उबले हुए अंडों पर की गयी अद्भुत कलाकारी!

आज हम आपके सामने उबले हुए अंडों से बनाई गई अद्भुत कलाकारी की कुछ तस्वीरें लेकर आएं हैं। यह उबले हुए अंडों से बनाई गयी रचनात्मकतायें बहुत ही सुंदर और अद्भुत हैं। इनकी बहुत ही बढ़िया तरिके से सज़ावट या रचनात्मकता की गयी है। आइए देखते हैं उबले हुए अंडों पर की गयी अद्भुत कलाकारियां!

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यह थी उबले हुए अंडों पर की गयी बहुत ही सुंदर और अद्भुत कलाकारी!

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गुड़गांव की 7 डरावनी और सच्ची भुतहा घटनाएं!

महानगर दिल्ली से सटा गुड़गांव (अब गुरुग्राम) शहर भारत के बड़े शहरों में से एक है. इस शहर के बारे में कुछ ऐसी खौफनाक और रहस्यमयी भुतहा बातें हैं, जो एक से अधिक बार लोगों के साथ घट चुकी हैं. कुछ ऐसी असाधारण घटनाएँ, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं, लेकिन जो जानते हैं, वही इनकी भयावहता को महसूस कर सकते हैं. इस लेख में गुड़गांव शहर में घटित कुछ डरावनी और सच्ची कहानियां रखी गयी हैं, जिन्हें पढ़ कर आपके रौंगटे खड़े हो जायेंगे।

एम.जी. रोड – वीरान सड़क में औरत का भूत

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गुड़गांव शहर का एम.जी. रोड, गुड़गांव का सबसे सुनसान और भयावह रोड है. इस सड़क पर ड्राइव करने वालोंका मानना है कि उन्होंने कई बार इस सड़क पर सफेद साड़ी पहने औरत को देखा है, जो गाड़ियों के साथ-साथ भागती है. उसकी जीभ बांह जितनी लंबी और बाहर की तरफ उबली हुई आँखें हैं. कहते हैं कि इस औरत की मौत कुछ साल पहले इसी एरिया में हुई थी.(पूरी Post पढ़ें :-गुरूग्राम का एम.जी. रोड़ जहाँ सफ़ेद साड़ी में चुड़ैल गाड़ी के पीछे भागती है!!)

सैफरन बीपीओ, गुड़गांव : गुड़गांव की सबसे भुतहा जगह

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कब्रिस्तान के ऊपर बना गुड़गांव का सैफरन काल सेंटर (BPO) गुड़गाँव की सबसे भुतहा जगह मानी जाती है. कहा जाता है इस बीपीओ में “रोज“(Rose) नाम की समयनिष्ठ (punctual) और मेहनती लड़की काम करती थी. वह कई महीनों तक लगातार “Employee of the Month” का ख़िताब जीतती रही. एक दिन अचानक फ़ोन पर बहुत लम्बी बातचीत करने के बाद उसने लम्बी छुट्टी ले ली, जो आश्चर्यजनक रूप से बढती चली गयी. उसके सह-कर्मियों ने उसके मकान-मालिक से बात की तो पता चला कि वहां इस नाम की कोई लड़की नहीं रहती थी. बहुत खोजबीन के बाद उसके परिवार को ढूँढा गया, जिन्होंने बताया की रोज़ आठ साल पहले मर चुकी थी! उसके दोस्त और सहकर्मी महीनों तक सदमे और दहशत की स्थिति में रहे, और अभी तक भी यह राज कायम है.(पूरी Post पढ़ें:- कब्रिस्तान पर बना हुआ एक कॉल सेंटर, जहां भूत करते है काम)

अशोक-विहार फ्लाईओवर – आत्मा जो बहकाती है

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गुड़गांव के अशोक विहार फ्लाईओवर पर रात के 1:00 बजे से 4:00 बजे सफेद साड़ी पहने हुए एक औरत मिलती है, जो आने जाने वाली गाड़ी के चालकों से रास्ता पूछती है. कोई ड्राईवर अगर उस औरत के पास रास्ता बताने के लिए गाड़ी रोकता है, तो अजीब ढंग से उसकी गाड़ी की ब्रेक्स फेल होने लगती है और गाड़ी गोल-गोल घूमती रहती है. अगर आप रात को इस फ्लाईओवर पर सफेद साड़ी पहने हुए किसी औरत को देखें तो भाग लें, इसी में आपकी भलाई है!

सेक्टर-7, गुडगाँव – घर जो आपको पागल कर देगा

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गुड़गांव के सेक्टर 7 में अपार्टमेन्ट के ग्राउंड फ्लोर भुतहा समझा जाता है. इस अपार्टमेंट के आस-पास रहने वालों को रात के समय बाथरूम में नल और शावर के चलने की आवाजें सुनाई देती हैं. खास कर इस घर में रहने वालों के साथ तो और भी बुरा अनुभव सुनने में आया है. यहाँ रहने वालों को बुरे स्वप्न और मानसिक परेशानियो के अलावा कुछ साए भी नज़र आते हैं.  कहा जाता है इस फ्लैट के बाथरूम में कई वर्ष एक व्यक्ति की निर्मम हत्या कर दी गयी थी, जिसकी वजह से यह अपार्टमेंट भुतहा बन गया।

सेक्टर 56, गुड़गांव- असाधारण गतिविधि

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यहाँ की रहने वाली पूजा सिंह ने बताया जब उनका परिवार इस सेक्टर के अपार्टमेंट में रहने के लिए आया, तो उनको पहले दिन से ही अपार्टमेंट में असाधारण गतिविधियों का सामना करना पड़ा. जैसे कि आधी रात को दरवाज़ा खटखटाना और लाइट्स का अपने आप जलना-बुझना. हद तो तब हुई जब घर में एक रिमोट से चलने वाली बड़ी कार अपने आप चलने लगी और बेकाबू हो गयी. इसके बाद उन्होंने फ्लैट बदलने में ही भलाई समझी.(पूरी Post पढ़ें:- गुड़गांव का एक भूतहा घर, जहां अपने आप चलती है खिलौने वाली कार)

सेक्टर 15, गुड़गांव – घोस्ट कार

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सर्दियों में धुंध भरी रात के समय में गुड़गांव के सेक्टर 15 के रोड पर न चलने की सलाह दी जाती है.  इन हादसों की वजह यहाँ पर रात को चलने वाली एक घोस्ट कार है, जो अत्याधिक तेज़ी से आपके समीप से गुज़रती है. अधिकतर जोशीले लोग इस कार का पीछा करते हैं और अंत में एक बैरीकेड से टकरा जाते हैं, जबकि वह कार दूर-दूर तक नज़र नहीं आती.

