850 साल पुराना नोट्रे डेम गिरजाघर

प्रतिवर्ष लाखों पर्यटक नोट्रे डेम गिरजाघर की खूबसूरत स्थापत्य कला को निहारते है. हालांकि कुछ लोगों को संदेह है कि पर्यटकों की अधिक संख्या इसके लिए खतरा बनती जा रही है. सामने से इसके लिए खतरा बनती जा रही है. सामने इस विख्यात गिरिजाघर को देखने पर नहीं लगता कि यह किसी भी तरह की संरचनात्मक समस्या से ग्रस्त है. इसके अग्र भाग तथा दो मीनारों की 1990 के दशक में ही साफ़ किया गया था और पहली नज़र में इसकी हालत अच्छी लगती है.

ईमारत को पहुंचे नुक्सान को दिखाते हुए ‘ फ्रेंड्स आफ नोट्रे डेम डी पैरिस’ के अध्यक्ष मिशेल पिकाड कहते है,” गिरिजाघर के अग्र भाग के जीणोंद्वार ने इसके बाकी हिस्सों की समस्या को कुछ हद तक छिपा दिया है”.

कमानियों जैसे डिज़ाइन में लगे पथरों पर मौसम तथा वायु प्रदुषण की मार का असर हुआ है और इसका एक हिस्सा गिर चूका है जबकि कुछ हिस्सों को अस्थायी निर्माण से सहारा देकर खडा किया गया है.

परनालों ने अपना रूप खो दिया है और बारिश का पानी मुख्य मीनार में लीक हो चूका है, जिससे पूरी छत को खतरा पैदा हो गया है. कुछ जगहों पर पत्थरों के हिस्से निचली छतों पर गिरे हुए है. मिशेल के अनुसार यह चिंताजनक स्थिति है और वास्तव में कुछ करने का वक़्त आ चुका है.

नोट्रे डेम गिरजाघर 850 वर्ष से अधिक पुराना है जिसका नींव पत्थर 12वीं सदी में रखा गया था. विक्टर ह्यूगो के 1831 में रचित उपन्यास ‘द हचबैक आफ नोत्रे डैम’ की कहानी इसी विख्यात गिरजाघर के इर्द-गिर्द बुनी गई थी. उसमे भी इस इमारत की खस्ता हालत का ज़िक्र मिलता है.

ह्यूगो ने लिखा था,” निश्चित रूप से पैरिस का नोत्रे डैम गिरजाघर एक शानदार इमारत है और जैसे जैसे यह महान इमारत बूढी हो रही है,अफ़सोस होता है कि वक़्त और इंसानों दोनों की मार से इसकी हालत खराब हो गई है.

चूँकि राज्य सरकार से मिलने वाले रख रखाव के बजट में बड़े स्तर पर जीणोंद्वार शामिल नहीं होगा. मिशेल ने सीन नदी पर स्थित इस ऐतिहासिक संरचना को बचाने के लिए निजी दान के रूप में 780 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य निर्धारित किया है.

फ्रेंड्स ऑफ नोत्रे डैम की सथापना इस गिरजाघर के संरक्षण के इच्छुक लोगों को एक मंच पर लाने के लिए हुई थी, फिर चाहे वे अमेरिकी में ही क्यों न रहते हो. फ्रांसीसीयों को अमेरिकियों से विशेष सहायता मिलने की आस है जो पेरिस से जुडी सभी चीज़ों में विशेष रुचि व उत्साह रखते है. साथ ही धर्मार्थ दान देने वाली अमेरिकी परम्पराओं पर भी उन्हें भरोसा है. अगले कुछ वर्षों  में इस गिरजाघर के संरक्षण में करोरों रूपए लगने की सम्भावना जताई जा रही है जिसका एक तिहाई हिस्सा राज्य सरकार देगी. राज्य ने इसके लिए वार्षिक अनुदान को 16 करोड़  रूपए से बढाकर 32 करोड़ रूपए इस शर्त पर कर दिया है कि ज़रुरत के शेष हिस्से को निजी स्रोतों से जुटाया जाएगा.

दूसरी और गिरजाघर  आने वाले पर्यटकों से फीस लेने के प्रस्ताव पर हाल ही में गर्मागर्म बहस छिड गई थी. फ्रांसीसी चर्च ने इस विचार को सिरे से ख़ारिज करते हुए कहा है कि नोत्रे डैम को देखना नि:शुल्क रहना चाहिए.

 

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