श्रावण मास विशेष: जानिए सबसे पहले कांवड़ यात्रा की शुरुआत कैसे हुई और इससे जुड़े कुछ प्रमुख नियम

सावन आते ही शुरू हो जाती है कांवड़ यात्रा। सैकड़ों कांवड़िये कांवड़ में जल भर करके मीलों की दूरी तय करके शिव धाम पहुंचकर शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि कांवड़ यात्रा की शुरुआत कैसे हुई या फिर किसने शुरू की यह प्रथा? साथ ही सबसे पहले कांवड़ से जल भर करके शिवलिंग का जलाभिषेक किसने किया?

कांवड़ियों के लिए बागपत के पुरा महादेव मंदिर का इतना महत्‍व क्‍यों है? कांवड़ यात्रा की शुरुआत कैसे हुई, इसके बारे में अलग- अलग मान्यताएं प्रचलित हैं। आइए जानते हैं कांवड़ यात्रा के बारे में प्रचलित मान्यताएं।

  • कुछ विद्वानों का मानना है कि त्रेता युग में श्रवण कुमार हिमाचल के उना क्षेत्र से अपने माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार लाए और उन्हें गंगा स्नान कराया था। वापसी में वे अपने साथ गंगाजल भी ले गए और इसे ही कावड़ यात्रा की शुरुआत माना जाता है।
  • कुछ अन्‍य मान्‍यताओं के अनुसार सबसे पहले प्रभु श्री राम ने शिव का जलाभिषेक किया। श्रीराम ने बिहार के सुल्तानगंज से कांवड़ में गंगाजल भरकर, बाबाधाम में शिवलिंग का जलाभिषेक किया था।
  • पुराणों के अनुसार समुद्र मंथन से निकले विष को पी लेने के कारण भगवान शिव का कंठ नीला हो गया और वे नीलकंठ कहलाए। विष के प्रभाव को खत्म करने के लिए लंका के राजा रावण ने कांवड़ में जल भरकर बागपत स्थित पुरा महादेव में भगवान शिव का जलाभिषेक किया था।
  • यह भी मान्यता है कि विष के प्रभावों को दूर करने के लिए देवताओं ने सावन में शिव पर मां गंगा का जल चढ़ाया था और तब कांवड़ यात्रा का प्रारंभ हुआ।
  • कांवड़ यात्रा को लेकर प्रचलित मान्यताओं में से एक वेस्ट यूपी से भी जुड़ी हैं। मान्यता है कि सबसे पहले भगवान परशुराम ने बागपत के पास स्थित पुरा महादेव मंदिर में कावड़ से गंगाजल लाकर जलाभिषेक किया था। जलाभिषेक करने के लिए भगवान परशुराम गढ़मुक्तेश्वर से गंगाजल लेकर आए थे।

बागपत-मेरठ जिला सीमा पर हिंडन के तट पर स्थित इस मंदिर के बारे में माना जाता है कि इसे भगवान परशुराम ने स्‍थापित किया था। यही वजह है कि कांवड़ियों के लिए महादेव के मंदिर का खास महत्‍व है। बागपत के पुरा महादेव मंदिर में हर साल लाखों कांवड़िये पहुंचते हैं।

कांवड़ यात्रा के प्रमुख नियम

  • कांवड़ यात्रा के दौरान किसी भी तरह का नशा, मांस मदिरा या तामसिक भोजन नहीं करना चाहिए। कांवड़ यात्रा पूरी तरह पैदल की जाती है। यात्रा प्रारंभ होने से लेकर पूर्ण होने तक सफर पैदल ही किया जाता है। यात्रा में वाहन का प्रयोग नहीं किया जाता।
  • कांवड़ में गंगा या किसी पवित्र नदी का ही जल ही रखा जाता है, किसी कुंवे या तालाब का नहीं। कावड़ को हमेशा स्नान करने के बाद ही स्पर्श करना चाहिए और ध्यान रखना चाहिए कि यात्रा के समय कांवड़ या आपसे चमड़ा स्पर्श ना हो। कावड़ियों को हमेशा जत्थे के साथ ही रहना चाहिए।
  • कांवड़ यात्रा के दौरान ध्यान रखना चाहिए कि अगर आप कहीं रुक रहे हैं तो कांवड़ को भूमि या किसी चबूतरे पर ना खें। कांवड़ को हमेशा स्टैंड या डाली पर ही लटकाकर रखें। अगर गलती से जमीन पर कांवड़ को रख दिया है तो फिर से कांवड़ में पवित्र जल भरना होता है।
  • कांवड़ यात्रा करते समय पूरे रास्ते बम बम भोले या जय जय शिव शंकर का उच्चारण करते रहना चाहिए। साथ ही यह भी ध्यान रखना चाहिए कि कांवड़ को किसी के ऊपर से लेकर ना जाएं।

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जानिए क्यों किए जाते हैं सावन महीने के व्रत – क्या है महत्व और इस पवित्र महीने की विशेषताएं

सावन का महीना मतलब चारों तरफ हरियाली। इस बार सावन का महीना 4 जुलाई से शुरू हो रहा है और 31 अगस्त तक रहेगा। इस बार सावन के महीने में चार सोमवार पड़ेंगे, सावन का महीना भगवान शिव को बहुत प्रिय होता है।

सावन में सोमवार के व्रत रखने का विशेष महत्व बताया गया है। कहा जाता है कि सोमवार व्रत को करने से भगवान शिव प्रसन्न होकर अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण कर देते हैं। सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से भी सावन सोमवार व्रत रखने की मान्यता है।

सावन महीने का महत्व

भगवान शिव के प्रिय महीने सावन में शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। भक्त सावन सोमवार के व्रत रखते हैं। इस दिन को सावन की सोमवारी के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि इस व्रत को करने से भगवान शिव प्रसन्न होकर अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

सावन के महीने में भक्त गंगा नदी या अन्य पवित्र नदियों से जल लाते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं, जिसके द्वारा देवो के देव महादेव को प्रसन्न करने का प्रयास किया जाता है।

सावन सोमवार 2023 की तिथियां-

हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन का महीना 04 जुलाई से शुरू होगा। अधिकमास के कारण सावन में 8 सोमवार रहेंगे.