साइबर सिटी, गुड़गांव

गुडगाँव की साइबर सिटी के पास बन रहे एक स्कूल के मालिकों को निर्माण सामग्री की निगरानी के लिए चौकीदार ढूँढने में बहुत परेशानी का सामना पड़ा. कहते हैं कि यहाँ रात के समय पुरुष, स्त्री, और बच्चों की दर्द और पीड़ा में रोने की आवाजें सुनाई देती थी, लेकिन ढूँढने पर कोई नहीं मिलता था. सुबह होते ही सभी चौकीदार ऐसे सरपट भागे कि अपनी दिहाड़ी लेने भी नहीं आये. इस समस्या से निपटने के लिए स्कूल में पूजा रखवाई गयी, तो मामला कुछ शांत हुआ.

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ये तस्वीरें आपको हैरानी में डाल देंगी!

हमारी पृथ्वी बहुत अद्भुत है. पृथ्वी में ऐसी कई जगहें हैं, जिनके बारे में जान कर आप हैरत में पड़ जायेंगे. कई बार ऐसे प्राकृतिक दृश्य और जगहें देखने को मिलती हैं, जिन्हें देखकर हम अपने आपको भाग्यशाली समझते हैं. दुनिया की अद्भुत जगहों और विस्मयकारी दृश्यों की, कैमरे में कैद कुछ ऐसी हीं तस्वीरें, यहाँ पर प्रस्तुत हैं.

पश्चिमी यॉर्कशायर के ऊपर लेंटीकूलर बादल

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इन दुर्लभ लेंटिकुलर बादलों को पश्चिम यॉर्कशायर में पड़ती जगह पेन्निनेस में देखा गया था. इस तरह के दुर्लभ बादल हिमालय पर्वतीय क्षेत्रों के आस-पास दिखायी देते हैं. यहां लेन्टीक्यूलर बादलों का होना बहुत ही दुर्लभ दृश्य था.

लाल रंग का समुद्री तट, पाजिन, चीन

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यह लाल समुद्री तट, चीन के पांजीन शहर के पास है. यह समुद्री तट लाल घास से घिरा हुआ है, जो इस बीच को सबसे अलग बना देती है. इस समुद्री तट की ज्वार भूमि दुनिया भर के हज़ारों पक्षियों को अपनी तरफ आकर्षित करती है. यह जगह प्रवासी पक्षियों के लंबे सफर के रास्ते में पड़ती है, इसलिए प्रवासी पक्षी यहाँ कुछ समय के लिए रुकते हैं.

सालार दे उयुनि, बोलीविया (Salar de Uyuni, Bolivia)

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बोलीविया के सलार दे उयुनी में दुनिया का सबसे बड़ा नमक-पठार (Salt pan) है. यह जगह बोलीविया के दक्षिण-पश्चिम में पोटोसी में स्थित है. इस जगह की ऊंचाई समुद्र तल से 3,656 मीटर (लगभग 11,995 फीट) है.

चमकती गुफाएं, न्यूजीलैंड

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चमकती या ग्लो-वोर्म्स (Glow Warms) गुफाएं, न्यूजीलैंड के उत्तरी द्वीप के वैतोमो (Waitomo) जगह पर स्थित है. इन गुफाओं में अलग तरह के जुगनू हैं. इस तरह के जुगनू सिर्फ न्यूजीलैंड में पाए जाते हैं. इन जुगनुओं का आकार एक मच्छर जितना होता है. “वैतोमो” शब्द माओरी भाषा से लिया गया है. यह गुफाएं जुगनुओं की वजह से चमकती रहती हैं.

विक्षिप्त बादल (Asperatus Clouds), न्यूजीलैंड

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इस तरह के बादलों को 2006 में न्यूजीलैंड के आकाश में देखा गया था, जबकि उससे पहले इस तरह के बादलों का कोई रिकॉर्ड नहीं है. अगर आप ने Asperatus बादलों का नाम कभी नहीं सुना, तो इसका कारण यह है कि इस तरह के बादल पहली बार आकाश में देखने को मिले हैं. अभी तक इन बादलों का नाम अन्तराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा पूरी तरह से स्वीकार नहीं किया गया है.

मोर्निंग ग्लोरी (Morning Glory) बादल, ऑस्ट्रेलिया

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मोर्निंग ग्लोरी बादल बहुत दुर्लभ बादल हैं. यह आस्ट्रेलिया में निम्न स्तर वायुमंडल में देखे गए थे. यह बादल एक एकांत लहर की तरह दिखाई देते हैं. इस तरह के बादलों को दुनिया के कई हिस्सों में देखा जा चुका है. इस तरह के बादल तब बनते हैं, जब लहरें रोल बादल का रूप ले लेती हैं.

साफ नीला पानी, ग्रीस

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यह जगह एक यूनानी द्वीप है, जिसका नाम कोर्फू है. यह दुनिया के सबसे साफ़ तैरने वाले पानी की जगहों में से है. यहाँ का पानी इतना साफ़ है कि नाव हवा में उड़ती प्रतीत होती हैं!

सिंकहोल (Sink Hole), ग्वाटेमाला

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यह सिंकहोल, ग्वाटेमाला शहर में 2010 में भयंकर आपदा की वजह से बना था. इस आपदा की वजह से तीन मंजिला कारखाना, जो 65 फीट घेरे में बना था, यह कारखाना 100 फीट अंदर जमीन में धस गया था. यह सिंकहोल के बनने की मुख्य वजह पकाया ज्वालामुखी का फटना, उष्णकटिबंधीय तूफ़ान का आना और सीवर पाइप में रिसाव होना था.

