कुत्ते बहुत ही वफादार और दिलचस्प जानवर होते हैं। यहां प्रस्तुत है कुछ कुत्तों की कुछ बहुत ही मजेदार हरकतें जिन्हें देखकर आप हंसी से लोटपोट हो जाएंगे। इस वीडियो में कुत्तों को खुद की ही परछाई से परेशान होकर तरह-तरह की कलाबाजी करते हुए दिखाया गया है और कई जगह उन्हें जान बूझ कर चिढ़ाया जा रहा है जिसके कारण वे अजीबोगरीब हरकतें करते हुए दिख रहे हैं।
आज भी मौजूद है नोएडा में मराठा और अंग्रेजों के बीच हुए युद्ध की निशानी
नोएडा गोल्फ कोर्स वैसे तो गोल्फ को लेकर प्रसिद्ध है लेकिन क्या आपको पता है कि इस गोल्फ कोर्स के मैदान में करीब 200 साल पहले एक युद्ध भी लड़ा गया था ? यह युद्ध ब्रिटिश और मराठा सेनाओं के बीच हुआ था।
युद्ध में मराठाओं की सेना को हार का सामना करना पड़ा था। इस मैदान में ब्रिटिश और मराठा सेनाओं के बीच युद्ध की स्मृति में एक ऐतिहासिक स्मारक भी बनाया गया है।
नोएडा गोल्फ कोर्स की स्थापना प्राधिकरण ने यू.पी. सरकार के सहयोग से की थी। मुख्य गोल्फ कोर्स और कई अभ्यास क्षेत्रों से मिलकर, यहां दी जाने वाली विश्व स्तरीय सुविधाएं कुछ ऐसी हैं, जो देश भर से बड़ी संख्या में खिलाड़ियों को आकर्षित करने का काम करती हैं।

यहां पर एक कॉफी शॉप, कई रेस्तरां और मैदान के साथ-साथ कई और चीजें भी मौजूद हैं। नोएडा का गोल्फ कोर्स शहर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता रहा है। गोल्फ कोर्स नोएडा सैक्टर-43 में मौजूद है। यहां का नजदीकी मैट्रो स्टेशन गोल्फ कोर्स ही हैं।
सितम्बर 1803 में ईस्ट इंडिया कम्पनी की ब्रिटिश सेना ने दिल्ली के भाग्य का फैसला करने के लिए मराठों से भीषण युद्ध लड़ा था। जानकारी के अनुसार, युद्ध के समय दिल्ली मुगल सम्राट शाह आलम की राजधानी हुआ करती थी।
मुगल सम्राट के राज प्रतिनिधि का दायित्व मराठा राजा दौलत राव सिंधिया के हाथों में था। यह युद्ध जनरल जेरार्ड लेक के नेतृत्व में ब्रिटिश सैनिकों और मराठा की सेना के बीच हुआ था।
इस युद्ध के बाद एक और युद्ध 12 दिन बाद महाराष्ट्र के जालना क्षेत्र में हुआ, जिसने सल्तनत के भाग्य का फैसला किया। इन युद्धों को इतिहासकारों ने ब्रिटिश-मराठा युद्ध के रूप में करार दिया है। इन युद्धों से उत्तरी भारत में अंग्रेजों का प्रभुत्व उभरकर सामने आया।
क्या लिखा है स्तम्भ लेख में
1916 में निर्मित गोल्फ कोर्स के स्तम्भ के अभिलेख में लिखा है कि, इस स्थान के पास सितम्बर 1803 को दिल्ली की सल्तनत के लिए भीषण युद्ध हुआ था, जिसमें मराठों की सेना ने ब्रिटिश सेना का जमकर मुकाबला किया था। इस युद्ध में जनरल जेरार्ड लेक की ब्रिटिश सेना को जीत मिली थी।

भारत के तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड वेलेस्ली को लिखे एक पत्र में विजयी ब्रिटिश जनरल लेक ने कहा है कि, युद्ध के लिए मराठों ने यमुना नदी को पार कर लिया था। उन्होंने ब्रिटिश सेना पर इतना जोरदार हमला बोला कि सेना के अधिकारियों और सैनिकों को काफी नुकसान हुआ।
इतिहासकारों के अनुसार, मराठा सेनाएं आंतरिक मतभेद के चलते इस युद्ध को जीत नहीं पाई थीं। इन युद्धों को इतिहासकारों ने ब्रिटिश-मराठा युद्ध के रूप में करार दिया है। इन युद्धों से उत्तरी भारत में अंग्रेजों का प्रभुत्व उभरकर सामने आया।
पंजाब केसरी से साभार
सावधान! तेजी से फैल रहा है कोविड का नया वैरिएंट जेएन.1
भारत में कोरोना के साथ-साथ कोरोना वायरस के सब वैरिएंट JN.1 के भी मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। हाल ही में कोरोना सब वैरिएंट जेएन.1 के छह और मामले सामने आए हैं।
