अनोखी प्रेम कहानी एक शख़्स ने की अपने तकिये से शादी

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प्यार में लोग क्या कुछ नहीं करते। हर दिन किसी ना किसी की प्रेम कहानी सुनने को मिलती है। क्या कोई अपने तकिये से शादी कर सकता है?  लेकिन यहां तो एक शख़्स को अपने तकिये से इतना प्यार हो गया कि उसने तकिये से ही शादी कर ली।

दक्षिण कोरिया में Lee Jin Gyu नामक शख़्स ने तकिया से शादी की, और मीडिया में ख़ूब सुर्ख़ियां बटोरीं। इस प्रेम कहानी के हीरो Lee Jin Gyu के अनुसार, वो Fate Testarossa (तकिया) से बेहद  प्यार करते हैं और इसीलिए उन्होंने उससे शादी करने का फै़सला लिया।

ये अनोखी शादी पूरे रीति-रिवाज़ और धूम-धाम से की गई। यही नहीं, शादी से पहले Lee, Fate Testarossa के साथ कई जगह डेट पर भी जा चुके हैं, जिस दौरान उन्हें महसूस हुआ कि उन्हें Fate से शादी कर लेनी चाहिए।

कुछ लोगों ने इस विवाह को संदेह की नज़रों से देखा, तो कुछ लोगों ने इसे पब्लिसिटी स्टंट बताया, लेकिन Lee को ज़माने की से कोई फ़र्क नहीं पड़ता। Fate Testarossa, Mahou Shoujo Lyrical Nanoha नामक सीरिज़ का एक Anime कैरेक्टर है, जिसे तकिये में देखा सकता जा सकता है।

ख़ैर, जब Lee और Fate राज़ी तो क्या करेगा काजी।

जूनागढ़ किला: तपते रेगिस्तान में सर्दी का माहौल

जूनागढ़ किला: तपते रेगिस्तान में सर्दी का माहौल

जूनागढ़ किला बीकानेर के सबसे लोकप्रिय आकर्षण के बीच में गिना जाता है। इस किले को वास्तव में चिंतामणि किले और बीकानेर किले – Bikaner Fort के नाम से जाना जाता है और 20 वी शताब्दी के प्रारंभ में इसका नाम बदलकर जूनागढ़ रखा गया था क्योकि 20 वी शताब्दी में किले में रहने वाला परिवार लालगढ़ महल में स्थानांतरित हुआ था। महल की ऊंचाई पर पहुंचते ही अचानक ठंडी हवा के झकोरे आपको तरोताजा कर देते हैं, एक बेहद सुखद एहसास।

यह दुर्गम किला राजा राय सिंह द्वारा वर्ष 1593 में बनाया गया था।यह किला अनूप महल, गंगा निवास, जैसे कई खूबसूरत महल है जैसे कि चंद्र महल, फूल महल, करण महल और शीश महल अदि महलों से घिरा हुआ है। अनूप महल सोने की पत्ती चित्रों के लिए प्रसिद्ध है। चन्द्र महल चूने के प्लास्टर पर किये जाने वाले उत्तम चित्रों से सजा हुआ है।करण महल का निर्माण मुगल बादशाह औरंगजेब के द्वारा बीकानेर के राजाओं के विजय को मनाने के लिए किया गया था।

इन महलों का निर्माण लाल बलुआ पत्थर से हुआ है जो कि दुलमेरा के नाम से भी जाना जाता है।किले की 986 लंबी दीवारें, 37 गढ़ है और दो प्रवेश द्वार है।पर्यटकों के मुख्य प्रवेश द्वार, करण किले के पोल पर हैं। यहाँ किले के अंदर एक मंदिर स्थित है।यह देवी – देवताओं की पूजा के लिए बीकानेर के शाही परिवारों द्वारा इस्तेमाल किया गया था।दरबार हॉल, गज मंदिर, और सूरज पोल किले के अन्य प्रसिद्ध आकर्षण हैं।

