यात्रा को सफल बनाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण टिप्स

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अगर आप गर्मियों और सर्दियों की छुट्टिओं में किसी यात्रा पर जाने का मन बना रहे हैं तो आपको इन बातों का ख़ास ध्यान रखना पड़ेगा, जो आज हम आपको बताने जा रहे हैं। यह कुछ बातें निश्चित रूप से आपकी यात्रा को सुखदायक बनाएं गी।

यात्रा को सफल बनाने के लिए कुछ बेहतरीन उपाय

सबसे पहले सफऱ पर जाने से पहले एक अच्छी गाड़ी का चुनाव करें और इसके साथ स्पेयर व्हील भी जरुर लेकर जाए, अगर गाड़ी का टायर पंचर भी हो गया, तो आप उसको स्पेयर व्हील के साथ बदल सकते हैं।

किसी भी जगह पर जाने से पहले वहां पर इंटरनेट दुवारा किसी अच्छे से होटल में अपनी बुकिंग करवा लें, ता कि आपको वहां रहने में आसानी हो।

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एक अच्छे से और हलके बैग में अपने कपड़े डालें, इससे आपको बैग उठाने में आपको कोई दिक़्क़त नही होगी।

यात्रा पर जाते समय अपने साथ पानी की बोतल को आवश्यक रखना।

अगर आप कोई तरल पदार्थ साथ में लजा रहे हैं, तो उसको किसी लफ़ाफे में अच्छे से पैक करके रखना ता कि लीक होने से भी वह आपको कोई नुकसान न करे।

अपने साथ कुछ दवाईयां जरूर लेकर जाए, खासकर पेनकिलर, ता कि आप किसी भी तरह के दर्द को आसानी से काबू में कर सके।

अपके कपड़े और जूते आरामदायक होने चाहिए, इससे आपको घूमने-फिरने में कोई दिक्कत नहीं आएगी और आप अपने सफ़र का खूब आनंद मान सकते हैं।

सफ़र पर जाते समय किसी भी तरह के नशे या शराब का सेवन न करें, और अपनी सफ़र को यक़ीनन सफल बनाए।

एक बात का खास ध्यान रखना कि सफ़र के समय खर्चा अपने बजट के हिसाब से करें और अपने पास कुछ पैसों को सेव करके रखें, ता कि जरूरत पड़ने पर उन पैसों का उपयोग किया जाए।

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भानगढ़ का किला जहां शाम ढलते ही जाग उठती हैं आत्माएं

पुराने किले, मौत, हादसों, अतीत और रूहों का अपना एक अलग ही सबंध और संयोग होता है। ऐसी कोई जगह जहां मौत का साया बनकर रूहें घुमती हो, उन जगहों पर इंसान अपने डर पर काबू नहीं कर पाता है। दुनिया भर में कई ऐसे पुराने किले है जिनका अपना एक अलग ही काला अतीत है और वहां आज भी रूहों का वास है। भानगढ़ का किला भारत में सबसे प्रेतवाधित स्थान के रूप में जाना जाता है, और शायद सबसे बड़ा अनसुलझा रहस्य है। आइए जानते है इस भुतहा किले की कहानी:

इतिहास

भानगढ़ किला 16वीं शताब्दी में बनवाया गया था। इस क़िले को आमेर के राजा भगवंत दास ने 1573  में बनवाया था। यह किला बसने के बाद लगभग 300 वर्षों तक यहां आबाद रहा। बाद में भगवंत दास के छोटे बेटे व अम्बर(आमेर ) के महान मुगल सेनापति, मानसिंह के छोटे भाई राजा माधो सिंह ने (1613) इसे अपनी रिहाइश बना लिया।

राजा माधो सिंह उस समय अकबर के सेना में जनरल के पद पर तैनात थे। उस समय भानगड़ की जनसंख्‍या तकरीबन 10,000 थी। भानगढ़ का किला अपने बर्बाद होने के इतिहास और रहस्यमयी घटनाओं के कारण मशहूर है। इस किले के उजाड़ होने के बारे में  दो कहानियाँ प्रचलित है।

