इस अभिनेत्री का कभी मोटी होने के कारण उड़ाया जाता था मज़ाक

बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री रेखा आज भी अपनी खूबसूरती और अदा से लाखों दिलों पर राज करती हैं। अपने दौर में वह अपनी एक्टिंग और खूबसूरती के लिए जितनी फेमस थीं, आज भी सबके बीच उतनी ही चर्चित हैं। फिल्मों के इलावा उन्हों ने अपनी निजी ज़िन्दगी में काफी उतार-चढ़ाव देखे। आइए जानते है उनके जीवन के बारे में कुछ बातें:

  • रेखा का जन्म 10 अक्टूबर 1954 को मद्रास में हुआ था। उनका असली नाम भानूरेख गणेशन है।
  • उनके माता पिता उनके जन्म के वक़्त विवाहित नहीं थे। इसलिए रेखा को उन्होंने अपनी पुत्री का दर्जा नही दिया। रेखा अपने पिता से इतनी नफरत करती थीं कि उनके अंतिम संस्कार में भी नहीं गईं थीं।
  • घर की ख़राब हालत की वजह से इच्छा न होते हुए भी उन्हें पढाई छोड़ कर फिल्मो में आना पड़ा।
  • रेखा ने जब फिल्मी जीवन की शुरुआत की थी तब वो काफी मोटी थी। शुरूआती दिनों में रेखा इतनी उभर नही पाई क्योकि तब रंगरूप को ज्यादा अहमियत दी जाती थी।
  • उनके अनुसार उन्हें अगली डकलिंग (बदसूरत बत्तख का बच्चा) कहा जाता था।
  • रेखा ने अपने करियर की शुरूआत 1966 में बाल कलाकार के तौर पर तेलगु फिल्म रंगुला रतलाम से की थी। मुख्य अभिनेत्री के तौर पर उनका डेब्यू चार साल बाद फिल्म सावन भादो से हुआ था।
  • रेखा ने अपने 40 सालों के लंबे करियर में लगभग 180 से उपर फिल्मों में काम किया है।
  • फिल्मी करियर के दौरान, रेखा का नाम अमिताभ बच्चन, राज बब्बर, विनोद मेहरा, नवीन निश्चल, जीतेंद्र, यश कोहली, शत्रुघ्न सिन्हा और अक्षय कुमार के साथ जुड़ा।
  • उन्होंने 1990 में दिल्ली के कारोबारी मुकेश अग्रवाल से शादी कर ली थी। लेकिन उनकी शादी सालभर भी नहीं चल पाई और शादी के 7 महीने बाद ही मुकेश ने मौत को गले लगा लिया था।
  • अमिताभ और रेखा एक-दूसरे के बेहद करीब रहे। अमिताभ की संगत में रेखा की शख्सियत में गजब के परिवर्तन हुए। वे अपने लुक के प्रति सजग हो गईं और जिंदगी को देखने का उनका नजरिया भी बदल गया।
  • रेखा समय की बहुत पाबंद हैं और सभी जगह नियत समय पर पहुंचती हैं।
  • इंटरनेट पर मौजूद आंकड़ों के हिसाब से, रेखा की संपत्ति 40 मिलियन डॉलर की है।
  • रेखा की सिक्योरिटी के बारे में बताया जाता है कि वो बहुत टाइट सिक्योंरिटी के बीच रहती हैं। इतना ही नहीं कहा यह भी जाता है कि उनके घर के दरवाजों में ऐसे लॉक लगे हैं जो मशीनों के द्वारा ही खुलते हैं और हर कोई उसे नहीं खोल सकता।
  • रेखा को पहला फिल्मफेयर अवार्ड 1978 में फिल्म “घर” और दूसरा फिल्मफेयर अवार्ड 1998 में “खून भरी मांग” के लिए मिला।
  • रेखा उन फिल्म अभिनेत्रियों में से एक थी जो राजनीती में आयीं किन्तु फिर भी उन्हें पद्म श्री मिला।

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ब्लैक माम्बा- दुनिया का सबसे फुर्तीला व खतरनाक सांप

ब्लैक माम्बा साँपों की सबसे खतरनाक प्रजाति है। अफ्रीका का यह बेहद जहरीला सांप दुनिया के दस सबसे ज़हरीले साँपों में शामिल है। ब्लैक माम्बा अफ्रीका में हर साल औसतन 20 हज़ार मौतों के ज़िम्मेदार है। आइये जानते हैं खौफ के बादशाह के बारे में बेहद रोचक बातें.

