि

कुंभ राशिफल 2024 के अनुसार कुंभ राशि के जातकों के लिए यह वर्ष बहुत कुछ प्रदान करने वाला वर्ष साबित होगा। आपके राशि स्वामी शनि देव आपकी ही राशि में पूरे वर्ष बने रहेंगे। यह आपके लिए हर तरीके से शुभ परिणाम लेकर आएगा। आपके जीवन में अनुशासन बढ़ेगा।

आप हर काम को पूरी लगन और मेहनत से करेंगे जिससे कार्य क्षेत्र में भी अपना अच्छा स्थान बना पाएंगे। आपकी मेहनत आपको अन्य लोगों से आगे रखेगी। देव गुरु बृहस्पति 1 मई तक आपके तीसरे भाव में रहकर आपकी आमदनी में बढ़ोतरी का कारण बनेंगे और आपके वैवाहिक जीवन में भी अनुकूल समय की आहट होगी।

व्यापार में वृद्धि के योग बनेंगे और भाग्य वृद्धि होगी। 1 मई के बाद देव गुरु बृहस्पति चतुर्थ भाव में जाकर पारिवारिक संबंधों को अनुकूल बनाने के लिए आपकी मदद करेंगे।

मीन राशिफल

मीन राशिफल 2024 के अनुसार, मीन राशि के जातकों के लिए वर्ष 2024 अच्छी संभावनाएं लेकर आने वाला है। आपकी राशि के स्वामी देव गुरु बृहस्पति वर्ष की शुरुआत से ही आपके दूसरे भाव में रहेंगे और आपके धन और आपके कुटुंब की रक्षा करेंगे। आपकी वाणी में मिठास बढ़ेगी जिससे आपके रिश्ते मजबूत होंगे।

धन संचित करने में आपको सफलता मिलेगी। केवल इतना ही नहीं, ससुराल पक्ष से भी आपके संबंध बढ़िया होने लगेंगे। बृहस्पति महाराज 1 मई को तीसरे भाव में चले जाएंगे जिससे आपके व्यापार में बढ़ोतरी होगी। वैवाहिक संबंधों में सुधार का योग बनेगा। आपके भाग्य की वृद्धि होगी।

धर्म-कर्म के मामलों में मन लगेगा। शनि महाराज पूरे वर्ष द्वादश भाव में बने रहने से आपको अपने खर्चों पर ध्यान देना होगा क्योंकि कोई न कोई खर्च पूरे वर्ष लगा रहने वाला है। विदेश यात्रा इस वर्ष होने के प्रबल योग हैं इसलिए इसकी तैयारी पूरी करके रखें। राहु महाराज प्रथम भाव में और सप्तम भाव में केतु का गोचर बना रहने से वैवाहिक जीवन में उतार-चढ़ाव की स्थितियां बनती रहेंगी।

दुनिया भर में मनाए जाते हैं 70 से अधिक नववर्ष!

नववर्ष यानी वर्ष का पहला दिन 1 जनवरी को मनाया जाता है। इस दिन के साथ दुनिया के ज्यादातर लोग अपने नए साल की शुरूआत करते हैं। नए साल का आत्मबोध हमारे अंदर नया उत्साह भरता है और नए तरीके से जीवन जीने का संदेश देता है।

हालांकि यह उल्लास और यह उत्साह दुनिया के अलग-अलग कोने में अलग-अलग दिन मनाया जाता है क्योंकि दुनिया में कई कैलेंडर हैं और हर कैलेंडर का नया साल अलग-अलग होता है। एक अनुमान के अनुसार अकेले भारत में ही करीब 50 कैलेंडर हैं जिनमें से बहुत से कैलेंडरों का नया साल अलग दिनों पर होता है।

1 जनवरी को मनाया जाने वाला नववर्ष दरअसल ग्रेगोरियन कैलेंडर पर आधारित है। इसकी शुरूआत रोमन कैलेंडर से हुई है। पारंपरिक रोमन कैलेंडर का नववर्ष 1 मार्च से शुरू होता है।