पहली कहानी

पहली कहानी के अनुसार जहाँ भानगढ़ किले का निर्माण करवाया गया, वह स्थान योगी बालूनाथ का तपस्थल था। उसने इस वचन के साथ महाराजा भगवंतदास को भानगढ़ किले के निर्माण की अनुमति दी थी कि किले की परछाई किसी भी कीमत पर उसके तपस्थल पर नहीं पड़नी चाहिए।

महाराजा भगवंतदास ने तो अपने वचन का मान रखा, किंतु उसके वंशज माधोसिंह इस वचन की अवहेलना करते हुए किले की ऊपरी मंज़िलों का निर्माण करवाने लगे। ऊपरी मंज़िलों के निर्माण के कारण योगी बालूनाथ के तपस्थल पर भानगढ़ किले की परछाई पड़ गई।

ऐसा होने पर योगी बालूनाथ ने क्रोधित होकर श्राप दे दिया कि यह किला आबाद नहीं रहेगा। उनके श्राप के कारण यह किला उजाड़ हो गया।

दूसरी कहानी

कहते है कि भानगढ़ की राजकुमारी रत्नावती बेहद खुबसुरत थी। उस समय उनके रूप की चर्चा पूरे राज्‍य में थी और साथ देश कोने कोने के राजकुमार उनसे विवाह करने के इच्‍छुक थे। उस समय उनकी उम्र महज 18 वर्ष ही थी और उनका यौवन उनके रूप में और निखार ला चुका था।

एक दिन वह अपनी सखियों के साथ इत्र की दुकान पर गई। वो इत्रों को हाथों में लेकर उसकी खुशबू ले रही थी। उसी समय उस दुकान से कुछ ही दूरी एक सिंधु सेवड़ा नाम का व्‍यक्ति खड़ा होकर उन्‍हे बहुत ही गौर से देख रहा था। सिंधु सेवड़ा उसी राज्‍य में रहता था और वो काले जादू का महारथी था।

कहते है वह राजकुमारी को पागलों की तरह मन ही मन में प्रेम करने लगा था। वो हर हालत में राजकुमारी को पाना चाहता था। इसलिए उसने उस दुकान के पास आकर एक इत्र के बोतल जिसे रानी पसंद कर रही थी,उसने उस बोतल पर काला जादू कर दिया जो राजकुमारी के वशीकरण के लिए किया था। लेकिन इस बात का पता राजकुमारी को लग गया।

राजकुमारी रत्नाकवती ने उस इत्र की शीशी को उठाया, और वही पास के एक बड़े पत्थर पर ज़ोर से पटक दिया। जिससे वो शीशी टूट गयी और सारा इत्र उस पत्‍थर पर फ़ैल गया। कहते है की काले जादू के असर के कारण वह पत्थर तांत्रिक सिंधु सेवड़ा के पीछे चल पड़ा और तांत्रिक को कुचल दिया, जिससे कारण तांत्रिक की मौत हो गयी।

मरने से पहले तांत्रिक ने श्राप दिया कि इस किले में रहने वालें सभी लोग जल्‍द ही मर जायेंगे और वो दोबारा जन्‍म नहीं ले सकेंगे और  उनकी आत्‍माएं इस किले में भटकती रहेंगी। कहा जाता है की तांत्रिक के मृत्यु के कुछ समय के बाद ही भानगढ़ और अजबगढ़ के बीच लड़ाई हुई।

उस युद्ध में सभी लोग मारे गये। साथ ही राजकुमारी रत्नाचवती भी उस श्राप से नहीं बच पाई और उनकी भी मृत्यु हो गयी। लोगों का मानना है की भानगढ़ के किले में उनकी रू‍हें आज भी घुमती हैं।

रात को किले के अंदर जाना है वर्जित

लोगों की माने तो इस किले में रात में किसी के रोने और चिल्लाने की तेज़ आवाजें आती हैं। कई बार यहाँ एक साये को भी भटकते हुए देखने की बात कही गई है। इन बातों में कितनी सच्चाई है, ये कोई नहीं जानता। रहस्यमयी घटनाओं के कारण पुरातत्व विभाग द्वारा भानगढ़ किले को भुतहा घोषित कर दिया है। किले के प्रवेश द्वार पर उनके द्वारा बोर्ड लगाया गया है, जिसके अनुसार सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के उपरांत किले में प्रवेश वर्जित है।