महल में पहुंचकर वाकई लगता है, जैसे आप आसमान के किसी बादल पर आ गए हों। नीले रंग के बादलों से सजी दीवारें बरखा की फुहारों का अहसास दिलाती हैं। यहां बहने वाली ताजा हवा पर्यटकों की सारी थकान छू कर देती है।

इस शानदार महल की स्थापत्य कला अद्भुत है। महल की दीवारों पर प्राकृतिक रंगों से शानदार पेंटिंग की गई है। कई सदियां गुजर जाने के बाद भी इन रं तरसतेगों की ताजगी और खूबसूरती दिल से महसूस की जा सकती है। महल की पेंटिंग्स बारिश के मौसम में राधा और कृष्ण के प्रेम की अधीरता और पूर्णता को एक साथ बयान करने में सक्षम है।
इस महल में राजा अपनी रानी के साथ खास समय बिताते थे। यहां के 5 शताब्दी से अधिक प्राचीन बीकानेर के जूनागढ़ किले को सर्वश्रेष्ठ दुर्ग मानते हुए अमेरिका की प्रतिष्ठित ट्रेवल एजेंसी ‘ट्रिप एडवाइजर’ ने हाल ही में ‘सर्टिफिकेट ऑफ एक्सीलेंस-2015’ सम्मान से सम्मानित किया है। पर्यटन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार जूनागढ़ को सम्मान मिलने पर बीकानेर ही नहीं, राजस्थान व भारत का गौरव बढ़ा है।
बीकानेर के 6ठे शासक राजा रायसिंह ने नया दुर्ग चिंतामणि (वर्तमान जूनागढ़) को ईस्वी सन् 1589-1593 के बीच बनवाया। पूर्व में बीकानेर रियासत के राजाओं का बीकानेर में ही प्रवास रहता था। बीकानेर रियासत के अब तक हुए 24 राजाओं में से ज्यादातर सभी राजाओं ने इसके विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। जूनागढ़ किला बीकानेर का एक बड़ा आकर्षण है।
इतिहास इस पूरे किले से बहुत गहरी जड़ों तक जुड़ा है इसलिए सैलानी इसकी ओर बहुत आकर्षित होते हैं। यह किला पूरी तरह से थार रेगिस्तान के लाल बलुआ पत्थरों से बना है। हालांकि इसके भीतर संगमरमर का काम किया गया है। इस किले में देखने लायक कई शानदार चीजें हैं। यहां राजा की समृद्ध विरासत के साथ उनकी कई हवेलियां और कई मंदिर भी हैं।

 

इस देश में होती है चुड़ैल की पूजा

इस देश में होती है चुड़ैल की पूजा

आज हम आपको एक ऐसा रहस्य बताने जा रहे हैं जो शायद आपने पहले कभी नहीं सुना होगा। आपको देवी-देवतियां की पूजा के बारे में तो पता ही होगा, लेकिन क्या आपको पता है कि मैक्सिको में देवी की नहीं बलकि, एक चुड़ैल की पूजा की जाती है। मैक्सिको में रहने वाले लोग इसको मृत्यु की देवी ‘सांता मुएर्ते’ से पुकारते हैं।

इन देशों में हो रही है चुड़ैल की मान्यता

आपको बता दें कि जहां पर एक कंकाल को सजा कर मृत्यु देवी की पूजा की जाती है। अब तो इस माता में विश्वास रखने वालों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। इसकी मान्यता मैक्सिको के अलावा, अब मध्य अमेरिका तथा कोलम्बिया में भी होने लग गई हैं। लोगों का यह विश्वास है कि मौत की देवी उनको बीमारी तथा दुःख से सुरक्षत करती है।

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मौत की देवी का संबंध पुरानी परम्परा से