इससे देश में जेएन.1 के मामलों की संख्या बढ़कर 69 हो गई है। देश में संक्रमण के दैनिक मामलों में भी बढ़ोतरी की खबर है। आइए जानते हैं कि नया सब-वैरिएंट कितना चिंताजनक है, और इसके लक्षण व बचाव के उपाय क्या हैं?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह सब-वैरिएंट ओमिक्रॉन के BA.2.86 वैरिएंट का ही रूप है, इसके स्पाइक प्रोटीन में एक अतिरिक्त म्यूटेशन नोट किया गया है।
जेएन.1 वैरिएंट के लक्षण
सीडीसी के मुताबिक जेएन.1 के कारण लोगों में खांसी, सांस की तकलीफ या सांस लेने में कठिनाई, थकान, मांसपेशियों-शरीर में दर्द, सिरदर्द, गले में खराश, नाक बंद या नाक बहने जैसी समस्या देखी जा रही है।

जेएन.1 से बचाव के उपाय
- कोविड 19 महामारी के दौरान अपनाएं जाने वाले सभी सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करें
- मास्क पहनकर ही घर से निकलें।
- भीड़भाड़ वाले इलाकों, व शादी पार्टी में जाने से बचें।
- रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं।
इस मामले में नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वी के पॉल ने पिछले हफ्ते कहा था कि भारत में वैज्ञानिक समुदाय कोरोना वायरस के नए सब वैरिएंट की बारीकी से पड़ताल कर रहा है और राज्यों को परीक्षण बढ़ाने और अपनी निगरानी प्रणालियों को मजबूत करने की जरूरत है ।
अधिकारियों ने कहा था कि भले ही मामलों की संख्या बढ़ रही है और देश में ‘जेएन.1’ सब वैरिएंट का पता चला है, लेकिन ये तत्काल चिंता का कोई कारण नहीं है क्योंकि संक्रमित लोगों में से 92 प्रतिशत लोग घर में रहकर ही उपचार का विकल्प चुन रहे हैं, जिससे पता चलता है कि नए सब वैरिएंट के लक्षण हल्के हैं।
डॉ. वी के पॉल के मुताबिक अस्पताल में भर्ती होने की दर में भी कोई वृद्धि नहीं हुई है और अन्य चिकित्सकीय स्थितियों के कारण अस्पताल में भर्ती होने वालों में कोविड-19 पाया जाना आकस्मिक मामला है।
राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को लिखे एक पत्र में, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव सुधांश पंत ने पिछले सप्ताह कहा था कि आगामी त्योहारी सत्र को देखते हुए महत्वपूर्ण कोविड-19 नियंत्रण और प्रबंधन रणनीतियों पर ध्यान दिया जाए। उन्होंने बीमारी के प्रसार के जोखिम को कम करने के लिए अपेक्षित सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय करने की सलाह दी।
वहीं कोरोना की बात करें तो भारत में बीते 24 घंटे में कोविड-19 के 412 नए मामले दर्ज किए गए और उपचाराधीन मरीजों की संख्या बढ़कर 4,170 हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से मंगलवार को सुबह आठ बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, देश में अब तक कोविड-19 के मामलों की कुल संख्या 4.50 करोड़ है।
देश में बीते 24 घंटे में संक्रमण से तीन लोगों की मौत होने के कारण इस महामारी से मरने वालों की संख्या बढ़कर 5,33,337 हो गई है। मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, बीते 24 घंटे में कर्नाटक में कोविड-19 से तीन मरीजों की मौत हुई है।
स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार, इस बीमारी से उबरने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 4,44,72,153 हो गई है। स्वस्थ होने की राष्ट्रीय दर 98.81 प्रतिशत है, वहीं मृत्यु दर 1.19 प्रतिशत है। मंत्रालय के अनुसार, देश में अभी तक कोविड-19 रोधी टीकाकरण अभियान के तहत 220.67 करोड़ खुराक दी जा चुकी हैं।
विश्व के 10 सर्वाधिक वर्षा वाले स्थान
वर्षा ऋतु जिसमें चारों और सब हरा भरा हो जाता है। यह वह समय होता है जब जीवन जैसे मंद-गतिमय व आनंद का मिला-जुला स्वरुप बन जाता है। गरमा-गर्म चाय-पकौड़ा, हंसी मजाक और बारिश में भीगना सब को भाता है। प्रकृति की लीला कुछ ऐसी है कि कहीं तो साल भर में अत्यधिक वर्षा होती है कहीं पर नाम-मात्र छींटे पड़ते है।
अमेरिका की डेथ वैली में अपने आप खिसकते पत्थरों का क्या है राज़???