रिजायना सिल्वेरा द्वारा बनाया गया Abyssal

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यह तस्वीर बहुत ही अदभुत है. इसमें खिड़कियों को जमीन पर इस तरह से कलाकारों द्वारा बनाया गया है, जो अपने आप में एक हैरान कर देने वाला दृश्य बनाता है. इस जमीन पर चलने वाले लोग ऐसे दिखाई देते हैं, जैसे वो हवा में चल रहे हैं.

जमी हुई झील का दृश्य, न्यूजीलैंड

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लिंडन झील (Lyndon Lake) न्यूजीलैंड के कैंटरबरी क्षेत्र में स्थित है. यह झील सर्दियों में पूरी तरह बर्फ से जम जाती है. इस दृश्य में इस झील के जमे होने का अदभुत दृश्य दिखाया गया है. यह झील न्यूजीलैंड के राजमार्ग 73 पर पड़ती है.

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भारत के इतिहास के 10 सबसे बड़े सांप्रदायिक दंगे

भारत में सांप्रदायिक दंगों का इतिहास बहुत पुराना है. भारत में सांप्रदायिक दंगों की शुरुआत संभवत: सन 1895 और 1899 में कज्हुहुमालाई (Kazhuhumalai) और सिवाकासी (Sivakasi) में होने वाले दंगों से शुरू हुई. भारत विभाजन से पहले कोलकाता में सन 1946 में जातिगत हिंसा हुई, जिसको “सीधी कार्रवाई दिवस” (Direct Action Day) से भी जाना जाता है. इसके अलावा नागपुर के दंगे (सन 1927), विभाजन के दंगे (सन 1947), रामनाद दंगे (सन 1957) और 2006 में महाराष्ट्र में घटित दलित दंगे शामिल हैं. यह है भारत में अब तक हुए सबसे भयंकर जातिगत दंगों की सूची, जिन्होंने भारत की एकता और सांप्रदायिक सदभाव को बुरी तरह प्रभावित किया.

कलकत्ता के दंगे, सन 1946

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सन 1946 में कलकत्ता में हुए इन दंगों को “डायरेक्ट एक्शन दिवस” के नाम से भी जाना जाता है. यह दंगे भारत में हिंदू-मुस्लिम समुदाय में होने वाली हिंसा के परिणामस्वरूप हुए थे. उस समय भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था. इन दंगों में 4,000 लोगों ने अपनी जानें गंवाई थी और 10,000 से भी ज़्यादा लोग घायल हुए थे.

सिख-विरोधी दंगे, सन 1984

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इन दंगों की शुरुआत तब हुई थी, जब इंदिरा गांधी की 31 अक्टूबर 1984 को उनके सिख अंगरक्षकों ने हत्या कर दी थी. इंदिरा गांधी की हत्या के अगले ही दिन इन दंगों की शुरुआत हो गई और यह दंगे कई दिनों तक चले, जिसमें 800 से भी ज़्यादा सिखों की हत्या कर दी गई. भारत की राजधानी दिल्ली और यमुना नदी के आसपास के इलाके इन दंगों से बुरी तरह से प्रभावित हुए थे.

कश्मीर दंगे, सन 1986

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इन सांप्रदायिक दंगों की शुरुआत 1986 में कश्मीर में ज़्यादा मुस्लिम आबादी वाले क्षेत्र अनंतनाग में हुई थी. यह दंगे वहां के रहने वाले मुस्लिम कट्टरपंथी द्वारा हिंदुओं को कश्मीर से बाहर निकालने के लिए किए गए थे. इन दंगों में 1000 से भी ज़्यादा लोगों की जानें गई थी और कई हज़ार हिंदू बेघर हो गए थे.

वाराणसी दंगे, सन 1989

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हिंदुओं के इस पवित्र शहर में क्रमवार 1989, 1990 और 1992 में भयंकर दंगे हुए थे. यह दंगे हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच हुए थे. 1989 में वाराणसी में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच हुए इस दंगे में बहुत से लोगों ने अपनी जान गंवाई थी.

भागलपुर दंगे, सन 1989

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भारत की आज़ादी के बाद से होने वाले यह दंगे सबसे कुख्यात दंगों में से एक थे. यह दंगे अक्टूबर 1989 को भागलपुर में हुए थे. इन दंगों में 1000 से भी ज़्यादा निर्दोष लोगों ने अपनी जानें गंवाई थी. यह हिंसावादी दंगे हिंदुओं और मुस्लिम समुदाय के लोगों के बीच हुए थे.

मुंबई दंगे, सन 1992

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मुंबई में होने वाले यह दंगे सबसे भीषण दंगों में से एक थे. इन दंगों की शुरुआत दिसंबर 1992 में हुई और यह दंगे जनवरी 1993 तक चले. यह दंगे एक बार फिर हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों के बीच हुए थे. इन दंगों में 1000 से भी ज़्यादा लोगों की मौत हुई थी. इन दंगों की मुख्य वजह बाबरी मस्जिद को तोड़ा जाना था. 1993 में इसी सिलसिले में सीरियल बम धमाके भी किए गए थे, जिनमें सैकड़ों लोगों की जान गई.

गुजरात दंगे, सन 2002

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यह दंगे भारत के इतिहास में होने वाले सबसे भयंकर दंगों में से थे. इन दंगों की शुरुआत तब हुई, जब सन 2002 में साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन को गुजरात के गोधरा में आग लगा दी गई थी, जिसमें 59 से ज़्यादा हिंदू तीर्थ-यात्री मारे गए थे, इसके बाद हिंदू और मुसलमानों के बीच हिंसक दंगे हुए, जिसमें 2,000 से भी ज़्यादा लोगों की जानें गई थी.

अलीगढ़ दंगे, सन 2006

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अलीगढ़ शहर को उत्तर प्रदेश का सांप्रदायिक दंगों से ग्रस्त शहर भी कहा जाता है. यहां 5 अप्रैल 2006 को हिंदू और मुसलमानों के बीच बहुत हिंसक दंगे हुए थे. यह दंगे हिंदुओं के पवित्र दिवस राम नवमी को हुए थे, जिसमें 6-7 लोगों की मौत हो गई थी.