प्रसिद्ध रोमन सम्राट जूलियस सीजर ने 47 ईसा पूर्व में इस कैलेंडर में परिवर्तन किया और इसमें जुलाई मास जोड़ा। इसके बाद उसके भतीजे के नाम के आधार पर इसमें अगस्त मास जोड़ा गया। दुनिया भर में आज जो कैलेंडर प्रचलित हैं, उसे पोप ग्रेगोरी अष्टम ने 1582 में तैयार किया था। ग्रेगोरी ने इसमें लीप ईयर का प्रावधान किया था।

ईसाइयों का एक अन्य पंथ इस्टर्न आर्थोडक्स चर्च तथा इसके अनुयायी ग्रेगोरियन कैलेंडर को मान्यता न देकर पारंपरिक रोमन कैलेंडर को ही मानते हैं। इस कैलेंडर के अनुसार नया साल 14 जनवरी को मनाया जाता है। इस कैलेंडर की मान्यता के अनुसार जॉर्जिया, रूस, यरूशलम, सर्बिया आदि में 14 जनवरी को नववर्ष मनाया जाता है।

इस्लामिक कैलेंडर

इस्लाम धर्म के कैलेंडर को हिजरी साल के नाम से जाना जाता है । इसका नववर्ष मोहर्रम मास के पहले दिन होता है । हिजरी कैलेंडर कर्बला की लड़ाई के पहले ही निर्धारित कर लिया गया था। मोहर्रम के दसवें दिन को आशूरा के रूप में जाना जाता है ।

इसी दिन पैगम्बर मोहम्मद (स.) के नवासे इमाम हुसैन बगदाद के निकट कर्बला में शहीद हुए थे। हिजरी कैलेंडर के बारे में एक दिलचस्प बात यह है कि इसमें चंद्रमा की घटती-बढ़ती चाल के अनुसार दिनों का संयोजन नहीं किया गया है। लिहाजा इसके महीने हर साल करीब 10 दिन पीछे खिसकते रहते हैं।

अन्य देशों में नववर्ष

भारत के पड़ोसी देश चीन में भी अपना एक अलग कैलेंडर है। तकरीबन सभी पुरानी सभ्यताओं के अनुसार चीन का कैलेंडर भी चंद्रमा की गणना पर आधारित है। इसका नया साल 21 जनवरी से 21 फरवरी के बीच पड़ता है। चीनी महिनों के नाम 12 जानवरों के नाम पर रखे गए हैं।

चीनी ज्योतिष में लोगों की राशियां भी 12 जानवरों के नाम पर होती हैं। लिहाजा यदि किसी की बंदर राशि है और नया वर्ष भी बंदर आ रहा हो तो वह साल उस व्यक्ति के लिए विशेष तौर पर भाग्यशाली माना जाता है।

1 जनवरी को अब नए साल के जश्न के रूप में मनाया जाता है। एक दूसरे को देखा-देखी यह जश्न मनाने वाले शायद ही जानते हों कि दुनिया भर में पूरे 70 नववर्ष मनाए जाते हैं। दिलचस्प बात यह है कि आज भी पूरी दुनिया कैलेंडर प्रणाली पर एकमत नहीं है।

इक्कीसवीं शताब्दी के वैज्ञानिक युग में इंसान अंतरिक्ष में जा पहुंचा, मगर कहीं सूर्य पर आधारित और कहीं चंद्रमा पर आधारित और कहीं तारों की चाल पर धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दुनिया में विभिन्न कैलेंडर प्रणालियां लागू हैं।

यही वजह है कि अकेले भारत में पूरे साल तीस अलग अलग नववर्ष मनाए जाते हैं। दुनिया में सर्वाधिक प्रचलित कैलेंडर ‘ग्रेगोरियन कैलेंडर’ है जिसे पोप ग्रेगरी तेरह ने 24 फरवरी, 1582 को लागू किया था। यह कैलेंडर 15 अक्तूबर 1582 को शुरू हुआ। इसमें अनेक त्रुटियां होने के बावजूद कई प्राचीन कैलेंडरों को दुनिया के विभिन्न हिस्सों में आज भी मान्यता मिली हुई है।