कुछ लोगों का मानना है कि मैक्सिको में ‘सांता मुएर्ते’ को पूजने का संबंध वहां की परम्परा से है। उपनिवेशी काल में स्पेन द्वारा इस देश पर कब्ज़ा कर लेने के साथ यहां कैथोलिक धर्म का आगमन हुआ था। फिर भी गुप्त रूप से कई लोग इस मौत की देवी की पूजा करते रहे।

 सार्वजनिक रूप से मानने लगे लोग

जहां पहले लोग मौत की देवी के अनुयायी होने की बात को खुल कर स्वीकार नहीं करते थे, लेकिन अब वह इसे सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने लगे हैं। कुछ स्थलों पर इससे जुड़े प्रार्थना स्थल भी खुल गए हैं।

लोकप्रिय प्रार्थना स्थल

एक महिला डोना कुएर्ता ने अपने घर में एक प्रार्थना स्थल बनाया है, जहां देश ही नहीं विदेशों से भी मृत्यु की देवी के अनुयायी आने लगे हैं। ऐसे प्रार्थना स्थलों में आमतौर पर कंकाल को सजा कर उसकी पूजा की जाती है। माना जाता है मैक्सिको में यह मृत्यु के देवता को समर्पित प्रथम सार्वजनिक प्रार्थना स्थल है, इसलिए इसकी लोकप्रियता सबसे ज्यादा है।

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मैगज़ीन के कवर पर इस अदाकारा को देख कर ‘एंग्री यंग मैन’ को हुआ उनसे प्यार

हिन्दी सिनेमा में चार दशकों से ज्यादा का वक्त बिता चुके सुपरस्टार अमिताभ बच्चन को उनकी फिल्मों से ‘एंग्री यंग मैन’ की उपाधि प्राप्त है। 1970 के दशक के दौरान उन्होंने बड़ी लोकप्रियता प्राप्त की और तब से भारतीय सिनेमा के इतिहास में सबसे प्रमुख व्यक्तित्व बन गए।

एंग्री यंगमैन, शहंशाह, मेगास्टार, बिग बी, सदी के महानायक, स्टार ऑफ द मिलेनियम और ना जाने ऐसे ही कितने नामों से जाने जाते हैं अमिताभ बच्चन। आइए जानते है उनके जन्म दिन पर कुछ रोचक बातें:

  • उनका का जन्म 11 अक्टूबर, 1942 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद जिले में हुआ था। उनके पिता का नाम हरिवंश राय बच्चन था। उनके पिता हिंदी जगत के मशहूर कवि रहे हैं। उनकी मां का नाम तेजी बच्चन था। उनके एक छोटे भाई भी हैं जिनका नाम अजिताभ है।
  • अमिताभ बच्चन शेरवुड कॉलेज, नैनीताल के छात्र रहे हैं। इसके बाद की पढ़ाई उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोरीमल कॉलेज से की थी। पढ़ाई में भी वे काफी अव्‍वल थे और कक्षा के अच्‍छे छात्रों में उनकी गिनती होती थी।
  • अमिताभ बच्चन की शादी जया बच्चन से हुई जिनसे उन्हें दो बच्चे हैं। अभिषेक बच्चन उनके सुपुत्र हैं और श्वेता नंदा उनकी सुपुत्री हैं।
  • उनका कहना है कि उनको पहली नज़र में जया से प्यार हो गया था। उन्होंने जया भादुड़ी को पहली बार मैगज़ीन के कवर पर देखा था। अमिताभ की नज़र एक मैगज़ीन कवर पर पड़ी, जिसमें जया नज़र आ रही थीं।
  • अमिताभ अपने लिए हमेशा से एक ऐसा जीवनसाथी चाहते थे जो ट्रडिशनल होने के साथ-साथ मॉडर्न भी हो और जया उन्हें अपने लिए बिल्कुल फिट नज़र आईं।
  • अपने शुरुआती दिनों में अमिताभ बच्चन एक शिपिंग कंपनी के लिए काम किया करते थे। शिपिंग कंपनी में काम करने के दौरान उन्हें तनख्वाह के रूप में ₹800 प्रति महीने मिलते थे।
  • अमिताभ बच्चन दाएं और बाएं, दोनों हाथों से लिख लेते हैं।
  • खाने में उनको को आलू-पूड़ी, पकौड़े और गुलाब-जामुन पसंद है।
  • अमिताभ बच्चन कभी भी गुस्सा नहीं होते। वो तभी गुस्सा होते है जब उन्हें फिल्मों में गुस्सा होने को कहा जाता है।
  • वह एशिया के पहले अभिनेता थे, जिनका लंदन में मोम का पुतला बना था।
  • बचपन के दिनों में अमिताभ बच्चन को एक सांड ने बड़ी जोर की टक्कर मारी थी। जिसकी वजह से उनके सिर में गहरी चोट लगी थी और उन्हें उस वक्त कई टांके लगवाने पड़े थे।
  • कौन बनेगा करोड़पति ने लोगों को तो पैसा जीतने का मौका दिया ही, अमिताभ को भी इस शो ने लाइफलाइन दी। अमिताभ की कंपनी एबीसीएल पर करीब 90 करोड़ का कर्ज था। अमिताभ इस शो को शायद ही कभी हाथ लगाते अगर उन्हें कर्ज चुकाने की चिंता न होती।
  • 4 नेशनल फिल्म अवॉर्ड, 15 फिल्मफेयर अवॉर्ड, पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित अमिताभ बच्चन हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय हस्ती हैं और उनकी विश्वभर में भी जबरदस्त फैन फॉलोइंग है।