दुनिया में कुछ चीजें ऐसी हैं जिनका अभी तक रहस्य ही बना हुआ है। एक ऐसी ही रहस्यमयी जगह डेथ वैली है जो कि पूर्वी कैलिफोर्निया में एक रेगिस्तान में स्थित है। डेथ वैली उत्तरी अमेरिका की सबसे गर्म, सूखी और विचित्र जगह है।
कैलिफोर्निया के डेथवैली की संरचना और तापमान हमेशा से ही सबको चौंकाने वाला रहा है। लेकिन इस जगह की सबसे विचित्र बात यह है कि यहाँ पत्थर अपने आप एक जगह से दूसरी जगह चले जाते हैं। जिन्हें सेलिंग स्टोन्स के नाम से भी जाना जाता है। इस क्षेत्र में कम से कम 320 किलो तक के पत्थरों को अपनी जगह बदलते देखा गया है, ऐसा क्यों होता है? यह अभी तक रहस्य बना हुआ है।
इन पत्थरों का खिसकने के पीछे के रहस्य का पता अभी तक नासा भी नहीं लगा पाई है। यह जगह 1.25 मील पूरब से पश्चिम और 2.5 मील उत्तर से दक्षिण तक समतल फैली हुई है।
इस जगह पर लगभग 100 पत्थर ऐसे हैं जो अपने आप खिसकते रहते हैं लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इन पत्थरों को खिसकते हुए किसी ने भी नहीं देखा है। कई सालों से ये पत्थर अपनी जगह से करीब 300 मीटर दूर तक खिसके मिलते हैं।
खिसकते पत्थरों के पीछे सब के अलग अलग तथ्य हैं.
1972 में इस रहस्य को सुलझाने के लिए वैज्ञानिकों की एक टीम ने इन पत्थरों का सात साल तक अध्ययन किया। वैज्ञानिकों की टीम ने एक 317 किलोग्राम का पत्थर का अध्ययन किया लेकिन अध्ययन के दौरान वह ज़रा भी नहीं हिला। लेकिन कुछ साल बाद जब उसी जगह पर वापस लौटे, तो करीब 1 किलोमीटर दूर मिला।
वैज्ञानिकों ने इस रहस्य का परिणाम यह निकाला कि तेज रफ्तार से चलने वाली हवाओं के कारण पत्थर अपने आप खिसकते हैं। वहीँ दूसरी और कुछ लोगों का मानना है कि यह सब पारलौकिक शक्तियों के कारण होता है। गहन शोध के बाद स्पेन की कम्प्लूटेंस यूनिवर्सिटी के भूवैज्ञानिकों ने इस जगह की मिट्टी में मौजूद माइक्रोब्स को इसका कारण बताया था।
माइक्रोब्स साइनोबैक्टीरिया एक कोशिकीय शैवाल होता हैं, जिनके कारण झील के तल में चिकना पदार्थ और गैस पैदा होती है। जिसके कारण पकड़ बनाने में मुश्किल होती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस चिकने धरातल पर सर्द मौसम में तेज हवा की वजह से यह पत्थर अपनी जगह से खिसक जाते हैं।
इसलिए सजाया जाता है क्रिसमस ट्री, रोचक तथ्य और जानकारी
क्रिसमस ईसाइयों का सबसे बड़ा त्यौहार है। ईसाई समुदाय के लोग इस त्यौहार को बहुत धूमधाम और उल्लास के साथ मनाते हैं। यह त्यौहार हर वर्ष 25 दिसंबर को मनाया जाता है। इसी दिन प्रभु ईसा मसीह या जीसस क्राइस्ट का जन्म हुआ था।
जीसस क्राइस्ट एक महान व्यक्ति थे उन्होंने समाज को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने दुनिया के लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया था। इन्हें ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है।