देगंगा दंगे, सन 2010

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यह दंगे पश्चिम बंगाल में पढ़ते देगंगा शहर में 6 सितम्बर 2010 को हुए थे. इन दंगों में मुसलमानों की भीड़ ने हिंदुओं पर हमला कर दिया था. इस भीड़ ने कई हिन्दू मंदिरों को तोड़ दिया था और उन मंदिरों में पड़े हुए खजाने को लूट लिया था. इससे पहले भी 2007 में ऐसे ही दंगे पश्चिम बंगाल में हुए थे.

असम दंगे, सन 2012

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यह दंगे जुलाई 2012 को भारतीय बोडोस और बांग्लादेश से भारत आ रहे मुसलमानों के बीच हुए थे. इन हिंसक दंगों में 80 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गयी थी. इन दंगों में 1 लाख से ज़्यादा लोग बेघर हो गए थे, जिन्होंने अभी तक राहत शिवरों में शरण ली हुई है. असम नरसंहार मानव की मानव के खिलाफ क्रूरता का एक उदाहरण है.

मुज़फ्फरनगर दंगे, सन 2013

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यह दंगे भी हिंदू और मुसलमानों के बीच उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर शहर में हुए थे. इन दंगों में 48 लोगों की जान गयी थी और 93 लोग घायल हुए थे.

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सरदार पटेल के बारे में जानने योग्य 8 बातें

सरदार पटेल को भारत में ‘लौह पुरुष’ या “बिस्मार्क ऑफ़ इंडिया” के नाम से भी जाना जाता है, सरदार पटेल, भारत के सबसे प्रभावशाली राजनेता थे. भारत की स्वतंत्रता संग्राम में उनका महत्वपूर्ण योगदान है. भारत की आज़ादी के बाद वह प्रथम गृह मंत्री और उपप्रधानमंत्री बने. आज हम आपको बताने जा रहे हैं, उनके बारे में 10 तथ्य, जिनके बारे में आपने कभी भी नहीं सुना होगा.

महात्मा गांधी से अच्छे संबंध

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सरदार पटेल के महात्मा गांधी जी से बहुत अच्छे संबंध थे. जब महात्मा गांधी की मृत्यु हुई, तो सरदार पटेल को उनके निधन से बहुत गहरा सदमा पहुंचा था. महात्मा गांधी के निधन के 2 महीने बाद ही सरदार पटेल का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था.

उनका जन्म एक किसान के घर में हुआ था और उनका स्वभाव भी किसानों जैसा था

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सरदार पटेल का जन्म एक किसान के घर हुआ था और उनका परिवार रानी झाँसी की सेना में भी रह चुका था. वह बचपन में अपने पिता के साथ खेतों में काम करते थे और महीने में दो बार उपवास भी रखते थे.

उनके द्वारा प्रिवी पर्स के भुगतान की गारंटी देना

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वह एक ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने संविधान सभा में प्रिवी पर्स के भुगतान की गारंटी का मुद्दा उठाया था. लेकिन उस समय कांग्रेस द्वारा इस प्रस्ताव को ख़ारिज कर दिया गया था.

उनकी जन्म तिथि का कोई रिकॉर्ड नहीं

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सरदार पटेल के जन्म की वास्तविक तिथि का कोई रिकॉर्ड नहीं है. 31 अक्टूबर को उनका जन्म-दिवस मनाया जाता है, इस तारीख का रिकॉर्ड भी असल में उनकी मैट्रिक की परीक्षा पेपर से लिया गया था.

सरदार पटेल बूबोनिक प्लेग से ग्रस्त थे

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एक समय था, जब गुजरात में बूबोनिक प्लेग फैल गया था, जिससे पटेल का एक अच्छा मित्र भी इस प्लेग की चपेट में आ गया था, अपने मित्र की मदद के लिए पटेल उसकी देखभाल करने लगे और फिर वह भी इस प्लेग की चपेट में आ गए. इसके बाद वह तुरंत अपने परिवार से दूर चले गए और एक मंदिर में जाकर रहने लगे और ठीक होने के बाद ही वापिस घर लौटे थे.

आरएसएस के अस्तित्व का विरोध करना

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यह तथ्य बहुत कम भारतीय जानते होंगे. भारत के इस प्रथम ग्रह मंत्री ने आरआरएस पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी. उन्होंने आरएसएस को हार्ड लाइन हिंदू गुट कहा था, जो भारत के महान नेता महात्मा गांधी की हत्या का ज़िम्मेदार था.

नेहरू के साथ अंतिम टकराव

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हालांकि सरदार पटेल और जवाहरलाल नेहरु के बीच राजनीती को लेकर कई टकराव हुए थे. इसमें सबसे बड़ा टकराव था, जब नेहरु ने सरदार पटेल पर सांप्रदायिक नेता होने का आरोप लगाया था. इस आरोप के बाद पटेल ने नेहरु से कभी भी बातचीत नहीं की.

भारत के सिविल सेवकों के संरक्षक संत

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उनको हमेशा लगता था कि भारत को एक मज़बूत नौकरशाही सेटअप की ज़रूरत है. उन्होंने भारत में भारतीय प्रशासनिक सेवा (Indian Administrative Service) शुरू कर के एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. इससे पहले अंग्रेजों द्वारा भारत में भारतीय सिविल सेवा (Indian Civil Service) चलाई जाती थी.

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भारतीय लोक-कला और जनजातीय कला को दर्शाते यह चित्र

भारत विभिन्नताओं वाला देश है. लोक-कला भारत का एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है. आज हम आपके सामने लेकर आए हैं, भारत की लोक-कला और जन-जातीय कला को दर्शाते कुछ चित्र.

लघु कला

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लघु कला, राजस्थान के बीकानेर और जयपुर शहर में बहुत प्रचलित है. लघु कला के चित्रों को हाथों से नाजुक ब्रश से अलग-अलग रंगों के साथ बनाया जाता है. यह चित्र अकार में छोटे होते हैं. इन चित्रों में इस्तेमाल होने वाले रंग खनिज, सब्जियों, कीमती पत्थरों, शुद्ध सोने और चांदी से निकाले जाते हैं.