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पोवेग्लिया आइलैंड एक ऐसी जगह जहां से आज तक कोई वापिस नहीं लौटा

दुनिया के ऐसे बहुत से स्थान हैं को खतरों से भरे हुए हैं। कई जगह बेहद जहरीले बेशुमार सांप हैं तो कई सक्रिय ज्वालामुखी वाले स्थान हैं। यानि कुछ ऐसे स्थान जहां जाना और मौत को बुलावा देना एक ही बात है।

ऐसी ही एक रहस्यमयी जगह है पोवेग्लिया। इटली में स्थित पोवेग्लिया आइलैंड दशकों से वीरान सुनसान टापू है जिसके बारे में इटली सरकार का कहना है:

प्रतिबंधित होने के बाद भी अगर कोई शख्स आइलैंड पर जाता है, तो वह उसकी खुद की जिम्मेदारी होगी

पोवेग्लिया आइलैंड है वेनीसिया झील के उत्तर में बसा हुआ था जो अब वीरान है। कहा जाता है कि पोवेग्लिया आइलैंड पर प्लेग के मरीजों को मरने के लिए छोड़ दिया जाता था. इस आइलैंड पर 1 लाख 60 हज़ार लोगों को उनके अंतिम समय पर यहां छोड़ा गया था. यहां पर मरीजों को मौत से पहले उनको रूह कंपा देने वाला टौर्चर भी दिया जाता था. जो लोग मर जाते थे, उन्हें वहीं पर दफ़ना दिया जाता था.

मानव अस्थियों से बनी हुई है मिट्टी

आपको बता दें कि यहां जाने पर अब सरकार ने रोक लगा दी गई है, क्योंकि यह आइलैंड बहुत खतरनाक है. इस आइसलैंड की 50 प्रतिशत मिट्टी मानव अस्थियों से बनी हुई है. इस आइलैंड पर इतनी मौते हो चुकी हैं की, मछुआरे जब मछली पकड़ने जाते हैं, तो उनके जाल में मछली की जगह इंसानों की हड्डियां आ जाती हैं.

कहा जाता है कि पोवेग्लिया आइलैंड पर प्लेग के मरीजों को मरने के लिए छोड़ दिया जाता था. इस आइलैंड पर 1 लाख 60 हज़ार लोगों को उनके अंतिम समय पर यहां छोड़ा गया था. यहां पर मरीजों को मौत से पहले उनको रूह कंपा देने वाला टौर्चर भी दिया जाता था. ऐसे में जो लोग मर जाते थे, उन्हें वहीं पर दफ़ना दिया जाता था.