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आज हम आपको राजस्थान के सोनार किले की कुछ रहस्यमई बातों के बारे में बताने जा रहे हैं। सबसे पहले आपको बता दें कि सोनार किला दुनिया के बड़े किलों में से एक है। यह किला जैसलमेर में स्थित है, जो कि भारत के राजस्थान राज्य में आता है।

सोनार किले का इतिहास

आपको बता दें कि 1156 ईस्वी में भाटी राजपूत शासक रावल जैसल ने इसे जैसलमेर में एक ताज की तरह बनवाया था। इस किले के चारों ओर 99 गढ़ बने हुए हैं, और इसकी ऊंचाई लगभग 30 मीटर है, इसीलिए यह किला दिखने में काफी विशाल लगता है।

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किले में आकर्षण चीजें

इस किले की आकर्षिता का अंदाजा लगाना वैसे तो बहुत मुश्किल है, क्योंकि इस किले को बनाया ही कुछ इस तरह से गया है। इसके प्रथम प्रवेश द्वार पर पत्थर की गई नक्काशी का शानदार नमूना बना हुआ है, जो कि पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षण करता है। दूसरा इस किले में दशहरा चौक भी प्रयटकों के लिए खास दर्शनीय स्थल बना हुआ है। यहां पर आप खूबसूरत दुकानों में जाकर खरीददारी का आनंद भी ले सकते हैं।

किले का राजमहल

आपको पता ही है कि राजमहल के बिना तो किले का कोई काम ही नहीं होता, क्योंकि राजमहल ही राजा महाराजाओं के निवास का मुख्य स्थल होता है। इस किले का तो राजमहल भी इतना खूबसूरत बना हुआ है जो कि पर्यटकों को वहां जाने के लिए बार-बार मजबूर करता है।

म्यूजियम

आपको एक बात और बता दें कि कुछ समय पहले इस महल के एक हिस्से को म्यूजियम के रूप में बना दिया गया है। म्यूजियम में प्रवेश होने के लिए भारतीयों के लिए 50 रुपए और विदेशियों के लिए 300 रुपए का टिकट लगता है।

सात जैन मंदिर

किले के आकर्षणों में सात जैन मंदिर भी शामिल हैं। इन मंदिरों में सबसे भव्य मंदिर जैन धर्म के 22 वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ को समर्पित है। पार्श्वनाथ मंदिर के अलावा चंद्रप्रभु मंदिर, रिषभदेव मंदिर, संभवनाथ मंदिर आदि भी किले में बने हुए हैं।

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नर्मदा नदी: भारत की तीसरी सबसे लम्बी नदी के बारे में रोचक कहानी

भारत में बहने वाली गोदावरी और कृष्णा नदी के बाद तीसरे स्थान पर सबसे लम्बी नदी आती है नर्मदा नदी। विंध्य की पहाड़‍ियों में बसा अमरकंटक एक वन प्रदेश है। अमरकंटक को ही इस नदी का उद्गम स्थल माना गया है।

यह समुद्र तल से 3500 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। कहते है कि इस नदी के दर्शन मात्र से भगतों के सब पापों का नाश होता है।

किवदंती

किवदंतियों में, नर्मदा नदी के विवाह के बारे में रोचक कहानी है जो इस प्रकार है:

राजा मैखल की पुत्री नर्मदा को रेवा के नाम से भी जाना जाता है। राजा मैखल ने नर्मदा के विवाह के लिए एक शर्त रखी कि जो राजकुमार गुलबकावली के फूल लेकर मेरी बेटी को देगा उससे इसका विवाह तय कर दिया जाएगा।