  • 10 जुलाई- सावन का पहला सोमवार
  • 17 जुलाई- सावन का दूसरा सोमवार
  • 24 जुलाई- सावन का तीसरा सोमवार
  • 31 जुलाई- सावन का चौथा सोमवार
  • 07 अगस्त – सावन का पांचवा सोमवार
  • 14 अगस्त- सावन का छठा सोमवार
  • 21 अगस्त-  सावन का सातवां सोमवार
  • 28 अगस्त- सावन का आठवां सोमवार
  • 31 अगस्त- सावन समाप्त

विशेषताएं

  • सावन मास में भगवान शिव की पूजा-आराधना का विशेष विधान है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह महीना वर्ष का पांचवां माह है और अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार सावन का महीना जुलाई-अगस्त में आता है।
  • सावन के पावन मास में शिव भक्तों के द्वारा कांवड़ यात्रा का आयोजन किया जाता है। इस दौरान लाखों शिव भक्त देवभूमि उत्तराखंड में स्थित शिवनगरी हरिद्वार और गंगोत्री धाम की यात्रा करते हैं। वे इन तीर्थ स्थलों से गंगा जल से भरी कांवड़ को अपने कंधों पर रखकर पैदल लाते हैं और बाद में वह गंगा जल शिव को चढ़ाया जाता है। सालाना होने वाली इस यात्रा में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं को कांवरिया अथवा कांवड़िया कहा जाता है।
  • इस दौरान सावन सोमवार व्रत का सर्वाधिक महत्व बताया जाता है। दरअसल श्रावस मास भगवान भोलेनाथ को सबसे प्रिय है। इस माह में सोमवार का व्रत और सावन स्नान की परंपरा है। श्रावण मास में बेल पत्र से भगवान भोलेनाथ की पूजा करना और उन्हें जल चढ़ाना बहुत फलदायी माना गया है।
  • शिव पुराण के अनुसार जो कोई व्यक्ति इस माह में सोमवार का व्रत करता है भगवान शिव उसकी समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं। सावन के महीने में लाखों श्रद्धालु ज्योर्तिलिंग के दर्शन के लिए हरिद्वार, काशी, उज्जैन, नासिक समेत भारत के कई धार्मिक स्थलों पर जाते हैं।
  • सावन के महीने का प्रकृति से भी गहरा संबंध है क्योंकि इस माह में वर्षा ऋतु होने से संपूर्ण धरती बारिश से हरी-भरी हो जाती है। ग्रीष्म ऋतु के बाद इस माह में बारिश होने से मानव समुदाय को बड़ी राहत मिलती है। इसके अलावा सावन मास में कई पर्व भी मनाए जाते हैं।
  • भारत के पश्चिम तटीय राज्यों (महाराष्ट्र, गोवा एवं गुजरात) में श्रावण मास के अंतिम दिन नारियल पूर्णिमा मनायी जाती है।
  • पौराणिक मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि जब देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन हो रहा था तब उस मंथन से 14 रत्न निकले। उन चौदह रत्नों में से एक हलाहल विष भी था, जिससे सृष्टि नष्ट होने का भय था। तब सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान शिव ने उस विष को पी लिया और उसे अपने गले से नीचे नहीं उतरने दिया। विष के प्रभाव से महादेव का कंठ नीला पड़ गया और इसी कारण उनका नाम नीलकंठ पड़ा। कहते हैं रावण शिव का सच्चा भक्त था। वह कांवर में गंगाजल लेकर आया और उसी जल से उसने शिवलिंग का अभिषेक किया और तब जाकर भगवान शिव को इस विष से मुक्ति मिली।
  • सावन मास शिवजी के साथ मां पार्वती को भी समर्पित है। भक्त सावन महीने में सच्चे मन और पूरी श्रद्धा के साथ महादेव का व्रत धारण करता है, उसे शिव का आशीर्वाद अवश्य प्राप्त होता है। विवाहित महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाने और अविवाहित महिलाएं अच्छे वर के लिए भी सावन में शिव जी का व्रत रखती हैं।
  • सावन के इस पवित्र महीने में भक्तों के द्वारा तीन प्रकार के व्रत रखे जाते हैं:
  1. सावन सोमवार व्रत : श्रावण मास में सोमवार के दिन जो व्रत रखा जाता है उसे सावन सोमवार व्रत कहा जाता है। सोमवार का दिन भी भगवान शिव को समर्पित है।
  2. सोलह सोमवार व्रत : सावन को पवित्र माह माना जाता है इसलिए सोलह सोमवार के व्रत प्रारंभ करने के लिए यह बेहद ही शुभ समय माना जाता है।
  3. प्रदोष व्रत : सावन में भगवान शिव एवं मां पार्वती का आशीर्वाद पाने के लिए प्रदोष व्रत प्रदोष काल तक रखा जाता है।

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सावन में एक बार जरूर करें रुद्राभिषेक, होते हैं विशेष लाभ!!

भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए रुद्राभिषेक सर्वोत्म उपाय है। रुद्राभिषेक का अर्थ रुद्र आर्थात भगवान शिव का अभिषेक करने से है। शिवरात्रि, प्रदोष और सावन के महीने में रुद्राभिषेक करने का विशेष महत्व होता है।

रुद्राभिषेक को लेकर ऐसी मान्यता है कि इससे हमारी कुंडली के महापाप भी जलकर भस्म हो जाते हैं और हम में शिवत्व का उदय होता है, भगवान शिव का शुभाशीर्वाद प्राप्त होता है।

सभी मनोरथ पूर्ण करने के लिए एकमात्र सदाशिव रुद्र के पूजन से सभी देवता स्वत: ही प्रसन्न हो जाते हैं। आज इस पोस्ट में हम आपको रुद्राभिषेक से होने वाले विशेष लाभ के बारे में बताने जा रहे हैं। तो चलिए जानते हैं:-

  • असाध्य रोगों को शांत करने के लिए कुशोदक से रुद्राभिषेक करें।
  • भवन-वाहन की मनोकामना पूर्ण करने के लिए दही से रुद्राभिषेक करें।
  • लक्ष्मी प्राप्ति के लिए गन्ने के रस से रुद्राभिषेक करें। सावन के महीने में आपको धन की प्राप्ति होगी। इसके अलावा धन वृद्धि के लिए शहद और घी से अभिषेक करें।
  • तीर्थ के जल से अभिषेक करने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • इत्र मिले जल से अभिषेक करने से बीमारी नष्ट होती है।
  • पुत्र प्राप्ति के लिए दुग्ध से और यदि संतान उत्पन्न होकर मृत पैदा हो तो गोदुग्ध से रुद्राभिषेक करें। ऐसा करने से आपको जल्द ही स्वस्थ संतान की प्राप्ति होगी।
  • सरसों के तेल से अभिषेक करने पर शत्रु पराजित होता है। गोदुग्ध से तथा शुद्ध घी द्वारा अभिषेक करने से आरोग्यता प्राप्त होती है।

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सावन के महीने में नहीं करना चाहिए इन चीज़ों का सेवन, जानिए क्या है धार्मिक और वैज्ञानिक मान्यताएं?

सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है और इस महीने में पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ महादेव की पूजा की जाती है। इसके साथ ही सावन के महीने में कुछ चीजों का सेवन करने को मना किया जाता है।

इनमें दूध, दही, बैंगन और हरी पत्तेदार सब्जियां प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके अलावा लहसुन, प्याज और मांस मदिरा का सेवन करने से भी रोका जाता है।

आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि इन चीजों को न खाने के पीछे क्या कारण है और क्या कहती हैं धार्मिक मान्यताएं:-

दूध, दही

लोगों के बीच में दूध, दही को लेकर ऐसी धार्मिक मान्यता प्रचलित है कि सावन में दूध और दही से भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है, इसलिए ऐसा मानते हैं कि दूध और दही खाने से बचना चाहिए।

वहीं इसके पीछे वैज्ञानिक तर्क यह भी है कि सावन का महीना बारिश का होता है और इस महीने में घास और पेड़-पौधों पर कई प्रकार के कीड़े-मकोड़े पनपते हैं। इस घास और पौधों को गाय-भैंस के चारे के तौर पर खाती हैं।

इस तरह ये कीड़े घास-फूस के साथ इनके पेट में पहुंचने का डर होता है और यहां से ये दूध में भी मिल सकते हैं। इसलिए दूध पीने को मना किया जाता है। दूध से ही दही और पनीर बनता है कि इसलिए डेयरी उत्पादों को खाने से रोका जाता है।

नमक को क्यों कहा जाता है न

सावन के महीने में कुछ लोग धार्मिक कारणों से नमक का त्याग कर देते हैं या फिर नमक का प्रयोग केवल एक वक्त के खाने में करते हैं।

वैज्ञानिक तर्क यह है कि इस बारिश के इस मौसम में हमारे शरीर में सोडियम की मात्रा पहले से ही काफी बढ़ी रहती है। ऐसे में सोडियमयुक्त नमक लेना आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। अगर आप नमक छोड़ नहीं सकते हैं तो सावन के महीने में सेंधा नमक का प्रयोग करें तो बेहतर होगा।

बैंगन और पत्तेदार सब्जियां

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ लोग सावन में बैंगन और पत्तेदार सब्जियां नहीं खाते हैं। बैंगन को धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अशुद्ध माना जाता है। तो वहीं विज्ञान कहता है कि सावन के महीने में बैंगन में कीड़े पड़ जाते हैं।

वहीं हरी पत्तेदार सब्जियों में भी कीड़े लग जाते हैं। अगर आप इन सब्जियों को खाएंगे तो संभव है कि आपके पेट में जाकर ये कीड़े और बैक्टीरिया बीमारी पैदा कर सकते हैं।

प्याज, लहसुन

धार्मिक मान्यताएं कहती हैं कि सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति का महीना होता है और ऐसे में हमें प्याज लहसुन नहीं खाना चाहिए। ये वस्तुएं हमें सत्कर्म के मार्ग से भ्रमित करती हैं।

वहीं वैज्ञानिक तर्क यह है कि सावन के महीने में हमारा पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है। ऐसे में प्याज और लहसुन से बनी सब्जियां अधिक गरिष्ठ होने की वजह से खाना पचा पाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है।

मांस मदिरा

इन वस्तुओं को तामसिक चीजों को श्रेणी में रखा जाता है जो कि आपके मन को भक्ति के मार्ग से भटकाकर गलत दिशा में धकेलती हैं। इसलिए सावन के महीने में मांस और मदिरा के सेवन को मना किया जाता है।

इसके साथ ही सावन में लाल मिर्च के स्थान पर हरी मिर्च और काली मिर्च खाने को कहा जाता है। मान्यता है कि अधिक मसालेदार भोजन खाने से मन में बुरे विचार आते हैं।

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आज से शुरू हो रहा है सावन का महीना, जाने कैसे करें महादेव की पूजा-अर्चना

हिंदू धर्म में सावन का महीना बहुत महत्वपूर्ण होता है। ये महीना विशेष रूप से भगवान शिव को समर्पित होता है। शिवभक्तों के लिए ये महीना बहुत महत्वपूर्ण होता है।

कहते हैं कि इस महीने में विधि- विधान से भगवान शिव की पूजा करने से आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। सावन का महीना 4 जुलाई को शुरू होगा और 31 अगस्त तक चलेगा, वहीं सावन के पहला सोमवार 10 जुलाई 2023 को पड़ेगा।