जिंदा जला दिया गया था लोगों को

आपको बता दें कि जब यहां मरीजों की संख्या बढ़ गई थी, तो करीब लगभग 1 लाख 60 हज़ार बीमार लोगों को यहां जिंदा जला दिया गया था. इसके बाद ये आइलैंड पूरी तरह से वीरान हो गया.

मरीजों को दिखने लगे भूत

इस आईलैंड पर 1992 में एक मेंटल अस्पताल बनाया गया था, लेकिन कुछ समय बाद यहां के मरीजों को प्लेग के मरीजों के भूत दिखाई देने लगे और इसी डर में यह अस्पताल भी बंद कर दिया गया था.

‘गॉड ऑफ सन’ के नाम से मशहूर पिरामिड

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पिरामिड न सिर्फ लोगों के आकर्षण के केंद्र हैं, बल्कि ये आश्चर्यों से भरे हुए हैं। पिरामिड का नाम आते ही सबसे पहले मिस्र की तस्वीर सामने आती है, लेकिन क्या आप जानते है कि मिस्र के अलावा भी इस दुनिया में कुछ जगह ऐसी हैं, जहां पर विशालकाय पिरामिड निर्मित हैं। मेक्सिको में गॉड ऑफ सन नाम का पिरामिड है।

यह फोटो मेक्सिको स्थिति प्राचीन शहर तेओतिवाकन का है, यानी मान्यताओं के अनुसार ऐसी जगह जहां देवताओं की उत्पत्ति हुई। इसे इटली के फोटोग्राफर एनरिको पेस्केन्टिनी ने क्लिक किया है।

उन्होंने बताया कि यह जगह आज भी पुरातत्वविदों के लिए बड़ा सवाल है, क्योंकि लगातार खोज का कार्य चलता है और इसकी वास्तुकला आज भी आश्चर्यचकित करती है। इसके अध्ययन से प्राचीन सभ्यता का पता चलता है।

यहां सवा लाख से अधिक लोग उस दौर में रहते थे, जिससे उस युग में यह छठा सबसे बड़ा शहर था। यह पिरामिड इतना विशाल है कि दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा है।  प्राचीन मान्यता के अनुसार इसे सूर्य देवता को समर्पित किया गया था।

इससे छोटा दूसरा पिरामिड भी वहां है, उसे चंद्र देवता को समर्पित किया गया है। यह पिरामिड ‘ज्योमिट्री ऑफ द सन’ से मशहूर है, इसे देखने हर साल 10 लाख से अधिक पर्यटक पहुंचते हैं।

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इस अभिनेत्री का कभी मोटी होने के कारण उड़ाया जाता था मज़ाक

बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री रेखा आज भी अपनी खूबसूरती और अदा से लाखों दिलों पर राज करती हैं। अपने दौर में वह अपनी एक्टिंग और खूबसूरती के लिए जितनी फेमस थीं, आज भी सबके बीच उतनी ही चर्चित हैं। फिल्मों के इलावा उन्हों ने अपनी निजी ज़िन्दगी में काफी उतार-चढ़ाव देखे। आइए जानते है उनके जीवन के बारे में कुछ बातें:

  • रेखा का जन्म 10 अक्टूबर 1954 को मद्रास में हुआ था। उनका असली नाम भानूरेख गणेशन है।
  • उनके माता पिता उनके जन्म के वक़्त विवाहित नहीं थे। इसलिए रेखा को उन्होंने अपनी पुत्री का दर्जा नही दिया। रेखा अपने पिता से इतनी नफरत करती थीं कि उनके अंतिम संस्कार में भी नहीं गईं थीं।
  • घर की ख़राब हालत की वजह से इच्छा न होते हुए भी उन्हें पढाई छोड़ कर फिल्मो में आना पड़ा।
  • रेखा ने जब फिल्मी जीवन की शुरुआत की थी तब वो काफी मोटी थी। शुरूआती दिनों में रेखा इतनी उभर नही पाई क्योकि तब रंगरूप को ज्यादा अहमियत दी जाती थी।
  • उनके अनुसार उन्हें अगली डकलिंग (बदसूरत बत्तख का बच्चा) कहा जाता था।
  • रेखा ने अपने करियर की शुरूआत 1966 में बाल कलाकार के तौर पर तेलगु फिल्म रंगुला रतलाम से की थी। मुख्य अभिनेत्री के तौर पर उनका डेब्यू चार साल बाद फिल्म सावन भादो से हुआ था।
  • रेखा ने अपने 40 सालों के लंबे करियर में लगभग 180 से उपर फिल्मों में काम किया है।
  • फिल्मी करियर के दौरान, रेखा का नाम अमिताभ बच्चन, राज बब्बर, विनोद मेहरा, नवीन निश्चल, जीतेंद्र, यश कोहली, शत्रुघ्न सिन्हा और अक्षय कुमार के साथ जुड़ा।
  • उन्होंने 1990 में दिल्ली के कारोबारी मुकेश अग्रवाल से शादी कर ली थी। लेकिन उनकी शादी सालभर भी नहीं चल पाई और शादी के 7 महीने बाद ही मुकेश ने मौत को गले लगा लिया था।
  • अमिताभ और रेखा एक-दूसरे के बेहद करीब रहे। अमिताभ की संगत में रेखा की शख्सियत में गजब के परिवर्तन हुए। वे अपने लुक के प्रति सजग हो गईं और जिंदगी को देखने का उनका नजरिया भी बदल गया।
  • रेखा समय की बहुत पाबंद हैं और सभी जगह नियत समय पर पहुंचती हैं।
  • इंटरनेट पर मौजूद आंकड़ों के हिसाब से, रेखा की संपत्ति 40 मिलियन डॉलर की है।
  • रेखा की सिक्योरिटी के बारे में बताया जाता है कि वो बहुत टाइट सिक्योंरिटी के बीच रहती हैं। इतना ही नहीं कहा यह भी जाता है कि उनके घर के दरवाजों में ऐसे लॉक लगे हैं जो मशीनों के द्वारा ही खुलते हैं और हर कोई उसे नहीं खोल सकता।
  • रेखा को पहला फिल्मफेयर अवार्ड 1978 में फिल्म “घर” और दूसरा फिल्मफेयर अवार्ड 1998 में “खून भरी मांग” के लिए मिला।
  • रेखा उन फिल्म अभिनेत्रियों में से एक थी जो राजनीती में आयीं किन्तु फिर भी उन्हें पद्म श्री मिला।

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ब्लैक माम्बा- दुनिया का सबसे फुर्तीला व खतरनाक सांप

ब्लैक माम्बा साँपों की सबसे खतरनाक प्रजाति है। अफ्रीका का यह बेहद जहरीला सांप दुनिया के दस सबसे ज़हरीले साँपों में शामिल है। ब्लैक माम्बा अफ्रीका में हर साल औसतन 20 हज़ार मौतों के ज़िम्मेदार है। आइये जानते हैं खौफ के बादशाह के बारे में बेहद रोचक बातें.