नर्मदा से शादी करने का मौका सोनभ्रद नाम के एक राजकुमार को मिला जो की नर्मदा के लिए वो पुष्प लाया था। अब विवाह में कुछ ही समय बचा था और सोनभ्रद से पहले कभी न मिले होने के कारण राजकुमारी नर्मदा ने अपनी दासी जुहिला के हाथ राजकुमार को एक संदेश भेजा।

राजकुमारी के वस्त्र और गहने पाकर जुहिला सोनभ्रद को मिलने चली गई। वहां पहुँच कर जुहिला ने राजकुमार को नहीं बताया कि वह दासी है, और उसे राजकुमारी समझ कर सोनभ्रद उस पर मोहित हो गया।

काफी समय बीतने के पश्चात जब जुहिला लौट कर ना आई तो राजकुमारी नर्मदा स्वयं सोनभ्रद से मिलने को चली गई। परन्तु वहाँ जाकर उसने देखा कि जुहिला और सोनभ्रद एक दूसरे के साथ थे।

यह दृश्य देख नर्मदा क्रोधित हो गई और घृणा से भर उठी। तुरंत वहां से विपरीत दिशा की ओर चल दी और कभी वापिस न आई। उसके पश्चात से नर्मदा बंगाल सागर की बजाए अरब सागर में जाकर मिल गईं और उन्होंने कसम उठाई कि वे कभी भी विवाह नहीं करेंगी, हमेशा कुंवारी ही रहेंगी।

कहते हैं कि आज तक भी सोनभ्रद को अपनी गलती पर पछतावा है परन्तु नर्मदा कभी लौट कर वापिस नहीं आई। कहा जाता है कि आज भी नर्मदा का विलाप और दुख की पीड़ा आज भी उनके जल की छल-छल की आवाज़ में सुनाई पड़ती है।

मिलती है अरब सागर में

भारत देश की सभी विशाल नदियां बंगाल सागर में आकर मिलती है, लेकिन नर्मदा एक ऐसी नदी है जो बंगाल सागर में नहीं बल्कि अरब सागर की में जाकर मिलती है।

अनोखी प्रेम कहानी एक शख़्स ने की अपने तकिये से शादी

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प्यार में लोग क्या कुछ नहीं करते। हर दिन किसी ना किसी की प्रेम कहानी सुनने को मिलती है। क्या कोई अपने तकिये से शादी कर सकता है?  लेकिन यहां तो एक शख़्स को अपने तकिये से इतना प्यार हो गया कि उसने तकिये से ही शादी कर ली।

दक्षिण कोरिया में Lee Jin Gyu नामक शख़्स ने तकिया से शादी की, और मीडिया में ख़ूब सुर्ख़ियां बटोरीं। इस प्रेम कहानी के हीरो Lee Jin Gyu के अनुसार, वो Fate Testarossa (तकिया) से बेहद  प्यार करते हैं और इसीलिए उन्होंने उससे शादी करने का फै़सला लिया।

ये अनोखी शादी पूरे रीति-रिवाज़ और धूम-धाम से की गई। यही नहीं, शादी से पहले Lee, Fate Testarossa के साथ कई जगह डेट पर भी जा चुके हैं, जिस दौरान उन्हें महसूस हुआ कि उन्हें Fate से शादी कर लेनी चाहिए।

कुछ लोगों ने इस विवाह को संदेह की नज़रों से देखा, तो कुछ लोगों ने इसे पब्लिसिटी स्टंट बताया, लेकिन Lee को ज़माने की से कोई फ़र्क नहीं पड़ता। Fate Testarossa, Mahou Shoujo Lyrical Nanoha नामक सीरिज़ का एक Anime कैरेक्टर है, जिसे तकिये में देखा सकता जा सकता है।

ख़ैर, जब Lee और Fate राज़ी तो क्या करेगा काजी।

जूनागढ़ किला: तपते रेगिस्तान में सर्दी का माहौल

जूनागढ़ किला: तपते रेगिस्तान में सर्दी का माहौल

जूनागढ़ किला बीकानेर के सबसे लोकप्रिय आकर्षण के बीच में गिना जाता है। इस किले को वास्तव में चिंतामणि किले और बीकानेर किले – Bikaner Fort के नाम से जाना जाता है और 20 वी शताब्दी के प्रारंभ में इसका नाम बदलकर जूनागढ़ रखा गया था क्योकि 20 वी शताब्दी में किले में रहने वाला परिवार लालगढ़ महल में स्थानांतरित हुआ था। महल की ऊंचाई पर पहुंचते ही अचानक ठंडी हवा के झकोरे आपको तरोताजा कर देते हैं, एक बेहद सुखद एहसास।