बाटिक कला

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भारत की बाटिक कला बंगाल से भारत में आई थी. यह कला हज़ारों साल पुरानी है. बाटिक कला को अलग-अलग विधियों से बनाया जाता है, जैसे कि छप विधि (splash method), स्क्रीन प्रिंटिंग विधि (screen printing method) और हाथों से बनाया जाता है. इस कला में कलाकार अपनी रचनात्मकता और कल्पना को अच्छी तरह से दिखा सकते हैं.

गोंड पेंटिंग्स

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भारत के मध्य प्रदेश में गोंड पेंटिंग्स बहुत प्रसिद्ध है. इन चित्रों में मध्य प्रदेश के गाँव वासी अपने धर्म के प्रति भावनाओं को दर्शाते हैं. गोंड पेंटिंग्स में भारत के अलग-अलग त्योहार, जैसे कि करवा चौथ, दीपावली, अहोई अष्टमी, नाग पंचमी आदि के चित्र आते हैं. यह चित्र औरतों द्वारा घरेलू रंगों से बनाए जाते हैं.

कलमकारी चित्रकारी

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भारत में कलमकारी चित्रकारी एक प्रसिद्ध लोक-कला है. इस कला में कपड़े के ऊपर कलम से चित्र बनाए जाते हैं. आंध्रप्रदेश कलमकारी के चित्र बनाने में बहुत प्रसिद्ध है. इस कला में सब्जियों के रंगों से धार्मिक चित्र बनाए जाते हैं.

मधुबनी चित्रकला

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मधुबनी चित्रकला, उत्तर भारत में सर्वप्रिय चित्रकला है. बिहार में मधुबनी एक छोटा सा गाँव है, जहां मधुबनी चित्रकला बहुत प्रसिद्ध है. यह चित्र हिंदू देवी-देवताओं द्वारा लगाने वाली शाही अदालतों को दर्शाते हैं. इन चित्रों में किसी भी जगह को खाली नहीं छोड़ा जाता, खाली बची जगह में फूल, जानवर बनाए जाते हैं. इन चित्रों में इस्तेमाल किए गए रंगों का कोई छायांकन (Shading) नहीं होता.

पातचित्र चित्रकारी

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यह चित्रकला, भारत के उड़ीसा राज्य में पड़ते जगन्नाथ मंदिर से पूरे देश में फैली थी. यह कला सदियों पुरानीं है, लेकिन इसको आज भी अभ्यास में लाया जाता है. यह चित्रकला उड़ीसा में बहुत लोकप्रिय है. इस चित्रकला में ज़्यादातर हिंदू देवताओं की तस्वीरें बनाई जाती है.

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मंडला चित्रकारी एक बौद्ध लोक कला चित्रकारी है. यह कला बौद्ध गुरुओं को पेंटिंग्स पर दर्शाती है. मंडला चित्रकारी, भारत में एक अनुष्ठान का प्रतीक है. मंडला चित्र को भारत में आध्यात्मिक मार्गदर्शन उपकरण के रूप में भी माना जाता है.

जनजातीय कला वार्ली

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वार्ली कला हमेशा लोगों के समूहों में शामिल है. कलाकार इस तरह के चित्र ज़्यादातर प्रकृति को देखकर बनाते हैं. इस कला के चित्रों में सबसे मशहूर चित्र शादी और त्योहारों के होते हैं. ज़्यादातर यह चित्र आदिवासियों द्वारा अपने घरों की मिट्टी की दीवारों पर बनाए जाते हैं.

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दिमाग को तेज़ करने के लिए यह 10 उपाय

आपका दिमाग आपकी सबसे मूल्यवान संपत्ति है. आपको हमेशा अपने दिमाग की देखभाल करनी चाहिए. इन 10 उपायों से आप अपने दिमाग की देखभाल कर सकते हैं. आइए जानते हैं दिमाग तेज़ करने के 10 उपाय:-

काम के बीच झपकी लें

काम के बीच झपकी लेने से आपका शरीर फिर से तरो ताज़ा हो जाता है, जिससे आपकी स्मृति में वृद्धि होती है और आपके स्वभाव में भी सुधार आता है. यहां तक कि दिन में सिर्फ 15 मिनट की झपकी आपके दैनिक ज़िंदगी में बड़ा परिवर्तन ला देती है.

बिस्तर जाने से पहले कुछ रचनात्मक करें

जब आप थके हुए होते हो, तो आपका दिमाग अधिक रचनात्मक हो सकता है, तो सोने से पहले अपने पेंट ब्रश से कैनवास पर कुछ रचनात्मक बनाएं या कोई किताब को लिखना शुरू करें. अपने अंदर के कलाकार को बाहर निकालें.

एक समय पर एक ही काम पर ध्यान दें

क्या आप जानते हैं कि आपका दिमाग एक से ज़्यादा कामों पर एक ही समय फोकस नहीं कर सकता? आपको एक समय पर एक ही काम पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए.

कार्डियो और व्यायाम करें

आपने सुना होगा कि कार्डियो आपके शरीर को स्वस्थ और बेहतर बनाती है, लेकिन यह आपके दिमाग के लिए भी फायदेमंद होती है. आपको कार्डियो करने के लिए व्यायामशाला जाने की ज़रूरत नहीं होती. सिर्फ छोटी सी पैदल यात्रा आपके दिमाग के लिए लाभदायक होती है.

हर रोज कागज पर लिखें

एक वैज्ञानिक शोध में पाया गया है कि कागज़ पर बनाए गए नोट्स आपको होशियार बनाते हैं. इसलिए आपको अपने नोट्स कंप्यूटर, टेबलेट्स, मोबाइल फ़ोन पर बनाने की बजाए कागज़ पर बनाने चाहिए.

हर रोज मल्टी विटामिन लें

जैसे आपकी कार को तेल की ज़रूरत होती है, आपके स्मार्टफोन को बैटरी की ज़रूरत होती है, वैसे ही आपके दिमाग को पोषक तत्वों की ज़रूरत होती है. इसलिए आपको अपनी दैनिक ज़िंदगी में मल्टी विटामिन का इस्तेमाल करना चाहिए.