बेहद फुर्तीला और आक्रामक

माम्बा रेंगने की गति के मामले में दुनिया के दूसरे साँपों से बहुत आगे है। यह 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भाग सकता है। यह इतना अधिक आक्रामक (aggressive) होता है कि खतरा महसूस होने पर कि यह कुछ ही सेकंड में लगातार 10-12 बार काट सकता है जिसके कारण शिकार के शरीर में 400 मिलीग्राम तक का ज़हर छोड़ देता है। दूसरी विशेषता या है कि ब्लैक माम्बा परिस्थिति के अनुसार अपना रंग बदल सकता है।

ब्लैक माम्बा पूरी तरह से ब्लैक नहीं

यह साँप देखने में भी बेहद ही खतरनाक होता है. वैसे अपने नाम के विपरीत ब्लैक माम्बा पूरी तरह से ब्लैक यानि काला नहीं होता बल्कि थोडा भूरा(ब्राउन) और ओलिव से लेकर ग्रे शेड लिए होता है. वैसे इसे यह नाम इसके मुहं के अन्दर के गहरे नीले (स्याही का रंग) भाग के लिए दिया गया है.

यह सांप जंगल के झाड़ और पेड़ों में रहना पसंद करते है। ब्लैक माम्बा की लम्बाई लगभग 2 मीटर तक होती है पर कई बार 4.5 मीटर लम्बे ब्लैक माम्बा साँप भी जंगल में देखे गए है।

बेहद जहरीला सांप

इसमें कोई शक नहीं कि यह सांप हमारी दुनिया के 10 सबसे ख़तरनाक और जहरीले सांपों की लिस्ट में शामिल है. इसका ज़हर तेजी से प्रक्रिया करने वाला (fast acting neuro toxin) होता है। इसका एक मिलीग्राम ज़हर ही इंसान को मारने करने के लिए काफी होता है. इसके काटते ही इंसान की आँखों के आगे अँधेरा छा जाता है। काटने के 15 मिनट से लेकर 3 घण्टे के अंदर इंसान की मौत हो जाती है। एंटी वेनीम बनने से पूर्व इसका काटा कोई भी इंसान बच नहीं सकता था। अफ्रीका में ये सांप इतना ज़्यादा पाया जाता है कि सांप के काटे व्यक्ति को अस्पताल पहुंचते ही सबसे पहले इसी सांप का एंटीडोट दिया जाता है।

ब्लैक माम्बा एक बार में 6 – 25 अंडे देता है, एक बार अंडा देने के बाद यह साँप उन्हें छोड़ के चली जाती है।  उसके तीन महीने बाद बच्चे बाहर आ जाते है जिनकी लम्बाई 16 – 24 इंच होती है। यह सांप लगभग 11 साल ज़िंदा रहते है।

शिकार करने का तरीका अन्य सांपों से जुदा

यह सांप आमतौर पर छोटे जीव जंतु और पक्षियों का शिकार करना पसंद करते हैं। इस सांप के शिकार करने का तरीका भी अन्य सांपों से बिल्कुल जुदा होता है। सबसे पहले यह अपने शिकार का तेजी से पीछा करके उसे पकड़ता है। फिर उसके अंदर अपना पूरा जहर छोड़ देता है। उसकी नज़र अपने शिकार पर तब तक रहती है, जब तक उसका ज़हर असर दिखाना शुरू नहीं कर देता।

कुछ देर बाद ही जैसे ही उसका शिकार पैरालाइज़ होकर मर जाता है, वैसे ही वह उसे खाने के लिए आगे बढ़ता है। जल्द ही वह अपने शिकार को निगल लेता है। दिलचस्प बात यह है कि यह सांप अपने से चार गुना बड़े जीव को खा सकता है।

 

24 हजार चिप्स से बनाई मोनालिसा की सबसे बड़ी पेंटिंग

लिओनार्दो दा विंची की मशहूर पेंटिंग याद है? जापान में मोनालिसा की दुनिया की सबसे बड़ी पेंटिंग बनाई गई है। इसमें सबसे खास बात है कि इस पेंटिंग को 24 हजार चावल की चिप्स की मदद से बनाया गया है। पेंटिंग की लंबाई 13 मीटर और चौड़ाई 9 मीटर है। इसका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है।