बेहद फुर्तीला और आक्रामक

माम्बा रेंगने की गति के मामले में दुनिया के दूसरे साँपों से बहुत आगे है। यह 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भाग सकता है। यह इतना अधिक आक्रामक (aggressive) होता है कि खतरा महसूस होने पर कि यह कुछ ही सेकंड में लगातार 10-12 बार काट सकता है जिसके कारण शिकार के शरीर में 400 मिलीग्राम तक का ज़हर छोड़ देता है। दूसरी विशेषता या है कि ब्लैक माम्बा परिस्थिति के अनुसार अपना रंग बदल सकता है।

ब्लैक माम्बा पूरी तरह से ब्लैक नहीं

यह साँप देखने में भी बेहद ही खतरनाक होता है. वैसे अपने नाम के विपरीत ब्लैक माम्बा पूरी तरह से ब्लैक यानि काला नहीं होता बल्कि थोडा भूरा(ब्राउन) और ओलिव से लेकर ग्रे शेड लिए होता है. वैसे इसे यह नाम इसके मुहं के अन्दर के गहरे नीले (स्याही का रंग) भाग के लिए दिया गया है.

यह सांप जंगल के झाड़ और पेड़ों में रहना पसंद करते है। ब्लैक माम्बा की लम्बाई लगभग 2 मीटर तक होती है पर कई बार 4.5 मीटर लम्बे ब्लैक माम्बा साँप भी जंगल में देखे गए है।

बेहद जहरीला सांप

इसमें कोई शक नहीं कि यह सांप हमारी दुनिया के 10 सबसे ख़तरनाक और जहरीले सांपों की लिस्ट में शामिल है. इसका ज़हर तेजी से प्रक्रिया करने वाला (fast acting neuro toxin) होता है। इसका एक मिलीग्राम ज़हर ही इंसान को मारने करने के लिए काफी होता है. इसके काटते ही इंसान की आँखों के आगे अँधेरा छा जाता है। काटने के 15 मिनट से लेकर 3 घण्टे के अंदर इंसान की मौत हो जाती है। एंटी वेनीम बनने से पूर्व इसका काटा कोई भी इंसान बच नहीं सकता था। अफ्रीका में ये सांप इतना ज़्यादा पाया जाता है कि सांप के काटे व्यक्ति को अस्पताल पहुंचते ही सबसे पहले इसी सांप का एंटीडोट दिया जाता है।

ब्लैक माम्बा एक बार में 6 – 25 अंडे देता है, एक बार अंडा देने के बाद यह साँप उन्हें छोड़ के चली जाती है।  उसके तीन महीने बाद बच्चे बाहर आ जाते है जिनकी लम्बाई 16 – 24 इंच होती है। यह सांप लगभग 11 साल ज़िंदा रहते है।

शिकार करने का तरीका अन्य सांपों से जुदा

यह सांप आमतौर पर छोटे जीव जंतु और पक्षियों का शिकार करना पसंद करते हैं। इस सांप के शिकार करने का तरीका भी अन्य सांपों से बिल्कुल जुदा होता है। सबसे पहले यह अपने शिकार का तेजी से पीछा करके उसे पकड़ता है। फिर उसके अंदर अपना पूरा जहर छोड़ देता है। उसकी नज़र अपने शिकार पर तब तक रहती है, जब तक उसका ज़हर असर दिखाना शुरू नहीं कर देता।

कुछ देर बाद ही जैसे ही उसका शिकार पैरालाइज़ होकर मर जाता है, वैसे ही वह उसे खाने के लिए आगे बढ़ता है। जल्द ही वह अपने शिकार को निगल लेता है। दिलचस्प बात यह है कि यह सांप अपने से चार गुना बड़े जीव को खा सकता है।

 

24 हजार चिप्स से बनाई मोनालिसा की सबसे बड़ी पेंटिंग

लिओनार्दो दा विंची की मशहूर पेंटिंग याद है? जापान में मोनालिसा की दुनिया की सबसे बड़ी पेंटिंग बनाई गई है। इसमें सबसे खास बात है कि इस पेंटिंग को 24 हजार चावल की चिप्स की मदद से बनाया गया है। पेंटिंग की लंबाई 13 मीटर और चौड़ाई 9 मीटर है। इसका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है।