एक नई भाषा सीखो

एक नई भाषा सीखने से आपके दिमाग को बहुत लाभ मिलता है. नई भाषा सीखने से आपका जीवन समृद्ध होता है और आपको नई संस्कृति के बारे में पता चलता है.

दोस्तों के साथ शब्दों के खेल खेलो

स्क्रैबल (Scrabble) या कई ओर शब्द बनाने वाले खेल आपका आईक्यू बढ़ाते हैं. एक शोध में पाया गया है कि शब्द बनाने वाले खेल आपका दिमाग तेज़ करते हैं.

ध्यान लगायें (Meditation)

मैडिटेशन आपके शरीर को विश्राम देने की सबसे प्राचीन विधि है, लेकिन यह आपके शरीर और दिमाग के लिए बहुत फायदेमंद हैं. एक अध्ययन में पाया गया है कि मैडिटेशन आपके दिमाग के हर हिस्से के लिए लाभदायक होती है. इसीलिए आपको हर रोज थोड़ा समय मैडिटेशन के लिए भी लगाना चाहिए.

आशावादी बनें

आशावादी स्वभाव आपकी ज़िंदगी को मज़ेदार बना देता है, लेकिन यह आपके दिमाग के लिए भी लाभदायक है. जब आप सकरात्मक रूप से सोचते हैं, तब आपका दिमाग भी चमत्कारी ढंग से काम करता है, तो हमेशा आशावादी बने रहो.

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ये 11 तरीके नींद लाने में आपकी मदद कर सकते हैं

क्या आप आसानी से सो नहीं पाते? क्या आप अनिद्रा, तनाव या नशे के सेवन से सोने में होने वाली परेशानी से जूझ रहे हैं? यहाँ पर दिए गए नींद लाने में मददगार इन 11 तरीकों को आजमाएं, हो सकता है कि अगली रात को आराम से सो पाएं।

सभी कहते और जानते हैं कि रात को दूध पीने से और नहाने से जल्दी नींद आ जाती है, आदि-2. लेकिन कई लोग इन तरीकों से भी रात को सो नहीं पाते। यहाँ प्रस्तुत हैं नीद लाने में मददगार कुछ टिप्स।

अपने बाएं नथुने से श्वास लें

यह योग पद्धति आपके रक्तचाप (blood pressure) को कम करती है और आपको शांत करती है।  समग्र नींद चिकित्सक पीटर स्मिथ का कहना है “यदि आपको नींद नहीं आ रही तो आपको बाईं ओर लेटकर अपने नाक के दायें नथुने को अंगुली से बंद करें और फिर बांएं नथुने से धीरे धीरे श्वास लें। इससे आपको धीरे-धीरे नींद आने लगेगी।

अपनी मांसपेशियों को आराम दें

शरीर की सारी मांसपेशियों को आराम देने से जल्दी नींद आती है. चिंता(Anxiety) विशेषज्ञ चार्ल्स लिंडन का कहना है कि अपने पीठ के बल लेट जाएँ तथा नाक से लंबी और धीरे-धीरे सांस लें. साथ ही साथ अपने पैरों की उँगलियों को जोर से तलुवों की तरफ भींच कर नीचे की ओर रगड़ें और फिर उँगलियों को ढीला छोड़ दें. इस प्रक्रिया को बार-बार करने से आपको अच्छी नींद आ जाएगी.

जागते रहने की कोशिश करें (Try to stay awake)

अगर आपको रात में नींद नहीं आ रही तो अपने आपको जागते रहने की चुनौती दें. इस प्रक्रिया को विरोधाभास कहा जाता है. मनोचिकित्सक जूली हिर्स्ट का कहना है अपनी आँखों को खुली रखें और यह बार-बार दोहराते रहो “मैं नहीं सोऊंगा”. ऐसा करने से आपकी आँखों की मांसपेशियां में थकान आ जायेगी. जिससे आपको नींद आने लगेगी.

आपने लोगों को बात करते-2 या बैठे-2 सो जाते हुए देखा होगा। वे लोग ऐसा कैसे कर लेते हैं? शायद इसलिए कि वे नींद लेने के बारे में नहीं सोच रहे होते। बल्कि वे थकान के कारण शरीर को आराम की आवश्यकता की सहज प्रवृति के कारण सो जाते हैं। नींद वास्तव में नींद लेने या सोना एक सहज प्रक्रिया है। लेकिन हम लेटकर सोने का प्रयत्न करके इसे असहज बना लेते हैं।

आपने दिन में क्या किया उन सारी चीजों को उल्टे क्रम में सोचें

आपने पूरे दिन क्या कुछ किया उसे उल्टे क्रम (reverse order) में सोचें. जैसे कि आपने शाम को क्या-क्या किया और फिर उससे पहले दोपहर में क्या किया और फिर सुबह में क्या किया. सैमी मार्गो जो कि मशहूर किताब “The Good Sleep Guide” के लेखक हैं, का कहना है ऐसा करने से आपको मस्तिष्क सोने की स्थिति में आ जायेगा.

कल्पना करें (Just Imagine)

दृश ध्यान (Visualisation meditation) तरीका अच्छी तरह से काम करता है यदि आप अपने तीनों सेंस का प्रयोग करें. सैमी का कहना है कि अगर आपको नींद नहीं आ रही तो यह कल्पना कीजिये कि आप स्वर्ग में, बगीचों में या किश्ती में सवार होकर शांत पानी में घूम रहे हैं. ऐसा करने से आपको जल्दी नींद लाने में मदद मिलेगी.

मुख्य मुद्दा खुद को चीज़ें सिखाने और समझाने का है। कुछ अनुशासनात्मक शारीरिक प्रक्रियाएं बोरियत महसूस करने का जरिया होती हैं जिससे नींद लेने में मदद मिल सकती है।

आरामदायक स्थिति में बैठें

एक आरामदायक स्थिति में बैठ जाएँ, अपनी आंखों को बंद कर लें, अपने कंधों को ढीला छोड़ दें, अपने मुख को धीरे से बंद करके अपने जबड़ों को आरामदायक स्थिति में कर लें. अपने नाक से लंबी सांस लें जितना आपको आरामदायक लगता है, लेकिन यह ध्यान रखें ऐसा करते समय आपकी छाती ना फूले. ऐसा करने से आपको आरामदायक नींद आएगी.