मान्यता है कि इस महीने में भगवान विष्णु पाताल लोक में रहते हैं और इसी वजह से इस महीने भगवान शिव ही पालनकर्ता होते हैं। सावन के महीने में त्रिदेवों की सारी शक्तियां भगवान शिव के पास ही होती हैं।

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श्रावण का अर्थ

श्रावण शब्द श्रवण से बना है जिसका अर्थ है “सुनना”। अर्थात सुनकर धर्म को समझना। इस माह में पतझड़ से मुरझाई हुई प्रकृति पुनर्जन्म लेती है। श्रावण माह में सिर्फ सावन सोमवार ही नहीं संपूर्ण माह ही व्रत रखना जाता है।
जिस तरह गुड फ्राइडे के पहले ईसाइयों में 40 दिन के उपवास चलते हैं और जिस तरह इस्लाम में रमजान माह में रोजे (उपवास) रखे जाते हैं उसी तरह हिन्दू धर्म में श्रावण मास को पवित्र और व्रत रखने वाला माह माना गया है।

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आधी परिक्रमा करना ही शुभ

शिवलिंग से दक्षिण दिशा में ही बैठकर पूजन करने से मनोकामना पूर्ण होती है। शिवलिंग पूजा में दक्षिण दिशा में बैठकर भक्त को भस्म का त्रिपुण्ड लगाना चाहिए।

रुद्राक्ष की माला पहननी चाहिए और बिना कटे-फटे हुए बेलपत्र अर्पित करने चाहिए। शिवलिंग की कभी पूरी परिक्रमा नहीं करनी चाहिए। आधी परिक्रमा करना ही शुभ होती है।

सावन सोमवार की पूजन विधि

सावन में पड़ने वाले सोमवार को विशेष ​पूजन विधि के साथ भगवान शिव को प्रसन्न किया जाता है। सावन सोमवान के दिन सुबह स्नान आदि करने के बाद दाएं हाथ में जल करें व्रत का संकल्प करें।

इसके बाद भगवान शिव का गंगाजल से ​अभिषेक करें और पंचामृत अर्पित करें। ध्यान रखें कि पंचामृत में दूध, दही, घी, गंगाजल और शहद शामिल होता है। इसके बाद शिवजी को सफेद चंदन का तिलक लगाएं और सफेद फूल अर्पित करें।

फिर धतूरा, बेल पत्र और सुपारी ​अर्पित करें। इसके बाद घी का दीपक जलाएं और सावन सोमवार की व्रत कथा पढ़ें। साथ ही आरती भी करें।

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लैब्राडोर- कुत्तों की सबसे समझदार नस्ल के बारे में रोचक तथ्य और जानकारी

लैब्राडोर, या लैब्राडोर रिट्रीवर दुनिया का सबसे समझदार कुत्ता होता है। इनका स्वभाव बहुत शांत एवं प्रेम पूर्वक होता हैं। यह अपने परिवार के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित होते हैं तथा प्रेम की भावना रखते हैं।

यह बच्चों तथा अन्य दूसरे पालतू जानवरों के प्रति इनका व्यवहार बहुत दोस्ताना एवं शालीन होता है यही कारण है कि यह भारत में एक उत्कृष्ट फैमिली डॉग के रूप में जाना जाता हैं।

लैब्राडोर नस्ल के कुत्तेलैब्राडोर नस्ल के कुत्ते भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, अमेरिका में बहुत ज्यादा पसंद किए जाते हैं। पुलिस और सेना भी लैब्राडोर कुत्तों का इस्तेमाल करती हैं क्योंकि इस नस्ल के कुत्ते बहुत ही होशियार होते हैं। इनका खेलकूद में और गाइड के तौर पर भी उपयोग किया जाता है।

वैसे तो ये आक्रामक नहीं होते लेकिन जरुरत पर ये जरूर काट सकते हैं। इनके जबड़े की पकड़ भी बहुत मजबूत होती है।

रंग एवं आकार

इस नस्ल के डॉग आकार में बड़े होते है, एक वयस्क नर लैब्राडोर का वजन लगभग 29-36 किलोग्राम और मादा लैब्राडोर वजन का 25-32 किलोग्राम होता है, इनकी हाईट लगभग 55-62 सेंटीमीटर तक होती हैं तथा यें लगभग 20-30 किलोमीटर/घंटे की रफ्तार से दौड़ सकते हैं।

लैब्राडोर डॉग के बाल घने, छोटे तथा बहुत ही मुलायम होते है तथा लैब्राडोर डॉग बालों का कोट जल प्रतिरोधी होता है जोकि इनको इनको ठंड से बचाता है।

लैब्राडोर डॉग के पैर मोटे और भारी होते है तथा इनकी पूंछ पतली सीधी व मध्यम आकार की होती हैं, इनका सिर मध्यम आकार का तथा कान, गाल से चिपके हुए V आकार के होते हैं। इसके अलावा इनके नाक का रंग काला या फिर गुलाबी रंग का होता हैं। लैब्राडोर ब्लैक, चॉकलेट, येल्लो, फॉक्स रेड रंग के होते हैं।

भोजन एवं स्वास्थ्य

एक प्रगतिशील लैब्राडोर के लिए बहुत जरूरी हैं कि उसे संतुलित एवं पौषक तत्वों से भरपूर उच्च गुणवत्ता वाला बेस्ट डॉग फूड मिले जोकि इसके स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण होता हैं भोजन में आप इन्हें वेज़ और नॉन वेज़ दोनों दे सकते हैं।

अब अगर बात करें इनके स्वास्थ्य के बारे में तो वैसे तो लैब्राडोर एक स्वस्थ नस्ल है लेकिन अन्य दूसरी नस्लों की तरह ही इसमें कुछ जन्म से ही अनुवांशिक समस्याएं होती हैं।