विभिन्न देशों में विभिन्न नववर्ष

जापानी नववर्ष गनतन-साई या’ ओषोगत्सू’ के नाम से भी जाना जाता है। महायान बौद्ध 7 जनवरी, प्राचीन स्कॉट में 11 जनवरी, वेल्स के इवान वैली में नववर्ष 12 जनवरी, सोवियत रूस के रूढ़िवादी चर्चा, आरमेनिया और रोम में नववर्ष 14 जनवरी को होता है। वहीं सेल्टिक, कोरिया, वियतनाम, तिब्बत, लेबनान और चीन में नववर्ष 21 जनवरी को प्रारंभ होता है।

प्राचीन आयरलैंड में नववर्ष 1 फरवरी को मनाया जाता है तो प्राचीन रोम में 1 मार्च को। इसके अतिरिक्त ईरान, प्राचीन रूस तथा भारत में बहाई, तेलुगु तथा जमशेदी (जोरोस्ट्रियन) का नया वर्ष 21 मार्च से शुरू होता है। प्राचीन ब्रिटेन में नववर्ष 25 मार्च को प्रारंभ होता हैं।

प्राचीन फ्रांस में 1 अप्रैल से अपना नया साल प्रारंभ करने की परंपरा थी। यह दिन ‘अप्रैल फूल’ के रूप में भी जाना जाता है। थाईलैंड, बर्मा, श्रीलंका, कम्बोडिया और लाओ के लोग 7 अप्रैल को बौद्ध नववर्ष मनाते हैं।

वहीं कश्मीर के लोग अप्रैल में, भारत में वैसाखी के दिन, दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों बंगलादेश, श्रीलंका, थाईलैंड, कम्बोडिया, नेपाल,बंगाल, श्रीलंका व तमिल क्षेत्रों में नया वर्ष 14 अप्रैल को मनाया जाता है। इसी दिन श्रीलंका का राष्ट्रीय नववर्ष भी मनाया जाता है। बौद्ध धर्म के कुछ अनुयायी बुद्ध पूर्णिमा के दिन 17 अप्रैल को नया साल मनाते हैं।

असम में नववर्ष 15 अप्रैल को, पारसी अपना नववर्ष 22 अप्रैल को, तो बेबीलोनियन नववर्ष 24 अप्रैल से शुरू होता है। प्राचीन ग्रीक में नववर्ष 21 जून को मनाया जाता था। प्राचीन जर्मनी में नया साल 29 जून को मनाने की परंपरा थी और प्राचीन अमेरिका में 1 जुलाई को। इसी प्रकार आरमेनियन कैलेंडर 9 जुलाई से प्रारंभ होता है जबकि म्यांमार का नया साल 21 जुलाई से शुरू होता है।

रक्त (blood) के बारे में रोचक तथ्य!!

blooddropcharacterरक्त हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अवयवों में से एक है। रक्त एक तरल संयोजी ऊतक है जिसमें प्लाज्मा, रक्त कोशिकाएं और प्लेटलेट्स होते हैं।

यह हमारे पूरे शरीर में घूमता हुआ विभिन्न कोशिकाओं और ऊतकों तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुंचाता है।

रक्त से जुड़े कुछ ऐसे अदभुत तथ्यों के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं, जिन्हें आपने शायद ही कभी पढ़ा है। तो यह लीजिये खून से सम्बंधित कुछ बेहद रोचक तथ्य । पसंद आयें तो शेयर ज़रूर करें।

रक्त कोशिकाओं के प्रकार

  • लाल रक्त कोशिकाएं (एरिथ्रोसाइट्स)
  • श्वेत रक्त कोशिकाएं (ल्यूकोसाइट्स)
  • रक्त प्लेटलेट्स (थ्रोम्बोसाइट्स)

रक्त के घटक
रक्त की संरचना में कई कोशिकीय संरचनाएँ होती हैं। रक्त के मुख्य घटक हैं:

  • प्लाज्मा
  • लाल रक्त कोशिकाएं (आरबीसी)
  • श्वेत रक्त कोशिकाएं (डब्ल्यूबीसी)
  • प्लेटलेट्स