उस समय के शासकों को जीसस का संदेश पसंद नहीं था। उन्होंने जीसस को सूली पर लटका कर मार डाला था। ऐसी मान्यता है कि जीसस फिर से जी उठे थेl
क्रिसमस के त्यौहार मेँ दिन ईसाई लोग अपने घर को भली-भांति सजाते हैं। क्रिसमस की तैयारियां पहले से ही होने लगती हैं।
क्रिसमस पर लगभग एक सप्ताह तक छुट्टी रहती है। बाजारों की रौनक बढ़ जाती है। घर और बाजार रंगीन रोशनियों से जगमगा उठते हैं।
क्रिसमस पर प्रार्थनाएं
क्रिसमस पर चर्च में विशेष प्रार्थनाएं होती हैं। लोग अपने रिश्तेदारों एवं मित्रों से मिलने उनके घर जाते हैं। सभी एक-दूसरे को उपहार देते हैं।
आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। इसकी विशेष सज्जा की जाती है। इस त्योहार में केक का विशेष महत्व है। मीठे, मनमोहन केक काटकर खिलाने का रिवाज बहुत पुराना है। लोग एक-दूसरे को केक खिलाकर पर्व की बधाई देते हैं।
सांताक्लाज का रूप धरकर व्यक्ति बच्चों को टॉफियां-उपहार आदि बांटता है। ऐसा कहा जाता है कि सांता-क्लाज स्वर्ग से आता है और लोगों को मनचाही चीजें उपहार के तौर पर देकर जाता है।
क्यों सजाते हैं क्रिसमस ट्री
क्रिसमस पर खास तरह का वृक्ष सजाया जाता है जिसे क्रिसमस ट्री कहते हैं। यह वृक्ष सदाबहार डगलस, बालसम या फर का होता है। इस पर रंग-बिरंगी लाइट्स लगाई जाती हैं, घंटियां बांधी जाती हैं, हार-फूलों से और अन्य सुंदर चीजों से सजाया जाता है।
इस ट्री के संबंध में कहा जाता है कि जिन घरों में ये पेड़ होता है वहां नकारात्मकता नहीं रहती है।
मान्यता है कि इस वृक्ष को सजाने की परंपरा जर्मनी से शुरू हुई थी। जब ईसा मसीह का जन्म हुआ तो देवताओं ने उनके माता-पिता को बधाई दी थी। इसके लिए देवताओं ने एक सदाबहार फर को सितारों से सजाया था।
उसी दिन से हर साल सदाबहार फर के पेड़ को क्रिसमस ट्री के प्रतीक के रूप में सजाते हैं। इसकी शुरुआत करने वाला पहला व्यक्ति बोनिफेंस टुयो नामक एक अंग्रेज धर्म प्रचारक था।
क्रिसमस ट्री के बारे मेँ तथ्य
- क्रिसमस ट्री मुख्य द्वार के दाहिनी ओर रखना चाहिए। इसकी सजावट में उन चीजों का उपयोग करना चाहिए जो हमें पसंद हैं। इससे हमारे जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है।
- इंग्लैंड में किसी के जन्मदिन, विवाह या किसी की मृत्यु पर क्रिसमस ट्री लगाने की परंपरा है। ये पेड़ लगाते समय सुखद जीवन की कामना की जाती है।
- क्रिसमस ट्री के संबंध में मान्यता प्रचलित है कि ये वृक्ष आदम के बाग में भी लगा था। उस समय हव्वा ने इसका फल तोड़ लिया था। जबकि परमेश्वर ने इस वृक्ष के फल तोड़ने के लिए मना किया था। इसके बाद इस पेड़ की पत्तियां सिकुड़ गई और नुकली हो गईं और इसकी वृद्धि रुक गई। जब ईसा मसीन का जन्म हुआ तो ये वृक्ष फिर से बढ़ने लगा।
- 16वीं सदी में जर्मनी में जब भी आदम और हव्वा का नाटक होता था, तब फर के वृक्ष लगाए जाते थे। स्टेज पर पिरामिड भी रखा जाता था और सितारा लगाया जाता था। समय के साथ पिरामिड और फर का वृक्ष एक हो गए और इस वृक्ष का नाम क्रिसमस ट्री पड़ गया।