लैब्राडोर कोहनी और कूल्हे डिस्पेलसिया से ग्रसित होते हैं हालाँकि यह बहुत कम होता है लेकिन प्रसव के समय ध्यान न रखने पर यह मामला गंभीर भी हो सकता हैं।

लैब्राडोर नस्ल के कुत्ते

प्रशिक्षण

प्रशिक्षण किसी भी नस्ल के कुत्ते के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता हैं। यह इन्हें सभ्य,अनुशासित,आज्ञाकारी व एक संगठित बनाता है। इस नस्ल के कुत्ते बहुत अच्छे शिक्षार्थी होते हैं इन्हे प्रशिक्षित करना अन्य नस्लों की तुलना बहुत में आसान होता है।

कीमत

भारत में एक लैब्राडोर पिल्ले की कीमत 5000-6000 रुपये से शुरू होती है जो 1 लाख रुपये तक जा सकती है। कीमत नस्ल की गुणवत्ता और वंशावली संयोजन पर निर्भर करती है।

यदि आपको अच्छी गुणवत्ता वाला लैब्राडोर कुत्ता, जिसमें कोई आनुवांशिक विकार नहीं हो चाहिए, तो आपका बजट कम से कम 30,000 रुपये होना चाहिए।

यदि आपके पास लैब्राडोर नस्ल का कुत्ता है या यदि आप इसे खरीदना चाहते हैं तो यह किताब आपकी मदद कर सकती है। देखें किताब

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आँखों के बारे में अद्भुत तथ्य!

हमारी आँख में कितनी जटिलता है, इसके बारे में कोई संदेह नहीं है. आँखें हमारे शरीर का अद्भुत अंग हैं. आँखों की वजह से हम मीलों दूर वस्तुओं को देखने में सक्षम होते हैं. आँख से हम रंगों की पहचान करने में सक्षम होते हैं. आँख से हमें वस्तुओं के बीच दूरी और उनमें होने वाली गतिविधियों के बारे में पता चलता है. यह हैं आँख के बारे में अद्भुत तथ्य:-

  1. मानव की आँख का कोर्निया, शार्क मच्छली से मिलता जुलता होता है. इसी वजह से मानव की आँख के कॉर्निया को आँख की सर्जरी के समय, शार्क मच्छली के कॉर्निया से बदला जा सकता है.
  2. पूरी दुनिया में मनुष्य और कुत्ते ही ऐसे जीव हैं, जिनकी आँखों का इलाज दूसरों की आँखों से बदल कर किया जा सकता है. कुत्तों में यह गुण तभी आता है, जब कुत्ते मानव के साथ रहते हैं.
  3. आँख खुली रखकर छींक मारना असंभव है.
  4. समुद्री डाकू अपने कान में बाली इसलिए डाल कर रखते हैं, क्योंकि वह मानते हैं कि ऐसा करने से उनकी आँखों की दृष्टि बेहतर होती है.
  5. लोगों की आँखों की 45 प्रतिशत तक पुतलियाँ तब फैल जाती हैं, जब वो उस व्यक्ति को देखते हैं, जिससे वह प्यार करते हैं.
  6. बच्चे जन्म के समय रंगों की पहचान करने में सक्षम नहीं होते.
  7. जिन लोगों की आँखें नीले रंग की होती हैं, उन सभी लोगों के पूर्वज समान हैं, क्योंकि 10,000 साल पहले सभी लोगों की आँखें भूरे रंग की होती थी, फिर किसी ने अनुवांशिक उत्परिवर्तन (Genetic mutation) को विकसित किया, जिसकी वजह से लोगों की आँखें नीले रंग की हो गयी थी.
  8. हमारी आँखें 500 अलग-अलग तरह के शेड्स (छाया) में अंतर को बता सकती है.
  9. हमारी आँख में 10 करोड़ 70 लाख सेल होते हैं, जो प्रकाश के प्रति बहुत ही संवेदनशील होते हैं.
  10. हर 12 में से एक पुरुष में रंगों को ना पहचानने का विकार होता है.
  11. भूरे रंग की आँखें वास्तव में नीचे से नीले रंग की होती हैं और ऐसी लेज़र मशीन भी है, जो भूरी आँखों को नीले रंग की आँखों में तब्दील कर देती है.
  12. ऐसे भी रंग होते हैं, जिनको देखना मानव की आँख के लिए असंभव है.
  13. 2 प्रतिशत औरतों की आँखों में एक दुर्लभ आनुवांशिक उत्परिवर्तन (rare genetic mutation) होता है, जिस वजह से उनकी आँखों में एक अतिरिक्त रेटिना शंकु होता है और इसी वजह से वह 10 करोड़ से ज़्यादा रंगों को पहचानने में सक्षम हो जाती हैं.
  14. दुनिया में सबसे आम आँखों का रंग भूरा ही होता है.
  15. आपकी आँखों का आकार जन्म से ही एक समान रहता है. जबकि आपके नाक और कान हमेशा बढ़ते रहते हैं.
  16. मानव की आँख सिर्फ तीन रंगों को पहचानती होती है, वह हैं लाल, नीला और हरा. बाकी के रंग इन तीन रंगों के  अलग-अलग संयोजन (combination) होते हैं. जिनकी वजह से मानव की आँखें बाकी रंगों को देखने में सक्षम होती है.
  17. नींद के बाद आपके शरीर के अंगों को सक्रिय होने में थोड़ा समय लगता है, लेकिन आपकी आँखें 24/7 हमेशा सक्रिय रहती हैं.
  18. आपकी आँख का अकार 1 इंच होता है और इसका भार 8 ग्राम होता है.
  19. औसतन ज़िंदगी में हमारी आँखें 2 करोड़ 40 लाख अलग-अलग तस्वीरें देख चुकी होती हैं.
  20. लोग कंप्यूटर पर किताबों के मुकाबले 25 प्रतिशत धीमी रफ्तार से पढ़ पाते हैं.