मोनालिसा की इस पेंटिंग को सोका गक्कई (धार्मिक उत्सव) के एक खास कार्यक्रम के तहत 200 स्थानीय लोगों ने 24 घंटे की कड़ी मेहनत में बनाया। इस पेंटिंग के निर्माण में 7 अलग-अलग रंगों के चिप्स का इस्तेमाल किया गया। शेड देने के लिए सोया सॉस, ग्रीन टी और चीनी आदि का प्रयोग किया गया। शनिवार को बननी शुरू हुई पेंटिंग के आखिरी पीस मेयर के साथ कुछ अन्य लोगों ने लगाए।

इस कार्य में शामिल 7 साल के “मी हमानो” का कहना है कि उसे पेंटिंग बनाकर बहुत मजा आया। मी के अलावा उसके पूरे परिवार ने भी पेंटिंग बनाने में सहयोग दिया। उसने कहा कि उसे चावल के चिप्स से पेंटिंग बनाना काफी अच्छा लगा। पेंटिंग का गिनीज बुक में दर्ज होने के बाद इसमें इस्तेमाल हुए चिप्स को लोगों को फ्री गिफ्ट के तौर पर बांट दिया गया।

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क्या होगा अगर इस दरवाजे को खोल दिया जाए ?

केरल के तिरुवनंतपुरम में बना पद्मनाभस्वामी मंदिर बहुत ही पुराना मंदिर है। इस मंदिर की विशेष बात यह है कि, इस मंदिर में 6 रहस्यमई तहखानें हैं। आपको बता दें कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर इन 6 रहस्यमई तहखानों में से 5 तहखानों को तो खोल दिया गया है लेकिन, 1 दरवाजे को अभी तक नहीं खोला गया है। आखिर क्यों नहीं खोला गया आखिरी दरवाजा जानने के लिए पूरा पढ़ें।

मंदिर से मिला लाखों करोड़ों का खजाना

अब तक खुले मंदिर के पांच तहखानों में से कीमती पत्थर, सोना और चांदी आदि कुछ मिल चुका है। इस खजाने की कीमत लगभग एक लाख करोड़ रुपये तक की आंकी जा चुकी है। हालांकि कुछ इतिहासकारों का कहना है कि, इस खजाने के पुरातात्विक महत्व को ध्यान में रखा जाए, तो इसकी सही कीमत का अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल है।

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अब तो इस मंदिर को दुनिया का सबसे अमीर मंदिर भी माना जा रहा है। मंदिर के खजाने की बात करें तो सरकार ने साफ कह दिया है कि ये खजाना मंदिर का है और उसके पास ही रहेगा, सरकार केवल इस पर नज़र रखेगी।

आखिरी दरवाजे का रहस्य

आपको बता दें कि पहले पांच चेम्बर खोलने के बाद आखिरी चेम्बर ‘बी’ नहीं खुल स्का क्योंकि, इसका कुछ खास रहस्य है। चेम्बर ‘बी’ में तीन दरवाजे हैं, पहला दरवाजा लोहे की झड़ों से बना है।

दूसरा लकड़ी से बना एक भारी दरवाजा है, और अंतिम दरवाजा लोहे का बना बड़ा ही मजबूत है, जो की बंद पड़ा है, और उसे खोला नहीं जा सकता क्योंकि, उस पर लोहे के दो नाग बने हुए हैं, और उस पर एक चेतावनी भी लिखी हुई है कि, अगर इसे खोला गया तो अंजाम बहुत बुरा होगा।

शाप से है ग्रस्त आखिरी दरवाजा

आखिरी इस दरवाजे की एक और विशेष बात यह भी है कि, इस पर न तो ताले लगे हैं, और न ही कोई कुंडी। कहा जाता है कि इसे एक मंत्र से बंद किया गया था, जिसे अष्टनाग बंधन मंत्र कहते हैं।

माना जाता है कि, वह चेम्बर एक अनोखे शाप से ग्रस्त है। यदि कोई भी उस चेम्बर के दरवाजे तक जाने का प्रयास करता है तो, वह बीमार हो जाता है या उसकी मौत भी हो सकती है।

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