जानिए क्या सिखाता है हमें क्रिसमस
क्रिसमस दुनियाभर में उल्लास के साथ मनाया जाता है। खासतौर पर बच्चे इस फेस्टिवल का बहुत आनंद लेते हैं क्योंकि यह बच्चों का मनपसंद त्यौहार होता है। और हो भी क्यों ना, इस दिन बच्चों को ढेर सारे गिफ्ट जो मिलते हैं।
यही नहीं कैंडी, चॉकलेट, आइसक्रीम और भी ढेर सारी चीजें भी खाने को मिलती हैं। आज इस पोस्ट में हम आपको क्रिसमस में छिपी कुछ शिक्षाएं और सही मायनों के बारे में बताने जा रहे हैं, तो चलिए जानते हैं:-
खुश रहिए
सबसे पहले तो आप यह समझ लीजिए कि क्रिसमस आपको बताता है कि आप हर हाल में खुश रहें। अपने पैरेंट्स की खुशी के लिए ऐसे काम करें ताकि उनकी उम्मीदों को ठेस न पहुंचे।
प्रेम बांटिए
क्रिसमस पर आप जी भरकर आनंद लें, लेकिन अपनों के प्रति आभार भी व्यक्त करें। अपने आसपास हर व्यक्ति के साथ प्यार बांटें।
हो सकता है कुछ बच्चे किसी कारणवश यह फेस्टिवल नहीं मना पा रहे हों, उन बच्चों के प्रति व्यक्त किया गया आपका प्रेम उन्हें खुशी दे सकता है।
मिल बांटकर खाइए
हो सकता है आपको उपहार में कुछ न कुछ मिला हो, लेकिन बाहर बहुत से ऐसे भी बच्चे मिलेंगे जिनमें से कुछ के माता-पिता नहीं होंगे या कुछ के पैरेंट्स उन्हें कुछ दिलाने में समर्थ नहीं होंगें। अगर आप अपने इस बार के तोहफे उन बच्चों के साथ शेयर करेंगे तो वे बहुत खुश हो जाएंगे।
फैमिली वैल्यू जानिए
आप बच्चे अकसर मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स में इतना व्यस्त रहते हैं कि अपने परिवार के साथ समय नहीं बिता पाते।
अगर आप उनके साथ समय नहीं बिताएंगे तो फैमिली वैल्यू को नहीं जानेंगे और परिवार के साथ आपकी बॉन्डिंग उतनी मजबूत नहीं हो पाएगी, इसलिए एक नियम बना लें कि क्रिसमस की रात इलेक्ट्रॉनिक चीजों का प्रयोग नहीं करेंगे।
इन सबके अलावा और भी बहुत-सी बातें हैं जो क्रिसमस से सीख सकते हैं जैसे जिद न करना, सब्र रखना, सबके साथ मिलकर रहना आदि। क्रिसमस हमें यही सब तो सिखाता है।
सीखें टीम भावना
क्रिसमस पर अगर आपके माता-पिता आपके लिए पार्टी ऑर्गनाइज कर रहे हैं तो आपके घर में बहुत सारे काम भी होंगे। आप खाना बनाने से लेकर साज-सजावट करने में थोड़ी बहुत मदद कर सकते हैं। इससे आपमें दसरों की मदद करने और टीम की भावना आएगी।
वॉलेंटियर बनिए
अगर आपके आसपास कोई दान – दया का कार्य चल रहा है और आप चाहते हैं, उनकी हेल्प करें तो अपने माता-पिता से
सहयोग मांगें।
दूसरों का सम्मान करिए
आपको अपने से बड़ों का सम्मान करना चाहिए और हर व्यक्ति के साथ नम्र भाव से व्यवहार करना चाहिए। आप लोगों से दयालुता का भाव सीखें, इसलिए क्रिसमस की शाम आप एक अच्छा व्यक्ति बनने का संकल्प लें और दयालुता जैसे भाव अपने अंदर भरने की कोशिश करें।
ये हैं क्रिसमस पर बनाए गए अनोखे ‘वर्ल्ड रिकॉर्ड’!!