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16 कानूनी अधिकार जो हर भारतीय को पता होना आवश्यक है!

भारत एक लोकतंत्र है। लोकतांत्रिक प्रणाली में हर नागरिक को कुछ संवैधानिक अधिकार प्राप्त होते हैं। हर नागरिक को अपने कानूनी अधिकारों के बारे में जानकारी होना आवश्यक है, शिक्षा और जागरूकता के अभाव में बहुत सारे नागरिकों को अपने कानूनी अधिकार नहीं पता होते, जिसकी वजह से हम परेशानी, भ्रष्टाचार और धोखेबाजी का शिकार हो जाते हैं।

आइए जानते है इन क़ानूनी अधिकारों के बारे में :-

  1. आपके एल.पी.जी गैस कनेक्शन के साथ आपको  40 लाख रूपये तक की इंश्योरेंस स्वत: मिलती है। यानि खुदा-न-खास्ता यदि आपके गैस सिलिंडर में विस्फोट  होता है तो आपको  40 लाख रूपये तक का मुआवजा मिल सकता है।cylinder-blast-claim-40-lakhs
  2. अगर आप किसी कंपनी द्वारा भेंट किये हुए तोहफे को स्वीकार करते हैं तो आप पर कोई भी व्यक्ति रिश्वत लेने का मुकदमा चला सकता है। आजकल कंपनियों में लोगों को तोहफे भेजने की परम्परा बनती जा रही है।  सरकार द्वारा इस तरह की परम्परा को खत्म करने के लिए वर्ष 2010 में एक कानून बनाया गया और इस कानून के मुताबिक अगर आप किसी कंपनी से किसी तरह का तोहफा लेते हैं तो उसको रिश्वत समझा जायेगा और आप पर कानूनी कार्यवाही हो सकती है।
  3. भारत में केवल महिला पुलिस अधिकारी के पास ही महिलाओं को गिरफ्तार करके सुरक्षित थाने में ले जाने का अधिकार होता है l अगर भारत में किसी महिला को पुरुष पुलिस अधिकारी गिरफ्तार करके थाने में लेकर जाता है तो इसको अपराध माना जाता है और ऐसे पुलिस अधिकारियों पर कानूनी कारवाई हो सकती है। अगर किसी महिला को रात के 6 बजे से लेकर सुबह के 6 बजे समय के बीच पुलिस स्टेशन आने के लिए कहा जाता है तो उस महिला को अधिकार है कि वह पुलिस स्टेशन आने से मना कर सकती है।women-cannot-be-arrested-in-eveing-before-morning
  4. इनकम टैक्स अधिकारियों या कर वसूल करने वाले अधिकारियों के पास आपको गिरफ्तार करने का अधिकार होता है। अगर आप ने टैक्स नहीं दिया तो टी.आर.ओ (Tax Recovery Organization) के पास आपको गिरफ्तार करने का अधिकार होता है और उनकी अनुमति पर ही आप जेल से छूट सकते हैं। इस नियम का उल्लेख वर्ष 1961 के इनकम टैक्स एक्ट में किया गया है।
  5. साइकिल चलाने वालों पर कोई मोटर व्हीकल एक्ट नहीं लागू होता। अगर आप रोजाना साइकिल चलाते हैं तो आपको मोटर व्हीकल एक्ट के नियमों की चिंता करने की कोई जरूरत नहीं क्योंकि मोटर व्हीकल एक्ट के अधीन साइकिल और रिक्शा नहीं आते।
  6. महिलाएं, पुलिस को ई-मेल के माध्यम से भी शिकायत दर्ज करा सकती हैं।  दिल्ली पुलिस ने हाल ही में महिलाओं को ऐसी सुविधा दी है जिनमें महिलाएं घर बैठे-बैठे अपनी शिकायत को ई-मेल के माध्यम से दर्ज करवा सकती हैं और उन्हें पुलिस स्टेशन आने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।भारत में अभी भी बहुत सारे लोग लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी अपराध मानते हैं।  भारतीय कानून के अनुसार लिव-इन रिलेशनशिप अवैध नहीं है लेकिन लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले पुरुष और महिला को बहुत सारी बातों का ध्यान रखना होता है। अगर लिव-इन रिलेशनशिप में बच्चे का जन्म होता है तो उसका माता-पिता की प्रॉपर्टी पर पूरा-पूरा अधिकार होगा.
  7. राजनीतिक दलों के पास चुनाव के समय आप से वाहन किराए पर लेने का अधिकार होता है।  अगर आप वाहन देने के लिए तैयार हैं तो चुनाव के समय राजनीतिक दल आपसे आपका वाहन किराए पर ले सकते हैं।
  8. भारत में अगर आप पर ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने की वजह से दिन में एक बार जुर्माना लग गया है तो आप पर पुलिस अधिकारी पूरे दिन फिर जुर्माना नहीं लगा सकते।  उदाहरण के लिए अगर आप पर दिन में एक बार हेलमेट ना पहनने का चालान हो गया है तो रात तक आप बिना हेलमेट पहने घूम सकते हैं और ट्रैफिक अधिकारी आप पर जुर्माना नहीं लगा सकता।
  9. आप के पास वस्तु की अधिकतम खुदरा मूल्य (Maximum Retail Price) से कम कीमत देने का अधिकार होता है।  आप दुकानदार से कोई वस्तु सौदे के साथ भी खरीद सकते हैं जैसे कि अगर किसी वस्तु का मूल्य 100 रूपये है तो आप सौदा करके उस वस्तु को 90 रूपये में भी खरीद सकते हैं।
  10. अगर कोई व्यक्ति आप से काम लेकर या आपसे पैसे उधार लेकर आपको भुगतान नहीं करता तो आप अदालत में उस व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकते हैं।  भारतीय अधिनियम के अनुसार अगर कोई आपको भुगतान नहीं दे रहा तो आप उस व्यक्ति के खिलाफ अदालत में एप्लीकेशन लिख कर मामला दर्ज करवा सकते हैं। यह आपका कानूनी अधिकार होता है।  आपके पास उस व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाने का तीन साल का समय होता है जिससे आप ने पैसे लेने हैं।
  11. अगर आप सार्वजनिक जगह पर अश्लील गतिविधियां करते हैं तो आपको तीन महीने की सजा हो सकती है।
  12. पुलिस का हैड-कांस्टेबल किसी ऐसे अपराध के लिए आपको दंड नहीं दे सकता जिसका जुर्माना 100 रुपये से अधिक हो। अगर आपने एक से अधिक कानून के नियमों का उलंघन किया तो आपका चालान किया जा सकता है।
  13. वर्ष 1861 में बने पुलिस एक्ट के अनुसार भारत के हर राज्य का पुलिस अधिकारी हमेशा ड्यूटी पर रहेगा।  अगर किसी जगह पर आधी रात को भी कोई अपराध या घटना होती है तो पुलिसकर्मी को यह कहने का कोई अधिकार नहीं होता कि वह ड्यूटी पर नहीं हैं क्योंकि पुलिस एक्ट के अनुसार पुलिसकर्मी बिना वर्दी के भी हमेशा ड्यूटी पर रहते हैं।[adinserter block=”10″]
  14. वर्ष 1956 में बने हिंदू गोद और रखरखाव अधिनियम के अनुसार अगर आप हिंदू धर्म के हैं और आपके एक बच्चा है तो आप दूसरा बच्चा गोद नहीं ले सकते।  अगर आपका कोई बच्चा नहीं है और आप बच्चा गोद लेना चाहते हो तो आपकी और बच्चे की उम्र में कम से कम 21 वर्ष का अंतर होना आवश्यक है।
  15. अगर पति पत्नी में सेक्स संबन्ध अच्छे नहीं हैं तो दोनों इस वजह को तलाक के सबूत के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।