रक्त से जुड़े रोचक तथ्य 

  • रक्त एकमात्र तरल संयोजी ऊतक है जो पूरे शरीर में चलता है। यह पोषक तत्वों, ऑक्सीजन, इलेक्ट्रोलाइट्स, प्रोटीन, ग्लूकोज हार्मोन और अन्य चयापचय अपशिष्ट जैसे सभी आवश्यक घटकों के परिवहन के साधन के रूप में भी कार्य करता है।
  • शरीर के कुल वजन का लगभग 7 से 8 प्रतिशत रक्त होता है। रक्त की संरचना में दो मुख्य घटक शामिल हैं – प्लाज्मा और गठित तत्व या कणिकाएं, जिनमें आरबीसी (लाल रक्त कोशिकाएं), डब्ल्यूबीसी (श्वेत रक्त कोशिकाएं) और रक्त प्लेटलेट्स शामिल हैं।
  • आर बी सी शरीर में ऑक्सीजन ले जाने का महत्वपूर्ण काम करती हैं। इनमें हीमोग्लोबिन नामक एक प्रोटीन भी होता है। हीमोग्लोबिन में आयरन होता है। रक्त का लाल रंग हीमोग्लोबिन और ऑक्सीजन के मिलने के कारण ही होता है।
  • ब्लड सेल्स पीले रंग के ब्लड प्लाज्मा में तैरती हैं। ब्लड प्लाज्मा 90 % पानी का बना होता है। साथ ही इसमें कई जरूरी पोषक तत्व, इलेक्ट्रोलाइट, प्रोटीन, ग्लूकोज और हार्मोन्स होते हैं।
  • रेड ब्लड सेल्स ही बोन मैरो को बनाती हैं और लगभग 120 दिनों तक शरीर में घूमती रहती हैं। रेड ब्लड सेल्स ऑक्सीजन को लेकर चलती है और शरीर के विभिन्न अंगों की कोशिकाओं तक पहुंचाने का काम करती है। इसके साथ ही यह कार्बन डाई आक्साइड को खत्म करती है।
  • व्हाइट ब्लड सेल्स का शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान है। ये बैक्टीरिया, वायरस, कैंसर सेल्स, संक्रामक रोगों से बचाने में मददगार हैं।
  • हम इंसानों का खून लाल रंग का होता है, जबकि अन्य प्रजातियों का खून अलग-अलग रंग का होता है और यह मुख्य रूप से श्वसन वर्णक या हीमोग्लोबिन नामक प्रोटीन द्वारा निर्धारित होता है।