कुछ बिन्दुओं को दबाएँ (Press Here)

हमारे शरीर में कई ऐसे विशेष बिंदु (points) होते हैं जिनको दबाने से हमें नींद आ जाती है. डॉ इद्ज़ीकोवस्की (Idzikowski) का कहना है “अपने अंगूठे को अपनी भौहों (eyebrows) के बीच 20 सेकंड तक रखो और फिर आराम से हटाओ. इस प्रक्रिया को दो-तीन बार करने से आपको नींद आने लगेगी.

अपने ट्रिगर को खोजें (Find your trigger)

असामान्य सी चीजें करें जैसे कि अपनी गाल को थप-थपाना. मशहूर थेरापिस्ट शेरोन का कहना है “ अपना सारा ध्यान उन चीजों पर लगाओ जो आप महसूस कर रहे हो” बार-बार ऐसा करने से आपको नींद लाने में मदद मिलेगी.

सोने की प्रक्रिया को मात्र समय या “रात हो चुकी है” आदि के पैमाने से जोड़ कर न देखें। इसे एक सहज प्रक्रिया मान अपने शरीर और प्रकृति के बीच बिठाने का प्रयत्न करें।

गहरी सांस लें (Take a Breather)

स्वभाविक रूप से श्वास लेने से भी आपको नींद आने लग जाती है. “The NightWave Sleep Assistant” जिसकी कीमत 3,246 रुपए है. यह एक ऐसा उपकरण है जो आपके कमरे में लगता है इसमें से नीली रौशनी निकलती है जिसके साथ आप अपनी साँसों को केन्द्रित करते हैं. इससे आपको 7 मिनट्स के भीतर नींद आ सकती है.

अपनी चिंताओं की सूची बनायें (Make a worry list)

बिस्तर पर अपनी कार्य-सूची (to-do list) के बारे में सोचना अनिद्रा का एक मुख्य कारण है. किसी महत्वपूर्ण कार्य को भूलने का डर आपकी अनिद्रा को बढ़ाता हैं. इसलिए सोने से पहले अपनी उन चिंताओं के बारे में सूची बनाने से भी आपको जल्दी नींद आने लगती है। यह नींद लाने में एक प्रमाणित तरीका है।

नींद लाने वाली मशीन

नींद लाने में मददगार इस मशीन में साउंड थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें विभिन्न तरह के साउंड जैसे बारिश, पानी, आसमानी बिजली की गर्जना, समुंदर का साउंड और नींद लाने में प्रामाणिक रूप से मददगार व्हाइट साउंड भी है। इस मशीन की कीमत लगभग 1800 रुपये है। सुनने में आया है कि यह मशीन काफी कारगर है और नींद लाने के लिए इसे आजमाया जा सकता है। एमाजोन की वैबसाइट पर खरीदने के लिए यहाँ क्लिक करें

नींद आने के मंत्र

जो लोग हिन्दू धर्म में पाए जाने वाली मन्त्र शक्ति पर विश्वास करते हैं वे इस मन्त्र के जाप नींद लाने के लिए कर सकते हैं.

ʹशुद्धे-शुद्धे महायोगिनी महानिद्रे स्वाहा।ʹ

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मौत के बारे में व्याप्त अंधविश्वास!

इंसान की मृत्यु अथवा मौत सदा ही एक अनसुलझी पहेली रही है. कुछ लोग मृत्यु को जीवन का अंत मानते हैं, तो कुछ नए जीवन की शुरुआत. लेकिन सच्चाई यह है कि सभी मौत से डरते हैं. कुछ विद्वान तो मृत्यु को सभी डरों का स्रोत मानते हैं, शायद इसी वजह से मृत्यु के बारे में कई तरह की बातें, डर और अंधविश्वास पैदा हुए हैं. यहाँ प्रस्तुत है, मृत्यु से सम्बंधित कुछ अंधविश्वास और विश्वास जो भारतीय समाज में सर्वाधिक प्रचलित हैं.

आँखें खुली होना

आप ने देखा होगा बहुत सारी फिल्मों में जब लोग मरने की एक्टिंग करते हैं, तो वह आँखें खुली रख कर लोगों को यह दिखाते हैं कि वो मर चुके हैं. असल में यह बात अंधविश्वास ही है. यह ज़रूरी नहीं कि जब व्यक्ति की मौत हो, तो उसकी आँखे खुली ही हों. बात जो भी हो, लेकिन मरे हुए व्यक्ति की आँखें खुली रखना बुरा माना जाता है.

कुत्ते का रोना

भारत के कुछ हिस्सों में कुत्ते के रोने को मौत के संकेत के तौर पर देखा जाता है. माना जाता है कि कुत्ते वह देख पाते हैं, जो मनुष्य नहीं देख पाते, जैसे कि यमदूत. वैसे कुत्ते अक्सर कुछ ख़ास वजह से रोते हैं, जैसे कि दर्द-पीड़ा की स्थिति में अथवा संसर्ग काल में भी बंधे हुए कुते या कुतिया. वैसे माना जाता है कि जानवर छठी इंद्री के द्वारा वह देख सकता है, तो मनुष्य नहीं देख पाते.. फिर भी कभी कुत्ते के रोते हुए स्थान आस-पास किसी की मौत होने से यह अंधविश्वास जुड़ गया होगा.

अंतिम संस्कार के बाद शुद्धिकरण

कई भारतीय गांवों में, किसी व्यक्ति के अंतिम संस्कार में शामिल व्यक्ति को तब तक अछूत माना जाता है, जब तक वह नहा-धोकर नए वस्त्र नहीं पहन लेता. यहाँ तक कि घर वाले भी उसे छूने में परहेज़ करते हैं. यह प्रथा प्राचीन काल में किसी मृत व्यक्ति की छूत की बीमारी से मौत होने के दुषप्रभाव से बचने के लिए थी, जो आज भी वैसे ही जारी है, भले ही किसी स्वस्थ व्यक्ति की मौत अचानक कोई दुर्घटना में हुई हो.