क्रिसमस या बड़ा दिन ईसा मसीह या यीशु के जन्म की खुशी में मनाया जाने वाला पर्व है। यह हर साल 25 दिसंबर को मनाया जाता है। यह एकमात्र ऐसा फेस्टिवल है, जब पूरे विश्व में एक साथ छुट्टी होती है।
क्रिसमस से 12 दिन के उत्सव क्रिसमसटाइड की भी शुरुआत होती है। आज इस पोस्ट में हम आपको क्रिसमस पर बने कुछ अनोखे रिकॉर्ड्स के बारे में बताने जा रहे हैं तो चलिए जानते हैं:-
सबसे महंगा क्रिसमस ट्री

स्पेन के केम्पिस्की होटल में साल 2019 में अब तक का सबसे महंगा क्रिसमस ट्री सजाया गया था। इसको डायमंड्स, डिजाइनर ज्वैलरी और कीमती पत्थरों से सजाया गया था।
इसकी कीमत करीब 106 करोड़ रुपए आंकी गई थी। इसे सफेद, काले, गुलाबी और लाल रंग के हीरों से सजाया गया था। इसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल किया गया है।
इससे पहले अबु धाबी के ‘द एमिरेट्स पैलेस‘ में 2010 में बने क्रिसमस ट्री को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दुनिया के सबसे महंगे क्रिसमस ट्री के रूप में शामिल किया गया था।
इस ट्री की कीमत करीब 78.70 करोड़ रुपए थी। इसको नेकलेस, ब्रेसलेट और कीमती घड़ियों से सजाया गया था। इसे सजाने के लिए हीरे, मोती, पन्ना, नीलम जैसे कीमती पत्थरों का इस्तेमाल किया गया था।
लगभग 40 फीट लम्बे इस पेड़ में सोने और चांदी से बने तीर, बॉल और सफेद लाइटें लगाई गई थीं।
सबसे बड़ा क्रिसमस-मोजा

दुनिया का सबसे बड़ा क्रिसमस-मोजा (Christmas Stocking) अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में दिसंबर 2015 में बनाया गया था।
इसकी लंबाई लगभग 43.43 मीटर और चौड़ाई करीब 22.71 मीटर थी। इसे अमेरिका के लोगों द्वारा भेजे गए 1100 से अधिक बुने हुए और क्रोशिए से बुने कंबल से बनाया गया था।
सबसे बड़ा मानव क्रिसमस ट्री

साल 2015 में केरल के चेंगन्नूर गांव में दुनिया का सबसे बड़ा मानव क्रिसमस-ट्री बनाया गया था, जिसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी स्थान मिला था।
इसमें लगभग 4030 प्रतिभागी शामिल हुए थे। क्रिसमस ट्री को बनाने में ज्यादातर चेंगन्नूर गांव के स्कूली बच्चे शामिल थे।
अंतरिक्ष में जिंगल बेल्स

जिंगल बेल्स अंतरिक्ष में गाया गया पहला गीत है। यह 16 दिसंबर 1965 को अंतरिक्ष यात्रियों टॉम स्टैफोर्ड और वैली शिर्रा द्वारा गाया गया था। दुनियाभर में सबसे ज्यादा लोकप्रिय कैरोल गीत (Carol song) यानी आनंद का गीत जिंगल बेल्स है।
प्लास्टिक बोतलों से बना क्रिसमस-ट्री

साल 2019 में उत्तरी लेबनान के चेक्का गांव में लगभग 1,20,000 प्लास्टिक की बोतलों से क्रिसमस ट्री तैयार किया गया था। इस ट्री की लम्बाई करीब 28.5 मीटर थी और गांववालों ने इसे 20 दिन में तैयार किया था।
यह प्लास्टिक बोतलों से बना दुनिया का सबसे विशाल क्रिसमस-ट्री है, जिसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी जगह मिली थी।
साल 2011 में लिथुआनिया के शहर काउनस के लोग भी प्लास्टिक की बोतलों का इस्तेमाल कर क्रिसमस-ट्री बना चुके हैं।