interesting-facts-about-blood

  • एक बूंद खून में 10,000 व्हाइट ब्लड सेल्स और 2,50,000 प्लेटलेट्स होती हैं।
  • रक्त मुख्य रूप से आरबीसी-लाल रक्त या एरिथ्रोसाइट्स, सफेद रक्त कोशिकाओं (डब्ल्यूबीसी) या ल्यूकोसाइट्स, रक्त प्लेटलेट्स या थ्रोम्बोसाइट्स और प्लाज्मा से बना होता है जिसमें प्रोटीन, लवण और पानी शामिल होते हैं।
  • डब्ल्यूबीसी -श्वेत रक्त कोशिकाएं, जिन्हें ल्यूकोसाइट्स भी कहा जाता है, एक स्वस्थ प्रतिरक्षा प्रणाली को बनाए रखकर, अंडाशय के भीतर रक्त वाहिकाओं का एक नेटवर्क विकसित करके मानव प्रजनन प्रणाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
  • एक स्वस्थ और वयस्क मानव शरीर में लगभग 1.325 गैलन रक्त होता है। रक्त की एक बूंद में लाखों लाल रक्त कोशिकाएं, हजारों सफेद रक्त कोशिकाएं और लाखों रक्त प्लेटलेट्स होते हैं।
  • जानवरों में पाया जाने वाला रक्त कई प्रकार का हो सकता है, जैसे कि गायों में लगभग 800, कुत्तो में 13 और बिल्लियों में 11 तरह का रक्त पाया जाता हैं। जबकि मनुष्य के शरीर में रक्त केवल 4 तरह (O, A, B, AB) का होता हैं।
  • नवजात के शरीर में करीब 250 मिलीलीटर खून की मात्रा होती है, जो एक कप जितना होता है। बात करें वयस्क की तो उनके शरीर में लगभग 5 लीटर खून पाया जाता है।
  • हर स्वस्थ इंसान रक्तदान कर सकता है। कभी भी एल्कोहॉल करने के 48 घंटों तक रक्तदान न करें। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को रक्तदान नहीं करना चाहिए।
  • शरीर की अन्य विशेषताओं, आंख, बालों की बनावट और त्वचा के रंग की तरह, रक्त समूह भी आनुवंशिक रूप से हमारे माता-पिता से विरासत में मिला है। मानव रक्त के 4 मुख्य रक्त समूह हैं – ओ, ए, बी और एबी और इन्हें सामूहिक रूप से एबीओ रक्त समूह प्रणाली कहा जाता है।
  • इन रक्त समूहों को मुख्य रूप से लाल रक्त कोशिकाओं की सतह पर विरासत में मिले एंटीजेनिक पदार्थों के आधार पर विभेदित किया जाता है।
  • शोध के अनुसार, एबीओ रक्त समूह प्रणाली के परिणामस्वरूप पोषण संबंधी ज़रूरतें अलग-अलग होती हैं और यह व्यक्ति की प्रजनन क्षमता, व्यक्तित्व, तनाव के स्तर आदि को प्रभावित करती है।
  • 1628 में ब्रिटिश चिकित्सक विलियम हार्वे ने रक्त का परिसंचरण किया था। हार्वे ने आँन्ट्वान मॉरेय नाम के एक पागल व्यक्ति को बछड़े का खून चढ़ा दिया था।
  • खून का पहला ट्रांसफर 17वी शताब्दी में किया गया था और इसका पहला उपयोग जानवरों पर किया गया था।
  • आपको यह जानकर हैरानी होगी कि HP प्रिंटर की काली स्याही, मनुष्य के खून से ज़्यादा महंगी होती है।
  • दुनिया का पहला Blood Bank संयुक्त राज्य अमेरिका में 1937 को बनाया गया था।
  • हमारे शरीर में पाए जाने वाला रक्त का 70% भाग शरीर में red blood cell के अंदर मौज़ूद होता है।
  • भारत में हर 5 सेकेंड में किसी न किसी को खून की आवश्यकता होती है। दुनिया ने हर तीसरे व्यक्ति को जीवन में कभी न कभी खून की आवश्यकता पड़ती है।
  • स्वस्थ शरीर में खून 400 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ता है, अगर पूरे दिन की औसत निकाले, तो खून लगभग 96,500 km की दूरी तय करता है।
  • अगर मच्छरों की बात करें, तो केवल सिर्फ मादा मच्छर ही खून चूसती है और वह अपने वजन से 3 गुना ज़्यादा खून पी सकती है। लेकिन नर मच्छर शाकाहारी होते है, ये सिर्फ फूलों का रस ही पीते हैं।
  • बच्चों के शरीर में सिर्फ 1 कप यानी 250 मिलीमीटर खून होता है और एक जवान आदमी में लगभग 5 लीटर खून हो सकता है।
  • हर स्वस्थ इंसान रक्तदान कर सकता है। कभी भी एल्कोहॉल करने के 48 घंटों तक रक्तदान न करें। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को रक्तदान नहीं करना चाहिए।
  • जापान में लोग ब्लड ग्रुप के माध्यम से ही आदमी के व्यक्तित्व का अंदाज़ा लगा लेते है।
  • बोरोरो प्रजाति, ब्राजील में पाई जाती है और इस प्रजाति की खास बात यह है कि यहाँ के सभी लोगों का Blood Group ‘O’ है।
  • जब हम आसमान की तरफ देखते है, तो हमारी आँखो के सामने सफेद-सफेद से डॉट्स घूमने लगते है। ये हमारे white blood cells होते है।