यह दुर्गम किला राजा राय सिंह द्वारा वर्ष 1593 में बनाया गया था।यह किला अनूप महल, गंगा निवास, जैसे कई खूबसूरत महल है जैसे कि चंद्र महल, फूल महल, करण महल और शीश महल अदि महलों से घिरा हुआ है। अनूप महल सोने की पत्ती चित्रों के लिए प्रसिद्ध है। चन्द्र महल चूने के प्लास्टर पर किये जाने वाले उत्तम चित्रों से सजा हुआ है।करण महल का निर्माण मुगल बादशाह औरंगजेब के द्वारा बीकानेर के राजाओं के विजय को मनाने के लिए किया गया था।

इन महलों का निर्माण लाल बलुआ पत्थर से हुआ है जो कि दुलमेरा के नाम से भी जाना जाता है।किले की 986 लंबी दीवारें, 37 गढ़ है और दो प्रवेश द्वार है।पर्यटकों के मुख्य प्रवेश द्वार, करण किले के पोल पर हैं। यहाँ किले के अंदर एक मंदिर स्थित है।यह देवी – देवताओं की पूजा के लिए बीकानेर के शाही परिवारों द्वारा इस्तेमाल किया गया था।दरबार हॉल, गज मंदिर, और सूरज पोल किले के अन्य प्रसिद्ध आकर्षण हैं।

महल में पहुंचकर वाकई लगता है, जैसे आप आसमान के किसी बादल पर आ गए हों। नीले रंग के बादलों से सजी दीवारें बरखा की फुहारों का अहसास दिलाती हैं। यहां बहने वाली ताजा हवा पर्यटकों की सारी थकान छू कर देती है।

इस शानदार महल की स्थापत्य कला अद्भुत है। महल की दीवारों पर प्राकृतिक रंगों से शानदार पेंटिंग की गई है। कई सदियां गुजर जाने के बाद भी इन रं तरसतेगों की ताजगी और खूबसूरती दिल से महसूस की जा सकती है। महल की पेंटिंग्स बारिश के मौसम में राधा और कृष्ण के प्रेम की अधीरता और पूर्णता को एक साथ बयान करने में सक्षम है।
इस महल में राजा अपनी रानी के साथ खास समय बिताते थे। यहां के 5 शताब्दी से अधिक प्राचीन बीकानेर के जूनागढ़ किले को सर्वश्रेष्ठ दुर्ग मानते हुए अमेरिका की प्रतिष्ठित ट्रेवल एजेंसी ‘ट्रिप एडवाइजर’ ने हाल ही में ‘सर्टिफिकेट ऑफ एक्सीलेंस-2015’ सम्मान से सम्मानित किया है। पर्यटन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार जूनागढ़ को सम्मान मिलने पर बीकानेर ही नहीं, राजस्थान व भारत का गौरव बढ़ा है।
बीकानेर के 6ठे शासक राजा रायसिंह ने नया दुर्ग चिंतामणि (वर्तमान जूनागढ़) को ईस्वी सन् 1589-1593 के बीच बनवाया। पूर्व में बीकानेर रियासत के राजाओं का बीकानेर में ही प्रवास रहता था। बीकानेर रियासत के अब तक हुए 24 राजाओं में से ज्यादातर सभी राजाओं ने इसके विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। जूनागढ़ किला बीकानेर का एक बड़ा आकर्षण है।
इतिहास इस पूरे किले से बहुत गहरी जड़ों तक जुड़ा है इसलिए सैलानी इसकी ओर बहुत आकर्षित होते हैं। यह किला पूरी तरह से थार रेगिस्तान के लाल बलुआ पत्थरों से बना है। हालांकि इसके भीतर संगमरमर का काम किया गया है। इस किले में देखने लायक कई शानदार चीजें हैं। यहां राजा की समृद्ध विरासत के साथ उनकी कई हवेलियां और कई मंदिर भी हैं।