मोनालिसा की इस पेंटिंग को सोका गक्कई (धार्मिक उत्सव) के एक खास कार्यक्रम के तहत 200 स्थानीय लोगों ने 24 घंटे की कड़ी मेहनत में बनाया। इस पेंटिंग के निर्माण में 7 अलग-अलग रंगों के चिप्स का इस्तेमाल किया गया। शेड देने के लिए सोया सॉस, ग्रीन टी और चीनी आदि का प्रयोग किया गया। शनिवार को बननी शुरू हुई पेंटिंग के आखिरी पीस मेयर के साथ कुछ अन्य लोगों ने लगाए।

इस कार्य में शामिल 7 साल के “मी हमानो” का कहना है कि उसे पेंटिंग बनाकर बहुत मजा आया। मी के अलावा उसके पूरे परिवार ने भी पेंटिंग बनाने में सहयोग दिया। उसने कहा कि उसे चावल के चिप्स से पेंटिंग बनाना काफी अच्छा लगा। पेंटिंग का गिनीज बुक में दर्ज होने के बाद इसमें इस्तेमाल हुए चिप्स को लोगों को फ्री गिफ्ट के तौर पर बांट दिया गया।

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क्या होगा अगर इस दरवाजे को खोल दिया जाए ?

केरल के तिरुवनंतपुरम में बना पद्मनाभस्वामी मंदिर बहुत ही पुराना मंदिर है। इस मंदिर की विशेष बात यह है कि, इस मंदिर में 6 रहस्यमई तहखानें हैं। आपको बता दें कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर इन 6 रहस्यमई तहखानों में से 5 तहखानों को तो खोल दिया गया है लेकिन, 1 दरवाजे को अभी तक नहीं खोला गया है। आखिर क्यों नहीं खोला गया आखिरी दरवाजा जानने के लिए पूरा पढ़ें।

मंदिर से मिला लाखों करोड़ों का खजाना

अब तक खुले मंदिर के पांच तहखानों में से कीमती पत्थर, सोना और चांदी आदि कुछ मिल चुका है। इस खजाने की कीमत लगभग एक लाख करोड़ रुपये तक की आंकी जा चुकी है। हालांकि कुछ इतिहासकारों का कहना है कि, इस खजाने के पुरातात्विक महत्व को ध्यान में रखा जाए, तो इसकी सही कीमत का अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल है।

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अब तो इस मंदिर को दुनिया का सबसे अमीर मंदिर भी माना जा रहा है। मंदिर के खजाने की बात करें तो सरकार ने साफ कह दिया है कि ये खजाना मंदिर का है और उसके पास ही रहेगा, सरकार केवल इस पर नज़र रखेगी।

आखिरी दरवाजे का रहस्य

आपको बता दें कि पहले पांच चेम्बर खोलने के बाद आखिरी चेम्बर ‘बी’ नहीं खुल स्का क्योंकि, इसका कुछ खास रहस्य है। चेम्बर ‘बी’ में तीन दरवाजे हैं, पहला दरवाजा लोहे की झड़ों से बना है।

दूसरा लकड़ी से बना एक भारी दरवाजा है, और अंतिम दरवाजा लोहे का बना बड़ा ही मजबूत है, जो की बंद पड़ा है, और उसे खोला नहीं जा सकता क्योंकि, उस पर लोहे के दो नाग बने हुए हैं, और उस पर एक चेतावनी भी लिखी हुई है कि, अगर इसे खोला गया तो अंजाम बहुत बुरा होगा।

शाप से है ग्रस्त आखिरी दरवाजा

आखिरी इस दरवाजे की एक और विशेष बात यह भी है कि, इस पर न तो ताले लगे हैं, और न ही कोई कुंडी। कहा जाता है कि इसे एक मंत्र से बंद किया गया था, जिसे अष्टनाग बंधन मंत्र कहते हैं।

माना जाता है कि, वह चेम्बर एक अनोखे शाप से ग्रस्त है। यदि कोई भी उस चेम्बर के दरवाजे तक जाने का प्रयास करता है तो, वह बीमार हो जाता है या उसकी मौत भी हो सकती है।

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ब्लू लैगून स्पा जिसमें नहाने से दूर होते हैं त्वचा संबंधि रोग