इस ट्री को बनाने में लगभग 40,000 प्लास्टिक की बोतलों का उपयोग हुआ था। यह प्लास्टिक की बोतलों से बने सबसे बड़े क्रिसमस-ट्री के तौर पर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवा चुका है।
‘रामानुजन’ की याद में मनाया जाता है ‘राष्ट्रीय गणित दिवस’
भारत में 22 दिसम्बर का दिन बेहद गौरवशाली है, जिसे ‘राष्ट्रीय गणित दिवस‘ के तौर पर मनाया जाता है। 1887 में इसी तारीख को महान भारतीय गणितज्ञ श्रीनिवास अयंगर रामानुजन का जन्म कोयंबतूर के ईरोड गांव के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था।
भारत सरकार ने उनके जीवन की उपलब्धियों को सम्मान देने के लिए 22 दिसम्बर यानी उनकी जयंती को ‘राष्ट्रीय गणित दिवस’ घोषित किया था।
आधुनिक काल के देश-दुनिया के महान गणित विचारकों में से एक, उन्होंने अपने जीवनकाल में गणित के विश्लेषण एवं संख्या सिद्धांत के क्षेत्रों में विस्तृत योगदान दिया।
बचपन से ही उनका ज्यादातर समय गणित पढ़ने और उसका अभ्यास करने में बीतता था, जिससे अक्सर वह अन्य विषयों में कम अंक पाते थे।

मात्र 12 साल की उम्र में रामानुजन ने ‘त्रिकोणमिति‘ (ट्रिग्नोमैट्री ) में महारत पा ली थी और बिना किसी की सहायता के स्वयं कई ‘प्रमेय‘ यानी थ्योरम्स भी विकसित की थीं।
1912 में घर पर आर्थिक संकट के चलते उन्होंने मद्रास पोर्ट ट्रस्ट में बतौर क्लर्क नौकरी कर ली। जहां उनके गणित कौशल के मुरीद हुए एक अंग्रेज सहकर्मी ने रामानुजन को ट्रिनिटी कॉलेज, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के प्रोफैसर जी. एच. हार्डी के पास गणित पढ़ने के लिए भेजा ।
1917 में उन्हें लंदन मैथेमैटिकल सोसायटी के लिए चुना गया जिसके बाद उनकी ख्याति विश्व भर में फैल गई। रामानुजन ने बिना किसी सहायता के हजारों रिजल्ट्स इक्वेशन के रूप में संकलित किए। उन्होंने ‘ डाइवरजेंट सीरीज ‘ पर अपना सिद्धांत भी दिया।
1918 में रामानुजन को ‘ एलीप्टिक फंक्शंस‘ और संख्याओं के सिद्धांत पर अपने शोध के लिए रॉयल सोसायटी का सबसे कम आयु का फैलो चुना गया। 1918 अक्तूबर में ही वह ट्रिनिटी कॉलेज के फैलो चुने जाने वाले पहले भारतीय बने ।
इसके बाद रामानुजन 1919 में भारत लौट आए लेकिन 32 वर्ष की अल्प आयु में ही 26 अप्रैल, 1920 को उनका निधन हो गया। रामानुजन की जीवनी ‘द मैन हू न्यू इंफिनिटी’ 1991 में प्रकाशित हुई और 2015 में इसी नाम से फिल्म रिलीज हुई थी। रामानुजन के बनाए हुए ढेरों ऐसे थ्योरम्स हैं, जो आज भी किसी पहेली से कम नहीं।
क्रिसमस के बारे में 18 विचित्र और रोचक तथ्य!
क्या आप जानते हैं कि पहले सांता क्लॉज को बच्चों को डराने के लिए एक सख्त मिजाज शख्सियत के तौर पर प्रयोग किया जाता था?
क्या आप जानते हैं कि सन 2010 में कोलम्बियाई सरकार ने क्रिसमस पर एक कैम्पेन चला कर 331 आतंकवादियों को आतंक का रास्ता छोड़ने पर मजबूर कर दिया?
जी हाँ, क्रिसमस से जुड़े कुछ ऐसे ही कुछ विचित्र और रोचक तथ्य हम आपको इस पोस्ट में बताने जा रहे हैं, तो चलिए शुरू करते हैं।





