कानों के बारे में रोचक तथ्य व जानकारी

कानों के बारे में रोचक तथ्य – कान हमारे शरीर का महत्वपूर्ण अंग है। यह मानव शरीर की विख्यात पाँच इंद्रियों में से एक श्रवण इंद्री का मुख्य उपकरण है। कान के द्वारा ही हम आवाजों को सुन सकते हैं और दूसरे की बातों को समझ सकते हैं।

कान हमारे शरीर का महत्वपूर्ण अंग है – कानों के बारे में रोचक तथ्य

कान हमें आवाजों को सुनने में मदद करते हैं परंतु इसके अलावा भी कान के बारे में ऐसा बहुत कुछ है जो आप नहीं जानते होंगे। कानों के बारे में रोचक तथ्य के इस लेख में हम कानों के बारे में कुछ रोचक तथ्य और जानकारी आपके साथ सांझा कर रहे हैं।

क्यों होते हैं दो कान

दोनों कान होने से हम पता लगा पाते हैं कि आवाज किस दिशा से आ रही है। हमारा मस्तिष्क दोनों कानों से आने वाली आवाज को पकड़ता है और उनकी तुलना करके दिशा का पता लगा लेता है।

कान के हिस्से

हमारे कान के तीन प्रमुख हिस्से हैं- 1. बाहरी कान, 2. मध्य कान तथा 3. भीतरी कान।

  1. बाहरी कान

यह कान का वह हिस्सा है जो हमें शरीर से बाहर निकला नजर आता है। यह कान के भीतरी हिस्सों की रक्षा करता है और ध्वनियों को जमा करके भीतरी हिस्से की ओर पहंचने में मदद करता है। इसके दो हिस्से हैं :

इयर फ्लेप : ध्वनि तरंगें इसी से होते हुए भीतर जाती हैं।

इयर कनाल : यह लगभग 2 सैंटीमीटर लम्बा होता है। यह ध्वनि तरंगों को तेज करके मध्य हिस्से की ओर प्रवाहित करता है। इसमें पसीने वाली ग्रंथियां भी होती हैं जिनसे ‘ईयर वैक्स’ (कान की मैल) पैदा होती है।

  1. मध्य कान

यह हवा से भरा खोखला हिस्सा है। कान के अन्य हिस्सों के बीच स्थित यह हिस्सा ध्वनि तरंगों को बाहरी कान से ‘प्रैशर वेव्स’ (दबाव वाली लहरों) के रूप में प्राप्त करता है। इसके मुख्य हिस्से इस प्रकार हैं :

कान का पर्दा (ईयरड्रम) : यह एक बेहद महीन झिल्ली है जो बाहरी तथा मध्य कान को अलग करती है। ध्वनि तरंगों के इससे टकराते ही यह हिलती है और ‘साऊंड एनर्जी’ को मैकेनिकल एनर्जी’ में बदल देती है। कान का पर्दा भीतरी हिस्से में स्थित कोकली से तीन बेहद छोटी हड्डियों से जुड़ा रहता है जो इस प्रकार हैं:

हैमर : कान के पर्दे के साथ स्थित यह बहुत छोटी हड्डी है। कान के पर्दे के हिलने पर यह भी हिलती है।

एनविल (anvil) : यह हैमर के साथ लगी अन्य हड्डी है। हैमर के हिलने पर यह हिलती

स्टेपीज़(stapes) : हैमर तथा एनिवल की ही तरह यह भी एक बहुत छोटी हड्डी है। उनके हिलने पर यह भी उनकी तरह हिलती है और कोकली से जुड़ी होती है और ध्वनि तरंगों को भीतरी कान की ओर भेजती है।

  1. भीतरी कान

कान का यह सबसे भीतरी हिस्सा पानी जैसे द्रव्य से भरा होता है। इसमें सुनने तथा शरीर का संतुलन बनाने वाले अंग होते हैं जो इस प्रकार हैं :