यूरोप का ब्लू लैगून आइसलैंड एक बहुत ही खास वाटर डेस्टिनेशन है। ब्लू लैगून आइसलैंड में एक भू-तापीय स्पा है, जिसका पानी हमेशा गर्म रहता है। इस स्पा में नहाने और इस जगह की खूबसूरती का लुफ्त उठाने के लिए काफी संख्या में पर्यटक यहां आते हैं।

इस स्पा के गर्म पानी में खनिज और सल्फर जैसे खनिजों का मिश्रण होता है, इसी कारण जब छालरोग से ग्रसित कोई रोगी इसमें स्नान करता हैं तो उनका ये रोग ठीक हो जाता है। वहीं इस स्पा में स्नान करने से अन्य त्वचा संबंधी रोगों से भी निजात मिलती है।

गर्मी के मौसम की बजाय सर्दी के मौसम में लोग यहां जाना पसंद करते हैं। लैगून के स्नान और तैराकी क्षेत्र में पानी का तापमान 37-39 डिग्री सेल्सियस रहता है। इसी कारण सर्दियों में स्पा लेने के लिए ये एकदम उपयुक्त जगह है।

मानव निर्मित इस स्पा में पास ही के भू-तापीय विद्युत संयंत्र के पानी का इस्तेमाल किया जाता है और इसे हर दो दिन में बदल दिया जाता है। जो लोग बीमारी से ग्रसित हैं और स्पा के अंदर नहीं जा सकते हैं ऐसे लोग रैंप के माध्यम से व्हील चेयर पर बैठकर यहां तक पहुंच सकते हैं।

वहीं कंप्लीट रोल शॉवर के साथ यहां पर प्राइवेट रूम भी उपलब्ध है। अगर कोई प्राइवेसी चाहता है तो इस रूम में जाकर चैंज कर सकता है। ब्लू लैगून स्पा का उपयोग पहले पिट स्टॉप के रूप में किया गया और इसके बाद इसे फिल्मों में भी दर्शाया गया।

इन फिल्मों में से एक है Hostel: Part II। इसके अलावा इसे Incubus डॉक्यूमेंट्री Look Alive में भी प्रदर्शित किया गया। यूरोप का ये स्पा पर्यटकों के लिए भी एक आकर्षक स्थल बन गया है। जहां कुछ लोग अपने त्वचा संबंधि रोगों से निजात पाने के लिए यहां जाते हैं तो कुछ का यहां जाने का मकसद फुल इंजॉय करना होता है।

विराट कोहली ने बनाया एक और नया रिकॉर्ड

यह है विश्व का सबसे बड़ा इलेक्ट्रॉनिक चरखा

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट में दुनिया का सबसे बड़ा इलेक्ट्रॉनिक चरखा स्थापित किया गया है। लकड़ी के बने इस इलेक्ट्रॉनिक चरखे को गांधी जी के अहिंसक आंदोलन के सिम्बल के तौर पर विदेशों से आने वाले टूरिस्ट और गेस्ट को दिखाया जाएगा। आइए जानते है क्या खास है इस चरखे में:

  • इस इलेक्ट्रॉनिक चरखे की ऊंचाई6 फीट और चौड़ाई 31 फीट है।
  • लकड़ी और मेटल से बने इस चरखे का वजन 5 टन है।
  • इस चरखे में सूत की कताई तो नहीं होती लेकिन ये इलेक्ट्रॉनिक मोटर से घूमता है।
  • इस चरखे को मुंबई के जेजे स्कूल ऑफ आर्ट कॉलेज के 12 छात्रों ने 20 दिनों में तैयार किया है।
  • छात्रों ने ये चरखा कॉलेज के प्रोफेसर श्रीकांत खैरनार के मार्गदर्शन में तैयार किया।
  • बता दें इससे पहले भी दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लकड़ी का चरखा लगाया गया था।
  • वह चरखा 15 फीट ऊंचा और 27 फीट चौड़ा है और उसमें 4 टन लकड़ी का इस्तेमाल किया गया है। उस चरखे को 26 कारीगरों ने 40 दिनों में बनाया था।

 

नवरात्रि कलश स्थापना का खास मुहूर्त

75 घरों वाले माधोपट्टी गांव में हैं 47 आईएएस और आईपीएस अधिकारी

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से 240 किलोमीटर दूर पूरब दिशा में एक गांव के लगभग हर घर में एक आईएएस और आईपीएस है। कहा जाता है इस गांव में सिर्फ आईएएस और आईपीएस अफसर ही जन्म लेते हैं।