 

इस देश में होती है चुड़ैल की पूजा

इस देश में होती है चुड़ैल की पूजा

आज हम आपको एक ऐसा रहस्य बताने जा रहे हैं जो शायद आपने पहले कभी नहीं सुना होगा। आपको देवी-देवतियां की पूजा के बारे में तो पता ही होगा, लेकिन क्या आपको पता है कि मैक्सिको में देवी की नहीं बलकि, एक चुड़ैल की पूजा की जाती है। मैक्सिको में रहने वाले लोग इसको मृत्यु की देवी ‘सांता मुएर्ते’ से पुकारते हैं।

इन देशों में हो रही है चुड़ैल की मान्यता

आपको बता दें कि जहां पर एक कंकाल को सजा कर मृत्यु देवी की पूजा की जाती है। अब तो इस माता में विश्वास रखने वालों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। इसकी मान्यता मैक्सिको के अलावा, अब मध्य अमेरिका तथा कोलम्बिया में भी होने लग गई हैं। लोगों का यह विश्वास है कि मौत की देवी उनको बीमारी तथा दुःख से सुरक्षत करती है।

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मौत की देवी का संबंध पुरानी परम्परा से

कुछ लोगों का मानना है कि मैक्सिको में ‘सांता मुएर्ते’ को पूजने का संबंध वहां की परम्परा से है। उपनिवेशी काल में स्पेन द्वारा इस देश पर कब्ज़ा कर लेने के साथ यहां कैथोलिक धर्म का आगमन हुआ था। फिर भी गुप्त रूप से कई लोग इस मौत की देवी की पूजा करते रहे।

 सार्वजनिक रूप से मानने लगे लोग

जहां पहले लोग मौत की देवी के अनुयायी होने की बात को खुल कर स्वीकार नहीं करते थे, लेकिन अब वह इसे सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने लगे हैं। कुछ स्थलों पर इससे जुड़े प्रार्थना स्थल भी खुल गए हैं।

लोकप्रिय प्रार्थना स्थल

एक महिला डोना कुएर्ता ने अपने घर में एक प्रार्थना स्थल बनाया है, जहां देश ही नहीं विदेशों से भी मृत्यु की देवी के अनुयायी आने लगे हैं। ऐसे प्रार्थना स्थलों में आमतौर पर कंकाल को सजा कर उसकी पूजा की जाती है। माना जाता है मैक्सिको में यह मृत्यु के देवता को समर्पित प्रथम सार्वजनिक प्रार्थना स्थल है, इसलिए इसकी लोकप्रियता सबसे ज्यादा है।

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मैगज़ीन के कवर पर इस अदाकारा को देख कर ‘एंग्री यंग मैन’ को हुआ उनसे प्यार

हिन्दी सिनेमा में चार दशकों से ज्यादा का वक्त बिता चुके सुपरस्टार अमिताभ बच्चन को उनकी फिल्मों से ‘एंग्री यंग मैन’ की उपाधि प्राप्त है। 1970 के दशक के दौरान उन्होंने बड़ी लोकप्रियता प्राप्त की और तब से भारतीय सिनेमा के इतिहास में सबसे प्रमुख व्यक्तित्व बन गए।

एंग्री यंगमैन, शहंशाह, मेगास्टार, बिग बी, सदी के महानायक, स्टार ऑफ द मिलेनियम और ना जाने ऐसे ही कितने नामों से जाने जाते हैं अमिताभ बच्चन। आइए जानते है उनके जन्म दिन पर कुछ रोचक बातें:

  • उनका का जन्म 11 अक्टूबर, 1942 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद जिले में हुआ था। उनके पिता का नाम हरिवंश राय बच्चन था। उनके पिता हिंदी जगत के मशहूर कवि रहे हैं। उनकी मां का नाम तेजी बच्चन था। उनके एक छोटे भाई भी हैं जिनका नाम अजिताभ है।
  • अमिताभ बच्चन शेरवुड कॉलेज, नैनीताल के छात्र रहे हैं। इसके बाद की पढ़ाई उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोरीमल कॉलेज से की थी। पढ़ाई में भी वे काफी अव्‍वल थे और कक्षा के अच्‍छे छात्रों में उनकी गिनती होती थी।
  • अमिताभ बच्चन की शादी जया बच्चन से हुई जिनसे उन्हें दो बच्चे हैं। अभिषेक बच्चन उनके सुपुत्र हैं और श्वेता नंदा उनकी सुपुत्री हैं।
  • उनका कहना है कि उनको पहली नज़र में जया से प्यार हो गया था। उन्होंने जया भादुड़ी को पहली बार मैगज़ीन के कवर पर देखा था। अमिताभ की नज़र एक मैगज़ीन कवर पर पड़ी, जिसमें जया नज़र आ रही थीं।
  • अमिताभ अपने लिए हमेशा से एक ऐसा जीवनसाथी चाहते थे जो ट्रडिशनल होने के साथ-साथ मॉडर्न भी हो और जया उन्हें अपने लिए बिल्कुल फिट नज़र आईं।
  • अपने शुरुआती दिनों में अमिताभ बच्चन एक शिपिंग कंपनी के लिए काम किया करते थे। शिपिंग कंपनी में काम करने के दौरान उन्हें तनख्वाह के रूप में ₹800 प्रति महीने मिलते थे।
  • अमिताभ बच्चन दाएं और बाएं, दोनों हाथों से लिख लेते हैं।
  • खाने में उनको को आलू-पूड़ी, पकौड़े और गुलाब-जामुन पसंद है।
  • अमिताभ बच्चन कभी भी गुस्सा नहीं होते। वो तभी गुस्सा होते है जब उन्हें फिल्मों में गुस्सा होने को कहा जाता है।
  • वह एशिया के पहले अभिनेता थे, जिनका लंदन में मोम का पुतला बना था।
  • बचपन के दिनों में अमिताभ बच्चन को एक सांड ने बड़ी जोर की टक्कर मारी थी। जिसकी वजह से उनके सिर में गहरी चोट लगी थी और उन्हें उस वक्त कई टांके लगवाने पड़े थे।
  • कौन बनेगा करोड़पति ने लोगों को तो पैसा जीतने का मौका दिया ही, अमिताभ को भी इस शो ने लाइफलाइन दी। अमिताभ की कंपनी एबीसीएल पर करीब 90 करोड़ का कर्ज था। अमिताभ इस शो को शायद ही कभी हाथ लगाते अगर उन्हें कर्ज चुकाने की चिंता न होती।
  • 4 नेशनल फिल्म अवॉर्ड, 15 फिल्मफेयर अवॉर्ड, पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित अमिताभ बच्चन हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय हस्ती हैं और उनकी विश्वभर में भी जबरदस्त फैन फॉलोइंग है।

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पोवेग्लिया आइलैंड एक ऐसी जगह जहां से आज तक कोई वापिस नहीं लौटा

दुनिया के ऐसे बहुत से स्थान हैं को खतरों से भरे हुए हैं। कई जगह बेहद जहरीले बेशुमार सांप हैं तो कई सक्रिय ज्वालामुखी वाले स्थान हैं। यानि कुछ ऐसे स्थान जहां जाना और मौत को बुलावा देना एक ही बात है।

ऐसी ही एक रहस्यमयी जगह है पोवेग्लिया। इटली में स्थित पोवेग्लिया आइलैंड दशकों से वीरान सुनसान टापू है जिसके बारे में इटली सरकार का कहना है:

प्रतिबंधित होने के बाद भी अगर कोई शख्स आइलैंड पर जाता है, तो वह उसकी खुद की जिम्मेदारी होगी

पोवेग्लिया आइलैंड है वेनीसिया झील के उत्तर में बसा हुआ था जो अब वीरान है। कहा जाता है कि पोवेग्लिया आइलैंड पर प्लेग के मरीजों को मरने के लिए छोड़ दिया जाता था. इस आइलैंड पर 1 लाख 60 हज़ार लोगों को उनके अंतिम समय पर यहां छोड़ा गया था. यहां पर मरीजों को मौत से पहले उनको रूह कंपा देने वाला टौर्चर भी दिया जाता था. जो लोग मर जाते थे, उन्हें वहीं पर दफ़ना दिया जाता था.