कोकली : यह एक घुमावदार ट्यूब है जो 3 सैंटीमीटर तक खिंच सकती है। इसमें अनेक ‘नर्व सैल्स’ होते हैं। बालों जैसे ये ‘नर्व सैल्स’ विभिन्न तरंगों के कम्पन के प्रति अलग-अलग प्रतिक्रिया करते हैं जिससे विद्युतीय आवेग पैदा होता है।

सैमीसर्कुलर कनाल्स : यह द्रव्य से भरे फंदे होते हैं जो कोकली से जुड़े रहते हैं। ये शरीर को संतुलन कायम रखने में मदद करते हैं।

ऑडिटरी नर्व : ‘नर्व सैल्स’ द्वारा पैदा विद्युतीय आवेग इसके माध्यम से ही मस्तिष्क तक पहुंचते हैं और हम आवाजों को समझ पाते हैं।

कानों के बारे में रोचक तथ्य

  • ऊंचे स्थलों पर कान बंद से होते महसूस होने लगते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ऊंचाई पर हवा कम घनी होती है जिससे मध्य कान में बंद हवा का संतुलन बिगड़ जाता है।
  • मध्य कान को हवा यूस्टैचियन ट्यूब से मिलती है जो गले से जुड़ी होती है। आमतौर पर यह बंद रहती है परंतु कभीकभी खुलती रहती है क्योंकि यह मध्य कान में हवा की मात्रा को संतुलित रखने के लिए जरूरी है।
  • इंसानों की तुलना में जानवर के सुनने की क्षमता अधिक होती है।
  • एक बार सुनने की क्षमता गई तो यह ठीक नहीं हो सकती।
  • अधिक खा लेने पर सुनने की क्षमता थोड़ी कम हो जाती है।
  • हैमर, एनविल तथा स्टेपीज़ शरीर की सबसे छोटी हड्डियां हैं। स्टेपीज़ मानव शरीर की सबसे छोटी और हल्की हड्डी है जो औसतन 3 x 2.5 मिलीमीटर माप की होती है।
  • कान की मैल वास्तव में बैक्टीरिया को खत्म करके सुरक्षा करती है।
उम्मीद हैं कि कानों के बारे में रोचक तथ्य के इस लेख में दी गयी जानकारी आपको पसंद आई होगी। अगर पसंद आई हो तो हमारे फेसबुक पेज को लाइक करें

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30 जून का इतिहास

30 जून का इतिहास:-

  • 1294 – स्विट्जरलैंड के बर्ने प्रांत से यहूदियों को बाहर निकाला गया।
  • 1868 – क्रिस्टोफर श्लेस ने टाइपराइटर के लिए पेटेंट अधिकार हासिल किया।
  • 1870 – अदा केपले यूएस में लॉ कॉलेज से ग्रेजुएट करने वाली पहली महिला बनीं।
  • 1876 – सर्बिया ने तुर्की के खिलाफ युद्ध की घोषणा की।
  • 1903 – भारतीय राजनीतिज्ञ तथा लोक सभा के सदस्य मुकुट बिहारी लाल भार्गव का जन्म।
  • 1911 – भारतीय साहित्यकार नागार्जुन का जन्म।
  • 1917 – भारत के प्रसिद्ध दिग्गज राजनेता, उद्योगपति, शिक्षाविद और विचारक दादा भाई नौरोजी का निधन।
  • 1928 – हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध संगीतकार कल्याणजी का जन्म।
  • 1934 – भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक सी. एन. आर. राव का जन्म।
  • 1937 – दुनिया का पहला इमरजेंसी नंबर 999 लंदन में जारी किया गया था।
  • 1966 – अमेरिका के बॉक्सर और एक्टर माइक टाइसन का जन्म।
  • 1966 – अमेरिका का पहला महिला संगठन नेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर वुमेन का गठन किया गया।
  • 1985 – लेबनान में बंधक बनाए गए 39 अमेरिकी नागरिक गिरफ्तार किए गए।
  • 1990 – पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी ने अपनी अर्थव्यवस्था का विलय किया।
  • 1994 – फ्रांस के तोलूज़ में ए-330 एयरबस विमान के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से सात लोग मारे गए।
  • 1999 – आस्ट्रेलियाई उप-प्रधानमंत्री तथा नेशनल पार्टी के नेता टीम फ़िशर का इस्तीफ़ा।
  • 2000 – अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर को कानूनी मान्यता दी।
  • 2002 – ब्राजील ने जर्मनी को 2-0 से हराकर फ़ुटबाल के विश्व कप पर कब्ज़ा किया।
  • 2003 – चार आस्कर पुरस्कार प्राप्त अभिनेत्री कैथरीन हेपबर्न का निधन।
  • 2005 – ब्राजील ने कन्फेडरेशन फुटबॉल कप जीता।
  • 2006 – फुटबॉल विश्व कप में जर्मनी ने अर्जेंटीना को हराया।
  • 2007 – संयुक्त राष्ट्र महासभा ने आम सहमति से शांति रक्षण विभाग के बंटवारे का निर्णय किया।
  • 2008 – रविकांत, उमा शंकर चौधरी व विमल चन्द्र पाण्डेय को संयुक्त रूप से भारतीय ज्ञानपीठ का नवलेखन पुरस्कार प्रदान किया गया।
  • 2008 – भारतीय पत्रकार अनीसुद्दीन अजीज को इंटरनेशनल एसोसियेशन आफ़ बुक कीपर्स (आईएबी) के न्यू बिजनेस आफ़ द ईयर अवार्ड से सम्मानित किया गया।
  • 2008 – पाकिस्तान सरकार ने कबाइली ख़ैबर दर्रा क्षेत्र में दहशत फैला रहे तीन आतंकी गुटों पर प्रतिबन्ध लगाया।
  • 2008 – रॉबर्ट मुगाबे ने जिम्बाब्वे के राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली।
  • 2012 – मोहम्मद मुर्सी मिस्र के राष्ट्रपति बने।

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