पूरे जिले में इसे अफसरों वाला गांव कहते हैं। इस गांव में महज 75 घर हैं, लेकिन यहां के 47 आईएएस अधिकारी उत्तर प्रदेश समेत दूसरे राज्यों में सेवाएं दे रहे हैं। इतना ही नहीं माधोपट्टी की धरती पर पैदा हुए बच्चे, इसरो, भाभा, मनीला और विश्व बैंक तक में अधिकारी हैं। सिरकोनी विकास खण्ड का यह गांव देश के दूसरे गांव के लिए रोल मॉडल है।

सबसे पहले सन 1914 में जाने-माने कवि वामिक जौनपुरी के पिता मुस्तफा हुसैन ने सिविल सेवा को ज्वाइन किया. 1952 में इस गांव के इन्दू प्रकाश सिंह का आईएएस परीक्षा में सिलेक्शन दूसरी रैंक के साथ हुआ. इसके बाद इन्दू प्रकाश सिंह से प्रेरित होकर माधोपट्टी गाँव के हर लड़के या लड़की में अधिकारी बनने की होड़ सी लग गई.

माधोपट्टी गाँव से बने पहले आईएएस इन्दू प्रकाश सिंह इंग्लैंड सहित दुनिया के कई देशों में भारत के राजदूत भी रहे. इस गाँव के चार सगे भाइयों ने आईएएस बनकर इतिहास रचा जो कि अब तक कीर्तिमान है. इनमें से एक भाई बिहार के चीफ सेक्रेटरी के पद से रिटायर हुए. माधोपट्टी गाँव के ही श्रीप्रकाश सिंह उत्तर प्रदेश के वर्तमान नगर विकास सचिव हैं.

माधोपट्टी गाँव के बेटों ने ही नहीं बल्कि गाँव की बेटियां ने भी आईएएसऔर आईसीएस (IRS; आंतरिक राजस्व सेवा) में अपना योगदान दिया है. अगर उच्च सेवाओं जैसे आईएएस और आईपीएस से नीचे की बात करें तो माधोपट्टी गाँव का लगभग हर सदस्य उच्च पदों पर मौजूद है.

सरकार को इस गाँव पर कई शौध करवाने की जरुरत है जिससे शिक्षा प्रणाली और व्यवस्था में व्यापक सुधार लाये जा सकते हैं.

दुनिया का सबसे महंगा केक

 

दुनिया का सबसे महंगा केक

आज हम आपको एक ऐसे केक के बारे में बताने जा रहें है, जिसके बारे में आपने पहले कही नहीं सुना होगा और ख़ास बात यह है कि यह  दुनिया का सबसे महंगा केक है। इस केक की कीमत लगभग 6.5 करोड़ (1 million US $) रुपए है। यह केक महंगा जरूर है, लेकिन यह देखने में भी काफी आकर्षित लगता हैं, क्योंकि इस केक को एक गाउन पहने खड़ी गुड़िया के रूप में ख़ास तौर पर तैयार किया गया है।

पूरी दुनिया में केक का वीडियो हुआ वायरल

आपको बता दें कि इस केक का एक वीडियो सोशल मीडिया पर भी सांझा किया गया था, और वह काफी वायरल हुआ, जिससे यह केक पूरी दुनिया के चर्चा में आ गया। पहली बार इस केक को देखकर हर कोई आश्चर्यजनक हो जाता है, क्योंकि दिखने में यह केक खूबसूरत दुल्हन की तरह लगता है। इसकी ड्रेसअप भी केक के मटेरियल की ही है।

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इस लिए ख़ास है केक

इस केक में ख़ास बात यह है कि, इसको बनाने के लिए 5000 फ्रूट्स, 25 किलोग्राम चॉकलेट, एक हज़ार असली मोती और एक हज़ार अंडे का इस्तेमाल किया गया है।

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डिज़ाइनर डैबी विंघेम्स ने बनाया था महंगा केक

आपको बता दें कि इस केक को ब्रिटेन की सेलेब्रिटी केक डिज़ाइनर डैबी विंघेम्स (Debbie Vingme) ने बनाया था। डिज़ाइनर डैबी विंघेम्स के अनुसार उनको यह केक बनाने में 10 दिन का समय लगा। डेबी केक बनाने के लिए दिन में 12 घंटे काम करती हैं। उनके केक को देखने के लिए दूसरे देशों से लोग आते हैं, इसीलिए उनको दुनिया की सबसे अच्छी और महंगी डिज़ाइनर भी माना जाता है, और वे “दुनिया का सबसे महंगा केक“ बनाने का रिकॉर्ड भी उनके नाम है.