मृत्यु वाले घर में खाना न बनना

भारत के कई हिस्सों में मृत्यु वाले घरों में कुछ निश्चित दिनों तक खाना नहीं बनता. पड़ोसी अपने-अपने घरों से खाना बना कर लाते हैं और लोगों को खिलाते हैं. ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि अपने प्रियजन की मृत्यु होने पर किसी का मन खाने पीने में नहीं करता, न ही खाना बनाने में. पड़ोसी इसमें मदद करते हैं, जो सामाजिक सदभाव का प्रतीक है.

अपने सांस को रोक कर रखना

एक ओर अंधविश्वास यह भी है कि अगर आप कब्रिस्तान या शमशान के पास से गुज़र रहे हैं, तो आपको उस समय तक अपनी सांस को रोके रखना चाहिए, जब तक कब्रिस्तान गुज़र नहीं जाता. ऐसा समझा जाता है कि कब्रिस्तान के आस-पास मरे हुए लोगों की आत्माएं होती हैं और अगर आप कब्रिस्तान के पास से सांस लेते हुए जाएंगें, तो कोई आत्मा आपके शरीर के अंदर प्रवेश कर जाएगी.

गरज के साथ बारिश

यह माना जाता है कि मरने के बाद लोगों की आत्मा ऊपर जाती है. अगर अंतिम संस्कार वाले दिन बारिश हो रही हो, तो वह इस बात को मृत व्यक्ति की आत्मा के लिए शुभ संकेत नहीं मानते. वहीँ दूसरी ओर कुछ लोग इसे शुभ भी मानते हैं.

दक्षिण दिशा की और पैर करना

लोगों को यह भी अंधविश्वास होता है कि अगर मृत व्यक्ति के शरीर के सर को पूर्व दिशा की तरफ रखकर रखा या जलाया/दफनाया गया, तो मृत व्यक्ति की अच्छी ‘गति’ होती है . अगर मृत व्यक्ति के शरीर के पैरों को पूर्व दिशा में रखकर जलाया/दफनाया जाए, तो यह उसके पुनर्जन्म के लिए अच्छा होता है.

कब्र पर फूल रखना

मृत व्यक्ति की कब्र के ऊपर फूल क्यों रखे जाते हैं ? इस बात पर लोगों के पास कोई तर्क नहीं है. सैंकड़ों साल पहले, जब मृत लोगों के शरीर को कब्र में ना रखकर खुले में रखा जाता था, तो उनके शरीर से आने वाली गंध को रोकने के लिए उनके ऊपर फूल रखे जाते थे, लेकिन आधुनिक युग में शरीर को बक्से में रखा जाता है, जिससे मृत व्यक्ति के शरीर से गंध नहीं आती. लेकिन लोग आज भी अंधविश्वास के कारण कब्र पर फूल रखते हैं.

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अदभुत वैज्ञानिक तथ्य!

यह दुनिया बहुत से रहस्यों और रोचक जानकारियों से भरी पड़ी है, जिन पर यकीन कर पाना मुश्किल होता है. आज हम आपके सामने कुछ ऐसे ही मज़ेदार और हैरान कर देने वाले अदभुत वैज्ञानिक तथ्य लेकर आएं हैं, जो आप अब तक नहीं जानते होंगे.

  1. शुक्र ग्रह पर एक दिन, पृथ्वी के एक वर्ष से भी बड़ा होता है.
  2. टमाटर में मानव से भी अधिक जीन होते हैं.
  3. परजीवी और पौदों के समुदाय एक दुसरे से बातचीत करके अनुवांशिक जानकारी सांझा करते हैं.
  4. दोस्त, आपस में अजनबियों से भी ज़्यादा डीएनए सांझा करते हैं.
  5. आलू में मनुष्य की तुलना से अधिक गुणसूत्र (chromosomes) होते हैं.
  6. चाँद पर आपका वजन पृथ्वी पर वजन की तुलना में सिर्फ 16.5 प्रतिशत होगा.
  7. पृथ्वी का सबसे गहराई वाला हिस्सा 24.5 एम्पायर स्टेट बिल्डिंग जितना गहरा है.
  8. सूरज, चाँद की तुलना में पृथ्वी से 400 गुना ज़्यादा दूरी पर स्थित है.
  9. हमारे पैरों में 2,50,000 से भी ज़्यादा पसीना निकालने वाली ग्रंथियां होती हैं.
  10. मनुष्य, केले के साथ 50 प्रतिशत डीएनऐ सांझा करता है.
  11. यूरेनस ग्रह पर गर्मियां 45 साल लंबी होती हैं.
  12. नेपच्यून पहला ऐसा ग्रह था, जिसके अस्तित्व को गणना के माध्यम से पता लगाया था, ना कि दूरबीन के माध्यम से.
  13. सूरज की रौशनी को धरती तक पहुंचने में सिर्फ 8 मिनट और 20 सेकंड लगते हैं.
  14. ध्वनि तरंगों का इस्तेमाल वस्तुओं को हवा में उड़ाने के लिए भी किया जा सकता है.
  15. वायरस भी दुसरे वायरस के चपेट में आ सकते हैं.
  16. प्लूटो को सूरज का चक्कर लगाने में 248 साल लगते हैं.
  17. अगर आप शनि ग्रह को पानी में डाल देंगे, तो यह नाव की तरह पानी के ऊपर तैरने लगेगा.
  18. चाँद एक साल में पृथ्वी से 1.48 इंच दूर हो जाता है.
  19. 87 प्रतिशत वैज्ञानिक सोचते हैं कि जलवायु परिवर्तन लोगों द्वारा किए जाने वाले कार्य की वजह से होता है, जबकि केवल 50 प्रतिशत लोग ही ऐसा सोचते है.
  20. आप के द्वारा दान किया हुआ शरीर फॉरेंसिक अनुसंधान, चिकित्सा प्रशिक्षण, क्रैश परिक्षण और अंग प्रत्यारोपण के प्रयोगों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.

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