मानव अस्थियों से बनी हुई है मिट्टी

आपको बता दें कि यहां जाने पर अब सरकार ने रोक लगा दी गई है, क्योंकि यह आइलैंड बहुत खतरनाक है. इस आइसलैंड की 50 प्रतिशत मिट्टी मानव अस्थियों से बनी हुई है. इस आइलैंड पर इतनी मौते हो चुकी हैं की, मछुआरे जब मछली पकड़ने जाते हैं, तो उनके जाल में मछली की जगह इंसानों की हड्डियां आ जाती हैं.

कहा जाता है कि पोवेग्लिया आइलैंड पर प्लेग के मरीजों को मरने के लिए छोड़ दिया जाता था. इस आइलैंड पर 1 लाख 60 हज़ार लोगों को उनके अंतिम समय पर यहां छोड़ा गया था. यहां पर मरीजों को मौत से पहले उनको रूह कंपा देने वाला टौर्चर भी दिया जाता था. ऐसे में जो लोग मर जाते थे, उन्हें वहीं पर दफ़ना दिया जाता था.

जिंदा जला दिया गया था लोगों को

आपको बता दें कि जब यहां मरीजों की संख्या बढ़ गई थी, तो करीब लगभग 1 लाख 60 हज़ार बीमार लोगों को यहां जिंदा जला दिया गया था. इसके बाद ये आइलैंड पूरी तरह से वीरान हो गया.

मरीजों को दिखने लगे भूत

इस आईलैंड पर 1992 में एक मेंटल अस्पताल बनाया गया था, लेकिन कुछ समय बाद यहां के मरीजों को प्लेग के मरीजों के भूत दिखाई देने लगे और इसी डर में यह अस्पताल भी बंद कर दिया गया था.

‘गॉड ऑफ सन’ के नाम से मशहूर पिरामिड

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पिरामिड न सिर्फ लोगों के आकर्षण के केंद्र हैं, बल्कि ये आश्चर्यों से भरे हुए हैं। पिरामिड का नाम आते ही सबसे पहले मिस्र की तस्वीर सामने आती है, लेकिन क्या आप जानते है कि मिस्र के अलावा भी इस दुनिया में कुछ जगह ऐसी हैं, जहां पर विशालकाय पिरामिड निर्मित हैं। मेक्सिको में गॉड ऑफ सन नाम का पिरामिड है।

यह फोटो मेक्सिको स्थिति प्राचीन शहर तेओतिवाकन का है, यानी मान्यताओं के अनुसार ऐसी जगह जहां देवताओं की उत्पत्ति हुई। इसे इटली के फोटोग्राफर एनरिको पेस्केन्टिनी ने क्लिक किया है।

उन्होंने बताया कि यह जगह आज भी पुरातत्वविदों के लिए बड़ा सवाल है, क्योंकि लगातार खोज का कार्य चलता है और इसकी वास्तुकला आज भी आश्चर्यचकित करती है। इसके अध्ययन से प्राचीन सभ्यता का पता चलता है।

यहां सवा लाख से अधिक लोग उस दौर में रहते थे, जिससे उस युग में यह छठा सबसे बड़ा शहर था। यह पिरामिड इतना विशाल है कि दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा है।  प्राचीन मान्यता के अनुसार इसे सूर्य देवता को समर्पित किया गया था।

इससे छोटा दूसरा पिरामिड भी वहां है, उसे चंद्र देवता को समर्पित किया गया है। यह पिरामिड ‘ज्योमिट्री ऑफ द सन’ से मशहूर है, इसे देखने हर साल 10 लाख से अधिक पर्यटक पहुंचते हैं।

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