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गोटमार एक पत्थरबाजी की अनोखी प्रथा

दुनिया के हर कोने में रहने वाले लोगों और समुदायों की अपनी अलग परम्पराएं हैं। इनमें से कुछ बेहद अनोखी प्रथा होती है। ऐसी ही एक प्रथा है गोटमार। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में पत्थरबाजी होती है जिसे गोटमार मेला कहा जाता है।

यह परम्परा उन युवक युवतियों की याद में निभाई जाती है जिन्होंने प्यार की खातिर जान दे दी थी। प्रशासन के संरक्षण में दो गांवों के लोगों के बीच पत्थरबाजी होती है जिसमें काफी लोग घायल भी हो जाते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सदियों पहले एक प्रेमी जोड़े ने प्यार की खातिर जान दे दी थी, उन्हीं की याद में गोटमार मेला आयोजित किया जाता है। सावरगांव के लड़के को पांढुर्ना गांव की लड़की से मोहब्बत थी।

वह लड़की को उठा ले गया था। इसका विरोध करते हुए पांढुर्ना के लोगों ने पथराव किया था। जिसमें प्रेमी जोड़े की मौत हो गई थी। इसके बाद दोनों गांवों के लोगों में जमकर पत्थरबाजी हुई थी।

उसी घटना की याद में हर साल गोटमार मेला आयोजित किए जाने और दो गांवों के बीच पत्थरबाजी की परम्परा है। परम्परा के तहत जाम नदी के बीच में एक लम्बा झंडा लगाया जाता है। नदी के दोनों किनारों पर गांव के लोग खड़े होकर उस झंडे को गिराने के लिए पत्थर चलाते हैं। जिस गांव के लोग झंडे को गिरा देते हैं, उस गांव को विजेता माना जाता है।

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दुनिया का एक अजूबा- सहारा रेगिस्तान की ‘रहस्यमयी आंख’

दुनिया का एक अजूबा- सहारा रेगिस्तान की ‘रहस्यमयी आंख’

दुनिया भर में अनेक अजूबे मौजूद हैं। इनमें से कुछ तो ऐसे हैं जिनके राज पर से आज भी वैज्ञानिक पर्दा नहीं उठा सके हैं। रिचाट स्ट्रक्चर भी एक ऐसी ही अनोखी संरचना है। इसको सहारा रेगिस्तान की ‘रहस्यमयी आंख’ के नाम से भी जाना जाता है।

अफ्रीकी महाद्वीप के इस विशालकाय रेगिस्तान के बीच में यह लगभग 30 मील में फैली एक प्राकृतिक संरचना है। माना जाता है कि इसका निर्माण मिट्टी के खिसकने की वजह से हुआ है। हालांकि,इसे लेकर समय-समय पर वैज्ञानिकों के अपने-अपने मत सामने आते रहे हैं, कुछ का मानना है कि यह एलियन यानी दूसरे ग्रह के प्राणियों द्वारा बनाई गई आकृति हो सकती है।

इसके अलावा वैज्ञानिकों द्वारा यह भी तथ्य सामने आए हैं जिसमें कहा गया है कि सहारा रेगिस्तान पहले समुद्र से पूरी तरह ढका हुआ था। लेकिन धीरे-धीरे यह इलाका रेगिस्तान में बदल गया।

पानी के सिकुड़ने और रेत के बनने से यहां एक ऐसी आकृति का निर्माण हुआ जो देखने में एक विशालकाय आंख की तरह लगती है। खास बात है कि यह अद्भुत संरचना आकाश में बेहद ऊंचाई से ही नहीं, अंतरिक्ष से भी साफ नजर आती है।

केवल सहारा रेगिस्तान में ही दिखाई देती है, कुछ-कुछ ऐसी ही प्रतीत होती आकृतियां धरती के अन्य हिस्सों में भी देखी गई हैं जिनमें से एक है ‘बेलिज का द ग्रेट ब्ल्यू होल’। यह भी एक विशालकाय नीली आंख की तरह ही दिखाई देती है।

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